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इसरो के चेयरमैन ने कहा- चांद पर अब इंसान भेजने की भी हो गई तैयारी, बताया किस साल लहराएगा तिरंगा

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद के चेयरमैन डॉ. एस सोमनाथ का कहना है कि भारत 2040 में चांद पर लैंडिंग करेगा। उन्होंने कहा कि हम इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू करने वाले हैं और इंसान को चांद पर लैंड कराएंगे। यही नहीं भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भी 2035 में स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। स्पेस स्टेशन मॉड्यूल की लॉन्चिंग 2028 में की जाएगी और फिर अगले 7 सालों में यह अभियान पूरा हो जाएगा। भारत के चंद्रयान मिशन की बड़ी सफलता के बाद इसरो का यह महत्वाकांक्षी अभियान पूरी दुनिया को अंतरिम में भारत की क्षमता को दिखाने वाला है। एस. सोमनाथ ने कहा कि अगले 15 सालों का रोडमैप हमने तैयार कर लिया है और लॉन्ग टर्म विजन के साथ प्रयासों में जुटे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार ने 31 हजार करोड़ रुपये का फंड इसरो के लिए जारी किया है। इसी पर बात करते हुए इसरो चीफ एस. सोमनाथ ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मुझे विश्वास है कि यह साल हमारे लिए बहुत शानदार रहेगा। हम अपने मिशनों पर आगे बढ़ेंगे। इसके अलावा पीएम के विजन के आधार पर आगे का भी रोडमैप तय करेंगे। स्पेस प्रोग्राम के इतिहास में हमारे पास पहली बार अगले 25 सालों का प्लान तय है।’ इस प्लान के तहत भारत अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने वाला है, जिसकी शुरुआत 2028 से होगी। इसके अलावा 2040 में भारत ने चांद पर इंसान को भेजने का लक्ष्य तय किया है। यह बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। डॉ. सोमनाथ ने कहा कि ऐसा कारनामा हम देश की आजादी की 100वीं वर्षगांठ पर करके दिखाएंगे। उन्होंने कहा, ‘हम जब देश की आजादी की 100वीं सालगिरह मनाएंगे तो भारत का झंडा भी चांद पर लहराएगा। हमारा एक यात्री वहां जाएगा और वहीं पर तिरंगा लहराकर लौटेगा। हमारा यह लक्ष्य वर्ष 2040 के लिए है।’ इससे पहले चंद्रयान-4 मिशन पर काम चल रहा है। इसके तहत यह तय किया जाएगा कि चंद्रयान मिशन कैसे सुरक्षित वापस लौटकर भी दिखाए। फिलहाल भारत इस बात की तैयारी कर रहा है कि कैसे चंद्रयान मिशन के लिए पेलोड तैयार किए जाएं। लॉन्च वीकल आदि को विकसित किया जाए, जिससे चांद पर लैंडिंग के साथ ही सुरक्षित वापसी भी की जा सके।

हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले तीन नेशनल हाइवे बंद, चार लोगों की मौत

शिमला हिमाचल प्रदेश में ताजा बर्फबारी के बाद लोगों की परेशानियां बढ़ती ही जा रही हैं। बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले तीन नेशनल हाइवे बंद हो गए हैं। इसके अलावा 174 सड़कों पर भी यातायात रोक दिया गया है। इतना ही नहीं, 683 बिजली लाइनें भी ठप हैं और पिछले 24 घंटे के दौरान चार लोगों की जान भी चली गई है। हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा ने बताया कि सोमवार दोपहर के बाद से हिमाचल के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हुई, जिसमें शिमला भी शामिल है। ताजा बर्फबारी के बाद पर्यटक और बागवान खुश हैं। हालांकि, लोगों की दिक्कतें भी बढ़ी हैं। बर्फबारी के बाद हिमाचल में तीन एनएच समेत 174 सड़कें यातायात के लिए बंद हो गई हैं। उन्होंने बताया, “बर्फबारी के कारण 683 बिजली की लाइनें बाधित हुई हैं। शिमला में सबसे अधिक सड़कें बंद हैं। इसके अलावा चार लोगों की मौतें हुईं, जो किसी ऊंचाई वाली जगह गिरने और फिसलने की वजह से हुई है। साथ ही कई लोगों को चोटें भी आई हैं।” ओंकार शर्मा ने कहा, “बर्फबारी के चलते दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ समेत कई अन्य क्षेत्रों से टूरिस्ट के हिमाचल प्रदेश आने का भी सिलसिला जारी है। नए साल से पहले मौसम विभाग की तरफ से बारिश और बर्फबारी को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया है।” हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पर्यटकों को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मेरी पर्यटकों से अपील है कि वह निर्देशों का पालन करें और बर्फबारी वाले क्षेत्र में ड्राइविंग करने से बचें, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके। मौसम विभाग ने हिमाचल में मंगलवार को भी बर्फ और बारिश की संभावना व्यक्त की है। मौसम विभाग के मुताबिक, 27 से 29 दिसंबर के बीच ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।

हमास नेता इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या करवाई थी इजरायल ने पहली किया स्वीकार

यरूशलम इजरायल ने पहली बार माना है कि उसने हमास नेता इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या करवाई थी। इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने एक कार्यक्रम में हूती ग्रुप को चेतावनी देते हुए यह बात कही। कैट्ज ने कहा, “हम हूती ग्रुप पर कठोर हमला करेंगे, उनके रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएंगे और उनके नेताओं का सिर कलम करेंगे – ठीक वैसे ही जैसे हमने तेहरान, गाजा और लेबनान में हानीया, सिनवार और नसरल्लाह के साथ किया था।” हूती ग्रुप ने सोमवार को एक और ड्रोन हमला किया था। हालांकि इजरायली सेना ने दावा किया था कि ड्रोन को उसकी वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा रोक दिया गया। गाजा संघर्ष छिड़ने के बाद से हूती ग्रुप इजरायल के शहरों पर रॉकेट-ड्रोन हमले कर रहे हैं और लाल सागर में ‘इजरायल से जुड़े’ जहाजों को निशाना बना रहा है। हानिया की हत्या 31 जुलाई को तेहरान के एक गेस्टहाउस में कथित तौर पर एक विस्फोटक उपकरण के जरिए की गई थी। व्यापाक रूप से माना जाता है कि विस्फोटक उपकरण इजरायली एजेंटों ने रखा था। अपनी मृत्यु के समय, हानिया हमास के लिए इजरायल के साथ युद्ध विराम वार्ता का नेतृत्व कर रहे थे। ईरान और हमास हानीया की हत्या के लिए इजरायल को जिम्मेदार बताते रहे हैं। इजरायल इससे पहले दक्षिणी गाजा में हमास नेता याह्या सिनवार (हानिया का उत्तराधिकारी) और बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहिएह में हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह की हत्या की जिम्मेदारी ले चुका है। हानिया के उत्तराधिकारी सिनवार को अक्टूबर में गाजा में एक मुठभेड़ में इजरायली सेना ने मार गिराया था। हमास अभी भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया में है। ईरान समर्थित लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के नेता हसन नसरल्लाह की सितंबर में एक इजरायली एयर स्ट्राइक में मौत हुई थी।

राज्य सरकार ने उठाया कदम, 25 दिसंबर से 1 फरवरी तक स्कूलों में छुट्टी का ऐलान

शिमला सर्दियों की छुट्टियों का इंतजार हर किसी को रहता है, खासकर तब जब ये लंबी हो। उत्तराखंड में स्कूली बच्चों के लिए इस बार एक महीने से भी ज्यादा की सर्दियों की छुट्टियां घोषित हो चुकी हैं। पहाड़ों की ठंड और बर्फबारी के बीच बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।   कब से शुरू होंगी छुट्टियां? उत्तराखंड के स्कूल 25 दिसंबर से बंद हो जाएंगे और फिर सीधे 1 फरवरी को दोबारा खुलेंगे। इसका मतलब है कि बच्चों को पूरे एक महीने से अधिक समय तक घर पर रहने और ठंड से बचने का मौका मिलेगा। सर्द मौसम का असर उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति और पहाड़ी इलाकों की कठोर सर्दी के कारण यहां सर्दियों में जमकर बर्फबारी होती है। ठंड से बच्चों को राहत देने और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जहां पहाड़ी इलाकों में सर्दियों की छुट्टियां लंबी होती हैं, वहीं मैदानी इलाकों में गर्मियों की छुट्टियां ज्यादा समय तक चलती हैं। इस बार मैदानी इलाकों में 1 जनवरी से 15 जनवरी तक का अवकाश घोषित किया गया है। अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी लंबी छुट्टियों के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल होमवर्क और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की योजना बनाते हैं। माता-पिता की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे घर पर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करें और पढ़ाई का माहौल तैयार करें। वहीं, शिक्षकों का भी फर्ज है कि बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रहे। बच्चों का ध्यान रखें सर्दियों की छुट्टियां न केवल आराम का मौका देती हैं बल्कि ठंड से बचाव और स्वास्थ्य का ध्यान रखने का भी समय होता है। अभिभावकों और बच्चों को चाहिए कि वे इस समय का सही उपयोग करें।

PM मोदी क्रिसमस सेलिब्रेशन को लेकर केरल की एक कैथोलिक चर्च के बिशप ने तंज कसा, कहा- यहां तो हमला करते हैं

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी दिल्ली में क्रिसमस सेलिब्रेशन के एक इवेंट में शामिल हुए थे। इसका आयोजन कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने किया था। इस पर केरल की एक कैथोलिक चर्च के बिशप ने तंज कसा है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘वहां वे बिशप का सम्मान करता है और क्रिब को लेकर श्रद्धा दिखाते हैं। यहां वे क्रिब को तबाह करना चाहते हैं।’ बता दें कि क्रिब क्रिसमस सेलिब्रेशन के दौरान की जाने वाली उस सजावट को कहा जाता है, जो ईसा मसीह के जन्म को दर्शाती है। उन्होंने पलक्कड़ के सरकारी स्कूलों में क्रिसमस सेलिब्रेशन के आयोजनों में बवाल किए जाने की घटनाओं का जिक्र किया। इनमें से एक घटना में चित्तूर में तीन वीएचपी नेताओं को अरेस्ट किया गया है। इसके अलावा दूसरी घटना में उपद्रवियों की तलाश जारी है। आरोप है कि पलक्कड़ के नालेपल्ली इलाके के अपर प्राइमरी स्कूल में क्रिसमस मनाया जा रहा था। इस दौरान के. अनिल कुमार के नेतृत्व में वीएचपी के तीन नेता पहुंच गए थे। आरोप है किन इन लोगों ने क्रिसमस के सेलिब्रेशन पर सवाल उठाया और उसे रोकने की कोशिश की। इन लोगों ने कहा कि आखिर आप लोग क्रिसमस मनाते हैं, लेकिन जन्माष्टमी का सेलिब्रेशन क्यों नहीं किया जाता। इसके अलावा टीचर्स और अन्य लोगों के सांता क्लॉज की ड्रेस पहनने को लेकर भी सवाल उठाया। वीएचपी के नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 329 (3), 296 (b), 351 (2) और 132 के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा एक अन्य स्कूल में क्रिसमस के क्रिब को नुकसान पहुंचाया गया। स्कूल को शुक्रवार को बंद कर दिया गया और सेमेस्टर एग्जाम के बाद छुट्टियां हैं। फिर भी पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और मामले की जांच की जा रही है। इन्हीं दो घटनाओं को लेकर बिशप ने पीएम नरेंद्र मोदी के क्रिसमस सेलिब्रेशन में जाने को लेकर तंज कसा है। हालांकि भाजपा की ओर से स्नेह यात्रा की शुरुआत भी की गई है। इसके तहत केरल में भाजपा के नेता क्रिसमस के कार्य़क्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी भी कई बार इसका जिक्र कर चुके हैं कि हमें अल्पसंख्यक समुदायों के बीच जाना होगा और उनके बीच पैदा हुई भ्रांतियों को दूर करना होगा।

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 78 साल से जारी आरक्षण पर सवाल उठाया, आरक्षण व्‍यवस्‍था सिर्फ 10 साल की थी

नई दिल्ली बाबा साहब भीम राव आंबेडकर पर संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर सियासी घमासान अभी थमा नहीं है। कांग्रेस के बाद आज बसपा सुप्रीमो मायावती के आह्वान पर बसपा इस मुद्दे को लेकर देश व्‍यापी आंदोलन कर रही है। इस बीच ज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जातिगत आरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि आरक्षण की व्‍यवस्‍था सिर्फ 10 साल के लिए की गई थी। बाबा साहब ने कभी नहीं चाहा था कि लोग आरक्षण की वैशाखी लेकर जिंदगी भर चलते रहें। लेकिन लागू होने के 78 साल बाद भी वो वर्ग जिसके लिए इसे लागू किया गया था, मुख्‍य धारा में शामिल नहीं हो सका है। इसका मतलब है कि या तो आंबेडकर फेल हो गए या तो आंबेडरवादी फेल हो गए। उन्‍होंने कहा कि लोगों को इसमें नहीं जाना चाहिए बल्कि शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य जैसी चीजों से जुड़ी अपनी समस्‍याओं को उठाना चाहिए। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं। वह सोमवार को काशी पहुंचे। यहां केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में डॉ. हरिप्रकाश पांडेय ने सपत्नीक पादुका पूजन किया। बताया जा रहा है कि शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत के दौरान किसी प्रश्‍न के उत्‍तर में उपरोक्‍त बातें कहीं। उन्‍होंने कहा, ’78 साल हो गए। बाबा साहब आंबेडकर के संविधान की बात की जाती है। 78 साल में जो लोग आंबेडकर के पीछे थे उनका कितना उन्‍नयन हुआ, ये बताइए। 10 साल के लिए आरक्षण दिया गया था, 78 साल हो गया वो आरक्षण कंटीन्‍यू है और उसके लिए जूझ रहे हैं उनके लोग कि ये न खत्‍म किया जाए। आरक्षण इसलिए थोड़े दिया गया था कि आप जिंदगी भर के लिए पंगु होकर आरक्षण की बैसाखी पर खड़े रहें।’ उन्‍होंने कहा- ‘ आरक्षण इसलिए दिया आंबेडकर साहब ने कि उसका लाभ लेकर आप समाज की मुख्‍य धारा में आ जाएं। आप कहां आ पाए? जो लोग आंबेडकर का नाम लेते हैं हम उन्‍हीं से पूछना चाहते हैं कि आंबेडकर की भावना का कितना उन्‍होंने ख्‍याल रखा। आंबेडकर ने यह नहीं चाहा था कि जिंदगी भर, अगले दो सौ साल, हजार साल तक ये लोग आरक्षण खाते रहें। उन्‍होंने ये चाहा था कि आरक्षण की वैशाखी को लेकर चलें और मुख्‍य धारा में शामिल हो जाएं। 78 साल में आप लोग मुख्‍य धारा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इसका मतलब है कि आंबेडकर या तो फेल हो गए या तो आंबेडरवादी फेल हो गए।’ शंकराचार्य ने कहा कि ‘हमारा यह कहना है कि इसमें न जाइए। आपकी जो समस्‍याएं हैं। आपको शिक्षा नहीं मिल रही है आप शिक्षा की मांग करिए। आपको स्‍वास्‍थ्‍य नहीं मिल रहा है, आप स्‍वास्‍थ्‍य की मांग करिए। आपको मुख्‍य धारा में नहीं लाया जा रहा है, कहीं अपमान हो रहा है, उसको उठाइए कि भाई जब समाज एक है तो भेदभाव नहीं होना चाहिए। ये तो ठीक है लेकिन आंबेडकर का किसी ने मान कर दिया किसी ने अपमान कर दिया। अब इसी में आप ढोल पीटते रहिए और राजनीतिज्ञों को जो करना है वे कर रहे हैं।’ शंकराचार्य का एयरपोर्ट पर रवि त्रिवेदी, यतींद्र चतुर्वेदी, कीर्ति हजारी शुक्ला आदि ने स्वागत किया। वहां से वह कचहरी में अधिवक्ताओं के एक कार्यक्रम में पहुंचे। फिर सड़क मार्ग से राजघाट पहुंचे। राजघाट से जल मार्ग से केदारघाट गए। शंकराचार्य 25 दिसंबर तक काशी में प्रवास करेंगे। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अनंत जन्मों के पुण्य कर्मों के फलों के उदित होने पर जीव को काशीवास सुलभ होता है। काशीवासियों को दृढ़ता से धर्म का पालन करना चाहिए।

खालिस्तानी आतंकियों को लेकर हुआ खुलासा, पाकिस्तान से खड़ी की खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स

नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मारे गए तीन खालिस्तानी आतंकियों को लेकर खुलासा हुआ है कि ये खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स नाम के आतंकी संगठन से जुड़े थे। इस संगठन के बारे में पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव का कहना है कि इसका गठन रंजीत सिंह नीता ने किया है, जो जम्मू का रहने वाला है, लेकिन लंबे समय से पाकिस्तान में बसा है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार जम्मू के सिंबल कैंप का रहने वाला रंजीत सिंह नीता फिलहाल पाकिस्तान में है और उसने आईएसआई की मदद से खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स नाम का संगठन खड़ा किया है। यह खालिस्तानी गुट लोगों को बरगलाता है और उनमें कट्टरता भरने के बाद भर्ती कर लेता है। इसमें बड़ी संख्या में शामिल लोग जम्मू के ही रहने वाले हैं, जिन्हें नीता ने ही कट्टरपंथ के दलदल में धकेल दिया। पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि नीता ने 1980 के दशक में ही पाकिस्तान में अपने लिंक बना लिए थे। उसने जम्मू इलाके के सिंबल कैंप, आरएस पुरा जैसे इलाकों में अपनी पकड़ बनाई, जहां सिखों की अच्छी आबादी थी। इसके बाद 1990 के दशक में तो वह पाकिस्तान में ही जाकर बस गया और फिर खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स जैसा संगठन ही खड़ा कर दिया। यह संगठन उस दौर में बसों और ट्रेनों को टारगेट करता था, जो दिल्ली या पंजाब आती जाती थीं। यही नहीं इसने अपना रूप एक दशक बाद फिर से बदला और धार्मिक नेताओं को टारगेट करने लगा। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स ने ही 2009 में रुलदा सिंह का कत्ल कर दिया था, जो राष्ट्रीय सिख संगत के प्रमुख थे। यही नहीं विएना में संत रामानंद की हत्या में भी इसका ही हाथ था। फिर 2017 के बाद से इसके निशाने पर पुलिस थाने और उसके अधिकारी रहे हैं। अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों में है मौजूदगी कई सूत्रों का कहना है कि इसने लगातार पुलिस थानों पर हमले किए हैं और इसके बारे में जानकारी मिली तो पुलिस ऐक्टिव हो गई। यहां तक कि पीलीभीत तक संपर्क साधा गया, जहां खालिस्तानी आंदोलन के दौर में भी आतंकवाद बढ़ा था। इस बार भी ऐसा हुआ और इन आतंकियों के तार पीलीभीत तक जुड़े पाए गए। अंत में यूपी पुलिस के सहयोग से तीन लोगों को मार गिराया गया। आने वाले दिनों में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स से जुड़े लोगों के खिलाफ ऐक्शन और तेज हो सकता है। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स भारत में प्रतिबंधित है, लेकिन इसकी मौजूदगी अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया, कनाडा, बेल्जियम, नेपाल, इटनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में भी है।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बार फिर संघ प्रमुख के बयान पर अपना विरोध दर्ज कराया, हिंदुओं के नेता नहीं

मुंबई संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर संत समाज उबल रहा है। इस बीच जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक बार फिर संघ प्रमुख के बयान पर अपना विरोध दर्ज कराया है। मुंबई में ANI से बातचीत में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, “…वह किसी संगठन के प्रमुख हो सकते हैं लेकिन वह हिंदू धर्म के प्रमुख नहीं हैं कि उनकी बात हम मानते रहें। वह हमारे अनुशासक रहे हैं, हम उनके अनुसार नहीं चल सकते।” उन्होंने आगे कहा, “मैं बीस बार कह रही हूं कि हिन्दू धर्म की व्यवस्था के लिए वह ठेकेदार नहीं हैं। हिंदू धर्म की व्यवस्था हिन्दू धर्म के आचार्यों के हाथ में है। संपूर्ण भारत के भी वह प्रतिनिधि नहीं हैं।” जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यह भी कहा कि जो हमारी ऐतिहासिक वस्तुएं हैं, वह हमें मिलनी ही चाहिए और हमें लेनी भी चाहिए, चाहे जैसे मिले। भले इसके लिए साम, दाम, दंड, भेद क्यों न अपनाना पड़े। रामभद्राचार्य के अलावा और कई संतों ने भी मोहन भागवत के बयान की आलोचना की है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी भागवत के उस बयान पर उनकी आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा था कि हर जगह मंदिर ढूंढ़ने की इजाजत नहीं दी सकती। बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पुणे में एक व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कहा , “धर्म प्राचीन है और धर्म की पहचान से ही राम मंदिर बनाया गया है। यह सही है, लेकिन सिर्फ मंदिर बन जाने से कोई हिंदुओं का नेता नहीं बन सकता। हिंदू धर्म सनातन धर्म है और इस सनातन और सनातन धर्म के आचार्य सेवाधर्म का पालन करते हैं। यह मानव धर्म की तरह सेवा धर्म है। सेवा करते समय हमेशा चर्चा से दूर रहना हमारा स्वभाव है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग बिना दिखावे के लगातार सेवा करते हैं, वे सेवा की इच्छा रखते हैं। सेवा धर्म का पालन करते हुए हमें अतिवादी नहीं होना चाहिए और देश की परिस्थिति के अनुसार मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए। मानव धर्म ब्रह्मांड का धर्म है और इसे सेवा के माध्यम से प्रकट किया जाना चाहिए। हम विश्व शांति की घोषणा करते हैं , लेकिन अन्य जगहों पर अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है? इस पर ध्यान देना जरूरी है। पेट भरने के लिए जो जरुरी है, वह करना चाहिए , लेकिन घर-गृहस्थी से परे जो कुछ भी हमें मिला है, उसका दोगुना सेवा के रूप में देना चाहिए।”

रेलवे का महाकुंभ के लिए बड़ा प्लान, 3 हजार स्‍पेशल समेत 13 हजार ट्रेनें चलाएगा रेलवे

प्रयागराज उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इस विशाल धार्मिक आयोजन में देशभर से करोड़ों लोग शामिल होंगे। महाकुंभ के लिए रेलवे ने देशभर से 3,000 विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। हालांकि, उत्तर पश्चिम रेलवे से केवल दो विशेष ट्रेनें चलेंगी—एक उदयपुर और दूसरी बाड़मेर से। इसके अलावा, पांच अन्य विशेष ट्रेनें जयपुर सहित उत्तर पश्चिम रेलवे के कई स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। महाकुंभ 2025 में करीब 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की उम्‍मीद है। उनकी सुगम आवाजाही के लिए इंडियन रेलवे ने व्‍यापक तैयारी की है। महाकुंभ 2025 के मद्देनजर रेलवे द्वारा इस बार 3000 स्पेशल ट्रेनों के साथ 13000 से अधिक रेलगाड़ियों का संचालन करेगा। महाकुंभ 2025 की तैयारियों पर रेलवे अकेले प्रयागराज में ही पिछले 2 साल में 5000 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है। यह जानकारी प्रयागराज पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है। अर्द्धकुंभ से अधिक ट्रेनें चलेंगी उन्‍होंने बताया, प्रयागराज क्षेत्र में सुगम रेल परिचालन के लिए 21 रोड ओवर ब्रिजों और रोड अंडर ब्रिजों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2019 में आयोजित कुम्भ मेला में 7000 गाड़ियों का संचालन किया गया था, जबकि इस बार 16000 से भी अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। मध्य प्रदेश से चलेंगी 48 से अधिक कुंभ स्पेशल ट्रेन इसमें भोपाल रेल मंडल सहित मप्र से विभिन्न स्टेशनों से लगभग 48 से अधिक ट्रेनें ठहराव लेकर चलेंगी। 01661-01662 रानी कमलापति-वाराणसी के लिए कुंभ स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। जानिए टाइम और स्टॉपेज की पूरी लिस्ट     रानी कमलापति से ट्रेन 16 जनवरी, 20 जनवरी, 23 जनवरी, 6 फरवरी, 17 फरवरी और 20 फरवरी को चलेगी। वहीं, वाराणसी से ट्रेन 17 जनवरी, 21 जनवरी, 24 जनवरी, 7 फरवरी, 18 फरवरी और 21 फरवरी को चलेगी।     यह ट्रेन मप्र के मंडीदीप, औबेदुल्लागंज, बुधनी, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), इटारसी, सोहागपुर, पिपरिया, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर, श्रीधाम, मदनमहल, जबलपुर, देवरी, सिहोरा, कटनी, जुकेही, मैहर, सतना, मझगवां से होते हुए उप्र के मानिकपुर, प्रयागराज, मिजार्पुर से होते हुए वाराणसी जाएगी। श्रीधाम एक्सप्रेस नौ, मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस आठ घंटे देरी से पहुंची भोपाल भोपाल और रानी कमलापति रेलवे स्टेशनों पर रविवार देर रात और सोमवार सुबह यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इसका मुख्य कारण उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में चल रहा तीसरी लाइन का निर्माण कार्य है। संदलपुर-आंतरी स्टेशनों के बीच अप लाइन पर कट और कनेक्शन का काम चल रहा है, जिसके कारण भोपाल सहित मंडल के कई स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों को 22 दिसंबर तक परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा था। इसके साथ ही कोहरे का असर भी ट्रेनों की आवाजाही के समय पर पड़ रहा है। कोहरे के कारण कई ट्रेनों की गति धीमी हो गई है, जिससे ये ट्रेनें अपने निर्धारित समय से गंतव्य पर काफी देरी से पहुंच रही हैं। कुछ ट्रेनें तो डेढ़ घंटे से लेकर नौ घंटे तक की देरी से भोपाल पहुंची। ऐसे में यात्रियों को स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यह ट्रेनें पहुंची देरी से     ट्रेन 12191 श्रीधाम एक्सप्रेस 9:35 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12618 मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस 8:06 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12644 हजरत निजामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस 5:10 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12724 आंध्र एक्सप्रेस 2:15 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12780 हजरत निजामुद्दीन-वास्को डी गामा एक्सप्रेस 2:10 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12626 नई दिल्ली-त्रिवेंद्रम केरला एक्सप्रेस 1:52 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12722 दक्षिण एक्सप्रेस 1:30 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12616 जीटी एक्सप्रेस 1:35 घंटे लेट आई।     ट्रेन 11058 अमृतसर एक्सप्रेस 1:20 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12002 शताब्दी एक्सप्रेस 36 मिनट लेट आई।   पहली बार मेमू ट्रेन महाकुंभ 2025 को देखते हुए पहली बार छोटी दूरी के लिए बड़ी संख्या में मेमू ट्रेन का इंतजाम किया जा रहा है। महाकुंभ 2025 की रेगुलर गाड़ियों में दोनों तरफ इंजन लगाया जाएगा जिससे समय की बचत होगी । वहीं श्रद्धालुओं और रेलयात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी। बनारस से प्रयागराज के मध्य रेल ट्रैक के दोहरीकरण से ट्रेनों की स्पीड बढ़ी है। इसी खंड में झूंसी से दारागंज के मध्य गंगा नदी पर 100 वर्ष बाद नया रेल ब्रिज बन कर तैयार हो चुका है। फाफामऊ-जंघई के बीच दोहरीकरण होने से ट्रेन परिचालन क्षमता में वृद्धि हुई है। महाकुंभ 2025 के दौरान बेहतर सुविधाओं के लिए विभिन्न स्टेशनों पर 43 स्थायी होल्डिंग एरिया का निर्माण किया गया है। प्रयागराज क्षेत्र के सभी स्टेशनों पर सभी फुट ओवर ब्रिजों पर वनवे ट्रैफिक की व्यवस्था की गई है। वहीं प्रयागराज क्षेत्र में सुगम रेल परिचालन के लिए 21 रोड ओवर ब्रिजों और रोड अंडर ब्रिजों का निर्माण हो चुका है। 13 को प्रयागराज आ सकते हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 13 दिसंबर को प्रयागराज आ सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव महाकुम्भ की तैयारियों का अवलोकन करने रविवार प्रयागराज पहुंचे थे। उन्‍होंने प्रयागराज में सबसे पहले झूंसी रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों एवं महाकुंभ 2025 की तैयारियों का निरीक्षण किया। इसके बाद झूंसी स्टेशन के निकट गंगा नदी पर प्रयागराज–वाराणसी रेल मार्ग दोहरीकरण कार्य के अंतर्गत बने नए ब्रिज संख्या 111 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में फाफामऊ स्टेशन एवं प्रयाग जंक्‍शन का भी निरीक्षण किया और महाकुंभ 2025 की तैयारियों को परखा। इस दौरान रेलमंत्री ने फाफामऊ से प्रयाग तथा प्रयाग से प्रयागराज जंक्‍शन तक विंडो ट्रेलिंग करते हुए रेलपथ की संरक्षा की जानकारी भी ली। इस अवसर पर इन दोनों स्टेशनों पर उपस्थित जन प्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों से भेंट की। इस दौरान अध्यक्ष रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार सहित उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे एवं पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एवं संबंधित मंडल रेल प्रबंधकों के साथ अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिमाचल प्रदेश की वादियां बर्फ में लिपटी, 174 स्टेट और 3 नेशनल हाईवे बंद, 1000 से अधिक गाड़ियां फंस गईं

श्रीनगर/ मनाली लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पहाड़ सफेद चादर से ढक गए हैं. हिमाचल प्रदेश की वादियां बर्फ में लिपट गई हैं. मनाली, कुल्लू, रोहतांग और कई अन्य इलाकों में हुई भारी बर्फबारी ने संकट को तो बढ़ा दिया लेकिन पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई है. कल इस बर्फबारी की वजह से मनाली-केलांग मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अस्थाई रूप से रोकनी पड़ी. अटल टनल के रास्ते पर तो करीब 1000 गाड़ियां फंस गईं. हालांकि प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रेस्क्यू अभियान चलाया. हिमाचल में 3 नेशनल हाईवे बंद हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के चलते पिछले 24 घंटे में 174 स्टेट और 3 नेशनल हाईवे ( NH 03, NH 305, NH 505) बंद किए गए हैं.बिजली और पानी का भी कुछ ज़िलों के डिवीज़नल एरिया कनेक्शन काटा गया है.जबकि 6 ज़िलों में 683 जगह बिजली बाधित है.बदले मौसम और बर्फ़बारी के कारण जन सेवाएं बाधित है. आपदा सूचना विभाग ने जिले के अनुसार रिपोर्ट जारी की है. वहीं, सैलानियों के लिए भी एडवाइज़री जारी की गई है. हिमाचल प्रदेश जैसे हालात उत्तराखंड में भी होने लगे हैं. राज्य के कई ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई है. हालांकि हिमाचल की तुलना में अभी यहां बर्फबारी कम है. फिर भी औली, उत्तरकाशी, चकराता, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले इलाके सफेद चादर से ढंक गए हैं. केदारनाथ धाम में इस सीजन की दूसरी बर्फबारी है. बर्फबारी की वजह से वहां चल रहा पुनर्निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है. केदारनाथ धाम में कल से लगातार बर्फबारी जारी है. धाम में अभी तक एक फ़ीट से अधिक तक बर्फ गिर चुकी है. मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि क्रिसमस और न्यू ईयर पर ज्यादा ठंड रह सकती है. उत्तराखंड के मशहूर पर्यटन स्थल और स्की रिजॉर्ट औली भी एक बार फिर से जबरदस्त बर्फ की आगोश में आ चुका है. औली की वादियां में तस्वीरों में देख सकते हैं किस तरह से पेड़ पौधे, मकान, रास्ते सब कुछ यहां बर्फ की आगोश में दिखाई दे रहा है, जिसके बाद औली का नजारा अपने आप में बहुत ही खूबसूरत दिखाई दे रहा है. जिसका इंतजार पर्यटकों को और स्थानीय होटल व्यवसाईयों को लंबे समय से था वह अब जाकर यहां पर देखने को मिल रहा है. आधा फीट बर्फ की मोटी चादर के नीचे औली की वादियां हर तरफ सफेद दिखाई दे रही है. वहीं कल क्रिसमस है और इस समय वीकेंड के चलते बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड के औली आ रहे हैं. ऐसे में उनके लिए यह बर्फबारी किसी तोहफे से कम नहीं है क्योंकि अब औली की वादियां बर्फ से लकदग हो चुकी है. ऐसे में यहां पहुंचे पर्यटकों को मन मांगी मुराद पूरी हो चुकी है औली अब एक बार फिर से जबरदस्त बर्फ की आगोश में आ चुका है. जम्मू-कश्मीर में भी मौसम का रूख काफी हद तक बदल गया है. वहां भी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी तेज है. कल पीर पंजाल और सोनमर्ग में बर्फबारी हुई. कई अन्य इलाकों में भी मौसम विभाग का अलर्ट है. इन दिनों कश्मीर का तापमान लगातार गिरा है. अभी श्रीनगर में रविवार की रात माइनस 3.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. मशहूर डल झील गिरते पारे की वजह से जमने लगी है. वहीं पहलगाम में माइनस 5 डिग्री तापमान रहा. मौसम विभाग की मानें तो बुधवार तक तापमान और झटका देने वाला है.  

गुवाहाटी का बहुचर्चित घोटाला, मास्टरमाइंड Khusdeep Bansal पर गंभीर आरोप

गुवाहाटी गुवाहाटी में हाल ही में सामने आए एक बहुचर्चित आर्थिक घोटाले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस मामले का मुख्य मास्टरमाइंड खुसदीप बंसल को बताया जा रहा है, जो आरोपों के केंद्र में हैं। उनके साथ, इस आपराधिक षड्यंत्र में प्रमुख भूमिका निभाने वाले परथा भारद्वाज को अदालत ने आज जमानत देने से इनकार कर दिया। मामले की पृष्ठभूमि यह मामला पी.आर. केस नंबर 2252/2024 के तहत दर्ज है। मामले की जांच में पाया गया कि खुसदीप बंसल और उनके साथी, परथा भारद्वाज, ने करोड़ों रुपये की ठगी और जालसाजी के जरिए सैकड़ों लोगों को धोखा दिया। यह घोटाला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में फैला हुआ है। आरोपों की गंभीरता आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120(B) (आपराधिक षड्यंत्र), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 418 (धोखा देकर नुकसान पहुंचाना), 419 (प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 467 (महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी), और 471 (जाली दस्तावेजों का उपयोग) के तहत आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में साजिश की गहराई और आर्थिक नुकसान का स्तर इतना बड़ा है कि इसे साधारण अपराध नहीं माना जा सकता। खुसदीप बंसल: मास्टरमाइंड की भूमिका जांच के दौरान पता चला कि खुसदीप बंसल ने एक सुव्यवस्थित नेटवर्क बनाया, जिसमें नकली दस्तावेज़, फर्जी कंपनियां और जालसाजी के अन्य तरीकों का उपयोग किया गया। इस नेटवर्क का मुख्य उद्देश्य भोले-भाले निवेशकों और व्यवसायियों को धोखा देना था। बंसल ने अपने संपर्कों और प्रभाव का उपयोग करके कई सरकारी और गैर-सरकारी परियोजनाओं में निवेश के नाम पर भारी धनराशि इकट्ठा की। उनके खिलाफ दर्ज शिकायतों के अनुसार, इस पूरे घोटाले की योजना और क्रियान्वयन उनकी निगरानी में हुआ। परथा भारद्वाज की संलिप्तता परथा भारद्वाज, जिन्हें इस घोटाले में खुसदीप बंसल का दाहिना हाथ माना जाता है, पर आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेज तैयार करने, गवाहों को डराने और धन के लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अदालत ने आज उनकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उनके खिलाफ लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। अदालत की टिप्पणी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने कहा, “आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लेना जरूरी है। ये अपराध न केवल व्यक्तिगत धन हानि पहुंचाते हैं बल्कि देश की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर करते हैं।” अभियोजन पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि खुसदीप बंसल और परथा भारद्वाज जैसे अपराधी अगर जमानत पर बाहर आते हैं, तो वे गवाहों को डराने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की पूरी कोशिश करेंगे। जमानत याचिका पर सुनवाई अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच लंबी बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने कई सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए यह स्थापित किया कि इस तरह के मामलों में जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि परथा भारद्वाज को स्वास्थ्य कारणों से जमानत दी जानी चाहिए, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि जेल प्रशासन उनकी चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखेगा। जांच की दिशा अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि खुसदीप बंसल और उनके नेटवर्क ने सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी दस्तावेजों को वैध ठहराने की कोशिश की। साथ ही, बंसल के विदेशी खातों की भी जांच की जा रही है, जहां घोटाले की धनराशि स्थानांतरित की गई हो सकती है। अगली सुनवाई की तारीख इस मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी 2025 को निर्धारित की गई है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि वे जांच में तेजी लाएं और सभी सबूतों को प्रस्तुत करें। आम जनता के लिए संदेश यह मामला उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे निवेश करते हैं। खुसदीप बंसल जैसे अपराधी आम लोगों की मेहनत की कमाई को अपने आपराधिक इरादों के लिए इस्तेमाल करते हैं।

म्यांमार में सत्ताधारी जुंटा का मुश्किल दौर जारी, जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज

नेपीडाॅ  म्यांमार में सत्ताधारी जुंटा का मुश्किल दौर जारी है। अराकान आर्मी नाम का विद्रोही गुट राखिने और चिन राज्यों में जुंटा सेना को लगातार पीछे धकेल रहा है। ये दोनों राज्य भारत की सीमा से सटे हैं। इसी बीच कई पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बैंकॉक में म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत की। क्या है पूरा मामला जानिए खबरों के मुताबिक,अराकान आर्मी ने रखाइन राज्य के अन्ना शहर में सैन्य मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। विद्रोहियों का दावा है कि चिन राज्य में लगभग 200 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज है,जहां भारत की ओर से निर्मित बंगाल की खाड़ी में एक बंदरगाह है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा करने की कोशिश करती है,तो जुंटा अपनी वायु सेना का इस्तेमाल कर सकता है। सित्तवे सामरिक रूप से जुंटा और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चीन की प्राइवेट मिलिट्री कंपनी के जवान कथित तौर पर राखिने के क्याउफ्यु बंदरगाह की रक्षा कर रहे हैं, जिसे चीन ने चीन म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर के हिस्से के रूप में बनाया है। बैंकॉक बैठक में भारत, चीन, बांग्लादेश, थाईलैंड के अधिकारियों ने सहमति जताई कि म्यांमार के साथ सीधा जुड़ाव महत्वपूर्ण और जरूरी है। थाईलैंड के विदेश मंत्री मारिस संगिआम्पोंगसा ने यह जानकारी दी। म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे ने सभा को सैन्य सरकार के राजनीतिक रोडमैप के बारे में बताया, जिसमें अगले साल होने वाले चुनाव भी शामिल हैं। अराकान आर्मी का मजबूत होना जुंटा के लिए चुनौती अराकान आर्मी लगातार मजबूत होती जा रही है और जुंटा के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। राखिने और चिन राज्यों में जुंटा के सैन्य ठिकाने लगातार अराकान आर्मी के हाथों में जा रहे हैं। इससे म्यांमार में हालात और बिगड़ने की आशंका है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि ये दोनों राज्य भारत की सीमा से लगते हैं। सित्तवे बंदरगाह सामरिक रूप से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत द्वारा निर्मित है और बंगाल की खाड़ी में स्थित है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा कर लेती है तो भारत के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। चीन की भूमिका भी यहां अहम है। क्याउफ्यु बंदरगाह चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और वह अपनी प्राइवेट मिलिटरी कंपनी के जरिये इसकी रक्षा कर रहा है।

नए साल में डिफेंस में बढ़ेगी भारत की ताकत, वायु सेना को तेजस मार्क-1ए फाइटर एयरक्राफ्ट भी मिलेगा

नई दिल्ली  नया साल स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री के लिए नई उम्मीदें भी लेकर आएगा। डिफेंस सेक्टर में लगातार आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ने की कोशिश जारी है और आर्म्ड फोर्सेस की जरूरतों पूरी करने के लिए स्वदेशी इंडस्ट्री से कई कॉन्ट्रैक्ट भी साइन हुए हैं। जहां नए साल में भी टेक्नॉलजी ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस रहेगा वहीं LAC पर चीन के साथ गतिरोध पूरी तरह खत्म करने की चुनौती भी होगी। लंबे इंतज़ार के बाद अपाचे आएगा भारतीय सेना को इस साल अटैक हेलिकॉप्टर ‘अपाचे’ मिलने की उम्मीद है। अमेरिका से आर्मी के लिए 6 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की डील हुई थी और पहला अपाचे फरवरी 2024 में मिलना था। लेकिन इंतजार काफी लंबा हो गया। यूपी के अमेठी के फैक्ट्री में बन रही एके-203 असॉल्ट राइफल भी इस साल से आर्मी को मिलना शुरू होने की उम्मीद है। आर्मी को 100 से ज्यादा मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री वीइकल मिलेंगे, 155 एमएम कैलिबर की अडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) का कॉन्ट्रैक्ट नए साल में साइन हो सकता है। इसके साथ ही टोड गन सिस्टम, पिनाका एक्सटेंडेट रेंज रॉकेट का भी कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की उम्मीद है। आर्मी को नए साल में पिनाका की नई रेजिमेंट भी मिल सकती है। शॉर्ट रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल आकाश के नए वर्जन का पहला प्रोटोटाइप मार्च तक मिलने की उम्मीद है। तेजस-मार्क1ए का इंतजार होगा खत्म एयरफोर्स को इस साल तेजस मार्क-1ए मिलने शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें पहले ही काफी देरी हो गई है। एयरफोर्स के पास 42 फाइटर स्क्वॉड्रन होनी चाहिए। लेकिन इस वक्त एयरफोर्स के पास फाइटर एयरक्राफ्ट की 31 स्क्वॉड्रन हैं। मिग-21 बाइसन की दो स्क्वॉड्रन हैं। 2025 में मिग-21 बाइसन की ये दोनों स्क्वॉड्रन फेज आउट हो जाएगी। यह चुनौती है कि कैसे घटती स्क्वॉड्रन में दोनों मोर्चों के लिए खुद को तैयार रखना है। एयरफोर्स को इस साल एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की बाकी दो यूनिट मिलने की भी उम्मीद है। इस साल एयरफोर्स को अपने फाइटर जेट के लिए ईस्टर्न लद्दाख में न्योमा एयरफील्ड भी मिल जाएगा। मिलेगी तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन नेवी में इस साल तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन कमिशन होने की उम्मीद है। तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन SSBN अरिधमान के अभी समंदर में ट्रायल चल रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि 2025 में ये नेवी में कमिशन होकर स्ट्रैटजिक फोर्सेस कमांड का हिस्सा बन जाएगी। भारत के पास अभी दो न्यूक्लियर सबमरीन (SSBN) ऑपरेशनल हैं। नेवी को 2025 में प्रोजेक्ट-15बी का चौथा और आखिरी डिस्ट्रॉयर- ‘सूरत’ भी मिल जाएगा। साथ ही कलवरी क्लास की एक और सबमरीन ‘वागशीर’ मिलेगी। नीलगिरी क्लास का पहला गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ साल 2025 में नेवी को मिलेगा। इंडियन ओशन रीजन में जिस तरह चीन अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उस चुनौती से नए साल में भी नेवी को निपटना होगा।

भारतवंशी के कायल हुए ट्रंप, श्रीराम कृष्णन को मिली बड़ी जिम्मेदारी?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के अमेरिकी एंटरप्रेन्योर और लेखक श्रीराम कृष्णन Artificial Intelligence (AI) को लेकर बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है. साथ ही वह अमेरिकी लीडरशिप में भी अहम भूमिका अदा करेंगे.   श्रीराम कृष्णन AI को लेकर सीनियम व्हाइट हाउस पॉलिसी एडवाइजर की कमान संभालेंगे. श्रीराम कृष्णन पहले भी कई बड़ी कंपनियों की टीम में अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इसमें Microsoft, Twitter, Yahoo!, Facebook और Snap आदि के नाम शामिल हैं. ट्रंप ने बताया है कि वह David Sacks के साथ काम करेंगे, जो White House AI & Crypto Czar होंगे. अमेरिकी लीडरशिप पर भी देना होगा ध्यान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, श्रीराम कृष्णन को इस जिम्मेदारी के साथ अमेरिकी लीडरशिप में लगातार ध्यान लगाएंगे. साथ ही AI पॉलिसी को आकार देने और उसे लागू करने में भी मदद करेंगे. श्रीराम ने माइक्रोसॉफ्ट में अपना करियर Windows Azure के संस्थापक सदस्य के रूप में शुरू किया. नियुक्ति पर श्रीराम कृष्णन ने खुशी जाहिर की श्रीराम कृष्णन ने इस नियुक्ति पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, मैं अपने देश की सेवा करने और डेविड के साथ मिलकर काम करते हुए AI में लगातार अमेरिकी लीडरशिप को शामिल करने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं. भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय ने स्वागत किया बताते चलें कि कृष्णन की नियुक्ति का भारतीय अमेरिकी समुदाय ने स्वागत किया. इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि श्रीराम कृष्णन को हार्दिक बधाई देते हैं और खुशी है कि उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के साइंस और टेक्नोलॉजी पॉलिसी ऑफिस में वरिष्ठ नीति सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है. कौन हैं श्रीराम कृष्णन? श्रीराम कृष्णन का जन्म चेन्नई में हुआ था। उन्होंने तमिलनाडु के कांचीपुरम के कट्टनकुलथुर में एसआरएम इंजीनियरिंग कॉलेज से सूचना प्रौद्योगिकी में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। वह 21 साल की उम्र में 2005 में अमेरिका चले गए। उनके पिता बीमा में काम करते थे। जबकि उनकी मां एक गृहिणी थीं। कृष्णन इससे पहले ‘माइक्रोसॉफ्ट’, ‘ट्विटर (अब X)’, ‘याहू’, ‘फेसबुक’ और ‘स्नैप’ में ‘प्रोडक्ट टीमों’ का नेतृत्व कर चुके हैं। वह डेविड ओ. साक्स के साथ काम करेंगे। ट्रंप ने डेविड को ‘व्हाइट हाउस एआई एंड क्रिप्टो जार’ नामित किया है। कृष्णन ने तमिलनाडु कट्टनकुलथुर में एसआरएम वल्लियमई इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने अपना करियर माइक्रोसॉफ्ट से शुरू किया, जहां उन्होंने Windows Azure के विकास में योगदान दिया। इसके एपीआई और सेवाओं पर काम किया। वह प्रोग्रामिंग विंडोज एज्योर फॉर ओ’रेली (Programming Windows Azure for O’Reilly) नामक पुस्तक के लेखक हैं। कृष्णन 2013 में फेसबुक से जुड़े, जहां उन्होंने कंपनी के मोबाइल ऐप डाउनलोड विज्ञापन व्यवसाय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने स्नैप में भी काम किया। कृष्णन ने 2019 तक ट्विटर (अब X) में काम किया, जहां उन्होंने प्लेटफॉर्म के पुनर्गठन पर एलॉन मस्क के साथ सहयोग किया। कृष्णन ने 2022 में अधिग्रहण के बाद ट्विटर (अब एक्स) को नया रूप देने के लिए मस्क के साथ काम किया। वह 2021 में आंद्रेसेन होरोविट्ज (a16z) में एक सामान्य भागीदार बन गए। बाद में 2023 में उन्होंने लंदन में फर्म के पहले अंतरराष्ट्रीय कार्यालय का नेतृत्व किया। उद्यमी OpenAI’s के ChatGPT और बड़े इंटरनेट प्लेटफॉर्म जैसे AI-संचालित मॉडल के बीच चुनौतियों को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का लाभ उठाने के भी हिमायती रहे हैं। उन्हें 2021 में पॉडकास्ट ‘द आरती एंड श्रीराम शो’ के होस्ट के रूप में भी पहचान मिली। कृष्णन अपनी पत्नी आरती राममूर्ति के साथ इस पर काम करते हैं।    

केंद्रीय सरकार का बड़ा फैसला, ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ समाप्त, जानें पूरा अपडेट

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने शिक्षा की दिशा में अहम बदलाव की ओर कदम बढ़ाते हुए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, सरकार ने पढ़ाई में सुधार को ध्यान में रखते हुए ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब 5वीं और 8वीं कक्षा के बच्चों को अगली क्लास में तभी प्रमोट किया जाएगा जब वह परीक्षा पूरी तरह से पास करेंगे। अभी तक 5वीं और 8वीं के बच्चों को अगली क्लास में जाने के लिए परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं था। फेल छात्रों को 2 महीने के अंदर देना होगा एग्जाम सरकार के इस फैसले के की जानकारी केंद्रीय शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी। उन्होंने पीसी में बताया कि सरकार सरकार ने निर्णय किया है कि 5वीं और 8वीं में फेल होने वाले छात्र 2 महीने के भीतर दोबारा परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन अगर वह दोबारा भी फेल होते हैं तो उन्हें अब अगली क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा। साथ ही सरकार ने इसमें एक प्रावधान भी जोड़ा है कि 8वीं तक के ऐसे बच्चे को स्कूल से निष्कासित भी नहीं किया जाएगा। शिक्षा में सुधार के लिए उठाया गया कदम शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार ने आगे कहा कि हमारा प्रयास शिक्षा में सुधार के लिए उपाय सभी संभव और जरूरी उपाय करने का है और यह फैसला उसी को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस फैसले के बाद हमने यह भी तय किया है कि हमारे स्कूलों में ऐसे बच्चे जिनका पढ़ाई से किसी कारणवश विशेष लगाव नहीं है उन पर विशेष ध्यान भी दिया जाएगा और इसीलिए हमने इस पॉलिसी के अंडर आने वाले बच्चों के लिए दोबारा एग्जाम जल्द आयोजित करने का फैसला किया है। एक्ट में बदलाव के बाद लागू हुई थी पॉलिसी बता दें कि ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ के खत्म होने के बाद केंद्र सरकार के करीब 3000 से अधिक स्कूल इस फैसले से प्रभावित होंगे। केंद्र सरकार के अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल आते हैं। ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को 2019 में राइट टू एजुकेशन एक्ट में संशोधन के बाद लागू किया गया था। इस पॉलिसी को इस साल दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने भी खत्म कर दिया था। दिल्ली शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने इसी साल मार्च में सरकार ने कक्षा 5 और 8 में ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने के मद्देनजर कक्षा 6 से 8 में प्रवेश के लिए मौजूदा नीति में संशोधन किया था। दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा का मौका इस नई व्यवस्था के अनुसार, असफल स्टूडेंट्स को दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा, लेकिन अगर स्टूडेंट्स दोबारा असफल होते हैं, तो उन्हें अगली क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा. हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्लास 8 तक किसी भी स्टूडेंट्स को स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाएगा. इसलिए लिया गया ये फैसला शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने बताया कि यह फैसला बच्चों के पढ़ाई के परिणाम सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है. उनका कहना है कि बच्चों की सीखने की क्षमता में गिरावट को रोकने के लिए इस कदम को जरूरी समझा गया.मंत्रालय ने विशेष रूप से क्लास 5 और 8 पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि इन क्लासओं को बुनियादी शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस नई नीति से स्टूडेंट्स और टीचर्स दोनों को पढ़ाई के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया गया है.

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