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हर जनपद पंचायत को 03 करोड़ की स्वीकृति प्रदान करने का होगा अधिकार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने नई पहल शुरू की है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा “सुगम संपर्कता परियोजना की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से गांव, ग्राम पंचायत और 100 से अधिक आबादी वाले मजरा-टोला तथा मुख्यमंत्री मजरा-टोला योजना अंतर्गत चिन्हित बस्तियों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा। मनरेगा के तहत होगा सड़क निर्माण परियोजना अंतर्गत सड़कों का निर्माण मनरेगा यानी (VB-G RAM G) योजना के माध्यम से कराया जाएगा। इसके लिए प्रदेश की प्रत्येक जनपद पंचायत को रू. 3 करोड़ तक की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार दिया गया है। मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद द्वारा सभी जनपद पंचायतों को राशि भी आवंटित कर दी गई है। सिपरी सॉफ्टवेयर से स्थान का होगा चयन परियोजना के तहत मजरे-टोले और सांदीपनि विद्यालयों तक बनने वाली सड़कों के लिए स्थान का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही सड़कों की डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार करने के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर और आरआईएमएस का उपयोग किया जाएगा। ड्रोन से होगी निगरानी परियोजना अंतर्गत बनने वाली सड़कों की निगरानी ड्रोन तकनीक से की जाएगी। निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 28 मार्च तक डीपीआर तैयार करने के निर्देश आयुक्त मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद श्री अवि प्रसाद ने बताया कि परियोजना के तहत 28 मार्च 2026 तक डीपीआर तैयार कर उसकी तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर आवागमन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इस परियोजना के माध्यम से 100 से अधिक आबादी वाले मजरे-टोले तथा सांदीपनि विद्यालयों तक सड़क निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा। 

मुगलिया हाट के सरपंच मारण का दिल्ली में सम्मान, केंद्रीय मंत्री पाटिल ने किया सम्मानित

भोपाल  केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल ने भोपाल जिले की ग्राम पंचायत मुगलिया हाट के सरपंच  धर्मेन्द्र मारण को जल जीवन अभियान अंतर्गत नल जल योजना के सफल क्रियान्वयन, बेहतर संचालन और संधारण में उत्कृष्ट कार्य के लिए नई दिल्ली मे ‘उत्कृष्ट जल नेतृत्व सरपंच सम्मान’ प्रदान किया। सरपंच  मारण के नेतृत्व में नल जल योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, सुव्यवस्थित संचालन तथा व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयासों की समारोह में सराहना के साथ प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ योजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत मुगलिया हाट के सरपंच  धर्मेन्द्र मारण को मिला यह सम्मान मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है और यह उपलब्धि प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। ग्राम स्तर पर जनभागीदारी के साथ योजनाओं का संचालन जल प्रबंधन को स्थायी रूप से सुदृढ़ बना रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके ने इस उपलब्धि पर ग्रामीणों को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नल जल योजनाओं के सफल संचालन और संधारण के लिए ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी  पी. नरहरि ने बताया कि सामुदायिक सहभागिता आधारित प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का दीर्घकालिक और प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके। भारत सरकार द्वारा राज्यों से जल जीवन मिशन के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों एवं महिला स्व सहायता समूह की सदस्यों को विभिन्न श्रेणियों में गए चयन के मापदंडों के आधार पर राज्यों से नामांकित सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय के राज्य मंत्री  वी. सोमन्ना, जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री  राज भूषण चौधरी तथा केन्द्र सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव  अशोक के के मीणा भी उपस्थित रहे। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से जल जीवन अभियान के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों और महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों को चयनित कर सम्मानित किया गया।  

मंत्री सिलावट का निर्देश: निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

भोपाल  जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि विभाग के अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ नियत समय अवधि में पूर्ण करें, जिससे जनता को इन कार्यों का समय से पूरा लाभ मिल सके. विभागीय अधिकारी समय-समय पर कार्यों का निरीक्षण करें एवं निरंतर निरीक्षण प्रतिवेदन दें. कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। मंत्री  सिलावट ने बुधवार को मंत्रालय में जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा की. बैठक में अपर मुख्य सचिव  राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता,  विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मंत्री  सिलावट द्वारा प्रमुख रूप से नर्मदा ताप्ती कछार इंदौर, जल संसाधन विभाग उज्जैन एवं नमामि क्षिप्रे परियोजना इकाई उज्जैन में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की गई. उन्होंने आगामी सिंहस्थ- 2028 से संबंधित विभागीय कार्यों कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना, क्षिप्रा नदी के दोनो तटो पर घाट निर्माण की विस्तृत समीक्षा कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और इन सभी कार्यों को समय-सीमा में आगामी सिंहस्थ के पूर्व पूरी गुणवत्ता एवं विभागीय मापदण्ड अनुसार पूर्ण करने के निर्देश दिये। मंत्री  सिलावट द्वारा उज्जैन एवं इंदौर कछार के अंतर्गत निर्माणाधीन 14 वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। परियोजनाओं के पूर्ण होने पर उज्जैन, देवास, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, झाबुआ, बुरहानपुर एवं धार जिले को लगभग 5 लाख 44 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किये जाने, गुणवत्ता पूर्ण कार्य किये जाने के निर्देश दिये साथ ही विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को इन परियोजनाओं को स्वीकृत समय सीमा में पूर्ण करने के लिये विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रत्येक 15 दिन में इससे संबंधित समीक्षा किये जाने के भी निर्देश दिए। मंत्री  सिलावट द्वारा चितावद, समाकोटा बैराज, डुंगरिया बैराज, बनीहरवाखेडी बैराज, मॉं रेवा उदवहन सिंचाई परियोजना, हाट पिपलिया सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, कयामपुर सीतामऊ सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, मल्हारगढ़ दाब युक्त सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, रामपुरा मनासा सूक्ष्म वृहर सिंचाई परियोजना, कबूलपुर मध्यम, आहू सिंचाई परियोजना, तलवाड़ा बांध परियोजना, पांगारी, कारम मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई किये जाने के लिये सार्थक प्रयास करने के निर्देश भी दिये गये।    

भारत एआई के क्षेत्र में लहरा रहा है अपना परचम मुख्यमंत्री ने राहतगढ़ और जेसीनगर को दी आधुनिक ग्रंथालय की सौगात

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में मातृ सत्ता प्रधान संस्कृति है। भारत की छवि विश्व गुरू की रही है। दुनिया में केवल भारतीय संस्कृति है, जिसने अपने मूल्यों के आधार पर ज्ञान की धारा को तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों के माध्यम से विश्व के कोने-कोने में पहुंचाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का समय बदला है। अब हमारा देश आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। भारत अपने कौशल के बल पर आधुनिक तकनीक में विश्व में नंबर वन बन रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महान शिक्षाविद् डॉ. हरि सिंह गौर ने अपनी जमा पूंजी लगाकर बुंदेलखंड के सागर में शिक्षा का नया सूर्योदय किया। श्री गौर के प्रयासों से बुंदेलखंड को केंद्रीय विश्वविद्यालय की सौगात मिली है। यहां विभिन्न कोर्स की पढ़ाई कर निकले विद्यार्थियों ने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राहतगढ़ और जेसीनगर में श्रमिकों के बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को सागर में ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस क्रम में आज सागर में मां सरस्वती की कृपा से शिक्षा का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के रूप में शिक्षा के आधुनिक मंदिर बुंदेलखंड के युवाओं के सामर्थ्य और संकल्पों को नई ऊंचाई देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पहल के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत का अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानवीर के केवल विश्वविद्यालय का नाम नहीं बल्कि एक बेटे का अपने माता-पिता के चरणों में श्रृद्धा सुमन है। मंत्री श्री राजपूत ने इस संस्थान को अपनी पूज्य माता ज्ञानबाई जी के नाम से ज्ञान और अपने श्रद्धेय पिता वीर सिंह के नाम से वीर शब्द लेकर उन्हें समर्पित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय बुंदेलखंड के युवाओं के लिए सपनों के नए द्वार खोलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समय के साथ चलने के लिए युवाओं से कौशल और तकनीक में पारंगत होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कुशल मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने बुंदेलखंड के चहुंमुखी विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। वर्ष 2003 के बाद हुए कार्यों से बुंदेलखंड क्षेत्र का कायाकल्प हो गया है। उसके पहले की सरकारों के कार्यकाल में विकास धरातल पर कहीं नजर नहीं आया। पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती, श्रद्धेय श्री बाबूलाल गौर और पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी राज्य सरकार के लिए बुंदेलखंड सर्वोच्च प्राथमिकता का क्षेत्र रहा है। हमारी सरकार ने पिछले दिनों खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में बुंदेलखंड के विकास के लिए 27 हजार करोड़ रूपये के विशेष पैकेज की मंजूरी दी। इससे क्षेत्र में करोड़ों का निवेश आएगा और बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रदेश में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुंदेलखंड वीरों और महावीरों की धरती है। बुंदेलखंड की पहचान महाराजा छत्रसाल से भी है। उन्होंने अपने कालखंड में कई लड़ाइयां लड़ीं और बुंदेलखंड की पावन धरा पर सनातन संस्कृति की ध्वजा फहराई। यहां के आल्हा और ऊदल की वीरता की कहानियां आज भी जीवंत हैं। बुंदेलखंड के वीरों ने अपने शौर्य से मातृभूमि की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय टीम के क्रिकेट में विश्व विजेता बनने और होली पर्व की बधाई दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सहित देश के खिलाड़ी, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दुनिया में भारत का परचम लहरा रहे हैं। आज विश्व के कई संस्थानों के शीर्ष पदों पर भारतवंशी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं, यह देश की श्रेष्ठतम शिक्षा व्यवस्था का ही परिणाम है। सागर के विकास में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का योगदान अविस्मरणीयः मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस दिन को सागर के लिए ऐतिहासिक बताते हुए विकास के कई महत्वपूर्ण पड़ावों को रेखांकित किया। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि आज का दिन बेहद सौभाग्यशाली है। उन्होंने याद दिलाया कि ज्ञानवीर विश्वविद्यालय की फाइल पर डॉ. मोहन यादव ने तभी हस्ताक्षर कर इसकी शुरुआत कराई थी, जब वे प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री थे। सागर अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल है जहाँ केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय (स्टेट यूनिवर्सिटी) और मेडिकल कॉलेज की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष धन्यवाद किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री आदित्य सिंह राजपूत ने स्वागत उदबोधन में विश्वविद्यालय के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल, रहली विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, खुरई एवं पूर्व मंत्री विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह, सागर विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, देवरी विधायक श्री ब्रज बिहारी पटेरिया, बण्डा विधायक श्री वीरेन्द्र सिंह लोधी, बीना विधायक श्रीमति निर्मला सप्रे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री हीरा सिंह राजपूत, महापौर नगर निगम सागर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने परखी भविष्य के वकीलों की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ज्ञानवीर विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परिसर का उद्घाटन करशैक्षणिक सुविधाओं का जायजा लिया, जिसमें विशेष रूप से विधि (Law) के छात्र-छात्राओं के लिए तैयार की गई मूट कोर्ट (Moot Court) आकर्षण का केंद्र रही। मूट कोर्ट एक प्रकार की कृत्रिम या नकली न्यायिक कार्यवाही होती है। इसमें कानून की पढ़ाई कर रहे छात्र एक काल्पनिक कानूनी मामले पर वास्तविक अदालत की तरह बहस करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को वास्तविक अदालती कार्यवाही और प्रोटोकॉल की बारीकियां सिखाना, न्यायिक तर्क और पैरवी की कला में निपुण बनाना, मुकदमेबाजी और कानूनी दस्तावेजीकरण का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। मुख्यमंत्री ने बढ़ाया छात्र-छात्राओं का उत्साह मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मूट कोर्ट का अवलोकन करते हुए वहां मौजूद छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान … Read more

फूड सेफ्टी जांच में खुलासा, MP में दो ब्रांड की आइसक्रीम के 4 फ्लेवर फेल

छिंदवाड़ा कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ है कि अब खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में टॉप एंड टाउन ब्रांड और हैवमोर ब्रांड की आइसक्रीम अमानक पाई गई। टॉप एंड टाउन के 3 फ्लेवर और हैवमोर की अल्फोंसो मैंगो फ्लेवर आइसक्रीम अमानक पाई गई है। संपूर्ण प्रदेश में ‘मिलावट से मुक्ति’ अभियान चलाया जा रहा है। वर्तमान ग्रीष्म ऋतु में आइसक्रीम एवं कोल्डड्रिंक की अत्यधिक खपत होती है। खास तौर पर बच्चे आइसक्रीम का अधिकतम उपयोग करते हैं। छिंदवाड़ा खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और सैंपलिंग ऐसे में आमजन को बिना मिलावट के आइसक्रीम उपलब्ध हो सके, इस बात की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा शहर के प्रमुख एवं छोटे-बड़े सभी आइसक्रीम विक्रेताओं से आइसक्रीम के नमूने संग्रहीत कर जांच के लिए लैब भेजे जाते हैं। लिहाजा विभिन्न ब्रांड्स के आइसक्रीम के नमूने पिछले कुछ महीनों में विभाग द्वारा लिए गए थे, जिसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी गोपेश मिश्रा द्वारा शहर में बिक रहे सभी ब्रांड्स के साथ-साथ टॉप एंड टाउन ब्रांड के मुख्य वितरणकर्ता ‘जानहवी फूड्स’ सिवनी रोड से और हैवमोर ब्रांड के मुख्य वितरणकर्ता ‘सरकार डिस्ट्रीब्यूटर्स’ से इन दोनों ही ब्रांड की विभिन्न फ्लेवर्स की आइसक्रीम के नमूने जांच हेतु लिए गए थे। लैब रिपोर्ट में टॉप एंड टाउन और हैवमोर के नमूने अमानक राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार टॉप एंड टाउन के 3 फ्लेवर- मैंगो, बटर स्कॉच, वनीला और हैवमोर की अल्फोंसो मैंगो फ्लेवर आइसक्रीम अमानक पाई गई है। उपरोक्त मामले में रिपोर्ट्स आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा दोनों ही वितरणकर्ताओं और इन आइसक्रीम के निर्माणकर्ता फर्म को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 46(4) का नोटिस दिया है। इसके अनुसार वितरणकर्ताओं और निर्माणकर्ता फर्म को विभाग में उपलब्ध नमूने के अन्य भागों को केंद्रीय खाद्य जांच प्रयोगशाला भेजकर जांच कराने का अधिकार होता है। नोटिस अवधि के बाद न्यायालय में पेश किया जाएगा चालान आगे खाद्य सुरक्षा विभाग छिंदवाड़ा द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार नोटिस अवधि के पश्चात जांच के अनुसार दोषियों पर नियमानुसार चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

दतिया में तनाव: भीम आर्मी-असपा की यात्रा रोकने पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का प्रयोग

दतिया दतिया में गोराघाट के सिंध पुल के पास बुधवार को आजाद समाज पार्टी की संकल्प यात्रा के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। बिना अनुमति निकाली जा रही यात्रा को रोकने के लिए पुलिस ने बैरीकेट लगाए थे। जानकारी के अनुसार, आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी से जुड़े कार्यकर्ता संकल्प यात्रा निकालते हुए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। प्रशासन ने पहले ही इस यात्रा की अनुमति नहीं दी थी, इसके बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने पहले समझाइश दी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले समझाइश दी, लेकिन कार्यकर्ता पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज किया। इसके साथ ही वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों को हिरासत में ले लिया पुलिस ने कार्यकर्ताओं को खदेड़ते हुए कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान करीब 100 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। आंदोलन में शामिल आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर सिंह यादव को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।  

मौत का मांझा बना मुसीबत, हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा—अब तक नीति क्यों नहीं?

इंदौर कोर्ट के आदेश के दो माह बाद भी शासन चाइनीज मांझे को लेकर नीति नहीं बना सका। मामले को लेकर हाई कोर्ट में चल रही स्वत: संज्ञान याचिका में बुधवार को शासन को इस बारे में बनाई गई नीति की जानकारी देना थी, लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय मांग लिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मुख्य सचिव ने 12 मार्च को इस संबंध में अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम 25 मार्च तक का समय दे रहे हैं। नीति तैयार कर इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाए। कोर्ट ने यह आदेश भी दिया कि न्यायमित्र द्वारा दिए गए सुझावों को भी नीति में शामिल किया जाए। चाइनीज मांझे मामले में मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेकर याचिका दायर की है। 11 दिसंबर 2025 को हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर इंदौर और आसपास के सभी जिलों में चाइनीज मांझा बनाने, बेचने, उपयोग करने को प्रतिबंधित कर दिया था। 12 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने जिला प्रशासन से कहा था कि वह आदेशों का सख्ती से पालन करें और सुनिश्चित करे कि चाइनीज मांझे की वजह से कोई हादसा न हो, बावजूद इसके मकर संक्रांति के दिन इंदौर और आसपास के जिलों में कई हादसे हुए। 16 जनवरी को मामले में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चाइनीज मांझे की वजह से हुए हादसों को लेकर नाराजगी जताई। कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि सख्ती के बावजूद हादसे हुए यह बहुत दुखद है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा था कि वे कोर्ट के आदेश और न्याय मित्र द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर चाइनीज मांझे को लेकर नीति तैयार करें। बुधवार को शासन को तैयार की गई नीति की जानकारी देना थी, लेकिन सरकारी वकील ने इसके लिए समय ले लिया। सुनवाई के दौरान ये सुझाव आए थे सामने     चाइनीज मांझे से घायल या मौत होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान होना चाहिए।     चाइनीज मांझे के निपटान की नीति तय होना चाहिए।     जब्त चाइनीज मांझे को मालखाने में रखने का कोई मतलब नहीं। इसे भस्मक भेजकर खत्म कराया जाए।     ई-प्लेटफार्म पर चाइनीज मांझे की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित की जाना चाहिए।     चाइनीज मांझे का ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रांसपोर्टरों का लायसेंस निरस्त किया जाए।     चाइनीज बनाने, बेचने या उपयोग की सूचना देने वालों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रविधान किया जाना चाहिए

महानिदेशक डॉ. कोठारी बोले, सफलता पाने के लिए समय का सही प्रबंधन आवश्यक

सफलता के लिये समय का प्रभावी प्रबंधन आवश्यक : महानिदेशक डॉ. कोठारी मैपकास्ट में एआई आधारित तकनीकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का हुआ समापन युवाओं में नवाचार एवं स्टार्ट-अप संस्कृति को मिला प्रोत्साहन भोपाल मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी ने कहा है कि विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और समय का प्रभावी प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी विचार को वास्तविकता में बदलने के लिए “आई कैन” की भावना सबसे महत्वपूर्ण होती है। डॉ. कोठारी ने बताया कि परिषद विज्ञान एवं नवाचार के लगभग 18 क्षेत्रों जैसे कृषि, वेटनरी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग एवं आईटी में तकनीकी परामर्श, संस्थागत सहयोग, प्रशिक्षण तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। साथ ही परिषद युवाओं को उद्योगों और संस्थानों से जोड़ने का भी कार्य कर रही है, जिससे उनके नवाचारों को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल सके। डॉ. कोठारी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एआई आधारित तकनीकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। छह सप्ताह तक संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव एआई टूल्स और उद्यमिता कौशल से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच का विकास करते हुए उन्हें स्टार्ट-अप एवं स्व-रोजगार के लिए प्रेरित करना रहा। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को इंटरएक्टिव डिजिटल टूल्स, ग्राफिक्स और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम प्रदेश में एआई आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में नए अवसर सृजित करने की एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए प्रशिक्षण को उपयोगी बताया। प्रतिभागी श्री प्रतीक बाघरे ने कहा कि मार्केटिंग, इंडिया फर्स्ट की अवधारणा और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर आयोजित सत्र अत्यंत लाभकारी रहे। साथ ही आईआईआईएफआर भोपाल के शैक्षणिक भ्रमण से स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को समझने का भी अवसर प्राप्त हुआ। प्रतिभागी श्री राहुल तिवारी ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार और तकनीक के उपयोग से जुड़े अनेक नए आयाम सीखने को मिले तथा समन्वयकों का मार्गदर्शन सराहनीय रहा। वहीं श्री उदित वर्मा ने बताया कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें स्व-रोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। कार्यक्रम के संचालन एवं समन्वय में डॉ. प्रवीण विद्यार्थी, श्री अवनीश शर्मा, सुश्री तन्या चतुर्वेदी एवं श्री रविंद्र कोरेव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।  

एसीएस स्वास्थ्य की अध्यक्षता में समिति गठित

एसीएस स्वास्थ्य की अध्यक्षता में समिति गठित समग्र स्वास्थ्य योजना का अंतिम प्रारूप का करेगी निर्धारण भोपाल राज्य के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लिए प्रस्तावित समग्र स्वास्थ्य योजना के अंतिम प्रारूप, नीति निर्धारण के साथ ही कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों से परामर्श कर योजना को मंत्रि-परिषद के समक्ष अनुमोदन के लिए अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में अपर मुख्य सचिव वित्त, अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग सदस्य जबकि आयुक्त लोक स्वास्थ्य सदस्य-सचिव होंगे। समिति प्रस्तावित योजना के सभी आवश्यक तत्वों जैसे पात्रता, कवरेज, वित्तीय माडल, क्रियान्वयन संरचना तथा हितधारकों के परामर्श को समाहित कर विस्तृत योजना दस्तावेज तैयार करेगी, जिसे मंत्रि-परिषद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।  

गैस की किल्लत जारी: महीने भर बाद मिलेगा दूसरा सिलेंडर, 25 दिन का नियम फेल

भोपाल  पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए 25 दिन के अंतराल के नियम ने व्यवहार में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कागजों में यह नियम पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर पाने के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग और डिलीवरी की तारीख के बीच बढ़ते अंतर ने डिजिटल सिस्टम को ऐसा जाल बना दिया है, जिसमें आम आदमी की रसोई फंसती नजर आ रही है। डिजिटल नियम बना परेशानी का कारण     राजधानी की विभिन्न गैस एजेंसियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार उपभोक्ताओं को दूसरे सिलेंडर के लिए तय समय से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद 25 दिन का अंतराल आवश्यक है, लेकिन सिस्टम की गणना का तरीका उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।     तेल कंपनियां इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से कर रही हैं। यही कारण है कि उपभोक्ता समय पर बुकिंग करने के बावजूद अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं। डिलीवरी में देरी बढ़ा रही इंतजार     गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर पहुंचाने में होने वाली देरी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।     इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। एजेंसियों की देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि डिजिटल सिस्टम उन्हें निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने से रोक देता है। जरूरत के समय काम नहीं आ रहा सिस्टम     मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर गैस की खपत स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी आयोजन या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते।     मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ताओं को ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ जैसा संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट के समय तकनीक सुविधा देने के बजाय बाधा बन रही है। पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी दिक्कत     शहर के नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पहले ही गैस और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस नियम को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। यदि डिलीवरी में देरी हो रही है तो उसकी गणना उपभोक्ता के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। नियम में लचीलापन जरूरी     उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से होनी चाहिए या फिर विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिए।     यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर और भारी पड़ सकता है।  

अमरीन-आफरीन का ईरानी डेरा कनेक्शन सामने, बनीं सेक्स रैकेट की हेड

भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए हाई प्रोफाइल धर्मांतरण और रेप केस में गिरफ्तार दो सगी बहनें अमरीन और आफरीन फिलहाल जेल में बंद हैं. इस मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस अब इस पूरे मामले की कई एंगल से जांच कर रही है ताकि सच्चाई तक पहुंचा जा सके. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी समय उनके परिवार की नजदीकियां ईरानी डेरे से बढ़ने लगी थीं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ईरानी डेरे के आपराधिक छवि वाले लोगों से इन दोनों बहनों का कोई संपर्क था या नहीं. फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी संभावित सबूतों को जोड़ने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। ब्यूटी पार्लर की आड़ में चल रहा था रैकेट पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना रैकेट फैलाया था. पुलिस का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी युवतियां इस जाल का शिकार बनी हैं. जांच एजेंसियां पीड़िताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। पुलिस मामले की कई एंगल से जांच में जुटी  इस मामले में एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कड़ियों की तलाश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहराई से विवेचना जारी है।

एमपी के कई शहरों में गर्मी की लहर, ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा प्रभावित, भोपाल और इंदौर में भी तापमान बढ़ा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने तेज तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह औसत से करीब 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद गर्मी का असर और तेज हो सकता है। यह आज की ताज़ा ख़बरों में मौसम से जुड़ा बड़ा अपडेट माना जा रहा है। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान 38 डिग्री के पार पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री तथा दमोह और टीकमगढ़ में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पांच बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 37.2 डिग्री तक पहुंच गया। उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। हवा की दिशा बदलने से बढ़ी गर्मी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में हवा की दिशा में बदलाव आया है। पहले जहां हवाएं उत्तर-पूर्व से आ रही थीं, वहीं अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की ओर से चल रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से होकर मध्यप्रदेश तक पहुंचती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 15 मार्च के बाद मौसम में बदलाव संभव मौसम विभाग के मुताबिक 15 मार्च के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मार्च में लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन अप्रैल और मई में भीषण गर्मी पड़ सकती है। इस दौरान 15 से 20 दिनों तक हीट वेव का असर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी पड़ने के संकेत हैं।  मंगलवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री और गुना में 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दमोह और टीकमगढ़ में भी पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री या उससे ऊपर रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में तापमान 37.2 डिग्री, उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च की शुरुआत में इतनी तेजी से तापमान बढ़ना सामान्य ट्रेंड से अलग है। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने की मुख्य वजह हवा की दिशा में बदलाव है। फिलहाल प्रदेश में हवाएं उत्तर-पूर्व की बजाय पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये रेगिस्तानी क्षेत्रों से होकर आती हैं, जिससे तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च का मौसम संक्रमण और एलर्जी के लिहाज से संवेदनशील होता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह-रात हल्की ठंड रहने के कारण सर्दी-जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ सकते हैं। डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह और देर रात ठंडी हवा से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में हल्का बदलाव भी देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। हालांकि इससे गर्मी में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल अप्रैल और मई के महीने सबसे अधिक गर्म रह सकते हैं। ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने का अनुमान है। पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में प्रदेश में दिन गर्म और रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहती हैं, जबकि कभी-कभी बारिश भी होती है। इस बार भी ऐसा ही मौसम देखने को मिल सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी ने लोगों को गर्मी का अहसास जल्दी करा दिया है।

भोपाल समेत कई राज्यों में IT की कार्रवाई, कारोबारी दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर छापा

भोपाल  राजधानी भोपाल में बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब आयकर विभाग की विशेष टीम ने शहर के बड़े माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। दिल्ली से पहुंची आयकर विभाग की टीम ने तड़के चूना भट्टी क्षेत्र में स्थित उनके आवास और एमपी नगर इलाके में मौजूद व्यावसायिक कार्यालयों पर कार्रवाई की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह अभियान केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग की अलग-अलग टीमें कानपुर, छतरपुर और दिल्ली समेत कई शहरों में गुप्ता से जुड़े प्रतिष्ठानों और कार्यालयों की जांच कर रही हैं, जिससे पूरे मामले को बड़े पैमाने की समन्वित कार्रवाई माना जा रहा है। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से टैक्स चोरी और वित्तीय लेन-देन में संभावित अनियमितताओं की जांच को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विभाग को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि माइनिंग कारोबार से होने वाली आय का पूरा विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इन सभी रिकॉर्ड्स की जांच कर वास्तविक आय और घोषित आय के बीच अंतर का आकलन किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की कर चोरी या वित्तीय हेरफेर का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों के रडार पर पहले भी रह चुके है दिलीप गुप्ता गौरतलब है कि दिलीप गुप्ता पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुके हैं। पिछले वर्ष नवंबर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भी उनके ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की गई थी। उस समय तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, जिंदा कारतूस और कई संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। आरोप लगाए गए थे कि निवेश योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए शेयर आवंटन किया गया। अब आयकर विभाग की नई कार्रवाई ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। अधिकारियों से सांठगांठ की जानकारी मौजूदा जांच में अधिकारियों द्वारा बेनामी संपत्तियों और हवाला से जुड़े लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। आयकर विभाग की टीम दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन कर रही है और घर के सदस्यों तथा कार्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई के बाद भोपाल के व्यापारिक और माइनिंग क्षेत्र में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि कारोबारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी जांच या खुलासे सामने आ सकते हैं। माइनिंग सेक्टर में सक्रिय दिलीप गुप्ता के खिलाफ यह कार्रवाई प्रदेश में आर्थिक अनियमितताओं पर नियंत्रण के प्रयासों के रूप में देखी जा रही है। हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से जब्त की गई संपत्तियों या दस्तावेजों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया है, लेकिन जिस स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित अघोषित संपत्ति से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

सरपंच व सचिव चला रहे अपने राज सरकार के पैसों का उडा रहे धज्जियां

सरपंच व सचिव चला रहे अपने  राज सरकार के पैसों का उडा रहे धज्जियां। राजेंद्रग्राम/छबिलाल जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत दुनिया के सरपंच श्रीमती जोगवती व सचिव पंचम सिमर को कर रहे अपने मन की राज और सरकार  के पैसों का धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं, अगर देखा जाए तो ग्राम पंचायत दुनिया के ग्राम मिर्च दादर में शासकीय प्राथमिक विद्यालय स्थित है जिसका बाउंड्री कारण किया जा रहा है जिसमें सुचारू रूप से गुणवत्ता विहीन है ऐसा लगता है की सीमेंट नहीं राख से चुने किया गया हो दीवाल को छूने से धूल जैसा उड़ रहा है उसे बाउंड्री वॉल में सरकार के द्वारा लाखों रुपए की लागत लगाकर बाउंड्री बनाने का निर्देश दिया गया है लेकिन एक पैसे का नहीं समझ में आ रहा है। उसे बाउंड्री वालों को बनते बनते लगभग एक से डेढ़ साल पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक काम को पूरा कर सरपंच संचिव के द्वारा विद्यालय परिसर को नहीं सोपा गया है। और अगर देखा जाए तो कहीं पहले स्टार अधूरा तो कहीं चुनाई अधूरा तो कहीं दीवाल ही तैयार नहीं किया गया है और काम को पेंडिंग में छोड़ दिया गया है जहां कोई अधिकारियों  कर्मचारी के द्वारा जाकर वहां मौके पर संज्ञान में नहीं लिया जाता है। और यह भी कहा जाता है कि अगर सरिया को खुले में छोड़ दिया जाता है तो बहुत जल्दी जंग लग जाता है तो कई सालों से पड़ा हुआ जंग वाला सरिया टूटने के कगार में भी आ चुके हैं ऐसे में दीवार क्या सक्सेसफुल हो पाएगी। और जानकारी के अनुसार बताया गया की लगभग 1 साल काम को पेंडिंग में रखकर सरपंच सचिव चल फिर कर भी देखने नहीं पहुंच पा रहे हैं। की बाउंड्री बच्चा की गिर गया।

मंत्री सारंग ने रचना टॉवर का निरीक्षण किया, परिसर में आधुनिक सुविधाओं के लिए निर्देश जारी

मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने किया रचना टॉवर का दौरा  रचना टॉवर परिसर में होगा सौंदर्यीकरण, पार्क, ओपन जिम और पोल लाइट लगाने के निर्देश भोपाल  सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत स्थित रचना टॉवर परिसर का दौरा कर क्षेत्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। नागरिकों द्वारा क्षेत्र में बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण की मांग को ध्यान में रखते हुए मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को रचना टॉवर के समक्ष स्थित पेविंग के समीप सौंदर्यीकरण कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को व्यवस्थित और आकर्षक रूप देने के लिए यहां पार्क का विकास किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके। मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि पार्क के साथ ही यहां ओपन जिम की भी व्यवस्था की जाए, जिससे क्षेत्र के नागरिक नियमित रूप से व्यायाम कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती आबादी को देखते हुए इस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्क और ओपन जिम क्षेत्र की फेंसिंग कर उसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए। मंत्री  सारंग ने क्षेत्र में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए रचना टॉवर के समक्ष पोल लाइट लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रचना टॉवर परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्रता से कार्य प्रारंभ किया जाए, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को जल्द से जल्द इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। नागरिकों ने क्षेत्र के विकास के लिए मंत्री  सारंग का आभार व्यक्त किया। 

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