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Waqf Amendment Bill के खिलाफ जंतर मंतर पर हल्ला बोल, AIMIM के नेता होंगे शामिल

नई दिल्ली ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण चल रहा है।मिली जानकारी के मुताबिक, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत अन्य मुस्लिम संगठनों ने जंतर-मंतर पर वक्फ बिल के खिलाफ सड़कों पर उतर गए हैं। देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जिम्मेदार कह रहे हैं कि देश में मुसलमानों को खतरा है, सुरक्षित नहीं हैं। ये सरासर गलत और गुमराह करने वाली बातें हैं। उन्होंने कहा कि देश में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित है। देश में मुसलमान अपने धार्मिक त्योहार, नमाज, रोजा, हज, जकात, जुलूस और उर्स आदि कार्यक्रम आजादी से मनाता है। कोई भी व्यक्ति या हुकूमत इन धार्मिक कार्यक्रमों में कोई भी बाधा नहीं डालती। रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए मौलाना ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड वक्फ संशोधन बिल के विरोध में जंतर-मंतर दिल्ली पर धरना प्रदर्शन करने जा रहा है। धरना प्रदर्शन करना, अपनी आवाज बुलंद करना हर व्यक्ति को संविधान ने यह अधिकार दिए हैं। मगर रमजान का महीना खुदा की इबादत के लिए है, धरना प्रदर्शन के लिए नहीं। साल के 12 महीनों में रमजान के माह में मुसलमान पवित्रता के साथ रोजा रखता है। नमाज पढ़ता है, कुरआन शरीफ की तिलावत करता है। ऐसी स्थिति में रमजान शरीफ के दिनों में धरना-प्रदर्शन का आयोजन करना, लोगों को धार्मिक कार्य से रोककर राजनीतिक काम में लगाना है। साल के 11 महीनों में किसी दिन भी धरना प्रदर्शन किया जा सकता था। रमजान के महीने में ही क्यों आयोजन किया गया। वक्फ क्या होता है? वक्फ कोई भी चल या अचल संपत्ति हो सकती है, जिसे इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिक कार्यों के लिए दान कर सकता है। इस दान की हुई संपत्ति की कोई भी मालिक नहीं होता है। दान की हुई इस संपत्ति का मालिक अल्लाह को माना जाता है। लेकिन, उसे संचालित करने के लिए कुछ संस्थान बनाए गए है। वक्फ कैसे किया जा सकता है? वक्फ करने के अलग-अलग तरीके हो सकते हैं। जैसे- अगर किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक मकान हैं और वह उनमें से एक को वक्फ करना चाहता है तो वह अपनी वसीयत में एक मकान को वक्फ के लिए दान करने के बारे में लिख सकता है। ऐसे में उस मकान को संबंधित व्यक्ति की मौत के बाद उसका परिवार इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उसे वक्फ की संपत्ति का संचालन करने वाली संस्था आगे सामाजिक कार्य में इस्तेमाल करेगी। इसी तरह शेयर से लेकर घर, मकान, किताब से लेकर कैश तक वक्फ किया जा सकता है। सरकार ने जो वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया है वो क्या है? पिछले कई दिनों से चर्चा थी कि सरकार संसद में वक्फ बोर्ड में संशोधन से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 पेश किया। 40 से अधिक संशोधनों के साथ, वक्फ (संशोधन) विधेयक में मौजूदा वक्फ अधिनियम में कई भागों को खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, विधेयक में वर्तमान अधिनियम में दूरगामी परिवर्तन की बात कही गई है। इसमें केंद्रीय और राज्य वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी शामिल है। इसके साथ ही किसी भी  धर्म के लोग इसकी कमेटियों के सदस्य हो सकते हैं। अधिनियम में आखिरी बार 2013 में संशोधन किया गया था।  

मुंबई के लिए खासतौर पर जारी हुआ FASTag का नया नियम

मुंबई फास्टैग को लेकर नया नियम जारी किया गया है। यह नियम खासतौर पर मुंबई के लिए है, जो कि 1 अप्रैल 2025 से सभी टोल प्लाजा पर लागू हो जाएगा। इस नए नियम के तहत FASTag को मुंबई में अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से ट्रैफिक को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र राज्य रस्ते विकास महामंडल (MSRDC) ने सभी टोल प्लाजा पर FASTag ओनली सिस्टम लागू किया है। आसान हो जाएगी डिजिटल पेमेंट सुविधा इसका मकसद टोल भुगतान को आसान बनाना और टोल बूथ पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करना है। ऐसा माना जा रहा है कि यह डिजिटल टोल सिस्टम पेमेंट प्रक्रिया को फास्ट बनाएगा और मैनुअल टोल कलेक्शन में होने वाली देरी को कम करेगा। फास्टैग न होने पर देना होगा दोगुना टोल रिपोर्ट की मानें, तो जिनके पास FASTag नहीं होगा, उन्हें दोगुना टोल देना होगा। फिर चाहे, वो नकद, क्रेडिट या फिर डेबिट कार्ड या UPI से भुगतान करें। मतलब हर गाड़ी पर फास्टैग होना चाहिए। यह नियम नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की तरफ से लागू किया गया है, जो देशभर में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है और मैन्युअल टोल को धीरे-धीरे हटा रही है। सरकार ने इसकी अधिसूचना पहले ही जारी कर दी है। स्कूल बस, हल्के मोटर वाहन और राज्य परिवहन बस को मुंबई के 5 मेन प्वाइंट पर FASTag से छूट दी गई है। टेक्नोलॉजी की जरूरत पर दिया जोर इस नीति को डिजिटल पेमेंट में बदलाव की मुश्किलों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कुछ लोगों का मानना था कि यह उन लोगों के लिए अनुचित है, जो डिजिटल साक्षर नहीं हैं। लेकिन कोर्ट ने इसे बरकरार रखा और कहा कि यह वाहन मालिकों के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता। एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने टेक्नोलॉजी को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया, जो आज के समय की मांग है। टोल कलेक्शन में होगी पारदर्शिता यह फैसला डिजिटल बदलाव की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है। FASTag का यह कदम न सिर्फ ट्रैफिक जाम को कम करेगा, बल्कि फ्यूल के खर्च को भी कम करेगा और टोल कलेक्शन में पारदर्शिता में बढ़ावा मिलेगा। यह सिस्टम उन लोगों के लिए चुनौती हो सकती है, जो अभी तक डिजिटल पेमेंट से वाकिफ नहीं हैं।

हमास ने इजरायली कैदी की रिहाई और चार अन्य बंधकों के शवों की वापसी का भी प्रस्ताव दिया, रखी तीन शर्तें

हमास हमास ने हाल ही में इजराइल के प्रति एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें गाजा पट्टी में हालिया तनाव को कम करने के लिए कई अहम शर्तें रखी हैं. इस प्रस्ताव के तहत हमास ने राफा क्रॉसिंग के खुलने और मानवीय मदद की एंट्री को प्रमुखता देने की पेशकश की है, साथ ही गाजा पट्टी में लगभग दो महीने के लिए युद्धविराम के विस्तार को भी शामिल किया है. मसलन, इन शर्तों के आधार पर एक इजरायली कैदी की रिहाई और चार अन्य बंधकों के शवों की वापसी का भी प्रस्ताव दिया गया है. शनिवार को हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस खबर की पुष्टि की. हमास के अधिकारी ने आगे बताया कि उन्होंने युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण पर वार्ता की मांग भी की है, जिसका उद्देश्य स्थायी रूप से हिंसा खत्म की जा सकती है.   हमास का प्रतिनिधिमंडल मिस्र रवाना ये प्रस्ताव औपचारिक रूप से इजराइली पक्ष को भेजे जा चुके हैं और अब उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है. हमास ने शुक्रवार को ऐलान किया कि उनका एक वार्ता प्रतिनिधिमंडल मिस्र के अधिकारियों से मिलने काहिरा जा रहा है. इसका उद्देश्य वार्ता और युद्धविराम समझौते के क्षेत्र में डेवलपमेंट की समीक्षा करना है. इजरायल-हमास में गाजा में युद्धविराम पर हुआ था करार इजरायल और हमास के बीच तीन चरण का युद्धविराम समझौता पहले से ही मिस्र, कतर, और अमेरिका की मध्यस्थता में प्रभावी हुआ था. हालांकि, इसका दूसरा चरण जब से रुका हुआ है, तब पहली 42-दिन की अवधि मार्च 1 को समाप्त हो गई. इजरायल ने गाजा में मानवीय मदद रोकी, बिगड़े हालात मार्च 2 से इजराइल ने गाजा में सहायता और खाद्य आपूर्ति को रोक दिया, जिसके बाद से क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया है. हमास और इजरायल के बीच इस प्रस्ताव ने एक नई वार्ता के रास्ते खोले हैं. यह प्रस्ताव, हमास की उच्च प्रायरिटी के साथ, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राहत पैकेज और मानवीय सहायता हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है. अगर दोनों पक्षों में इन शर्तों पर बातचीत पाजिटिव रहती है तो गाजा में शांति स्थापित करना आसान हो सकता है.  

बीजेपी MLA बोलीं- ये लोग वहां मांस और शराब परोस रहे, केदारनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की तैयारी

देहरादून केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस संबंध में केदारनाथ की भाजपा विधायक आशा नौटियाल ने जानकारी दी है. विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि कुछ गैर-हिंदू तत्व धार्मिक स्थल केदारनाथ धाम की पवित्रता को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग वहां मांस, मछली और शराब परोसने जैसे कामों में लिप्त हैं, जिससे धाम की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों को चिह्नित कर उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई जा रही है. बैठक में सामने आया ये सुझाव बीजेपी विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि हाल ही में प्रदेश के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने इस विषय पर अधिकारियों और स्थानीय लोगों के साथ बैठक की थी. बैठक में यह सुझाव आया कि गैर-हिंदू तत्वों द्वारा केदारनाथ धाम को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं. इसलिए ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. बीजेपी पर कांग्रेस का तीखा पलटवार उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि यह शिव भूमि है, उत्तराखंड ही नहीं, देशभर में एक तरफ द्वारका और पुरी में भगवान विष्णु विराजमान हैं. एक तरफ रामेश्वरम हैं, तो दूसरी तरफ उत्तराखंड में केदारनाथ-बद्रीनाथ हैं. जहां हर धार में देवालय है और हर नदी घाड़ में शिवालय है, वहां आप किस-किस को वर्जित करेंगे. और ये संकीर्णता क्यों? हरीश रावत ने कहा कि बीजेपी के नेताओं को सनसनीखेज बयान देने की आदत पड़ गईं है, जिन्हें कोई जानता भी नहीं था, वो भी मीडिया की कृपा से रातोरात चर्चित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि आशाजी ने सोचा कि मैं पीछे क्यों रह जाऊं, इसलिए उन्होंने भी बयान दे दिया. हरीश रावत ने कहा कि अब शराब-मांस क्यों आ रहा है, आप सरकार हैं तो इसे आप रोकिए. मैं तो दूसरे धर्म के ऐसे लोगों को भी जनता हूं, जो हमेशा मंदिरों और आस्था वाली जगह पर पहले जूते उतार देते हैं, कभी-कभी हम भूल जाते हैं.  

नाइटक्लब में लगी भीषण आग, 50 लोगों की मौत, आग लगते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और भगदड़

स्कोप्जे उत्तरी मैसेडोनिया के कोकानी में एक नाइटक्लब में भीषण आग लग गई। आग में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी। देश के प्रधानमंत्री ने इस दुखद घटना पर अफसोस जताते हुए लोगों से इस दुख की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की अपील की है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया कि नाइटक्लब में एक कॉन्सर्ट के दौरान लगभग 1,500 लोग मौजूद थे, जब अचानक आग लग गई। आग तेजी से छत और बिल्डिंग के अन्य हिस्सों में फैल गई, जिससे पूरा नाइटक्लब जलकर राख हो गया। आग लगते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ के कारण भी कई लोगों की मौत हो गई। इस हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि मृतकों और घायलों की संख्या का अभी भी आकलन किया जा रहा है। बचाव दल घटनास्थल पर मौजूद है और राहत कार्य जारी है। इस घटना पर उत्तरी मैसेडोनिया के प्रधानमंत्री ह्रिस्टिजन मिकोस्की ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “गहरे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि मुझे कोकानी में हुई भयानक त्रासदी की खबर मिली। मैसेडोनिया के लिए यह एक कठिन और बहुत दुखद दिन है! इतने सारे युवा जीवन की अपूरणीय हानि है।” उन्होंने आगे कहा, “दुख के इस समय में, हमारी संवेदनाएं उन लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं और मृतकों के परिवारों को इस अकल्पनीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान किए जाने की प्रार्थना करता हूं। आम लोग और सरकार उनके दर्द को कम करने और इन कठिन क्षणों में उनकी मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” पीएम ने हर संभव सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा, “मैं सभी सक्षम संस्थानों – स्वास्थ्य सेवाओं, पुलिस, स्थानीय अधिकारियों – से घायलों की मदद के लिए तत्काल उपाय करने और प्रभावित परिवारों की सहायता करने का आह्वान करता हूं। सरकार पूरी तरह से सक्रिय है और परिणामों से निपटने और इस त्रासदी के कारणों का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।” पीएम ने लोगों से इस दुख की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की अपील करते हुए कहा, “गहरे दुख के इस समय में, जब हमारे दिल इस भयानक त्रासदी के दर्द से टूट गए हैं, मैं एकजुटता, मानवता और जिम्मेदारी का आह्वान करता हूं। ईश्वर पीड़ितों और घायलों के परिवारों और मैसेडोनिया के लोगों के साथ रहें!”

RSS की अहम भूमिका, समाज में इसके योगदान और अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की: पीएम मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मशहूर अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रीडमैन के बीच बातचीत का पॉडकास्ट आज रविवार को रिलीज हो गया है. इस बातचीत में पीएम मोदी ने कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. इसमें पीएम मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की उनके जीवन में अहम भूमिका, समाज में इसके योगदान और अपने व्यक्तिगत अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की. लेक्स ने उनसे सवाल पूछा कि जब आप आठ साल के थे, तब RSS में शामिल हो गए थे, जो हिंदू राष्ट्रवाद के विचार का समर्थन करता है. क्या आप मुझे आरएसएस के बारे में बता सकते हैं? आप पर और आपके राजनीतिक विचारों के विकास पर उनका क्या प्रभाव पड़ा? इसके जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि बचपन से ही मुझे हमेशा किसी न किसी काम में लगे रहने की आदत थी. मुझे याद है कि मकोशी नाम का एक आदमी था, मुझे उसका पूरा नाम ठीक से याद नहीं है, मुझे लगता है कि वह सेवा समूह का हिस्सा थे. वह अपने साथ एक ढफली जैसा रखते थे. वह अपनी गहरी, दमदार आवाज में देशभक्ति के गीत गाते थे. जब भी वह हमारे गांव में आते थे तो अलग-अलग जगहों पर कार्यक्रम करते थे. मैं उनके पीछे पागलों की तरह दौड़ता रहता था, बस उनके गाने सुनने के लिए. मैं पूरी रात उनके देशभक्ति के गाने सुनता रहता था. मुझे इसमें मज़ा आता था, मुझे नहीं पता क्यों, लेकिन बस मज़ा आता था. ‘संघ को समझना इतना सरल नहीं’ उन्होंने कहा कि हमारे गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक शाखा थी, जहां देशभक्ति के गीत चलते थे. उन गीतों की कुछ बातें मुझे बहुत छू गईं. और इस तरह मैं आरएसएस का हिस्सा बन गया. आरएसएस में हमें जो मूल मूल्य दिए गए, उनमें से एक था कि जो भी करो, उसे उद्देश्य के साथ करो. राष्ट्र के योगदान के लिए करो. जैसे मैं पढ़ाई करूं तो इतनी करूं की देश के काम आए. जब मैं व्यायाम करूं तो इतना करूं कि मेरा शरीर भी देश के काम आए. ये संघ के लोग सिखाते रहते हैं. संघ एक बहुत बड़ा संगठन है. यह अब अपनी 100वीं वर्षगांठ के करीब है. इतना बड़ा स्वयंसेवी संगठन शायद दुनिया में कहीं और मौजूद नहीं है. करोड़ों लोग इससे जुड़े हुए हैं. लेकिन संघ को समझना इतना सरल नहीं है. इसके कार्य की प्रकृति को सही मायने में समझने के लिए प्रयास करना चाहिए. किसी भी चीज से ज़्यादा, संघ आपको एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है जिसे वास्तव में जीवन में एक उद्देश्य कहा जा सकता है. पीएम मोदी ने कहा कि दूसरी बात, देश ही सब कुछ है और जनसेवा ही ईश्वर की सेवा है. यही वैदिक काल से कहा जाता रहा है. यही हमारे ऋषियों ने कहा है, यही विवेकानंद ने कहा है और यही बातें संघ के लोग करते हैं. तो स्वयंसेवक को कहा जाता है कि तुम्हें जो संघ से प्रेरणा मिली है, उससे समाज के लिए कुछ करना चाहिए.आज, उस भावना से प्रेरित होकर कई पहल चल रही हैं. जैसे कुछ स्वयंसेवकों ने सेवा भारती नामक संगठन की स्थापना की. यह संगठन उन झुग्गी-झोपड़ियों और बस्तियों की सेवा करता है जहां सबसे गरीब लोग रहते हैं, जिन्हें वे सेवा समुदाय कहते हैं. मेरी जानकारी के अनुसार, वे बिना किसी सरकारी सहायता के केवल सामुदायिक सहयोग से, लगभग एक 1 लाख 25 हजार सेवा परियोजनाएं चलाते हैं. वे वहां समय बिताते हैं, बच्चों को पढ़ाते हैं, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं, अच्छे संस्कार देते हैं और इन समुदायों में स्वच्छता को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते हैं. यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है. ‘संघ ने आदिवासी इलाकों में खोले 70 हजार स्कूल’ उन्होंने कहा कि इसी तरह, संघ द्वारा पोषित कुछ स्वयंसेवक वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से आदिवासी समुदायों की सेवा के लिए समर्पित हैं. वे आदिवासियों के बीच रहते हैं, उनके कल्याण के लिए काम करते हैं. उन्होंने दूरदराज के आदिवासी इलाकों में 70,000 से ज़्यादा एक शिक्षक वाले स्कूल खोले हैं. अमेरिका में भी कुछ लोग हैं जो इनके लिए लगभग 10 या 15 डॉलर का दान करते हैं. और वे कहते हैं, ‘इस महीने एक कोका-कोला न पिएं और उस पैसे को एक शिक्षक वाले स्कूल में दान करें.’ अब कल्पना करें, आदिवासी बच्चों को शिक्षित करने के लिए समर्पित 70,000 एक शिक्षक स्कूल. कुछ स्वयंसेवकों ने शिक्षा में क्रांति लाने के लिए विद्या भारती की स्थापना की है. आज, वे लगभग 25,000 स्कूल चलाते हैं, लगभग 30 लाख छात्रों को शिक्षित करते हैं, और मेरा मानना ​​है कि इस पहल से करोड़ों छात्रों को लाभ हुआ है, जो अविश्वसनीय रूप से कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. शिक्षा के साथ-साथ, मूल्यों को प्राथमिकता दी जाती है, और छात्र जमीन से जुड़े रहते हैं, कौशल सीखते हैं ताकि वे समाज पर बोझ न बनें. यानी, जीवन के हर पहलू में, चाहे वह महिलाएँ हों, युवा हों या फिर मज़दूर हों, RSS ने भूमिका निभाई है. ‘संघ से मुझे जीवन के संस्कार मिले’ पीएम मोदी ने कहा कि सदस्यता के आकार के संदर्भ में, अगर मैं ऐसा कहूं तो हमारे पास भारतीय मज़दूर संघ है. इसके लगभग 50,000 संघ हैं, जिनके देश भर में लाखों सदस्य हैं. शायद, पैमाने के संदर्भ में, दुनिया में इससे बड़ा कोई मज़दूर संघ नहीं है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वे किस तरह का दृष्टिकोण अपनाते हैं. ऐतिहासिक रूप से, वामपंथी विचारधाराओं ने दुनिया भर में मज़दूर आंदोलनों को बढ़ावा दिया है. और उनका नारा क्या रहा है? 

किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति के आधार पर नहीं, बल्कि गुणों और कार्यों से किया जाना चाहिए: नितिन गडकरी

नई दिल्ली केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी जाति, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि उसके गुणों और कार्यों से किया जाना चाहिए। ‘कभी भी जातिवाद की राजनीति को बढ़ावा नहीं देंगे…’ बता दें कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने  सेंट्रल इंडिया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। गडकरी ने अपने जीवन और राजनीति से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया कि वह कभी भी जातिवाद की राजनीति को बढ़ावा नहीं देंगे, चाहे इसका उनके राजनीतिक करियर पर क्या भी असर पड़े। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण अपने सिद्धांतों और मूल्यों को बनाए रखना है। ‘जाति, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं, बल्कि कार्यों और गुणों से बनती है पहचान’ गडकरी ने आगे कहा कि समाज को जाति, धर्म और भाषा के नाम पर बांटने की बजाय, हमें व्यक्ति के गुणों और काबिलियत को प्राथमिकता देनी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी जाति, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं, बल्कि उसके कार्यों और गुणों से बनती है। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीति में जाति आधारित पहचान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन उन्होंने दोहराया कि वह इस तरह की राजनीति से दूर रहेंगे, चाहे इससे उन्हें वोट मिले या नहीं। गडकरी ने कहा, “मैं राजनीति में हूं और यहां ये सब चलता है, लेकिन मैं इसे नहीं मानता, चाहे इससे मुझे वोट मिले या न मिले।” ‘चुनाव हारने से जिंदगी खत्म नहीं होती…’ गडकरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई लोग जाति के आधार पर वोट मांगते हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। उन्होंने सभा में कहा, “मैंने 50,000 लोगों से कहा था – जो करेगा जात की बात, उसके कस के मारूंगा लात।” उनके इस बयान पर कुछ लोगों ने चेतावनी दी थी कि इससे उन्हें नुकसान हो सकता है, लेकिन गडकरी ने कहा कि वह अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “चुनाव हारने से जिंदगी खत्म नहीं होती, लेकिन अपने विचारों से समझौता नहीं कर सकता।”  

इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग भारत में सबसे बड़ा विनिर्माण क्षेत्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा: एस कृष्णन

नई दिल्ली इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग दुनिया भर में और भारत में सबसे बड़ा विनिर्माण क्षेत्र बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि तमिलनाडु का ‘इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर’ वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत का नेतृत्व करने वाला एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। यह बयान कृष्णन ने केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा अनुबंध निर्माण फर्म, जेटवर्क इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सुविधा के उद्घाटन के दौरान दिया। यह कार्यक्रम श्रीपेरंबदूर में आयोजित किया गया था जिसमें तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा, जेटवर्क के सीईओ और सह-संस्थापक अमृत आचार्य और इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस के अध्यक्ष जोश फॉल्गर ने भी भाग लिया। एस कृष्णन ने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य तय किया है, और तमिलनाडु की पूरी भागीदारी के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत या एक चौथाई इस क्षेत्र में उत्पादन के माध्यम से पूरा किया जाना चाहिए।   कृष्णन ने कहा कि तमिलनाडु में उच्च गुणवत्ता वाले मानव संसाधन और बढ़ती विनिर्माण क्षमता के कारण कई प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता यहां अपनी उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने के लिए इच्छुक हैं। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के उद्योग मंत्री टीआरबी राजा ने भी राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में योगदान को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डाला। इस बयान से यह साफ है कि तमिलनाडु राज्य का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में महत्वपूर्ण स्थान बन चुका है और आने वाले वर्षों में यह भारत के विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।  

भारत पहुंचे न्यूजीलैंड के PM लक्सन, रायसीना डायलॉग 2025 में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन रविवार को पांच दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे। केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। वह रायसीना डायलॉग 2025 में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर लक्सन 16 से 20 मार्च तक देश में रहेंगे।   कल पीएम नरेंद्र मोदी से करेंगे मुलाकात दौरे से पहले न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा था कि वह भारत के साथ एक व्यापक आर्थिक साझेदारी पर जोर देंगे और दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। लक्सन का यह पहला भारत दौरा है। उनके साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी है, जो न्यूजीलैंड के किसी भी प्रधानमंत्री के साथ अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल है। उनकी कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होनी है।   व्यापक आर्थिक साझेदारी पर करेंगे चर्चा: क्रिस्टोफर लक्सन पिछले हफ्ते लक्सन ने कहा था, मैं चाहता हूं कि भारत के साथ एक व्यापक आर्थिक साझेदारी हो। हम इस पर चर्चा करेंगे कि यह आगे कैसे बढ़ सकती है। हम भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहते हैं। लक्सन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को महत्वपूर्ण ताकत बताया था। उन्होंने कहा था, भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति है और मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस पर चर्चा करूंगा कि हम अपने क्षेत्र में शांति और समृद्धि को बनाए रखने के लिए मिलकर क्या कर सकते हैं। रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र में होंगे मुख्य अतिथि विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को बताया था कि पीएम मोदी और उनके न्यूजीलैंड के समकक्ष की मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। इसके अलावा वह 17 मार्च को ही नई दिल्ली में होने वाले 10वें रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री के साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आएगा जिसमें मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी दिग्गज, मीडिया और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्य शामिल होंगे। पीएम मोदी अतिथि के सम्मान में दोपहर भोज आयोजित करेंगे। लक्सन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। लक्सन 19-20 मार्च को मुंबई भी जाएंगे और फिर वेलिंगटन लौटेंगे।

अमित शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन की समीक्षा की

गुवाहाटी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुवाहाटी के एक होटल में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और डीजीपी के साथ बैठक की। इसमें तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई। राष्ट्रपति शासन वाले मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला बैठक में शामिल हुए। असम के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर गुवाहाटी में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र के सात मुख्यमंत्री भाग ले रहे हैं, जबकि मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर को छोड़कर पांच राज्यों के डीजीपी मौजूद हैं। इसमें कई पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद हैं। आठ राज्यों में से प्रत्येक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के कार्यान्वयन पर केंद्रीय गृह मंत्री को अद्यतन करने के लिए प्रस्तुति दे रहा है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बैठक का उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों में पुलिस, जेल, अदालतों, अभियोजन और फोरेंसिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना है। इस दौरान शाह ने असम सीआईडी की ओर से तैयार और असम सरकार से प्रकाशित पुस्तक ‘न्यू क्रिमिनल लॉज : स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स एंड रूल्स’ का विमोचन किया।  

रियासी में दर्दनाक हादसा, पलटी बस, 22 महिला समेत 30 यात्री घायल, दो लोग गंभीर रूप से घायल

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के रियासी में रविवार को एक मिनी बस के पलट जाने से 30 लोग घायल हो गए हैं। इनमें से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों को जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में अधिकतर महिलाएं थीं। बताया जा रहा है कि बस पहाड़ी रास्ते से जा रही थी। नियंत्रण खोने से बस खाई में पलट गई। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना तारा मोड़ के पास हुई जब बस राजौरी जिले के मुगला से रियासी के पौनी जा रही थी। दो की हालत गंभीर, जम्मू अस्पताल में रेफर उन्होंने बताया कि दुर्घटना में 22 महिलाओं समेत 30 यात्री घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि गंभीर रूप से घायलों में से दो रफाकत अली और गौतम शर्मा को विशेष उपचार के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल जम्मू रेफर कर दिया गया है। अधिकारी के मुताबिक, यह दुर्घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई है। आगे की जांच के लिए मामला दर्ज किया गया है। घायलों की हुई पहचान     सपना देवी (25) पत्नी विक्की कुमार, अल्ल्या     अंजलि शर्मा (20), पुत्री अजय कुमार, मोघला     ​​बलवंत राज (54) पुत्र मुंशी राम, मंगल (तरेणु)     बलबीर सिंह (35) पुत्र राम सिंह, मल्लूरियां     अंजू देवी (45) पत्नी कमल सिंह, जुंगरियाल     मंजू देवी (45) पत्नी बलदेव सिंह, जुंगरियाल     मंत्रा देवी (33) पत्नी रमेश कुमार, जुंगरियाल     राज कुमारी (50) पत्नी शेर सिंह, जुंगरियाल     फरजाना कौसर (21) पत्नी मोहम्मद अख्तर, अल्ल्या     सुमन देवी (30) पत्नी जसबीर सिंह, मल्लूरियां     बिट्टो देवी (50) पत्नी कृष्ण लाल, मोघला     ​​कमला देवी (85) पत्नी सुरम सिंह, मोघला     ​​चंचलो देवी (55) पत्नी पूरन सिंह, जुंगरियाल     सुभाष सिंह (44) पत्नी संत राम, जुंगेरियल     रफाकत अली (25) पुत्र अब्दुल शकूर, जुंगेरियल     रीता देवी (35) पत्नी पप्पू सिंह, मोघला     ​​गणेश कुमार (37) पुत्र तेज पॉल, खेयोन     गौतम शर्मा (6) पुत्र सुनील कुमार, केरल तेरथ     बबली देवी (29) पत्नी सुनील कुमार, केरल तेरथ     गुड्डो देवी (60) पत्नी चरण दास, जुंगेरियल     कमलेश कुमारी (42) पत्नी केवल कृष्ण, जुंगेरियल     कमला देवी (30) पत्नी कृष्ण सिंह, जुंगेरियल     पुष्पा देवी (30) पत्नी केवल कृष्ण, जुंगेरियल     बिमला देवी (60) पत्नी सुरम चंद, जुंगेरियल     किशो देवी (62) पत्नी बर्फी लाल, जुंगेरियल     मोहिनी देवी (50) पत्नी स्वर्ण सिंह, उम्बलीगल्ला     तारेनू के अब्दुल रशीद के पुत्र मोहम्मद अशरफ (29)     मोहम्मद फारूक (40) अल्लिया के जिम्दी चौधरी का पुत्र     मांगल के बलवंत राज की पत्नी गुड्डो देवी (40)     मांगल के गुलशन कुमार की पत्नी अनु शर्मा (23)  

रमाकांत रथ भारतीय साहित्य जगत की एक प्रमुख विभूति थे, जताया दुःख: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रख्यात ओडिया कवि पद्म भूषण रमाकांत रथ के निधन पर दुख जताया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि रमाकांत रथ भारतीय साहित्य जगत की एक प्रमुख विभूति थे। उन्हें पद्म भूषण सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यालय ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”प्रख्यात कवि रमाकांत रथ जी के निधन के बारे में जानकर मुझे बहुत दुख हुआ है। रमाकांत रथ भारतीय साहित्य जगत की एक प्रमुख विभूति थे। उन्हें पद्म भूषण सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। ओडिया साहित्य में अपने चिरस्मरणीय योगदान द्वारा उन्होंने अखिल भारतीय साहित्य को समृद्ध किया है। मैं उनके शोक संतप्त परिवारजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।” प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा,” रमाकांत रथ जी ने एक प्रभावी प्रशासक और विद्वान के रूप में अपनी पहचान बनाई है। उनकी रचनाएं, विशेषकर कविताएं, समाज के सभी वर्गों में व्यापक रूप से लोकप्रिय हैं। उनके निधन से बहुत दुःख हुआ है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। ” इससे पहले ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रमाकांत रथ के निधन पर शोक जताया। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा,”मुझे पद्म भूषण से सम्मानित, पूर्व सिविल सेवक एवं लेखक रमाकांत रथ के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ है। उन्हें भारतीय सिविल सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार राष्ट्रीय सम्मान के साथ किया जाएगा। मैं भगवान जगन्नाथ से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं।”

227 साल पुराने इस कानून को एलियन एनिमी ऐक्ट 1798 के तौर पर जाना जाता है, जिसे नहीं लागू कर पाए ट्रंप

वाशिंगटन निर्वासन में तेजी लाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18वीं सदी के एक कानून का इस्तेमाल किए जाने की घोषणा की लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद एक संघीय अदालत के न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन को इसे लागू करने से रोक दिया। शपथ लेते ही डोनाल्ड ट्रंप ने अवैध प्रवासियों को वॉर्निंग दे दी थी। इसके तत्काल बाद ही उनपर कार्रवाई शुरू हो गई और विमानों में भर-भरकर लोगों का निर्वासन होने लगा। सैकड़ों भारतीयों को भी अमेरिका से निकाला जा चुका है। क्या है एलियन एनिमी ऐक्ट डोनाल्ड ट्रंप इस काम को तेज करने के लिए 1798 का एक कानून लागू करना चाहते थे। 227 साल पुराने इस कानून को एलियन एनिमी ऐक्ट 1798 के तौर पर जाना जाता है। फ्रांस से तनाव के बीचअमेरिका की सरकार ने यह कानून बनाया था। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी को भी निर्वीसित करने का अधिकार दिया गया था। अगर ऐसा लगता है कि कोई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है या फिर दुश्मनों के साथ है तो उसे तुरंत निर्वासित किया जा सकता है। इस कानून में कहा गया था कि अगर किसी विदेशी ताकत का आक्रमण होता है या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा खतरा दिखता है तो इस कानून को लागू किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन ने इस कानून का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि वेनेजुएला का एक गिरोह अमेरिका पर आक्रमण कर रहा है और प्रशासन के पास उसके सदस्यों को देश से बाहर निकालने के लिए नई शक्तियां हैं। कोलंबिया जिले के लिए अमेरिकी जिला न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जेम्स ई बोसबर्ग ने कहा कि उन्हें अपना आदेश तत्काल जारी करने की आवश्यकता है क्योंकि सरकार प्रवासियों को पहले से ही एल साल्वाडोर और होंडुरास भेज रही है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ट्रंप की घोषणा के तहत इन प्रवासियों को नए सिरे से निर्वासित किया जा सकता है और उन्हें एल साल्वाडोर तथा होंडुरास में कैद किया जाएगा। अल साल्वाडोर ने इस सप्ताह 300 ऐसे प्रवासियों को स्वीकार करने पर सहमति दे दी जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने गिरोह का सदस्य घोषित किया है। बोसबर्ग ने एसीएलयू और ‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड’ द्वारा दायर मामले की शनिवार शाम सुनवाई करते हुए कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि मैं अब और इंतजार कर सकता हूं और मुझे कार्रवाई करनी होगी।’ इस फैसले से कुछ ही घंटे पहले ट्रंप ने 1798 के ‘एलियन एनीमीज एक्स’ (विदेशी शत्रु अधिनियम) को लागू करते हुए दावा किया कि वेनेजुएला का गिरोह ‘ट्रेन डी अरागुआ’ अमेरिका पर आक्रमण कर रहा है। यह अधिनियम राष्ट्रपति को निर्वासन में बड़े पैमाने पर तेजी लाने के लिए नीतिगत और कार्यकारी कार्रवाई के संबंध में व्यापक छूट देता है। दो सौ साल के इतिहास में केवल तीन बार लागू हुआ कानून अमेरिकी इतिहास में इस अधिनियम का इस्तेमाल अब तक केवल तीन बार हुआ है और वह भी केवल युद्ध के दौरान किया गया है। इससे पहले इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुआ था। उस समय जर्मन और इतालवी लोगों को कैद करने के साथ-साथ जापानी-अमेरिकी नागरिकों को सामूहिक रूप से नजरबंद करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया था।

पाक में बस में विस्फोट, पांच की मौत

क्वेटा पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान के नौशकी में सुरक्षा बलों को लेकर जा रही बस में विस्फोट हो गया। हमले में पांच सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई। जबकि 12 सैन्यकर्मी घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बलूच लिबरेशन आर्मी ने हमले की जिम्मेदारी ली है। वहीं बलूचिस्तान सरकार ने हमले की निंदा की है। पुलिस ने बताया कि पाकिस्तानी सेना की बसें सुरक्षा बलों को लेकर जा रही थीं। स्थानीय पुलिस प्रमुख जफर जमानानी ने बताया कि बलूचिस्तान के नौशकी जिले में नौशकी-दलबंदिन राजमार्ग पर एक बस के पास सड़क किनारे बम विस्फोट हुआ। विस्फोट से पास की एक दूसरी बस भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। मृतकों और घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने हमले की निंदा की। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना एक क्रूर कृत्य है। रिंद ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। रिंद ने कहा कि शत्रु तत्व देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। आतंक के जरिये लोगों का मनोबल नहीं गिराया जा सकता। हम दुख की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं। किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि हमला बलूच लिबरेशन आर्मी ने कराया है। ट्रेन कर ली गई थी हाईजैक मंगलवार को क्वेटा से पेशावर के लिए रवाना हुई जफर एक्सप्रेस को विद्रोहियों ने गुडलार और पीरू कुनरी की पहाड़ी इलाकों के पास एक सुरंग में बंधक बना लिया था। विद्रोहियों ने पटरी को उड़ा दिया और ट्रेन के रुकते ही उस पर कब्जा जमा लिया था। नौ डिब्बों की ट्रेन में 400 से अधिक यात्री सवार थे। बीएलए ने हमले की जिम्मेदारी ली थी और 214 यात्रियों को बंधक बनाने का दावा किया था। विद्रोहियों ने जब ट्रेन पर हमला किया था तब 21 यात्रियों की हत्या कर दी थी। जवाब में सुरक्षा बलों ने अभियान चलाकर सभी 33 हमलावरों को मार गिराया था।  

भारतीय मूल की दो महिलाओं को कनाडा की नई कैबिनेट में मिली बड़ी जिम्मेदारी

कनाडा भारतीय-कनाडाई अनीता आनंद और दिल्ली में जन्मी कमल खेड़ा को कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। पूर्व केंद्रीय बैंकर मार्क कार्नी ने शुक्रवार को कनाडा के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। कार्नी (59 साल) ने प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की जगह ली है। ट्रूडो ने जनवरी में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी। लिबरल पार्टी द्वारा नया नेता चुने जाने तक ट्रूडो सत्ता में बने रहे। भारतीय मूल की महिलाओं को अहम मंत्रालय आनंद को (58) नवाचार, विज्ञान और उद्योग मंत्री बनाया गया है जबकि 36 वर्षीय खेड़ा स्वास्थ्य मंत्री हैं। दिल्ली में जन्मी खेड़ा का परिवार उस समय कनाडा चला गया था जब वह स्कूल की शिक्षा ग्रहण कर थीं। बाद में उन्होंने टोरंटो के यॉर्क विश्वविद्यालय से विज्ञान स्नातक की डिग्री हासिल की। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर चुकी हैं कमल खेड़ा कनाडा के प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर उल्लेख है कि खेड़ा को पहली बार 2015 में ब्रैम्पटन वेस्ट से संसद सदस्य के रूप में चुना गया था। इसमें कहा गया है, ‘मंत्री खेड़ा संसद के लिए चुनी गई सबसे कम उम्र की महिलाओं में से एक हैं। वह एक पंजीकृत नर्स, सामुदायिक स्वयंसेवक और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।’ खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘एक नर्स के रूप में, मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता हमेशा अपने मरीजों की सहायता के लिए मौजूद रहना था और यही मानसिकता मैं स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका में भी हर दिन अपनाऊंगी। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा मुझे पर जताये गये भरोसे के लिए बहुत आभारी हूं।’ राजनीति में आने से पहले, उन्होंने टोरंटो के सेंट जोसेफ हेल्थ सेंटर में एक पंजीकृत नर्स के रूप में काम किया था। पीएम पद की भी दावेदार थीं अनीता आनंद ट्रूडो की जगह अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे बताई गई आनंद ने जनवरी में घोषणा की थी कि वह इस दौड़ से हट रही हैं। आनंद ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा,‘‘मुझे मार्क कार्नी की सरकार में नवाचार, विज्ञान और आर्थिक विकास मंत्री के रूप में शपथ लेने पर गर्व है।’ कनाडा के प्रधानमंत्री की वेबसाइट के अनुसार आनंद को पहली बार 2019 में ओकविले के लिए संसद सदस्य के रूप में चुना गया था और इससे पहले उन्होंने ट्रेजरी बोर्ड के अध्यक्ष, राष्ट्रीय रक्षा मंत्री और सार्वजनिक सेवा और खरीद मंत्री के रूप में कार्य किया था। इसमें कहा गया है कि आनंद ने एक विद्वान, वकील और शोधकर्ता के रूप में काम किया है और वह एक कानूनी शिक्षाविद रही हैं।

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