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एमएसएमई, डिफेंस, फार्मा और टेक सेक्टर में निवेश के लिए खुलेगी राह

लखनऊ  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया। वैश्विक भरोसे की कसौटी पर खरा उतरा भारत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई यह कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ हट चुका है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा सीधा और दीर्घकालिक लाभ अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में की गई कटौती का व्यापक और प्रत्यक्ष असर उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर पर पड़ने वाला है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम लागत और बेहतर लाभांश के साथ पहुंच सकेगा। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण ये उत्पाद कीमत के मामले में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।  आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे, बल्कि सीधे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा, वहीं नई यूनिट्स की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।  डिफेंस कॉरिडोर में तकनीक का होगा प्रवेश भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक रिश्तों में आई मजबूती का प्रभाव अब रणनीतिक क्षेत्रों तक भी महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो देश व्यापार और निवेश के मोर्चे पर एक-दूसरे के प्रति भरोसा जताते हैं, तो उसका स्वाभाविक विस्तार रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी होता है। इसी क्रम में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिख सकता है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे रणनीतिक नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रमों और उच्चस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण की संभावनाएं आकार ले रही हैं।  जानकारों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ संभावित सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार एवं राडार सिस्टम तथा अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। टैरिफ में कटौती से बने अनुकूल निवेश माहौल और भारत की नीतिगत स्थिरता ने विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।  इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को मिलेगी गति भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार उच्च तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाएं कम होती हैं और नीतिगत स्थिरता का संकेत मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए निवेश निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नया बल मिलता नजर आ रहा है। नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा एआई, आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी आयात लागत में संभावित कमी आने से डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक संभाव्यता और बेहतर होगी। इससे बड़े पैमाने पर कैपिटल-इंटेंसिव निवेश को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अनुकूल व्यापार माहौल और मजबूत भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के नए हब के रूप में उभर सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अवसर मिलेंगे।  राज्य सरकार का फोकस डेटा सेंटर, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और स्थिर बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर है। इन कारकों और टैरिफ कटौती से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल के चलते डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। … Read more

बाढ़/अतिवृष्टि की पूर्व-तैयारी की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, सभी तटबंधों और ड्रेनों की समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करने का निर्देश

लखनऊ. प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को व्यापक तैयारी और प्रभावी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और सफलता से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सतर्कता, समन्वय और तय समयसीमा में काम पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन की मूल कुंजी है। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा) राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आस-पास के जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी-पट्टी और वर्षा पैटर्न का विश्लेषण करते हुए इस वर्ष 12 जनपदों में 18 तटबंधों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 241.58 किमी है। 11 जनपद के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 464.92 किमी है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता पर चल रहे हैं। बैठक में बताया गया कि ग्रामीण इलाकों में जल-निकासी को सुचारु रखने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग कराई जा रही है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई 60,047 किमी है। कई महत्त्वपूर्ण रूटों की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तय समय में पूरे किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं, जिससे नदी प्रवाह सुधरेगा और तटीय इलाकों में जलभराव कम होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कहीं नदी के मेन स्ट्रीम में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान होना संभव न हो, तब ही तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाये।

सिल्क एक्सपो-2026 के आयोजन से प्रदेश के रेशम उद्योग को मिल रही है राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ हुआ। एक्सपो का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इस मौके  पर ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका के विमोचन के साथ ही उद्योग से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया। एक्सपो के आयोजन से सिल्क उत्पादकों व उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही प्रदेश में सिल्क उत्पादन तथा इससे जुड़े उद्योगों व व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। मंत्री राकेश सचान ने इस अवसर पर रेशम उत्पादकों व उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार का लक्ष्य दस वर्षों में लगभग 13,500 उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है। योजना के तहत अब तक 1630 लाभार्थियों को 32.49 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता दी जा चुकी है, जिससे उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 9,000 एकड़ में शहतूत पौधरोपण का कार्य जारी है, जिससे 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में रेशम उद्योग उत्पादकों व बुनकरों को नियमित रोजगार के अवसर दे रहा है। मल्टी रीलिंग इकाइयों की स्थापना से प्रसंस्करण की सुविधाएं मजबूत हुई हैं। रेशम मित्र पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन, निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अवसर पर उपस्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समर्थन से उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग ने अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश में रेशम उत्पादन 27 मीट्रिक टन से बढ़कर अब 450-500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है। साथ ही प्रदेश गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को आय और रोजगार के नये अवसर प्रदान कर रहा है।  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मरकरी हॉल में आयोजित सिल्क एक्सपो के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के रेशम उद्योग से जुड़े 16 उत्पादकों, बुनकरों, उद्यमियों और अन्य योगदानकर्ताओं को पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही रेशम निदेशालय की विभागीय उपलब्धियों पर आधारित ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। सिल्क एक्सपो, 06 फरवरी 2026 तक चलेगा, जहां देशभर के बुनकर और व्यापारी हाथ से बने रेशमी वस्त्र, साड़ियां, दुपट्टे और अन्य उत्पाद लेकर आए हैं। यह आयोजन प्रदेश के रेशम उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने के साथ यूपी को रेशम उत्पादन व निर्यात का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

कांवड़ यात्रा ऐप बनाया, जिसे साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उपयोग किया

लखनऊ  कभी साइकिल पर अखबार बेचकर घर का खर्च चलाने वाला लड़का आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तर प्रदेश और भारत का नाम रोशन कर रहा है। यूपी के बागपत जनपद के छोटे से गांव ट्यौढी का रहने वाला अमन कुमार संघर्ष, संकल्प और योगी सरकार के सहयोग से ऐसा उदाहरण बन चुका है, जो लाखों युवाओं को प्रेरणा दे रहा है। बचपन में गरीबी और बाल मजदूरी की पीड़ा झेलने वाले अमन कुमार ने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी पहचान इंटरनेशनल यूथ आइकॉन के रूप में होगी। अमन कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की युवा केंद्रित नीतियों, डिजिटल पहल और जनभागीदारी आधारित योजनाओं ने उनके जैसे युवाओं को न केवल अवसर दिए, बल्कि आगे बढ़ने का भरोसा भी दिया। 12वीं के बाद बढ़ाई सक्रियता अमन कुमार आज यूपी सरकार के युवा कल्याण विभाग से संबद्ध उड़ान यूथ क्लब के अध्यक्ष हैं। खुद अवसरों के अभाव में पले-बढ़े अमन ने ठान लिया कि अब कोई भी होनहार युवा सिर्फ जानकारी न होने की वजह से पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि इसी सोच से 12वीं के बाद व्हाट्स-ऐप ग्रुप बनाया और उसे विस्तार देकर वेबसाइट प्रोजेक्ट ‘कॉन्टेस्ट 360’ तैयार किया। एक क्लिक पर शिक्षा, स्कॉलरशिप, करियर और सरकारी अवसरों की जानकारी देने वाली इस वेबसाइट को अब तक 84 लाख से अधिक युवा देख चुके हैं। कांवड़ यात्रा से लेकर चुनाव तक डिजिटल समाधान कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए अमन ने वर्ष 2022 में प्रशासन के साथ मिलकर कांवड़ यात्रा ऐप तैयार किया। यात्रा मार्ग, चिकित्सा सहायता, शिविर, आपात संपर्क और प्रशासनिक सहयोग जैसी सुविधाएं एक मंच पर उपलब्ध कराई गईं, जिसे साढ़े तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने उपयोग किया। इसके बाद उन्होंने लोकसभा निर्वाचन में स्वीप बागपत ऐप बनाकर भारत निर्वाचन आयोग की सेवाएं सवा लाख मतदाताओं तक पहुंचाईं। जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में सरकारी योजनाओं को जोड़ने का मॉडल बनाया बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल के मार्गदर्शन में अमन प्रशासन के कार्यों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सूचना विभाग के सहयोग से सूचना सेतु ऐप तैयार कर एक क्लिक पर अधिकारियों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का मॉडल बनाया। यहीं नहीं, बागपत फॉर एनिमल्स ऐप के जरिए पशु कल्याण और ग्राम पंचायत फैजपुर निनाना की वेबसाइट बनाकर डिजिटल पंचायत की दिशा में भी अहम पहल की। अब वह अगले चरण में वेबसाइट और इनोवेशन के जरिए प्रदेशभर के युवाओं को जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। युवाओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका अमन के जुनून और नवाचार को राष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब यूपी सरकार ने उन्हें स्वामी विवेकानंद यूथ अवॉर्ड से सम्मानित किया। आज अमन कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े हैं। वह यूनेस्को ग्लोबल यूथ कम्युनिटी, यूनेस्को इन्क्लूसिव पॉलिसी लैब नेटवर्क, यूनेस्को मीडिया इन्फॉर्मेशन लिटरेसी एलायंस, यूनिसेफ नेशनल यू एंबेसडर, हंड्रेड फाउंडेशन, नेचर पॉजिटिव यूनिवर्सिटीज, क्लाइमेट कार्डिनल्स, यांगो जैसे संस्थानों से जुड़कर युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2026 में आयोजित विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में अमन को टीम यूपी का ग्रुप कैप्टन बनाया गया, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राष्ट्रीय मंच पर युवाओं की अगुवाई की। इसके अलावा, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के साथ भी काम किया। सम्मान और पहचान अमन कुमार को वर्ष 2025 में देश के स्वयंसेवा क्षेत्र का प्रतिष्ठित आई वॉलंटियर अवॉर्ड मिला। इसके साथ ही यूनिसेफ इंडिया में इंडियाज मोस्ट वैल्यूएबल यू रिपोर्टर अवॉर्ड, यंग ट्रांसफॉर्मर्स अवॉर्ड, शिक्षा रत्न सम्मान सहित कई राष्ट्रीय उपलब्धियां उनके नाम हैं। भारत सरकार के माई भारत संस्थान ने उन्हें यूपी में यूथ मेंटर बनाया है।

मतदाता सूची पर घमासान: अखिलेश यादव ने BJP को घेरा, बोले– फार्म-7 जमा हुए सब निरस्त हों

लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी एसआईआर को लेकर भाजपा पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने मांग की कि अब तक जमा किए गए सभी फार्म-7 निरस्त किए जाएं। फार्म-7 पर आयोग का होलोग्राम लगाया जाए। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि फार्म-7 को लेकर पूरे प्रदेश से खबर आ रही है। भाजपा बड़े पैमाने पर धांधली कर रही है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में एक करोड़ 99 हजार 710 वोट काटने की तैयारी है। मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में सपा मुखिया ने आरोप लगाया कि सबसे पहले सीतापुर में ये खेल हुआ है। वहां जांच में पता चला कि जिसने शिकायत की है वो लिख भी नहीं सकता है। वह अंगूठा लगाता है जबकि शिकायत पर उसके हस्ताक्षर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा से मिलकर लाखों की संख्या में फार्म-7 छपवाए हैं। टारगेट करके पीडीए खासकर मुस्लिम समाज के लोगों के वोट काटे जा रहे हैं। इस आईएएस का नाम बाद में बताऊंगा उन्होंने आरोप लगाया कि आईएएस अफसर सीएम ऑफिस में बैठकर बीएलओ को धमका रहे हैं। उनके नाम की घोषणा मैं बाद में करूंगा। अखिलेश ने कहा कि मुझे लग रहा है कि मुझे लग रहा है कि वन नेशन वन इलेक्शन की तरफ जा रहे हैं और न जानें कहां जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि मतदाता को वोटल लिस्ट नहीं दिखाई जा रही है। मतदाता पूछते हैं तो उन्हें पंचायत चुनाव की लिस्ट दिखा दी जा रही है। इस दौरान पूर्व मंत्री योगेश ने आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में 6321 वोट काटने की तैयारी है। फार्म भरकर भेज दिए अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सभी विधानसभा क्षेत्रों में फार्म भरकर भेज दिए गए हैं। सुल्तानपुर में तो मुस्लिम महिला बीएलओ का ही नाम काट दिया गया। छपे-छपाए फार्म पर इपिक नंबर और डिटेल भरकर विधानसभावार भेजा जा रहा है। भाजपा हर विधानसभा में 10 हजार वोट कटवाना चाहती है। सदर सुल्तानपुर और कन्नौज में भी इसी तरह वोट काटा जा रहा है। लखनऊ सरोजनीनगर में 100 से अधिक फार्म पर दशरथ ने हस्ताक्षर कर जमा किए हैं। उन्होंने कहा कि नियम कहता है कि कोई गलत फार्म जमा करता है तो लोक अधिनियम के तहत एफआईआर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीडीए प्रहरी से अपील है कि एक भी वोट करने न पाए।  

फार्मा दिग्गज एक सुर में बोले- सीएम योगी के नेतृत्व में बदला उत्तर प्रदेश का परिदृश्य

लखनऊ  ‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ में देश और दुनिया की दिग्गज फार्मा कंपनियों के चेयरमैन व शीर्ष नेतृत्व ने खुलकर राज्य की बदलती तस्वीर, मजबूत शासन व्यवस्था और निवेश के अनुकूल माहौल की सराहना की। कॉन्क्लेव के दौरान उद्योग जगत के दिग्गजों ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी और संरचनात्मक बदलाव किए हैं, जो न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को दिशा देने वाले साबित हो रहे हैं। यूपी के वर्तमान व भविष्य का रोडमैप स्पष्ट: अयोध्या रामी रेड्डी राज्यसभा सदस्य एवं रामकी ग्रुप के चेयरमैन अयोध्या रामी रेड्डी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को देश और समाज के लिए “उत्कृष्ट कमिटमेंट” करार दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो बुनियादी परिवर्तन देखने को मिले हैं, वे अभूतपूर्व हैं। उत्तर प्रदेश जो है और जो होने जा रहा है, सबका रोडमैप योगी जी ने स्पष्ट कर दिया है। यह न केवल राज्य, बल्कि देश को भी नई दिशा दिखाएगा। उन्होंने अपने चार दशक के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पिछले 40 वर्षों में उन्होंने यूपी में ऐसा सकारात्मक माहौल पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने यूपी की कानून-व्यवस्था, अकाउंटेबिलिटी और इंटीग्रिटी को दीर्घकालिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि एक अच्छा नेता किस तरह पूरे सिस्टम को बदल सकता है, उत्तर प्रदेश इसका जीवंत उदाहरण है। निवेशकों के लिए सुरक्षित माहौल व पारदर्शी प्रशासन आज यूपी की पहचान है। रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट ट्रीटमेंट: जीनल मेहता टोरेंट ग्रुप के वाइस चेयरमैन जीनल मेहता ने कहा कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हमने यूपी के 20 जिलों में काम किया है, लेकिन कहीं भी लॉ एंड ऑर्डर की समस्या या रेड टेप का सामना नहीं करना पड़ा। यूपी आज निवेशकों को रेड टेप नहीं, रेड कार्पेट ट्रीटमेंट दे रहा है। यह सब योगी जी के नेतृत्व में संभव हुआ है। कभी छोड़ना पड़ा था प्रदेश, अब लौटने का समय: रमेश जुनेजा मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा ने यूपी के पुराने दौर की कड़वी यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि 1995 में कंपनी शुरू की थी, तब माहौल ठीक नहीं था। 2001 में मेरे भाई का बेटा किडनैप हो गया, जिसके बाद हमने तय किया कि प्रदेश छोड़कर दिल्ली में रहना चाहिए, लेकिन कहते हैं ना कि हर रात के बाद एक अच्छी सुबह होती है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने के बाद यूपी में वह सुबह आई है। आज देर रात भी प्रदेश में लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं, यही वजह है कि निवेशक यहां आ रहे हैं और लगातार निवेश कर रहे हैं। उनकी कंपनी उत्तर प्रदेश में हरसंभव सहयोग के लिए तैयार है। मेरा दिल यूपी के लिए धड़कता है और सरकार के प्रोत्साहन के साथ निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। वैश्विक फार्मा लीडर्स की यूपी में रुचि: सतीश रेड्डी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के चेयरमैन सतीश रेड्डी ने कहा कि फार्मा सेक्टर में भारत की भूमिका वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है, जिसका उदाहरण कोविड काल में देखने को मिला। भारत ने कोविड के समय लाखों जिंदगियां बचाईं। उत्तर प्रदेश की नीतियां बेहद प्रभावी हैं और हम यहां काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।  इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर यूपी की ताकत: पंकज पटेल जाइडस लाइफ साइंसेज के चेयरमैन पद्मभूषण पंकज रमनभाई पटेल ने कहा कि किसी भी इंडस्ट्री को भूमि, बिजली, पानी और प्रशिक्षित मैनपावर की जरूरत होती है और ये सभी संसाधन उत्तर प्रदेश में भरपूर उपलब्ध हैं। यही वजह है कि फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के लिए यूपी एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। देश का सबसे सुरक्षित स्थान है यूपी: दिलीप सांघवी पद्मश्री से सम्मानित और सन फार्मास्यूटिकल के चेयरमैन दिलीप सांघवी ने कहा कि आज सन फार्मा देश की सबसे बड़ी और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी फार्मा कंपनी है। उत्तर प्रदेश ऐसा प्रदेश है, जहां पर हम अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाना चाहते हैं। कुछ वर्षों में यहां पर लॉ एंड ऑर्डर की जो स्थिति में सुधार हुआ है, वो इसे देश का सबसे सुरक्षित स्थान बनाता है।

सीएम योगी का चेतावनी भरा अंदाज़—‘कानून हाथ में लिया तो जवाब भी उसी अंदाज़ में मिलेगा’

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की नीति को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। अपराधियों के खिलाफ पुलिस की मुठभेड़ की कार्रवाइयों पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति हमारी ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिप्पणी की जाती है कि पुलिस ने गोली क्यों मारी? सीएम योगी ने पूछा कि पुलिस गोली न मारे तो क्या गोली खाए? कहा कि जो जिस भाषा में समझेगा उसे उसी भाषा में समझाया ही जाएगा। सीएम योगी मंगलवार को लखनऊ में आयोजित पहले फार्मा कान्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले ही हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में हो रहे हाफ एनकाउंटर (पैर में गोली मारने की घटनाओं) पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पुलिस के पास दंड देने का हक नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने तय किया है कि कानून सभी के लिए बराबर है। कोई अपना या पराया नहीं है। यदि कोई अपना व्यक्ति भी गलत करेगा तो उस पर वही कठोर कानून लागू होगा जो किसी माफिया पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा प्रयास किया कि कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर हो, लेकिन अगर सामने वाला अपराधी कानून से भयभीत नहीं है, तो उसे उसी की भाषा में समझाना तात्कालिक परिस्थिति की मांग हो जाती है। पुलिस को पिस्तौल और प्रशिक्षण दिया जाता है सीएम योगी ने कहा कि बहुत बार लोग सवाल उठाते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों मार दी। मैं पूछता हूं कि पुलिस गोली न चलाए तो क्या गोली खाए? यह दोनों काम एक साथ नहीं चल सकता। अगर अपराधी को गोली चलाने की स्वतंत्रता है तो पुलिस के पास भी पिस्तौल इसीलिए है कि वह उसका डटकर मुकाबला करे। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस का प्रशिक्षण ही इसीलिए होता है कि कोई अपराधी जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा में जवाब दे सके। सीएम योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि जब पुलिस ने अपराधियों को उनकी भाषा में समझाना शुरू किया, तभी प्रदेश में बदलाव आया है। पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश के बड़े-बड़े त्योहार शांति से संपन्न हुए हैं। कहीं कोई अराजकता नहीं है। आज प्रदेश में कहीं दंगा-फसाद, गुंडा टैक्स या अराजकता की बात नहीं होती है। सुरक्षा के इसी माहौल के कारण आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के लिए निवेश का बेहतरीन गंतव्य (Investment Destination) बन चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ यह लड़ाई बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगी। जीरो टॉलरेंस का मतलब यह है कि अगर शासन-प्रशासन से जुड़ा कोई व्यक्ति भी गलत करेगा, तो उसे भी माफिया की तरह ही कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। उनके इस बयान को पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने और अपराधियों को आखिरी चेतावनी देने के तौर पर देखा जा रहा है।  

फार्मा कॉन्क्लेव में 10 हजार करोड़ के एमओयू पर सहमति, 5525 करोड़ के 11 एमओयू का आदान-प्रदान

लखनऊ  भारत किसी के आगे नहीं झुकेगा: सीएम योगी ‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम प्रधानमंत्री जी व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आभारी हैं, जिन्होंने रोलबैक करते हुए भारत के टैरिफ को कम किया है और भारत को एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में माना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपनी नीतियों पर अडिग था, और इसका परिणाम है ‘सत्यमेव जयते’। यह पहले भी हुआ है और आगे भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विकसित भारत और बढ़ते भारत की यात्रा का प्रमाण है, जहां भारत एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने आगाह भी किया कि भारत की इस बढ़ती ताकत से कुछ लोग सशंकित भी हैं, इसलिए देश को विश्वसनीय सहयोगियों के साथ आगे बढ़ते हुए सतर्कता और विवेक के साथ कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है और स्वयं अपना नियंता बन रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि आज देश वैश्विक चुनौतियों और दबावों के बीच आत्मविश्वास, नीति-स्थिरता और निर्णायक नेतृत्व के साथ अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रहा है। 24 घंटे में खाली हुई 65 हजार एकड़ जमीन ‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में जब हम लोग सत्ता में आए थे, उत्तर प्रदेश के अंदर कहीं जमीन ढूंढते हुए नहीं बनती थी। कोई लैंड नहीं मिल पाती थी, क्योंकि उस पर लैंड माफिया ने कब्जा कर रखा था। हमने भू-माफिया टास्क फोर्स गठित की और मैंने कहा, 24 घंटे का समय दे रहा हूं। उत्तर प्रदेश के अंदर जिस भी सरकारी भूमि पर जिस भू माफिया ने कब्जा किया है, उसको तत्काल छोड़ दे। 24 घंटे के बाद जब हम कारवाई करेंगे तो उसको जमीन तो छोड़नी ही पड़ेगी, लेकिन साथ-साथ उसने जो कमाई की होगी, उसकी ब्याज सहित वसूली करेंगे। आप आश्चर्य करेंगे कि हमारी 65000 एकड़ लैंड खाली हुई थी। यह हमारा लैंड बैंक बना था। उस लैंड बैंक में हमने निवेश भी करवाए। इनसेट-3 फार्मा कॉन्क्लेव में 10 हजार करोड़ के एमओयू पर सहमति, 5525 करोड़ के 11 एमओयू का आदान-प्रदान *‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ के दौरान राज्य के फार्मास्यूटिकल सेक्टर में 10  हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर सहमति बनी है, जिसमें औषधि, चिकित्सा उपकरण एवं संबंधित क्षेत्रों में 5,525 करोड़ रुपये के 11 एमओयू का आज मंच पर औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। प्रमुख निवेशकों में अर्ना फार्मा व बायोजेंटा लाइफ साइंसेज ने 1,250-1,250 करोड़ रुपये, शुक्रा फार्मास्यूटिकल्स ने 737 करोड़, वाल्टर बुशनेल एंटरप्राइज ने 590 करोड़, झानविका लैब्स ने 553 करोड़, कोरो हेल्थ ने 418 करोड़, मार्क लेबोरेटरीज ने 300 करोड़, हाई ग्लांस लैबोरेटरीज ने 120 करोड़, रासपा फार्मा ने 107 करोड़, रोमसंस मेडवर्ल्ड ने 100 करोड़ और कोटक हेल्थकेयर ने 100 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई, जिससे उत्तर प्रदेश के फार्मा निवेश के नए केंद्र के रूप में उभरने को मजबूती मिली है। इन निवेश प्रस्तावों से फार्मा इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती, नवाचार को बढ़ावा और हजारों नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।

रूल ऑफ लॉ पूरी मजबूती से लागू, कानून से खिलवाड़ करने की किसी को छूट नहीं

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को होटल ताज में आयोजित वैश्विक निवेशकों एवं उद्यमियों के महासंगम “उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0” का शुभारंभ करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज केवल एक राज्य नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए भरोसे की गारंटी बन चुका है। प्रदेश सरकार हर निवेशक को ट्रिपल-एस यानी सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड की पूर्ण गारंटी देती है और उत्तर प्रदेश आज ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का रोल मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में रूल ऑफ लॉ पूरी मजबूती से लागू है। कानून से खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं है। यदि कोई कानून को आंख दिखाने की कोशिश करता है, तो कानून अपने दायरे में लाकर उसे उसकी ही भाषा में जवाब देता है। यह नया उत्तर प्रदेश है, जहां व्यवस्था कमजोर नहीं, बल्कि निर्णायक है। अराजकता से विश्वास तक का सफर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश असुरक्षा, अराजकता और अविश्वास का पर्याय बन चुका था। वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 900 से अधिक दंगे हुए। शायद ही कोई शहर रहा हो, जहां कर्फ्यू न लगा हो। उद्योग, व्यापार और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को गुंडा टैक्स देना पड़ता था। सुरक्षा के अभाव में पहले से स्थापित उद्योग भी प्रदेश छोड़ने पर मजबूर थे, युवा वर्ग पलायन कर रहा था। जिस धरती पर बचपन बीता हो, उसे छोड़ना किसी के लिए भी पीड़ादायक होता है, लेकिन असुरक्षा के चलते मजबूरी थी। यह केवल किसी एक उद्यमी की पीड़ा नहीं थी, बल्कि हर व्यापारी, हर निवेशक और हर नागरिक की व्यथा थी। जीरो टॉलरेंस से लौटा भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह दायित्व सौंपा, तो सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करना था। सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। हमने स्पष्ट कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा, चाहे कोई कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। आज इसका परिणाम सबके सामने है। बड़े पर्व-त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहे हैं। कहीं दंगे नहीं, कहीं फिरौती नहीं, कहीं गुंडा टैक्स नहीं। उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और स्थिरता का वातावरण है और यही निवेश की सबसे मजबूत नींव है। डी-रेगुलेशन में नंबर वन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप अचीवर बना है यूपी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज डी-रेगुलेशन रैंकिंग में देश में नंबर वन है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप अचीवर बन चुका है। डी-क्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य अधिनियमों में मौजूद आपराधिक प्रावधानों को समाप्त किया गया, ताकि उद्योग बिना भय और बाधा के कार्य कर सकें। एमएसएमई सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को 1000 दिनों तक निरीक्षण से छूट दी गई है। कई अन्य सेक्टरों में भी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें सुविधा देना है। 14 हजार से 30 हजार फैक्ट्रियों तक की छलांग मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में लगभग 14,000 कारखाने कार्यरत थे, जो आज बढ़कर 30,000 से अधिक हो चुके हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार डबल स्पीड से काम कर रही है। प्रदेश में अब तक 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 20 लाख करोड़ प्रस्तावो की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और कई प्रोजेक्ट्स में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। निवेशकों के साथ सरकार का निरंतर संवाद बना हुआ है। फार्मा सेक्टर को बनाया जा रहा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए ठोस नीति और स्पष्ट विजन के साथ कार्य किया जा रहा है। ललितपुर में विकसित किया जा रहा बल्क ड्रग फार्मा पार्क केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं होगा, बल्कि इसे हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जहां अत्याधुनिक आर एंड डी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क, यूएस-एफडीए टेस्टिंग लैब और वर्ल्ड-क्लास लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं। फरवरी के दूसरे सप्ताह में बजट सत्र के माध्यम से लखनऊ में एक वर्ल्ड-क्लास फार्मा इंस्टीट्यूट के निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ाया जाएगा। बरेली सहित अन्य जनपदों में भी नए फार्मा पार्क विकसित किए जाएंगे। लोकल से ग्लोबल की यात्रा तय की यूपी ने मुख्यमंत्री ने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में देश का लगभग 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में 60 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में हो रहा है। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। देश के लगभग 55 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। हर जिला मुख्यालय फोरलेन से जुड़ा है। बेहतर रेल नेटवर्क, सर्वाधिक मेट्रो सेवाएं, देश का पहला इनलैंड वाटरवे और सर्वाधिक एयरपोर्ट वाला राज्य आज उत्तर प्रदेश है। वर्तमान में 16 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं, जिनमें चार अंतरराष्ट्रीय हैं और पांचवें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जल्द ही प्रधानमंत्री राष्ट्र को समर्पित करेंगे। निवेशकों को सरकार का पूर्ण समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। यहां जीरो पॉलिटिकल इंटरफेयर, पारदर्शी नीतियां और समयबद्ध इंसेंटिव वितरण सुनिश्चित किया गया है। आइए निवेश करें, उत्पादन करें और समय पर इंसेंटिव प्राप्त करें, यही उत्तर प्रदेश का मॉडल है। उत्तर प्रदेश आज बीमारू नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस राज्य है और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विकसित भारत की ओर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मा कॉन्क्लेव उसी संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश को फार्मा सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में स्थापित किया जाएगा। एआई, टेलीमेडिसिन, डीप-टेक, मेड-टेक, हेल्थ-टेक और क्लिनिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश की इस विकास यात्रा में … Read more

कानूनी और साइबर जांच तेज, बस्ती में लव जेहाद नेटवर्क से जुड़े 300 वीडियो मामले में कार्रवाई

बस्ती  प्यार, भरोसा और शादी के सपनों के नाम पर रची गई यह साजिश इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली है. आरोप है कि बस्ती के एक शातिर युवक और उसका गिरोह 300 से ज्यादा लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाता रहा, फिर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया. यही नहीं, इन वीडियो को हथियार बनाकर कई लड़कियों को जबरन देश और विदेशों में देह व्यापार के लिए भेजा गया. मामला सामने आते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है, जबकि पीड़िताओं की संख्या और नेटवर्क का दायरा जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. बस्ती के कलवारी थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता बस्ती शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में काम करती थी. जनवरी 2022 में उसकी मुलाकात अजफरुल हक उर्फ प्रिंस से हुई. खुद को हिंदू बताने वाले इस युवक ने पहले हमदर्दी दिखाई, फिर बेहतर नौकरी दिलाने का झांसा दिया. बातों-बातों में मोबाइल नंबर लिया गया और इसके बाद शुरू हुआ भावनात्मक जाल. पीड़िता के मुताबिक युवक न सिर्फ खुद को हिंदू बताता था, बल्कि भरोसा दिलाने के लिए हाथ में कलावा भी पहनता था, ताकि किसी तरह का शक न हो. धीरे-धीरे बातचीत प्यार में बदली और फिर एक दिन युवक ने भरोसा जीतकर उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद शादी का झांसा देकर लगातार उसका शारीरिक शोषण किया जाता रहा. जब शिकायत करने पहुंची तो गैंगरेप का आरोप पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपनी आपबीती लेकर आरोपी के घर पहुंची और शादी की बात की, तो वहां हालात और भयावह हो गए. युवक ने अपने भाई और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. यही नहीं, विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियां दी गईं. पीड़िता का दावा है कि अगर वह आरोपी के पास नहीं जाती थी तो उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता, यहां तक कि उसके भाई को किडनैप करने की धमकी दी गई. हालात ऐसे बना दिए गए कि वह मजबूरी में बार-बार आरोपी के संपर्क में रहने को विवश हो गई. आपत्तिजनक वीडियो बने हथियार जांच में सामने आया है कि आरोपी और उसका गिरोह लड़कियों के निजी पलों के आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बना लेता था. बाद में इन्हीं वीडियो के जरिए पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया जाता. वीडियो वायरल करने, परिवार को बदनाम करने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियों से लड़कियों को तोड़ दिया जाता था. पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में दावा किया है कि आरोपी और उसका भाई इसी तरीके से करीब 300 लड़कियों को प्रेम जाल में फंसा चुके हैं. इन सभी के वीडियो बनाकर उन्हें अलग-अलग राज्यों और नेपाल जैसे देशों तक देह व्यापार के लिए भेजा गया. हिस्ट्रीशीटर निकला मुख्य आरोपी पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर सामने आया कि अजफरुल हक उर्फ प्रिंस पहले से ही थाने का हिस्ट्रीशीटर अपराधी है. उस पर पहले भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी के काले कारनामों में उसके घरवाले भी पूरी तरह शामिल थे और उन्होंने भी उसे देह व्यापार के दलदल में धकेलने की कोशिश की. पीड़िता का कहना है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि संगठित अपराध है, जिसमें कई लोग शामिल हैं और इसका नेटवर्क बस्ती तक सीमित नहीं है. 300 लड़कियों का दावा, जांच एजेंसियों के लिए चुनौती पीड़िता के इस दावे के बाद पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया है. अगर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला राज्य के सबसे बड़े लव जिहाद और सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट में से एक बन सकता है. पुलिस फिलहाल पीड़िता के बयान, डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल्स के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. 8 आरोपियों पर FIR, एक गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी अजफरुल हक उर्फ प्रिंस समेत 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. इनमें आरोपी के परिजन और सहयोगी भी शामिल हैं. मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश के लिए दबिशें दी जा रही हैं. डिप्टी एसपी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस गिरोह का संबंध किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से तो नहीं है. नेपाल और अन्य राज्यों तक फैले तार सूत्रों के अनुसार, पुलिस को शुरुआती जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ पीड़िताओं को नेपाल और देश के अन्य राज्यों में भेजा गया. इसके लिए एजेंट, ठिकाने और संपर्क सूत्रों का इस्तेमाल किया गया. मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स की फोरेंसिक जांच की जा रही है. फिलहाल, गिरफ्तारी के साथ इस काले खेल की परतें खुलनी शुरू हुई हैं. आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, यह साफ होगा कि यह आंकड़ा 300 तक सीमित है या इसके पीछे इससे भी बड़ा और खतरनाक नेटवर्क छिपा है.

पति ने शादी में बाइक न मिलने पर तलाक दिया, हलाला का विवादास्पद बयान भी सामने आया

 बांदा उत्तर प्रदेश के बांदा में एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला को शादी के बाद इतना मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया कि वो टूट गयी. ससुराल वालों ने उसे लौटने के लिए हलाला करने की शर्त रख दी, जिससे परेशान होकर उसने थाना पहुंच पुलिस से शिकायत की है. पुलिस ने शौहर सहित चार लोगों पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.  दहेज के लिए प्रताड़ना मामला मटौंध थाना क्षेत्र का है, जहां की रहने वाली एक युवती ने पुलिस शिकायत के दौरान बताया कि उसके पिता ने उसका निकाह जून 2025 में अपने सामर्थ्य के अनुसार किया था, निकाह के बाद विदा होकर ससुराल पहुचीं तो मालूम हुआ कि पति सहित अन्य ससुरालीजन दहेज से खुश नही थे. महिला ने आरोप लगाया कि इस कारण लोग उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे. उसे कई दिनों तक भूखा रखा गया, लेकिन परिवार चलता रहे इसलिए युवती सब सहती रही. कई बार मामला बढ़ने पर पुलिस ने समझौता कराया, लेकिन ससुराल पक्ष के लोगों मे कोई बदलाव नहीं आया. दिसम्बर 2025 में मारपीट करते हुए उसे ससुराल से निकाल दिया गया.  ‘हलाला कराकर आओगी तो रखूंगा’ युवती ने आगे बताया कि इन लोगों ने कहा कि अपने परिवार वालों को बुलाओ, हमे दो लाख रुपये, एक हीरो होंडा बाइक दिलवाओ. हमने तुम्हे तलाक दे दिया है तो अब हम तुम्हें अपने साथ तब रखेंगे जब तुम हलाला कराकर आओगी. साथ ही उसे जमकर गालियां दी गईं. जिसके बाद पीड़ित युवती ने परेशान होकर पुलिस से शिकायत की है, पुलिस ने शौहर सहित चार ससुरालियों पर केस दर्ज किया है.  मटौंध थाना के पुलिस अधिकारी SO संदीप कुमार ने बताया कि महिला ने शिकायत की है, जिस पर सुसंगत धाराओ में अभियोग दर्ज किया गया है. मामले में जांच करके सही तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

योगी सरकार ने चल-अचल संपत्ति छुपाने वाले कर्मचारियों के वेतन पर लगाई रोक

लखनऊ   राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अब तक घोषित नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें वेतन रोके जाने की कोई चिंता नहीं है। सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्यकर्मियों की संपत्ति का विवरण जुटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर देना अनिवार्य था। इसके लिए विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जो कर्मचारी तय समयसीमा तक विवरण अपलोड न करें, उनका वेतन रोक दिया जाए। इन सभी का वेतन रोका जाएगा  रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। वहीं ‘अन्य’ श्रेणी के 1,612 कर्मचारियों में से 854 ने भी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। इन सभी का वेतन रोका जाएगा।  

PDA की राजनीति ढोंग, असली एजेंडा परिवारवाद : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल को ‘पीडीए’ से ज्यादा ‘परिवार’ की चिंता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा, “पीडीए तो बहाना है, असली लक्ष्य तो ‘परिवार’ है…!” मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में पीडीए को नजरअंदाज करने के सपा प्रमुख के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा, “जो लोग यह दावा करते हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार ने उत्तर प्रदेश के छह करोड़ लोगों सहित पूरे देश में 25 करोड़ लोगों को गौरव और सम्मान के साथ आगे बढ़ने में मदद की, तो उनके कार्यकाल में ऐसा क्यों नहीं हो सका? पीडीए का मुद्दा तब भी जरूर रहा होगा।” उन्होंने कहा, “मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पीडीए पर चर्चा क्यों नहीं हुई? अपनी पार्टी (सपा) के शासनकाल में उन्हें (अखिलेश को) सिर्फ परिवार की ही चिंता क्यों थी?” योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को परिवार के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य गरीबों, युवाओं और किसानों की सहायता करना है। हमारा लक्ष्य उच्च श्रेणी की अवसंरचना सुनिश्चित करना है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “यह दृष्टिकोण बजट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, लेकिन दूरदृष्टिहीन लोग, भविष्य की कोई योजना न रखने वाले लोग ऐसी निरर्थक बातों में उलझे रहते हैं।” योगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बजट की आलोचना को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आवंटन से उत्तर प्रदेश को मदद मिलेगी, जो देश में रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के साथ-साथ निवेशकों को भी लाभ होगा। योगी ने कहा कि केंद्रीय बजट के आधार पर प्रदेश सरकार फरवरी में बजट प्रस्तुत करेग और डबल इंजन सरकार के इस बजट का लाभ देश की सबसे बड़ी आबादी को प्राप्त होगा।

कृषि में बड़ा बदलाव! CM योगी का आय बढ़ाने वाला इंटरक्रॉपिंग फॉर्मूला सभी किसानों के लिए

लखनऊ यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।   मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा मिलती है। प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश तथा देश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल का चयन किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी में सरसों-मसूर और जायद में उर्द-मूंग को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही वर्षवार रोडमैप और सहायता-अनुदान की स्पष्ट व्यवस्था करने के निर्देश दिए।  

प्रदेश के सभी जनपदों में चरणबद्ध रूप से विकसित होंगे एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को रोजगार से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर घोषित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ के लिए सभी जनपदों में उपयुक्त भूमि शीघ्र चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति का लक्ष्य ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करना है, जहां युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के अवसर एक ही परिसर में सुलभ हों। उन्होंने निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जोन उद्योग, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार तथा उद्योग-सहायता से जुड़े विभागों और सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने एमएसएमई, सेवा आधारित उद्योगों और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्लग-एंड-प्ले यूनिट और फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया, जिससे उद्यमियों को प्रारंभ से ही आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध हो सके। बैठक में अवगत कराया गया कि इस योजना के अंतर्गत कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग फैसिलिटी, डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर, टूल रूम, ईटीपी/सीईटीपी, प्लग-एंड-प्ले यूनिट तथा फ्लैटेड फैक्ट्री की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही युवाओं के कौशल उन्नयन हेतु उद्यमिता प्रशिक्षण, मेंटरिंग, विभिन्न ऋण योजनाओं की जानकारी तथा हैंडहोल्डिंग की व्यवस्था भी इसी परिसर से की जाएगी। बैठक में यह भी बताया गया कि योजना को चरणबद्ध रूप से प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किए जाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल में एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित जोन के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र, फ्लैटेड फैक्ट्री, वाणिज्यिक क्षेत्र, सड़क, कॉमन फैसिलिटी, सर्विस सेक्टर, ग्रीन एरिया और कार्यालय स्पेस का संतुलित लेआउट तैयार किया गया है। इसके साथ ही ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रशिक्षण हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, एक्सटेंशन काउंटर और उद्योग-सहायता से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ऑपरेशनल मॉडल के अंतर्गत स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रशिक्षण, कौशल विकास, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप तथा संबंधित उद्योगों में वेतन आधारित रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और उद्यमिता का एक सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित स्थलों की शीघ्र पहचान कर परियोजना के क्रियान्वयन को गति दी जाए, ताकि यह पहल प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का एक प्रभावी मॉडल बन सके।

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