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केरल को ‘मिनी पाकिस्तान’ बताने पर अब CM पिनराई विजयन का आया जवाब, नितेश राणे पर बदनाम करने का आरोप

कोच्चि, मुंबई महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और भाजपा लीडर नितेश राणे ने पिछले दिनों राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के केरल से चुने जाने पर हमला बोला था और राज्य को ‘मिनी पाकिस्तान’ करार दिया था। इस पर जमकर बवाल मचा तो नितेश राणे ने सफाई भी दी और कहा कि मैंने इसलिए केरल को मिनी पाकिस्तान कहा था क्योंकि वहां लव जिहाद का एजेंडा आगे बढ़ रहा है। हिंदू और मुसलमान महिलाओं का धर्मांतरण कराया जाता है। हमारा देश कैसे हिंदू राष्ट्र बना रहे, हमें इसके लिए प्रयास करने होंगे। यह तो सच है कि राहुल गांधी और प्रियंका को वहां जीत मिली क्योंकि वह आतंकियों का समर्थन लेते हैं। यदि मैं गलत हूं तो फिर कांग्रेस मुझे गलत साबित करे। नितेश राणे के विवादित बयान देने और उस पर कायम रहने के बीच अब केरल के सीएम का ही बयान आया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने नितेश राणे पर राज्य को बदनाम करने का आरोप लगाया है और कहा कि यह संघ परिवार का एजेंडा है। पिनराई विजयन ने एक्स पर लिखा, ‘महाराष्ट्र के मत्स्य पालन और जहाजरानी मंत्री नितेश राणे ने केरल को मिनी पाकिस्तान का लेबल दिया है। यह बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय है। इस तरह के नफरती बयान बताते हैं कि कैसे संघ परिवार की ओर से केरल के खिलाफ एजेंडा चलाया जाता रहा है और उसे बदनाम किया जाता है। केरल तो सेकुलरिज्म और सांप्रदायिक सद्भाव की जमीन है।’ उन्होंने कहा कि हम केरल के खिलाफ इस तरह के आपत्तिजनक बयान की निंदा करते हैं।’ यही नहीं पिनराई विजयन ने कहा कि केरल के लोगों को संघ के इस हेटफुल एजेंडे के खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए। महाराष्ट्र के दिग्गज नेता नारायण राणे के बेटे नितेश फिलहाल देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री हैं। वह पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं, जिस पर विवाद छिड़ गया था। हाल ही में उन्होंने वायनाड लोकसभा सीट से प्रियंका गांधी की जीत को लेकर टिप्पणी की थी। राणे का कहना है कि केरल से ही दोनों भाई-बहन इसलिए चुनाव लड़ने जाते हैं क्योंकि वहां से उनका जीतना आसान है। इसके अलावा केरल में मुस्लिमों की बड़ी आबादी को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए नितेश ने राज्य को ‘मिनी पाकिस्तान’ करार दिया था। नितेश राणे ने कहा था, ‘केरल मिनी पाकिस्तान है। इसीलीए राहुल गांधी और उनकी बहन वहां से चुनाव लड़ने जाते हैं। सारे आतंकवादी उन्हें वोट करते हैं। यह सच है औऱ आप पूछ सकते हैं। वे लोग आतंकियों को साथ लेकर ही सांसद चुने गए।’

कनाडा, ग्रीनलैंड और पनामा की बात छेड़ पुतिन की मदद कर रहे हैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप? क्यों है खतरे की घंटी

वाशिंगटन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही पदभार संभालेंगे। इससे पहले वह अपने बयानों को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। बीते कुछ दिनों से उन्होंने एक ऐसी बहस छेड़ दी है जो रूस के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हाल ही में ट्रंप ने कई बार ग्रीनलैंड, कनाडा और पनामा नहर को अमेरिका में शामिल करने की बात की है। उनकी इस टिप्पणी को लेकर विवाद भी हुए हैं। हालांकि रूस को इन बयानों से फायदा पहुंच सकता है। मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ट्रंप के इन बयानों को रूस में व्लादिमीर पुतिन को एक तोहफे के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में एक टेलीविजन शो के दौरान होस्ट व्लादिमीर सोलोविओव ने बताया कि ट्रंप की योजनाओं और रूस की महत्वाकांक्षाओं के बीच काफी समानांतर रेखाएं हैं। सोलोविओव ने कहा, “ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका अपनी सीमाओं का विस्तार करेगा। अगर ट्रंप ग्रीनलैंड, पनामा और कनाडा ले सकते हैं तो रूस फिनलैंड, बाल्टिक और अलास्का को वापस क्यों नहीं ले सकता?” रूसी टीवी पर विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि क्षेत्रीय विस्तार के लिए ट्रंप को दृष्टिकोण पुतिन के से मेल खाता है। रूस से जुड़े सूत्र ट्रंप के इन बयानों को रूस की बढ़ती क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के समर्थन में देख रहे हैं। रूसी टीवी चैनलों पर ट्रंप की इन टिप्पणियों का जोरदार ढंग से स्वागत किया गया है। रूसी चैनल के मुताबिक ट्रंप का यह बयान पुतिन की मदद कर रहा है। इस तरह के बयान रूस के 2014 के क्रीमिया पर कब्जे को वैध बनाने में मदद कर रहे हैं। यहां तक ​​कि यह रूस के यूक्रेन पर नियंत्रण के विस्तार करने के विचार से भी मेल खाते हैं। ट्रंप ने पहले भी पुतिन के क्रीमिया पर आक्रमण और कब्जा करने के कदम की तारीफ की है। उन्होंने इसे प्रतिभाशाली और समझदारी वाला कदम कहा था। रूस के द वीकली न्यूज के होस्ट दिमित्री किसेलेव ने बीते दिनों एक शो के दौरान कहा, “ट्रंप मजाक नहीं कर रहे हैं। वह अमेरिका की क्षेत्रीय महत्वकांक्षाओं का विस्तार करने के लिए दृढ़ हैं। यह दुनिया भर में जमीन पर कब्जा करने को सामान्य बनाने के संकेत देता है।” रूस के अंदरूनी सूत्रों ने यह तर्क भी दिया है कि 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर जंग छेड़ने पर ट्रंप ने कभी भी नैतिक विरोध नहीं जताया हैं। उन्होंने सिर्फ युद्ध की लागत और अवधि पर सवाल उठाए हैं।

10 साल के एक लड़के की उस समय मौत हो गई, जब वह अपने घर में लगे झूले पर स्टंट कर रहा था, फंसी थी टाई

वडोदरा गुजरात के वडोदरा में दिल को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। जिसमें जरा सी लापरवाही के चलते एक बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि इस अजीबोगरीब घटना में 10 साल के एक लड़के की उस समय मौत हो गई, जब वह अपने घर में लगे झूले पर स्टंट कर रहा था। इस दौरान उसकी नेकटाई झूले के लूप में फंस गई और इससे उसका गला दब गया और मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना रविवार रात वडोदरा के नवापुरा इलाके में हुई। मृतक की पहचान रचित पटेल के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि जब लड़का झूले पर स्टंट कर रहा था, तब उसकी मां पड़ोसी के घर एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गई थी। जबकि उसका पिता दूसरे कमरे में था। हालांकि, इस दौरान मृतक बच्चे ने जो नेकटाई पहनी हुई थी, वह झूले के लूप में उलझ गई, जिससे वह दुर्घटनावश लटक गया और अंततः उसकी मौत हो गई। नवापुरा पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एमएस अंसारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परिवार ने बताया कि लड़का झूले पर स्टंट करने का आदी था। हालांकि, उसने नेकटाई पहनी हुई थी, जो झूले के लूप में उलझ गई और इससे वह लटक गया। उसके पिता ने उसे बेहोशी की हालत में पाया और तुरंl नीचे उतारा। माता-पिता उसे मंजलपुर के एक अस्पताल ले गए जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।’ गुजरात के वडोदरा में दिल को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। जिसमें जरा सी लापरवाही के चलते एक बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि इस अजीबोगरीब घटना में 10 साल के एक लड़के की उस समय मौत हो गई, जब वह अपने घर में लगे झूले पर स्टंट कर रहा था। इस दौरान उसकी नेकटाई झूले के लूप में फंस गई और इससे उसका गला दब गया और मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना रविवार रात वडोदरा के नवापुरा इलाके में हुई। मृतक की पहचान रचित पटेल के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि जब लड़का झूले पर स्टंट कर रहा था, तब उसकी मां पड़ोसी के घर एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए गई थी। जबकि उसका पिता दूसरे कमरे में था। हालांकि, इस दौरान मृतक बच्चे ने जो नेकटाई पहनी हुई थी, वह झूले के लूप में उलझ गई, जिससे वह दुर्घटनावश लटक गया और अंततः उसकी मौत हो गई। नवापुरा पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एमएस अंसारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘परिवार ने बताया कि लड़का झूले पर स्टंट करने का आदी था। हालांकि, उसने नेकटाई पहनी हुई थी, जो झूले के लूप में उलझ गई और इससे वह लटक गया। उसके पिता ने उसे बेहोशी की हालत में पाया और तुरंl नीचे उतारा। माता-पिता उसे मंजलपुर के एक अस्पताल ले गए जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।’ अंसारी ने कहा कि पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और फिर उसे उसके माता-पिता को सौंप दिया। घटना के बाद से परिवार सदमे में है। माता-पिता को अपनी भूल पर पछतावा है। बच्चे को बेहाशी की हालत में देखकर पिता अस्पताल लेकर पहुंचते लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है उसका अंदाजा इस घटना से लगाया जा सकता है।

2024 के आखिरी दिन कहा है कि नया वर्ष बहुत कुछ तय करने वाला होगा, AI पर भी किया अलर्ट: सुंदर पिचाई

न्यूयॉर्क पूरी दुनिया में 2025 के आगमन की तैयारी है और लोग जश्न मनाने की प्लानिंग में हैं। इस बीच दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कर्मचारियों को चेतावनी दी है। सुंदर पिचाई ने 2024 के आखिरी दिन कहा है कि नया वर्ष बहुत कुछ तय करने वाला होगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से उभार हो रहा है। ऐसे दौर में हम सभी को उसकी जरूरत समझनी होगी औऱ खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें एक कंपनी के तौर पर तेजी से विकास करना होगा। पिचाई ने कहा कि बहुत कुछ दांव पर है और उसे समझते हुए हमें एक कंपनी के तौर पर तेजी से खुद को आगे बढ़ाना होगा और एआई के हिसाब से खुद को ढालना और तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि 2024 में ऐसे कई मौके रहे हैं, जब तकनीक का प्रभाव पड़ा है। 2025 में हमें बिना थके प्रयास करना होगा। इस तकनीक के फायदे समझने होंगे और उसके अनुसार ही यूजर की समस्याओं का समाधान करना होगा। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य फोकस अगले साल Gemini ऐप होगा। हम उसके माध्यम से लोगों को सही जानकारी देंगे और जेनरेटिव एआई के उनके अनुभव को बेहतर करेंगे। पिचाई ने कहा कि Gemini को लेकर हमें प्लान करना होगा और उस पर फोकस करना होगा। पिचाई ने कर्मचारियों से साफ कहा कि एआई इंडस्ट्री में कैसे हम अपने Gemini ऐप को स्थापित कर सकें, यही हमारी प्राथमिकता में इस साल रहना चाहिए। पिचाई ने कहा कि Gemini ऐप के साथ हमने बीते कुछ महीनों में अच्छे प्रयोग किए हैं। लेकिन हमें 2025 में और फोकस करना होगा ताकि इंडस्ट्री में गैप को खत्म करें और खुद को लीडर के तौर पर स्थापित कर सकें। उन्होंने कहा कि Gemini को विस्तार देना औऱ उसे इंडस्ट्री में स्थापित करना 2025 में गूगल की शीर्ष प्राथमिकता में होगा। पिचाई ने एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखते हुए कहा कि हमें 2025 में 500 मिलियन यूजर्स तक के टारगेट को हासिल करना है। उन्होंने कहा कि 2025 में Gemini के उपभोक्ताओं में इजाफा करना ही हमारी मुख्य प्राथमिकता में होगा। दरअसल चैटजीपीटी समेत ऐसे कई एआई टूल हैं, जिनसे गूगल को चुनौती मिल रही है। ऐसे में वह भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर जोर दे रहा है।

यात्रियों को तत्काल टिकट बुकिंग में परेशानियों का सामना करना पड़ा, जब IRCTC की सेवाएं ठप हुई, ऐसा हुआ तीसरी बार

नई दिल्ली नए साल पर घर जाने के लिए तत्काल टिकट बुक कर रहे लाखों यात्रियों को तब निराशा हाथ लगी, जब इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) की सेवाएं ठप हो गईं। इस महीने यह तीसरी बार हुआ है, जब IRCTC की सेवाएं ठप हो गईं और यात्रियों को तत्काल टिकट बुकिंग में परेशानियों का सामना करना पड़ा। पेमेंट्स से लेकर ट्रेन्स के चुनाव तक में यूजर्स को ऐप और वेबसाइट दोनों पर कई दिक्कतें आईं। दिसंबर महीने में ही इससे पहले दो बार IRCTC की सेवाएं ठप हो चुकी हैं। इस बार भी यूजर्स को लंबे वक्त तक डाउनटाइम मेसेद दिखता रहा। कई यूजर्स ने इसे लेकर नाराजगी जताई और सोशल मीडिया पर रेल मंत्री को टैग करते हुए इसकी शिकायत की। इससे पहले 9 दिसंबर को भी ठीक ऐसा ही मेसेज करीब एक घंटे तक वेबसाइट पर दिख रहा था और दूसरा मामला बीते 26 दिसंबर को सामने आया था, जब यात्रियों को परेशान होना पड़ा था। IRCTC की ओर से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया प्लेटफॉर्म पर दिख रहे डाउनटाइम मेसेज में लिखा है कि ‘सभी साइट के लिए बुकिंग और कैंसिलेशन सेवा अगले एक घंटे के लिए उपलब्ध नहीं है। आप कैंसिलेशन या TRD फाइल करने के लिए 139 पर कस्टम केयर को कॉल कर सकते हैं।’ यूजर्स को यह मेसेज दिखता रहा और वे सेवाएं ऐक्सेस नहीं कर सके। इसके अलावा कई यूजर्स को मेंटिनेंस मेसेज दिखाया गया कि साइट पर काम चल रहा है, इसलिए सेवाएं कुछ देर के लिए बंद हैं। फिलहाल इसपर IRCTC की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है और सेवाएं डाउन होने की कोई वजह सामने नहीं आई है। इन वजहों से डाउन हो सकती हैं सेवाएं वैसे तो वेबसाइट के सर्वर में खराबी, सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी या नेटवर्क कनेक्शन में दिक्कत होने से वेबसाइट डाउन होती है, लेकिन कई बार त्योहारों या छुट्टियों के मौसम में जब ट्रेन टिकट बुक करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा होती है, तब भी वेबसाइट ज्यादा लोड के चलते डाउन हो सकती है। बाकी वेबसाइट को अपडेट करने या सुधार करने के लिए समय-समय पर मेंटेनेंस किया जाता है, जिसके दौरान वेबसाइट कुछ समय के लिए डाउन रह सकती है। कई यूजर्स को डर है कि बार-बार सेवाएं प्रभावित और डाउन होने के लिए कोई साइबर अटैक तो जिम्मेदार नहीं है। फिलहाल आप कुछ वक्त इंतजार कर सकते हैं या फिर IRCTC हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं।

बांग्लादेश में कट्टरपंथी दौर में राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के पद होंगे खत्म, संविधान की हो सकती है विदाई

ढाका पूरी दुनिया में नए साल 2025 के स्वागत की तैयारियां हो रही हैं, लेकिन भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में अलग ही माहौल है। खबरों के मुताबिक आज यानी 31 दिसंबर को बांग्लादेश में उस संविधान को ही खत्म करने का ऐलान हो सकता है, जो 1972 में शेख मुजीबर रहमान के दौर में बना था। इसके अलावा राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जैसे पदों का भी खात्मा हो सकता है। वहीं जुलाई में शेख हसीना के खिलाफ हुए आंदोलन को क्रांति का दर्जा दिया जा सकता है। यह ईरानी क्रांति जैसा होगा, जिसके बाद शेख हसीना ने पद से इस्तीफा दे दिया था और वह भारत आ गई थीं। खबर है कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले छात्र संगठन की ओर से नए रिपब्लिक का ऐलान किया जा सकता है। स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन की ओर से नए रिपब्लिक की घोषणा किए जाने की तैयारी है। अब तक यह जानकारी नहीं मिली है कि बांग्लादेश को इस्लामिक देश घोषित किया जाएगा या फिर सेकुलर गणराज्य बनाया जाएगा। फिलहाल अस्थिरता का आलम है और राष्ट्रपति एवं आर्मी चीफ जैसे पदों को समाप्त करने से यह और बढ़ सकती है। इससे भारत जैसे पड़ोसी मुल्कों के लिए भी चिंता बढ़ जाएगी। भारत के लिए एक चुनौती तो यही है कि यदि बांग्लादेश में किसी से बात की जाए तो वह कौन होगा। वहां फिलहाल कोई चुनी हुई सरकार नहीं है और अंतरिम सरकार के मुखिया नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस हैं। उन्होंने अपने कार्य़काल के दौरान कट्टरपंथियों का खूब साथ दिया है, जिसे लेकर भारत समेत कई मुल्क चिंतित हैं। अमेरिका तक ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है। छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने बांग्लादेश के मौजूदा संविधान को लेकर कहा कि वह तो मुजीबवादी कानून है। उसे हम समाप्त करेंगे और दफन करेंगे। यही नहीं अब्दुल्ला ने भारत के खिलाफ भी अपनी नफरत को उजागर कर दिया। हसनत ने कहा कि 1972 के उस संविधान के चलते भारत को बांग्लादेश में दखल देने का मौका मिला। अब्दुल्ला ने कहा कि हम 31 दिसंबर की दोपहर को ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार में ऐलान करेंगे और बताएंगे कि भविष्य का बांग्लादेश कैसा होगा। माना जा रहा है कि बांग्लादेश में इस तरह कट्टरपंथी विचारधारा के विस्तार लेने के पीछे पाकिस्तान है। यही नहीं छात्र आंदोलन के नाम पर तख्तापलट करने वाले नेता लगातार पाकिस्तान के दूतावास के संपर्क में हैं। यही नहीं हाल ही में इस्लामिक देशों के संगठन डी-8 की मीटिंग में मोहम्मद यूनुस और शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई थी। इस मीटिंग में दोनों के बीच संबंधों को लेकर बात हुई। इसके अलावा बांग्लादेश ने पाकिस्तान से कारोबार में भी इजाफा किया है। अब बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह तक पाकिस्तान का माल सीधे पहुंच रहा है और उनकी फिजिकल चेकिंग के नियम को भी खत्म कर दिया गया है।

न्यूजीलैंड ने सबसे पहले किया नव वर्ष 2025 का स्वागत, ऑकलैंड में जोरदार जश्न

ऑकलैंड दुनिया में सबसे पहले नए साल का आगाज किरीटीमाटी द्वीप (Christmas Island) पर 3.30 बजे हुआ। यह द्वीप प्रशांत महासागर में स्थित है और किरिबाती रिपब्लिक का हिस्सा है।यहां का समय भारत से 7.30 घंटे आगे है, यानी जब भारत में 3:30 बजे होते हैं, तो किरीटीमाटी में नया साल शुरू हो जाता है। इसके बाद चैथम द्वीप न्यूजीलैंड में भी नए साल का जश्न शुरू हो गया है। जैसे ही घड़ी में रात के 12 बजेंगे वैसे ही पुराना साल विदा हो जाएगा और नए साल का स्वागत होगा। सबसे आखिरी में नए साल का जश्न दक्षिण प्रशांत में अमेरिकी समोआ और नीयू द्वीप में होता है। अलग-अलग टाइम जोन के कारण कई देश अलग-अलग समय पर नए साल का जश्न मनाएंगे। भारत से पहले 41 देश ऐसे हैं, जहां नया साल मनाया जाता है। न्यूजीलैंड में नए साल पर जगमगा उठा सिडनी हार्बर ब्रिज नए साल के स्वागत में सिडनी में खास तैयारी की गई है. सिडनी हार्बर ब्रिज और ओपेरा हाउस पर ‘फैमिली फायरवर्क्स’ का शानदार प्रदर्शन हुआ. ये नए साल के आगाज पर की गई. इससे पहले यह शो हर साल रात से तीन घंटे पहले भी आयोजित किया गया. जिससे परिवार के लोग और बच्चे भी इस खूबसूरत नजारे का आनंद ले सकें. किरीटीमाटी द्वीप पर सबसे पहले नए साल का आगाज किरीटीमाटी द्वीप (Christmas Island) पर सबसे पहले नए साल का आगाज हुआ. भारतीय समयानुसार आज दोपहर 3.30 बजे ही यहां 2025 का आगाज हो गया. यह द्वीप प्रशांत महासागर में स्थित है और किरिबाती रिपब्लिक का हिस्सा है. यहां का समय भारत से 7.30 घंटे आगे है, यानी जब भारत में 3:30 बजे होते हैं, तो किरीटीमाटी में रात के 12 बजते हैं.   न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आतिशबाजी के साथ New Year2025 का स्वागत न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में आतिशबाजी के साथ New Year 2025 का स्वागत किया गया. ऑकलैंड के प्रसिद्ध  क्लॉक टावर रोशनी से जगमगता नजर आया. नए साल को हो गया आगाज, न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में मना जश्न न्यूजीलैंड ने साल 2025 का स्वागत आतिशबाजी के साथ किया. ऑकलैंड में लोगों ने नए साल का जश्न मनाना शुरू कर दिया है. भारत में रात 12 बजे के बाद नए साल की जश्न मनाया जाएगा.

WMO ने चेतावनी दी 2024 का रिकॉर्ड तोड़ने वाला तापमान 2025 में भी जारी रहेगा

नई दिल्ली नए साल 2025 दुनिया के सबसे अधिक गर्म तीन साल में से एक हो सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी कि 2024 का रिकॉर्ड तोड़ने वाला तापमान अगले साल भी जारी रहेगा। इसकी वजह है कि ग्रीनहाउस गैस का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई तक बढ़ रहा है। इससे भविष्य में और भी अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है। 2025 के लिए यूके मौसम कार्यालय के दृष्टिकोण में यह चेतावनी शामिल है। यह बताता है कि यह ग्लोबल एवरेज तापमान के लिए तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक होने की संभावना है। यह 2024 और 2023 के ठीक पीछे होगा। साल 2023 में रिकॉर्ड गर्मी WMO ने पहले ही अनुमान लगा लिया है कि 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल होगा। यह अब लगभग तय है कि पहली बार पेरिस समझौते की सीमा 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होगी। यह पूर्व-औद्योगिक (1850-1900) के स्तर से ऊपर है। यह 2023 में रिकॉर्ड तोड़ 1.45 डिग्री सेल्सियस के बाद है, जो कि रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल था। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को अपने नए साल के संदेश में कहा कि आज मैं आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट कर सकता हूं कि हमने अभी-अभी जानलेवा गर्मी का एक दशक झेला है। रिकॉर्ड पर शीर्ष दस सबसे गर्म साल पिछले दस सालों में हुए हैं, जिसमें 2024 भी शामिल है। कम करना होगा उत्सर्जन डब्लूएमओ के इस अवलोकन का उल्लेख करते हुए कि 2015-2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म दस साल होंगे। गुटेरेस ने कहा कि यह वास्तविक समय में जलवायु का टूटना है। हमें बर्बादी की इस राह से बाहर निकलना होगा – और हमारे पास खोने के लिए समय नहीं है। 2025 में, देशों को उत्सर्जन में नाटकीय रूप से कमी करके और नवीकरणीय भविष्य की ओर संक्रमण का समर्थन करके दुनिया को सुरक्षित रास्ते पर लाना होगा। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ता है और अत्यधिक गर्मी की घटनाएँ अधिक बार और गंभीर होती जाती हैं। डब्लूएमओ ने अत्यधिक गर्मी के जोखिमों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की बढ़ती आवश्यकता पर भी जोर दिया। तापमान तस्वीर का केवल एक हिस्सा वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन और क्लाइमेट सेंट्रल की एक नई रिपोर्ट का हवाला दिया। इसने उल्लेख किया कि जलवायु परिवर्तन ने 29 चरम मौसम की घटनाओं में से 26 को तीव्र कर दिया है। इससे 2024 में कम से कम 3,700 लोगों की मौत हो गई और लाखों लोग विस्थापित हो गए। गर्मी का एक डिग्री का हर अंश मायने रखता है और जलवायु चरम सीमाओं, प्रभावों और जोखिमों को बढ़ाता है। WMO महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि तापमान तस्वीर का केवल एक हिस्सा है। जलवायु परिवर्तन चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती घटनाओं और प्रभावों के रूप में लगभग दैनिक आधार पर हमारी आंखों के सामने होता है। उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई हालांकि, वैश्विक मौसम निकाय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि एक या एक से अधिक वर्षों में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान का मतलब यह नहीं है कि पेरिस समझौते में बताए गए ‘पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान वृद्धि को सीमित करने के प्रयासों को जारी रखना’ पहुंच से बाहर है। WMO ने कहा कि पेरिस समझौते में उल्लिखित तापमान वृद्धि के स्तर के बढ़ने को एक विस्तारित अवधि, आमतौर पर दशकों या उससे अधिक समय तक के बढ़ने के रूप में समझा जाना चाहिए। हालांकि समझौता स्वयं एक विशिष्ट परिभाषा प्रदान नहीं करता है।

Gaza में रिफ्यूजी कैंप पर Israel का हवाई हमला, 27 फिलिस्तीनियों की मौत

गाजा गाजा में इजरायली हमले लगातार जारी हैं. आईडीएफ के ताजा हमले में 27 फिलिस्तिनियों की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए हैं. मरने वालों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक है. इससे पहले रविवार को हमास के नाम पर फिर से एक अस्पताल को निशाना बनाया गया, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई. वहीं एक जुड़वा नवजात की भी बिना इलाज के मौत हो गई. पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमलों के बाद से इजराली अटैक लगातार जारी हैं. इन हमलों में अबतक 45 हज़ार 500 से ज़्यादा फिलिस्तीन मारे जा चुके हैं. करीब एक लाख लोग घायल हैं. वहीं हमलों की वजह से गाज़ा की करीब 90 फीसदी आबादी को कई बार विस्थापित होना पड़ा है. बताया जा रहा है कि आईडीएफ ने वफा अस्पताल पर हमला किया, जिसमें अस्पताल मलबे में ढ़ेर हो गया. फिलिस्तीनी सिविल डिफेंस सदस्य महमूद बसल ने कहा, “इजरायली सेना ने गाजा शहर में अल-वफ़ा मेडिकल अस्पताल को निशाना बनाया. इसमें कई लोगों की मौत हो गई. अस्पताल के कर्मचारियों ने सात मृतकों के शव बरामद किए हैं. कई घायलों को बचाकर अल-अहली अस्पताल में पहुंचाया गया है. ये सभी लोग अस्पताल के बगल में स्थित एक रिफ्यूजी कैंप में शरण लिए हुए थे.” इन हमले के बाद इजरायल की रटी रटाई प्रतिक्रिया सामने आई है. इसमें कहा गया है कि उसने इमारत के अंदर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाकर हमला किया है. वहीं दो मासूम जुड़वा बच्चों की मौत के बाद मातम छाया है. ये जुड़वा बच्चे जन्म के महज़ 20 दिन बाद ही दुनिया से रुख्सत हो गए. उनकी मौत की वजह हाइपोथर्मिया बीमारी बताया जा रहा है. इसका इलाज चल रहा था. बताया जा रहा है कि शरीर का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर ये बीमारी होती है. इन जुड़वा बच्चों का जन्म वक्त से एक महीना पहले हुआ था. लिहाज़ा पर्याप्त इलाज ना मिलने से और ठंड की वजह से दोनों ने दम तोड़ दिया. ऐसे ही कई अन्य बच्चों ने भी टेंट में रहने की वजह से ठंड लगने से मौत का शिकार हो चुके हैं. पूरे गाजा में हाहाकार मचा हुआ है. सीजफायर की मांग हो रही है. उधर, इजरायल की राजधानी तेल अवीव में लोग लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वहां की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से इस्तीफा भी मांगा. देश में आम चुनाव कराए जाने की भी मांग की है. उनका दावा है कि पीएम नेतन्याहू बंधकों को छुड़ाने में अबतक असमर्थन रहे हैं. ऐसे में उन्हे पद छोड़ देना चाहिए. इस वक्त 100 से अधिक बंधक हमास के पास हैं. हजारों की संख्या में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने इजरायल की सरकार से बंधकों की रिहाई के लिए गाजा में बमबारी रोकने और हमास से तुरंत समझौते की मांग की है. बंधक बनाए गए लोगों के परिजनों और दोस्तों को डर है कि अगर हमास के साथ जल्द समझौता नहीं होता तो और ज्यादा बंधक मारे जाएंगे. ये प्रदर्शन ऐसे समय हुआ जब गाजा में युद्धविराम के लिए बातचीत अंतिम दौर में हैं.  

31 जनवरी 2025 तक टैक्स से जुड़े इस जरूरी काम के लिए बढ़ी अंतिम तारीख , जानें सबकुछ

नई दिल्ली आज साल 2024 का आखिरी दिन है और कल से नए साल (New Year 2025) का आगाज होने जा रहा है, इस बीच टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी खबर आई है. दरअसल, आयकर विभाग ऐन मौके पर विवाद से विश्वास स्कीम (Vivad Se Vishwas Scheme) की डेडलाइन में इजाफा कर दिया है. इस स्कीम की लास्ट डेट 31 दिसंबर तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर अब 31 जनवरी तक कर दिया गया है. इसका मतलब है कि एक महीने और टैक्सपेयर्स अपने विवादित टैक्स को कम अमाउंट के साथ निपटा सकते हैं. बता दें कि इस स्कीम का ऐलान मोदी 3.0 के पहले बजट (Budget) में वित्त मंत्री द्वारा किया गया था. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से… एक महीने के लिए बढ़ी डेडलाइन आयकर विभाग (Income Tax Department) ने टैक्सपेयर्स के विवादित टैक्स मुद्दों के निपटाने के लिए विवाद से विश्वास योजना की शुरुआत की थी, जिसमें आयकर विवादों से परेशान टैक्सपेयर्स (Tax Payers) को कम अमाउंट देकर करा सकते हैं. इस स्कीम की डेडलाइन भी 31 दिसंबर 2024 यानी आज खत्म होने वाली थी. लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से सोमवार को ही इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर इसकी डेडलाइन को 1 महीने के लिए बढ़ाने का ऐलान किया गया. अगर आप इस योजना का लाभ उठाकर टैक्स विवाद का निपटारा कराना चाहते हैं, तो फिर आपके पास अब 31 जनवरी 2025 तक का समय है. नहीं तो देना होगा 110% पेमेंट केंद्रीय प्रत्यक्ष कर आयोगा यानी CBDT ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि अब विवाद से विश्वास योजना का लाभ अगले साल भी मिलेगा और 31 जनवरी तक विवादित टैक्स निपटारे किए जा सकेंगे. इसमें साफ कहा गया है कि नई डेडलाइन तक अगर टैक्सपेयर्स अपने विवादों का निपटारा नहीं करा पाते हैं, तो फिर ऐसे स्थिति में 1 फरवरी 2025 या उसके बाद की जाने वाली घोषणाओं पर विवादित टैक्स डिमांड का 110 फीसदी पेमेंट करना होगा. इन करदाताओं को स्कीम का फायदा Vivad Se Vishwas Yojna का लाभ ऐसे करदाताओं को मिलेगा, जिनके विवादित टैक्स से जुड़े मामले के संबंध में अपनी दायर की गई है. जिन टैक्सपेयर्स ने 22 जुलाई 2024 तक सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ठ या फिर आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में याचिका दायर की है, या फिर टैक्स ऑफिसर्स की ओर से अपील की गई है, तो फिर उन्हें इस स्कीम के तहत कम अमाउंट देकर टैक्स निपटारा करने का फायदा मिल सकता है. सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से लगभग 2.7 करोड़ प्रत्यक्ष कर मांगों का समाधान हो सकेगा, जिनकी कुल राशि लगभग 35 लाख करोड़ रुपये होगी. तेजी से इन मामलों का निपटान करने के लिए स्टार्ट की गई Income Tax Department की इस स्कीम के तहत चार तरह के फॉर्म जारी किए गए हैं. ये चार फॉर्म किए गए हैं जारी फॉर्म 1 – इसमें आप डिक्लेरेशन फाइल और अंडरटेकिंग देंगे. फॉर्म 2 – यह अथॉरिटी द्वारा जारी किए जाने वाले प्रमाणपत्र के लिए होगा. फॉर्म 3 – इस फॉर्म के तहत घोषणाकर्ता द्वारा पेमेंट की जानकारी दी जाएगी. फॉर्म 4 – अथॉरिटी द्वारा टैक्स एरियर के फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की जानकारी दी जाएगी. फॉर्म 1 और 3 हैं सबसे जरूरी विवाद से विश्वास सरकारी स्कीम में फॉर्म-1 को इनकम टैक्स से जुड़े हर विवाद के लिए अलग-अलग से भरना होगा. वहीं फॉर्म-3 में आपको पेमेंट की जानकारी शेयर करनी होगी. इसमें आपको अपील, आपत्ति, आवेदन, रिट याचिका या दावे को वापस लेने के प्रमाण के साथ अथॉरिटी को देना पड़ेगा. फॉर्म 1 और 3 को टैक्सपेयर्स द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रस्तुत किया जा सकेगा. ये फॉर्म आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल यानी www.incometax.gov.in पर उपलब्ध कराए जाएंगे. क्या होता है डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स? भारत में डायरेक्ट टैक्स के तहत इनकम टैक्स (Income Tax) आता है. जो लोग इसके लिए तय किए गए दायरे में आते हैं, उन्हें अपने इनकम ब्रैकेट के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना पड़ता है. इनडायरेक्ट के तहत वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी (GST) के मामले आते हैं. आप जो भी सामान खरीदते हैं या टेलीकॉम जैसी किसी सेवा का इस्तेमाल करते हैं, तो उस पर जीएसटी देना पड़ता है.  

अफगानिस्तानी बॉर्डर पर पाकिस्तानी चौकी पर टीटीपी के कब्जे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

काबुल पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस समय एक दूसरे पर धड़ाधड़ हमले कर रहे हैं. डूरंड लाइन क्रॉस कर पाकिस्तान में घुसे अफगान के तालिबानी लड़ाके पाकिस्तानी चौकियों पर बम बरसा रहे हैं. इस बीच खबर आई कि तहरीकए-ए-तालिबान (टीटीपी) ने पाकिस्तानी सेना के एक पोस्ट पर कब्जा कर लिया. लेकिन अब इसे लेकर पाकिस्तानी सेना की सफाई आई है. अफगानिस्तानी बॉर्डर पर पाकिस्तानी चौकी पर टीटीपी के कब्जे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. कहा जा रहा है कि टीटीपी ने इस वीडियो को खुद जारी किया है. लेकिन अब पाकिस्तानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि सेना की इस चौकी को हमले से कुछ समय पहले ही खाली कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि यहां से सैन्यकर्मियों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था. यह प्रक्रिया सिर्फ बाजौर तक सीमित नहीं थी बल्कि उत्तरी और दक्षिणी वजीरिस्तान में भी इसी तरह सैन्यकर्मियों को चौकियों से हटा दिया गया था. बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तालिबानी लड़ाकों को पाकिस्तानी पोस्ट पर हथियारों के साथ जश्न मनाते देखा जा सकता है. उन्होंने आर्मी पोस्ट से पाकिस्तान का झंडा उखाड़कर टीटीपी का झंडा भी लहरा दिया. अफगानी तालिबानी लड़ाकों और पाकिस्तानी सेना के बीच क्यों ठनी? पाकिस्तानी सेना और अफगान लड़ाकों के बीच यह विवाद उस समय गहरा गया, जब तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने हाल ही में वजीरिस्तान के मकीन इलाके में पाकिस्तानी सेना के 30 जवानों को मार गिराया था. इसके जवाब में, पाकिस्तान ने एयरस्ट्राइक करके यह संदेश देने की कोशिश की थी कि वह अपने सैनिकों की हत्या बर्दाश्त नहीं करेगा. अफगान तालिबान के पास भारी मात्रा में हथियार और दुर्गम इलाकों में छिपने की क्षमता है. उनके पास एके-47, मोर्टार, रॉकेट लॉन्चर जैसे आधुनिक हथियारों का विशाल भंडार है. इसके अलावा, तालिबानी लड़ाके उन पहाड़ों और गुफाओं से हमले करते हैं, जिनके बारे में पाकिस्तानी सेना को जानकारी तक नहीं है. शहबाज शरीफ सरकार पहले से ही आर्थिक संकट, सीपैक प्रोजेक्ट में देरी और बलूचिस्तान में अलगाववाद जैसी समस्याओं से जूझ रही है. इन मुद्दों ने सरकार और सेना दोनों को कमजोर किया है. अब तालिबान के साथ टकराव ने इस संकट को और बढ़ा दिया है. तालिबान की ताकत कितनी है? इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के पास इस समय एक लाख 50 हजार एक्टिव लड़ाके हैं. तालिबान ने अफगानिस्तान के लिए अब तक रक्षा बजट का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया है. अफगानिस्तान की सत्ता संभालने के बाद सेना को औपचारिक रूप देने के लिए स्पेशल फोर्स और आठ इन्फैंट्री कोर के अंतर्गत तीन बटालियन की नींव रखी गई. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.  

रेलवे ने महाकुंभ में 3 हजार स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया, 560 ट्रेने रिंग रेल रूट पर चलाई जाएंगी

प्रयागराज महाकुंभ के आयोजन के लिए ना केवल उत्तर प्रदेश प्रशासन बल्कि भारतीय रेलवे ने भी कमर कस ली है। प्रयागराज में गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के पवित्र संगम पर आगामी 13 जनवरी से शुरू होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जुटा है। दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक महाकुंभ के लिये क्षेत्र को तमाम सुविधाओं से लैस करने के मकसद से श्रमिकों की पूरी फौज नदियों के प्रवाह को व्यवस्थित करने, सड़कों को चौड़ा करने और घाटों को समतल करने में जुटी है। वहीं रेलवे ने महाकुंभ के लिए 3 हजार स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया है। इसमें से 560 ट्रेने रिंग रेल रूट पर चलाई जाएंगी। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर उपेंद्र चंद्र जोशी ने कहा कि आसपास के 9 रेलवे स्टेशनों पर 560 टिकटिंग पॉइंट की व्यवस्था की जा रही है। प्रयागराज जंक्शन, सुबेदारगंज, नैनी, प्रयागराज छेओकी, प्रयाग जंक्शन, फाफामऊ, प्रयागराज रामबाग, प्रयागराज संगम और झूसी स्टेशन पर टिकट काउंटर बनाए गए हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि इन पॉइंट्स से रोज करीब 10 लाख टिकट बांटे जा सकते हैं। महाकुंभ मेले को देखते हुए 15 दिन पहले टिकट लेने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि रिंग रेल रूट पर भी ट्रेनें चलाई जाएंगी। प्रयागराज-अयोध्या-वाराणसी-प्रयागराज, प्रयागराज संगम- जौनपुर-प्रयाग-प्रयागराज, गोविंदपुरी-प्रयागराज-चित्रकूट-गोविंदपुरी और झांसी-गोविंदपुरी-प्रयागराज-माणिकपुर-चित्रकूट-झांसी रूट पर ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेलवे 10 हजार से ज्यादा नियमित और 3 हजार से ज्यादा स्पेशल ट्रेनों का संचालन करेगा। स्पेशन ट्रेनों में करीब 1800 छोटे रूट पर और 700 ट्रेनें लंबे रूट पर चलेंगी। इसके अलावा रिंग रूट पर 560 ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा की नजरिए से 18 हजार से ज्यादा आरपीएफ और एसआरपी के जवानों को तैनात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज जंक्शन पर 6 बेड वाले ऑब्जरवेशन रूम का सेटअप तैयार किया गया है। यहां ऑक्सीजन सिलेंडर, कंसंट्रेटर, ईसीजी मशीन, ग्लुकोमीटर, नेबुलाइजर और स्ट्रेचर की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा यात्रियों की सुरक्षा के लिए 1186 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। इनमें से 116 कैमरे एआई तकनीक से चलते हैं। कहां से चलेंगी ट्रेनें अब तक जिन स्पेशल ट्रेनें की समय सारिणी सामने आई है उनमें मैसूर से लेकर कामाख्या और वलसाड़ से राजकोट तक की ट्रेनें शामिल हैं। इसमें मैसूर-दानापुर-मैसूर एक्स्परेस, कामाख्या-टूंडला-कामाख्या एक्सप्रेस, कानपुर से्ंट्रल-भागलपुर, नाहरलगुन-टुंडला-नाहरलगुन, टाटानगर-टुंडला- टाटानागर, रांची-टूंडला-रांची. पटना-प्रयागराज-पटना. गया-प्रयागराज-गया, विश्वामित्री-बलिया-विश्वामित्री, वलसाड-दानापुर-वलसाड, वापी-गया-वापी, साबरमती-बनारस-साबरमती, भावनगर टर्मिनल-बनारस-साबरमती. अहमदाबाद-जंघई-अहमदाबाद, राजकोट-बनारस-राजकोट, वेरावल-बनारस-वेरावल ट्रेनें शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस मेगा आयोजन को ‘एकता का महाकुंभ’ बताया और लोगों से समाज से नफरत और विभाजन को खत्म करने के संकल्प के साथ इस भव्य धार्मिक समागम से लौटने का आग्रह किया। महाकुंभ आगामी 13 जनवरी को ‘पौष पूर्णिमा’ से शुरू होगा और 45 दिनों के बाद 26 फरवरी को ‘महा शिवरात्रि’ पर सम्पन्न होगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, महाकुंभ में श्रद्धालुओं के लिये एक लाख 60 हजार टेंट और डेढ़ लाख शौचालयों की स्थापना की गई है और इनकी साफ-सफाई के लिए 15 हजार सफाई कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। मेला क्षेत्र में पानी की सुविधा देने के लिये 1,250 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके अलावा 67 हजार एलईडी लाइट, दो हजार सोलर लाइट और तीन लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नौ पक्के घाट, सात रिवरफ्रंट सड़कें और 12 किलोमीटर क्षेत्र में अस्थायी घाट निर्माणाधीन हैं। सात बस अड्डे भी बनाए जा रहे हैं। वहीं, क्षेत्र को सजाने के लिए 15 लाख वर्ग फुट से अधिक के भित्ति चित्र और ‘स्ट्रीट पेंटिंग’ बनाई गई हैं। हालांकि, हर बड़ा आयोजन अपने साथ उतनी ही बड़ी चुनौतियां भी लेकर आता है। कटान की वजह से गंगा नदी अपने मूल मार्ग से दूर चली गई है और महाकुंभ के लिए उपलब्ध भूमि कम हो गई है। इसके अलावा, पांच साल के दौरान नदी के प्रवाह की जद में आ जाने से साल 2019 के कुंभ के लिए इस्तेमाल की गई 3200 हेक्टेयर जमीन कम हो गई है।

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में मुस्लिम छात्राएं बुर्का पहनकर पहुंची संस्कृत विश्वविद्यालय

हरिद्वार सनातन नगरी हरिद्वार के उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में बुर्का और हिजाब पहने हुए मुस्लिम छात्राओं के प्रवेश ने एक बार फिर से विवाद खड़ा कर दिया है। इसकी भी चर्चा हो रही है कि क्या उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में भी इस्लामीकरण की बयार बहने लगी है और वह भी सनातन तीर्थ स्थली में ? जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें मुस्लिम छात्राएं, हिजाब और बुर्का पहने हुए परिसर में दिखाई दे रही हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में कई मुस्लिम छात्राएं अध्ययनरत हैं। पहले ये सामान्य छात्राओं की तरह ही परिधान में विद्यालय आती थीं किंतु अचानक कुछ दिनों से ये सभी छात्राएं या तो बुर्के में या फिर हिजाब पहने हुए कॉलेज में आने लगी हैं और क्लासरूम में भी बुर्का और हिजाब पहनकर बैठती हैं। ऐसा क्यों हुआ? छिड़ी बहस “पाञ्चजन्य” ने इस बारे में विश्वविद्यालय प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए कुलपति से वार्ता की और उक्त वीडियो के बारे में जानकारी साझा की। इस पर कुलपति डा. दिनेश चंद्र शास्त्री ने बताया कि ये विषय उनके संज्ञान में आया है। इस बारे में कुलसचिव और संबंधित एचओडी से बैठक कर एक महिला चेंजिंग रूम बनाने का निर्णय लिया गया है ताकि छात्राएं बुर्का आदि बदलकर अपने क्लास रूम में जाएं। बहरहाल ये छात्राएं यहां इतिहास और अन्य विषय तो पढ़ने आ रही हैं, लेकिन क्या वे साथ ही साथ वे इस्लामिक संस्कृति को भी इस संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश कराने में सफल हो गई है ? ये बात हरिद्वार में चर्चा का विषय बन गई है। उल्लेखनीय ये भी है कि गंगा नगरी हरिद्वार के आसपास डेमोग्राफी चेंज की घटना भी सामने आई है, जिसको लेकर सोशल मीडिया और अन्य मीडिया में लगातार खबरें चल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा हिजाब और बुर्के पर प्रतिबंध के फैसले पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश दिया कि क्लास में बुर्का अथवा हिजाब पहन कर बैठने की इजाजत नहीं दी जा सकती। विद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों की भी अनुमति नहीं दी जाएगी।

युवाओं में जागरूकता पैदा करने, सुरक्षा को बढ़ावा देने, नए साल के जश्न में कंडोम और ORS बांटेगा ये पब

पुणे  पुणे का एक पब अपने द्वारा आयोजित नए साल की पार्टी में आमंत्रित लोगों को कंडोम और ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के पैकेट बांटने जा रहा है. पब का दावा है कि इन सामानों के वितरण का उद्देश्य युवाओं में जागरूकता पैदा करना, सुरक्षा को बढ़ावा देना और जिम्मेदारी को प्रोत्साहन करना है. फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर बवाल मच गया है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. साथ ही पुलिस ने पब प्रबंधन से भी पूछताछ शुरू कर दी है. लेकिन आयोजकों ने कहा कि कंडोम बांटना कोई अपराध नहीं है. दूसरी ओर पूरे मामले को लेकर युवा कांग्रेस ने पुणे पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई है. पुणे के मुंधवा में एक रेस्तरां-सह-पब, हाई स्पिरिट्स कैफे है. यह पब अपने नियमित युवा ग्राहकों को नए साल के जश्न के निमंत्रण के रूप में ओआरएस के साथ कंडोम के पैकेट बांट रहा है. पुणे कांग्रेस का कहना है कि ऐसा कृत्य पुणे की शैक्षिक और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप नहीं है. पुणे युवा कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की चीजों से युवाओं में गलत संदेश जाने का खतरा है. जिससे गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं और समाज में अनुचित आदतों को बढ़ावा मिल सकता है.  

Economy में मजबूती, 2024-25 में GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान, आरबीआई रिपोर्ट

नई दिल्ली देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को जारी अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है।  साथ ही कहा है कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 2024-25 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि देश की जीडीपी को ग्रामीण खपत में सुधार, सरकारी खपत और निवेश में तेजी और मजबूत सेवा निर्यात से मदद मिलेगी। शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों की स्थिति हुई है मजबूत खबर के मुताबिक, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) का दिसंबर 2024 का अंक जारी किया है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन और वित्तीय स्थिरता के जोखिमों पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के सामूहिक मूल्यांकन को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों (एससीबी) की सुदृढ़ता मजबूत लाभप्रदता, घटती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और पर्याप्त पूंजी और तरलता बफर द्वारा मजबूत हुई है। जीएनपीए रेशियो कई वर्षों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों परिसंपत्तियों पर रिटर्न (आरओए) और इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) दशक के उच्चतम स्तर पर हैं, जबकि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि ज्यादातर एससीबी के पास प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों के तहत भी विनियामक न्यूनतम सीमा के सापेक्ष पर्याप्त पूंजी बफर है। तनाव परीक्षण म्यूचुअल फंड और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लचीलेपन को भी मान्य करते हैं। वास्तविक जीडीपी वृद्धि में गिरावट अर्थव्यवस्था पर, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट ने कहा कि 2024-25 की पहली छमाही के दौरान, वास्तविक जीडीपी वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) 2023-24 की पहली और दूसरी छमाही के दौरान दर्ज की गई क्रमशः 8. 2 प्रतिशत और 8. 1 प्रतिशत की वृद्धि से 6 प्रतिशत तक कम हो गई। आरबीआई ने कहा कि इस हालिया मंदी के बावजूद, संरचनात्मक विकास चालक बरकरार हैं। घरेलू चालकों, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश, मजबूत सेवा निर्यात और आसान वित्तीय स्थितियों में तेजी से समर्थित वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में ठीक होने की उम्मीद है।” रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कहा गया है कि आगे चलकर, बंपर खरीफ फसल और रबी फसल की संभावनाओं के अवस्फीतिकारी प्रभाव से खाद्यान्न की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक संघर्ष और भू-आर्थिक विखंडन भी ग्लोबल सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों पर उल्टा दबाव डाल सकते हैं। आरबीआई ने कहा, ‘‘इस हालिया सुस्ती के बावजूद संरचनात्मक वृद्धि चालक बरकरार हैं। घरेलू चालक, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश तथा मजबूत सेवा निर्यात के कारण 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार होने की उम्मीद है।’’ रिपोर्ट में मुद्रास्फीति के बारे में कहा गया कि बंपर खरीफ फसल और रबी फसल के चलते आगे चलकर खाद्यान्न कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। हालांकि, चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ते रुझानों के कारण जोखिम बने हुए हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और जिंस कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।  

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