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अब आम आदमी की टोल समस्या होगी जल्द दूर, नितिन गडकरी ने देश में बड़े बदलाव के दिए संकेत

नई दिल्ली केंद्र सरकार टोल से भी जल्द ही बड़ी राहत देने जा रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऐसे संकेत दिए हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि टोल को लेकर सभी की ‘शिकायतें’ खत्म होने वाली हैं। खास बात है कि सरकार ने बजट 2025 में 12 लाख रुपये की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगाकर बड़ी राहत का ऐलान किया था। मीडिया से बातचीत में गडकरी से जब टोल से राहत को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘जल्द ही मिल जाएगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमारा अध्ययन पूरा हो गया है। हम जल्द ही ऐसी स्कीम लाएंगे कि सभी लोगों को टोल से एक प्रकार से तकलीफें खत्म हो जाएंगी।’ हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया, लेकिन कहा, ‘पर मैं जल्द ही स्कीम जारी करके इसे खत्म करूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मेरे भी बहुत कार्टून निकलते हैं। सोशल मीडिया पर लोग ट्रोल करते हैं। टोल को लेकर लोग नाराज ही हैं। मैं बस इतना ही कह सकता हूं आने वाले कुछ ही दिनों में यह नाराजगी दूर हो जाएगी।’ केंद्रीय मंत्री ने टोल कलेक्शन के तरीके में भी बदलाव के संकेत दिए हैं। जब टोल टैक्स के लिए बार-बार रुकने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, ‘देखिए 99 फीसदी फास्टैग हैं। रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी कहीं।’ उन्होंने संकेत दिए हैं कि इसे सैटेलाइट से जोड़ने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार कई नीतियां जारी करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बजट पेश करने के दौरान मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए 12 लाख रुपये की सालाना आय पर कर छूट की घोषणा की है। वेतनभोगी करदाताओं के लिए 75,000 रुपये की मानक कटौती के साथ अब 12.75 लाख रुपये तक कोई कर नहीं लगेगा। साथ ही सरकार इनकम टैक्स को लेकर नया बिल भी इस सप्ताह पेश करने जा रही है।

विजय माल्या ने दावा किया है कि किंगफिशर एयरलाइंस पर करीब 6200 करोड़ का कर्ज था, उससे कहीं अधिक बैंकों ने वसूल लिए

कर्नाटक भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने कर्नाटक हाई कोर्ट में किंगफिशर एयरलाइंस के खिलाफ चल रही कर्ज वसूली प्रक्रिया को चुनौती दी है। विजय माल्या ने दावा किया है कि किंगफिशर एयरलाइंस पर करीब 6200 करोड़ का कर्ज था। बैंक के अधिकारियों ने प्रारंभिक कर्ज की राशि की तुलना में कहीं अधिक वसूल लिया है। आपको बता दें कि यह याचिका 3 फरवरी 2025 को दायर की गई थी। इस मामले पर न्यायमूर्ति आर देवदास द्वारा बुधवार को संक्षिप्त सुनवाई की गई। विजय माल्या के लिए पेश हुए वरिष्ठ वकील साजन पूवैया ने हाईकोर्ट को बताया कि वह किसी अंतरिम राहत के लिए नहीं कह रहे हैं, जब तक कि संबंधित पक्षों से सुनवाई न हो जाए। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दस बैंकों, एक वसूली अधिकारी और एक एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी को नोटिस जारी किया है। आपको बता दें कि इन्हें याचिका में पार्टी बनाया गया है। विजय माल्या ने इस सप्ताह की शुरुआत में कई राष्ट्रीय और प्राइवेट बैंकों (जिनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और एक एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी शामिल हैं) के खिलाफ उनकी वसूली प्रक्रिया को चुनौती दी थी। अपनी याचिका में माल्या ने कोर्ट से यह अनुरोध किया कि फिलहाल इस रिकवरी की प्रक्रिया को रोकी जाए और अंतरिम स्थगन आदेश जारी किया जाए। पिछले साल दिसंबर महीने में विजय माल्या ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया था कि बैंकों ने 6,203 करोड़ के कर्ज की राशि के अलावा ब्याज भी वसूल लिया है। यह राशि डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित की गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में लोकसभा में यह कहा था कि विजय माल्या की 14,131.6 करोड़ की संपत्तियां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को लौटा दी गई हैं। आपको बता दें कि विजय माल्या 2016 में ब्रिटेन भाग गए थे। भारत में किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए कई बैंकों के कर्जों में डिफॉल्ट के कारण वह वांटेड हैं।

US से 104 भारतीय डिपोर्ट, अमृतसर पहुंचा विमान, गृह मंत्रालय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच होगी मीटिंग

अमृतसर डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका से डिपोर्ट किए गए 104 प्रवासी भारतीयों को लेकर यूएस मिलिट्री एयरक्राफ्ट भारत पहुंच गया है. इस विमान ने पंजाब के अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंड किया. विमान के जरिए 79 पुरुष और 25 महिलाएं भारत पहुंचे. जिनमें 13 बच्चे भी शामिल हैं. ख़बरों के मुताबिक पंजाब पुलिस और अमृतसर जिला प्रशासन की टीमें हवाई अड्डे पर मौजूद थे. इसके अलावा एयरपोर्ट के अंदर अमेरिकी दूतावास के कर्मचारी भी थे. जानकारी के मुताबिक, डिपोर्ट किए गए लोगों को वतन वापसी पर गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. जानकारों के मुताबिक जिन लोगों को निर्वासित किया गया है उनमें से ज्यादातर को मैक्सिकन-अमेरिकी सीमा से पकड़ा गया था. ये सभी भारत में अपराधी नहीं हैं. क्योंकि उन्होंने भारत छोड़ने के लिए कानूनी तरीके का इस्तेमाल किया होगा. लेकिन डंकी रूट के जरिए अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश की और पकड़े गए. सूत्रों का कहना है कि पासपोर्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बायोमेट्रिक्स का उपयोग करके उनकी पहचान की जा सकती है. असल में उनसे पूछताछ नहीं की जा सकती. पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पंजाब के 30 निर्वासित लोगों में से अधिकांश गुरदासपुर, अमृतसर और तरनतारन सहित माझा बेल्ट से हैं. जबकि अन्य जालंधर, नवांशहर, पटियाला, मोहाली और संगरूर से हैं. अमेरिकी सैन्य विमान सी-17 पंजाब और पड़ोसी राज्यों के इन अवैध अप्रवासियों को लेकर भारत पहुंच रहा है.  पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने डिपोर्ट होकर भारत लौटने वालों के लिए एयरपोर्ट पर काउंटर बनाए हैं. इस बीच पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने मंगलवार को अमेरिकी सरकार के फैसले पर निराशा व्यक्त की थी. किस राज्य से कितने लोग? इस प्लेन में पंजाब से 30, हरियाणा से 33, गुजरात से 33, महाराष्ट्र से 3, उत्तर प्रदेश के 3 और चंडीगढ़ के 2 लोग हैं. बता दें कि अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासी भारतीयों को लेकर US एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट ने टेक्सास के पास अमेरिकी सैन्यअड्डे से उड़ान भरी. इस प्लेन में 104 अवैध भारतीय प्रवासी हैं. बता दें कि ट्रंप सरकार अवैध प्रवासियों को ले जाने के लिए सैन्य विमान का इस्तेमाल करती रही है. इससे पहले ग्वाटेमाला, पेरू और होंडूरास में भी अमेरिकी मिलिट्री प्लेन से अवैध प्रवासियों को भेजा गया था. मालूम हो कि 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर हुई बातचीत के बाद ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका से अवैध प्रवासी भारतीयों को वापस भारत बुलाने के लिए भारत सही कदम उठाएगा. अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 18000 अवैध प्रवासी भारतीय हैं, जिन्हे भारत डिपोर्ट किया जाना है. ट्रंप के सत्ता में आने के बाद भारत सरकार ने इस समस्या को सुलझाने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई थी. बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले ग्वाटेमाला, पेरू और होंडूरास के अवैध प्रवासियों को भी उनके मुल्क भेज दिया था. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने टेक्सास के अल पासो और कैलिफोर्निया के सैन डिएगो में हिरासत में रखे गए 5000 से अधिक अवैध अप्रवासियों को भी उनके देशों में भेजना शुरू कर दिया है. प्यू रिसर्च सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 7.25 लाख अवैध भारतीय अप्रवासी रहते हैं. यह आंकड़ा अवैध प्रवासियों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या का है. पहले स्थान पर मेक्सिको और दूसरे पर अल सल्वाडोर है. पिछले महीने भारत सरकार ने कहा था कि अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे भारतीय नागरिकों को वापस लेने के मामले में भारत हमेशा तैयार रहा है. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था कि भारत यह जांच कर रहा है कि अमेरिका में कितने भारतीय अवैध रूप से रह रहे हैं और इन्हें वापस भेजा जा सकता है या नहीं. अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा डिपोर्टेशन प्रोग्राम डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा डिपोर्टेशन प्रोग्राम शुरू किया है. इस प्रोग्राम के तहत ट्रंप ने अवैध प्रवासियों को उनके मुल्क भेजने की कवायद शुरू कर दी है. पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि भारत और अमेरिका ने ऐसे लगभग 18000 भारतीयों की शिनाख्त की है, जो अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे हैं. पिछले हफ्ते अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी और अवैध प्रवासियों से जुड़ी समस्या का समाधान करने की इच्छा जताई थी. पवन खेड़ा ने यूपीए शासन की घटना को किया याद सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर उन्होंने एक बयान साझा करते हुए यूपीए शासन की एक घटना को याद किया। उन्होंने कहा कि  जब 2013 में भारतीय राजनयिक देवयानी कोबरागड़े को अमेरिका में “हथकड़ी लगाई गई और कपड़े उतारकर तलाशी ली गई तब भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताई थी।  विदेश सचिव सुजाता सिंह ने अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल के साथ कड़ा विरोध दर्ज कराया था।” उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और राहुल गांधी और सुशील कुमार शिंदू जैसे कांग्रेस नेताओं ने उस समय भारत दौरे पर आए अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार कर दिया था और भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास को दी गई कई सुविधाएं वापस ले ली थीं। डाैंकी लगाकर गए थे युवक जितने भी लोगों को अब अमेरिका की ओर से वापिस भेजा जा रहा है। वह सभी एजेंटों के जरिये डौंकी लगवाकर जाते हैं। इस तरह एजेंट प्रति व्यक्ति 35 से 40 लाख रुपये लेते हैं। इन सभी लोगों को मैक्सिको, पनामा आदि के जंगलों के जरिये अमेरिका में गैर-कानूनी तरीके से प्रवेश करवाया जाता है। यहां तक बहुत सारे ऐसे भी लोग होते हैं जो अमेरिका तक पहुंच ही नहीं पाते और जंगलों में भूख-प्यास के मारे दम तोड़ देते हैं।

विजय माल्या जैसे हाई-प्रोफाइल भगोड़ों का उदाहरण देकर आरोपी को विदेश जाने से रोकने की गलत तुलना की, भड़का कोर्ट

केरल केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक सत्र न्यायालय के आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें एक नशीले पदार्थ मामले के आरोपी को काम के लिए विदेश यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। न्यायमूर्ति वीजी अरुण ने सत्र न्यायाधीश की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल भगोड़ों का उदाहरण देकर आरोपी को विदेश जाने से रोकने का गलत तुलना की है। उन्होंने कहा, “विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे व्यक्तियों के उदाहरण देना अनुचित था।” आरोपी सूर्यानारायणन नशीली दवाओं से संबंधित कानून (NDPS एक्ट) के तहत एक अपराध में चौथे आरोपी हैं। उनके खिलाफ मामला त्रिशूर के अतिरिक्त सत्र न्यायालय-III में विचाराधीन है। उन्हें 6 मार्च 2019 को त्रिशूर जिला सत्र न्यायालय से जमानत दी गई थी। बाद में उन्होंने विदेश में काम करने के लिए यात्रा की अनुमति देने की याचिका दायर की थी, जिसे सत्र न्यायालय ने यह तर्क देते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें भगोड़ों जैसे विजय माल्या और निरव मोदी का उदाहरण देकर विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सत्र न्यायाधीश ने याचिका खारिज करते हुए कहा था, “अगर आरोपी विदेश में फरार हो जाता है तो इसे वापस लाना हमारे लिए बहुत मुश्किल होगा। हम विजय माल्या और नीरव मोदी को भी वापस नहीं ला सकते, जिन्होंने हजारों करोड़ों के वित्तीय धोखाधड़ी की और विदेश में अपनी जिंदगी का आनंद ले रहे हैं। अगर आरोपी वापस नहीं आता है तो उसे कौन लाएगा?” हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि सत्र न्यायालय में 4,000 से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से 1,000 से अधिक मामले पांच साल से पुराने हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर दो साल तक आरोपी के मामले का निस्तारण नहीं किया जा सकता है तो यह अनुचित होगा कि उसे विदेश में काम करने का अवसर नहीं दिया जाए। कोर्ट ने सत्र न्यायालय को आदेश दिया कि आरोपी को विदेश जाने की अनुमति दी जाए, बशर्ते वह किसी वकील के माध्यम से उपस्थित हो और सत्र न्यायालय द्वारा तय किए गए किसी भी अतिरिक्त शर्तों का पालन करे।

ट्रंप का कहना है कि हम गाजा पट्टी को अपने अधिकार क्षेत्र में लेंगे, गाजा खाली कराना और पुनर्निर्माण काम कराना है फोकस

वाशिंगटन इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने व्हाइट हाउस पहुंचे. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत हुई. इसी साल 20 जनवरी को कार्यालय में लौटने के बाद ट्रंप की यह किसी विदेशी नेता के साथ पहली बैठक थी. बैठक के बाद दोनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम चाहते हैं कि अमेरिका गाजा पट्टी का स्वामित्व ले और इसका विकास करे. उन्होंने कहा कि अमेरिका देश युद्धग्रस्त फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा पट्टी पर कब्जा करेगा और इसका विकास करेगा. साथ ही इसका मालिकाना हक रखेगा. वहीं ट्रंप के साथ बोलते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि रिपब्लिकन नेता का विचार ऐसा है जो इतिहास बदल सकता है और ट्रंप गाजा के लिए एक अलग भविष्य की कल्पना करते हैं. गाजा के लोगों को नौकरियां और घर देंगे: ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हम गाजा पर अपना अधिकार जताएंगे और साइट पर मौजूद सभी खतरनाक बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने की जिम्मेदारी लेंगे. हम नष्ट हो चुकी इमारतों को गिरा देंगे और एक ऐसा आर्थिक विकास करेंगे जो क्षेत्र के लोगों को असीमित संख्या में नौकरियां और आवास प्रदान करेगा.” क्षेत्र में किसी भी सुरक्षा शून्यता को भरने के लिए सैनिकों को तैनात करने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हम वही करेंगे जो आवश्यक है. यदि यह आवश्यक है, तो हम ऐसा करेंगे”. ट्रंप ने कहा कि वह अपनी विकास योजना के बाद गाजा में दुनिया भर के लोगों के रहने की कल्पना करते हैं. उन्होंने कहा कि वह मध्य पूर्व की अपनी भावी यात्रा के दौरान गाजा, इज़राइल और सऊदी अरब जाने की योजना बना रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कोई समय निर्दिष्ट नहीं किया. ‘गाजा पूरी तरह विध्वंस स्थल’ जब उनसे उनके प्रस्ताव पर फिलिस्तीनी और अरब नेताओं की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “गाजा की बात कभी कामयाब नहीं हुई. यह पूरी तरह विध्वंस स्थल है. अगर हम सही ज़मीन का टुकड़े को ढूंढ़ सकें और उस क्षेत्र में बहुत सारा पैसा लगाकर कुछ बहुत अच्छी जगहें बना सकें, तो यह पक्का है. मुझे लगता है कि यह गाजा वापस जाने से कहीं बेहतर होगा. यहां के लोग गाजा छोड़ना पसंद करेंगे. मुझे लगता है कि वे रोमांचित होंगे. मुझे नहीं पता कि वे (फिलिस्तीनी) कैसे रहना चाहेंगे.” राष्ट्रपति से जब इस क्षेत्र पर अमेरिका के लंबे समय तक नियंत्रण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं दीर्घकालिक स्वामित्व की स्थिति देखता हूं.” ट्रंप ने सुझाव दिया कि अमेरिका द्वारा ऐसा करने से क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और उन्होंने कहा, “यह कोई हल्के में लिया गया निर्णय नहीं है. मैंने जिन लोगों से बात की है, वे सभी इस विचार से खुश हैं कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पास उस भूमि का एक टुकड़ा हो.” गाजा को लेकर ट्रंप का 5 प्वॉइन्ट प्लान? इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में मुलाकात के बाद प्रेस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने एक बार फिर गाजा पट्टी को खाली करवाने की बात दोहराई. गाजा खाली कराना और पुनर्निर्माण काम कराना है फोकस उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनियों को गाजा पट्टी खाली करनी होगी. उन्हें मिस्र, जॉर्डन और अन्य देशों में स्थाई तौर पर बस जाना चाहिए. अब गाजा रहने लायक नहीं रहा. मैंने सुना है कि गाजा उनके लिए बदकिस्मत है. वे वहां नरक की तरह रहते हैं. वे नरक में रह रहे हैं. गाजा के भविष्य में फिलिस्तीनी नहीं हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई महीनों से गाजा की स्टडी की है. बहुत करीब से स्टडी की है. गाजा में फिलिस्तीनियों के पास कोई विकल्प नहीं है. उनके पास क्या है? वहां बस मलबा है. फिलिस्तीनियों को गाजा के बजाए किसी खूबसूरत जगह शिफ्ट हो जाना चाहिए. हम गाजा पर नियंत्रण हासिल कर वहां मौजूद सभी खतरनाक बिना फटे बमों और अन्य हथियारों को नष्ट करने से लेकर साइट को समतल करने और नष्ट इमारतों का मलबा हटाने की जिम्मेदारी निभाएंगे. गाजा Riviera of Middle East में होगा तब्दील ट्रंप ने कहा कि गाजा को खाली करवाने के बाद यहां पर जोर-शोर से पुनर्निर्माण का कार्य करवाया जाएगा. हम गाजा को Riviera of Middle East में तब्दील कराएंगे. ट्रंप ने कहा कि यह फैसला पूरी गंभीरता से लिया गया है. मैंने जिनसे भी इस ब्लूप्रिंट के बारे में बात की,उन्हें यह पसंद आया है. गाजा पर अमेरिकी कब्जे के बाद इस क्षेत्रा के पुनर्निर्माण और फिर यहां रोजगार के हजारों मौके उपलब्ध कराकर इसका विकास किया जाएगा. गाजा दुनियाभर के लोगों का घर बन सकता है. ट्रंप ने कहा कि हम गाजा को मिडिल ईस्ट का रिवेरा बनाने पर फोकस करेंगे. रिवेरा दरअसल इटली का एक शब्द है, जिसका मतलब है कोस्टलाइन यानी समुद्री तट. फ्रेंच रिवेरा और इटैलियन रिवेरा दुनियाभर में अपने पर्यटन के लिए मशहूर है. इसी तर्ज पर ट्रंप गाजा को पर्यटन हब के तौर पर विकसित करना चाहते हैं. हमास का खात्मा ट्रंप ने कहा कि इजरायल पर हमास के हमले ने कई निर्दोष लोगों की जिंदगियां छिनी है. आज फिलिस्तीनियों ने जो कीमत चुकाई है, उसका जिम्मेदार हमसा ही है. ऐसे में गाजा को आतंक से मुक्त करना होगा. इसके लिए जरूरी है कि गाजा को खाली कराया जाए. ईरान भी है ट्रंप की हिटलिस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति के गाजा को लेकर 5 प्वॉइन्ट ब्लूप्रिंट में ईरान भी है. ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने उन्हें मारने की कोशिश की तो उसे इसका अंजाम भुगतना होगा. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए. ट्रंप ने ईरान की कमर तोड़ने के लिए एक एक्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत भी किए हैं जिसमें अमेरिकी सरकार को ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने के लिए कहा गया है. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल पहले कभी इतना ताकतवर नहीं रहा जबकि ईरान कभी इतना कमजोर नहीं रहा. मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से हमारे इलाके में शांति लाने और हमारे भविष्य को बचाने पर चर्चा की. … Read more

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली धमकी दी कहा अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उस देश को खत्म कर दूंगा

वॉशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने उन्हे मारने की कोशिश की तो वह देश को खत्म कर देंगे। अमेरिका ने ये भी संकेत दिए है कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार से जुड़े परियोजनाओं को बंद नहीं किया तो अमेरिका उसपर और भी प्रतिबंध लगाएगा। ट्रंप ने ईरान पर और भी अधिक दबाव डालने के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए। ईरान को ट्रंप की खुली धमकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अपने सलाहकारों को निर्देश दिया है कि अगर ईरान उनके ऊपर हमला करता है तो उसे तबाह कर दिया जाए। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने मुझे मारने की कोशिश की तो मैं उसे खत्म कर दूंगा। उन्होंने कहा कि ईरान के पास ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के समकक्ष से मुलाकात की इच्छा भी जाहिर की। ट्रंप पर हो चुका है जानलेवा हमला बता दें कि ट्रंप को कई बार ईरान की ओर से धमकी मिल चुकी है। हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर जानलेवा हमला भी हुआ था। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि वह नहीं मानते की हत्या का प्रयास ईरान ने किया था। साल 2020 में ट्रंप ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। इसके बाद से ही ट्रंप की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी काफी अलर्ट रहती है। आशंका जताई जा रही है कि ट्रंप, ईरान की मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। साल 2015 में अमेरिका से जब ईरान का परमाणु समझौता हुआ था, लेकिन 2018 में ट्रंप ने ईरान से परमाणु समझौता तोड़ दिया था। इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते काफी खराब हो गए। ईरान के राष्ट्रपति से मिलने की जताई इच्छा उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता है, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई की तेहरान के साथ समझौता किया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान के अपने समकक्ष से मिलने की इच्छा जताई, ताकि तेहरान को यह समझाने की कोशिश की जा सके कि वह परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश छोड़ दे। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन पर तेल-निर्यात प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। ट्रंप के ऊपर खतरा अमेरिकी अधिकारी वर्षों से ट्रंप और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ ईरानी धमकियों पर नजर रख रहे हैं। ट्रंप ने 2020 में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की एलीट शाखा कुद्स फोर्स का नेतृत्व करने वाले कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया था। न्याय विभाग ने बीते साल नवम्बर में घोषणा की थी कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप को मारने की ईरानी साजिश की नाकाम किया गया है। विभाग ने आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारियों ने सितम्बर में 51 वर्षीय फरहाद शकेरी को ट्रंप की निगरानी करने और उनकी हत्या के लिए योजना बनाने का निर्देश दिया गया था।

महिला प्रोफेसर ने छात्र के साथ रीति-रिवाज से विवाह करते हुए वीडियो वायरल होते ही प्रोफेसर ने थमाया इस्तीफा

कोलकाता पश्चिम बंगाल के सरकारी मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएकेएयूटी) में एप्लाइड साइकोलॉजी विभाग की प्रमुख महिला प्रोफेसर ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है। यह कदम तब उठाया गया जब सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें अपने ही विभाग के प्रथम वर्ष के छात्र के साथ कक्षा के अंदर बंगाली रीति-रिवाज से विवाह करते हुए देखा गया। यह वीडियो 28 जनवरी को सामने आया था और तब से यह मामला तूल पकड़ चुका है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर को छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया था। इसके बाद, 1 फरवरी को उन्होंने विश्वविद्यालय को ई-मेल भेजकर मौजूदा परिस्थितियों के कारण अपने पद पर बने रहने में असमर्थता जताई और इस्तीफे की पेशकश कर दी। क्या है पूरा मामला? वायरल हो रहे वीडियो क्लिप में महिला प्रोफेसर दुल्हन की तरह सजी-धजी नजर आ रही हैं और यह सीन एमएकेएयूटी के हरिंगहाटा परिसर की एक कक्षा के भीतर फिल्माया गया है। जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो इसे लेकर विश्वविद्यालय और शिक्षाविदों के बीच काफी चर्चा छिड़ गई। हालांकि, प्रोफेसर का कहना है कि यह असली विवाह नहीं था, बल्कि साइको-ड्रामा प्रोजेक्ट के तहत मंचित एक नाटक था, जिसे छात्रों और विश्वविद्यालय की सहमति से आयोजित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके एक सहकर्मी ने इस वीडियो को जानबूझकर लीक कर दिया ताकि उनकी छवि खराब की जा सके और उनका करियर बर्बाद हो जाए। जांच कमेटी ने किया दावे को खारिज मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें सभी महिला संकाय सदस्य थीं। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रोफेसर के इस दावे को खारिज कर दिया कि यह वीडियो साइको-ड्रामा प्रोजेक्ट का हिस्सा था। एमएकेएयूटी के रजिस्ट्रार पार्थ प्रतिम लाहिड़ी ने बताया कि प्रोफेसर के इस्तीफे पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है और उचित प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, प्रोफेसर का कहना है कि वे अपनी सामाजिक और शैक्षणिक प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के लिए कानूनी कदम उठाएंगी।

FIITJEE के 100 अकाउंट हुए फ्रीज! नोएडा पुलिस ने बैंक को था भेजा लेटर, जांच जारी

नोएडा FIITJEE कोचिंग संस्थान के बंद होने के मामले में नोएडा पुलिस ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. संस्थान के संचालकों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने FIITJEE से जुड़े बैंक खातों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू की है. अब तक कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है, जबकि अन्य खातों को सीज करने की कार्रवाई जारी है. बताया जा रहा है कि इन खातों में करोड़ों रुपए जमा हैं. बता दे थाना सेक्टर 58 में FIITJEE के मालिक दिनेश गोयल और अन्य संचालकों पर क्लासेस बंद होने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था. इस मामले में दिनेश गोयल सहित 8 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) और विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. थाना सेक्टर 58 की पुलिस इस मामले की जांच कर रही है. 300 से ज्यादा बैंक खातों की मिली जानकारी जांच के दौरान पुलिस को FIITJEE से जुड़े 300 से अधिक बैंक खातों की जानकारी मिली है. इनमें से एक निजी बैंक खाते में 60 लाख रुपये जमा पाए गए, जिसे पुलिस ने सीज कर दिया है. डीसीपी रामबदन सिंह के मुताबिक, अन्य बैंक खातों की डिटेल्स का इंतजार किया जा रहा है, जिन्हें जल्द ही फ्रीज कर दिया जाएगा. मालिक को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया पुलिस ने इस मामले में 31 पूर्व शिक्षकों और 250 अभिभावकों के बयान दर्ज किए हैं. FIITJEE के मालिक दिनेश गोयल को भी पुलिस ने बयान दर्ज करने के लिए बुलाया है. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि FIITJEE ने उनके साथ धोखाधड़ी की है और उनकी फीस का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है. डीसीपी रामबदन सिंह ने बताया कि मामले की जांच की रही है क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी का मामला है तो मनी लॉन्ड्रिंग भी हो सकता है इसके लिए जांच की जा रही है मालिक और संचालकों को बुलाया गया है. इसके साथ ही पुलिस अब अन्य बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है और उन्हें भी सीज करने की तैयारी कर रही है.  

स्वीडन के एजुकेशन सेंटर में बड़ा हमला, गोलीबारी में11 लोगों की मौत

 स्टॉकहोल्म स्वीडिश अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ओरेब्रो के एक स्कूल में हुई सामूहिक गोलीबारी में 11 लोग मारे गए हैं। इसे देश के प्रधानमंत्री ने स्वीडन के इतिहास का सबसे घातक हमला बताया है। स्वीडिश प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने  देर रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्वीडन के मध्य ओरेब्रो में स्कूल में हुई गोलीबारी देश के इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक गोलीबारी है। इससे पहले स्वीडिश पुलिस ने  शाम को पुष्टि की कि गोलीबारी में लगभग दस लोग मारे गए। यह घटना ओरेब्रो स्थित रिसबर्गस्का स्कोलन नामक शिक्षा केंद्र में हुई। पुलिस के अनुसार, मृतकों में संदिग्ध शूटर भी शामिल है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार जांच और आगे की तलाश जारी है। अधिकारियों ने कहा कि पीड़ितों की सही संख्या अभी भी स्पष्ट नहीं है। हालांकि, शुरुआती निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि संदिग्ध ने अकेले ही यह काम किया। पुलिस ने यह भी कहा कि उन्हें गोलीबारी के पीछे का मकसद नहीं पता है, लेकिन यह आतंकवाद नहीं लगता। उन्होंने कहा कि उन्हें हमले के बारे में “कोई वॉर्निंग साइन नहीं मिला था”। वहीं, क्रिस्टर्सन ने जनता से अटकलें लगाने से बचने की अपील की, इस बात पर जोर देते हुए कि अधिकारियों को अपनी जांच करने के लिए जगह दी जानी चाहिए। स्वीडिश न्याय मंत्री गुन्नार स्ट्रोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “स्वीडिश जनता कारण जानना चाहती है, लेकिन उन्हें जवाब का इंतजार करना होगा।” “समय के साथ, तस्वीर साफ हो जाएगी।” राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने एक बयान में अपनी संवेदना व्यक्त की, इस दिन को स्वीडन के लिए “काला दिन” बताया। उन्होंने पीड़ितों और घायलों के परिवारों और दोस्तों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और पुलिस, बचाव और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के प्रयासों की सराहना की। रिसबर्गस्का स्कोलन मुख्य रूप से 20 साल से अधिक आयु के वयस्कों की सेवा करता है, साथ ही अप्रवासियों के लिए प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय पाठ्यक्रम और स्वीडिश भाषा की कक्षाएं भी प्रदान करता है। ओरेब्रो शहर स्टॉकहोम से लगभग 200 किमी पश्चिम में स्थित है। स्वीडिश रेडियो (एसआर) से बात करते हुए, स्थानीय स्कूल सुरक्षा विशेषज्ञ लीना लजुंगडाहल ने कहा कि स्वीडन में स्कूलों में सशस्त्र हिंसा बहुत दुर्लभ है, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों के बाहर हिंसा बढ़ गई है। हाल के वर्षों में स्कूलों के पास कई गोलीबारी शामिल हैं।

आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने भारत को दी धमकी कहा ‘भारत के किसी भी दुस्साहस का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा

इस्लामाबाद पाकिस्तान में खाने के लाले भले भी पड़े हों, लेकिन भारत के खिलाफ उसका जहर उगलना लगातार जारी है। इस बार पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने भारत को धमकी दी है। उन्होंने कहा है, कि ‘भारत के किसी भी दुस्साहस का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।’ जनरल असीम मुनीर ने मंगलवार को रावलपिंडी में जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में 267वें कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (CCC) की बैठक के दौरान भारत को गीदड़भभकी दी है। उन्होंने भारतीय सैन्य अधिकारियों पर भड़काऊ भाषण देने के आरोप लगाया और कहा, कि “पाकिस्तानी सेना देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।” असीम मुनीर ने कहा, कि “भारतीय सेना के ये खोखले बयान उनकी बढ़ती हताशा को दर्शाते हैं और वो ऐसा बयान इसलिए दे रहे हैं, कि वो अपने आंतरिक मुद्दों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों से ध्यान भटका पाए।” उन्होंने कहा, कि “पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी दुस्साहस का, राज्य की पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा, इंशाअल्लाह।” पाकिस्तान की आर्मी चीफ की गीदड़भभकी इसके अलावा, सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान जनरल असीम मुनीर ने अफगानिस्तान के तालिबान शासकों को भी धमकाने की कोशिश की है। उन्होंने काबुल के शासकों से अफगानिस्तान की धरती से पाकिस्तान के खिलाफ चलाए जा रहे आतंकी अभियानों के खिलाफ ठोक कार्रवाई करने की अपील की है। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है, कि इस सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता पर बात की गई और उन सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी हालिया समय में आतंकी हमलों में मौत हुई है। आपको बता दें, कि पाकिस्तान में पिछले तीन सालों में आतंकी हमलों में बेतहाशा इजाफा हुआ है और सैकड़ों जवानों और आम नागरिकों की मौत हुई है। सबसे दिलचस्प ये है, कि जिस तरह से भारत के खिलाफ आतंकवादियों को भेजने के बाद पाकिस्तान ऐसे अभियान में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है, उसी तरह से तालिबान भी पाकिस्तान में होने वाले हमलों से पल्ला झाड़ लेता है। कश्मीर पर भी पाकिस्तान आर्मी चीफ के जहरीले बोल पाकिस्तान के आर्मी चीफ सिर्फ भारत को धमकाने तक ही सीमित नहीं रहे। बल्कि उन्होंने कश्मीर को लेकर भी इस बैठक में जमकर जहर उगला और भारत पर अनर्गल आरोप लगाए हैं। पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने आरोप लगाया, कि ‘भारतीय कश्मीर’ में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जाता है। लेकिन, पाकिस्तान में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की नारकीय स्थिति पर उनके मुंह से एक बोल नहीं फूटे। बैठक के दौरान उन्होंने ‘कश्मीर के आत्मनिर्णय के संकल्प पर पाकिस्तान के अटूट समर्थन’ की बात दोहराई। उन्होंने कहा, कि “हम कश्मीरी लोगों के उनके अधिकारों के लिए वैध संघर्ष का समर्थन करने में दृढ़ हैं।” इसके अलावा, पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने बलूचिस्तान में अशांति पर भी बात की है। उन्होंने कहा, कि “बलूचिस्तान में शांति को भंग करने की किसी को भी इजाजत नहीं दी जाएगी।” हैरानी की बात ये थी, कि उन्होंने बलूचिस्तान के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप विदेशी देशों पर लगाया। जबकि, जिहाद के नाम पर पाकिस्तान की सेना ने कैसे अपने ही देश को बर्बाद कर दिया है, ये हर कोई जानता है।

कुलगाम में पूर्व सैनिक की हत्या का मामला, पुलिस ने 500 लोगों को हिरासत में लिया, पीओके के आतंकी संगठनों पर है संदेह

 कुलगाम जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकी हमले में पूर्व सैनिक की हत्या के मामले में सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं। सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या करने वाले बंदूकधारियों की तलाश को जहां सर्च ऑपरेशन चल रहा है तो वहीं पुलिस जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों में 500 से ज्यादा लोगों को डिटेन किया है। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं। पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद कश्मीरी आतंकवादियों के रिश्तेदार हैं। पूर्व सैनिक के परिवार पर हमला कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में आने वाले कुलगाम में संदिग्ध आतंकवादियों ने हमले में एक सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या कर दी थी। इस हमले में पूर्व सैनिक की पत्नी और भतीजी को घायल हुए थे। हमले की घटना के बाद अब जम्मू-कश्मीर पुलिस अब सख्त एक्शन के मूड में है। यह पहला मामला है जब सुरक्षाबलों की तरफ से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को डिटेन किया गया है। सोमवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के बेहिबाग गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने सेवानिवृत्त सैनिक मंजूर अहमद वागे, उनकी पत्नी और उनकी भतीजी पर गोलियां चलाईं थीं। इस हमले में वागे (45) की मौत हो गई, जिसके पेट में गोली लगी, जबकि दो महिलाओं के पैर में गोली लगी और उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी हमले के बाद इतने बड़े पैमाने पर लोगों को कभी हिरासत में नहीं लिया गया। इस लिहाज से देखें तो यह अब तक का सबसे बड़ा ऐक्शन है। इन लोगों को इसलिए हिरासत में लिया गया है ताकि संदेश दिया जा सके कि अब आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे सीमा के इधर की बात हो या फिर उस पार का मसला, कहीं भी आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेंगे। अज्ञात हमलावरों ने रिटायर्ड सैनिक मंजूर अहमद वागे और उनकी पत्नी पर गोलीबारी की थी। यह हमला दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के बेहीबाग गांव में हुआ था। इस हमले में मंजूर अहमद की भतीजी भी घायल हुई थी। हमले में मंजूर अहमद मारे गए, जबकि पत्नी और भतीजी का इलाज चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं। अमित शाह की मीटिंग में पता चली पीओके और पाकिस्तान पर एक बात पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ बड़े अभियान की वजह यह भी है कि इन लोगों ने रेड लाइन ही पार कर दी। अब तक ये लोग सैनिकों पर हमले करते थे, लेकिन अब उनके परिवार को भी निशाना बनाया है। इसके चलते सुरक्षा बलों में गुस्सा है। इस बीच होम मिनिस्टर अमित शाह ने भी बुधवार को सुरक्षा का जायजा लिया। इस दौरान जानकारी मिली कि पीओके और पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी जुटे हुए हैं। इसके चलते कश्मीर में अलर्ट घोषित किया गया है। दरअसल बीते कुछ सालों में ऐसे लोगों पर भी सख्त ऐक्शन हुआ है, जो सीधे तौर पर आतंकवाद में शामिल नहीं हैं, लेकिन ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करते रहे हैं। जांच में जुटी पुलिस की विशेष टीम पुलिस की तरफ से इस घटना के हमलावरों को पकड़ने के लिए डिटेन किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। अभी तक कुलगाम में पूर्व सैनिक के घर पर हमले की घटना की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी समूह ने नहीं ली है। वागे 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए सीनियर ऑफिसर की टीम भी बनाई है। पुलिस ने एक बयान में कहा कि संदिग्ध आतंकियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। टीमें इस पर काम कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैश, लश्कर के साथ हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।    

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, 500 बिस्तर वाला ‘ट्रॉमा केयर सेंटर’ स्थापित किया जाएगा

भुवनेश्वर कटक के एससीबी (श्रीरामचंद्र भंज) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 500 बिस्तर वाला ‘ट्रॉमा केयर सेंटर’ स्थापित किया जाएगा। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ‘प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ (पीएमएसएसवाई) के तहत स्थापित किया जाने वाला ‘ट्रॉमा केयर सेंटर’ कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण साबित होगा और दुर्घटना पीड़ितों को एक ही छत के नीचे तत्काल उपचार मुहैया कराया जा सकेगा। बयान में कहा गया है कि केंद्र सरकार ‘ट्रॉमा केयर सेंटर’ के लिए 60 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध कराएगी, जबकि राज्य सरकार शेष 40 प्रतिशत लागत वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने जुलाई 2024 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा को पत्र लिखकर कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में ‘ट्रॉमा केयर सेंटर’ स्थापित करने के लिए आग्रह किया था। केंद्र सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी। सरकार ने कहा कि अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी और ‘ट्रॉमा केयर सेंटर’ स्थापित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।  

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के लिए किया AI का इस्तेमाल तो मिलेगी सख्त सजा, पहली बार ब्रिटेन ने बनाया कानून

लंदन आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ रहा है, इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जो AI से चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के खिलाफ कानून लेकर आया है। इस कानून में बाल यौन शोषण कंटेंट को बनाने के लिए AI प्रोडक्ट को रखना, बनाना या उनकी किसी भी तरह से डिस्ट्रीब्यूशन को अवैध श्रेणी में रखा गया है। ऐसे करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसे एआई के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कानून माना जा रहा है। रॉयटर की खबर के मुताबिक AI को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी लोगों में चिंता है। ब्रिटेन सरकार में होम सेक्रेटरी यवेट कूपर ने बताया कि AI द्वारा जनरेट चाइल्ड पोर्नोग्राफी इमेज जैसे खतरों को रोकने के लिए चार नए कानून को पेश किया जाएगा। इसमें सख्त सजा का प्रावधान किया जाएगा। ऐसी सामग्री के साथ पकड़े जाने पर 5 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है। AI पीडोफाइल मैनुअल रखना भी गैर-कानूनी कैटेगरी में पाया है और इसमें अपराधियों को तीन साल तक सजा होगी। कूपर ने चाइल्ड एब्यूज को कूपर ने बाल शोषण के बढ़ते ऑनलाइन पहलू पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि एक जांच में पाया गया कि पूरे ब्रिटेन में लगभग 500,000 बच्चे हर साल किसी न किसी तरह के दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं, जिसमें इंटरनेट से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है। सरकार उन लोगों पर भी निशाना साध रही है जो बाल यौन शोषण सामग्री को वितरित करने या साझा करने की सुविधा देने वाली वेबसाइट चलाते हैं। ऐसी वेबसाइट चलाते हुए पकड़े जाने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 साल तक की जेल हो सकती है। UK होम मिनिस्ट्री ने दी जानकारी ब्रिटेन की होम मिनिस्ट्री ने इसको लेकर कहा कि ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है, जो चाइल्ड एब्यूज कंटेंट बनाने AI प्रोडक्ट को रखना, बनाना या उनको डिस्ट्रीब्यूट करने को अवैध बनाता है. सिखाना भी होगा गैर कानूनी AI पीडोफाइल मैनुअल रखना भी गैर-कानूनी कैटेगरी में पाया है और इसमें अपराधियों को तीन साल तक सजा होगी. AI पीडोफाइल मैनुअल के तहत लोगों को यौन शोषण के लिए AI का उपयोग करना सिखाया जाता हैं. वेबसाइट भी होंगी शामिल नए कानून के तहत चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के तहत वे वेबसाइट भी आएंगी, जो चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कंटेंट शेयर करती हैं. नए कानून में वे वेबसाइट भी शामिल होंगी, जो यौन शोषण के लिए बच्चों को कैसे तैयार किया जाए उसके लिए सलाह देने का काम करती हैं. क्राइम एजेंसी ने बताया मीडिया रिपोर्ट्स में नेशनल क्राइम एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए और उससे संबंधित हर महीने 800 गिरफ्तारियां होती हैं. इसमें कहा कि 8.40 लोग देशभर में बच्चों के लिए खतरा हैं, जो वयस्क आबादी का 1.6 परसेंट है. ऑनलाइन और ऑफलाइन खतरा पैदा करते हैं.

हर घर में पाइप लाइन से पहुंचेगी रसोई गैस, केंद्र सरकार की बढ़ी तैयारी

नईदिल्ली केंद्र सरकार उज्जवला योजना के तहत हर घर में एलपीजी पहुंचाने के बाद देश में गैस पाइपलाइन के दायरे में विस्तार कर रही हैं। पाइप लाइन के माध्यम से घर-घर गैस आपूर्ति के लिए सरकार कदम उठा रही है। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 733 जिलों में फैले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करने वाले 307 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) को अधिकृत किया है। यह जानकारी केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार ने देश में सीजीडी क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। इनमें अन्य बातों के अलावा ये उपाय शामिल हैं-     सीजीडी क्षेत्र को घरेलू प्राकृतिक गैस का आवंटन     पीएनजी प्रयोजन के लिए उपलब्ध मोड (कैस्केड मोड सहित) के माध्यम से घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए अधिसूचना।     सीजीडी परियोजनाओं को सार्वजनिक उपयोगिता का दर्जा प्रदान करना ।     रक्षा आवासीय क्षेत्र/यूनिट लाइनों में पीएनजी के उपयोग के लिए दिशानिर्देश।     सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को अपने-अपने आवासीय परिसरों में पीएनजी की व्यवस्था करने के लिए दिशानिर्देश।     सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी सभी सरकारी आवासीय परिसरों में पीएनजी की व्यवस्था करेंगे। सरकार इस विषय में संबंधित राज्यों में सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए राज्य सरकारों के साथ नियमित रूप से बातचीत और बैठकें आयोजित करती है तथा इस संबंध में चुनौतियों का समाधान करती है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विकास के तहत प्रदान किए जाते हैं। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से ये कनेक्शन दिए जाते हैं। आपको बता दें, पीएनजीआरबी ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 733 जिलों में फैले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करने वाले 307 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) को अधिकृत किया है। इसके अतिरिक्त पीएनजीआरबी ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए पूरे झारखंड राज्य को कवर करने वाले 11 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) (बिहार और झारखंड में फैले 3 जीए सहित) को अधिकृत किया है। हर घर में आएगी रसोई गैस के लिए पाइप लाइन उन्होंने कहा कि गैस पाइप लाइन का विस्तार हो जाने के बाद देश के 82 प्रतिशत से अधिक भूमि क्षेत्र और 98 प्रतिशत आबादी को पाइप लाइन के जरिये रसोई गैस सप्लाई कर दी जाएगी। गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए बोल का प्रोसेस 12 मई से शुरू होगा। 98 फीसदी आबादी को मिलेगी पाइप के जरिये रसोई गैस हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि बोली प्रक्रिया के बाद बेसिक इंफ्रास्ट्रक्टर का खाका बनाने पर काम किया जाएगा। इसमें एक तय समय लगेगा। मंत्री ने बताया कि 11वीं बोली के बाद 82 फीसदी लैंड एरिया और 98 फीसदी आबादी को रसोई गैस पाइप लाइन के जरिये मिलेगी। इन एरियो को नहीं मिल पाएगी गैस पाइप लाइन वहीं, पहाड़ी इलाकों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि देश के पूर्वी इलाके और जम्मू कश्मीर के कुछ दुर्गम एरिया में गैस पाइप लाइन नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पाइप के माध्यम से मिलने वाली रसोई गैस सस्ती और ज्यादा बेहतर होगी। बनेंगे 1000 एलएनजी स्टेशन कोविड महामारी के दौरान उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर दिये गए। आज गैस सिलेंडरों की संख्या 30 करोड़ से अधिक है जबकि साल 2014 में 14 करोड़ थी। मंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी की पूरा आबादी को इसमें कवर किया जाए और काम तेजी से किया जाएगा। इसी योजना के तहत 1000 एलएनजी स्टेशन लगाए जाएंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा- पीएम मोदी की नीति के कारण नारियल के उत्पादन में आज भारत नंबर एक बना है

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र की कार्यवाही चौथे दिन भी जारी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान नारियल के उत्पादन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की नीति के कारण नारियल के उत्पादन में आज भारत नंबर एक बना है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा, “मैं सांसद पार्थ सारथी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने नारियल से संबंधित प्रश्न पूछा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना है। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि आज भारत नारियल उत्पादन में पीएम मोदी की नीति के कारण दुनिया में नंबर एक बना है।” उन्होंने कहा, “मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि 2014-15 में नारियल का उत्पादन 140 लाख मीट्रिक टन था, जो अब 153.29 लाख मीट्रिक टन हो गया है। विश्व में हमारी उत्पादकता सबसे अधिक है। आंध्र प्रदेश में भी नारियल का उत्पादन होता है। इसे बढ़ाने की नीति के कारण आंध्र प्रदेश में उत्पादकता 11 मीट्रिक टन है। पिछले दिनों अनेक बीमारियों की शिकायत आई थी। नारियल विकास बोर्ड ने इसको नियंत्रित करने के लिए विभिन्न केंद्रीय संस्थान और अन्य संस्थानों के माध्यम से प्रबंधन के लिए आठ परियोजनाएं अनुमोदित की हैं।” शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “नारियल में होने वाली अलग-अलग प्रकार की बीमारियों से निपटने के लिए आईसीएआर ने अनेक उपाय किए हैं। नई फसलें विकसित करने के साथ सहायता राशि भी उपलब्ध कराई गई है।” साथ ही उन्होंने फसल बीमा योजना का जिक्र करते हुए कहा, “फसल बीमा योजना में किसानों का विश्वास बढ़ता जा रहा है। इस बार किसानों के 14 करोड़ आवेदन आए हैं, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। सरकार खुले मन से प्रयत्न करेगी कि किसानों को अधिकतम लाभ प्रदान क‍िया जा सके।”

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