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सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनाएगा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर फैसला

नई दिल्ली अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुना सकता है। इसकी संभावना इसलिए है क्योंकि मामले की सुनवाई करने वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने की थी जो 10 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। फैसले का अल्पसंख्यक राजनीति पर भी होगा असर 10 नवंबर तक सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 15 कार्य दिवस बचे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा था। अभी तक आठ महीने से ज्यादा बीत चुके हैं। इस मामले में जो फैसला आएगा वह एएमयू का भविष्य तय करने वाला होगा। इससे तय होगा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान माना जाएगा या नहीं। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा उसका अल्पसंख्यक राजनीति पर भी असर होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती इस मामले में एएमयू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पांच जनवरी 2006 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने उस फैसले में एएमयू में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम में मुसलमानों को 50 फीसद आरक्षण रद्द करते हुए कहा था कि एएमयू कभी भी अल्पसंख्यक संस्थान नहीं था, इसलिए पीजी पाठ्यक्रम में मुस्लिम छात्रों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता। हाई कोर्ट ने मुस्लिम छात्रों को दिये जाने वाले आरक्षण को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के अजीज बाशा मामले में 1968 में दिए फैसले को आधार बनाया था, जिसमें कहा गया था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। हाईकोर्ट ने अजीज बाशा फैसले के बाद एएमयू कानून में 1981 में संशोधन कर इसे अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रविधानों को भी रद्द कर करते हुए संशोधन को इसलिए गलत ठहराया था कि इससे सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्प्रभावी किया गया है।   बड़ी पीठ के पास विचार के लिए भेजा गया 12 फरवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को सात न्यायाधीशों की पीठ को विचार के लिए भेज दिया था। इसके अलावा, 1981 में भी अल्पसंख्यक दर्जे का एक मामला सात न्यायाधीशों को भेजा गया था, उसमें अजीज बाशा फैसले का मुद्दा भी शामिल था। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, संजीव खन्ना, सूर्यकांत, जेबी पार्डीवाला, दीपांकर दत्ता, मनोज मिश्रा और सतीश चंद्र शर्मा की सात सदस्यीय पीठ ने आठ दिनों तक दोनों पक्षों की बहस सुनी। क्या है एएमयू की दलील? एएमयू ने अल्पसंख्यक दर्जे का दावा करते हुए दलील दी थी कि एएमयू की स्थापना मुसलमानों ने की थी। एएमयू ने 1968 के अजीज बाशा फैसले पर भी पुनर्विचार का अनुरोध किया जबकि केंद्र सरकार ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि न तो एएमयू की स्थापना मुसलमानों द्वारा की गई है और न ही उसका प्रशासन अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित होता है। केंद्र की दलील थी कि एएमयू की स्थापना 1920 में ब्रिटिश कालीन कानून के जरिए हुई थी और उस समय एएमयू ने अपनी मर्जी से अल्पसंख्यक दर्जा छोड़ कर इंपीरियल कानून के जरिए विश्वविद्यालय बनना स्वीकार किया था।

मुंबई: रतन टाटा का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए NCPA परिसर लाया गया ,रतन टाटा का राजकीय अंतिम संस्कार आज होगा

मुंबई टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब नहीं रहे. उनका 86 साल की उम्र में निधन हो गया. रतन टाटा ने बुधवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. यहां उन्हें कुछ दिन पहले उम्र संबंधी दिक्कतों की वजह से भर्ती कराया गया था. बुधवार रात ही उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से घर लाया गया. अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के नेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स हॉल में रखा जाएगा. यहां गुरुवार सुबह 10 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक लोग उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे. भारत के बाहर भी प्रेरणादायक रहे हैं रतन टाटा: नेपाल के PM नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रतन टाटा के निधन पर कहा कि उद्योग जगत के अनमोल रत्न रतन टाटा के निधन की खबर से दुखी हूं. बिजनेस और सामाजिक कार्यों में उनका दूरदर्शी नेतृत्व भारत के बाहर भी बहुत प्रभावकारी और प्रेरणादायक रहा है, इससे बहुत लोगों को प्रेरणा मिली. रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) ने दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा के लिए भारत रत्न की मांग की है. पार्टी नेता राहुल कनाल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चिट्ठी लिखकर भारत रत्न के लिए रतन टाटा का नाम केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया है. नीतीश कुमार ने रतन टाटा के निधन पर जताया शोक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा जी का निधन दुखद है. उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया. उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया. रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय क्षति हुई है. दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना है.     प्रख्यात उद्योगपति एवं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन, पद्म विभूषण रतन टाटा जी का निधन दुःखद। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, सहजता और सादगी भरे जीवन से सबको प्रेरित किया। उन्होंने अपने कार्यों से देश की अर्थव्यवस्था में अपना सराहनीय योगदान दिया। रतन टाटा जी के निधन से उद्योग जगत को अपूरणीय…   रतन टाटा के जीवन की दिलचस्प बातें साल 1937 में जन्मे रतन टाटा का पालन-पोषण 1948 में उनके माता-पिता के अलग होने के बाद उनकी दादी नवाजबाई टाटा ने किया था. रतन टाटा साल 1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क की डिग्री प्राप्त की थी. 1962 के अंत में भारत लौटने से पहले उन्होंने लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ कुछ समय काम किया. 2008 में भारत सरकार ने उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण, प्रदान किया था. वह 28 दिसंबर 2012 को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रिटायर हुए थे. रतन टाटा का सफ़र: रतन टाटा का सफर एक प्रेरणादायक कहानी है, जो उनकी दूरदर्शिता, मेहनत और नेतृत्व कौशल को दर्शाता है- जन्म      28 दिसंबर 1937 कॉलेज डिग्री      1962 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से बी.आर्क (Bachelor of Architecture) विदेश में कार्य अनुभव      1962 के अंत में भारत लौटने से पहले लॉस एंजिल्स में जोन्स और इमन्स के साथ काम किया मैनेजमेंट ट्रेनिंग      1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया टाटा संस के चेयरमैन बने      मार्च 1991 रिटायर      28 दिसंबर 2012 टाटा समूह की आय      1991 में ₹10,000 करोड़ से बढ़कर 2011-12 में USD 100.09 बिलियन टाटा के मुख्य अधिग्रहण      – 2000 में टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में टेटली का अधिग्रहण – 2007 में टाटा स्टील द्वारा 6.2 बिलियन पाउंड में कोरस का अधिग्रहण – 2008 में टाटा मोटर्स द्वारा 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में जगुआर लैंड रोवर का अधिग्रहण सम्मान      2008 में पद्म विभूषण (भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) निधन      09 अक्टूबर 2024 …जब रतन टाटा ने संभाली कमान: रतन टाटा की उल्लेखनीय यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने साल 1991 में ऑटोमोबाइल से लेकर स्टील तक के विभिन्न उद्योगों में फैले टाटा समूह की बागडोर संभाली. साल 1996 में उन्होंने टाटा टेली-सर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करवाया, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ. रतन टाटा के नेतृत्व में ऐतिहासिक अधिग्रहण:     टेटली (2000): टाटा टी द्वारा 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर में ब्रिटिश चाय कंपनी टेटली का अधिग्रहण किया गया. यह भारतीय कंपनी का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण था.     कोरस (2007): टाटा स्टील ने 6.2 बिलियन पाउंड में यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी कोरस का अधिग्रहण किया. यह भारतीय स्टील उद्योग का अब तक का सबसे बड़ा सौदा था.     जगुआर लैंड रोवर (2008): टाटा मोटर्स ने 2.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर में प्रतिष्ठित ब्रिटिश कार ब्रांड जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया। यह सौदा टाटा मोटर्स के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ और कंपनी को वैश्विक ऑटोमोबाइल बाजार में मजबूती दी. टाटा ग्रुप की कमान किसके हाथ? रतन टाटा की सेवानिवृत्ति के बाद, टाटा ग्रुप की कमान एन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) के हाथों में है. उन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पदभार संभाला था. एन चंद्रशेखरन इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुके हैं.    

गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया, केंद्रीय कैबिनेट ने लिया निर्णय

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिसके अनुसार गरीबों को मुफ्त अनाज देने की योजना को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। यह फैसला विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत भरा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलेगी, खासकर उन परिवारों के लिए जो रोजमर्रा के भोजन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। योजना का दायरा इस योजना के तहत, गरीब परिवारों को हर महीने अनाज प्रदान किया जाएगा। यह अनाज विभिन्न प्रकार के अनाज, जैसे गेहूं और चावल, शामिल होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी जरूरतमंद लोगों को उचित मात्रा में खाद्य सामग्री मिल सके। सीमावर्ती इलाकों में किया जाएगा सड़क निर्माण साथ ही इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से बातचीत की और सरकार के नए कदमों के बारे में जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निवेश का विवरण बैठक में निर्णय लिया गया कि सीमावर्ती इलाकों में 4,406 करोड़ रुपये के निवेश से 2,280 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुविधाएं बढ़ाएगी, बल्कि देश की सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगी। विकास के लाभ इस सड़कों के निर्माण से सीमावर्ती क्षेत्रों में आवागमन में सुधार होगा, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह सुरक्षा बलों की तैनाती और ऑपरेशन में भी मदद करेगा।केंद्रीय कैबिनेट के इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दे रही है। इससे न केवल स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि यह देश की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा।

नहीं रहे रतन टाटा, मुंबई हॉस्पिटल में ली अंतिम सांसें, देश के लिए किए ये 5 बड़े काम

मुंबई दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा अब हमारे बीच नहीं रहे, 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. दरअसल, रतन टाटा को भारतीय उद्योग का पितामह भी कहा जाता है. अपने व्यक्तित्व से उन्होंने लोगों को प्रभावित किया. रतन टाटा ने इस दुनिया को कई बहुमूल्य उपहार दिए. उनका योगदान आज भारत समेत पूरे विश्व के लिए एक नजीर है. यूं तो देश निर्माण में रतन टाटा के अनगिनत योगदान हैं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता. लेकिन इनमें से कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने समय की परिधि पर अमिट छाप छोड़ दी है. जिस समय पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा था, उस समय भारत भी हेल्थ संकटों से लड़ रहा था. इस संकट के समय में  रतन टाटा सामने आए और उन्होंने 500 करोड़ रुपये की देश को सहायता दी. उन्होंने एक्स (x) पर लिखा था, कोविड-19 हमारे सामने आने वाली सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है. टाटा ट्रस्ट और टाटा समूह की कंपनियां अतीत में भी देश की जरूरतों के लिए आगे आईं हैं. इस समय आवश्यकता किसी भी अन्य समय से अधिक है.   रतन टाटा अपने सौम्य स्वभाव और उदार दिल के लिए जाने जाते थे. उनको कुत्तों से बड़ा लगाव रहा. अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने कुत्तों के लिए एक हास्पिटॉल खोला. उन्होंने हॉस्पिटल खोलते समय कहा था कि मैं कुत्तों को अपने परिवार का हिस्सा मानता हूं. रतन टाटा ने आगे कहा था कि मैं जीवन कई पेट्स रखे हैं. इस वजह से मुझे हॉस्पिटल की अहमियत पता है. उनके द्वारा नवी मुम्बई बनाया गया अस्पताल 5 मंजिला है, जिसमें 200 पालतू जानवरों का एक साथ इलाज किया जा सकता है. इसको 165 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. रतन टाटा को कुत्तों से कितना नेह है उसे इस बात से भी समझा जा सकता है कि एक बार एक कुत्ते को वो यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा लेकर गए थे. जहां कुत्ते का जॉइंट रिप्लेसमेंट किया गया था. टाटा ग्रुप पहले केवल बड़ी गाड़ियों के निर्माण के लिए जाना जाता था. लेकिन 1998 रतन टाटा ने छोटी गाड़ियों की दुनिया में भी उतरने का फैसला लिया और उन्होंने टाटा इंडिका (Tata Indica) को बाजार में लॉन्च किया. टाटा इंडिका पूरी तरह से एक स्वदेशी कार थी. जिसको लोगों ने खूब पसंद किया और इसने बिक्री के सारे रिकॉर्ड तोड़ कर बाजार में नया कीर्तिमान को स्थापित कर दिया. उसके लगभग एक दशक बाद टाटा ने एक और प्रयोग किया और वो 2008 में बाजार में नैनो कार लेकर आए, जिसकी कीमत एक लाख रुपये से भी कम थी. कहते हैं अगर मन में ठान लें तो कोई लक्ष्य बड़ा नहीं होता, टाटा इंडिका इतना ब्रेकडाउन हो रही थी कि साल 1999 में टाटा ने उसे बेचने का फैसला कर लिया. ये जज्बे से भरे रतन टाटा के लिए एक बहुत बड़ा झटका था. उसी समय वो बिल फोर्ड को अपनी कार की कंपनी बेचना चाहते थे. लेकिन बिल फोर्ड  ने तंज कसते हुए कहा कि जब पैसेंजर कार बनाने का कोई अनुभव नहीं था तो ये बचपना क्यों किया. ये बात उनको चुभ गई और उन्होंने कंपनी को बेचने से इनकार कर दिया. एक दशक बाद वक्त ने करवट ली और फोर्ड मोटर्स की हालत खराब हो गई. जिस वजह से फोर्ड को बेचना और उसे रतन टाटा ने खरीद लिया. भारत में जब भी सॉफ्टवेयर कंपनी का जिक्र करते ही लोगों की जुबान से सबसे पहले टीसीएस का ही नाम आता है. टीसीएस दुनिया की सबसे बड़ी सूचना तकनीकी और बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवा देने वाली कंपनियों में से एक है. जिसने तकनीक के क्षेत्र में अहम योगदान के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन भी किया.

भारत के ‘रतन’ की कहानी, टाटा कंपनी को बना दिया इंटरनेशनल ब्रांड

नई दिल्ली रतन टाटा नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का बुधवार रात को निधन हो गया. मुंबई के अस्‍पताल में उन्होंने 86 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. 1962 में टाटा ग्रुप में सहायक के रूप में हुआ थे शामिल रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे. रतन टाटा की उपलब्धियां 1. टाटा समूह के अध्यक्ष के रूप में 1991-2012 तक सेवा. 2. जैगुआर लैंड रोवर की खरीद (2008). 3. कोरस की खरीद (2007). 4. टाटा स्टील की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 5. टाटा मोटर्स की सफलता. 6. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की वैश्विक पहुंच बढ़ाना. 7. टाटा समूह की वैश्विक ब्रांड वैल्यू में वृद्धि. रतन टाटा के प्रमुख पुरस्कार और सम्मान 1. पद्म विभूषण (2008) 2. पद्म भूषण (2000) 3. ऑनररी नाइट कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (2009) 4. इंटरनेशनल हेरिटेज फाउंडेशन का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2012) परोपकार और सामाजिक कार्य रतन टाटा को उनकी परोपकार और समाज सेवा के कार्यों के लिए व्यापक रूप से सराहा जाता है. उनके नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट और टाटा फाउंडेशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, और तकनीकी नवाचारों के क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया है.

लद्दाख और अरुणाचल की मौजूदा स्थिति का जायजा लेगा सैन्य नेतृत्व

नई दिल्ली  चीन को कड़ा संदेश देने के लिए पहली बार सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नेतृत्व में भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास 10-11 अक्टूबर को सिक्किम में बैठक करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित शीर्ष रक्षा अधिकारी संबोधित करेंगे। शीर्ष सैन्य कमांडरों की महत्वपूर्ण बैठक वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब किसी स्थान पर होगी। बैठक में एलएसी पर संवेदनशील स्थिति, विशेष रूप से लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति का जायजा लिया जाएगा, जहां दोनों पक्ष नियमित आधार पर गतिरोध और टकराव में लगे हुए हैं। सम्मेलन का दूसरा चरण 28-29 अक्टूबर को दिल्ली में होने की संभावना है। अधिकारियों ने कहा कि शीर्ष अधिकारी मौजूदा वैश्विक संघर्षों के सबक और सेना के विभिन्न अंगों सहित भारतीय बलों के लिए सीख पर भी चर्चा करेंगे। जनरल द्विवेदी के नेतृत्व में शीर्ष सेना कमांडरों की यह पहली बैठक होगी। उन्होंने इस साल 30 जून को सेना प्रमुख का पद संभाला था। हाल ही में जनरल द्विवेदी ने सीमा पर चीन के साथ स्थिति स्थिर लेकिन सामान्य बताया था। उन्होंने यह भी कहा था कि संवेदनशील क्षेत्र में चीन के साथ लंबे समय से चल रहे सैन्य गतिरोध में भारतीय सेना और चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच विश्वास को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। अप्रैल, 2020 जैसी स्थिति बहाल होने तक स्थिति संवेदनशील बनी रहेगी और हम किसी भी तरह की आकस्मिकता का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।    

रतन टाटा का 86 साल की उम्र में निधन, PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि

मुंबई अरबपति कारोबारी और बेहद ही दरियादिल इंसान रतन टाटा का निधन हो गया है. वह 86 वर्ष के थे. उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं रहे. 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया. उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. कुछ दिनों पहले उन्हें उम्र संबंधी मेडिकल कंडीशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके स्वास्थ्य को लेकर खबरें चल रही थी और इस बारे में उन्होंने एक बयान जारी कर बताया भी था कि उनकी तबीयत ठीक है और सामान्य चेक-अप के लिए अस्पताल में हैं. उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर “गलत सूचना” न फैलाने की सलाह दी थी. रतन टाटा ने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. भारतीय इतिहास में रतन टाटा का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. भारत में जब भी उद्योगपतियों का जिक्र होगा. सबसे पहले रतन टाटा का नाम लिया जाएगा. उन्होंने अपने जीवन की सार्थक यात्रा में बहुत से ऐतिहासिक काम किए. रतन टाटा की शख्सियत देखें तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान, लोगों के लिए आदर्श और प्रेरणास्रोत भी थे. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. उन्होंने टाटा को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया. रतन टाटा का जन्म 28 दिसंबर, 1937 को नवल और सूनू टाटा के घर हुआ था. उन्होंने 1962 में कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद 1975 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में एडवांस मैनेजमेंट कार्यक्रम पूरा किया. उनके पिता नवल टाटा एक सफल उद्योगपति थे और उन्होंने टाटा समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वहीं रतन टाटा की मां सोनी टाटा एक गृहिणी थीं. रतन टाटा 1962 में टाटा इंडस्ट्रीज में सहायक के रूप में टाटा ग्रुप में शामिल हुए थे. बाद में उसी वर्ष टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (जिसे अब टाटा मोटर्स कहा जाता है) के जमशेदपुर संयंत्र में छह महीने की ट्रेनिंग ली. विभिन्न कंपनियों में सेवा देने के बाद उन्हें 1971 में नेशनल रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी का प्रभारी निदेशक नियुक्त किया गया. 1981 में, उन्हें समूह की अन्य होल्डिंग कंपनी टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जहां वे इसे समूह रणनीति थिंक टैंक और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यवसायों में नए उपक्रमों के प्रवर्तक में बदलने के लिए जिम्मेदार थे. वे 1991 से 28 दिसंबर, 2012 को अपनी सेवानिवृत्ति तक टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अध्यक्ष थे. इस दौरान वे टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा पावर, टाटा ग्लोबल बेवरेजेज, टाटा केमिकल्स, इंडियन होटल्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित प्रमुख टाटा कंपनियों के अध्यक्ष थे. वे भारत और विदेशों में विभिन्न संगठनों से भी जुड़े हुए थे. रतन टाटा मित्सुबिशी कॉर्पोरेशन और जेपी मॉर्गन चेस के अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड में भी थे. वे सर रतन टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स, और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और एलाइड ट्रस्ट्स के अध्यक्ष थे. वे टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष थे. वह कॉर्नेल विश्वविद्यालय और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के न्यासी बोर्ड में भी कार्य करते थे.

14 अक्टूबर से दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस

पटना  यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने कई ट्रेनों के ठहराव में बदलाव किया है। रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए वंदे भारत, हटिया एक्सप्रेस और श्रमजीवी एक्सप्रेस के ठहराव में बदलाव किए हैं। वंदे भारत ट्रेन का ठहराव 13 अक्टूबर से बख्तियारपुर में और हटिया एक्सप्रेस का दनियावां में होगा। श्रमजीवी एक्सप्रेस का पावापुरी रोड स्टेशन पर ठहराव भी 14 अक्टूबर से होगा। बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चन्द्र ने बताया कि ये बदलाव यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। अधिकारी ने बताया कि 13 अक्टूबर से पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस (22348) बख्तियारपुर स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:37 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 08:39 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में हावड़ा-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस (22347) रात 21:32 बजे बख्तियारपुर पहुंचेगी और 21:34 बजे आगे के लिए रवाना होगी। बख्तियारपुर में नए ठहराव के कारण 22348 पटना-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस मोकामा में 09:02/09:04 बजे और लखीसराय में 09:24/09:26 बजे रुकेगी। दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस इसी तरह, 14 अक्टूबर से इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस (18623) शाम 19:54 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 19.56 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 15 अक्टूबर से 18624 हटिया-इसलामपुर एक्सप्रेस सुबह 07;38 बजे दनियावां हॉल्ट पर रुकेगी और 07:40 बजे आगे के लिए रवाना होगी। दनियावां में नए ठहराव के कारण 18623 इस्लामपुर-हटिया एक्सप्रेस के दनियावां बाजार हॉल्ट पर ठहराव समय में भी बदलाव किया गया है। यह ट्रेन अब दनियावां बाजार हॉल्ट पर 20:07/20:09 बजे रुकेगी। पावापुरी रोड स्टेशन राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस 14 अक्टूबर से राजगीर-नई दिल्ली श्रमजीवी एक्सप्रेस (12391) भी पावापुरी रोड स्टेशन पर रुकेगी। यह ट्रेन सुबह 08:20 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 08:22 बजे आगे के लिए रवाना होगी। वापसी में 12392 नई दिल्ली-राजगीर श्रमजीवी एक्सप्रेस सुबह 09:15 बजे पावापुरी रोड स्टेशन पहुंचेगी और 09:17 बजे आगे के लिए रवाना होगी।

हरियाणा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने ईवीएम और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर फिर सवाल उठाए

नई दिल्ली राहुल गांधी ने एक बार कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असली ताकत उनका इकबाल है और एक दिन वह उस इकबाल को खत्म करके रहेंगे। इसके लिए उन्होंने कोशिशें भी खूब की। राफेल सौदे को लेकर ‘चौकीदार चोर है’ का अभियान हो या हिंडनबर्ग रिपोर्ट को लेकर ‘मोदानी’ का हमला या फिर अंबानी-अडानी की जेब में सरकार वाला नैरेटिव…राहुल गांधी ने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली। राहुल गांधी मोदी का इकबाल खत्म भले न कर पाए लेकिन ऐसा लगता है कि उनकी पार्टी अब संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ध्वस्त करने के खतरनाक खेल में जुट गई है। हरियाणा चुनाव में हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने और चुनाव आयोग पर हमले से कांग्रेस असल में यही कर रही। उस ईवीएम पर सवाल उठा रही जो एक बार नहीं बल्कि कई बार, बार-बार अग्निपरीक्षा में पास हुई है। बेदाग साबित हुई है। सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिली। चुनाव आयोग ने हैकिंग का ओपन चैलेंज तक दिया लेकिन कोई सामने नहीं आया। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का! मंगलवार को दो राज्यों के चुनाव नतीजे आए। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नैशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन की जीत हुई तो हरियाणा में बीजेपी की। लेकिन दोनों परिणामों को लेकर कांग्रेस की प्रतिक्रिया में जमीन-आसमान का फर्क था। जहां जीते वहां तो लोकतंत्र की जीत। राज्य के साथ ‘अन्याय’ और ‘अपमान’ का जनता का करारा जवाब। तरह-तरह के लच्छेदार जुमले। लेकिन जहां हार गए, वहां जनादेश का सम्मान तो दूर, उसे न स्वीकार करने का अहंकार। जीत गए तो ईवीएम ठीक, हार गए तो सारा दोष ईवीएम का। हरियाणा चुनाव के लिए मंगलवार सुबह 8 बजे जब काउंटिंग शुरू हुई तो शुरुआती रुझानों में कांग्रेस बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी थी। लेकिन 1-2 घंटे बाद ही रुझान पलट गए। बीजेपी आगे हो गई। एक बार आगे हुई तो फिर अंतिम नतीजे आने तक आगे ही रही। पिछड़ने के बाद से ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। पहले काउंटिंग के आंकड़ों के कथित धीमे अपडेट का मुद्दा उठाया। वक्त के साथ जब रुझान निर्णायक मोड़ पर पहुंच गए तब कांग्रेस ने ईवीएम पर ही सवाल उठाना शुरू कर दिया। जनादेश को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस ने काउंटिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठा दिए। ईवीएम पर उंगली उठाई। साजिश का आरोप लगाने लगे। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतगणना के वक्त कई ईवीएम में 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज मिली। जिन ईवीएम की बैटरी 60-70 प्रतिशत चार्ज थीं वहां कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन का दावा किया। जहां 99 प्रतिशत बैटरी चार्ज थी वहां बीजेपी की जीत का दावा किया. लेकिन चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ईवीएम बैटरी की क्षमता और नतीजों में कोई संबंध ही नहीं है। आत्ममंथन के बजाय ईवीएम का रोना! कांग्रेस ने हार को स्वीकार कर आत्ममंथन और समीक्षा के बजाय बहानेबाजी का आसान रास्ता चुना लेकिन ऐसा करते हुए वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की महान लोकतांत्रिक प्रक्रिया और उसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है। हरियाणा में इस बार कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 2019 में 31 सीट जीतने वाली कांग्रेस ने इस बार 37 सीटों पर जीत हासिल की। वोट शेयर में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पिछली बार कांग्रेस का वोटशेयर 28 प्रतिशत था तो इस बार 39 प्रतिशत यानी 11 प्रतिशत ज्यादा रहा। लेकिन प्रदर्शन में ये सुधार सत्ता तक नहीं पहुंचा पाया। ऐसा क्यों हुआ, उसकी समीक्षा के बजाय पार्टी चुनावी प्रक्रिया पर ही लांछन लगाने लगी है। वैसे कांग्रेस या विपक्षी दल ऐसा पहली बार नहीं कर रहे। इससे पहले भी अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से पार्टियां ईवीएम पर चुप्पी या हो-हल्ला मचाती रही हैं। ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल तो सबसे पहले बीजेपी ने ही उठाए थे। 2009 की हार के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ईवीएम पर संदेह किया था। बीजेपी के एक और नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने तो बाकायदे किताब लिखकर ईवीएम पर संदेह जताया था। लेकिन ईवीएम एक बार नहीं, कई बार अग्निपरीक्षा से गुजरी और हर बार बेदाग निकली। जब देश की सबसे बड़ी अदालत से ईवीएम और चुनाव आयोग को क्लीन चिट मिल गई तब इस पर चल रहा विवाद खत्म हो जाना चाहिए था। हर अग्निपरीक्षा में बेदाग साबित हुई है ईवीएम निहित स्वार्थ के तहत चुनाव आयोग और ईवीएम को लांछित करने की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट एडीआर जैसे समूहों को लताड़ लगा चुका है। इसी साल अप्रैल में जब लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी तब सर्वोच्च अदालत ने पिछले 70 सालों से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग की तारीफ की और साथ में इस पर दुख जताया कि ‘निहित स्वार्थी समूह’ देश की उपलब्धियों को कमजोर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम पर 8 बार परीक्षण किया गया और ये हर बार बेदाग निकली। ईवीएम को लेकर कई बार मामले हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन हर बार उसकी विश्वसनीयता असंदिग्ध मिली। वीवीपैट पर्चियों और ईवीएम में दर्ज वोटों के मिलान में कभी कोई विसंगति नहीं दिखी। अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कई राज्यों में ईवीएम में दर्ज वोट और वीवीपैट का मिलान हुआ। सब सही पाया गया और ईवीएम बेदाग साबित हुई। सात साल पहले 2017 में तो चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों या किसी भी व्यक्ति या संगठन को ईवीएम हैक करके दिखाने का खुला चैलेंज दिया था। तब सिर्फ 2 पार्टियों ने ही चैलेंज स्वीकार किया था- एनसीपी और सीपीएम। तय तारीख को दोनों पार्टियों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर तो पहुंचे लेकिन चैलेंज में हिस्सा लेने की हिम्मत नहीं हुई। हां, आम आदमी पार्टी ने जरूर दिल्ली विधानसभा के भीतर प्रहसन किया। विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जुगाड़ के डिब्बों को ईवीएम का नाम देकर कथित तौर पर हैक करके दिखाया गया। पार्टी ने असली ईवीएम के बजाय ‘जुगाड़ डिब्बे’ का इस्तेमाल करके सस्ती पब्लिसिटी का हथकंडा अपनाया। चुनाव आयोग कार्रवाई न कर दे, इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र की आड़ ली गई। हार-जीत होती रहेगी, जनता में … Read more

घातक ड्रोन बनेगा राफेल का पूरक, दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे

पेर‍िस  फ्रांस का लड़ाकू विमान राफेल पूरी दुनिया में सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। भारत से लेकर कतर तक ने फ्रांस को जमकर ऑर्डर दिए हैं। इससे राफेल बनाने वाली कंपनी डसाल्‍ट एविएशन की चांदी हो गई है। अब फ्रांसीसी कंपनी राफेल मल्‍टी रोल जेट की अगली पीढ़ी F5 बना रही है जो हवा में ही ‘शाही बॉडीगार्ड’ से लैस होगा। दरअसल, फ्रांसीसी कंपनी चाहती है कि हवा में राफेल के साथ एक मानवरहित ड्रोन विमान भी उड़ान भरे। यह ड्रोन राफेल के पायलट के इशारे पर काम करेगा और दुश्‍मन को तबाह करने में मदद करेगा। फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टिअन लेकोर्नू ने राफेल के घर कहे जाने वाले सेंट डिजिअर एयरबेस पर इस ड्रोन का ऐलान किया। यह ड्रोन पहले के nEUROn UCAV प्राजेक्‍ट के आधार पर तैयार किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक nEUROn UCAV का ट्रायल के दौरान पायलट वाले लड़ाकू विमानों के साथ पहले ही इस्‍तेमाल किया जा रहा है। डसॉल्‍ट कंपनी के सीईओ एरिक ट्रैप्पियर ने कहा, ‘यह रेडार की पकड़ में नहीं आने वाला लड़ाकू ड्रोन विमान साल 2033 तक फ्रांसीसी एयर फोर्स को तकनीकी और ऑपरेशनल बढ़त दिलाएगा।’ यह ड्रोन विमान कई तरह की क्षमताओं से लैस होगा और इसे शामिल किया जाएगा। इस ड्रोन का अभी कोई नाम नहीं रखा गया है और यह राफेल का पूरक होगा। यह ड्रोन और राफेल दोनों मिलकर युद्ध के मैदान में काम करेंगे। राफेल F5 जेट का ड्रोन क्‍यों है बेहद खास ? इस यूएवी के अंदर ही एक आंतरिक पेलोड होगा। इस ड्रोन में ऑटोनॉमस कंट्रोल और राफेल का पायलट इसे आसानी से उड़ा सकेगा। डसॉल्‍ट ने बताया कि यह ड्रोन विमान कई गुणों से लैस होगा और भविष्‍य में आने वाले खतरों को ध्‍यान में रखकर इसे आगे भी विकसित किया जा सकेगा। कंपनी ने इस किलर ड्रोन के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी है। बता दें कि फ्रांस एक परमाणु हथियार संपन्‍न राष्‍ट्र है और वह अब राफेल की मदद से परमाणु प्रतिरोधक क्षमता रखता है। इससे पहले मिराज फाइटर परमाणु बम गिराने के लिए तैयार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक भविष्‍य में किलर ड्रोन परमाणु मिशन के दौरान आकाश में आने वाले खतरों को दूर करेगा और इसके बाद राफेल आराम से एटम बम गिरा सकेगा। राफेल का एफ-5 वर्जन नए ड्रोन के साथ साल 2060 तक फ्रांस की वायुसेना में बना रह सकेगा। राफेल के एफ-5 वर्जन के लिए शुरुआती अध्‍ययन हो चुका है और साल 2026-27 में इसका पूरा विकास शुरू हो जाएगा। इससे आने वाले समय में यह राफेल नए ड्रोन के साथ उड़ान भर सकेगा। आने वाले दिनों में फ्रांस राफेल को ASN4G से लैस करने जा रही है जो फ्रांसीसी वायुसेना का स्‍टैंडऑफ न्‍यूक्लियर वेपन है। भारत को भी हो सकता है बड़ा फायदा इस नए राफेल नई क्रूज मिसाइल, एयर टु-एयर मिसाइल और नई एंटी शिप हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने की भी योजना है। राफेल एफ-5 संस्‍करण दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को मुख्‍य रूप से निशाना बनाएगा। नए राफेल को इस तरह से बनाया जाएगा कि वह दुश्‍मन की नजर में नहीं आए और अगर हमला हो तो बचाव भी कर सके। फ्रांस अगर यह नया राफेल बनात है तो इससे भारत को भी बड़ा फायदा हो सकता है। भारत 100 से ज्‍यादा लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है और इससे पहले भारतीय वायुसेना में राफेल को शामिल किया जा चुका है। भारत अब नौसेना के लिए भी राफेल खरीद रहा है। ऐसे में भविष्‍य में भारत को भी इस परमाणु बम गिराने वाले ड्रोन से लैस राफेल का ऑफर मिल सकता है।

भारत अमेरिका से खरीद रहा MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो, डील से भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध और मजबूत होंगे

नई दिल्ली भारतीय नौसेना की गिनती दुनियाभर की टॉप 10 नेवी में होती है। अब इसकी ताकक औरबढ़ने वाली है। दरअसलभारत अमेरिका से 53 MK-54 लाइटवेट टॉरपीडो खरीदने वाला है। जिनकी कीमत 175 मिलियन डॉलर है। ये टॉरपीडो भारत के नए MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टरों के लिए हैं। बाइडन प्रशासन का कहना है कि यह सौदा दोनों देशों के रिश्ते मजबूत करेगा। इससे भारत की सुरक्षा भी बेहतर होगी। बढ़ेगी नौसेना की ताकत अमेरिका का कहना है कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम है। नए टॉरपीडो से भारत की नौसेना और मजबूत होगी। वे पनडुब्बियों से होने वाले खतरों से निपटने में सक्षम होंगे। भारत ने मार्च में छह MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर शामिल किए थे। ये हेलीकॉप्टर हेलफायर मिसाइल, MK-54 टॉरपीडो और प्रेसिजन-किल रॉकेट से लैस हैं। अगले साल तक भारत को 24 और सीहॉक मिलेंगे। ये सभी हेलीकॉप्टर फरवरी 2020 में हुए 15,157 करोड़ रुपये के सौदे का हिस्सा हैं। सीहॉक हेलीकॉप्टर काफी आधुनिक हैं। इनमें मल्टी-मोड रडार और नाइट-विजन उपकरण भी हैं। ये हेलीकॉप्टर युद्धपोतों से संचालित हो सकते हैं। नौसेना अधिकारियों का कहना है कि सीहॉक दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं। यह सौदा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं। MK-54 टॉरपीडो भारत की नौसेना को एक मजबूत बढ़त देंगे। कितने पावरफुल होते हैं MK-54 लाइटवेट टॉर्पीडो एक प्रकार का स्वचालित पनडुब्बी रोधी हथियार है, जिसे पानी के अंदर चलने वाले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये टॉर्पीडो आधुनिक तकनीक से लैस होते हैं और उच्च गति से चलते हैं। इन्हें हल्का होने के कारण विभिन्न प्रकार के प्लेटफॉर्म जैसे कि हेलीकॉप्टर, विमान और जहाज से लॉन्च किया जा सकता है।

86 की उम्र में रतन टाटा का मुंबई में निधन, शोक में देश

नई दिल्ली देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है. भारत के दिग्‍गज उद्योगपति रतन टाटा का निधन बुधवार की शाम को हो गया. उन्‍होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में अंतिम सांस ली. रतन टाटा 86 साल के थे. पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी. दरअसल, बुधवार की शाम में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी. जिसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है. रतन टाटा का जाना देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है. हालांकि उन्हें देश कभी भूल नहीं पाएगा. उन्होंने देश के एक से बढ़कर एक काम किए. टाटा ग्रुप को ऊंचाईयों पर पहुंचाने में रतन टाटा की सबसे बड़ी भूमिका रही. इन्‍होंने देश और आम लोगों के लिए कई ऐसे काम किए, जिसके लिए उन्‍हें हमेशा याद किया जाता रहेगा. रतन टाटा एक दरियाद‍िली इंसान थे और मुसीबत में देश के लिए हमेशा तैयार रहते थे. दो दिन पहले ही कहा था- मैं बिल्‍कुल ठीक हूं इससे पहले सोमवार को भी रतन टाटा की तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद खुद रतन टाटा के एक्‍स (ट्विटर) हैंडल से एक पोस्‍ट शेयर किया गया था. इस पोस्‍ट में लिखा था कि मेरे लिए चिंता करने के लिए सभी का धन्‍यवाद! मैं बिल्‍कुल ठीक हूं. चिंता की कोई बात नहीं, मैं बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारियों की रूटीन जांच के लिए अस्‍पताल आया हूं. लेकिन देश को ये दर्द रहेगा कि वो इस बार अस्पताल से लौट नहीं पाए, और हमेशा के लिए अंतिम यात्रा पर निकल पड़े. 28 दिसंबर को हुआ था जन्‍म अरबपति कारोबारी और बेहद दरियादिल इंसान रतन टाटा 86 साल के थे, 28 दिसंबर 1937 को उनका जन्म हुआ था. वे साल 1991 से 2012 तक टाटा ग्रुप के चेयरमैन रहे और इस दौरान उन्होंने बिजनेस सेक्टर में कई कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के सबसे पुराने कारोबारी घरानों में से एक टाटा समूह को बुलंदियों तक पहुंचाया. रतन टाटा की शख्सियत को देखें, तो वो सिर्फ एक बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि एक सादगी से भरे नेक और दरियादिल इंसान भी थे. वो देश के लिए हमेशा आदर्श और प्रेरणास्रोत रहेंगे. वे अपने समूह से जुड़े छोटे से छोटे कर्मचारी को भी अपना परिवार मानते और उनका ख्याल रखने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते, इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. 1991 में बने थे चेयरमैन गौरतलब है कि रतन टाटा को 21 साल की उम्र में साल 1991 में ऑटो से लेकर स्टील तक के कारोबार से जुड़े समूह, टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया था. चेयरमैन बनने के बाद रतन टाटा ने टाटा ग्रुप को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया. उन्होंने 2012 तक इस समूह का नेतृत्व किया, जिसकी स्थापना उनके परदादा ने एक सदी पहले की थी. 1996 में टाटा ने टेलीकॉम कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज की स्थापना की और 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को मार्केट में लिस्‍ट कराया था.  

हरियाणा : भाजपा के सामने जीत के बाद अब ‘मुख्यमंत्री’ चुनने की चुनौती

चंडीगढ़ हरियाणा में चुनावी संग्राम खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने एग्जिट पोल और राजनीतिक पंडितों को धता बताते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। हालांकि प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे पर आखिरी मुहर लगानी बाकी है। जिस तरह भाजपा ने चुनाव से पहले इस मुद्दे को शांत रखा, वैसी ही उम्मीद मतगणना के बाद भी की जा रही है। कुल 90 सीटों वाली हरियाणा विधानसभा में बहुमत आंकड़ा 46 का बनता है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जननायक जनता पार्टी (जजपा) के साथ मिलकर इस लक्ष्य को हासिल किया था, लेकिन इस बार उसने अकेले चुनाव लड़ा और 48 सीटों पर पहुंच गई। लगातार तीन बार प्रदेश में जीत की हैट्रिक लगाना पार्टी के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। भारतीय जनता पार्टी ने एक नहीं बल्कि हर मोर्चे पर ऑलराउंड प्रदर्शन करके सबको दिखा दिया है कि जमीनी स्तर पर अच्छे काम करके सत्ता में लगातार वापसी की जा सकती है। भले ही चुनाव से पहले किसान और बेरोजगारी जैसे मुद्दे पार्टी के ऊपर हावी हो रहे थे, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता को मिल रही बिजली, पानी और सड़क की सुविधा ने ज्यादा असर दिखाया, तभी तो पार्टी ने सिर्फ सीट की संख्या ही नहीं बल्कि वोट शेयर में भी बढ़ोतरी दर्ज की है। पिछली बार 2019 में पार्टी को 36.49 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे और 40 सीटों पर जीत मिली थी, वहीं इस बार उसने 39.94 प्रतिशत वोटों के साथ 48 सीटों पर जीत दर्ज की है। भले ही भाजपा अर्धशतक लगाने से चूक गई लेकिन पहले से बेहतरीन स्ट्राइक रेट के साथ टीम ने मैच को अपने पाले में कर लिया। अब मुख्यमंत्री का सेहरा किसके सिर बंधता है यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नायब सिंह सैनी को ही एक बार फिर मौका दे सकती है। यह बात बहुत हद तक हरियाणा के दिग्गज भाजपा नेता अनिल विज के रुख पर भी निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने की उनकी महत्वाकांक्षा जगजाहिर है। कई बार सार्वजनिक मंचों से भी वह इसका जिक्र कर चुके हैं।अनिल विज क्या अब अपनी इस मांग को और मुखर करेंगे या फिर पार्टी हाईकमान के फैसले की पूरे धैर्य से इंतजार करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अपने अभियान के दौरान 25,000 रुपये की रिश्वत लेता रंगे हाथों गिरफ्तार

चंडीगढ़ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अपने अभियान के दौरान आज पटियाला जिले के पातड़ां कस्बे के एक प्राइवेट व्यक्ति अजैब सिंह को 25,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस संबंध में जानकारी देते हुए राज्य विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि उक्त आरोपी को पातड़ां नगर के रहने वाले गोपी चंदर द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि शिकायतकर्ता ने विजिलेंस ब्यूरो से संपर्क किया और बताया कि वह पातड़ां शहर में नूरमहल नामी एक होटल चला रहा है। उन्होंने आगे बताया कि होटल को सुचारु रूप से चलाने के लिए उक्त आरोपी और उसके साथी सिकंदर सिंह, जो पातड़ां नजदीक गांव दुग्गल का रहने वाला है, को डी.एस.पी. पातड़ां के नाम पर उनसे 25 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। प्रवक्ता ने आगे बताया कि इस शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया, जिसके दौरान आरोपी अजैब सिंह को दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में शिकायतकर्ता से 25000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत विजिलेंस ब्यूरो पुलिस स्टेशन पटियाला रेंज में मामला दर्ज किया गया है और इस मामले की आगे की जांच जारी है।

पीएम मोदी की कैबिनेट में पंजाब के लिए बड़ा फैसला लिया, सीमावर्ती इलाकों में सड़क बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी

पंजाब आज पीएम मोदी की कैबिनेट में पंजाब के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने जब से सत्ता संभाली है, उनके एजेंडे में 2 मुख्य बातें रही हैं। पहला, हाशिये पर पड़े लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाना और दूसरा, देश के बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाना। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लिए गए फैसलों में पंजाब के लिए बड़ा ऐलान किया गया है। पंजाब और पाकिस्तान की सीमा से लगे अन्य राज्यों में सड़क व्यवस्था सुधारने के लिए आज मोदी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने सीमावर्ती इलाकों में 2280 किमी लंबी सड़क बनाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए मोदी सरकार ने 4400 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम मंजूर की है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। उनका मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा देश की सुरक्षा और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान (Pakistan) के सीमावर्ती इलाके दशकों से हर मौसम के लिए उपयुक्त सड़क नेटवर्क की कमी से जूझ रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों में विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क होने से परिवहन में काफी आसानी होगी। आपातकालीन स्थिति में जहां तुरंत मौके पर पहुंचना आसान होगा, वहीं जरूरी सामान की आपूर्ति भी आसानी से हो सकेगी। 

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