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पीड़ित बुजुर्ग का अश्लील वीडियो बनाकर उससे 50 लाख रुपयों की भी डिमांड की, 61 साल के बुजुर्ग के साथ हनी ट्रैप

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में एक हैरतअंगेज मामला सामने आया है। 61 साल के बुजुर्ग के साथ हनी ट्रैप का मामला सामने आने के बाद पुलिस भी दंग रह गई। आरोप है कि पीड़ित बुजुर्ग का अश्लील वीडियो बनाकर उससे 50 लाख रुपयों की भी डिमांड की गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इंदौर के कनाड़िया में एक 61 साल के बुजुर्ग को एक महिला ने अपने हुस्न के जाल में फसाया। बुजुर्ग के साथ आरोपी महिला ने अश्लील फोटोज व वीडियो भी बना डाले। अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया में वायरल करने की धमकी देकर आरोपी महिला ने बुजुर्ग से 50 लाख रुपयों की मांग तक कर डाली। आरोपी महिला के टॉर्चर से परेशान होकर पीड़ित ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई थी। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि मकवाना कॉम्प्लेक्स में एक सुपर मार्केट के लिए उन्होंने दुकान को किराये पर दिया था। बिल्डिंग मालिक होने के कारण बुजुर्ग दंपति दुकान में आया-जाया करते थे। बताया कि दुकान में वैशाली मनावत पत्नी संतोष मनावत निवासी पहाड़ी टेकरी सेल्स गर्ल का काम करती थी। स्टोर में आने जाने के दौरान पीड़ित का बुजुर्ग से बातचीत शुरू हुई। 28/11/2023 को लगभग 10 बजे आरोपी वैशाली ने पीड़ित को फोन कर मिलने की बात कही। वैशाली ने पीड़ित को कहा कि यदि मैंने आप को नहीं बताया तो मैं बर्बाद हो जाउंगी । आरोपी वैशली ने चालाकी से उसे कहा की ट्रैफिक में कैसे बात करेंगे तो बुजुर्ग ने उसे अपनी कार में बैठा लिया। वैशाली ने कार को पहले उज्जैन रोड की और ले जाने को कहा। आरोप है कि वैशाली ने बुजुर्ग को बात खत्म होने तक उज्जैन दर्शन के लिए चलने की जिद की। रेलवे स्टेशन के पास एक होटल में कमरा लेने के बाद आरोपी वैशली ने बुजुर्ग को खाना लाने के लिए कमरे से बाहर भेज दिया। इस बीच, वैशली ने मोबाईल वीडियो रिकॉर्डिंग मोड पर ऑन कर छुपा दिया। खाना खाने के बाद बुजुर्ग बेहोश हो गए, जिसके बाद आरोपित वैशाली ने बुजुर्ग के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। फोन पर दी धमकी-बदनाम कर दूंगी आरोप है कि वैशाली ने फोन पर बुजुर्ग को कहा कि तुमने मेरे साथ जो किया है वह सारी बातें उसके घरवालों को बता देगी। घरवालों को बताकर बदनाम करने के साथ ही जेल भेजने की धमकी भी दी गई। पीड़ित ने इस उम्र में इस तरह कार्य नहीं करने में वो शरारिक असमर्थता बताई लेकिन वैशाली ने उसे 50 लाख की डिमांड कर दी । आरोपी वैशाली ने बुजुर्ग को स्टोर बुलाकर एक वीडियो दिखाया। आरोपी वैशाली ने 19 लाख रुपये देकर फोटो-वीडियो वायरल नहीं करने की बात तय हुई। 5 लाख फिर मांगे और दोबारा 11 लाख की थी डिमांड दिनांक 17.01.2024 को वैशाली एवं पीड़ित के 19 लाख रूपये देने के रूप में एग्रीमेंट 500 रूपये के स्टाम्प पर हुआ । जिसके बाद कुछ राशि नगद और कुछ राशि चेक के माध्यम से वैशाली को दिए । वीडियो-फोटो देने की बात पर पीड़ित ने बोला की वह मोबाईल फोन उसके भाई के पास है और वह वीडियो-फोटो डिलीट कर देगी। आरोप है कि वैशली ने 5 लाख और मांगे, जो बुजुर्ग ने दे दिए। बुजुर्ग ने आरोप लगाया कि वैशाली ने 11 लाख की दोबारा डिमांड रखी जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस को अपनी आपबीती बताई। पुलिस ने पूरे मामले की जांच करने के बार आरोपी वैशाली को गिरफ्तार कर लिया।

महाकाल मंदिर में दान की जांच होगी, स्वर्ण-रजत टेस्टिंग मशीन लगेगी

उज्जैन देश के अन्य बड़े मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर (Mahakaleshwar Temple Ujjain) में भी लगभग प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी संख्या में दान किया जाता है। यह क्रम वर्षभर जारी रहता है। इसी को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने निर्णय लिया है कि दान में मिलने वाली वस्तुओं का भौतिक सत्यापन मंदिर में ही टंच मशीन लगाकर किया जाएगा। इसके अलावा वर्तमान वाली प्रक्रिया को भी बंद नहीं किया जाएगा। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने लिया निर्णय गत दिनों हुई महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि देश के अन्य बड़े मंदिरों की तरह महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान स्वरूप दी जाने वाली सोने और चांदी की वस्तुओं की शुद्धता की जांच के लिए ‘टंच मशीन’ लगाकर की जाए। इस टंच मशीन की मदद से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जो आभूषण या धातुएं दान की जाती हैं, वे वास्तव में सोना या चांदी हैं या नहीं और उनकी कितनी शुद्धता है। इससे मंदिर प्रशासन को दान की गई वस्तुओं का सही मूल्यांकन करने में आसानी होगी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी। 23 साल से बिना मशीन के जांच रहे शुद्धता महाकाल मंदिर में लगभग 23 साल से सोना और चांदी की शुद्धता की जांच करने वाले अशोक जड़िया (सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष) उनका कहना है कि हम लोग अपनी नजरों से देखकर ही बता सकते हैं कि यह शुद्ध है या खोटा है। कोई भी मशीन 100त्न एक्यूरेसी नहीं बता सकती, जबकि इंसान द्वारा जांची गई सोने चांदी की शुद्धता 100त्न मानी जाती है, क्योंकि डॉक्टर का काम एक डॉक्टर ही करेगा, मशीन नहीं। क्या प्रक्रिया है सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं की शुद्धता की जांच कई तरीकों से की जाती है। इनमें से कुछ परंपरागत हैं और कुछ आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर आधारित हैं। यह कहना है अशोक जड़िया के पुत्र अतिन जड़िया का, जो महाकालेश्वर मंदिर से आने वाले दान वस्तुओं की जांच करते हैं। उन्होंने कहा- 1. टंच मशीन यह एक सबसे आधुनिक और लोकप्रिय तरीका है। मशीन में वस्तु को रखकर X-Ray की मदद से उसकी धातु संरचना का विश्लेषण किया जाता है। यह जांच कुछ ही सेकंड में हो जाती है और धातु में मौजूद सोना, चांदी, तांबा, जस्ता आदि का प्रतिशत स्क्रीन पर आ जाता है। बिना धातु को नुकसान पहुंचाए जांच संभव होती है। 2. एसिड टेस्ट यह पुराना और सस्ता तरीका है, परन्तु इसमें वस्तु को थोड़ा खरोंचना पड़ता है। धातु पर अलग-अलग एसिड की बूंदें डालकर उसकी प्रतिक्रिया देखी जाती है। रंग बदलने से शुद्धता का अनुमान लगाया जाता है, लेकिन यह तरीका पूरी तरह सटीक नहीं होता। 3. कैरट माप यह पारंपरिक तरीका है, जिसमें काली पत्थर (टच स्टोन) पर आभूषण को रगड़ा जाता है और फिर एसिड से परीक्षण किया जाता है। इससे लगभग अंदाजा लग जाता है कि सोने की कितनी कैरट की शुद्धता है (जैसे 22 कैरट, 18 कैरट आदि)। 4. फायर एस्से यह सबसे विश्वसनीय और शुद्धता वाला परीक्षण होता है, लेकिन प्रक्रिया लंबी और महंगी होती है। इसमें धातु को उच्च तापमान पर पिघलाकर उसके तत्वों को अलग किया जाता है। इसका उपयोग आमतौर पर सरकारी मानक प्रयोगशालाओं में किया जाता है। 5. अल्ट्रासोनिक टेस्ट इसका उपयोग आभूषणों की भीतरी संरचना देखने के लिए किया जाता है ताकि यह पता चले कि अंदर कोई मिलावट या नकलीपन है या नहीं। क्या होगा लाभ नकली या मिलावटी धातु की पहचान दान प्रक्रिया में पारदर्शिता मंदिर संपत्ति का सही लेखा-जोखा अभी अप्रूवल मिला है, जल्द ही टंच मशीन खरीदी जाएगी अधिकतर दुकानों और मंदिरों में XRF आधारित टंच मशीन का ही उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह तेज, सटीक और बिना नुकसान के काम करती है। अभी तो सिर्फ अप्रूवल मिला है, जल्द ही मशीन क्रय की जाएगी, उस मशीन से यह फायदा होगा कि हाथों हाथ वैरिफिकेशन होगा, उसमें तत्काल मालूम होगा कि वस्तु कितनी शुद्ध है। –प्रथम कौशिक, प्रशासक, महाकाल मंदिर

राज्य में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी को ऐतिहासिक रूप से 99.47 % के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई

प्रदेश में पारेषण उपलब्धता का नया कीर्तिमान 98 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले हासिल किया 99.47 प्रतिशत मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग पारेषण उपलब्धता बढ़कर 99.47 प्रतिशत तक हो गई राज्य में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी को ऐतिहासिक रूप से  99.47 % के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के विद्युत क्षेत्र में ट्रांसमिशन नेटवर्क (पारेषण प्रणाली) की अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तारीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इसके फलस्वरूप राज्य में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) को ऐतिहासिक रूप से  99.47 प्रतिशत के उच्चतम स्तर तक पहुँचाने में सफलता प्राप्त हुई है। ऊर्जा मंत्री तोमर ने जानकारी दी है कि मध्यप्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2024-25 के लिये निर्धारित 98 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले इस वित्तीय वर्ष में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) बढ़कर 99.47 प्रतिशत तक हो गई है।  वर्ष 2023-24 में पारेषण उपलब्धता (ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी) 99.42 प्रतिशत के मुकाबले यह उल्लेखनीय सुधार है, जो राज्य विद्युत कंपनियों की कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रदेश के विद्युत क्षेत्र की यह सफलता राज्य के लिए गर्व की बात है, इस उपलब्धि के लिये उन्होंने विद्युत कार्मिकों को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी, बल्कि उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता होगी बेहतर तोमर ने  कहा है कि एम.पी. ट्रांसको द्वारा किए गए नवाचारों, उन्नत तकनीकी समाधानों जैसे स्काडा प्रणाली, विद्युत ग्रिडों की निगरानी और समय-समय पर रख-रखाव के चलते यह सफलता संभव हो पाई है। कंपनी द्वारा विद्युत नेटवर्क के आधुनिकीकरण और क्षमतावर्धन की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पारेषण उपलब्धता अधिक होने के फायदे किसी भी ट्रांसमिशन सिस्टम में ट्रांसमिशन अवेलेबिलिटी (पारेषण उपलब्धता) अधिकतम होने से विद्युत आपूर्ति में बाधाएँ कम होती हैं, जिससे उपभोक्ताओं को निरंतर बिजली मिलती है। इससे औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है। यह प्रणाली की विश्वसनीयता और दक्षता को भी सुनिश्चित करता है। साथ ही आपात स्थितियों में शीघ्र बिजली आपूर्ति संभव होती है।  

प्रदेश में संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलोें की प्रक्रिया को स्थान परिवर्तन का नाम दिया

भोपाल मध्यप्रदेश में ट्रांसफर पर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य के संविदाकर्मियों को भी अब हटाकर इधर से उधर किया जा सकेगा। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों को नई जगह पर पदस्थापना के लिए वर्तमान स्थल पर पदस्थापना का अनुबंध समाप्त कर नई पदस्थापना का अनुबंध करना होगा। हालांकि नई पदस्थापना के लिए उन्हें भत्ता और छुट्‌टी का लाभ नहीं मिलेगा। विभाग ने संविदा कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलोें की इस प्रक्रिया को स्थान परिवर्तन का नाम दिया है। जिले में कार्यरत संविदा कर्मचारियों में से केवल 10 प्रतिशत को ही स्थान परिवर्तित किया जा सकेगा। एमपी में कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादलों के लिए ​30 मई तक का समय नियत है। राज्य के नियमित कर्मचारियों, अधिकारियों के जैसे ही संविदा कर्मचारियों के लिए भी नई तबादला प्रक्रिया लागू की गई है। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए प्रावधान जारी किए हैं। अभी तक इनके तबादलों के लिए कोई नीति नहीं बनाई गई थी। संविदा कर्मचारियों के तबादलों के प्रावधान नई जगह पर पदस्थापना के लिए पुराना अनुबंध निरस्त करना होगा। नई पदस्थापनास्थल पर नियोक्ता नया कार्य सौंपेगा। स्थान परिवर्तन होने पर पांच साल तक वहीं रहना होगा। नए पदस्थापना स्थल के लिए यात्रा भत्ता या छुट्‌टी का लाभ नहीं मिलेगा। आदेश जारी होने के दो सप्ताह में संविदाकर्मी को कार्यमुक्त करना होगा। नगर निगम कमिश्नर ने लिया बड़ा एक्शन, शुरू की बदलाव की तैयारी…  नगर निगम में वार्ड कर्मचारियों का रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने और टैक्स कलेक्शन में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद कमिश्नर ने अब नगर निगम में अंगद की तरह जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जोनल अधिकारियों को बदलने के बाद अब इंजीनियर और बाबुओं की लिस्ट तैयार की गई है जिन्हें एक ही विभाग में नौकरी करते कई वर्ष बीत चुके हैं। सूची में कई अधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने वर्ष 2003 में नगर निगम में नौकरी मिलने के बाद एक ही विभाग में पूरी सर्विस निकाल दी। अधिकारी इसलिए सुनवाई नहीं करते नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने नगर परिषद की बैठक में आरोप लगाया था कि नगर निगम में पिछले कई सालों से एक ही विभाग में इंजीनियर अधिकारी और कर्मचारी जमे हुए हैं। भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और जनप्रतिनिधियों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 10 से 25 साल तक नौकरी करने वालों पर गाज इंजीनियर लालजी चौहान ने वर्ष 2010 से अब तक बिल्डिंग परमिशन सेल में ही पूरी नौकरी की। एई महेश सिरोहिया ने 22 साल, राजाराम अहिरवार ने वर्ष 2003 से अब तक, नंदकिशोर डेहरिया ने भी 2003 से अब तक एवं डीके सिंह राजधानी परियोजना प्रशासन से प्रतिनियुक्ति पर आकर वर्ष 2018 से अब तक एक ही विभाग में जमे हैं। इसी प्रकार सब इंजीनियर गोपी लाल चौधरी 22 साल से, अंकित शाक्य, अमित दुबे, श्रीपदा दीक्षित ने 2018 में नौकरी ज्वाइन करने के बाद भवन अनुज्ञा से संबंधित काम संभाले हुए हैं। एक ही विभाग में जमे बाबुओं में सुनील जैन 30 साल, राकेश लहरिया 30 साल, मोहमद साबिर 20 साल, तपेंद्र सिंह 10 साल, रामचरण मालवीय 15 साल, सरिता बर्वे 22 साल, साधु प्रसाद खंडित 22 साल, सिद्दीकी हसन को 25 वर्ष का समय एक ही विभाग में हो चुका है। अब होगा बदलाव जोनल अफसरों के प्रभारों में परिवर्तन किया गया है। एक ही विभाग में बरसों से जमे अन्य स्टाफ भी बदला जाएगा। –हरेंद्र नारायण, निगमायुक्त

ग्वालियर से भोपाल के बीच यात्रा करने वाले के लिए अच्छी खबर, अब दिन में भोपाल आएंगे शाम को वापस ग्वालियर लौट सकेंगे, जाने कैसे

भोपाल ग्वालियर से भोपाल के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है. अब वो जिस दिन भोपाल आएंगे, उसी दिन वापस ग्वालियर भी लौट सकेंगे. रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय भोपाल-ग्वालियर के बीच यात्रियों के दबाव को कम करने और लंबे समय से की जा रही मांग के बाद लिया है. अब सप्ताह में प्रतिदिन ट्रेन की सुविधा मिलने से ग्वालियर और भोपाल के बीच आवागमन और भी सुगम होगा. इसका सबसे अधिक फायदा प्रतिदिन अप डाउन करने वालों को होगा. अब प्रतिदिन मिलेगी भोपाल इंटरसिटी की सुविधा मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी ने बताया कि “भोपाल मंडल द्वारा यात्रियों की सुविधा और मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रेन सेवाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है. इसी क्रम में रेल प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ट्रेन संख्या 12197/12198 ग्वालियर-भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस (भोपाल इंटरसिटी) की सेवा को 5 दिन से बढ़ाकर प्रतिदिन कर दिया गया है.” बुधवार और रविवार को नहीं चलती थी ट्रेन वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि “यह गाड़ी अभी तक सप्ताह में 5 दिन (बुधवार और रविवार को छोड़कर) संचालित होती थी. अब यह गाड़ी दिनांक 26 मई 2025 से ग्वालियर और भोपाल दोनों दिशाओं से प्रतिदिन चलाई जाएगी. इस निर्णय से न केवल यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे, बल्कि इन दोनों शहरों के बीच आवागमन और अधिक सुगम होगा.” इन स्टेशनों पर होगा भोपाल इंटरसिटी का स्टाप भोपाल इंटरसिटी दोनों दिशाओ में ग्वालियर जंक्शन, मोहना, शिवपुरी, कोलारस, बदरवास, गुना, शाढोरा गांव, अशोकनगर, पिपराइगांव, मुंगावली, बीना जंक्शन, गंज बासौदा, विदिशा, भोपाल जंक्शन पर ठहराव लेती है. इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. अभी यह ट्रेन (12198) ग्वालियर जंक्शन से सुबह 6:20 बजे चलती है और दोपहर 2:35 बजे भोपाल जंक्शन पहुंचती है. भोपाल से ग्वालियर जाने वाली इंटरसिटी ट्रेन 12197, भोपाल जंक्शन से दोपहर 3:15 से चलती है और ग्वालियर जंक्शन पर देर रात 11:58 बजे पहुंचती है. सिंधिया ने की थी मांग, रेलवे ने किया खंडन बता दें कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी-ग्वालियर-भोपाल सुपरफास्ट एक्सप्रेस को सातों दिन चलाने की मांग थी. जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने यह ट्रेन प्रतिदिन चलाने का निर्णय लिया है. इसको लेकर सिंधिया के कार्यालय से 22 मई को प्रेस नोट भी जारी किया गया था. हालांकि 23 मई को रेलवे ने अधिकारिक प्रेस नोट जारी कर बताया कि भोपाल रेल मंडल के यात्रियों की सुविधा और मांग को देखते हुए भोपाल -ग्वालियर इंटरसिटी को प्रतिदिन चलाने का निर्णय लिया गया है.

बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल, बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब

बालाघाट शुगर के मरीजों के लिए अच्छी खबर. फूंक मारकर पता कीजिए शरीर का शुगर लेवल. अब बार बार सुई चुभाने और खून निकालने की जरूरत नहीं है, बस एक फूंक मारो और जान लो अपना शुगर लेवल. बालाघाट के प्रोफेसर और छात्रों ने निकाली ऐसी अनोखी तरकीब. सेकंडों में पता करें अपना सुगर लेवल बालाघाट के शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर और छात्रों ने मिलकर एक ऐसी मशीन बनाई है, जिससे आप उस मशीन में फूंक मारकर सेकंडों में पता कर सकेंगे कि आपके शरीर का शुगर लेवल कितना है. अब आपको बार बार डॉक्टर के पास जाने के झंझट से छुटकारा मिल जायेगा साथ ही आप अपने शरीर का ध्यान भी रख सकेंगे. प्रोफेसर और कॉलेज के छात्रों के द्वारा बनाई गई इस मशीन की तारीफ अब हर तरफ हो रही है. भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम में बालाघाट के इस प्रोजेक्ट ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से 150 प्रोजेक्ट चयनित हुए थे. बालाघाट के शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 प्रोजेक्ट को पहला स्थान बता दें कि भोपाल में आयोजित सृजन कार्यक्रम के लिए पूरे प्रदेश से 150 प्रोजेक्ट चयन किये गये थे, जिसमें इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट का भी चयन हुआ था. बालाघाट के इस शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 नाम के प्रोजेक्ट को पहला स्थान मिला. शुगर ब्रीथ एसीटोन 3.0 मशीन क्या है? यह एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें बिना सुई चुभाए यानी शरीर से बिना खून निकाले ही शुगर लेवल का पता लगाया जा सकता है. इस डिवाइस में सिर्फ फूंक मारना होता है. इसके बाद ये मशीन चंद सेकंड में ही आपका शुगर लेवल बता देती है. इसमें एकदम इग्जैक्ट शुगर लेवल की मात्रा तो नहीं पता चलती, लेकिन ये तीन तरह से शुगर की रीडिंग दिखाती है, इसमें ‘लो’ का मतलब शुगर लेवल कम है. वहीं, ‘मॉडरेट’ यानी शुगर लेवल सामान्य है, जबकि मशीन में जब ‘हाई’ दिखाता है, तो शुगर लेवल ज्यादा है, यानी कि डायबिटीज होने की आशंका है. एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन गौरतलब हो कि शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे इस प्रोजेक्ट पर पिछले 8 सालों से काम कर रहे थे तब कहीं जाकर यह डिवाइस बन पाई है. प्रोफेसर डॉ. दुर्गेश अगासे ने बताया कि “2017 में उन्होंने इस प्रोजेक्ट को बनाना शुरू किया था. शुगर के मरीजों में कीटोजेनिक मेटाबॉलिज्म शुरू हो जाता है. उनकी बॉडी के अंदर कीटोन का निर्माण होने लगता है. फिर कीटोन में उपस्थित एसिटोन उनकी सांस में आने लगता है. ऐसे में एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन किया गया. फिर इस आधार पर इस मशीन का आविष्कार हो पाया है. इसका पेटेंट साल 2023 में किया गया. इस मॉडल में इंजीनियरिंग की अहम भूमिका रही, क्योंकि एसिटोन और ग्लूकोज के संबंध का अध्ययन और इसके अनुपात को स्पष्ट करने के लिए कोडिंग की गई. दोनों के संबंध को स्थापित करने के लिए फिर प्रोग्रामिंग की गई. ऐसे में इंजीनियरिंग की मदद से यह प्रोजेक्ट पूरा हो पाया.” ब्रेथ एनलाइजर डिवाइस, एसिटोन पर करती है काम जनरल फिजिशियन डॉ. वेदप्रकाश लिल्हारे ने चर्चा में बताया कि “प्रोफेसर और बच्चों के द्वारा यह एक अच्छा नवाचार है, जिस तरह से खून निकाल कर शुगर की जांच होती थी उससे छुटकारा मिलेगा. वहीं, डॉक्टर ने बताया कि प्रोफेसर अगासे का जो ब्रेथ एनलाइजर है वो एसिटोन पर काम कर रहा है और एसिटोन हर शुगर के मरीजों में नहीं बनता है. मैं उनसे लगातार चर्चा में हूं, वे और क्या अपडेट कर रहे हैं इसकी चर्चा भी लगातार हो रही है.”

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खुलकर समर्थन दिया

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विचार को खुलकर समर्थन दिया है. उनका तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से न केवल सरकार के कामकाज में बाधा आती है, बल्कि इसका खर्च भी आसमान छू रहा है. उन्होंने बताया कि 1952 में चुनावों पर 9,000 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा पहुंच गया. चौहान के मुताबिक अगर राज्यों के विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनाव भी जोड़ लिए जाएं, तो यह खर्च 7 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है. चौहान ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि सितंबर 2023 से लेकर जून 2024 तक आचार संहिता लागू रहने के कारण कोई बड़ा काम नहीं हो सका. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अधिकारियों का ध्यान भी चुनावी ड्यूटी में लगा रहता है जिससे योजनाओं की रफ्तार धीमी हो जाती है. ऐसे में एक बार में सभी चुनाव कराना ही बेहतर विकल्प है. कांग्रेस की आशंकाएं: लोकतंत्र पर खतरा? कांग्रेस पार्टी इस विचार का खुलकर विरोध करती रही है. पार्टी का मानना है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में संघीय ढांचे के खिलाफ है. कांग्रेस का तर्क है कि इससे राज्यों की स्वायत्तता पर चोट पहुंचेगी और केंद्र सरकार को अतिरिक्त राजनीतिक लाभ मिल सकता है. पार्टी यह भी कहती है कि हर राज्य की राजनीतिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं, ऐसे में एक साथ चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है. क्षेत्रीय दलों की राय: सत्ता के केंद्रीकरण का खतरा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), वाम मोर्चा, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और अन्य क्षेत्रीय दल भी इस प्रस्ताव पर सवाल उठा चुके हैं. टीएमसी की ओर से कहा गया है कि यह प्रस्ताव भारतीय लोकतंत्र की विविधता को समाप्त करने की दिशा में एक कदम है. वाम मोर्चा इसे चुनावी ‘केंद्रवाद’ करार देता है, जिससे क्षेत्रीय मुद्दे गौण हो जाएंगे. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और राजद ने किया विरोध राजद के नेता भी मानते हैं कि यह एक राजनीतिक चाल है जिसका उद्देश्य विपक्षी दलों को कमजोर करना और केंद्र की सत्ता को मजबूत करना है. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने भी कहा है कि इससे राज्यों की राजनीति दब जाएगी और केवल राष्ट्रीय मुद्दे ही चुनाव में हावी रहेंगे, जिससे स्थानीय जनता की समस्याएं अनसुनी रह जाएंगी. भाजपा की रणनीति और नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के वरिष्ठ नेता शिवराज सिंह चौहान का बयान इस दिशा में पार्टी की रणनीतिक सोच को दर्शाता है. भाजपा लगातार इस विषय को उठाती रही है और अब इसे एक प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार इस विचार का समर्थन किया है. सहम‍ति होना मुश्किल, राजनेताओं ने बना दी कठिन राह शिवराज सिंह चौहान का बयान भाजपा के भीतर इस मुद्दे को लेकर एकता और दृढ़ता को दर्शाता है, जबकि विपक्षी दल इससे लोकतंत्र और संघीय ढांचे के लिए खतरा मानते हैं. जहां सरकार इसे खर्च और प्रशासनिक कुशलता के नजरिए से देख रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला कदम मानता है.  

बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही

मध्यप्रदेश को अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार संकल्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नीति आयोग की विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047 बैठक में की सहभागिता बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मे नीति आयोग की शासी परिषद (गवर्निंग काउंसिल) की 10वीं बैठक में भाग लिया। यह बैठक ‘विकसित राज्य फॉर विकसित भारत @2047’ थीम पर केंद्रित रही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत-आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के विजन से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की प्रथम पंक्ति में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में शामिल होकर प्रधानमंत्री मोदी का मार्गदर्शन प्राप्त किया और इसे भारत के भविष्य निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर कहा कि प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में सभी राज्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश विकास और लोक कल्याण के संकल्प पथ पर अग्रसर है और निरंतर नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।  

शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मनेन्द्रगढ़ में जनभागीदारी समिति की बैठक सम्पन्न

मनेंद्रगढ़  शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़ में नवगठित जनभागीदारी समिति की प्रथम बैठक का आयोजन उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र सिंह राणा ने की। अध्यक्ष महोदय एवं सभी सदस्यगण पहली बार महाविद्यालय पधारे, जिनका स्वागत प्राचार्य डॉ.श्राबनी चक्रवर्ती द्वारा पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मानपूर्वक किया गया। बैठक की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए डॉ.चक्रवर्ती ने समिति के समक्ष प्रमुख एजेण्डा प्रस्तुत किए तथा महाविद्यालय की वर्तमान स्थिति से सभी सदस्यों को अवगत कराया। उन्होंने महाविद्यालय के समग्र विकास हेतु निम्नलिखित आवश्यक प्रस्ताव रखे- महाविद्यालय की बाऊंड्री वॉल का निर्माण, अतिरिक्त अध्यापन कक्षों की आवश्यकता, पेयजल व्यवस्था के अंतर्गत वॉटर कूलर की स्थापना, रिक्त पदों पर विशेषकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वैकल्पिक नियुक्ति की आवश्यकता आदि। प्राचार्य डॉ. चक्रवर्ती ने इस बात पर विशेष बल दिया कि महाविद्यालय को स्नातकोत्तर स्तर का दर्जा प्राप्त है, किन्तु वर्तमान में केवल चार विषयों में ही स्नातकोत्तर कक्षाएं संचालित हो रही हैं। उन्होंने समिति से आग्रह किया कि हिन्दी, अंग्रेज़ी, इतिहास, अर्थशास्त्र, प्राणीशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, भौतिकशास्त्र, गणित एवं भूगर्भशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ कराने हेतु शासन स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं। इसके साथ ही, महाविद्यालय में शिक्षकों व कर्मचारियों के रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती सुनिश्चित कराने की आवश्यकता भी जताई गई। बैठक में प्रस्तुत सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया तथा महाविद्यालय स्तर पर किए जाने वाले कार्यों पर समिति ने सर्वसम्मति से अपनी सहमति प्रदान की। शासन स्तर पर संपादित कार्यो के लिए आवश्यक प्रयास किए जाने का भी समिति द्वारा आश्वासन दिया गया। आज की इस बैठक में समिति के माननीय सदस्यगण श्री धमेन्द्र पटवा, सुंदरलाल दुग्गड़, मुरलीधर सोनी,  शैलेष जैन, आदित्य राज डेविड, गौरव अग्रवाल, राजकुमार गुप्ता, जीतेन्द्र यादव एवं महाविद्यालयीन स्टॉफ से डॉ. रश्मि तिवारी, डॉ.सुशील कुमार तिवारी, पुष्पराज सिंह, रामनिवास गुप्ता एवं मनीष श्रीवास्तव की गरिमामयी उपस्थिति रही। निश्चित ही आज की इस बैठक में लिए गए निर्णय महाविद्यालय की शैक्षणिक एवं भौतिक उन्नति हेतु रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानि पीएचई में बड़ा फेरबदल किया गया

भोपाल   मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानि पीएचई में बड़ा फेरबदल किया गया है। प्रदेशभर में विभाग के 54 अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। कई कर्मचारियों को भी हटा दिया गया है। पीएचई के 100 से ज्यादा अधिकारियों, कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। इनमें 54 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन यंत्री और सहायक यंत्रियों के अलावा, उपयंत्रियों, मानचित्रकार, समयपाल, हेल्पर तथा चौकीदारों के भी ट्रांसफर किए गए हैं। 54 वरिष्ठ अधिकारी स्थानांतरित पीएचई के 54 वरिष्ठ अधिकारियों को स्थानांतरित किया गया है। इनके ट्रांसफर आर्डर जारी कर दिए गए हैं जिनमें अनेक मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन और सहायक यंत्री शामिल हैं। मुख्य अभियंता एनएस जौहरी को भोपाल से ग्वालियर, प्रभारी मुख्य अभियंता आरएलएस मौर्य को ग्वालियर से अधीक्षण यंत्री पन्ना, अधीक्षण यंत्री संजय कुमार को भोपाल से प्रभारी मुख्य अभियंता इंदौर, कार्यपालन यंत्री महेंद्र सिंह को पन्ना से प्रभारी अधीक्षण यंत्री रीवा, कार्यपालन यंत्री व्हीके छारी को ग्वालियर से प्रभारी अधीक्षण यंत्री मुरैना, कार्यपालन यंत्री रामकुमार सिंह राजपूत को भिंड से प्रभारी अधीक्षण यंत्री ग्वालियर, कार्यपालन यंत्री संजीव कुमार गुप्ता को भोपाल से प्रभारी अधीक्षण यंत्री प्रमुख अभियंता कार्यालय भोपाल, दिलीप कुमार जैन को प्रमुख अभियंता कार्यालय से प्रभारी अधीक्षण यंत्री प्रभारी अधीक्षण यंत्री भोपाल रीजन, मोनिका सप्रे को इंदौर से प्रभारी अधीक्षण यंत्री इंदौर, केएस कुसरे डिंडोरी से सीई आफिस जबलपुर, संतोष साल्वे को विदिशा से कार्यपालन यंत्री इंदौर बनाकर भेजा गया है। बीएस अचाले प्रभारी कार्यपालन यंत्री खरगोन से प्रभारी कार्यपालन यंत्री आगर मालवा, सहायक यंत्री मुजीब उल हसन को सिवनी मालवा नर्मदापुरम से प्रभारी कार्यपालन यंत्री नर्मदापुरम, लखन प्रताप सिंह शिवपुरी से प्रभारी कार्यपालन यंत्री श्योपुर, शुभम अग्रवाल श्योपुर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री शिवपुरी,अमित कुमार शाह मऊगंज से प्रभारी कार्यपालन यंत्री अनूपपुर, पवनसुत गुप्ता हरदा से प्रभारी कार्यपालन यंत्री कटनी, प्रदीप कुमार सक्सेना भोपाल से प्रभारी कार्यपालन यंत्री सीहोर, अफजल अमान उल्लाह शहडोल से प्रभारी कार्यपालन यंत्री डिंडोरी, नरेश कुमार भास्कर उज्जैन से प्रभारी कार्यपालन यंत्री हरदा, संजीव कुमार गुप्ता भिंड से प्रभारी कार्यपालन यंत्री ग्वालियर, वर्षा शिवपुरे इंदौर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री खंडवा, आशीष मार्तंड रायसेन से प्रभारी कार्यपालन यंत्री भोपाल, अमित सिंह देवास से प्रभारी कार्यपालन यंत्री भिण्ड, नरेश कुवाल, रतलाम से प्रभारी कार्यपालन यंत्री देवास, त्रयंबकेश कुमार द्विवेदी सीधी से प्रभारी कार्यपालन यंत्री सीधी, सुरेश चंद्र जनोलिया बड़वानी से प्रभारी कार्यपालन यंत्री धार, संचित खेत्रपाल छतरपुर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री पन्ना, अनुभव चतुर्वेदी दतिया से प्रमुख अभियंता कार्यालय भोपाल, श्रीअंका वासनिक जबलपुर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री परासिया छिंदवाड़ा, पदमा गोमे इंदौर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री नीमच, सीताराम जांगड़े उज्जैन से प्रभारी कार्यपालन यंत्री सागर, राकेश राहोरा ग्वालियर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री ग्वालियर, रितिका गुप्ता भोपाल से प्रभारी कार्यपालन यंत्री निवाड़ी, अशोक मुकाती दमोह से प्रभारी कार्यपालन यंत्री दमोह, संजय पाण्डेय रीवा से प्रभारी कार्यपालन यंत्री सतना, श्वेतांक चौरसिया सागर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री रीवा, नवल सिंह भूरिया धार से प्रभारी कार्यपालन यंत्री सरदारपुर धार, अनुपम गहोई खंडवा से प्रभारी कार्यपालन यंत्री विदिशा, राहुल सूर्यवंशी खरगोन से प्रभारी कार्यपालन यंत्री खरगोन, राजेंद्र सिंह बामनिया इंदौर से प्रभारी कार्यपालन यंत्री बड़वानी, पूर्वा शर्मा राजगढ़ से कार्यालय मुख्य अभियंता इंदौर, पूजा शर्मा, नरसिंहपुर से देवास, अपराजिता पांडे राजगढ़ से कार्यालय अधीक्षण यंत्री भोपाल, विकल्प पटेल कटनी से कार्यालय मुख्य अभियंता जबलपुर, गंगा सिंह रावत दमोह से बड़वानी, दीपक मौर्य शिवपुरी से राजगढ़, पंकज तंतुवाय पन्ना से कटनी, एसके चौधरी परासिया से प्रभारी सहायक यंत्री सिवनी, करिश्मा श्रीवास्तव देवास को कार्यालय मुख्य अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (वि.यां.) परिक्षेत्र भोपाल, शिवराम सोलंकी खरगोन को सागर का प्रभारी कार्यपालन यंत्री बनाया गया है। सब इंजीनियर से लेकर चौकीदार तक के ट्रांसफर प्रतिबंध हटने के साथ ही पीएचई में जबर्दस्त तबादले किए जा रहे हैं। विभाग के सब इंजीनियरों, मानचित्रकार, समयपाल, हेल्पर, चौकीदारों के नाम भी तबादला सूची में शामिल हैं।

यात्रियों को बड़ी राहत – रानी कमलापति-आधारताल एक्सप्रेस में 3 अतिरिक्त कोच स्थायी रूप से जोड़े गए

भोपाल यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए रेल प्रशासन द्वारा गाड़ी संख्या 22187/22188 रानी कमलापति-आधारताल एक्सप्रेस में 2 स्लीपर और 1 थर्ड एसी कोच सहित कुल तीन अतिरिक्त कोच स्थायी रूप से जोड़े जा रहे हैं। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि 28 मई 2025 से इस ट्रेन में 2 स्लीपर और 1 थर्ड एसी कोच की वृद्धि की जाएगी। अब यह ट्रेन कुल 23 कोचों के साथ संचालित होगी, जिससे अधिक यात्रियों को आरक्षण की सुविधा मिल सकेगी। इस निर्णय से गर्मियों की छुट्टियों में प्रतीक्षा सूची में राहत मिलेगी और स्लीपर व एसी श्रेणी में यात्रियों को अतिरिक्त सीटों का लाभ मिलेगा। यह गाड़ी दोनों दिशाओं में रानी कमलापति, नर्मदापुरम, इटारसी जंक्शन, पिपरिया, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर, श्रीधाम, मदन महल, जबलपुर, आधारताल स्टेशन पर ठहराव लेती है

ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते के तहत दो मूकबधिर नाबालिग बालकों का भोपाल स्टेशन पर किया गया रेस्क्यू

भोपाल भोपाल मंडल रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा मानवीय संवेदनाओं को सर्वोपरि रखते हुए एक अत्यंत सराहनीय कार्य “ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते” के अंतर्गत संपन्न किया गया। इस अभियान के तहत भोपाल स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक-01 पर ड्यूटी पर तैनात सहायक उपनिरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने नियमित गश्त के दौरान मानवीय दृष्टिकोण से एक संवेदनशील कार्य को अंजाम दिया।  प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेन संख्या 07076 गोरखपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस के जनरल कोच की जांच के दौरान दो मूकबधिर नाबालिग बालक भयभीत एवं असहाय अवस्था में दरवाजे के पास बैठे पाए गए। स्थानीय यात्रियों से पूछताछ करने पर कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई। तत्पश्चात दोनों बच्चों को सुरक्षा एवं सांत्वना प्रदान करते हुए आरपीएफ पोस्ट, भोपाल लाया गया। आरपीएफ पोस्ट में दोनों बच्चों ने इशारों के माध्यम से फोन करने की इच्छा जताई, जिस पर तत्परता दिखाते हुए उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। बातचीत के दौरान यह जानकारी प्राप्त हुई कि दोनों बालक – प्रवीण कुमार, उम्र 14 वर्ष तथा सावन कुमार, उम्र 17 वर्ष – झारखंड राज्य के देवघर जिले के निवासी हैं और दिनांक 16.05.2025 से लापता थे। इस संदर्भ में स्थानीय थाना कुंडा एवं थाना जसडीह में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। परिजनों को सूचित किया गया कि उनके बच्चे भोपाल स्टेशन पर सुरक्षित पाए गए हैं और उन्हें समुचित देखभाल प्रदान की जा रही है। बालकों को चिकित्सकीय परीक्षण हेतु जयप्रकाश नारायण अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के उपरांत उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के अध्यक्ष श्री धनीराम सिंह पवार एवं अन्य सदस्यों द्वारा विचारोपरांत किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 27 के अंतर्गत दोनों बालकों को अस्थाई संरक्षा हेतु एसओएस बालग्राम (स्पेशल) संस्था को सौंपा गया। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि यह कार्य न केवल रेलवे सुरक्षा बल की सतर्कता एवं तत्परता का प्रतीक है, बल्कि भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों तथा समाज के विशेष रूप से सक्षम वर्ग के प्रति निभाई जा रही सामाजिक जिम्मेदारी का भी उदाहरण है। भोपाल मंडल द्वारा भविष्य में भी “ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते” जैसे मानवीय प्रयासों को निरंतर जारी रखा जाएगा।

हाईकोर्ट में रिटायर्ड लेक्चरर की दायर की गई अवमानना याचिका पर सुनवाई, DEO- BEO के खिलाफ वांरट

ग्वालियर  ग्वालियर हाईकोर्ट में स्कूल शिक्षा विभाग के रिटायर्ड लेक्चरर द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और जिला शिक्षा अधिकारी के साथ ही BEO को 05-05 हजार जमानती वारंट से तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी। दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग के रिटायर्ड लेक्चर भारत सिंह सिकरवार के एडवोकेट आरबीएस तोमर ने साल 2023 में अवमानना याचिका दायर की गई थी, जिसमें कोर्ट को बताया गया था कि 2020 में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वार्षिक इंक्रीमेंट की गणना का आदेश दिया था, ताकि उनकी पेंशन का पुनः निर्धारण किया जा सके। 6 साल बीतने के बाद भी हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश का पालन नहीं किया गया। ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद 28 नवंबर 2023 को नोटिस हुआ। जिसके अनुपालन प्रतिवेदन के लिए 3 सप्ताह का समय भी दिया गया। तब से लेकर अब तक दो बार पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिसे खारिज किया गया। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि 6 साल बीतने के बाद भी आदेश का पालन अभी तक नहीं किया जा सका है, बल्कि हर बार समय मांगा जाता रहा है। ऐसी स्थिति में लगता है कि अधिकारी आदेश का पालन करने में गंभीर नहीं है। लिहाजा कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार और BEO मंजू सिंह को 05-05 हजार के जमानती वारंट से तलब किया है।

12 वीं बोर्ड के छात्र-छात्राओं के लिए खुशखबरी, 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी स्टूडेंट्स को लैपटॉप के लिए राशि देने का आदेश जारी

भोपाल मध्य प्रदेश के 12वीं के बोर्ड छात्रों के लिए खुशखबरी है. माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी छात्रों को लैपटॉप के लिए राशि देने का आदेश जारी किया है. शुक्रवार को लोक शिक्षण संचालनालय ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं. जिला शिक्षा अधिकारियों से बच्चों के बैंक खाता की जानकारी मांगी गई है. संचालक लोक शिक्षण डीके कुशवाहा ने मध्य प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर निर्देश दिया है. मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के तहत मिल रहा लाभ प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षा मंडल के सत्र 2024 25 की कक्षा 12वीं की परीक्षा में 75% या उससे अधिक अंक लाने वाले छात्रों के शिक्षा पोर्टल पर दर्ज बैंक खाता संबंधित पत्र जारी किया जाए. जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में संचालक ने साफ किया कि पिछले वर्षों में देखा गया था कि कई छात्रों के बैंक खाता उनके परिवारजनों के नाम से संचालित थे ओर कई बैंक खातों में गड़बड़ी भी देखी गई,जिससे वन क्लिक के माध्यम से छात्रों के खाते में राशि ही नहीं पहुंच पाई थी. ऐसे में पूर्व सावधानी से पात्र छात्रों के बैंक खाते की प्रविष्टि की जाए. एक हफ्ते में पोर्टल में दर्ज करना होगी जानकारी इसमें पात्र विद्यार्थियों के नाम से संचालित बचत बैंक खाता क्रमांक, आईएफसी कोड और बैंक शाखा का नाम एक सप्ताह के अंदर शिक्षा पोर्टल पर दर्ज करवाना है। प्रदेश में मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल से 12वीं में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाती है। इस बार माशिम की 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 94 हजार के आसपास है। जुलाई में लैपटाप की राशि मिलने की संभावना पिछले सत्र के मेधावी विद्यार्थियों को इस साल फरवरी में लैपटॉप की राशि दी गई थी। इस बार सरकार का प्रयास है कि जुलाई तक विद्यार्थियों को लैपटॉप की राशि प्रदान कर दी जाए। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने अपलोड की पात्र स्टूडेंट्स की लिस्ट मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के अंतगर्त 12 वीं के एग्जाम में जिन छात्र-छात्राओं को लाभ मिलना है, उनकी लिस्ट माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने अपने पोर्टल पर अपलोड की है. यदि टॉपर छात्र-छात्राएं नाम देखना चाहते हैं, तो पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं. लैपटॉप के लिए पैसे मिलने की जानकारी जैसे ही टॉपर्स स्टूडेंट्स को मिली, तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे. योजना के मुख्य उद्देश्य…     डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना।     मेधावी छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देना।     छात्रों को तकनीकी दक्षता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करना।     शिक्षा में समानता और अवसर प्रदान करना। पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)…     आवेदक मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।     MP बोर्ड से 12वीं पास हो।     सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 85% अंक।     SC/ST/अन्य आरक्षित वर्ग के लिए न्यूनतम 75% अंक।     परिवार की वार्षिक आय 6 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।     आधार कार्ड, बैंक खाता, और आवश्यक दस्तावेज होना अनिवार्य। 1. आधिकारिक वेबसाइट [shikshaportal.mp.gov.in] पर जाएं। 2. ‘पात्रता जांचें’ लिंक पर क्लिक करें। 3. 12वीं बोर्ड का रोल नंबर दर्ज करें और जानकारी प्राप्त करें। 4. पात्रता मिलने पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें। 5. सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। 6. आवेदन सबमिट करें और प्रिंट निकाल लें। 7. आवेदन की स्थिति पोर्टल पर चेक करें। राशि ट्रांसफर सीधे DBT के जरिए बैंक खाते में…     चयनित छात्रों को 25,000 रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खाते में डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जाएगी।     राशि से छात्र अपने मनपसंद लैपटॉप खरीद सकते हैं।     साथ ही सरकार की ओर से सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। इस साल कितने प्रतिशत पर मिलेगा लैपटॉप?     सामान्य वर्ग के लिए 12वीं बोर्ड में 85% या उससे अधिक अंक।     SC/ST और अन्य आरक्षित वर्ग के लिए 75% या उससे अधिक अंक। फ्री लैपटॉप योजना के फायदे…     25,000 की आर्थिक सहायता सीधे खाते में।     छात्रों के लिए डिजिटल शिक्षा और तकनीकी कौशल विकास।     प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद।     ऑनलाइन शिक्षा में सहजता।     आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी।     सभी वर्गों के मेधावी छात्रों को समान अवसर। योजना से जुड़ी जरूरी जानकारियां (Important Information)… बिंदु                              जानकारी योजना का नाम       मध्य प्रदेश फ्री लैपटॉप योजना लाभार्थी                 12वीं में अच्छे अंक लाने वाले छात्र प्रोत्साहन राशि         ₹25,000 कटऑफ प्रतिशत     सामान्य – 85%, SC/ST – 75% आवेदन तरीका        ऑनलाइन जरूरी दस्तावेज        आधार, मार्कशीट, जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक आधिकारिक वेबसाइट     shikshaportal.mp.gov.in राशि का वितरण           डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर (DBT) योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज…     आधार कार्ड     12वीं बोर्ड की मार्कशीट     जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)     बैंक पासबुक या बैंक खाता विवरण पिछले वर्षों का डेटा और योजना की सफलता पिछले साल 78,641 छात्रों ने इस योजना का लाभ लिया। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में और अधिक मेधावी छात्र इस योजना का लाभ उठाएं और डिजिटल शिक्षा से जुड़ें। एमपी फ्री लैपटॉप योजना के लाभ…     ऑनलाइन पढ़ाई का मौका     प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी     तकनीकी कौशल में सुधार     रोजगार के नए अवसर     आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना डिजिटल युग में सफलता की एक मजबूत सीढ़ी… यह योजना मध्य प्रदेश के छात्रों के लिए डिजिटल युग में सफलता की एक मजबूत सीढ़ी साबित हो रही है। अगर आप भी 12वीं में अच्छे अंक लाए हैं तो इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

साउथ की फिल्म इंडस्ट्री को पातालकोट भाया, आज से शूटिंग शुरू, लोकल कलाकारों को भी मिलेगा मौका

छिंदवाड़ा  अब तक पातालकोट के आदिवासियों की अलग-अलग कहानी सुनी और देखी होगी. लेकिन अब पातालकोट के आदिवासी बड़े पर्दे पर नजर आएंगे. क्योंकि यहां की वादियों में भी लाइट, कैमरा और एक्शन की गूंज सुनाई देगी. साउथ की फिल्म इंडस्ट्री को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा का पातालकोट भा गया है. शनिवार से यहां पर तेलुगु फिल्म की शूटिंग शुरू हो रही है. जिसमें यहां के लोकल कलाकार भी शामिल होंगे. 25 दिनों तक पातालकोट में गूंजेगा लाइट कैमरा एक्शन जिले में पर्यटन विकास के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और इस कड़ी में मध्य प्रदेश पर्यटन दिवस के मौके पर शनिवार को एक तेलगू फिल्म की शूटिंग शुरू होगी. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और जिला प्रशासन के सहयोग से करीब 25 दिनों तक चलने वाली तेलगू फिल्म भार्गवी की शूटिंग की जाएगी. बता दें कि हर साल 24 मई को मध्य प्रदेश पर्यटन दिवस मनाया जाता है. फिल्मी पर्दे पर दिखेंगे पातालकोट के लोग अब तक पातालकोट के वनवासियों के बारे में अलग-अलग जानकारियां मिलीं कि जंगल में रहने वाले पातालकोट के आदिवासियों की जिंदगी भी अलग है. लेकिन अब फिल्म शूटिंग के जरिए पातालकोट के आदिवासी भी बड़े पर्दे पर नजर आएंगे. इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा. कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने बताया कि, ”पर्यटन विकास के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं. साऊथ फिल्म इंइस्ट्री से छिंदवाड़ा आ रहे प्रोड्यूसर, डायरेक्टर व फिल्मों की टीम से जुड़े कलाकारों व तकनीकी सहयोगियों को सुरक्षित माहौल और बिना परेशानी के फिल्म अनुमति व अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रहीं हैं. जिससे साऊथ फिल्म इंइस्ट्री को छिंदवाड़ा और यहां का हिल स्टेशन तामिया और पातालकोट भा गए हैं. मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड व जिला प्रशासन के संवेदनशील रूख के कारण तामिया में तेलगू फिल्मों की शूटिंग का सिलसिला आगे बढ़ रहा है और शनिवार से तामिया में तेलगू फिल्म भार्गवी की शूटिंग शुरू होने जा रही है.” साउथ के सुपरस्टार छिंदवाड़ा में डालेंगे डेरा साउथ के जाने माने निर्देशक निर्माता जी अशोक इस फिल्म की शूटिंग करेंगे, जिसमें कई बेहतरीन कलाकार हिस्सा लेंगे. बता दें कि जी अशोक ने दुर्गामती, भागमती, कुछ खट्टा हो जाए और चित्रांगदा जैसी बड़ी फिल्में बनाईं हैं. इस फिल्म से निर्देशक वाई एस श्रीनिवास वर्मा भी जुड़े हैं, जो साऊथ फिल्म इंइस्ट्री के बड़े निर्देशक के रूप में पहचाने जाते हैं. तामिया की वादियों और होमस्टे में होगी शूटिंग तामिया में फिल्म की शूटिंग के व्यवस्था से जुड़े लाइन प्रोड्यूसर उमर गुल खान ने बताया कि, ”भार्गवी फिल्म की शूटिंग के दौरान तामिया, पातालकोट, पर्यटन ग्राम काजरा की ज्यादा से ज्यादा लोकेशन दिखाई जाएगी और तामिया, छिंदवाड़ा के लोगों को रोजगार दिया जाएगा.” स्थानीय कलाकारों, बढ़ई, केटरर, होटल, ट्रेवल्स को रोजगार से जोड़ने वाले उमर गुल खान इसके पहले तामिया में फीचर फिल्म तपिंच कोलेरू व ओटीटी वेब सीरिज सरपंच साहब के साथ कई वीडियो एलबम कर चुके हैं.

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