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मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राजन ने रायसेन में मतगणना स्थल का निरीक्षण कर तैयारियों का लिया जायजा.

Chief Election Officer Rajan inspected the polling booth in Raisen and assessed the preparations for the upcoming election. साकिब कबीरभोपाल । मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश अनुपम राजन ने बुधवार को भोपाल संभाग के रायसेन में शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज पहुंचकर विधानसभा निर्वाचन-2023 अंतर्गत आगामी 3 दिसंबर को जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों के लिए होने वाली मतगणना हेतु की जा रही तैयारियों का अवलोकन किया । मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अरविंद दुबे ने मतगणना के लिए की जा रही व्यवस्थाओं और तैयारियों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने विधानसभावार बनाए गए मतगणना कक्षों में जाकर तैयारियों का जायजा लिया। साथ ही डाक मतपत्रों की गणना के लिए की जा रही तैयारियों, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को भी देखा। उन्होंने मतगणना टेबिले, मतगणना कार्य में संलग्न अमले की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, डाक मतपत्रों की संख्या आदि के बारे में जानकारी ली। बाद में उन्होंने कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। साथ ही मतगणना स्थल परिसर में रूके हुए निर्वाचन अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों के कक्ष में जाकर उनसे चर्चा की तथा सीसीटीवी के माध्यम से कक्ष से ही स्ट्रांग रूम की मॉनीटरिंग संबंधी व्यवस्था को देखा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन मतगणना व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आए तथा आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। श्री राजन कम्पोजिट भवन में जिला कोषालय पहुंचे तथा यहां बने डबल लॉक कक्ष में रखे गए सांची विधानसभा के डाक मतपत्रों की जानकारी ली। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था का भी अवलोकन किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राजन ने निर्देश दिए कि विधानसभा निर्वाचन-2023 की मतगणना 3 दिसम्बर को सुबह 8 बजे से पोस्टल बैलेट की गिनती के साथ शुरू होगी। सुबह 8:30 बजे से ईव्हीएम में दर्ज मतों की गणना प्रारंभ होगी। मतगणना के दिन विद्युत की सतत् आपूर्ति हो और किसी भी वजह से मतगणना प्रभावित न हो, यह सुनिश्चित करें। मतगणना स्थल पर सभी व्यवस्थाएँ सुचारू तरीके से उपलब्ध रहें। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक विकास शहवाल तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।

कलेक्टर ने पेट्रोल पंपों का औचक निरीक्षण कर पीयूसी जाँच की व्यवस्था का किया अवलोकन.

Collector conducted an inspection of petrol pumps and reviewed the arrangements for checking the quality of petrol and diesel. होशंगाबाद रोड पर चल रही वाहनों के प्रदूषण जाँच का किया औचक निरीक्षण, पीयूसी न पाये जाने पर होगी चालानी कार्यवाही. भोपाल के बिगड़ते AQI स्तर को देखते हुए वाहनों के प्रदूषण स्तर की जाँच के दिये निर्देश साकिब कबीर – Sahara Samachaarभोपाल। कलेक्टर आशीष सिंह ने बुधवार को 5 नंबर स्थित दुर्गा पेट्रोल पंप एवं पॉलीटेक्निक स्थित पेट्रोल पंप पर पीयूसी जाँच की व्यवस्था का अवलोकन किया। उन्होंने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को उनके पंप पर पीयूसी की जाँच व्यवस्था रखने के निर्देश दिए है। भोपाल शहर के बढ़ते प्रदूषण स्तर के मद्देनज़र कलेक्टर ने वाहनों के प्रदूषण स्तर की जाँच करने एवं पीयूसी न होने की स्थिति में चालानी कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। इस दौरान एडीएम श्री हरेन्द्र नारायण, आरटीओ, पॉल्युशन कंट्रोल के अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री सिंह के निर्देश के बाद से वाहनों के प्रदूषण स्तर की जाँच की जा रही है। कमर्शियल वाहनों में पीयूसी न होने पर चालानी कार्यवाही की जाएगी, जिसके अंतर्गत 5000 तक के चालन का प्रावधान है। इसी के साथ प्रायवेट वाहनों को पीयूसी कराने 15 दिनों का समय दिया जा रहा है, इसके बाद इन पर भी चालानी कार्यवाही की जायेगी। भोपाल शहर के बिगड़ते AQI स्तर को देखते हुए की जा रही कार्यवाही। इसी के साथ कलेक्टर आशीष सिंह ने मिसरोद, होशंगाबाद रोड पर चल रही वाहनों के प्रदूषण स्तर की जाँच का औचक निरीक्षण भी किया और जाँच की टेक्निकलिटी समझी। उन्होंने निर्देश दिए कि वाहनों के पीयूसी की जाँच निरंतर जारी रखी जाए एवं पीयूसी न पाये जाने पर उचित कार्यवाही की जाए।

बीटीआर में टिकट की कालाबाजारी से अधिकारियों की दिवाली

The corruption in the purchase of tickets in the BTR is a celebration for the officials more than Diwali. उदित नारायण बांधवगढ़:- टाइगर रिजर्व में स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाले पड़े हैं, और यहां अधिकारियों की जमकर कमाई का आरोप लगा है। स्थानीय जनों में पर्यटकों के टिकट के कालाबाजारी का चर्चा जोरों पर है। विभाग के कर्मचारियों के ऊपर चहेतों और पूंजीपतियों के दबाव में टिकट का बड़ा खेल किया जा रहा है, लेकिन कार्यवाही के नाम पर मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चुप्पी साध रखी है। लिहाजा स्थानीय जनों की माने तो उनके अनुसार टिकट के कालाबाजारी के इस खेल में नीचे से ऊपर तक कि कड़ी के संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, जिसका खामियाजा दूर से आने वाले सैलानियों को उठाना पड़ता है और बांधवगढ़ की सफारी का सपना बुनकर आने वाले पर्यटक बगैर सैर के ही वापस लौट जाते हैं। वीआईपी टिकट के नाम पर किये जाने वाले इस कारनामे ने बीटीआर की समूची व्यवस्था ही चौपट कर दी है। कारनामे का कौन है जिम्मेदार – बांधवगढ़ में कई पूंजीपतियों के रिसोर्ट हैं, साथ ही कई बड़े  पहुंच का दम भरने वाले वे लोग भी जो टिकट बुकिंग का काम करते हैं। दिवाली की इस भीड़ में जहां लोगों को सफारी के लिए मसक्कत करनी पड़ रही थी, तो वहीं उक्त लोग टिकट का जुगाड़ बीटीआर के कर्मचारियों के सह पर बना रहे थे। बांधवगढ़ में इससे पूर्व भी टिकट के कालाबाजारी के कारनामे से पर्दा उठ चुका है, लेकिन टिकट का खेल ज्यों का त्यों अभी भी जारी है। सूत्रों के मुताबिक़ वीआईपी के नाम पर टिकट की बुकिंग कर गाढ़ी कमाई की जा रही है, इसमें बीटीआर के कई अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। यही नहीं हर विभाग के जिम्मेदार मिलकर राजस्व को चुना लगाने में जुटे हैं, वहीं सैलानियों को भी सफारी के लिए कई कठिनाईयों से गुजरना पड़ता है। अफसर ही लूट के कटघरे में – पूंजीपति रिसोर्ट सञ्चालक अपने रसूख के बल पर टिकट तो बुक कर लेते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर सक्रीय कुछ दलाल बड़े अधिकारी और वीआईपी के नाम पर टिकट लेकर महंगे दामों में पर्यटकों को सफारी करा रहे हैं। यही नहीं कई वर्षों से एक ही स्थान पर जमें स्थानीय शासकीय विभागों के कर्मीयों पर भी टिकट कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं, इन कर्मियों द्वारा शासकीय प्रोटोकॉल वाहनों को भी पर्यटक सफरी के लिए उपयोग कर कमाई का जरिया बना लिया गया है। जिस तरह से व्यापक पैमाने पर अधिकारियों और अन्य वीआईपी के कोटे की टिकटों के नाम पर खेला किया जा रहा है उससे समूची व्यवस्था चौपट हो रही है साथ ही पर्यटन से मिलने वाले राजस्व की हानि भी हो रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि वीआईपी के नाम पर जितनी भी टिकट बुकिंग हुई है उनकी जांच कर दी जाए तो मामले में शामिल अधिकारियों और व्यक्तियों के नामों का खुलासा हो जाएगा।

कलेक्टर ने किया नेहरू नगर, रंगमहल, बागसेवनिया, दानिश एवं बिट्टन मार्केट चौराहों का निरीक्षण.

Collector inspected Nehru Nagar, Rangmahal, Bagsevaniya, Danish, and Bittan markets yesterday. ट्रैफिक जाम एवं अव्यवस्था से निजात पाने इन चौराहों का होगा चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण, चौराहों के अवैध अतिक्रमण हटाये जायेंगे। फ्री लेफ्ट टर्न का चलाया जायेगा अभियान, नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी को प्रक्रिया पूर्ण कर कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के दिये निर्देश. साकिब कबीरभोपाल: कलेक्टर आशीष सिंह ने मंगलवार की सुबह नेहरू नगर चौराहा, रंगमहल चौराहा, बागसेवनिया चौराहा, दानिश चौराहा एवं बिट्टन मार्केट चौराहा का निरीक्षण किया। इस दौरान नगर निगम आयुक्त फ़्रेंक नोबल ए, एडीएम श्री हरेन्द्र नारायण सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री सिंह ने निरीक्षण के बाद कहा कि इन चौराहों पर आये दिन ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है जिससे उत्पन्न अव्यवस्था के चलते कई बार हादसे भी देखे गये है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिये चौराहों का चौड़ीकरण किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने एवं जाम की समस्या से निजात पाने के लिये यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन चौराहों का सौंदर्यीकरण भी होगा। उन्होंने चौराहों के चौड़ीकरण में डिवाइडर एवं फ्री लेफ्ट टर्न को सुव्यवस्थित बनाने के निर्देश दिये जिससे ट्रैफिक का मूवमेंट व्यवस्थित रहे और जाम जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। इसके साथ ही चौराहों पर स्थित अवैध अतिक्रमण को भी हटाया जायेगा। कलेक्टर श्री सिंह ने संबंधित विभागों नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी को चौराहों के चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण के लिये की जाने वाली प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कर कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिये

सिर्फ वेबसाइट तक ही सिमटा कामकाज, शिवराज सरकार का आनंद विभाग.

Work of the Anand Department of the Shivraj government is confined only to the website. Manish Trivedi भोपाल: वर्ष 2016 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आनंद विभाग (Ministry of Happiness) के गठन को मंजूरी दी थी. मोटे तौर पर इसका मूल मकसद राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर मापकर उनका जीवन खुशहाल बनाने का प्रयास करना था. इसकी प्रेरणा मुख्यमंत्री चौहान को भूटान के राष्ट्रीय खुशहाली सूचकांक से मिली थी. इसलिए मध्य प्रदेश का एक ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ जारी करने की भी बात कही गई थी, जो राज्य की जनता में खुशहाली का स्तर बताता. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले उनके इस विभाग के कामकाज की गंभीरता का पता इससे भी चलता है कि संस्थान के कार्यों के निष्पादन हेतु 28 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 13 रिक्त हैं. वहीं, वेबसाइट पर जिन 17 पदाधिकारियों का उल्लेख है, उनमें सामान्य सभा के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री, कार्यपालन समिति के अध्यक्ष के तौर पर राज्य के प्रमुख सचिव और सीईओ के अलावा बाकी 14 पदों में से 7 रिक्त हैं. द वायर में आनंद विभाग के ऊपर एक रिपोर्ट के अनुसार आनंद विभाग पर एक रिपोर्ट के अनुसार  संस्थान की ओर से आनंद के विषय पर शोध/अनुसंधान के लिए ‘आनंद रिसर्च फेलोशिप’ भी जारी की जाती है, लेकिन आज तक कोई शोध प्रकाशित नहीं हुआ है. लोगों के जीवन में आनंद घोलने का बजट 10 पैसा प्रति व्यक्ति है आनंद विभाग का गठन एक स्वतंत्र विभाग के रूप में हुआ था. वर्ष 2018 में सरकार बदलने पर इसका विलय अध्यात्म विभाग में कर दिया गया. वापस भाजपा की सरकार आने पर इसे फिर से स्वतंत्र कर दिया गया. वर्ष 2022-23 में इसको 5 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था, जिसमें 2 करोड़ वेतन भुगतान, कार्यालय किराया, बिजली-पानी व्यय, प्रकाशन एवं प्रचार-प्रसार के लिए थे. 3 करोड़ का पोषण अनुदान था, जिससे विभाग को आनंद के प्रसार के कार्यक्रमों का संचालन करना था. विभाग केवल 4.22 करोड़ की राशि खर्च कर सका. वित्तीय वर्ष 2021-22 के उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं मुख्यमंत्री के इस महत्वाकांक्षी विभाग द्वारा आनंद के प्रसार के लिए चलाए जाने वाले सभी कार्यक्रमों पर केवल 79 लाख रुपये खर्च किए गए, जो राज्य की लगभग 8 करोड़ आबादी के लिहाज से लगभग 0.10 पैसा प्रति व्यक्ति होता है. हालांकि, इस बजट को पर्याप्त मानते हैं. उनका कहना है, ‘हम वालंटियर (स्वयंसेवी) के जरिये काम करते हैं. यह एक नई अवधारणा लाने की शुरुआत है, समय तो निश्चित तौर पर लगेगा. बजट हमारे लिए पर्याप्त है, कोई समस्या नहीं है.’ ‘आनंद विभाग’ या ‘सरकारी अधिकारी/कर्मचारी आनंद विभाग?’ स्वयंसेवी आनंदकों (84 हजार से अधिक) में बड़ी संख्या में शासकीय सेवक शामिल हैं (दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 फीसदी से अधिक), उनमें भी शिक्षा विभाग के कर्मियों की संख्या इनमें अधिक है. अशासकीय व्यक्तियों में समाजसेवी, पत्रकार जैसे ज़मीनी सक्रियता वाले पेशों के लोग शामिल हैं. वहीं, वेबसाइट पर उपलब्ध 268 आनंदम सहयोगियों की सूची में 60 फीसदी से अधिक शासकीय कर्मचारी हैं. भले ही पूरी योजना को वॉलंटियर रूप से सफल बनाने का ख्वाब देखते हों लेकिन द वायर से बातचीत में ‘अशासकीय आनंदम सहयोगी’ कहते हैं कि हम काम-धाम छोड़कर अपने मन की संतुष्टि के लिए लोगों में खुशियों बांटने के प्रयास करते हैं, तो कम से कम विभाग को हमारे पानी-पेट्रोल का खर्च तो देना ही चाहिए. विभाग के गठन के समय राज्य का हैप्पीनेस इंडेक्स जारी करने को इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य बताया गया था. आईआईटी खड़गपुर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने के अलावा तत्कालीन अधिकारियों ने सरकारी खर्च पर भूटान के दौरे भी किए थे. लेकिन, तब से अब तक नतीजा सिफर ही रहा है. कभी कोरोना, तो कभी किसी अन्य कारण से बार-बार राज्य आनंद संस्थान की ओर से इंडेक्स जल्द ही जारी करने का आश्वासन दिया जाता है. वेबसाइट पर उपलब्ध विभागीय कामकाज की उपरोक्त जानकारी किसी को भी बेहद आकर्षक लग सकती है लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और है. ‘द वायर’ ने इस दौरान कई ‘आनंदम सहयोगी’ से बात की. इनमें एक डॉ. सत्य प्रकाश शर्मा भी थे. उनका नाम वेबसाइट पर ग्वालियर के ‘आनंदम सहयोगी’ के रूप में दर्ज है. द वायर से बातचीत में उन्होंने बताया, ‘जो भी दिख रहा है वो केवल कागजों में है, धरातल पर शून्य है. आपको केवल संस्थान के ईमेल मिलेंगे, वेबसाइट पर सब कुछ मिलेगा, ज़मीन पर कुछ भी नहीं है. विभाग की सक्रियता केवल फोटो खिंचवाकर अपलोड करने तक है. थोड़ी-बहुत गतिविधियां कर देते हैं, जिससे फोटो बन जाते हैं और वेबसाइट पर अपलोड हो जाते हैं. कुल मिलाकर यह केवल एक वेबसाइट के अलावा और कुछ नहीं है. डॉ. शर्मा के दावों की ज़मीनी पड़ताल की और राज्य के विभिन्न तबकों से जुड़े लोगों से बात करके जाना कि वह ‘आनंद विभाग ’ या ‘राज्य आनंद संस्थान’ के कामकाज को किस तरह देखते हैं या उसके कामकाज के बारे में कितना जानते हैं. शिवपुरी और श्योपुर ज़िलों में आदिवासी समुदाय के बीच पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार आदि समस्यों पर सक्रियता से काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अजय यादव को तो पता ही नहीं है कि ऐसा कोई विभाग भी है जो लोगों का जीवन खुशहाल बनाने के लिए कार्य करता है. ‘मैं करीब दशकभर से वंचित तबकों के बीच काम कर रहा हूं, लेकिन मैंने आज तक आनंद विभाग या राज्य आनंद संस्थान का नाम ही नहीं सुना और न ही कभी इसके द्वारा किया गया कोई आयोजन देखा.’ सिवनी ज़िले के केवलारी खेड़ा गांव के किसान सतीश राय, जो किसान संबंधी समस्याओं पर भी मुखर रहते हैं, को भी नहीं पता कि लोगों के जीवन में आनंद का प्रसार करने के लिए भी कोई विभाग काम कर रहा है. वे आगे कहते हैं, मेरे जैसे सक्रिय किसान को भी ऐसे किसी विभाग या उसके कार्यक्रमों और आयोजनों की जानकारी नहीं है. कोई भी ग्रामीण इस विभाग की गतिविधियों के बारे में नहीं बता पाएगा कि इसके कार्यक्रम कब और कहां होते हैं.’ पूरे राज्य में पोषण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल अधिकार और नागरिक अधिकारों पर काम करने वाली भोपाल की एनजीओ विकास संवाद के राकेश मालवीय को विभाग के गठन … Read more

मप्र के हारे थके भाजपा नेत और मंत्री चले तेलंगाना, करेंगे प्रचार.

Tired after the elections in Madhya Pradesh, BJP leaders and ministers have gone to Telangana to campaign. मप्र को निपटाकर अब तेलंगाना को निपटाएंगे नेता, मंत्री, तेलंगाना के चुनाव में शिवराज कैबिनेट के आधा दर्जन मंत्रियों की लगी ड्यूटी, चुनाव प्रचार में होंगे शामिल, राजस्थान में सीएम की होंगी सभाएं. अपने आपको मप्र और देश का बड़ा नेता कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय से पार्टी ने किया किनारा. मप्र विधानसभा चुनाव के बाद कैलाश विजयवर्गीय का पार्टी ने घटाया कद घटा, बने छोटे नेता. Udit Narayanभोपाल। मध्यप्रदेश में चुनाव के बाद अब बीजेपी हाईकमान ने तेलंगाना में हो रहे चुनाव के लिए कमर कस ली है। मध्यप्रदेश भाजपा के दिग्गज नेता भी अब तेलंगाना चुनाव में मोर्चा संभालेंगे। इसके लिए एमपी भाजपा से एक दर्जन से अधिक नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। दिलचस्प बात यह है कि अपने आपको मप्र और देश का बड़ा नेता कहने वाले कैलाश विजयवर्गीय से फिलहाल उनसे किनारा कर लिया। पार्टी ने जिन 22 नेता और मंत्रियों की सूची बनाई, उसमें उनका नाम नहीं है। पार्टी ने उन्हें प्रचार प्रसार करने लायक नेता नहीं समझा है। एक तरह से उनके कद का छोटा आंक लिया है। अब वे छोटे कद के नेता बन गए हैं। वहीं शिवराज कैबिनेट के आधा दर्जन मंत्रियों की चुनावी प्रचार में ड्यूटी लगा दी गई है। सभी इसी वीक से तेलंगाना की अलग-अलग विधानसभाओ में डेरा डालेंगे। इनमें कई मंत्री और संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजस्थान में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्हें स्टार प्रचारक बनाया गया है। बता दें, राजस्थान में 25 और तेलंगाना में 30 नवंबर को मतदान होगा। फिलहाल, यहां भाजपा का प्रचार जारी है। 22 नेता जाएंगे तेलंगाना

काउंटिंग से पहले कांग्रेस के सभी पोलिंग एजेंट और 230 प्रत्याशियों की होगी ट्रेनिंग.

Before the counting, all polling agents of the Congress and 230 candidates will undergo training 26 नवंबर को सभी उम्मीदवारों को बुलाया, ईवीएम की मानीटिरिंग और गणना का होगा प्रशिक्षण Udit Narayanभोपाल। प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए मतदान संपन्न हो चुका है। सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला एश्ट में कैद है। आगामी 3 दिसंबर को मतों की गणना की जाएगी। वहीं मतगणना की तैयारी में सभी राजनीतिक पार्टियां जुट गई है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने विधानसभा प्रत्याशी को राजधानी भोपाल बुलाया है। जानकारी के अनुसार, एमपी कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के सभी 230 विधायक प्रत्याशियों को ट्रेनिंग के लिए राजधानी भोपाल बुलाया गया है। विधायक प्रत्याशी और मतगणना एजेंट को ट्रेनिंग दी जाएगी। आपको बता दें कि, 26 नवंबर को एमपी कांग्रेस द्वारा ट्रेनिंग कैंप लगाया जा रहा है। ट्रेनिंग में प्रत्याशियों को मतगणना से संबंधित जानकारी दी जाएगी। प्रत्याशियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खुद के साथ पोलिंग एजेंट को भी साथ में लेकर आएंगे। बता दें कि, ट्रेनिंग में मतगणना के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है। इस बात की विशेष जानकारी (टिप्स) दी जाएगी। ट्रेनिंग में ईवीएम और वीवीपैट की भी जानकारी दी जाएगी। बता दें कि, साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस ने मतगणना के पहले प्रत्याशियों को इसी तरह ट्रेनिंग के लिए बुलाई थी। उसी कड़ी में इसबार भी ऐसा किया जा रहा है। इसके साथ कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि स्ट्रांग रूम में रखी मशीनों की लाइव जानकारी हर एक प्रत्याशी को मिले। स्ट्रांग रूम में लगे कैमरे का लिंक प्रत्याशी को दिया जाए, ताकि वह अपनी सुविधा के मुताबिक स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम मशीनों की गणना तक उन पर नजर रख सके।

95 वर्ष की श्रीमति विद्यावती दूबे ने परिवार के साथ किया मतदान

Mrs. Vidyavati Dubey, 95 years old, cast her vote with her family. साकिब कबीरभोपाल में मतदान के प्रति मतदाताओं में उत्साह देखा गया जिसमे युवाओं के साथ वृद्धजन भी पीछे नहीं रहे। दक्षिण-पश्चिम के मतदान केंद्र क्रमांक 210 पर 95 वर्ष की श्रीमती विद्यावती दूबे अपने परिवार के साथ मतदान करने आईं। उनका लोकतंत्र के उत्सव के प्रति ऐसा जज्बा सभी को प्रेरित करता है ।

मतदान को लेकर युवाओं में उत्साह.

Enthusiasm among the youth regarding voting. कु. ईशा, कु. अदिति और कु. सुष्मिता ने किया पहली बार मतदान साकिब कबीरभोपाल: लोकतंत्र के महोत्सव यानि विधानसभा निर्वाचन के तहत शुक्रवार को पहली बार वोट करने गए युवाओं में बहुत उत्साह था।इन युवाओं में से 3 युवाओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी जो काबिले तारीफ है। विधानसभा क्षेत्र 152 भोपाल दक्षिण-पश्चिम के मतदान केन्द्र क्रमांक 210 में कु. ईशा, कु. अदिति और 211 में कु. सुष्मिता ने उत्साह पूर्वक पहली बार मतदान किया। कुमारी ईशा ने कहा कि मैंने लाईन में खडे़ होकर अपनी बारी का इंतजार किया और यह संदेश दिया कि नियम के साथ काम करते हुये हमें यह पता चलता है कि हमारी व्यवस्थायें सुदृढ हैं। उन्होंने अपने मत का प्रयोग करके खुशी व्यक्त की। सभी मतदाताओं से भी कहा है कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें। कुमारी अदिति ने कहा कि आज मतदाताओं के लिये महत्वपूर्ण दिवस है। हर मतदाता को लोकतंत्र के इस पर्व पर अपने मत का प्रयोग करके एक ईमानदार जनप्रतिनिधि को चुनने का मौका मिलता है। सभी लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिये। कुमारी सुष्मिता ने कहा कि लोकतंत्र के इस उत्सव में आज पहली बार हिस्सा लेकर उन्हें बहुत खुशी मिल रही है। उन्होंने सभी से अपील कर कहा कि मतदान अवश्य करें और एक जागरूक नागरिक होने का फर्ज निभायें।

गर्भवती ने पहले किया मतदान, फिर गई प्रसव करवाने.

Pregnant woman first cast her vote and then went to arrange for childbirth. साकिब कबीरभोपाल । शुक्रवार को मतदान दिवस पर गर्भवती महिला मतदान के अपने कर्तव्य को नहीं भूली। महिला ने अस्पताल जाने के पहले अपने पोलिंग बूथ पर पहुंच कर वोट किया, उसके बाद अस्पताल पहुंचकर प्रसव करवाया । भोपाल की वार्ड क्रमांक 78 निवासी 23 वर्षीय श्रीमती सानिया शेख पत्नी श्री सोहेल शेख की संभावित प्रसव दिनांक 17 नवंबर थी। 17 तारीख की सुबह स्थानीय आशा कार्यकर्ता श्रीमती सना गर्भवती को अस्पताल ले जाने के लिए घर पहुंची। अस्पताल में भर्ती होने के लिए सभी जरूरी सामान और ए एन सी जांच के दस्तावेजों को रखने के दौरान आशा कार्यकर्ता द्वारा मतदान करने के लिए प्रेरित किया गया। गर्भवती महिला और परिजन भी मतदान के लिए खुशी खुशी तैयार हुए। महिला ने डिलीवरी के लिए भर्ती होने के पूर्व आशा कार्यकर्ता के साथ बूथ क्रमांक 44 जाकर अपना वोट दिया। महिला ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया है। मतदान के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए आशा कार्यकर्ता श्रीमती सना द्वारा जागरूकता गतिविधियां भी की गई थी।

करोड़पति आबकारी अधिकारी अलोक खरे पर लोकायुक्त 4 साल से नहीं कर पा रहा कार्रवाई.

Alok Khare; Excise Inspector; Sahara Samachaar; Lokayukt

The Lokayukta has been unable to take action against the millionaire excise officer Alok Khare for the past four years. Udit Narayan सरकार से अभियोजन की लोकायुक्त ने मांगी अनुमति 4 साल पहले अधिकारी के आधा दर्जन के अधिक ठिकानों पर हुई थी छापेमारी, बंगले, फार्महाउस सहित मिली 100 करोड़ से अधिक संपत्तिFour years ago, the Lokayukta sought permission from the government for prosecution. Raids were conducted at more than half a dozen locations associated with the officer, resulting in the discovery of properties worth over 100 crores, including bungalows, farmhouses, and more. भोपाल। मध्य प्रदेश के आबकारी विभाग के अधिकारी आलोक खरे पर गाज गिर सकती है। 4 साल पहले लोकायुक्त के छापे के दौरान आय से अधिक संपत्ति की पुष्टि हुई थी। राज्य सरकार से लोकायुक्त ने अभियोजन की स्वीकृति मांगी की है। लोकायुक्त के पत्र के बाद वाणिज्य कर विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी ने आलोक खरे की अभियोजन स्वीकृति देने के लिए आबकारी आयुक्त ओपी श्रीवास्तव को पत्र लिखा है। लोकायुक्त पुलिस ने 4 साल पहले सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे के साथ ठिकानों पर छापेमारी की थी। भोपाल में दो इंदौर में दो और रायसेन में दो छतरपुर में एक साथ छापेमारी की गई। लोकायुक्त ने कार्रवाई के दौरान पाया कि खरे ने आय से अधिक संपत्ति बनाई है। इसके बाद विभाग ने खरे को रीवा जिला आबकारी आयुक्त बनाकर भेज दिया। छापे के बाद जानकारी निकाली कि 100 करोड रुपए से अधिक की संपत्ति पाई गई है। इंदौर के पास इलाके में पेंट हाउस और बंगले का पता चला है। तीन किलो सोना मिलने की भी जानकारी थी। इंदौर में जिस फ्लैट में आलोक खरे रहते थे, उसे पर ताला था। लोकायुक्त टीम ने ताले को भी सील कर दिया था। भोपाल की चूना भट्टी और बाग मुगलिया में दो बड़े बंगले और कोलार में फार्म हाउस की जमीन से जुड़े हुए दस्तावेज मिले थे। इसके अलावा रायसेन में दो फार्म हाउस का भी खुलासा हुआ। खरे ने अपनी पत्नी के इनकम टैक्स रिटर्न में रायसेन में फलों की खेती से आय होना बताया था। फल दिल्ली में बेचे जाते थे, जिसकी वजह से करोड़ों रुपए की आय हुई। सूत्र बताते हैं कि दस्तावेज की जांच के बाद यह खुलासा हुआ कि ट्रकों से फल दिल्ली भेजने की बात कही गई लेकिन उन नंबरों की जांच करने के बाद आॅटो के नंबर निकाले। फाइल बंद, फिर खुलीसूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त ने डीजी ने आलोक खरे के खिलाफ चल रही फाइल को बंद कर दिया था। इस मामले में लोकायुक्त के चेयरमैन के दखल के बाद हटाए डीजी के खिलाफ सरकार को रिपोर्ट दे दी थी। फिर नए डीजी ने अलोक के मामले की फाइल खोल दी। इस मामले में पूर्व डीजी की कथित इमानदारी पर भी सवाल उठे थे। ईडी भी कर रही जांच- लोकायुक्त पुलिस के अलावा अलोक खरे के खिलाफ ईडी भी जांच कर रही है। इसके लिए बकायदा लोकायुक्त पुलिस के डीजी को पत्र लिखकर जांच की रिपोर्ट देने के लिए कहा था। माना जा रहा है कि ईडी मनी लाड्रिंग के मामले में कार्रवाई कर सकती है। हालांकि लोकायुक्त को अभियोजन की स्वीकृति का इंतजार है। हैरत की बात है कि खरे को सरकार ने छापेमारी के बाद निलंबित नहीं किया। इसके अलावा उन्हें सिर्फदूसरे जिले में पोस्टिंग दे दी।

वोटर कार्ड नहीं है तब भी कर सकेंगे मतदान।

You can vote even if you don’t have a voter card. 12 डॉक्यूमेंट होंगे मतदान के लिए मान्य। चुनाव आयोग ने जारी किए दिशा निर्देश। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 17 नवंबर के दिन वोटिंग होना है। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक वोटर अपना वोट डाल कर करेंगे। वोट करने के लिए मतदाता का नाम वोटिंग लिस्ट में होना जरूरी है। इसके अलावा कहा जाता है कि मतदाता के पास वोटर कार्ड होना भी जरूरी है लेकिन ऐसा नहीं है। मतदाता वोटर कार्ड के बिना भी इन दस्तावेजों की सहायता से वोट कर सकता है। दरअसल, चुनाव आयोग ने एमपी विधानसभा चुनाव के लिए वोटर कार्ड के बिना भी करीब 12 आईडी की परमिशन दी है। वोटर पहचान जाहिर करने वाले इन डॉक्यूमेंट्स को दिखाकर अपने मताधिकार का उपयोग कर सकते है और विधानसभा चुनाव के लिए वोट कर सकते है। वो 12 डॉक्यूमेंट जिनके द्वारा कर सकते हैं मतदान यदि किसी वजह से आपके पास वोटर आईडी कार्ड नहीं है तो भी वह अपने मताधिकार का उपयोग कर सकता है। वोटर 12 ऑप्शनल फोटो वाले डॉक्यूमेंट की मदद से वोटिंग कर सकता है। इनमें है आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, इंडियन पासपोर्ट, फोटो पेस्टेड पेंशन कार्ड, गर्वनमेंट सर्विस कार्ड, फोटोयुक्त पासबुक, स्मार्ट कार्ड, हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड, ऑफिशियल आईडेंटिटी कार्ड और यूनिक डिसेबिलिटी कार्ड दिखाकर वोटर 17 नवंबर के दिन वोट कर सकता है। वोटर लिस्ट में मतदाता का नाम होना जरूरी चुनाव आयोग ने वोटर के मताधिकार का उपयोग करने के लिए वोटर कार्ड के अलावा इन 12 फोटोयुक्त पहचान पत्र दिखाकर वोटिंग कर सकते है। लेकिन इन दस्तावेज के साथ ही मतदाता को इस बात का ध्यान रखना होगा कि उसका नाम वोटर लिस्ट में होना जरूरी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि वैलिड डाक्यूमेंट के अलावा मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में होना जरूरी है। यदि उसका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो वह वोटिंग नहीं कर पाएगा।

मध्य प्रदेश में चुनाव आचार संहिता के दौरान प्रशासन व पुलिस ने अरबों रुपए की नकदी व शराब पकड़ी।

During the election code of conduct in Madhya Pradesh, the administration and police seized cash and liquor worth billions of rupees. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव आचार संहिता में जब्ती के आंकड़े हुए उजागर। 335 करोड़ 76 लाख रुपये से अधिक की नकदी, शराब व सोना चांदी हुआ जब्त। उदित नारायण भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान प्रक्रिया को सम्पन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए आचार संहिता लागू होने से लेकर अब तक मध्य प्रदेश शासन और पुलिस व अन्य विभागों द्वारा अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लगातार चलाए गए अभियानों में अरबों रुपए का मसरूका जब्त होने का खुलासा हुआ है। इस जब्त मसरुका में नकदी, सोना चांदी, अवैध शराब व अन्य मादक पदार्थ शामिल हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक इन सभी जब्त सामग्रियों एवं नकदी का इस्तेमाल निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने और मतदाताओं की खरीद फरोख्त के लिए किया जा सकता था। यहां गौरतलब बात यह भी है कि इस बार जब्त नकदी और मादक पदार्थ आदि की मात्रा एवं कीमत पिछले चुनाव की अपेक्षा बहुत अधिक है। पिछले विधानसभा चुनाव में तकरीबन 75 से 100 करोड़ के बीच नकदी और शराब आदि जब्त हुई थी। अरबों रुपए की नकदी और शराब पकड़ी इस बार के विधानसभा चुनाव में न केवल शराब की खेप दर खेप खपाने की चहुंओर कोशिशें चल रही हैं, बल्कि पैसे से वोट खरीदने का मिजाज भी मस्ती पर है। अब तक हुई कार्रवाइयों के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चुनाव की तुलना में यह चार गुनी ज्यादा रफ्तार पर है। उधर, आलम यह भी है कि इन तमाम कार्रवाइयों में किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी की संलिप्तता सामने नहीं आई है। आचार संहिता लागू होने के बाद से अब तक 39 करोड़ 15 लाख 88 हजार 874 रुपये नकद, 63 करोड़ 84 लाख 6 हजार से अधिक राशि की अवैध शराब ही जब्त की जा चुकी है। जबकि 92 करोड़ 76 लाख 36 हजार रूपए से अधिक का सोना चांदी और 17 करोड़ 8 लाख 36 हजार रुपए से ज्यादा के अन्य मादक पदार्थों की जब्ती की गई है। इसके साथ ही 1 अरब 22 करोड़ 91 लाख 94 हजार रूपए से अधिक के वाहन एवं अवैध हथियार भी जब्त किए गए हैं।इन आंकड़ों के हिसाब से कुल 3 अरब 35 करोड़ 76 लाख 36 हजार रुपए से अधिक की नकदी, अवैध शराब, सोना चांदी, अवैध हथियार, मादक पदार्थ एवं इन सबके परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन जब्त किए गए हैं। जबकि पिछले चुनाव में आचार संहिता के दौरान 75 से 100 करोड़ रुपये के बीच शराब, नकदी सहित अन्य सामग्रियों की जब्ती हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा पिछली बार की तुलना में चार गुना से अधिक पहुंच गया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन का कहना कि नौ अक्टूबर से अब तक 335 करोड़ 76 लाख 36 हजार 94 रुपये की जब्ती की कार्रवाई की गई है। इसमें 33 लाख लीटर से अधिक अवैध शराब सहित अन्य सामग्रियां शामिल हैं। सी विजल एप पर लगभग 10 हजार से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। इन पर त्वरित कार्रवाई भी हो रही है। बहुत कुछ कह रही है जब्त नकदी और शराब प्रदेश में पुलिस और आबकारी विभाग सक्रिय है। आचार संहिता लगने के बाद टीमें लगातार ढाबों, होटलों रेस्टोरेंट पर छापे मार रही हैं। हालांकि, सख्ती से शराब तस्करों में हड़कंप जरूर मचा हुआ है, मगर नशे की धार पर अंकुश लग गया हो, यह कतई नहीं कहा जा सकता। मध्य प्रदेश कई राज्यों की सीमाओं से जुड़ा हुआ है तो सीमा पर बनाई चौकियों पर नकदी, शराब, सोना-चांदी को पकड़ने की कार्रवाइयां भी अधिक हो रही हैं। देखने में आ रहा है कि एफएसटी और एसएसटी की टीमों ने अब तक राजनेता या उनके समर्थकों के खिलाफ एक भी कार्रवाई नहीं की है। व्यापारी, कारोबारी और उनके नुमाइंदे ही पकड़े जा रहे हैं। यदि जब्त सामग्रियों एवं नकदी को कारोबारियों से पकड़ा गया है तो निश्चित रूप से उनके पास इस सबका हिसाब किताब भी होना चाहिए और नहीं है तो यह भी पता चलना चाहिए कि यह नकदी, शराब आदि किन राजनेतिक पार्टियों के नेताओं के कहने पर और किसके द्वारा पहुंचाई जा रही थी।

शराब दुकान बंद होने के पहले उमड़ी भीड़, 48 घंटे के लिए सील.

Crowds surged before the closure of liquor shops, sealed for 48 hours. मतदान के दिन छह बजे खुलेंगी दुकान, आबकारी की टीम तीन शिफ्टों में रखेगी अवैध शराब की बिक्री पर नजर Manish Trivedi भोपाल। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आबकारी अमले ने जिले की सभी 87 शराब दुकानों को बुधवार शाम 5 बजे सील कर दी गई। गुुरुवार को ये दुकानें पूरी तरह बंद रहेगी और शुक्रवार शाम पांच बजे या मतदान समाप्ति के बाद ही खुलेंगी। बुधवार को इन दुकानों पर भीड़ उमड़ी। इधर, आबकारी अमले ने इन शराब दुकानों के अलावा जिलेभर में अवैध रूप से बिकने वाली शराब की निगरानी भी बढ़ा दी है। यह टीम अगले तीन दिनों तक पूरे 24 घंटे तीन शिफ्टों में तैनात रहेगी। इन तीन दिनों में शराब का 9 करोड़ से ज्यादा का कारोबार प्रभावित होगा। इनमें सरकार का रेवेन्यू (लाइसेंसी फीस) 6.54 लाख रुपए शामिल है। कलेक्टर आशीष सिंह ने बुधवार शाम 6 बजे से 17 नवंबर को मतदान समाप्ति तक (48 घंटे के लिए)जिले में ड्राई डे घोषित किया है। इसी तरह 3 दिसंबर को मतगणना वाले पूरे दिन यह प्रतिबंध लागू रहेगा। जिले में शराब की 87 शराब दुकानें है। इन दुकानों का साल भर का शराब ठेका 798 करोड़ रुपए में गया है। इस हिसाब से सरकार को रोजाना की लाइसेंसी फीस (रेवेन्यू) 2.18 करोड़ रुपए मिलती है। दुकानदारों को इसकी लागत डेढ़ गुना पड़ती है। इस तरह हर दिन तीन करोड़ रुपए की शराब का कारोबार होता है। तीन दिन के हिसाब से यह राशि करीब 9 करोड़ रुपए होती है। अलग-अलग टीम तीन शिफ्टों में तैनात :सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा ने बताया कि अवैध शराब की बिक्री की निगरानी जिले की सभी शराब दुकानें बुधवार शाम सील कर दी गई। अब यह शुक्रवार को मतदान समाप्ति के बाद खुलेंगी। इन दुकानों के अलावा जिले में अवैध शराब की बिक्री पर नजर रखने के लिए आबकारी की अलग-अलग टीम तीन शिफ्टों में तैनात रहेगी।

वोटर कार्ड के साथ ही 12 अन्य तरह के परिचय पत्र को भी किया है मान्य चुनाव आयोग ने मतदान के लिए इन कागजातों को दी मान्यता.

Election Commission has approved not only the voter card but also 12 other types of identification documents for voting. Manish Trivedi भोपाल। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सीईओ अनुपम राजन ने कहा कि आमतौर पर वोटरों में यह भ्रांति होती है कि उनके पास वोटर कार्ड नहीं है, इसलिए वे वोट नहीं डाल सकते, किंतु ऐसा नहीं है। चुनाव आयोग ने किसी कारण से वोटर कार्ड नहीं प्राप्त करने वाले मतदाताओं के लिए 12 अन्य तरह के पहचान पत्रों को मतदान के लिए अधीकृत किया है। कोई भी मतदाता इन 12 तरह के परिचय पत्रों में से किसी एक परिचय पत्र को दिखाकर अपना मत डाल सकेगा। मप्र में इस बार एक ही चरण में मतदान कराने की तैयारी चुनाव आयोग ने की है। इसी तैयारियों आदि को लेकर हरिभूमि ने सीईओ राजन से विस्तृत बातचीत की। उन्होंने चुनाव की तैयारियों आदि को लेकर कई तरह की जानकारी दी। राजन ने कहा कि किसी भी मतदाता को मतदान के संबंध में भ्रांति नहीं रहे, इसके लिए हर स्तर पर प्रचार-प्रसार करवाया गया है। बूथ स्तर पर तैनात बीएलओ को कई तरह के निर्देश दिए गए हैं। मतदाताओं की सुविधा के लिए सभी तरह के बंदोबस्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर मतदाताओं को मतदाता पर्ची उपलब्ध करा दी गई है या फिर कराई जा रही है,किंतु किसी कारण वश यदि मतदान समय तक में मतदान पर्ची नहीं मिल पाई है तो इस स्थिति में मतदाता को निराश होने या भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। मतदाता को बस यह करना है कि सरल ऐप पर अपना नाम अािद देखकर मतदान केंद्र में परिचय पत्र दिखाकर मतदान कर सकता है। मतदान केंद्र के बाहर मौजूद बीएलओ भी इसमें आपकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद कई तरह की शिकायतें आती हैं। इन शिकायतों को संबंधित विभागों के पास भेजकर उसकी रिपोर्ट मांगी जाती है। इसके बाद कार्रवाई के लिए आयोग के पास भेजा जाता है। यदि श्िाकायत गंभीर है तो संबंधित जैसे पुलिस आदि के पास भेजकर कार्रवाई करने को कहा जाता है। इसके अलावा सी विजिल में भी शिकायतें आती है। इसके लिए आयोग की तरफ से नियम बन चुका है कि 100 मिनट में उसका निराकरण होगा। सी- विजिल में आने वालीे शिकायतों को उसी समयावधि में तत्काल निबटारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि कुल मतदान केंद्रों में से 25 फीसदी मतदान केंद्र संवेदनशील चिन्हित किए गए हैं। ऐसे मतदातन केंद्रों पर संेंट्रल फोर्स के साथ पुलिस की सख्त सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। मतदान केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे, माइक्रो आब्जर्वर, पेट्रोलिंग आदि कराई जाती है। भिंड व मुरैना जिलों में ज्यादा पुलिस बल की तैनाती की जा रही है। पुलिस को सुरक्षा के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मप्र में कुल करीब 65 हजार मतदान केंद्र हैं। मतदान केंद्रों की सुरक्षा तथा शांतिपूर्ण मतदान के लिए कुल चार लाख कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

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