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दो अमेरिकी वैज्ञानिकों को वर्ष 2024 का चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने का हुआ ऐलान

स्टॉकहोम दो अमेरिकी वैज्ञानिकों विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को वर्ष 2024 का चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार देने का ऐलान हुआ है। इन दोनों वैज्ञानिकों ने माइक्रो RNA की खोज की थी। पुरस्कार देने वाली संस्था ने सोमवार को बताया कि वैज्ञानिक विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन ने माइक्रो आरएनए की खोज और जीन विनियमन में इसकी भूमिका के लिए फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2024 का नोबेल पुरस्कार जीता है। चिकित्सा क्षेत्र के लिए नोबेल विजेताओं का चयन स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट मेडिकल यूनिवर्सिटी की नोबेल असेंबली द्वारा किया जाता है। विजेताओं को 11 मिलियन स्वीडिश क्राउन ($1.1 मिलियन) की पुरस्कार राशि दी जाती है। नोबेल असेंबली ने कहा कि दोनों वैज्ञानिकों की खोज “जीवों के विकास और कार्य करने के तरीके के लिए मौलिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो रही है।”

युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल की करीब 18 बिलियन डॉलर की मदद की, हर हाल में सपोर्ट करता है अमेरिका

नई दिल्ली पिछले साल 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमास के हमले के बाद से मिडिल-ईस्ट में लगातार युद्ध जारी है। इजरायल ने पिछले एक साल में लगातार गाजा को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। दुनिया भर में मानवता की दुहाई देने वाला अमेरिका इन सब हमलों की केवल निंदा करके एक पिता और अच्छे दोस्त की तरह इजरायल सारे गुनाहों को नजरअंदाज करता दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल की करीब 18 बिलियन डॉलर की मदद की है।  इस मदद के अलावा अमेरिका ने इजरायल में पिछले एक साल में 4.86 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त सैन्य निवेश किया है। इन सब के बावजूद अमेरिका लगातार इजरायल को हमला करने की कोशिश करता है लेकिन इजरायल यह जानते हुए कि अमेरिका हर हाल में उसका सपोर्ट करेगा वह अपनी योजना के अनुसार अपने दुश्मनों पर हमला करता है। हाल ही में इजरायल की  सुरक्षा को लेकर अमेरिका के वर्तमान विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकेन ने कहा कि हम हर हाल में इजरायल की सुरक्षा करेंगे। अमेरिका का इजरायल को दिए बिना शर्त समर्थन के पीछे एक नहीं कई कारण नजर आते हैं। अमेरिका की मजबूत यहूदी लॉबी, अमेरिकी राजनेताओं के परिवारों से यहूदी परिवारों के रिश्ते और मिडिल ईस्ट में अमेरिकी हितों की रक्षा करने वाला इजरायल इनमें सबसे बड़े कारण हैं। यहां तक की अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडेन के तीनों बच्चों की शादी यहूदी परिवारों में हुई है वहीं कमला हैरिस के पति भी यहूदी ही है। लेकिन इससे इतर यहूदी परिवारों का अमेरिका की आंतरिक राजनीति में जबरदस्त प्रभाव है, जो कि अमेरिका को और ज्यादा प्रो इजरायल होने के लिए प्रेरित करता है।   इजरायल को 11 मिनट में देश के रूप यूएस ने दी मान्यता 14 मई 1948 को स्टेट ऑफ इजरायल की घोषणा होने के साथ ही केवल 11 मिनट के अंदर अमेरिका के 33 वें राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने प्रेस रिलीज जारी कर इजरायल को एक देश के रूप में मान्यता दे दी थी। इस बात को लेकर एक ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि ट्रूमैन खुद एक यहूदी विरोधी व्यक्ति थे, लेकिन इस घोषणा के कुछ महीने पहले ही ऐडी जैकबसन( एक अमेरिकी यहूदी व्यापारी) के साथ हुई मीटिंग में उन्होंने बनने वाले स्टेट ऑफ इजरायल को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। हालांकि इजरायल को एक देश के रूप मे स्वीकार करने के बाद भी अमेरिका ने इसको अपना ज्यादा समर्थन नहीं दिया। 1956 में जब इजरायल ने अपने पश्चिमी मित्रों के साथ मिलकर स्वेज नहर पर कंट्रोल के लिए इजिप्ट पर हमला कर दिया। लेकिन अमेरिका इन सभी के खिलाफ खड़ा हो गया इससे इन सभी देशों की सेनाओं को वहां से पीछे हटना पड़ा। 1960 में इजरायल ने जब न्यूक्लियर बनाने की कोशिश की थी तो अमेरिका ने इसका मुखर होकर विरोध किया था। इजरायल से अमेरिका की दोस्ती की शुरुआत 1967 में अरब देशों और इजरायल के बीच हुए युद्ध के बाद अमेरिका को इजरायल के रूप में मिडिल ईस्ट में अपना एक पार्टनर दिखा। क्योंकि इजरायल एक मजबूत लोकतंत्र के साथ साथ पश्चिमी देशों का मुख्य सहयोगी भी था। 1973 में जब इजरायल के साथ अरब देशों के साथ एक बार फिर से युद्ध हुआ तो अमेरिका ने इजरायल का पूरा समर्थन किया। सैन्य साजो सामान के साथ-साथ उसने इजरायल को आर्थिक रूप से भी सहायता दी। 1979 में जब ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और पूरे ईरान में अमेरिका विरोधी लहर चलने लगी तो अमेरिका अपनी मिडिल ईस्ट पॉलिसी में इजरायल के ऊपर और भी ज्यादा निर्भर हो गया। इस समय तक कोल्ड वॉर अपने चरम पर था। क्षेत्र में सोवियत प्रभाव को रोकने में इजरायल ने अपनी पूरी ताकत लगाकर अमेरिकी हितों को साधा। अमेरिका ने इजरायल को बनाया खास पार्टनर इसके बाद तो जैसे अमेरिका और इजरायल के रिश्तों को पंख लग गए। रीगन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने तक अमेरिका हर साल इजरायल को 1.8 बिलियन डॉलर की मदद करने लगा। दोनों देश मिलकर एक साथ दुनियाभर का सैन्य साजो सामान बनाने लगे। इसके बदले में इजरायल ने अमेरिका की भरपूर मदद की। लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी जवानों के कैंप पर हमला करके 200 से ज्यादा सैनिकों को मार डाला गया। अमेरिका ने इसके जवाब में इजरायल को खुली छूट दे दी। कुछ ही महीनों में इजरायल की सेना ने अपना बदला लेते हुए आधे लेबनान को रौंध डाला। इसके बाद 21 वीं सदी में अमेरिका और इजरायल के रिश्ते और भी ज्यादा मजबूती के साथ बढ़े। अमेरिका ने गोलन हाइट्स पर इजरायली दावे को स्वीकार कर लिया और यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में भी मान लिया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका करता है इजरायल की पूरी मदद संयुक्त राष्ट्र संघ आज की तारीख में इजरायल के गाजा और अन्य क्षेत्रों में हमलों के सामने बौना नजर आता है। क्योंकि इजरायल के खिलाफ जब भी कोई प्रस्ताव लाया जाता है तो उसके खिलाफ अमेरिका वीटो कर देता है। अब तक इजरायल को बचाने के लिए अमेरिका 50 से ज्यादा बार वीटो का प्रयोग कर चुका है।  

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को लेकर कट्टरपंथियों की धमकी के बाद हिंदू डरे हुए

ढाका  बांग्लादेश में दुर्गा पूजा को लेकर कट्टरपंथियों की धमकी के बाद हिंदू डरे हुए हैं। इसके चलते बांग्लादेश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय में दुर्गा पूजा को लेकर जोश फीका पड़ गया है। बांग्लादेश में हिंसा की बढ़ती घटनाओं के बीच ढाका में राम कृष्ण मिशन ने इस साल कुमारी पूजा नहीं मनाई है। इसके बाद मिशन ने मुख्य पूजा को खुले में न करने का फैसला किया है। यह पूजा अब सभागार के अंदर ही मनाई जाएगी।   अपनी रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है। ढाका में अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाले एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर TNIE को बताया कि ‘कट्टरपंथियों ने किसी भी तरह के साउंड का इस्तेमाल न करने की चेतावनी जारी की है। इससे पूरे देश में हिंदू डरे हुए हैं।’ कार्यकर्ता ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए राम कृष्ण मिशन में दुर्गा पूजा सभागार के अंदर आयोजित की जाएगी। कट्टरपंथियों के साथ अंतरिम सरकार बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने दुर्गा पूजा के दौरान माइक न लगाने के साथ ही किसी भी तरह के संगीत वाद्ययंत्र के इस्तेमाल को लेकर भी धमकी दी है। पूजा समितियों को पंडाल लगाने के लिए 5 लाख टका फिरौती के रूप में देने की मांग की जा रही है। इन कट्टरपंथियों को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की मौन सहमति मिली हुई है। कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश के गृह मंत्री ने भी इसी के सुर में सुर मिलाते हुए हिंदुओं से दुर्गा पूजा में नमाज के पहले साउंड और पूजा रोकने की बात कही थी। हिंदुओं के खिलाफ हिंसा 5 अगस्त को शेख हसीना के ढाका छोड़ने के बाद से बांग्लादेश के कुल 72 में से 62 जिलों में हिंदुओं को निशाना बनाकर 2010 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इसमें हिंदू समुदाय के घरों, पूजा स्थलों और कार्य स्थलों पर तोड़फोड़ और भीड़ द्वारा हत्या तक शामिल है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने आगामी त्योहार के दौरान पूजा पंडालों और हिंदुओं की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, लेकिन यह सब दिखावा है। किसी भी आरोपी को न हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है। बांग्लादेश में घट रहे हिंदू बांग्लादेश में शेख हसीना के जाने के बाद अल्पसंख्यकों पर संकट खड़ा हो गया है। मौजूदा शासन हिंदुओं को अवामी लीग का समर्थक मानता है और उनके खिलाफ अत्याचारों पर आंख मूंदे हुए है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की यह कहानी नई नहीं है। 1971 में जब बांग्लादेश के गठन के समय देश में हिंदू समुदाय आबादी का 21 प्रतिशत था। अब यह मात्र 8.7 प्रतिशत रह गया है। अल्पसंख्यक कार्यकर्ता ने कहा कि लगता है कि मौजूदा शासन नहीं चाहता कि बांग्लादेश में कोई अल्पसंख्यक रह जाए।

मालदीव में भी अब चलेगा भारत का RuPay कार्ड

नई दिल्ली मालदीव में RuPay कार्ड से भुगतान की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू इस तरह के पहले लेनदेन के गवाह बने। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले मालदीव में RuPay कार्ड लॉन्च किया गया। आने वाले समय में भारत और मालदीव UPI के जरिए जुड़ जाएंगे। इसके अलावा दोनों ने मालदीव में हनीमाधू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। भारत ने उसके सहयोग से निर्मित 700 से अधिक सामाजिक आवास इकाइयां भी मालदीव को सौंपीं। इसके साथ भारत और मालदीव के बीच कई अहम समझौते हुए। सभी फैसले, शिलान्यास और उद्घाटन पीएम मोदी और मोइज्जू की हैदराबाद हाउस में बैठक के बाद लिए गए। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत और मालदीव के संबंध सदियों पुराने हैं। भारत मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी और घनिष्ठ मित्र देश है। हमारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी और सागर विजन में मालदीव का महत्वपूर्ण स्थान है। हमने रक्षा और सुरक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। एकथा हार्बर प्रोजेक्ट पर काम तेजी से चल रहा है। इंडियन ओसियन रीजन में स्थिरता और समृद्धि के लिए हम मिलकर काम करेंगे। कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव में फाउंडिंग मेंबर के रूप में जुड़ने के लिए मालदीव का स्वागत है।

विदेश मंत्री जयशंकर नेUN के पुराने ढर्रे की जमकर आलोचना की, बोले इसी रवैये से देशों ने खुद ही कदम उठाने शुरू कर दिए

नई दिल्ली  जमाने की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे तो इंसान हो या संस्थान, हिकारत ही झेलता है। और यही हाल है संयुक्त राष्ट्र का। दुनिया की सबसे बड़ी पंचायत आज इस हालत में पहुंच गई है कि इसकी उपयोगिता पर उठे सवालों की जड़ें लगातार गहरी हो रही हैं। विश्व जब आज बहुध्रुवीय अवस्था में कहीं युद्ध तो कहीं युद्ध जैसे हालात का सामाना कर रहा है तो संयुक्त राष्ट्र का मूकदर्शक बनकर ठिठके रहना इस संस्था के निष्प्रभावी होने का पर्याप्त संकेत है। यही वजह है कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र को एक पुरानी कंपनी करार दे दिया जो बाजार से कदमताल तो नहीं मिला पा रही है, लेकिन जगह घेर रखी है। संयुक्त राष्ट्र की तुलना पुरानी कंपनी से जयशंकर ने यूएन की आलोचना करते हुए कहा कि यह एक पुरानी कंपनी की तरह है जो बाजार के साथ पूरी तरह से नहीं चल पा रही है, लेकिन जगह घेरे हुए है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में एक बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में दो बहुत ही गंभीर संघर्ष चल रहे हैं। और इन पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है? विदेश मंत्री ने कहा, ‘निश्चित रूप से एक दर्शक की।’ उन्होंने अमेरिकी चुनावों के संभावित नतीजों पर एक सवाल के जवाब में कहा कि अमेरिका ने भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण में वास्तविक बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि नवंबर में चाहे जो भी नतीजे हों, इनमें से कई रुझान आने वाले दिनों में तेज होंगे। कौटिल्य इकनॉमिक कॉन्क्लेव में बोले जयशंकर जयशंकर ने ‘भारत और दुनिया’ विषय पर आयोजित इंटेरेक्टव सेशन में भाग लिया और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत की भूमिका और चुनौतियों के बारे में बात की। जयशंकर ने श्रीलंका जैसे अपने पड़ोसी देशों के साथ-साथ अन्य देशों की मदद के लिए उठाए गए कुछ कदमों की चर्चा की। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी आगामी पाकिस्तान यात्रा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने फिर से अपने पाकिस्तानी समकक्ष के साथ किसी भी द्विपक्षीय बातचीत से इनकार किया। पाकिस्तान दौरे को लेकर क्लियर कट जयशंकर ने कहा, ‘मैं वहां एक खास काम, एक खास जिम्मेदारी के लिए जा रहा हूं। चूंकि मैं अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेता हूं इसलिए मैं एससीओ मीटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां जा रहा हूं, और बस यही करने जा रहा हूं।’ विदेश मंत्री ने शनिवार को भी कहा था कि वह बहुपक्षीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने इस्लामाबाद जा रहे हैं, न कि भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने। संयुक्त राष्ट्र की कड़ी आलोचना बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने विश्व निकाय के बारे में काफी आलोचनात्मक नजरिया पेश किया।उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र एक तरह से एक पुरानी कंपनी की तरह है, जो बाजार के साथ पूरी तरह से नहीं चल पा रही है, लेकिन जगह घेरे हुए है। और, जब यह समय से पीछे होता है, तो इस दुनिया में आपके पास स्टार्ट-अप और इनोवेशन होते हैं, इसलिए अलग-अलग लोग अपनी चीजें खुद करने लगते हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘तो आज आपके पास संयुक्त राष्ट्र है, हालांकि कामकाज में कितना भी दोयम दर्जे का क्यों न हो, यह अभी भी एकमात्र वैश्विक पंचायत है।’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘लेकिन, जब यह प्रमुख मुद्दों पर आगे नहीं बढ़ पाता है तो देश इसे करने के अपने-अपने तरीके खोज लेते हैं। उदाहरण के लिए, पिछले पांच-दस वर्षों को ही ले लीजिए, शायद हमारे जीवन में सबसे बड़ी चीज जो हुई वह थी कोविड। संयुक्त राष्ट्र ने कोविड पर क्या किया? मुझे लगता है कि जवाब है- बहुत ज्यादा नहीं।’ जयशंकर ने कहा, ‘आज दुनिया में दो संघर्ष चल रहे हैं, दो बहुत ही गंभीर संघर्ष, उन पर संयुक्त राष्ट्र कहां है, बस एक दर्शक की मुद्रा में।’ यूएन की निष्क्रियता से खुद फैसले लेने लगे देश इससे हो यह रहा है कि सभी ने अपने-अपने हिसाब से कदम उठाए, जैसे कि कोवैक्स जैसी पहल जो कई देशों के एक समूह ने की थी। उन्होंने कहा, ‘जब अब बड़े मुद्दों पर कुछ करने को लेकर सहमत होने वाले देशों के समूह बढ़ रहे हैं।’ उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी), ग्लोबल कॉमन्स की देखभाल के लिए इंडो-पैसिफिक में क्वाड, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) और आपदा प्रतिक्रियाशील अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी संपर्क पहलों का हवाला देते हुए कहा कि ये सभी निकाय संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के बाहर आए हैं। जयशंकर ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र तो रहेगा, लेकिन संयुक्त राष्ट्र से इतर का स्थान भी तेजी से तैयार हुआ है जो सक्रिय है और मुझे लगता है कि यह संयुक्त राष्ट्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।’ संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत लेकिन हो नहीं रहे जयशंकर ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्यों का अदूरदर्शी दृष्टिकोण वैश्विक निकाय के लंबे समय से लंबित सुधार में आगे बढ़ने से रोक रहा है। पांच स्थायी सदस्य रूस, यूके, चीन, फ्रांस और अमेरिका हैं और ये देश किसी भी वास्तविक प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं। जयशंकर से अमेरिकी चुनावों के संभावित नतीजे और नई सरकार के साथ भारत कैसे जुड़ेगा, इस बारे में भी सवाल किया गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों पर गौर करें तो पता चलेगा कि ट्रंप प्रशासन की कई नीतियां वास्तव में न केवल बाइडेन प्रशासन ने आगे बढ़ाई गईं बल्कि उन्होंने उन नीतियों का विस्तार किया।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह बात समझ आ गई है कि जिस व्यवस्था को उसने कई साल पहले खुद तैयार किया था, वह अब उस हद तक उसके फायदे के लिए काम नहीं करती है।’ संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के अनुसार, अपनी स्थापना के 75 से अधिक वर्षों के बाद संयुक्त राष्ट्र अभी भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने, जरूरतमंदों को मानवीय सहायता देने, मानवाधिकारों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कायम रखने के लिए काम कर रहा है। भारत बदलते समय के साथ तालमेल बिठाते हुए संयुक्त राष्ट्र और इसकी सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग करता रहा है।

नक्सलियों पर बड़े प्रहार की तैयारी! 8 राज्यों के CM से अमित शाह की मुलाकात, जानें देश में कितना खत्म हुआ नक्सलवाद

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित राज्यों में सुरक्षा और विकास की समीक्षा के लिए बैठक की अध्यक्षता की. बैठक के बाद गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल एरिया में अंतिम प्रहार किया जाएगा. मार्च 2026 तक हम नक्सलवाद को खत्म कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है तो नक्सलवाद को खत्म करना होगा. LWE के सामने लड़ने के लिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून को लागू करना जरूर है. 30 साल के बाद पहली बार वामपंथी उग्रवाद से मरने वाले लोगों की संख्या 100 से कम रही है. नक्सलियों से अंतिम चरण में लड़ाई अमित शाह ने कहा कि LWE से लड़ाई अब अपने अंतिम चरण में है. 2026 मार्च तक ये देश इस दशकों पुरानी समस्या से मुक्ति पा लेगा. LWE का 85 फीसदी कैडर स्ट्रैंथ छत्तीसगढ़ में सिमट कर रह गया है. छत्तीसगढ़ में जनवरी से लेकर अब तक 194 मारे गए , 801 ने हथियार छोड़े और 742 नक्सलियों ने सरेंडर किया. उन्होंने कहा कि मैं दोबारा नक्सलियों से अपील करता हूं हथियार छोड़िए और मुख्यधारा से जुड़िए. राज्यों में हमने राज्य पुलिस और ज्वाइंट टास्क फोर्स गठित की है, लेकिन इसकी हेरारकी पर भी काम करना है. नक्सली ऑपरेशन के लिए आज 12 हेलीकाप्टर, 6 बीएसएफ के और 6 एयरफोर्स के जवानों को बचाने के लिए तैनात हैं. ‘छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को बधाई’ शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उनकी टीम को बधाई देना चाहता हूं कि अगस्त से अब तक लगभग 194 नक्सली मारे गए हैं. जो युवा नक्सलवाद से आज भी जुड़े हैं उनसे विनती है कि हिंसा छोड़िए और मुख्यधारा में आइए. नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होने वाला है. सरकार क्षमता निर्माण का एक संयुक्त अभियान चलाया जाएगा. करीब 3 गुना बजट सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) स्कीम का बढ़ा है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रो में विकास कार्यों के लिए मुख्य योजना है.   इस बैठक में छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. इसके अलावा बैठक में पांच केंद्रीय मंत्री, केंद्रीय मंत्रालयों के सीनियर अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के प्रतिनिधि और डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर भी भाग लेंगे. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार मार्च 2026 तक एलडब्ल्यूई के खतरे को पूरी तरह से खत्म करेगी. केंद्र सरकार नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए प्रभावित राज्य सरकारों को हर संभव सहायता कर रही है. गृह मंत्री अमित शाह ने पिछली बार 6 अक्टूबर 2023 को नक्सलवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ रिव्यू बैठक की थी. उस बैठक में गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बड़े स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए थे. कहा गया है कि मोदी सरकार की रणनीति की वजह से 2010 की तुलना में 2023 में नक्सलवाद हिंसा में 72 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी, जबकि मौतों में 86 प्रतिशत की गिरावट आई थी. सरकार का कहना है कि नक्सलवाद आज अपनी अंतिम लड़ाई लड़ रहा है. इस साल कितने मारे गए हैं नक्सली? गृह मंत्रालय का कहना है कि साल 2024 में अब तक सुरक्षाबलों ने हथियारबंद नक्सलियों के सफाए में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है. इस वर्ष अब तक 202 नक्सलियों का सफाया किया जा चुका है. पिछले 9 महीनों में 723 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, जबकि 812 को गिरफ्तार किया गया है. 2024 में नक्सलवाद से प्रभावित जिलों की संख्या घटकर मात्र 38 रह जाएगी. उसका कहना है कि केंद्र सरकार ने विकास से वंचित क्षेत्रों तक योजनाओं को पहुंचाने के लिए सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने समेत कई कदम उठाए हैं. नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 14400 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं और करीब 6000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं. सरकार का नक्सलियों पर बड़ा एक्शन जिस तरह से बीजेपी सरकार ने जम्मू कश्मीर में आतंक की फंडिंग पर रोक लगाने का लगातार प्रयास किया और बहुत हद तक इसको रोका गया, वैसे ही नक्सलियों की हो रही फंडिंग को रोकने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में 31 नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों ने 6 अक्टूबर को नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया. सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के आतंक को खत्म करने के लिए 120 मिनट में 31 नक्सलियों को ढेर कर दिया. 31 नक्सलियों को ढेर किए जाने के मौके पर राज्य के सीएम विष्णु दिओ साय ने कहा, जब से हम सरकार में आए हैं, हम तब से मजबूती के साथ नक्सलवाद से लड़ रहे हैं. साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के संग सोमवार को नक्सलवाद के खिलाफ होने वाली बैठक को लेकर कहा, अमित शाह जी के संग बैठक है, जहां जिसमें नक्सल प्रभावित राज्य शामिल होंगे. 812 गिरफ्तार, 202 नक्सली ढेर मीटिंग को लेकर जारी बयान में कहा गया, इस साल 2024 में 202 नक्सलियों को ढेर किया गया, 723 ने सरेंडर किया, 812 को गिरफ्तार किया गया. बीजेपी सरकार समय-समय पर नक्सलवाद को खत्म करने का प्रयास करती रही है. पिछले साल 6 अक्टूबर को भी गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ मीटिंग की थी.

सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर अमेरिकी चुनाव में अंतरिक्ष से मतदान करेँगे

न्यूयॉर्क  महीनों से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स के अमेरिकी चुनाव तक धरती पर लौटने के आसार कम हैं। इसके बावजूद भी वह देश का नेता चुनने के लिए तैयार हैं। खबर है कि विलियम्स अंतरिक्ष से ही अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगी। खास बात है कि अमेरिका में स्पेस से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए वोटिंग की प्रथा साल 1997 से ही चली आ रही है। ISS यानी इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की कमांडर विलियम्स स्पेस से ही मतदान के लिए तैयार हैं। वह धरती की सतह से अनुमानित 400 किमी की दूरी से वोटिंग में शामिल होंगी। वह स्पेस के मतदाताओं के एक सिलेक्ट ग्रुप में शामिल होंगी। इतिहास में सबसे पहले वोट डालने वाले अमेरिकी डेविड वुल्फ हैं। वहीं, हाल ही में यह उपलब्धि हासिल करने वाली केट रुबिन्स थीं। उन्होंने 2020 के चुनाव में वोट डाला था। स्पेस से कैसे वोट डालेंगी सुनीता विलियम्स जिस तरह से विदेश में बैठे अमेरिकी नागरिक मतदान में शामिल होते हैं, उससे मिलती-जुलती प्रक्रिया से विलियम्स भी गुजरेंगी। हालांकि, इसमें कई और बातें भी शामिल हैं। सबसे पहले उन्हें एब्सेंटी बैलेट हासिल करने के लिए फेडरल पोस्ट कार्ड एप्लिकेशन पूरी करनी होगी। इसे हासिल करने के बाद वह ISS के कंप्युटर सिस्टम पर इलेक्ट्रॉनिक बैलेट भरेंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वोटिंग प्रक्रिया नासा के SCaN यानी सोफिस्टिकेटेड स्पेस कम्युनिकेशन एंड नेविगेशन पर निर्भर है। विलियम्स का बैलेट एजेंसी के नियर स्पेस नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ेगा। इसके बाद नासा के न्यू मैक्सिको स्थित व्हाइट सैंड्स टेस्ट फैसिलिटी ग्राउंड एंटेना तक पहुंचेगा। बाद में इसे ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर के मिशन कंट्रोल सेंटर भेजा जाएगा। ह्यूस्टन से एनक्रिप्टेड बैलेट काउंटी क्लर्क के पास भेजा जाएगा। खास बात है कि सिर्फ विलियम्स और काउंटी क्लर्क के पास ही मतपत्र तक पहुंच होगी।

बीरभूम की कोयला खदान में फिर हुआ हादसा, 7 मजदूरों की मौत

बीरभूम पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित एक कोयला खदान में धमाका होने की वजह से 7 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं. जिस कोयला खदान में यह ब्लास्ट हुआ वह बीरभूम जिले के लोकपुर थाना क्षेत्र में स्थित है. कंपनी का नाम गंगारामचक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड कोलियरी (GMPL) है जहां कोयला क्रशिंग के दौरान यह खदान में ब्लास्ट हो गया. इस घटना में कई कर्मचारी भी घायल हुए हैं. सूत्रों का दावा है कि कोयला क्रशिंग के लिए कोयला खदान में विस्फोट करते समय यह हादसा अनजाने में हुआ. जैसे ही धमाका हुआ तो मौके पर मौजूद जी.एम.पी.एल. के कई अधिकारी और कर्मचारी वहां से भाग निकले. स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई है और बचे हुए मजदूरों को सुरक्षित निकाला जा रहा है. इसके अलावा स्थानीय बीजेपी विधायक भी मौके पर हैं. फिलहाल बचाव और राहत का कार्य जारी है. पुलिस मृतकों के परिजनों की भी जानकारी जुटा रही है और उनसे संपर्क कर रही है.  

इजरायली सेना ने गाजा को खंडहर में बदल दिया, अब 42000 मौतें, इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है युद्ध

तेल अवीव इजरायल ने 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के बर्बर हमले की पहली बरसी पर 10 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है. हमास ने पिछले साल 7 अक्टूबर के दिन इजरायल में अचानक धावा बोल दिया था. उसके लड़ाकों ने आसमान, जमीन और समुद्र के रास्ते इजरायल में घुसकर कत्लेआम मचाया था. इस हमले में 1200 से अधिक इजरायली नागरिकों की मौत हुई थी और हमास ने 250 से के करीब लोगों को बंधक बना लिया था, जिसमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं. हमास ने अपने इस हमले को ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड (Operation Al-Aqsa Flood) नाम दिया था. इजरायल ने इस बर्बरता का बदला लेने और हमास का अस्तित्व मिटाने की कसम खाई थी. उसने गाजा में ऑपरेशन आयरन स्वॉर्डस (Operation Iron Swords) चलाया. उसकी सेना ने गाजा को खंडहर में बदल दिया. पिछले एक साल के अंदर गाजा में इजरायली कार्रवाई में करीब 41000 मौतें हुई हैं, लाखों लोग गाजा से विस्थापित हुए हैं. इजरायल अब तक इस्माइल हानिया और मोहम्मद डेफ समेत हमास के कई शीर्ष नेताओं को ढेर कर चुका है. यह 2008 के बाद से फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष का पांचवां युद्ध है, और 1973 में योम किप्पुर युद्ध के बाद इस क्षेत्र में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है. हमार ने 7 अक्टूबर के हमले को बताया ‘Glorious’ गाजा पट्टी पर 2007 से हमास का शासन है और 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के बाद इजरायल की बदले की कार्रवाई में यहां बड़े पैमाने पर विनाश हुआ है. गाजा में बुनियादी ढांचे मलबे में तब्दील हो चुके हैं. एक वर्ष बीत जाने के बाद भी, गाजा युद्ध अनसुलझा है और पूरे क्षेत्र में युद्ध की संभावना अधिक बनती जा रही है. अपने कई शीर्ष नेताओं और कमांडरों के मारे जाने के हमास सक्रिय है. कतर स्थित हमास के सदस्य खलील अल-हया ने एक वीडियो संदेश जारी करके 7 अक्टूबर, 2023 के हमले को ‘महान कार्य’ बताया है. अल-हया ने 7 अक्टूबर के हमले की बरसी पर जारी अपने संदेश में कहा, ‘पूरा फिलिस्तीन, विशेष रूप से गाजा और हमारे फिलिस्तीनी नागरिक दुश्मन के खिलाफ अपने प्रतिरोध के साथ एक नया इतिहास लिख रहे हैं.’ इजरायल कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है युद्ध हमास द्वारा 7 अक्टूबर, 2024 को किए गए हमले की पहली बरसी आने तक इजरायल कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है. अब उसका फोकस गाजा से लेबनान में शिफ्ट हो गया है. लेबनान के अलग-अलग हिस्सों में हिज्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए इजरायली सेना की जमीनी कार्रवाई और वायुसेना के हवाई हमले जारी हैं. गाजा में 41,000 से अधिक मौतों के बावजूद ऐसा लगता है कि यह हिंसा कभी खत्म नहीं होने वाली. इजरायली रक्षा बलों ने 5 अक्टूबर, 2024 को गाजा शहर के बगल में स्थित जबालिया में हमास लड़ाकों को खत्म करने के इरादे से एक और अभियान शुरू किया. इजरायल ने कहा कि हमास जबालिया में फिर सिर उठाने की कोशिश कर रहा था. अब भी 101 बंधकों के बारे में नहीं चल सका पता यह संभव है कि इजरायल के खिलाफ उसके दुश्मनों द्वारा एक और आतंकवादी हमला या सैन्य अभियान इलाके में संघर्ष की स्थिति को और भी भयावह बना सकता है. हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमले के दौरान जिन 250 लोगों को बंधक बनाया था, उनमें से 101 बंधकों का अब भी पता नहीं चल सका है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में इन बंधकों का जिक्र किया था. उन्होंने यह प्रतिबद्धता जाहिर की थी कि इजरायल आखिरी बंधक का पता लगाए बिना चैन से नहीं बैठेगा. गाजा में इजरायल का उद्देश्य हमास की सैन्य क्षमताओं और शासन को नष्ट करना और बंधकों को छुड़ाना है. अपने युद्ध को अंजाम तक पहुंचा पाएगा इजरायल? लेबनान के खिलाफ मोर्चा खोलने के पीछे इजरायल का लक्ष्य अपने उन 60,000 से अधिक नागरिकों को सीमा के पास अपने घरों में लौटने के लिए सुरक्षित महसूस कराना है, जिन्हें ​हिज्बुल्लाह के रॉकेट हमलों की जद में आने का डर सताता है. पिछले एक साल में इजरायल अपने दुश्मनों पर नकेल कसने में कामयाब रहा है, लेकिन अपने युद्धों को अंजाम तक पहुंचाने में सफल नहीं रहा है. इजरायली सैन्य अधिकारी भी यह स्वीकार करते हैं कि हमास और हिज्बुल्लाह के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने और उनकी सैन्य क्षमताओं को कुंद करने के बावजूद, ये दोनों मिलिशिया समूह फिलिस्तीन और लेबनान में एक ताकत बने रहेंगे. इस संघर्ष में ईरान की एंट्री से स्थिति और बिगड़ सकती है. इन सब तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यही समझ में आता है कि इजरायल को निकट भविष्य में भी युद्धों और संघर्षों के लिए तैयार रहना होगा.  

पाकिस्तान : चीनियों की एक बार फिर से टारगेट किलिंग, 3 की मौत

 कराची पाकिस्तान में कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास जोरदार धमाका हुआ है। इसकी चपेट में आने से 3 विदेशी नागरिकों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हैं। मृतकों में चीन के 2 श्रमिक भी शामिल हैं। चीनी दूतावास ने बयान जारी कर बताया कि पोर्ट कासिम इलेक्ट्रिक पावर लिमिटेड कंपनी के कर्मचारियों को ले जा रहे काफिले पर देर रात करीब 11 बजे हमला हुआ, जिसमें 2 चीनी नागरिक मारे गए और एक अन्य घायल हो गया। उसने बताया कि इस हमले में पाकिस्तानी नागरिक भी घायल हुए हैं। घायलों में पुलिस अधिकारी भी शामिल होने की जानकारी भी सामने आई है। हमले के वीडियो में कारों से आग की लपटें और घटनास्थल से धुएं का गुबार उठता दिखाई दे रहा है। घटनास्थल पर भारी संख्या में सैन्यकर्मी तैनात थे और इस इलाके को चारों ओर से घेर लिया गया है। नागरिक उड्डयन विभाग के एक कर्मचारी राहत हुसैन ने बताया कि विस्फोट इतना भीषण था कि इससे हवाई अड्डे की इमारतें हिल गईं। डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल अजफर महेसर ने बताया, ‘शुरुआती जानकारी मिली है कि एक तेल टैंकर में आग लग गई जो कई दूसरे वाहनों में फैल गई। इससे बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। हम यह निर्धारित कर रहे हैं कि क्या इसमें आतंकवाद का कोई तत्व शामिल था। फिलहाल ऐसी आशंका को हम खारिज नहीं कर सकते हैं।’ ‘विदेशियों को निशाना बनाकर किया गया विस्फोट’ प्रांतीय गृह मंत्री जिया उल हसन ने स्थानीय टीवी चैनल जियो को बताया कि विस्फोट विदेशियों को निशाना बनाकर किया गया था। मालूम हो कि पाकिस्तान में हजारों चीनी कर्मचारी हैं। इनमें से अधिकतर कर्मचारी चीन की अरबों डॉलर की उस ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के लिए काम कर रहे हैं, जो दक्षिण और मध्य एशिया को चीनी राजधानी से जोड़ने के लिए शुरू की गई है। चीन के बयान में विस्फोट को आतंकवादी हमला बताया गया है। साथ ही, कहा गया कि चीन इसके बाद की स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम कर रहा है। चीन ने इस हमले की गहन जांच किए जाने की मांग की है, ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके और पाकिस्तान में चीनी नागरिकों से सुरक्षा संबंधी सावधानी बरतने को कहा है। पाकिस्तानी में चीनियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता चीन की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘पाकिस्तान में चीनी दूतावास और महावाणिज्य दूतावास इस आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं। दोनों देशों के निर्दोष पीड़ितों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।’ कराची में यह टारगेट किलिंग ऐसे समय हुई है, जब पाकिस्तान सरकार ने चीनियों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बलों के लिए 45 अरब रुपये का अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने का फैसला किया। नकदी की कमी से जूझ रहे देश में चीन के वाणिज्यिक हितों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बाड़ लगाने का प्रबंधन करने की उसकी क्षमता को मजबूत करना इसक मकसद है। 45 अरब रुपये में से 35.4 अरब रुपये सेना को और 9.5 अरब रुपये नौसेना को विभिन्न उद्देश्यों के लिए दिए जाएंगे। चीन ने पाकिस्तान में पहले से काम कर रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त कंपनी की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा है।

ओडिशा में एक दिन के अंदर ही 16 हजार से अधिक शिक्षकों की हुई भर्ती, सीएम ने सौंपे नियुक्ति पत्र

भुवनेश्वर ओडिशा सरकार ने एक ही दिन में 16000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की है. राज्य में विभिन्न योजनाओं के तहत ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में 16009 प्राइमरी और अपर प्रामरी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे हैं. जूनियर शिक्षकों की नियुक्ति राज्य के सभी 30 जिलों में की गई है. मुख्यमंत्री मोहन माझी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में बीते कलिंगा स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे. सीएम मोहन माझी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘शिक्षण सबसे सम्मानजनक पेशा है और शिक्षक समाज के भविष्य को आकार देते हैं. प्राचीन काल में गुरुओं (शिक्षकों) की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर जैसे भगवानों से की जाती थी.’ सीएम ने आगे कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के लिए बजटीय आवंटन में काफी वृद्धि की है. उन्होंने कहा, ‘दोगुनी गति से वादे पूरे किए जा रहे हैं! स्कूली शिक्षा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए आज 16,000 से अधिक नव-नियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए.’ वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पोस्ट में लिखा कि चुनावी वादों को पूरा करने और 2036 तक विकसित ओडिशा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मोहन माझी की सरकार चौबीसों घंटे काम कर रही है. उन्होंने पोस्ट में लिखा, ‘यह बड़े पैमाने पर भर्ती शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, बेहतर शिक्षण परिणाम सुनिश्चित करने और ओडिशा के बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री मोहन मोदी की सरकार आकांक्षाओं को साकार करने, चुनावी वादों को पूरा करने और 2036 तक विकसित ओडिशा के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है.” हालांकि, विपक्षी बीजद ने शिक्षकों की भर्ती का श्रेय लेने के लिए भाजपा का मजाक उड़ाया. क्षेत्रीय पार्टी ने एक विज्ञप्ति में कहा, “पिछली बीजेडी सरकार ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली थी. भाजपा की इसमें कोई भूमिका नहीं है, लेकिन वह सिर्फ नियुक्ति पत्र बांटकर श्रेय ले रही है.” बीजू जनता दल के ‘एक्स’ पर एक प्रेस रिलीजी जारी कर कहा गया कि नई मोहन सरकार द्वारा केवल जूनियर शिक्षक भर्ती के नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं. बीजेडी की पोस्ट में लिखा, ‘हिरण हिरण का पीछा कर रहा है और कह रहा है कि हमने उसका शिकार किया है. नए दौर में ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल की स्थापना की गई. बीजेपी इसे संविदा नियुक्ति कहकर विरोध कर रही थी, अब उसमें वह नियुक्ति देकर श्रेय लेने की कोशिश कर रही है.’  

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आप सांसद संजीव अरोड़ा के घर ED के छापे

लुधियाना आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम छापेमारी करने पहुंची है। पंजाब से राज्यसभा सांसद अरोड़ा के गुरुग्राम और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। रेड को लेकर आम आदमी पार्टी भड़ उठी। दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि आज फिर केंद्र सरकार ने अपने तोता मैना को खुला छोड़ दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि 61 वर्षीय सांसद के गुरुग्राम स्थित घर पर एक मनी लॉन्ड्रिंग केस के छापेमारी की गई है। यह एक जमीन धोखाधड़ी से जुड़ा मामला है। संजीव अरोड़ा के अलावा पंजाब में कुछ अन्य लोगों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है। मनीष सिसोदिया ने एक्स पर लिखा, ‘आज सुबह से आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजीव अरोड़ा जी के घर ED वाले रेड कर रहे हैं। पिछले दो सालों में इन्होंने अरविंद केजरीवाल के घर रेड कर लिया, मेरे घर रेड कर दिया, संजय सिंह के घर रेड दिया, सत्येंद्र जैन के घर रेड कर दिया। कहीं भी कुछ भी नहीं मिला। लेकिन पूरी शिद्दत से केंद्र सरकार की एजेंसियां लगी हुई है एक के बाद एक फर्जी केस बनाने में।’ सिसोदिया ने आगे कहा कि आम आदमी पार्टी को तोड़ने के लिए यह लोग किसी भी हद तक जाएंगे। लेकिन कोशिश कितनी भी कर ले, आम आदमी पार्टी वाले ना रुकेंगे, ना बिकेंगे, ना डरेंगे। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी छापेमारी को लेकर अपना आक्रोश जाहिर किया और कहा कि उनकी पार्टी के हौसले नहीं टूटने वाले हैं। संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, ‘एक और सुबह, एक और रेड। आप सांसद संजीव अरोड़ा के घर ED वाले पहुंचे है। मोदीजी की फर्जी केस बनाने वाली मशीन 24 घंटे आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इनको लताड़ा की झूठे केस बनवाना बंद करो, लेकिन फिर भी ED को समझ नहीं आ रहा। ये एजेंसियों कोर्ट को नही मानती, सिर्फ अपने आका की मानती है। लेकिन मोदी जी का अहंकार आम आदमी पार्टी के नेताओं के हौसलों के सामने बिल्कुल फेल है। फर्जी केस और रेड वाले हथकंडों से आप एक कट्टर ईमानदार पार्टी को तोड़ नहीं सकते मोदी जी।’

नवरात्रि के दौरान जहां लोग देवी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते, लेकिन देश में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां महिषासुर की होती है पूजा

नई दिल्ली नवरात्रि के दौरान जहां अधिकांश लोग देवी मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन देश में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां लोग नवरात्रि में महिषासुर की पूजा करते हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी और क्या है इसके पीछे की वजह। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के मनौरा विकासखंड में एक अलग ही परंपरा देखने को मिलती है। यहां के लोग खुद को राक्षसराज महिषासुर का वंशज बताते हैं। समुदाय के लोग महिषासुर की पूजा करते हैं और इसे अपने पूर्वज के प्रति श्रद्धांजलि मानते हैं। इतना ही नहीं, वह इस परंपरा को बड़े गर्व के साथ निभाते हैं। समुदाय के लोगों का मानना है कि महिषासुर का वध केवल एक छल था, जिसमें देवी दुर्गा ने अन्य देवताओं के साथ मिलकर उनके पूर्वज की हत्या की। इस समुदाय के लोगों की जनजाति जशपुर के जरहापाठ, बुर्जुपाठ, हाडिकोन और दौनापठा जैसे स्थानों पर निवास करती है। इसके अलावा, बस्तर के कुछ हिस्सों में भी इस समुदाय के लोग महिषासुर को अपना पूर्वज मानते हैं। यह लोग नवरात्रि में दुर्गा पूजा में शामिल नहीं होते हैं। उनके अनुसार, देवी के प्रकोप से उनकी मृत्यु का डर रहता है। वह न केवल देवी की पूजा से दूरी बनाए रखते हैं, बल्कि अपने खेत, खलिहान में महिषासुर को अपना आराध्य देव मानकर उसकी पूजा करते हैं। उनके लिए महिषासुर राजा है, और उसकी मृत्यु पर खुशी मनाना उनके लिए असंभव है। यह समुदाय दीपावली के दिन भैंसासुर की भी पूजा करता है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि इस जनजाति के लोग नवरात्रि के दौरान किसी भी प्रकार के रीति-रिवाज या परंपरा का पालन नहीं करते हैं। वे अपने पूर्वजों की स्मृति में गहरे शोक में डूबे रहते हैं, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण भावना है। इन लोगों को अपने पूर्वज महिषासुर को लेकर काफी गर्व है और वह उसे अपनी सांस्कृतिक पहचान के रूप में मानता है। इस समुदाय के लोगों ने मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ महिषासुर की प्रतिमा न लगाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा था। यह कदम उन्होंने इसलिए उठाया था ताकि वह अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकें। इनका मानना है कि महिषासुर की पूजा उनके लिए सम्मान का प्रतीक है। जब नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा की पूजा की जाती है, तो इस समय महिषासुर के वध की कथा का संदर्भ दिया जाता है, जो इस समुदाय के लिए अपमान का कारण बनता है। इसलिए, उन्होंने यह मांग की थी कि महिषासुर की प्रतिमा को पूजा में शामिल किया जाए ताकि उनकी धार्मिक आस्था का सम्मान हो सके।

भारतीय वायुसेना ने चीन का जासूसी गुब्बारा राफेल से मार गिराया

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना के राफेल फाइटर जेट्स ने पिछले साल आसमान में 15 किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई पर उड़ रहे चीनी जासूसी गुब्बारे को मार गिराया था. रक्षा सूत्रों ने बताया कि राफेल लड़ाकू जेट में उड़ान भरने वाले भारतीय वायु सेना के पायलटों ने कुछ महीने पहले पूर्वी क्षेत्र में एक चीनी जासूसी गुब्बारे को गिरा दिया था. IAF ने पिछले साल गुब्बारे को किया था शूट  भारतीय वायुसेना ने पिछले साल अमेरिकी वायुसेना द्वारा गिराए गए गुब्बारे की तुलना में एक छोटे गुब्बारे को मार गिराने में सफलता हासिल की थी. सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने 15 किलोमीटर से अधिक की ऊंचाई पर उड़ रहे गुब्बारे को नीचे गिरा दिया था. 2023 की शुरुआत में, अमेरिकी वायु सेना F-22 ने दक्षिण कैरोलिना के तट पर एक चीनी जासूसी गुब्बारे को मार गिराया था, जो कई दिनों से उत्तरी अमेरिका में घूम रहा था. उसके बाद एक हफ्ते के भीतर इस तरह के कम से कम दो अन्य मामले भी सामने आए थे. अंडमान-निकोबार के ऊपर उड़ रहा था गुब्बारा इसी तरह का एक गुब्बारा भारत में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह क्षेत्र में भी देखा गया था. ऐसा माना जाता है कि इन गुब्बारों का इस्तेमाल एक बड़े क्षेत्र पर नजर रखने के लिए किया जाता है. हालांकि, तीन से चार दिनों तक इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद इसे गिरा दिया गया. यह भी माना जाता है कि चीनी जासूसी गुब्बारों में एक प्रकार का स्टीयरिंग तंत्र होता है जिसका इस्तेमाल उनके हित के क्षेत्रों पर स्थिरता के लिए किया जा सकता है. सेना भविष्य में ऐसे खतरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अपनी मानक संचालन प्रक्रिया भी तैयार कर रही है.

इस्माइल कानी लापता, बताया जा रहा है कि उन्हें आखिरी बार हिज्बुल्लाह के तेहरान ऑफिस में देखा गया, नहीं मिल रहा सुराग

नई दिल्ली ईरानी कुद्स फोर्स के ब्रिगेडियर-जनरल और कासिम सुलेमानी के उत्तराधिकारी इस्माइल कानी लापता हैं. इजरायल उनकी मौत का पता लगा रहा है, जिनके बारे में पता चला कि वह हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह के संभावित उत्तराधिकारी हाशम सफियोद्दीन के साथ मौजूद थे, जब इजरायल ने उनपर एयर स्ट्राइक की थी. बीते दिनों बेरूत में इजरायली स्ट्राइक में नसरल्लाह के उत्तराधिकारी मारे गए थे. इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह एक इजरायली हवाई हमले में घायल हो सकते हैं जिसमें हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह के संभावित उत्तराधिकारी हाशम सफियोद्दीन को टारगेट किया गया था. इस्माइल कानी के बारे में बताया जा रहा है कि उन्हें आखिरी बार हिज्बुल्लाह के तेहरान ऑफिस में देखा गया. कानी के बारे में अब तक कुछ भी स्पष्ट नहीं इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुलेमानी के उत्तराधिकारी इस्माइल कानी नसरल्लाह की मृत्यु के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में नहीं पहुंचे थे और यही वजह है कि उनकी मौत की संभावना जताई जाने लगी है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में ईरानी मीडिया का हवाला देते हुए बताया गया है कि ईरानी अधिकारियों के पास कानी की मौजूदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है. नसरल्लाह के उत्तराधिकारी को किया गया था टार्गेट इजरायली एन12 की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण बेरूत में हिज्बुल्लाह के प्रमुख हसन नसरल्लाह के संभावित उत्तराधिकारी हाशम सफियोद्दीन को टार्गेट करते हुए अटैक किए गए थे, जिसमें संभावित रूप से कानी घायल हो सकते हैं. इस मौके पर ईरानी अधिकारियों की चुप्पी ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सदस्यों में चिंता पैदा कर दी है. सुलेमानी की हत्या के बाद बने थे उत्तराधिकारी 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद इस्माइल कानी उनके उत्तराधिकारी बने थे. मध्य पूर्व में ईरान की सैन्य रणनीति के प्रमुख व्यक्ति रहे हैं. अब कानी की मौजूदगी पर सवाल खड़ा होने के कारण क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है. यह स्थिति न सिर्फ ईरान और लेबनान के बीच तनाव को बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

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