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यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज के दिन 3 नवंबर को बंद किए जाएंगे

उत्तरकाशी  गंगोत्री धाम के कपाट अभिजीत मुहूर्त में अन्नकूट पर्व के अवसर पर 2 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे, जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट भैया दूज के दिन 3 नवंबर को बंद किए जाएंगे। परंपरा अनुसार, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद करने के मुहूर्त शारदीय नवरात्र के अवसर पर तय किए जाते हैं।  गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने दोनों धामों के कपाट बंद करने के शुभ मुहूर्त की घोषणा की। गंगोत्री धाम में भगवती गंगा के कपाट 2 नवंबर को दोपहर 12:14 बजे बंद होंगे। मां भगवती गंगा की डोली गंगोत्री से प्रस्थान कर रात्रि में भगवती मंदिर मारकंडेय में विश्राम करेगी और 3 नवंबर को मुखवा गांव में शीतकालीन प्रवास के लिए विराजमान हो जाएगी। गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने जानकारी दी कि परंपरा अनुसार गंगोत्री धाम के कपाट बंद करने का मुहूर्त शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन तय किया जाता है। इस वर्ष, मां गंगा की डोली 3 नवंबर को अपने मायके मुखवा में छह महीने के शीतकालीन प्रवास के लिए पहुंचेगी। इस अवसर पर मंदिर समिति के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। यमुनोत्री धाम के कपाट भी परंपरानुसार दशहरे के दिन तय किए गए मुहूर्त के अनुसार 3 नवंबर को भैया दूज पर बंद होंगे। यमुनोत्री धाम के रावल आशीष उनियाल ने बताया कि 3 नवंबर को सोमेश्वर देवता की डोली के साथ मां यमुना की डोली खरसाली गांव के लिए रवाना होगी, जहां शीतकालीन प्रवास होगा।  

ओपनएआई का दावा ChatGPT का इस्तेमाल US राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने के लिए हो रहा

न्यूयॉर्क पिछले 2-3 सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल काफी बढ़ा है। कंटेंट लिखने से लेकर कॉलेज प्रोजेक्ट लिखने तक में ChatGPT का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन अब एक नया दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दावा कोई और नहीं बल्कि चैटजीपीटी की डेवलपर कंपनी OpenAI ने किया है। क्या है OpenAI का दावा ओपनएआई ने बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कहा गया कि साइबर अपराधी अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए फर्जी कंटेंट बनाने के लिए चैटजीपीटी का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिसमें लंबे-चौड़े आर्टिकल और सोशल मीडिया कमेंट्स शामिल हैं, जिनका उद्देश्य चुनावों को प्रभावित करना है। कंपनी ने कहा कि ये एआई-जनरेटेड मैसेज असली न्यूज जैसे लग सकते हैं, जिससे आम नागरिक के लिए सच और झूठ में अंतर करना मुश्किल हो जाता है। AI से तैयार किया जा रहा फेक सोशल मीडिया कंटेंट रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई टेक्नोलॉजी का लाभ उठाकर, साइबर अपराधी, फर्जी न्यूज आर्टिकल, सोशल मीडिया पोस्ट और यहां तक कि मतदाताओं को गुमराह करने के लिए डिजाइन की गई धोखाधड़ी वाले कैंपेन कंटेंट भी बना सकते हैं। कंपनी ने कहा कि ओपनएआई ने इस साल चैटजीपीटी का दुरुपयोग करके प्रभाव संचालन के लिए 20 से अधिक प्रयासों को विफल किया है। अगस्त में, कंपनी ने चुनाव से संबंधित आर्टिकल बनाने वाले अकाउंट को ब्लॉक कर दिया। इसके अलावा जुलाई में, रवांडा के अकाउंट को उस देश के चुनावों को प्रभावित करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया कमेंट्स बनाने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। एआई से तैयार किए जा रहे सोशल मीडिया पोस्ट बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कंपनी ने पाया कि उसके AI मॉडल का इस्तेमाल फर्जी सामग्री, जैसे कि लंबे लेख और सोशल मीडिया कॉमेंट बनाने के लिए किया गया था, जिनका उद्देश्य चुनावों को प्रभावित करना था। ये AI जेनरेटेड मैसेज वास्तविक समाचार स्रोतों की शैली की नकल कर सकते हैं, जिससे आम नागरिकों के लिए सत्य और झूठ के बीच अंतर करना कठिन हो जाता है। कई अकाउंट किए गए ब्लॉक सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि साइबर अपराधी डेटा माइनिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके मतदाताओं के व्यवहार और प्राथमिकताओं का विश्लेषण कर सकते हैं और ऐसे मैसेज तैयार कर सकते हैं जो उन्हें आकर्षित करे। OpenAI ने इस वर्ष ChatGPT के दुरुपयोग के 20 से अधिक प्रयासों को विफल किया है। अगस्त में कंपनी ने चुनाव से संबंधित लेखों को बनाने वाले खातों को ब्लॉक किया। इसके अलावा जुलाई में रवांडा के कुछ अकाउंट को उस देश के चुनावों को प्रभावित करने वाले सोशल मीडिया कॉमेंट को बनाने के लिए प्रतिबंधित किया गया था। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने भी इस बात पर चिंता जताई है कि रूस, ईरान, और चीन एआई द्वारा किए गए कंटेंच और गलत सूचना के माध्यम से आगामी नवंबर चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इन देशों पर AI का इस्तेमाल करके फर्जी या विभाजनकारी जानकारी फैलाने का आरोप है, जिससे चुनावी के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है।

अमेरिका में 87 लाख लोगों को करनी पड़ रही है एक से ज्यादा नौकरी, फुल टाइम एम्प्लॉयमेंट में 10 लाख से ज्यादा गिरावट

न्यूयॉर्क  अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है। दुनियाभर से लोग बेहतर जिंदगी की तलाश में अमेरिका का रुख करते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से अमेरिका पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। इस देश के लोग महंगाई से परेशान हैं और उनके लिए एक नौकरी से गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। कई साल से लोगों की सैलरी नहीं बढ़ी है जबकि इस दौरान महंगाई में काफी ज्यादा इजाफा हो चुका है। सितंबर में वहां मल्टीपल जॉब यानी एक से ज्यादा नौकरी करने वाले लोगों की संख्या रेकॉर्ड 86.6 लाख पहुंच चुकी है। यह संख्या महामारी के पहले के मुकाबले 300,000 और 2008 के पीक के मुकाबले 600,000 अधिक है। इतना ही नहीं अमेरिका में पार्ट-टाइम जॉब्स की संख्या में पिछले तीन साल में 30 लाख की तेजी आई है। यह तीन साल के रेकॉर्ड 2.82 करोड़ के करीब पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि पिछले साल नवंबर से फुल टाइम एम्प्लॉयमेंट में 10 लाख से ज्यादा गिरावट आई है। अमेरिका में महंगाई चरम पर है। लोगों के लिए अपने परिवार का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। यही वजह है कि उन्हें एक से ज्यादा जगह नौकरी करनी पड़ रही है। वास्तविकता यह है कि महंगाई दर में कमी के बावजूद देश में कीमतों में गिरावट नहीं आई है। जानकारों का कहना है कि हाल-फिलहाल अमेरिकी लोगों को महंगाई से मुक्ति मिलने की उम्मीद नहीं है। अमेरिका का कर्ज अमेरिका का कर्ज 35 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। यह देश की जीडीपी का करीब 127% है। अमेरिका की जीडीपी का साइज 28.6 ट्रिलियन डॉलर है। पिछले एक साल में अमेरिका के कर्ज में 2.2 ट्रिलियन डॉलर की तेजी आई है जबकि इस दौरान देश की इकॉनमी 1.6 ट्रिलियन डॉलर बढ़ी है। जुलाई 2024 के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के प्रत्येक नागरिक पर 1,04,507 डॉलर का कर्ज है। हालत यह हो गई है कि अमेरिका को रोजाना दो अरब डॉलर ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। अगले दशक में देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है।

शांति के नोबेल पुरस्कार का ऐलान, जाने क्या-क्या मिलता है, क्या काम करने पर दिया

स्टॉकहोम  साल 2024 का शांति का नोबेल जापान के संगठन निहोन हिदान्क्यो को मिला है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने शुक्रवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि इस साल का नोबेल पीस प्राइज जापानी संगठन निहोन हिदान्क्यो को देने का फैसला लिया गया है। संगठन को ये पुरस्कार परमाणु हथियारों के खिलाफ लंबी मुहिम चलाने के लिए दिया जा रहा है। संगठन ने दुनिया को परमाणु मुक्त करने के लिए वर्षों से संघर्ष किया है। जापान के इस संगठन को उन लोगों ने बनाया है, जो दूसरे विश्व युद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में जिंदा बच गए थे। इनको हिबाकुशा भी बुलाया जाता है। नॉर्वे नोबेल समिति के अध्यक्ष जॉर्गन वात्ने फ्रिदनेस ने शुक्रवार को पुरस्कार की घोषणा करते हुए कहा, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी के परमाणु बम से बचे लोगों के इस जमीनी स्तर के आंदोलन को परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया हासिल करने के प्रयासों और गवाहों के माध्यम से यह प्रदर्शित करने के लिए शांति पुरस्कार मिल रहा है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल दोबारा कभी नहीं किया जाना चाहिए। समिति ने कहा- परमाणु हथियारों के खतरे को समझना होगा नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने कहा कि निहोन हिदान्क्यो को इस साल का नोबेल पीस प्राइज देने पर हम इस उत्साहजनक तथ्य को स्वीकार करते हैं कि बीते 80 वर्षों में किसी भी युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं किया गया है। निहोन हिदान्क्यो और हिबाकुशा के अन्य प्रतिनिधियों के असाधारण प्रयासों ने परमाणु निषेध की स्थापना में बहुत योगदान दिया है। समिति ने संगठन के प्रयासों की इसलिए भी तारीफ की है क्योंकि आज परमाणु हथियारों की होड़ बढ़ी है। परमाणु शक्तियां अपने शस्त्रागारों को अपग्रेड रही हैं। ऐसा लगता है कि नए देश परमाणु हथियार हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं। मानव इतिहास के इस क्षण में हमें यह याद दिलाना जरूरी है कि परमाणु हथियार दुनिया में अब तक देखे गए सबसे विनाशकारी हथियार हैं। नोबेल कमेटी ने कहा कि एक दिन परमाणु हमले को झेलने वाले लोग हमारे पास नहीं रहेंगे लेकिन जापान की नई पीढ़ी उनकी याद और अनुभवों को दुनिया के साथ साझा करती रहेगी। ये लोग दुनिया को ये बताते रहेंगे कि परमाणु हथियार कितने खतरनाक हैं और क्यों इनके खत्म हो जाने में ही सबकी भलाई है। बता दें कि नॉर्वेजियन नोबेल समिति को इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 286 आवेदन मिले थे, जिसमें से 89 संगठन थे।

कोलकाताआरजी कर की घटना की थीम पर बना दुर्गा पूजा का पंडाल, उड़ाए जनता के होश

कोलकाता पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के लिए बनाए गए पंडालों एक पंडाल को लज्जा थीम पर बनाया गया है। इस पंडाल में 8-9 अगस्त की रात को कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की घटना को दर्शाय गया है। जिसमें लेडी डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। लज्जा थीम पर बने इस पंडाल में इस घटना के दर्द को उकेरा गया है। इसमें मां दुर्गा ने अपनी आंखे ढंकी है और शेर भी शर्मिंदा दिखाया गया है। इस मामले की जांच फिलहाल सीबीआई के पास है। पंडाल से व्यक्त किया आक्रोश गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों की तरह बंगाल में नवरात्रि पर बड़ा उत्सव होता है। बंगाली जहां भी रहते हैं वहां वे आद्यशक्ति की उपासना दुर्गापूजा के तौर पर करते हैं। श्री सरस्वती और काली माता मंदिर परिषद के सचिव विश्वजीत सरकार ने बताया, पंडाल की थीम ‘लज्जा’ और टैग लाइन विचार चाई मतलब इंसाफ चाहिए है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के पूजा पंडाल देश की ऐतिहासिक संस्कृति की झलक पेश करते रहे हैं। इस बार आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या से कोलकाता वासी इतने व्यथित हैं इसके चलते उन्होंने लोगों के भाव को पंडाल में भी उतार दिया है। छह संकेतों में दर्शाया गुस्सा कोलकाता के इस पंडाल में छह संकेतों के जरिए घटना के प्रति आक्रोश को बताया गया है। पहले संकेत में मां दुर्गा ने चेहरा ढंका ढंक लिया है। बंगाल में महिलाओं पर शारीरिक- मानसिक अत्याचार यानी दुष्कर्म और हत्या की घटनाओं को देखकर मां दुर्गा लज्जित हैं। दूसरे संकेत में मां के वाहन शेर का सिर झुका है। जंगल का राजा खुद शक्तिशाली है, पर उसने इन घटनाओं से शर्मसार होकर सिर झुका लिया है। तीसरे संकेत में पंडाल में काला कपड़ा है। जो दुष्कर्म और हत्या का विरोध के तौर पर लगाया गया है। चौथे प्रतीक में पंडाल में लाल रंग की रोशनी है। जाे यह लगातार अपराधों में बह रहे खून को बताती है। पांचवें संकेत में मां के एक तरफ एप्रन लटकाया है। जो अपराधियों-रसूखदारों के आगे चिकित्सा समुदाय की बेबसी को व्यक्त करता है। छठवें संकेत में मां के सामने महिला का शव है। यह कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज सहित पश्चिम बंगाल में महिलाओं के साथ हुए अत्याचार को बताता है।

धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक कपड़ों में पहुंची मॉडल, लोगो ने सुनाई खरी -खरी

कोलकाता धार्मिक स्थल पर आपत्तिजनक कपड़ों का मामला एक बार फिर सामने आया है। ताजा घटना कोलकाता की है, जहां सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के कपड़ों पर बवाल मच गया। पंडाल में इस तरह जाने के चलते सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है। खबरें हैं कि तस्वीर में नजर आ रहीं हेमश्री भद्रा साल 2016 में मिस कोलकाता का खिताब भी जीत चुकी हैं। Instagram पर भद्रा के आधिकारिक हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिसमें वह कुछ अन्य महिलाओं के साथ नजर आ रही हैं। इससे जुड़ा एक फोटो सन्नति मित्रा नाम की सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने शेयर किया है। खास बात है कि भद्रा को इंस्टाग्राम पर करीब 9 लाख फॉलोअर्स हैं। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मित्रा को फॉलो करने वालों की संख्या 16 लाख के करीब है। जान से मारने की धमकी सोशल मीडिया यूजर्स इन पोस्ट्स पर काफी भड़के हुए नजर आ रहे हैं। इंस्टाग्राम पर एक यूजर ने तो तीनों महिलाओं को जान से मारने तक की धमकी दे दी है। एक यूजर ने लिखा, ‘आपको शर्म आनी चाहिए।’ मित्रा की पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा, ‘आप एक नए ट्रेंड की शुरुआत कर रही हैं। कल को और भी लड़कियां ऐसे जाएंगी, क्या यह सही है। आप खुद सोचिए।’ सोशल की जनता ने उन्हें घर में ऐसे कपड़े पहनने की सलाह दी। एक यूजर ने कहा, ‘हम जानते हैं कि क्या पहनना है और क्या नहीं यह आपकी च्वाइस है, लेकिन देवी के आसपास ऐसे कपड़े नहीं पहनने चाहिए।’ एक यूजर ने कहा, ‘यह बहुत ही अपमानजनक है। हमेशा मंदिर में अपना सिर ढंकना चाहिए।’

बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल

 ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों हमला का जवाब हमला से देने की धमकी दी बेरूत: इजरायली एयर स्रा सइक में 22 की मौत, हिजबुल्लाह कमांडर बच निकलने में रहा कामयाब बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल तेहरान/तेल अवीव  ईरान ने गुप्त राजनयिक चैनलों के माध्यम से फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व में अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करने की धमकी दी है। तेहरान ने कहा कि अगर उनके क्षेत्रों या हवाई क्षेत्रों का उपयोग ईरान पर हमला करने के लिए किया जाता है तो वह इसका जवाब हमला से देगा। यह जानकारी वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अरब अधिकारियों के हवाले से दी। रिपोर्ट में गुरुवार को कहा गया कि तेहरान ने जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर को संबंधित चेतावनी भेजी है। इन देशों ने कथित रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन को सूचित किया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई के लिए अमेरिका और इज़रायल को अपने सैन्य संरचना या हवाई क्षेत्र प्रदान नहीं करना चाहते हैं। पिछले सप्ताह, ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने कहा था कि “अमेरिका सहित इज़रायल का समर्थन करने वाले देशों का सीधा हस्तक्षेप और ईरान के खिलाफ उनकी आक्रामकता की स्थिति में, मध्य पूर्व में उनके ठिकानों और हितों को एक साथ एक शक्तिशाली हमले का सामना करना पड़ेगा।” उत्तरी गाजा में तीन सैन्यकर्मियों की मौत : आईडीएफ  इज़रायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने  कहा कि उत्तरी गाजा पट्टी में उसके तीन रिजर्व सैनिक मारे गए। आईडीएफ ने सैनिकों के नाम भी प्रकाशित किए, जो कि 5460 प्रशासनिक सहायता इकाई के सदस्य थे। इज़रायली सेना रेडियो ने कहा कि जबालिया क्षेत्र में एक आपूर्ति मार्ग पर एक विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से तीन सैनिक मारे गए। इस सप्ताह की शुरुआत में, आईडीएफ ने जबालिया क्षेत्र में एक नए आतंकवाद विरोधी अभियान की घोषणा की थी। उल्लेखनीय है कि 07 अक्टूबर, 2023 को मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद से, इज़रायल ने विभिन्न मोर्चों पर 734 सैनिकों को खो दिया है, जिसमें गाजा पट्टी में जमीनी अभियानों में मारे गए लगभग 350 सैनिक भी शामिल हैं। बेरूत पर इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हुई, 117 घायल मध्य बेरूत के घनी आबादी वाले इलाके अल-नुएरी को निशाना बनाकर  शाम किए गए इजरायली हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है और 117 लोग घायल हुए हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने नवीनतम अपडेट में यह जानकारी दी। अल जज़ीरा टीवी चैनल के अनुसार, हवाई हमले का लक्ष्य कथित रूप से हिजबुल्लाह के संपर्क और समन्वय इकाई के प्रमुख वाफिक सफा को निशाना बनाना था लेकिन वह हमले में बच गए। यह तीसरी बार है जब इज़रायल ने अल कोला और अल-बचौरा क्षेत्रों पर हमले के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत को निशाना बनाया है। इज़रायल ने हाल ही में बेरूत और उसके उपनगरों पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए हैं, मुख्य रूप से हिजबुल्लाह के अधिकारियों और सुविधाओं को निशाना बनाया है। इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष एक साल पहले तब शुरू हुआ था जब हिजबुल्लाह ने गाजा युद्ध की शुरुआत में हमास के समर्थन में इजराइल पर रॉकेटों की बौछार की थी। बेरूत: इजरायली एयर स्रा सइक में 22 की मौत, हिजबुल्लाह कमांडर बच निकलने में रहा कामयाब  बेरूत के घनी आबादी वाले क्षेत्र अल-नूइरी को निशाना बनाकर की गई इजरायली एयर स्ट्राइक में मरने वालों की संख्या कम से कम 22 हो गई और 117 लोग घायल हुए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने नवीनतम अपडेट में यह जानकारी दी ।  एयर स्ट्राइक कथित तौर पर हिजबुल्लाह के संपर्क और कोऑर्डिनेशन यूनिट के प्रमुख वाफिक सफा को निशाना बनाकर की गई। हालांकि सफा हमले में बच गया। सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने अल जजीरा टीवी चैनल के हवाले से बताया कि यह तीसरी बार है जब इजरायल ने अल कोला और अल-बचौरा इलाकों पर हमला करने के बाद लेबनान की राजधानी बेरूत को निशाना बनाया। रॉयटर्स की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान सरकार ने अपने दैनिक अपडेट में कहा कि पिछले साल से लेबनान में जारी इजरायली हमलों में कम से कम 2,169 लोग मारे गए। इनमें से ज्यादातर की मौत 23 सितंबर के बाद हुई, जब इजरायल ने अपने सैन्य अभियान का विस्तार किया। मृतकों की संख्या में नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं किया गया। बता दें 23 सितंबर से, इजरायल ने लेबनान में हवाई हमले तेज कर दिए। उसका कहना है कि यह कार्रवाई लेबानानी संगठन हिजबुल्ला के खात्मे के लिए की जा रही है। 27 सितंबर को बेरूत के दक्षिणी उपनगर में एक महत्वपूर्ण हमले में हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह और उसके कई सहयोगी मारे गए। वहीं इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में जमीनी सैन्य अभियान भी शुरू कर दिया। इजरायली हमलों की वजह से लेबनान में लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। 8 अक्टूबर, 2023 को हिजबुल्लाह ने गाजा में हमास के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए इजरायल पर रॉकेट दागने शुरू किए थे। नवीनतम घटनाक्रम इसी संघर्ष का विस्तार है। पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर एक बड़ा हमला किया था जिसमें करीब 1200 लोगों की मौत हुई थी जबकि 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया गया। ऐसा माना जाता है कि 100 से अधिक बंधक अब भी गाजा में है। इस हमले के बाद इजरायल ने हमास के कंट्रोल वाली गाजा पट्टी में सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी। अलजजीरा की शुक्रवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में इजरायली हमलों में कम से कम 42,065 लोग मारे गए हैं और 97,886 घायल हुए हैं।      

दुर्घटना के दूसरे दिन ही मलबे के साथ मिल गए थे दो सदस्यों के पार्थिव अवशेष

नई दिल्ली अरब सागर में पिछले माह गिरकर डूबे भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव के लापता पायलट इन कमांड का पार्थिव शरीर पोरबंदर से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र से बरामद कर लिया गया है। दुर्घटना के दूसरे दिन ही हेलीकॉप्टर का मलबा मिलने के साथ चालक दल के दो सदस्यों के पार्थिव अवशेष समुद्र से बरामद किए गए थे। अब चालक दल के तीसरे सदस्य के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आईसीजी की परंपराओं और सम्मान के अनुसार किया जाएगा। गुजरात में चक्रवाती मौसम के दौरान बिगड़े हालात में मोटर टैंकर हरि लीला से गंभीर रूप से घायल चालक दल के सदस्य को निकालने के लिए आईसीजी के एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) मार्क-III ध्रुव को लगाया गया था। पिछले माह 2 सितंबर की रात लगभग 11.00 बजे मेडिकल निकासी मिशन पर निकले एएलएच हेलीकॉप्टर में दो पायलट और दो गोताखोर सवार थे। जब हेलीकॉप्टर निकासी के लिए पोत के पास पहुंच रहा था, उसी समय 11.15 बजे आपातकालीन लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर चालक दल समेत समुद्र में गिरकर डूब गया। इसके बाद चलाये गए सर्च ऑपरेशन के दौरान 03 सितम्बर को हेलीकॉप्टर का मलबा मिल गया और एक गोताखोर को जिंदा बरामद कर लिया गया। इसके बाद आईसीजी ने हेलीकॉप्टर के दोनों लापता पायलटों और एक गोताखोर की तलाश में 04 जहाजों और दो विमानों को लगाया। सर्च ऑपरेशन के दौरान दूसरे दिन ही हेलीकॉप्टर (फ्रेम संख्या सीजी 863) का मलबा बरामद होने के बाद चालक दल के दो सदस्यों कमांडेंट (जेजी) विपिन बाबू और प्रधान नाविक करण सिंह के शव मिल गए। इसके बाद आईसीजी ने अपने एएलएच ध्रुव बेड़े की सुरक्षा जांच के आदेश दिए और घटना की गहन जांच होने तक मल्टी मिशन हेलीकॉप्टरों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी से पता चला है कि तटरक्षक बल के पोरबंदर स्थित 835 स्क्वाड्रन का हेलीकॉप्टर समुद्र में नाक के बल (नोज ड्राइव) गिरा था। आईसीजी ने चालक दल के लापता तीसरे सदस्य की तलाश में व्यापक खोज और बचाव अभियान जारी रखा। आईसीजी के कमांडर अमित उनियाल ने बताया कि भारतीय नौसेना और अन्य हितधारकों के साथ लगातार सर्च ऑपरेशन का नतीजा रहा कि मिशन के पायलट इन कमांड कमांडेंट राकेश कुमार राणा का शव 10 अक्टूबर को पोरबंदर से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र से बरामद किया गया है। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आईसीजी की परंपराओं और सम्मान के अनुसार किया जाएगा। गुजरात में पोरबंदर के पास अरब सागर में दो सितंबर को ‘एएलएच एमके-III’ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के बाद से चालक दल के तीन सदस्य लापता हो गए थे। हालांकि बाद में चालक दल के दो सदस्यों के शव तो मिल गए थे, लेकिन इस मिशन के पायलट राकेश कुमार राणा की तलाश जारी थी। तटरक्षक बल की ओर से जारी की गई एक विज्ञप्ति में बताया कि राणा का शव 10 अक्टूबर को पोरबंदर से लगभग 55 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में समुद्र में पाया गया। इसमें बताया गया, ‘‘तटरक्षक बल ने भारतीय नौसेना और अन्य हितधारकों के साथ मिशन के पायलट-इन-कमांड राकेश कुमार राणा का पता लगाने के लिए अथक प्रयास जारी रखे।’’ विज्ञप्ति में बताया गया है, ‘‘सेवा परम्पराओं और सम्मान के अनुसार ही उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। भारतीय तटरक्षक बल के तीन बहादुर जवानों को सलाम, जिन्होंने अपना कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।’’ इसमें बताया गया है कि भारतीय तटरक्षक का एक उन्नत हल्का हेलीकॉप्टर दो सितंबर की रात को मोटर टैंकर ‘हरि लीला’ पर सवार चालक दल के एक घायल सदस्य को निकालने के प्रयास में अरब सागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें चालक दल के चार सदस्य सवार थे। विज्ञप्ति में बताया गया कि हेलीकॉप्टर पर सवार चालक दल चार सदस्यों में से एक गोताखोर गौतम कुमार को तुरंत बचा लिया गया था, जबकि तीन लापता हो गए थे। एक दिन बाद पायलट विपिन बाबू और गोताखोर करण सिंह का शव खोज लिया गया, लेकिन राणा को नहीं ढूंढा जा सका था। इसके बाद बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया।      

अगर कोई गलत धारणा है, तो उसे बदलना होगा, अगर कोई भ्रम या बेकार का अहंकार है तो उसे खत्म करना होगा- सुरेश भैयाजी

जयपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वारा विजयादशमी के मौके पर पथ संचालन का कार्यक्रम किया जाता है। इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। जयपुर में भी इसको लेकर तैयारी हो रही है। त्रिवेणी नगर स्थित सामुदायिक केंद्र में स्वयंसेवक इकट्ठा हुए और इसका अभ्यास किया। इस दौरान आरएसएस नेता सुरेश भैयाजी जोशी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जाति व्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही है। सुरेश भैयाजी ने कहा, “जाति का निर्धारण जन्म के आधार पर होता है। क्या कोई बता सकता है कि हरिद्वार किस जाति का है? क्या 12 ज्योतिर्लिंग किसी जाति के हैं? क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में 51 शक्तिपीठ किसी जाति के हैं? जो लोग खुद को हिंदू मानते हैं और देश के सभी हिस्सों में रहते हैं । वे इन सभी को अपना मानते हैं। फिर विभाजन कहां है?” उन्होंने आगे कहा, ”जिस तरह से राज्यों की सीमाएं हमारे बीच कोई विभाजन पैदा नहीं कर सकती हैं, उसी तरह जन्म के आधार पर मिलने वाली चीजें हमें विभाजित नहीं कर सकती हैं। अगर कोई गलत धारणा है, तो उसे बदलना होगा। अगर कोई भ्रम या बेकार का अहंकार है तो उसे खत्म करना होगा।”

दुनिया में संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं बल्कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान से होगा -पीएम मोदी

वियेनतिएन/नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया में संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान से नहीं बल्कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करके किया जा सकता है। पीएम मोदी ने यह बात 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ईएएस) के अपने संबोधन में कही। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “ग्लोबल साउथ के देश, दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव झेल रहे हैं। हर कोई जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली चाहता है, चाहे वह यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया।” प्रधानमंत्री ने कहा: “हमारा दृष्टिकोण विकासवादी होना चाहिए न कि विस्तारवादी।” सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी पहले ऐसे नेता हैं जिन्हें मेजबान और इनकमिग चेयर के बाद पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन को संबोधित करने के लिए कहा गया। आसियान में भारत की भूमिका और महत्व को मान्यता देते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया। वे वहां मौजूद एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने सबसे अधिक संख्या में ईएएस (19 में से नौ) में भाग लिया था। टाइफून यागी के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “हमने ऑपरेशन सद्भाव के माध्यम से मानवीय मदद प्रदान की। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दक्षिण चीन सागर की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हित में है। समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के तहत समुद्री गतिविधियों की वकालत करते हुए उन्होंने एक मजबूत और प्रभावी आचार संहिता का सुझाव दिया जो क्षेत्रीय देशों की विदेश नीति पर प्रतिबंध नहीं लगाए। म्यांमार की स्थिति पर उन्होंने कहा कि भारत म्यांमार की स्थिति के प्रति आसियान के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक पड़ोसी देश के रूप में, “हम अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करना जारी रखेंगे।” उन्होंने लोकतंत्र को बहाल करने के लिए मानवीय सहायता और उचित कदम उठाने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा, “हमारा मानना है कि इसके लिए म्यांमार को शामिल किया जाना चाहिए, अलग-थलग नहीं किया जाना चाहिए।” प्रधानमंत्री मोदी ने साइबर, समुद्र और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने की भी मांग की। पीएम मोदी ने सम्मेलन में शामिल देशों को नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की जानकारी दी। साथ ही इन देशों को जून में नालंदा में आयोजित होने वाले उच्च शिक्षा प्रमुखों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। अगला पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन मलेशिया में आयोजित किया जाएगा। मोदी ने सैन्य संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूरोप और पश्चिमी एशिया में चल रहे सैन्य संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने शुक्रवार को दोहराया कि समस्याओं का समाधान रणभूमि से नहीं निकल सकता है इसलिए मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए, संवाद एवं कूटनीति के रास्ते पर आना होगा। मोदी ने यहां 19वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में विस्तारवाद की नीति पर भी कड़ा प्रहार करते हुए इस बात पर जोर दिया कि समस्याओं के समाधान के प्रयासों में संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का आदर करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में, “टाइफून यागी” से प्रभावित लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं और कहा कि इस कठिन घड़ी में, ऑपरेशन सद्भाव के माध्यम से भारत ने मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने सदैव आसियान एकता और केंद्रीयता का समर्थन किया है। भारत के हिन्द प्रशांत विज़न और क्वाड सहयोग के केंद्र में भी आसियान है। भारत के “हिन्द प्रशांत महासागरीय पहल” और “हिन्द प्रशांत पर आसियान के दृष्टिकोण” के बीच गहरी समानताएं हैं। एक स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी, समृद्ध और नियम आधारित हिन्द प्रशांत, पूरे क्षेत्र की शांति और प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। दक्षिण चीन सागर की शांति, सुरक्षा और स्थिरता पूरे हिन्द प्रशांत क्षेत्र के हित में है। मोदी ने कहा, हमारा मानना है कि समुद्री गतिविधियाँ यूएनक्लोस के अंतर्गत संचालित होनी चाहिए। नौवहन और हवाई परिवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना आवश्यक है।एक ठोस और प्रभावी आचार संहिता बनायी जानी चाहिए। और इसमें क्षेत्रीय देशों की विदेश नीति पर अंकुश नहीं लगाए जाने चाहिए। हमारा रुख विकासवाद का होना चाहिए, न कि विस्तारवाद का। उन्होंने कहा कि म्यांमार की स्थिति पर हम आसियान दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं। हम पांच सूत्रीय सहमति का भी समर्थन करते हैं। साथ ही, हमारा मानना है कि मानवीय सहायता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।और लोकतंत्र की बहाली के लिए उपयुक्त कदम भी उठाए जाने चाहिए। हमारा मत है कि, इसके लिए, म्यांमार को अलग थलग नहीं, बल्कि साथ में रखना होगा। एक पड़ोसी देश के नाते, भारत अपना दायित्व निभाता रहेगा। मोदी ने कहा, विश्व के अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का सबसे नकारात्मक प्रभाव ग्लोबल साउथ के देशों पर हो रहा है।सभी चाहते हैं कि चाहे यूरेशिया हो या पश्चिम एशिया, जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली हो।” उन्होंने कहा,” मैं बुद्ध की धरती से आता हूँ, और मैंने बार-बार कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है। समस्याओं का समाधान रणभूमि से नहीं निकल सकता। संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का आदर करना आवश्यक है। मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए, संवाद एवं कूटनीति को प्रमुखता देनी होगी। विश्वबंधु के दायित्व को निभाते हुए, भारत इस दिशा में हर संभव योगदान करता रहेगा।” प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसका सामना करने के लिए, मानवता में विश्वास रखने वाली ताकतों को एकजुट होकर काम करना ही होगा। और, साइबर, समुद्र और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बल भी देना होगा। उन्होंने कहा कि नालंदा का पुनरुद्धार, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दी गयी हमारी प्रतिबद्धता थी।इस वर्ष जून में, नालंदा विश्वविद्यालय के नए परिसर का उद्घाटन करके हमने इसे पूरा किया है। वह, यहाँ उपस्थित सभी देशों को नालंदा में होने वाले उच्च शिक्षा के प्रमुखों के सम्मेलन के लिए आमंत्रित करते हैं।    

युवक हो रहा था पेट दर्द से परेशान था, आंत में फसा था जिंदा कॉकरोच

नई दिल्ली दिल्ली के एक निजी अस्पताल में 23 साल के युवक की छोटी आंत से जिंदा कॉकरोच निकाला गया। कॉकरोच करीब तीन सेंटीमीटर का था। मरीज करीब दो-तीन दिनों से पेट दर्द से परेशान था। पाचन क्रिया भी प्रभावित हो गई थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को कारण का पता नहीं चला। समस्या बढ़ने पर अस्पताल के गैस्ट्रो विभाग के डॉक्टर शुभम वत्स ने टीम के साथ मिल कर मरीज की जीआई एंडोस्कोपी करने का निर्णय लिया। इस जांच के दौरान मरीज के पेट में जिंदा कॉकरोच दिखा। कॉकरोच मरीज की छोटी आंत में चिपका हुआ था। यह देख डॉक्टरों ने तुरंत कॉकरोच को बाहर निकालने का फैसला लिया। डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी कर छोटी आंत से जिंदा कॉकरोच को निकाला। डॉक्टरों ने बताया कि एंडोस्कोपी करने में करीब 10 मिनट का समय लगा। इस दौरान कॉकरोच को आसानी से बाहर खींच लिया गया। डॉक्टर शुभम ने कहा कि छोटी आंत में जिंदा कॉकरोच मरीज के लिए खतरनाक था। लंबे समय तक यदि वह शरीर में रहता तो मरीज को नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि कॉकरोच ऐसा जीव है जो किसी भी स्थिति में जिंदा रह सकता है। एंडोस्कोपी की मदद से तत्काल इस कॉकरोच को बाहर निकालने की सर्जरी की। उन्होंने कहा कि जब मरीज से पूछा गया कि यह कॉकरोच उनके पेट में कैसे गया तो उसके पास कोई जवाब नहीं था। डॉक्टरों का अनुमान है कि खाना खाते समय या दूसरे कारणों से कॉकरोच पेट में चला गया होगा। यदि समय पर इस कॉकरोच को नहीं निकाला जाता तो संक्रमण की वजह से यह घातक हो सकता था।  

15 अक्टूबर को भव्य शपथ ग्रहण समारोह में नायब सिंह सैनी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे

चंडीगढ़ हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में नायब सिंह सैनी एक बार फिर सीएम पद की शपथ लेंगे। 15 अक्टूबर को आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में नायब सिंह सैनी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। नायब सिंह सैनी के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। शपथ ग्रहण समारोह पंचकूला में आयोजित किया जाएगा, जहां लगभग 50 हजार लोगों के उपस्थित रहने की संभावना है। समारोह में भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। इसके अलावा कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे। जानकारी के अनुसार, हरियाणा सरकार की नई कैबिनेट में अनिल विज, कृष्ण लाल मिड्ढा, श्रुति चौधरी, अरविंद कुमार शर्मा, विपुल गोयल , निखिल मदान को जगह मिल सकती है। गौरतलब है कि, नायब सिंह सैनी ने दिल्ली में बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने राजधानी में केंद्रीय मंत्री और हरियाणा भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान से भी मुलाकात की थी। विधानसभा चुनाव के दौरान ही भाजपा की ओर से संकेत दिए गए थे कि अगली सरकार के भी मुखिया नायब सिंह सैनी बनेंगे। भाजपा ने मार्च 2024 में नायब सिंह सैनी को हरियाणा भाजपा अध्यक्ष पद से मुख्यमंत्री बनाया था। उस समय भाजपा मनोहर लाल के साढ़े नौ साल के कार्यकाल के बाद सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही थी। बता दें कि हरियाणा में भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 48 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, कांग्रेस 37 सीटों पर ही सिमटकर रह गई। इस चुनाव में जजपा और आम आदमी पार्टी का सफाया हो गया और इनेलो सिर्फ दो सीट जीतने में सफल रही। प्रदेश की तीन सीटें अन्य के खाते में गई हैं।    

एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का मंच है- PM मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाओस की यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन(EAS) को संबोधित करते हुए हिंद प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मंच से हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर काफी जोर दिया। इससे पहले 4 नवंबर, 2019 की बात है, जब इसी अंतरराष्ट्रीय मंच से पीएम मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभर रहे मतभेदों पर बात की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक मुक्त, खुला, समावेशी, पारदर्शी, नियम आधारित, शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने का तार्किक मंच है, जहां संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता और समुद्री कानूनों के पालन पर जोर दिया जाता है। उस वक्त पीएम ने’इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव (IPOI)’ का प्रस्ताव दिया था, जिससे हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित, भयमुक्त और स्थिर बनाया जा सके और इसके लिए इच्छुक राष्ट्रों के बीच सहयोगी ढांचा बनाया जा सके। जानते हैं मोदी के उसी भयमुक्त समुद्री क्षेत्र के विजन के बारे में, यह इतना जरूरी क्यों है। यह भी जानेंगे कि आखिर ये मंच किस तरह का है। समुद्री सुरक्षा को लेकर क्या हैं मोदी के 7 सूत्र राजनीतिक विश्लेषक डॉ. राजीव रंजन गिरि कहते हैं कि 4 नवंबर, 2019 को भारत ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अपने प्रस्ताव में समुद्री सहयोग और सहभागिता के 7 मूल पहलुओं की पहचान की थी, जो रणनीतिक रूप से मोदी के 7 तीर भी हैं। ये हैं-समुद्री सुरक्षा, समुद् इकोसिस्टम, समुद्री रिसोर्स, क्षमता निर्माण और संसाधनों का बंटवारा, आपदा जोखिम में कमी और मेनेजमेंट, विज्ञान, प्रौद्योगिकी सहयोग और कारोबारी कनेक्टिविटी व समुद्री परिवहन। पीएम मोदी के यही सूत्र हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन को दबदबे को कम कर सकते हैं। क्या है पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन का गठन 2005 में किया गया था। यह हिंद प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर रणनीतिक बातचीत और सहयोग के लिए 18 देशों का एक मंच है। इस मंच का विचार सबसे पहले 1991 में तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर बिन मुहम्मद ने दिया था। उन्होंने उस वक्त पूर्वी एशिया समूह बनाने की बात की थी। पहला पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन 14 दिसंबर, 2005 को कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित किया गया था। भारत इस मंच के फाउंडर मेंबर में शामिल भारत पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के संस्थापक सदस्यों में शामिल है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन (ASEAN) के 10 सदस्य देश शामिल हैं-ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के साथ ही 8 सदस्य देश ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, भारत, न्यूज़ीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका है। दुनिया की जीडीपी में 58 फीसदी हिस्सेदारी डॉ. राजीव रंजन गिरि के अनुसार, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के सदस्य विश्व की लगभग 54% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में इनकी 58% भागीदारी है। पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन एक आसियान केंद्रित मंच है। इसकी अध्यक्षता केवल एक आसियान सदस्य द्वारा की जा सकती है। पूर्वी एशिया-शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कौन करता है ASEAN का अध्यक्ष EAS का भी अध्यक्ष होता है तथा प्रतिवर्ष 10 ASEAN सदस्य देशों के मध्य बारी-बारी से इसकी अध्यक्ष की जाती है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं-पर्यावरण और ऊर्जा, शिक्षा, वित्त, वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, आसियान देशों के मध्य संपर्क, आर्थिक व्यापार और सहयोग, खाद्य सुरक्षा और समुद्री सहयोग। क्या यह अमेरिका-यूरोप के बाद तीसरा ध्रुव भारतीय वैश्विक परिषद में रिसर्चर रहे डॉ. टेम्जेनमरेन एओ के एक लेख ‘हिंद-प्रशांत और भू-राजनीतिक क्षेत्र में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की भूमिका’ में कहा गया है कि 2021 में EAS सदस्यों ने दुनिया की करीब 54% आबादी का प्रतिनिधित्व किया। इसके सदस्य देशों ने अनुमानित रूप से 57.2 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का कारोबार किया, जो वैश्विक जीडीपी का 59.5% है। यह मज़बूत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं वाला क्षेत्र है। इसे अमेरिका और यूरोप के बाद विश्व अर्थव्यवस्था का तीसरा ध्रुव माना जाता है। भारत, जापान, चीन और कोरिया वर्ल्ड इकोनॉमी में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में 4 प्रमुख आर्थिक भागीदार देश जापान, चीन, भारत और कोरिया 12 उच्च रैंकिंग वाली वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। EAS देशों के बीच वित्तीय और मौद्रिक सहयोग इतना ज्यादा है कि उनका संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार 3 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है। समंदर पर है चीन की टेढ़ी नजर, भारत से दुश्मनी भारत-जापान समेत चीन का हिंद प्रशांत क्षेत्र में तकरीबन हर देश के साथ कुछ न कुछ विवाद बना हुआ है। दरअसल, चीन के मंसूबे नापाक हैं। उसकी दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपना प्रभुत्व बढ़ाने की टेढ़ी नजर है। इसके अलावा, इस क्षेत्र में चीन कारोबार और निवेश के क्षेत्र में भी भारत को अपना प्रतिद्वंद्वी मानता है। समुद्री सुरक्षा समेत मुक्त कारोबार पर भी जोर डॉ. टेम्जेनमरेन एओ कहते हैं कि EAS का मकसद समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ समंदर में मुक्त कारोबारी क्षेत्र विकसित करना भी है। यही वजह है कि पीएम मोदी समंदर को भयमुक्त बनाना चाहते हैं। वह चाहते हैं कि समुद्री सुरक्षा होने से हिंद-प्रशांत देशों के बीच समुद्री कारोबार ज्यादा बढ़ेगा। दरअसल, इस इलाके में क्षेत्रीय शक्तियों के बीच सैन्य बजट में बढ़ोतरी शांति, सुरक्षा और समृद्धि के व्यापक मकसद को कमजोर करता है। भारत के लिये EAS की क्या अहमियत है? भारत के लिए EAS इसके तेजी से बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक ताकत को मान्यता देने वाला मंच है। ASEAN और अन्य बहुपक्षीय देशों के साथ बहुआयामी संबंध बनाने और द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के लिये भारत ने अपनी एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policies) पर बल दिया है जिसके लिये EAS महत्त्वपूर्ण साबित होगा। मुद्री क्षेत्र में भारत बन सकता है बड़ा पॉवर दक्षिण चीन सागर में चीन की दबंगई और उसके बढ़ते निवेश की प्रकृति ने आसियन देशों में भारत को एक ऐसी संभावित शक्ति के रूप में देखने के लिये प्रेरित किया है जो चीन को संतुलित कर सकता है। भारत समुद्री क्षेत्र में बड़ा पॉवर बन सकता है। भारत की शक्ति सेवा क्षेत्र और सूचना-प्रौद्योगिकी में है, वहीं जापान के पास एक मजबूत पूंजी आधार भी है।

लेबनानियों को शरण दे रहा सीरिया, 24 घंटों में 5,959 लोगों ने की सीमा पार

दमिश्क  लेबनान से पिछले 24 घंटों में लगभग 5,959 लोगों ने सीरियाई सीमा पार किया। यह जानकारी रूसी रक्षा मंत्रालय के सीरिया में विरोधी पक्षों के सुलह केंद्र के उप प्रमुख कैप्टन प्रथम रैंक ओलेग इग्नास्युक ने दी। इग्नासियुक ने कहा, “पिछले 24 घंटों में, 5,959 लोगों ने लेबनान से अल अरिदा, जौसिह, दबौसिह, जेसर अल क़मार और जदीदेत याबस सीमा क्रॉसिंग के माध्यम से सीरियाई अरब गणराज्य की सीमा पार की है।” इजरायल 01 अक्टूबर से दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह लड़ाकों के खिलाफ जमीनी अभियान चला रहा है और साथ ही हवाई हमले भी कर रहा है। नुकसान के बावजूद, हिजबुल्लाह जमीनी स्तर पर इजरायली सैनिकों से लड़ रहा है और सीमा पार रॉकेट दाग रहा है। इज़रायल का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य उत्तर में गोलाबारी से पलायन कर चुके 60,000 निवासियों की वापसी के लिए परिस्थितिया बनाना है।

महादेव बेटिंग एप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को यूएई (UAE) में गिरफ्तार, भारत लाने की तैयारी

नई दिल्ली महादेव बेटिंग ऐप केस में भारत की जांच एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है. सूत्रों के मुताबिक बेटिंग ऐप के मालिक सौरभ चंद्राकर को इंटरपोल ने डिटेन कर लिया है, जिसके बाद उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सूत्रों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम महादेव ऐप के मालिक सौरभ चंद्राकर को एक हफ्ते के अंदर भारत लेकर आ सकती है. बताया जा रहा है कि इंटरपोल ने सीबीआई को सूचित किया है, जो नोडल एजेंसी है. बता दें कि इस मामले में ईडी ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. बता दें कि महादेव ऐप के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर का D कंपनी (दाऊद इब्राहिम) से भी कनेक्शन है. देश के कई राज्यों में महादेव ऐप के खिलाफ केस दर्ज है. ED में भी ऐप को लेकर शिकायत दर्ज की गई है. बता दें कि इससे पहले दिसंबर 2023 को भी सौरभ चंद्राकर को दुबई में हिरासत में लेने के बाद ‘घर में नजरबंद’ किया गया था. केंद्र ने महादेव बेटिंग ऐप पर लगाया बैन केंद्र सरकार ने 5 नवंबर 2023 को महादेव बेटिंग ऐप समेत अवैध सट्टेबाजी वाले 22 ऐप और वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था. ED की सिफारिशों के बाद इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी अधिनियम की धारा 69ए के तहत आदेश जारी किए गए थे. महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामला तब सुर्खियों में आया था, जब ईडी ने दावा किया कि उसने एक ‘कैश कूरियर’ के ईमेल स्टेटमेंट को रिकॉर्ड किया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यूएई में स्थित ऐप प्रमोटरों से कथित तौर पर 508 करोड़ रुपये लिए थे. हालांकि, बघेल ने आरोपों को खारिज किया था. ईडी ने 8 नवंबर को दर्ज किया था केस महादेव बेटिंग ऐप और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ धोखाधड़ी को लेकर मुंबई पुलिस ने 8 नवंबर 2023 को केस दर्ज किया था. आरोपियों पर चीटिंग करने और जुआ खिलाने के आरोप लगे थे. इस मामले में माटुंगा पुलिस थाने में सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल समेत 30 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज हुआ था, जिसे बाद में मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंपा गया और बाद में इसकी जांच के लिए एक एसआईटी बनाई गई. दरअसल, इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता ने निचली अदालत में याचिका दायर की थी. इसमें ऐप और इसके प्रमोटर्स के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माटुंगा पुलिस को केस दर्ज करने को कहा था. पुलिस ने बताया कि सौरभ, रवि आदि के खिलाफ FIR दर्ज की गई. FIR के मुताबिक, आरोपियों ने लोगों को करीब 15 हजार करोड़ का चूना लगाया है.  

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