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सूरत में दर्दनाक सड़क हादसा, चलती कार में लगी आग, दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया

सूरत गुजरात के सूरत शहर के सचिन-मगदल्ला रोड पर चलती कार में अचानकर आग लग गई। यह घटना सिटी प्लस सिनेमा के पास घटी है। इस हादसे में कार ड्राइवर और कपड़ा व्यापारी दीपक पटेल की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया गया। कार से बाहर नहीं निकल पाए दीपक इस संबंध में प्राप्त विवरण के अनुसार सूरत के अभावा गांव के मूल निवासी दीपक पटेल अपनी लाल रंग की स्विफ्ट कार (जीजे-5-आरएम-7588) से हजीरा से सचिन जा रहे थे। वह सिटी प्लस सिनेमा के पास से गुजर रहे थे, तभी उनकी स्विफ्ट कार में अज्ञात कारणों से आग लग गई। कार में आग लगने के बाद लोगों ने कार ड्राइवर और कारोबारी को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन वो कार के अंदर फंस गए, जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। दीपक पटेल अभवा गांव में रहते थे और उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। जयपुर में ट्रक और गैस टैंकर की हुई थी भिड़ंत इससे पहले शुक्रवार की सुबह राजस्थान के जयपुर में अजमेर हाईवे पर शुक्रवार की सुबह दर्दनाक हादसा हुआ। एक ट्रक और एलपीजी गैस टैंकर की भिड़ंत हो हई। हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई। तकरीबन 35 लोग झुलस हए। हादसा इतना भयंकर था कि पूरा इलाका आग की लपटों में घिर गया। एक घर भी आग की चपेट में आ गया।

पाकिस्तान आतंकी हमले से फिर दहला, हमले में 16 जवानों की मौत, आठ घायल

पेशावर पाकिस्तान में एक बार फिर आतंकी हमला हुआ है। आतंकियों ने एक सुरक्षा चौकी को निशाना बनाया है। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि शनिवार तड़के उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक सुरक्षा चौकी पर आतंकवादियों ने हमला किया, जिसमें 16 सैनिक मारे गए और आठ अन्य घायल हो गए। सूत्रों ने एजेंसी को बताया कि आतंकवादियों ने अफगानिस्तान की सीमा से लगे दक्षिण वजीरिस्तान जिले के माकेन में लिटा सार चौकी पर हमला किया। यह पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा बलों पर सबसे बड़े हमलों में से एक है। यह हमला पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा उसी जिले के सरोघा इलाके में खुफिया सूचना पर आधारित अभियान में दो आतंकवादियों को मार गिराने के कुछ दिनों बाद हुआ है। एक दशक से बनी हुई है समस्या कानून प्रवर्तन कर्मियों ने आतंकवादियों की कथित मौजूदगी पर कार्रवाई की और दो आतंकवादियों को मार गिराया, जबकि दिसंबर के पहले सप्ताह में अभियान में दो आतंकवादियों को पकड़ा गया। दक्षिण वजीरिस्तान सात अर्ध-स्वायत्त आदिवासी क्षेत्रों में से एक है, जहां सेना एक दशक से अधिक समय से प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े आतंकवादियों से जूझ रही है।

हिमाचल प्रदेश में सरकार के स्कूल बंद करने वाले मुद्दे पर असंतुष्‍ट विपक्ष ने सदन का वॉक आउट क‍िया

धर्मशाला हिमाचल प्रदेश विधानसभा में चौथे दिन विपक्ष ने सरकार के स्कूल बंद करने वाले मुद्दे पर वॉक आउट क‍िया। मुख्यमंत्री चर्चा के दौरान बंद किए संस्थानों को ज़रूरत के अनुसार शुरू करने की बात कही। मुख्‍यमंत्री के उत्तर से असंतुष्‍ट विपक्ष ने वॉक आउट क‍िया। उसका कहना था क‍ि उसका मापदंड क्‍या है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस संबंध में कहा, “आज प्रश्नकाल के दौरान सदस्य रणवीर शर्मा ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा। उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में संस्थान बंद करने, नए संस्थान खोलने और पुराने संस्थानों के बारे में जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा था कि कांग्रेस सरकार ने जब से सत्ता संभाली है, तब से कितने संस्थानों को डिनोटिफाई किया गया है, कितने नए संस्थान खोले गए हैं और कितने संस्थानों को फिर से नोटिफाई किया गया है। इस प्रश्न के जवाब में पेश आंकड़े सही नहीं थे, क्योंकि उन्हें ठीक तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया था।” जयराम ठाकुर ने कहा, “आज इस प्रश्न के माध्यम से हमें जो जानकारी मिली है, वह यह है कि हिमाचल प्रदेश में कुल 1865 संस्थानों को डिनोटिफाई किया गया है। इसके बाद सरकार ने 37 नए संस्थान खोले हैं और 103 संस्थानों को फिर से नोटिफाई किया है। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कांग्रेस सरकार ने कुछ संस्थानों को बंद किया है, जबकि कुछ नए संस्थान खोले भी हैं और कुछ पुराने संस्थानों को फिर से सक्रिय किया है।” उन्होंने कहा, “जब यह जानकारी सदन में प्रस्तुत की गई, तो सवाल यह उठता है कि संस्थान बंद करने का पैरामीटर क्या है और नए संस्थान खोलने के लिए क्या मापदंड हैं। र मुख्यमंत्री से बार-बार यह सवाल पूछा गया, लेकिन उनका जवाब था कि यह “नीड बेस्ड” है। यह जवाब सुनकर पहला सवाल यह उभरा कि हिमाचल प्रदेश में “नीड बेस्ड” की आवश्यकता का आकलन कब शुरू किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 दिसंबर को उन्होंने शपथ ली थी, और 12 दिसंबर को ही सभी संस्थान बंद करने का आदेश दे दिया था। इसका मतलब यह हुआ कि बिना कोई ठोस योजना या आकलन किए कांग्रेस सरकार ने 1 अप्रैल के बाद खोले गए सभी संस्थानों को बंद कर दिया था। इन संस्थानों के लिए बजट प्रावधान पहले से किया गया था, लेकिन फिर भी उन्हें बंद कर दिया गया।” उन्होंने कहा, “यह भी ध्यान देने वाली बात है कि “नीड बेस्ड” आकलन का कोई ठोस आधार नहीं था, क्योंकि 11 दिसंबर को सरकार बनने के बाद और 12 दिसंबर को सभी संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया गया था। इस संदर्भ में कहा जा सकता है कि यह फैसला राजनीतिक दृष्टिकोण से लिया गया था। यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा खोले गए संस्थानों को बंद करने का स्पष्ट संकेत है।”

रामायण-महाभारत के अरबी अनुवादक से पीएम मोदी ने की मुलाकात, कुवैत यात्रा पर मोदी का हुआ भव्य स्वागत

कुवैत सिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शनिवार दोपहर कुवैत सिटी स्थित होटल में पहुंचने पर भारतीय समुदाय ने भव्य स्वागत किया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 वर्षों में कुवैत की पहली यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी से गर्मजोशी से मिलने वालों में 101 वर्षीय मंगल सेन हांडा भी शामिल थे, जो भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के पूर्व अधिकारी हैं। वे अब कुवैत में रहते हैं और लगभग चार दशक पहले रिटायर्ड हुए थे। वह कुवैत, यूनाइटेड किंगडम, इराक, चीन, अर्जेंटीना और कंबोडिया में सेवा दे चुके हैं। पीएम मोदी ने न केवल हांडा के साथ अभिवादन किया, बल्कि उनके परिवार के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। पूर्व आईएफएस अधिकारी की नातिन श्रेया जुनेजा ने पीएम मोदी से अनुरोध किया था कि वह कुवैत यात्रा के दौरान उनके 101 वर्षीय दादा से मुलाकात करें। जुनेजा के अनुरोध को स्वीकार करते हुए, पीएम मोदी ने एक्स पर संदेश दिया, “बिल्कुल! मैं आज कुवैत में मंगल सैन हांडा जी से मिलने के लिए उत्सुक हूं।” श्रेया को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की पूरी उम्मीद नहीं थी, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी, [जो विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय प्रवासियों के मुलाकात करना पसंद करते हैं], से मिले जवाब ने उन्हें बेहद खुश कर दिया। जुनेजा ने एक्स पर कहा, “आपसे प्रतिक्रिया पाना हमारे लिए सम्मान की बात है, सर! आपने एक बार फिर हमारा दिल जीत लिया है। नानाजी मंगल सैन हांडा बहुत खुश हैं और उनकी मुस्कान हमारे लिए बहुत मायने रखती है। हम इस दयालु व्यवहार के लिए बहुत आभारी हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुवैत में अब्दुल्ला अल बैरन और अब्दुल लतीफ अल नेसफ से मुलाकात की। अब्दुल्ला अल बैरन ने रामायण और महाभारत दोनों का अरबी में अनुवाद किया है। अब्दुल लतीफ अल नेसफ ने रामायण और महाभारत के अरबी संस्करण प्रकाशित किए हैं। उन्होंने पीएम मोदी को दोनों रामायण और महाभारत के अरबी संस्करण भेंट किए। कुवैत में सबसे बड़ा प्रवासी समूह, भारतीय समुदाय, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शनिवार को अपने प्रस्थान वक्तव्य में, पीएम मोदी ने उल्लेख किया था कि उनकी यात्रा लोगों और क्षेत्र के लाभ के लिए भविष्य की साझेदारी के लिए रोडमैप तैयार करने का अवसर होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं कुवैत में भारतीय प्रवासियों से मिलने के लिए उत्सुक हूं, जिन्होंने दोनों देशों के बीच मैत्री के बंधन को मजबूत करने में बहुत योगदान दिया है।” प्रधानमंत्री पश्चिम एशियाई देश की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान एक श्रमिक शिविर का दौरा करने के अलावा एक सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत भी करेंगे।

भारतीय राज्यों को बताया बांग्लादेश का हिस्सा, तो भारत ने PM यूनुस के सलाहकार को लताड़ा, सोच समझकर बोलें

ढाका भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के सलाहकार महफूज आलम द्वारा की गई विवादित टिप्पणी पर कड़ा रुख अपनाया है। महफूज आलम ने एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि भारत को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे के बाद हुए आंदोलन को स्वीकार करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश का एक गलत नक्शा भी पोस्ट किया, जिसमें भारत के बंगाल, त्रिपुरा और असम के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश का हिस्सा बताया गया। इस पोस्ट में भारत पर आरोप लगाया गया था कि वह बांग्लादेश को अपनी मुट्ठी में रखने की नीतियां अपनाता है और बांग्लादेश को सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अपने क्षेत्र का विस्तार करना चाहिए। हालांकि, विवाद बढ़ने पर महफूज आलम ने कुछ घंटों बाद इस पोस्ट को हटा लिया। यह टिप्पणी खास महत्व रखती है क्योंकि महफूज आलम का यह पोस्ट 16 दिसंबर 2024 को प्रकाशित हुआ था। 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान, जो अब बांग्लादेश है, स्वतंत्र हुआ था। यह दिन हर साल बांग्लादेश और भारत में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। महफूज आलम के पोस्ट के वायरल होने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने तुरंत अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। 20 दिसंबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने इस मामले पर बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। हमें जानकारी मिली है कि पोस्ट को कथित तौर पर हटा लिया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत हमेशा बांग्लादेश की जनता और अंतरिम सरकार के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की इच्छा रखता है, लेकिन इस तरह की टिप्पणियां सार्वजनिक संवाद में जिम्मेदारी की आवश्यकता को उजागर करती हैं।” हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में बढ़ोत्तरी देखी गई है। बीते अगस्त में बांग्लादेश में छात्रों ने सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन किया, जो बाद में हिंसक प्रदर्शन में बदल गया। इन प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और वह भारत में शरण लेने पहुंचीं। इस घटनाक्रम के बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले बढ़े, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा। भारत के विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की 2200 घटनाएं दर्ज की गई हैं। मंत्रालय ने बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों से आग्रह किया कि वे अपने देशों में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। 

अमेरिका ने ताइवान को खतरनाक हथियार दिया, चीन और अमेरिका के बीच टेंशन बढ़ सकती है, धमकी भी न आई काम

वॉशिंगटन चीन की अमेरिका को दी गई धमकी भी काम नहीं आई है। अमेरिका ने ताइवान को खतरनाक हथियार दे दिए हैं, जिससे चीन और अमेरिका के बीच टेंशन बढ़ सकती है। ताइवान को अमेरिका से 38 M1A2T अब्राम टैंक मिले हैं, जो 23 सालों में द्वीप पर पहली अमेरिकी टैंक डिलीवरी है। रेडियो फ्री एशिया के अनुसार, यह शिपमेंट अगले दो वर्षों में अपेक्षित 122 टैंकों के बड़े ऑर्डर का हिस्सा है। चीन काफी समय से ताइवान को हथियार नहीं देने के लिए कहता आया है और इसके लिए वह अमेरिका तक को धमकी दे चुका है। वह साफ कर चुका है कि संप्रभुता को बचाने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगा। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि क्या यह टेंशन और बढ़ी तो यह कहीं युद्ध की शक्ल न ले ले। M1A2T टैंक को वैश्विक स्तर पर सबसे मॉडर्न युद्धक टैंकों में से एक माना जाता है। कुछ विशेषज्ञों ने ताइवान के पहाड़ी इलाकों और घने शहरी क्षेत्रों के लिए इसकी उपयुक्तता के बारे में चिंता जताई है। हालांकि, टैंकों को ताइवान की रक्षा क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा बढ़ावा माना जा रहा है। खासकर चीन के साथ चल रहे तनाव को देखते हुए। M1A2T अब्राम, जनरल डायनेमिक्स द्वारा निर्मित M1 अब्राम का एक लेटेस्ट वर्जन है, जो 120 मिमी स्मूथबोर गन से लैस है जो 850 मिमी तक की मोटाई वाले कवच को भेदने में सक्षम है। इसकी दुर्जेय मारक क्षमता, उन्नत कवच और गति इसे ताइवान की सेना के लिए एक शक्तिशाली संपत्ति बनाती है। ताइवान के M60A3 और CM11 टैंकों के मौजूदा बेड़े की तुलना में – जो दोनों 30 साल से अधिक पुराने हैं – M1A2T एक महत्वपूर्ण तकनीक है।। इसके अलावा, अब्राम में एक हंटर-किलर क्षमता है, जो इसे एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक करने के काबिल बनाती है। कैटो इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एरिक गोमेज ने इस बात पर जोर दिया कि ताइवान की रक्षा में M1A2T की प्राथमिक भूमिका संभावित चीनी आक्रमण के दौरान महत्वपूर्ण लैंडिंग पॉइंट की रक्षा करना होगी। ताइवान के चुनौतीपूर्ण इलाके में टैंक के प्रदर्शन के बारे में चिंताओं के बावजूद, विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि M1A2T चीनी सैन्य दबाव का सामना करने की ताइवान की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। इस बीच, सौदे के बारे में पूछे जाने पर, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करेगा। चीन ने अमेरिका को दी थी खुली धमकी इस महीने की शुरुआत में चीन ने हथियारों की बिक्री को मंजूरी देने पर अमेरिका को खुली धमकी दी थी। इसे चीन ने वन चाइना पॉलिसी का उल्लंघन माना था। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और आतंकवादी उपायों की रक्षा के लिए मजबूत और दृढ़ जवाबी कदम उठाएगा। अगर अमेरिका ताइवान को तुरंत हथियार देना बंद नहीं करता है तो कड़े कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, चीन की धमकी के बाद भी अमेरिका ने ताइवान को हथियार दिए हैं, जिससे चीन भड़क सकता है। कोरोना काल के दौरान से ही चीन और अमेरिका में रिश्ते काफी खराब हैं। भले ही डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के नए राष्ट्रपति बनने जा रहे हों, लेकिन उनके साथ भी चीन के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं। यानी कि साफ है कि आने वाले समय में चीन और अमेरिका के संबंधों में और दरार आ सकती है, जिससे युद्ध का खतरा बना हुआ है।

पूर्वोत्तर के सात राज्यों को देश के बाकी हिस्से को जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग को निशाना बनाने की विशेष योजना थी

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से गिरफ्तार अंसार अल इस्लाम के आतंकी चिकन नेक पर निशाना साधना चाहते थे। पता चला कि उनकी पूर्वोत्तर के सात राज्यों को देश के बाकी हिस्से को जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग को निशाना बनाने की विशेष योजना थी, जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है। हाल ही में गिरफ्तार आतंकवादी संगठन अंसार-अल-इस्लाम बांग्लादेश के आठ संदिग्ध सदस्य ‘चिकन नेक’ को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी। ‘चिकन नेक’ पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला गलियारा है। उन्होंने कहा कि वे सिलसिलेवार हमलों को अंजाम देकर और अस्थिरता फैलाकर सिलीगुड़ी गलियारे में बड़े पैमाने पर अव्यवस्था पैदा करना चाहते थे। पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुर्शिदाबाद जिले में गिरफ्तार किए गए आतंकवादी संगठन के दो संदिग्ध सदस्यों के पास से पेन ड्राइव और दस्तावेज बरामद किए। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सुप्रतिम सरकार ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया था कि ये दोनों बंगाल, केरल और असम पुलिस द्वारा पकड़े गए आठ लोगों के समूह का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि पूछताछ में पता चला कि उनकी पूर्वोत्तर के सात राज्यों को देश के बाकी हिस्से को जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग ‘चिकन नेक’ को निशाना बनाने की विशेष योजना थी, जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है। सरकार ने कहा कि राज्य पुलिस को संगठन के एक ‘स्लीपर सेल’ के बारे में सूचना मिली थी, जो अगस्त से सक्रिय था। सरकार ने कहा था, “हमने अब्बास अली और मिनारुल शेख नामक दो संदिग्धों के पास से 16 जीबी की पेन ड्राइव, कुछ जिहादी दस्तावेज और नकली पहचान पत्र बरामद किए हैं। हमें संदेह है कि वे स्लीपर मॉड्यूल का हिस्सा थे, जिसका लक्ष्य दक्षिण और उत्तर बंगाल के संवेदनशील क्षेत्रों के साथ-साथ पूर्वोत्तर के सात राज्यों में अस्थिरता पैदा करना था।” उन्होंने कहा, “वे मुर्शिदाबाद और अलीपुरद्वार जिलों में ठिकाने बना रहे थे, जहां उनकी साजिश पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में प्रमुख हिंदू नेताओं को खत्म करने और बांग्लादेश में 2015 में एक ब्लॉगर की हत्या जैसे हमले को अंजाम देने की थी।”

मोदी ने आज कच्छ में आयोजित होने वाले रण उत्सव के लिए देशवासियों को आमंत्रित किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कच्छ में आयोजित होने वाले रण उत्सव के लिए देशवासियों को आमंत्रित किया है। 1 नवंबर 2024 से शुरू ये रण उत्सव फरवरी 2025 तक चलेगा। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए इस बात पर जोर दिया कि यह उत्सव एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “कच्छ आप सभी का इंतजार कर रहा है। आइए, चल रहे रण उत्सव के दौरान कच्छ की शानदार संस्कृति और गर्मजोशी भरी मेहमाननवाजी का आनंद लें। यह महोत्सव आपके और आपके परिवार के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होने का वादा करता है।” पीएम मोदी ने एक अन्य वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “कच्छ की परंपरा, संस्कृति और विरासत का प्रतीक रण उत्सव हर किसी का मन मोह लेने वाला है। अद्भुत क्राफ्ट बाजार हो, सांस्कृतिक कार्यक्रम या फिर खान-पान की परंपरा, यहां का आपका हर अनुभव अविस्मरणीय बन जाएगा। आप सभी से मेरा आग्रह है कि एक बार अपने परिवार के साथ इस रण उत्सव में जरूर आएं।” गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने पीएम मोदी के पोस्ट को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, पीएम मोदी के मार्गदर्शन में कच्छ का सफेद रण वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां आयोजित रण उत्सव प्राकृतिक सौंदर्य के साथ कला और संस्कृति का अद्भुत संगम है। रण उत्सव में जरूर पधारिए, आप खुद कहेंगे की “कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा”।”  

श्रीनगर में शून्य से 8.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज हुआ तापमान, दिसंबर महीने का तीसरा सबसे कम तापमान

श्रीनगर श्रीनगर में न्यूनतम तापमान इस मौसम में शून्य से 8.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो 1974 के बाद से अब तक सबसे ठंडा रहा। उस समय तापमान शून्य से 10.3 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया था। वैसे, श्रीनगर में अब तक का सबसे कम तापमान शून्य से 12.8 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा है, जो 13 दिसंबर 1934 को दर्ज किया गया था। इस बार का तापमान 1891 के बाद से श्रीनगर में दिसंबर महीने का तीसरा सबसे कम तापमान है। कुपवाड़ा में भी माइनस 7.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो 1998 के बाद से दिसंबर में सबसे कम तापमान है। कुपवाड़ा का अब तक का रिकॉर्ड माइनस 9.4 डिग्री सेल्सियस है, जो 31 दिसंबर 1986 को दर्ज किया गया था। इस तरह से आज का तापमान कुपवाड़ा जिले में दिसंबर महीने में दर्ज किए गए 9वें सबसे कम तापमान के रूप में रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा, इस मौसम में अन्य मैदानी इलाकों में भी सबसे ठंडी रात दर्ज की गई। बर्फ के आवरण के अभाव के कारण कई पहाड़ियां कश्मीर के मैदानों की तुलना में अधिक गर्म रही। इससे पहले 21 दिसंबर को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया था। आईएमडी ने उत्तर-पश्चिम भारत के प्रमुख स्थानों में अगले 5-7 दिनों तक शीत लहर की स्थिति की आशंका जताई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया था, अगले छह दिनों तक जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में शीत लहर की स्थिति बनी रहेगी। राजस्थान और पंजाब में भी दो दिनों तक सर्दी का सितम जारी रहने की संभावना जताई गई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शीतलहर के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में अगले छह दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया था, जबकि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 21 दिसंबर को काफी ठंडा होने की बात कही गई थी।  

थेन्नारसु ने केंद्र से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से राज्य के लिए 6,675 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया

चेन्नई तमिलनाडु के वित्त मंत्री थंगम थेन्नारसु ने राजस्थान के जैसलमेर में केंद्रीय बजट से पहले हुयी बैठक में केंद्र सरकार से चक्रवात फेंगल के बाद अस्थायी और स्थायी राहत एवं पुनर्वास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से राज्य के लिए 6,675 करोड़ रुपये जारी करने का आग्रह किया है। श्री थेन्नारसु ने शुक्रवार को जैसलमेर में आयोजित बैठक में कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चेन्नई मेट्रो रेल, सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), रेलवे और अन्य परियोजनाओं के लिए केंद्र से लंबित धन आवंटित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को चक्रवात, मूसलाधार बारिश और अभूतपूर्व बाढ़ सहित प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में चक्रवात फेंगल से राज्य तबाह हुआ है। इसने राज्य के 14 जिलों को प्रभावित किया और जीवन, आजीविका और बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इन मौसमी घटनाओं की तीव्रता और आवृत्ति में काफी वृद्धि हुई है। कुछ क्षेत्रों में 24 घंटे के भीतर पूरे वर्ष की संचयी वर्षा हो जाती है। उन्होंने कहा कि योजना और तैयारी में राज्य के सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद ये जलवायु विसंगतियाँ काफी आर्थिक तनाव पैदा कर रही हैं और राज्य के खजाने को खाली कर रही हैं। उन्होंने कहा, “राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत धनराशि तत्काल राहत और दीर्घकालिक बहाली की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त साबित हुई है। इसलिए, मैं केंद्र सरकार से चक्रवात फेंगल के बाद अस्थायी और स्थायी राहत और पुनर्वास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एनडीआरएफ के तहत 6,675 करोड़ रुपये की राशि जारी करने का आग्रह करता हूं।”  

कुवैत की यात्रा दोनों देशों के बीच दोस्ती के बंधन को मजबूत करने और रोडमैप तैयार करने का अवसर प्रदान करेगी: मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि उनकी कुवैत की दो दिन की यात्रा दोनों देशों के बीच दोस्ती के बंधन को मजबूत करने और आपसी लाभ की भविष्य की साझीदारी के लिए एक रोडमैप तैयार करने का अवसर प्रदान करेगी। श्री मोदी ने रवानगी के पूर्व अपने वक्तव्य में कहा, “आज, मैं कुवैत राज्य के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबा के निमंत्रण पर कुवैत की दो दिवसीय यात्रा पर जा रहा हूं। हम कुवैत के साथ पीढ़ियों से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंध को गहराई से महत्व देते हैं। हम न केवल मजबूत व्यापार और ऊर्जा भागीदार हैं, बल्कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि में भी हमारे साझा हित हैं।” प्रधानमंत्री ने कहा,”मैं कुवैत के अमीर, क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री के साथ अपनी बैठकों के लिए उत्सुक हूं। यह हमारे लोगों और क्षेत्र के लाभ के लिए भविष्य की साझेदारी के लिए एक रोडमैप तैयार करने का अवसर होगा।” उन्होंने कहा,”मैं कुवैत में भारतीय प्रवासियों से मिलने का उत्सुकता से इंतजार कर रहा हूं, जिन्होंने दोनों देशों के बीच दोस्ती के बंधन को मजबूत करने में बहुत योगदान दिया है। मैं खाड़ी क्षेत्र के एक प्रमुख खेल आयोजन, अरेबियन गल्फ कप के उद्घाटन समारोह में मुझे विशेष रूप से आमंत्रित करने के लिए कुवैत के नेतृत्व के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूं। मैं एथलेटिक उत्कृष्टता और क्षेत्रीय एकता के इस उत्सव का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हूं। मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत और कुवैत के लोगों के बीच विशेष संबंधों और दोस्ती के बंधन को और मजबूत करेगी।”  

प्रधानमंत्री कुवैत रवाना हो गए जबकि हिंसा प्रभावित मणिपुर के लोग उनका इंतजार करते रह गए, कांग्रेस का तंज

नई दिल्ली कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि बार-बार विदेश जाने वाले प्रधानमंत्री कुवैत रवाना हो गए जबकि हिंसा प्रभावित मणिपुर के लोग उनका इंतजार करते रह गए। रक्षा और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत के लिए पीएम मोदी शनिवार को कुवैत की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 43 साल बाद पहली कुवैत यात्रा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘मणिपुर के लोगों का इंतजार जारी है, यही उनकी किस्मत है क्योंकि श्रीमान मोदी कोई तारीख तय करने से इनकार कर रहे हैं। बार-बार विदेश दौरे करने वाले प्रधानमंत्री मोदी कुवैत रवाना हो गए।’ कांग्रेस पीएण मोदी से कई बार मणिपुर का दौरा करने की बात कह चुकी है। पार्टी का कहना है कि इससे संघर्षग्रस्त राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद मिलेगी। पीएम मोदी से पहले, भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1981 में इस खाड़ी देश की यात्रा की थी। मोदी ने यात्रा पर रवाना होने से पहले दिए गए एक बयान में कहा कि कुवैत के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत भारत और कुवैत के बीच भविष्य की साझेदारी का खाका तैयार करने का अवसर देगी। उन्होंने कहा, ‘हम कुवैत के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बहुत महत्व देते हैं, जो पीढ़ियों से कायम हैं। हम न केवल व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्रों में मजबूत साझेदार हैं, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति, सुरक्षा और स्थिरता में भी हमारा साझा हित है।’ मोदी कुवैत के अमीर शेख मेशाल अल-अहमद अल-जबर अल-सबा के निमंत्रण पर कुवैत गए हैं। मोदी ने कहा कि वह कुवैत के अमीर, युवराज (क्राउन प्रिंस) और प्रधानमंत्री के साथ अपनी बैठकों के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं कुवैत में भारतीय प्रवासियों से मिलने के लिए उत्सुक हूं, जिन्होंने दोनों देशों के बीच मित्रता के बंधन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।’

BRICS समिट की मेजबानी कर चर्चा में आया था शहर, रूस के कजान में 9/11 जैसा अटैक

नई दिल्ली रूस के कजान शहर में भीषण अटैक हुआ है, जिसने दुनिया को अमेरिका के इतिहास में हुए सबसे वीभत्स 9/11 हमले की याद दिला दी है. रूस के कजान शहर में सीरियल ड्रोन (UAV) अटैक किए गए हैं. ये हमले कजान शहर की तीन हाई राइज इमारतों में हुए हैं. हमले के कारण भारी नुकसान होने की बात सामने आ रही है. कजान की हाई राइज इमारतों में हुए UAV अटैक की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं. इनमें साफतौर पर नजर आ रहा है कि अलग-अलग दिशाओं से आ रहे किलर ड्रोन (UAV) हवा में ही इमारतों से टकरा रहे हैं. ड्रोन के बिल्डिंग से टकराने के बाद बड़ा धमाका होता हुआ भी नजर आ रहा है. रूस ने इस हमले का आरोप सीधे यूक्रेन पर लगाया है. रूसी रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा है कि यह ड्रोन अटैक यूक्रेन की तरफ से किया गया था. इस हमले पर रूस के रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया भी आ गई है. रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि रूस के एयर डिफेंस सिस्टम ने कजान शहर के ऊपर एक यूक्रेनी ड्रोन को नष्ट किया है. वहीं, कजान के मेयर ऑफिस से रूसी मीडिया एजेंसी स्पुतनिक को बताया गया है कि ड्रोन हमले के कारण तीन जिलों, सोवेत्स्की, किरोव्स्की और प्रिवोलज्स्की में घरों में आग लग गई है. ड्रोन हमले के कारण जिन इमारतों में आग लगी है, वहां ऑपरेशनल सेवाएं जारी हैं. सभी जरूरी मदद मुहैया कराई जा रही है. बिल्डिंग से निकाले गए लोगों को भोजन और रहने के लिए शेल्टर दिए जा रहे हैं. कजान शहर पर हुए इस हमले की इसलिए भी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है, क्योंकि इसी साल 2024 में रूस के इस शहर में ब्रिक्स सम्मलेन हुआ था. इस बार कजान में हुए 16वें ब्रिक्स सम्मेलन में पहली बार संयुक्त अरब अमीरात, ईरान, मिस्र  और इथियोपिया को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था. इस हमले को अमेरिका में हुए 9/11 (वर्ल्ड ट्रेड सेंटर) हमले की तरह ही बताया जा रहा है.

राज्यपाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि बिना डरे इतिहास के बारे में सही परिप्रेक्ष्य सामने लाया जाए

पणजी बिहार के राज्यपाल ने अंग्रेजों के भारत छोड़ने को लेकर एक बयान दिया है. राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने गोवा में कहा कि ब्रिटिश शासकों ने सत्याग्रह के कारण भारत नहीं छोड़ा. अंग्रेजों ने जब लोगों के हाथों में हथियार देखे तो उन्हें लगने लगा कि लोग अब किसी भी हद तक जा सकते हैं. बिहार के राज्यपाल आर्लेकर ने पणजी गोवा में कहा,’आक्रमणकारियों (ब्रिटिशर्स) ने एक कहानी गढ़ने की कोशिश की. लेकिन सच्चाई यह है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम हथियारों के बिना नहीं लड़ा गया. अंग्रेज ‘सत्याग्रह’ के कारण भारत नहीं छोड़कर गए.’ तत्कालीन सरकार ने भी किया समर्थन गोवा पर पुर्तगाली आक्रमण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि अब समय आ गया है कि बिना डरे इतिहास के बारे में सही परिप्रेक्ष्य सामने लाया जाए. उन्होंने कांग्रेस की पिछली सरकारों पर नाम लिए बिना गंभीर आरोप लगाए. राज्यपाल ने कहा,’भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) ने एक कहानी गढ़ी थी कि आप गुलाम बनने के लिए पैदा हुए हैं और तत्कालीन सरकार ने भी इसका समर्थन किया था.’ पूछा, गोवा इनक्विजिशन क्या है? वह आनंदिता सिंह की लिखित पुस्तक ‘भारत के उत्तर पूर्व में स्वतंत्रता संग्राम का संक्षिप्त इतिहास (1498 से 1947)’ पर बोल रहे थे. आर्लेकर ने कहा,’गोवा इनक्विजिशन क्या है? अगर हम इसे सामने लाने की कोशिश करते हैं तो गोवा में कुछ लोग परेशान हो जाते हैं. उन्हें दर्द होता है. क्या हमें यह नहीं बताना चाहिए कि आपकी जड़ें क्या हैं? कुछ लोग तब परेशान हो जाते हैं, जब उन्हें यह बताया जाता है कि आपकी जड़ें कहां हैं.’ ‘सामने लाना चाहिए अपना दृष्टिकोण’ उन्होंने कहा,’हमें बिना किसी से डरे अपनी बात कहनी चाहिए. जिन लोगों ने हम पर आक्रमण किया, वे कभी हमारे नहीं हो सकते. इसलिए हमें अपना दृष्टिकोण सामने लाना चाहिए. अगर गुवाहाटी जैसी जगहों से लोग हमें अपना इतिहास बता रहे हैं, तो गोवा के लोग अपनी भूमि का सच्चा इतिहास क्यों नहीं लिखते.’ बता दें कि आर्लेकर गोवा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं.  

GST: लाइफ और हेल्थ इंश्योंरेस नहीं होगा सस्ता, GST Council ने टैक्स घटाने का फैसला टाला, इन शेयरों पर होगा असर!

 नई दिल्‍ली जीएसटी काउंसिल की बैठक (GST Council Meeting) में एक बड़ा फैसला लिया गया है. मंत्रियों के समूह ने हेल्‍थ और लाइफ इंश्‍योरेंस प्रीमियम पर GST घटाने का प्रस्‍ताव रखा था, जिसे जीएसटी काउंसिल की बैठक में नेक्‍स्‍ट मीटिंग के लिए टाल दिया गया है. इसका मतलब है कि अभी भी लोगों को अपने इंश्‍योरेंस पर पुराने टैक्‍स रेट के हिसाब से प्रीमियम जमा करना होगा. GST परिषद की 55वीं बैठक में स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर प्रीमियम कम करने का फैसला टालने के पीछे वजह बताया गया कि इस पर और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. काउंसिल ने मंत्रियों के समूह (GOM) को अपनी रिपोर्ट को और अधिक व्यापक बनाने के लिए अतिरिक्त जानकारी पेश करने के लिए कहा है. इससे पता चलता है कि GST रेट्स को संशोधित करने या हेल्‍थ्‍स और लाइफ इंश्‍योरेंस से संबंधित प्रीमियम को कम करने पर कोई भी फैसला लेने से पहले मामले को और अधिक जांच की आवश्‍यकता है. अभी कितना लगता है जीएसटी रेट्स? वर्तमान में, स्वास्थ्य बीमा, टर्म लाइफ इंश्योरेंस और यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान 18 प्रतिशत जीएसटी दर के तहत आते हैं. एंडोमेंट प्लान में जीएसटी आवेदन अलग है, पहले वर्ष में 4.5 प्रतिशत और दूसरे वर्ष से 2.25 प्रतिशत की दर से. जीवन बीमा के लिए सिंगल प्रीमियम एन्युटी पॉलिसियों पर 1.8 प्रतिशत जीएसटी दर लागू होती है. ये रेट्स सभी आयु वर्ग पर समान रूप से लागू होती हैं. स्वास्थ्य बीमा पर मंत्रिसमूह (GOM) ने 16 दिसंबर को राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व अधिकारियों के समक्ष अपनी सिफारिशें रखी थीं. बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि समूह, व्यक्तिगत, वरिष्ठ नागरिकों की पॉलिसियों पर टैक्सेशन के बारे में फैसला करने के लिए बीमा पर जीओएम की एक और बैठक होगी। चौधरी ने मीडिया से कहा कि कुछ सदस्यों ने कहा कि और चर्चा की जरुरत है। हम (GoM) जनवरी में फिर मिलेंगे। जीएसटी काउंसिल ने चौधरी की अध्यक्षता में इंश्योरेंस पर मंत्रियों के समूह (GoM) का गठन किया है, जिसने नवंबर में अपनी बैठक में सावधि जीवन बीमा पॉलिसियों के इंश्योरेंस प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने पर सहमति जताई थी। साथ ही हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए वरिष्ठ नागरिकों द्वारा दिए गए प्रीमियम को भी टैक्स से छूट देने का प्रस्ताव किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के अलावा अन्य व्यक्तियों के 5 लाख रुपये तक के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने का भी प्रस्ताव है। हालांकि 5 लाख रुपये से अधिक के हेल्थ इंश्योरेंस कवर वाली पॉलिसी के लिए भुगतान किए गए प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी जारी रहेगा। क्‍या की गई थीं सिफारिश?     जीवन बीमा के लिए छूट:  GOM ने परिवार के सदस्यों को कवर करने वाली शुद्ध अवधि जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए जीएसटी छूट का प्रस्ताव दिया था. इसका मतलब यह होगा कि ये पॉलिसियां जीएसटी के अधीन नहीं होंगी, जिससे पॉलिसीधारकों पर वित्तीय बोझ कम होगा.     सीनियर सिटीजन के लिए हेल्‍थ बीमा पर छूट:  एक अन्य प्रमुख सिफारिश खासतौर से सीनियर सिटीजन के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी से छूट है, जिससे बुजुर्ग आबादी के लिए हेल्‍थ सर्विस को अधिक किफायती बनाने में मदद मिलेगी.     पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पर जीएसटी दर कम करना:  GOM ने सभी पर्सनल हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसियों पर जीएसटी दर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव रखा है, लेकिन इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विकल्प के बिना. इसका उद्देश्य प्रक्रिया को सरल रखते हुए व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की लागत को कम करना है. इन शेयरों पर भी असर होगा! सोमवार को जब शेयर बाजार खुलेगा तो जीएसटी रेट में कोई बदलाव नहीं करने से हेल्‍थ इंश्‍योरेंस और लाइफ इंश्‍योरेंस देने वाली लिस्‍टेड कंपनियों के शेयरों जैसे- पॉलिसीबाजार, गो डिजिट और निवा बूपा (Policy Bazaar, Go Digit, Niva Bupa Stocks) पर इसका असर हो सकता है.

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