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पूर्व SC जज ने बताया- बाबरी विवाद के फैसलों में सेकुलरिज्म के सिद्धांत के तहत न्याय नहीं दिया गया, कोई राम मंदिर नहीं मिला था

नई दिल्ली पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरएफ नरीमन ने बाबरी विवाद से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर अपनी असहमति जताते हुए कहा कि इन फैसलों में सेकुलरिज्म के सिद्धांत के तहत न्याय नहीं दिया गया। उन्होंने 2019 के ऐतिहासिक फैसले की भी आलोचना की, जिसमें विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण की अनुमति दी गई थी। जस्टिस नरीमन ने इसे ‘न्याय का बड़ा मजाक’ करार दिया और कहा कि इन फैसलों में सेकुलरिज्म को उचित स्थान नहीं दिया गया। जस्टिस नरीमन ने यह टिप्पणी “सेकुलरिज्म और भारतीय संविधान” विषय पर आयोजित प्रथम जस्टिस एएम अहमदी स्मृति व्याख्यान में की। उन्होंने बताया कि ‘खुद सुप्रीम कोर्ट ने ये बात मानी थी कि बाबरी मस्जिद के नीचे कोई राम मंदिर नहीं था।’ उन्होंने इस मामले से जुड़े पहले के फैसलों पर खुलकर बात की। लिब्रहान आयोग और राष्ट्रपति संदर्भ पर टिप्पणी रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नरीमन ने कहा, “”सबसे पहले सरकार ने लिब्रहान आयोग नियुक्त किया, जो निश्चित रूप से 17 वर्षों तक सोया रहा और फिर 2009 में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की। दूसरा, इसने अयोध्या अधिग्रहण क्षेत्र अधिनियम और साथ ही सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति संदर्भ दिया, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि मस्जिद के नीचे कोई हिंदू मंदिर था या नहीं।” उन्होंने इसे “भ्रामक और शरारतपूर्ण प्रयास” बताया। 1994 का इस्माइल फारूकी मामला उन्होंने इस्माइल फारूकी बनाम भारत सरकार (1994) के फैसले का जिक्र किया, जिसमें अयोध्या क्षेत्र अधिग्रहण अधिनियम, 1993 की वैधता और राष्ट्रपति संदर्भ पर सुनवाई हुई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 67 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को वैध ठहराया, लेकिन न्यायमूर्ति अहमदी ने असहमति जताते हुए कहा कि यह कानून सेकुलरिज्म के खिलाफ है। 2019 का राम जन्मभूमि फैसला जस्टिस नरीमन ने राम जन्मभूमि मामले (2019) में अंतिम फैसले का भी जिक्र किया। इसमें तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि अयोध्या में 2.77 एकड़ की पूरी विवादित भूमि राम मंदिर के निर्माण के लिए सौंप दी जानी चाहिए। साथ ही, सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक भूमि देने का आदेश दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि 1992 में मस्जिद का विध्वंस कानून का गंभीर उल्लंघन था। जस्टिस नरीमन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, “कोर्ट ने माना कि 1857 से 1949 तक मुसलमान वहां नमाज पढ़ते थे। लेकिन यह कहा गया कि वे इस स्थल पर ‘एकमात्र कब्जे’ का दावा नहीं कर सकते भले ही हिंदू पक्ष ने कई बार कानून के विपरीत कार्य किए हों। इसके बावजूद कोर्ट ने पूरा स्थल हिंदू पक्ष को सौंप दिया। यह न्याय का बड़ा मजाक है।” जस्टिस नरिमन ने इस फैसले को लेकर कहा, “मस्जिद का निर्माण 1528 में हुआ था और यह तब से एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में थी। लेकिन 1853 में पहली बार इसमें विवाद हुआ। जैसे ही ब्रिटिश साम्राज्य ने 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी से सत्ता ली, एक दीवार को अंदर और बाहर के आंगन के बीच खड़ा किया गया। इस दीवार के बाद, अंदर के आंगन में मुस्लिम नमाज पढ़ते थे और बाहर के आंगन में हिंदू। यह तथ्य दर्ज है कि 1857 से लेकर 1949 तक दोनों पक्षों की प्रार्थनाएं होती रही थीं। लेकिन 1949 में कुछ लोग मस्जिद में घुसकर मूर्तियां स्थापित कर गए, जिसके बाद मुस्लिमों की प्रार्थनाएं रुक गईं।” एएसआई रिपोर्ट और ऐतिहासिक संदर्भ उन्होंने 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तैयार रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट में विभिन्न धर्मों से संबंधित पुरावशेष पाए गए, जिनमें शैव, बौद्ध और जैन संस्कृतियों के चिन्ह भी थे। जस्टिस नरिमन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया था कि “कोई राम मंदिर बाबरी मस्जिद के नीचे नहीं था।” इसके बावजूद कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि मुस्लिमों के पास 1857 से 1949 तक के बीच विवादित स्थल पर “विशेष अधिकार” नहीं था, क्योंकि यह स्थान विवादित था। उन्होंने कहा, “कोर्ट ने माना कि इस स्थान पर हिंदू पक्ष ने कानून का उल्लंघन किया और इसलिए इस मामले में कोई एकतरफा दावा नहीं किया जा सकता था।” सेकुलरिज्म की अनदेखी पर नाराजगी जस्टिस नरीमन ने जोर देकर कहा, “हर बार हिंदू पक्ष ने कानून का उल्लंघन किया, लेकिन इसका परिणाम मस्जिद के पुनर्निर्माण के बजाय केवल वैकल्पिक भूमि देने के रूप में सामने आया। यह सेकुलरिज्म के साथ न्याय करने में असफलता है।” जस्टिस नरिमन ने इस बात पर जोर दिया कि हर बार जब कोई कानून का उल्लंघन हुआ, तो वह हिंदू पक्ष द्वारा हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या न्याय का सही पालन किया गया था? इस फैसले में किसी तरह से सेकुलरिज्म को सम्मान नहीं दिया गया, जो कि मेरी व्यक्तिगत राय में न्याय का एक बड़ा अपमान है।” उन्होंने यह भी कहा कि, “आखिरकार, जो ‘सुधार’ किया गया वह यह था कि मस्जिद को पुनर्निर्मित करने के बजाय सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए कुछ और भूमि दी गई।” उन्होंने बाबरी विध्वंस साजिश मामले का भी जिक्र किया, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया। इस पर उन्होंने कहा, “जिन न्यायाधीश ने यह फैसला दिया, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद उत्तर प्रदेश के उप-लोकायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। यह हमारे देश की स्थिति को दर्शाता है।”

केंद्र ने बताया- ई-श्रम पोर्टल पर 30.43 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक हैं रजिस्टर्ड

नई दिल्ली संसद को सूचित किया गया कि सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर 1 दिसंबर तक 30.43 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक रजिस्टर्ड हैं। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड ग्रामीण क्षेत्रों के अनौपचारिक श्रमिकों की संख्या 1 दिसबंर तक 27.22 करोड़ है। मंत्रालय ने आधार से जुड़े असंगठित श्रमिकों (एनडीयूडब्ल्यू) का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए 26 अगस्त, 2021 को ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया था। ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य असंगठित श्रमिकों को उनकी खुद की घोषणा के आधार पर एक यूनिवर्सल खाता संख्या (यूएएन) प्रदान कर उन्हें रजिस्टर और सपोर्ट करना है। ई-श्रम पर रजिस्ट्रेशन के लिए श्रमिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, असंगठित श्रमिकों को रजिस्ट्रेशन में मदद करने के लिए राज्य सेवा केंद्रों (एसएसके) और कॉमन सर्विस सेंटर की सेवाओं को शामिल किया गया है। श्रमिकों तक पहुंच बढ़ाने और उन्हें रजिस्ट्रेशन/अपडेट की सुविधा उनके मोबाइल फोन पर ही उपलब्ध करवाई जा रही है। उमंग ऐप पर ई-श्रम पोर्टल को शामिल किया गया है। अब तक, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 12 योजनाओं को पहले ही ई-श्रम पोर्टल के साथ इंटीग्रेट या मैप किया जा चुका है। केंद्रीय बजट 2024-25 के अनुसार, अन्य सरकारी वेबसाइटों के साथ ई-श्रम पोर्टल का इंटीग्रेशन ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ की सुविधा प्रदान करेगा। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने असंगठित श्रमिकों को जल्द से जल्द ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय , स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय आदि जैसे अन्य मंत्रालयों से भी संपर्क किया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा, “ई-श्रम-वन स्टॉप सॉल्यूशन असंगठित श्रमिकों तक विभिन्न सरकारी योजनाओं की निर्बाध पहुंच को लेकर सहायक होगा। इससे असंगठित श्रमिकों के लिए बनाई गई योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद मिलेगी, साथ ही छूटे हुए संभावित लाभार्थियों की पहचान करने में आसानी होगी।”  

इसरो वैज्ञानिक प्रमोद आर. नायर को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया

तिरुवनंतपुरम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक प्रमोद आर नायर को हाई एनर्जी मैटेरियल्स सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डीआरडीओ और इसरो के संयुक्त संगठन, हाई एनर्जी मैटेरियल्स सोसाइटी ऑफ इंडिया ने ‘एम.आर.’ कुरुप एंडोमेंट अवार्ड’ की स्थापना की है, जो उच्च ऊर्जा सामग्री (प्रणोदक और पायरो) के क्षेत्र में काम करने वाले युवा वैज्ञानिकों को मान्यता देता है। इसरो के अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने डीआरडीओ के महानिदेशक और वीएसएससी, एलपीएससी और आईआईएसयू के निदेशकों की उपस्थिति में पुरस्कार प्रदान किया। गौरतलब है कि एम.आर. कुरुप एक भारतीय रॉकेट वैज्ञानिक और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में भारत के पहले ठोस रॉकेट प्रणोदक संयंत्र के संस्थापक थे। उन्हें तिरुवनंतपुरम में वीएसएससी केंद्र के निदेशक के रूप में संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान (एएसएलवी) के सफल प्रक्षेपण में योगदान देने के लिए जाना जाता है। केरल के चेंगन्नूर के मूल निवासी श्री कुरुप ने इसरो के वीएसएससी से अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने वीएसएससी में महाप्रबंधक, उप निदेशक और रसायन, सामग्री और प्रणोदन इकाइयों के मुख्य कार्यकारी जैसे विभिन्न पदों पर काम किया, जहां उन्हें ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ काम करने का अवसर मिला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश में पहला ठोस रॉकेट प्रणोदन संयंत्र स्थापित किया। वह विक्रम साराभाई द्वारा पहले भारतीय उपग्रह प्रक्षेपण यान को डिजाइन करने के लिए चुनी गई टीम के सदस्य भी रहे हैं। वह 1990 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, ‘पद्म श्री’ से भी अलंकृत हैं।  

म्यांमार में भारत की सहायता से बदल रही लोगों की जिंदगी

म्यांमार म्यांमार के नाय पी ताव में शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया जिससे नागरिक बुनियादी ढांचे में सुधार होगा और म्यांमार के लोगों की जीवन की गुणवत्ता बेहतर होगी। इन परियोजनाओं का काम भारत की 50 लाख डॉलर की वार्षिक अनुदान सहायता से पूरा किया गया है। म्यांमार में भारत के राजदूत अभय ठाकुर ने देश के केंद्रीय सामाजिक कल्याण, राहत और पुनर्वास मंत्री डॉ. सो विन और सीमा मामलों के मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल तुन तुन नौंग के साथ मिलकर सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) और राखीन प्रांत विकास कार्यक्रम (आरएसडीपी) परियोजनाओं का उद्घाटन किया। म्यांमार में भारतीय दूतावास के अनुसार, उद्घाटन की गई परियोजनाएं चिन प्रांत और नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में स्थानीय लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण नई सामाजिक और आर्थिक सुविधाएं प्रदान करेंगी, जो उनकी भलाई के लिए फायदेमंद होंगी। चिन प्रांत में 16 सड़कों और पुलों के साथ एक शिक्षा केंद्र का निर्माण पूरा होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी तरह, नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में 19 सड़कों और पुलों और दो शिक्षा केंद्रों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। कुल मिलाकर, इन पहलों में 45 लाख अमेरिकी डॉलर की लागत से 38 गतिविधियां शामिल हैं, जो क्षेत्रीय विकास के लिए व्यापक प्रयास और प्रतिबद्धता को दिखाती हैं। इसके अलावा, महत्वपूर्ण परियोजनाओं में ग्वा टाउनशिप में जल आपूर्ति प्रणाली का निर्माण और मराउक यू टाउनशिप में भस्मक का काम पूरा होना शामिल है। भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि ये परियोजनाएं आवश्यक सेवाओं और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करती हैं। बीएडीपी और आरएसडीपी ढांचे के तहत, भारत सरकार प्रति वर्ष 50 लाख डॉलर की अनुदान सहायता प्रदान करती है, जैसा कि समझौता ज्ञापन (एमओयू) में तय किया गया है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य जल आपूर्ति, स्वास्थ्य देखभाल, बिजली, सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को सुधारना और लोगों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। सरकार ने पिछले साल यांगून क्षेत्र, नाय पी ताव, तनिनथारी क्षेत्र, सागांग क्षेत्र, मैगवे क्षेत्र और मांडले क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा, ई-लर्निंग और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में इसी तरह की पहल का समर्थन किया है। भारतीय दूतावास ने बताया, “यह साझेदारी सागांग क्षेत्र, चिन प्रांत और राखीन प्रांत जैसे सीमावर्ती इलाकों में समुदायों के विकास और सशक्तिकरण के लिए है। यह म्यांमार के लोगों के लिए सतत विकास और बेहतर जीवन स्थितियां सुनिश्चित करने के लिए दोनों सरकारों की प्रतिबद्धता को दिखाता है।” शुक्रवार का कार्यक्रम अक्टूबर में भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त पांच त्वरित प्रभाव परियोजनाओं (क्यूआईपी) के हस्ताक्षर समारोह के बाद हुआ। ये परियोजनाएं म्यांमार के विभिन्न क्षेत्रों में कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा, हथकरघा और आपदा जोखिम न्यूनीकरण क्षेत्रों में नागरिक बुनियादी ढांचे को सुधारने का काम करेंगी।

जन्म के समय लिंगानुपात में हुआ सुधार, 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया: केन्द्र सरकार

नई दिल्ली स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार देश में लिंगानुपात (एसआरबी)  2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया है। साथ ही, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई +) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल में लड़कियों का राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 79.4 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी। आपको बता दें, देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना 22 जनवरी, 2015 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर शुरू की गई थी। यह लिंग-पक्षपाती लिंग-चयनात्मक प्रथाओं को रोकने, बालिकाओं के अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करने और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। वहीं, योजना के प्रभाव का आकलन करने और प्रगति का मूल्यांकन करने के प्रमुख मानदंड जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में सुधार और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार एसआरबी 2014-15 में 918 से बढ़कर 2023-24 में 930 हो गया है। साथ ही, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई +) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर स्कूल में लड़कियों का राष्ट्रीय सकल नामांकन अनुपात 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2021-22 में ग्रामीण क्षेत्रों सहित 79.4 प्रतिशत हो गया है। इस तथ्य की पहचान करते हुए कि बीबीबीपी के तहत बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेपों के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस सहित गतिविधियों में कम भागीदारी वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए, मंत्रालय ने बीबीबीपी के लिए एक संचालन नियमावली जारी किया है। इसमें बालिकाओं, उनके परिवारों और समुदायों की साल भर की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विकसित जिलों के लिए एक विस्तृत और अच्छी तरह से सुझाया गया गतिविधि कैलेंडर शामिल है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के आधार पर धनराशि जारी की जा रही है, जिसने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की एकल नोडल एजेंसी (एसएनए) के लिए दिशा-निर्देश निर्धारित किए हैं। इसके अलावा, वर्ष 2020-21 के लिए एचएमआईएस डेटा के अनुसार जिलों की अलग-अलग एसआरबी स्थिति के आधार पर, बीबीबीपी के तहत धनराशि जारी करने के लिए तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं – जिन जिलों का एसआरबी 918 या उससे कम है, उन्हें प्रति वर्ष 40 लाख रुपये आवंटित किए जाते हैं। एसआरबी 919 से 952 वाले जिलों को 30 लाख रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। 952 से अधिक एसआरबी वाले जिलों को 20 लाख रुपये प्रति वर्ष आवंटित किए जाते हैं। गौरतलब हो, बीबीबीपी एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका मिशन शक्ति के संबल वर्टिकल के तहत देश के सभी जिलों में केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त पोषण किया जाता है। बावजूद इसके पश्चिम बंगाल सरकार बीबीबीपी को लागू नहीं कर रही है।  

एक निजी कंसल्टेंसी सेवा कंपनी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गई और उसे 1.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

मुंबई एक निजी कंसल्टेंसी सेवा कंपनी साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो गई और उसे 1.30 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह धोखाधड़ी तब सामने आई, जब कंपनी के चीफ अकाउंटेंट को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप पर मैसेज मिला, जिसमें खुद को कंपनी का प्रबंध निदेशक बताने वाले व्यक्ति ने पैसे ट्रांसफर करने का आदेश दिया। एफआईआर के मुताबिक, चीफ अकाउंटेंट ने पहले एक अज्ञात कॉल को काट दिया, जब कॉल पर उस व्यक्ति की आवाज़ नहीं सुनाई दी। इसके बाद, उन्हें एक मैसेज मिला, जिसमें लिखा था, “मैं तन्वी औती हूं, मेरा नेटवर्क सिग्नल खराब है, यह मेरा व्हाट्सएप नंबर है, कृपया इसे सेव कर लें।” चीफ अकाउंटेंट ने तन्वी औती का व्हाट्सएप प्रोफाइल देखा और यह मान लिया कि यह वही नंबर है, जो प्रबंध निदेशक का है। नकली प्रबंध निदेशक ने आगे बातचीत में कहा कि वह अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं, और सीएएफओ से कंपनी के खाता शेष का स्क्रीनशॉट लेने और उसे भेजने को कहा। इसके बाद, उन्होंने खाता संख्या देकर 1.30 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का आदेश दिया, जिसे चीफ अकाउंटेंट ने बिना किसी संकोच के पूरा कर दिया। घोटालेबाज ने अगले कुछ दिनों में अतिरिक्त 2 करोड़ रुपये की मांग भी की थी, लेकिन धोखाधड़ी का पता तब चला, जब 2 दिसंबर को सीएएफओ ने अपने असली प्रबंध निदेशक से संपर्क किया। उस वक्त तक पैसे ट्रांसफर हो चुके थे और धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। नवी मुंबई साइबर सेल ने आईपीसी और आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और मामले की जांच जारी है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक गजानंद कांबले के मुताबिक पैसे के स्रोत का पता लगाने के लिए पुलिस प्रयासरत है। यह घटना पहचान की चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को उजागर करती है, जिसमें हैकर्स अक्सर असली लोगों की पहचान का उपयोग कर धोखाधड़ी करते हैं।

मंत्रालयों के बंटवारे की फडणवीस ने बताई तारीख, एकनाथ शिंदे की तारीफ, उन्होंने इशारों में ही चिंता भी बढ़ा दी

मुंबई महाराष्ट्र के नए सीएम बने देवेंद्र फडणवीस ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि वह धैर्य से फैसले लेने वाले नेता हैं और अकसर सोच-समझकर ही कोई निर्णय लेते हैं। इसके अलावा उन्होंने लड़की बहिन योजना शुरू करने का क्रेडिट भी एकनाथ शिंदे को दिया। हालांकि होम मिनिस्ट्री की डिमांड कर रहे एकनाथ शिंदे की उन्होंने इशारों में ही चिंता भी बढ़ा दी। शपथ लेने के बाद दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय तो हमेशा ही हमारे पास रहा है। इस तरह देवेंद्र फडणवीस ने यह संकेत भी एकनाथ शिंदे को दे दिया कि भाजपा होम मिनिस्ट्री पर अपना दावा नहीं छोड़ेगी। बता दें कि एकनाथ शिंदे अब भी होम मिनिस्ट्री के लिए लॉबिंग में जुटे हैं। उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह के बाद भी अमित शाह से मुलाकात की थी। कहा जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने मंत्रालयों के बंटवारे में शिवसेना को महत्व देने की मांग की थी। ऐसे में फडणवीस की यह टिप्पणी अहम है कि गृह मंत्रालय हमेशा से भाजपा के पास ही रहा है। वह खुद एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम रहते हुए होम मिनिस्ट्री संभाल रहे थे। अब एकनाथ शिंदे का कहना है कि उसी फॉर्मूले के तहत यदि अब वह डिप्टी सीएम बन रहे हैं तो फिर होम मिनिस्ट्री उन्हें दे दी जाए। इसके साथ ही देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रालयों के बंटवारे की भी आखिरी तारीख बता दी है। उन्होंने कहा कि 16 दिसंबर तक मंत्रालयों का बंटवारा कर लिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि एकनाथ शिंदे, अजित पवार के साथ मिलकर हम लोग काफी चीजें तय कर चुके हैं। कोई मतभेद नहीं है और जल्दी ही फैसला ले लिया जाएगा। यही नहीं उन्होंने बीते ढाई साल चली सरकार के मंत्रियों को रिपीट करने के सवाल पर कहा कि पहले मूल्यांकन किया जाएगा। हम मूल्यांकन करने के बाद ही मंत्रियों को लेकर फैसला लेंगे। देवेंद्र फडणवीस ने दिए इंटरव्यू में अजित पवार की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि पश्चिम महाराष्ट्र ने साबित किया है कि वह शरद पवार की बजाय अजित पवार के साथ हैं। ईवीएम में गड़बड़ी के सवालों और कांग्रेस की ओर से यात्रा निकालने पर भी फडणवीस ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये लोग झारखंड और लोकसभा इलेक्शन में जीतते हैं तो ऐसा नहीं कहते, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा सवाल उठा रहे हैं। ऐसा तो नहीं चलेगा कि हारने पर सवाल उठाएं और जीतने पर चुप्पी साध लें। वहीं ब्राह्मण होते हुए भी सीएम बनाए जाने के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि जनता जाति की बात नहीं करती। यह तो नेताओं के दिमाग की उपज है। उन्होंने कहा कि हमें तो मराठा और ओबीसी सभी ने समर्थन दिया है। जाति की राजनीति लोग तभी शुरू करते हैं, जब कुछ और सफल नहीं होता।

सीमा पर अलर्ट, बांग्लादेश ने पश्चिम बंगाल के पास ड्रोन्स तैनात किए, भारत की जासूसी पर उतरा

ढाका बांग्लादेश से लगी भारत की सीमा पर अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि, इसे लेकर सेना की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन खबरें हैं कि बांग्लादेश की तरफ से ड्रोन्स की तैनाती की रिपोर्ट्स के बाद भारत भी हरकत में आ गया है। कहा जा रहा है कि ये ड्रोन्स तुर्की में बने हैं और बांग्लादेश खुफिया जानकारी जुटाने में इनका इस्तेमाल करता है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बांग्लादेश ने पश्चिम बंगाल के पास ड्रोन्स तैनात किए हैं। खास बात है कि यह घटना क्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब खबरें हैं कि बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद सीमा के आसपास आतंकवादी गतिविधियों में इजाफा हुआ है। फिलहाल, सेना की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि भारत की सीमा के पास बायरैक्टर टीबी2 UAV की तैनाती के बारे में सेना जानकारी जुटा रही है। कहा जा है कि इस संबंध में बांग्लादेश का कहना है कि सुरक्षा कारणों से इनकी तैनाती की गई है। इधर, संवेदनशील इलाकों में ड्रोन्स की तैनाती को लेकर भारत भी अलर्ट मोड पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया जानकारी है कि हसीना सरकार में कमजोर पड़े चरमपंथी तत्व एक बार फिर भारत से जुड़ी सीमा के पास सक्रिय हो रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि आतंकवादी समूह और तस्करी का नेटवर्क बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाकर भारत में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं। चैनल से बातचीत में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हसीना की सरकार गिरने के बाद सीमावर्ती इलाकों में भारत विरोधी तत्वों में बढ़त देखी गई है। राजनीतिक अस्थिरता और एडवांस UAV की तैनाती के चलते भारत की सीमाओं पर भारी निगरानी की जरूरत है।’ खास बात है कि बांग्लादेश ने इस साल ही Bayraktar TB2 हासिल किए थे। खबर है कि फिलहाल 12 में से 6 ड्रोन संचालित किए जा रहे हैं।

अब पाकिस्तान में सविनय अवज्ञा आंदोलन करने की दी चेतावनी, महात्मा गांधी की राह चले इमरान खान

इस्लामाबाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पिछले महीने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर जबरदस्त प्रदर्शन हुए। राजधानी कूच करने के ऐलान के बाद इमरान खान के समर्थकों को रोकने के लिए प्रशासन ने पूरा जोर लगा दिया। उग्र प्रदर्शन से घबराई सरकार ने सेना तक उतार दी थी। वहीं विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी। अब इमरान खान हिंसा छोड़कर दूसरे रास्तों की ओर रुख करते दिख रहे हैं। इमरान खान ने गुरुवार को जेल से एक संदेश जारी कर सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। गुरुवार को इमरान खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि देश में तानाशाही कायम हो गई है। इमरान खान ने अपने समर्थकों से 13 दिसंबर को खैबर पख्तूनख्वा की राजधानी पेशावर में जमा होने के लिए कहा है जहां फिलहाल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी की सरकार है। उन्होंने सरकार के सामने दो मांगे रखी हैं और कहा है कि अगर इन मांगों को नहीं माना गया तो वह नया आंदोलन शुरू करेंगे। इमरान खान ने लिखा, “देश में तानाशाही कायम हो गई है। निर्दोष राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गोली मार दी गई है और शांतिपूर्ण राजनीतिक कार्यकर्ता शहीद हो गए हैं। हमारे सैकड़ों कार्यकर्ता लापता हैं। सुप्रीम कोर्ट को अब इस पर संज्ञान लेना चाहिए और अपनी संवैधानिक भूमिका निभानी चाहिए। हमने मानवाधिकार के उल्लंघन के लिए सुप्रीम कोर्ट, लाहौर हाईकोर्ट और इस्लामाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन कोर्ट ने कोई कार्रवाई नहीं की गई और देश इस स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने आगे लिखा, “हम 13 दिसंबर को पेशावर में शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक भव्य सभा आयोजित करेंगे। इसमें विपक्षी राजनीतिक दलों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने विरोध प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने सभी गिरफ्तार कार्यकर्ताओं को रिहा करने की भी मांग की है। इमरान खान ने कहा, “अगर ये दोनों मांगें पूरी नहीं की गईं तो 14 दिसंबर से सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू होगा और किसी भी परिणाम के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।” गौरतलब है कि इमरान खान के पिछले साल के अंत से जेल में हैं। उनका और उनकी पार्टी का कहना है कि 2022 में पद से हटाए जाने से पहले सेना के जनरलों के साथ उनके मतभेद के बाद सेना के इशारे पर उन्हें राजनीति से दूर रखने के लिए झूठे मामले बनाए गए थे। हालांकि सेना ने इन आरोपों से इनकार किया है।

GDP growth को लगा बड़ा झटका! RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने GDP अनुमान को घटाकर किया 6.6 प्रतिशत

मुंबई  चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों के 5.4 प्रतिशत कर दर से बढ़ने के मद्देनजर आर्थिक विकास में आयी सुस्ती को ध्यान में रखकर भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से 0.6 प्रतिशत कम कर 6.6 प्रतिशत कर दिया और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के उद्देश्य से नकद आरक्षित अनुपात(सीआरआर) में 0.5 प्रतिशत की कटौती कर दी जिससे बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये आ गये। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय पांचवी द्विमासिक बैठक के समापन पर शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा “ एमपीसी ने नोट किया कि अक्टूबर नीति के बाद से भारत में निकट अवधि की मुद्रास्फीति और विकास परिणाम कुछ हद तक प्रतिकूल हो गए हैं। हालांकि, आगे चलकर, रिजर्व बैंक के सर्वेक्षणों में परिलक्षित व्यापार और उपभोक्ता भावनाओं में वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक गतिविधि में सुधार होने की संभावना है। मुद्रास्फीति में हाल ही में हुई वृद्धि मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और अपेक्षाओं पर कई और अतिव्यापी झटकों के निरंतर जोखिमों को उजागर करती है। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और वित्तीय बाजार में अस्थिरता ने मुद्रास्फीति के लिए और अधिक जोखिम बढ़ा दिया है। उच्च मुद्रास्फीति ग्रामीण और शहरी दोनों उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को कम करती है और निजी खपत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। एमपीसी ने जोर दिया कि उच्च विकास के लिए मजबूत नींव केवल टिकाऊ मूल्य स्थिरता के साथ ही सुरक्षित की जा सकती है। एमपीसी अर्थव्यवस्था के समग्र हित में मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, एमपीसी ने इस बैठक में नीति रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। एमपीसी ने मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख को जारी रखने का भी निर्णय लिया क्योंकि यह अवस्फीति और विकास पर प्रगति और दृष्टिकोण की निगरानी करने और उचित रूप से कार्य करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है। एमपीसी स्पष्ट रूप से लक्ष्य के साथ मुद्रास्फीति के टिकाऊ संरेखण पर केंद्रित है, जबकि विकास का समर्थन करता है।” उन्होंने कहा कि सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए 2024-25 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को पहले के 7.2 प्रतिशत से कम कर 6.6 प्रतिशत किया गया है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही 6.8 प्रतिशत और चौथी तिमाही 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना जतायी गयी है।। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि सीआरआर में आधी फीसदी की कटौती गयी है और अब यह 4 प्रतिशत पर आ गया है जिससे बैंकिंग तंत्र में 1.16 लाख करोड़ रुपये आ गये हैं। दास ने कहा “ जैसा कि हम 2025 की दहलीज पर खड़े हैं, मुझे 2024 की घटनापूर्ण यात्रा पर विचार करने दें। पिछले कुछ वर्षों में चलन के अनुरूप, केंद्रीय बैंकों को एक बार फिर निरंतर, विशाल और जटिल झटकों के खिलाफ अपनी अर्थव्यवस्थाओं को स्थिर करने के लिए अंतिम परीक्षण के दौर से गुजरना पड़ा। केंद्रीय बैंक लगातार भू-राजनीतिक संघर्षों, भू-आर्थिक विखंडन, वित्तीय बाजार में अस्थिरता और निरंतर अनिश्चितताओं द्वारा निर्मित नए वैश्विक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य के अनुकूल हो रहे हैं, जो सभी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लचीलेपन का परीक्षण कर रहे हैं। उन्नत और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) दोनों के लिए मुद्रास्फीति की अंतिम मील लंबी और कठिन होती जा रही है। व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना और बफर बनाना ईएमई के लिए दिशा-निर्देश बने हुए हैं। भारत में, विकास और मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र में हाल के विचलन के बावजूद, अर्थव्यवस्था प्रगति की ओर एक निरंतर और संतुलित पथ पर अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए स्वरूप के बीच, भारत उभरते रुझानों से लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है क्योंकि यह एक परिवर्तनकारी यात्रा पर आगे बढ़ रहा है।” रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने विकास की गति में हाल की मंदी पर ध्यान दिया, जो चालू वर्ष के लिए विकास पूर्वानुमान में कमी के रूप में सामने आती है। इस वर्ष की दूसरी छमाही और अगले वर्ष की ओर बढ़ते हुए, एमपीसी ने विकास के दृष्टिकोण को लचीला माना, लेकिन इस पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है। दूसरी ओर, मुद्रास्फीति अक्टूबर में 6.0 प्रतिशत के ऊपरी सहनीय बैंड से ऊपर बढ़ गई, जो खाद्य मुद्रास्फीति में तेज उछाल से प्रेरित थी। खाद्य मुद्रास्फीति का दबाव इस वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में बना रहने की संभावना है और केवल 2024-25 की चौथी तिमाही से कम होना शुरू होगा, जिसे सब्जियों की कीमतों में मौसमी सुधार, खरीफ की फसल की आवक, संभावित रूप से अच्छे रबी उत्पादन और पर्याप्त अनाज बफर स्टॉक का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उच्च मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं के हाथों में उपलब्ध व्यय योग्य आय को कम करती है और निजी खपत को प्रभावित करती है, जो वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। प्रतिकूल मौसम की घटनाओं की बढ़ती घटनाएं, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और वित्तीय बाजार में अस्थिरता मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा करती हैं। एमपीसी का मानना ​​है कि केवल टिकाऊ मूल्य स्थिरता के साथ ही उच्च विकास के लिए मजबूत नींव सुरक्षित की जा सकती है। एमपीसी अर्थव्यवस्था के समग्र हित में मुद्रास्फीति वृद्धि संतुलन को बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। तदनुसार, एमपीसी ने इस बैठक में नीति रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने और मौद्रिक नीति के तटस्थ रुख को जारी रखने का फैसला किया क्योंकि यह मुद्रास्फीति और विकास पर दृष्टिकोण की निगरानी और आकलन करने और उचित रूप से कार्य करने के लिए लचीलापन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने कई प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद 2024 में असामान्य लचीलापन दिखाया है। मुद्रास्फीति धीरे-धीरे अपने बहु-दशकीय उच्च स्तर से लक्ष्य की ओर बढ़ रही है, जिससे कई केंद्रीय बैंक नीतिगत बदलाव करने लगे हैं। वैश्विक व्यापार लचीला बना हुआ है और इसकी मात्रा भू-राजनीतिक ब्लॉकों तक सीमित है। पिछली एमपीसी बैठक के बाद से, बढ़ते अमेरिकी डॉलर और सख्त बॉन्ड यील्ड के बीच वित्तीय बाजार अस्थिर बने हुए … Read more

मुसलमान के घर में नमाज पढ़ने के विरोध में हनुमान चालीसा पाठ की धमकी दी, उत्तराखंड में पनपा नया विवाद

टिहरी उत्तराखंड के टिहरी जिले में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में एक मुस्लिम के घर में नमाजियों के एकत्रित होने और सामूहिक नमाज पढ़े जाने पर हिंदूवादी संगठनों ने हंगामा खड़ा कर दिया है। उन्होंने धमकी दी कि वह उस घर में शुक्रवार को हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। धमकी देते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में एक घर के परिसर में नमाज पढ़ने के विरोध में बजरंग दल, विहिप और राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन ने हनुमान चालीसा पाठ की धमकी दी है। गुरुवार को स्थानीय प्रशासन ने मामले को सुझलाने का प्रयास किया, लेकिन संगठन अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। दरअसल, नरेंद्रनगर में मंगलवार को एक घर के परिसर में खुले में नमाज पढ़ी गई। इसमें दूसरे स्थानों से भी बुलाकर लोगों को शामिल करने का आरोप है। इसे लेकर कुछ संगठनों ने विरोध जताया। मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव बढ़ता देख गुरुवार को नरेंद्रनगर के एसडीएम देवेंद्र सिंह नेगी ने बैठक की। इसमें घर के परिसर में नमाज पढ़ने वाले परिवार को बुलाया गया और उन्हें इस बाबत समझाया गया। एसडीएम ने बताया कि परिवार ने भरोसा दिया है कि वह बाहर के लोगों को बुलाकर कोई धार्मिक गतिविधि नहीं करेंगे। एसडीएम ने बताया कि हनुमान चालीसा का पाठ करने की चेतावनी देने वाले संगठनों के लोगों से भी वार्ता की जा रही है। वहीं बजरंग दल के पदाधिकारी नरेश उनियाल ने कहा कि शुक्रवार को हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा। सोशल मीडिया पर घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें कुछ लोग उस मुस्लिम परिवार के साथ बहस करते दिख रहे हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के चलते भारत से दुश्मनी करने पर उतारू, अब वापस बुला लिए दो डिप्लोमैट

ढाका बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार हटने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद ही भारत के साथ रिश्ते बिगड़ते ही जा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह है बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार। साफ दिखाई देता है कि ना केवल बांग्लादेश की सरकार बल्कि कोर्ट भी हिंदुओं के खिलाफ साठगांठ कर रहा है। वहीं भारत की सख्ती पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का दिखावा करता है। अब बांग्लादेश ने एक और ऐसा कदम उठाया है जिससे उसका चीन और पाकिस्तान प्रेम छिपा नहीं रहा। बांग्लादेश ने भारत से अपने दो डिप्लोमैट्स को वापस बुला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक  बांग्लादेश ने कोलकाता में उसके उप उच्चायुक्त शिकदार मोहम्मद अशफरुल रहमान और अगरतला में असिस्टेंट हाई कमिश्नर आरिफ मोहम्मद को वापस बुला लिया है। बता दें कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और पुजारियों की गिरफ्तारी के बाद भारत के लोगों में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। हाल ही में त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश के राजनयिक मिशन में तोड़फोड़ की घटना हुई थी। इसके बाद सरकार ने कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। वहीं सात लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद बांग्लादेश ने विरोध किया और अगलतला में काउंसलर सर्विस बंद करने का ऐलान कर दिया। अब उसने अपने डिप्लोमैट को भी ढाका वापस बुला लिया है। कोलकाता में बांग्लादेश के उप उच्चायोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘‘कोलकाता में हमारे कार्यालय के बाहर जारी विरोध प्रदर्शनों के बाद अशरफुर रहमान को बातचीत के लिए तत्काल बुलाया गया है। इसके अलावा, वह अगले सप्ताह दोनों देशों के बीच होने वाली विदेश सचिव स्तर की वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। वह इस महीने के मध्य तक वापस आ जाएंगे।’’ बता दें कि पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा दोनों की ही सीमाएं बांग्लादेश के साथ लगी हुई हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बांग्लादेशी सरकार ने कहा है कि उसके दो डिप्लोमैट आगे के निर्देशों तक ढाका में रहकर ही काम करेंगे। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कई नेता भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। हाल ही में पार्टी के नेता रुहुल कबीर रिजवी ने अपनी पत्नी की भारतीय साड़ी को जलाकर विरोध किया था। इसके अलावा उन्होंने भारतीय प्रोडक्ट्स के बायकॉट की भी अपील की थी। त्रिपुरा में स्थानीय लोगों के आक्रोश के चलते कथित तौर पर बांग्लादेशी झंडे का अपमान हुआ था। इसके बाद भारत ने जिम्मेदार लोगों पर कड़ा एक्शन लिया है। गिरफ्तारी के खिलाफ झारखंड में विभिन्न हिंदू संगठनों ने गुरुवार को भी रैलियां निकालीं और प्रदर्शन किए। रांची में, विभिन्न हिंदू और सामाजिक संगठनों के सदस्य मोराबादी मैदान में बापू वाटिका पर एकत्र हुए, जहां प्रमुख नेताओं ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। सनातन सरना समाज के राकेश लाल ने कहा कि सर्व सनातन समाज और उससे जुड़े समूह बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसानों ने मांगो को लेकर फिर से मोर्चा थामा, अंबाला के शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में हरियाणा सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती की है

अंबाला/नई दिल्ली कर्ज माफ करने और एमएसपी की लीगल गारंटी की मांग के लिए किसानों ने फिर से मोर्चा थाम लिया है। किसान संगठनों ने आज से दिल्ली कूच का ऐलान किया था, जिसे देखते हुए अंबाला के शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में हरियाणा सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती की है। यही नहीं हालात ऐसे हैं कि दिल्ली पुलिस भी अलर्ट पर है और शंभू बॉर्डर के हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि हम बॉर्डर पर अलर्ट हैं। यदि आंदोलनकारी वहां से निकले तो फिर यहां सीमा पर ही रोकने के लिए उन्हें पूरे इंतजाम किए गए हैं। फिलहाल शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है। यह बॉर्डर पहले ही बीते कई महीनों से बंद है और इसके चलते रूट भी डायवर्ट करना पड़ा है। इस साल फरवरी से ही यहां किसान संगठनों और पुलिस के बीच मोर्चेबंदी की स्थिति बनी हुई है। यहां पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की है और कंटीले तार भी लगाए गए हैं ताकि किसान उसे पार करके हरियाणा की सीमा में दाखिल न हो सकें। वहां पर पानी की बैछारों और बड़े-बड़े पत्थर वाली बैरिकेडिंग्स की भी व्यवस्था की गई है। अंबाला रेंज के आईजी सिबाश कबिराज और एसपी सुरिंदर सिंह भोरिया ने एक बार फिर से शंभू बॉर्डर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया है। भोरिया ने कहा कि हमने किसानों को रोकने के लिए पूरे इंतजाम किए हैं। हम उनसे अपील कर रहे हैं कि कानून व्यवस्था को बनाए रखा जाए। हमारा साफ कहना है कि यदि आप दिल्ली पुलिस से मार्च की परमिशन ले लें तो फिर जाने दिया जाएगा। बता दें कि किसान संगठनों ने ऐलान किया था कि वे 6 दिसंबर से संसद चलो मार्च निकालेंगे। इसके तहत वे दिल्ली पहुंचकर संसद का घेराव करना चाहते हैं। किसान अंबाला में, फिर भी क्यों अलर्ट पर है दिल्ली की पुलिस दिल्ली पुलिस ने पंजाब के किसान संगठनों के ऐलान के मद्देनजर बॉर्डर पर पहले ही अलर्ट जारी कर रखा है। दिल्ली पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि सीमा चौकियों पर सुरक्षा टाइट है। सिंघू बॉर्डर पर अच्छी संख्या में बल तैनात है। पंजाब और हरियाणा बॉर्डर के हालात को देखते हुए सुरक्षा में इजाफा भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान दिल्ली की ओर बढ़े तो इंतजाम बढ़ाए जा सकते हैं और इससे ट्रैफिक भी प्रभावित होगा। यही नहीं दिल्ली पुलिस की नजर नोएडा बॉर्डर पर भी है क्योंकि यूपी के किसान संगठनों ने भी इसी सप्ताह प्रदर्शन किया था और बड़ी मुश्किल से माने थे।

मतपत्रों से माँक मतदान- मार्करबाड़ी गांव के नागरिकों की पहल के संदेश

डा. गिरीश महाराष्ट्र के जनपद शोलापुर का छोटा सा गांव मार्करबाड़ी अचानक सुर्खियों में आगया है। मीडिया से लेकर राजनैतिक हल्कों में उसकी चर्चा सुनायी पड़ रही है। वह इसलिए नहीं कि गांव में कोई संगीन वारदात अथवा घटना घट गयी थी। अपितु इसलिये कि गांव के लोगों ने बड़ी ही खामोशी से, अपने एक गांधीवादी कदम से लोकतन्त्र के आधारों को नयी मजबूती प्रदान की है। वह भी उस दौर में जब सत्ता प्रतिष्ठान और उस पर काबिज भाजपा और आरएसएस द्वारा लोकतन्त्र पर चहुंतरफा हमले बोले जा रहे हैं। भाजपा और उसके अधीन शासकीय मशीनरी द्वारा निर्वाचन आयोग की पक्षधरता का लाभ उठाते हुये निर्वाचन प्रक्रिया को अकल्पनीय क्षति पहुंचाई जा रही है। ईवीएम मशीन में गड़बड़ी और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने को भांति- भांति की हेराफेरी की अनगिनत खबरें मिलती रहती हैं। ऐसी ही एक खबर महाराष्ट्र की मालशिरस विधान सभा सीट से आयी। महाराष्ट्र विधान सभा की अन्य सीटों के साथ इस सीट पर भी इसी  20 नवंबर को मतदान हुआ था और 23 नवंबर को चुनाव परिणाम आया था। एनसीपी (शरद पवार) के प्रत्याशी उत्तम राव जानकर ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी  राम सतपुते को 13147 वोटों से हराया है। लेकिन जानकर  जिनकी कि लोकप्रियता असंदिग्ध है, को अपने ही गांव मार्करबाड़ी में भाजपा प्रत्याशी से कम वोट मिले। एनसीपी प्रत्याशी जानकर को अपने ही गांव में 843 वोट मिले हैं जबकि भाजपा प्रत्याशी को वहाँ 1003 वोट मिले। गांव के तीन मतदान केन्द्रों पर लगभग दो हजार वोट हैं जिनमें से लगभग 1900 वोट पड़े थे। बताया जाता है कि इस गांव में भाजपा के दो सौ से भी कम वोट हैं। विजयी प्रत्याशी जानकर को पराजित भाजपा प्रत्याशी से यहाँ  कम मत मिलने से गांववासियों का माथा ठनक गया। उन्हें ईवीएम पर शक था, जो और गहरा गया। अपने इस शक को मिटाने को उन्होने जो उपाय सोचा वह आज तक न तो किसी राजनेता के मस्तिष्क में आया न ही किसी ख्यातिलब्ध तकनीशियन के। अपने शक को मिटाने को गांववासियों ने बैलट पत्र से माँक वोटिंग कराने का निश्चय किया। इसके लिये उन्होने समूचे गांव को मतदान के लिये तैयार किया। मतदान का खर्च जुटाने को आपस में चन्दा किया। मतदान के जगह जगह पोस्टर लगाये गये। 3 दिसंबर को सुबह 8: 00 बजे से वोटिंग होना तय था। प्रशासन से इसकी अनुमति भी मांगी गयी। लेकिन प्रशासन ने इसे गैर कानूनी करार देकर अनुमति हेतु आवेदन को रद्द कर दिया। यद्यपि यह अनौपचारिक मतदान था, वास्तविक नहीं। गांव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने वाले मुट्ठी भर लोग मतदान रूपी इस कदम का मुखर विरोध कर रहे थे।   बैलट से रीपोलिंग कराके गांव वाले ईवीएम से हुये मतदान में घोषित मतों से इनकी तुलना करना चाहते थे। दोनों के मत टैली कर यह तय होना था कि ईवीएम से वोट मैनेज हुये थे। लेकिन बौखलाए प्रशासन द्वारा 3 दिसंबर,  मंगलवार को सुबह ही गांव की सड़कें बन्द कर दी गयीं। चेतावनी दी गयी कि वोटिंग करने वालों पर मामले दर्ज किए जायेंगे और मतदान सामग्री जब्त कर ली जायेगी। कुछ लोग तैयार किए गए मतदान पंडाल में वोटिंग करने गये तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। शेष को बलपूर्वक खदेड़ दिया गया। इतना ही नहीं प्रशासन ने गांव में 5 दिसंबर तक के लिये धारा 163 (पूर्व की धारा 144) लगा दी जिसके तहत 5 से अधिक लोग एक जगह इकट्ठे नहीं हो सकते। सवाल यह है कि भारतीय जनता पार्टी के नेत्रत्व वाली महाराष्ट्र की कार्यवाहक महायुति सरकार मतपत्रों द्वारा होने वाली इस गैर सरकारी रीपोलिंग से इतनी भयभीत क्यों हो गयी? क्या उसे यह भय सता रहा था कि इससे उनके द्वारा चुनावों में की जाने वाली हेरा फेरी और उसका मुख्य औज़ार बनी ईवीएम की कलई खुल जायेगी। वरना इतना भय क्यों? इतनी सख्ती क्यों? क्या उन्हें भय था कि मतपत्रों से पोलिंग के परिणाम यदि वैसे ही आये जैसा कि गांववाले दावा कर रहे हैं तो इससे महाराष्ट्र विधान सभा के 23 नवंबर को आये नतीजों पर प्रश्नचिन्ह लग जायेगा और उनकी सारी खुशियाँ काफ़ूर हो जायेंगी। हाल के महाराष्ट्र विधान सभा चुनावों में महायुति ने राज्य की 288 सीटों में से 230 सीटें जीती हैं। इसमें भाजपा 132 सीटें, शिवसेना 57 और अजित पवार की एनसीपी 41 सीटों पर विजयी हुयी है। महा विकास अघाड़ी को सिर्फ 46 सीटें मिली हैं। तो क्या मार्करबाड़ी गांव के मतपत्रों से निकलने वाले परिणाम महाराष्ट्र विधानसभा के समूचे चुनाव परिणामों पर सवालिया निशान नहीं लगा देते? इन परिणामों से डरी कार्यवाहक महायुति सरकार ने अनौपचारिक मतदान को बलपूर्वक रुकवा दिया। पर इस पाबंदी से बात रुकने वाली नहीं। अकोला  और वर्धा में कुछ जगहों पर जनता द्वारा मतपत्रों के द्वारा  ऐसे माँक मतदान कराये जाने की खबरें आ रही हैं। लेकिन अब बात शायद महाराष्ट्र तक सीमित रहने वाली नहीं। लोकसभा चुनावों के दौरान भाजपा पर चुनावों में धांधली के कई आरोप लगे थे, पर निर्वाचन आयोग की पक्षधरता के चलते वे दब गये। हरियाणा विधान सभा चुनाव जिन्हें वे एक प्रतिशत से भी कम वोटों से जीते हैं, मैं भी उन पर ईवीएम में हेराफेरी और मतदान से मतगणना तक में धांधली के आरोप लगे थे। उत्तर प्रदेश जहां कि लोकसभा चुनावों में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा, विधानसभा उपचुनावों में भाजपा की 9 में से 7 सीटों पर जीत अनेक सवाल खड़े करती है। खास कर कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र की जीत जहां अल्पसंख्यक मतदाता बहुत बड़ी संख्या में हैं और भाजपा लगातार हारती रही है। मार्करबाड़ी गांव की मतपेटियों से बाहर आने वाले परिणामों की धमक दूर दूर तक फैल चुकी है और देश ही नहीं दुनियां भर में भाजपा द्वारा लोकशाही से की जा रही खिलवाड़ की कलई खुल चुकी है। इसी डर से भाजपा महाराष्ट्र की जीत का जश्न तक नहीं मना पा रही। सामंती काल में जब शासकों पर असीम अधिकार थे, तब भी शासकों के खिलाफ नाटक एवं प्रहसन  आदि का मंचन कर जनता को जाग्रत किया जाता था। संस्कृत भाषा में महाकवि शूद्रक द्वारा रचित नाटक- मृच्छकटिकम ( मिट्टी की गाड़ी ) में तो उस समय के राज दरबार में व्याप्त भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद पर गहरी चोट है। पर शासकों ने न तो इसे प्रतिबंधित किया नहीं इसका मंचन रोका। यह आज तक जारी है। पर हेराफेरी से वोट हासिल कर सत्ता शिखर तक पहुंची भाजपा को नाटकीय मतदान तक  कबूल नहीं। भाजपा का डर तो समझ में आता है, पर पूरे प्रकरण पर भारी भरकम विपक्षी दलों की चुप्पी रहस्यमय है। संसद में कोई सवाल तक … Read more

“अगले पांच वर्षों में सभी रेल ज़ोन में इस नई प्रणाली को लागू करने का लक्ष्य”: रेल मंत्री

“हाई-टेक रेल-कम-रोड निरीक्षण वाहन और अत्याधुनिक रेलवे ट्रैक हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम से भारत में सुरक्षित हो रही रेल यात्रा”: रेल मंत्री “नई तकनीक से कार्यशैली में बदलाव के द्वारा ट्रैकमैन का बेहतर हो रहा है जीवन”: रेल मंत्री “अगले पांच वर्षों में सभी रेल ज़ोन में इस नई प्रणाली को लागू करने का लक्ष्य”: रेल मंत्री “हर चार महीने में होने वाले इस रखरखाव को रेलवे अब हर दो महीने में करने का रख रहा है लक्ष्य”: रेल मंत्री नई दिल्ली रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम (ITMS) और रोड सह रेल निरीक्षण वाहन (RCRIV) का अवलोकन किया। यह अत्याधुनिक प्रणाली भारतीय रेलवे की ट्रैक सुरक्षा और संचालन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।   उन्होंने  इस मौके पर पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा, कि RCRIV  ने हमारे ट्रैकमैन, गैंगमैन, कीमैन और पीडब्ल्यूआई (स्थायी पथ निरीक्षक) के कार्य करने के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों से न केवल सुरक्षा में सुधार होगा बल्कि उनके कामकाज और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। आने वाले पांच वर्षों में सभी रेल ज़ोन में इस नई प्रणाली को लागू करने का लक्ष्य है। यह विशेष रूप से ट्रैक निरीक्षण और रखरखाव के आधुनिकीकरण में रेलवे विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। यह तकनीकी प्रणाली न केवल ट्रेक की निगरानी और माप करने में मदद करेगी, बल्कि रेलवे संचालन को भी और अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाएगी। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली प्रत्येक रेलवे जोन में उपलब्ध कराई जाएगी। रेलवे का लक्ष्य है कि हर चार महीने में होने वाले इस रखरखाव को अब हर दो महीने में किया जाए। यह नवीन टेक्नोलॉजी भारतीय रेल से हर  रोज यात्रा करनेवाले लगभग 2.3 करोड़ यात्रियों की सुरक्षा में बढ़ोतरी करेगी। ITMS और इसका कार्य इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम (ITMS) एक उच्च-प्रदर्शन प्रणाली है, जो ट्रैक की निगरानी, माप और सुरक्षा के लिए नवीनतम तकनीकों का इस्तेमाल करती है। ITMS ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (टीआरसी) पर स्थापित है, जो 20 से 200 किमी प्रति घंटे की गति से ट्रैक का विश्लेषण कर सकता है। इसमें लेजर सेंसर, हाई-स्पीड कैमरे, GPS और अन्य सेंसर शामिल होते हैं, जो ट्रैक की स्थिति और संभावित दोषों का पता लगाते हैं। प्रमुख विशेषताएँ त्वरण माप: ITMS प्रणाली में एक्सेलेरोमीटर का उपयोग किया जाता है, जो कोच और एक्सल बॉक्स पर त्वरण (acceleration) को मापता है। यह सिस्टम सवारी की गुणवत्ता की निगरानी करता है और ऐसे स्थानों की पहचान करता है जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता होती है। उल्लंघन माप प्रणाली: यह प्रणाली LiDAR तकनीक का उपयोग करती है, जिससे किसी भी ट्रैक उल्लंघन  (infringement) या बाधा का तुरंत पता लगाया जा सकता है। यह रेलवे ट्रैक के आसपास की सुरक्षा को और भी मजबूत बनाता है। RCRIV की विशेषताएँ रोड सह रेल निरीक्षण वाहन(RCRIV)  टाटा योद्धा मॉडल से रूपांतरित करके बनाया गया है, जिसमे आगे 250 mm के दो लोहे के पहिए और पीछे 750 mm के दो लोहे के पहिए जुड़े है,  जो कि इस गाड़ी को सड़क के साथ-साथ रेलवे ट्रेक पर चलने में सक्षम बनाता है ।  इसमें 3 कैमरे है जो 15 दिन के बैकअप के साथ ट्रेक का रेकॉर्डिंग करेंगे ।

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