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ईरान पर बड़ा साइबर हमला, सरकार और न्यूक्लियर ठिकानों से कई अहम जानकारियां चुराई

तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी लड़ाई के बीच शनिवार को ईरान के ऊपर बड़ा साइबर अटैक हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की सरकार और न्यूक्लियर ठिकानों पर किए गए इस साइबर अटैक में कई अहम जानकारियां चुराई गई हैं। इस हमले में सरकार के तीनों ब्रांचेज को निशाना बनाया गया है। यह साइबर अटैक कब हुआ और इसे किसने अंजाम दिया, इस बारे में कोई सूचना नहीं है। गौरतलब है कि 1 अक्टूबर को ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार कर दी थी। तब से ही इजरायल बौखलाया हुआ है और उसने बदला लेने की कसम खाई है। बीते दिनों इजरायली प्रधानमंत्री ने इस बारे में एक बैठक भी की थी, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को निशाना बनाने संबंधी चर्चा हुई थी। ईरान इंटरनेशनल ने ईरान के सुप्रीम काउंसिल ऑफ साइबरस्पेस के पूर्व सचिव फिरोजाबादी के हवाले से कहाकि ईरान की सरकार की सभी तीन शाखाएं-न्यायपालिका, विधायिका और एग्जीक्यूटिव ब्रांच पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। यहां से बडे़ पैमाने पर जानकारियां चुराई गई हैं। उन्होंने बताया कि इस हमले में परमाणु ठिकानों के साथ-साथ ईंधन वितरण, नगरपालिका नेटवर्क, परिवहन नेटवर्क, बंदरगाहों और अन्य नेटवर्क को टारगेट किया गया है। ये देश भर के विभिन्न क्षेत्रों की एक लंबी सूची का हिस्सा हैं, जिन पर हमला किया गया है। यह साइबर हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका ने इजरायल पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल सेक्टर्स पर लगाए गए यह प्रतिबंध इजरायल पर ईरानी मिसाइल हमलों के बाद लगाए गए हैं। अमेरिका का यह कदम उस आदेश की कड़ी है जिसमें वह ईरान को मिसाइल प्रोग्राम्स के लिए सरकारी मदद मुहैया कराने से रोकता है। इससे पहले, ईरान ने कहा था कि अगर उसका कट्टर दुश्मन इजरायल हमला करता है तो वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। इस्लामिक रिपब्लिक ने अपने दो करीबी सहयोगियों, हमास नेता इस्माइल हानिया और हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्लाह के साथ-साथ एक ईरानी जनरल की हत्या के प्रतिशोध में 1 अक्टूबर को इजरायल पर मिसाइलें दागीं। सोशल मीडिया पर उनके प्रेडिक्शन को संजीदगी से लिया जा रहा है. इसकी वजह उनकी पिछली भविष्यवाणियां हैं, जो ज्यादातर सही साबित हुई हैं, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट के ग्लोबल आउटेज, कोरोनावायरस महामारी और एलन मस्क के ट्विटर अधिग्रहण जैसी घटनाएं शामिल थीं. ईरान और इजरायल के बीच AI का बढ़ता इस्तेमाल सलोम का मानना है कि आने वाले समय में ईरान और इज़राइल, दोनों देश अपने सैन्य रणनीतियों में आर्टिफिशेयल इंटिलेजेंस का ज्यादा इस्तेमाल कर सकते हैं. साथ ही ये भी चेतावनी दी कि AI शांति बनाए रखने के लिए इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ, तो यह संघर्ष को और बढ़ा सकता है. यह स्थिति दुनिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर सकती है. EMP का बढ़ता खतरा, ‘तीन दिनों का अंधकार’? सलोम की मानें तो EMP तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल, खासकर अमेरिका, रूस, चीन, और उत्तर कोरिया जैसे देशों में, एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है. सलोम के अनुसार, EMP का इस्तेमाल तीसरे विश्व युद्ध में किया जा सकता है, जिससे ‘तीन दिनों का अंधकार’  जैसे हालात पैदा हो सकते हैं. इससे दुनिया भर के इलेक्ट्रॉनिक ढांचे ठप हो सकते हैं, जिससे समाज ढह सकता है और देशों में अराजकता फैल सकती है. क्या है EMP EMP एक ऐसा उपकरण है जो सूचना प्रणालियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मानवों या इमारतों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निष्क्रिय कर सकता है. यह आमतौर पर ऊंचाई पर हुए विस्फोटों से ट्रिगर होता है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ संपर्क में आकर इलेक्ट्रॉनिक ढांचों को बाधित कर सकता है. कोल्ड वॉर के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने इस तकनीक को दुश्मनों के बुनियादी ढांचे को निष्क्रिय करने के साधन के रूप में देखा था. अमेरिका और चीन के बीच टकराव की संभावना सलोम ने डेली मेल से एक एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर, जहां क्षेत्रीय और सैन्य तनाव पहले से ही मौजूद हैं, एक अस्थिर क्षेत्र बन सकता है. इसके अलावा, एक बड़े साइबर हमले से किसी देश की सुरक्षा ढांचे पर हमला किया जा सकता है, जो युद्ध की वजह बन सकता है. रूस और चीन जैसे देशों की क्या भूमिका होगी? सलोम ने यह भी चेतावनी दी है कि चीन और रूस के बीच बढ़ती साझेदारी एक बड़े वैश्विक संघर्ष को जन्म दे सकती है. उन्होंने कहा एशिया, जहां तेज आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक महत्व है, एक अस्थिर क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है. यह क्षेत्र एक अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को भड़काने में सक्षम हो सकता है अथोस सलोम की इन भविष्यवाणियों ने दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध को लेकर चर्चा को और तेज कर दिया है अब यह देखना होगा कि आगे क्या होता है.

हिमाचल प्रदेश में फिर हिली धरती, शिमला में 3 तीव्रता का आया भूकंप, जानें अपडेट

 शिमला हिमाचल प्रदेश के शिमला और आसपास के इलाकों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता 3.0 थी और यह आज दोपहर 3:32 बजे आया. भूकंप का केंद्र हिमाचल प्रदेश के कुल्लू क्षेत्र में बताया जा रहा है. राहत की बात यह है कि इस भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. हालांकि झटके हल्के थे, लेकिन स्थानीय लोगों में थोड़ी घबराहट जरूर देखी गई.    

संघ मना रहा 100वीं सालगिरह, अमित शाह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक RSS के स्थापना दिवस पर दी बधाई

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना दिवस के अवसर पर इसके सदस्यों को बधाई दी और कहा कि अपनी स्थापना के बाद से यह संगठन भारतीय संस्कृति की रक्षा और युवाओं में देशभक्ति के विचारों को विकसित करने का उल्लेखनीय काम कर रहा है। संघ की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में विजया दशमी के दिन नागपुर में की थी। शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “अनुशासन और देशभक्ति के अद्वितीय प्रतीक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी स्वयंसेवकों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। संघ अपनी स्थापना से ही भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं युवाओं को संगठित कर उनमें राष्ट्रभक्ति के विचारों को सींचने का उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।” उन्होंने कहा कि संघ समाज सेवा के कार्यों को गति देकर हर वर्ग को सशक्त बनाने के साथ ही शैक्षणिक प्रयासों से देशहित के प्रति समर्पित देशभक्तों का निर्माण कर रहा है। गृहमंत्री ने विजया दशमी के अवसर पर भी देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने एक संदेश में कहा कि विजया दशमी अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक, विजया दशमी का यह पर्व सभी को अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त कर धर्म और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु श्री राम सभी का कल्याण करें। जय श्री राम।” विजया दशमी दुर्गा पूजा के समापन और असुरों के राजा रावण पर भगवान राम की विजय का प्रतीक है। एक अलग संदेश में शाह ने भाजपा नेता राजमाता विजयाराजे सिंधिया को भी उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि वह (राजमाता सिंधिया) सादगी की प्रतिमूर्ति थीं और आपातकाल के दौरान उनके साहस और संघर्ष ने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “राजमाता सिंधिया जी की देश के प्रति निष्ठा और जनकल्याण के कार्यों को देश सदैव याद रखेगा।” ग्वालियर राजघराने से ताल्लुक रखने वाली राजमाता सिंधिया भाजपा की उपाध्यक्ष और सांसद थीं। उनका जन्म 12 अक्टूबर 1919 को हुआ था।  

पायल शहर में दशहरे के मौके पर लोग हाथों में कट लगाकर रक्त चढ़ाते हैं और शराब भी चढ़ाई जाती है

पंजाब देश में दशहरे का त्योहार के अवसर पर जहां रावण का पुतला फूंका जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। चारों वेदों के ज्ञाता रावण के प्रति घृणा पाली जाती है वहीं पंजाब के लुधियाना जिले के पायल शहर में दशहरे के मौके पर रावण की भी पूजा की जाती है। इस परंपरा को दुबे परिवार विदेशों और पटियाला, बठिंडा, पठानकोट, चंडीगढ़ से हर साल दशहरे के मौके पर पायल आकर पिछले 7 पीढ़ियों से निभा रहा है और रावण की पूजा सहित राम मंदिर में भी पूजा अर्चना कर लोगों के बीच सम्मान का पात्र बनता जा रहा है। यहां लोगों ने हाथों में कट लगाकर रक्त चढ़ाते हैं और यहां शराब भी चढ़ाई जाती है। दुबे परिवार ने बताया कि हमारे पूर्वज बीरबल दास के वंशज नहीं थे। वे पायल नगर को छोड़कर हरिद्वार की ओर चल पड़े। रास्ते में एक साधु ने संतान की मनोकामना पूरी करने का उपाय बताया और कहा कि जाकर रामलीला करो और दशहरा मनाओ। इसके बाद उनके दादा बीरबल दास ने पायल आकर रामलीला की और अगले वर्ष के दशहरे से पहले पहली संतान प्राप्त की। इनके 4 पुत्र हुए, जिनके नाम हकीम अछारुदास दुबे, तुलसीदास दुबे, प्रभुदयाल दुबे और नारायणदास दुबे थे। हम उन्हें राम, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और भरत मानते हैं। दूसरे पितरों के घर संतान का जन्म हमारे दुबे परिवार के लिए दशहरे के अवसर पर पूजा अर्चना का साधन बन गया, जो आज तक निर्विघ्न रूप से किया जा रहा है। राम मंदिर पर पत्थर 1835 में राम मंदिर के निर्माण का प्रमाण दिखाता है और रावण की मूर्ति को मंदिर के समकालीन भी कहा जाता है। दुबे परिवार का मानना ​​है कि हमारी अगली पीढ़ी भी रावण पूजा करने और मंदिर में पढ़ने के लिए बहुत प्रतिबद्ध है। दशहरा के दिन शाम को रावण की पूजा की जाती है, जहां विशेष रूप से दशहरा के दिन सूर्यास्त के समय शराब के साथ रावण को रक्त चढ़ाने की रस्म भी निभाई जाती है। इसके बाद रावण की प्रतिमा के मस्तक पर आग लगाकर अग्नि रस्म भी निभाई जाती है। शराब और खून चढ़ाने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रावण जहां राक्षसी बुद्धि का था, वहीं वेदों का ज्ञाता भी था, जिस कारण रावण की पूजा की जाती है। गौरतलब है कि 36 साल से एक सिख परिवार मंदिर के अंदर पूजा कर धार्मिक एकता का संदेश देता आ रहा है और इस जगह की काफी मान्यता है।

कारागार में रामलीला मंचन के दौरान हुई यह घटना, दो खूंखार कैदी फरार

हरिद्वार  उत्तराखंड के हरिद्वार से ऐसा मामला सामने आया है, जिससे पुलिस और प्रशासन महकमे में हड़कंप मच गया है। हर साल की तरह इस बार भी रोशनाबाद जेल में रामलीला का मंचन चल रहा था। इसी दौरान शुक्रवार को वानर का किरदार निभा रहे दो कैदी मौका देखकर फरार हो गए। रामलीला और जेल में हो रहे निर्माण कार्य का फायदा उठाकर दोनों भाग निकले। यह घटना बीती रात की है। रामलीला मंचन के दौरान हरिद्वार जेल से दो खूंखार कैदी फरार हो गए। मंचन के दौरान इधर माता सीता की खोज हो रही थी, उधर दो वानर रूपी कैदी दीवार फांद कर भाग निकले। सभी लोग रामलीला मंचन के दृश्यों में सराबोर थे और किसी को भी घटना का पता नहीं लग सका। जेल से फरार हुए आरोपियों की पहचान रुड़की निवासी पंकज और यूपी के गोंडा निवासी राजकुमार के तौर पर की गई है। ये दोनों सीढ़ी लगाकर दीवार लांघ गए। फरार हुए दोनों कैदी जघन्य अपराधों के दोषी है। घटना के बाद हड़कंप मच गया। आरोपियों की तलाश जारी है। पंकज हत्या के मामले में आजीवन कारावास काट रहा था। वहीं राजकुमार अपहरण के मामले में विचाराधीन कैदी है। कैदियों की फरारी के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उधर पुलिस अधिकारियों का कहना कि आरोपियों की तलाश की जा रही है।

बिहार वालों के लिए आ गई गुड न्यूज, पटना से दिल्ली के लिए चलेगी वंदे भारत; जानें किराया-टाइमिंग

पटना  दीपावली और छठ के मौके पर पटना से दिल्ली जाने वालों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे ने पहली बार पटना से दिल्ली के बीच स्पेशल वंदे भारत ट्रेन चलाने का फैसला किया है। यह ट्रेन 30 अक्टूबर से 7 नवंबर तक चलेगी। दरअसल, त्योहारों के सीजन में ट्रेनों में सीट मिलना मुश्किल हो जाता है। पटना से दिल्ली जाने वाली सभी ट्रेनों में पहले से ही नो-रूम है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी परेशानी को देखते हुए रेलवे ने यह फैसला लिया है। पटना से दिल्ली के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह स्पेशल वंदे भारत ट्रेन 30 अक्टूबर और 1, 3 और 6 नवंबर को दिल्ली से पटना के लिए रवाना होगी। वहीं, 31 अक्टूबर और 2, 4 और 7 नवंबर को यह ट्रेन पटना से दिल्ली के लिए चलेगी। जानिए पटना दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस का समय यह ट्रेन दिल्ली से सुबह लगभग 8:25 बजे चलेगी और शाम 7 बजे दिल्ली पहुंचेगी । इस दौरान यह ट्रेन कानपुर, प्रयागराज, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा में रुकेगी। पटना से यह ट्रेन सुबह 7:30 बजे रवाना होगी और शाम 7:10 बजे आरा जंक्शन पहुंचेगी। इसके बाद यह ट्रेन रात 8 बजे पटना पहुँच जाएगी। स्लीपर कोच नहीं होंगे इस स्पेशल ट्रेन में हालांकि, इस स्पेशल वंदे भारत ट्रेन में स्लीपर कोच नहीं होंगे। यात्रियों को बैठकर ही सफर करना होगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्लीपर वंदे भारत ट्रेन अभी ट्रायल फेज में है। ट्रायल पूरा होने के बाद उसे रेगुलर कर दिया जाएगा। जानिए पटना दिल्ली वंदे भारत का किराया इस स्पेशल वंदे भारत ट्रेन का किराया तेजस एक्सप्रेस के थर्ड एसी से भी ज़्यादा होगा। इसमें एससी चेयर कार का किराया 2575 रुपये है, जबकि एसी एग्जीक्यूटिव चेयर कार का किराया 4655 रुपये है। इसमें खाने-पीने की सुविधा भी शामिल है। गौरतलब है कि दिवाली और छठ के मौके पर रेलवे ने कई स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। रेलवे अलग-अलग रूट्स पर 283 फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें चला रहा है। रेलवे के इस फैसले से त्योहारों के सीजन में यात्रा करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी।  

परिवार के सभी लोग ऑल्टो से जा रहे थे मंदिर, नहर में गिरी कार, 3 बच्चों समेत एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत

चंडीगढ़ हरियाणा के कैथल में दशहरे के दिन एक ऑल्टो कार मुंदड़ी नहर में डूब गई। कार सवार 8 लोगों की मौत हो गई है। हादसे में 3 बच्चों समेत एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई। वे कैथल के गांव डीग के रहने वाले थे। शनिवार सुबह परिवार ऑल्टो कार में सवार होकर मंदिर में माथा टेकने जा रहे थे। इसी दौरान जब वे मुंदड़ी पहुंचे तो उनकी कार अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जब ग्रामीणों ने कार को नहर में गिरते देखा तो वे मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला गया। कार में सवार सभी लोगों को अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। रविदास मंदिर जा रहा था परिवार मृतकों की संख्या 8 है, जिनमें से सात के शव मिल चुके हैं। 15 वर्षीय लड़की का शव अभी तक नहीं मिल पाया है, जो नहर में ही बताई जा रही है। कार चला रहा ड्राइवर फिलहाल बच गया है और कुंडली अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। परिवार वालों ने बताया कि एक ही परिवार के 9 सदस्य सुबह कैथल के गांव गुहणा में गुरु रविदास मंदिर में माथा टेकने जा रहे थे। वे सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर से निकले थे। 10-15 मिनट में कार को बाहर निकाला प्रत्यक्षदर्शी प्रदीप शर्मा ने भावुक होते हुए बताया कि गाड़ी अनियंत्रित होकर नहर में गिर गई। मौके पर मौजूद लोग वहां से भागकर घटना स्थल पर पहुंचे। गाड़ी में सवार लोगों को बचाने के लिए नहर में कूद गए। करीब 10-15 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद गाड़ी को बाहर निकाला गया। उस समय 2 लोग जीवित थे। जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक उनकी भी मौत हो गई। मरने वालों में तीन बच्चे भी शामिल हैं। घटना से गांव वाले काफी दुखी हैं। हमने अपने हाथों से बच्चों के शव गाड़ी से बाहर निकाले हैं। लड़की के शव की तलाश शुरू डीएसपी ललित कुमार ने बताया कि मामले में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें चार बच्चे और तीन महिलाएं शामिल हैं। एक लड़की का शव अभी तक नहीं मिला है। लड़की के शव की तलाश शुरू हो गई है। ग्रामीणों के सहयोग से तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही लड़की का शव बरामद कर लिया जाएगा।

दशहरा के दिन शस्त्र पूजन करते हुए राजनाथ सिंह ने चीन-पाक को दिया संदेश ‘हमारे हितों पर आंच आई तो’

दार्जिलिंग पूरे देश में आज विजयादशमी का त्यौहार मनाया जा रहा है. इस दिन पूजा में अस्त्र-शस्त्रों को सामने रखकर पूजा करने की परंपरा रामायण और महाभारत काल से चली आ रही है. आज भी हमारी सेना इस परंपरा को निभाती है. इसी उपलक्ष्य में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शस्त्र पूजा की. इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर भारत के हितों पर बात आती है तो हम कोई भी बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दार्जिलिंग में सुकना कैंट में सेना के जवानों के साथ विजयादशमी मना रहे हैं. ‘यह हमारी विशाल सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है’ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “मैं आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं. भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां शास्त्रों और शस्त्रों दोनों की पूजा की जाती है. ऐसा लग सकता है कि लोहे और लकड़ी से बनी चीजों की पूजा करने का क्या औचित्य है? लेकिन वास्तव में, यह हमारी विशाल सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है जिसमें हम किसी भी वस्तु का उपयोग करने से पहले और बाद में उसके प्रति आभार व्यक्त करते हैं.” ‘यह मानवता की जीत है’ इस दौरान उन्होंने कहा कि विजयादशमी के दिन भगवान राम को मिली जीत सिर्फ उनकी नहीं थी बल्कि यह मानवता को मिली जीत थी. रावण विद्वान होने के बाद भी बुराइयों का प्रतीक था. भगवान राम की रावण से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी. उन्होंने रावण का वध इसलिए किया क्योंकि मानवता के लिए वो जरूरी था. बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे रक्षामंत्री ने कहा, “हमने कभी किसी देश के साथ युद्ध नहीं किया है. हमने तब युद्ध किया है जब उसने मानव मूल्यों के खिलाफ जंग छेड़ी है. हमें हमारे हितों पर आंच दिखी तो हम कोई भी बड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे.” उन्होंने आगे कहा, ‘पड़ोसियों की किसी भी हरकत से इनकार नहीं किया जा सकता. वैश्विक हालात चाहे कुछ भी हों, हमें हमेशा तैयार रहना है.”

‘दुर्बल रहना अपराध है, हिन्दू समाज को समझ में आना चाहिए,’ बोले मोहन भागवत

 नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर अपने संबोधन में कई समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार रखे. उन्होंने अपने भाषण में इस्राइल-हमास युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि इस युद्ध से पूरे विश्व में चिंताएं बढ़ गई हैं, और यह आग किस-किस को झुलसाएगी, यह कहना कठिन है. भागवत ने इस संघर्ष को वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का प्रतीक बताया. भारत को आगे बढ़ने में रुकावट बन रही हैं विदेशी शक्तियां भागवत ने जम्मू-कश्मीर के शांतिपूर्ण चुनावों की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारत की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश और शक्तियां भारत के आगे बढ़ने में रुकावट डालने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने यह चेतावनी दी कि भारत को रोकने के लिए ऐसी ताकतें विभिन्न तरह की चालें चलेंगी. बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का किया जिक्र मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू समाज पर हुए अत्याचारों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी ताकतों के कारण अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहे हैं और हिंदू समाज को संगठित होने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हिंसा का सहारा लिए बिना भी संगठित रहना जरूरी है ताकि समाज दुर्बल न बने. भारत का विकास कई देशों के स्वार्थ पर करता है चोट भागवत ने बांग्लादेश में भारत के खिलाफ चल रही अफवाहों पर चिंता जताई, जिसमें भारत से खतरा बताकर पाकिस्तान से गठजोड़ की बात हो रही है. उन्होंने इसे उन ताकतों का षड्यंत्र बताया जो नहीं चाहतीं कि भारत आगे बढ़े. उन्होंने कहा कि भारत का विकास कई देशों के स्वार्थों पर चोट करता है और इससे उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी. आरजीकर अस्पताल जैसी घटनाओं से कलंकित होता है समाज आरजी कर अस्पताल की घटना पर चर्चा करते हुए भागवत ने इसे समाज के लिए लज्जाजनक बताया. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से समाज कलंकित होता है और हमें चौकस रहने की आवश्यकता है. भागवत ने देश के पर्व-त्यौहारों पर भी बात की और कहा कि हमें विभाजन से बचते हुए सभी त्यौहार मिलकर मनाने चाहिए. बच्चों के हाथ में मोबाइल, इस पर कोई नियंत्रण नहीं हम देख रहे हैं कि भारत वर्ष में इस प्रकार मन वचनों पर कुप्रभाव हो रहा है. कोई बात छिपती नहीं है. बच्चों के हाथ पर भी मोबाइल है. वो क्या देख रहे हैं इस पर किसी का नियंत्रण नहीं है. इस पर नियंत्रण करना घर परिवार और विधि व्यवस्था पर भी जरूरी है. इसके कुपरिणाम भी हैं. कई जगह युवा पीढ़ी नशे के जाल में फंस रही है… एक द्रौपद्री के वस्त्र का हरण हुआ, महाभारत हो गया. सीता हरण हुआ रामायण हो गया…आरजी कर अस्पताल में क्या हुआ वो लज्जित करने वाला हो गया है.ऐसा नहीं होना चाहिए था. होने के बाद भी वहां जिस तरह की टालमटोली हुई वो अपराध और राजनीति के गठबंधन को दिखाता है. घर की हरियाली बढ़ाने पर जोर उन्होंने कहा कि अपने यहां सिंगल यूज प्लास्टिक नहीं चलना चाहिए, पेड़ लगाओ. गमलों में भी खेती हो सकती है. घर की हरियाली बढ़ाओं. गांव-शहर मोहल्ले में पेड़ लगाओ.. कई पेड़ हमने फैशन के चलते लगाए जिनको काटने के लिए अब सरकार कह रही है क्योंकि उससे विकार आते हैं. हमारे यहां नीम का पेड़ है जो गुणकारी है.  

संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक भी इजरायली गोलाबारी का शिकार हुए, 600 भारतीय सैनिकों पर मंडरा रहा खतरा

बेरुत मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत ने दक्षिणी लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है. इजरायल लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों को लगातार निशाना बना रहा है. बीते दिनों संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक भी इजरायली गोलाबारी का शिकार हो गए थे. 600 भारतीय सैनिक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन का हिस्सा हैं और इजराइल-लेबनान सीमा पर 120 किलोमीटर लंबी ब्लू लाइन पर तैनात हैं. क्षेत्र में तेजी से बढ़ते तनाव और हमलों के बीच भारत इन सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है. ‘ब्लू लाइन पर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित’ विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हम ब्लू लाइन पर बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित हैं. हम स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र परिसर का सभी को सम्मान करना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए.’ अस्पताल में भर्ती UN शांति सैनिक विदेश मंत्रालय की ओर से यह बयान संयुक्त राष्ट्र के यह कहने के एक दिन बाद आया है कि ‘लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के नकौरा मुख्यालय और आसपास के स्थानों पर इजरायली बलों द्वारा बार-बार हमला किया गया. आज सुबह, दो शांति सैनिक घायल हो गए.’ संयुक्त राष्ट्र ने कहा, ‘गनीमत रही, इस बार चोटें गंभीर नहीं हैं, लेकिन वे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हैं.’ UN सैनिकों पर हुए हमले बता दें कि मध्य पूर्व में इजरायल और लेबनान के हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष के बीच स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. इस तनावपूर्ण माहौल में, दक्षिणी लेबनान की सीमा पर शांति बहाल करने के लिए तैनात संयुक्त राष्ट्र की UNIFIL (United Nations Interim Force in Lebanon) की टुकड़ी पर भी हमले हो रहे हैं. हाल ही में इस हमले में दो शांति सैनिक घायल हुए हैं. एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप इजरायल का दावा है कि हिज्बुल्लाह जानबूझकर UNIFIL को निशाना बना रहा है, जबकि UNIFIL का कहना है कि इजरायल अपने हवाई हमलों के जरिए संयुक्त राष्ट्र की शांति सैनिक टुकड़ी के बेस के पास हमले कर रहा है, ताकि वह उसे मानवीय ढाल (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल कर सके. दक्षिणी बेरूत में भी हो रहे हमले अब हालात और खतरनाक हो गए हैं, क्योंकि इजरायली हवाई हमले दक्षिण लेबनान से राजधानी बेरूत तक पहुंच गए हैं. दक्षिणी बेरूत पर जारी हमले अब बेरूत शहर के केंद्र में भी हो रहे हैं. बेरूत में स्थिति बेहद तनावपूर्ण है, जहां हाल ही में दो स्थानों पर इजरायली हवाई हमले हुए. इन हमलों में 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.  

अस्पताल में सुरक्षित माहौल और सुरक्षा की मांग कोई विलासिता नहीं है- आईएमए

कोलकाता इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर जूनियर डॉक्टरों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से शीघ्र इनका समाधान करने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि जूनियर डॉक्टरों की मांग कोई विलासिता नहीं है बल्कि कामकाजी माहौल के लिए अनिवार्य शर्त है, जिन्हें सरकार आसानी से पूरा कर सकती है। आईएमए ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वे वरिष्ठ के रूप में इस मुद्दे को गंभीरता से देखें और समाधान करें। पिछले सात दिनों से जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। यह हड़ताल कोलकाता के धर्मतला में हो रही है, जहां शनिवार रात से डॉक्टर अनशन पर बैठे हुए हैं।  देर रात को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर अनिकेत महतो की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। पत्र में आईएमए ने लिखा, पश्चिम बंगाल के जूनियर डॉक्टरों का अनशन लगभग एक सप्ताह से चल रहा है। हम उनकी मांगों का समर्थन करते हैं। आपके तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। अस्पताल में सुरक्षित माहौल और सुरक्षा की मांग कोई विलासिता नहीं है, बल्कि यह अनिवार्य है। हम आपसे आग्रह करते हैं कि एक वरिष्ठ और राज्य की मुखिया के रूप में इस मुद्दे का समाधान करें। पूरे देश के डॉक्टर इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्हें विश्वास है कि आप जूनियर डॉक्टरों की ज़िंदगी बचाएंगी। एक दिन पहले यानी  अखिल भारतीय निवासी डॉक्टर संघ ने भी ममता बनर्जी को पत्र लिखा। इस पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो पूरे देश में चिकित्सा सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। एक ही दिन में ममता को लगातार दो पत्र मिलने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की है। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान होने वाले कार्निवल को रद्द करने की भी अपील की है, ताकि मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक ध्यान दिया जा सके।      

पहले कार्यकाल में व्यापार का उपयोग कर युद्ध फैलने से रोका: ट्रंप

वाशिंगटन अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता में आने पर पारस्परिक कर लगाने का संकल्प लेते हुए  आरोप लगाया कि सभी प्रमुख देशों में से भारत विदेशी उत्पादों पर सबसे अधिक शुल्क लगाता है। ट्रम्प ने डेट्रायट में प्रमुख आर्थिक नीति पर अपने भाषण में कहा, ‘‘शायद अमेरिका को फिर से असाधारण रूप से समृद्ध बनाने की मेरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण तत्व पारस्परिकता है। यह एक ऐसा शब्द है जो मेरी योजना में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हम आम तौर पर शुल्क नहीं लगाते हैं। मैंने वह प्रक्रिया शुरू की थी वैन तथा छोटे ट्रक आदि के साथ…वह बहुत बढ़िया थी। हम वास्तव में शुल्क नहीं लगाते हैं। चीन 200 प्रतिशत शुल्क लगाएगा। ब्राजील बड़ा शुल्क वसूलता है। हालांकि इनमें से सबसे अधिक शुल्क भारत लेता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत बहुत अधिक शुल्क लेता है। भारत के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। मेरे भी हैं। खास तौर पर नेता (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी के साथ। वे एक महान नेता हैं। महान व्यक्ति हैं। वास्तव में महान व्यक्ति हैं। उन्होंने बहुत बढ़िया काम किया है, लेकिन वे शायद काफी शुल्क लेते हैं।’’ ट्रम्प की यह टिप्पणी इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा के बाद आई है। ट्रंप ने मोदी को ‘‘सबसे अच्छा इंसान’’ करार देते हुए भारतीय नेता को अपना मित्र बताया था। अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प ने कहा था कि मोदी के साथ उनके ‘‘बहुत अच्छे संबंध’’ हैं। पहले कार्यकाल में व्यापार का उपयोग कर युद्ध फैलने से रोका: ट्रंप  अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और राष्ट्रपति पद के लिये रिपब्लिकन पार्टी से उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में अन्य देशों पर दबाव बनाने के लिए व्यापार उपकरणों का उपयोग करके युद्ध को फैलने से रोका। श्री ट्रम्प ने डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में टिप्पणी करते हुए  कहा, ‘मैंने कई युद्धों को शुरू होने से रोका है। मुझे इस पर बहुत गर्व है। मैं व्यापार का उपयोग करता हूं। मैंने उनको व्यापार की धमकी दी और कहा कि आप अमेरिका के साथ व्यापार नहीं करने जा रहे हैं।” श्री ट्रम्प ने कई बार कहा है कि अगर वह नवंबर का चुनाव जीतते हैं तो निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में वह यूक्रेन संघर्ष का समाधान जल्द से जल्द करने में सक्षम होंगे।

हाइफ़ा पर हिज़्बुल्लाह का ‘सबसे बड़ा’ रॉकेट हमला, इजरायल की कमजोर नस बनी !

तेल अवीव हिज्बुल्लाह ने हाइफा की खाड़ी में ताबड़तोड़ करीब 100 रॉकेट दागे. कुछ को इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया. लेकिन कुछ गिरे. जिससे दो लोगों की मौत हो गई. 8 जख्मी हो गए. किरयत श्मोना में 20 रॉकेट गिरे. मौत भी यहीं हुई है. ये एक कपल था, जो अपने कुत्ते के साथ घूम रहा था. इन्हें प्रोटेक्टिव बंकर में घुसने का मौका नहीं मिला. इसलिए रॉकेट से निकले शार्पेनल की वजह से मारे गए. हाइफा की खाड़ी के पास वाले इलाके में तीन लोग बुरी तरह से जख्मी हुए हैं. इजरायली फोर्स ने कहा कि हिज्बुल्लाह के रॉकेट खुले इलाके में गिरे हैं. कुछ को हमने रोक दिया. इजरायली पुलिस और बम स्क्वाड किरयत श्मोना में कई घरों की जांच की है. पुलिस ने लोगों को ऐसी जगहों पर जाने को मना किया है, जहां पर रॉकेट गिरे हों. क्योंकि उनमें जिंदा विस्फोटक होने की आशंका है. अगर वो फटे तो नुकसान हो सकता है. आइए जानते हैं हाइफा के बारे में… येरूसल और तेल-अवीव के बाद इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर हाइफा है. 2022 के मुताबिक यहां करीब तीन लाख लोग रहते हैं. यहां पर सबसे ज्यादा बहाई समुदाय के लोग रहते हैं. माउंट कारमेल के पठारी ढलानों पर बसे इस शहर का इतिहास 3000 साल पुराना है. कांस्य युग में स्थापित हुए इस शहर सबसे पहले डाई (Dye) बनाने का काम होता था. पूरी दुनिया में यह इसी काम के लिए प्रसिद्ध था. यहां कई साम्राज्य आए और गए. बेबिलोनियन, पर्सियन, इजरायलाइट्स आदि. 1948 की फिलिस्तीन जंग में जब हाइफा में युद्ध हुआ तो यहां की अरब आबादी शहर छोड़कर भाग गई थी. इसके बाद यह शहर इजरायल का हिस्सा बन गया. हाइफा एक बंदरगाह शहर है. खाड़ी का इलाका करीब 63.7 वर्ग किलोमीटर का है. इजरायली रक्षामंत्री ने दी ईरान को चेतावनी इजरायल के रक्षामंत्री योआव गैलेंट ने कहा है कि ईरान ने 1 अक्तूबर को बड़ा हमला किया था. लेकिन उसे जबाव में तगड़ा हमला मिलेगा. उसका हमला आक्रामक था लेकिन सटीक नहीं. हमारा हमला घातक और पिनप्वाइंट एक्यूरेट होगा. सबसे जरूरी बात कि ये हैरान कर देगा. उन्हें पता भी नहीं कि उनके साथ क्या होने वाला है. इस बीच द जेरुसलम पोस्ट ने रिपोर्ट किया है कि इजरायल ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर हमला नहीं करेगी. उसका फोकस मिलिट्री बेस और इंटेलिजेंस साइट्स होंगे.  

जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए संघ के नाम का अनावश्यक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं :RSS

तिरुवनंतपुरम केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राज्य विधानसभा के अंदर सत्तारूढ़ और विपक्षी सदस्यों द्वारा संगठन के खिलाफ की गई कथित ‘अपमानजनक’ टिप्पणियों के लिए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। दक्षिणपंथी संगठन ने कहा कि यह ‘निंदनीय’ है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग सदन के अंदर और बाहर यह निराधार आरोप लगा रहे हैं कि इस साल आयोजित हुए त्रिशूर पूरम में व्यवधान पैदा करने के पीछे संघ का हाथ था। ‘त्रिशूर पूरम’ केरल के त्रिशूर में आयोजित होने वाला एक वार्षिक हिंदू मंदिर उत्सव है। यह हर साल पूरम के दिन त्रिशूर के वडक्कुनाथन मंदिर में आयोजित किया जाता है। संघ के वरिष्ठ नेता और प्रांत कार्यवाहक (उत्तर केरल) एन. ईश्वरन ने पूछा कि किस आधार पर वे ऐसी “गलत” बातें बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघ नेता इस मामले को लेकर जल्द ही राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमशीर से मुलाकात करेंगे। संघ नेता ने आरोप लगाया कि मंत्री, विधायक और नेता प्रतिपक्ष सहित जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए संघ के नाम का अनावश्यक रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इसकी अनुमति नहीं है। संघ के पास ऐसे विवादों में हस्तक्षेप करने का न तो समय है और न ही रुचि है।’’ ईश्वरन ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विवादों में संघ का नाम घसीटने का प्रयास ‘दुर्भावनापूर्ण’ है और ऐसे प्रयासों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल के त्रिशूर पूरम और सबरीमाला तीर्थयात्रा जैसे प्रतिष्ठित उत्सवों में जानबूझकर तनाव और विवाद पैदा करने के लिए ये आरोप लगाए जा रहे हैं। प्रतिष्ठित त्रिशूर पूरम उत्सव में हुए व्यवधान को लेकर केरल विधानसभा में बुधवार को तीखी बहस हुई। विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की जानकारी में ऐसा हुआ जबकि सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने न्यायिक जांच की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि मामले की व्यापक जांच जारी है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ कुछ समय से यह आरोप लगा रहा है कि संघ नेताओं के साथ विजयन द्वारा गुप्त सहमति जताए जाने के बाद और उनकी जानकारी में उत्सव में व्यवधान पैदा किया गया। ऐसा कहा जाता है कि त्रिशूर पूरम अनुष्ठानों में कथित तौर पर पुलिस हस्तक्षेप हुआ था और इसके बाद हुए विवादों ने इस वर्ष अप्रैल में आयोजित वार्षिक उत्सव की चमक को फीका कर दिया था।  

सूरत के प्रवासी कपड़ा व्यापारी और उद्यमी अपने-अपने मूल राज्यों में बरसाती पानी संचय के जन अभियान में भागीदारी करेंगे

सूरत के प्रवासी व्यापारी-उद्यमी अपने राज्यों में चलाएंगे ‘कैच दी रेन’ का  जन आंदोलन : सीआर पाटिल 13 अक्टूबर को सूरत के इंडोर स्टेडियम में चार राज्यों के मुख्यमंत्री-उप मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम सूरत के प्रवासी कपड़ा व्यापारी और उद्यमी अपने-अपने मूल राज्यों में बरसाती पानी संचय के जन अभियान में भागीदारी करेंगे सूरत  सूरत के प्रवासी कपड़ा व्यापारी और उद्यमी अपने-अपने मूल राज्यों में बरसाती पानी संचय के जन अभियान में भागीदारी करेंगे। सूरत में बसे बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान मूल के व्यापारी इन राज्यों में सैकड़ों रिवर्स बोरिंग बनवाने में सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। इसके तहत 13 अक्टूबर को सूरत के इंडोर स्टेडियम में गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान के मुख्यमंत्री-उप मुख्यमंत्री की मौजूदगी में विस्तृत कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने शुक्रवार को सूरत के एक होटल में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी दी। केन्द्रीय मंत्री पाटिल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मार्च, 2021 में ‘कैच दी रेन’ की योजना बनाई थी। इसके तहत बरसाती पानी को बेकार बहने के बजाय उसे जमीन में नीचे उताकर भूमिगत जल को रिचार्ज किया जाएगा। इसके तहत खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में ही जमीन के नीचे के जल को रिचार्ज करेगा, जिसका बाद में कई तरह से उपयोग हो सकेगा। पाटिल ने कहा कि गुजरात में इस अभियान का अच्छा रेस्पांस देखने को मिला है। गुजरात में जन भागीदारी के तहत वाटर हार्वेस्टिंग के लिए अभी तक 24 हजार 800 रिवर्स बोरिंग का कमिटमेंट आया था। सरकार ने इसके बाद राज्य में कार्यरत एनजीओ, संस्थाओं और सरकारी कार्यालयों को साथ लेकर करीब 80 हजार रिवर्स बोरिंग का कमिटमेंट प्राप्त करने में सफलता पाई है। राज्य में कुल 2 लाख से ऊपर रिवर्स बोरिंग का लक्ष्य रखा गया है। सूरत में बसे मूल बिहार के व्यापारियों-उद्यमियों ने भी वहां के 5 राज्यों के सभी गांवों में बोर करने का निश्चय किया है। पाटिल ने बताया कि प्रधानमंत्री के जल संचय जल भागीदारी को जन आंदोलन में परिवर्तित करने के तहत सूरत को अपना कर्मभूमि बनाने वाले मूल राजस्थान के व्यापारियों-उद्यमियों ने राजस्थान के सभी गांवों में 4-4 रिवर्स बोर के जरिये बरसाती पानी को जमीन में उतारने का निश्चय किया है। इसके अलावा जन भागीदारी के तहत ही मध्य प्रदेश में भी 3500 बोर बनाना तय किया है। इसी के तहत आगामी 13 अक्टूबर को शाम चार बजे सूरत के इनडोर स्टेडियम में कार्यक्रम किया जाएगा, जिसमें राजस्थान के मुख्मंत्री भजनलाल शर्मा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद रहेंगे। इस कार्यक्रम में सूरत के व्यापारी-उद्यमी रिवर्स बोर बनाने के लिए अपने-अपने मूल राज्य के गांवों के नामों की सूची सौंपेंगे। इन राज्यों के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के लिए सूरत के प्रवासी व्यापारी-उद्यमी के जरिए स्वागत कार्यक्रम भी किया जाएगा। प्रेस कांफ्रेंस में गुजरात सरकार के मंत्री कनुभाई देसाई, गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी, सूरत के महापौर दक्षेश मावाणी, विधायक संगीता पाटिल, शहर भाजपा प्रमुख निरंजन झांझमेरा और उद्यमी सांवर प्रसाद बुधिया, प्रमोद चौधरी, कैलाश हाकिम तथा कई अन्य लोग मौजूद रहे।  

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