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बलूचिस्तान में खदान में काम करते मजदूरों पर ग्रेनेड और रॉकेट से हमला, 20 की मौत

बलूचिस्तान  पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शुक्रवार को एक छोटी निजी कोयला खदान पर हथियारबंद लोगों द्वारा किए गए हमले में कम से कम 20 खनिकों की मौत हो गई जबकि अन्य सात घायल हो गए। यह जानकारी स्थानीय पुलिस ने दी। डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, डुकी स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) हुमायूं खान ने कहा कि “हथियारबंद लोगों के एक समूह ने आज तड़के डुकी इलाके में जुनैद कोयला कंपनी की खदानों पर भारी हथियारों से हमला किया। उन्होंने खदानों पर रॉकेट और ग्रेनेड भी दागे।” डुकी जिला अस्पताल के एक डॉक्टर जौहर खान शादीजई ने कहा कि “हमें जिला अस्पताल में अब तक 20 शव और छह घायल मिले हैं।” हमले की किसी गुट ने नहीं ली है जिम्मेदारी इस हमले की फिलहाल किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। यह प्रांत अलगाववादी समूहों का गढ़ है, जो आजादी चाहते हैं। वे इस्लामाबाद की संघीय सरकार पर स्थानीय लोगों की कीमत पर तेल एवं खनिज-समृद्ध बलूचिस्तान का अनुचित दोहन करने का आरोप लगाते हैं। सोमवार को बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) नामक एक समूह ने कहा कि उसने पाकिस्तान के सबसे बड़े हवाई अड्डे के बाहर चीनी नागरिकों पर हमला किया। देश में चीन के हजारों नागरिक काम कर रहे हैं, उनमें से ज्यादातर बीजिंग की अरबों डॉलर की बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल हैं। बीएलए ने कहा कि यह विस्फोट आत्मघाती हमलावर का काम था।

बांग्लादेश में यशोरेश्वरी काली मंदिर से देवी का मुकुट हुआ चोरी, पीएम मोदी ने किया था भेंट, घटना पर भारत सख्त

ढाका बांग्लादेश के जेशोरेश्वरी मंदिर से मां काली का मुकुट चोरी हो गया है। चांदी का बना सोने की परत वाला यह मुकुट भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर को गिफ्ट किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2021 में जब बांग्लादेश गए थे तो उन्होंने जेशोरेश्वरी मंदिर का दौरा भी किया था। इस दौरान उन्होंने ये मुकुट भेंट किया था। उपहार में दिया गया देवी काली का ये मुकुट कथित तौर पर चोरी हो गया है। इस घटना पर भारत ने सख्त रुख दिखाया है। ढाका में भारतीय उच्चायोग ने बयान जारी करते हुए इस पर चिंता जताई है। उच्चायोग ने मुकुट को बरामद करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, मंदिर के पुजारी और सफाई कर्मचारियों ने पाया कि देवी काली के सिर से मुकुट गायब है। बांग्लादेशी पुलिस ने चोरी की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि अपराधी की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही है और जल्दी ही चोर को पकड़ लिया जाएगा। जेशोरेश्वरी मंदिर की हिन्दुओं में मान्यता पीढ़ियों से मंदिर की देखभाल कर रहे परिवार की सदस्य ज्योति चट्टोपाध्याय ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि मुकुट चांदी से बना था और उस पर सोने की परत चढ़ी थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने मार्च 2021 में जेशोरेश्वरी मंदिर को मुकुट भेंट करते हुए मंदिर में एक बहुउद्देश्यीय सामुदायिक हॉल का निर्माण करने का भी ऐलान किया था। जेशोरेश्वरी मंदिर की बांग्लादेश के अलावा भारत और दूसरे पड़ोसी देशों में भी काफी मान्यता है। ये भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों में फैले 51 शक्तिपीठों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित है। यह मंदिर, भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल, ईश्वरीपुर, सतखिरा में स्थित है। माना जाता है कि इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था। अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा पर सवाल बांग्लादेश में देवी का मुकुट चोरी होने का ये मामला ऐसे समय हुआ है, जब देश में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सवालों के घेरे में है। इस साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की एक श्रंखला देखी गई है। हालांकि मौजूदा चोरी में अभी तक इस तरह के किसी एंगल की बात पुलिस ने नहीं की है। 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है जेशोरेश्वरी मंदिर पीढ़ियों से मंदिर की देखभाल करने वाले परिवार के सदस्य ज्योति चट्टोपाध्याय ने बांग्लादेशी मीडिया को बताया कि यह मुकुट चांदी से बना था और इस पर सोने की परत चढ़ी हुई थी। चोरी हुआ मुकुट भक्तों के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, जेशोरेश्वरी मंदिर को भारत और पड़ोसी देशों में फैली 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।   ऐसा है मंदिर का इतिहास माना जाता है कि सतखीरा के ईश्वरीपुर में स्थित इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अनारी नामक ब्राह्मण ने करवाया था। उन्होंने जशोरेश्वरी पीठ के लिए 100 दरवाजों वाला मंदिर बनवाया था। बाद में 13वीं शताब्दी में लक्ष्मण सेन ने इसका जीर्णोद्धार करवाया और अंततः राजा प्रतापादित्य ने 16वीं शताब्दी में मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने कहा था कि भारत मंदिर में एक बहुउद्देशीय सामुदायिक हॉल का निर्माण कराएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय लोगों के लिए सामाजिक, धार्मिक और शैक्षिक आयोजनों के लिए उपयोगी होगा और साथ ही, यह चक्रवात जैसी आपदाओं के समय सभी के लिए आश्रय का काम भी करेगा।

अमेरिका: फ्लोरिडा तट से टकराया मिल्टन तूफान, 32 लाख से अधिक लोग अंधरे में रहने को मजबूर, 10 की मौत

 फ्लोरिडा अमेरिका में तूफान मिल्टन ने कहर मचा दिया है. फ्लोरिडा में इस तूफान का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है. यहां करीब 20 लाख लोग अपने घरों को छोड़कर कहीं और चले गये हैं. जबकि, 4,300 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है. तूफान मिल्टन फ्लोरिडा के पश्चिमी तट से टकराया है. तूफान की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि फ्लोरिडा में कई बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के पत्तों की तरह बिखरी हुई नजर आ रही हैं. तूफान के बाद ऐसी कई तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें अमेरिकी घरों की छत पूरी तरह से गायब हो चुकी है और घरों के अंदर का सामान यहां-वहां बिखरा पड़ा है. नजर आ रहे मगरमच्छ और सांप तूफान के बाद भारी बारिश के चलते आई बाढ़ के कारण फ्लोरिडा के कई इलाकों में मगरमच्छ और सांप भी देखे गये हैं. इस बीच फ्लोरिडा की सरकार ने लोगों से बाढ़ वाले इलाकों में जाने से बचने की अपील की है. सरकार ने लोगों से खुद को सुरक्षित रखने की गुजारिश की है. एक साल के अंदर तीसरा तूफान अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि तूफान बीतने के बाद भी टूट  चुके बिजली के तारों और मलबे से अभी भी खतरा बना हुआ है. अमेरिका के इतिहास में ऐसा छठी बार हो रहा है, जब एक साल के अंदर ही तीन तूफानों ने फ्लोरिडा में दस्तक दी है. साजिश को लेकर चल रही ये थ्योरी बता दें कि पहले मिल्टन तूफान को तूफानों की सबसे विनाशकारी श्रेणी 5 में रखा गया था. इस श्रेणी के तूफानों से हमेशा ही जान-माल का बड़ा नुकसान होता रहा है. हालांकि, बाद में इसकी कैटेगिरी को कम करके 3 कर दिया गया. अमेरिका में इस तूफान को लेकर कई कंस्पिरेसी थ्योरीज भी चल रही हैं. कहा जा रहा है कि कथित तौर पर मिल्टन कुदरत का कहर नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है ताकि अमेरिकी चुनावों पर असर पड़ सके.    

अटल पेंशन योजना 18 से 40 वर्ष की उम्र के नागरिकों के लिए लाई गई है, इस योजना से 10वें वर्ष में जुड़े 56 लाख लोग

नई दिल्ली भारत सरकार नागरिकों के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन्हीं योजनाओं में से एक अटल पेंशन योजना है। यह योजना 18 से 40 वर्ष की उम्र के नागरिकों के लिए लाई गई है। अटल पेंशन योजना यानी एपीआई के 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं। योजना के दसवें वर्ष में पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की ओर से मंगलवार को सकल पंजीकरण के आंकड़ों की जानकारी दी गई है। पीएफआरडीए द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक,अटल पेंशन योजना से अब तक 7 करोड़ लोग जुड़ चुके हैं। इस योजना के तहत वर्ष 2024- 25 में अब तक 56 लाख से अधिक नामांकन हुए हैं। प्राधिकरण ने कहा, “यह योजना अपने 10वें वर्ष में है और इसने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।” अटल पेंशन योजना के तहत नागरिकों को 60 वर्ष की उम्र में पेंशन की सुविधा दी जाती है। यह भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर केंद्रित पेंशन योजना है, जिसे पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा रेगुलेट किया जाता है। योजना के तहत लाभार्थी को 1,000- 5000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती है। पेंशन की राशि लाभार्थी को उसके द्वारा योजना में दिए योगदान के आधार पर तय होती है। भारत का कोई भी नागरिक इस योजना में नामांकन करवा सकता है। योजना के लिए व्यक्ति का डाकघर या बैंक में एक बचत खाता होना अनिवार्य है। पीएफआरडीए ने कहा, “समाज के सबसे कमजोर वर्गों को पेंशन के दायरे में लाने की यह उपलब्धि सभी बैंकों और एसएलबीसी/यूटीएलबीसी के अथक प्रयासों से संभव हो पाई है।” हाल के दिनों में, नियामक प्राधिकरण ने योजना के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर एपीवाई आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करना, जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, विभिन्न मीडिया चैनलों के माध्यम से प्रचार करना और नियमित निष्पादन समीक्षा करना जैसी पहल की है।  

कश्मीर चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर डाला वोट, कश्मीर अब पाक से बहुत दूर हो गया – शब्बर जैदी

इस्लामाबाद पाकिस्तान के शीर्ष अर्थशास्त्री और संघीय राजस्व बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके सैयद शब्बर जैदी का कहना है कि कश्मीर अब उनके देश से बहुत दूर हो गया है। शब्बर जैदी ने कश्मीर में हुए विधानसभा के चुनाव और इसके नतीजों पर ये टिप्पणी की है। जैदी का मानना है कि भले ही कश्मीर के लोगों ने नरेंद्र मोदी की पार्टी भाजपा को वोट नहीं दिया है लेकिन पाकिस्तान के लिहाज से भी कोई अच्छी खबर नहीं है क्योंकि कश्मीरियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को चुना है, जिसे शेख अब्दुल्ला ने बनाया था। शब्बर जैदी ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, ‘पाकिस्तान ने कश्मीर हमेशा के लिए खो दिया है। कश्मीर चुनाव नतीजे दिखाते हैं कि कश्मीरियों ने बीजेपी के खिलाफ वोट दिया लेकिन ये भी देखिए कि उन्होंने शेख अब्दुल्ला की बनाई पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को जमकर समर्थन दिया है। मेरे विचार से उन्होंने हिंदुत्व और पाकिस्तान के साथ विलय दोनों को अस्वीकार कर दिया। हमने पाकिस्तान में अपने प्रदर्शन से कश्मीरियों को निराश कर दिया।’ कश्मीर में चुनाव ने किया पाकिस्तान को निराश! जम्मू कश्मीर की 90 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए हुए चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित किए गए हैं। चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 90 में से 42 पर जीत दर्ज की है। वहीं उसकी सहयोगी कांग्रेस के खाते में छह सीटें गई हैं। बीजेपी ने जम्मू रीजन की 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। पीडीपी और दूसरी पार्टियां कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सकीं। कश्मीर में चुनाव पर ना सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान और दुनियाभर की निगाह थीं। इसकी वजह ये थी कि जम्मू कश्मीर में यह चुनाव 10 साल के बाद हुआ है कश्मीर का राज्य का दर्जा खत्म किए जाने और केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव था। एक्सपर्ट का मानना है कि कश्मीर के लोगों ने जिस तरह चुनाव जोश के साथ हिस्सा लिया, उसने कहीं ना कहीं पाकिस्तान की मीडिया और सरकार को परेशान किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए तीन चरणों में वोटिंग हुई थी। इस चुनाव में कश्मीर में 63.45 प्रतिशत मतदान हुआ। कश्मीर में लंबे समय बाद इस तरह का उत्साह चुनाव के लिए देखा गया। इस चुनाव में लोगों ने कहीं भी वोटिंग का बायकॉट नहीं किया, जैसा पहले कुछ इलाकों में देखा जाता रहा था। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तानियों को परेशान कर रखा है। उनको लगता है कि अब पाकिस्तान के लिए कश्मीर में समर्थन ढूंढ़ना मुश्किल होगा।

प्रसाद विवाद के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति सतर्क, भोग-प्रसाद के लिए बनी SOP

 देहरादून  तिरुपति मंदिर प्रसाद में मिलावट का मामला सामने आने के बाद उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति भी सतर्क हो गयी है। समिति ने बद्रीनाथ, केदारनाथ धाम के अलावा बीकेटीसी के अधीन आने वाले मंदिरों में भोग और प्रसाद की गुणवत्ता और शुद्धता के लिए एसओपी जारी कर दी है। जिसके बाद साल भर में कम से कम एक बार फूड सेफ्टी ऑडिट होगा। तिरुपति मंदिर प्रसाद विवाद का नाता उत्तराखंड से जुड़ने के बाद यहां के मंदिरों में प्रसाद की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य मंदिरों के प्रसाद को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश सरकार ने दिए थे। वहीं बद्री-केदार मंदिर समिति ने भी बद्रीनाथ, केदारनाथ धामों के साथ समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में भोग और प्रसाद की गुणवत्ता-शुद्धता के लिए एसओपी जारी कर दी है। इस एसओपी के तहत मंदिरों के लिए बनने वाले भोग-प्रसाद को तैयार करने, उसमे इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री भंडारण के साथ ही निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। यह भी कहा गया है कि साल भर में एक बार भोग प्रसाद का फुल सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। इसमें भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से अधिकृत प्रयोगशाला में खाद्य सामग्री की जांच कराई जाएगी। प्रसाद और भोग में इस्तेमाल होने वाले चावल, तेल, मसाले और केसर की जांच करने के साथ ही सभी सामग्री किसी भरोसेमंद व्यापारी से खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। भोग और प्रसाद बनाने के लिए इस्तेमाल में आने वाले तेल को ज्यादा से ज्यादा तीन बार प्रयोग में लाये जाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इसके साथ ही यह भी निर्देशित किया गया है कि भोग और प्रसाद तैयार करने के लिए कर्मचारियों को स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना होगा। मंदिर समिति ने साफ किया है कि खाद्य सामग्री का स्टॉक लंबे समय तक ना रखा जाए। गुणवत्ता और शुद्धता की जांच के लिए नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए।

भारत सरकार ने परमाणु पनडुब्बी बनाने के लिए ₹40 हजार करोड़ मंजूर किए

नई दिल्ली भारत सरकार की CCS यानी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने दो स्वदेशी परमाणु पनडुब्बियों को बनाने की अनुमति दे दी है. इससे भारतीय नौसेना की सामरिक और आक्रामक क्षमता में बढ़ोतरी होगी. इन पनडुब्बियों के बनने से नौसेना की ताकत हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में अधिक हो जाएगी. इन पनडुब्बियों को विशाखापट्टनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाया जाएगा. इस बनाने में लार्सेन एंड टुब्रो जैसी निजी कंपनियों की मदद भी ली जा सकती है. पनडुब्बियां 95 फीसदी तक स्वदेशी होंगी. ये पनडुब्बियां अरिहंत क्लास से अलग होंगी. इन्हें प्रोजेक्ट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल के तहत बनाया जाएगा. अभी दो पनडुब्बियां बनेंगी, इसके बाद चार और बनाई जा सकती है. जबकि भारत ने हाल ही में अपनी दूसरी SSBN यानी परमाणु पनडुब्बी INS Arighat कमीशन की है. अगले साल भर के अंदर भारतीय नौसेना में अलग-अलग तरह के कई युद्धपोत और सबमरीन मिलने वाले हैं. कौन-कौन से जंगी जहाज होंगे शामिल… इन 12 जंगी जहाजों में फ्रिगेट्स, कॉर्वेट्स, डेस्ट्रॉयर्स, सबमरीन और सर्वे वेसल भी हैं. नौसेना में इनके शामिल होने से इंडियन ओशन रीजन (IOR) में सुरक्षा का स्तर बढ़ जाएगा.   आईएनएस विशाखापट्टनम (INS Vishakhapatnam)… विशाखापट्टनम क्लास में चार युद्धपोत शामिल हैं. विशाखपट्टनम अपने क्लास की प्रमुख जंगी जहाज है. ये इस साल दिसंबर में नौसेना में शामिल होगा. इसमें कुछ अपग्रेडेशन का काम चल रहा है. इसी साल दिसंबर में इसी क्लास का आईएनस सूरत भी शामिल होगा. इस क्लास के डेस्ट्रॉयर्स में 32 बराक 8 मिसाइलें, 16 ब्रह्मोस एंटी शिप मिसाइल 4 टॉरपीडो ट्यूब्स, 2 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स, 7 प्रकार के गन्स होते हैं. ध्रुव और सी किंग हेलिकॉप्टर तैनात हैं. ये ऐसे युद्धपोत हैं, जिनसे लगातार ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का परीक्षण किया जा रहा है. आईएनएस वाघशीर (INS Vagsheer)… ये कलवारी क्लास यानी स्कॉर्पीन क्लास की डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बी है. यह पनडुब्बी इस साल दिसंबर में तैनात हो जाएगी. यह एंटी-सरफेस, एंटी-सबमरीन वारफेयर में माहिर है. आईएनएस वाघशीर कई मिशन कर सकती है. जैसे सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी जमा करना, समुद्री बारूदी सुरंग बिछाना, क्षेत्र की निगरानी आदि. पनडुब्बी को ऑपरेशन के समय हर परिस्थिति में संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी लंबाई लगभग 221 फीट, बीम 20 फीट और ऊंचाई 40 फीट होती है. पानी की सतह पर इसकी गति 20 KM प्रतिघंटा है. पानी के अंदर ये 37 KM प्रतिघंटा की स्पीड से चलती हैं. यह 50 दिनों तक पानी के अंदर बिता सकती है. अधिकतम 350 फीट की गहराई जा सकती है. इसमें 8 सैन्य अधिकारी और 35 सेलर तैनात किए जा सकते हैं. इनके अंदर एंटी-टॉरपीड काउंटरमेजर सिस्टम लगा है. इसके अलावा 533 मिमी के 6 टॉरपीडो ट्यूब्स होते हैं, जिनसे 18 एसयूटी टॉरपीडोस या एसएम.39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं. इसके अलावा यह पानी के अंदर 30 समुद्री बारूदी सुरंग बिछा सकती है. आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak)… यह अगले साल जून में नेवी में शामिल होगी. यह संध्यक क्लास का सर्वे शिप है. इसकी मदद से नौसेना समंदर के नीचे और ऊपर किसी भी तरह का रिसर्च और सर्वे मिशन कर सकती है. आईएनएस निर्देशक (INS Nirdeshak)… ये भी संध्यक क्लास का सर्वे वेसल है. ये इस साल अगस्त में शामिल हो चुकी है. इसमें एडवांस हाइड्रोग्राफिक जांच करने की क्षमता है. साथ ही यह नौसेना के मेरिटाइम ऑपरेशन और सुरक्षित नेविगेशन में मदद करेगा. आईएनएस इक्छक (INS Iskshak)… संध्यक क्लास का यह सर्वे वेसल अगले साल मार्च में मिलेगा. इससे नौसेना हाइड्रोग्राफिक सर्वे कर पाएगी. और साथ ही मेरीटाइम डेटा जमा करने में मदद करेगा. आईएनएस अरनाला (INS Arnala)… यह इस साल नवंबर में नौसेना को मिलेगा. इसका डिस्प्लेसमेंट 900 टन होगा. यह करीब 255 फीट लंबा है. बीम 34 फीट ऊंची है. यह अधिकतम 46 km/hr  की रफ्तार से चलेगा. इसकी रेंज 3300 km है. इस युद्धपोत पर 7 अधिकारियों समेत 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं. इसमें ASW कॉम्बैट सूइट लगा है, जो दुश्मन के हमलों से टकराने के लिए हथियारों को तैयार करेगा. उनपर नजर रखेगा. इसपर 4 तरह के मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं, जो जंग में युद्धपोत को सही-सलामत रखने में मदद करेंगे. RBU-6000 एंटी सबमरीन रॉकेट लॉन्चर लगा होगा. यह 213 mm की एंटी-सबमरीन रॉकेट सिस्टम है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों के ऊपर ताबड़तोड़ रॉकेट फायरिंग करता है. इसके अलावा इस पर 6 हल्के वजन वाले ASW टॉरपीडो लगे हैं. साथ ही एंटी-सबमरीन समुद्री बारूदी सुरंगें रहेंगी. आईएनएस अरनाला पर 30 मिलिमीटर की एक CRN-91 नेवल गन होगी. यह एक ऑटोमैटिक गन होती है, जो हर मिनट 550 गोलियां दाग सकती है. यानी दुश्मन का जहाज छलनी हो जाएगा. इसकी रेंज 4 km है. इसके अलावा 2 ओएफटी 12.7 मिलिमीटर एम2 स्टेब्लाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन लगी होगी. यह भारतीय नौसेना का वाटर जेट प्रोपल्शन पावर्ड सिस्टम से लैस सबसे बड़ा युद्धपोत होगा.   आईएनएस माहे (INS Mahe)… यह अगल साल अगस्त में मिलने वाला ASW-SWC कॉर्वेट है. यह एक माइनस्वीपर है. इसके अलावा इसमें सबकुछ अरनाला जैसा ही होगा.   आईएनएस तमाला (INS Tamala)… तलवार क्लास का फ्रिगेट. इसे फरवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया जाएगा. इन जंगी जहाजों का समंदर में डिस्प्लेसमेंट 3850 टन होता है. लंबाई 409.5 फीट, बीम 49.10 फीट और ड्रॉट 13.9 फीट है. ये जंगी जहाज समंदर में अधिकतम 59 km/hr की रफ्तार से चलते हैं. यह जंगी जहाज 18 अधिकारियों समेत 180 सैनिकों को लेकर 30 दिन तक समंदर में तैनात रह सकता है. ये जंगी जहाज इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस हैं. साथ ही 4 केटी-216 डिकॉय लॉन्चर्स लगे हैं. इसके अलावा इसमें 24 Shtil-1 मीडियम रेंज की मिसाइलें तैनात हैं.   8 इगला-1ई, 8 वर्टिकल लॉन्च एंटी-शिप मिसाइल क्लब, 8 वर्टिकल लॉन्च एंटी-शिप और लैंड अटैक ब्रह्मोस मिसाइल भी तैनात है. इसमें एक 100 मिलिमीटर की A-190E नेवल गन लगी है. इसके अलावा एक 76 mm की ओटो मेलारा नेवल गन लगी है. 2 AK-630 सीआईडब्लूएस और 2 काश्तान सीआईडब्लूएस गन लगी हैं. इन खतरनाक बंदूकों के अलावा दो 533 मिलिमीटर की टॉरपीडो ट्यूब्स हैं. और एक रॉकेट लॉन्चर भी तैनात की गई है. इस जंगी जहाज पर एक कामोव-28 या एक कामोव-31 या ध्रुव हेलिकॉप्टर लैस … Read more

प्रियंक कानूनगो ने कहा NCPCR आयोग ने बाल विवाह के मुद्दे को प्राथमिकता दी

नई दिल्ली राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के नाम एक पत्र लिखा। इस पत्र में 2023-2024 के दौरान भारत में बाल विवाह के प्रतिबंध के संबंध में एक समग्र रिपोर्ट तैयार करने का उल्लेख किया गया है। प्रियंक कानूनगो ने अपने पत्र में कहा कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) देश में बाल अधिकारों और अन्य संबंधित मामलों की सुरक्षा के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 की धारा 3 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। आयोग के पास यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012; किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के उचित और प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी करने का भी अधिकार है। प्रियंक कानूनगो ने बताया कि आयोग ने अपने कार्यों के तहत, बाल विवाह के रोकथाम के लिए 2006 के बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम के तहत प्रमुख हितधारकों के साथ एक महीने में कई वर्चुअल समीक्षा बैठकें की। इन बैठकों का उद्देश्य बाल विवाह को रोकना, सामाजिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और बच्चों के कल्याण नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन में योगदान देना था। उन्होंने कहा कि आयोग ने बाल विवाह के मुद्दे को प्राथमिकता दी है और जिलों द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष में किए गए कार्यों को संकलित करने के लिए एक प्रारूप विकसित किया है। पिछले तीन वर्षों से बाल विवाह की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करने वाली समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप बाल विवाह की रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है, जबकि मामलों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि इन समीक्षा बैठकों के निष्कर्षों और एनसीपीसीआर के बाल विवाह पोर्टल के माध्यम से संबंधित हितधारकों द्वारा प्रस्तुत डेटा के आधार पर, आयोग ने बाल विवाह के प्रतिबंध अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा किए गए प्रयासों का विवरण देने वाली एक समग्र रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने पत्र में आगे लिखा कि इस रिपोर्ट में जिला स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों और बाल विवाह की प्रथा को रोकने के लिए लागू की गई निवारक उपायों का विस्तृत उल्लेख है। इसके अलावा, आयोग नियमित रूप से राज्य और जिला अधिकारियों के साथ संवाद करता है ताकि 2006 के बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम (पीसीएमए) के तहत उपायों को प्रभावी रूप से लागू और प्रवर्तन किया जा सके। रिपोर्ट में 27 राज्यों और 7 संघ शासित प्रदेशों के 596 जिलों से प्राप्त डेटा को ध्यानपूर्वक संकलित किया गया है। यह रिपोर्ट राज्य स्तर पर बाल विवाह को रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए उपायों को मजबूत करने के लिए एक संसाधन के रूप में कार्य करेगी। कानूनगो के मुताबिक रिपोर्ट में पिछले एक वर्ष में किए गए कार्यों और उपायों का विस्तृत विवरण शामिल है, जो जिला अधिकारियों, बाल विवाह प्रतिबंध अधिकारियों, और अन्य हितधारकों की मेहनत को दर्शाता है।    

ब्रिटिश के पूर्व राजनयिक टॉम फ्लेचर को संयुक्त राष्ट्र सहायता प्रमुख नियुक्त किया गया

संयुक्त राष्ट्र  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने पूर्व ब्रिटिश राजनयिक टॉम फ्लेचर को विश्व निकाय का नया मानवीय प्रमुख नियुक्त किया। वर्तमान में ऑक्सफोर्ड के हर्टफोर्ड कॉलेज के प्रिंसिपल और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के कॉन्फ्रेंस ऑफ कॉलेजेज़ के उपाध्यक्ष फ्लेचर अपने ब्रिटिश साथी मार्टिन ग्रिफिथ्स का स्थान लेंगे। ग्रिफिथ्स ने जून के अंत में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मानवीय मामलों के अवर महासचिव के पद से इस्तीफा दे दिया था। नियुक्ति की घोषणा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फरहान हक ने कहा कि कार्यवाहक संयुक्त राष्ट्र मानवीय प्रमुख जॉयस मसूया तब तक इस पद पर बने रहेंगे जब तक कि फ्लेचर कार्यभार नहीं संभाल लेते। हक ने फ्लेचर को “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक संचारक बताया जिन्होंने अपनी पुस्तकों और लेखन संबंधी कार्यों के माध्यम से विकास, कूटनीति, प्रौद्योगिकी और लोकतंत्र के क्षेत्रों में तकनीकी विशेषज्ञता और सार्वजनिक कूटनीति का मिश्रण प्रस्तुत किया है।” अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा कि अमेरिका “तत्काल मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने और तेज करने के लिए” फ्लेचर के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है। उन्होंने एक बयान में कहा, “हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि जीवन रक्षक सहायता सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे – सूडान से लेकर गाजा, हैती, यूक्रेन और अन्य जगहों पर।”    

शिमला मस्जिद मामले में संजौली की दुकानों पर लगाए गए ‘सनातनी सब्जी वाला’ बोर्ड, देवभूमि संघर्ष समिति लगा रही पोस्टर

शिमला हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में देवभूमि संघर्ष समिति ने एक नया अभियान शुरू कर दिया है. यहां देवभूमि संघर्ष समिति की ओर से हिंदू दुकानदारों की सब्जी की दुकान के बाहर एक बोर्ड लगाया जा रहा है. इस बोर्ड में ‘सनातन सब्जी वाला’ लिखा गया है. इसका उद्देश्य यह है कि स्थानीय लोग हिंदू दुकानदारों से खरीदारी करें और बाहरी लोगों का बॉयकॉट किया जाए. देवभूमि संघर्ष समिति के राज्य सह संयोजक विजय शर्मा ने कहा कि समिति की ओर से यह अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान का उद्देश्य संजौली इलाके में हिंदू सब्जीवालों को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि वे लोगों से यह भी अपील कर रहे हैं कि बाहरी लोगों से वह खरीददारी न करें और स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ाएं, ताकि उनका रोजगार चल सके. विजय शर्मा ने कहा, “हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में रोहिंग्या जैसे लोगों का आना शुरू हो गया है. यह लोग यहां पर व्यापार कर रहे हैं. इस बीच देवभूमि संघर्ष समिति ने स्थानीय दुकानदारों को आगे बढ़ने का बीड़ा उठाया है.” नेम प्लेट को लेकर पहले मच चुका बवाल हिमाचल में इससे पहले भी दुकानों में नेम प्लेट लगाने को लेकर विवाद हो चुका है। शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, पिछले महीने विक्रमादित्य सिंह ने कहा था कि सभी दुकानों में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर नेम प्लेट लगानी होगी। इस बयान के बाद देशभर में कांग्रेस बेक फुट पर आ गई थी, क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जब कावड़ यात्रा के दौरान नेम प्लेट लगाना अनिवार्य किया था, उस दौरान देशभर में कांग्रेस ने विरोध किया था। विक्रमादित्य के इस बयान के बाद कांग्रेस सरकार ने भी मंत्री के बयान से किनारा कर दिया था और मंत्री का निजी बयान बताया था। बहुदलीय कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उद्योग मंत्री हर्ष वर्धन चौहान की अध्यक्षता में रेहड़ी फड़ी वालों की समस्या के समाधान के लिए उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर रखी है। यह कमेटी स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए रूल्स तैयार कर रही है। नेम प्लेट वाले मामले पर हो चुका है विवाद हिमाचल प्रदेश देवभूमि संघर्ष समिति के इस अभियान के बाद अब संजौली में सब्जी बेच रहे दुकानदारों का धर्म प्रदर्शित होगा. इससे पहले हिमाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह के नेम प्लेट वाले बयान को लेकर भी खासा विवाद हो चुका है. विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश के तर्ज पर हिमाचल प्रदेश के रेहड़ी-फड़ी वालों के नाम प्रदर्शित करने की बात कही थी. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि इस पूरे मामले का उत्तर प्रदेश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल से कोई लेना-देना नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष ने की कमेटी गठित हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर पॉलिसी के लिए विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जो कमेटी गठित की गई है, वहीं इस संबंध में फैसला लेगी. गौरतलब है कि कि हिमाचल प्रदेश में स्ट्रीट वेंडर एक्ट के तहत जो भी व्यक्ति वेंडिंग करता है, उसे नगर निगम की ओर से लाइसेंस दिया जाता है. इस लाइसेंस में पहले से ही व्यक्ति की पहचान से जुड़ी जानकारी होती है. इस लाइसेंस को दुकान में लगाना पहले से ही अनिवार्य है.

बंगाल में ममता सरकार पर बरसे जेपी नड्डा, सत्ता में बैठे हैं उनके मन में करुणा आए, अन्याय के खिलाफ लड़ सकें

कोलकाता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हो रहे अन्याय से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। दुर्गा पूजा में कोलकाता के एक दिवसीय दौरे पर आए नड्डा ने महानगर के प्रसिद्ध पूजा आयोजक संतोष मित्रा स्क्वायर के पूजा पंडाल का परिदर्शन के बाद यह बात कही। कोलकाता में सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म व हत्या के मामले को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नड्डा सुबह करीब 11 बजे कोलकाता पहुंचने के बाद महासप्तमी के अवसर पर सबसे पहले हावड़ा में रामकृष्ण मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ पहुंचे। दुर्गा पूजा में हुए शामिल नड्डा बेलूर मठ में दुर्गा पूजा में भी शामिल हुए। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री सुकांत मजूमदार और बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी भी उनके साथ थे। यहां दर्शन पूजन के बाद नड्डा दोपहर में मध्य कोलकाता के संतोष मित्रा स्क्वायर पूजा कमेटी के पंडाल में पहुंचे, जिसके प्रमुख कोलकाता नगर निगम में भाजपा के पार्षद सजल घोष हैं। लास वेगास क्षेत्र की तर्ज पर बनाए गए इस पंडाल का परिदर्शन और देवी दुर्गा के समक्ष प्रार्थना करने के बाद नड्डा ने बंगाल में अन्याय से लड़ने के लिए भाजपा की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा हमें नया जोश और तब तक अन्याय के खिलाफ लड़ने की नई ऊर्जा देती है, जब तक कि सत्य और न्याय की जीत न हो जाए। ममता सरकार पर बोला हमला जेपी नड्डा ने कहा, ‘मां दुर्गा करुणा और शक्ति की प्रतीक हैं, लेकिन जब मैं बंगाल आता हूं और यहां महिलाओं के साथ हो रही क्रूरता देखता हूं तो मैं मां दुर्गा से विशेष प्रार्थना करता हूं कि यहां जो सत्ता में बैठे हैं उनके मन में करुणा आए और हम यहां हो रहे अन्याय के खिलाफ लड़ सकें।’ उन्होंने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की संस्कृति ‘धमकी संस्कृति’ बन गई है। गुंडागर्दी और कट मनी संस्कृति टीएमसी का पर्याय बन गई है। जनता हकीकत जानती है और मुझे पूरा भरोसा है कि वे टीएमसी को कड़ा सबक सिखाएंगे। नड्डा ने दुर्गा पूजा के अवसर पर राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं और इस त्योहार के सांस्कृतिक महत्व तथा अन्याय से लड़ने की भावना को पुनर्जीवित करने में इसके महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद नड्डा ने बांग्ला को शास्त्रीय भाषा घोषित करने के केंद्र के हालिया फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने के वास्ते कोलकाता के न्यूटाउन स्थित एक पांच सितारा होटल में आयोजित प्रतिष्ठित हस्तियों की एक बैठक में भाग लिया। हाल में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बांग्ला सहित पांच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी है।

जलशक्ति विभाग में पेयजल की नई दरें लागू होने के साथ अब नए कनेक्शन लेने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी

मंडी जलशक्ति विभाग में पेयजल की नई दरें लागू होने के साथ अब नए कनेक्शन लेने के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। शहर में 100 प्रतिशत कनेक्शन फीस में बढ़ोतरी कर 1000 रुपये घरेलू और व्यवसायिक के 1500 रुपये की गई है। गांव में यह 200 और 500 रुपये लगेंगे। विभाग ने इस बार एक नई कैटागिरी नान कर्मिशियल व नान डोमेस्टिक भी शामिल की है। इसके तहत कनेक्शन लेने के लिए 2500 रुपये चुकाने होंगे। 1 अक्टूबर को लागू हुई थीं नई दरें प्रदेश सरकार ने पहली अक्टूबर से शहरों और गांव में पेयजल की नई दरें निर्धारित की थी। इसके साथ ही पहले नया कनेक्शन लेने के लिए गांव में घरेलू कनेक्शन 200 और व्यवसायिक के 400 रुपये लगते थे। इसमें घरेलू कनेक्शन का फीस तो 200 रुपये ही है, लेकिन व्यसायिक 400 से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई है। इसमें 10 रुपये फार्म के अतिरिक्त लगते थे। शहरी क्षेत्रों में कनेक्शन का दाम बढ़ाकर 1000 कर दिया गया वहीं, शहरी क्षेत्र में पहले घरेलू कनेक्शन के फार्म सहित 460 रुपये लगते थे, जिसे बढ़ाकर 1000 किया गया है। व्यवसायिक कनेक्शन के 50 रुपये के फार्म सहित 700 रुपये लगते थे, इसे बढ़ाकर 1500 रुपये किया गया है लेकिन फार्म की अलग से फीस लेने संबंधित आदेश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में अब अगर आपको कनेक्शन लेना होगा तो जेब ढीली करनी पड़ेगी। वहीं सीवरेज कनेक्शन के भी शहर में 500 और 1000 रुपये लगेंगे। नई कैटागिरी बनी अधिकारियों के लिए समस्या इस बार अधिसूचना में शामिल नान घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन का 2500 रुपये निर्धारित किया गया है, लेकिन इसमें कौन से भवन शामिल होने हैं। यह स्थिति स्पष्ट नहीं हैं। हालांकि अधिकारियों की माने तो इसमें भवन निर्माण के आरंभ में लिए जाने वाले कनेक्शन शामिल हो सकते हैं। अब इसकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए शुक्रवार को शिमला में बैठक रखी गई है। गांव में 200 और 500 रुपये में मिलेगा कनेक्शन। पेयजल के साथ नए कनेक्शन लेने के लिए रेट भी बढ़ाए। पहले शहर में लगते थे 460 और 700 रुपये, लेकिन अब बढ़ाकर 1000 और 1500 कर दिया गया है।    

आज हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद, 2500 से अधिक श्रद्धालु रहे मौजूद

हेमकुंड श्री हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मन्दिर के कपाट गुरुवार को दोपहर एक बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अंतिम अरदास का साक्षी बनकर पवित्र सरोबर में डुबकी लगाई। कपाट बंद होने से पहले श्रद्धालुओं द्वारा निशान साहिब के वस्त्र भी बदले गए। इस वर्ष यात्रा काल के दौरान 1.84 लाख श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के दर्शन कर माथा टेका है। तीन कुंतल फूलों से सजाया हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की प्रक्रिया सुबह से ही प्रारंभ हो गयी थी। हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर को तीन कुंतल फूलों से सजाया गया गया था। कपाट बंदी के कार्यक्रम को गौरवमयी बनाने के लिए पंजाब से सतनाम सिंह के नेतृत्व में सेवानिवृत सेना के जवानों का बैंड व गढ़वाल स्काउट के बैंड की धुन पर तड़के 2500 से अधिक श्रद्धालु हेमकुंड के बेस कैंप घाघरिया से हेमकुंड पहुंचे। कब क्‍या हुआ? प्रात: नौ बजकर 30 मिनट पर मुख्य ग्रंथी मिलाप सिंह व ग्रंथी कुलबंत सिंह के नेतृत्व में सुखमणि साहिब पाठ हुआ। 10 बजकर 50 मिनट पर पुणे से आए अमित सिंह के जत्थे ने सबद कीर्तन गायन किया। 12 बजकर 15 मिनट पर साल की अंतिम अरदास हुई। 12 बजकर 30 मिनट पर गुरु ग्रंथ साहिब का हुक्मनामा पढ़ने के बाद पंच प्यारों के नेतृत्व में गुरु ग्रंथ साहिब को सच्चखंड में विराजमान कर दोपहर एक बजे गुरुद्वारा के कपाट बंद किए गए। इसकी के साथ लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में भी पूजा अर्चना के बाद मुख्य पुजारी ने सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मंदिर के कपाट विधि विधान से शीतकाल के लिए बंद किए। 1886 में हुई थी खोज हेमकुंड साहिब की खोज अमृतसर पंजाब के पत्रकार पंडित तारा सिंह नरोत्तम ने 1886 में की थी। तब उन्होंने गुरूवाणी के दसम ग्रंथ में लिखित हेमकुंंड पर्वत है जहां, सप्तश्रंख शोबत है तहां, के आधार पर इस स्थान को खोज कर इसे गुरू की तपस्थली बताते हुए देश दुनिया के सामने विचार रखे थे। दशम ग्रंथ में लिखा है कि गुरू गोविंद सिंह ने अपने पूर्व जन्म में हेमकुंड साहिब में दुष्टदमन के रूप में कठोर तपस्या की थी। इसके बाद 1934 में बंगाल इंजीनियरिंग के हवलदार मोदन सिंह के साथ टिहरी राजदरबार में मुख्य ग्रंथी संत सोहन सिंह से मिलकर हेमकुंड पहुंकर यहां पर पूजा अरदास शुरू कराई। इसके बाद से ग्रीष्मकाल में हमेशा यहां की यात्रा सुचारू रही। 1992 में हेमकुंड गुरूद्वारा का भव्‍य निर्माण हुआ।

नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिल सकता है 4 और विधायको का साथ, जम्मू-कश्मीर में अपने दम पर बना सकती है सरकार

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए निर्वाचित सात निर्दलीय उम्मीदवारों में से तीन नेशनल कान्फ्रेंस में अपनी घर वापसी के लिए तैयार हैं। इनके अलावा कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले एक विजयी उम्मीदवार भी हाथ के बजाय हल (नेकां का चुनाव चिन्ह) थामने के मूड में हैं। वहीं, कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार को उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है। चुनाव परिणाम में सात निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे हैं। इनमें से तीन नेशनल कान्फ्रेंस के बागी हैं, जिन्होंने टिकट न मिलने पर पार्टी से नाता तोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता है। राजौरी के थन्नामंडी सीट पर भाजपा के मोहम्मद इकबाल मलिक को 6179 वोटों के अंतर से हराने वाले पूर्व जज मुजफ्फर इकबाल खान का संबंध नेकां से रहा है। जज की नौकरी छोड़ थामा था नेकां का दामन मुजफ्फर खान को नेकां ने उम्मीदवार बनाने का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस से गठबंधन समझौते में यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। पूर्व जज के पिता असलम खान 2002 में राजौरी से विधायक चुने गए थे। 2019 में मुजफ्फर खान ने जज की नौकरी छोड़कर नेकां का दामन थाम लिया था, लेकिन टिकट न मिलने पर निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर पड़े और जीत गए। अब वह फिर से नेकां में शामिल हो जाएंगे। थन्नामंडी से कांग्रेस के मोहम्मद शब्बीर खान ने गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और हार गए। ये विधायक कर सकते हैं घर वापसी किश्तवाड़ जिले के इंद्रवाल से निर्दलीय चुनाव जीते प्यारे लाल शर्मा भी नेकां के सदस्य रहे हैं। नेकां-कांग्रेस गठजोड़ होने के कारण इंद्रवाल से गठबंधन की तरफ से कांग्रेस के मोहम्मद जफरुल्लाह ने चुनाव लड़ा। अपना टिकट कटने से नाराज प्यारे लाल शर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। वहीं नेकां में वापस जाने का एलान कर चुके हैं। पुंछ के सुरनकोट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले चौधरी अकरम खान ने वर्ष 2014 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। कई निर्दवीय विधायक आ सकते हैं नेकां में करीब चार वर्ष पहले वह जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी का हिस्सा बने थे और कुछ समय बाद उन्होंने उससे नाता तोड़ नेकां का दामन थाम लिया था। सुरनकोट सीट से कांग्रेस के पक्ष में उम्मीदवार न उतारने के नेकां नेतृत्व के फैसले से आहत होकर अकरम खान ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीता। उन्होंने गठबंधन के उम्मीदवार मोहम्मद शहनवाज चौधरी को 8851 वोटों के अंतर से हराया है। ये सभी निर्दलीय नेकां में लौटने को तैयार हैं। सभी नेकां नेतृत्व के साथ लगातार संवाद और संपर्क बनाए हुए हैं। इंद्रवाल से निर्वाचित प्यारे लाल शर्मा तो बुधवार को किश्तवाड़ से श्रीनगर के लिए रवाना हुए हैं। उनके गुरुवार को नेकां विधायक दल की बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। ये निर्दलीय भी हैं कतार में जम्मू के छंब से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तारांचद को हराने वाले निर्दलीय सतीश शर्मा (कांग्रेस के बागी) भी कथित तौर पर नेकां में शामिल होने के मूड में हैं। नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी उनके साथ कथित तौर पर संपर्क किया है। यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व भी उन्हें मनाने का प्रयास कर रहा है। अलबत्ता, वह कांग्रेस नेतृत्व द्वारा की गई अपनी उपेक्षा से आहत हैं और लौटने के मूड में नहीं हैं। सतीश शर्मा से जब इस बावत संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन बंद था। वहीं कठुआ जिले के बनी में भाजपा उम्मीदवार व पूर्व विधायक जीवन लाल को हराने वाले निर्दलीय डा. रामेश्वर सिंह भी नेकां में जाने का मन बना चुके हैं और वह भी अगले एक दो दिन में हल के निशान वाला लाल झंडा थाम लेंगे।

इस वर्ष देश में विदेशियों का आगमन 10 मिलियन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा

नई दिल्ली भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या में आने वाले समय में बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जा रही है। इस वर्ष ही देश में विदेशियों का आगमन 10 मिलियन से ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बुकिंग डॉट कॉम द्वारा एक्सेंचर के सहयोग से जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन इस वर्ष 10.1 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2022 में 9.2 मिलियन से अधिक है। यह अभी भी 2019 में कोविड महामारी के पूर्व स्तर 10.9 मिलियन से कम है। ‘हाउ इंडिया ट्रैवल्स 2024 – द इनबाउंड एडिट’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2025 तक कोरोना महामारी के पहले की आगमन की संख्या को भी पार कर जाएगा। विदेशी आगमन में देरी के बावजूद, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपने समकक्षों की तुलना में भारत में पर्यटकों के खर्च में सुधार उल्लेखनीय रूप से तेज रहा है, जो 2023 तक 2019 के खर्च का 94 प्रतिशत हो गया है। इसी अवधि के दौरान भारतीय यात्रियों द्वारा औसत खर्च में भी 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और यूएई भारत के शीर्ष इनबाउंड स्रोत बाजारों के रूप में उभरे हैं। पहले चीन, कनाडा और बांग्लादेश जैसे देश भारत के स्रोत थे। यह एक बड़े बदलाव को भी दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, हम्पी, लेह और खजुराहो जैसे उभरते स्थलों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इस रिपोर्ट में लिमिटेड कस्टमाइजेशन ऑप्शन (49 प्रतिशत), बंडल ट्रैवल पैकेज की कमी (51 प्रतिशत), सूचनाओं का अतिभार (43 प्रतिशत) जैसी चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया है। इनकी वजह से यात्रियों के अनुभव में बाधा आती है। कई अंतरराष्ट्रीय आगंतुक व्यक्तिगत यात्रा कार्यक्रम चाहते हैं। लेकिन, सहज यात्रा की योजना बनाने के लिए संघर्ष करते हैं। रिपोर्ट में उद्योग द्वारा डिजिटल संसाधनों में सुधार, सीधी उड़ानों का विस्तार, वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारत की विविध यात्रा पेशकशों को बढ़ावा देकर इन मुद्दों को हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। बुकिंग डॉट कॉम में भारतीय उपमहाद्वीप और इंडोनेशिया के कंट्री हेड संतोष कुमार के अनुसार, “भारत का इनबाउंड पर्यटन अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आतिथ्य के कारण अभूतपूर्व वृद्धि का अनुभव कर रहा है।” उन्होंने कहा कि विश्व आर्थिक मंच के यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक-2024 में भारत का 39वें स्थान पर पहुंचना, जो 2021 में 54वें स्थान से ऊपर है, वैश्विक गंतव्य के रूप में देश की बढ़ती अपील को रेखांकित करता है।

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