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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नींव पर टिके भारत-साइप्रस संबंध, साइप्रस यात्रा पर जा रहे पीएम मोदी

नई दिल्ली दो प्राचीन सभ्यताओं वाले देश भारत और साइप्रस भले ही भौगोलिक रूप से दूर हों, लेकिन उनके बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध सदियों से चले आ रहे हैं। इसी सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइप्रस यात्रा पर जा रहे हैं। यह 23 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। यह न केवल इन संबंधों को नया आयाम देगी, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है। यह यात्रा विशेष रूप से तुर्की और पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक संदेश है, जो भारत के खिलाफ एकजुट होकर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नींव पर टिके भारत-साइप्रस संबंध ऐसा माना जाता है कि भारत और साइप्रस के बीच संबंध प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। साइप्रस, भूमध्य सागर में स्थित एक छोटा द्वीपीय देश, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा है। प्राचीन काल में भारतीय व्यापारी और बौद्ध मिशनरी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सक्रिय थे, जिससे सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान हुआ। आधुनिक काल में, भारत और साइप्रस ने 1960 में राजनयिक संबंध स्थापित किए, जब साइप्रस को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिली। दोनों देशों ने स्वतंत्रता के बाद से ही एक-दूसरे का समर्थन किया है। साइप्रस ने भारत के परमाणु परीक्षण (1998) और कश्मीर मुद्दे पर हमेशा भारत के पक्ष का समर्थन किया है। दूसरी ओर, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत साइप्रस की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया है, विशेष रूप से 1974 के तुर्की आक्रमण के बाद, जब तुर्की ने उत्तरी साइप्रस पर कब्जा कर लिया और इसे ‘तुर्की गणराज्य उत्तरी साइप्रस’ (TRNC) घोषित किया। इसे केवल तुर्की ही मान्यता देता है। 1974, 1983, 1984 के UNSC प्रस्तावों में तुर्की को साइप्रस से अपनी उपस्थिति और सेना वापस लेने के लिए कहा गया, तथा तथाकथित TRNC की स्थापना को “कानूनी रूप से अमान्य” बताया गया। भारत ने साइप्रस का समर्थन किया था। पाकिस्तान एकमात्र देश था जिसने 1983/1984 के UNSC साइप्रस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था। साइप्रस का भारत के लिए रणनीतिक महत्व साइप्रस, अपनी छोटी आबादी (लगभग 10 लाख) और सीमित क्षेत्र के बावजूद, भारत के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है साइप्रस, पूर्वी भूमध्य सागर में एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ता है। यह क्षेत्र ऊर्जा संसाधनों, विशेष रूप से प्राकृतिक गैस के लिए महत्वपूर्ण है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, साइप्रस के साथ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा दे सकता है। इसके अलावा, साइप्रस यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य है और 2026 में EU काउंसिल की अध्यक्षता करेगा। भारत, जो EU के साथ अपने व्यापार और रणनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है, साइप्रस के माध्यम से यूरोप में अपनी पैठ बढ़ा सकता है। भारत और साइप्रस के बीच रक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ रहा है। साइप्रस ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन किया है, और दोनों देश समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर सकते हैं। साइप्रस एक वित्तीय केंद्र है और भारतीय कंपनियों के लिए निवेश का आकर्षक गंतव्य हो सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं हैं। साइप्रस और तुर्की के बीच 1974 से तनाव है, जब तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया। भारत, साइप्रस और ग्रीस के साथ त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देकर तुर्की के क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित कर सकता है। इतिहास गवाह है भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और प्रथम साइप्रस राष्ट्रपति आर्कबिशप मकारियोस तृतीय ने संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों गुटनिरपेक्ष आंदोलन के प्रमुख व्यक्ति थे। मकारियोस बांडुंग सम्मेलन में एकमात्र यूरोपीय नेता थे। यह सम्मेलन एशिया और अफ्रीका के देशों के नेताओं की एक बैठक थी, जहां उन्होंने शीत युद्ध में तटस्थ रहने के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी थी। साइप्रस के राष्ट्रपति मकारियोस ने 1962 में आजादी मिलने के बाद भारत का दौरा किया और चीनी आक्रमण के बाद भारत को अपने देश का समर्थन देने की पेशकश की थी। इतना ही नहीं, 1964 में, जब साइप्रस आंतरिक संकट में घिरा हुआ था, तब भारत ने पीड़ितों को मानवीय सहायता भेजी। भारत ने साइप्रस के शहरों के खिलाफ “तुर्की विमानों द्वारा की गई कार्रवाई” की भी निंदा की। कुल मिलाकर साइप्रस भारत का भरोसेमंद मित्र रहा है। इसने यूएनएससी की स्थायी सदस्यता के लिए भारत का समर्थन किया है। साइप्रस ने 2019 में पुलवामा आतंकी हमले की निंदा की थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत को समर्थन दिया था। यहां तक कि साइप्रस ने यूरोपीय संघ की बैठक में पहलगाम हमले का मुद्दा उठाया। साइप्रस ने लेबनान (2006/ऑपरेशन सुकून) और लीबिया (2011/ऑपरेशन सेफ होमकमिंग) से भारतीयों को निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा: एक रणनीतिक कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस यात्रा 15-17 जून को कनाडा में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन से पहले हो रही है। यह एक सुनियोजित कूटनीतिक कदम है। यह यात्रा न केवल भारत-साइप्रस संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि तुर्की और पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश भी देगी। यह यात्रा 2002 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली साइप्रस यात्रा है, जब अटल बिहारी वाजपेयी ने साइप्रस का दौरा किया था। इससे पहले, इंदिरा गांधी 1983 में साइप्रस गई थीं। 23 वर्षों के अंतराल के बाद यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क को पुनर्जनन देगी। तुर्की-पाकिस्तान गठजोड़ के खिलाफ जवाब तुर्की ने हाल के वर्षों में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है, विशेष रूप से कश्मीर मुद्दे पर और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे सैन्य अभियानों के दौरान। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआन ने पाकिस्तान के साथ इस्लामी एकजुटता का प्रदर्शन किया और भारत की नीतियों की आलोचना की। भारत की साइप्रस यात्रा तुर्की के लिए एक कूटनीतिक चेतावनी है, क्योंकि साइप्रस तुर्की का सबसे संवेदनशील मुद्दा है। 1974 में तुर्की के आक्रमण के बाद साइप्रस दो हिस्सों में बंट गया। भारत ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का समर्थन किया है, जो साइप्रस की एकता और क्षेत्रीय अखंडता की वकालत करते हैं। मोदी की यात्रा इस स्थिति को और मजबूत करेगी, जिससे तुर्की को अंतरराष्ट्रीय … Read more

रक्षा बजट ने खोली पोल- पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के बीच चीन से 40 विमान खरीदने जा रहा

इस्लामाबाद पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के बीच देश ने अपने रक्षा खर्च को बढ़ाते हुए चीन से अत्याधुनिक फिफ्थ जनरेशन स्टील्थ फाइटर J-35A की खरीद की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। दरअसल पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में 20% की वृद्धि की है, जिसके तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 2,550 अरब रुपये (लगभग 9 अरब डॉलर) आवंटित किए गए हैं। इस वृद्धि का प्रमुख कारण चीन से 40 अत्याधुनिक जे-35ए स्टील्थ फाइटर जेट्स की खरीद का प्रस्ताव है, जो भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की सैन्य ताकत को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 40 J-35A स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने पर बातचीत टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से लिखा, पाकिस्तान चीन से 40 J-35A स्टील्थ लड़ाकू विमान खरीदने पर बातचीत कर रहा है और अगस्त से इनकी डिलीवरी शुरू हो सकती है। J-35A एक ट्विन-इंजन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसमें PL-17 मिसाइलें और अत्याधुनिक AESA रडार सिस्टम लगे हैं। इससे पाकिस्तान की एयर सुपीरियॉरिटी और स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है। पाकिस्तान एयरफोर्स ने इस सौदे को पहले ही मंजूरी दे दी है और पायलटों को चीन में ट्रेनिंग दी जा रही है। चीन ने कथित तौर पर पाकिस्तान को इस सौदे में 50% तक की छूट और लचीले भुगतान विकल्प दिए हैं, जो दोनों देशों के गहराते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है। वर्तमान में पाकिस्तान के लगभग 80% हथियार चीन से आते हैं। J-10C फाइटर जेट और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान ने हाल ही में भारत के साथ सैन्य टकराव के दौरान किया था। आर्थिक संकट के बीच सैन्य खर्च पर सवाल पाकिस्तान का यह सैन्य उभार ऐसे समय में हो रहा है जब देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पाकिस्तान पर चीन का 15 अरब डॉलर का कर्ज पहले ही आ रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तान IMF से 6-8 अरब डॉलर के राहत पैकेज की मांग कर रहा है। कुल 269 अरब डॉलर के कर्ज में डूबा देश अपनी GDP का 1.9% से अधिक सिर्फ कर्ज चुकाने में खर्च कर रहा है। ऐसे में सामाजिक कल्याण, शिक्षा और आधारभूत ढांचे पर खर्च के लिए सरकार के पास सीमित संसाधन हैं। फिर भी, शहबाज शरीफ सरकार ने इस बार के बजट में कुल राष्ट्रीय खर्च को 7% घटाकर 17.57 ट्रिलियन रुपये कर दिया है, जबकि रक्षा खर्च को प्राथमिकता दी गई है। संसद में इस बजट पर खास बहस नहीं हुई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की सैन्य ताकत किस हद तक देश के नीति निर्धारण में प्रभावी है। भारत के साथ बढ़ेगी तनाव की आशंका J-35A जैसे स्टील्थ जेट की खरीद से भारत-पाक संबंधों में और तनाव आ सकता है। पाकिस्तान जहां कूटनीतिक मंचों पर संयम और बातचीत की वकालत कर रहा है, वहीं अंदरखाने वह अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने में लगा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल ही में चीन, खाड़ी देशों, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र से संपर्क साधा है ताकि भारत को “आक्रामक” और पाकिस्तान को “स्थिरता लाने वाला” देश बताकर वैश्विक समर्थन जुटाया जा सके। चीन में इस सौदे को लेकर भी विवाद छिड़ गया है। चीनी सोशल मीडिया पर नागरिकों ने सरकार के इस कदम को “वित्तीय और रणनीतिक रूप से लापरवाह” बताया है, खासकर क्योंकि जे-35ए अभी भी ट्रायल स्टेज में है और इसे चीनी वायु सेना में शामिल नहीं किया गया है। कुछ का कहना है कि पाकिस्तान की सीमित वित्तीय क्षमता को देखते हुए यह सौदा बीजिंग के लिए जोखिम भरा हो सकता है। डार ने हाल ही में चीन की यात्रा के दौरान भारत के साथ टकराव के समय चीन के समर्थन के लिए बीजिंग का आभार जताया और दोनों देशों के रिश्तों को “आयरन-क्लैड” करार दिया। इसके साथ ही, पाकिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (CPEC) का भी उपयोग अपने लिए आर्थिक जीवनरेखा सुनिश्चित करने में कर रहा है। भुखमरी से जूझ रहा पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक की ‘पावर्टी एंड शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी’ रिपोर्ट के अनुसार, 2011-12 में भारत की कुल आबादी का 27.1% अत्यंत गरीबी में जी रहा था, लेकिन 2022-23 तक यह आंकड़ा घटकर केवल 5.3% रह गया। यानी 344.47 मिलियन (34.4 करोड़) की जगह अब 75.24 मिलियन (7.5 करोड़) लोग ही गरीबी रेखा से नीचे हैं- यानी 26.9 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया, जो पाकिस्तान की पूरी आबादी से भी ज्यादा है। इसके विपरीत, पाकिस्तान में 2017-18 से 2020-21 के बीच अत्यंत गरीबी 4.9% से बढ़कर 16.5% हो गई। यानी सिर्फ़ पांच साल में हालात तीन गुना खराब हो गए। वर्ल्ड बैंक ने महंगाई के मद्देनज़र गरीबी की परिभाषा में बदलाव करते हुए अब अत्यंत गरीबी की रेखा को $2.15 से बढ़ाकर $3 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कर दिया है। भारत ने इस बढ़े हुए मानक के बावजूद भी बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि पाकिस्तान ने हर पैमाने पर निराश किया है।  

अहमदाबाद प्लेन क्रैश में ब्रिटेन के 53, पुर्तगाल के 7 और कनाडा के एक यात्री और भारत के कुल 169 नागरिक सवार थे

अहमदाबाद अहमदाबाद से लंदन जा रहा विमान हादसे का शिकार हो गया। 242 लोगों को लेकर लंदन जा रहे प्लेन में अलग-अलग देशों के लोग सवार थे। इस प्लेन में ब्रिटेन के 53, पुर्तगाल के 7 और कनाडा के एक यात्री सवार थे। बाकी सभी यात्री भारत के नागरिक थे। इस प्लेन में सवार सभी यात्रियों की नाम समेत लिस्ट सामने आई है। लिस्ट में सभी यात्रियों की डिटेल साझा की गई है। इसके साथ ही उनके देश का नाम भी बताया गया है। हादसे में भारत के कुल 169 नागरिक सवार थे। हादसे वाले प्लेन में 12 क्रू मेंबर भई सवार थे। इस हादसे के बाद अब तक 50 शव बरामद किए जा चुके हैं। शव जली हुई अवस्था में हैं। शवों की पहचान नहीं हो पा रही है। इस हादसे को लेकर जानकारी सामने आई है कि प्लेन को टेक ऑफ करने से पहले जांच की गई थी लेकिन कोई कमी नहीं मिली। टेक ऑफ करने के बाद पायलट ने मेडे कॉल दी थी, जिसमें यह संकेत दिया जाता है कि प्लेन खतरनाक स्थिति में है। हालांकि, इस कॉल के बाद प्लेन को बहुत कम वक्त मिला और 242 लोगों को लेकर लंदन जा रहा विमान नीचे आकर एक बिल्डिंग से टकरा गया। इस हादसे के बाद यात्रियों के परिजनों के लिए एक पैसेंजर हेल्पलाइन साझा की है। यात्री के परिजन जानकारी के लिए हॉट लाइन नंबर 1800 5691 444 पर संपर्क कर सकते हैं। इस हादसे में घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।  

भारत के ऐक्शन से पाकिस्तान में मचा त्राहिमाम, सूख रहे डैम, किसान भी सूखे से परेशान

इस्लामाबाद  भारत द्वारा अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखने लगा है। पाकिस्तान के दो प्रमुख जलाशय झेलम नदी पर स्थित मंगला डेम और सिंधू नदी पर बना टर्बेला बांध अब पूरी तरह सूखने के करीब पहुंच चुके हैं। पाकिस्तान की इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) के अनुसार, बुधवार को पाकिस्तान ने अपने सभी प्रमुख जलस्रोतों से जितना पानी प्राप्त किया, उससे 11,180 क्यूसेक अधिक पानी छोड़ना पड़ा। इसका सीधा प्रभाव पंजाब और सिंध प्रांतों की जल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा है। भारत ने जम्मू-कश्मीर में जलाशयों की सफाई और फ्लशिंग प्रक्रिया शुरू की है, जिससे पाकिस्तान की ओर जल प्रवाह और कम हो गया है। भारत ने पाकिस्तान को जल डेटा साझा करना भी बंद कर दिया है, जो संधि के तहत पहले अनिवार्य था। आईआरएस के आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में पानी का कुल इनफ्लो 2,41,611 क्यूसेक और कुल आउटफ्लो 2,52,791 क्यूसेक है। यानी कि पाकिस्तान हर दिन 11,180 क्यूसेक अधिक पानी खर्च कर रहा है। पंजाब प्रांत को इस साल 1,14,600 क्यूसेक पानी मिला, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 1,43,600 क्यूसेक था। यानी 20% की कमी देखी गई है। इसी तरह सिंध प्रांत की भी जल आपूर्ति में गिरावट आई है। IRSA की सलाहकार समिति ने पहले ही 1 मई से 10 जून तक के लिए 21% की पानी की कमी की चेतावनी दी थी। अब जून से सितंबर के अंत तक यह कमी 7% तक रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जल संकट से खरीफ की बुवाई पर भारी असर पड़ेगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि सिंधु जल संधि को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में स्थगित किया गया है और जल प्रवाह या डेटा साझा करने की बाध्यता अब लागू नहीं है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने यह कड़ा कदम उठाया है। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 9 से अधिक आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इसमें पाकिस्तान में मौजूद 100 से अधिक आतंकी मारे गए।  

अहमदाबाद में बड़ा विमान हादसा, लन्दन जा रहा एयर इंडिया का विमान टेक ऑफ होते ही हुआ धमाका

अहमदाबाद  गुजरात के अहमदाबाद में गुरुवार को दोपहर एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया। लंदन के लिए उड़ान भरने वाले विमान में 244 लोग सवार थे। विमान में गुजरात के पूर्व सीएम विजय रुपाणी भी सवार थे। विजय रुपाणी विमान में दूसरी पंक्ति में सीट नंबर 12 पर सवार थे। उनका टिकट भी सामने आया है और पैसेंजर लिस्ट में उनका नाम मौजूद है। पूर्व सीएम किस स्थिति में हैं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि रुपाणी अपनी बेटी से मिलने के लिए लंदन के लिए निकले थे। विजय रुपाणी 2016 से 2021 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। वह राजकोट वेस्ट सीट से विधायक चुने जाते रहे। विमान में कुल 232 यात्री थे, जिनमें 230 व्यस्क और दो नवजात थे। विमान में 12 क्रू सदस्य थे। विमान में कुल 244 लोग थे। एयर इंडिया के विमान ने 1 बजकर 39 मिनट पर उड़ान भरी थी। रनवे नंबर 23 से टेक ऑफ के तुरंत बाद पायलट को कुछ गड़बड़ी का अहसास हुआ। उसने एटीसी से संपर्क भी किया लेकिन तब तक विमान क्रैश हो गया। एयरपोर्ट के बेहद करीब रिहायशी इलाके में विमान गिरा। कई लोगों ने इस हादसे को अपने मोबाइल फोन में कैद किया है। वीडियो में दिख रहा है कि बेहद कम ऊंचाई पर उड़ता हुआ विमान तेजी से नीचे आ रहा है और फिर तेज धमाका होता है। आग का बड़ा गोला दिखाई देता है और फिर आसमान तक काले धुएं का गुबार छा जाता है। मेघानीनगर इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के पीछे यह विमान क्रैश हुआ। तुरंत ही रेस्क्यू टीम को मौके पर भेजा गया। फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, पुलिस के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और बीएसएफ की टीमों को भेजा गया। आग बुझाने के बाद मलबे से कई लोगों को निकालकर अस्पताल भेजा गया था। गुजरात के अहमदाबाद में एअर इंडिया का प्लेन क्रैश होने की खबर आ रही है. क्रैश साइट से आसमान में काला धुआं उठता हुआ देखा गया. रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्लेन के टेक ऑफ करने के तुरंत बाद यह हादसा हुआ. प्लेन में 12 क्रू मेंम्बर्स (दो पायलट समेत) और 230 यात्रियों सहित कुल 242 लोग सवार थे. विमान ने गुरुवार दोपहर 1 बजकर 38 मिनट पर उड़ान भरी थी और दो मिनट के बाद ही 1 बजकर 40 मिनट बाद क्रैश हो गया. अहमदाबाद पुलिस कंट्रोल रूम ने इसकी पुष्टि की है. जानकारी के मुताबिक यह विमान अहमदाबाद से लंदन जा रहा था और अहमदाबाद एयरपोर्ट से टेक ऑफ करने के कुछ देर बाद मेघानीनगर के पास क्रैश हो गया. प्लेन में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई नागरिक सवार थे.  नागरिक उड्डयन मंत्रालय में एक इमरजेंसी बैठक के बाद मिनिस्टर ऑफ सिविल एविएशन राम मोहन नायडू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद के लिए रवाना हो गए हैं. हादसे के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड की 7 गाड़ी मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने का काम शुरू किया. सोशल मीडिया पर प्लेन क्रैश के कई वीडियो वायरल हैं, जिनमें दुर्घटनास्थल से धुएं का काला गुबार आसमान में उठता हुआ दिखाई दे रहा है. दुर्घटना के तुरंत बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की तैनाती मौके पर कर दी गई. अधिकारियों ने अभी तक दुर्घटना के कारण की पुष्टि नहीं की है. मेघानीनगर क्षेत्र के निकट धारपुर से दुर्घटनास्थल पर आसमान में भारी धुआं उठता दिखाई दिया. बीएसएफ और एनडीआरएफ की टीमों को दुर्घटनास्थल के लिए रवाना कर दिया गया है. क्रैश प्लेन बोइंग का 787-8 ड्रीमलाइनर बताया जा रहा है, जो 11 साल पुराना था. गुजरात के पूर्व CM विजय रूपाणी भी प्लेन में थे सवार एअर इंडिया के विमान AI-171 ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) से अहमदाबाद के लिए उड़ान भरी थी और यहां कुछ देर के ठहराव के बाद गुरुवार दोपहर लंदन के लिए टेक ऑफ किया क्रैश हो गया. अग्निशमन अधिकारी जयेश खड़िया ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विमान में आग लग गई और आग बुझाने के लिए दमकल गाड़ियां मौके पर भेजी गईं. सूत्रों के मुताबिक गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता विजय रूपाणी भी इस प्लेन में सवार थे. एनडीआरएफ ने एक बयान में कहा कि 90 कर्मियों वाली उसकी तीन टीमें गांधीनगर से विमान दुर्घटना स्थल पर भेजी गई हैं. वडोदरा से कुल तीन और टीमें भेजी जा रही हैं. एअर इंडिया प्रवक्ता के ने X पर एक पोस्ट में कहा, ‘अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट AI171 आज 12 जून, 2025 को दुर्घटनाग्रस्त हो गई. इस समय, हम हादसे में हुए नुकसान का पता लगा रहे हैं और http://airindia.com और हमारे एक्स हैंडल https://x.com/airindia पर जल्द से जल्द आगे की जानकारी साझा करेंगे.’ सीआईएसएफ की एयरपोर्ट पर मौजूद टीम लोकेशन पर मौजूद है. विमान अहमदाबाद एयरपोर्ट के रनवे 23 से उड़ान भरने के तुरंत बाद एयरपोर्ट परिसर के अंदर ही जमीर पर आ गिरा और ब्लास्ट की तेज आवाज सुनी गई. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया कि एयर एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) के डायरेक्टर जनरल, एक टीम के साथ जांच के लिए अहमदाबाद रवाना हो गए हैं. डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने एक बयान में कहा, ‘अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट जा रहा एअर इंडिया का B787 ड्रीमलाइनर विमान 1:38 बजे उड़ान भरते समय एक रिहायशी इलाके (मेघानीनगर) में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. डायरेक्टोरेट ऑफ एयर वर्दीनेस (DAW), असिस्टेंट डायरेक्टर्स ऑफ एयर वर्दीनेस (ADAW) और एक फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर (FOI) पहले से ही अहमदाबाद में हैं. वे हादसे के कारणों का पता लगा रहे हैं.’ एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने दुर्घटना पर जयाता दुख अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर एअर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा, ‘मैं अत्यंत दुःख के साथ पुष्टि करता हूं कि अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI 171 आज एक दुखद दुर्घटना का शिकार हो गई. हमारी संवेदनाएं  इस विनाशकारी घटना से प्रभावित सभी लोगों के परिवारों और प्रियजनों के साथ हैं. इस समय, हमारा प्राथमिक ध्यान सभी प्रभावित लोगों और उनके परिवारों … Read more

गोवा में 3 लड़कियों से बलात्का , होटल में बर्थडे पार्टी के नाम पर हैवानियत

पणजी  उत्तरी गोवा में ईद का जश्न मनाने का एक निमंत्रण तीन नाबालिग लड़कियों के लिए बुरे सपने में बदल गया। 11 से 15 साल की इन लड़कियों के साथ कैलांगुट के एक होटल में दो दोस्तों ने बलात्कार किया। इन लड़कियों में दो सगी बहनें भी शामिल हैं। गोवा पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनकी उम्र 19 और 21 साल है। होटल मालिक रजत चौहान को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। रजत हरियाणा का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़कियों को बिना पहचान पत्र और माता-पिता की अनुमति के होटल में रहने दिया। इससे अपराध करने में मदद मिली। सोशल मीडिया पर हुई मुलाकात? दरअसल कुछ महीने पहले 19 साल के आरोपी ने सोशल मीडिया पर 15 साल की लड़की से दोस्ती की और उससे बातें करने लगा। पिछले हफ्ते उसने उसे ईद मनाने के लिए बुलाया। पुलिस के अनुसार, 15 साल की लड़की अपनी 13 साल की बहन और 11 साल की दोस्त के साथ शनिवार को मुख्य आरोपी से मिलने के लिए घर से निकली थी। 15 साल की लड़की को 19 साल के आरोपी की ‘गर्लफ्रेंड’ बताया जा रहा है। मुख्य आरोपी और उसके दोस्त (21) ने कैलांगुट के एक होटल में कमरा बुक किया। तीन नाबालिगों के साथ रेप दोनों लड़के तीनों नाबालिगों के साथ रात बिताने और 15 साल की लड़की का जन्मदिन केक काटकर मनाने के लिए होटल में रुके। इसके बाद मुख्य आरोपी ने कथित तौर पर अपनी ‘गर्लफ्रेंड’ के साथ बलात्कार किया, जबकि उसके दोस्त ने अन्य दो नाबालिगों के साथ बार-बार बलात्कार किया। पुलिस ने क्या बताया? उत्तरी गोवा के SP राहुल गुप्ता ने बताया कि पुलिस को 15 साल की लड़की के परिवार से शिकायत मिली थी कि नाबालिग बहनें शनिवार को अपने घर से निकली थीं और वापस नहीं लौटीं। इसी बीच 11 साल की लड़की के परिवार ने भी एक और शिकायत दर्ज कराई। इसमें आरोप लगाया गया कि उनकी नाबालिग बेटी लापता है और उन्हें शक है कि वह पहली शिकायतकर्ता की बेटियों के साथ गई होगी। पुलिस ने मामले में दिखाई तेजी SP गुप्ता ने कहा कि सावधानीपूर्वक प्रयासों और विश्वसनीय मानवीय और तकनीकी स्रोतों से जानकारी जुटाने के बाद तीनों नाबालिग पीड़ितों को कैलांगुट के एक होटल से बचाया गया। उनके साथ मौजूद दो लोगों को पकड़कर पुलिस स्टेशन लाया गया। होटल में पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपियों ने दो अलग-अलग होटल के कमरों में चेक इन किया था। दो अलग-अलग FIR दर्ज गोवा पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। SP गुप्ता ने कहा कि जांच के दौरान दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। कैलांगुट पुलिस ने होटल मालिक चौहान और होटल के मैनेजर/रिसेप्शनिस्ट मंसूर शफी पीर को भी गिरफ्तार किया है। मंसूर जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है। उन पर अपराध में मदद करने का आरोप है। पुलिस ने होटल को किया सील SP गुप्ता ने कहा कि हम होटल को सील कर रहे हैं और इसका लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर होटल प्रबंधन और मालिक किसी बच्चे को बिना परिवार या रिश्तेदारों के कमरा देते हैं तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह गोवा बाल अधिनियम का उल्लंघन है। अगर भविष्य में भी ऐसा कोई उल्लंघन देखा जाता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘व्लादिमीर पुतिन हमारे सबसे प्रिय कॉमरेड…’, तानाशाह किम जोंग बोले- रूस के साथ हमेशा खड़ा रहेगा उत्तर कोरिया

फियोंगयांग उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेजे संदेश में कहा कि उनका देश हमेशा मास्को के साथ खड़ा रहेगा. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी. केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ‘रशियन डे’ (रूस की स्वतंत्रता का जश्न मनाने वाला दिन) के मौके पर पुतिन को भेजे गए संदेश में किम ने रूसी राष्ट्रपति को अपना ‘सबसे प्रिय मित्र’ कहा. उन्होंने उत्तर कोरिया और रूस के द्विपक्षीय संबंधों की प्रशंसा करते हुए इसे ‘दोनों साथियों के बीच वास्तविक संबंध’ बताया.  किम के हवाले से कहा गया, ‘डीपीआरके सरकार और मेरी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति डीपीआरके-रूस संबंधों को आगे बढ़ाने की है.’ डीपीआरके का मतलब उत्तर कोरिया का आधिकारिक नाम ‘डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ है. केसीएनए ने बुधवार (11 जून) को बताया कि किम जोंग उन ने पुतिन को रूस दिवस की बधाई भेजी है. इस साल की शुरुआत में, प्योंगयांग ने पहली बार पुष्टि की थी कि उसने महीनों की चुप्पी के बाद नेता किम जोंग उन के आदेश पर यूक्रेन युद्ध में रूस के लिए लड़ने के लिए अपनी सेना भेजी थी. उत्तर कोरियाई नेता लगातार रूस का समर्थन करते रहे हैं. इससे पहले किम जोंग उन ने पुतिन को बिना शर्त समर्थन देने का वादा किया था. केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, ‘पुतिन के प्रमुख सुरक्षा सहयोगी सर्गेई शोइगु के साथ प्योंगयांग में एक बैठक के दौरान किम ने कहा कि उत्तर कोरिया रूस औरसभी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मामलों पर उसकी विदेश नीतियों का बिना शर्त समर्थन करेगा.’ दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के शक्तिशाली और व्यापक संबंधों में बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की. ब्लूमबर्ग न्यूज ने संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा और जापान सहित 11 देशों की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 2024 में, उत्तर कोरिया ने रूस को कम से कम 100 बैलिस्टिक मिसाइलें भेजी थीं. रूस ने इन मिसाइलों का इस्तेमाल यूक्रेन में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने और कीव और जापोरिज्जिया जैसे आबादी वाले क्षेत्रों पर हमले करने के लिए किया था. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्योंगयांग ने 2024 के अंत में पूर्वी रूस में 11,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया था, जिन्हें सुदूर-पश्चिमी कुर्स्क ओब्लास्ट में ले जाया गया, जहां उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के साथ युद्ध अभियानों में शिरकत की.  

महाराष्ट्र में शादी के 15 दिन बाद पत्नी ने की पति की कुल्हाड़ी से हत्या; वजह कर देगी हैरान

सांगली इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी की हत्या की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि महाराष्ट्र के सांगली जिले से एक और दिल दहला देने वाली घटना हुई है। यहां एक 27 साल की महिला ने कथित तौर पर अपने 53 साल के पति अनिल लोखंडे की हत्या कर दी। यह वारदात शादी के महज 15 दिन बाद ही हुई है। कुपवाड़ एमआईडीसी पुलिस स्टेशन के सहायक निरीक्षक दीपक भंडवलकर ने कहा, “मंगलवार रात को दंपति में झगड़ा हुआ था। बुधवार को रात करीब 12.30 बजे जब अनिल सो रहा था, राधिका ने उसके सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसने अपनी चचेरी बहन को इसके बारे में बताया। हमने महिला को गिरफ्तार कर लिया और उसे अदालत में पेश किया। अदालत ने हमें दो दिन की रिमांड दी है।” पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे सांगली जिले के कुपवाड़ तहसील स्थित उसके घर से उसे हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारी ने कहा, “मामला काफी संवेदनशील है और हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।” पुलिस का कहना है कि अनिल लोखंडे ने 15 दिन पहले ही राधिका से दूसरी शादी की थी। लोखंडे की पहली पत्नी की कैंसर से मौत हो गई थी। वह इस शादी को पूर्ण करने के लिए अपनी नई पत्नी के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाने की जिद कर रहा था। इससे राधिका गुस्से में आ गई। उसने पति पर कुल्हाड़ी से वार करते हुए उसकी हत्या कर दी। अधिकारियों ने राधिका के खिलाफ बीएनएस की धारा 103 (1) के तहत मामला दर्ज किया है। 

अवैध खनन में मामले में कर्नाटक के पूर्व मंत्री जनार्दन रेड्डी को राहत, बने रहेंगे विधायक

हैदराबाद  तेलंगाना हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी (ओएमसी) मामले में कर्नाटक के पूर्व मंत्री जी जनार्दन रेड्डी की सजा को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें जमानत भी दे दी है। रेड्डी पर अवैध लौह अयस्क खनन का आरोप था। हाईकोर्ट ने रेड्डी के साथ दोषी ठहराए गए तीन अन्य लोगों को भी जमानत दे दी है। सीबीआई की विशेष अदालत ने पहले रेड्डी और अन्य को दोषी ठहराया था। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 6 मई को जनार्दन रेड्डी और तीन अन्य लोगों को दोषी माना था। इनमें बी वी श्रीनिवास रेड्डी, वी डी राजगोपाल और महफूज अली खान शामिल हैं। बी वी श्रीनिवास रेड्डी जनार्दन रेड्डी के रिश्तेदार हैं और ओएमसी के प्रबंध निदेशक हैं। वी डी राजगोपाल आंध्र प्रदेश सरकार में खान एवं भूविज्ञान निदेशक थे। महफूज अली खान जनार्दन रेड्डी के सहायक रहे। अदालत ने इन सभी को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद जनार्दन रेड्डी और अन्य ने हाईकोर्ट में अपील की। उन्होंने सजा को निलंबित करने और जमानत देने की मांग की। अदालत ने उनकी सजा को निलंबित कर दिया है। अदालत ने उन्हें 10-10 लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर जमानत दी है। अदालत ने यह भी कहा है कि वे अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकते। सीबीआई ने इस मामले में 8 दिसंबर 2009 को एफआईआर दर्ज की थी। जनार्दन रेड्डी और अन्य के खिलाफ अपने चार्जशीट में केंद्रीय एजेंसी ने उन पर खनन पट्टे की सीमा चिह्नों के साथ छेड़छाड़ करने और कर्नाटक-आंध्र प्रदेश सीमा पर बेल्लारी रिजर्व वन क्षेत्र में अवैध रूप से खनन करने का आरोप लगाया। सीबीआई ने पहले कहा था कि आरोप है कि आरोपियों ने एक-दूसरे के साथ आपराधिक साजिश रची और सरकारी जमीनों और अन्य निजी व्यक्तियों की जमीनों में आपराधिक रूप से घुसपैठ करके लौह अयस्क के अवैध खनन के अपराध किए और इस तरह सरकार को 800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचाया।

JK में वंदे भारत हुई ‘ब्लॉकबस्टर’, 10 दिनों तक की सीटें हुई फुल, टिकट के लिए हो रही भयंकर मारामारी

जम्मू  श्रीनगर-कटड़ा के बीच छह जून को शुरू हुई वंदे भारत में सफर करने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। आलम यह है कि श्रीनगर से कटड़ा के लिए चलने वाली दो वंदे भारत में 26 जून तक कोई सीट उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं जून के महीने में केवल 27 व 28 जून को सीटें उपलब्ध है और उसके बाद दो व तीन जुलाई को छोड़ 23 जुलाई तक कोई भी सीट उपलब्ध नहीं है। ऐसे में साफ है कि तीन जुलाई से आरंभ होने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु भी इस बार वंदे भारत रेल का सफर कर इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ कटड़ा से श्रीनगर जाने के इच्छुक लोगों को भी वंदे भारत का इंतजार करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। कटड़ा से श्रीनगर जाने के लिए 18 जून तक दोनों वंदे भारत में प्रतिक्षा सूची में टिकट उपलब्ध है। ऐसा अनुमान है कि वार्षिक अमरनाथ यात्रा अवधि तक वंदे भारत में दोनों तरफ से इसी तरह की भीड़ देखने को मिलेगी। बता दें कि कटड़ा और श्रीनगर के बीच चलने वाली दो वंदे भारत को पीएम मोदी ने हरी झंडी दिखाई थी। रेलवे से संबंधित अधिकारियों का कहना है कि श्रीनगर जाने वाली वंदे भारत का जबरदस्त क्रेज है। कटरा से श्रीनगर को जोड़ती है वंदे भारत पीएम मोदी ने 6 जून को कटरा से श्रीनगर को जोड़ने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस (Vande Bharat express) का उद्घाटन किया था. जो अब जम्मू कश्मीर के पर्यटन उद्योग के लिए नई उम्मीद जगाई है. कटरा से कश्मीर तक का सफर लोगों के लिए रोमांच और उत्साह का केंद्र बन चुका है. यह ट्रेन दुनिया के सबसे ऊंचे पुल ‘चिनाब ब्रिज’ (Chenab Rail Bridge) से होकर गुजरती है. जो यात्रियों को सपने जैसा अनुभव देता है. 43 हजार करोड़ का है ये रेल प्रोजेक्ट कटरा को कश्मीर से जोड़ने वाले इस रेल प्रोजेक्ट को बनाने में 43 हजार करोड़ रुपये का खर्च आया है. यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग के किसी चमत्कार से कम नहीं है. ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच से निकलती वंदे भारत ट्रेन यात्रियों को स्वर्ग का अनुभव दे रही है. हर दिन लंबी होती जा रही है वेटिंग लिस्ट कटरा-श्रीनगर रेलवे रुट के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने दो वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई थी. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कटरा से श्रीनगर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेन की यात्रियों में जबरदस्त डिमांड है. भीड़ के हिसाब से दो ट्रेनें कम पड़ जा रही है. हर मौसम में कश्मीर जा सकेंगे पर्यटक कटरा से श्रीनगर के बीच की दूरी करीब 190 किलोमीटर है. जिसे वंदे भारत तीन घंटे से भी कम समय में तय करती है. जिससे यात्रा का समय आधा रह जाता है. कठोर सर्दियों में जहां रोड कनेक्टिविटी ठप हो जाती है. वहीं वंदे भारत सालों भर चलेगी. जिससे कश्मीर और शेष भारत के बीच कनेक्टिविटी लगातार बनी रहेगी.  

हाइवे पर जितनी चलेगी गाड़ी उतना ही कटेगा टोल, आ रही नई पॉलिसी पर बड़ा अपडेट

नई दिल्ली आपको भी लॉन्‍ग रूट पर अपनी कार से जाना पसंद है तो यह खबर आपको खुश कर देगी. लंबे इंतजार के बाद सरकार की तरफ से जल्‍द नई टोल पॉल‍िसी (New Toll Policy) लाने की तैयारी की जा रही है. सरकार की नई टोल पॉल‍िसी (New Toll Policy) से देशभर के एक्सप्रेसवे और नेशनल हाइवे पर सफर करने वालों को बड़ी राहत मिलेगी. सूत्रों की तरफ से दावा क‍िया गया क‍ि नई पॉल‍िसी के तहत हर टोल प्‍लाजा पर FASTag और कैमरे लगाए जाएंगे. टोल के चार्ज का पैसा कार माल‍िक के सीधे अकाउंट से काटा जाएगा. जितने किमी की यात्रा, उतना ही टोल टैक्‍स सूत्रों की तरफ से दावा क‍िया गया क‍ि नई पॉल‍िसी लाने के बाद जितने किलोमीटर की यात्रा की जाएगी, उतना ही टोल टैक्‍स देना होगा. नए सिस्टम में टोल बूथ पर लगे कैमरे हर गाड़ी की नंबर प्लेट को रिकॉर्ड करेंगे और FASTag के जर‍िये टोल का चार्ज काट ल‍िया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि यह नई टोल पॉल‍िसी मौजूदा सिस्टम से क‍िफायती और सुविधाजनक रहेगी. इससे लोगों को टोल प्‍लाजा पर रोजाना होने वाली परेशानियों और लंबी कतार से छुटकारा मिलेगा. टोल में सबसे ज्यादा राजस्व उत्तर प्रदेश ने जुटाया बता दें कि यूपी उन राज्यों की सूची में सबसे ऊपर है, जिन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-फरवरी अवधि में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल के माध्यम से उच्च राजस्व जुटाया है. यह जानकारी संसद में दी गई थी. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया था कि सरकार ने फरवरी 2025 तक उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर सबसे अधिक 7,060 करोड़ रुपये का ‘टोल’ एकत्र किए, इसके बाद राजस्थान ने 5,967.13 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र ने 5,115.38 करोड़ रुपये टोल एकत्र किए. जानकारी के लिए बता दें कि गडकरी ने उस समय ये बताया था कि सरकार (टोल) ‘पास’ प्रणाली के विवरण पर काम कर रही है। ‘पास’ प्रणाली के विवरण को अंतिम रूप दिए जाने के बाद इनके कार्यान्वयन के वित्तीय प्रभाव का पता लगाया जा सकता है. एक अलग प्रश्न का उत्तर देते हुए गडकरी ने कहा था कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में सरकार मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है. हाइवे पर आपने क‍ितने क‍िमी का सफर क‍िया? फास्टैग बेस्‍ड क‍िमी टोल पॉलिसी एक नया स‍िस्‍टम है, जिसमें टोल चार्ज को इस बेस पर लिया जाएगा कि आपने हाइवे पर कितने किमी का सफर क‍िया. अभी, टोल प्लाजा पर एक न‍िश्‍च‍ित शुल्क देना पड़ता है चाहे आप पूरा रास्ता यूज करें या नहीं. लेकिन नई पॉलिसी में आप केवल उतने ही किमी के ल‍िये पेमेंट करेंगे, जितना आपने हाइवे पर सफर क‍िया. यह चार्ज आपके फास्टैग अकाउंट से खुद-ब-खुद कट जाएगा. कैसे काम करेगी यह पॉलिसी? जीपीएस का यूज इस सिस्टम में जीपीएस (सैटेलाइट नेविगेशन) टेक्‍न‍िक का प्रयोग होगा. यह आपकी कार के रास्ते को ट्रैक करेगा और उसी के बेस पर टोल चार्ज की कैलकुलेशन की जाएगी. पॉलिसी के तहत टोल प्लाजा को हटाने का लक्ष्‍य है, ताकि आपको ज्‍यादा देर तक रुकना नहीं पड़े और यात्रा तेज व आसान हो. मीडि‍या रिपोर्ट में दावा क‍िया जा रहा है क‍ि एक कार को हर 100 किमी के लिए करीब 50 रुपये देने होंगे. फायदे क्या हैं?   आप केवल उस दूरी के लिए पेमेंट करेंगे, ज‍ितना आपने हाइवे का इस्तेमाल किया है. इसके अलावा समय और ईंधन की बचत होगी और टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. जीपीएस, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) और कैमरों के जरिये टोल अपने आप कटेगा.  

कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला ने पाकिस्तान को ‘आतंक रोधी अभियानों में एक अभूतपूर्व साझेदार’ बताया

वाशिंगटन  संयुक्त राज्य अमेरिका के सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के कमांडर जनरल माइकल कुरिल्ला ने पाकिस्तान को ‘आतंक रोधी अभियानों में एक अभूतपूर्व साझेदार’ बताया है. उन्होंने आईएसआईएस-खुरासान के खिलाफ अभियानों में इस्लामाबाद की भूमिका पर भी प्रकाश डाला. अमेरिकी संसद में हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमिटी की एक सुनवाई के दौरान जनरल माइकल कुरिल्ला ने पाकिस्तान को लेकर यह टिप्पणियां कीं. ऐसे समय में जब भारत ने अप्रैल में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए वैश्विक स्तर पर पैरवी तेज कर दी है, शीर्ष अमेरिकी सैन्य अधिकारी के इस बयान से हलचल मचने की संभावना है.  जनरल कुरिल्ला ने पाकिस्तान के बारे में कहा, ‘वह इस समय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, तथा काउंटर टेररिज्म में एक अभूतपूर्व साझेदार रहा है.’ अमेरिकी संसद की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष गवाही देते हुए जनरल कुरिल्ला ने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखने की पुरजोर वकालत की तथा इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका को अपनी साउथ एशिया को जीरो-सम लेंस (एक पक्ष का फायदा, दूसरे पक्ष का नुकसान) के माध्यम से नहीं देखना चाहिए.’  भारत और PAK दोनों से अमेरिका रखे अच्छे संबंध: कुरिल्ला उन्होंने कहा, ‘हमें पाकिस्तान और भारत के साथ संबंध बनाने की जरूरत है. मैं नहीं मानता कि अगर हम भारत के साथ संबंध रखते हैं तो हम पाकिस्तान के साथ संबंध नहीं रख सकते. हमें संबंधों के मेरिट को सकारात्मकता के लिए देखना चाहिए.’ कुरिल्ला की यह टिप्पणी भारत द्वारा पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद के समर्थन के लिए जवाबदेह ठहराने के लिए बढ़ते कूटनीतिक प्रयास की पृष्ठभूमि में आई है. 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान जाने के बाद, भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे पर सटीक हमले किए. दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सहमति बनने के बाद 10 मई को सैन्य तनाव समाप्त हुआ. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि आतंकवाद के पीड़ितों और अपराधियों की बराबरी नहीं की जा सकती. कुरिल्ला ने आईएसआईएस-खुरासान के खिलाफ पाकिस्तान के सैन्य प्रयासों की प्रशंसा की. उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का नाम लेते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने आईएसआईएस के लड़ाकों को निशाना बनाने के लिए अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर दर्जनों ऑपरेशन किए हैं. कुरिल्ला ने कहा कि अफगानिस्तान से संचालित आईएसआईएस-खुरासान, अमेरिका की धरती सहित दुनिया भर में हमले करने वाले सबसे सक्रिय आतंकवादी समूहों में से एक है. अमेरिकी जनरल ने आतंकवाद परस्त PAK से दिखाई हमदर्दी उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान के साथ अभूतपूर्व साझेदारी के माध्यम से, अमेरिकी सैनिकों ने आईएसआईएस-खुरासान पर हमला किया और दर्जनों आतंकियों को मार गिराया. पाकिस्तान द्वारा खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने की वजह से हमने आईएसआईएस-खुरासान के कम से कम पांच बड़े कमांडर्स को पकड़ने में सफलता पाई.’ आईएसआईएस-खुरासान के पकड़े गए कमांडर्स में, कुरिल्ला ने मोहम्मद शरीफुल्लाह उर्फ ​​जफर का उल्लेख किया, जो कथित तौर पर 2021 काबुल हवाई अड्डे पर आत्मघाती बम विस्फोट में शामिल था, जिसमें 13 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 160 से अधिक नागरिक मारे गए थे. जनरल कुरिल्ला ने कहा कि मोहम्मद शरीफुल्लाह उर्फ ​​जफर की गिरफ्तारी के बाद मुनीर [पाकिस्तानी सेना प्रमुख] मुझे फोन करने वाले पहले व्यक्ति थे. उन्होंने मुझसे कहा कि मैंने उसे पकड़ लिया है, मैं उसे वापस अमेरिका प्रत्यर्पित करने को तैयार हूं. कृपया अपने रक्षा सचिव और राष्ट्रपति को इसके बारे में बता दें.’ जनरल कुरिल्ला ने आतंकवाद के कारण पाकिस्तान को हुई मानवीय क्षति के बारे में भी बताया और खुलासा किया कि 2024 की शुरुआत से अब तक देश में 1,000 से अधिक आतंकवादी हमले हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 700 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 2,500 नागरिक हताहत हुए हैं. कुरिल्ला की यह टिप्पणी पिछले महीने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के बाद युद्ध विराम को सुगम बनाने में अमेरिका की अहम भूमिका के दावों के बाद आई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम कराने का श्रेय लिया है, हालांकि उनकी टिप्पणियों से नई दिल्ली में नाराजगी है. भारत ने कई अवसरों पर अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के साथ युद्ध विराम कराने के दावों का खंडन किया है.  अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी द्वारा पाकिस्तान की तारीफ के बावजूद, भारत वैश्विक मंचों पर इस्लामाबाद के खिलाफ अपनी बात रखना जारी रखे हुए है. पहलगाम हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के बाद, भारत ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी एजेंडे को उजागर करने के लिए दुनिया भर की 33 राजधानियों में सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजे. विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रुसेल्स की यात्रा के दौरान आतंकवाद के प्रति भारत की जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी की पुष्टि की और कड़ी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में नए स्टैंडर्ड स्थापित किए हैं और अगर पाकिस्तान अपनी हरकतें जारी रखता है तो देश जवाबी कार्रवाई करने से पहले दो बार नहीं सोचेगा.  आतंकी PAK में चाहे कहीं हों, भारत जवाब देगा: जयशंकर जयशंकर ने न्यूज आउटलेट ‘पोलिटिको’ (Politico) को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे. इसलिए हमारा संदेश उन्हें यह है कि यदि आप अप्रैल में किए गए बर्बर कृत्यों को जारी रखते हैं, तो आपको कीमत चुकानी होगी और हमारा जवाब आतंकवादी संगठनों और आतंकवादी नेतृत्व के खिलाफ होगा. हमें फर्क नहीं पड़ता कि वे (आतंकी और उनके संगठन) कहां हैं. यदि वे पाकिस्तान में बहुत अंदर भी बैठे हुए हैं, तो हम वहां जाकर जवाब देंगे.’ मीडिया से बातचीत में एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद पश्चिम को परेशान करने के लिए वापस आएगा. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको एक बात याद दिलाना चाहता हूं- ओसामा बिन लादेन नाम का एक आदमी था. वह सभी लोगों में से, वेस्ट प्वाइंट के ठीक बगल में एक पाकिस्तानी सैन्य शहर में वर्षों तक सुरक्षित क्यों महसूस करता था? मैं चाहता हूं कि दुनिया समझे- यह केवल भारत-पाकिस्तान का मुद्दा नहीं है. यह आतंकवाद के बारे में है. और वही आतंकवाद अंततः आपको परेशान करने के लिए वापस आएगा.’  

बांग्लादेश में कैसा उत्पात! भीड़ ने रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर को बनाया निशाना

ढाका  बांग्लादेश के सिराजगंज जिले में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के पैतृक घर पर एक भीड़ ने हमला करके उसे नुकसान पहुंचाया है। इसके बाद पुरातत्व विभाग ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है जिसे पांच कार्यदिवसों में रिपोर्ट देने को कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आठ जून को एक विजिटर अपने परिवार के साथ सिराजगंज जिले में स्थित कचहरीबाड़ी गया था। इसे रवींद्र कचहरीबाड़ी या रवींद्र स्मारक संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता है। कार्यालय में बंद हुआ विजिटर  विजिटर की प्रवेश द्वार पर मोटरसाइकिल पार्किंग शुल्क को लेकर एक कर्मचारी के साथ बहस हो गई थी। बाद में विजिटर को कथित तौर पर एक कार्यालय में बंद कर दिया गया था और उस पर हमला किया गया था। इस घटना से नाराज स्थानीय लोगों ने मंगलवार को मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद भीड़ ने कचहरीबाड़ी के ऑडिटोरियम पर हमला किया और संस्थान के एक निदेशक की पिटाई कर दी। गौरतलब है कि इस घर में रहते हुए रवींद्रनाथ टैगोर ने कई साहित्यिक रचनाएं की थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भीड़ ने हंगामा उस वक्त शुरू किया जब  एक विजिटर अपने परिवार के साथ रवींद्र कचहरीबाड़ी पहुंचा, जिसे रवींद्र स्मारक संग्रहालय के नाम से भी जाना जाता है. कथित तौर पर मोटरसाइकिल पार्किंग शुल्क को लेकर प्रवेश द्वार पर विजिटर और कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ. तनाव बढ़ गया और विजिटर को कथित तौर पर एक रूम में बंद कर दिया गया और कर्मचारियों द्वारा शारीरिक रूप से हमला किया गया. इस घटना से स्थानीय आक्रोश भड़क उठा. मंगलवार को, निवासियों ने विरोध में एक मानव श्रृंखला बनाई, जिसके बाद भीड़ ने परिसर में धावा बोल दिया. कचहरीबाड़ी के सभागार में तोड़फोड़ की गई और संस्थान के एक निदेशक पर शारीरिक रूप से हमला किया गया.  

महिलाओं के कपड़ों और ड्रेस कोड को लेकर सीरिया की नई सरकार ने लागू किया ड्रेस कोड

दमिश्क सीरिया में बशर अल-असद की दमनकारी शासन का जिस विद्रोही समूह ने अंत किया अब वो सीरिया पर शासन कर रहा. अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाली सीरिया की नई अंतरिम सरकार ने  एक नया रुढ़िवादी इस्लामिक ड्रेस कोड जारी किया जिसके तहत, समुद्र तटों और स्विमिंग पूल में स्विमसूट पहनकर नहाने की मनाही हो गई है. महिलाओं को अब समुद्री तटों और स्विमिंग पूल में नहाने के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले ढीले-ढाले स्विमवियर जिसे बुर्किनी कहा जाता है, पहनना होगा. पिछले साल दिसंबर में इस्लामिक विद्रोहियों के असद की सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से यह पहला सांस्कृतिक बदलाव है. सीरिया की अंतरिम सरकार में पर्यटन मंत्री माजेन अल-सलहानी ने कहा कि नए दिशानिर्देश ‘सार्वजनिक हित की जरूरतों’ को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. पर्यटन मंत्री माजेन अल-सलहानी ने फेसबुक पर जारी निर्देश में कहा, ‘पब्लिक समुद्र तटों और स्विमिंग पूलों पर आने वाले सभी लोगों को, चाहे वो पर्यटक हों या स्थानीय लोग, सही स्विमवियर पहनना जरूरी है. स्विमसूट ऐसा होना चाहिए जो लोगों को देखने में बुरा न लगे और जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया हो. निर्देश में आगे कहा गया है, ‘पब्लिक समुद्र तटों और पूलों पर अधिक शालीन स्विमवियर (बुर्किनी या स्विमसूट जो शरीर के अधिकांश हिस्से को ढकता हो) की जरूरत है. समुद्र से किसी अन्य जगह पर जाते समय स्विमसूट के ऊपर समुद्र तट कवर-अप या ढीले-ढाले कपड़े पहनने महिलाओं के लिए जरूरी है.’ दिशा-निर्देशों में पुरुषों के लिए कही गई ये बात नए दिशा-निर्देशों के तहत पुरुषों को शर्ट पहनना अनिवार्य है, जिसके अनुसार ‘तैराकी की जगहों, होटल लॉबी और खाने-पीने की जगहों में टॉपलेस कपड़े पहनने की अनुमति नहीं है.’ निर्देश में कहा गया है, ‘समुद्र तटों और स्विमिंग पूलों के बाहर पब्लिक जगहों में, कंधों और घुटनों को ढकने वाले ढीले कपड़े पहनना बेहतर तरीका है, पारदर्शी या अत्यधिक तंग कपड़े पहनने से बचें.’ मंत्रालय ने कहा कि हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रिजॉर्ट्स और प्रीमियम होटलों, प्राइवेट समुद्र तटों और स्विमिंग पूल में पश्चिमी स्विमवियर पहनने की इजाजत होगी. मंत्रालय ने कहा कि लाइफगार्ड और समुद्र तटों की निगरानी करने वाले लोग नए नियमों को लागू कराना सुनिश्चित करेंगे. सीरिया में दिख रहा इस्लामिक शासन का प्रभाव स्विमसूट को लेकर नए नियम इस्लामिक समूह हयात अल-शाम (HTS) के प्रभाव को दिखाते हैं जो अब सीरिया पर शासन कर रहा है. HTS पहले अल-नुसरा फ्रंट के नाम से मशहूर था जिसे अमेरिका और ब्रिटेन ने आतंकवादी समूह घोषित कर रखा है. सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अल-शरा जिन्होंने ड्रेस कोड के निर्देश पर हस्ताक्षर किए हैं, वो एचटीएस का नेतृत्व करते हैं. HTS अलकायदा से जुड़ा समूह है जो 2016 में आतंकी समूह से अलग हो गया था. HTS के विद्रोह से ही असद की सत्ता का अंत हुआ. मार्च में अल-शरा ने एक अंतरिम संविधान पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत सीरिया पर पांच सालों तक इस्लामी शासन अनिवार्य रहेगा. अल-शरा ने दिसंबर में कहा था कि सीरिया के संविधान को फिर से लिखने में तीन साल लग सकते हैं, और संभवतः पांच साल के भीतर चुनाव हो सकते हैं. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स वॉच ने मार्च में कहा था कि अल-शरा का शासन मानवाधिकार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है.  कभी जिसे आतंकी मानता था अमेरिका, उसी से मिलाया ट्रंप ने हाथ कुछ समय पहले तक अमेरिका अल-शरा को आतंकवादी घोषित कर रखा था. उनके सिर पर एक करोड़ डॉलर (85 करोड़ रुपये से ज्यादा) का इनाम घोषित था लेकिन सीरिया की सत्ता संभालते ही अमेरिका ने अल-शरा से हाथ मिला लिया. मई में सऊदी अरब के अनुरोध पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रियाद में अल-शरा से गर्मजोशी से हैंडशेक किया और 1979 से सीरिया पर लगाए सभी प्रतिबंधों को भी हटा दिया था. हालांकि, एचटीएस को अभी भी संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और ब्रिटेन एक आतंकी संगठन ही मानते हैं.   

मिडिल ईस्ट से अमेरिकी सैनिक-राजनयिक निकालेंगे ट्रंप, ईरान पर हमले की तैयारी, बढ़ेगा तनाव!

वॉशिंगटन  मिडिल ईस्‍ट में हालात एक बार फिर से विस्‍फोटक होने लगे हैं. ईरान अपने न्‍यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने पर अभी तक सहमत नहीं हुआ है. अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने तेहरान की परमाणु महत्‍वाकांक्षाओं को हर हाल में रोकने की बात कही है. अब इजरायल ने ईरान के न्‍यूक्लियर प्रोग्राम को रोकने के लिए सैन्‍य टकराव का रास्‍ता अपनाने की मंशा को स्‍पष्‍ट कर दिया है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि इज़राइल अब ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. बताया जा रहा है कि इजरायल अब जल्द ही ईरान के खिलाफ अपना स्‍पेशल ऑपरेशन शुरू कर सकता है. अमेरिकी अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इज़राइल ईरान के खिलाफ सैन्‍य ऑपरेशन करने के लिए अब पूरी तरह से तैयार है. इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन शुरू करने की पूरी तैयारी कर रखी है. वहीं, अमेरिका मिडिल ईस्ट से अपने सैनिकों को हटाने की बात कही है. CBS न्यूज को मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिका को उम्मीद है कि इजरायल के कदम पर ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की जा सकती है. अमेरिका को डर है कि इराक में मौजूद उसके ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है. इसी वजह से अमेरिका ने पहले ही वहां के कुछ क्षेत्रों से गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों को निकालने की सलाह दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे मध्य पूर्व से अपने सैनिकों को हटा रहे हैं, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. राष्‍ट्रपति ट्रंप ने स्‍पष्‍ट शब्‍दों में कहा कि वहां स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है. बता दें कि इजरायल पहले से ही हमास के साथ जंग लड़ रहा है. ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन शुरू कर इजरायल एक और मोर्चा खोलने जा रहा है.  ईरानी अधिकारी का बड़ा दावा सामने आया है. उनका कहना है कि इज़राइल के हमले पर दुश्‍मन को तगड़ा जवाब देने की पूरी तैयारी है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया कि देश के सैन्य और सरकारी शीर्ष अधिकारी पहले ही एक साथ बैठकर इज़राइल के संभावित हमले का सामना करने के लिए रणनीति तैयार कर चुके हैं. तेहरान ने ऐसी प्रतिक्रिया योजना बनाई है, जिसके तहत इज़राइल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलों से जोरदार जवाबी हमला किया जाएगा. वहीं, हूती विद्रोहियों का अमेरिका और इज़राइल को खुली चेतावनी देते हुए कहा – ईरान पर हमला होगा तो होगा बड़ा युद्ध.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी कर्मियों को मध्य पूर्व से बाहर निकाला जा रहा है, क्योंकि यह एक खतरनाक स्थान हो सकता है. उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं देगा. रॉयटर्स ने बुधवार को पहले बताया कि अमेरिका अपने इराकी दूतावास को आंशिक रूप से खाली करने की तैयारी कर रहा है और अमेरिकी और इराकी स्रोतों के अनुसार, क्षेत्र में बढ़े हुए सुरक्षा जोखिमों के कारण सैन्य आश्रितों को मध्य पूर्व के आसपास के स्थानों को छोड़ने की अनुमति देगा.  अमेरिका द्वारा कुछ कर्मचारियों को निकालने का निर्णय क्षेत्र में अस्थिर समय में लिया गया है. ईरान के साथ परमाणु समझौते पर पहुंचने के ट्रम्प के प्रयास गतिरोध में फंसते दिखाई दे रहे हैं और अमेरिकी खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि इजरायल ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला करने की तैयारी कर रहा है. ट्रम्प ने कहा, ‘उन्हें वहां से हटाया जा रहा है, क्योंकि यह एक खतरनाक जगह हो सकती है. हम देखेंगे कि क्या होता है. हमने वहां से हटने का नोटिस दे दिया है.’ समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बुधवार को पहले खबर दी थी कि अमेरिका अपने इराकी दूतावास को आंशिक रूप से खाली करने की तैयारी कर रहा है और क्षेत्र में बढ़े सुरक्षा जोखिमों के कारण सेना से जुड़े परिवारों को मिडिल ईस्ट छोड़ने कह रहा है.   अब अमेरिकी विदेश विभाग ने आतंकवाद, किडनैपिंग, हथियारबंद लड़ाई और आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए इस क्षेत्र में आने के खिलाफ लेवल-4 कैटेगरी की चेतावनी जारी की है और लोगों ने से कहा है कि वे इन इलाकों की यात्रा न करें. अमेरिका ने कहा है कि इस समय इराक की यात्रा करना अत्यधिक और जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाला जोखिम हो सकता है.   चार अमेरिकी और दो इराकी सूत्रों ने यह नहीं बताया कि किस सुरक्षा जोखिम के कारण यह निर्णय लिया गया.  मध्य पूर्व से अमेरिका के बाहर आने की खबरों ने मार्केट में शंका देखी गई.वहीं तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो गई.  एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि विदेश विभाग ने बहरीन और कुवैत से वैसे लोगों को एरिया छोड़ देने को कहा है जो इस क्षेत्र को छोड़ना चाहते हैं. ये स्वैच्छिक फैसला होगा. विदेश विभाग ने बुधवार शाम को अपने विश्वव्यापी ट्रेवल एडवाइजरी को अपडेट करते हुए कहा, “11 जून को विदेश विभाग ने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के कारण गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी स्टाफ को यहां से प्रस्थान करने का आदेश दिया है.” बता दें कि अमेरिका द्वारा मध्यपूर्व से अपने स्टाफ को निकालने का फैसला उन नाजुक क्षणों में आया है जब ट्रंप ईरान के साथ परमाणु समझौते को अंतिम रूप नहीं दे पा रहे हैं. ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु डील लगातार अटक रहा है.  इस बीच अमेरिकी खुफिया संकेत देते हैं कि इजरायल ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमले की तैयारी कर रहा है.  इस मुद्दे पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट से अमेरिकी कर्मियों को निकाला जा रहा है क्योंकि ये खतरनाक जगह हो सकता है और हम देखते हैं कि आगे क्या होता है. हमने उन्हें बाहर जाने का नोटिस दिया है.  जब राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि पूरे क्षेत्र का राजनीतिक और सैन्य तापमान कम करने के लिए कुछ किया जा सकता है या नहीं. इसके जवाब में ट्रंप ने साफ साफ कहा कि, ‘ईरान परमाणु बम नहीं बना सकता है, ये बहुत ही सिंपल सी बात है, उनके पास परमाणु बम नहीं हो सकता है.’ यूरेनियम का संवर्धन रोके ईरान, नहीं तो… बता दें कि ट्रम्प ने बार-बार ईरान पर हमला करने की धमकी दी है. उन्होंने कहा है … Read more

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