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मध्‍य प्रदेश में सरकार तबादला नीति घोषित करने की तैयारी में है, मई से हो सकते हैं तबादले, नीति जल्द कैबिनेट में आएगी

भोपाल प्रदेश में तीन वर्ष से लगा तबादले पर से प्रतिबंध मई में हटाया जा सकता है। सरकार तबादला नीति घोषित करने की तैयारी में है। इसमें जिले के भीतर स्थानांतरण करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। किसी भी संवर्ग में 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं होंगे। गंभीर बीमारी, पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ करने, प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर स्थानांतरण किए जा सकेंगे। आदिवासी क्षेत्रों में तबादला उसी स्थिति में होगा, जब वहां दूसरी पदस्थापना सुनिश्चित हो जाए। प्रदेश में चार लाख से अधिक नियमित कर्मचारी हैं। अभी मंत्रियों को विशेष परिस्थिति में तबादला करने के अधिकार दिए गए हैं। लेकिन विधानसभा का बजट सत्र आने के कारण इसका भी अधिक उपयोग नहीं हो सका। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों-कर्मचारियों का प्रशासनिक और स्वैच्छिक आधार पर तबादला करने की छूट देने की नीति तैयार करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि तीन वर्ष से सामान्य प्रकृति वाले तबादले नहीं हुए हैं। मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री समन्वय में वे प्रकरण ही आते हैं, जो गंभीर और अति आवश्यक प्रकृति के होते हैं। विभागों के मैदानी कार्यालयों में कई अधिकारी लंबे समय से पदस्थ हैं।  प्रशासनिक दृष्टि से परिवर्तन आवश्यक होता है। इसे देखते हुए नीति जल्द घोषित की जाएगी। इसमें उन अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले मुख्यमंत्री समन्वय की अनुमति के बिना नहीं होंगे। जिन्हें मुख्यमंत्री की नोटशीट के आधार पर दूसरे स्थान पर पदस्थ किया गया था।  

जल संकट से जूझ रहे उफरी गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया

भोपाल डिंडोरी जिले के करंजिया ब्लॉक का उफरी गांव, जहां कभी जल संकट विकराल रूप ले लेता था, अब स्वच्छ पेयजल की सुविधा से आत्मनिर्भर हो चुका है। यह वही गांव है, जहां पानी की एक-एक बूंद के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जहां महिलाओं और बच्चों का बड़ा हिस्सा अपने दिन का अधिकांश समय पानी की व्यवस्था करने में ही गंवा देता था। अब यह सब बीते समय की बात हो गई है। गांव के बुजुर्ग गंगाराम बैगा बताते हैं, “गर्मियों में पानी की इतनी दिक्कत थी कि कई बार हमें रात में भी पानी भरने जाना पड़ता था। कई बार तो ऐसा हुआ कि झिरियों से गंदा पानी पीने के कारण गांव के कई लोग बीमार पड़ गए। हमें कभी उम्मीद नहीं थी कि हमारे गांव में भी नल से पानी मिलेगा। अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं। यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।” पीएम जनमन योजना बनी संजीवनी जल संकट से जूझ रहे इस गांव में पीएम जनमन योजना के साथ जल जीवन मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यहां एक बड़ी पेयजल टंकी का निर्माण कराया गया, जिससे पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, ताकि उन्हें जल संकट से मुक्ति मिल सके। गांव की महिला श्रीमती सुकली बाई कहती हैं, “पहले हमें रोज सुबह जल्दी उठकर पानी के लिए निकलना पड़ता था। कई बार रात में भी पानी भरना पड़ता था, क्योंकि सुबह भीड़ अधिक होती थी। हमारी पूरी दिनचर्या पानी पर निर्भर थी, खेती-किसानी और बच्चों की देखभाल भी पीछे छूट जाती थी। अब हमें यह चिंता नहीं रहती, अब समय बचता है और हम अन्य कामों पर ध्यान दे सकते हैं।” नल से जल, 110 परिवारों के जीवन में बदलाव लगभग 530 जनसंख्या वाले उफरी गांव में जल जीवन मिशन के तहत 110 परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन दिए गए। अब ग्रामीणों को पीने के लिए साफ पानी उपलब्ध है, जिससे कई समस्याएं हल हो गई हैं। सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब बीमारियों का खतरा कम हो गया है। पहले दूषित पानी पीने के कारण गांव में डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां आम थीं, लेकिन अब स्वास्थ्य केंद्र में ऐसे मामलों में काफी कमी आई है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उनके जीवन को सरल और सुखद बनाने वाली क्रांतिकारी पहल है। ग्रामीणों ने इस बदलाव को हृदय से स्वीकार किया है और प्रधानमंत्री जनमन योजना को विकास का वह स्रोत माना है, जिसने उफरी को नई पहचान दी है। पानी की हर बूंद के साथ अब यहां विकास की नई लहर बह रही है। विकास की ओर बढ़ता उफरी अब गांव में महिलाएं पानी भरने की चिंता से मुक्त होकर अपने घर-परिवार और आजीविका पर ध्यान दे सकती हैं। बच्चे बिना किसी रुकावट के स्कूल जा रहे हैं, और सबसे बड़ी राहत यह है कि गंदे पानी से होने वाली बीमारियों का डर अब नहीं सताता। गांव के कई परिवार अब आजीविका के नए साधनों की ओर बढ़ रहे हैं। पीएम जनमन योजना जल जीवन मिशन से हुए इस सकारात्मक बदलाव से पूरा गांव उत्साहित है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री मोदी और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है और कहा है कि यह योजना उनके लिए केवल जल उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अब उफरी गांव विकास की एक नई राह पर आगे बढ़ रहा है, जहां हर घर जल है और हर घर खुशहाली की ओर अग्रसर है।  

सरकार के इस कदम से प्रदेश के 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने 25 हजार रुपए से कम वार्षिक फीस वाले निजी स्कूलों को बड़ी राहत दी है। अब इन स्कूलों को फीस संबंधी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय से लगभग 16,000 स्कूलों को लाभ मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन निजी विद्यालयों की किसी भी कक्षा में वार्षिक फीस 25 हजार रुपए या उससे कम है, उन्हें विभाग के पोर्टल पर फीस संबंधी जानकारी अपलोड करना अनिवार्य नहीं होगा। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 16,000 स्कूलों को राहत मिलेगी।राज्य में कुल 34,652 निजी स्कूल हैं, जिनमें से लगभग 18,000 स्कूलों की वार्षिक फीस 25 हजार रुपए से अधिक है। इन विद्यालयों को अब 15 मई तक पोर्टल पर कक्षा और संवर्गवार फीस संरचना की जानकारी अपलोड करनी होगी। शुरुआत में यह अंतिम तिथि 31 मार्च तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इसे बढ़ाया गया है। यह नियम मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम-2020 के तहत लागू किया गया है, जो 31 जनवरी 2025 से प्रभावी हुआ है। 10% तक फीस बढ़ाने की छूट, लेकिन शर्तों के साथ शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कोई भी विद्यालय सालाना 10% तक फीस वृद्धि बिना अनुमति कर सकता है। लेकिन इससे अधिक फीस वृद्धि के लिए संबंधित जिला समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और फीस बढ़ोतरी पारदर्शिता के साथ हो। राज्य और जिला स्तर पर निगरानी समितियों का गठन फीस संबंधी मामलों की निगरानी और शिकायतों के निवारण के लिए राज्य और जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि सभी विद्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार ही फीस निर्धारित करें और किसी भी प्रकार की मनमानी न हो। सरकार का यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।  

प्रदेश में अब सरकारी स्कूलों के टीचर्स की अटेंडेंस चेहरा दिखाकर लगेगी

भोपाल  अब सरकारी स्कूलों से शिक्षक गायब नहीं रह पाएंगे। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। प्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज होगी। यह एप शिक्षकों की लोकेशन दर्ज करेगा साथ ही आनलाइन चेहरा दिखाई देने पर ही उपस्थिति लगेगी। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलेंगे तो जुलाई से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाएगी।     प्रदेश के 99,145 स्कूलों में से केवल 8,051 स्कूलों में ही शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप से दर्ज की जा रही है यानी 91,094 स्कूलों में इसका उपयोग ही नहीं हो रहा है।     जबकि यह व्यवस्था अनिवार्य की गई थी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर सवाल खड़े होते रहते हैं।     स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी इस बात को कई बार स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में कुछ जिलों में शिक्षक स्कूल नहीं जाते हैं।     उनके स्थान पर दूसरे लोग पढ़ाने जाते हैं। वहीं कुछ शिक्षक स्कूलों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते हैं।     तीन बार व्यवस्था बनाई गई लेकिन फेल हो गई।     स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2017, वर्ष 2020 और वर्ष 2022 में प्रयास किया।     ऑनलाइन उपस्थिति एम शिक्षा मित्र एप के जरिए शुरू की गई थी।     लेकिन शिक्षकों ने इस प्रक्रिया का विरोध किया।     कभी स्मार्ट फोन न होने तो कभी नेटवर्क न मिलने का बहाना बनाया गया।     ऑनलाइन उपस्थिति से कन्नी काटी जाती रही।     कई कारणों से यह प्रक्रिया ठीक से लागू नहीं हो पाई। नए एप में गड़बड़ियों को किया गया दूर     एम शिक्षा मित्र एप से उपस्थिति लगानी अनिवार्य की गई थी लेकिन इसके माध्यम से नेटवर्क मिलने पर ही उपस्थिति लगती थी।     इसमें लोकेशन व चेहरा पहचान कर उपस्थिति लगाने का विकल्प नहीं होने से बहुत गड़बड़ियां होती थीं। सार्थक एप में इन्हें दूर कर लिया गया है। अवकाश के लिए भी कर सकेंगे आवेदन     सार्थक एप की नई व्यवस्था में कर्मचारी व शिक्षक छुट्टी के लिए भी आवेदन कर सकेंगे और शासन से किसी भी प्रकार का कार्यालयीन पत्राचार इस एप से हो जाएगा।     दरअसल, सार्थक एप मध्य प्रदेश सरकार के पोर्टल से जुड़ा नवीनतम मोबाइल एप्लीकेशन है।     सरकारी स्कूलों में अब शिक्षकों की सार्थक एप के माध्यम से आनलाइन उपस्थिति दर्ज की जाएगी। इस बार इसे बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा। जुलाई से यह अनिवार्य कर दिया जाएगा।     – उदय प्रताप सिंह, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग  

इंदौर शहर के मुख्य मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लग्जरी एसी इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी, नौ बस डिपो होंगे अपडेट

इंदौर  एबी रोड पर 12 वर्ष पहले बनाए गए 11.5 किमी लंबे बीआरटीएस कॉरिडोर को तोड़कर रोड साइड 40 बस स्टाप बनाए जाएंगे। इसके साथ ही एआईसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड) अब धीरे-धीरे कॉरिडोर से बनी सेवाएं भी बंद करने जा रही है, जिसकी शुरुआत सीएनजी आई-बसों को बंद करने के साथ हो चुकी है। गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि जल्द ही टेंडर अवार्ड होते ही कॉरिडोर को तोड़ने का काम भी शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को हाई कोर्ट ने बीआरटीएस को तोड़ने की अनुमति दे दी थी। आदेश के बाद शिवाजी वाटिका से जीपीओ चौराहे के बीच रेलिंग भी हटा दी गई थी। बीआरटीएस पर बने बस स्टाप बंद हो जाएंगे एआईसीटीएसएल अब बीआरटीएस पर सीसीटीवी कैमरों, आटोमैटिक डोर के संचालन व रखरखाव संबंधी कार्य, ट्रैफिक सिग्नल मेंटेनेंस, आई-बस स्टाप, रेलिंग, लॉलीपाप, यूनिपोल, स्ट्रीट लाइट पोल पर कियोस्क के माध्यम से विज्ञापन का काम कर रही एजेंसी को नोटिस जारी कर बंद किया जा रहा है। आगामी माह से बस स्टाप पर तमाम सुविधाएं बंद हो जाएंगी। वर्तमान में बीआरटीएस पर बने 20 मीडियन बस स्टाप को हटाकर एबी रोड पर दोनों 20-20 बस स्टाप बनाए जाने हैं, जिसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इसके साथ ही एआईसीटीएसएल अपनी आय बढ़ाने के लिए एबी रोड के इस हिस्से में विज्ञापन योजना बनाएगा। मुख्य रूट पर दौड़ेगी लग्जरी एसी ई-बस बैठक तय किया गया कि शहर के मुख्य मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लग्जरी एसी इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी। इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही शहर में बने नौ बस डिपो को अपडेट करने के लिए नगर निगम और आईडीए से फंड लेकर काम किया जाएगा। सिटी बस के रूट रेशनलाइजेशन कर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। बैठक में एआईसीटीएसएल सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य अफसर मौजूद थे।

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ‘एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ प्रोजेक्ट पर काम कर रहा, मिलेंगी ये खास सुविधाएं

भोपाल 18 अप्रैल 2025 को पूरी दुनिया में विश्व धरोहर दिवस मनाया . भारत हमेशा से ही पूरी दुनिया में धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का गढ़ रहा है. लेकिन, Madhya Pradesh में प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरें, संस्कृति और गौरवशाली परंपराएं हमेशा से ही दुनिया भर के Tourists को आकर्षित करती रही हैं. प्रदेश के ये स्थल न केवल मन को सुकून देते हैं, बल्कि मानव सभ्यता, कला, कौशल से आज की पीढ़ी को अवगत कराते हैं. प्रदेश की इन धरोहरों तक प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच को सुलभ बनाने के उद्देश्य से MP Tourism Board एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत महेश्वर, मांडू, धार व ओरछा में रैंप, ब्रेल साइन बोर्ड, व्हीलचेयर, आदि सुविधाओं से दिव्यांगों की पहुंच आसान व सुलभ बनाई जाएगी. दिव्यांगों के लिए खास सुविधा प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्‍ला ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के अधिक से अधिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की स्थायी सूची में शामिल कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐतिहासिक धरोहरों के सुलभता से दर्शन के अभिलाषी दिव्यांगों के लिए टूरिज्म बोर्ड पर्यटन स्थलों का कायाकल्प करेगा. बोर्ड प्रारंभिक तौर पर महेश्वर, मांडू, धार और ओरछा में एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर कार्य कर रहा है. इन स्थानों पर मिलेंगी विशेष सुविधाएं       महेश्वर : महेश्वर में मध्य प्रदेश टूरिज्म नर्मदा रिसॉर्ट, राम कुंड, देवी संग्रहालय, कालेश्वर मंदिर, जलेश्वर मंदिर और कमानी गेट पर  विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे.     मांडू : मांडू में मध्य प्रदेश टूरिज्म रिसॉर्ट, सात कोठरी मंदिर, दिल्ली दरवाजा, मालवा रिसॉर्ट, मलिक दीनार मस्जिद, धर्मशाला, होशंगशाह का मकबरा, जामी मस्जिद, अशरफी महल, नीलकंठ मंदिर, दरिया खान का मकबरा, दाई का महल, लाल महल, संग्रहालय, ईको–पॉइंट, बाज बहादुर और रूपमति पेवेलियन में दिव्यांगों की सुविधा के दृष्टिगत कायाकल्प किया जाएगा.       धार : धार में “बाघ की गुफाओं” के अंतर्गत अलग–अलग गुफाओं और बाघ संग्रहालय में  निर्माण कार्य किए जाएंगे.         ओरछा : ओरछा में राजा महल, तमिरत की कोठी, जहांगीर महल, तीन दासियों की छतरी, पंचमुखी महादेव मंदिर और राय प्रवीण महल में  दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी. प्रदेश के 18 स्थल यूनेस्को सूची में एमपी में यूनेस्को द्वारा घोषित 18 धरोहरों है, जिसमें तीन स्थाई और 15 टेंटेटिव सूची में है. यूनेस्को की स्थायी विश्व धरोहर स्थल की सूची में प्रदेश के खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप शामिल हैं. गौरतलब है कि यूनेस्को ने इस वर्ष प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है. सम्राट अशोक के शिलालेख, चौंसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किले को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में घोषित होना प्रमाणित करता है कि एमपी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में विशेष स्थान रखता है. ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार का ऐतिहासिक समूह, मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी भी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं. मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख मौर्य कालीन शासक सम्राट अशोक को भला कौन नहीं जानता, जिन्होंने न केवल बौद्ध धर्म का प्रचार किया बल्कि कुशल शासन और नैतिकता का संदेश भी दिया. यही संदेश प्रदेश के शिलालेखों में नजर आते हैं. इन शिला और स्तंभ लेखों में सम्राट अशोक से संबंधित संदेश 2200 से अधिक वर्षों से संरक्षित हैं. सांची स्तंभ अभिलेख, जबलपुर में रूपनाथ लघु शिलालेख, दतिया में गुज्जरा लघु शिलालेख और सीहोर में पानगुरारिया लघु शिलालेख को इसमें शामिल किया गया है. चौंसठ योगिनी मंदिर हिन्दू धर्म में मां जगतजननी को सुख और समृद्धि दायिनी माना जाता है. हजारों वर्षों से धर्म स्थलों में मां की प्रतिमा को स्थापित कर श्रद्धालु उनके प्रति आस्था भाव से पूजन–अर्चन करते आए हैं. माता की आराधना का ऐसे ही स्थल हैं चौंसठ योगिनी मंदिर. 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित यह मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है. इन मंदिरों की गोलाकार, खुले आकाश के नीचे बनी संरचनाएं, जटिल शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय हैं. इसमें खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के चौसठ योगिनी मंदिर को शामिल किया गया है. गुप्तकालीन मंदिर प्रदेश में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर को यूनेस्को द्वारा शामिल किया गया है. गुप्तकालीन मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाते हैं. मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी, शिखर शैली और कलात्मक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं. बुंदेला काल के किला-महल बुंदेला काल के गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहांगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल, राजपूत और मुगल स्थापत्य कला के बेहतरीन संगम को दर्शाते हैं. ये महल बुंदेला शिल्पकला, सैन्य कुशलता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अद्भुत मिसाल हैं

महू तहसील के 18 गांव से होकर गुजरेगी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन, 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क होगा

 इंदौर इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए इस बार बजट में 267.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस राशि से प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। मप्र के तीन जिलों के 77 गांव से होकर रेल लाइन गुजरेगी। नवंबर-2024 में रेल मंत्रालय ने इन 77 गांव की जमीन अधिग्रहण करने के लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया था। इसके बाद इसी वर्ष मंत्रालय ने इंदौर जिले की महू तहसील के 18 गांवों की सूची जारी की थी। यह नई रेल लाइन से धार(Dhar), खरगोन(Khargone) और बड़वानी(Barwani) जिलों के आदिवासी अंचल के लिहाज से महत्वपूर्ण है। परियोजना से लगभग एक हजार गांव और 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क होगा। अनुमान के मुताबिक प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होगा, जिनमें 50 लाख यात्री शुरुआती वर्षों में सफर करेंगे। हर साल इस प्रोजेक्ट से रेलवे को 900 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी। इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण होना है अफसरों के अनुसार रेल मंत्रालय द्वारा 14 जनवरी को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार महू तहसील के खेड़ी, चैनपुरा, कमदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, कैलोद, बेरछा, गवली पलासिया, आशापुरा, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चौरड़िया, न्यू गुराडिया, और महू केंटोमेंट एरिया की चिह्नित जमीन का रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण होना है। प्रोजेक्ट के लिए राशि आवंटित होने के बाद अब जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। 568 किमी. रह जाएगी इंदौर-मनमाड़ की दूरी इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन प्रोजेक्ट महू से धार होते हुए धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव होकर मनमाड़ पहुंचेगी। पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इसके पूरा होने के बाद इंदौर और मुंबई की दूरी 568 किमी रह जाएगी। इस परियोजना में मप्र के तीन जिलों के 77 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। जिनमे बड़वानी जिले के 39, धार जिले के 28 और खरगोन जिले के 10 गांव शामिल हैं। आगामी पांच साल में इस प्रोजेक्ट को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इन गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित धार जिला– राती तलाई, सेवरी माल, सराय तालाब, आंवलिया, चुंडीपुरा बीके, बियाघाटी, आंवलीपुरा, जामदा, झाड़ीबड़ोदा, जलवाय, नागझीरी, लुन्हेराखुर्द, सुंद्रेल, पटलावद, भीखरोन, पंधानिया, ग्यासपुर खेड़ी, एकलारा खुर्द, एकलारा, दुधी, भोंदल, चिकटयावड़, सिरसोदिया, दुंगी, कोठिदा, चौकी, भारूडपुरा बीके और भारूड़पुरा। बड़वानी जिला– सोलवान, मालवान, मालवान बीके, भामन्या, बावदड़, अजनगांव, अजनगांव बीके, नवलपुरा, बनिहार, गोई, कलालदा, जामली, सालीकलां, नांदेड़, मातमुर, बालसमुद, ओजर, सांगवी नीम, देवला, जुलवानिया रोड, निहाली, छोटी खरगोन, वासवी, कुसमारी, मुंडला, रेलवा बुजुर्ग, बंजारी, खजूरी, बघाड़ी, घाटी, अजंदी, हसनखेड़ी, सिकंदर खेड़ी, सेगवाल, उमरदा, शेरपुरा, जरवाह और जरवाह बीके। खरगोन जिला– जारोली, औरंगपुरा, नागंवा, कोठड़ा, ज्ञानपुरा, मोहिदा, मक्सी, भेडल्याबाड़ा, नीमगढ़ और कुसुम्भ्या।

चीतों के लिए नया घर तैयार:गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के लिए बड़े बाड़े तैयार, जन्मे दो नर चीतों को 20 अप्रैल को किया जाएगा रिलीज

भोपाल  मध्य प्रदेश में चीतों का दूसरा घर यानी गांधी सागर अभयारण्य जल्द ही चीतों से आबाद होने जा रहा है। यहां चीतों को बसाने की तारीख तय हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि 20 अप्रैल को गांधी सागर अभ्यारण्य में 2 चीतों को कूनो से यहां शिफ्ट किया जाएगा।  कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा रहवास स्थल हो जाएगा। बताया जा रहा है कि चीतों की शिफ्टिंग के लिए चीता स्टीयरिंग कमेटी ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच आज गुरुवार को होने वाली बैठक के बाद शिफ्टिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। मध्यप्रदेश के कूनो में इस समय कुल 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक शामिल हैं। इनमें से 6 वयस्क और 11 शावक, यानी कुल 17 चीते, कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने शुरू कर दी तैयारी अफ्रीका, केन्या के प्रतिनिधिमंडलों और केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी के निरीक्षण के बाद आखिरकार तय हो गया कि भारत की धरती पर जन्म लेने वाले चीतों से ही गांधीसागर आबाद होना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हां होते ही वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दो नर चीतों को लाया जा रहा है फिलहाल यहां कूनो नेशनल पार्क में जन्मे लेने वाले दो नर चीतों को लाया जा रहा है। उन्हें 20 अप्रैल को यहां छोड़ा जाएगा। इसकी तैयारी गांधीसागर अभयारण्य में काफी समय पहले से चल रही थी। मंदसौर के डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि 6400 हेक्टेयर में चीतों के लिए बड़े बाड़े बनकर तैयार हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी हैं। शुरुआत में चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। गांधीसागर अभयारण्य को अनुकूल बताया था बता दें कि केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी ने निरीक्षण के बाद दिल्ली में वन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में गांधीसागर अभयारण्य को चीतों के लिए पूरी तरह से अनुकूल बताया था, तो केंद्र सरकार ने यहां कूनो से ही चीते भेजने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों ने बाड़े, क्वारंटाइन बाड़ों, हाइमास्ट कैमरा, जलस्रोत मानीटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारी देखी हैं। बड़े जानवरों का शिकार नहीं कर सकता चीता चीता बड़े जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर सकता है। ऐसे में गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र में 1250 चीतल और हिरणों को चीतों के भोजन के लिए छोड़ने का लक्ष्य है। अभी तक करीब 472 हिरण-चीतल छोड़े गए हैं। भोपाल के वन विहार, नरसिंहगढ़ सेंचुरी और कान्हा टाइगर सफारी आदि स्थानों से हिरण व चीतल को पकड़कर यहां छोड़े जा रहे हैं।  

मुख्यमंत्री ने जताई प्रवासी पक्षियों पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और रैप्टाईल्स व जल जीवों के संरक्षण के लिए कार्य योजना की आवश्यकता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन, आजीविका से सम्बद्ध विषय है। जनजातीय क्षेत्र में अपार वन संपदा उपलब्ध है। इसके प्रबंधन में ध्यान रखना होगा कि विकास से जनजातीय वर्ग के हित प्रभावित न हो। भारतीय जीवन पद्धति वनों पर आधारित रही है। वनों के प्रबंधन में औपनिवेशिक सोच से मुक्त होने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विरासत से विकास और प्रकृति को जोड़ते हुए प्रगति और प्रकृति में सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। पेसा एक्ट इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जीवन का आनंद समग्रता में है, और प्रकृति आधारित जीवन जीने से कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापना, जलवायु परिवर्तन और समुदाय आधारित आजीविका पर प्रशासन अकादमी में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भगवान बिरसा मुंडा और वीरांगना रानी दुर्गावती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। प्रदेश के महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में वनों की स्थिति में सुधार और वन प्रबंधन में नवाचार के लिए के लिए वन विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के संरक्षण से इको सिस्टम बेहतर हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर चीतों का पुनर्स्थापना हो पाया है। उन्होंने किंग कोबरा सहित रैप्टाइल्स की प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इससे सर्पदंश की घटनाओं में कमी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में विद्यमान जनजातीय समुदाय के पूजा और आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता होने पर केंद्र शासन से भी सहयोग प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश वन की दृष्टि से बहुत संपन्न है। प्रदेश में यद्यपि कोई ग्लेशियर नहीं है, किन्तु प्राकृतिक रूप से वनों से निकलने वाली जल राशि से ही प्रदेश से निकलने वाली बड़ी नदियां आकार लेती हैं। मध्यप्रदेश से निकली सोन, केन, बेतवा, नर्मदा नदियां देश के कई राज्यों में जल से जीवन पहुंचा रही हैं। बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश की प्रगति में प्रदेश के वनों से निकले इस जल का महत्वपूर्ण योगदान है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश के वन, पूरे देश के वन हैं। इन नदियों के संरक्षण और उनके निर्मल अविरल प्रवाह को बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश के वनों का संरक्षण और संवर्धन महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा समग्र के माध्यम से नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। अन्य नदियों पर भी कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार माना। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के बड़े क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता और सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल जीवों के संरक्षण पर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य प्राणियों के संरक्षण में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने प्रवासी पक्षियों पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को सरल और सुलभ बनाने के लिए आयोजित कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के साथ-साथ वन-पर्यावरण के संरक्षण में भी यह कार्यशाला उपयोगी सिद्ध होगी। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री यादव ने कहा कि हमें प्रकृति के संरक्षण के लिए समुदाय आधारित योजनाएं तैयार करने की जरूरत है। केन्द्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रकृति के संरक्षण के लिए एनवायरमेंट फ्रेंडली लाइफ पर ध्यान देने के लिए जनता को निरंतर प्रेरित कर रहे हैं। पृथ्वी पर निवासरत प्रत्येक व्यक्ति को ऊर्जा, अन्न और जल को सुरक्षित रखना होगा। पर्यावरण संरक्षण में सॉलिड वेस्ट और ई-वेस्ट मैनेजमेंट बड़ी चुनौती हैं। प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और स्वस्थ जीवन शैली अपनाना आवश्यक है।  

मंत्री कृष्णा गौर ने अधिकारियों द्वारा लंबे समय तक फाइल अटकाने पर नाराजगी व्यक्त की, विकास कार्यों में लापरवाही नहीं चलेगी

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को समय पर काम करना होगा। मंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों द्वारा लंबे समय तक फाइल अटकाने पर नाराजगी व्यक्त की। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने शुक्रवार को वार्ड-61 का औचक निरीक्षण कर रहवासियों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही उनका निराकरण किया। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने भ्रमण के दौरान कहा कि नागरिक सुविधाओं के स्थायी समाधान के लिए हम संकल्पित हैं। हमारा निरंतर प्रयास है कि क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कोई कमी नहीं रहे, इसके लिए आवश्यक कार्य किए जा रहे हैं। मंत्री श्रीमती गौर को गोविंदपुरा स्थानीय रहवासियों ने पेयजल से जुड़ी कुछ परेशानियाँ बताईं। उन्होंने पानी का प्रेशर कम होना और निर्धारित समय से कम अवधि तक पानी मिलने की शिकायत की। मंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को पाइपलाइन का प्रेशर ठीक करने, पानी लाइन नेटवर्क को दुरुस्त करने और जल आपूर्ति की समय सीमा बढ़ाने के निर्देश दिए। राज्य मंत्री श्रीमती गौर को लवकुश नगर, समृद्धि परिसर खजूरीकलां के रहवासियों ने बताया कि यहां मौजूद 40 फीट रोड पर बारिश में पानी भर जाता है। रहवासियों ने नाली पर से अतिक्रमण हटा कर सफाई की मांग की। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों से पानी निकासी की व्यवस्था करने और मंदिर में पेवर ब्लॉक लगाने के निर्देश दिए। रचना विहार एवं अवंतिका विहार में कॉलोनी की प्रस्तावित सड़क एवं पार्क सौंदर्यीकरण कार्यों को शीघ्र व गुणवत्तापूर्ण कराने के अधिकारियों को निर्देश दिए। मंदिर सौंदर्यीकरण कार्य के लिये विधायक निधि से 5 लाख रूपये की सहयोग राशि प्रदान की गई है, ताकि धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का स्वरूप और अधिक आकर्षक बन सके। तुलसी परिसर में मार्ग चौड़ीकरण, नाला सफाई, सीवेज के खुले में बहने तथा मंदिर सौंदर्यीकरण कार्यों के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अमृतपुरी खजूरीकलां क्षेत्र के अमृतेश्वर महादेव मंदिर के समीप भ्रमण के दौरान रहवासियों से स्थानीय समस्याओं की जानकारी ली। पार्क के सौंदर्यीकरण व बाउंड्रीवाल की मांग को प्राथमिकता पर लेते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। श्री त्र्यंबकेश्वर मंदिर टैगोर नगर में रहवासियों ने खाली पड़ी जमीन को पार्क में विकसित करने की मांग की और सीवेज की समस्या से भी अवगत कराया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने मांग को प्राथमिकता पर लेते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र 100 मीटर की खराब हुई सीवेज लाइन को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। राधाकुंज कॉलोनी में रहवासियों ने पुलिया के निर्माण, ट्रांसफार्मर खराब होने, नर्मदा जल नहीं मिलने की समस्या बताई। श्रीराम साईं परिसर के रहवासियों ने बारिश के पानी की निकासी नहीं होने, सीवेज लाइन के नेटवर्क को दुरुस्त करने और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की मांग की। पार्षद श्रीमती मधु सबनानी, श्री रुपेश कुमार पाटि, श्री अंकित मेश्राम, श्री शिवलाल मकोरिया, श्री राकेश मालवीय, श्री अशोक गुप्ता, श्री आनंद पाठक, श्री हरि प्रसाद तिवारी, श्री संजय सबनानी, श्री नीलेश गौर सहित सैकड़ों की संख्या में रहवासी, कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों के अधिकारी भ्रमण के दौरान उपस्थित थे।

प्रदेश में जन सहभागिता से चल रहा है जल स्रोतों का संवर्धन एवं संरक्षण

भोपाल प्रदेश में 30 मार्च से शुरू हुए जल गंगा संवर्धन अभियान अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संरक्षण पर 7 प्रमुख बिन्दु तय किये थे। इन बिन्दुओं में जल संरक्षण से जुड़ी व्यापक योजना तैयार करना, वर्षा जल संचयन प्रणाली को बढ़ावा देना, जल प्रदूषण नियंत्रण और जल शुद्धिकरण, समुदाय की भागीदरी सुनिश्चित करना, तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाना प्रमुख थे। अभियान में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में इन बिन्दुओं को केन्द्रित करते हुए जल गंगा संवर्धन अभियान का प्रत्येक जिले में जन भागीदारी से संचालन किया जा रहा है। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से की पानी बचाने की अपील छिन्दवाड़ा जिले के जुन्नारदेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आह्वान पर जन अभियान परिषद छात्र-छात्राओं के सहयोग से जल का महत्व समझाने के लिये दीवार लेखन करा रही है। मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम कार्यक्रम में बीएस डब्ल्यू- एमएसडब्ल्यु के छात्र-छात्राओं के द्वारा सेक्टर क्रमांक 02 विकासखंड जुन्नारदेव के ग्राम पंचायत जुन्नारदेव विशाला एवं जुन्नारदेव दमामी, शिव नगरी मंदिर परिसर में अंतर्गत जल है तो कल है, जल ही जीवन है, हम सबने ठाना है, पानी को बचाना है सहित विभिन्न प्रकार के नारों का दीवार लेखन के माध्यम से ग्रामीणों जनों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा हैं।   ग्राम पंचायत मरकाढ़ाना के तवानगर में नवांकुर संस्था ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति परिवर्तित दृष्टि सामाजिक विकास एवं कल्याण संस्थान ने तवा नदी के उद्गम स्थल में सामूहिक रूप से श्रमदान किया तथा तय किया गया है कि परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में यहां निरंतर सामूहिक सहभागिता से जल स्रोतों की सफाई का कार्य किया जायेगा।     स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान में की जा रही सहभागिता सीधी जिले में सभी 25 सेक्टर्स में निरंतर जन सहभागिता से जल संरक्षण एवं जन जागरूकता के लिये अनेकों प्रकार के कार्यक्रम संपन्न किये जा रहे हैं। कुसमी विकासखंड में स्थित बरी नदी पर डैम की साफ-सफाई एवं पानी को रोकने के लिये श्रमदान किया गया। यह कार्य निरंतर 30 जून तक संचालित किया जाएगा, जिसमें प्रस्फुटन समितियां, मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के छात्र-छात्रा, नवांकुर संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा जन सहभागिता से कार्यक्रम संपन्न करेंगे। सीएम राईज विद्यालय चितरंगी में चित्रकला प्रतियोगिता सिंगरौली जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में जल है तो कल की भावना को ध्यान में रखते हुए 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान जल संरचनाओं की साफ सफाई कराये जाने के साथ ही उनका जीर्णोद्धार, नवीन जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। चितरंगी मुख्यालय के सीएम राइज विद्यालय में जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 9 से 12 तक के छात्र छात्राओं ने 9 ग्रुपों में प्रतिभागी रहे।  विद्यालय के छात्रो ने आकर्षक चित्रकारी कर आम लोगो का संरक्षण का संदेश दिया। मानव श्रृंखला बनाकर किया श्रमदान कटनी जिले में पानी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत कार्य किए जा रहे है। तालाब की सीढ़ियों पर पड़े कचरे को भी साफ किया गया। जल स्रोतों के पास मानव श्रृंखला बनाकर जल के महत्व का संदेश दिया गया। जिले में पौध-रोपण के लिये अभी से कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जिले में सार्वजनिक स्थानों की दीवारों पर जल के महत्व पर केन्द्रित संदेश लिखे जा रहे हैं। सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाली होती हैं साहसिक गतिविधियां जबलपुर संभाग के मंडला जिले के देवरी में चल रहे झील महोत्सव का निरीक्षण मंडला कलेक्टर श्री सोमेश मिश्र ने किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय के बीच जल संवर्धन अभिायन की चर्चा भी की। उन्होंने स्पीड बोट पर बैठकर बरगी बांध से समूचे महोत्सव परिसर की गतिविधियां देखीं। आयोजन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाले होते हैं। नर्मदा नदी के किनारे बसे देवरी बकई में बरगी बांध की अथाह जलराशि के निकट आयोजित झील महोत्सव न केवल साहसिक गतिविधियों का गवाह बन रहा है, बल्कि पर्यटन और संस्कृति के प्रेमियों के लिए भी अनूठा आकर्षण प्रस्तुत कर रहा है। जल का महत्व बताने ग्राम पंचायतों में हुआ दीवार लेखन का कार्य नरसिहंपुर जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान में लोगों को जल का महत्व बताने के लिए जिले की ग्राम पंचायतों और नगरीय क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। लोगों को जल का महत्व बताने के साथ अभियान से जुड़ने और अन्य लोगों को भी प्रेरित करने के लिए कहा जा रहा है। जिले में दीवार लेखन के साथ संगोष्ठी, प्रतियोगिताओं और अन्य गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सिवनी जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर विविध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसी कड़ी में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग खंड सिवनी द्वारा ग्रामों  में नलजल योजना के स्रोतों की जियो टैगिंग कार्य करते हुए टूटी-फूटी एवं लीकेज पाईप लाइनों का मरम्मत कार्य किया गया एवं स्थानीय जनों को  नदी, तालाबों एवं अन्य जल स्त्रोतों तथा जल की उपयोगिता महत्वता से ग्रामीणों को अवगत कराया गया।  इसी क्रम में जिला कलेक्टर सुश्री संस्कृति जैन ने ग्राम बैगा पिपरिया में जनसमुदाय को जलवायु परिवर्तन और इससे होने वाली दिक्कतों तथा जल के महत्व के बारे में जानकारी दी। सोहागपुर में जल श्रोतों के स्वच्छता कार्य वॉटर रिचार्जपिट के लिये गहरीकरण कार्य में श्रमदान किया गया। ग्रामीणों की चौपाल लगाकर जल संवर्धन अभियान पर चर्चा की गई।  

हिनौती गौधाम में सभी आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित करायें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हिनौती गौधाम में गौवंशों के लिए शेड की व्यवस्था सहित चारा व पानी सुविधा सुनिश्चित करायें। गौधाम में पानी की कमी न होने पाये इस पर विशेष ध्यान दें। सर्किट हाउस राजनिवास में हिनौती गौधाम के संबंध में बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अधोसंरचना विकास के कार्यों सहित अन्य निर्माणाधीन कार्यों की विस्तार से जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हिनौती गौधाम में टैंकर के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था करायें तथा गौवंश के लिए पशु आहार की भी उपलब्धता सुनिश्चित करायें। उन्होंने कहा कि गौधाम में व्यवस्था के अनुरूप ही गौवंश संरक्षित रखे जाय। उन्होंने निर्माणाधीन कार्यों की धीमी प्रगति व व्यवस्थाओं में कमी होने पर नाराजगी व्यक्त की तथा एसडीएम को निर्देश दिये कि प्रतिदिवस हिनौती गौधाम जाकर व्यवस्थाओं की मानीटरिंग करें। बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, अध्यक्ष गंगेव जनपद विकास तिवारी, एसडीएम राजेश सिन्हा, समाजसेवी राजेश पाण्डेय, उप संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।  

जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयास नहीं बल्कि जन-सहभागिता से जुड़ा एक संकल्प है : खाद्य मंत्री राजपूत

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा गुना जिले के प्रभारी मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने गुना जिले के ग्राम सागर में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत तालाब गहरीकरण में सहभागिता कर श्रमदान किया। मंत्री श्री राजपूत ने पूजा कर गेती-फावड़ा लेकर स्वयं श्रमदान करते हुए तालाब गहरीकरण की शुरुआत की और जल संरक्षण की इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाई। मंत्री श्री राजपूत और विधायक श्रीमती प्रियंका पेंची ने ग्रामीणों से संवाद कर जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयास नहीं बल्कि जन-सहभागिता से जुड़ा एक संकल्प है। तालाबों का संरक्षण और गहरीकरण हमारे भविष्य की जल आवश्यकता की पूर्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से इस अभियान को जनांदोलन के रूप में अपनाने का आग्रह किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री अरविंद धाकड़, जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने की सौजन्य भेंट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प-गुच्छ, अंग वस्त्रम और राजा भोज की प्रतिमा भेंट कर थल सेना प्रमुख श्री द्विवेदी का स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को जनरल द्विवेदी ने मणिपुरी शैली में निर्मित राधा कृष्ण की प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भेंट में प्रदेश में जारी विकास गतिविधियों, उद्योगों के विस्तार तथा युवाओं में कौशल उन्नयन के लिए चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी। इस अवसर पर प्रदेश में विद्यमान सैन्य इकाईयों के प्रबंधन संबंधी विषयों पर भी चर्चा हुई। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट जनरल पी.पी. सिंह तथा मेजर जनरल सुमित उपस्थित थे।

नवाचार श्रेणी के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2022-23 चयनित शासकीय अधिकारियों की सूची जारी की

भोपाल सामान्य प्रशासन विभाग ने नवाचार श्रेणी के लिए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2022-23 चयनित शासकीय अधिकारियों की सूची जारी की है। सूची में 6 क्षेत्रों के लिए 14 शासकीय अधिकारियों के नाम शामिल हैं। सभी चयनित शासकीय सेवकों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 1 लाख रुपये नकद और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया जाएगा। अधिकारियों को यह पुरस्कार अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए नवाचार के लिए दिया जा रहा है। सम्मान समारोह का आयोजन नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी भोपाल में किया जाएगा। इन 6 क्षेत्रों में किए गए नवाचार के लिए दिया जा रहा पुरस्कार शिक्षा एवं मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य एवं पोषण, सामाजिक समावेश एवं सशक्तिकरण, अधोसंरचना, नागरिक सेवा प्रदाय-सूचना प्रौद्योगिकी एवं सुशासन, रोजगार एवं आर्थिक विकास क्षेत्रों में नवाचार के लिये पुरस्कार प्रदान किये जा रहे हैं। इन शासकीय अधिकारियों को किया जाएगा पुरस्कृत पुरस्कार के चयनित अधिकारियों में सुश्री शीला दाहिमा, श्री माधव प्रसाद पटेल, श्रीमती अदिति गर्ग, डॉ. इंदिरा दांगी, श्रीमती शारदा डुडवे, श्री आलोक पौराणिक, श्री चंद्रमोहन ठाकुर, डॉ. यशपाल सिंह, श्री संजय जोशी, श्री अमित तोमर, श्री ऋषव गुप्ता, श्री गणेश शंकर मिश्रा, श्री दिव्यांक सिंह और श्री प्रवीण सिंह के नाम शामिल हैं।  

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