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राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने किया क्षेत्र का औचक निरीक्षण, जनसमस्याओं का किया त्वरित निराकरण

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने क्षेत्र के विकास के लिए अधिकारियों से रोडमैप बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी कार्य में देरी न हो। राज्यमंत्री श्रीमती गौर लगातार क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर रही हैं और रहवासियों की समस्याएं सुनकर मौके पर ही निराकरण के लिए अधिकारियों को निर्देशित कर रही हैं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नारायण नगर नर्मदापुरम रोड के श्रीदुर्गा मंदिर से भ्रमण की शुरुआत की। जहां रहवासियों ने पानी की समस्या से उन्हें अवगत कराया। इसपर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अधिकारियों को सम्पवेल को जल्द से जल्द शुरु करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पानी सप्लाई की समय सीमा तय करें, जिससे आम लोगों को परेशानी न हो। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नारायण नगर की सीवेज लाइन को अमृत फेज 2 में शामिल कर इंटरनल नेटवर्क का रोडमैप तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बावड़ियाकलां, आमनगर, डीके कॉटेज का भी भ्रमण किया। यहां के रहवासियों ने बताया कि उनके क्षेत्र की संजीवनी अस्पताल भवन के निर्माण कार्य को ठेकेदार ने लंबे समय से काम रोक कर रखा है। इसपर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट घोषित कर किसी अन्य एजेंसी से कार्य को पूरा कराने के लिए कहा। उन्होंने क्षेत्र में हाईमास्क और पार्क का निर्माण भी कराने के निर्देश भी दिए। ऋषि वैली, रोहित नगर के रहवासियों ने अवैध निर्माण के चलते बंद हो चुके नाले की समस्या से अवगत कराया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने बिल्डर को नोटिस देकर अवैध निर्माण को रोकने के निर्देश दिए। सलैया मिसरोद में फॉरच्यून लैंडमार्क, आईबीडी कालोनी और आकृति ग्रीन के लोगों ने पानी, बिजली और कचरे की समस्या से अवगत कराया। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया कि डोर-टू-डोर कचरा उठाने की व्यवस्था करें।  

विधायक गोपालसिंह इंजीनियर याचिका एवं अभ्यावेदन समिति के बैठक में हुए शामिल

आष्टा आष्टा विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री गोपालसिंह इंजीनियर आज एक दिवसीय प्रवास पर भोपाल पहुचे । आज विधानसभा भवन भोपाल के कक्ष क्रमांक 6 में विधानसभा की “याचिका एवं अभ्यावेदन समिति” की बैठक आहूत की गई थी । आष्टा विधायक विधानसभा की उक्त महत्वपूर्ण समिति के सदस्य है । समिति की बैठक में महत्वपूर्ण कार्यो की समीक्षा की गई एवं सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया ।

प्रदेश के 10 जिलों में औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा प्रबंधन के लिये मॉक ड्रिल का सफल आयोजन

भोपाल प्रदेश के औद्योगिक व रासायनिक इकाइयों में आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से भोपाल, धार, रायसेन, उज्जैन, देवास, सिंगरौली, छिंदवाड़ा, जबलपुर, इंदौर एवं सीहोर जिलों में औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का आयोजन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), मध्यप्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एमपीएसडीएमए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) एवं राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीईआरएफ) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में आपदा की वास्तविक परिस्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित विभागों, औद्योगिक इकाइयों तथा स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया एवं संसाधनों के दक्ष उपयोग की कार्यप्रणाली का परीक्षण करना था। मॉक ड्रिल से औद्योगिक व रासायनिक दुर्घटना, गैस रिसाव, आगजनी एवं घायलों के त्वरित उपचार, आपदा प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी और नियंत्रण की तैयारी को परखा गया। इस अवसर पर होम गार्ड, सिविल डिफेंस एवं आपदा प्रबंधन विभाग के महानिदेशक श्री अरविंद कुमार, एनडीएमए के वरिष्ठ सलाहकार सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर श्री रविंदर गुरंग एनडीआरएफ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल श्री एम.के. शर्मा, एसडीईआरएफ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल श्री मनीष कुमार अग्रवाल, एमपीएसडीएमए के उपसंचालक श्री सौरभ सिंह, वरिष्ठ सलाहकार श्री बृजेश जायसवाल एवं राज्य कमांड सेंटर के श्री कमलेन्द्र सिंह परिहार डिविजनल कमांडेंट, कमांडेंट श्री कमलनाथ धुर्वे विशेष रूप से उपस्थित रहे। मॉक ड्रिल में संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, होम गार्ड, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन, सिविल डिफेंस, औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय रूप से भागीदारी की। अभ्यास के दौरान औद्योगिक इकाई में गैस रिसाव की काल्पनिक स्थिति निर्मित कर तत्काल राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अग्निशमन कार्य, घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद निकटतम अस्पताल पहुंचाने तथा क्षेत्र की सुरक्षित घेराबंदी का प्रदर्शन किया गया। महानिदेशक श्री अरविंद कुमार ने मॉक ड्रिल के सफल आयोजन के लिए सभी विभागों एवं जिलों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के अभ्यास से हमारी आपदा प्रतिक्रिया क्षमता सशक्त होती है तथा वास्तविक आपदा की स्थिति में जनहानि एवं वित्तीय नुकसान को न्यूनतम करने में सहायता मिलती है। श्री रविंदर गुरंग ने आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक एवं त्वरित समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया। डीआईजी एनडीआरएफ श्री एम.के. शर्मा एवं डीआईजी एसडीईआरएफ श्री मनीष कुमार अग्रवाल ने भी मॉक ड्रिल की महत्ता पर प्रकाश डाला एमपीएसडीएमए के उपसंचालक श्री सौरभ सिंह ने प्रदेश स्तर पर आपदा प्रबंधन ढांचे की मजबूती के लिए ऐसे नियमित अभ्यास की आवश्यकता बताई। प्रदेश आपदा प्रबंधन तंत्र आमजन की सुरक्षा एवं आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिये सदैव तत्पर एवं सजग है। आगामी समय में भी प्रदेश के अन्य जिलों में इस प्रकार की मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा, जिससे हर स्तर पर आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक दक्ष बनाया जा सके।  

ताप विद्युत गृहों की ऊर्जा कुशलता से आयी ट्रिपिंग में कमी और घटी विद्युत उत्पादन लागत

भोपाल मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के 4 ताप विद्युत गृहों ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऑपरेशन (संचालन) क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए  पूर्व की तुलना में अधिक उत्पादन किया। साथ ही विद्युत गृहों की ट्रिपिंग दर पूर्व की तुलना में कम हो गई। विद्युत गृहों के ऑपरेशन में ट्रिपिंग, विशिष्ट तेल की खपत में कमी, ऑक्जलरी कंजम्पशन महत्वपूर्ण मापदंड हैं। पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चारों ताप विद्युत गृहों की 12 विद्युत यूनिट ने इन मापदंडों में महत्वपूर्ण उपलब्धिहासिल की है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने  ताप विद्युत गृहों की इस उपलब्धि पर  इंजीनियरों, तकनीशियनों और संचालन टीम को  बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रबंधन नीति, तकनीकी उन्नयन व कड़ाई से ऑपरेशन नियमों का पालन करने से यह लक्ष्य हासिल किया गया। विद्युत गृहों की ट्रिपिंग में निरंतर कमी पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों की यूनिट में किए गए सुधार कार्य व बेहतर मेंटेनेंस के कारण ट्रिपिंग में उल्लेखनीय कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में विद्युत गृहों में मात्र 85 ट्रिपिंग दर्ज की गईं। इससे पूर्व वर्ष 2019-20 में 150 ट्रिपिंग दर्ज होती रही हैं। विशिष्ट तेल खपत की कमी से परिचालन लागत में आई कमी पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा विद्युत उत्पादन लागत में कमी के लगातार प्रयास किए गए। इससे ताप विद्युत यूनिट की विशिष्ट तेल खपत वर्ष 2024-25 में 0.51 मिलीलीटर प्रति यूनिट रही। यह अब तक की न्यूनतम विशिष्ट तेल खपत है। न्यूनतम विशिष्ट तेल खपत से परिचालन लागत में जहां कमी आई वहीं यह पर्यावरण संरक्षण में सहायक हुई। ऑक्जलरी कंजम्पशन में कमी मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों ने वर्ष 2024-25 में अब तक का सबसे कम ऑक्जलरी कंजम्पशन (सहायक संयंत्र खपत)  6.91 प्रतिशत हासिल किया। विद्युत गृहों के संचालन के दौरान खपत हो रही ऊर्जा जितनी कम होगी उतनी ही अधिक विक्रय बिजली (नेट जनरेशन) होगी और इसका सीधा प्रभाव उत्पादन लागत पर पड़ता है। कैसे कम हुई ट्रिपिंग और घटी विद्युत उत्पादन लागत-मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के 4 ताप विद्युत गृहों में विभिन्न क्षमताओं की कुल 12 ताप विद्युत इकाइयों का समन्वित प्रबंधन अत्यंत प्रभावी ढंग से किया जा रहा है। इन विद्युत इकाइयों में सुधारात्मक प्रयास कर यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक इकाई से क्षमता अनुसार अधिकतम उपयोग किया जा सके। तकनीकी उन्नयन, सख्त संधारण नियम व प्रभावी प्रबंधन नीतियों के द्वारा ट्रिपिंग की संख्या में कमी आई और उत्पादन कुशलता में वृद्धि संभव हो पाई है।  

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा- स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रयास होना चाहिये

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रयास होना चाहिये कि प्रदेश के शत-प्रतिशत बच्चों का स्कूल में नामांकन हो। इसके लिये उन्होंने टीम वर्क के साथ काम करने के निर्देश दिये। उन्होंने अनेक जिलों में अब तक कराये गये नामांकन की जानकारी प्राप्त की। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि विभाग के जो अधिकारी-कर्मचारी श्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे, उनका सार्वजनिक रूप से सम्मान किया जायेगा। कार्य के प्रति गैर-जिम्मेदार रहने वाले अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह गुरुवार को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंस से विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर शिक्षा को नई दिशा दें। बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह और विभागीय अधिकारी मौजूद थे। नामांकन दर बढ़ाने के दिये निर्देश मंत्री श्री सिंह ने एक अप्रैल, 2025 से शुरू हुए प्रदेशव्यापी प्रवेश उत्सव की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अप्रैल अंत तक स्कूल जाने योग्य बच्चों का नामांकन हो जाये, यह सुनिश्चित किया जाये। मंत्री श्री सिंह ने स्कूलों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था की जानकारी भी ली। मंत्री श्री सिंह ने अतिथि शिक्षकों की पदस्थापना के लिये जल्द पोर्टल शुरू किये जाने के भी निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अतिथि शिक्षकों की आवश्यकता की मैपिंग का कार्य जल्द पूरा किया जाये। टाइम टेबल बनाकर करें हॉस्टल्स का निरीक्षण स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने विभाग के हॉस्टल्स का निर्धारित टाइम टेबल बनाकर निरीक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गर्ल्स हॉस्टल में सुरक्षा के इंतजामों की समीक्षा की जाये। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि स्कूलों के विभिन्न कार्यों में विधायक और सांसद निधि का उपयोग किया जाये। जिम्मेदार कड़ी के रूप में काम करें अधिकारी स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने कहा कि जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों के बीच संभागीय अधिकारी कड़ी के रूप में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने कार्य क्षेत्र का निरंतर दौरा करें। कार्यालयों में लंबित पेंशन और अनुकम्पा नियुक्ति संबंधी प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता के साथ किया जाये। उन्होंने कहा कि जून माह में संभाग और जिला स्तर पर पदस्थ अधिकारियों के साथ पुन: समीक्षा की जायेगी। स्कूल सचिव डॉ. गोयल ने बताया कि शिक्षकों के उपस्थिति पोर्टल पर अटेंडेंस का कार्य शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिये शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जायेगा।

बिजली कार्मिक की मृत्यु पर आश्रित परिवार को मिलेगी सवा लाख रुपये अनुग्रह राशि

भोपाल एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने कंपनी की सेवा में रहते हुए कार्मिक की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को दी जाने वाली अनुग्रह अनुदान राशि का पुनरीक्षण करते हुए अधिकतम 1,25,000 रूपए करने का आदेश आज जारी कर दिया गया है। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने  किसी कंपनी कार्मिक की कंपनी की सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर उनके आश्रित परिवार को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 में देय वेतन के छह गुना के बराबर, अधिकतम 1,25,000  अनुग्रह अनुदान राशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया है। आदेश 1 अप्रैल 2025 अथवा इसके बाद के प्रकरणों पर प्रभावशील होगा। अनुग्रह अनुदान भुगतान करने की अन्य शर्तें यथावत प्रभावशील रहेंगी।  

मध्यप्रदेश टिम्बर डिपो नई दिल्ली में मई माह में सागौन काष्ठ की होगी नीलामी

भोपाल मध्यप्रदेश टिम्बर डिपो, न्यू टिम्बर मॉर्केट, कीर्ति नगर, नई दिल्ली में मई माह में सागौन काष्ठ की नीलामी की जायेगी। इस नीलामी में मध्यप्रदेश के विभिन्न वन मण्डलों से प्राप्त भारत की सर्वश्रेष्ठ “सी.पी. टीक’’ के गोल लट्ठों का विक्रय किया जायेगा। नीलामी में छोटी-छोटी मात्रा के लाट भी विक्रय किये जायेंगे, जो भवन निर्माण, आंतरिक सज्जा अथवा फर्नीचर के लिये उपयुक्त हैं। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (जनसम्पर्क एवं विक्रय) विक्रय डिपो मध्यप्रदेश वन विभाग नई दिल्ली ने बताया कि नीलामी संबंधी जानकारी के लिये दूरभाष क्रमांक 011-25939685, 8077873394 पर सम्पर्क किया जा सकता है।  

ग्राम पंचायत सचिवों तथा ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण की नीति शीघ्र घोषित होगी: मंत्री पटेल

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम एवं रीवा जिले के प्रभारी मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल की अध्यक्षता में गुरूवार को जिला योजना समिति की बैठक हुई। बैठक में शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम कल्पना चावला पॉलिटेक्निक कालेज करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मेसर्स गोकुलदास एक्सपोर्ट लिमिटेड बैंगलोर के सहयोग से शासकीय कन्या महाविद्यालय के छात्रावास में सिलाई एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि ग्राम पंचायत सचिवों तथा ग्राम रोजगार सहायकों के स्थानांतरण की नीति शीघ्र घोषित होगी। इसके अनुसार ही स्थानांतरण किए जाएंगे। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि “जल गंगा संवर्धन” अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन करें। जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में इस अभियान में जल संरक्षण के कार्य कराएं। गत वर्षों में जिन गांवों में पानी का संकट रहा, वहाँ हैण्डपंप तथा कुओं में रिचार्ज पिट प्राथमिकता से बनाएं। अभियान में शामिल जल संरक्षण कार्यों की तकनीकी और प्रशासकीय स्वीकृति तत्काल जारी करके निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराएं। अभियान के तहत मनरेगा से मंजूर सभी अधूरे कार्य 15 मई तक पूरे कराएं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान से 50 हजार से अधिक खेत तालाबों का निर्माण कराया जाएगा। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की समीक्षा करते हुए मंत्री श्री पटेल ने कहा कि इस योजना से रीवा जिले ही नहीं पूरे विन्ध्य में बहुत अच्छा कार्य हुआ है। नए पात्र परिवारों को योजना का लाभ देने के लिए एक लाख 72 हजार परिवार चिन्हित किए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना से प्रदेश में 27 लाख गरीब परिवारों को आवास मंजूर किए गए हैं। इसके शेष 6 लाख 50 हजार आवास शीघ्र स्वीकृत किए जा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि ग्रामीण क्षेत्र में गरीब परिवारों को पक्के आवास के लिए सभी एसडीएम प्राथमिकता से जमीन उपलब्ध कराएं। इस योजना से मल्टी स्टोरी आवास भी बनाए जा सकते हैं। पेयजल की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिले में औसत से कम वर्षा हुई है। जिले की सभी बसाहटों में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करें। जिन क्षेत्रों में पेयजल संकट की आशंका हो वहाँ वैकल्पिक स्त्रोत से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करें। ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध राशि से स्पॉट सोर्स पर पानी की टंकी रखकर भी पेयजल की आपूर्ति कराएं। जहाँ जरूरत हो वहाँ तत्काल हैण्डपंपों में सिंगल फेज मोटर लगाकर पानी की आपूर्ति करें। जल जीवन मिशन की समूह नल जल योजना से जिन गांवों में पानी दिया जा रहा है, उनमें पाइप की मरम्मत तथा अन्य कमियाँ दूर कर नियमित रूप से पानी की सप्लाई करें। बैठक में पिछली बैठक के पालन प्रतिवेदन को भी मंजूरी दी गई। उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि रीवा विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में ग्राम पंचायतें नल जल योजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं। जल संवर्धन और संरक्षण के कार्य में सामाजिक संगठनों तथा आम जनता की भी भागीदारी आवश्यक है। विधायक गुढ़ श्री नागेन्द्र सिंह ने ग्रामीण क्षेत्र में पानी का संकट दूर करने के लिए बाणसागर बांध की नहरों से तालाबों और नदियों में पानी छोड़ने का सुझाव दिया। विधायक देवतालाब श्री गिरीश गौतम ने जिला योजना समिति के पुनर्गठन तथा जब तक मऊगंज जिले में जिला पंचायत का गठन नहीं हो जाता तब तक वहाँ के जिला पंचायत सदस्यों को रीवा की योजना समिति की बैठक में सदस्य के रूप में शामिल करने का सुझाव दिया। विधायक श्री गौतम ने नल जल योजना तथा पेयजल व्यवस्था के भी मुद्दे उठाए। विधायक सेमरिया श्री अभय मिश्रा ने पेयजल व्यवस्था, बसामन मामा में तीन करोड़ 21 लाख रुपए की लागत से एनिकट निर्माण, कौआढान में सड़क निर्माण तथा जिला योजना समिति के पुनर्गठन की बात कही। बैठक में महापौर रीवा नगर निगम श्री अजय मिश्रा ने बाणसागर बांध की नहरों की साफ-सफाई तथा गाद निकालने का सुझाव दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल ने ग्राम पंचायत सचिवों के स्थानांतरण, समिति सदस्य डॉ. अजय सिंह ने मतदाता सूची संबंधित बातें कही। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन एवं “जल गंगा संवर्धन” अभियान की प्रगति की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में विधायक सिरमौर श्री दिव्यराज सिंह, विधायक मनगवां श्री नरेन्द्र प्रजापति तथा समिति के सदस्यगण सहित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रभारी मंत्री ने आमजनों की समस्यायें सुनीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री व श्रम एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री सिंह पटेल ने रीवा में स्थानीय लोगों से भेंट कर आमजनों की समस्यायें सुनीं। उन्होंने प्राप्त आवेदनों में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिये। प्रभारी मंत्री ने डॉ. योगानंद गिरी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।  

एमपी पॉवर कंपनी ने कार्मिकों के गृह भाड़ा भत्ते को किया पुनरीक्ष‍ित

भोपाल एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने कंपनी कार्मिकों के पुनरीक्ष‍ित गृह भाड़ा भत्ता का आदेश आज जारी कर दिया। पॉवर मैनेजमेंट कंपनी ने मध्यप्रदेश शासन वित्त विभाग के ज्ञाप क्रमांक एफ 4-1/2025/नियम/चार दिनांक 3 अप्रैल 2025 को जारी राज्य शासन के शासकीय सेवकों को देय गृह भाड़ा भत्ता के पुनरीक्षण संबंधी आदेश को यथावश्यक संशोधनों सहित ‘शासकीय सेवक’के स्थान पर ‘कंपनी कार्मिक’प्रतिस्थापित करते हुए ग्राह्य किया है। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा पुनरीक्ष‍ित गृह भाड़ा भत्ता इस प्रकार हैं (1) 7 लाख अथवा इससे अधिक जनसंख्या के नगरों में निवासरत कंपनी कार्मिक को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार देय मूल वेतन का 10 प्रतिशत देय होगा। (2) 3 लाख से अधिक पर 7 लाख से कम जनसंख्या के नगरों में निवासरत कंपनी कार्मिक को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार देय मूल वेतन का 7 प्रतिशत देय होगा। (3) 3 लाख से कम जनसंख्या के नगरों में निवासरत कंपनी कार्मिक को वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के अनुसार देया मूल वेतन का 5 प्रतिशत देय होगा। इन कार्मिकों को देय नहीं होगा गृह भाड़ा भत्ता जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन कार्मिकों को कंपनी आवास गृह आवंटित किया गया है अथवा जो किराया रहित कंपनी आवासगृहों में निवासरत हों अथवा जिन्हें किराया रहित आवास गृह के बदले और कोई भत्ता दिया जा रहा हो, उन्हें देय गृह भाड़ा भत्ता की पात्रता नहीं होगी। संविदा, तदर्थ, स्थायीकर्मी व दैनिक वेतन के आधार पर नियुक्त कार्मिकों को देय गृह भाड़ा भत्ता की पात्रता नहीं होगी। आदेश के अनुसार गृह भाड़ा भत्ता की स्वीकृति के संबंध में अन्य शर्तें पूर्वानुसार रहेंगी। आदेश के अनुसार गृह भाड़ा संबंधी दिशा निर्देश 1 अप्रैल 2025 से प्रभावशील होंगे।

भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र में राज्यपाल पटेल ने सिकल सेल एनीमिया मशीन का लोकार्पण किया

भोपाल भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) में 17 अप्रैल को मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने अस्पताल के सिकल सेल एनीमिया सक्षमता केंद्र में स्थापित आनुवंशिक विश्लेषण प्रयोगशाला एवं डीएनए सीक्वेंसर मशीन का लोकार्पण किया। साथ ही “सिकल सेल एनीमिया के प्रबंधन में आनुवंशिक विश्लेषण और एकीकृत दृष्टिकोण” विषय पर संगोष्ठी का शुभारंभ भी किया। माननीय राज्यपाल ने इस दौरान सिकल सेल से पीड़ित कुछ बच्चों से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जााना।       कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री श्री कुँवर विजय शाह, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सलोनी सिडाना, आईसीएमआर- राष्ट्रीय प्रतिरक्षा रुधिर विज्ञान संस्थान, मुंबई की निदेशक डॉ. मनीषा मडकईकर, और बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव उपस्थित रहीं।     भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े। साथ ही सिकल सेल से पीड़ित कई मरीज व उनके अभिभावक भी कार्यक्रम में शामिल थे।     इस दौरान ‘सिकल सेल रोग: जानकारी, बचाव और देखभाल’ शीर्षक दिग्दर्शिका का लोकार्पण विमोचन किया गया तथा सिकल सेल पीड़ितों को स्वास्थ्य किट एवं पोषण आहार वितरित किए गए।     ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि महामहिम राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल को भारत से खत्म करने का लक्ष्य रखा है।     इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी हम सभी की है। जहां भी लोगों के सिकल सेल से प्रभावित होने की आशंका है, वहां लोगों की जांच कराओ। जो बीमारी से ग्रसित पाए जाते हैं, उनको दवा दिलाओ।     सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बीएमएचआरसी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि चूंकि सिकल सेल एक अनुवांशिक बीमारी है।     इसलिए इसका उन्मूलन जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य है। हमारे वैज्ञानिकों ने जीन स्तर के विश्लेषण द्वारा रोग की जड़ तक पहुंचकर रोग उन्मूलन के लिए कार्य करने का अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध कराया है।     उन्होंने कहा कि सिकल सेल के उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों में डीएनए सीक्वेंस मशीन की स्थापना एक सकारात्मक पहल है।     यह मशीन सिकल सेल रोग से संबंधित चुनौतियों और जटिलताओं को समझने और समाधान खोजने में सहायक सिद्ध होगी।     सिकल सेल बीमारी के बारे में जनजागरूकता लाने के लिए राज्यपाल मंगुभाई पटेल के प्रयासों को अभूतपूर्व बताते हुए जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा कि सिकल सेल एक अद्भुत और अनोखी बीमारी है, लेकिन पहले बीमारी से ग्रस्त बच्चों और उनके माता—पिता को इसके बारे में पता ही नहीं था।     महामहिम राज्यपाल के प्रयासों से लोगों में काफी जागरूकता आई है। सिकल सेल से चल रही लड़ाई को जीतने के लिए हम काफी कुछ कर सकते हैं। राज्यपाल महोदय से प्रेरणा लेकर हम इस दिशा में काम करते रहेंगे।  

ग्वालियर हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में झूठी जानकारी देने पर DIG पीएचक्यू पर लगाया 5 लाख का जुर्माना

ग्वालियर ग्वालियर हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में झूठी जानकारी देने और महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाने के आरोप में डीआईजी (पीएचक्यू) मयंक अवस्थी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने अवस्थी के खिलाफ विभागीय जांच और अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए हैं। यह मामला उस समय का है, जब अवस्थी दतिया के पुलिस अधीक्षक थे। कोर्ट ने उनकी कार्यप्रणाली को गलत ठहराते हुए कहा कि उन्होंने एक पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए साक्ष्य छिपाए, जो निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों का उल्लंघन है। मामले का विवरण यह प्रकरण 2017 का है, जब दतिया जिले के दीपार थाने में 24 सितंबर को हत्या का मामला दर्ज हुआ था। आरोपी मानवेंद्र गुर्जर ने दावा किया था कि घटना तीन-चार दिन पहले की थी। घटना के दिन मृतक, घायल और गवाह भिंड जिले के अमायन में थे, न कि दतिया में। उन्होंने मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर अपनी बात साबित करने की मांग की। सेंवढ़ा न्यायालय ने पुलिस को टावर लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) सुरक्षित करने के निर्देश दिए थे। उस समय मयंक अवस्थी दतिया के एसपी थे। साक्ष्य छिपाने का आरोप पुलिस ने शुरू में कोर्ट को पत्र देकर दावा किया था कि टावर लोकेशन और कॉल डिटेल सुरक्षित हैं। जब मामला अंतिम तर्क के चरण में पहुंचा, तो पुलिस ने कहा कि डेटा सुरक्षित नहीं किया गया। साइबर सेल ने बताया कि दो साल से पुराना डेटा रिट्रीव नहीं हो सकता। इस पर कोर्ट ने दीपार थाने के तत्कालीन प्रभारी को तलब किया, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद हाई कोर्ट ने अवस्थी और तत्कालीन थाना प्रभारी यतेन्द्र सिंह भदौरिया से जवाब मांगा। हाई कोर्ट का सख्त रुख 4 अप्रैल 2025 को बहस के बाद हाई कोर्ट ने 16 अप्रैल को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अवस्थी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर साक्ष्य दबाए, जिससे एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने इसे चौंकाने वाला और निष्पक्ष जांच के अधिकारों का उल्लंघन बताया। कोर्ट ने अवस्थी को एक महीने के भीतर 5 लाख रुपये प्रिंसिपल रजिस्ट्रार के पास जमा करने का आदेश दिया, जो जीतने वाले पक्ष को दिया जाएगा। गैर-अनुपालन पर अवमानना और वसूली की कार्रवाई होगी। विभागीय जांच के आदेश हाई कोर्ट ने डीजीपी को अवस्थी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने और उनके इरादों की पड़ताल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि डीजीपी को तय करना होगा कि ऐसे अधिकारी पुलिस विभाग में रहने योग्य हैं या नहीं। वर्तमान दतिया एसपी को 10 दिनों के भीतर कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन रिकॉर्ड जमा करने को कहा गया है। डीजीपी को 20 मई 2025 तक जांच की प्रगति पर कोर्ट को सूचित करना होगा। मामले का महत्व यह फैसला पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच के महत्व को रेखांकित करता है। कोर्ट ने माना कि अवस्थी के कृत्य से एक परिवार ने अपना सदस्य खोया, जबकि दूसरा पक्ष गंभीर सजा का सामना कर रहा है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

किसान 1 लाख रुपये बैंक में जमा कराने आया था, लेकिन इसमें से 500 के 11 नोट नकली मिले, मचा हड़कंप, मामला दर्ज

शहडोल शहर के इंडियन बैंक में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किसान ने बैंक में नकली नोट जमा करा दिए। किसान 1 लाख रुपये बैंक में जमा कराने आया था, लेकिन इसमें से 500 के 11 नोट नकली मिले। पुलिस ने किसान पर मामला दर्ज कर लिया है। किसान को ये रुपये फसल बेचने के एवज में मिले थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सोहागपुर थाना क्षेत्र के जमुई गांव के किसान सूर्यांश सिंह बघेल को फसल बेचने के बाद व्यापारी से 1 लाख रुपये मिले थे। उसने इंडियन बैंक में रुपये जमा कराए, तो 500 सौ के 11 नोट नकली पाए गए। सभी नकली नोटों का सीरियल नंबर एक ही था। बैंक कर्मियों ने मामले की शिकायत कोतवाली में की है। सहायक शाखा प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि खाताधारक ने एक लाख रुपये अपने खाते में जमा करवाए थे। जब कर्मचारियों ने नोटों को मशीन में डाला, तो उसमें से 11 नोट नकली मिले। पिछले माह भी मिला था नकली नोट पिछले माह भी कोतवाली थाना क्षेत्र के बुढ़ार रोड स्थित एक बैंक की कैश डिपाजिट मशीन में एक युवक ने 500 रुपये का एक नकली नोट जमा करने का प्रयास किया था, लेकिन मशीन ने बैंक को अलार्म बजाकर अलर्ट कर दिया। पुलिस ने युवक पर मामला दर्ज किया था।

बंगाल हिंसा, मैडम को सुधारने के लिए भी एक शिव महापुराण कथा करना पड़ेगी: पं प्रदीप मिश्रा

सीहोर  देश के पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा और हिंदुओं के साथ अत्याचार की खबर से कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा भी दुखी है। उन्होंने कहा कि- बंगाल की मैडम को सुधारने के लिए भी एक शिव महापुराण करना पड़ेगा। सबको जानते हुए भी कुछ नहीं कर रही सीहोर के अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि बंगाल में जिस तरह से घटनाएं हो रही है। हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है इन घटनाओं को देखकर मन बड़ा दुखी हो रहा है। एक वह मैडम बंगाल की जो यह सब देख रही है उसकी बुद्धि सही करने के लिए एक शिव महापुराण की कथा बंगाल में भी करना पड़ेगी, जब उसकी बुद्धि सही होगी। राजस्थान के लोगों से बंगाल के लोगों को सीख लेना चाहिए। रतनगढ़ कि धरती में छोटे से छोटा बच्चा सेवा का भाव लेकर काम कर रहा है और एक वो बंगाल की मैडम जो सबको जानते हुए भी कुछ नहीं कर रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात पिछले दिनों वक़्फ (संशोधन) कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान यहां हिंसा भड़क गई थी। हिंसा में तीन लोग मारे गए थे। अब जिले के चप्पे-चप्पे पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की बड़ी संख्या में तैनाती है। 11 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान मुर्शिदाबाद में अशांति फैल गई थी। यह कानून इस क्षेत्र में एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। अब तक 150 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और समसेरगंज, धुलियान और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

दुनिया अपनी स्मृतियों में संजो रही मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरें

–    महेश्वर, मांडू, धार और ओरछा में ‘एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ परियोजना पर किया जा रहा कार्य   –    रैंप, ब्रेल साइन बोर्ड, व्हीलचेयर की होगी व्यवस्था –    पर्यटन स्थलों को सभी के लिए सुलभ और समावेशी बनाना हमारा उद्देश्य- प्रमुख सचिव श्री शुक्ला भोपाल मध्यप्रदेश में प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरें, संस्कृति, गौरवशाली परंपराएं हमेशा से ही दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करती रही हैं। यह स्थल न केवल मन को सुकून देते हैं, बल्कि मानव सभ्यता, कला, कौशल से आज की पीढ़ी को अवगत कराते हैं। प्रदेश की इन धरोहरों तक प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच को सुलभ बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ परियोजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत महेश्वर, मांडू, धार व ओरछा में रैंप, ब्रेल साइन बोर्ड, व्हीलचेयर इत्यादि सुविधाओं से दिव्यांगजनों की पहुंच आसान व सुलभ बनाई जाएगी।       प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्‍ला ने बताया कि “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के नेतृत्व में हम मध्यप्रदेश के अधिक से अधिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की स्थायी सूची में शामिल कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मध्यप्रदेश पुरातात्विक, भूगर्भिक और प्राकृतिक महत्व के स्थलों से समृद्ध है। पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की सुविधा के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं। जिससे पर्यटकों की संख्या में बढ़ाेत्तरी होने के साथ अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।” दिव्यांगों को सुलभता से होंगे धरोहरों के दर्शन मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों के सुलभता से दर्शन के अभिलाषी दिव्यांगों के लिए मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा पर्यटन स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा। बोर्ड प्रारंभिक तौर पर महेश्वर, मांडू, धार और ओरछा में एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर कार्य कर रहा है।   विस्तृत कार्ययोजना तैयार इस परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार हो चुकी है।  यह पहल भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता से संचालित किया जाना प्रस्तावित है। यह परियोजना मध्य प्रदेश को “समावेशी पर्यटन प्रदेश” के रूप में स्थापित करेगी। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। यह होंगे विकास कार्य चलने-फिरने में असमर्थता (लोकोमोटर दिव्यांगता), दृष्टि बाधा (नेत्रहीनता, कम दृष्टि और रंग अंधता), श्रवण बाधा (सुनने में असमर्थता), एकाधिक दिव्यांगता, बौद्धिक दिव्यांगता के दृष्टिगत पर्यटन स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं होंगी। इसके अंतर्गत रैंप का निर्माण, सुलभ शौचालय, पेयजल व ऑडियो गाइड्स आदि की व्यवस्था की जाएगी। इन स्थानों पर मिलेंगी विशेष सुविधाएं   महेश्वर : महेश्वर में मध्य प्रदेश टूरिज्म नर्मदा रिसॉर्ट, राम कुंड, देवी संग्रहालय, कालेश्वर मंदिर, जलेश्वर मंदिर और कमानी गेट पर  विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे। •  मांडू : मांडू में मध्य प्रदेश टूरिज्म रिसॉर्ट, सात कोठरी मंदिर, दिल्ली दरवाजा, मालवा रिसॉर्ट, मलिक दीनार मस्जिद, धर्मशाला, होशंगशाह का मकबरा, जामी मस्जिद, अशरफी महल, नीलकंठ मंदिर, दरिया खान का मकबरा, दाई का महल, लाल महल, संग्रहालय, ईको–पॉइंट, बाज बहादुर और रूपमति पेवेलियन में दिव्यांगों की सुविधा के दृष्टिगत कायाकल्प किया जाएगा।   •  धार : धार में “बाघ की गुफाओं” के अंतर्गत अलग–अलग गुफाओं और बाघ संग्रहालय में  निर्माण कार्य किए जाएंगे।    •  ओरछा : ओरछा में राजा महल, तमिरत की कोठी, जहांगीर महल, तीन दासियों की छतरी, पंचमुखी महादेव मंदिर और राय प्रवीण महल में  दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। अब प्रदेश में 18 स्थल यूनेस्को सूची में प्रदेश में यूनेस्को द्वारा घोषित 18 धरोहरों है। जिसमें से 3 स्थाई और 15 टेंटेटिव सूची में है। यूनेस्को की स्थायी विश्व धरोहर स्थल की सूची में प्रदेश के खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप शामिल हैं। गौरतलब है कि यूनेस्को ने इस वर्ष प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है। सम्राट अशोक के शिलालेख, चौंसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किले को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में घोषित होना प्रमाणित करता है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में विशेष स्थान रखता है। ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार का ऐतिहासिक समूह, मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी भी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं। यह उपलब्धि हमारी धरोहरों के संरक्षण तथा संवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख मौर्य कालीन शासक सम्राट अशोक को भला कौन नहीं जानता, जिन्होंने न केवल बौद्ध धर्म का प्रचार किया बल्कि कुशल शासन और नैतिकता का संदेश भी दिया। यही संदेश प्रदेश के शिलालेखों में नजर आते हैं। इन शिला और स्तंभ लेखों में सम्राट अशोक से संबंधित संदेश 2200 से अधिक वर्षों से संरक्षित हैं। सांची स्तंभ अभिलेख, जबलपुर में रूपनाथ लघु शिलालेख, दतिया में गुज्जरा लघु शिलालेख और सीहोर में पानगुरारिया लघु शिलालेख को इसमें शामिल किया गया है। चौंसठ योगिनी मंदिर हिन्दू धर्म में मां जगतजननी को सुख और समृद्धि दायिनी माना जाता है। हजारों वर्षों से धर्म स्थलों में मां की प्रतिमा को स्थापित कर श्रद्धालु उनके प्रति आस्था भाव से पूजन–अर्चन करते आए हैं। माता की आराधना का ऐसे ही स्थल हैं चौंसठ योगिनी मंदिर। 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित यह मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है। इन मंदिरों की गोलाकार, खुले आकाश के नीचे बनी संरचनाएं, जटिल शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय हैं। इसमें खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के चौसठ योगिनी मंदिर को शामिल किया गया है। गुप्तकालीन मंदिर प्रदेश में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर को यूनेस्को द्वारा शामिल किया गया है। गुप्तकालीन मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाते हैं। मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी, शिखर शैली और कलात्मक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं। बुंदेला काल के किला-महल बुंदेला काल के गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहांगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल, राजपूत और मुगल … Read more

मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह : सभी जिला अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण करेंगे

मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन  मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर आसान बना दिया गया मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह : सभी जिला अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण करेंगे मंत्री ने 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण के दिये निर्देश भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन कर आसान बना दिया गया है। कल्याणी महिला (विधवा महिला) सामाजिक न्याय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के विवाह पोर्टल https://vivahportal.mp.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकती है। मंत्री कुशवाह ने सभी जिलाधिकारियों को प्राप्त आवेदन पत्रों का 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण के निर्देश दिए है। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण सशक्तिकरण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में निवासरत कल्याणी बहनों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2018 से मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना संचालित की जा रही है। योजना में कल्याणी बहनों को विवाह उपरांत 2 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। विभाग द्वारा योजनांतर्गत आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इच्छुक हितग्राही https://vivahportal.mp.gov.in पर पब्लिक डोमेन से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। उन्होंने बताया कि विवाह पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन के लिये समग्र पोर्टल पर जानकारी अपडेट होना आवश्यक है। आवेदिका एवं उसके पति का आधार ई-केवायसी समग्र पोर्टल पर होना अनिवार्य है, समग्र पोर्टल पर वैवाहिक स्थिति विवाहित होना अनिवार्य है, 8 अंको की समग्र परिवार आईडी एक ही होना अनिवार्य है। सभी जिला अधिकारी ऑनलाइन प्राप्त आवेदन पत्रों का परीक्षण कर 30 दिवस में अनिवार्य रूप से निराकरण करेंगे। अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित रखने पर संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई की जा सकती है। प्रमुख सचिव श्रीमती वायंगणकर ने स्पष्ट किया कि जिला कार्यालय में सीधे आवेदन (ऑफलाइन) लेने ने मना नहीं किया जायेगा। जिला कार्यालय स्वयं पोर्टल पर लॉगइन कर आवेदन को ऑनलाइन प्रक्रिया में शामिल कर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।  

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