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पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई ‘बीमा सखी योजना’ का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना

मुंबई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई ‘बीमा सखी योजना’ का लाभ लेने के लिए रविवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने बीमा सखी फॉर्म भरा है। पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के बारे में यशस्वी यादव ने कहा, “मैं विज्ञान विषय की छात्रा हूं। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद करना चाहती हूं कि उन्होंने महिलाओं के लिए बीमा सखी योजना लॉन्च की है। पहले हम लोग अपने माता-पिता पर निर्भर थे। लेकिन, इस योजना के तहत हम लोग आर्थिक रूप से खुद पर निर्भर हो सकते हैं। इसके साथ ही हम लोग अपने परिवार को भी सपोर्ट कर सकते हैं। इस योजना से गृहिणी भी आत्मनिर्भर हो जाएंगी।“ ‘बीमा सखी योजना’ के बारे में जानकारी देते हुए सचिन सिंह ने कहा, “जो महिलाएं गृहिणी हैं और अपने परिवार को संभाल रही हैं, उनके लिए पीएम मोदी द्वारा इस योजना के तहत हर महीने सात हजार रुपये सैलरी के साथ विशेष लाभ दिया जाएगा, साथ ही कमीशन भी दिया जाएगा। इसके अलावा, कई अन्य लाभ हैं, जैसे समूह बीमा, चिकित्सा सहायता, और भी बहुत कुछ, जो उन्हें प्रदान किया जाएगा। मैं पीएम मोदी का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने इस तरह से महिलाओं के बारे में सोचा, खासकर उनके लिए जो कुछ करना चाहती हैं, कुछ बनना चाहती हैं। इस योजना से जुड़ने के लिए आवेदक को महज 10वीं पास होना अनिर्वाय है। आवेदक की उम्र 18 साल से 70 साल के बीच में होनी चाहिए।” रुचि चावला ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहूंगी। क्योंकि उन्होंने महिला को सशक्त बनाने के लिए बीमा सखी योजना के तहत एक पहल की है। अब महिलाएं अपने सपनों को पंख दे सकती हैं और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकती हैं। इसके लिए मैं पीएम मोदी का दिल से आभार व्यक्त करना चाहती हूं।” एक अन्य महिला ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद करना चाहती हूं कि साल 2024 में हम लोगों के लिए बीमा सखी योजना दी है। इस योजना से हम महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। इस योजना से जुड़कर हमें सैलरी भी मिलेगी, साथ ही कमीशन भी मिलेगा।” बता दें कि इस योजना के तहत 15 दिसंबर को पालघर जिले के वसई पूर्व के एवरसाईन सिटी में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर बीमा सखी फार्म भरा है।

महामंडलेश्वर महाराज ने कहा- राहुल गांधी लगातार हिंदू समाज पर हमलावर रहते हैं, द्रोणाचार्य वाले बयान पर माफी मांगें

हरिद्वार “द्रोणाचार्य ने अंगूठा काटा” बयान को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी विवादों में घिर गए हैं। संत समाज ने इस पर आपत्ति जताई है। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा वो घटना अन्याय को नहीं भारत की गुरु शिष्य परंपरा को दर्शाती है। महामंडलेश्वर रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहा कि राहुल गांधी लगातार हिंदू समाज पर हमलावर रहते हैं। लेकिन, मुस्लिम धर्म पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी नहीं करते हैं, क्योंकि वह इसके परिणामों से अवगत हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने द्रोणाचार्य के उस प्रसंग का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया कि द्रोणाचार्य ने एकलव्य का अंगूठा काट दिया था। लेकिन, वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। महाभारत के इस प्रसंग में, एकलव्य गुरु दक्षिणा देने के लिए अंगूठे का दान करता है। यह एकलव्य की अपनी श्रद्धा और गुरु के प्रति आदर का प्रतीक था, न कि किसी प्रकार का अत्याचार। यह घटना गुरु-शिष्य परंपरा की महानता और एकलव्य की श्रद्धा को दर्शाती है, न कि किसी अन्याय को।” उन्होंने कहा, “राहुल गांधी का यह बयान इतिहास के तथ्यों के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि यह द्रोणाचार्य और एकलव्य के रिश्ते को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका यह बयान एक प्रकार से सनातन धर्म के खिलाफ एक हमलावर दृष्टिकोण की तरह दिखाई देता है। वे लगातार हिंदू धर्म के प्रतीकों, महापुरुषों और उनके योगदान का अपमान करते रहते हैं। राहुल गांधी ने इस मामले में जिस प्रकार का बयान दिया है, वह न केवल गलत है, बल्कि यह सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रतीकों का अपमान करने वाला है। सनातन धर्म में महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों का अत्यधिक सम्मान है, और इनमें निहित शिक्षा और दर्शन का पालन करना चाहिए। ऐसे बयानों से समाज में भ्रम और तनाव फैल सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “राहुल गांधी को इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए और उन्हें यह समझने की आवश्यकता है कि उन्हें महाभारत या रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन करके ही इस प्रकार के मुद्दों पर बोलना चाहिए। अगर वे इन ग्रंथों का सही तरीके से अध्ययन करेंगे, तो वे समझ पाएंगे कि एकलव्य और द्रोणाचार्य के बीच का संबंध केवल एक गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत उदाहरण है, न कि कोई विवाद या अन्याय।” बता दें कि राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया था कि जिस तरह एकलव्य का अंगूठा काटा गया, उसी तरह से आज सरकार देश के युवाओं का अंगूठा काट रही है। उन्होंने कहा था कि आज भारत में एक वैचारिक लड़ाई चल रही है और विपक्ष की तरफ संविधान के विचारों के संरक्षक हैं।  

आज 3-3 महामिसाइल बनाकर पूरी दुनिया को चुनौती दे रहा है भारत, जो अमेरिका बनाने के लिए संघर्ष कर रहा

नई दिल्ली सपने अक्सर उन्हीं के सच होते हैं, जो उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं. दुनियाभर में ताकत का प्रतीक माना जाने वाला अमेरिका भी आज हाइपरसॉनिक मिसाइल बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है. लेकिन भारत जो कभी तकनीकी क्षमता में दुनिया की दौड़ में पीछे समझा जाता था, वही आज 3-3 महामिसाइल बनाकर पूरी दुनिया को चुनौती दे रहा है. प्रोजेक्ट ध्वनि के तहत हाइपरसॉनिक मिसाइल तकनीकी क्षमता में पीछे रहने वाले देश को आज दुनिया की अग्रणी सूची में गिना जाता है. इसका श्रेय भारत के वैज्ञानिकों का जुनून और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की मेहनत को जाता है. DRDO के वैज्ञानिकों ने प्रोजेक्ट ध्वनि के तहत ऐसे हाइपरसॉनिक हथियार बनाए है, जिन्हें रोक पाना अब नामुमकिन है. ध्वनि की गति से भी तेज होते हैं हाइपरसॉनिक मिसाइल दरअसल, हाइपरसॉनिक मिसाइल उन हथियारों को कहा जाता है जो कि ध्वनि की गति से पांच गुणा तेज यानी 6,200 प्रति घंटे की रफ्तार से उड़कर अपने लक्ष्य पर हमला करते हैं. इनकी तेज रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खासियत के बदौलत ये हाइपरसॉनिक मिसाइल बेहद खतरनाक हो जाते हैं, जिसे कोई भी रडार पकड़ नहीं सकता है. DRDO की यह हाइपरसॉनिक तकनीक पूरी तरह से स्वदेशी है. हाइपरसॉनिक मिसाइल रॉकेट इंजन के जरिए लॉन्च होता है और वातावरण में 6 से 7 Mach की गति से उड़ता है. वहीं, 1,500 किलोमीटर से अधिक की रेंज में पेलोड ले जाने में सक्षम है. भारत के तीनों सेनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है हाइपरसॉनिक मिसाइल ध्वनि की गति से 5 गुना तेज उड़ने, किसी भी रडार के पकड़ में न आने वाली खासियत से यह हाइपरसॉनिक मिसाइल भारत की तीनों सेना (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के लिए अत्यंत उपयोगी है. इसमें मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल होता है, जो उड़ान के दौरान मिसाइल की गति को बनाए रखता है. भारत का ब्रह्मोस-2 इस हाइपरसॉनिक तकनीक का सटीक उदाहरण है. बता दें कि DRDO अभी तीन अलग-अलग डिजाइनों पर काम कर रहा है. पाकिस्तान और चीन की अब खैर नहीं उल्लेखनीय है कि भारत ने एक बार गलती से पाकिस्तान की ओर एक ब्रह्मोस मिसाइल दाग दी थी, जिसे पाकिस्तान ट्रैक नहीं कर पाया था. वहीं, अब ब्रह्मोस-2 और प्रोजेक्ट ध्वनि की हाइपरसॉनिक मिसाइलों के सामने पाकिस्तान तो क्या चीन और अमेरिका के डिफेंस सिस्टम भी पूरी तरह से बेबस नजर आ रहे हैं. जहां अमेरिका अब तक अपने हाइपरसॉनिक प्रोग्राम को सफलता नहीं दिला पाया, वहीं भारत रूस के साथ मिलकर इस तकनीक में महारथ हासिल कर ली है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- ‘मोदी सरकार में नहीं है बांग्लादेश को जवाब देने की काबिलियत’

नई दिल्ली बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ देश समेत दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है. इस बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं. इस दौरान उन्होंने इंडिया गठबंधन में लीड करने को लेकर चल रहे घमासान पर भी प्रतिक्रिया दी है. ‘बांग्लादेश को जवाब देने में सक्षम नहीं मोदी सरकार’ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “बांग्लादेश में जिस तरह से वहां रहने वाले हिंदू पर वहीं के मुस्लिम अत्याचार कर रहे हैं ये बहुत ही चिंता का विषय है. आज बांग्लादेश भले ही बांग्लादेश है… पहले वो पाकिस्तान था और उससे भी पहले वो भारत था. वे हिंदू हमारे हैं, हम उनसे जुड़े हैं, इसलिए चिंतित हैं.” उन्होंने कहा, “हम भारत सरकार से इसे रोकने की उम्मीद कर रहे हैं और अनुरोध भी कर रहे हैं, लेकिन समय बीतता जा रहा है, हमें इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. यह सोचने वाली बात है कि हिंदूवादी सरकार होने के बावजूद भी भारत सरकार उस पर ठीक से जवाब में सक्षम नहीं है.” इंडिया गठबंधन को लीड करने पर क्या बोले शंकराचार्य इंडिया गठबंधन को लीड करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये उनका अपना मामला है. उन्होंने कहा, “मैं या बाहर का कोई व्यक्ति उस पर नहीं बोल सकता है. गठबंधन में शामिल सभी दल ये विचार करेंगे कि कौन उनका प्रतिनिधित्व करेगा.” मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर डेमोक्रेसी, प्लुरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स (सीडीपीएचआर) ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें अगस्त 2024 में बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद वहां अल्पसंख्यकों की स्थिति पर रिपोर्ट दिया है. इस रिपोर्ट में 150 से अधिक हिंदू परिवारों पर हमले, कई घरों में आग लगाने, करीब 20 मंदिरों में तोड़फोड़ और लूटपाट का दावा किया है. उत्तरी बांग्लादेश के सुनामगंज जिले में हिंदू समुदाय के घरों, दुकानों और स्थानीय लोकनाथ मंदिर में तोड़फोड़ कर उसे नुकसान पहुंचाने के आरोप में शनिवार (14 दिसंबर 2024) को चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. इस मामले में पुलिस ने 12 नामजद सहित 150 से 170 लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है.

सरकार के खिलाफ किया था विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान की आतंक-रोधी अदालत ने इमरान के 38 समर्थकों को किया रिहा

इस्लामाबाद. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन में पिछले महीने विरोध प्रदर्शन करने पर गिरफ्तार किए गए 38 समर्थकों को पाकिस्तान की एक आतंकवाद रोधी अदालत ने शनिवार को रिहा कर दिया। पुलिस ने 26 नवंबर को विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के सैकड़ों समर्थकों को गिरफ्तार किया था। यह लोग इस्लामाबाद तक मार्च निकालने जा रहे थे। पीटीआई के संस्थापक और पूर्व पीएम इमरान खान ने 13 नवंबर को लोगों से देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा था कि लोग पार्टी के लिए चुनावी जनादेश की बहाली, हिरासत में लिए गए पार्टी सदस्यों की रिहाई और 26वें संविधान संशोधन को बदलने की मांग करें। इसके बाद पार्टी के समर्थक 26 नबंवर को सड़क पर उतरे थे। पुलिस ने रावलपिंडी में 1,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। डॉन अखबार के मुताबिक न्यायाधीश अबुल हसनत मोहम्मद जुल्करनैन ने शनिवार को 56 संदिग्धों के मामलों की सुनवाई की। पुलिस ने संदिग्धों के लिए 20 दिन की रिमांड मांगी थी। इस पर बचाव पक्ष के वकील अंसार कयानी ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शन से पहले संदिग्धों को उनके घरों से गिरफ्तार किया था। पुलिस संदिग्धों से कुछ भी बरामद नहीं करना चाहती। पुलिस ने केवल उनकी संख्या पूरी की है। इस पर न्यायाधीश ने 50 व्यक्तियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया और छह अन्य को रिहा कर दिया। पुलिस को उन्हें फिर से गिरफ्तार न करने का आदेश दिया। जियो न्यूज ने बताया कि न्यायाधीश जुल्करनैन ने देर रात गिरफ्तार किए गए 32 व्यक्तियों के मामलों सुनवाई की। पुलिस ने संदिग्धों के लिए 30 दिन की रिमांड का अनुरोध किया। जबकि बचाव पक्ष के वकील कियानी ने तर्क दिया कि पुलिस ने कोटा पूरा करने के लिए निर्दोष श्रमिकों को उनके घरों से गिरफ्तार किया था। न्यायाधीश जुल्कारनैन ने अदालत में संदिग्धों की हथकड़ी खोलने का आदेश दिया और उन्हें मामलों से मुक्त कर दिया। उन्होंने पुलिस को उन्हें फिर से गिरफ्तार न करने की सख्त चेतावनी दी। न्यायाधीश ने कहा कि अगर पुलिस ने फिर से ऐसा किया, तो मैं उन्हें हथकड़ी पहना दूंगा।

देवेंद्र फडणवीस सरकार में चंद्रशेखर बावनकुले, नितेश राणे और पंकजा मुंडे समेत भाजपा के दिग्गज नेताओं ने शपथ ली

मुंबई महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार पूरा हो चुका है।  नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान 39 विधायकों ने मंत्रिपद की शपथ ली। शपथ लेने वालों में चंद्रशेखर बावनकुले, नितेश राणे और पंकजा मुंडे समेत भाजपा के दिग्गज नेताओं ने शपथ ली। शिवसेना की तरफ से गुलाबराव पाटिल, भारत गोगवले, संजय शिरसाट ने शपथ ली। एनसीपी की तरफ से छगन भुजबल और हसन मुश्रिफ समेत कई दिग्गजों को मंत्री बनाया गया है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार से पहले नाराजगी की खबरें भी सामने आईं। शिवसेना नेता नरेंद्र भेंडिकर ने मंत्री पद न मिलने से विधानसभा उपनेता पद से इस्तीफा दे दिया। महाराष्ट्र में इन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली- भाजपा के नितेश राणे, आकाश फुंडकर, एनसीपी के बाबासाहेब पाटिल, शिवसेना के प्रकाश अबितकर ने महाराष्ट्र के मंत्रिपद की शपथ ली। मराठा कुनबी समुदाय के नेता और महाड़ से शिवसेना विधायक भारत गोगवले, भाजपा विधायक नितेश राणे ने मंत्रिपद की शपथ ली। एकनाथ शिंदे के करीबी संजय शिरसाट ने मंत्रिपद की शपथ ली। उनके अलावा मराठा समुदाय के बड़े नेता प्रताप सरनाइक ने भी मंत्रिपद की शपथ ली। नरहरि झिरवाल, दत्तात्रेय भरणे, अदिति तटकरे, संजय सावकारे ने मंत्रिपद की शपथ ली। सतारा सीट से भाजपा विधायक शिवेंद्र राजे, नासिक की सिन्नर सीट से एनसीपी विधायक माणिकराव कोकाटे और जयकुमार गोरे ने मंत्रिपद की शपथ ली। फडणवीस के करीबी नेता और रालेगांव से भाजपा विधायक अशोक उइके ने मंत्रिपद की शपथ ली। शिवसेना विधायक शंभूराज देसाई, मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीश शेलार. चंद्रकांत पाटिल, धनंजय मुंडे और राधा कृष्ण पाटिल ने भी मंत्रिपद की शपथ ली। पंकजा मुंडे ने फडणवीस सरकार में मंत्रिपद की शपथ ली। वह बीड की पराली सीट से विधानसभा चुनाव जीतीं थी। उनके बाद भाजपा नेता अतुल सावे ने मंत्री पद की शपथ ली। भाजपा विधायक मंगल प्रभात लोढ़ा, शिंदे गुट के नेता उदय सामंत और भाजपा के सीनियर नेता जय कुमार रावल ने मंत्रिपद की शपथ ली। गुलाबराव के बाद शिवसेना विधायकों गणेश नाइक, मालेगांव आउटर से विधायक दादा भुसे और संजय राठौड़ ने मंत्रिपद की शपथ ली। शिवसेना नेता और विधायक गुलाबराव पाटिल ने मंत्रिपद की शपथ ली। गुलाबराव ने शिवसेना नेताओं की तरफ से सबसे पहले शपथ ली। वो एक वक्त उद्धव ठाकरे के करीबी माने जाते थे, लेकिन बाद में एकनाथ शिंदे से जुड़ गए। भाजपा विधायक गिरीश महाजन ने भी मंत्रिपद की शपथ ली। वो सीएम देवेंद्र फडणवीस के करीबी माने जाते हैं। भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के बाद मुस्लिम नेता और कोल्हापुर के कागल से एनसीपी विधायक हसन मुश्रिफ ने मंत्रिपद की शपथ ली। हसन अजित पवार के साथ उन नेताओं में एक हैं, जिन्होंने शरद पवार के खिलाफ बगावत की थी। मंत्रियों का ढाई साल कार्यकाल सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि देवेंद्र फडणवीस सरकार मेंमंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों का कार्यकाल सिर्फ ढाई साल का होगा। शिवसेना और एनसीपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कई मंत्रियों से बाकायदा एफिडेविट भी लिखाया गया है। इसके पीछे की मंशा यह है कि ढाई साल के बाद और विधायकों को मंत्री पद का मौका मिलेगा। इसमें ढाई साल के भीतर कार्यकुशलता और विकास परियोजनाओं को भी परखा जाएगा। सूत्रों का यह भी कहना है कि कई ऐसे विधायक हैं, जो दो से तीन बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। उनकी नाराजगी को दूर करने के लिए ढाई साल का फॉर्मूला रखा जा सकता है। इससे पहले सीएम फडणवीस ने नवगठित सरकार की प्राथमिकताओं पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने राज्य में लागू की जाने वाली योजनाओं और परियोजनाओं पर भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति ने 230 सीटें जीतकर जबरदस्त सफलता हासिल की थी। चुनाव में भाजपा को 132, शिवसेना शिंदे समूह को 57 तथा अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 41 सीटें मिली।

सांसदों ने कहा- टीबी जागरूकता के लिए अहम पहल, राज्यसभा और लोकसभा के एमपी के बीच चल रहा दोस्ताना क्रिकेट मैच

नई दिल्ली। राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों के बीच ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के प्रति जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से एक दोस्ताना क्रिकेट मैच खेला जा रहा है। दोनों सदनों के सांसदों के बीच यह मुकाबला नई दिल्ली के मेजर ध्यान चंद नेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में राज्यसभा से किरन रिजिजू और लोकसभा से अनुराग ठाकुर अपनी टीमों की अगुवाई कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का एक लक्ष्य रखा है। दुनियाभर का लक्ष्य 2031 का है। अगर आप 2015 से लेकर अब तक देखें, भारत में जो टीबी से जुड़ी मृत्यु में 38 प्रतिशत की गिरावट आई है। जो नए केस हैं उनमें लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट है। दुनियाभर में यह लगभग 8 प्रतिशत है। इसका मतलब भारत दुनिया से बेहतर कर रहा है, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी टीबी आबादी भी भारत में ही है। अब इसका इलाज भी है और सरकार मुफ्त में दवाई भी देती है। 1,000 रुपये पोषण के लिए भी देती है और इसकी ट्रैकिंग भी की जाती है।” अनुराग ठाकुर ने आगे कहा, “इस बात के लगातार प्रयास किए जाते हैं। ऐसी 75,000 से अधिक संस्थाएं और व्यक्ति हैं जिन्होंने 20 लाख से ज़्यादा टीबी मरीजों को गोद लिया है। उनकी मदद करते हैं। हमारा प्रयास सांसदों के मैच करने के पीछे यह था कि आप ज़्यादा से ज़्यादा जागरूक हों और हम टीबी मुक्त भारत, जो लक्ष्य प्रधानमंत्री मोदी ने रखा है, उसको पूरा कर सकें।” लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने इस अवसर पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “इस मैच के जरिए हम एक संदेश देना चाहते हैं कि हम सांसद टीबी जैसी बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मैदान पर भागेंगे, दौड़ेंगे और इस मैच को खेलेंगे। टीबी बहुत खतरनाक बीमारी है और थोड़ी सी सजगता से उसको हराया जा सकता है। आज के मैच में कौन जीतेगा और कौन हारेगा, यह बाद की बात है। लेकिन टीबी हारेगा यह तय है।” केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू ने मैच से पहले आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मुझे खुशी है कि हम लोग एक साथ आए हैं। टीवी को हराना हमारा लक्ष्य है और आज हम लोग यहां पर इकट्ठा हुए हैं। बहुत खुशी की बात है। बहुत अच्छी पहल की गई है। हम लोग साथ हैं और टीबी को हराएंगे। देश में टीबी के खिलाफ जो लड़ाई चल रही है उसको और थोड़ा बल देने के लिए आज हमने यह क्रिकेट मैच रखा है और बहुत ही अच्छी प्रतिक्रिया आई है।” उन्होंने आगे कहा कि कई दलों के राजनेता इसमें जुड़कर अपनी राजनीतिक सीमाओं से आगे बढ़कर आज यहां पर शामिल हुए हैं। हमने 2025 तक टीबी को हराने के लिए एक लक्ष्य रखा है, तो इसके तहत यह कार्यक्रम अभी आगे बढ़ रहा है। आज के मैच को जागरूकता प्रोग्राम की तरह रखा गया है। हमें जागरूकता को जमीनी स्तर पर ले जाने के लिए आगे भी ऐसे कार्यक्रम करने चाहिए। हमें भारत को 2047 तक विकसित बनाने के संकल्प के तहत इस तरह की बीमारियों को हटाना बहुत ही जरूरी है और इसके लिए हम सबको मिलकर लड़ना होगा। आज हम सांसदों ने एक दोस्ताना मैच रखा है। इसमें जीत जरूर भारत की होगी और टीबी हार की होगी। वहीं, सांसद रवि किशन ने कहा कि ऐतिहासिक मैच होगा। हम लोग धुआं-धुआं कर देंगे। युवा नशे और ड्रग्स से बचें। युवा भारत के लिए पीएम मोदी का सपना तभी पूरा होगा, जब पूरा देश भी इसको पूरा करने के लिए प्रयास करेगा। तभी भारत नशा मुक्त होगा। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “एक बेहतरीन कारण के लिए सभी सांसद पहुंचे हैं। टीबी को लेकर जागरूकता देश के कोने-कोने तक पहुंचे। बिनी किसी राजनीति के, टीम भावना के साथ हम एकजुट हुए हैं। हमारी टीम भावना बनी रहें। सभी राजनेता भी ऐसे ही टीम भावना के तहत काम करें। चुनाव के बाद भी राजनेता आपस में उलझते रहते हैं। मुझे लगता है कि इस प्रकार की पहल से ऐसी चीजें भी कम होंगी।”

पूनम चैंबर इमारत में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंची, आग पर काबू पाने की कोशिश

मुंबई मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित बनी पूनम चैंबर इमारत में आज भीषण आग लग गई। आग की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की 10 गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने की कोशिश कर रही हैं। बता दें कि आग इमारत की दूसरी मंजिल पर लगी है लेकिन अब तक किसी के घायल होने की खबर नहीं आई है। आग कैसे लगी इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। फायर ब्रिगेड की टीमें आग को बुझाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं जबकि पुलिस ने भी घटना की जांच शुरू कर दी है। वहीं स्थानीय लोग और कर्मचारी इमारत के बाहर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं जबकि अग्निशमन विभाग के अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हुए हैं। घटना के बाद आसपास के इलाकों में अफरातफरी का माहौल बन गया लेकिन राहत की बात यह है कि अभी तक किसी तरह के बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है।

गृह मंत्रालय ने ली मांगों की लिस्ट, 20वें दिन भी अनशन तोड़ने को तैयार नहीं जगजीत डल्लेवाल

नई दिल्ली. शंभू बॉर्डर पर डटे किसानों ने शनिवार को दिल्ली कूच करने की कोशिश की। प्रशासन की सख्ती की वजह से किसान आगे नहीं बढ़ पाए। पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। किसानों का कहना है कि अब वे 16 दिसंबर को ट्रैक्टर मार्च करेंगे। वहीं खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 20वें दिन भी आमरण अनशन कर रहे हैं। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, हम यही आश्वासन देने की कोशिश कर रहे हैं कि किसानों की सरकार से बातचीत का रास्ता खुलेगा और उनकी मांगें भी पूरी होंगी। उन्होंने कहा, हमने जगजीत सिंह डल्लेवाल और अन्य किसान नेताओं से अपील की। इसके अलावा उनकी चिकित्सा सुविधा का इंतजाम किया गया। यादव ने कहा, हम उनके साथ मिलकर इस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। डल्लेवाल ने हमसे कहा कि हमारी मांगों को सरकार के सामने रखा जाए। वहीं गृह मंत्रालय में डायरेक्टर मयंक मिश्रा ने किसानों से मुलाकात के बाद कहा, हमने किसानों की मांगों की सूची ले ली है और हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी पालन करना है। पंजाब के डीजीपी ने कहा, हमने किसान नेता डल्लेवाल की स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। हमने उन्हें सीएम भगवंत मान का संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री उनको लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल का जीवन कीमती है। डल्लेवाल 26 नवंबर से पंजाब और हरियाणा के बीच खनौरी बॉर्डर पर अनशन पर बैठे हुए हैं ताकि केंद्र पर फसलों के एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी सहित आंदोलनकारी किसानों की मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जा सके। सुरक्षा बलों द्वारा किसानों के दिल्ली कूच को रोके जाने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। चिकित्सकों ने पहले ही डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती करने की सिफारिश की है और कहा है कि लंबे समय तक अनशन के कारण वह कमजोर हो गए हैं। खनौरी में मीडिया को अपने संक्षिप्त संबोधन के दौरान डल्लेवाल ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय को धन्यवाद दिया।

ऋण पुनर्गठन और नई प्रतिभूति हासिल करने में मिलेगी मदद, श्रीलंका में अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बांड एक्सचेंज ऑफर का समापन

कोलंबो. श्रीलंका ने अपने अंतर्राष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड एक्सचेंज ऑफर के सफल समापन की घोषणा की है, जिसमें 98 प्रतिशत बॉन्डधारकों ने भाग लिया। यह कदम देश को अपने ऋण का पुनर्गठन करने और नई बॉन्ड प्राप्त करने में मदद करेगा। श्रीलंका ने यह घोषणा शुक्रवार को की गई, जो 14.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण पुनर्गठन समझौते के कुछ दिनों बाद आई है, जिसे पिछले शासन में तय किया गया था। इस समझौते के तहत मौजूदा बॉन्ड के बदले नए बॉन्ड जारी किए जाएंगे और यह कदम आईएमएफ द्वारा कर्ज स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी था। श्रीलंका के राष्ट्रपति और वित्त मंत्री अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस उच्च भागीदारी को एक विश्वासमत के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इस विनिमय में बाजार प्रतिभागियों की बड़ी भागीदारी यह दिखाती है कि सरकार की योजना में विश्वास है। श्रीलंका के राष्ट्रपति ने विश्वासमत के रूप में सराहा श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय हितधारकों से उच्च भागीदारी को एक विश्वासमत के रूप में सराहा। उन्होंने कहा हम अपने अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय बॉन्डधारकों से इस विश्वास को देखकर बहुत प्रसन्न हैं। पिछले कुछ साल श्रीलंकाई जनता के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन हमारे सामूहिक प्रयास अब फल दे रहे हैं। उन्होंने आगे कहा इस ऋण विनिमय का कार्यान्वयन, जो दो वर्षों की गहन वार्ता का परिणाम है। श्रीलंका को पर्याप्त ऋण राहत प्रदान करेगा। इससे हमारे विकास और सामाजिक योजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए अल्प और मध्यम अवधि में संसाधन मिलेंगे और हमारे सार्वजनिक वित्त की दीर्घकालिक स्थिरता बहाल होगी। उन्होंने कहा कि आज हम अपने इतिहास का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं और कई वर्षों के संकट के बाद एक नया रास्ता चुन रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की विस्तारित निधी सुविधा जानकारी के अनुसार IMF ने श्रीलंका को 2.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर की विस्तारित निधि सुविधा (EFF) प्रदान की है। IMF ने शनिवार को स्टाफ-स्तरीय समझौते को मंजूरी दी, जिससे चार वर्षीय सुविधा की चौथी किश्त – लगभग 330 मिलियन अमेरिकी डॉलर – प्राप्त होगी। श्रीलंका को अप्रैल 2022 में संप्रभु डिफ़ॉल्ट घोषित करने के बाद गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था, जो 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से उसका पहला डिफ़ॉल्ट था। इस संकट के कारण महीनों तक सार्वजनिक विरोध हुए, और तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़ना पड़ा। श्रीलंका ने धारकों को दिया था निमत्रण बता दें कि श्रीलंका ने 25 नवंबर को अपने आईएसबी (अंतर्राष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड) धारकों को नए ऋण साधनों के बदले पुराने बॉन्ड्स का आदान-प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया था। इन धारकों में अंतर्राष्ट्रीय निवेशक और घरेलू वित्तीय संस्थान शामिल थे, जिनके पास आईएसबी की कुल बकाया राशि का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा था। श्रीलंका को मिलेगी राहत जानकारी के अनुसार इस ऋण पुनर्गठन से श्रीलंका को पर्याप्त ऋण राहत मिलेगी। इससे विकास और सामाजिक योजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे और सार्वजनिक वित्त की दीर्घकालिक स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। जहां इससे पहले, 26 नवंबर को सरकार ने 14.2 बिलियन डॉलर के ऋण पुनर्गठन समझौते की पुष्टि की थी, जिसे आईएमएफ ने कर्ज को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी माना था।

भारतीय दूतावास ने दी जानकारी, म्यांमार में नौकरी के झांसे में फंसे छह भारतीय लौट रहे घर

नेपीडाॅ. भारतीय दूतावास ने म्यांमार में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया है। दूतावास ने जानकारी दी कि मायावडी में फंसे छह और भारतीयों को भारत वापस भेजा जा रहा है। इन लोगों को स्थानीय थाने पहुंचा दिया गया है, जहां से उन्हें जल्द भारत भेजा जाएगा। ये भारतीय मायावडी इलाके में फंसे हुए थे, जहां नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी या अवैध गतिविधियां होती हैं। जो छह भारतीय नागरिक म्यांमार से भारत वाप आ रहे हैं, उनका नाम अजय कुमार, मुस्तफा, सुखचैन, बचू मणिकांत, समीर अहमद और कुलदीप है। दूतावास ने बताया कि अब तक 101 भारतीय नागरिकों को जुलाई 2024 से अब तक म्यांमार से भारत वापस भेजा जा चुका है। दूतावास ने एक बार फिर एडवाइजरी जारी कर म्यांमार में नौकरी की पेशकश को लेकर भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने को कहा है। इसमें कहा गया है कि बिना दूतावास की सलाह के इस क्षेत्र में नौकरी की पेशकश पर भरोसा न करें। विद्रोही बलों के नियंत्रण में मायावडी इलाका भारतीय नागरिकों को फर्जी नौकरी का रैकेट चलाने वाले जालसाजों के चंगुल से छुड़ाना और उन्हें वापस भेजना एक जटिल प्रक्रिया है। मायावडी क्षेत्री म्यांमार के विद्रोही बलों के नियंत्रण में है और म्यांमार के सुरक्षा बलों की वहां तक पहुंच नहीं है। म्यांमार सरकार मदद करने की कोशिश करती है, लेकिन उसकी पहुंच सीमित है। भारतीय दूतावास स्थानीय थाने तक नागरिकों के पहुंचने के बाद ही उन्हें सुरक्षित रूप से वापस भेज सकता है। भारतीय दूतावास ने पहले भी जारी की थी एडवाइजरी दूतावास ने इससे पहले मई में भी एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर स्थित मायावडी इलाके में सक्रिय अपराधियों के अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के बारे में चेतावनी दी गई थी। दूतावास ने भारतीय नागरियों को आगाह किया था कि वहां से नौकरी की पेशकश को लेकर सतर्क रहें। दूतावास ने अपनी एडवाइजरी में कहा था कि म्यांमार में काम करने से पहले नौकरी की पेशकश को स्वीकार करने से पहले भारतीय मिशन से संपर्क करें।

जेलेंस्की बोले- रूस ने तैनात किए उत्तर कोरियाई सैनिक, ब्राजील के पूर्व रक्षा मंत्री गिरफ्तार

ब्रेसिला. फैशन टाइकून के नाम से विख्यात स्पेन की प्रमुख फैशन कंपनी मैंगो के संस्थापक इसाक एंडिक की एक दुर्घटना में निधन हो गया है, यह जानकारी कंपनी ने शनिवार को दी। मैंगो के सीईओ टोनी रुइज़ ने एक बयान जारी कर एंडिक की विरासत को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को सराहा। जारी बयान में कहा गया इसाक एंडिक ने अपना जीवन मैंगो को समर्पित किया। उनकी रणनीतिक सोच, प्रेरक नेतृत्व और कंपनी के प्रति उनकी अडिग प्रतिबद्धता ने गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने यह भी कहा उनकी विरासत सिर्फ एक व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि उनके मानवीय गुणों, देखभाल और स्नेह का भी प्रतीक है, जिसे उन्होंने हमेशा पूरी टीम को दिया। रुइज़ ने कहा कि एंडिक के निधन से एक “बहुत बड़ा शून्य” रह गया है और यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी कि मैंगो उस परियोजना के रूप में आगे बढ़े, जिसे इसाक ने हमेशा अपनी आकांक्षाओं और गर्व से जोड़ा था।

गृह मंत्रालय ने ली किशानो ने मांगों की लिस्ट, जगजीत डल्लेवाल 20वें दिन भी अनशन तोड़ने को तैयार नहीं

नई दिल्ली शंभू बॉर्डर पर डटे किसानों ने दिल्ली कूच करने की कोशिश की। प्रशासन की सख्ती की वजह से किसान आगे नहीं बढ़ पाए। पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। किसानों का कहना है कि अब वे 16 दिसंबर को ट्रैक्टर मार्च करेंगे। वहीं खनौरी बॉर्डर पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 20वें दिन भी आमरण अनशन कर रहे हैं। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, हम यही आश्वासन देने की कोशिश कर रहे हैं कि किसानों की सरकार से बातचीत का रास्ता खुलेगा और उनकी मांगें भी पूरी होंगी। उन्होंने कहा, हमने जगजीत सिंह डल्लेवाल और अन्य किसान नेताओं से अपील की। इसके अलावा उनकी चिकित्सा सुविधा का इंतजाम किया गया। यादव ने कहा, हम उनके साथ मिलकर इस मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। डल्लेवाल ने हमसे कहा कि हमारी मांगों को सरकार के सामने रखा जाए। वहीं गृह मंत्रालय में डायरेक्टर मयंक मिश्रा ने किसानों से मुलाकात के बाद कहा, हमने किसानों की मांगों की सूची ले ली है और हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी पालन करना है। पंजाब के डीजीपी ने कहा, हमने किसान नेता डल्लेवाल की स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। हमने उन्हें सीएम भगवंत मान का संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री उनको लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि जगजीत सिंह डल्लेवाल का जीवन कीमती है। डल्लेवाल 26 नवंबर से पंजाब और हरियाणा के बीच खनौरी बॉर्डर पर अनशन पर बैठे हुए हैं ताकि केंद्र पर फसलों के एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी सहित आंदोलनकारी किसानों की मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जा सके। सुरक्षा बलों द्वारा किसानों के दिल्ली कूच को रोके जाने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के बैनर तले किसान 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। चिकित्सकों ने पहले ही डल्लेवाल को अस्पताल में भर्ती करने की सिफारिश की है और कहा है कि लंबे समय तक अनशन के कारण वह कमजोर हो गए हैं। खनौरी में मीडिया को अपने संक्षिप्त संबोधन के दौरान डल्लेवाल ने उनके स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करने के लिए उच्चतम न्यायालय को धन्यवाद दिया।

हर्षिता बरेला इस साल अप्रैल में भारत से लंदन गई थी, वहा उनकी हुई हत्या, मां से कहा था- मेरा पति मुझे मार डालेगा

लंदन लंदन में रहने वाली 24 साल की भारतीय महिला हर्षिता बरेला की हत्या का मामला सामने आया है। उसकी लाश को 14 नवम्बर को एक कार के बूट से बरामद किया गया। हर्षिता की मां सुदेश कुमारी ने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी ने कुछ हफ्ते पहले उन्हें बताया था कि उसका पति उसे मार डालेगा। हर्षिता ने अपनी मां से कहा था, “मैं उसके पास वापस नहीं जाऊंगी। वह मुझे मार डालेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि उसका पति यानी कि पंकज लाम्बा उसकी ज़िंदगी को नर्क बना चुका था। हर्षिता बरेला इस साल अप्रैल में भारत से लंदन गई थी। उसकी शादी पंकज लाम्बा से अगस्त 2023 में हुई थी। पुलिस का कहना है कि हर्षिता को हत्या करने से पहले गला घोंटकर मारा गया था। पुलिस ने पंकज लाम्बा को मुख्य आरोपी बनाया है, लेकिन वह इस समय भारत में है। हर्षिता के परिवार का आरोप है कि ब्रिटिश पुलिस ने उनकी मदद के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि ब्रिटिश अधिकारियों ने अभी तक भारत से उनकी मदद के लिए संपर्क नहीं किया है। हर्षिता के पिता सतबीर बरेला ने भी अपने दामाद पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंकज लाम्बा ने हर्षिता को इतनी बुरी तरह पीटा था कि उसकी गर्भावस्था में गर्भपात हो गया था। सतबीर ने बताया कि उनकी बेटी ने कई बार उन्हें बताया था कि पंकज उसे सरेआम पीटता था और वह बहुत रोती थी। इस मामले में यह भी सामने आया कि हर्षिता ने अगस्त 2023 में पुलिस में घरेलू हिंसा की शिकायत की थी। इसके बाद पंकज लाम्बा को 3 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे बाद में जमानत मिल गई थी। इस मामले में घरेलू हिंसा रोकने का आदेश भी दिया गया था। हालांकि, पंकज लाम्बा की मां, सुनील देवी ने मीडिया से कहा कि वह विश्वास नहीं कर सकतीं कि उनका बेटा हर्षिता को मार सकता है। “मुझे कुछ नहीं पता, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि उसने ऐसा किया होगा,” उन्होंने कहा। हर्षिता बरेला की हत्या ने ब्रिटेन और भारत में घरेलू हिंसा के मामलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बरेला परिवार को न्याय का इंतजार है।

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने की पुष्टि, ‘अमेरिका सीरियाई विद्रोही समूह के संपर्क में’

वाशिंगटन. सीरिया में फैली अशांति को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शनिवार को पुष्टि की कि अमेरिका सीरियाई विद्रोही समूह हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के साथ संपर्क में है, जिसने बशर अल-असद के शासन को खत्म कर दमिश्क पर नियंत्रण स्थापित किया। ब्लिंकन ने यह भी कहा कि अमेरिका 2012 से लापता अमेरिकी पत्रकार ऑस्टिन टाइस को घर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि जॉर्डन में पत्रकारों से बात करते हुए ब्लिंकन ने कहा कि हम एचटीएस और अन्य दलों के संपर्क में हैं और हमने ऑस्टिन टाइस को खोजने और उसे घर लाने की महत्ता को सबके सामने रखा है। सीरिया के भविष्य पर साझा किए विचार अमेरिकी विदेश मंत्री बताया कि उन्होंने सीरिया के भविष्य और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा किए हैं। सीरिया से रूसी सेना की वापसी की रिपोर्टों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मीडिया रिपोर्टों को स्वीकार किया, लेकिन इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं दी। उन्होंने प्रशासन के अन्य अधिकारियों से इस बारे में पूछताछ करने का निर्देश दिया। पुनरुत्थान के खिलाफ संघर्ष के महत्व पर दिया जोर मध्य पूर्व के दौरे पर ब्लिंकन ने बगदाद में इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी से सीरिया के भविष्य पर चर्चा की। तुर्की में अपनी यात्रा के बाद ब्लिंकन बगदाद पहुंचे, जहां उन्होंने आईएसआईएल के पुनरुत्थान के खिलाफ संघर्ष के महत्व पर भी जोर दिया। इसके साथ ही तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान के साथ बैठक में उन्होंने सीरिया के नेतृत्व वाले संक्रमण के महत्व पर बात की। उन्होंने सीरिया के तानाशाही से लोकतंत्र में संक्रमण की आवश्यकता पर बल दिया, जो सभी अल्पसंख्यकों के लिए समावेशी और सुरक्षात्मक हो। ब्लिंकन ने यह भी कहा कि सीरिया को आतंकवाद का केंद्र नहीं बनना चाहिए और इराक के लिए इसे स्थिरता और सुरक्षा बढ़ाने का एक अवसर बताया। एक नजर सीरिया विद्रोह पर बता दें कि सीरियाई विद्रोही बलों ने हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व में दमिश्क पर कब्जा किया, जिसके बाद बशर अल-असद को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। हाल ही में, विपक्ष ने मोहम्मद अल-बशीर को अंतरिम प्रधानमंत्री घोषित किया, जिन्होंने विदेशों में रह रहे सीरियाई शरणार्थियों के वापसी को अपनी प्राथमिकता बताया।

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