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फ्लाइंग फेस्टिवल में स्पॉट लैंडिंग पैराग्लाइडिंग चैम्पियनशिप में विदेशियाें सहित 50 पायलट लेंगे भाग

शिमला शिमला फ्लाइंग फेस्टिवल और हॉस्पिटैलिटी एक्सपो 2024 के द्वितीय संस्करण का उद्घाटन आज बुधवार काे जुन्गा में स्थित द ग्लाइड इन में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल करेंगे। इसका आयोजन पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन शिमला, एमएसएमई मंत्रालय और राज्य का उद्योग विभाग संयुक्त से रूप से करेंगे। एक्सपाे के आयोजक अरुण रावत ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाना है ताकि शिमला और इसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। उन्हाेंने बताया कि फेस्टिवल की एक प्रमुख विशेषता स्पॉट लैंडिंग पैराग्लाइडिंग चैम्पियनशिप होगी, जिसमें भारत और विदेशों से 50 से अधिक पायलट भाग लेंगे। ये पायलट सोलो और टीम श्रेणियों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। इसके विजेताओं को पांच लाख रुपये के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। सोलो श्रेणी का प्रथम पुरस्कार 2.25 लाख रुपये है। उन्हाेंने बताया कि इस फेस्टिवल में 40 से अधिक प्रदर्शकों की एक प्रदर्शनी भी लगेगी, जिसमें लगभग 20 स्टार्टअप्स शामिल होंगे। इसके बाद, स्टार्टअप पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार 18 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम की ओर से होमस्टे मालिकों और एडवेंचर व तीर्थयात्रा गाइडों के लिए योग्यता मानकों पर एक सम्मेलन और कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रसिद्ध डब्ल्यूडब्लयूइ रेसलर द ग्रेट खली 18 अक्टूबर को शामिल होंगे, जो युवाओं को एडवेंचर स्पोर्ट्स को वैकल्पिक करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। उसी दिन ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का समापन 19 अक्टूबर को हाेगा, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान और विधायक (भोरंज) सुरेश कुमार उपस्थित रहेंगे।    

चारधाम यात्रा अब अंतिम चरण में अब तक 40 लाख से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे चारधाम

देहरादून  हरी-भरी वादियां, ऊंचे-ऊंचे पहाड़, सीढ़ीनुमा-घुमावदार सड़कें, हिमालय व हिल स्टेशन समेत देवभूमि का प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों पर्यटकों को खूब लुभा रहा है। मई से शुरू हुई राज्य की चारधाम यात्रा इस वर्ष अब तक तीर्थयात्रियों का आंकड़ा 40 लाख पार कर चुका है। राज्य में अब तक चार लाख 80 हजार 788 वाहन भी चारधाम पहुंच चुके हैं। अभी भी बड़ी संख्या में तीर्थयात्री चारधाम यात्रा पर देवभूमि पहुंच रहे हैं। दरअसल, इस वर्ष की चारधाम यात्रा अब अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में सभी धाम छह माह के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसे में हरिद्वार से लेकर उच्च हिमालय तक आस्था पथ गुलजार है। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की आर्थिकी की लाइफलाइन है। चारधाम यात्रा से हजारों परिवारों को काफी आस होती है। उत्तराखंड समेत आसपास के राज्यों के अलावा नेपाल के नागरिक भी चारधाम यात्रा के सहारे गुजर-बसर करने देवभूमि आते हैं। इस वर्ष 31 जुलाई की आपदा भी आस्था की डगर पर श्रद्धालुओं के पांव रोक नहीं पाई। इस वर्ष अब तक 40 लाख 92 हजार 360 तीर्थयात्री सुरक्षित धार्मिक यात्रा कर चारों धामों में शीश नवा चुके हैं। इस दौरान सबसे अधिक यात्री केदारनाथधाम में मंगलवार तक 13 लाख 67 हजार 567 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। बद्रीनाथ धाम में 11 लाख 18 हजार 348 व गंगोत्री धाम में सात लाख 53 हजार 397 तो यमुनोत्री धाम में अब तक छह लाख 60 हजार 333 तीर्थयात्रियों ने हाजिरी लगा चुके हैं। साथ ही हेमकुंड साहिब दरबार में एक लाख 83 हजार 722 व गौमुख में अब तक 8993 भक्त मत्था टेक चुके हैं। वहीं, अभी भी तीर्थयात्रियों का केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचने का सिलसिला जारी है। अकेले केदारनाथ धाम में प्रतिदिन 10 हजार के पार तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं। विश्व फलक पर अतिथि देवो भव: का संदेश देती चारधाम यात्रा शक्ति-भक्ति से लबरेज पुष्कर सिंह धामी की सरकार सुरक्षित धार्मिक यात्रा को लेकर प्रतिबद्ध है। ऐसे में चारधाम यात्रा विश्व फलक पर अतिथि देवो भव: का संदेश दे रही है। यह संभव हो पाया है सरकार और प्रशासन के समन्वय से। मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित यात्रा कराना राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित और मजबूत करने लिए यात्रा प्राधिकरण बनाया जा रहा है। इसके लिए चारधाम यात्रा एवं इससे जुड़े लोगों और स्टेक होल्डर्स के सुझाव लिए जा रहे हैं।      

उपराष्ट्रपति का मेघालय दौरा, 16 और 17 अक्टूबर को शिलांग और सोहरा की ओर जाने पर रोक लगायी गयी

शिलांग उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 16-17 अक्टूबर को दो दिवसीय दौरे पर मेघालय आ रहे हैं। उपराष्ट्रपति की यात्रा के मद्देनजर शिलांग ट्रैफिक पुलिस ने गणमान्य व्यक्तियों की सुरक्षित और सुचारू यात्रा और आम जनता की सुविधा के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। यातायात पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक या जरूरी काम को छोड़कर शिलांग और आसपास के इलाकों की यात्रा करने से बचने को कहा है। निर्देश में यातायात पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा कि आवश्यक मालवाहक वाहन, गैस सिलेंडर परिवहन वाहन, तेल टैंकर, एफसीआई ट्रक, स्थानीय मिनी ट्रक सहित सभी प्रकार के भारी और मध्यम मोटर वाहनों को 16 और 17 अक्टूबर को शिलांग और सोहरा की ओर जाने पर रोक लगायी गयी है। ट्रैफिक पुलिस ने 16 अक्टूबर को ट्रैफिक दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है वाहनों को वाईडब्ल्यूसीए गुरुद्वारा जंक्शन से राजभवन के रास्ते में आकाशवाणी जंक्शन पर डायवर्ट किया जाएगा। ये दिशा-निर्देश शाम 5 बजे से कार्यक्रम समाप्ति तक लागू रहेगा। वाईडब्ल्यूसीए से गुरुद्वारा जंक्शन: वाहनों को आकाशवाणी जंक्शन की ओर मोड़ दिया जाएगा। यह निर्देश आईजीपी पॉइंट की ओर जाने वाले सभी वाहनों के लिए शाम 5 बजे से कार्यक्रम के अंत तक लागू रहेगा। गोल्फलिंक्स, पाइनथरबाह, बीडीडब्ल्यू स्कूल लाइलाद नोंगमेनसोंग: दोपहर 2:30 बजे के बाद वाहनों को पाइन्तर बाजार-जेएन स्टेडियम के पीछे-वहुमखराह ब्रिज के पीछे की ओर मोड़ दिया जाएगा। इशिरवाट जंक्शन नोंगमेनसोंग मार्केट की ओर: दोपहर 2:30 बजे से वाहनों को बीएसएफ माओपट, उम्पलिंग रोड की ओर मोड़ दिया जाएगा। शिलांग कॉमर्स कॉलेज बीके बाजोरिया जंक्शन ब्रिज: दोपहर 2:30 बजे के बाद वाहनों को शिलांग कॉमर्स कॉलेज जंक्शन से डॉन बॉस्को स्क्वायर, गुरूद्वारा की ओर मोड़ दिया जाएगा। एमईएस जंक्शन, नोंग्रिम हिल्स डीएडी जंक्शन (डेम्सिनियग): दोपहर 2:30 बजे से वाहनों को नोंग्रिम पेट्रोल पंप, एमईएस जंक्शन नोंग्रिम हिल्स, गोरालेन की ओर मोड़ दिया जाएगा। दोपहर 2:30 बजे से यातायात को बीके बाजोरिया फोर्थ फर्लांग जंक्शन पर शिलांग कॉमर्स कॉलेज की ओर मोड़ दिया जाएगा।      

सामग्री में संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो प्राथमिकी को रद्द करके जांच को विफल नहीं किया जा सकता: Supreme Court

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब प्राथमिकी में किसी आरोपी पर बेईमानी का आरोप लगाया जाता है और सामग्री में संज्ञेय अपराध का पता चलता है तो प्राथमिकी को रद्द करके जांच को विफल नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि किसी आपराधिक कार्यवाही या प्राथमिकी को शुरुआत में ही रद्द कर दिया जाना चाहिए या नहीं, इस पर निर्णय लेते समय जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्रियों सहित प्राथमिकी में लगाए आरोपों पर गौर किया जाना चाहिए ताकि यह तय किया जा सके कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ जांच के लिए मामला बनता है या नहीं। पीठ ने  अपने फैसले में कहा, ‘‘इस प्रकार, जब प्राथमिकी में आरोपी पर बेईमान आचरण का आरोप लगाया जाता है, जिसका पता संज्ञेय अपराध का खुलासा करने वाली सामग्रियों से चलता है तो प्राथमिकी को रद्द करके जांच को विफल नहीं किया जाना चाहिए।’’ उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला सोमजीत मलिक की अपील पर दिया है जिसने एक आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने के झारखंड उच्च न्यायालय के एक फरवरी के आदेश को चुनौती दी थी। मलिक ने आरोप लगाया था कि उसका ट्रक जुलाई 2014 से आरोपी के पास था लेकिन 12.49 लाख रुपये के बकाये समेत उसका किराया नहीं चुकाया गया। पीठ ने कहा कि प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने 14 जुलाई 2014 और 31 मार्च 2016 के बीच मलिक के ट्रक को 33,000 रुपये के मासिक किराये पर लिया था लेकिन पहले महीने के बाद किराया नहीं चुकाया और झूठा आश्वासन देता रहा। उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘किराया नहीं चुकाने के आरोप से ही सामान्य तौर पर यह मान लिया जाएगा कि आरोपी ने वाहन पर कब्जा बरकरार रखा है। ऐसी परिस्थितियों में उस ट्रक का क्या हुआ, यह जांच का विषय बन जाता है। यदि इसे आरोपी ने बेईमानी से खुर्द-बुर्द कर दिया था, तो यह आपराधिक विश्वासघात का मामला बन सकता है। इसलिए जांच के दौरान एकत्रित की गयी सामग्रियों पर विचार किए बिना शुरुआत में ही प्राथमिकी रद्द करने का कोई औचित्य नहीं है।’’ उसने कहा, ‘‘हमारी राय में उच्च न्यायालय को प्राथमिकी रद्द करने के अनुरोध पर विचार करने से पहले जांच के दौरान एकत्रित की गयी सामग्रियों पर गौर करना चाहिए था।’’ उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए, शीर्ष अदालत ने कानून के अनुसार और जांच एजेंसी द्वारा एकत्र की गई सामग्री पर विचार करने के बाद याचिका पर नए सिरे से निर्णय लेने के लिए मामला वापस उच्च न्यायालय को भेज दिया।  

केवल मानक की दिव्यांगता होने के आधार पर अभ्यर्थी को एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए पात्रता के अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा: SC

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केवल 40 प्रतिशत दिव्यांगता का तय मानक किसी को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से नहीं रोकता, जब तक कि विशेषज्ञ की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख न हो कि अभ्यर्थी एमबीबीएस करने में असमर्थ है। न्यायामूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने अपने 18 सितंबर के आदेश के लिए विस्तृत कारण बताए। इस आदेश में न्यायालय ने एक उम्मीदवार को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की अनुमति दी थी क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वह बिना किसी बाधा के मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने में समर्थ है। पीठ ने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवार की एमबीबीएस पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने की क्षमता की जांच विकलांगता मूल्यांकन बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए। इसने कहा, ‘‘केवल निर्धारित मानक की दिव्यांगता होने के आधार पर अभ्यर्थी को एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए पात्रता के अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। अभ्यर्थी की दिव्यांगता का आकलन करने वाले विकलांगता बोर्ड को सकारात्मक रूप से यह दर्ज करना होगा कि अभ्यर्थी की दिव्यांगता पाठ्यक्रम की पढ़ाई में अभ्यर्थी के लिए बाधा बनेगी या नहीं।’’ शीर्ष अदालत ने कहा कि विकलांगता बोर्ड को यह भी बताना चाहिए कि क्या वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि उम्मीदवार पाठ्यक्रम में पढ़ाई के लिए असमर्थ है। अगर ऐसा है तो उसे कारण बताना चाहिए। न्यायालय ने ओंकार नामक छात्र की याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसने 1997 के स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियमन को चुनौती दी है जो 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले अभ्यर्थी को एमबीबीएस करने से रोकता है।    

एयर प्यूरीफायर कंपनियों पर कसेगी नकेल, केंद्र सरकार Air Purifiers की क्‍वालिटी को लेकर गंभीर

नई दिल्ली बदलते मौसम, पराली के चलते दिल्‍ली-एनसीआर की आबोहवा दिवाली से पहले ही खराब होना शुरू हो गई है. कुछ जगहों पर तो प्रदूषण का स्‍तर डेंजर जोन की ओर बढ़ गया है. ऐसे में आने वाले दिनों में AQI का स्‍तर और भी खराब होने की संभावना है. ऐसे में बाजार में Air Purifiers की मांग भी तेजी से बढ़ने लगी है. ऐसे में सरकार भी एयर प्यूरीफायर की क्‍वालिटी को लेकर काफी गंभीर हो गई है. फिल्‍टर घटिया पाया गया तो लिया जाएगा एक्‍शन ग्राहक की चिंता, एयर प्यूरीफायर की क्वालिटी, सर्विस और दावे को लेकर सरकार अब सख्‍त कदम उठाने की तैयारी में है. इसके तहत एयर प्यूरीफायर की क्वालिटी को जांचने के लिए सर्विलांस बढ़ाया जाएगा. फैक्ट्री, आउटलेट से रैंडम सैंपलिंग ली जाएगी. एयर फिल्टर के लिए QCO है, ऐसे में अगर फिल्‍टर घटिया पाया गया तो BIS एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने ग्राहकों से भी अपील की है कि वे बिना ISI मार्क वाला एयर प्यूरीफायर न खरीदें. साथ ही सर्विस सेंटर की जानकारी भी आसानी से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. अभी से खतरनाक स्‍तर पर पहुंच रहा है प्रदूषण बता दें कि दिल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण एक बहुत बड़ा मुद्दा है. हर साल दिवाली के बाद यहां प्रदूषण इतना बढ़ जाता है कि लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. अभी दिवाली आई भी नहीं और तमाम जगहों पर एक्‍यूआई खतरनाक स्‍तर पर पहुंचने लगा है. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण का हाल अभी से काफी खराब है. नोएडा का वायु गुणवत्ता सूचकांक सोमवार को सुबह 10 बजे 259, ग्रेटर नोएडा का AQI (Air Quality Index) 270 और गाजियाबाद में 265 दर्ज किया गया है.  नोएडा के सेक्टर 116 में वायु सूचकांक 306 मापा गया है, जो खतरनाक जोन में पहुंच गया है. इसी तरह ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क 5 में वायु सूचकांक 310 पर पहुंचा हुआ है. वहीं गाजियाबाद के लोनी इलाके में स्थिति और भी गंभीर हो चुकी है. यहां पर वायु सूचकांक 335 पर पहुंच गया है. हालातों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने भी सोमवार को आदेश जारी करते हुए 1 जनवरी तक पटाखे के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर रोक लगा दी है. क्‍या होता है AQI हवा की क्वालिटी मापने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index-AQI) का इस्तेमाल किया जाता है. AQI एक ईकाई है, जिसके आधार पर ये पता चलता है कि उस जगह की हवा सांस लेने लायक है या नहीं.  AQI में 8 प्रदूषक तत्वों सल्फर PM10, PM2.5, NO2, SO2, CO, O3, NH3 और PB को देखा जाता है कि उनकी मात्रा कितनी है. अगर उनकी तय लिमिट से ज्यादा मात्रा होती है, तो समझ जाता है कि वहां की हवा प्रदूषित है. AQI के छह मानक एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) के छह मानक  होते हैं, जो ये बताते हैं कि शहर की हवा सांस लेने योग्‍य है या नहीं. ये छह मानक हैं- अच्छी, संतोषजनक,सामान्‍य, खराब, बहुत खराब और गंभीर जैसी कैटेगरी शामिल हैं. 0-50 के बीच ‘अच्‍छी’, 51-100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘सामान्य’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है. भ्रामक दावों के साथ कंपनियां करती हैं विज्ञापन मसलन, कंपनियां अक्सर भ्रामक विज्ञापनों के जरिए अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार करती हैं, जबकि प्रोडक्ट्स में क्वालिटी नहीं पाई जाती. इस मामले पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने वर्ल्ड स्टैंडर्ड्स डे इवेंट में बात भी की थी और मिसलीडिंग विज्ञापनों पर चिंता जाहिर की थी. उन्होंने कहा था, “एयर प्यूरीफायर बनाने वाली कंपनियां गलत दावे करती हैं और हम देखते हैं कि कितना कुछ लिखा होता है, लेकिन उसमें कुछ नहीं होता. उसमें मात्र एक फैन लगा होता है, फिर भी दावे किए जाते हैं. प्रदूषण बढ़ने के बीच सर्विलांस अहम प्रह्लाद जोशी ने इस मुद्दे का समाधान निकालने के लिए BIS, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और उपभोक्ताओं के बीच सहयोग की शुरुआत करने की बात कही थी. इस पहल का समय अहम है क्योंकि भारतीय शहरों में बढ़ते प्रदूषण स्तर ने एयर प्यूरीफायर की डिमांड बढ़ाई है और ऐसे में कंपनियां अक्सर भ्रामक दावों के साथ अपने प्रोडक्ट्स के विज्ञापन करती हैं. भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना मकसद इस कदम से यह उम्मीद की जा रही है कि उपभोक्ताओं को अच्छी क्वालिटी के एयर प्यूरीफायर मिल सकें और यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि कंपनियां भ्रामक दावों के साथ अपने प्रोडक्ट्स का विज्ञापन करने पर रोक लगाएं. एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि इस तरह की जांच से क्वालिटी कंट्रोल को बेहतर किया जा सकता है और कंपनियों के गलत दावे करने पर लगाम लगाई जा सकती है.  

आज हुए पंचायती चुनावों के दौरान मोगा में दो गुटों में खूनी झड़प हुई है, जिसमें गोलियां चली ताबड़तोड़

मोगा पंचायती चुनावों के बीच मोगा से बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि आज हुए पंचायती चुनावों के दौरान मोगा में दो गुटों में खूनी झड़प हुई है, जिसमें गोलियां चलने की सूचना है। जानकारी अनुसार मोगा के गांव मसीतां में दो गुटों में झड़प होने की सूचना है, जिसमें गोलियां चली हैं। वहीं गोलियों की आवाज सुनते ही वहां पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। वहीं इसी तरह के मोगा के अन्य गांव कोटला मेहर सिंह में भी लोगों में झड़प होने की सूचना है तथा वहां भी फायरिंग की सूचना है।  

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लोगों की सुविधा के लिए लंबी लिंक सड़कें बनाने का निर्देश दिया

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य के लोगों की सुविधा के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए आज अधिकारियों को 2436.49 करोड़ रुपये की लागत से 13400 किलोमीटर लंबी लिंक सड़कें बनाने का निर्देश दिया। आज यहां एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये लिंक सड़कें वस्तुओं और सेवाओं की निर्विघ्न आपूर्ति के अलावा लोगों की आवाजाही के लिए भी बहुत सहायक हैं। उन्होंने कहा कि ये संपर्क सड़कें राज्य के आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं और ग्रामीण निवासियों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। सी.एम. भगवंत सिंह मान ने इन सड़कों के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया क्योंकि 6 साल बीत जाने के बाद भी इनमें से अधिकांश सड़कों को अनदेखा किया गया है।   मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सड़कों को प्राथमिकता देकर निर्माण कराया जाए ताकि लोगों को इसका पूरा लाभ मिल सके। सी.एम. मान ने कहा कि इन सड़कों के निर्माण के लिए आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर जमीनी स्तर का सर्वेक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और मंडी बोर्ड के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि इन सड़कों के निर्माण पर एक-एक पैसा सोच-समझकर खर्च किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य भर में इन ग्रामीण लिंक सड़कों को चौड़ा, मजबूत और अपग्रेड करके लिंक सड़कों के बुनियादी ढांचे को नया रूप देने का फैसला किया है।  उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा के लिए इस सड़क नेटवर्क के महत्व को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सी.एम. भगवंत सिंह मान ने पंजाब मंडी बोर्ड और लोक निर्माण विभाग को काम आवंटित करते समय परियोजना की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने और यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि इसके लिए आवंटित एक-एक पैसे का उचित निवेश किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कदम से ग्रामीण सड़कों पर उच्च गुणवत्ता का काम सुनिश्चित होगा और साथ ही राज्य के मौजूदा संसाधनों का उपयोग सुनिश्चित होगा।  सी.एम. मान ने कहा कि इस तकनीक से लोगों का पैसा तो बचेगा ही, साथ ही सड़क निर्माण कार्यों में भी क्रांति आ जाएगी।

अब हरियाणा का मौसम तेजी से बदल रहा है, लगातार शीतलहर का दौर जारी, ठंड ने दस्तक दे दी

हिसार हरियाणा में ठंड ने दस्तक दे दी है। लगातार हरियाणा में शीतलहर का दौर जारी है। आपको बता दें, अब हरियाणा का मौसम तेजी से बदल रहा है। बिना बारिश के भी न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है जिसके चलते सुबह सवेरे और रात के समय ठंड का अहसास होने लगा है।   बता दें, बीते सोमवार हरियाणा में अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस रहा। जो सामान्य से 0.4 डिग्री कम रहा। वहीं आर बात करें न्यूनतम तापमान की तो वो हरियाणा में 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हैरान कर देने वाली बात तो यह भी है कि हरियाणा में शीतलहर के दौर में बारिश की भी संभावनाएं हैं। जिसके चलते हरियाणा के तापमान में और भी अधिक गिरावट देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विभोक्ष सक्रिय होता नजर आ रहा है। ये असरदार साबित हो सकता है।जिसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी भी हो सकती है। इसके अलावा हरियाणा में बारिश और बूंदाबांदी के भी आसार हैं। जिससे दिन और रात के तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है।

मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में 22 जिलों से बसों में आवागमन करने वाले लोगों को मिलेगा भोजन पैक्ड, पानी मिले

चंडीगढ़(धरणी) हरियाणा में मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में जाने वाले लोगों को फुल खाना मिलेगा। इसको लेकर जिला प्रशासन को आदेश जारी किया गया है। आदेश में कहा गया है कि 22 जिलों से 17 अक्तूबर को बसों में आवागमन करने वाले लोगों को मिले पैक्ड भोजन,पानी मिले। गौर रहे कि हरियाणा में 17 अक्टूबर को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के माध्यम से एनडीए अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी करेगी। यही कारण है कि बीजेपी के इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे। इसके अलावा 11 भाजपा शासित राज्यों और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, NDA घटक दलों के प्रमुख भी मौजूद रहेंगे। इसके साथ विपक्ष के नेताओं को भी न्योता दिया गया है। इस संबंध में सीएम के पूर्व मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय ने बताया कि समारोह में ड्रोन दीदी, प्रगतिशील किसान, सफाई कर्मचारी, उद्योगपतियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही सरकार की योजनाओं के लाभार्थी और प्रमुख खिलाड़ियों को भी निमंत्रण भेजा गया है।

किसी काम से घर से बाहर गई थी पत्नी, घर में डॉ.सतीश कुमार का शहर के ओमैक्स सिटी स्थित घर में फंदे से लटका शव मिला

बहादुरगढ़ रोहतक के बनियानी गांव स्थित पीएचसी में तैनात डॉ.सतीश कुमार का शहर के ओमैक्स सिटी स्थित घर में फंदे से लटका शव मिला है। डॉक्टर के मानसिक रूप से परेशान होने की बात कही जा रही है। सेक्टर-6 थाना पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रोहतक के लाहली निवासी डॉ. सतीश कुमार (52) कुछ समय से बहादुरगढ़ के ओमैक्स सिटी में परिवार के साथ रह रहे थे। वे रोहतक के गांव बनियानी पीएचसी में मेडिकल ऑफिसर थे। रविवार को उनकी पत्नी किसी काम के सिलसिले में घर से बाहर गई हुई थी। घर में काम करने वाली नौकरानी जब पहुंची तो उसने शव फंदे पर लटका देखा। नौकरानी के शोर मचाने पर आसपास के लोग आए और डॉ.सतीश को फंदे से उतारा गया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही सेक्टर-6 थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की।  डॉ.सतीश पिछले डेढ़ साल से बनियानी पीएचसी में बतौर मेडिकल ऑफिसर तैनात थे। डाॅ. सतीश दो दिन पहले अवकाश पर गए थे। शुक्रवार को वे पीएचसी आए थे, यहां ओपीडी में कुछ मरीजों को देखा था। सोमवार को अचानक उनके निधन की खबर से पीएचसी में शौक की लहर दाैड़ गई। बताया जा रहा है कि पिछले कई दिनों से वे बीमार थे। चर्चा है कि वे मानसिक रूप से भी परेशान थे। डॉ. सतीश ने पीजीआई से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद हिसार में लंबे समय तक सेवाएं दी थीं।

भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, दे रहा आतंकियों को पनाह

कनाडा भारत और कनाडा के संबंधों में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, लेकिन हाल के घटनाक्रम ने इस रिश्ते में एक नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान का जिक्र अक्सर आतंकवाद और भारत-विरोधी गतिविधियों के संदर्भ में होता है, वहीं अब कनाडा भी इसी श्रेणी में आ चुका है। “कनाडा अब भारत के लिए नया पाकिस्तान बन चुका है,” यह टिप्पणी वरिष्ठ शोधकर्ता सुशांत सरीन ने एक टेलीविजन चर्चा के दौरान की, क्या वाकई भारत के लिए कनाडा की स्थिति पाकिस्तान की तरह हो गई है? आइए जानते हैं। कैसे आने लगी भारत-कनाडा के रिश्ते में खाई भारत-कनाडा के बीच संबंधों में असली दरार तब आई जब जून 2023 में कनाडा के सरे शहर में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या हुई। इसके बाद, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने भारत पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि, भारत ने बार-बार ठोस सबूतों की मांग की लेकिन कनाडा इस दिशा में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इस घटना ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को और भी गंभीर बना दिया। हाल ही में, कनाडा ने भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को पर्सन ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया, जिससे भारत और अधिक नाराज हो गया। परिणामस्वरूप, भारत ने अपने राजनयिकों को वापस बुलाने और कनाडाई दूतावास के छह अधिकारियों को निष्कासित करने का कठोर कदम उठाया। इस प्रकार के उपाय भारत और पाकिस्तान के बीच पहले भी देखे गए हैं, जब पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने दूतावासों के कर्मियों को निष्कासित किया था। खालिस्तान मुद्दे पर ट्रूडो का ढुलमुल रवैया जस्टिन ट्रूडो की सरकार पर आरोप है कि वह खालिस्तानी तत्वों को शह देकर अपने देश में वोट-बैंक की राजनीति कर रहे हैं। यह वही रणनीति है जिसे पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर अपनाया था। पाकिस्तान ने कश्मीर को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे उसकी घरेलू राजनीति में वोटों की फसल काटी जा सके। ट्रूडो भी इसी तरह कनाडा में सिखों के वोट के लिए खालिस्तानी गतिविधियों को समर्थन दे रहे हैं। खालिस्तानी संगठनों जैसे वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन, खालिस्तान टाइगर फोर्स, और बब्बर खालसा इंटरनेशनल ने कनाडा में खुलेआम काम किया है। इन संगठनों पर भारत सरकार ने पहले ही कई बार प्रतिबंध लगाने की मांग की है, लेकिन कनाडा ने इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया। आतंकियों के लिए पनाहगार बना कनाडा जैसे पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन गया था, वैसे ही कनाडा भी अब भारत-विरोधी तत्वों का गढ़ बनता जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि कनाडा सरकार न केवल खालिस्तानी तत्वों को संरक्षण दे रही है, बल्कि वह भारतीय कानून से फरार आतंकवादियों और अपराधियों को भी शरण दे रही है। इसमें से कई व्यक्ति पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ट्रूडो की वोट-बैंक की राजनीति भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बार-बार ट्रूडो की वोट-बैंक राजनीति को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया है। ट्रूडो की सरकार को जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) का समर्थन प्राप्त है, जिनकी छवि खालिस्तानी समर्थक के रूप में जानी जाती है। इस गठबंधन ने कनाडा को खालिस्तानी तत्वों के प्रति नर्म रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है।

हरियाणा में हार नसीब के बाद अब महारास्ट्र और झारखण्ड में अलर्ट मोड़ में कांग्रेस: राहुल गांधी

नई दिल्ली हरियाणा में जीत सामने देख रही कांग्रेस को अंत में हार नसीब हुई। इस करारी हार को अब तक कांग्रेस हजम नहीं कर पाई है। इस नतीजे की एक वजह ओवर कॉन्फिडेंस भी मानी जा रही है। यही वजह है कि पार्टी अब महाराष्ट्र में हर कदम फूंक-फूंक कर रखना चाहती है। सोमवार को महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं के साथ हुई मीटिंग में राहुल गांधी ने अलर्ट भी किया कि आप लोगों को ओवर कॉन्फिडेंस से बचना होगा। उन्होंने कहा कि आप लोग एकजुट होकर काम करें और किसी भी तरह के अति आत्मविश्वास से बचें। चुनाव आयोग आज ही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का ऐलान करने वाला है। इसके साथ ही झारखंड के विधानसभा चुनावों का भी शेड्यूल जारी किया जाएगा। लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने दम पर बहुमत से रोकने वाली कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में अच्छे नतीजे लाएगी। खासतौर पर हरियाणा में तो पार्टी को अपने दम पर सत्ता की उम्मीद थी, लेकिन नतीजे ने चौंका दिया। भाजपा लगातार तीसरी बार हरियाणा में जीत गई। अब भाजपा को महाराष्ट्र में जीत का भरोसा जग गया है, जबकि कांग्रेस वहां अब सावधानी के साथ ही चलना चाहती है। अब तक कांग्रेस महाराष्ट्र में इस भरोसे में रही है कि वह पहले नंबर पर रहेगी। बता दें कि महाराष्ट्र में सीट शेयरिंग भी INDIA अलायंस के लिए एक चैलेंज है। उद्धव ठाकरे गुट सबसे ज्यादा सीटें चाहता है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को देखते हुए वह सबसे ज्यादा सीटों पर लड़ेगी। हालांकि इस बात पर तीनों के बीच सहमति दिखती है कि वह किसी भी हाल में एक साथ ही चुनाव में उतरेंगे। बता दें कि महाविकास अघाड़ी को लोकसभा चुनाव में अच्छी सफलता मिली थी। राज्य की 48 में से 31 सीटों पर गठबंधन जीता था। वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को महज 17 पर ही जीत मिली थी। तभी से राज्य में INDIA अलायंस उत्साहित है, लेकिन हरियाणा के नतीजों ने राहुल गांधी से लेकर पूरी पार्टी को ही अलर्ट कर दिया है। इसी वजह से पूरी कोशिश है कि मतभेद वाले मुद्दों को फिलहाल दूर ही रखा जाए। सीएम फेस घोषित नहीं किया जाएगा। अब तक तीनों दलों के बीच जो बात हुई है, उसके अनुसार कांग्रेस 110 से 115 सीटें लड़ सकती है। वहीं 90 से 95 सीटें उद्धव सेना को मिलने की उम्मीद है। शरद पवार की एनसीपी के खाते में 80 से 85 सीटें जा सकती हैं।

भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और पांच अन्य अधिकारी लौटेंगे कनाडा से, खालिस्तानी तत्वों से बताया खतरा

नई दिल्ली भारत ने कनाडा के छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया तथा कनाडा से अपने उच्चायुक्त और ‘‘निशाना बनाए जा रहे’’ अन्य राजनयिकों एवं अधिकारियों को वापस बुलाने की घोषणा की। भारत के उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा और पांच अन्य अधिकारी इस सप्ताह के अंत में कनाडा से लौट आएंगे। भारत लौटने के बाद उनको संभावित खालिस्तानी खतरों के कारण बढ़ी हुई सुरक्षा दी जाएगी। खुफिया सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों पर खालिस्तानी समर्थक समूहों से गंभीर खतरे की आशंका है। इसके अलावा, कनाडा में हाल ही में तैनात अन्य भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को भी विशेष सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी। संजय कुमार वर्मा के अलावा, टोरंटो के वाणिज्य दूत सिद्धार्थ नाथ को सबसे अधिक “खतरे में” माना जा रहा है। उन्हें भी हाल ही में कनाडा छोड़ने को कहा गया था। नाथ ने पिछले साल अगस्त में टोरंटो कांसुलेट का कार्यभार संभाला था। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रमुख खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के दो महीने बाद ही नाथ ने कार्यभार संभाला था। खालिस्तानी समर्थक समूह का $500,000 का इनाम खालिस्तान समर्थक समूह ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) ने उच्चायुक्त वर्मा की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 500,000 डॉलर का इनाम घोषित किया है। SFJ के जनरल काउंसल गुरपतवंत पन्नू ने एक बयान में कहा कि वे “संजय कुमार वर्मा की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे” और उन्हें “न्याय के कटघरे” में लाने के लिए प्रयास करेंगे। SFJ का आरोप है कि वर्मा का निज्जर की हत्या में कथित तौर पर हाथ था और यह संगठन लगातार कनाडा के प्रधानमंत्री को इस मामले की जांच के लिए पत्र लिखता रहा है। भारत की प्रतिक्रिया: OCI कार्ड पर सख्ती, वीजा पर नहीं सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार खालिस्तानी गतिविधियों से जुड़े भारतीय मूल के कनाडाई नागरिकों के ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड पर सख्त कार्रवाई करने की योजना बना रही है। हालांकि, वीजा जारी करने पर रोक लगाने की संभावना नहीं है, जैसा कि पिछले साल प्रधानमंत्री ट्रूडो के बयान के बाद हुआ था। ट्रूडो का बयान: “सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम” कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को कहा कि छह भारतीय अधिकारियों को निष्कासन नोटिस देना “आवश्यक” था ताकि उन आपराधिक गतिविधियों को रोका जा सके जो कनाडा की सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं। फिलहाल भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी मुद्दे को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।

वक्फ पर JPC की बैठक में बवाल, विपक्षी नेताओं का कहना है कि बीजेपी के एक सदस्य ने उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर सुंयुक्त संसदीय समिति की बैठक में एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच टकराव देखने को मिला। विपक्षी नेताओं का कहना है कि बीजेपी के एक सदस्य ने उनपर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इसके बाद विपक्ष के नेताओं ने वॉकआउट कर दिया। इससे पहले सोमवार को भी विपक्ष के नेताओं ने वॉकाउट कर दिया था। बैठक के दौरान बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे, दिलीप सैकिया, अभिजीत गांगुली और टीएमसी सांसद कल्याण बरर्जी, कांग्रेस के गौरव गोगोई के बीच तीखी बहुस हो गई। वक्फ बोर्ड में महिलाओं को शामिल करने को लेकर इन लोगों में तीखी बहुस हुई। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ही नियमों के मुताबिक काम नहीं कर रहे हैं और उन्होंने सांसदों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। दूसरी तरफ बीजेपी सांसदों का आरोप है कि विपक्षी सांसद अध्यक्ष को ही बुरा-भला कह रहे थे। वक्फ (संशोधन) विधेयक 28 जुलाई को सदन में पेश किया गया था। हालांकि विपक्षी दलों की आपत्ति के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया। सोमवार को कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनवर मनीप्पाडी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर वक्फ जमीन घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा दिया था। इसके बाद विपक्ष सांसदों ने कहा था कि इस तरह के पैनल में बिना सबूत के इस तरह के अप्रमाणित आरोप नहीं लगाने चाहिए। हालांकि अध्यक्ष ने उनकी आपत्ति को किनारे करते हुए सांसद को बोलने की इजाजत दे दी। पिछले सप्ताह बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने पाल को पत्र लिखा था और कहा था गृह मंत्रालय को जांच करना चाहिए कि वक्फ के माध्यम से कितने घोटाले किए गए हैं। दुबे का दावा था कि इसमें जाकिर नाइक जैसे लोग भी शामिल हो सकते हैं।

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