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CM ममता ने संबोधित करते हुए कहा- अल्पसंख्यकों की और उनकी संपत्ति की रक्षा करेंगी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि राज्य में वक्फ (संशोधन) अधिनियम लागू नहीं किया जाएगा। कोलकाता में जैन समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि वह अल्पसंख्यकों की और उनकी संपत्ति की रक्षा करेंगी। मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, ‘मैं जानती हूं कि वक्फ अधिनियम के लागू होने से आप दुखी हैं। आप भरोसा रखें, बंगाल में ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे कोई बांटकर राज कर सके।’ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख बनर्जी ने लोगों से उन लोगों की बातों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जो उन्हें राजनीतिक आंदोलन शुरू करने के लिए उकसाते हैं। जाहिर तौर पर मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर मंगलवार को हुई हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश के सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति देखिए। वक्फ विधेयक को अभी पारित नहीं किया जाना चाहिए था। बंगाल में हमारे पास 33 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं, मैं उनके साथ क्या करूंगी?’ वक्फ (संशोधन) विधेयक तीन अप्रैल को लोकसभा द्वारा और उसके अगले दिन तड़के लंबी बहस के बाद राज्यसभा द्वारा पारित कर दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी। बनर्जी ने कहा, ‘इतिहास बताता है कि बंगाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत सभी एक साथ थे। विभाजन बाद में हुआ और जो लोग यहां रह रहे हैं, उन्हें सुरक्षा देना हमारा काम है।’ बनर्जी ने कहा कि अगर लोग एकजुट हों तो वे दुनिया जीत सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कुछ लोग आपको इकट्ठा होने और आंदोलन शुरू करने के लिए उकसाएंगे। मैं आप सभी से ऐसा न करने की अपील करूंगी। कृपया याद रखें कि जब दीदी (बनर्जी) यहां हैं, तो वह आपकी और आपकी संपत्ति की रक्षा करेंगी। हमें एक-दूसरे पर भरोसा रखना होगा।’ जैन समुदाय के कार्यक्रम में बनर्जी ने कहा कि वह सभी धर्मों से जुड़े स्थलों पर जाती हैं और वह ऐसा करना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, ‘अगर आप मुझे गोली भी मार देंगे तो भी आप मुझे उस एकता से अलग नहीं कर पाएंगे। हर धर्म, जाति, पंथ… सभी मानवता के लिए प्रार्थना करते हैं और हम उनसे प्यार करते हैं।’ बनर्जी ने कहा कि वह दुर्गा पूजा, काली पूजा, जैन और बौद्ध मंदिर, गुरुद्वारा, चर्च और गुरु रविदास मंदिर जाती हैं। उन्होंने कहा, ‘राजस्थान में मैंने अजमेर शरीफ के दौरे के साथ-साथ पुष्कर में ब्रह्म मंदिर के भी दर्शन किए।’

समंदर में बढ़ेगा दबदबा: भारत ने दी 26 लड़ाकू विमान खरीदने की मंजूरी, राफेल मरीन से लैस होगा INS विक्रांत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने बुधवार को भारतीय नौसेना के लिए 65,000 करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल मरीन फाइटर जेट खरीदने को मंजूरी दे दी है। ये अत्याधुनिक युद्धक विमान देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर तैनात किए जाएंगे। इस बड़े रक्षा सौदे पर जल्द ही भारत और फ्रांस के बीच हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। समुद्री अभियानों के लिए खासतौर पर तैयार राफेल मरीन राफेल मरीन एक ट्विन-इंजन, डेक-बेस्ड फाइटर जेट है जिसे समुद्री अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग पहले से ही फ्रांस की नौसेना अपने विमानवाहक पोत ‘चार्ल्स डी गॉल’ पर कर रही है। जुलाई 2023 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजीशन काउंसिल (DAC) की बैठक में नौसेना के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। हथियार, ट्रेनिंग, स्पेयर पार्ट्स समेत व्यापक पैकेज यह रक्षा सौदा केवल जेट विमानों की खरीद तक सीमित नहीं है। इसके तहत हथियार प्रणाली, सिम्युलेटर, स्पेयर पार्ट्स, अन्य जरूरी उपकरण, क्रू ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है, जो फ्रांस सरकार से मिलेगा। स्वदेशी TEDBF के आने तक अंतरिम व्यवस्था राफेल मरीन जेट की खरीद को भारतीय नौसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था माना जा रहा है। जब तक भारत अपना खुद का ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) विकसित नहीं कर लेता, तब तक यह विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। खास डिजाइन और सामग्री से बनी ताकतवर मशीन राफेल M में विमानवाहक संचालन के लिए असाधारण रूप से मजबूत एयरफ्रेम और अंडरकैरिज है। राफेल मरीन का एयरफ्रेम और लैंडिंग गियर काफी मजबूत हैं, ताकि वह विमानवाहक पोत से टेकऑफ और लैंडिंग की कठिन परिस्थितियों को सह सके। इसमें करप्शन-प्रतिरोधी मिश्रधातुएं और कंपोजिट मटीरियल्स का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह ट्रॉपिकल जलवायु में भी बेहतरीन प्रदर्शन करता है। INS विक्रांत को मिलेगा तकनीकी फायदा INS विक्रांत को कोचीन शिपयार्ड में 20,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यह एक “शॉर्ट टेक ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी” (STOBAR) आधारित एयरक्राफ्ट कैरियर है। इसमें फाइटर जेट्स स्की-जंप की मदद से टेकऑफ करते हैं और अरेस्टर वायर के जरिए लैंड करते हैं। राफेल मरीन इस प्रणाली के अनुरूप पूरी तरह फिट बैठता है। IAF के राफेल से होगी लॉजिस्टिक कॉमनैलिटी भारतीय वायुसेना पहले ही फ्रांस से खरीदे गए 36 राफेल जेट्स का संचालन कर रही है, जिसकी लागत लगभग 59,000 करोड़ रुपये थी। नौसेना के लिए राफेल मरीन की खरीद से ट्रेनिंग, रखरखाव और लॉजिस्टिक्स के मामले में समरूपता मिलेगी, जिससे संचालन आसान और अधिक प्रभावी होगा।

पीएम मोदी ने वक्फ बोर्ड ऐक्ट बनने को लेकर कहा कि इससे पसमांदा मुस्लिमों, महिलाओं और गरीबों के हित में काम होगा

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने वक्फ बोर्ड ऐक्ट बनने को लेकर कहा कि इससे पसमांदा मुस्लिमों, महिलाओं और गरीबों के हित में काम होगा। उन्होंने कहा कि देश अब तक तुष्टिकरण की राजनीति से चलाया आया और उसका हमें खामियाजा भी भुगतना पड़ा। पीएम मोदी ने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति कोई नहीं है। इसका बीज स्वतंत्रता संग्राम के समय ही बो दिया गया था। उन्होंने न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट में हिस्सा लेते हुए कहा, ‘भारत कई देशों के साथ ही आजाद हुआ था, लेकिन किसकी स्वतंत्रता की शर्त विभाजन थी। भारत के साथ ही ऐसा क्यों हुआ। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय राष्ट्र हित से ऊपर सत्ता का मोह हो गया। विभाजन सभी मुस्लिमों का काम नहीं था बल्कि कांग्रेस समर्थित कट्टरपंथियों का काम था।’ उन्होंने कहा कि इसी तुष्टिकरण की राजनीति का शिकार तो पसमांदा मुस्लिम हुए और महिलाएं भी हैं। कांग्रेस ने इसे वोटबैंक की राजनीति का हथियार बना लिया। 2013 में वक्फ बोर्ड में किया गया संशोधन कट्टरपंथियों और भूमाफियाओं को खुश करने का कानून था। वक्फ कानून ने संविधान को भी कमतर कर दिया। हाल यह हो गया कि भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हो गए। केरल में ईसाई समुदाय के लोगों की जमीनों पर दावा, हरियाणा में गुरुद्वारों की जमीन पर विवाद हो गया। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक का भी एक मामला बताया। मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा, खेत और सरकारी जमीन हो, किसी को यह भरोसा नहीं रह गया था कि उनकी जमीन उनकी ही रहेगी। बस एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर के कागज ढूंढने लग जाते थे। आखिर यह कैसा कानून था, जिसने डर पैदा किया था। अब एक शानदार कानून बना है। यह देश और मुस्लिम समाज के हित में है। इससे वक्फ की पवित्र भावना की भी रक्षा होगी। इसके अलावा गरीब, पसमांदा मुस्लिम और उनके बच्चों के हित सुरक्षित रहेंगे। वक्फ पर हुई डिबेट दूसरी सबसे लंबी बहस थी। इसे सदन में दोबारा लाने से पहले जेपीसी की 38 बैठकें हुई थीं। यह दिखाता है कि भारत में लोकतंत्र कितना प्रभावी है। पीएम मोदी ने कहा कि वक्फ बोर्ड की ताकत इतनी थी कि हर कोई डरा रहता था कि कब नोटिस न आ जाए। नोटिस आया नहीं कि लोग कानूनी लड़ाई में उलझ जाते थे। वह भी उस जमीन के लिए जो उनकी अपनी हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि हमने वक्फ बोर्ड ऐक्ट लाकर न्याय किया है और इससे सारी विसंगतियां दूर हो जाएंगी।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताई पूरी रणनीति, डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ अटैक से निपटने का क्या है प्लान

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर भी 26 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया है। इसके चलते भारत के कई ऐसे उद्योगों पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है, जो अमेरिका में एक्सपोर्ट करते हैं या फिर वहां के लिए सर्विसेज मुहैया कराते हैं। चीन, ब्राजील, कनाडा, यूरोपियन यूनियन समेत दुनिया भर के बड़े देश आशंकित हैं कि ट्रंप के फैसलों का असर उनकी इकॉनमी पर क्या होगा। दुनिया में मंदी का खतरा भी मंडरा रहा है। इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया है कि डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ अटैक से निपटने के लिए भारत की क्या तैयारी है। विदेश मंत्री ने कहा कि हम अमेरिका के साथ इस साल के अंत तक ट्रेड डील करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का अब तक एकमात्र देश है, जिसने डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद ट्रेड डील को लेकर एक सहमति बनाने की पहली की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में हम कामयाब होते दिख रहे हैं। विदेश मंत्री का यह जवाब ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप की ओऱ से लगाए गए टैरिफ आज से 5 बड़े देशों पर लागू हो गए हैं। इन देशों में भारत भी शामिल हैं। ट्रंप के टैरिफ अटैक से वैश्विक महामंदी का खतरा भी मंडरा रहा है। जयशंकर ने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है, जो डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए प्रयास कर रहा है। जयशंकर ने टैरिफ अटैक को लेकर कहा कि अब तक यह साफ नहीं है कि इसका हम पर क्या असर रहेगा। उन्होंने कहा कि यह साफ नहीं है कि असर क्या होगा, लेकिन इससे निपटने की रणनीति क्या होगी। यह काफी हद तक स्पष्ट है। एस जयशंकर ने कहा कि हमने तय किया है कि ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत की जाएगी। इस मसले का हल समय रहते ही निकाला जाएगा और इसे लेकर हम बेहद पॉजिटिव हैं। अमेरिका के साथ हमारी अच्छे माहौल में बातचीत चल रही है और उनका रुख भी पॉजिटिव है। हमारी कोशिश है कि द्विपक्षीय समझौता कर लिया जाए। बता दें कि फरवरी में ही पीएम नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की फरवरी में मुलाकात हुई थी। इसी दौरान दोनों नेताओं की ट्रेड डील पर भी बात हुई थी। जयशंकर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम ऐसे एकमात्र देश हैं, जिसने ट्रंप के फिर से राष्ट्रपति बनने के बाद एक सहमति बनाने की कोशिश की है और इस दिशा में आगे बढ़े हैं।’ उन्होंने कहा कि दुनिया का हर देश अपने स्तर से रणनीति बना रहा है और भारत की भी कोशिश है कि समय रहते एक ट्रेड डील कर ली जाए।

विधायक मलिक के बयान से PDP कार्यकर्ता और नेता भड़क गए और विधानसभा परिसर में जमकर हुई बहस

जम्मू जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को एक शर्मनाक घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। डोडा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के एकमात्र विधायक मेहराज मलिक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों के बीच विधानसभा परिसर में तीखी बहस के बाद मारपीट की नौबत आ गई। दरअसल, मेहराज मलिक ने पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को “गद्दार” कहा और PDP और भाजपा पर मिलीभगत का आरोप लगाया। मलिक के इस बयान से PDP कार्यकर्ता और नेता भड़क गए और विधानसभा परिसर में जमकर बहस हुई। धक्का-मुक्की और झड़प में मलिक कांच की मेज पर गिर गए। सुरक्षा कर्मियों ने मौके पर हस्तक्षेप कर हालात को संभाला। “पुलिस BJP के इशारे पर काम कर रही है”: मेहराज मलिक मलिक ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें विधानसभा में आने से रोकने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि “पुलिस PDP की तरह व्यवहार कर रही है और मुझे बोलने से रोका जा रहा है।” इसके बाद उन्होंने SP सुरक्षा से PDP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की मांग भी की। BJP विधायकों से हाथापाई, कांच की मेज पर गिरे मलिक बात यहीं नहीं रुकी। मलिक ने जब भाजपा नेताओं पर हमला बोला तो वहां मौजूद भाजपा विधायक विक्रम रंधावा, युधवीर सेठी, आरएस पठानिया, अरविंद गुप्ता और सतीश शर्मा भड़क गए। दोनों पक्षों में तीखी बहस के बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान मेहराज मलिक एक कांच की टेबल पर गिर पड़े, जिससे हलचल मच गई। विधानसभा के सुरक्षा कर्मचारियों ने उन्हें किसी तरह वहां से हटाया। मेहराज मलिक के भड़काऊ बयानों का पुराना इतिहास मेहराज मलिक इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बयान दिया था कि “हिंदू त्योहारों में शराब पीते हैं” – इस पर जम्मू में भारी विरोध हुआ। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि “BJP के 28 विधायक रात को अपनी पत्नियों से पिटते हैं और सुबह बहादुरी का नाटक करते हैं।” BJP विधायकों की मांग: “मलिक की सदस्यता रद्द हो” भाजपा विधायक युधवीर सेठी ने कहा, “यह आदमी गुंडा है, इसे विधानसभा में कोई जगह नहीं दी जानी चाहिए। इसकी सदस्यता खत्म होनी चाहिए।” विक्रम रंधावा ने भी कहा कि “मलिक मानसिक संतुलन खो चुका है और लगातार जहर उगल रहा है।” वहीं BJP विधायक आरएस पठानिया ने आरोप लगाया कि “नेशनल कॉन्फ्रेंस इस तरह के ड्रामे को बढ़ावा दे रही है ताकि सदन की कार्यवाही बाधित हो।”

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को घेरा, जयशंकर ने बखिया उधेड़ी

नई दिल्ली आतंकवाद के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को घेरा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि वहां कई लोग हैं, जो गर्व से भारत में अशांति फैलाने की बात को स्वीकार भी करते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि आतंकवाद का उद्योग शुरू करने वाले उसी में डूब जाते हैं। उनकी टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब 26/11 के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा के अमेरिका से प्रत्यर्पण की तैयारी चल रही है। समिट में पहुंचे जयशंकर ने कहा, ‘मुझे यह कहने की जरूरत नहीं है, साफ नजर आता है। वो लोग भी कहते हैं। ऐसा नहीं है कि मैं आरोप लगा रहा हूं और पाकिस्तान में सभी इस बात से इनकार कर रहे हैं। पाकिस्तान में कुछ लोग हैं, जो खुलकर स्वीकार करते हैं कि वे भारत में आतंकवादी गतिविधियां कर रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘ये कोई अनुमान नहीं है। यह कुछ ऐसा है, जिसे वो लोग गर्व के साथ स्वीकार करते हैं। सभी समझदार लोग कहते हैं कि अगर आप आतंकवाद का उद्योग शुरू करते हैं, तो उसमें डूब भी जाएंगे और यही हम आज होता हुआ देख रहे हैं।’ तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण राणा के प्रत्यर्पण को लेकर उन्होंने कहा, ‘तहव्वुर राणा के मुद्दे में कुछ भी नया कहने जैसा नहीं है। हम अमेरिका की कानूनी प्रक्रिया के फैसले का स्वागत करते हैं।’ पीटीआई भाषा ने सरकारी सूत्रों के हवाले से लिखा कि भारत से कई एजेंसियों की एक टीम अमेरिका आई है और अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर सभी कागजी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। सूत्रों ने कहा कि इस बात की ‘अत्यधिक संभावना’ है कि राणा को ‘जल्द ही प्रत्यर्पित किया जा सकता है।’ यह भी माना जा रहा है कि राणा को बुधवार को भारत नहीं लाया जाएगा और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी है।

चिनाब पुल के साथ कश्मीर की यात्रा को नई ऊँचाई

श्रीनगर जहां बर्फ से ढके पहाड़ आसमान को छूते हैं और चिनाब नदी धरती को गहराई तक काटती है, वहीं भारत ने इस कठिन भूभाग में अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति को इस्पात में ढाल दिया है। चिनाब पुल — अब विश्व का सबसे ऊँचा रेलवे पुल — नदी तल से 359 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो भारतीय इंजीनियरिंग कौशल और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक बन चुका है। यह पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) परियोजना का हिस्सा है, जो न केवल भौगोलिक दूरी, बल्कि उम्मीदों को भी जोड़ता है — कश्मीर घाटी को पूरे भारत से जोड़ता एक हर मौसम में चलने वाला, विश्वसनीय रेल मार्ग। सलाल डैम के निकट चिनाब नदी पर बना यह पुल कुल 1,315 मीटर लंबा है, जिसमें 467 मीटर का मुख्य आर्च स्पैन है। यह 266 किमी/घंटा तक की हवा की रफ्तार को झेलने में सक्षम है। ऊंचाई में यह पुल एफिल टॉवर से भी ऊँचा है और नदी तल से रेल पथ तक की ऊंचाई कुतुब मीनार से लगभग पाँच गुना अधिक है। इस अद्भुत संरचना के निर्माण में 28,000 मीट्रिक टन इस्पात का प्रयोग हुआ और भारतीय रेलवे ने पहली बार केबल क्रेन प्रणाली का उपयोग किया — दो विशाल केबल कार और 100 मीटर से अधिक ऊंचे पाइलन के जरिए, 915 मीटर चौड़ी घाटी को पार करते हुए निर्माण सामग्री को पहुंचाया गया। हिमालय की भूगर्भीय दृष्टि से जटिल और अस्थिर धरातल पर बना यह पुल केवल एक ढांचागत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह भारत की हिम्मत, नवाचार और दूर-दराज क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने की अटल प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जैसे ही यह पुल चिनाब पर गर्व से खड़ा है, यह केवल दो पहाड़ों को नहीं जोड़ता — यह सपनों, विकास और जम्मू-कश्मीर के नए युग को जोड़ता है।

अब नौ सेना को भी मिलेंगे महाबली राफेल, विमान खरीदने के लिए 63000 करोड़ रुपये की डील पर करेगा हस्ताक्षर, और मजबूत होगी नौसेना

मुंबई भारत ने फ्रांस से 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदने के लिए मेगा डील को मंजूरी दे दी है. रक्षा सूत्रों ने बुधवार को आजतक को य​ह जानकारी दी. दोनों देशों की सरकारें 63,000 करोड़ रुपये से अधिक के इस रक्षा सौदे पर जल्द ही हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत भारतीय नौसेना को 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर राफेल मरीन जेट मिलेंगे. डील पर मुहर लगने के बाद राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी 2029 के अंत से शुरू होगी और 2031 तक भारतीय नौसेना को सभी 26 विमान मिल जाएंगे. इन विमानों का निर्माण फ्रांस की प्राइवेट एविएशन कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) करेगी. इन राफेल-एम विमानों की तैनाती INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे विमान वाहक युद्धपोतों पर होगी. अभी तक भारतीय नौसेना के ये दोनों जहाज अपने मिशनों को पुराने हो चुके मिग 29-K लड़ाकू विमानों के साथ अंजाम देते हैं. राफेल-एम विमानों की फ्लीट, पुराने हो चुके मिग-29K विमानों की फ्लीट को रिप्लेस करेगी. सूत्रों के मुताबिक, इस डील के तहत 26 राफेल मरीज जेट्स के अलावा फ्लीट के मेंटेनेंस, लॉजिस्टिक सपोर्ट, कर्मियों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी फ्रांस की होगी. इसके अलावा ऑफसेट दायित्वों के तहत इन विमानों के कलपुर्जों और उपकरणों का निर्माण भारत में ही करना होगा. इस पैकेज में नौसेना कर्मियों की ट्रेनिंग भी शामिल है. जिन 26 राफेल विमान को खरीदने की तैयारी है उनमें से 22 विमान सिंगल सीट वाले होंगे, जबकि चार विमानों में दो पायलट के बैठने की जगह होगी. सूत्रों के अनुसार इन विमानों को मुख्य रूप से स्वदेशी रूप से निर्मित विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा. इससे भारत हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी गतिविधियों पर नजर रखने में और आसानी होगी. साथ ही इससे भारतीय नौसेना की क्षमताओं को मजबूत करना चाहता है.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इस सौदे को मंजूरी दी है. राफेल मरीन, राफेल लड़ाकू विमान का एयरक्राफ्ट कैरियर्स के लिए डिजाइन किया गया संस्करण है, जो अपनी एडवांस एवियोनिक्स, वेपन सिस्टम और एयर वारफेयर में अपनी कुशलता के लिए जाना जाता है. राफेल-एम को विमानवाहक पोतों से अंजाम दिए जाने वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें मजबूत लैंडिंग गियर, अरेस्टर हुक्स और शॉर्ट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी (STOBAR) ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए मजबूत एयरफ्रेम की सुविधा है. ‘ यह एक ऐसी तकनीक है जिसका उपयोग नौसेना के विमानवाहक पोतों पर लड़ाकू विमान के टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए किया जाता है, क्योंकि एयरक्राफ्ट कैरियर्स पर रनवे छोटा होता है. ऐसे में बहुत कम दूरी में लड़ाकू विमानों को उड़ान भरनी और लैंडिंग करनी होती है. भारतीय वायु सेना (आईएएफ) पहले से ही अंबाला और हाशिमारा स्थित अपने एयरबेस पर 36 राफेल फाइटर जेट्स का संचालन कर रही है. बता दें कि फ्रांस के साथ डसॉल्ट एविएशन के 36 राफेल फाइटर जेट के लिए यह डील मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में फाइनल हुई थी. नया राफेल मरीन डील भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को बढ़ाने में भी मदद करेगा, जिसमें इसके ‘बडी-बडी’ एरियल रिफ्यूलिंग सिस्टम को उन्नत करना भी शामिल है. यह सुविधा भारतीय वायुसेना के लगभग 10 राफेल विमानों को हवा में ही ईंधन भरने में सक्षम बनाएगी, जिससे उनका ऑपरेशनल रेंज बढ़ जाएगा. नौ सेना के लिहाज से मॉडिफाई होंगे राफेल ये नए राफेल एम विमान, पुराने MiG-29K और MiG-29KUB विमानों की जगह लेंगे। ये पुराने विमान अभी भारतीय नौसेना के 300 स्क्वाड्रन (INAS 300) ‘व्हाइट टाइगर्स’ और 303 स्क्वाड्रन (INAS 303) ‘ब्लैक पैंथर्स’ में इस्तेमाल हो रहे हैं। नए राफेल जेट आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य नाम के एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरेंगे। ये विशाल जहाज समुद्र में तैरते हुए हवाई अड्डे की तरह होते हैं। भारत में फैक्ट्री लगाएगी राफेल वाली कंपनी राफेल विमान बनाने वाली कंपनी दसॉ एविएशन भारत में अपनी एक असेंबली लाइन लगाने पर भी विचार कर रही है। इसका मतलब है कि कुछ राफेल विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि भारत समेत कई देशों से राफेल विमानों के बहुत सारे ऑर्डर मिले हैं। भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पॉलिसी के तहत खरीदे जाने वाले 60% हथियार भारत में ही बनने चाहिए। भारत के इस नए ऑर्डर को मिलाकर दसॉ एविएशन के पास कुल 256 राफेल विमान बनाने के ऑर्डर हैं। इनमें से 190 विमान दूसरे देशों के लिए और 56 विमान फ्रांसीसी वायु सेना के लिए हैं। दसॉ अभी हर महीने तीन विमान बनाती है। इस हिसाब से सभी ऑर्डर पूरे करने में लगभग 7 साल लग जाएंगे। फरवरी में फ्रांस के रक्षा मंत्री ने 20 से 30 और राफेल विमान खरीदने की योजना की घोषणा की थी। इससे साफ है कि राफेल विमानों की मांग दुनिया भर में बढ़ रही है। भारत ने जुलाई 2023 में ही 26 और राफेल विमान खरीदने की योजना बना ली थी। उस समय रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए 26 राफेल और तीन स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों की खरीद को मंजूरी दे दी थी। भारत ने 2016 में 36 राफेल विमानों का ऑर्डर दिया था। इनमें से आखिरी दो विमान दिसंबर 2022 में भारत पहुंचे थे। वायु सेना के लिए आ चुके हैं 36 राफेल इन 36 विमानों में भारत की खास जरूरतों के हिसाब से 13 बदलाव किए गए थे। इनमें एक इजरायली हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम, मीटिऑर गाइडेड मिसाइल समेत कई तरह की मिसाइलें, 10 घंटे का डेटा स्टोर करने वाले फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, इन्फ्रारेड टारगेट ट्रैकिंग सिस्टम, बेहतर रडार, ऊंचाई वाले एयरफील्ड से उड़ान भरने के लिए कोल्ड वेदर इंजन स्टार्टर और भी बहुत कुछ शामिल है। इन बदलावों से भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ गई है। नए राफेल विमान भी इन्हीं खूबियों से लैस होंगे और भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा करेंगे। ये नए विमान हिंद महासागर में भारत की सुरक्षा को और मजबूत बनाएंगे।  

Kia के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से कारों के 900 इंजन हो गए चोरी, साल मार्च में ऑडिट के दौरान यह चोरी पकड़ी गई

तिरुपति आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पेनकोंडा के पास किआ मोटर्स (Kia Motors) की कार बनान की फैक्ट्री है। इस फैक्ट्री से बीते पांच साल में करीब 900 इंजन चोरी हो गए हैं। यह मामला तब सामने आया जब कंपनी ने बीते मार्च के दौरान पूरे साल का ऑडिट किया। पुलिस ने शुरू की जांच हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में किआ मोटर्स शिकायत दर्ज कराने में हिचकिचा रही थी। वे चाहते थे कि पुलिस बिना औपचारिक शिकायत के ही मामले की जांच करे। लेकिन पुलिस ने साफ़ कह दिया कि बिना शिकायत के जांच नहीं हो सकती। इसके बाद किआ मोटर्स ने 19 मार्च को पेनकोंडा इंडस्ट्रियल एस्टेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। श्री सत्य साईं जिले के SP वी. रत्ना ने किआ मोटर्स के कारखाने का दौरा किया और सारे रिकॉर्ड देखे। उन्होंने कहा, “हमने मामले की जांच के लिए तीन विशेष टीमें बनाई हैं। हमारी टीमें महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने के लिए पूरे देश में जा रही हैं। मामले की जांच तेजी से चल रही है।” 2020 से हो रही है चोरी पेनकोंडा के DSP वाई. वेंकटेश्वरुलु भी जांच टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि किआ मोटर्स में इंजन की चोरी 2020 में शुरू हुई थी। उन्होंने कहा, “शुरुआती जांच से पता चला है कि पिछले पांच सालों में 900 इंजन धीरे-धीरे और योजना बनाकर चुराए गए हैं। यह निश्चित रूप से किसी अंदर के आदमी का काम है। हमें शक है कि किआ मोटर्स के कुछ पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों ने मिलकर इस चोरी को अंजाम दिया है।” प्लांट से चोरी हुए इंजन पहले पुलिस को शक था कि तमिलनाडु से पेनकोंडा के किआ मोटर्स प्लांट में आते समय इंजन चोरी हो गए होंगे। लेकिन जांच के बाद पता चला कि सारे इंजन प्लांट से ही चुराए गए थे। चोरों ने रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया। दूसरी तरफ, किआ मोटर्स ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि पुलिस अभी जांच कर रही है। लेकिन कंपनी ने यह जरूर कहा कि इंजन चोरी होने से कारखाने के उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। प्रोडक्शन पर असर नहीं किआ मोटर्स के एक प्रतिनिधि ने TOI को बताया, “हम हर साल लगभग 3-4 लाख गाड़ियां बनाते हैं। 900 इंजन चोरी होने से उत्पादन में कोई कमी नहीं आई है।” वैसे यह घटना कई सवाल खड़े करती है। इतनी बड़ी संख्या में इंजन कैसे चोरी हो गए? क्या कारखाने में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी? क्या कंपनी के अंदर कुछ लोग चोरों के साथ मिले हुए थे? पुलिस इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश कर रही है। यह भी सोचने वाली बात है कि इंजन चोरी होने के बाद भी कंपनी को इसका पता क्यों नहीं चला। क्या कंपनी के ऑडिट सिस्टम में कोई कमी थी? क्या कर्मचारियों ने चोरी को छिपाने की कोशिश की?

EPFO मेंबर्स के लिए सरकार ने किया बड़ा काम, अब सिर्फ फेस वेरिफिकेशन से हो जाएगा ये बड़ा काम

नई दिल्ली  एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) जेनरेट और एक्टिवेट करने के लिए फेस ऑथंटिकेशन टेक्नॉलजी की सुविधा शुरू की है। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने  यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब कर्मचारी उमंग ऐप (Umang App) इस्तेमाल कर आधार फेस ऑथेन्टिकेशन टेक्नॉलजी से खुद अपना UAN बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी नियोक्ता अपने नए कर्मचारी का UAN इस तरह खुद इसी प्रोसेस से बना सकता है। मांडविया ने बताया कि जिन पुराने सदस्यों का UAN एक्टिवेट नहीं हुआ है, वे भी उमंग ऐप से इसे एक्टिवेट कर सकते हैं। मांडविया ने बताया, ‘EPFO जल्दी ही जीवन प्रमाण (डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट) को भी फेस ऑथंटिकेशन के जरिए प्रमोट करेगा, जिससे पेंशनधारकों को घर पर सेवाएं मिल सकेगी मांडविया ने कहा, UAN जेनरेट करने के लिए आमतौर पर एंप्लॉयर कर्मचारी का डेटा EPFO को भेजता था और डेटा आधार से वेरिफाई किया जाता था, लेकिन पिता का नाम, मोबाइल नंबर जैसी जानकारी में कई बार गलतियां हो जाती थी, जिससे कर्मचारियों को क्लेम या दूसरे बेनेफिट के लिए बाद में डेटा अपडेट कराना पड़ता था। कई मामलों में कर्मचारी का मोबाइल नंबर गलत होने या उसकी जानकारी ही नहीं दिए जाने के चलते EPFO उनसे संपर्क नहीं कर पाता था। लेकिन फेस ऑर्थोटिकेशन टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से ऐसी दिक्कतें नहीं होंगी और करोड़ों कर्मचारियों को कॉन्टैक्टलेस और सुरक्षित सेवा मिलेगी।’ इसके अलावा EPFO मेंबर पोर्टल पर आधार ओटीपी वैलिडेशन के जरिए UAN एक्टिवेशन की प्रक्रिया है, जिसे मेंबर को पूरा करना होता है। इसमें भी कई बार कन्फ्यूजन की स्थिति बन जाती है। मांडविया ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 1,26,56,127 UAN जनरेट हुए, लेकिन 44,68,236 यानी करीब 35% ही एक्टिवेट हुए। इस तरह खुद जेनरेट करें UAN     प्लेस्टोर से उमंग ऐप (Umang App) डाउनलोड कर इंस्टॉल करें।     AadhaarFaceRD App भी डाउनलोड करे और इंस्टॉल करे।     उमंग ऐप खोलें और UAN अलॉटमेंट एंड एक्टिवेशन पर जाएं।     आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर डालें।     कंसेट देने के लिए चेकबॉक्स पर टिक करें और OTP वेरिफाई करें।     इसके बाद कैमरा ऑन होगा, लाइव फोटो लें।     जब बॉर्डर हरे रंग में बदल जाए, तो फोटो कैप्चर पूरा होगा, जैसे डिजियात्रा ऐप में होता है।     फोटो आधार डेटाबेस से मिलाया जाएगा सफल मैचिंग के बाद UAN SMS से भेजा जाएगा।     UAN जेनरेट होते ही ऑटो एक्टिव हो जाएगा। उमंग ऐप या मेबर पोर्टल से UAN कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे।

‘नवकार महामंत्र दिवस’: पीएम बोले- सरकार इस प्राचीन धर्म की विरासत और शिक्षाओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नवकार महामंत्र दिवस’ पर आयोजित ‘नवकार महामंत्र’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिना जूते के पहुंचे। इसके अलावा उन्होंने मंच पर नहीं बल्कि आम लोगों के साथ बैठकर कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक धोती और कुर्ता धारण किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि जैन धर्म ने भारत की पहचान स्थापित करने में अमूल्य भूमिका निभाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके मूल्य आतंकवाद, युद्ध और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से पार पाने में मददगार हैं। पीएम मोदी ने ‘नवकार महामंत्र दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार इस प्राचीन धर्म की विरासत और शिक्षाओं के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों की शिक्षाओं और मूर्तियों के जरिए इस धर्म का प्रभाव संसद भवन पर दिखाई देता है। क्यों मनाया जाता है नवकार महामंत्र दिवस? नवकार महामंत्र दिवस आध्यात्मिक सद्भाव और नैतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण उत्सव है, जो जैन धर्म में सबसे अधिक पवित्र है। इस नवकार महामंत्र के सामूहिक जप के माध्यम से लोगों को एकजुट करने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान 108 से अधिक देशों के लोग शांति और एकजुटता के लिए वैश्विक जप में शामिल हुए। अनेकांतवाद के सिद्धांत का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया को इसकी बहुत जरूरत है क्योंकि इसके तहत विभिन्न दृष्टिकोणों की सराहना की जाती है। अनेकांतवाद जैन धर्म में गैर-निरपेक्षता को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख सिद्धांत है। इसके तहत यह माना जाता है कि अंतिम सत्य को अलग-अलग तरीके से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में जीवन की पारस्परिक निर्भरता का खासा महत्व है और इसलिए इसमें मामूली हिंसा पर भी रोक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शांति, सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण के लिए सबसे अच्छा सबक है। मोदी ने कहा कि जैन साहित्य भारत की आध्यात्मिक भव्यता की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इसे संरक्षित करने के लिए कई कदम उठा रही है, जिसमें इसके प्राचीन ग्रंथों का डिजिटलीकरण और पाली व प्राकृत को शास्त्रीय भाषा घोषित करने की हालिया योजना भी शामिल है। मोदी ने लोगों से जल संरक्षण, अपनी मां की याद में एक पेड़ लगाना, स्वच्छता को बढ़ावा देना, स्थानीय लोगों के लिए मुखर होना, देश में यात्रा करना, प्राकृतिक खेती को अपनाना, मोटे अनाजों का अधिक सेवन कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और खाद्य तेल के उपयोग में 10 प्रतिशत की कटौती करना, गरीबों की मदद करना और खेल तथा योग को दिनचर्या में सम्मिलित करने समेत नौ प्रतिज्ञाएं लेने का अनुरोध किया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से देश भर में एकता का संदेश ले जाने और “भारत माता की जय” कहने वाले किसी भी व्यक्ति को गले लगाने को कहा।

RBI ने रेपो रेट में लगातार दूसरी बार की कटौती, सस्ते हो जाएंगे लोन, इकॉनमी को लगेंगे पंख

नई दिल्ली आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर दी है। लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती की गई है। इससे पहले फरवरी में भी रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती की गई थी। यह करीब पांच साल में रेपो रेट में पहली कटौती थी। आज की कटौती के साथ अब रेपो रेट 6 फीसदी हो गया है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है। इसके कम होने से आपके होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की किस्त कम होती है।आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट में कटौती का फैसला लिया गया। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। आरबीआई की एमपीसी की नए फाइनेंशियल ईयर में यह पहली बैठक थी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में कटौती के पक्ष में वोट दिया। उन्होंने कहा कि नया वित्त वर्ष काफी उथलपुथल के साथ शुरू हुआ है। ट्रेड के मामले में कुछ आशंकाएं सही साबित हो रही हैं और ग्लोबल कम्युनिटी परेशान है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने कीमतों में स्थिरता और नियमित विकास के मामले में अच्छी प्रगति की है। दुनिया में इकनॉमिक आउटलुक तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत अमेरिकी शुल्क के साथ वैश्विक अनिश्चितता के साथ हुई है लेकिन आरबीआई स्थिति पर नजर रखे हुए है। भारतीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ रही है और आर्थिक वृद्धि में सुधार जारी है। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत रुख को तटस्थ से बदलकर उदार करने का फैसला किया है। महंगाई में कमी आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रियल जीडीपी ग्रोथ के इस फाइनेंशियल ईयर में 6.5% रहने का अनुमान है। पहले इसके 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। पहली तिमाही में इसके 6.5%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 6.6% और चौथी तिमाही में 6.3% रहने का अनुमान है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में महंगाई दर 4 फीसदी रहने का अनुमान है जो फरवरी के 4.2 फीसदी अनुमान से कम है। पहली तिमाही में महंगाई की दर 3.6%, दूसरी तिमाही में 3.9%, तीसरी तिमाही में 3.8% और चौथी तिमाही में 4.4% रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि हमारा रुख नकदी प्रबंधन पर किसी मार्गदर्शन के बिना नीति दर मार्गदर्शन प्रदान करता है। वैश्विक निश्चितताओं से मुद्रा पर और दबाव पड़ सकता है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, नवीनतम व्यापार संबंधी उपायों से अनिश्चितताएं और बढ़ गई हैं जिससे विभिन्न क्षेत्रों में परिदृश्य धुंधला गया है। महंगाई में कमी का असर माना जा रहा था कि आरबीआई रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने इसका अनुमान जताया था। उनका कहना था कि देश में महंगाई कम हो रही है, इसलिए आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर सकता है। भारत की खुदरा महंगाई की दर फरवरी में 3.61% तक गिर गई थी। यह जनवरी में 4.26% थी। यह सात महीनों में पहली बार RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे आई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मार्च में भी महंगाई RBI के अनुमान से कम रहेगी। क्या होता है रेपो रेट? रेपो रेट के जरिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया वाणिज्यिक बैंकों को शॉर्ट टर्म लोन प्रदान करती है। ये एक तरह से बैंकों के लिए लोन ब्याज दर की तरह काम करता है। ये लोन एक समय सीमा के लिए निर्धारित किया जाता है। हालांकि अगर बैंक लंबे समय के लिए लोन लेना चाहे तो उन्हें बैंक रेट के आधार पर आरबीआई लोन ऑफर करती है। कैसे पड़ेगा आप पर प्रभाव? रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर- अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी आती है, तो इसका मतलब है कि बैंकों को लोन महंगा पड़ने वाला है, जिसका इनडायरेक्ट असर आपके लोन के ब्याज और ईएमआई पर देखने को मिलता है। रेपो रेट में कटौती का असर- अगर आरबीाई द्वारा रेपो रेट में कटौती की जाती है। तो इससे बैंकों को लोन सस्ता पड़ता है। वहीं लोग भी कम ब्याज दर पर लोन ले पाते हैं। इस तरह से रेपो रेट फिक्सड डिपॉजिट के फ्लोटिंग और फिक्सड रेट पर भी इनडायरेक्ट असर डाल सकता है। आरबीआई ने क्यों घटाया रेपो दर? हमारे देश की केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कटौती और बढ़ोतरी कर अर्थव्यवस्था में मनी सप्लाई पर नियंत्रित करने की कोशिश करती है। रेपो रेट में कटौती और बढ़ोतरी का फैसला कई तरह के महत्वपूर्ण तथ्यों को देखकर लिया जाता है। इनमें से एक महंगाई भी है। रेपो रेट की खबर ने दी राहत इससे पहले 7 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के उत्पाद शुल्क बढ़ाना, एलपीजी गैस के दामों में इजाफा होने की खबर से लोगों को बड़े झटके मिले हैं। इस बीच आरबीआई का ये फैसला राहत दे सकता है हालांकि बढ़ते उत्पाद शुल्क का असर पेट्रोल डीजल के दामों में देखने को नहीं मिला है। आज भी इनमें दाम स्थिर है।

26/11 हमले के आरोपी आतंकी तहव्वुर राणा अमेरिका से प्रत्यर्पित, विशेष विमान से लाया जा रहा भारत

मुंबई  26/11 मुंबई आतंकी हमले (Mumbai Terror Attack) का मुख्य आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana), जो इस समय अमेरिका (United States Of America) की जेल में बंद है, भारत लाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारत सरकार काफी समय से तहव्वुर के प्रत्यर्पण (Tahawwur Rana Extradition) की कोशिश कर रही थी और कुछ समय पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Of US) ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) के अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी साफ कर दिया था कि तहव्वुर को जल्द से जल्द भारत के हवाले कर दिया जाएगा। तहव्वुर ने भारत प्रत्यर्पण को रोकने के लिए अलग-अलग मौकों पर याचिका भी लगाई, पर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। कुछ दिन पहले ही तहव्वुर की आखिरी याचिका भी खारिज कर दी गई। अब उसके भारत प्रत्यर्पण की तैयारी शुरू हो गई है। आज लाया जाएगा भारत तहव्वुर को आज ही भारत लाया जाएगा। भारतीय एजेंसियों की टीम उसे भारत लाने के लिए अमेरिका पहुंच चुकी है और बचा हुआ पेपरवर्क पूरा किया जा रहा है। तहव्वुर कल सुबह, यानी कि गुरुवार को भारत पहुंच सकता है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल (Ajit Doval) पूरी स्थिति पर नज़र बनाए हुए हैं। तिहाड़ जेल में रखने की संभावना! तहव्वुर के भारत प्रत्यर्पण से पहले ही दिल्ली में तिहाड़ जेल और मुंबई की आर्थर रोड जेल में गतिविधियाँ बढ़ गई हैं और स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया है। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि मुंबई आतंकी हमले के आरोपी को इन दोनों में से एक जेल में NIA की निगरानी में बेहद सुरक्षित सेल में रखा जा सकता है। मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर की थी अहम भूमिका मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर ने अहम भूमिका निभाई थी। इस आतंकी हमले में 175 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 166 नागरिक और 9 आतंकी थे। इतना ही नहीं, 300 से ज़्यादा लोग इस आतंकी हमले में घायल भी हो गए थे। लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले को अंजाम दिया था और आतंकी संगठन के 10 आतंकियों ने इस हमले को अंजाम दिया था। 10 में से सिर्फ एक आतंकी अजमल कसाब ही इस हमले में ज़िंदा बच गया था और बाकी सभी मारे गए थे। कसाब को 2012 में फांसी दे दी गई थी।

दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य, 3 जून को होगा राष्ट्रपति चुनाव

सोल दक्षिण कोरियाई सरकार ने औपचारिक रूप से ऐलान किया कि राष्ट्रपति चुनाव 3 जून को होगा। पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को पद से हटाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यह घोषणा कैबिनेट बैठक में की गई जो कि यून महाभियोग केस में संवैधानिक न्यायालय के फैसले के चार दिन बाद हुई। न्यायालय ने यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव जारी रखा जिसका मतलब था कि उन्हें अपना पद छोड़ना होगा और नए राष्ट्रपति चुनाव कराए जाएंगे। संविधान के अनुसार, देश में राष्ट्रपति पद रिक्त होने के 60 दिनों के भीतर नए चुनाव कराना अनिवार्य है। जब पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हे को 10 मार्च, 2017 को पद से हटाया गया, तो चुनाव ठीक 60 दिन बाद, 9 मई को आयोजित किए गए। सरकार ने 3 जून को अस्थायी सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया है। पिछले शुक्रवार को संवैधानिक न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों का पंजीकरण शुरू कर दिया था। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, चुनाव के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति बिना किसी ट्रांजिशन टीम के पदभार ग्रहण करेंगे। बता दें राष्ट्रपति यून ने 03 दिसंबर की रात को दक्षिण कोरिया में आपातकालीन मार्शल लॉ की घोषणा की, लेकिन संसद द्वारा इसके खिलाफ मतदान किए जाने के बाद इसे निरस्त कर दिया गया। मार्शल लॉ कुछ घंटों के लिए ही लागू रहा लेकिन इसने देश की राजनीति को हिला कर रख दिया। नेशनल असेंबली ने राष्ट्रपति यून सुक-योल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। प्रधानमंत्री हान डक-सू ने उनकी जगह ली लेकिन उनके खिलाफ भी महाभियोग पारित हुआ। इसके बाद उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री चोई सांग-मोक कार्यवाहक राष्ट्रपति और कार्यवाहक प्रधानमंत्री दोनों की जिम्मेदारी संभालने लगे। हालांकि 24 मार्च को संवैधानिक न्यायालय ने प्रधानमंत्री हान डक-सू के महाभियोग को खारिज कर दिया और उन्हें कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में बहाल कर दिया।

सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्पेशल कैजुअल लीव का नियम बनाया, अपना अंगदान करने वाले को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारी अब 42 दिन की अतिरिक्त छुट्टी (स्पेशल कैजुअल लीव) ले सकते हैं। हालांकि इन छुट्टियों के लिए शर्त जोड़ी गई है। ये छुट्टियां उन्हीं कर्मचारियों को मिलेंगी जो अपना अंगदान करेंगे। इस दौरान कर्मचारियों की सैलरी में कुछ भी कटौती नहीं होगी। यानी उन्हें छुट्टियां भी मिलेंगी और उतने दिनों की सैलरी भी। 42 दिन की छुट्टियों से जुड़े इन नियमों के बारे में सरकार ने संसद में भी बताया है। हाल ही में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में इन छुट्टियों के बारे में जानकारी दी गई। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए स्पेशल कैजुअल लीव का नियम बनाया है। यह नियम सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों को अंगदान करने पर अधिकतम 42 दिनों की स्पेशल कैजुअल लीव देने का फैसला किया है। 2023 में आया था आदेश इन छुट्टियों के बारे में साल 2023 में आदेश आया था। यह आदेश पर्सनेल मिनिस्ट्री (Personnel Ministry) ने जारी किया था। इस आदेश के मुताबिक अंगदान करने वाले कर्मचारी को 42 दिनों तक की छुट्टी मिल सकती है। हालांकि यह छुट्टी इस बात पर निर्भर नहीं करेगी कि ऑपरेशन कैसा था। किसी भी स्थिति में 42 दिन से ज्यादा की छुट्टी नहीं मिलेगी। फिर चाहे ऑपरेशन छोटा हो या बड़ा। वहीं इन छुट्टियों के लिए डॉक्टर की मंजूरी जरूरी है। यानी बिना डॉक्टर की मंजूरी के छुट्टी नहीं मिलेगी। ये छुट्टियां अस्पताल में भर्ती होने वाले दिन से शुरू होंगी। बढ़ाया जा सकता है समय सरकारी नियमानुसार छुट्टियों के समय में इजाफा किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में 42 दिन से ज्यादा की छुट्टियां नहीं मिलेंगी। अगर किसी सर्जरी के लिए डॉक्टर 7 दिन की छुट्टी की मंजूरी देता और उसे बाद में लगता है कि मरीज को और छुट्टियों की जरूरत है तो वह छुट्टियों के दिनों में इजाफा कर सकता है। हालांकि इसके लिए डॉक्टर को लिखित में देना होगा। वहीं नियमानुसार छुट्टियों उस दिन से लागू होंगी जिस दिन अंगदान करने वाला शख्स अस्पताल में भर्ती होगा। लेकिन यहां भी कुछ राहत दी गई है। अगर डॉक्टर को लगता है कि अंगदान के लिए उस शख्स की सर्जरी से पहले उसे अस्पताल में कुछ दिन भर्ती करना जरूरी है तो ऐसे मामले में छुट्टियां सर्जरी से अधिकतम एक सप्ताह पहले से उपलब्ध हो सकती हैं।

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