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स्थापना दिवस पखवाड़े के दौरान कार्यकर्ताओं ने किया रक्तदान

भोपाल भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पखवाड़े 6 अप्रैल से 25 अप्रैल तक आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया। जिलाध्यक्ष सुंदरलाल शाह की अगुवाई एवं जिलामंत्री पूनम गुप्ता की विशेष उपस्थिति में कार्यकर्ताओं ने रक्तदान कर सामाजिक दायित्वों के प्रति अपनी निष्ठा को प्रकट किया। विंध्यनगर स्थित रेड क्रॉस ब्लड बैंक में कई कार्यकर्ताओं ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वाले कार्यकर्ताओ में मुख्य रूप से पुनीत शुक्ला, गुरुप्रीत सिंह खालसा, गौतम कुमार , फैजान अली, पुष्पेंद्र सिंह, साहेब मलिक शामिल रहे। जिलाध्यक्ष सुंदरलाल शाह ने कहा कि स्थापना दिवस पखवाड़े के दौरान विभिन्न सांगठनिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों रक्तदान का कार्यक्रम भी हमारे युवा एवं ऊर्जावान कार्यकर्ताओं ने किया है जो निश्चित ही प्रशंसनीय है। रक्त दान जीवनदान के बराबर माना जाता है हमारे दिये रक्त से किसी के जीवन की रक्षा हो सकती है जिससे बड़ा पुण्य और कुछ भी नहीं हो सकता। रक्तदान करने वाले युवा कार्यकर्ताओं ने कहा कि रक्तदान से कोई भी हानि नहीं होती और‌ हमे वर्ष में एक बार रक्तदान जरूर करना चाहिए। किसी आपातकालीन स्थिति में किसी को रक्त की आवश्यकता होती है तो हमारा ब्लड बैंक में रखा रक्त उसके जीवन को बचा सकता है जोकि बहुत ही नेक काम है। हमारे रक्त दान से समाज में एक संदेश प्रसारित होता है और नये व्यक्ति रक्त दान के लिए प्रेरित होते हैं। इस दौरान जयन्त मंडल अध्यक्ष संदीप झा, पूर्व मंडल अध्यक्ष विक्रम सिंह चंदेल, युवा नेता अशोक शाह समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ की नई धमनी बनेगी खरसिया-परमालकसा 5वीं-6वीं रेल लाइन, मिलेगा बंपर रोजगार: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव

भोपाल केंद्रीय कैबिनेट की ओर से मंजूर खरसिया-नया रायपुर-परमालकसा रेल प्रोजेक्ट के बारे में रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को रेल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को बदलने वाला है। इस प्रोजेक्ट पर 8741 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इससे पूरे छत्तीसगढ़ को एक छोर से दूसरे छोर तक कवरेज मिलेगा। रेल मंत्री ने कहा कि खरसिया-परमालकसा 5वीं-6वीं रेल लाइन छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क की नई धमनी की तरह है। यह ओडिशा की सीमा से महाराष्ट्र की सीमा तक रेल नेटवर्क की सुविधा प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि यह भारत के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक है। इससे छत्तीसगढ़ के रायगढ़, जांजगीर चाँपा, बिलासपुर, बलौदा बाजार, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिले जुड़ेंगे। इसके तहत 21 स्टेशन बनेंगे और 48 बड़े ब्रिज बनाए जाएंगे। साथ ही 349 माइनर ब्रिज बनेंगे। 14 फ्लाईओवर और 184 अंडर पास का निर्माण होगा। स्थानीय स्तर पर निवासियों को दिक्कत ना हो इसके लिए 5 रेल फ्लाईओवर भी निर्मित किए जाएंगे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में 615 किलोमीटर लंबी पटरियां बिछेंगी, जिसमें 278 किलोमीटर का रूट है। इस रूट के निर्माण के बाद 8 से ज्यादा मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। इस रेल नेटवर्क के निर्माण से करीब 22 करोड़ लीटर डीजल बचेगा और रेलवे को लगभग 2500 करोड़ रुपये के डीजल की बचत होगी। रेल मंत्री ने कहा कि भगवान राम के वनवास के दौरान माता शबरी के प्रसंग से जुड़े लक्ष्मी नारायण मंदिर का भी इस रेल नेटवर्क से संपर्क स्थापित होगा। बलौदा बाजार और खरसिया जैसे सीमेंट उत्पादन के बड़े इंडस्ट्रियल हब भी इस नेटवर्क से जुड़ेंगे। श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए रेलवे अब बायपास पद्धति को अपना रही है। इसके तहत मालगाड़ी को शहर के बाहर से निकालने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं यात्री गाड़ियों को शहर के अंदर एंट्री दी जाएगी। इस रेल लाइन के निर्माण के दौरान भी इस पर फोकस रहेगा। साथ ही छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत डोकरा और कोसा सिल्क के उत्पादन वाले इलाके भी रेल लाइन के जरिए जुड़ेंगे। इसके चलते 2 करोड़ मैन डे जॉब क्रिएट होगा। रेल मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ को लगभग 3 सौ करोड़ का रेलवे फंड मिलता था। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का रेलवे बजट अब 22 गुना बढ़कर लगभग 6900 करोड़ से ज्यादा हो गया है। साथ ही 2014 के बाद छत्तीसगढ़ में रेलवे के काम में अभूतपूर्व तेजी आई है। इसके तहत 1,125 किमी नए ट्रैक बने हैं, जोकि दुबई के पूरे रेलवे नेटवर्क से ज्यादा है।   उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में रेलवे का कुल निवेश 47 हजार करोड़ से अधिक है। इसके तहत 32 स्टेशनों का पुनर्निर्माण हो रहा है, और इन्हें पूरी तरह नया बनाया जा रहा है। इनमें से कई स्टेशनों के विकास का कार्य इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। राज्य के महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट्स की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि दल्ली राझरा से रावघाट नई लाइन पूरी होने वाली है। अब इसके आगे रावघाट से जगदलपुर रेल लाइन के डीपीआर बनाने का काम लगभग पूरा हो गया है। वैसे ही गेवरा-पेन्ड्रा रोड नई लाइन पर भी तेजी से काम चल रहा है। साथ ही राजनांदगांव से नागपुर तीसरी लाइन, झारसुगुड़ा से बिलासपुर चौथी लाइन, रायपुर-केन्द्री-धमतरी से अभनपुर-राजिम लाइन का गेज कन्वर्जन करके ब्रॉड गेज बनाया जा रहा है। राजनांदगांव से डोंगरगढ़ चौथी लाइन, जगदलपुर से कोरापुट की डबलिंग, धरमजयगढ़ से कोरबा नई लाइन, अनूपपुर से अंबिकापुर के दोहरीकरण के लिए पर्याप्त फंड दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुखातिब होते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि राज्य के लोगों ने जिन उम्मीदों के साथ डबल इंजन की सरकार बनाई है, उसे पूरा करने का काम भारतीय रेल कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आई है, छत्तीसगढ़ में रेलवे से जुड़ा हजारों करोड़ का काम हो रहा है। नई परियोजना से छत्तीसगढ़ के छह सात जिले जुड़ते हैं, यह राज्य के लिए सौभाग्य की बात है। स्टेशनों के विकास के लिए सरकार ने करोड़ों का फंड दिया है, इससे रेलवे और छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदलेगी।

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान

एमएसटी रेल टिकट बुक करना हुआ और भी आसान यूटीएस मोबाइल ऐप से एमएसटी रेल टिकट बुकिंग: यात्रियों के लिए लाभदायक विकल्प भोपाल भोपाल मंडल में यात्री मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से बुक कर सकते हैं। यह सुविधा न केवल यात्रा को सरल बनाती है बल्कि समय और धन की बचत भी करती है। भोपाल मंडल में पिछले 6 महीनों में अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक कुल 60,672 मासिक सीजन रेल टिकट बुक किए गए, जिनमें से 17,722 टिकट यानी करीब 30% टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से बुक किए गए। MST क्या है? MST यानी Monthly Season Ticket एक प्रकार का मासिक रेल टिकट है जो यात्रियों को रोज़ाना आने-जाने के लिए बार-बार टिकट लेने की झंझट से मुक्ति देता है। यह टिकट एक अधिकतम 150 किलोमीटर  के लिए मान्य होता है और महीने भर रेल यात्राओं की सुविधा देता है। MST (Monthly Season Ticket) रेलवे द्वारा नियमित यात्रियों के लिए दी जाने वाली एक सुविधा है जो रोज़ रेल टिकट लेने की ज़रूरत को खत्म कर देती है। यह टिकट कई प्रकारों में उपलब्ध है जैसे – QST (Quarterly Season Ticket) जो 3 महीनों के लिए, HST (Half-Yearly Season Ticket) जो 6 महीनों के लिए और YST (Yearly Season Ticket) जो पूरे 12 महीनों के लिए मान्य होता है। ये सभी विकल्प यात्रियों को अधिक रियायत और सुविधा प्रदान करते हैं। अब ये सभी सीजन रेल टिकट UTS मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल रूप से बुक किए जा सकते हैं, जिससे रेल टिकट काउंटर की कतारों से मुक्ति, समय की बचत और पेपरलेस यात्रा का लाभ मिलता है। MST रेल टिकट लेने के लाभ: 1.    डिजिटल सुविधा: अब MST भी मोबाइल ऐप से बुक की जा सकती है, पेपरलेस और कैशलेस जिससे पेपर MST खोने का डर भी नहीं रहता क्यूंकि अब आपका मोबाइल ही आपकी MST है । 2.    रोज़ टिकट लेने की ज़रूरत नहीं: हर दिन टिकट खरीदने की झंझट से छुटकारा। 3.    पैसों की बचत: डेली रेल टिकट की तुलना में एमएसटी कहीं ज़्यादा किफायती होता है। 4.    समय की बचत: स्टेशन पर कतार में खड़े रहने की ज़रूरत नहीं।      वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि “मासिक सीजन रेल टिकट (MST) भी UTS ऑन मोबाइल ऐप से बुक किया जा सकता है, जो कि दैनिक यात्रियों के लिए बहुत ही उपयोगी सुविधा है। मैं सभी यात्रियों से आग्रह करता हूँ कि वे इस डिजिटल रेल सुविधा का अधिकतम लाभ उठाएं और डिजिटल इंडिया की दिशा में अपना योगदान दें।” यूटीएस ऑन मोबाइल ऐप: MST रेल टिकट बुकिंग की आसान प्रक्रिया 1.    ऐप डाउनलोड करें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल स्टोर से ‘UTS’ ऐप डाउनलोड करें। 2.    रजिस्ट्रेशन करें: मोबाइल नंबर से साइन अप करें। 3.    टिकट बुकिंग करें: o    MST विकल्प चुनें और रूट भरें। o    R-Wallet से भुगतान करें (3% बोनस भी मिलता है)। o    टिकट आपके मोबाइल पर पेपरलेस रूप में उपलब्ध रहेगा।

मुख्यमंत्री 2 छात्रावासों का भी करेंगे वर्चुअल लोकार्पण, अन्य मंत्रिगण भी होंगे वर्चुअल शामिल

ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ग्वालियर के विकास में नए अध्याय के रूप में जुड़ने जा रहे नवनिर्मित आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) को मंगलवार 8 अप्रैल को जनता को समर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस आरओबी का वर्चुअल लोकार्पण करेंगे। चंद्रबदनी नाका से न्यू कलेक्ट्रेट मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग क्रमांक-418 पर विवेकानंद नीडम के समीप लगभग 42 करोड 80 लाख रूपए की लागत से यह आरओबी बनकर तैयार हुआ है। लोकार्पण कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, उद्यानिकी एवं सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह तथा ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर भी शामिल होंगे। मंगलवार 8 अप्रैल को अपरान्ह 3.30 बजे यहाँ नाका चंद्रबदनी की ओर संभाग आयुक्त कार्यालय के समीप आरओबी का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित होगा। लोकार्पण कार्यक्रम में सांसद भारत सिंह कुशवाह, महापौर श्रीमती डॉ. शोभा सिकरवार, विधायक डॉ. सतीश सिकरवार व नगर निगम सभापति मनोज सिंह तोमर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधिगण बतौर विशिष्ट अतिथि आमंत्रित किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग और रेलवे द्वारा लगभग 937 मीटर लम्बाई और 76 मीटर स्पान में 42 करोड़ 80 लाख रूपए की लागत से इस आरओबी का निर्माण किया गया है। रेलवे द्वारा आरओबी के 37 मीटर भाग का निर्माण किया गया है। इस आरओबी के प्रारंभ हो जाने से एजी ऑफिस ब्रिज पर यातायात का दबाव कम होगा। साथ ही लश्कर कम्पू से लेकर अन्य बस्तियों के निवासियों को कलेक्ट्रेट व न्यू सिटी सेंटर की बस्तियों एवं हाईवे तक जाने में कम दूरी तय करनी पड़ेगी। साथ ही जाम से मुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री 2 छात्रावासों का भी करेंगे वर्चुअल लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव आरओबी के साथ-साथ लगभग 7 करोड 87 लाख रूपए की लागत से नवनिर्मित अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास भवन ठाटीपुर व अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास भवन सिरोल का भी वर्चुअली लोकार्पण करेंगे। ये दोनों छात्रावास 50 – 50 सीटर हैं और प्रत्येक छात्रावास का निर्माण 3 करोड 93 लाख 38 हजार रूपए की लागत से किया गया है।  

ज्ञान दान अभियान की प्रेरणादायक शुरुआत, किताबें दान करें, जीवन संवारे

भोपाल मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा 7 अप्रैल 2025 से ‘ज्ञान दान अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस सराहनीय पहल का शुभारंभ राज्य कार्यालय में मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह ने किया। अभियान का जरूरतमंद विद्यार्थियों तक प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक किताबों को पहुँचाना है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई में पीछे रह जाते हैं। सीईओ श्रीमती सिंह ने आमजन से आग्रह किया गया है कि वे पुरानी व उपयोग में न आने वाली यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, स्कूल-कॉलेज स्तर की किताबें और सामान्य ज्ञान व संदर्भ ग्रंथ दान कर सकते हैं। ये पुस्तकें आजीविका मिशन के राज्य, जिला व ब्लॉक कार्यालयों, सीटीसी-सामुदायिक प्रशिक्षण केंद्र या गांवों में मौजूद स्व-सहायता समूहों, ग्राम संगठन, संकुल स्तरीय संगठनों के कार्यालयों के माध्यम से एकत्र की जाएंगी। यह अभियान किताबों का आदान-प्रदान कर विद्यार्थियों का भविष्य संवारने की एक सशक्त मुहिम है। आमजन से अपील है कि वे इस अभियान से जुड़कर किसी के सपनों को उड़ान देने में भागीदार बनें।  

बनासकांठा दुर्घटना के प्रभावित परिवारों को हर संभव की जा रही है मदद

भोपाल गत दिनों गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में हरदा जिले के प्रभावित परिवारों को प्रशासन द्वारा हर संभव मदद देने की कार्यवाही लगातार जारी है। कलेक्टर आदित्य सिंह ने बताया कि दुर्घटना में मजदूर परिवारों के कुल 11 सदस्यों की मृत्यु हो गई थी। इन सभी 11 मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री सहायता कोष से दो-दो लाख रुपए तथा गुजरात शासन की ओर से चार-चार लाख रुपए की मदद स्वीकृत की गई है। इसके अलावा सभी 11 मृतकों के परिजन को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान की राशि से 2-2 लाख रुपए की मदद मृतकों के परिजनों को दी जा चुकी है। साथ ही संबल अनुग्रह योजना से 3 मृतक श्रमिक के परिवारों को चार-चार लाख रुपए की मदद भी दी गई है। हरदा कलेक्टर सिंह ने बताया कि संबल योजना में पंजीबद्ध 8 मृतक मजदूरों के परिजनों को अंत्येष्टि सहायता के रूप में पांच-पांच हजार रुपए की सहायता भी दी गई है। उन्होंने बताया कि 2 घायल मजदूरों को प्रधानमंत्री राहत कोष से 50-50 हजार रुपए तथा गुजरात सरकार की ओर से 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की कार्यवाही जारी है। कलेक्टर सिंह ने बताया कि दोनों घायल मजदूरों को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से 50-50 हजार रुपए की मदद दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों में से राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना के तहत पात्र पाए गए 2 परिवारों को 20-20 हजार रुपए स्वीकृत करने की कार्यवाही भी की जा रही है। इसके अलावा कुल 13 प्रभावित परिवारों में से 8 परिवारों को राशन पात्रता पर्ची जारी कर दी गई है और उन्हें अप्रैल माह का राशन प्रदान कर दिया गया है। हरदा कलेक्टर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में पात्र पाए गए दो मृतक श्रमिकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की सहायता राशि स्वीकृत करने की कार्यवाही भी जारी है। इन दुर्घटना प्रभावित परिवारों में से प्रधानमंत्री आवास योजना में 2 परिवार पात्र पाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास प्लस 2.0 योजना के तहत इन दोनों परिवारों के प्रधानमंत्री आवास के प्रकरण तैयार किये जा रहे हैं। प्रभावित परिवारों के 2 बच्चों को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बच्चों के संरक्षण हेतु संचालित स्पॉन्सरशिप योजना के तहत उनके निकटतम परिजनों को संरक्षक घोषित करते हुए 4-4 हजार रुपए प्रतिमाह की मदद करने की कार्यवाही भी की जा रही है। सभी प्रभावित परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था भी जिला प्रशासन कर रहा है।  

Madhya Pradesh Tech Growth Conclave-2025 :जीआईएस की निवेश प्रतिबद्धताओं को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

इंदौर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित मध्यप्रदेश “टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव-2025” का आयोजन 27 अप्रैल को इंदौर में किया जाएगा। यह ऐतिहासिक सम्मेलन राज्य में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) 2025 में की गई निवेश प्रतिबद्धताओं को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में इस आयोजन में राज्य की प्रौद्योगिकी नेतृत्व की दिशा में रोडमेप प्रस्तुत किया जायेगा। आईटी एवं संबंधित क्षेत्रों में राज्य सरकार के निवेश कार्यान्वयन नीति को गति देने और राज्य को एक प्रमुख प्रौद्योगिकी गंतव्य के रूप में उभारने के लिये यह आयोजन महत्वपूर्ण होगा। यह निवेश प्रगति को ट्रेक पर लाने, नीतिगत निर्णयों को सामने लाने और सहयोग बढ़ाने के लिये एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जाएंगी। इनमें आईआईटी इंदौर दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन का भूमि-पूजन, बीईएल में एआई टेक्नोलॉजी का उपयोग करने वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन और नई सेटर्स ऑफ एक्सीलेंस, एव्हीजीसी-एक्सआर प्रयोगशालाएं और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर शामिल हैं। इससे सरकार, अकादमी और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग संजय दुबे मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जीआईएस-2025 के आयोजन के बाद आईटी क्षेत्र में मध्यप्रदेश के निवेश को बढ़ाने के लिये किये गये प्रयासों की प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही प्रमुख परियोजनाओं जैसे एलटीआई माइंडट्री (आईटी/आईटीईएस), इंदौर सुपर कॉरिडोर केंपस (इन्फ्रा), पीपीपी टॉवर इंदौर (इन्फ्रा), सीटीआरएलएस (डाटा सेंटर) और पंचशील (इन्फ्रा डेवलपर) जैसी परियोजनाओं का भूमिपूजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त एसडीडब्ल्यूएएन (नेटवर्क), ऑपटिकल फाइबर (डिजिटल इन्फ्रा), आईटी पार्क प्लॉट अलॉटमेंट फॉर 12 कंपनीस (इन्फ्रा), केयनीस (ईएमसी) परियोजनाओं को लेटर्स ऑफ अलॉटमेंट सौंपे जाएंगे। कॉन्क्लेव में 300 से अधिक उद्योगपति, नीति निर्माता और निवेशक भाग लेंगे, जो राज्य में आईटी और संबंधित क्षेत्रों में प्रगति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान आईटी-आईटीईएस, ईएसडीएम, सेमिकंडक्टर्स, एव्हीजीसी-एक्सआर, डेटा सेंटर्स, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश की प्रगति की समीक्षा की जायेगी। मुख्य उद्घाटन में सिंहासा आईटी पार्क, इंदौर में स्थित भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एआई और सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर (एसडीसी) का उद्घाटन शामिल है। साथ ही 25 करोड़ रूपये की राशि से विकसित जबलपुर आईटी पार्क ब्लॉक बी का उद्घाटन भी किया जायेगा, जिससे 500 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस आयोजन में एआई एण्ड सायबर सिक्योरिटी (डीएसटी और मेनिट तथा एक उद्योग भागीदार के साथ), सेमिकंडक्टर्स (डीएसटी और आईआईआईटीएम ग्वालियर के साथ), ड्रोन स्कूल (डीएसटी और आईआईएसईआर भोपाल के साथ), एव्हीजीसी-एक्सआर सीओई (डीएसटी और एफआईसीसीआई तथा एमपी एव्हीजीसी-एक्सआर एसोसिएशन के साथ) और एव्हीजीसी-एक्सआर लैब्स (डीएसटी और एफआईसीसीआई तथा मध्यप्रदेश के शासकीय आर्टस् कॉलेजों के साथ) के लिए आगामी सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस के लिए एमओयू और समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह साझेदारी राज्य की प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। निवेश सुविधा को और सरल बनाने के लिए, मध्यप्रदेश सरकार एक समर्पित पोर्टल लॉन्च करेगी, जो परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी और कार्यान्वयन को बढ़ावा देगा। इसके अतिरिक्त, 4 नई नीति मार्गदर्शिकाएँ जारी की जाएंगी, जो मध्यप्रदेश को प्रौद्योगिकी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करेंगी। कॉन्क्लेव में प्रमुख उद्योग हस्तियों को एमपी ब्रांड एंबेसडर के रूप में सम्मानित किया जायेगा। इससे राज्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को स्वीकार किया जायेगा। इसमें समापन सत्र के बाद उद्योगपतियों और शासकीय अधिकारियों के बीच एक्सक्लूसिव वन-टू-वन बैठकें होंगी। एमपी टेक ग्रोथ कांस्लेव-2025 निवेश क्षमता को आर्थिक वास्तविकता में बदलने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह आयोजन मध्यप्रदेश की तकनीकी क्षमताओं को प्रदर्शित करेगा। मजबूत नीतिगत ढाँचे, निवेश के अनुकूल माहौल और एक समृद्ध नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के साथ, राज्य प्रौद्योगिकी-प्रेरित विकास के अगले चरण में भारत का नेतृत्व करेगा।  

मुख्यमंत्री ने प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा कर सभी निर्माणाधीन परियोजनाएं समय पर पूरा करने के दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सड़क विकास के काम में हम किसी से भी पीछे न रहें। प्रदेश में सड़कों विशेषकर अधिक यातायात वाले राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्गों के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र सरकार से उच्च कोटि का समन्वय करें। आपसी संवाद में कोई कमी न रखें, ताकि राजमार्गों की मंजूरी और निर्माण के कामों को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में प्रदेश में प्रगतिरत राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में लोक निर्माण एवं एनएचएआई के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को पूरी गुणवत्ता (परफार्मेंस गारंटी) के साथ तय समय-सीमा में ही पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़े भू-अधिग्रहण के लंबित मामलों को आपसी वार्ता के जरिए शीघ्र सुलझाया जाए। बैठक में बताया गया कि गत वित्त वर्ष 2024-25 में मध्यप्रदेश फोर लेन राष्ट्रीय राजमार्ग मंजूर कराने के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर रहा है। यह मध्यप्रदेश को केंद्र सरकार द्वारा दी गई बड़ी सौगातों में से एक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति एवं प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा कर जानकारी ली। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में बाबा महाकाल मंदिर के पास से एक एलिवेटेड रोड बनाया जा सकता है, जो रेलवे स्टेशन को सीधा कनेक्ट करे। इससे महाकाल दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का बेहतर तरीके से यातायात प्रबंधन किया जा सकेगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी 10 अप्रैल को बदनावर आएंगे बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एनएचएआई के अधिकारियों ने अवगत कराया गया कि आगामी 10 अप्रैल को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी धार जिले के बदनावर आएंगे। यहां वे एक गांव में एनएचएआई द्वारा निर्मित की गईं 218 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकर्पण करेंगे। इनकी कुल लागत 3502 करोड़ रुपए है। इसी प्रकार एनएचएआई द्वारा निर्मित की जाने वाली 110 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का भूमिपूजन भी इसी अवसर पर केंद्रीय मंत्री द्वारा किया जाएगा। इन सभी निर्माण कार्यों की लागत 2330 करोड़ रुपए है। मुख्यमंत्री प्रदेश की 7 प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी से करेंगे आग्रह बैठक में एनएचएआई के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश में नवीन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण की 7 परियोजनाएं पाइप लाइन में हैं। इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलना शेष है। यह जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन अत्यधिक आवश्यकता वाले मार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में विकसित करने के लिए वे स्वयं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी से आग्रह करेंगे। बताया गया कि बदनावर-पेटलावद-थांदला 4 लेन मार्ग निर्माण (लंबाई 80 किमी, लागत 1500 करोड़ रु.), पूर्वी इंदौर बायपास मार्ग निर्माण (लंबाई 77 किमी, लागत 3500 करोड़ रु.) एवं उज्जैन-झालावाड़ 4 लेन मार्ग का निर्माण कार्य (लंबाई 134 किमी, लागत 2200 करोड़ रु.) अत्यंत जरूरी है। यह तीनों राजमार्ग विकास कार्य 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे। इसी प्रकार मिसरौद से औबेदुल्लागंज खण्ड रा.रा.- 46 का 6 लेन में उन्नयन एवं निर्माण (लंबाई 19.32 किमी, लागत 280 करोड़ रु.), ग्वालियर-भिण्ड से म.प्र/उ.प्र. की सीमा तक रा.रा.- 719 का 4 लेन मय पेव्हड शोल्डर में उन्नयन एवं निर्माण (लंबाई 96 किमी, लागत 3125 करोड़ रु.) तथा सतना-चित्रकूट खण्ड रा.रा.- 135 बीजी का 4 लेन में उन्नयन एवं निर्माण (लंबाई 80 किमी, लागत 1500 करोड़ रु.) प्रस्तावित है। इसी तरह लखनादौन से रायपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (लंबाई 200 किमी, लागत लगभग 5985 करोड़ रु.) के निर्माण के लिए बालाघाट और लांजी तहसील के जनजातीय क्षेत्र से गुजरने वाले एकरेखण(अलाइमेंट) के विकल्प को प्राथमिकता दी जानी है। इसके लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। यह परियोजनाएं सिर्फ़ भू-अधिग्रहण एवं वन अनुमतियां न मिलने की वजह से अबतक मंजूर होने से शेष हैं। बैठक में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल 9664 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग उपलब्ध हैं। इसमें से 5428 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई के अधीन हैं। शेष 4236 किमी लंबाई युक्त राष्ट्रीय राजमार्गों का संधारण लोक निर्माण विभाग (3990 किमी) एवं म.प्र. सड़क विकास निगम (846 किमी) द्वारा किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय सरकार द्वारा प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए 3935 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। गत वित्त वर्ष की कार्य योजना अंतर्गत 8 नवीन कार्यो के लिए 3412 करोड़ रुपए के प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में स्वीकृति के लिए प्रक्रियाधीन हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोड नेटवर्क बढ़ाने के लिए हम केंद्र सरकार से लगातार सम्पर्क में हैं और बहुत जल्द ही प्रदेश को नए राष्ट्रीय राजमार्ग मंजूर होने वाले हैं। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव लोक निर्माण नीरज मंडलोई, म.प्र. सड़क विकास निगम के एमडी भरत यादव, एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधार के लिये प्रदेशभर में हुआ औचक निरीक्षण, 35 कार्यों का किया गया मूल्यांकन

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधार के लिये प्रदेशभर में हुआ औचक निरीक्षण, 35 कार्यों का किया गया मूल्यांकन दो निर्माण एजेंसी ब्लैक लिस्ट एवं तीन अधिकारियों को नोटिस भोपाल प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्माण कार्यों के औचक निरीक्षण की नवीन पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल में हर माह दो बार सॉफ्टवेयर से रैंडमली चयनित दलों, जिलों, निर्माण कार्यों और सामग्री के सैंपल लेने के स्थानों का औचक निरीक्षण किया जाएगा।इसी क्रम में 5 अप्रैल 2025 को प्रदेश के 7 जिलों हरदा, बालाघाट, अशोकनगर, अलीराजपुर, सीधी, उज्जैन एवं टीकमगढ़ में निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण अभियान के अंतर्गत कुल 35 निर्माण कार्यों का चयन रैंडम आधार पर किया गया, जिनमें 14 कार्य पीडब्ल्यूडी (सड़क/पुल), 13 कार्य पीआईयू, 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, 1 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम एवं 1 कार्य पीडब्ल्यूडी (एनएच) से संबंधित थे। निरीक्षण के बाद प्राप्त प्रतिवेदन की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में की गई, प्रबंध संचालक सड़क विकास निगम श्री भरत यादव, प्रमुख अभियंता श्री के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता श्री एस.आर. बघेल, सभी मुख्य अभियंता एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी उपस्थित रहे। समीक्षा में टीकमगढ़ जिले के दिगोड़ा-मोहनगढ़ मार्ग की गुणवत्ता को लेकर निरीक्षणकर्ताओं ने सराहना की। परफॉर्मेंस गारंटी की अवधि समाप्त होने के दो वर्ष बाद भी मार्ग की स्थिति उत्कृष्ट पाई गई। इसके लिए निर्माण कार्य के दौरान पदस्थ श्री अनिल श्रीवास्तव एवं श्री पी.के. जोशी की विशेष प्रशंसा की गई। बालाघाट जिले के पीनडकेपर-खुशीपार-फोगलटोला मार्ग पर गुणवत्ता में गंभीर कमी पाई गई, जिसमें कस्ट की मोटाई कम पाई गई तथा सीसी कार्य में जॉइंट कटिंग समय पर नहीं की गई। इस लापरवाही के लिए निर्माण एजेंसी ‘श्री मोहनी कंस्ट्रक्शन’ को ब्लैक लिस्ट में डालने एवं संबंधित कार्यपालन यंत्री, एसडीओ व उपयंत्री को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार अशोकनगर जिले के बररी-नलखेड़ा मार्ग के निर्माण कार्य की खराब गुणवत्ता को देखते हुए निर्माण एजेंसी ‘अवनी कंस्ट्रक्शन’ को भी ब्लैक लिस्ट में दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। समीक्षा बैठक में एमडी एमपीआरडीसी श्री भरत यादव ने समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं विधानसभा के लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने एवं ई-ऑफिस के माध्यम से कार्य संपादन करने के लिये भी निर्देश जारी किए गए हैं।  

15 जिलों के आबकारी अधिकारियों के होंगे तबादले

भोपाल प्रदेश में शराब ठेकों की नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 15 जिलों के जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) हटाए जा सकते हैं। उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़़ा ने ऐसे जिलों की सूची मांगी थी, जहां डीईओ का प्रदर्शन खराब है। इनमें छिंदवाड़ा, विदिशा, बड़वानी और राजगढ़ के डीईओ का प्रदर्शन(परफारमेंस) खराब बताया जा रहा है। ये जिले राजस्व लक्ष्य में पिछड़ गए हैं। वहीं नर्मदापुरम, छतरपुर, झाबुआ, टीकमगढ़ और खंडवा जिले में एक ही जिला आबकारी अधिकारी के पदस्थ रहते तीन साल से अधिक हो गया है। वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव ने ऐसे जिलों की सूची तैयार कर ली है। जल्द ही इनके तबादले किए जा सकते हैं।     विभाग में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कनिष्ठ अधिकारी, जैसे कि सहायक जिला आबकारी अधिकारी (एडीईओ), जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।     इस स्थिति को देखते हुए आबकारी महकमे में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों के जिला आबकारी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।     इसमें शिवपुरी, नरसिंहपुर, आलीराजपुर, सहित कई जिले शामिल हैं, जहां नए अधिकारियों की नियुक्ति आवश्यक हो गई है।  

युवाओं को सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, कांस्टेबल और SI के पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया, भरे जाने हैं 8000 पद

भोपाल मध्य प्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई शुरू होने वाली है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस माह के अंत में करीब आठ हजार पदों पर पुलिस भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसमें इसमें 7,500 कांस्टेबल और 500 उप निरीक्षक (एसआई) के पद शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय ने कर्मचारी चयन मंडल से जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने का अनुरोध किया है। भर्ती की अधिसूचना इस माह के अंत तक जारी की जा सकती है और शारीरिक दक्षता परीक्षा जून-जुलाई के आसपास हो सकती है। बता दें कि राज्य में एसआई के पदों पर भर्ती परीक्षा छह साल बाद हो रही है। इससे पहले 2018 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक भर्ती नहीं हो सकी। इसका एक कारण कोविड-19 और पिछले कुछ सालों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना है। युवा लंबे समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे। भर्ती के इंतजार में कई युवाओं की तो अब उम्र भी बीत चुकी है, लेकिन राहत की बात यह है कि अब सरकार ने इस भर्ती को जल्द से जल्द शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में युवाओं को अभी से ही इस भर्ती के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।  छह साल बाद हो रही एसआई की भर्ती परीक्षा एसआई के पदों पर भर्ती परीक्षा छह साल बाद हो रही है। इससे पहले 2018 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक भर्ती नहीं हो सकी। इसका एक कारण कोविड-19 और पिछले कुछ सालों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना है। लंबे समय से एसआई भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी अब उम्र सीमा पार भी कर चुके हैं। पांच साल में होगी ढाई लाख पदों पर भर्ती सरकार ने विधानसभा में सरकारी विभागों के रिक्त पदों को भरने का एलान किया है। सरकार ने कहा कि आगामी पांच साल में सरकार ढाई लाख पदों पर भर्ती करेगी। सभी विभागों के खालों पदों को भरा जाएगा। सरकार ने हर वर्ग को एससी,एसटी और ओबीसी को उनके लिए आरक्षित आरक्षण के अनुसार लाभ देने का भी वादा किया है। वहीं, कांग्रेस भी सरकार पर रोजगार को लेकर हमलावर है। कई अवसरों पर कांग्रेस सरकार को उनके वादे पूरे नहीं करने को लेकर घेर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि कई विभागों में पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार कोई पद नहीं भर रही। सिर्फ वादे कर रही है। MP Police भर्ती अधिसूचना जल्द, परीक्षा जून-जुलाई में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा इस माह के अंत तक भर्ती अधिसूचना जारी की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय ने बोर्ड से भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) जून-जुलाई में आयोजित की जा सकती है। MP Police में 6 साल बाद फिर से SI भर्ती 2018 के बाद से अब तक MP में कोई SI भर्ती नहीं हुई थी। कोविड-19 और प्रशासनिक देरी की वजह से प्रक्रिया अटकी रही। इस देरी से कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं, जिससे सरकार पर पहले से ही दबाव बना हुआ था। सरकार का बड़ा वादा: 5 साल में 2.5 लाख नौकरियां सरकार ने विधानसभा में घोषणा की है कि अगले 5 वर्षों में 2.5 लाख पदों पर भर्ती की जाएगी। सभी विभागों में खाली पदों को भरने की तैयारी की जा रही है। SC/ST/OBC वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। राजनीतिक हलचल भी तेज कांग्रेस सरकार पर रोजगार के वादे पूरे न करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही है, जबकि विभागों में हज़ारों पद खाली पड़े हैं।

विद्युत वितरण कंपनी ने आम जनता तथा खेतों में काम करने वाले किसानों को आगाह किया

भोपाल मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने आम जनता तथा खेतों में काम करने वाले किसानों को आगाह किया है कि वे अपनी फसलों और घास की ढेरियां हाईटेंशन लाइनों से दूर लगाएं। कंपनी ने कहा है कि जरा सी असावधानी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए आमजन भी करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम में सहयोग करें एवं बिजली लाइनों तथा ट्रांसफार्मर से उचित दूरी बना कर ही अपनी फसलों को रखें। कंपनी ने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं उपकरणों के साथ छेड़छाड़ न करें तथा सुरक्षित दूरी बनायें रखें। यदि आँधी तूफान में खंबे, तार टूटे हों तो इसकी सूचना तत्काल शिकायत कॉल सेंटर के टोल फ्री नं. 1912, उपाय एप एवं समीप के वितरण केन्द्र कार्यालय में दें। जमीन पर पड़े तारों को छूने या स्पर्श करने की गलती न करें। साथ ही पार करने का प्रयास न करें। पान टपरों तथा ऐसी दुकानों जिनमें लोहे की चादर का इस्तेमाल होता है, में वायरिंग को सुरक्षित ढंग से पी.वी.सी. पाईप के द्वारा ही कराई जाए। किसी प्रकार की कटी-फटी लूज वायरिंग से जान-माल का खतरा हो सकता है। बारिश के दौरान विद्युत खम्बे /स्टे के पास पानी भराव वाले स्थान से निकलने की जल्दी न करें। सावधानी बरतें क्योंकि बारिश के दौरान करंट लीकेज की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि बच्चों और मवेशियों का विशेष ध्यान रखें। अपने मवेशी को बिजली के खम्बे, स्टे वायर इत्यादि से न बांधें। कपड़े सुखाने के लिये जी.आई. तार अथवा रस्सी, सर्विस लाईन के पाईप या बिजली के खम्बों से कभी न बांधें। इसमें करंट आने की संभावना बनी रहती है। घर की दीवार, उपकरण, नल आदि में लीकेज करंट आने पर प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन से तत्काल ठीक कराएं। खेतों में लोहे के कटीले तारों की फेंसिंग को आपस में शार्ट कर कई स्थानों पर अर्थिंग कराएं। इन तारों में असावधानीवश करंट आने की संभावना बनी रहती है। इससे जान-माल के नु‍कसान का खतरा रहता है।  मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू विद्युत उपकरणों, वायरिंग, स्विच इत्यादि को स्वयं सुधारने के बजाय किसी प्रशिक्षित एवं अनुभवी इलेक्ट्रीशियन की सेवाएं लें। मानव जीवन अमूल्य है। बिजली के स्विच/सॉकिट/बिजली उपकरण बच्चों की पहुंच से दूर रखें। विद्युत पोल से ही कनेक्शन लें, बीच तारों में कटिया डालकर विद्युत का उपयोग न करें, यह दण्डनीय अपराध है।  शादी, धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों में अतिरिक्त भार के लिये अस्थायी कनेक्शन लें तथा उचित क्षमता की उच्च गुणवत्ता की केबिल का ही उपयोग करें। कटे-फटे तारों का उपयोग कतई न करें। स्वीकृत भार से अधिक लोड का उपयोग न करें। उचित क्षमता के एम.सी.सी.बी/कट-आउट लगाने के साथ ही अच्छी गुणवत्ता की वायरिंग का ही उपयोग करें। वर्ष में एक बार अपने परिसर की वायरिंग, फिटिंग, अर्थिंग अनुभवी एवं दक्ष इलेक्ट्रीशियन से अवश्य चैक कराएं।  विद्युत लाईन के नीचे एवं ट्रांसफार्मर्स के नजदीक भवन निर्माण/ दुकान/ बैनर/ ईट भट्टा न लगाएँ। विद्युत लाईन के नीचे कोई स्थाई-अस्थाई निर्माण न करें। फसल इत्यादि का संग्रहण न करें। विद्युत लाइनों से सुरक्षित दूरी पर ही निर्माण करें। किसान भाई खेतों में कटाई एवं गहाई की जा रही फसलों को बिजली के तारों के नीचे, बिजली के खम्बों एवं स्थापित ट्रांसफार्मर/ स्टे तारों के पास एकत्रित न करें। खेतों में विद्युत उपयोग के लिये कटी-फटी डोरी का उपयोग न करें।  

विद्युत भार (लोड) स्वीकृत करवायें एवं जुर्माने से बचें

भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इन दिनों निम्नदाब के गैर घरेलू और औद्योगिक (पॉवर) उपभोक्ताओं के परिसरों का व्यापक चैकिंग अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के दौरान उपभोक्ता परिसर में विद्युत भार (लोड) में वृद्धि के प्रकरण पकड़े जा रहे हैं। कंपनी द्वारा विद्युत भार की वृद्धि स्वेच्छा से कराने के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक करने का भी अभियान इन दिनों चलाया जा रहा है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे कंपनी के पोर्टल पर स्वेच्छिक ऑनलाइन आवेदन कर भार वृद्धि करा लें। विद्युत भार क्या है  बिजली कंपनी में नवीन कनेक्शन के लिए जब कोई व्यक्ति अधिकृत आवेदन देता है तो उसके परिसर में भार (लोड) की गणना कर भार निर्धारित किया जाता है। इस प्रक्रिया में नया कनेक्शन देने के लिए बिजली कर्मचारी परिसर का लोड सर्वे करते हैं। यह भार (लोड) विद्युत प्रणाली में जोड़ा जाता है। इसलिए इसे संयोजित भार या कनेक्टेड लोड कहा जाता है। भार की सही गणना  उपभोक्ता को बिजली कंपनी के साथ सहयोग कर भार की सही गणना कराना चाहिए ताकि विद्युत प्रणाली सुचारू रूप से संचालित की जा सके। उपभोक्ता द्वारा परिसर में कनेक्शन लेने के कुछ अन्तराल बाद कुछ नये विद्युत उपकरणों को स्थापित कर भार बढ़ा लिया जाता है। यह बढ़ा भार बिजली कंपनी के कार्यालय में यदि स्वीकृत नहीं कराया जाता है तो चैकिंग के दौरान भार वृद्धि का प्रकरण बन जाता है और उपभोक्ता को जुर्माना भरना पड़ता है। चैकिंग में पकड़े जाने पर जुर्माना  यदि उपभोक्ता के परिसर में भार वृद्धि का प्रकरण मिलता है तो ऐसे उपभोक्ताओं पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। बढ़े हुए भार की अनुपातिक खपत पर दो गुनी दर से शुल्क वसूली का प्रावधान है। साथ ही विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 126 के अंतर्गत भी चैकिंग में अतिरिक्त भार पाए जाने पर ऐसे अतिरिक्त भार को संयोजित करने की दिनांक से बढ़े हुए भार की अनुपातिक खपत पर दोगुनी दर से पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है। विद्युत भार वृद्धि : क्या करें मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी उपभोक्ताओं से आग्रह करती है कि वे बिजली कंपनी के सरल संयोजन पोर्टल saralsanyojan.mpcz.in:8888/home पर ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करें। ऑनलाइन आवेदन में विद्युत उपकरणों एवं उनके भार की जानकारी दिया जाना आवश्यक है। उपभोक्ता द्वारा ऑनलाइन आवेदन करने पर एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने पर कंपनी द्वारा आगे भार स्वीकृत कर दिया जाता है। उपभोक्ता को चाहिए कि वे लाईसेंसी ठेकेदार से गणना करा कर यदि आनलाइन भार वृद्घि /कमी प्रस्तुत करेंगे तो उन्हें अनावश्यक परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने सभी सम्माननीय उपभोक्ताओं से अपील करती है कि वे आनलाइन सुविधा का लाभ लेकर अपने परिसर के वास्तविक भार के अनुसार अपना संयोजित भार स्वीकृत करवायें।  

नगर पालिका मंडला में आसपास के गांवों को शहर में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी

मंडला  अब मंडला नगर पालिका की सीमा में नया विस्तार होने वाला है, जिससे शहर की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। दरअसल नगर पालिका मंडला में आसपास के लगे गांवों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चिन्हित ग्रामों को मध्यप्रदेश के राजपत्र में प्रकाशन के लिए पंचायत इंस्पेक्टर या ग्राम सचिव से प्रस्ताव और विस्तृत जानकारी मांगी गई है। यदि सब कुछ योजना के अनुरूप चलता है, तो जल्द ही 11 गांवों को नगर पालिका मंडला में सम्मिलित कर लिया जाएगा। 24 की जगह होंगे 33 वार्ड जानकारी के अनुसार नगर पालिका की सीमा के विस्तार के लिए नगरीय क्षेत्र से लगी हुई 11 ग्राम पंचायतों के गांवों को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। वर्तमान में मंडला नगर पालिका में कुल 24 वार्ड हैं, लेकिन नए परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 33 हो जाएगी। नगर पालिका की वर्तमान आबादी 50 हजार के ऊपर है, जो बढ़कर एक लाख के करीब हो जाएगी। नए परिसीमन में 11 ग्राम पंचायतों के राजस्व गांवों की 40 हजार से अधिक की आबादी को जोड़ा जाएगा। पूर्व में हुआ था विरोध मंडला नगर के पास बसे हुए गांवों को नगर पालिका में शामिल करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उस समय भारी विरोध हुआ था। बावजूद इसके अब फिर से 11 ग्राम पंचायतों के राजस्व गांवों को नगर पालिका में सम्मिलित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परिसीमन का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और अब वार्ड विस्तार के बाद नगर पालिका में कुल 33 वार्ड हो जाएंगे। बताया गया कि पिछले वर्ष इस सीमा विस्तार की प्रक्रिया को लेकर कुछ पंचायतों की ओर से विरोध हुआ था, जिसके चलते कार्य योजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही थी। विकास को मिलेगा बल नगर पालिका राजस्व निरीक्षक के अनुसार, 2011 की जनगणना के अनुसार मंडला की जनसंख्या लगभग 75 हजार थी, जो पिछले तीन वर्षों में एक लाख के करीब पहुंच गई है। जब नए गांवों को नगर पालिका में जोड़ा जाएगा तो यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाएगी, जिससे इस नगरीय निकाय को अधिक फंडिंग प्राप्त होगी। ज्यादा बजट मिलने से शहर का विकास और अधिक व्यवस्थित और तीव्र गति से होगा। साथ ही, अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठान और छोटे-बड़े उद्योग स्थापित होंगे, जिससे नगर पालिका का राजस्व भी बढ़ेगा। ये गांव होंगे शामिल जनगणना 2011 के अनुसार जिन ग्राम पंचायतों के गांवों को नगर पालिका में शामिल करने की योजना है, उनमें बिझिंया, कटरा, देवदरा, पौंडी महाराजपुर, केहरपुर के मोहनटोला, माली मोहगांव, पुरवा, सकवाह, बिनैका, बड़ी खैरी शामिल हैं। इन सभी गांवों की आबादी तीन वर्ष पहले 36,469 थी, जो अब 40 हजार के पार पहुंच गई है। जब यह सभी ग्रामीण नगर पालिका मंडला से जुड़ जाएंगे, तो शहर की आबादी के साथ उसकी पहचान और आवश्यकता भी बदल जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए कार्य तेज कर दिया गया है। शहर से सटे गांवों को अब मिलेंगी सुविधाएं जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायतों को शहरी क्षेत्र में शामिल किए जाने से उनका विकास अधिक तेज गति से हो सकेगा। जहां अभी सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है, वहां नगर पालिका क्षेत्र में आने के बाद स्ट्रीट लाइट्स, नालियां और सौंदर्यीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। ग्रामों के विकास का रोड मैप तैयार किया जाएगा और प्लानिंग के आधार पर कार्य किया जाएगा। वर्तमान में इन ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की भारी समस्या है और सड़कों की हालत भी दयनीय है। नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। चुनावों ने डाली थी बाधा विगत वर्ष 2021 में ही नए परिसीमन के तहत जिला मुख्यालय से लगी 11 ग्राम पंचायतों को नगर पालिका क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। यदि यह कार्य समय पर पूर्ण हो जाता, तो मंडला नगर पालिका के 24 वार्ड बढ़कर 33 हो जाते और आबादी एक लाख से ऊपर हो जाती। लेकिन कुछ अटकलों और विवादों के चलते यह योजना पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 2022 में जनवरी माह में पंचायत चुनावों की घोषणा और आचार संहिता लागू हो जाने के कारण परिसीमन का कार्य रोक दिया गया था। अब एक बार फिर से इस प्रक्रिया को लेकर उम्मीद जताई जा रही है। चारों दिशाओं में फैलेंगी नपा की सीमाएं नए परिसीमन के अनुसार नगर पालिका की सीमा अब चारों दिशाओं में विस्तृत होगी। पूर्व की दिशा में बिनैका, बड़ी खैरी, पुरवा, सकवाह और रामबाग जैसे गांव जुड़ेंगे। पश्चिम में माली मोहगांव, उत्तर में देवदरा, कटरा, बिझिंया और दक्षिण की दिशा में पौंडी महाराजपुर, मोहनटोला जैसे गांव नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा बनेंगे। इस विस्तार से शहर की सीमा का आकार बड़ा होगा और अधिक क्षेत्र में नगरीय सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा। प्रशासन तैयार नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) गजानन नाफड़े ने बताया कि “नगर पालिका क्षेत्र के परिसीमन की तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रस्ताव भोपाल भेजा जाएगा। वहां से जो भी दिशा-निर्देश मिलेंगे, उस पर तत्काल कार्य किया जाएगा।

इंदौर देवी अहिल्याबाई एयरपोर्ट पर स्वदेशी रूप से तैयार की गई ‘फ्रिक्शन रनवे टेस्टिंग मशीन’ का इस्तेमाल किया गया

इंदौर इंदौर के देवी अहिल्याबाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए पहली बार देश में पूरी तरह से स्वदेशी रूप से तैयार की गई ‘फ्रिक्शन रनवे टेस्टिंग मशीन’ का इस्तेमाल किया गया। इस टेस्ट में रनवे को एयरक्राफ्ट की सुरक्षित और स्मूद लैंडिंग के लिए उपयुक्त पाया गया। विशेषज्ञों की टीम ने माना कि भारी-भरकम विमानों के संचालन के बावजूद वर्तमान में कोई खतरा नहीं है। यह मशीन रनवे पर दौड़ते हुए विमानों की लैंडिंग के दौरान होने वाले घर्षण की जांच करती है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा यह परीक्षण शनिवार को इंदौर एयरपोर्ट पर किया गया। देश में पहली बार बनी यह मशीन इंदौर एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि इस ‘एयरपोर्ट सरफेस फ्रिक्शन टेस्टर’ (ASFT) को पहली बार भारत में तैयार किया गया है। इससे पहले यह मशीन विदेशों से मंगाई जाती थी। इस मशीन को एक कार पर इंस्टॉल किया जाता है। इसमें एक विशेष पहिया रनवे की सतह को स्पर्श करता है। कार के दौड़ने पर यह पहिया रनवे पर उपलब्ध घर्षण का डेटा मशीन तक भेजता है। अक्सर विमानों के तेजी से उतरने पर उनके टायरों का रबर रनवे पर चिपक जाता है, जिससे रनवे की घर्षण क्षमता कम हो जाती है और फिसलन का खतरा बढ़ जाता है। यह मशीन इन सभी आंकड़ों को रिकॉर्ड करती है और उसी के आधार पर रनवे के सुधार की आवश्यकता तय की जाती है। यह टेस्ट क्यों जरूरी है? एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, जब विमान लैंड करता है, तो सबसे पहले उसके टायर रनवे से टकराते हैं। रनवे की सतह सीमेंटेड होती है और इस पर कारपेट की तरह लेयर बिछाई जाती है ताकि टायर खराब न हों। यदि यह सतह खराब हो जाए तो लैंडिंग के समय झटका महसूस हो सकता है या टायर फटने की घटनाएं हो सकती हैं। टेस्ट के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि रनवे पर किसी तरह की कोई परेशानी न हो। यदि कोई दिक्कत सामने आती है, तो सुधार कार्य किया जाता है क्योंकि यह विमानों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। 25 करोड़ रुपए की लागत से रनवे मरम्मत का कार्य जारी इंदौर एयरपोर्ट पर वर्तमान में 25 करोड़ रुपए की लागत से रनवे की मरम्मत का कार्य चल रहा है। इसके लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सितंबर में टेंडर जारी किए थे और नवंबर में चंद्रपुर की श्रीसाईं कंस्ट्रक्शन कंपनी को यह कार्य सौंपा गया। इस कार्य के अंतर्गत रनवे की पुरानी डामर परत को हटाकर लगभग 8 इंच मोटी नई परत बिछाई जा रही है। यह कार्य प्रतिदिन रात के समय किया जा रहा है, जिसके चलते रात की उड़ानों का संचालन नहीं हो रहा। अथॉरिटी द्वारा 1 अप्रैल से 31 अक्टूबर तक रात 10:30 बजे से सुबह 6:30 बजे तक रनवे क्लोजर का आदेश जारी किया गया है। बड़े विमानों की लैंडिंग अब आसान इंदौर एयरपोर्ट पर अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नए बोइंग 777 जैसे बड़े विमान आसानी से उतर सकते हैं। साल 2022 में रनवे के टर्नपैड की चौड़ाई बढ़ाकर इसे संभव बनाया गया। दरअसल, 31 अगस्त 2021 को पीएम का विमान प्रैक्टिस फ्लाइट के तौर पर इंदौर आया था, लेकिन रनवे पर टर्नपैड की कम चौड़ाई के कारण बिना उतरे लौट गया था। इसके बाद टर्नपैड की चौड़ाई चार मीटर तक बढ़ाई गई, जिससे अब बोइंग 777 विमान आसानी से उतर सकते हैं।

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