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चीन की ‘दो चेहरे वाली’ नीति पर उठने लगे सवाल, पहलगाम हमले की निंदा, फिर पाक को बताया ‘मजबूत दोस्त’

बीजिंग पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करते हुए चीन ने एक ओर जहां आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दिखाया, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान को अपना ‘आयरन-क्लैड फ्रेंड’ यानी ‘लोहे जैसा मजबूत मित्र’ बताते हुए उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के समर्थन की बात दोहराई. यह घटना भारत-चीन-पाकिस्तान के बीच चल रही कूटनीतिक रस्साकशी का एक नया अध्याय बन गई है, जहां चीन की ‘दो चेहरे वाली’ नीति पर सवाल उठने लगे हैं. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय स्वतंत्रता की रक्षा में चीन के समर्थन को दोहराया. वांग यी ने पाकिस्तान को ‘हर मौसम का रणनीतिक साझेदार’ और ‘लोहे जैसा दोस्त’ बताया. चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि वांग ने पाकिस्तान के संयम और जिम्मेदाराना रवैये की सराहना की है. हालांकि, इसी के साथ वांग यी ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी फोन पर बातचीत की और पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि चीन आतंकवाद का विरोध करता है. चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य जटिल और अस्थिर है. ऐसे में एशिया में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है और उसे संभालकर रखना चाहिए.   चीन ने यह भी कहा कि वह चाहता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों पक्ष संयम बरतें, आपसी मतभेदों को बातचीत और परामर्श से सुलझाएं, और किसी भी तरह की सैन्य टकराव की स्थिति से बचें. बीजिंग ने उम्मीद जताई कि दोनों देश व्यापक और स्थायी संघर्षविराम की दिशा में आगे बढ़ेंगे, जो न केवल दोनों देश, बल्कि पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह नीति दोमुंही है, जहां एक ओर वह आतंकवाद की निंदा करता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के समर्थन में खड़ा दिखाई देता है, जो कई बार आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है. रोम के दोमुंहे देवता ‘जैनस’ की तरह चीन भी एक साथ दो चेहरों के साथ दुनिया के सामने खड़ा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संघर्षविराम की घोषणा के बाद चीन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि मैं चीन के राष्ट्रपति और वहां की जनता को दिल से धन्यवाद देना चाहता हूं, जो पिछले 58 वर्षों से पाकिस्तान के साथ खड़े हैं. संघर्षविराम की घोषणा भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद हुई, जो दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों को पूरे युद्ध के मुहाने तक ले गई थी. शनिवार को भारत और पाकिस्तान ने जल, थल और वायु मार्ग से सभी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से रोकने पर सहमति जताई. हालांकि, इस समझौते को लेकर कई देशों ने दावा किया कि इसमें उनकी भूमिका रही है. कई रिपोर्ट में कहा गया कि यह समझौता चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब सहित कई देशों की गहन कूटनीतिक कोशिशों के बाद हुआ. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता अमेरिका द्वारा कराए गए मध्यस्थता के प्रयासों का नतीजा है. वहीं, भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह समझौता पूरी तरह से द्विपक्षीय बातचीत का परिणाम है और इसमें कोई बाहरी हस्तक्षेप नहीं हुआ. भारत का यह भी कहना है कि पाकिस्तान ने इस संघर्षविराम के लिए बिना किसी शर्त या अन्य मुद्दों से जोड़ने की कोशिश किए बगैर सहमति जताई. दरअसल, भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकियों के लॉन्चपैड ध्वस्त कर दिए थे. इसी के बाद जवाब में पाकिस्तान की ओर से भी हमले हुए, जिससे तनाव चरम पर पहुंच गया. चीन की भूमिका को लेकर भारत में मिलेजुले सुर देखने को मिल रहे हैं. जहां एक ओर कूटनीतिक हलकों में इसे संतुलन साधने वाला कदम कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे पाकिस्तान को लेकर चीन के विशेष झुकाव का उदाहरण माना जा रहा है. कई विश्लेषकों का मानना है कि चीन इस समय दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और पाकिस्तान को रणनीतिक मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है. वहीं, भारत को संतुलन में बनाए रखने के लिए वह आतंकवाद के मुद्दे पर बयानबाजी करता है. यह चीन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह दोनों पक्षों से अपने हित साधने की कोशिश करता है. फिलहाल, भारत ने चीन के इस ‘दोहरे रवैये’ पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन आंतरिक स्तर पर इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में भारत की विदेश नीति में इस घटनाक्रम का क्या असर पड़ता है और क्या वह चीन पर अधिक कड़ा रुख अपनाएगा. पाकिस्तान को लेकर चीन की इस अंध समर्थन वाली नीति ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बीजिंग वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ है या फिर वह अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हुए दोहरी चाल चलता है.  

मिस वर्ल्ड के मंच पर भारत की मेजबानी करेंगी राजस्थान की नंदिनी गुप्ता

नई दिल्ली मिस वर्ल्ड 2025 के मंच में भारत की नंदिनी गुप्ता 100 से ज्यादा देशों की सुंदरी से मुकाबला करेंगी। वो पहली बार किसी पेजेंट में हिस्सा नहीं ले रही हैं, इससे पहले भी हसीना फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2023 का ताज हासिल कर चुकी हैं। ऐसे में देश के लोगों को उनसे बहुत उम्मीदें हैं। उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है और वो स्टाइल के मामले में भी सबसे आगे हैं। नंदिनी को जब भी देखा जाता है कि वो एक खास लुक से फैंस का दिल जीत लेती हैं। स्टाइलिश के साथ नंदिनी के देसी लुक्स से भी नजर हटा पाना मुश्किल है। वो हर बार ऐसा अटायर सिलेक्ट करती हैं कि उनके चेहरे का नूर दोगुना हो जाता है। चलिए आप भी देख लीजिए राजस्थान के कोटा की नंदिनी गुप्ता का ग्लैमरस अंदाज। स्टाइलिश ड्रेस में दिखीं कमाल ​लंबी-सी स्टाइलिश ड्रेस पहन नंदिनी डीवा लग रही हैं। अटायर का रेड कलर और स्ट्रैपी स्लीव्स स्टाइल ट्रेंडी बना रहा है। वहीं, कटआउट डिजाइन भी ग्लैमरस नजर आया। ड्रेस का अपर पार्ट फिटिंग वाला है, जबकि नीचे से फ्लेयर्ड नजर आ रही है। वहीं, लुक को हाइलाइट किया स्कर्ट पोर्शन पर बनी कटआउट डिजाइन वाली लेयर्स ने। साथ में हसीना के स्टाइलिश इयररिंग्स भी ग्रेसफुल नजर आए। नंदिनी का साड़ी वाला लुक सिर्फ स्टाइलिश ड्रेस में ही नहीं नंदिनी की खूबसूरती साड़ी में भी नंबर-1 लगती है। इस फोटो में भी वो रेड कलर की साड़ी में एलिगेंट दिख ही है। साथ में उन्होंने कट स्लीव ब्लाउज पहना है, जिसपर सिल्वर एम्ब्रॉयडरी वर्क नजर आ रहा है। वहीं, हसीना की साड़ी पर भी एम्ब्रॉयडरी वाला बॉर्डर जुड़ा हुआ है, जिसमें उनकी खूबसूरती कमाल लग रही है। लुक को कंप्लीट बनाने के लिए उन्होंने हैवी इयररिंग्स, कंगन और अंगूठी पहनी है। सादगी से जीत लेती हैं दिल लाइट कलर के कुर्ता सेट में नंदिनी सादगी वाला अंदाज दिखा रही हैं। सूट के कई हिस्सों पर फूल और पत्तियों वाले डिजाइन बने नजर आ रहे हैं। साथ ही अटायर की स्लीव्स भी मिड लेंथ है, जो हसीना को क्लासी दिखा रही हैं। उन्होंने साथ में मैचिंग प्लाजो पेयर है। और, उनके इस लुक को एलिगेंट बना रहा है एम्ब्रॉयडरी वाला दुपट्टा, जिसे ओढ़कर नंदिनी परफेक्ट नजर आईं। ग्लैमर का लगाती हैं तड़का स्ट्रैपलेस मैक्सी ड्रेस में नंदिनी ग्लैमर दिखा रही हैं। अटायर का ग्रेडिएंट डिजाइन देखते ही बन रहा है। जबकि ड्रेस के डार्क ब्लू कलर और दूसरे रंगों की शेड्स से उनका पूरा लुक हाईलाइट हो रहा है। साथ में वो एक हाथ में गोल्ड ब्रेसलेट पहनी दिख रही हैं। जबकि कानों में दिख रहे उनके ड्रॉप इयररिंग्स लुक के साथ परफेक्टली ट्यून कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर #BoycottTurkeyAzerbaijan ट्रेंड, तुर्की घूमने जाने से भारतीयों का इंकार

 नई दिल्ली  शायद ही कोई ऐसा हो जिसे एक जगह से दूसरी जगह पर घूमना, नई-नई जगहों पर जाना और नई-नई चीजों को देखना और अपने कैमरे में कैद करना न पसंद हो। इसके लिए लोग घूमने जाते हैं। आप भी कहीं न कहीं घूमने जाते ही होंगे और लोग तो देश ही नहीं बल्कि, देश के बाहर भी यात्रा पर जाते हैं। जैसे, लोग अमेरिका, न्यूजीलैंड, दुबई जैसी जगहों पर घूमने जाते हैं। इसके अलावा भी एक जगह ऐसी है जहां पिछले कुछ वर्षों में खासतौर पर भारतीय पर्यटक काफी संख्या में पहुंचा है और वो जगह है तुर्की, लेकिन अब तुर्की जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं और भारतीय पर्यटक यहां जानें से बच रहे हैं। तो चलिए जानते हैं इसके पीछे क्या वजह है। आगे आप इस बारे में विस्तार से जान सकते हैं…     दरअसल, जिस तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चल रहा है उसमें तुर्की ने पाकिस्तान की मदद की। कराची बंदरगाह पर तुर्की द्वारा भेजी गई सैन्य मदद देखी गई और साथ ही जो ड्रोन पाकिस्तान ने भारत में दागे, वो भी तुर्की के ही हैं। ऐसे में जैसे ही ये बात सामने आई तो भारतीयों ने सोशल मीडिया से लेकर अपनी चर्चाओं तक में तुर्की का विरोध करना शुरू कर दिया। तुर्की जाने से बच रहे हैं भारतीय यहां ये जान लें कि तुर्की और अजरबैजान घूमने के लिए दुनिया ही नहीं बल्कि, भारत से काफी ज्यादा संख्या में लोग हर साल जाते हैं। इसलिए अब सोशल मीडिया पर लोगों से अपील की जा रही है कि वे तुर्की की यात्रा पर न जाएं। साथ ही सोशल मीडिया पर #BoycottTurkeyAzerbaijan ट्रेंड कर रहा है। 2024 में इतने भारतीय गए हैं तुर्की घूमने?     रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में लगभग 3.3 लाख भारतीय टूरिस्ट तुर्की घूमने गए थे। इसके अलावा 2024 में ही अजरबैजान में लगभग 2.4 लाख भारतीय घूमने गए। ऐसे में इस यात्रा के लिए हर यात्री ने औसतन लगभग 1 हजार अमेरिकी डॉलर यानी 85 हजार रुपये (भारतीय रुपये में) खर्च किए। इससे तुर्की जैसे देश ने सिर्फ ट्रैवल से करोड़ों रुपये की मोटी कमाई। वहीं, तुर्की पर्यटन बोर्ड ने जानकारी दी थी कि वर्ष 2023 में दुनियाभर से 6.22 करोड़ पर्यटक आए और इसमें भारत के लोगों की संख्या 20.7 प्रतिशत बढी। क्यों की जा रही है तुर्की घूमने न जाने की अपील?     जैसा की तुर्की भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद कर रहा है, जो किसी भी भारतीय को सही नहीं लग रही। ऐसे समय में जब ज्यादातर देश पाकिस्तान के खिलाफ हैं, तब तुर्की पाकिस्तान की मदद कर रहा है। इसलिए सोशल मीडिया पर तुर्की को बायकॉट करने की बात की जा रही है और भारतीयों से अपील की जा रही है कि तुर्की घूमने न जाए ताकि तुर्की को टूरिज्म से होने वाले आर्थिक लाभ को कम किया जा सके।  

अमेरिका लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए बना रहा दबाव, 30 दिवसीय युद्ध विराम के लिए यूक्रेन तैयार

कीव रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग थमने के आसार हैं। यूक्रेन और उसके सहयोगी 30 दिवसीय पूर्ण और बिना शर्त युद्ध विराम के लिए तैयार हो गए हैं। यूक्रेन के विदेश मंत्री ने बताया कि यह युद्ध विराम सोमवार से शुरू होगा। यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने शनिवार को कहा कि यूक्रेन और उसके सहयोगी सोमवार से कम से कम 30 दिनों के लिए रूस के साथ पूर्ण, बिना शर्त युद्ध विराम के लिए तैयार हैं। शनिवार को चार देशों फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और पोलैंड के नेता यूक्रेन पहुंचे थे। इसमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर शामिल रहे। सभी ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात कर रूस पर दबाव बढ़ाने और युद्ध रोकने की कोशिशों पर चर्चा की। जेलेंस्की से मुलाकात से पहले नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा था कि हम अमेरिका के साथ मिलकर रूस से 30 दिन के पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम की अपील करते हैं ताकि एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में बातचीत हो सके। उन्होंने आगे कहा, हम युद्धविराम लागू करने और पूर्ण शांति समझौते की तैयारी के लिए बातचीत का समर्थन करने को तैयार हैं। नेताओं ने कहा था कि खूनखराबा अब बंद होना चाहिए, रूस को अपनी अवैध घुसपैठ रोकनी चाहिए और यूक्रेन को एक सुरक्षित, संप्रभु राष्ट्र के रूप में समृद्ध होने का हक मिलना चाहिए। साथ ही नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर रूस युद्धविराम के लिए तैयार नहीं होता, तो उस पर दबाव और बढ़ाया जाएगा और यूक्रेन को हर संभव सहायता जारी रहेगी। रूस-यूक्रेन युद्ध को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं। अमेरिका लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए दबाव बना रहा है। मार्च में संयुक्त राज्य अमेरिका ने तत्काल, सीमित 30-दिवसीय युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था जिसे यूक्रेन ने स्वीकार कर लिया था, लेकिन रूस ने अपनी पसंद के अनुसार शर्तों पर जोर दिया।

मौसम विभाग ने बताया-इस बार समय से पांच दिन पहले ही मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है

नई दिल्ली   मौसम को लेकर बड़ा अपडेट आ गया है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार समय से पांच दिन पहले ही मॉनसून केरल तट पर पहुंच सकता है। 27 मई को मॉनसून पहुंचने की संभावना जताई गई है। आम तौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट पर पहुंचता है। आईएमडी के आंकड़े के अनुसार, यदि मानसून केरल में उम्मीद के अनुरूप पहुंचता है, तो यह 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर मानसून का समय से पहले आगमन होगा। तब मानसून 23 मई को आया था। आमतौर पर, दक्षिण-पश्चिम मानसून एक जून तक केरल में दस्तक देता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में छा जाता है। यह 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है। आईएमडी ने अप्रैल में 2025 के मानसून में सामान्य से अधिक कुल वर्षा का पूर्वानुमान जताया था और अल नीनो परिस्थितियों की संभावना को खारिज कर दिया था, जो भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य से कम वर्षा से जुड़ी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में सचिव एम रविचंद्रन ने कहा था, ‘भारत में चार महीने के मानसून (जून से सितंबर) में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।’ इस बार प्री मॉनसून ऐक्टिविटी भी काफी देखी जा रही है। पिछले एक महीने से देश के बड़े हिस्से में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां जारी ही रही हैं। शनिवार को भी राजधानी दिल्ली में बौछार पड़ने के बाद मौसम ठंडा हो गया। वहीं बीते पांच दिनों में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और पंजाब में अलग-अलग इलाकों में बारिश हुई है। पश्चिमी विक्षोभ और अन्य कारणों से उत्तर भारत में होने वाली बारिश के चलते अब तक हीटवेव का ज्यादा प्रकोप देखने को नहीं मिला है। वहीं गर्मी बढ़ने की संभावना के बीच मॉनसून जल्दी आने की खबर भी राहत भरी है।

स्टारलिंक को भारत में सर्विसेज शुरू करने की हरी झंडी मिली, लगेगा 4 % स्पेक्ट्रम शुल्क

नई दिल्ली  दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सर्विसेज शुरू करने की हरी झंडी मिल गई है। यह कंपनी सैटेलाइट के जरिए दुनिया के 100 से अधिक देशों में इंटरनेट सर्विसेज देती है। इस बीच दूरसंचार नियामक ट्राई ने स्टारलिंक जैसे उपग्रह संचार सेवा प्रदाताओं पर वार्षिक राजस्व का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क लगाने की सिफारिश की है। ट्राई ने दूरसंचार विभाग को दी गई अपनी सिफारिश में कहा है कि शहरी क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं को प्रति ग्राहक 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क देना होगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए इन कंपनियों को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। ट्राई ने सिफारिश की है कि उपग्रह ब्रॉडबैंड स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए आवंटित किया जाए जिसे बाद में दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। AGR का चार प्रतिशत स्पेक्ट्रम शुल्क भू-स्थैतिक कक्षा (जीएसओ) और गैर-भूस्थैतिक कक्षा (एनजीएसओ) में स्थित उपग्रहों के जरिये सेवाएं देने वाली दोनों तरह की उपग्रह संचार कंपनियों को देना होगा। न्यूनतम वार्षिक स्पेक्ट्रम शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज होगा। एजीआर का उपयोग उस राजस्व की गणना करने के लिए किया जाता है, जिसे दूरसंचार कंपनियां स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस शुल्क के रूप में सरकार के साथ साझा करती हैं। ट्राई का यह प्रस्तावित शुल्क सेवा प्रदाता कंपनियों के अनुरोध से काफी अधिक है। मस्क की स्टारलिंक और एमेजन इंक की सहायक कंपनी कुइपर सिस्टम्स ने ट्राई के साथ परामर्श के दौरान स्पेक्ट्रम शुल्क को एजीआर के एक प्रतिशत से कम रखने और कोई अन्य शुल्क नहीं लगाने का आग्रह किया था। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने सिफारिशें जारी करते हुए कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं उन वंचित क्षेत्रों में संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जहां दूरसंचार नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं। इन सेवाओं की आपदाओं, बचाव और राहत कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ट्राई ने कहा कि स्पेक्ट्रम शुल्क को कारोबारी सुगतमा को बढ़ाते हुए एजीआर के प्रतिशत के रूप में लगाया जाना चाहिए। नियामक ने कहा, ‘कुल मिलाकर स्पेक्ट्रम शुल्क स्पेक्ट्रम के आवंटन को कवर करने के लिए जरूरी प्रशासनिक लागतों से अधिक नहीं होना चाहिए। यह निवेश और नवाचार को भी सुविधाजनक बनाएगा। डीओटी इन सिफारिशों पर कार्रवाई करेगा। यह उन्हें संशोधित कर सकता है या पूरी तरह स्वीकार कर सकता है और उन्हें मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल को भेज सकता है। एक बार मंजूरी मिलने के बाद उपग्रह संचार कंपनियां लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकती हैं। लेना होगा लाइसेंस स्टारलिंक को दो दिन पहले ही सेवा शुरू करने का आशय पत्र (LOI) दिया गया था। अब कंपनी को भारत में सेवाएं शुरू करने से पहले लाइसेंस हासिल करना होगा। स्पेसएक्स ने भारत में स्टारलिंक की ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत के लिए पहले ही रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ समझौता कर लिया है। ट्राई ने इन तर्कों को खारिज किया कि उपग्रह संचार सेवाएं स्थलीय मोबाइल नेटवर्कों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा करेंगी। इसके लिए दूरसंचार नियामक ने इन दोनों की नेटवर्क क्षमताओं और संचालन के पैमाने के बीच बहुत बड़ा अंतर होने का हवाला दिया। लाहोटी ने उपग्रह संचार पर अपनी अनुशंसा सौंपे जाने के बाद संवाददाताओं से कहा कि इनमें प्रतिस्पर्धा को लेकर कोई तुलना नहीं है, ये पूरक सेवाएं हैं। यह पूछने पर कि क्या उपग्रह संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम पर ट्राई की सिफारिशों से स्थलीय मोबाइल सेवा प्रदाताओं को किसी तरह का झटका लगेगा, उन्होंने कहा, ‘इन सिफारिशों के कारण (दूरसंचार कंपनियों को) कोई नुकसान नहीं होगा।’ समान अवसर ट्राई ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि उपग्रह संचार सेवाएं निकट भविष्य में स्थलीय सेवाओं के लिए काफी हद तक पूरक बनी रहेंगी और दोनों सेवाओं की परिचालन क्षमताओं तथा पैमाने में काफी अंतर है। भारतीय अंतरिक्ष संघ (आईएसपीए) ने कहा कि उपग्रह संचार सेवाओं के मूल्य निर्धारण पर ट्राई की सिफारिशें सरकार के लिए राजस्व जरूरतों और उपग्रह सेवाओं को किफायती एवं सुलभ रखने के बीच संतुलन बनाती हैं। इसके साथ ही आईएसपीए ने कहा कि इस सिफारिश में सबको समान अवसर देने पर भी ध्यान दिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी, सीजफायर सहमति के बाद अब 12 मई को फिर करेंगे बात

नई दिल्ली भारत और पाकिस्‍तान के बीच तनातनी के बीच बड़ी खबर है। दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है। इसे आज शाम 5 बजे से लागू कर दिया गया है। अब 12 मई को दोपहर 2 बजे फिर से इस पर बात होगी। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, “पाकिस्तान के डीजीएमओ ने आज दोपहर 15:35 बजे भारतीय डीजीएमओ को फोन किया। उनके बीच सहमति बनी कि दोनों पक्ष शाम 5 बजे से जमीन, हवा और समुद्र में सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई बंद कर देंगे।   सरकार का बड़ा फैसला: किसी भी आतंकी घटना को भारत के खिलाफ युद्ध माना जाएगा, उसी के हिसाब से देंगे जवाबसरकार का बड़ा फैसला: किसी भी आतंकी घटना को भारत के खिलाफ युद्ध माना जाएगा, उसी के हिसाब से देंगे जवाब इस सहमति को लागू करने के लिए दोनों पक्षों को निर्देश दिए गए हैं। वे 12 मई को 12 बजे फिर से बात करेंगे।” भारत-पाक युद्धविराम समझौते के बाद कमोडोर रघु आर नायर, विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अब आगे क्‍या होगा दिल्ली: कमोडोर रघु आर नायर ने कहा, “समुद्र, हवा और जमीन पर सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए सहमति बन गई है। भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेनाओं को इस सहमति का पालन करने का निर्देश दिया गया है…”। कर्नल सोफिया कुरैशी ने किया पाक के तमाम दावों का खंडन     कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा, “पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अपने JF 17 से हमारे S400 और ब्रह्मोस मिसाइल बेस को नुकसान पहुंचाया, जो पूरी तरह से गलत है।     दूसरे, उसने एक गलत सूचना अभियान भी चलाया कि सिरसा, जम्मू, पठानकोट, भटिंडा, नलिया और भुज में हमारे हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचाया गया, और उसकी यह गलत सूचना भी पूरी तरह से गलत है।     तीसरे, पाकिस्तान के गलत सूचना अभियान के अनुसार, चंडीगढ़ और व्यास में हमारे गोला-बारूद डिपो को नुकसान पहुंचाया गया, जो भी पूरी तरह से गलत है।     पाकिस्तान ने झूठे आरोप लगाए कि भारतीय सेना ने मस्जिदों को नुकसान पहुंचाया।     मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूं कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और हमारी सेना भारत के संवैधानिक मूल्य का एक बहुत ही सुंदर प्रतिबिंब है…” विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा, “सर्वोच्च सम्मान के साथ, हमारे अभियान विशेष रूप से भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे आतंकवादी शिविरों और सुविधाओं पर लक्षित हैं। भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किसी भी धार्मिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया है…”

सोफिया कुरैशी और उनकी जुड़वा बहन शायना सुनसारा हैं वंडर वुमन, एक बहादुर तो दूसरी ब्यूटी क्वीन

वडोदरा कर्नल सोफिया कुरैशी, ऑपरेशन सिंदूर के बाद से चर्चा में आया वह नाम जिस पर आज हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा है। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देने के लिए भारतीय सेना ने जिन दो महिलाओं को चुना उनमें से एक थीं कर्नल सोफिया कुरैशी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक-एक जानकारी सामने रखी और बताया कि कैसे पाकिस्तान में चल रही आतंकी की फैक्ट्रियों को मिट्टी में मिलाया गया। सोफिया कुरैशी और उनकी जुड़वा बहन शायना सुनसारा सेना में रहे अपने दादा से सैन्यकर्मियों की वीरता और बलिदान की कहानियां सुनकर बड़ी हुईं। कई सालों बाद, सोफिया ने सशस्त्र बलों में शामिल होने की इच्छा जताई तो, तो उनके परिवार ने बिना किसी हिचकिचाहट के उनके फैसले का दृढ़ता से समर्थन किया। आज अपनी बहन को इस मुकाम पर देख शायना सुनसारा भी गर्व से भर उठी हैं। गोल्ड मेडलिस्ट से लेकर फैशन डिजाइनर तक, हर जगह गाड़े झंडे कर्नल कुरैशी और सुनसारा का जन्म गुजरात के वडोदरा में एक सैन्य परिवार में हुआ था। शायना सुनसारा भी अपनी जुड़वां बहन कर्नल सोफिया कुरैशी की तरह कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। वह एक मा, एक अर्थशास्त्री, पूर्व आर्मी कैडेट, फैशन डिजाइनर और एक पर्यावरणविद् भी हैं। डॉ. शायना सुनसारा को वडोदरा की “वंडर वुमन” के तौर पर भी जाना जाता है। वह मिस गुजरात, मिस इंडिया अर्थ 2017 और मिस यूनाइटेड नेशंस 2018 का ताज भी अपने नाम कर चुकी हैं। सुनसारा राइफल शूटिंग गोल्ड मेडलिस्ट (भारत के राष्ट्रपति) भी हैं। इसके अलावा भारतीय फैशन उद्योग में अपने योगदान के लिए 2018 में प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। वह एक मॉडल भी हैं और उन्हें गुजरात में एक लाख पेड़ लगाने की उनकी पहल के लिए भी जाना जाता है। कोई नहीं जानता था ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देंगी सोफिया शायना सुनसारा एचटी सिटी को बताया कि उनके परिवार में कोई भी यह नहीं जानता था कि कर्नल सोफिया कुरैशी ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी देने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक रिश्तेदार ने उन्हें फोन करके टीवी ऑन करने को कहा और तभी उन्हें इस बारे में पता चला। सुनसारा ने कहा, “यह न केवल हमारे लिए बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का पल था। हमारी सरकार और पीएम मोदी ने बहुत बढ़िया जवाब दिया। कौन हैं सोफिया कुरैशी? सोफिया कुरैशी का जन्म कुरैशी का जन्म 1974 में गुजरात के वडोदरा में हुआ। उन्होंने 1997 में मनोनमनियम सुंदरनार (एमएस) यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री हासिल की।महत्वपूर्ण सिग्नल कोर में अधिकारी के रूप में कार्यरत, कुरैशी को 2006 में लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में सैन्य पर्यवेक्षक की भूमिका के लिए चुना गया था, और वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में बाढ़ राहत अभियानों का हिस्सा रही थीं। 2016 में भी कायम की थी मिसाल कुरैशी ने उस समय नई मिसाल कायम की थी, जब 2016 में वह आसियान देशों के बीच शांति बनाए रखने में अंतर-संचालन के लिए भारत द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण अभ्यास, फोर्स 18 में अपनी सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनी थीं। वह संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण दल के हिस्से के रूप में अन्य देशों में भी जा चुकी हैं। रक्षा मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर महिला दिवस पर एक पोस्ट में कुरैशी की तस्वीर शेयर करते हुए कहा था, 2016 में फोर्स18-आसियान प्लस बहुराष्ट्रीय क्षेत्र प्रशिक्षण अभ्यास में सेना प्रशिक्षण टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी। वह सभी आसियान प्लस टुकड़ियों में एकमात्र महिला अधिकारी टुकड़ी कमांडर थीं।

सीबीआई ने इस ऑपरेशन के तहत 8 राज्यों में 42 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की, 5 गिरफ्तार

नईदिल्ली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अंतरराष्ट्रीय संगठित साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर शिकंजा कसते हुए ‘ऑपरेशन चक्र-V’ के तहत एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। सीबीआई ने इस ऑपरेशन के तहत 8 राज्यों में 42 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की और साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले अनाधिकृत सिम कार्ड की बिक्री में शामिल 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों को रोकने के लिए चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। सीबीआई ने विभिन्न टेलीकॉम ऑपरेटरों के पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) एजेंटों के परिसरों पर छापेमारी की। आरोप है कि ये एजेंट साइबर अपराधियों और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के अज्ञात अधिकारियों के साथ मिलकर सिम कार्ड जारी करने में शामिल थे, जिनका इस्तेमाल बाद में डिजिटल गिरफ्तारी, धोखाधड़ी, फर्जी विज्ञापन, निवेश धोखाधड़ी और यूपीआई धोखाधड़ी जैसी अवैध गतिविधियों में किया गया। सीबीआई ने विशेष रूप से टेलीकॉम ऑपरेटरों के विभिन्न पीओएस एजेंटों द्वारा जारी किए गए अनाधिकृत सिम कार्ड की बिक्री और दुरुपयोग को रोकने के लिए समन्वित प्रयास किए। इसके तहत असम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित 8 राज्यों में 38 पीओएस एजेंटों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। इन छापों के दौरान, सीबीआई ने मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केवाईसी दस्तावेजों की प्रतियां जैसे कई आपत्तिजनक दस्तावेज और लेख जब्त किए हैं। इसके अलावा, अनाधिकृत सिम कार्ड के वितरण में शामिल मध्यस्थों सहित व्यक्तियों की पहचान की गई है और अपराध की आय से अर्जित चल संपत्ति को भी जब्त किया गया है। सीबीआई ने केवाईसी मानदंडों का उल्लंघन करते हुए साजिश के तहत अनाधिकृत रूप से सिम कार्ड बेचने में उनकी संलिप्तता के लिए 4 राज्यों से 5 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई साइबर अपराध और इसके अपराधियों से सख्ती से निपटने की भारत सरकार की चल रही प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें ऐसे अपराधों के पीछे के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है और सीबीआई इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए प्रयासरत है। यह ऑपरेशन साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने और डिजिटल धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पाक में रहीमयार खान एयरबेस पर हुआ बड़ा गड्ढा, पंजाब में सिख परिवार के घर में गिरा पाकिस्तानी ड्रोन

नई दिल्ली पाकिस्तान शनिवार सुबह से भारत में हमले की कोशिश कर रहा है। यही कारण है कि अब भारत से भी हमले के फोटो-वीडियो सामने आने लगे हैं। आम जन ये वीडियो शेयर कर रहे हैं। पाकिस्तान (Pakistan) से भी क्रम जारी है। पाकिस्तान में वहां के लोगो वीडियो शेयर कर बता रहे हैं कि भारतीय सेना किस तरह सटीक हमले कर रही है और पाकिस्तान को मुंह की खाना पड़ रही है।   पाकिस्तान से एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें भीड़ खेत में गिर ड्रोन पर हमला कर रही है। लोग ड्रोन को लातें मार रहे हैं। हालांकि एक्स पर पाकिस्तान के ही कुछ लोगों का कहना है कि यह भारत का नहीं, बल्कि पाकिस्तान का ही ड्रोन है। पाकिस्तान के दक्षिणी पंजाब में रात को हुए हमले के बाद रहीमयार खान एयरबेस की स्थिति कुछ ऐसी हो गई है। हरियाणा के सिरसा में पाकिस्तान की एक मिसाइल को नाकाम कर दिया गया। इसका टुकड़ा मैदान में पड़ा मिला। माना जा रहा है कि यह लंबी दूरी की मिसाइल थी, जिसे नई दिल्ली को निशाना बनाकर दागा गया था। यह अमृतसर के वडाला गांव का वीडियो है। भारतीय वायु रक्षा ने पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया जो एक सिख परिवार के आंगन में गिरा, जिससे वहां आग लग गई। पाकिस्तानी सेना अब सिख समुदाय पर हमला कर रही है और अपने गंदे सांप्रदायिक एजेंडे का फैलाने की नाकाम कोशिश कर रही है।

जम्मू-कश्मीर में फिर ड्रोन हमले और गोलाबारी, पाकिस्तान ने किया सीजफायर का उलंघन

नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान के बीच 86 घंटों तक चला युद्ध शनिवार शाम 5 बजे खत्म हो गया. जब दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई. लेकिन इसके 4 घंटे बाद ही पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन हुआ है.  जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से पाकिस्तान की उकसावेभरी गतिविधियां एक बार फिर तेज़ हो गई हैं. शनिवार रात को पाकिस्तान ने कई इलाकों में संघर्षविराम का उल्लंघन करते हुए भारी गोलाबारी की, वहीं एक संदिग्ध ड्रोन को लेकर कश्मीर के बारामूला जिले में धमाका हुआ है. जानकारी के अनुसार, अखनूर, राजौरी और आरएसपुरा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान द्वारा तोपखाने से गोलाबारी की गई है. वहीं, बारामुला में एक ड्रोन से अटैक हुआ है. पाकिस्तान ने जम्मू के पलनवाला सेक्टर में भी संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है.

भारत को अब पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंकी हमले बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होंगे: भारत सरकार

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। लगातार पिछली दो रातों में पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन से हमले करने की कोशिश की, जिसे हवा में ही नाकाम कर दिया गया। इस बीच, भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, अब अगर भारत के खिलाफ आतंकी हमला हुआ तो उसे युद्ध माना जाएगा और उसी प्रकार जवाब भी दिया जाएगा। सरकार के फैसले ने साफ कर दिया है कि भारत को अब पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे आतंकी हमले बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होंगे। यदि पाकिस्तान अब भी आतंकी हमलों से बाज नहीं आता है तो फिर भारत उसे युद्ध मानते हुए, उसी हिसाब से निपटेगा। 22 अप्रैल को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा आतंकी संगठन टीआरएफ ने पहलगाम में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इसमें 26 लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। आतंकियों ने भारतीय पर्यटकों से उनका धर्म पूछकर गोली मारी थी, जिससे देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ काफी गुस्सा था। भारत ने पाकिस्तान के आतंकी हमले का जवाब देते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। पाक और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक करते हुए 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर कर दिया था। इसमें जैश-ए-मोहम्मद चीफ मसूद अजहर के परिवार के दस सदस्य भी मारे गए। इसके अलावा, कई अन्य बड़े आतंकियों को भी मार गिराया गया। भारत की कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार की रात जम्मू समेत कई शहरों में 400 तुर्की ड्रोन से हमला बोल दिया था। हालांकि, भारत को इससे ज्यादा नुकसान नहीं हुआ और एयर डिफेंस सिस्टम ने आसमान में ही इन हमलों को नाकाम कर दिया। शुक्रवार की रात को फिर से पाकिस्तान ने भारत के 26 शहरों पर ड्रोन अटैक किया। इसे भी नाकाम कर दिया गया। पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। भारत ने भी बीती रात पाकिस्तान के छह एयरबेस को निशाना बनाते उन पर जवाबी कार्रवाई की है। कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि रफीकी, मुरीद, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियां में पाकिस्तानी सैन्य अड्डों पर भारतीय लड़ाकू विमानों से हवा से वार करने वाले सटीक हथियारों के जरिए हमला किया गया और यह जवाबी कार्रवाई मुख्य रूप से कमान एवं नियंत्रण केंद्रों, रडार स्थलों और हथियार भंडारण क्षेत्रों पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि पसरूर और सियालकोट हवाई अड्डे के रडार स्थलों को भी हथियारों से निशाना बनाया गया। इस दौरान, भारत ने सुनिश्चित किया कि इन जवाबी कार्रवाइयों के दौरान न्यूनतम अवांछित क्षति हो।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकियों ने एक पोस्ट को निशाना बनाकर किया हमला

पेशावर पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकियों ने एक पोस्ट को निशाना बनाकर हमला किया। इसमें नौ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। हालांकि इस हमले के बारे में अभी तक पाकिस्तानी सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। शकाई तहसील पर हमला उर्दू भाषा के दैनिक अखबार मशरिक में शनिवार को प्रकाशित खबर के अनुसार, आतंकियों ने शुक्रवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दक्षिण वजीरिस्तान जिले के शकाई तहसील में डंडा चेक पोस्ट पर हमला किया। यह इलाका अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है। हमले में नौ सुरक्षाकर्मी मारे गए और पांच घायल हो गए। घायल सैनिकों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्तक्षेप से भारत और पाक के बीच तत्काल युद्ध विराम एक स्वागत योग्य कदम: मुफ्ती

श्रीनगर भारत-पाकिस्तान के बीच ‘सीजफायर’ का ऐलान होने पर जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने खुशी जताई है। उन्होंने फैसला का स्वागत करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्तक्षेप करने पर भारत और पाकिस्तान के बीच तत्काल युद्ध विराम एक स्वागत योग्य कदम है। मुझे उम्मीद है कि दोनों देश इस क्षेत्र के लिए एक स्थायी शांति की दिशा में काम करेंगे। बता दें कि पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में घुसकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल से पंजाब औऱ जम्मू में हमले किए। लेकिन भारत ने हर मिसाइल को नाकाम कर दिया था। पाकिस्तान के किसी मंसूबे को कामयाब नहीं होने दिया। हालांकि, सीजफायर के बाद भी भारत पूरी तरह से सक्रिय है। वहीं, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने यह जानकारी दी है। दोनों देशों के DGMO (Director General Of Military Operations) वार्ता के बाद ‘युद्ध विराम’ पर सहमति जताई गई। विक्रम मिसरी ने जानकारी दी कि दोनों देश के DGMO फिर 12 मई को बात करेंगे।

आसिम मुनीर का नेतृत्व जारी रहा, तो पाकिस्तान का विखंडन और गृहयुद्ध जैसे हालात हो जाएँगे : माइकल रुबिन

नई दिल्ली पहलगाम अटैक के बाद भारत-पाक के बीच बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान में सबसे बड़े खलनायक बन कर उभर रहे हैं. भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी लोग मान रहे हैं कि भारत-पाक के बीच युद्ध जैसी स्थिति के लिए मुनीर ही जिम्मेदार हैं. आज 1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान इतना कमजोर नजर आ रहा है तो उसके पीछे भी मुनीर को ही कारण बताया जा रहा है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख के रूप में उन्होंने कई ऐसे कार्य किए हैं जिनके कारण पाकिस्तान को आंतरिक और बाह्य चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. जनरल आसिम मुनीर ने अपनी भड़काऊ बयानबाजी, आतंकवाद को बढ़ावा देने, और गलत रणनीतिक फैसलों के जरिए पाकिस्तान को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है . पहलगाम हमले और उनके टू-नेशन थ्योरी को बढ़ावा देने के कारण भारत के साथ तनाव को चरम पर पहुंच गया है. जबकि बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, और पीओके में विद्रोह ने देश को अंदर से खोखला कर दिया है. माइकल रुबिन, एक पूर्व पेंटागन अधिकारी और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (AEI) के वरिष्ठ फेलो, ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की तीखी आलोचना की है. रुबिन ने मुनीर को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला और अल-कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के समकक्ष बताया है.  मुनीर की अलोकप्रियता, सेना के भीतर असंतोष, और जनता का गुस्सा दर्शाता है कि वह न केवल भारत के लिए, बल्कि पाकिस्तान के लिए भी खलनायक साबित हो रहे हैं. कहा जा रहा है कि मुनीर का नेतृत्व जारी रहा, तो पाकिस्तान का विखंडन और गृहयुद्ध जैसे हालात हो सकते हैं। 1. मुनीर के बयानों से आतंकवादियों को मिली हरी झंडी, पहलगाम हमला उसका परिणाम आसिम मुनीर पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले को प्रायोजित किया, जिसमें 26-27 हिंदू पर्यटकों की हत्या हुई. यह हमला उनके भारत-विरोधी जहरीले बयानों के ठीक बाद हुआ, जिसमें उन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत को बढ़ावा देते हुए कहा कि हिंदू और मुस्लिम पूरी तरह अलग हैं और कश्मीर पाकिस्तान की रगों का हिस्सा है. समझा जाता है कि उनका ये बयान आतंकवादियों के लिए इशारा था. माइकल रुबिन का कहना है कि मुनीर का बयान आतंकवादी समूहों के लिए हरी झंडी का काम किया. रुबिन ने कहा कि मुनीर के इन बयानों ने लश्कर-ए-तैयबा और उसकी प्रॉक्सी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे समूहों को पहलगाम हमले के लिए प्रेरित किया. भारत ने इस हमले के जवाब में पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. इससे दोनों देश युद्ध के कगार पर पहुंच गए. यदि तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है. सऊदी अरब और यूएई जैसे सहयोगी देशों ने पहलगाम हमले के लिए मुनीर की आलोचना की, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई. सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी नागरिकों ने चिंता जताई कि युद्ध के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था 100 साल पीछे चली जाएगी. क्योंकि देश पहले से ही IMF, सऊदी अरब, और यूएई से लिए गए कर्ज पर निर्भर है. 2. पाकिस्तान में उभरते लोकतंत्र के दमन कारण बने, इमरान खान और PTI को कुचलने में बड़ी भूमिका मुनीर पर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आरोप रहा है. खान 2023 से जेल में हैं, और उनके खिलाफ 200 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए. 2024 के आम चुनावों में कथित धांधली के जरिए PTI को सत्ता से दूर रखा गया. PTI नेताओं की गिरफ्तारी और सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाने का आदेश भी मुनीर से जुड़े हैं. इमरान खान की लोकप्रियता के बावजूद उनके दमन से पाकिस्तान में राजनीतिक अशांति बढ़ी है. PTI समर्थकों और अन्य विपक्षी दलों जैसे मौलाना फजलुर रहमान ने मुनीर के खिलाफ आंदोलन शुरू किए, जिससे #MunirOut जैसे ट्रेंड सोशल मीडिया पर वायरल हुए. पाकिस्तान में मुनीर की नीतियों को अघोषित मार्शल लॉ के रूप में देखा जा रहा है. खान के समर्थकों और मुनीर के बीच बढ़ता तनाव सेना को कमजोर कर सकता है. 3. पूर्व सेना प्रमुखों के मुकाबले मुनीर कितने कुशल जनरल सैयद आसिम मुनीर, जो नवंबर 2022 से पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं, को उनके भड़काऊ बयानों, धार्मिक कट्टरता, और पहलगाम हमले में कथित भूमिका के कारण खलनायक माना जा रहा है. उनकी तुलना पूर्व सेना प्रमुखों जैसे परवेज मुशर्रफ, कमर जावेद बाजवा, राहील शरीफ, और अशफाक परवेज कयानी से करने पर उनकी नीतियों, नेतृत्व शैली, और पाकिस्तान पर प्रभाव में स्पष्टतया कमतर नजर आते हैं. बाजवा ने 2019 के पुलवामा हमले के बाद संयम बरता और भारतीय पायलट अभिनंदन वर्धमान को लौटाकर युद्ध टाला. बाजवा का जोर क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीति पर था. परवेज मुशर्रफ ने करगिल युद्ध (1999) और संसद हमले (2001) के जरिए भारत के साथ तनाव बढ़ाया, लेकिन उनकी छवि उदारवादी थी. वे मुनीर की तरह इस्लामी कट्टरता और जिहादी बयानबाजी पर निर्भर नहीं थे. मुनीर का धार्मिक ज्ञान, ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस का अनुभव, और आंतरिक दमन की नीति उन्हें अपने पूर्ववर्तियों से अधिक खतरनाक बनाती हैं. मुनीर की रणनीति मुशर्रफ और कयानी की तरह आतंकवाद पर निर्भर है, लेकिन उनकी खुली धार्मिक बयानबाजी जैसे हिंदू और मुस्लिम अलग हैं और परमाणु धमकियां उन्हें अधिक आक्रामक बनाती हैं. उनकी परमाणु धमकियों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2025 में चर्चा की जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि खराब हुई है. मुशर्रफ और बाजवा ने अमेरिका और चीन के साथ संतुलन बनाया, लेकिन मुनीर ने CPEC हमलों (जैसे कराची में चीनी नागरिकों की हत्या, 2024) के कारण चीन को नाराज किया. FATF में ग्रे लिस्ट का खतरा उनकी कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है. 4. बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्तिस्तान में असंतोष की जड़ मुनीर ने बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलनों को कुचलने के लिए सैन्य कार्रवाई तेज की और क्षेत्र को पाकिस्तान के माथे का झूमर बताया. हालांकि, उनकी धमकियों, जैसे आतंकवादियों की 10 पीढ़ियां भी बलूचिस्तान को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं ने स्थानीय नेताओं को भड़काया. बलूच नेता सरदार अख्तर मेंगल ने 1971 की बांग्लादेश हार की याद दिलाते हुए सेना को चेतावनी दी. गिलगित-बाल्तिस्तान में … Read more

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