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अपने दिग्गजों की राजनैतिक विरासत संभालने निकले ‘वंशज’ डेंजर जोन में फंसे.

The ‘descendants’ set out to uphold the political legacy of their stalwarts find themselves trapped in the danger zone. मैदान में अर्जुन, दिग्विजय, कैलाश, पटवा और सकलेचा के बेटे, बड़ा कारण – कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय लड़ा चुनाव, राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद, 3 को खुलेगा तो ही चमकेगी विधायकी की तरदीर उदित नारायणभोपाल। इस बार मप्र के चुनाव में सबसे ज्यादा दिग्गज नेताओं के वारिस चुनावी मैदान में उतरे हैं। इनमें से ज्यादातर का राजनैतिक भविष्य दाव पर लगा है, हालांकि कुछ के लिए राह आसान भी दिखाई दे रही है। जब 3 दिसंबर को ईवीएम परिणाम उगलेगी तो जीत और हार के दावे की हकीकत सबके सामने आ जाएगी। विधानसभा चुनाव में कई राजनेताओं के वंशज व परिवार के सदस्य मैदान में उतरे हैं जिनका राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद है। इनमें कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों अर्जुनसिंह व दिग्विजय सिंह, गैर कांग्रेस सरकारों के पूर्व मुख्यमंत्रियों कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, वीरेंद्र सकलेचा, बाबूलाल गौर, उमा भारती और गोविंदनारायण सिंह के वंशज प्रमुख हैं। इनके अलावा प्रदेश सरकारों के पूर्व मंत्री, सक्रिय राजनेताओं के वंशज भी चुनाव मैदान में उतरे हैं जिन्होंने कांग्रेस-भाजपा ही नहीं अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय चुनाव लड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्रियों में अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह चुरहट और साले राजेंद्र सिंह अमरपाटन से हैं जिनकी स्थिति पिछले चुनाव से बहुत अच्छी बताई जा रही है। दिग्विजय सिंह के पुत्र मंत्री जयवर्द्धन सिंह और भाई विधायक लक्ष्मण सिंह की स्थिति पिछली बार से कमजोर है लेकिन दोनों के किसी तरह संकट से बाहर निकल जाने की परिस्थितियां दिखाई दे रही हैं। कैलाश जोशी के पुत्र दीपक के चुनाव के ठीक पहले भाजपा से मोहभंग होने तथा कांग्रेस में पहुंचने से कुछ नुकसान है तो फायदा भी मिलेगा। सुंदरलाल पटवा के भतीजे विधायक सुरेंद्र, वीरेंद्र सकलेचा के पुत्र मंत्री ओमप्रकाश और बाबूलाल गौर की बहू विधायक कृष्णा गौर की स्थिति बेहतर है लेकिन भारती के भतीजे मंत्री राहूल लोधी की सीट पर चुनौतीपूर्ण मुकाबला है। अन्य वंशजों में कुछ बेहतर तो कुछ मुकाबले में फंसेराजनेताओं के अन्य वंशजों में मुकाबले में फंसे प्रत्याशियों में नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के भांजे कांग्रेस प्रत्याशी राहुल भदौरिया, सिंधिया परिवार की निकटतम रिश्तेदार भाजपा प्रत्याशी माया सिंह, विधानसभा अध्?क्ष गिरीश गौतम के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पद्मेश, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी के पोते भाजपा प्रत्याशी सिद्धार्थ, इंदौर की सांवेर सीट पर पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू की बेटी कांग्रेस की रीना बौरासी के भविष्य का रास्ता 3 दिसंबर को खुलेगा। पूर्व मंत्री चिटनिस, डिप्टी सीएम रहे यादव के सामने चुनौती देपालपुर में निर्भयसिंह पटेल के पुत्र भाजपा प्रत्याशी मनोज पटेल, रतलाम की जावरा सीट पर पूर्व सांसद लक्ष्मीनाराण पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र पांडेय, बुरहानपुर की नेपानगर सीट पर पूर्व विधायक राजेंद्र दादू की बेटी भाजपा प्रत्याशी मंजू दादू, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बृजमोहन मिश्र की पुत्री पूर्व मंत्री व भाजपा प्रत्याशी अर्चना चिटनीस, पूर्व विधायक चिड़ाभाई डाबर के बेटे विधायक कांग्रेस प्रत्याशी केदार डाबर, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुभाष यादव के पुत्र पूर्व मंत्री सचिन यादव, पूर्व विधायक सीताराम साधौ की पुत्री व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ हैं। केंद्रीय मंत्री भूरिया बेटे के लिए परेशानपूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया, पूर्व विधायक प्रेम सिंह दत्तीगांव के पुत्र मंत्री भाजपा प्रत्याशी राजवर्धन सिंह, पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश्वर पटेल, पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी नितेंद्र सिंह, पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुवेर्दी के भाई कांग्रेस प्रत्याशी विधायक आलोक चतुवेर्दी, पूर्व विधायक चौधरी दिलीप सिंह के पुत्र पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी राकेश सिंह चतुवेर्दी, पूर्व मंत्री सत्येंद्र पाठक के पुत्र भाजपा प्रत्याशी संजय पाठक, पूर्व विधायक प्रभात पांडेय के पुत्र भाजपा प्रत्याशी प्रणय पूर्व सांसद कंकर मुंजारे की पत्नी कांग्रेस प्रत्याशी अनुभा मुंजारे, पूर्व मंत्री लिखीराम कांवरे की पुत्री पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष कांग्रेस प्रत्याशी हिना कांवरे भी शामिल है। अकील की बेटे के लिए ज्यादा चिंंतापूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी की पुत्री भाजपा प्रत्याशी मोनिका, पूर्व मंत्री आरिफ अकील के बेटे कांग्रेस प्रत्याशी आतिफ अकील, पूर्व राज्यसभा सदस्य कैलाश नारायण सारंग के पुत्र मंत्री विश्वास सारंग, पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई विधायक भाजपा प्रत्याशी उमाकांत, पूर्व विधायक केदार सिंह चौहान के पुत्र भाजपा प्रत्याशी महेंद्र सिंह चौहान, पूर्व विधायक गोविंद शर्मा के पुत्र विधायक भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा, पूर्व मंत्री हजारीलाल रघुवंशी के पुत्र ओमप्रकाश रघुवंशी के नाम प्रमुख हैं। इन नेताओं की सीट में अच्छे संकेतवहीं जिन नेताओं के वंशजों के लिए चुनाव में मुकाबला आसान दिखाई दे रहा है उनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी के भतीजे व पूर्व मंत्री कांग्रेस प्रत्याशी उमंग सिंगार, पूर्व मंत्री सुलोचना रावत के पुत्र भाजपा प्रत्याशी विशाल रावत, पूर्व मंत्री तुकोजीराव पवार की पत्नी विधायक गायत्रीराजे, पूर्व सांसद सुखराम कुशवाह के पुत्र विधायक सिद्धार्थ कुशवाह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के पुत्र कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे, नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की समधन पूर्व विधायक चंदा गौर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के पुत्र अशोक, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के भतीजे कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री प्रियव्रत सिंह शामिल हैं।

सियासत किस करवट लेगी, इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म.

Political discussions are heating up over which direction politics will take. गगनचुंबी दावों के बीच किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज, तीन दिसंबर को स्थिति होगी साफ, लगभग 150 घंटे का इंतजार बांकी. उदित नारायण उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश चुनाव 2023 के परिणाम को भले ही लगभग 150 घंटे शेष हों, लेकिन सियासत में कांग्रेस और भाजपा के परिणाम इस बार किस करवट बैठेंगे, इसको लेकर भारी चर्चा हो रही है। मध्यप्रदेश में बिना किसी लहर के नजर आए मतदाताओं के उत्साह और भारी मतदान के बाद राजनीतिक दल और राजनेता आंकड़ों के खेल में उलझ कर इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि आखिर सता का ताज किसके सिर सजेगा। भाजपा को भरोसा है कि सत्ता का ताज उसके सर पर ही सजा रहेगा। वहीं कांग्रेस को भरोसा है कि कांग्रेस की ही सरकार बन रही है और कमल नाथ मुख्यमंत्री बनेंगे। लाडली बहना बनाम एंटी इनकमबेंसी को लेकर ही अनुमान लगाए जा रहे हैं। शिवराज सरकार की लाडली बहना योजना को भाजपा अपने पक्ष में मानकर चल रही है तो कांग्रेस एंटी इनकमबेंसी और महंगाई के कारण महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में मानकर अपनी जीतका गगनचुंबी दावा कर रही हैं। भाजपा नेता मध्यप्रदेश में 230 सीटों में से 150 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं तो वहीं कांग्रेस नेता 125 से लेकर 150 सीट तक जीतने का दावा कर रहे हैं। अपने अंदरूनी सर्वे में दोनों ही दल यह मानकर चल रहे हैं कि लगभग 100 -100 सीटें तो जीत ही रहे हैं और बची हुई 30 सीटों में से जो भी आधे से अधिक जीत लेगा उसे ही मध्य प्रदेश में सत्ता साकेत में नौकायन का मौका मिल जाएगा। लाख टके के सवाल का जवाब 3 दिसंबर को मतगणना से ही मिलेगा 116 का जादुई आंकड़ा कौन पर करता है। वास्तव में भारी मतदान किसके पक्ष में हुआ है इसको लेकर राजनीतिक विश्लेषक भी अपने-अपने ढंग से इसका अर्थ निकाल रहे हैं लेकिन कोई भी निश्चित तौर पर यह नहीं कह रहा है कि चुनाव कौन जीत रहा है। मध्यप्रदेश के चुनाव नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि शिवराज की लाडली बहना ने कोई गुल खिलाया है या फिर एंटी इनकंबेंसी मतदाताओं के मानस पटल पर पूरी तरह छाई रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का पक्का भरोसा है कि लाडली बहनों ने अपने भाई का साथ दिया है और भाजपा की ही सरकार बनने वाली है। वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का दावा है कि मतदाता मध्यप्रदेश का निर्माण करेगा और उनका एक-एक वोट प्रदेश में फैले कुशासन को समाप्त कर जनहित की सरकार की स्थापना करेगा। सूत्रों के अनुसार भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण में उसे 124 सीटें जीतने का पक्का भरोसा है जबकि उसका अनुमान है कि कांग्रेस को लगभग 100 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस 130 से अधिक सीटों के साथ अपनी सरकार बनाने का दावा कर रही है तो वहीं पर दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी 124 सीटों पर अपनी जीत पक्की मान वह लगभग 4 सीटों पर कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में जहां तक विंध्याचल का सवाल है वहां पर पार्टी है यह मान रही है कि उसे यहां की 30 में 19 सीटें मिल ही जाएंगी तो वहीं दूसरी ओर 11 सीटें कांग्रेस को भी मिल सकती है। यहां की 25 सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला बताया जा रहा है जबकि 5 सीटों में मुकाबला त्रिकोणात्मक माना जा रहा है। महाकौशल आंचल की कुल 38 सीटों में से भाजपा को 19 सीटों पर जीत का भरोसा है और इतनी सीटें वह कांग्रेस के लिए पक्की मानकर चल रही है। इस प्रकार भाजपा के आंतरिक सर्वे में भी इस अंचल में दोनों के बीच बराबरी का मुकाबला माना जा रहा है जबकि कांग्रेस इस अंचल में अपनी स्थिति काफी मजबूत मानकर चल रही है। यह तो मतगणना से ही पता चलेगा कि आखिर यहां के मतदाताओं ने किस पर अधिक और किस पर कम भरोसा जताया। भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार भोपाल- नर्मदापुरम संभाग की 36 सीटों में से भाजपा 20 पर अपनी जीत पक्की मानकर चल रही है और कांग्रेस को वह 15 सीटें दे रही है। राजधानी भोपाल की एक सीट भोपाल मध्य में वह कांग्रेस के साथ क कड़े संघर्ष की स्थिति देख रही है। इस संभाग में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य चुनावी मुकाबला हो रहा है। ग्वालियर चंबल संभाग में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को धीरे से जोर का झटका लगा था लेकिन यहां वह दल बदल के बाद भाजपा को अपनी स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत नजर आ रही है क्योंकि इस बार उसे भरोसा है कि उसकी झोली में 15 सीटें तोआ ही रहीं हैं जबकि एक मुरैना सीट पर कड़े मुकाबले में बसपा को जीतते हुए देख रही है। इस सर्वे में माना जा रहा है कि इस अंचल में सबसे अधिक 17 सीटें कांग्रेस जीत सकती है। दतिया सीट पर भाजपा कांग्रेस के साथ कड़े मुकाबले की स्थिति देख रही है ।यहां पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर हो रही है। बुंदेलखंड अंचल की 26 सीटों में से भाजपा यह मानकर चल रही है कि कांग्रेस को 13 सीटों पर बढ़त है तो वहीं 12 सीटों को अपने लिए पक्की मान रही है जबकि एक सीट निवाड़ी में समाजवादी पार्टी को जीते हुए देख रही है। निमाड़ और मालवांचल की 66 सीटों में से वह अपने लिए 39 सीटें पक्की मान रही है जबकि क्षेत्र 25 सीटें कांग्रेस पार्टी को दे रही है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है उसे 130 से 140 सीटें जीतने का भरोसा है। कांग्रेस पार्टी का आंतरिक सर्वे भाजपा को मात्र 80 से 85 ही सीटें दे रहा है। वही आम आदमी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी आदि को लगभग दस तक सीटें मिल जाएगी ऐसा मानकर कांग्रेस चल रही है।कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत का दावा पूरी शिद्दत के साथ कर रहे हैं।दोनों के अपने अपने तर्क हैं और अपने अपने विश्वास । सभी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने-अपने … Read more

हेरिटेज मदिरा बनाने में अब पर्यावरण एनओसी नहीं लगेगी.

Heritage liquor production will no longer require Environmental NOC. एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की होटलों और वाइन शॉप में उपलब्ध उदित नारायणभोपाल। राज्य सरकार ने महुआ से निर्मित हेरिटेज मदिरा के उत्पादन के लिये बने नियमों में बदलाव कर दिया है। अब इसके निर्माण के लिये प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एनओसी जमा नहीं कराना होगी। हालांकि आबकारी विभाग ने अपने नियमों में इसका प्रावधान हटा दिया है परन्तु यदि प्रदूषण नियंत्रण मंडल अपने विनियमों में इसका प्रावधान करेगा तो फिर यह एनओसी लेना जरुरी होगा। फिलहाल प्रदेश में अलीराजपुर जिले के ब्लाक कट्ठीवाड़ा के ग्राम कोछा में आदिवासी वर्ग के हनुमान आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा महुआ से हेरिटेज मदिरा का निर्माण किया जा रहा है तथा इससे हेरीटेज को प्रदेश के चुनिंदा एयरपोर्ट, पर्यटन निगम की कतिपय होटलों एवं एमबी वाईन के आउटलेट पर विक्रय के लिये उपलब्ध कराई गई है। डिण्डौरी जिले के ब्लाक अमरपुर के ग्राम भाखानाल में स्थित मां नर्मदा आजीविका स्वसहायता समूह द्वारा अभी हेरीटेज मदिरा का निर्माण शुरु नहीं किया गया है। नये बदलावों के अंतर्गत, अब हेरीटेज मदिरा के विनिर्माता मूल्य, अधिकतम फुटकर मूल्य एवं न्यूनतम विक्रय मूल्य का निर्धारण आबकारी आयुक्त के अनुमोदन से होगा। स्वसहायता समूह में कम से कम 25 सदस्य दसवीं कक्षा अथवा उसके समकक्ष अर्हता रखने वाला प्रावधान अब खत्म कर दिया गया है। हेरीटेज मदिरा निर्माण इकाई में योग्यता प्राप्त विशेषज्ञ केवल अनुसूचित जनजाति समुदाय का ही हो सकेगा तथा इकाई में केवल अजजा समूदाय के व्यक्यिों से ही समस्त प्रकार की गतिविधियों का संचालन करवाया जायेगा। इसी प्रकार, अब हेरीटेज मदिरा के परिवहन हेतु एक ही अनुज्ञा-पत्र होगा जो भले की विनिर्माण इकाई से गोदाम तक एवं गोदाम से रिटेल दुकान तक किया जाये। पहले अलग-अलग परिवहन अनुज्ञा-पत्रों का प्रावधान था। हेरीटेज मदिरा के परिवहन में 0.25 प्रतिशत की छीजन यानि वेस्टेज (टूट-फूट) दी जायेगी। हेरीटेज मदिरा की फुटकर दुकान चलाने का एचएल-2 लायसेंस 5 हजार रुपये प्रति वर्ष के स्थान पर एक हजार रुपये प्रति वर्ष लगेगा।

सरकार किसी की भी बने, इस बार डिप्टी सीएम का फार्मूला भी.

Regardless of which government is formed, this time the formula for the Deputy Chief Minister is also there. Manish Trivediभोपाल, मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में मतगणना के बाद सरकार किसी भी दल की बने चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस, लेकिन इतना तय है कि अब मध्यप्रदेश में डिप्टी सीएम के फार्मूले भी चलेंगे। इस बार दोनों ही दलों में सीएम बनने की चाहत वाले नेताओं को संतुष्ट करने के लिये यूपी , महाराष्ट्र व छत्तीसगढ की तर्ज पर डिप्टी सीएम बनाया जायेगा। ताकि सत्तारूढ पार्टी के बडे नेताओं में समन्वय रहे। यदि भाजपा की सरकार बनती है तो सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम बनेंगे, इसमें एक दलित वर्ग से भी पार्टी के एक बडे नेता को संतुष्ट किया जायेगा। वहीं कांग्रेस की सरकार बनती है तो ग्वालियर-चंबल या विंध्य, अंचल के एक बडे नेता को अब डिप्टी सीएम बनाना तय है। यह नेता कमलनाथ की पिछली सरकार में भी पावरफुल मंत्री रहे थे।कुल मिलाकर दोनों ही पार्टियां अब अंदर ही अंदर नाराजगी रोकने के लिये डिप्टी सीएम के फार्मूले पर काम कर रही है।

वोटिंग के बाद भाजपा के बडे नेता व मंत्री पूजा पाठ में तल्लीन.

After voting, senior leaders and ministers of the BJP were immersed in prayer. उदित नारायणभोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की वोटिंग के बाद प्रदेश के एक दर्जन मंत्री और भाजपा के बडे नेता पूजा पाठ में लगे हैं । इन्हें विश्वास है कि उनकी पूजा पाठ से नैया पार लग जायेगी। यह मंत्री और बडे नेता धार्मिक स्थानों पर निकल गये हैं, तो कुछ अज्ञात वास पर हैं। जहां नियमित तौर पर अपने धार्मिक सलाहकारों की सलाह से पूजा पाठ में लगे हैं।कुल मिलाकर भाजपा की सरकार के मंत्री व बडे नेता मध्यप्रदेश में हुई बम्पर वोटिंग से मन ही मन घबरा रहे हैं, और अपने सलाहकारों की सलाह पर परिणाम अपने पक्ष में आने की संभावना पर धार्मिक स्थलों के दर्शन भी कर रहे हैं। स्वयं मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पांचवी बार सरकार के रिपीट की संभावना पर पूजा पाठ कर रहे हैं। उन्होंने भी कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन किये हैं। कुल मिलाकर अब राज्य की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री , मंत्री व भाजपा के बडे नेता चुनावी घमासान में वोटर रूपी भगवान की मान मनोब्बल करने के बाद अब देव मंदिरों व देव आराधना की शरण में हैं। विशेष बात यह है कि इन सभी ने अपनी दिनचर्या भी पंडितों व ज्योत्षियों के बताई सलाह पर कर ली है। राज्य के एक बडे मंत्री तो एक वास्तु विशेषज्ञ की सलाह भी ले रहे है। वैसे यह सभी कवायद चुनाव जीतने के लिये ही है। वहीं एक भाजपा कार्यकर्ता का तो यह कहना है कि यदि कार्यकर्ताओं की पूछ परख की होती तो इतनी चकल्लस ही क्यों करनी पडती।कांग्रेसी भी पूजा पाठ के सहारे राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा को कडी टक्कर देने वाली कांग्रेस के नेता व प्रत्याशी भी अपनी जीत के लिये विभिन्न मंदिरों में मत्था टेक रहे हैं। किसी ने अपने घर अखंड रामायण तो किसी ने सुंदरकांड तक के आयोजन कराये हैं। स्वयं कमलनाथ भी अपने एक ज्योतिष व धार्मिक सलाहकार की सलाह से चल रहे हैं।

राज्यसभा में MP की 5 सीटों का नंबर गेमः कौन किस पर भारी

The number of seats for Members of Parliament (MP) in the Rajya Sabha is 5. मौजूदा 4 सीटों को बचाने भाजपा को चाहिए 152 विधायक; अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल मध्यप्रदेश में 3 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे। इन नतीजों से दो सवालों का जवाब मिलेगा। मध्यप्रदेश में किस पार्टी की सरकार बनेगी?अप्रैल 2024 में खाली हो रही राज्यसभा की 5 सीटों में से कितनी-किस पार्टी के खाते में जाएंगी। एमपी के 11 में से 5 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल 2 अप्रैल को खत्म हो रहा है। इनमें से 4 सीटें भाजपा जबकि 1 कांग्रेस के पास है। भाजपा को यदि यह आंकड़ा बरकरार रखना है तो विधानसभा में उसे 152 सीटें जीतना होंगी क्योंकि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए न्यूनतम 38 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। राज्यसभा सांसद का चुनाव तय फॉर्मूले के तहत होता है। इसके मुताबिक, जिस पार्टी के पास विधायकों की संख्या अधिक होती है, उस पार्टी के उम्मीदवार की जीत तय होती है। पहले जानिए, कैसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया अन्य चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। व्हिप के उल्लंघन से खत्म हो सकती है सदस्यता राज्यसभा चुनाव में लोकसभा और विधानसभा की तरह गुप्त मतदान नहीं होता है। राज्यसभा सांसद के नाम के आगे एक से चार तक का नंबर लिखा होता है। विधायकों को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। राज्यसभा सदस्य के चुनाव के लिए राजनीतिक दल रिक्त सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने के साथ अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हैं। यदि किसी विधायक ने व्हिप का उल्लंघन कर पार्टी प्रत्याशी को वोट नहीं दिया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। नियमानुसार पार्टी विधानसभा सचिवालय को ऐसे विधायक की लिखित शिकायत करती है तो जांच के बाद उसकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है। किस फॉर्मूले से तय होती है जीत? राज्यसभा चुनाव के लिए एक फॉर्मूले का उपयोग किया जाता है। इसमें कुल विधायकों की संख्या को 100 से गुणा किया जाता है। इसके बाद राज्य में जितनी राज्यसभा की सीटें हैं, उसमें एक जोड़ कर भाग दिया जाता है। इसके बाद कुल संख्या में एक जोड़ा जाता है। फिर अंत में जो संख्या निकलती है, वह जीत का आंकड़ा होता है। 2020 में भाजपा ने ऐसे पलट दिया था नंबर गेम 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हुआ था। भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया था जबकि दिग्विजय सिंह और फूल सिंह बरैया ने कांग्रेस की तरफ से नामांकन भरा था। इस चुनाव से तीन महीने पहले सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने 10 मार्च 2020 को विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मौजूदा विधायकों की कुल संख्या 206 रह गई थी क्योंकि 2 विधानसभा सीटें मुरैना जिले की जौरा और आगर-मालवा की आगर सीट विधायकों के निधन के बाद खाली थी।इस हिसाब से राज्यसभा के एक प्रत्याशी को कम से कम 52 वोट चाहिए थे। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा के दो उम्मीदवार- ज्योतिरादित्य सिंधिया (56 वोट) और डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी (55 वोट) जीतने में कामयाब हुए थे। कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह (57 वोट) ही जीत दर्ज कर सके थे। दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को केवल 38 वोट मिले थे। 5 विधायकों ने भी बदल लिया था पाला 2018 विधानसभा चुनाव के बाद बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कमलनाथ सरकार ने बहुमत का आंकड़ा पार किया था। इस चुनाव में कांग्रेस को 114 और भाजपा को 109 सीटें मिली थीं लेकिन 19 जून 2020 को राज्यसभा की 3 सीटों पर हुए चुनाव से ठीक पहले बसपा के दो, सपा का एक और 2 निर्दलीय विधायकों ने पाला बदल लिया था। जिसका फायदा भाजपा को हुआ था। दिग्विजय को तीन वोट ज्यादा मिले थे 3 सीटों के चुनाव में भाजपा को दो वोटों का नुकसान हुआ था। गुना से भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की जगह क्रॉस वोटिंग की थी। सुमेर सिंह सोलंकी के पक्ष में दिया गया भाजपा विधायक जुगल किशोर बागरी का वोट निरस्त हो गया था। 3 सीटों पर चुनाव से ठीक एक दिन पहले 18 जून 2020 को कमलनाथ के निवास पर एक बैठक हुई थी। इसमें तय किया गया था कि दिग्विजय सिंह को 54 विधायक वोट देंगे लेकिन उन्हें 57 वोट मिले। यानी जिन तीन विधायकों को दूसरे प्रत्याशी फूल सिंह बरैया को वोट देना था, उन्होंने दिग्विजय सिंह को वोट दे दिया था। से ओबीसी, दलित और महिला वर्ग को साधा था। दरअसल, राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी की राजनीति में ओबीसी एक बड़ा मुद्दा बन गया था। ओबीसी आरक्षण की वजह से पंचायत और निकाय चुनाव टल गए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। कोर्ट के दखल के बाद निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का रास्ता साफ हुआ था। प्रदेश में ओबीसी वोटरों की आबादी 50 फीसदी से अधिक है। बीजेपी ने कविता पाटीदार के नाम की घोषणा कर एक बड़ा ओबीसी कार्ड खेला था। इसी तरह सुमित्रा वाल्मीकि को राज्यसभा में भेजकर दलित वर्ग को साधने की कोशिश की थी। जानकार कहते हैं कि यदि भाजपा फिर दलित, ओबीसी और महिला कार्ड खेलती है तो उसे मिशन 2024 में भी बड़ा फायदा होगा।

नए साल में पाटिल होंगे वन विभाग के नए मुखिया, दिसंबर में हो रही है गुप्ता की विदाई.

In the new year, Patil will be the new chief of the Forest Department, and Gupta’s farewell is scheduled for December. डॉ श्रीवास्तव लघु वनोपज संघ और यादव होंगे वन विकास निगम नए एमडी उदित नारायणभोपाल. नए साल में वन विभाग में कई नए बदलाव होने जा रहें है। ये सभी बदलाव नई सरकार के गठन के बाद होने की संभावना है। मौजूदा वन बल प्रमुख आरके गुप्ता और लघु वनोपज संघ के एमडी पुष्कर सिंह दिसम्बर में सेवानिवृत होने जा रहें है। सूत्रों के अनुसार वर्तमान वन विभाग के हॉफ गुप्ता के सेवानिवृत्ति के बाद वन विकास निगम के एमडी एके पाटिल वन बल प्रमुख होंगे। हालांकि उनका कार्यकाल एक महीने का ही होगा। इसी प्रकार लघु वन वनोपज संघ एमडी पुष्कर सिंह के रिटायरमेंट के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ अतुल कुमार श्रीवास्तव नए एमडी होंगे। वर्तमान में डॉक्टर श्रीवास्तव वर्किंग प्लान शाखा के प्रमुख हैं। गौरतलब यह है कि अभी तक विभाग में हुई पदस्थापना के दौरान डॉक्टर श्रीवास्तव की वरिष्ठता अनदेखी की गई। इसी कारण संभावना जताई जा रही है की नई सरकार में उनकी पदस्थापना वरिष्ठता के आधार पर होगी। निगम के मौजूदा एमडी पाटिल के वन बल प्रमुख बनने पर पीसीसीएफ प्रशासन -एक के आरके यादव को निगम में एमडी के पद पर पदस्थ किए जाने की संभावना है। कैडर में पीसीसीएफ का पद प्रशासन-एक का नहीं है। कैडर में यह पद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के लिए निर्धारित है। डॉ श्रीवास्तव के संघ में चले जाने पर वर्किंग प्लान शाखा का प्रभार पीसीसीएफ जेएफएम पीके सिंह को दिया जा सकता है। फरवरी में अम्बाडे होंगे पीसीसीएफ वन्य प्राणीपाटिल के जनवरी में रिटायर होने पर पीसीसीएफ वन्य प्राणी असीम श्रीवास्तव वन बल प्रमुख बनेंगे और उनकी जगह पर 88 बैच के आईएफएस विजय एन अम्बाडे पीसीसीएफ वन्य प्राणी होंगे. विभाग में अम्बाडे की छवि वन्य प्राणी विशेष के रूप में बनी हुई है। अनूपपुर डीएफओ पर गिर सकती है गाजअनूपपुर डीएफओ सुशील प्रजापत पर गाज गिरने की संभावना प्रबल हो गई है। महिला कर्मचारियों के साथ बदसलूकी और खरीदी में गड़बड़ी संबंधित जांच रिपोर्ट प्रशासन-एक को मिल गई है। पीसीसीएफ प्रशासन एक शाखा ने आरोप पत्र तैयार कर लिए है। शीघ्र ही उन्हें जारी किया जा रहा है। डीएफओ प्रजापत के खिलाफ जांच वन संरक्षक शैलेंद्र गुप्ता ने की थी। सूत्रों ने बताया कि जांच प्रतिवेदन में उन्हें दोषी करार दिया गया है। इस बीच डीएफओ द्वारा वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ बदसलूकी का सिलसिला जारी है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने सीहोर के मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का किया निरीक्षण

मतगणना की तैयारियों का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लिया जायजा

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी, शिवपुरी की घटना पर मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

मंत्री सुरेश राठखेड़ा की मुश्किलें बढ़ी

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजन ने सीहोर के मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का किया निरीक्षण

Chief Election Officer Rajan inspected the polling station and the strong room in Sehore. मतगणना की तैयारियों का मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने लिया जायजा साकिब कबीरभोपाल। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश अनुपम राजन ने सीहोर जिले के शासकीय महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज पहुँचकर विधानसभा निर्वाचन-2023 के अंतर्गत आगामी 3 दिसंबर को जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए होने वाली मतगणना के लिए की जा रही तैयारियों का अवलोकन किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी प्रवीण सिंह ने मतगणना के लिए की जा रही व्यवस्थाओं और तैयारियों के बारे में विस्तार से अवगत करवाया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने विधानसभावार बनाए गए मतगणना कक्षों में जाकर तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही डाक मतपत्रों की गणना के लिए की जा रही तैयारियों, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को भी देखा। उन्होंने मतगणना टेबिले, मतगणना कार्य में संलग्न अमले की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, डाक मतपत्रों की संख्या आदि के बारे में जानकारी ली। साथ ही मतगणना स्थल परिसर में रूके हुए निर्वाचन अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों से चर्चा की तथा सीसीटीवी के माध्यम से कक्ष से ही स्ट्रांग रूम की मॉनीटरिंग संबंधी व्यवस्था को देखा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन मतगणना व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आए तथा आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने निर्देश दिए कि विधानसभा निर्वाचन-2023 की मतगणना 3 दिसम्बर को सुबह 8 बजे से पोस्टल बैलेट की गिनती के साथ शुरू होगी। सुबह 8:30 बजे से ईव्हीएम में दर्ज मतों की गणना प्रारंभ होगी। उन्होंने मतगणना के दिन विद्युत की सतत् आपूर्ति हो और किसी भी वजह से मतगणना कार्य प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मतगणना स्थल पर सभी व्यवस्थाएँ सुचारू तरीके से उपलब्ध रहें। श्री राजन ने मतगणना स्थल के निरीक्षण के पश्चात कलेक्ट्रेट में कोषालय के स्ट्रांग रूम का अवलोकन कर डाक मतपत्र की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की। श्री राजन ने ईवीएम के लिए बनाए गए वेयर हाउस का भी निरीक्षण किया तथा निर्वाचन के पश्चात ईवीएम के रखने के लिए की गई व्यवस्थाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान एसपी मयंक अवस्थी, जिला पंचायत सीईओ आषीश तिवारी, सहायक कलेक्टर अर्पित गुप्ता, अपर कलेक्टर वृंदावन सिंह तथा एएसपी गीतेश गर्ग सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

पार्टियों ने काटा टिकट, तो विधानसभा सचिवालय ने कहा, बंगला खाली करो

Parties have issued tickets, so the Legislative Assembly Secretariat has said, Vacate the bungalow. छिनेगा यशोधरा राजे से बंगला, चुनाव नहीं लड़ने वाले विधायकों को नोटिस, विधानसभा सचिवालय ने 30 बेटिकट विधायकों को भेजा पत्र भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में दोनों बड़ी पािर्टयों भाजपा और कांग्रेस ने इनकमवेंशी के कारण लगभग ढाई दर्जन के क्या टिकट काट दिए कि अब उनका बंगला भी छिनने वाला है। यानि इधर पार्टियों ने टिकट काटा, तो उधर, जैसे लोकसभा में राहुल गांधी का बंगला िछनने की जल्दबाजी की गई, उसी तरह विधानसभा सचिवालय ने भी बेटिकट वाले माननीयों को बंगला खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इससे इन माननीयों की भोपाल में रहने को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पूरा हो चुका है। अब तीन दिसंबर को मतगणना होनी है। जिसमें 16वीं विधानसभा के सदस्यों के नाम सामने आ जाएंगे। नई विधानसभा सदस्यों को आवास उपलब्ध कराने के लिए विधानसभा सचिवालय ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। इसके लिए सचिवालय ने उन विधानसभा सदस्यों को नोटिस जारी कर दिया है, जो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। ऐसे भाजपा और कांग्रेस के 30 वर्तमान विधायकों को नोटिस देकर आवास खाली करने को कहा गया है। हालांकि वर्तमान विधायक नई विधानसभा के गठन तक आवास में रह सकते हैं। नए विधायकों को लेकर टेंशन में विधानसभा सचिवालय नए विधायकों के जीतने के बाद उन्हें भोपाल में सरकार द्वारा आवास मुहैया कराया जाता है। इसको लेकर विधानसभा सचिवालय ने राज्य सरकार को भी पत्र लिखा है। इसमें नए विधायकों के चुन कर आने पर उनके लिए गेस्ट हाउस और रेस्ट खाली रखने को कहा गया है। इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से भी विभिन्न विभागों को लिखा गया है।

कर्ज में डूबा मध्यप्रदेश, जो सत्ता में आएगा, करोड़ों का कर्ज मिलेगा विरासत में।

Madhya Pradesh will inherit debts in the millions when it comes to power. मनीष त्रिवेदीभोपाल, मध्यप्रदेश में इस बार तीन दिसंबर को जिसकी भी सरकार बनती है, उसे करोड़ों का कर्ज विरासत में मिलेगा। क्योंकि प्रदेश सरकार पर करोड़ों के कर्ज हैं। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि जिसकी भी सरकार बनती है उसने जो जनता से वादे किए हैं वह कैसे पुरे होंगे? फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. प्रदेश के हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. सरकारी खजाने से साल का 20 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है. मध्यप्रदेश शासन का वित्तीय वर्ष 2023-24 का बजट 3.14 लाख करोड़ रुपए का है. इसका तकरीबन 26.2% हिस्सा वेतन, भत्ते और ब्याज की अदायगी में ही चला जाता है. अकेले वेतन-भत्ते को देखें तो वित्तीय वर्ष खत्म होने तक 56 हजार 314 हजार करोड़ रुपये से अधिक इस पर खर्च होंगे. यह बजट का 18.64% होता है. वहीं, पेंशन पर बजट का 18 हजार 636 करोड़ रुपए यानी 6.17% और ब्याज पर 22 हजार 850 करोड़ रुपये यानी 7.56% खर्च होगा. मौजूदा फाइनेंसियल बजट के मुताबिक सरकार की आमदनी 2.25 लाख करोड़ है और खर्च इससे 54 हजार करोड़ है. अब नई सरकार को वर्तमान बजट से अधिक राशि की आवश्यकता होगी. मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के परिणाम 3 दिसंबर को आने हैं. मतदान के बाद सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस की ओर से सरकार बनाने का दावा किया जा रहा हैं. हालांकि,वोटर का फैसला 3 दिसम्बर को आएगा लेकिन सूबे में सरकार किसी भी पार्टी की बने, उसे विरासत में खाली खजाना मिलेगा. फिलहाल सरकार के ऊपर 3.85 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है. साफ है कि नई सरकार के लिए खस्ताहाल खजाने से अपनी लोक-लुभावन चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए बड़ी चुनौती सामने आने वाली है. जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार सालाना 20 हजार करोड़ रुपए ब्याज देती है. जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य के पास नए टैक्स लगाने की गुंजाइश बेहद सीमित रह गई है. ऐसे में सरकार किसी भी बने, उसके लिए अर्थव्यवस्था को गतिमान बनाए रखने के साथ वित्तीय प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी. अभी मध्यप्रदेश सरकार पर जितना कर्ज है, उस लिहाज से देखा जाए तो हर नागरिक पर 47 हजार रुपए का कर्ज है. वित्तीय जानकार बताते है कि पिछले 23 सालों में प्रति व्यक्ति कर्ज 42000 बढ़ गया है. साल 2001-02 में प्रदेश पर 23 हजार करोड़ रुपए का कुल कर्ज था. जनसंख्या के हिसाब से प्रतिव्यक्ति बमुश्किल 3,500 हजार रुपए का कर्ज था. दरअसल, 31 मार्च 2023 को खत्म वित्तीय वर्ष में सरकार पर 3.31 लाख करोड़ का कर्ज था, जो 2023-24 के अंत तक 3.85 लाख करोड़ रुपए हो गया.

नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव आयोग में दर्ज कराई शिकायत

The opposition leader filed a complaint with the Election Commission. भिंड कलेक्टर के खिलाफ लगाए आरोप, मैं सात बार से लगातार कैसे जीत रहा हूं साजिश करते हुए जानबूझकर लहार विधानसभा में अधिकारी कर्मचारियों को वोटिंग से वंचित रखा. Udit Narayan – Sahara Samachaar भोपाल। मप्र के नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह ने मुख्य निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को हटाए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा वे मेरी जीत का कारण पूछते हैं। वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से पूछते हैं कि मैं सात बार से लगातार कैसे जीत रहा हूं। सिंह ने भिंड कलेक्टर पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं।नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचा था। यहां उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन से मुलाकात भिंड कलेक्टर को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई। गोविंद ने इस संबंध में चुनाव आयोग में ज्ञापन भी सौंपा। उनका कहना है कि संजीव श्रीवास्तव के रहते लहार विधानसभा में निष्पक्ष काउंटिंग नहीं हो पाएगी। वे भाजपा का एजेंट बनकर काम कर रहे हैं। इसीलिए कलेक्टर श्रीवास्तव को हटाया जाए। नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि भिंड कलेक्टर ने साजिश करते हुए जानबूझकर लहार विधानसभा में अधिकारी कर्मचारियों को वोटिंग से वंचित रखा। उन्होंने कहा कि कलेक्टर ने डाक मत पत्रों को कोषालय में जमा भी नहीं कराया गया। इतना ही मतदान दिवस पर कलेक्टर के आदेश पर मतदाताओं को प्रताड़ित किया गया, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग वोट नहीं कर पाए। कांग्रेस एजेंट्स को कलेक्टर ने मतदान केंद्र के बाहर बैठाए रखा और फर्जी मतदान करवाया गया। उन्होंने कहा कि भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को सीनियर आईएएस का संरक्षण प्राप्त है और यह सब कुछ उनके ही इशारे पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले ही उन्होंने सीएस को हटाने के लिए मांग उठाई थी।

बागियों ने अपनों की बढ़ाई मुश्किलें, त्रिकोणीय से भाजपा-कांग्रेस में टेंशन.

Tensions arise between BJP and Congress in triangular. दो दर्जन सीटों पर फसा पेंच, कहीं बागी भाजपा का खेल बिगाड़ रहे हैं तो कहीं कांग्रेस का. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर 17 नवंबर को मतदान होने के बाद 3 दिसंबर के परिणाम पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। वैसे तो प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला बताया जा रहा है, लेकिन इस बार बसपा, सपा के साथ ही बागी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यह बागी कहीं भाजपा का खेल बिगाड़ रहे हैं तो कहीं कांग्रेस का। ऐसी करीब दो दर्जन सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी की धड़कनें बढ़ी हुई हैं तो वहीं, दोनों ही राजनीतिक दलों की टेंशन भी बढ़ गई है। बीएसपी ने 181 और निर्दलीय 1166 प्रत्याशी मैदान मेंबहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने इस चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के साथ गठबंधन किया है। बीएसपी ने 181 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 37 प्रत्याशी उतारे हैं। इसके अलावा प्रदेश में समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, जन अधिकार पार्टी, जनता दल यूनाइटेड पार्टी चुनाव मैदान में है। 2018 के चुनाव में बीएसपी को 6.42 प्रतिशत वोट मिले थे और दो सीटों पर जीत हासिल की थी। पिछली बार भाजपा को 109 और कांग्रेस को 114 सीटों पर विजय मिली थी। बागियों के कारण इन सीटों पर फसा पेंच राजनगर :छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा में भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे डॉ. घासीराम पटेल बागी होकर बसपा से चुनावी मैदान हैं। उनके मैदान में आने से इस विधानसभा का चुनाव पूरी तरह से त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की मुश्िकल में फंसे हुए हैं। यहां अभी कांग्रेस के नाती राजा विधायक हैं। टीकमगढ़ :टीकमगढ़ विधानसभा शहरी क्षेत्र में है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का हर चुनाव में यहां खासा असर दिखाई देता है। इस बार भाजपा के विधायक राकेश गिरी गोस्वामी को उन्हीं की पार्टी के पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव बागी होकर कड़ी टक्कर दे रहे हैं। नर्मदापुरम :यहां पर भाजपा से बागी भगवती चौरे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी सीताशरण शर्मा को इससे नुकसान हो सकता है। इस सीट पर कांग्रेस से सीताशरण शर्मा के भाई गिरजाशंकर शर्मा प्रत्याशी हैं। भगवती चौरे के निर्दलीय चुनाव लड़ने से इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय और दिलचस्प हो गया है। सतना :भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष और भाजयुमो के दो बार सतना जिला अध्यक्ष रहे चुके रत्नाकर चतुर्वेदी शिवा बसपा से चुनाव मैदान में हैं। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने बसपा की सदस्यता ले ली थी। यहां पर भाजपा ने चार बार के सांसद गणेश सिंह और कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाह मैदान में हैं। बुरहानपुर :भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्षवर्धन सिंह चौहान निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा ने पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस की तरफ से विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा प्रत्याशी हैं। सीधी :भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर सीधी सीट पर विधायक केदारनाथ शुक्ला निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इससे भाजपा प्रत्याशी रीति पाठक को नुकसान हो सकता है। यहां पर कांग्रेस की तरफ से ज्ञान सिंह प्रत्याशी हैं। मुरैना :भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह के बेटे राकेश सिंह बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा से रघुराज कंसाना और कांग्रेस से दिनेश गुर्जर प्रत्याशी हैं। टीकमगढ़ :भाजपा से पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव टीकमगढ़ में निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा ने वर्तमान विधायक राकेश सिंह और कांग्रेस ने यादवेंद्र सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया है। भिंड :बसपा से चुनाव जीत कर भाजपा में शामिल होने पर संजीव कुशवाह ने मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर कुशवाह बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा से नरेंद्र सिंह कुशवाह और कांग्रेस से चौधरी राकेश चतुर्वेदी मैदान में हैं। सुमावली :कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप सिंह सिकरवार बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा से एंदल सिंह कंसाना और कांग्रेस से अजब सिंह कुशवाह को टिकट दिया है। चाचौड़ा :भाजपा से पूर्व विधायक ममता मीणा आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ रही हैं। यहां पर कांग्रेस से विधायक लक्ष्मण सिंह प्रत्याशी हैं। वहीं, भाजपा ने प्रियंका मीणा को प्रत्याशी बनाया है। धार :पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष राजीव यादव पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर भाजपा ने विधायक नीना विक्रम वर्मा और कांग्रेस ने प्रभा गौतम को प्रत्याशी बनाया है। डॉ. अंबेडकर महू :कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व विधायक अंतरसिंह दरबार महू से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर कांग्रेस ने राम किशोर शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है। जबकि भाजपा की तरफ से वर्तमान विधायक उषा ठाकुर हैं। परसवाड़ा :बालाघाट की परसवाड़ा सीट पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक कंकर मुंजारे के चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां पर भाजपा की तरफ से रामकिशोर कांवरे और कांग्रेस ने मधु भगत प्रत्याशी हैं। सिरमौर :सिरमौर विधानसभा सीट पर पूर्व डीएसपी वीडी पांडे ने मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है। यहां पर भाजपा से दिव्यराज सिंह और कांग्रेस से रामगरीब कोल प्रत्याशी हैं। रैगांव :बसपा प्रत्याशी देवराज अहिरवार ने रैगांव में मुकाबला रोचक कर दिया है। यहां पर कांग्रेस की तरफ से विधायक कल्पना वर्मा और भाजपा की तरफ से प्रतिमा बागरी प्रत्याशी है। नागौद :कांग्रेस से टिकट कटने पर यहां पर पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह बीएसपी से चुनाव लड़ रहे हैं। यहां पर कांग्रेस ने डॉ. रश्मि सिंह पटेल और भाजपा ने नागेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया है। देवतालाब :यहां पर समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रही सीमा जयवीर सेंगर से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां पर भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और कांग्रेस ने पद्ममेश गौतम को टिकट दिया है। सीमा जयवीर सेंगर 2018 में बसपा से चुनाव लड़ कर दूसरे नंबर पर थी।

वन विभाग में चल रहा जंगलराज – हरियाली बढ़ाने के बजाय 10 हजार पौधों को फेंका.

Jungle Raj is prevailing in the Forest Department – instead of promoting greenery, 10 thousand saplings were thrown away. जेसीबी से मिट्टी और खाद नालों में डाली, एसडीओ ने रिपोर्ट में दस्तावेज और फोटो दिए, फिर भी डीएफओ ने कोई एक्शन नहीं लियाThe Soil and Fertilizers were added, and the SDO provided documentation and photos in the report. District Forest Officer (DFO) did not take any action. उदित नारायणभोपाल। मध्य प्रदेश में वन विभाग के अंदर जंगलराज पूरी तरह से फैल चुका है। हरियाली को बढ़ाने के लिए लाए गए करीब दस हजार पौधों जंगल में फेंकने का कारनामा उजागर हुआ है। जूनियर अधिकारी की रिपोर्ट के बाद भी वृक्षारोपण में बरती गई। इस लापरवाही पर कोई एक्शन नहीं हुआ है। ताजा मामला खरगोन जिले के भीकनगांव का है। खरगोन के इस मामले में भी बार-बार एसडीओ की रिपोर्ट पर डीएफओ ने अब तक कार्रवाई नहीं की है। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में दस्तावेज और फोटो संलग्न किए हैं, बावजूद इसके डीएफओ ने कोई एक्शन नहीं लिया है। वृक्षारोपण में गड़बड़ी का मामला खरगोन वन मंडल के भीकनगांव रेंज का है। एसडीओ ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि 10 हजार से अधिक पौधे जंगल में फेंक दिए गए जिनका प्लांटेशन नहीं किया गया। यही नहीं प्लांटेशन के लिए खोदे गए गड्ढे के पास खाद और मिट्टी का ढेर लगा हुआ है। इसकी तस्वीर भी एसडीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में डीएफओ को भेजी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फर्जी और घटिया काम के प्रमाणकों को पास करने के लिए दबाव बनाया जाता है। वृक्षारोपण के लिए गड्ढों में मिट्टी परिवर्तन और खाद भी नहीं डाला गया है। जेसीबी से मिट्टी और खाद नालों में फेंके गए हैं। इस मुद्दे को लेकर वन विभाग के अफसरों ने चुप्पी साध ली। सूत्रों का कहना है कि खरगोन डीएफओ प्रशांत कुमार जब सागर दक्षिण में पदस्थित है तब वनीकरण क्षतिपूर्ति के तहत किए गए वृक्षारोपण में भी इसी तरीके की धांधली पाई गई थी। ऐसी गड़बड़ी के चलते उनके खिलाफ विभाग की जांच अभी भी चल रही है। इसके बाद भी खरगोन में वृक्षारोपण की गड़बड़ी पर उनकी लापरवाही बनी हुई है।

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