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बर्फ से ढकी चोटियों की 200 मील लंबी शृंखला का नजारा, उत्‍तराखंड का यह हिल स्‍टेशन कुदरत का अनूठा उपहार

देहरादून देवभूमि उत्तराखंड के पौड़ी से आप हिमाच्छादित शिखरों की लगभग 200 मील लंबी शृंखला को सहजता से निहार सकते हैं। समुद्रतल से 5,500 से 8,000 फीट तक की ऊंचाई पर स्थित पौड़ी नगर एक खूबसूरत हिल स्टेशन होने के साथ गढ़वाल जिला व गढ़वाल मंडल का मुख्यालय भी है। देवदार, रोडोडेंड्रोन व ओक के घने जंगल के बीच रिज (कंडोलिया पहाड़ी) की उत्तरी ढलान पर स्थित इस नगर से नंदा देवी, नीलकंठ, कैलास, बंदरपूंछ, भागीरथी, गंगोत्री ग्रुप, जौली, यमुनोत्री, केदारनाथ, भृगुपंथ, खरचा, सुमेरु, कुमलिंग, हाथी पर्वत, नंदा घुंटी, चौखंभा, त्रिशूल आदि हिमशिखरों का मनमोहक नजारा देखते ही बनता है। ट्रेकर, पैराग्लाइडिंग के शौकीन और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी पौड़ी कुदरत का अनुपम उपहार है। औपनिवेशिक काल से पर्यटन से जुड़ाव पौड़ी का पर्यटन से जुड़ाव औपनिवेशिक काल से रहा है। तब गर्मियों में अंग्रेज यहां आराम करने आया करते थे। आजादी के बाद न केवल घरेलू आगंतुकों, बल्कि हिमालय की गोद में रहस्यमय अनुभव तलाशने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच भी यह नगर लोकप्रिय होता चला लगा। यह नगर इतिहास, संस्कृति और प्रकृति को जोड़ता है। इतिहास के पन्ने पलटें तो वर्ष 1804 में पूरे गढ़वाल पर गोरखाओं का नियंत्रण हो गया था। उन्होंने यहां 12 वर्ष राज किया। गोरखों के शासन का अंत वर्ष 1815 में तब हुआ, जब अंग्रेजों ने उन्हें पश्चिम में काली नदी तक खदेड़ दिया। गोरखाओं की हार के बाद 21 अप्रैल 1815 को अंग्रेजों ने गढ़वाल राज्य का आधा हिस्सा, जो अलकनंदा और मंदाकिनी नदी के पूर्व में स्थित है, अपने नियंत्रण में ले लिया। इसे ब्रिटिश गढ़वाल कहा गया। पश्चिम में गढ़वाल का शेष भाग, जो राजा सुदर्शन शाह के पास रहा, वह टिहरी रियासत कहलाया। प्रमुख पर्यटन व तीर्थ स्थल     रांसी स्टेडियम: देवदार और बांज के जंगल के बीच समुद्रतल से 7,000 फीट की ऊंचाई पर नगर के केंद्र से 2.5 किमी की दूरी पर स्थित है रांसी स्टेडियम। इसे एशिया के दूसरे सबसे ऊंचे स्टेडियम का दर्जा हासिल है।     कंडोलिया देवता मंदिर: ओक और पाइन के घने जंगल के बीच शांत वातावरण में 5,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित कंडोलिया देवता का मंदिर नगर के केंद्र से महज दो किमी के फासले पर है।     नागदेव मंदिर: यह मंदिर पौड़ी-बुबाखाल रोड पर नगर के केंद्र से पांच किमी दूर देवदार और रोडोडेंड्रोन के घने जंगल के बीच स्थित है। मंदिर के रास्ते में एक वेधशाला स्थापित की गई है।     चौखंभा व्यू प्वाइंट: नगर के केंद्र से चार किमी की दूरी पर स्थित इस स्थल से मंत्रमुग्ध कर देने वाले ग्लेशियर देखे जा सकते हैं। रोडोडेंड्रोन और ओक के जंगल का घना आवरण इस जगह का मुख्य आकर्षण है।     कंकालेश्वर (क्यूंकालेश्वर) महादेव मंदिर: नगर के केंद्र से दो किमी दूर 6,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर आठवीं सदी का बताया जाता है।     गगवाड़स्यूं घाटी: कंडोलिया की पहाड़ी से सटी गगवाड़ास्यूं घाटी करीब तीन वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैली हुई है। 12 वर्ष के अंतराल में लगने वाला मौरी मेला इस घाटी को विशिष्टता प्रदान करता है।     झंडीधार: यह इस नगर का सर्वोच्च शिखर है जोकि समुद्रतल से लगभग 8,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कब आएं?     आप पौड़ी में बर्फ से लदी पहाड़ियां देखना चाहते हैं तो सर्दियों में आएं और हरियाली देखने के इच्छुक हैं तो गर्मियों का समय अच्छा रहेगा।     वैसे मार्च से नवंबर तक पौड़ी में खुशनुमा मौसम रहता है, जबकि शीतकाल में जोरदार ठंड पड़ती है।     खाने-ठहरने की यहां कोई दिक्कत नहीं है।     छोटे-बड़े होटल, लाज व होम स्टे बजट के हिसाब से उपलब्ध हैं। ऐसे पहुंचें     जौलीग्रांट स्थित देहरादून एयरपोर्ट पौड़ी से 155 किमी की दूरी पर है।     कोटद्वार निकटतम रेलवे स्टेशन है, जहां से पौड़ी की दूरी 105 किमी है।     ऋषिकेश से भी सीधे पौड़ी पहुंचा जा सकता है।  

लीलाबेन के पति के भी हाथ में गोली लगी, बताया आतंकी ने 20 साल के स्मित की छाती में मार दी गोली, दर्दनाक दास्तां

भावनगर कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में जान बचाकर भागे लोगों की दास्तां सुनकर रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। हमले से बच निकलीं गुजरात के भावनगर की लीलाबेन ने बताया कि जब वह भाग रही थीं तब देखा कि एक आतंकवादी ने स्मित की छाती में गोली मार दी। वह दृश्य असहनीय था। इस आतंकी हमले में लीलाबेन के पति के भी हाथ में गोली लगी है। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में घायल हुए गुजरात के भावनगर निवासी विनुभाई डाभी और उनकी पत्नी लीलाबेन ने इस वीभत्स हमले के उस दर्दनाक क्षण को शुक्रवार को याद किया। उन्होंने 20 साल के एक युवक को आतंकवादियों की गोलियों का शिकार होते हुए काफी नजदीक से देखा था। विनुभाई डाभी और उनकी पत्नी उन 20 लोगों में शामिल थे, जो 16 अप्रैल को श्रीनगर में प्रवचनकर्ता मोरारी बापू का प्रवचन सुनने के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे। डाभी ने बृहस्पतिवार रात को भावनगर पहुंचने के बाद अपने आवास पर मौजूद पत्रकारों से कहा, ‘‘जब हमें गोलीबारी के बारे में पता चला तो सभी अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। मैं अपनी पत्नी से अलग हो गया था। जो लोग पीछे रह गए, आतंकवादियों ने उन्हें मार डाला। जब मैं भाग रहा था तो एक गोली मेरे दाहिने हाथ में लगी, जबकि दूसरी मेरे बाएं कंधे को छूती हुई निकल गई।’’ उन्होंने बताया, ‘‘जब मैं आखिरकार अपनी पत्नी से मिला तो वह मेरी खून से सनी शर्ट और गोली के घाव को देखकर तीन बार बेहोश होकर गिर पड़ी थी। हम किसी तरह बचकर पहाड़ी की तलहटी पर पहुंचे, जहां सेना के जवान मुझे अस्पताल ले गए। मैं तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा था।’’ विनुभाई डाभी की पत्नी लीलाबेन ने नम आंखों से बताया कि इस हमले के दौरान वह अपने पति से अलग हो गई थीं। उन्होंने देखा कि एक आतंकवादी ने किस तरह से 20 साल के स्मित परमार की गोली मारकर हत्या कर दी। लीलाबेन ने कहा, ‘‘जब मैं भाग रही थी तब मैंने देखा कि एक आतंकवादी ने स्मित की छाती में गोली मार दी। वह बेचारा तुरंत जमीन पर गिर पड़ा। वह दृश्य असहनीय था। मुझे बाद में पता चला कि उसके पिता की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पहलगाम की ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कही जाने वाली बैसरन घाटी पर मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में 20 साल के स्मित और उनके पिता यश परमार सहित 26 लोगों की जान चली गई। दोनों बाप-बेटे उन 20 लोगों के समूह में शामिल थे, जो भावनगर से श्रीनगर गए थे। लीलाबेन ने बताया कि जब उन्होंने अपने पति के हाथ पर खून देखा तो वह भगवान शिव की प्रार्थना करने लगीं। उन्होंने बताया कि जवानों ने इस हमले में किसी तरह बचे लोगों को अस्पताल में भर्ती कराने में मदद की और उनके रहने की व्यवस्था भी की।

भारत ने INS सूरत के बाद किया हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण

नई दिल्ली भारत ने लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। स्क्रैमजेट इंजन के एक्टिव कूल्ड कम्बस्‍टर का जमीन पर 1000 सेकंड तक सफल परीक्षण किया है। हाइपरसोनिक मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा तेजी से उड़ती हैं। यानी ये मिसाइलें Mach 5 से भी तेज होती हैं। राक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) ने हाइपरसोनिक हथियार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। दुनिया की बड़ी ताकतें इन मिसाइलों को बनाने में जुटी हैं क्योंकि ये मौजूदा मिसाइल और हवाई सुरक्षा प्रणालियों को चकमा दे सकती हैं। मिसाइल की खासियत है कि इसकी तेज रफ्तार, बेहतरीन कंट्रोल और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता। इससे पहले गुरुवार को भारतीय नौसेना ने अपने बनाए स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस सूरत ने समुद्र में तेजी से उड़ाने वाले टारगेट पर सटीक हमला किया है। स्वदेशी निर्देशित मिसाइल Destroyer ने समुद्र में टारगेट को हिट किया। इस उपलब्धि से नौसेना और भी ज्यादा ताकतवर हो चुकी है। यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के विजन को दिखाता है। भारत ने किया INS सूरत से सफल परीक्षण बता दें कि पाकिस्तान भी इसी इलाके में मिसाइल टेस्टिंग करने जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने नोटिफिकेशन जारी किया था। पाकिस्तान ने अरब सागर क्षेत्र में मिसाइल परीक्षण करने का एलान किया है।

साबिर हुसैन नाम के इस शख्स ने इस्लाम धर्म को त्यागने का फैसला किया, बंगाल के एक स्कूल टीचर ने बड़ा कदम उठाया है

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले को देश कभी नहीं भुला पाएगा। आतंकियों ने बैसरन की खूबसूरत पहाड़ियों का लुत्फ उठा रहे बेकसूर लोगों पर बेरहमी से गोलियां चला दीं। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जिनमें से अधिकतर सैलानी थे। वहीं कई लोग घायल भी हुए हैं। जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने लोगों को मारने से पहले यह भी सुनिश्चित किया कि वे किस धर्म के हैं। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा फूट पड़ा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल के एक स्कूल टीचर ने बड़ा कदम उठाया है। साबिर हुसैन नाम के इस शख्स ने इस्लाम धर्म को त्यागने का फैसला किया है। पहलगाम आतंकी हमले से आहत बदुरिया के साबिर हुसैन ने इस्लाम छोड़ने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। न्यूज 18 से बात करते हुए साबिर हुसैन ने कहा है कि हिंसा फैलाने के लिए बार-बार धर्म का इस्तेमाल किया जाता है जो सही नहीं है। उन्होंने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा, “मैं किसी धर्म का अनादर नहीं कर रहा हूं। यह मेरा निजी फैसला है। मैंने देखा है कि किस तरह हिंसा फैलाने के लिए एक हथियार के रूप में धर्म का इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीर में ऐसा कई बार हुआ है। मैं अब इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता।” उन्होंने आगे कहा, “मैं सिर्फ एक इंसान के रूप में जाना जाना चाहता हूं, किसी धार्मिक पहचान की वजह से नहीं। इसलिए मैं कोर्ट में आवेदन करने आया हूं।” साबिर ने आगे कहा, “पहलगाम जैसी हिंसक घटनाओं में महजब का गलत इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, “किसी को उसके धर्म की वजह से मारना कैसे ठीक है? ये मुझे बहुत आहत करता है।” मौजूदा माहौल पर टिप्पणी करते हुए हुसैन ने कहा कि वह ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहते हैं जहां सब कुछ मजहब के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। उन्होंने कहा, “आजकल सब कुछ धर्म के इर्द-गिर्द घूमता हुआ लगता है। मैं ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहता।” साबिर हुसैन के मुताबिक उन्होंने यह फैसला स्वतंत्र रूप से लिया है और कहा है कि उनकी पत्नी और उनके बच्चे जो भी रास्ता चुने वह उन्हें पूरी आजादी देंगे।

वक्फ कानून पर नहीं लगा सकते पूरी तरह रोक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि इस कानून पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है। 1,332 पन्नों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में सरकार ने विवादास्पद कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536) से अधिक की वृद्धि हुई है। हलफनामे में कहा गया है, “मुगल काल से ठीक पहले, आजादी से पहले और आजादी के बाद के दौर में भारत में कुल 18,29,163.896 एकड़ जमीन वक्फ की थी।” इसमें निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण करने के लिए पहले के प्रावधानों के “दुरुपयोग” का दावा किया गया है। हलफनामा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव शेरशा सी शेख मोहिद्दीन द्वारा दायर किया गया था। इसमें आगे कहा गया, “कानून में यह तय स्थिति है कि संवैधानिक अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगाएंगी और मामले पर अंतिम रूप से निर्णय लेंगी। संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।” केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि वक्फ जैसी धार्मिक व्यवस्था का प्रबंधन किया जाए और उसमें जताया गया भरोसा कायम रहे। वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा, ”जब वैधता की परिकल्पना की जाती है तो प्रतिकूल परिणामों के बारे में जाने बिना ही पूरी तरह रोक लगाना अनुचित है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वैध, विधायी शक्ति का उचित प्रयोग है। केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विधायी क्षमता और अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकता है।

पाकिस्तानी प्रोफेसर ने लताड़ा पाक सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को जमकर लताड़ा, यही है हमले का जिम्मेदार

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तानी मूल के प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने अपनी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जनरल आसिम मुनीर ने हिंदू और मुस्लिम को अलग बताया और फिर एक सप्ताह के अंदर ही आतंकियों ने ऐसा हमला कर दिया। हिंदू और मुसलमानों के अलग होने वाले बयान के मद्देनजर यह ध्यान देना जरूरी है कि आतंकियों ने लोगों को मारने से पहले चेक किया कि वे हिंदू या मुसलमान हैं। ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि आखिर आसिम मुनीर के बयान के बाद ही ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर को इस तरह का बयान नहीं देना था। इस बीच उन्होंने भारत की ओर से सिंधु जल समझौता रोके जाने पर भी बात की। इश्तियाक अहमद ने कहा कि मेरे एक दोस्त लियाकत अली ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक लेख लिखा था। उन्होंने बताया था कि 1960 में समझौते से पहले नदियों के पानी को लेकर खूब विवाद हुआ था। प्रोफेसर ने कहा कि जब विभाजन हुआ तो बड़े पैमाने पर तैयार नहरें और नदियां भारत के हिस्से में चली गईं। इससे पाकिस्तान की स्थिति खराब थी। भारत के पक्ष में कई ताकतें थीं और उसका पॉइंट भी सही माना गया, फिर भी भारत ने सिंधु जल समझौते को मंजूरी दी थी। उन्होंने इसे भारत का बड़प्पन करार दिया। प्रोफेसर अहमद ने कहा कि तीन से 4 जंगों के बाद भी इस समझौते को किसी ने नहीं छेड़ा था। नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीतने के बाद पाकिस्तान का दौरा किया था, लेकिन फिर पठानकोट हमला हुआ। ऐसे में भारत सरकार ने तय कर लिया कि हम पाकिस्तान को बख्शेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि समझौते के अनुसार 5 पंजाब की नदियां और एक मुख्य सिंधु नदी है। चिनाब, रावी और झेलम नदियां कश्मीर से होते हुए आते हैं। फिर भी भारत ने किसी भी तरह इन नदियों के प्रवाह को नहीं रोका। इस संधि को वर्ल्ड बैंक ने कराया था। अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसमें शामिल हैं। इनके कई प्रोजेक्ट्स हैं। भारत में जब हमले हुए हैं तो सवाल उठे हैं कि आखिर हम क्यों इस समझौते को बनाए रखे हैं। फिर भी उन्होंने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने जिस तरह का बयान दिया है, उसके चलते ही ऐसी स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अब हम फंस गए हैं। यदि सिंधु जल समझौते पर भारत ने ऐक्शन लिया तो नुकसान हमारा ही होगा। टू नेशन थ्योरी पर भी उठाया सवाल, बोले- 1947 से पहले तो नहीं बंटा देश उन्होंने कहा कि मैं तो कहूंगा कि पाकिस्तान पहले खुद अपने अंदर के हालात सुधारे। सिंध में आंदोलन चल रहा है और उनका कहना है कि पंजाब में सिंधु नदी का जल रोका जा रहा है। नहरें बनाई जा रही हैं और हमारा पानी चोरी हो रहा है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने कश्मीर को लेकर बयान दिया, लेकिन सोचना चाहिए कि 4 जंगों में वे कुछ नहीं कर पाए। उलटे अपना मुल्क और तुड़वा बैठे। इसलिए अच्छी बात यही है कि ऐसे बयान न दिए जाएं। उन्होंने पाक सेना चीफ आसिम मुनीर के द्विराष्ट्र सिद्धांत की भी तीखी आलोचना की। प्रोफेसर ने कहा कि 1947 में भारत का विभाजन होना ही गलत था। आज भारत में उतने ही मुसलमान हैं, जितनी पाकिस्तान की आबादी है। आखिर इससे किसका फायदा हुआ? उन्होंने कहा कि 1947 से पहले किसी का भी शासन हुआ, लेकिन सांप्रदायिक आधार पर कोई विभाजन नहीं हुआ था।

पहलगाम आतंकी हमला: ताशकंद समझौता रद्द कर अपनी ही कब्र खोदेगा पाक, क्या है हाजी पीर दर्रा

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से रिश्ते तल्ख हो गए हैं। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त ऐक्शन लेते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है और बॉर्डर सील करने समेत कई अन्य कदम उठाए हैं। इससे पड़ोसी देश बौखला उठा है। पाकिस्तान ने शिमला समझौता निलंबित करने का फैसला किया है और ताशकंद समझौते को भी रद्द करने की सोच रहा है। ताशकंद समझौता 10 जनवरी, 1966 को उज्बेकिस्तान में हुआ था। 1965 की जंग के बाद सोवियत संघ की मौजूदगी में यह समझौता हुआ था, जिसमें भारत की तरफ से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान की तरफ से तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। इसी समझौते के तहत भारत ने हाजी पीर दर्रा पर से अपना कब्जा हटा लिया था और 5 अगस्त 1965 से पहले की यथास्थिति बहाल करने पर तैयार हो गया था। इसे 60 साल पहले भारत की एक बड़ी चूक कहा जाता है। अब जब फिर से पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान की नकेल कसना चाह रहा है तो हाजी पीर दर्रा की बात अनायास सामने आ जा रही है क्योंकि यह वही दर्रा है, जहां से पाकिस्तान भारत में अपनी आतंकियों की सप्लाई करता है। अगर 60 साल पहले भारत ने वह चूक नहीं की होती, तो आज कश्मीर में पाकिस्तान आतंक न फैला रहा होता। क्या है हाजी पीर दर्रा? हाजी पीर दर्रा हिमालय पर्वतमाला की पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है। यह जम्मू-कश्मीर स्थित पूंछ को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट से जोड़ता है। 2,637 मीटर यानी 8,652 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित यह रणनीतिक दर्रा न केवल पूरे पाक अधिकृत कश्मीर घाटी पर नजर रखता है बल्कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ का मुख्य मार्ग भी यही है। अगर भारत ने 60 साल पहले इस दर्रे को पाकिस्तान को नहीं सौंपा होता तो पाक आतंकियों की कश्मीर में सप्लाई रोक सकता था और इस्लामाबाद की नकेल भी कस सकता था। इसके अलावा इस दर्रे पर भारत का कब्जा होने से पूंछ और उरी के बीच की दूरी भी 282 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 56 किलोमीटर रह जाती। देश का बंटवारा होने से पहले जम्मू घाटी और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इसी दर्रे से होकर गुजरती थी लेकिन 1948 में पाकिस्तान द्वारा PoK और हाजी पीर दर्रे पर कब्जा कर लेने के बाद से यह रास्ता अनुपयोगी हो गया है। पूरी रात बारिश के बीच की थी चढ़ाई 1965 के भारत-पाक जंग में भारतीय सेना ने हाजी पीर दर्रे के पास स्थित तीन ऊंची पहाड़ियों पूर्व में बेदोरी (3760 मीटर), पश्चिम में सांक (2895 मीटर) और दक्षिण-पश्चिम में लेडवाली गली (3140 मीटर) पर कब्जा कर लिया था, जो इस दर्रे से मात्र 10 से 14 किसोमीटर की दूरी पर था। 27 अगस्त 1965 को मेजर रणजीत सिंह दयाल ने पूरी रात बारिश होने के बावजूद भारी बाधाओं को पार करते हुए तीव्र पहाड़ी पर चढ़ाई की थी और 28 अगस्त, 1965 को इस रणनीतिक दर्रे पर कब्जा कर लिया था। 29 अगस्त को पाकिस्तानी सेना ने फिर से इसे अपने कब्जे में करने की कोशिश की लेकिन भारतीय जवानों ने पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया था। 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग लौटाना पड़ेगा हालांकि, जब 10 जनवरी 1966 को ताशकंद में भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ तो भारत ने हाजी पीर दर्के पर से अपना कब्जा छोड़ दिया और समझौते के मुताबिक 5 अगस्त, 1965 की यथास्थिति पर लौट गया। इस तरह एक बार फिर इस रणनीतिक दर्रे पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया। भारत ने उस जंग में पाकिस्तान के 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग पर भी कब्जा कर लिया था। इसके तहत सियालकोट, लाहौर और कश्मीर घाटी के उपजाऊ क्षेत्र और हाजी पीर दर्रा शामिल था लेकिन सब कुछ लौटाना पड़ गया। अगर पाकिस्तान ने ताशकंद समझौता तोड़ा तो एक बार फिर इस पर भारत का कब्जा हो जाएगा।

केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन एक्ट पर जवाबी हलफनामा दाखिल किया, धार्मिक अधिकार में कोई हस्तक्षेप नहीं…

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने वक्फ संशोधन एक्ट पर जवाबी हलफनामा दाखिल किया है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में सरकार ने कानून का बचाव करते हुए यानी इसे सही ठहराते हुए कहा है कि पिछले 100 साल से वक्फ बाई यूजर को केवल पंजीकरण के आधार पर मान्यता दी जाती है ना कि मौखिक रूप से. केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा कि वक्फ मुसलमानों की कोई धार्मिक संस्था नहीं बल्कि वैधानिक निकाय है. वक्फ संशोधन कानून के मुताबिक मुतवल्ली का काम धर्मनिरपेक्ष होता है न कि धार्मिक. ये कानून चुने गए जनप्रतिनिधियों की भावनाओं को दर्शाता है. उन्होंने ही बहुमत से इसे पारित किया है. केंद्र सरकार ने कोर्ट में वक्फ को लेकर जो हलफनामा दाखिल किया है, उसमें कहा गया है कि संसद द्वारा पारित कानून को संवैधानिक रूप से वैध माना जाता है, विशेष रूप से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की सिफारिशों और संसद में व्यापक बहस के बाद बना हुए कानून को. केंद्र ने कोर्ट से अनुरोध किया कि वह अभी किसी भी प्रावधान पर अंतरिम रोक नहीं लगाए. इस संशोधन कानून से किसी भी व्यक्ति के वक्फ बनाने के धार्मिक अधिकार में कोई हस्तक्षेप नहीं होता. केवल प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस कानून में बदलाव किया गया है. बता दें कि इस बिल को पारित करने से पहले संयुक्त संसदीय समिति की 36 बैठकें हुई थीं और 97 लाख से ज्यादा हितधारकों ने सुझाव और ज्ञापन दिए थे. समिति ने देश के दस बड़े शहरों का दौरा कर जनता के बीच जाकर उनसे उनके विचार जाने थे.  

पाकिस्तानी संसद ने भारत के खिलाफ सर्वसम्मति से घातक हमले को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया

इस्लामाबाद जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आने से पड़ोसी देश तिलमिला गया है। संसद में पाकिस्तान भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहा है। शुक्रवार को पाकिस्तानी संसद ने भारत के खिलाफ सर्वसम्मति से घातक हमले को पाकिस्तान से जोड़ने को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। उसने कहा कि पाकिस्तान अपनी रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। पहलगाम हमले में आतंकियों ने 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ भारी गुस्सा है। पाकिस्तानी डिप्टी पीएम इशाक डार ने संसद में प्रस्ताव पेश किया, जिसमें कहा गया कि पाकिस्तान जल आतंकवाद या सैन्य उकसावे सहित किसी भी आक्रमण के खिलाफ अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है। प्रस्ताव के अनुसार, संसद ने इस बात पर जोर दिया कि निर्दोष नागरिकों की हत्या पाकिस्तान के अपनाए गए मूल्यों के विपरीत है। कहा गया, ”यह प्रस्ताव जम्मू और कश्मीर में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम हमले से पाकिस्तान को जोड़ने के सभी तुच्छ और निराधार प्रयासों को भी खारिज करता है।” प्रस्ताव में पाकिस्तान ने भारत पर उसे बदनाम करने का आरोप लगाया। संसद ने कहा, ”पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए भारत सरकार द्वारा सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण अभियान की निंदा की जाती है, जो संकीर्ण राजनीतिक लक्ष्य के लिए आतंकवाद के मुद्दे का शोषण करने के परिचित पैटर्न पर चल रहा है।” साथ ही, पाकिस्तान ने भारत की सिंधु जल संधि पर रोक लगाने के फैसले की भी निंदा की और फिर से दोहराया कि यह साफ तरीके से युद्ध की कार्रवाई के बराबर है। नई दिल्ली ने हमले के बाद बुधवार को पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। भारत ने कार्रवाई करते हुए 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। इसके अलावा, पाक से लगने वाली अटारी बॉर्डर को भी बंद कर दिया और राजनयिक संबंधों को भी कम कर दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा को भी रद्द करने का फैसला लिया गया है। इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी अहम बैठक की और भारतीय विमानों के लिए एयरस्पेस को बंद करने समेत कई फैसले लिए।

सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन की शुरुआत कर दी, पहलगाम में हमला करने वाले 4 आतंकियों को देखा है, महिला के दावे से हड़कंप

जम्मू जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में शामिल आतंकियों के लिए तेजी से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच, कठुआ जिले में एक महिला ने दावा किया कि उन्होंने हमले में शामिल आतंकियों को देखा है, जिससे हड़कंप मच गया। इसके बाद कठुआ में बड़े स्तर पर सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन की शुरुआत कर दी है। ‘इंडिया टुडे’ के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस का विशेष अभियान समूह मौके पर पहुंच गया है और तलाशी अभियान चला रहा है। कठुआ के अलावा, पुलवामा और बारामूला में भी आतंकियों को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने गोलीबारी करते हुए 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इसमें कई लोग घायल भी हुए थे। इसके बाद आतंकी घटनास्थल से भागने में कामयाब रहे थे। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सेना आतंकियों को ढूंढने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले में शामिल प्रत्येक अपराधी की तलाश की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमलावरों को इस कायरतापूर्ण कृत्य की भारी कीमत चुकानी होगी। उपराज्यपाल ने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी समेत शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक की। लगभग एक घंटे तक चली बैठक में उपराज्यपाल ने सेना प्रमुख से न केवल पहलगाम आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा, बल्कि आतंकवाद के बुनियादी ढांचे और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को कुचलने के प्रयासों को भी तेज करने को कहा। बैठक के दौरान सिन्हा ने कहा कि देश को सेना, पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शौर्य और वीरता पर पूरा भरोसा है और इन सभी एजेंसियों को मिलकर पहलगाम आतंकवादी हमले के गुनहगारों और मददगारों की पहचान कर, उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में सतत कार्रवाई करनी चाहिए। सेना प्रमुख शुक्रवार को घाटी पहुंचे थे, जहां उन्होंने पहलगाम हमले के बाद की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि सेना प्रमुख जम्मू-कश्मीर की समग्र सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेंगे और शीर्ष सैन्य अधिकारी उन्हें हमले के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे।

कोई भी इंटेलिजेंस इनपुट या सुरक्षा जानकारी पुख्ता तौर पर सही नहीं होती है, पहलगाम आतंकी हमला एक चूक: पूर्व रॉ चीफ

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को पूर्व रॉ चीफ ए एस दुलत ने स्पष्ट तौर पर बड़ी चूक करार दिया है लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि कोई भी इंटेलिजेंस इनपुट या सुरक्षा जानकारी पुख्ता तौर पर सही नहीं होती है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता तो इंदिरा गांधी की हत्या नहीं होती और न ही अमेरिका में 9/11 जैसी वीभत्स घटना होती। उन्होंने कहा कि सबसे मजबूत खुफिया एजेंसी मोसाद के रहते हुए भी इजरायल में 7 अक्टूबर जैसी घटना नहीं होती और अचानक हमले में इतनी जानें नहीं जाती। बता दें कि पहलगाम में हुए आतंकी घटना पर कुछ मीडिया संस्थानों ने उंगली उठाई है और इसे खुफिया विफलता और सुरक्षा चूक बताया है। इस हमले में एक नेपाली नागरिक समेत कुल 26 लोगों की मौत हो गई। इनमें अधिकांश पर्यटक थे, जो वहां घूमने गए थे। भारत सरकार ने इस घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं। इसमें सबसे प्रमुख सिंधु जल समझौता स्थगित करना है। इससे पाकिस्तान बौखला उठा है। पहलगाम की घटना अजीब दुलत ने कहा कि फिर भी यह घटना अजीब है क्योंकि ऐसा कैसे संभव हुआ कि जहां हजारों सैलानी जा रहे हों, कई वीवीाईपी जा रहे हों, वहां सुरक्षा व्यवस्था एकदम नहीं थी, जबकि यह राज्य पहले से आतंकियों के निशाने पर है और आतंकी गतिविधियों के केंद्र में रहा है। उन्होंने कहा कि यह घटना ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व है क्योंकि 2017 को छोड़कर कभी भी आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा को प्रभावित नहीं किया। उन्होंने कहा कि गौर करने वाली बात यह है कि जहां ये आतंकी घटना घटी, वह अमरनाथ यात्रा मार्ग से बहुत दूर नहीं है। कश्मीर के इतिहास में एक मोड़ उन्होंने माना कि कश्मीर के इतिहास में एक बड़ा अपवाद चित्तीसिंहपुरा नरसंहार रहा है, जहां आतंकियों ने 20 मार्च 2000 की शाम को 35 सिखों को खड़े कर गोली मार दी थी। यह घटना तब घटी थी, जब कुछ घंटे बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आने वाले थे। दुलत ने कहा कि वह घटना अशांत कश्मीर के इतिहास में एक मोड़ था। इस बार भी यह घटना ऐसे वक्त में हुई है, जब अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेन्स भारत के चार दिवसीय दौरे पर थे। पाकिस्तानी सेना प्रमुख का भाषण ही जड़ जब उनसे पूछा गया कि क्या आतंकवादियों के रुख में आया यह बदलाव पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर द्वारा हाल ही में दिए गए दो राष्ट्र सिद्धांत और कश्मीर गले की नस है, जैसे मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उछाले जाने के बाद आया है, तो पूर्व रॉ चीफ ने कहा कि ऐसा ही लगता है क्योंकि इनसे पहले के पाक सेना प्रमुख कम आक्रामक थे। दुलत ने कहा कि जनरल मुनीर ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया है, जो किसी जिम्मेदार पद पर बैठे शख्स को नहीं बोलनी चाहिए थी। हर हाल में ढूंढ़ा जाना चाहिए हमलावर आतंकी दुलत ने कहा कि जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आतंकवादी चाहे जहां कहीं भी छिपे हों, उसे ढूंढकर सबक सिखाना ही चाहिए। पूर्व रॉ चीफ ने कहा कि अगर आतंकी भारत में छिपे हों तो या पाक चले गए हों, जिसकी संभावना ज्यादा दिखती है, तो भी हर हाल में उन्हें ढूंढ़ा जाना चाहिए और उसे नेस्तनाबूद किया जाना चाहिए। कश्मीर में आगे की राह क्या हो? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र को एक ही रास्ते पर होना चाहिए और फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री अब्दुल्ला, दोनों ही एक साथ तालमेल कर रहे हैं और एक ही सुर में हैं जो अच्छा संकेत हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में कश्मीरियों को अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए।

अमित शाह ने सभी मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे अपने-अपने राज्यों से पाकिस्तान के लोगों को जल्द से जल्द हटाएं

 नई दिल्ली   जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है. गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान से जुड़े सारे वीजा कैंसिल करने के निर्देश दिए हैं.इस संबंध में गृहमंत्री अमित शाह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात की है. अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वे अपने-अपने राज्यों से पाकिस्तान के लोगों को जल्द से जल्द हटाएं. गृहमंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद ये फैसला लिया राष्ट्रहित सर्वोपरि, अन्य हित इसके बाद- जगदीप धनखड़ पहलगाम आतंकी हमले पर सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा- मेरे पास प्रधानमंत्री के लिए कुछ सुझाव हैं। संसद का विशेष सत्र बुलाकर इस पर चर्चा की जानी चाहिए और सभी से सुझाव लिए जाने चाहिए। देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी तो आतंकवादी है, उसका कोई धर्म नहीं होता। देश की भावना को दुनिया के सामने रखने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए। हमें अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में सत्ताधारी और विपक्षी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए, ताकि हम उन्हें वैश्विक स्तर पर स्थिति के बारे में बता सकें। अगर हम यह कदम नहीं उठाएंगे तो हम कूटनीतिक दबाव नहीं बना पाएंगे। बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत सरकार लगातार एक्शन मोड में है. इस हमले के बाद भारत सरकार ने सबसे पहले भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था. भारत ने पाकिस्तान को औपचारिक पत्र लिखकर सिंधु जल संधि को निलंबित करने की सूचना दी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई सुरक्षा मामलों से जुड़ी कैबिनेट कमेटी की बैठक में कड़े फैसले लिए गए थे, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला भी शामिल है. भारत-पाकिस्तान के बीच साल 1960 से सिंधु जल समझौता लागू है. सिंधु नदी को पाकिस्तान की लाइफ लाइन माना जाता है. करीब 21 करोड़ से ज्यादा की आबादी पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सिंधु और उसकी चार सहायक नदियों पर निर्भर रहती है. इसके अलावा अटारी बॉर्डर को बंद करने का भी फैसला लिया गया. भारत आए पाकिस्तानी नागरिकों को इस रास्ते से लौटने के लिए एक मई तक का वक्त दिया गया है. भारत में पाकिस्तानी हाईकमीशन में तैनात पाकिस्तानी डिफेंस एडवाइजर्स को देश छोड़ने के लिए एक हफ्ते का समय दिया. साथ ही दोनों हाई कमीशन में तैनात कर्मचारियों की संख्या 50 से घटाकर 30 कर दी थी. बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी जबकि 17 लोग घायल हुए थे.  है. आतंकी मुल्क’ को पत्र लिख मोदी सरकार ने बताया- रोक रहे सिंधु जल समझौता भारत ने CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक के बाद न केवल सिंधु जल समझौता को निलंबित कर दिया, बल्कि पाकिस्तानियों का वीजा भी रद्द कर दिया। साथ ही पाकिस्तान के रक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को दूतावास छोड़ने का आदेश दिया गया। अटारी-वाघा सीमा को भी बंद कर दिया गया है। अब भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवा निलंबित किए जाने के संबंध में नया बयान जारी किया है। इसमें बताया गया है कि ये फ़ैसला ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ पर आए लोगों पर लागू नहीं होता है। ये वो वीजा (LTV) हैं, जिन्हें उन पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों को दिया गया है जो प्रताड़ना के कारण भारत में आकर लंबे समय से रह रहे हैं। उन्हें देश नहीं छोड़ना होगा। बता दें कि पड़ोसी इस्लामी मुल्क़ों से प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए CAA (नागरिकता संशोधन क़ानून) के तहत भारत की नागरिकता दिए जाने की भी व्यवस्था है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ़ किया कि पाकिस्तानी हिन्दुओं का वीजा रद्द नहीं होगा। उधर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव देवश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि हम सिंधु जल समझौते को निलंबित करते हैं। पत्र में कहा गया है कि पहले से अभी के समय में बहुत बुनियादी बदलाव आ गए हैं, जिनमें डेमोग्राफी परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जल बँटवारे को लेकर पहले जो सोच थी उसमें अब परिवर्तन आया है। पत्र में स्पष्ट लिख दिया गया है कि किसी भी संधि को निभाने के लिए भरोसे और ईमानदारी की ज़रूरत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से पाकिस्तान ने सीमापार आतंकवाद को पोषित किया है, खासकर के जम्मू कश्मीर को निशाना बनाकर – उससे ये भरोसा टूटा है।

सिब्बल ने मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाने का किया आग्रह, पहलगाम में हमले की निंदा करने प्रस्ताव पारित किया जाये

नई दिल्ली राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद का विशेष सत्र बुलाकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करने और एक प्रस्ताव पारित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस सत्र में यह संदेश दिया जाना चाहिए कि देश एकजुट है और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगा। सिब्बल ने सरकार से यह भी अनुरोध किया कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों को विभिन्न महत्वपूर्ण देशों में भेजा जाए, ताकि पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डाला जा सके। विशेष सत्र बुलाने का आग्रह कपिल सिब्बल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह समय है कि प्रधानमंत्री संसद का विशेष सत्र बुलाएं और इस पर चर्चा कराएं। हम सभी को यह संदेश देना चाहिए कि देश एकजुट है और हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट खड़े हैं।” उन्होंने इस हमले को भारत की संप्रभुता पर हमला करार दिया और इसे लेकर संसद में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करने की आवश्यकता जताई। सिब्बल का कहना था कि यह समय है जब पूरी दुनिया को यह संदेश देना चाहिए कि भारतीय संसद और नागरिक एक साथ हैं और इस प्रकार के हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की जरूरत कपिल सिब्बल ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डालने के लिए प्रमुख देशों को भारत के साथ व्यापार न करने की चेतावनी देने की भी बात की। उन्होंने कहा, “भारत को पाकिस्तान के साथ व्यापार करने वाले सभी प्रमुख देशों को यह बताना चाहिए कि अगर वे पाकिस्तान के साथ व्यापार करते हैं तो हमारे साथ कारोबार नहीं करेंगे।” इस तरह से पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने की योजना का सुझाव उन्होंने प्रधानमंत्री से किया। हमलों का सिलसिला और पाकिस्तान का कृत्य सिब्बल ने 1972 से लेकर अब तक भारत पर हुए विभिन्न आतंकी हमलों का जिक्र किया, जिसमें संसद पर हमला (2001), कालूचक नरसंहार (2002), मुंबई में ट्रेन बम विस्फोट (2006), 2008 का मुंबई हमला, पठानकोट एयरबेस हमला (2016), उरी आतंकी हमला (2016) और पुलवामा आत्मघाती बम विस्फोट (2019) शामिल हैं। उन्होंने कहा, “यह सिलसिला लगातार चलता जा रहा है और पाकिस्तान ने हमेशा भारत को आतंकवाद के माध्यम से नुकसान पहुँचाया है।”   सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने का प्रस्ताव कपिल सिब्बल ने यह भी सुझाव दिया कि संसद में एक सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए, जिसमें यह संदेश दिया जाए कि भारत एकजुट है और आतंकवाद के खिलाफ कठोर कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के द्वारा दुनिया को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भारतीय सरकार और विपक्ष एक साथ खड़े हैं और इस प्रकार के कृत्यों को कभी सहन नहीं किया जाएगा। सांसदों के प्रतिनिधिमंडल भेजने का सुझाव कपिल सिब्बल ने कहा कि सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के सांसदों के प्रतिनिधिमंडलों को अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में भेजा जाना चाहिए, ताकि वहां पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव डाला जा सके। उन्होंने कहा, “भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में इस मुद्दे को उठाने की जरूरत है और हमारे सांसदों को इन देशों में जाकर पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक अभियान चलाना चाहिए।” समूहों के सहयोग से पाकिस्तान पर दबाव बनाने का आह्वान सिब्बल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग करने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि यह समय है कि सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आतंकवाद को कभी भी शरण नहीं मिले।  

भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी, 25 से 30 अप्रैल के बीच राज्य के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है

देहरादून गर्मी से झुलसते उत्तराखंडवासियों को जल्द ही राहत मिल सकती है, क्योंकि एक बार फिर पहाड़ों में मौसम करवट लेने को तैयार है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि 25 से 30 अप्रैल के बीच राज्य के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। जहां एक ओर मैदानों में तेज गर्मी और लू लोगों को बेहाल कर रही है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भी तपिश बढ़ने लगी है। इसका असर अब प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी दिखने लगा है, जिससे कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बन गई है।  कहां-कहां और कब होगी बारिश? जानिए जिलेवार अलर्ट  25 अप्रैल – उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में बारिश के आसार।  26 व 27 अप्रैल – इन तीन जिलों के साथ रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भी बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना।  28 अप्रैल – पूरे प्रदेश में मौसम के साफ रहने की उम्मीद। 29 अप्रैल – पिथौरागढ़, चम्पावत और नैनीताल में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 30 अप्रैल – मौसम विभाग ने पूरे उत्तराखंड में व्यापक बारिश की संभावना जताई है, खासकर चम्पावत और नैनीताल में तेज़ बौछारें पड़ सकती हैं।  गर्जना और बिजली गिरने की चेतावनी IMD ने 26 और 27 अप्रैल को गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है। लोगों से आग्रह किया गया है कि इस दौरान खुले स्थानों से बचें और सुरक्षित स्थानों में रहें।  गर्मी से बेहाल लोग और जल संकट की दस्तक राज्य के मैदानी जिलों में पारा लगातार चढ़ रहा है। एसी-कूलर ही अब राहत का सहारा बने हैं। उधर, पहाड़ों में तेज धूप के कारण झरने और प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है।  

पहलगाम आतंकी हमले पर झारखंड सरकार के मंत्री ने हिमाचल के CM से मांगा ‘इस्तीफा’, सोशल मीडिया पर Video Viral

हिमाचल झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा, पर्यटन और कला-संस्कृति मंत्री सुदिव्य सोनू एक अजीबोगरीब बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह पूरे आत्मविश्वास के साथ जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई घटना के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से इस्तीफा मांगते नजर आ रहे हैं। मंत्री सुदिव्य का यह बयान अब सोशल मीडिया पर मजाक का विषय बन गया है। वीडियो में सुदिव्य कहते हैं कि पहलगाम की घटना पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इस्तीफा देना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जिसमें उन्होंने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता दिखाई है। मेरा यह मानना है कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। यह बयान सुनकर हर कोई हैरान है, क्योंकि पहलगाम जम्मू-कश्मीर राज्य में स्थित है, न कि हिमाचल प्रदेश में। इसके बावजूद मंत्री ने यह बयान इतने विश्वास के साथ दिया कि देखने वालों को भ्रम होने लगा। सवाल यह उठ रहा है कि क्या मंत्री को वास्तव में यह जानकारी नहीं है कि पहलगाम जम्मू-कश्मीर में है, या उन्होंने यह बयान किसी व्यंग्य के तौर पर दिया है। हालांकि, मंत्री की ओर से अब तक इस बयान पर कोई सफाई नहीं दी गई है, जिससे भ्रम और भी गहरा गया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बयान को लेकर सुदिव्य सोनू की आलोचना शुरू कर दी है। कई यूजर्स ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि अगर उच्च शिक्षा मंत्री को भारत के राज्यों की भौगोलिक जानकारी नहीं है तो छात्रों का भविष्य किसके भरोसे है? गौरतलब है कि सुदिव्य सोनू झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) कोटे से झारखंड सरकार में मंत्री हैं और उनके पास उच्च शिक्षा, पर्यटन और कला संस्कृति जैसे अहम विभाग हैं। ऐसे में इस तरह की बयानबाजी को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से स्पष्टीकरण मांगा है। बहरहाल, यह पहला मौका नहीं है जब किसी मंत्री ने बिना तथ्यों की जांच किए विवादास्पद बयान दे दिया हो, लेकिन जब मामला उच्च शिक्षा से जुड़ा हो, तब ऐसी चूकें गंभीर चिंता का विषय बन जाती हैं। अब देखना यह होगा कि खुद मंत्री सुदिव्य या झारखंड सरकार इस पर क्या सफाई देती है।

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