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मथुरा सहित 12 जिलों में भारतीय सेना में अग्निवीरों की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ, 10 अप्रैल तक पंजीकरण

मथुरा मथुरा सहित 12 जिलों में भारतीय सेना में अग्निवीरों की भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ हो गए हैं। आवेदक 10 अप्रैल तक पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण कराने के बाद ही ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) में बैठ सकते हैं। सेना से मिली जानकारी के अनुसार आगरा स्थित सेना भर्ती कार्यालय के अंतर्गत अलीगढ़, एटा, इटावा, फिरोजाबाद, हाथरस, जालौन, झांसी, कासगंज, ललितपुर, मैनपुरी, मथुरा और आगरा के अभ्यर्थियों की भर्ती की जाएगी। सामान्य ड्यूटी के साथ तकनीकी, क्लर्क, स्टोर कीपर व अग्निवीर ट्रेड्समैन के लिए 10वीं और 8वीं पास युवा आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा (CEE) पहला कदम है। इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की ही सेना भर्ती रैली आयोजित होगी। क्या है आयु सीमा? साढ़े 17 वर्ष से 21 वर्ष की आयु के अभ्यर्थी पंजीकरण के पात्र हैं। अग्निवीर तकनीकी ट्रेड में प्रवेश के लिए पालिटेक्निक व आइटीआइ डिप्लोमा होना चाहिए। ऑनलाइन सामान्य प्रवेश परीक्षा अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, पंजाबी, उड़िया, बंगाली, उर्दू, गुजराती, मराठी और असमिया भाषा में आयोजित की जाएगी। वर्ष के अंत में सेना भर्ती रैली आयोजित की जाएगी। joinindianarmy.nic.in पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण किया जा सकता है। अभ्यर्थियों को ऑनलाइन एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थी पात्रता के आधार पर दो अग्निवीर श्रेणियों में आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए दो श्रेणियों के फार्म अलग-अलग भरने होंगे। अब अग्निवीर के लिए होगा अनुकूलनशीलता परीक्षण इस वर्ष से शारीरिक फिटनेस टेस्ट व शारीरिक माप परीक्षण उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को अनुकूलनशीलता परीक्षण (अडाप्टेबिलिटी टेस्ट) भी पास करना होगा। इसमें परखा जाएगा कि अभ्यर्थी सैन्य जीवन की चुनौतियों के अनुकूल हैं या नहीं। आवेदक इस परीक्षा के बाद ही मेडिकल परीक्षा और आगे की भर्ती प्रक्रिया के लिए पात्र होंगे। स्वरोजगार के लिए 11 बैंकों ने दिया 8़ 50 करोड़ का ऋण वहीं उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत स्वरोजगार के लिए 170 युवाओं को ऋण दिया गया है। इनमें से हर युवा को बैंकों से पांच लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है। सबसे ज्यादा ऋण ग्रामीण आर्यावर्त बैंक ने 44 आवेदकों को वितरित किए हैं। इस योजना के तहत 1000 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक कुल 1502 आवेदन हुए हैं। शासन ने युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना प्रारंभ की गई है। इसका उद्देश्य शिक्षित व प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना है। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम पांच लाख रुपये तक का चार वर्ष के लिए ब्याज मुक्त ऋण जिले की बैंक शाखाओं के माध्यम से दिया जा रहा है। लेकिन बैंक इस योजना को लेकर कतई गंभीर नहीं हैं। इस योजना में अब तक 1502 कुल आवेदन आए हैं। इनमें स्वीकृत 350 आवेदन हुए हैं, जबकि ऋण वितरण 170 को हुआ है। जबकि 416 आवेदन अस्वीकृत किए गए हैं। अभी तक 719 आवेदन लंबित हैं। इस प्रकार 8़ 50 करोड़ रुपये का ऋण आवेदकों को दिया गया है। सबसे ज्यादा 44 युवाओं को ग्रामीण आर्यावर्त बैंक ने वितरित किए हैं।

ट्रेन हाइजैक करने वाले बलूच विद्रोहियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, सभी 214 बंधकों को मार डाला

इस्लामाबाद पाकिस्तानी यात्री ट्रेन का अपहरण करने वाले बलूच विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सभी 214 सैन्य बंधकों को मार डाला है, क्योंकि बलूच राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए सौदे के लिए उनकी 48 घंटे की समय सीमा समाप्त हो गई थी. बलूच लिबरेशन आर्मी, जिसने पाकिस्तानी सेना के इस दावे को खारिज कर दिया कि बंधकों को रिहा करवा लिया गया है.  बीएलए ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार की “जिद” ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया. विद्रोहियों ने सरकार को बलूच राजनीतिक कैदियों और कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. बलूच विद्रोहियों ने अगवा कर ली थी ट्रेन दरअसल बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग करने वाले अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी ने मंगलवार को रेलवे ट्रैक को उड़ाने के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था. जिस समय ट्रेन को हाइजैक किया गया उस समय ट्रेन में 400 से ज्यादा लोग मौजूद थे. ट्रेन को कब्जे में लेने के बाद बीएलए के विद्रोहियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को जाने दिया था. बीएलए ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तान ने अपनी पारंपरिक जिद और सैन्य अहंकार का प्रदर्शन करते हुए न केवल गंभीर वार्ता से परहेज किया, बल्कि जमीनी हकीकत से भी आंखें मूंद लीं. इस जिद की वजह से सभी 214 बंधकों को मार दिया गया.” ट्रेन में 400 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकतर सुरक्षाकर्मी थे. बंधकों को छुड़ाने के लिए अभियान चलाने वाली पाकिस्तानी सेना ने कहा कि 30 घंटे के अभियान के बाद बुधवार को घेराबंदी समाप्त हो गई, जिसमें सभी 33 विद्रोही मारे गए. सेना ने दावा किया कि हमले में 23 सैनिक, तीन रेलवे कर्मचारी और पांच यात्री मारे गए. UNSC में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल यानि UNSC में पाकिस्तान को बड़ी कामयाबी मिली है। UNSC में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा की गई है। सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का भी साथ मिला है, जिसने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बीएलए के हमलों की निंदा करने से परहेज किया था। द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने जाफर एक्सप्रेस पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की तरफ से किए गए “घृणित और कायरतापूर्ण” हमले की कड़ी निंदा की है। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल, जिसमें 15 स्थाई और अस्थाई सदस्य होते हैं, उसकी अध्यक्ष डेनमार्क की क्रिस्टीना मार्कस लासेन की तरफ से जारी बयान में दोषियों को इंसाफ के कटघरे में लाने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा उन्होंने आतंकी हमले में मारे गये जवानों और नागरिकों के प्रति “गहरी सहानुभूति और संवेदना” जताई है। वहीं उन्होंने सभी देशों से इस संबंध में इस्लामाबाद के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया है। UNSC में जाफर एक्सप्रेस हमले की निंदा आपको बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके बोलन में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के स्वतंत्रता सेनानियों ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले में 440 यात्रियों को बंधक बना लिया गया था, जिन्हें अब रिहा करवा लिया गया है। इस दौरान पाकिस्तान सेना के भी कई दवानों की मौत हो गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पटरी को उड़ा दिया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि हमला करने वाले 33 हमलावरों को मार दिया गया है। लेकिन ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही 26 यात्रियों को मार दिया गया था, जबकि ऑपरेशन के दौरान चार सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। हालांकि बीएलए का दावा है कि अभी भी उसके कब्जे में 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान और आम नागरिक हैं। पाकिस्तानी सेना इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि 26 शहीद ट्रेन यात्रियों में सेना और एफसी के 18 सुरक्षाकर्मी, पाकिस्तान रेलवे और अन्य विभागों के तीन अधिकारी और पांच नागरिक शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि 354 यात्रियों में से 37 गंभीर घायल हुए हैं। इस बीच, हमले पर विस्तार से बात करते हुए UNSC ने कहा कि आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के परिणामस्वरूप कई पाकिस्तानी नागरिकों की गंभीर क्षति हुई। UNSC की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि “सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।” बयान में आगे कहा गया है कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और अनुचित है, चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, चाहे वह कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। बलूच विद्रोहियों का दावा हालांकि, बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के दावे का खंडन करते हुए कहा कि भीषण लड़ाई जारी है और सुरक्षा बलों को “भारी नुकसान” उठाना पड़ रहा है. अपने ताजा बयान में, बीएलए ने दावा किया कि दर्रा-ए-बोलन नामक ऑपरेशन में उसके 12 कर्मी मारे गए. बीएलए के बयान में आगे कहा गया है, “फ़िदायीन ने कुछ बंधक सैन्य कर्मियों को विशेष बोगियों में बंद कर दिया और अपनी स्थिति संभाल ली, जबकि अन्य बीएलए सैनिक शेष बंधकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में कामयाब रहे. जब पाकिस्तानी कमांडो पहुंचे, तो फ़िदायीन ने उन्हें घेर लिया और उन पर भीषण हमला किया. कमांडो को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि बंधकों को भी मार दिया गया.” झूठ बोल रही पाक सरकार- बीएलए पाकिस्तान की सरकार ने बुधवार को ही दावा कर दिया था कि संकट खत्म हो गया है और सभी विद्रोही लड़ाके मारे गए हैं। यह भी दावा किया गया था कि सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है। हालांकि पाकिस्तान की सरकार की तरफ से इसका कोई भी सबूत नहीं जारी किया गया था। अब बीएलए का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार केवल झूठ बोल रही है। बीएलए ने कहा कि पाक सरकार को अपने जवानों की फिक्र ही नहीं है। वह बात करने को तैयार नहीं है। बीएलए ने कहा था … Read more

सेना ने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को उतारकर बड़ा दांव चल दिया

 कारगिल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कभी एकदम से खत्म नहीं हो पाया। वहीं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर पाकिस्तान और चीन सदाबहार दोस्त बने रहते हैं। ऐसे में भारत की चुनौती और भी बढ़ जाती है। बुधवार को सेना ने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को उतारकर बड़ा दांव चल दिया है। यह कदम बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। दरअसल सीमा को सुरक्षित रखने के लिए कनेक्टिविटी बहुत जरूरी होती है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के ऊंचाई वाले इलाकों में अकसर कनेक्टिविटी खत्म हो जाती है। पाकिस्तान 1999 में करगिल पर कब्जा करने की कोशिश कर भी चुका है। ऐसे में भारतीय सेना ने भी अपनी तैयारियों तेज कर दी हैं। जल्द ही लद्दाख को जोड़ने वाली ऑल वेदर सड़क और जोजिला टनल भी शुरू हो जाएगा। क्या हैं सी-17 लैंड करने के मायने कारगिल में सी-17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग के मायने बहुत बड़े हैं। दरअसल इससे सेना का मूवमेंट बढ़ जाएगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक सपोर्ट की क्षमता भी चार गुना बढ़ेगी। इस एयरफील्ड से अब तक सी-130 जे सुपर हल्क्युलिस और एएन-32 का संचालन किया जाता था। इनकी अधिकतम क्षणता 6 से सात टन ही थी। वहीं सी-17ग्लोबमास्टर अकेले ही 60 से 70 टन का भार उठा सकता है। इसके अलावा इसकी मदद से 150 से ज्यादा सैनिक हथियारों और उपकरणों के साथ तुरंत फ्रंट पर तैनात हो सकते हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों से जंग की स्थिति में कारगिल तक यह पहुंच काम आएगी। कारगिल में सेना को उतारकर जल्दी चीन की सीमा पर भी भेजा जा सकता है। पाकिस्तान इस एयरफील्ड से भी इतना चिढ़ा रहता है कि 1999 के युद्ध के दौरान उसने इसे निशाना बनाया था। यह एयरफील्ड एलओसी से बेहद करीब है। सी-17 ग्लोबमास्टर ऊंचाई वाले इलाकों में और कम तापमान वाले इलाकों के हिसाब से भी तैयार रहता है। सूत्रों का कहना है कि वायुसेना को लगता था कि लेह और श्रीनगर के बीच एक गैप है। अगर कारगिल में ग्लोबमास्टर की लैंडिंग होती है तो यह खाली स्थान भर जाएगा और सेना को सप्लाई और तैनाती दोनों में मदद मिलेगा। कारगिल में कोई पार्किंग बे नहीं है। ऐसे में एक समय में एक ही सी-17 का संचालन हो सकता है।

कुलगाम में पूर्व सैनिक की हत्या का मामला, पुलिस ने 500 लोगों को हिरासत में लिया, पीओके के आतंकी संगठनों पर है संदेह

 कुलगाम जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकी हमले में पूर्व सैनिक की हत्या के मामले में सुरक्षा एजेंसियां एक्शन में आ गई हैं। सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या करने वाले बंदूकधारियों की तलाश को जहां सर्च ऑपरेशन चल रहा है तो वहीं पुलिस जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों में 500 से ज्यादा लोगों को डिटेन किया है। इनमें ज्यादातर वे लोग हैं। पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मौजूद कश्मीरी आतंकवादियों के रिश्तेदार हैं। पूर्व सैनिक के परिवार पर हमला कश्मीर के दक्षिणी हिस्से में आने वाले कुलगाम में संदिग्ध आतंकवादियों ने हमले में एक सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या कर दी थी। इस हमले में पूर्व सैनिक की पत्नी और भतीजी को घायल हुए थे। हमले की घटना के बाद अब जम्मू-कश्मीर पुलिस अब सख्त एक्शन के मूड में है। यह पहला मामला है जब सुरक्षाबलों की तरफ से इतनी बड़ी संख्या में लोगों को डिटेन किया गया है। सोमवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के बेहिबाग गांव में अज्ञात बंदूकधारियों ने सेवानिवृत्त सैनिक मंजूर अहमद वागे, उनकी पत्नी और उनकी भतीजी पर गोलियां चलाईं थीं। इस हमले में वागे (45) की मौत हो गई, जिसके पेट में गोली लगी, जबकि दो महिलाओं के पैर में गोली लगी और उनका इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आतंकी हमले के बाद इतने बड़े पैमाने पर लोगों को कभी हिरासत में नहीं लिया गया। इस लिहाज से देखें तो यह अब तक का सबसे बड़ा ऐक्शन है। इन लोगों को इसलिए हिरासत में लिया गया है ताकि संदेश दिया जा सके कि अब आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे सीमा के इधर की बात हो या फिर उस पार का मसला, कहीं भी आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेंगे। अज्ञात हमलावरों ने रिटायर्ड सैनिक मंजूर अहमद वागे और उनकी पत्नी पर गोलीबारी की थी। यह हमला दक्षिण कश्मीर के कुलगाम के बेहीबाग गांव में हुआ था। इस हमले में मंजूर अहमद की भतीजी भी घायल हुई थी। हमले में मंजूर अहमद मारे गए, जबकि पत्नी और भतीजी का इलाज चल रहा है और वे खतरे से बाहर हैं। अमित शाह की मीटिंग में पता चली पीओके और पाकिस्तान पर एक बात पुलिस अधिकारी ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ बड़े अभियान की वजह यह भी है कि इन लोगों ने रेड लाइन ही पार कर दी। अब तक ये लोग सैनिकों पर हमले करते थे, लेकिन अब उनके परिवार को भी निशाना बनाया है। इसके चलते सुरक्षा बलों में गुस्सा है। इस बीच होम मिनिस्टर अमित शाह ने भी बुधवार को सुरक्षा का जायजा लिया। इस दौरान जानकारी मिली कि पीओके और पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी जुटे हुए हैं। इसके चलते कश्मीर में अलर्ट घोषित किया गया है। दरअसल बीते कुछ सालों में ऐसे लोगों पर भी सख्त ऐक्शन हुआ है, जो सीधे तौर पर आतंकवाद में शामिल नहीं हैं, लेकिन ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर काम करते रहे हैं। जांच में जुटी पुलिस की विशेष टीम पुलिस की तरफ से इस घटना के हमलावरों को पकड़ने के लिए डिटेन किए गए लोगों से पूछताछ की जा रही है। अभी तक कुलगाम में पूर्व सैनिक के घर पर हमले की घटना की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी समूह ने नहीं ली है। वागे 2021 में सेवानिवृत्त हुए थे। पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए सीनियर ऑफिसर की टीम भी बनाई है। पुलिस ने एक बयान में कहा कि संदिग्ध आतंकियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। टीमें इस पर काम कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैश, लश्कर के साथ हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी संगठन इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।    

कश्मीर में बर्फीले तूफान के कारण पर्यटक फंसे, सेना ने 68 लोगों को बचाया

 जम्मू भारतीय सेना ने गुलमर्ग जाते वक्त रास्ते में फंसे कई पर्यटकों को बचाया है। भारतीय सेना की चिनार कोर ने इस मिशन को अंजाम दिया है। चिनार वॉरियर्स को सिविल प्रशासन से पर्यटकों के फंसे होने की जानकारी मिली थी। इसके मुताबिक पर्यटक गुलमर्ग और तानमार्ग जा रहे थे। इसी दौरान भारी बर्फबारी के चलते पर्यटक यहां पर फंस गए थे। चिनार कोर के मुताबिक इस दौरान कुल 68 लोगों को बचाया गया। इनमें 30 महिलाएं, 30 पुरुष और 8 बच्चे शामिल हैं। इसके बाद सभी 137 पर्यटकों को गर्म खाना, शेल्टर और दवाएं भी मुहैया कराई गईं। चिनार वॉरियर ने इसको लेकर ट्वीट में जानकारी दी है। इसमें बताया है कि चिनार कोर को सिविल एडमिनिस्ट्रेशन से कॉल मिली थी। इसके बाद इस बचाव कार्य को अंजाम दिया गया। इसके मुताबिक चिनार वॉरियर्स ने कुलगाम के मुनाद गांव से एक गर्भवती महिला को निकालने के लिए एक आपातकालीन संकट कॉल का जवाब दिया। भारी बर्फबारी के बीच बचाव दल समय पर घटनास्थल पर पहुंच गया। तत्काल जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता प्रदान की गई और रोगी को यारीपोरा के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया। गौरतलब है कि चिनार कोर का नाम यहां के चिनार वृक्ष के नाम पर रखा गया है। सेना का यह दल जम्मू कश्मीर के पूर्वी और उत्तरी इलाकों में सुरक्षा इंतजाम देखती है। बता दें कि जम्मू कश्मीर में मौसम खराब है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग स्थित काजीगुंड कस्बे में बर्फबारी में करीब 2000 वाहन फंस गए हैं। सीएम ने बताया कि उन्होंने अनंतनाग के डिप्टी कमिश्नर से बात की है। उन्होंने लिखा कि डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि भारी वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जा रही है और बाकी फंसे हुए वाहनों को निकालने के प्रयास जारी हैं। सीएम ने आगे लिखा कि बर्फीले मौसम के कारण यातायात का बैक अप लेना पड़ा है। फंसे हुए वाहन, दोनों दिशाओं में, धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं और जहां आवश्यक हो, सहायता की जा रही है।

पूर्व सैनिक की मौत की जानकारी रेजिमेंट को लगी, तो कमांडिंग ऑफिसर ने पांच सेना के जवानों को बेटी की शादी का जिम्मा उठाने गांव में भेजा

 मथुरा यूपी के मथुरा में एक पूर्व सैनिक की सड़क हादसे में मौत हो गई. इस घटना के दो दिन बाद ही मृतक की बेटी की शादी होनी थी. ऐसे में खुशियों वाले घर में मातम पसर गया. बेटी शादी को टालना चाहती थी. उधर, पिता के गुजर जाने के बाद परिजनों को बेटी के कन्यादान की चिंता सताने लगी. लेकिन इस बीच कुछ ऐसा हुआ जिसने लोगों को इमोशनल कर दिया. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पूर्व सैनिक की मौत की जानकारी जब उसके रेजिमेंट को लगी, तो कमांडिंग ऑफिसर ने पांच सेना के जवानों को बेटी की शादी का जिम्मा उठाने गांव में भेजा. मृतक के फौजी साथियों ने उसकी बेटी की शादी का ना सिर्फ पूरा जिम्मा उठाया बल्कि उन्होंने बेटी का कन्यादान भी किया. फौजियों ने रिश्तेदारों-मेहमानों की भी देखभाल की, जिसे देख उनके आंसू छलक पड़े. मथुरा के मांट थाने के एसएचओ के अनुसार, पूर्व सैनिक देवेंद्र सिंह (48) की बेटी की शनिवार को शादी होनी थी. लेकिन, शादी से ठीक दो दिन पहले मांट-राया रोड पर सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. जैसे ही इसकी खबर परिवार तक पहुंची शादी का जश्न मातम में बदल गया. पिता की मौत से दुखी दुल्हन ने कथित तौर पर शादी करने से इनकार कर दिया. मृतक देवेंद्र सिंह के रिश्तेदार नरेंद्र ने बताया कि शादी समारोह बीच में ही रुक गया क्योंकि परिवार को कन्यादान समारोह को लेकर चिंता थी, जो दुल्हन के पिता द्वारा किया जाता है. पिता की याद में रो-रोकर बेटी का बुरा हाल हो गया. वहीं, मैरिज होम में चल रही शादी की तैयारी धरी-धरी की रह गई. परिवार के सदस्यों ने बताया कि जब यह सूचना देवेंद्र सिंह के कमांडिंग ऑफिसर तक पहुंची, तो उन्होंने पांच जवानों को गांव भेजा और शादी की रस्में पूरी कराईं. सूबेदार सोनवीर सिंह, सूबेदार मुकेश कुमार, हवलदार प्रेमवीर, विनोद और बेताल सिंह मृतक के गांव पहुंचे और कन्यादान कर पिता का कर्तव्य निभाया और जोड़े को आशीर्वाद दिया. ये सब देखकर लोगों की आंखे नम हो गईं और उन्होंने जमकर सेना के कार्य की प्रशंसा की. गौरतलब हो कि इससे पहले हरियाणा के जींद के एक छोटे में भी CRPF के जवानों ने शहीद की बेटी का कन्यादान किया था.  

भारत और चीन के सैनिक पूर्वी लद्दाख के डेपसांग में गश्त के बारे में बनी आम सहमति का पालन कर रहे हैं : सेना

नई दिल्ली सेना ने बुधवार को स्पष्ट किया कि भारत और चीन के सैनिक पूर्वी लद्दाख के डेपसांग में गश्त के बारे में बनी आम सहमति का पालन कर रहे हैं और किसी भी पक्ष की ओर से इसमें बाधा उत्पन्न नहीं की जा रही है। सेना ने एक अंग्रेजी दैनिक में ‘ डेपसांग में गश्त बहाल करने पर बातचीत बाधित हुई’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि गत 21 अक्टूबर को बनी सर्वसम्मति के आधार पर, दोनों पक्षों ने प्रभावी ढंग से सैनिकों को पीछे हटाया है । भारतीय पक्ष ने अपने पारंपरिक गश्त वाले क्षेत्रों में गश्त फिर से शुरू कर दी है। दोनों पक्ष आम सहमति का पालन कर रहे हैं और किसी भी पक्ष द्वारा कोई बाधा उत्पन्न नहीं की गई है। सेना ने कहा है कि यह स्पष्ट किया जाता है कि इस अंग्रेजी दैनिक में बुधवार को प्रकाशित लेख काल्पनिक और तथ्यों से परे है। सेना ने मीडिया से अनुरोध किया है कि वह ऐसे संवेदनशील लेख प्रकाशित करने से पहले तथ्यों को सत्यापित कर लें। उल्लेखनीय है की अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित खबर में कहा गया है कि गश्त के तौर तरीकों को लेकर भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत में गतिरोध उत्पन्न हो गया है। उल्लेखनीय है कि भारत और चीन के बीच करीब साढ़े चार वर्षों के गतिरोध के बाद 21 अक्टूबर को गश्त व्यवस्था को लेकर आम सहमति बनी थी, जिसके बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने सैनिकों को पीछे हटाया था और डेपसांग तथा डेमचोक दोनों क्षेत्रों में अगस्त शुरू हो गई थी।  

उमर अब्दुल्ला सरकार के आते ही आतंकी वारदातों में इजाफा, 15 दिन में 19 का कत्ल

 श्रीनगर जम्मू-कश्मीर को 10 साल बाद चुनी हुई सरकार मिली है और उमर अब्दुल्ला अब मुख्यमंत्री बन गए हैं। इसके बाद भी केंद्र शासित प्रदेश में आतंकी हमले थमने की बजाय और बढ़ गए हैं। बीते 15 दिनों में ही अलग-अलग आतंकी हमलों में अब तक 19 लोग मारे जा चुके हैं। 24 अक्टूबर की शाम को कश्मीर के गुलमर्ग में फिर एक आतकी हमला हुआ, जिसमें दो आर्मी पोर्टर और दो जवान शहीद हो गए। यह हमला भी टूरिस्ट हॉटस्पॉट वाले इलाके में हुआ। यही नहीं यहां सेना की बड़ी संख्या में तैनाती रहती है। उसके बाद भी आतंकियों के सेना तक पहुंचने और उनको निशाना बनाने से सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले 20 अक्टूबर को गांदरबल जिले के गगनगीर इलाके में एक सुरंग के निर्माण की साइट पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में 6 बाहरी मजदूरों और एक स्थानीय डॉक्टर का कत्ल कर दिया गया। इन लोगों पर आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं और ज्यादातर लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इससे पूर्व 18 तारीख को भी शोपियां में बिहार के एक मजदूर का कत्ल कर दिया गया था। इन घटनाओं के बीच एलजी मनोज सिन्हा ने सुरक्षा बलों को सख्ती बरतने और पुलिस एवं सेना को साथ मिलकर अभियान चलाने का आदेश दिया है। फिर भी अब तक कोई नियंत्रण नहीं दिख रहा है। बीती रात को सेना और आतंकियों के बीच छिड़े संघर्ष ने चिंताओं को और बढ़ा दिया है। बारामूला, पुंछ, शोपियां, गांदरबल और कश्मीर समेत ज्यादातर इलाकों में सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल ज्यादातर जगहों पर सुरक्षा बल सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और कई जगहों पर कैंपिंग बढ़ा दी गई है। 9 अक्टूबर को भी एक लापता सैनिक का गोलियों से छलनी शव बरामद हुआ था। खबर थी कि सैनिक को अनंतनाग से आतकियों ने अगवा कर लिया है। अंत में उनका शव ही बरामद किया गया। जवान की पहचान हिलाल अहमद भट के तौर पर हुई है। इस बीच गुरुवार को सीएम उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली में राजनाथ सिंह और होम मिनिस्टर अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने इस दौरान राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग की। वहीं भाजपा के एक नेता ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा तब तक नहीं मिल सकता, जब तक सुरक्षा के हालात सुधर नहीं जाते। उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार के आते ही आतंकी वारदातों में इजाफे की ओर भी इशारा किया। माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में शांति पूर्ण चुनाव और सरकार गठन से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन बौखला गए हैं और वे लोगों पर हमले कर रहे हैं। इसी के चलते ऐसी स्थिति पैदा हुई है। बारामूला आतंकी हमले पर क्या बोले फारूक अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बारामूला आतंकी हमले पर उन्होंने कहा, ‘इस रियासत में ऐसा होता रहेगा। जब तक इस समस्या से निकलने का रास्ता नहीं निकलेगा, तब तक यह नहीं रुकेगा। मैं 30 साल से देख रहा हूं कि निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं।’ फारूक ने कहा कि हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनने वाले हैं, तो वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? हमारा भविष्य बर्बाद करने के लिए? उन्हें अपने देश को देखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मैं उनसे फिर अपील करता हूं कि वे इसे रोकें और दोस्ती का रास्ता खोजें। अगर दोस्ती नहीं की गई तो भविष्य बहुत मुश्किल होगा। मैं इस घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देता हूं।’ जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में गुरुवार को किए गए आतंकवादी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए 2 जवानों ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस हमले में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है। सैन्य बल के साथ काम करने वाले 2 कुलियों की कल मौत हो गई थी। तीन सैनिकों सहित चार लोग घायल हुए थे जिनमें से दो सैनिकों ने बाद में दम तोड़ दिया। उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में गुलमर्ग से छह किलोमीटर दूर आतंकवादियों ने सेना के एक वाहन पर हमला दिया। बूटापथरी इलाके में सेना के वाहन पर तब गोलीबारी की जब वह अफरावत रेंज में नागिन चौकी की ओर जा रहा था। अधिकारियों ने कहा कि यह क्षेत्र पूरी तरह से सेना के कब्जे में है। उमर अब्दुल्ला बोले- हालिया हमले गंभीर चिंता का विषय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि घाटी में हालिया हमले गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘उत्तरी कश्मीर के बूटापथरी क्षेत्र में सेना के वाहनों पर हमले की बेहद दुर्भाग्यपूर्ण खबर है, जिसमें कुछ लोग हताहत हुए हैं। कश्मीर में हालिया हमले गंभीर चिंता का विषय हैं।’ अब्दुल्ला ने कहा कि मैं इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं और जान गंवाने वाले लोगों के प्रियजन के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। मैं यह भी प्रार्थना करता हूं कि घायल पूरी तरह और शीघ्र स्वस्थ हों। पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘बारामूला में सेना के काफिले पर आतंकवादी हमले से स्तब्ध और दुखी हूं। इसकी स्पष्ट रूप से निंदा करती हूं और घायल सैनिकों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करती हूं।’

सेना ने आतंकियों की एक बड़ी साजिश को नाकाम किया, एक को मार गिराया, गोला-बारूद और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

 बारामुला जम्मू कश्मीर के बारामुला में सेना की एक संयुक्त टीम ने हथियारों से लैस आतंकी को मार गिराया। इसके साथ ही सेना ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। इस दौरान यहां पर गोला-बारूद और हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद किया गया है। सेना के बयान में कहा गया है कि इस जखीरे को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी युद्ध की तैयारी के लिए सामान जुटाया जा रहा है। मारे गए आतंकी के पास एक एके 47 राइफल, दो एके मैगजीन, 57 एके राउंड, दो पिस्टल मैगजीन के अलावा कई अन्य खतरनाक हथियार थे। इससे पहले आर्मी के चिनार कोर ने बताया कि घुसपैठ के खिलाफ इलाके में संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया था। बयान के मुताबिक घुसपैठ को लेकर मिली खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस ने एलओसी के करीब स्थित उरी और बारामुला में यह अभियान चलाया। संदिग्ध गतिविधि नजर आने के बाद सेना की चौकन्नी टुकड़ी ने चुनौती दी। इसके बाद सामने से फायरिंग होने लगे। जवाब में जवानों ने भी गोलियां बरसाईं। इससे पहले गांदरबल इलाके में आतंकी हमले में दो मजदूरों की हत्या कर दी गई। अधिकारियों के मुताबिक यह घटना रविवार शाम को हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन हमलों की निंदा की है और इन्हें कायराना कृत्य बताया है। उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा कि गैर-स्थानीय मजदूरों पर सोनमर्ग इलाके के गगनगीर इलाके में कायराना हमला हुआ है। यह लोग इलाके में एक बेहद अहम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। आतंकी हमले में दो की हत्या की गई है, दो-तीन घायल हैं। अब्दुल्ला ने लिखा कि मैं इस हमले की निंदा करता हूं और मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रेषित करता हूं। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में रविवार शाम को हुए आतंकी हमले में एक स्थानीय डॉक्टर सहित सात लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यह हमला श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर गगनगीर के पास एक शिविर में हुआ जहां स्थानीय और गैर-स्थानीय मजदूर 6.5 किलोमीटर लंबी जेड-मोड़ सुरंग परियोजना के निर्माण पर काम कर रहे थे। अधिकारियों के अनुसार दो आतंकवादियों ने मजदूरों पर अंधाधुंध गोलीबारी की जिसके कारण दो गैर-स्थानीय मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हमले में एक स्थानीय डॉक्टर सहित नौ अन्य घायल हो गए। डॉक्टर सहित पांच घायलों ने बाद में दम तोड़ दिया।

अनंतनाग में आतंकियों की कायराना करतूत, सेना के जवान की अपहरण के बाद की हत्या, जंगल में गोलियों से छलनी शव मिला

 श्रीनगर दक्षिण कश्मीर के जिला अनंतनाग के शांगस और कोकरनाग में आतंकियों ने कथित तौर पर जंगल में गश्त कर रहे टेरिटोरियल आर्मी से जुड़े दो जवानों को अगवा कर लिया। इनमें से एक जवान किसी तरह जख्मी हालत में आतंकियों की चंगुल से बच पाने में सफल हो सका। वहीं एक अन्य जवान की आतंकियों ने हत्या कर दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रादेशिक सेना के जवान हिलाल अहमद भट का शव अनंतनाग के उत्रासू इलाके में सांगलान वन क्षेत्र से बरामद किया गया है। उन्होंने कहा कि शव को चिकित्सीय औपचारिकताओं के लिए अस्पताल ले जाया गया है। जवान की पहचान हिलाल अहमद के तौर पर की गई है. पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि जवान को कई गोलियां मारी गई हैं. शरीर पर चाकू से कटने के कोई निशान नहीं है. इससे पहले सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि अनंतनाग में सेना के एक जवान को आतंकियों ने अगवा कर लिया है. टेरिटोरियल आर्मी की 161 यूनिट के एक जवान को आतंकियों ने अगवा कर लिया था. बता दें कि शुरुआत में दो जवानों के अपहरण की खबर थी. खबर थी कि अनंतनाग के वनक्षेत्र से दो जवानों को अगवा किया गया है. हालांकि, एक जवान को गोली लगी थी लेकिन इसके बावजूद वह आतंकियों के चंगुल से बचकर भागने में सफल रहा था. इससे पहले भारतीय सेना के श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया था कि खुफिया जानकारी के आधार पर सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस ने कोरनाग में अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर आठ अक्टूबर को संयुक्त आतंकवाद रोधी ऑपरेशन शुरू किया था. यह ऑपरेशन रातभर चला, जिसमें सेना का एक जवान लापता था. इन जवानों को अनंतनाग के कोनरनाग में सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस के एक ज्वॉइंट एंटी टेरर ऑपरेशन के दौरान अगवा किया गया था. अधिकारी का कहना है कि घायल जवान को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है, जहां उसकी हालत स्थिर है. बता दें लापता सैनिकों को ढूंढने के लिए इलाके में भारी तलाशी अभियान चलाया गया था. यह घटना जम्मू कश्मीर में आठ अक्तूबर को हुई काउंटिंग के दिन हुआ था. इससे पहले अगस्त महीने में अनंतनाग में ही आतंकियों के साथ मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए थे जबकि तीन घायल हुए थे.  

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश विफल, दो आतंकी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया, इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी

 कुपवाड़ा जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में शुक्रवार की रात सुरक्षाबलों ने आतंकियों की घुसपैठ को नाकाम कर दिया है। सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया। फिलहाल सुरक्षाबल पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चला रहे हैं। सुरक्षाबलों को यहां पर और भी कई आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। बता दें कि नार्थ कश्मीर के कुपवाड़ा के गुगलधारा जंगल में सुरक्षाबलों ने यह सर्च ऑपरेशन चलाया। सेना ने कहा कि आतंकियों के कश्मीर घाटी में घुसपैठ की कोशिश करने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद जॉइंट ऑपरेशन शुरू किया गया। सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जॉइंट टीम ने इलाके में कुछ हलचल देखी। इसके बाद आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जॉइंट टीम ने भी करारा जवाब दिया। इसमें उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया। सेना की चिनार कोर ने दी जानकारी घाटी में मौजूद सेना की चिनार कोर ने एक्स पर पोस्ट किया, “4 अक्टूबर 2024 को घुसपैठ की कोशिश की खुफिया जानकारी के आधार पर भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गुगलधार, कुपवाड़ा में एक संयुक्त अभियान शुरू किया। सतर्क सैनिकों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दी, जिसके बाद आतंकवादियों के साथ गोलीबारी हुई। सतर्क सैनिकों ने प्रभावी गोलीबारी की।” इसके बाद सेना ने एक पोस्ट में बताया कि मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। चिनार कोर ने पोस्ट किया, “चल रहे ऑपरेशन गुगलधर में सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया है। युद्ध जैसे सामान बरामद किए गए हैं।” सेना ने कहा कि क्षेत्र में घेराबंदी एवं तलाशी अभियान जारी है।

आतंकियों ने कठुआ हमले से पहले बंदूक दिखाकर ग्रामीणों से जबरन खाना बनवाया था

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सेना के काफिले पर हमला करने वाले आतंकवादियों ने घात लगाने से पहले कई ग्रामीणों को बंदूक की नोक पर खाना पकाने के लिए मजबूर किया था। आतंकवादियों ने हमले के दौरान बॉडी कैमरा पहना हुआ था और वे सेना के जवानों के हथियार छीनना चाहते थे। सैनिकों ने साहस और बहादुरी का परिचय दिया और घायल होने के बावजूद हथियार छीनने की उनकी योजना को विफल कर दिया। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। सूत्रों ने कहा है कि आतंकवादी उन इलाकों में हमला कर रहे थे जो सुरक्षा बलों के कैंप से बहुत दूर हैं। वहां सड़कों की स्थिति भी काफी खराब है। सुरक्षा बलों को अतिरिक्त बल भेजने में समय लगा। सूत्रों ने बताया कि पुलिस ने पूछताछ के लिए 20 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने हमले की जांच तेज कर दी है। आपको बता दें कि सोमवार को कठुआ जिले के बदनोटा गांव के पास माचेडी-किंडली-मल्हार पहाड़ी सड़क पर गश्त कर रहे एक दल पर आतंकवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में एक जेसीओ सहित सेना के पांच जवान शहीद हो गए।  कई अन्य घायल हो गए। एक महीने के भीतर जम्मू क्षेत्र में यह पांचवां आतंकी हमला था। ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सैन्यकर्मियों की पहचान जेसीओ अनंत सिंह, हेड कांस्टेबल कमल रावत, सिपाही अनुज नेगी, राइफलमैन आदर्श नेगी और एनके कुमार के रूप में हुई है। इससे पहले सूत्रों ने कहा था कि कठुआ में हमला पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा किया गया था। उन्होंने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया था। सूत्रों ने कहा था कि आतंकवादियों ने स्थानीय समर्थकों की मदद से इलाके की टोह ली थी। सूत्रों के अनुसार, आतंकवादियों ने एम4 कार्बाइन राइफलों और विस्फोटक उपकरणों का हमले के लिए इस्तेमाल किया था। हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य कर्मियों की मौत पर शोक व्यक्त किया और जोर देकर कहा कि सैनिक क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ हैं।  

पहाड़ी पर ट्रक ने सेना के काफिले को ओवरटेक किया, वाहन स्लो हुए तो आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू

कठुआ जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में सेना के वाहनों पर अटैक मामले में सुरक्षा एजेंसियां हमलावर आतंकवादियों की तलाश में जुटी हैं. इस बीच, जांच में पता चला है कि हमले से ठीक पहले पहाड़ी पर एक ट्रक ने सेना के काफिले की गाड़ियों को ओवरटेक किया था. जैसे ही सेना के वाहन स्लो हुए तो आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी और हमले में 5 जवान शहीद हो गए. 5 अन्य घायल हो गए. घटना 7 जुलाई की है. सुरक्षा एजेंसियों को शुरुआत से ही बड़ी साजिश की आशंका है. इसलिए मामले में 51 संदिग्धों से पूछताछ हो रही है. अधिकारियों का कहना था कि आतंकवादियों की तलाश की जा रही है. एक ट्रक चालक और 50 अन्य को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. गोलीबारी होते ही स्लो हो गया था ट्रक अधिकारियों के अनुसार, माचेडी-किंडली-मल्हार पहाड़ी सड़क पर सेना के वाहनों के पीछे एक ट्रक चल रहा था. लेकिन, लोहाई मल्हार में बदनोटा गांव के पास जब आतंकवादियों ने सेना के वाहनों पर दो अलग-अलग दिशाओं से गोलीबारी शुरू की तो यह ट्रक स्लो हो गया. जानबूझकर तो नहीं पास मांग रहा था ट्रक? ट्रक चालक पर संदेह जताया जा रहा है. अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इस ट्रक ड्राइवर ने पुलिया पर ओवरटेक मांगकर जानबूझकर सैन्य काफिले को निकलने में देरी करवाई है? माना जा रहा है कि ट्रक चालक ने जानबूझकर पुलिया पर पास (ओवरटेक) मांगा था. एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा, आमतौर पर इन क्षेत्रों में सेना के वाहनों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन ट्रक ने फिर भी पास मांगा, जिससे दोनों वाहनों की स्पीड धीमी हो गई. आतंकियों को मार गिराने के लिए सर्च ऑपरेशन फिलहाल, चार जिलों के घने जंगलों में भारी बारिश के बीच सेना और पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. कठुआ, उधमपुर और भद्रवाह से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है. हमले के संबंध में पूछताछ के लिए 50 लोगों को हिरासत में लिया गया है. जंगल में छिपे आतंकवादियों का पता लगाने और उन्हें मार गिराने के प्रयास किए जा रहे हैं. सेना की टीमें  डोडा जिले के ऊंचे इलाकों में भी तलाशी अभियान चला रही हैं. उधमपुर, सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों के विभिन्न हिस्सों में घने जंगलों में सेना और पुलिस के जवान तैनात हैं. सुबह कई इलाकों में फिर तलाशी शुरू की गई. ग्राम रक्षा समूह स्थापित करने की मांग बदनोटा गांव और आसपास के लोगों ने हमले के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और आतंकवादी खतरों से निपटने के लिए ग्राम रक्षा समूहों की स्थापना की मांग की है. स्थानीय निवासियों ने सरकार से हथियार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आग्रह किया है ताकि वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों का समर्थन कर सकें. हेलिकॉप्टर और यूएवी की मदद ली जा रही है. सर्च टीमें डॉग स्क्वायड और मेटल डिटेक्टरों की सहायता से जंगल खंगाल रही हैं.. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जांच में पुलिस की सहायता कर रही है. जबकि विशेष बल यूनिट सर्जिकल ऑपरेशन कर रही हैं. एक अधिकारी ने कहा, स्थानीय लोग आतंकवाद के खिलाफ हैं और शांति और सुरक्षा के संकल्प के साथ एकजुट हैं. वे इलाके से आतंकवाद को खत्म करने में सुरक्षा बलों की सहायता के लिए तैयार हैं. हथियार और प्रशिक्षण दे सरकार स्थानीय निवासी जगदीश राज ने कहा, सरकार को हमें हथियार और प्रशिक्षण देना चाहिए. हम आतंकवादियों के खिलाफ अपनी सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने के लिए तैयार हैं. 20 वर्षीय छात्र पंकज ने कहा कि आतंकवादियों ने स्थानीय लोगों में डर पैदा कर दिया है, लेकिन जब आपके हाथों में हथियार होते हैं तो स्थिति पूरी तरह से बदल जाती है. उन्होंने क्षेत्र के स्थानीय युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान की मांग की और कहा, हम तेजी से जंगलों में जा सकते हैं और आतंकवाद के खतरे से निपटने में मदद कर सकते हैं. शाहिद अहमद ने कहा कि इलाके के मुसलमान और हिंदू शांति चाहते हैं और आतंकवाद को खत्म करने में सुरक्षा बलों की मदद करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, अपने सैनिकों को खोने पर हमारी आंखें भर आईं. दो दशक पहले आतंकवाद के चरम के दौरान भी (यहां) ऐसा हमला कभी नहीं हुआ था. उन्होंने कहा कि सरकार को लड़ने के लिए हथियार और प्रशिक्षण मुहैया कराना चाहिए. अहमद ने कहा कि ग्रामीण अपने पशुओं के साथ ऊपरी इलाकों में चले गए हैं. उन्होंने कहा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम अपनी सेनाओं के साथ हैं.  

घाटी में धारा 370 हटाने के बाद काफी समय तक यहां शांति रही, लेकिन हाल के महीनों में मामला अलग हुआ

जम्मू पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के अलग-अलग इलाकों में आतंकवादी हमले हो रहे हैं. सोमवार को कठुआ में हुए आतंकी हमले में सेना के 5 जवानों के शहीद हुए हैं. अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि जम्मू में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए जैश गुट OGW (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) प्लान के तहत काम कर रहा है. इस प्लान के तहत लोकल सपोर्ट लेकर भारतीय सुरक्षा बलों पर ‘सरप्राइज अटैक’ किया जा रहा है. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है कि जैश ने सुरक्षा बलों के मूवमेंट की जानकारी, हथियारों और बाकी लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए मुखबिरों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स को एक्टिव करने का फरमान दिया था. कहां-कहां एक्टिव हैं जैश के आतंकी? साउथ पीर पंजाल जम्मू का इलाका है, जहां जैश के आतंकी सबसे ज्यादा है एक्टिव हैं. इंटरनेशनल बॉर्डर के उस पार “मसरूर बड़ा भाई” है, जो जैश का सबसे बड़ा लॉन्च पैड है. कुछ महीने पहले इस इलाके से घुसपैठ हुई थी. आतंकी कठुआ, सांबा और हीरानगर के इलाके में मौजूद ‘चोर गली’ का इस्तेमाल इनफिल्ट्रेशन के लिए करते हैं. ‘चोर गली’ इंटरनेशल बॉर्डर पर मौजूद एक जगह है, जो जंगलों और नदी-नालों से घिरी हुई है. इस इलाके में ISI और पाक रेंजर्स की शह पर आतंकियों की घुसपैट होती है. सूत्रों के मुताबिक कठुआ, सांबा, आरएसपुरा, अरनिया और अब्दुलिया सेक्टर के सामने पाकिस्तान की सीमा के उस पार जैश का सबसे बड़ा लॉंचिंग पैड ‘मसरूर बड़ा भाई’ मौजूद है. इसके अलावा ‘सुकमल’, ‘चपराल’ और लूनी में मौजूद लॉन्चिंग पैड के आस-पास सीमा पार आतंकियों का मूवमेंट पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों ने नोटिस किया गया था. नेशनल हाइवे से भाग निकलते हैं आतंकी सुरक्षा महकमे के सूत्रों के मुताबिक, ये सारे घुसपैठ के अड्डे इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) के काफी नजदीक हैं. आतंकी इस इलाके से घुसपैठ करने की कोशिश इसलिए करते हैं क्योंकि यहां से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद नेशनल हाइवे का इस्तेमाल करके कहीं भी भाग सकते हैं. इसके साथ ही इन रास्तों के इस्तेमाल करके सरप्राइज अटैक करने के बाद जंगलों छिपा जा सकता है. कहां है ‘मसरूर बड़ा भाई’ ? यह जगह सांबा रीजन के कठुआ-हीरानगर सेक्टर में पहारपुर के पास बीएसएफ की बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) के दूसरी तरफ स्थित है. इस इलाके में लंबे वक्त से आतंकी घुसपैठ हो रही है. यह जगह इंटरनेशनल बॉर्डर से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. जम्मू-कश्मीर में कई चीजें बदलती दिख रही हैं. धारा 370 हटाने के बाद काफी समय तक यहां शांति रही, लेकिन हाल के महीनों में मामला अलग हुआ. कश्मीर तो फिर भी शांत है, लेकिन जम्मू दहशतगर्दों का नया ठौर बनता दिख रहा है. वे नागरिकों, तीर्थयात्रियों समेत सेना पर भी घात लगाकर हमले कर रहे हैं. ताजा हमला कठुआ में हुआ. ये वही इलाका है, जो कश्मीर के सबसे अस्थिर दौर में आतंकियों की पनाहगाह बना हुआ था. लेकिन ऐसा क्या हुआ है, जो आतंकी एक बार फिर जम्मू की तरफ मुड़ रहे हैं. हमले को लेकर कई चौंकानेवाली बातें आ रही हैं. माना जा रहा है कि आतंकियों को लोकल शख्स ने ही गाइड किया होगा, वरना घटनास्थल से बचकर निकल सकना आसान नहीं. अटैक की जिम्मेदारी आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने ली है. ये शैडो संगठन है, जो जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करता है. ये उन्हीं 7 आतंकियों का ग्रुप बताया जा रहा है जिनमें से 3 को डोडा में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था. कठुआ क्यों बन रहा टारगेट नब्बे के दौरान कठुआ आतंकियों का बड़ा ठिकाना हुआ करता था, जहां से वे पूरे जम्मू-कश्मीर पर निशाना साधते. अब एक बार फिर ऐसा दिख रहा है. दरअसल इस जिले की बनावट ऐसी है कि यहां छिपना-छिपाना आसान है. जंगलों से सटे क्षेत्र में हमले के बाद आतंकी गायब हो सकते हैं, जैसा ताजा केस में दिख रहा है. लेकिन एक बड़ी वजह और भी है, जो है इसकी जिओग्राफी. जिले के एक तरफ पाकिस्तान की सीमा सटती है, तो दूसरी तरफ हिमाचल और पंजाब हैं. कठुआ उधमपुर, सांबा और डोडा जिलों से भी लगा हुआ है. नब्बे के दशक में यहां सुरक्षा बलों का बेस भी हुआ करता था ताकि आतंक पर रोक लगाई जा सके. क्या-क्या हो चुका जिले में सोमवार को हुआ हमला कठुआ में दूसरा बड़ा अटैक है. 11 जून को हीरानगर के एक गांव में एक सुरक्षाकर्मी समेत दो आतंकी मारे गए थे. वहीं महीनेभर के भीतर जम्मू में यह सातवां अटैक है. इसकी शुरुआत 9 जून को हुई, जब टैररिस्ट्स ने रियासी में श्रद्धालुओं की बस को टारगेट किया था. दो दिनों के हीरानगर में हमला हुआ. 12 जून को डोडा में दो अटैक हुए थे. इसके बाद 26 जून को घटना दोहराई गई. पिछले साल जम्मू में 40 से ज्यादा हमले साफ दिख रहा है कि कश्मीर में तो शांति है, लेकिन आतंकवादी जम्मू को घेर रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह ये है कि धारा 370 हटने के बाद से घाटी में सुरक्षाबल भारी संख्या में बना हुआ है. वहां सेंध लगाना बेहद मुश्किल है. शायद इसी वजह से पाकिस्तान स्थित आतंकी जम्मू को निशाना बनाने की कोशिश में हैं. बता दें कि साल 2023 में भी ऐसी कोशिश हुई थी, जब जम्मू में 43 टैरर अटैक दर्ज किए गए. मॉनसून में बढ़ जाती है आतंकी गतिविधि! बरसात में मामला और संवेदनशील हो जाता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेज बारिश के दौरान मॉनिटरिंग सिस्टम पर असर होता है, जैसे फेंसिंग और इंफ्रारेड लाइट्स कमजोर या खराब हो जाती हैं. इसका फायदा आतंकी उठाते हैं और सीमा पार से आकर आतंक मचा जाते हैं. आबादी भी हो सकती है एक वजह कश्मीर की तुलना में जम्मू की डेमोग्राफी अलग है. यहां हिंदू-मुस्लिम प्रतिशत 60:40 का मान सकते हैं. ऐसे में टैररिस्ट जानकर जिले को निशाना बना रहे हैं ताकि सांप्रदायिक भावनाएं उकसाकर दंगों जैसे हालात पैदा कर सकें. इससे उनकी आवाजाही और आसान हो जाएगी. होने वाले हैं विधानसभा चुनाव आर्टिकल 370 हटने के बाद से पहली बार यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जल्द ही इनकी तारीख फाइनल हो जाएगी. आतंकवादी गुट इसलिए भी क्षेत्र … Read more

आतंकवादीयों ने पहले फेंका ग्रेनेड, फिर 12 मिनट तक अंधाधुंध फायरिंग… शहीद हुए 5 जवान, जानें हुआ क्या?

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के कठुआ में हुए आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हुए हैं जबकि पांच जवान घायल हुए हैं. आतंकियों की खोजबीन के लिए सेना का सर्च ऑपरेशन जारी है. इस बीच सूत्रों के हवाले से पता चला है कि आतंकियों ने इस हमले को अंजाम देने से पहले इलाके की रेकी की थी. यह हमला ऐसे समय पर किया गया, जब सुरक्षाबल कठुआ के बडनोटा में तलाशी अभियान चला रहे थे. तभी आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया. सूत्रों का कहना है कि बडनोटा गांव में रोड कनेक्टिविटी सही नहीं है. यहां वाहन दस से पंद्रह किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक की रफ्तार पर वाहन नहीं चला सकते. लोकल गाइड ने आतंकियों को दिया खाना और छिपने में की मदद सूत्रों का कहना है कि कच्ची सड़क होने की वजह से सेना के वाहन धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं. दो से तीन आतंकी और कुछ स्थानीय गाइड पहाड़ियों के ऊपर हैं. आंतकियों ने पहले सेना के वाहनों पर ग्रेनेड फेंके और फिर फायरिंग की. यहां पहले हुए हमलों की तरह ड्राइवर को भी निशाना बनाया गया. सूत्रों का कहना है कि इलाके में रेकी के लिए स्थानीय गाइड ने आतंकियों की मदद की थी. इन गाइडों ने आतंकियों को खाना भी मुहैया कराया था और उन्हें पनाह दी थी. हमले को अंजाम देने के बाद इन स्थानीय गाइड ने आतंकियों को छिपने में भी मदद की थी. हमले में पाकिस्तानी आतंकी थे शामिल सूत्रों का कहना है कि इस हमले में पाकिस्तानी आतंकी शामिल थे. इन आतंकियों के पास अमेरिका में बने M4 कार्बाइन राइफल, एक्सप्लोसिव डिवाइस और अन्य हथियार हैं. ऐसा भी लग रहा है कि आतंकी हमले के बाद बचकल भाग निकलने में कामयाब रहे. हमले में 2-3 आतंकी हो सकते हैं शामिल देर रात तक सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को कोई सफलता नहीं मिल सकी. सर्च ऑपरेशन जारी है. जंगल के अंदर आतंकी हमले की सटीक जगह का पता लगाया जा चुका है. सूत्रों के मुताबिक हमले में 2 से 3 आतंकी शामिल हो सकते हैं. उम्मीद है कि आतंकियों के साथ उनके स्थानीय समर्थक भी थे, जिन्होंने उन्हें रास्ता बताने में मदद की. आतंकियों का मकसद ज्यादा से ज्यादा जवानों को हताहत करने का था. वह अपने साथ अत्याधुनिक हथियार लेकर आए थे. पैरा कमांडो चला रहे सर्च ऑपरेशन तैनात सेना के पैरा कमांडो (एसपीएल फोर्स) को कठुआ के दूरदराज के माचिन्डी-मल्हार क्षेत्र में हवाई मार्ग से उतारा गया है. उन्हें काउंटर ऑपरेशन में तैनात किया गया है. ताकि उन आतंकवादियों के खिलाफ समय पर प्रभावी काउंटर ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा सके. जो आतंकवादी भाग रहे हैं और क्षेत्र से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं. उनपर शिकंजा कसने की तैयारी है. राजौरी में सेना के शिविर पर आतंकी हमला जम्मू कश्मीर के राजौरी में दो दिन पहले ही भारतीय सेना के शिविर पर आतंकवादी हमले का मामला सामने आया था. इस अटैक में आर्मी का एक जवान घायल हो गया था. आतंकवादियों ने सेना के शिविर पर गोलीबारी की थी. इस दौरान सतर्क सुरक्षा चौकी पर तैनात जवान भी ने आतंकवादियों पर गोलीबारी की थी. घटना के वक्त सेना का जवान घायल हो गया था. आतंकवादी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे थे. दूसरी ओर इस हमले के कुछ घंटों बाद ही चिनिगाम गांव में गोलीबारी की एक और घटना हुई थी. सेना को लश्कर ग्रुप के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद सुरक्षा बल उस क्षेत्र में पहुंच गए थे. दोनों तरफ से गोलीबारी हुई थी.  सेना को कुलगाम के इलाके में आतंकियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया इनपुट मिला था. इसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान सेना के जवानों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई थी. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की है। रविंद्र शर्मा ने कहा कि, यह एक दुखद घटना है कि कठुआ के इलाके में हमारे चार जवान शहीद हो गए और 6 के घायल होने की जानकारी है। इस तरह की स्थिति जम्मू सूबे के हर जिले में है। सरकार आतंकवाद खत्म करने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन डोडा, राजौरी, कठुआ जैसे इलाके भी आतंकवाद से ग्रस्त होते जा रहे हैं। यह एक दुखद घटना है, सरकार को गंभीरता से देखना होगा। चुनाव के बाद अचानक इस तरह की स्थिति बनना चिंता का विषय है। सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे और बताना होगा कि इस तरह के गंभीर हालत क्यों हो रहे हैं। इस घटना पर डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी के चेयरमैन और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने भी ट्वीट करते हुए कहा, कठुआ में सेना के वाहन पर हुए आतंकी हमले में चार जवानों की शहादत और छह जवानों के घायल होने की खबर बेहद दुखद और निंदनीय है। जम्मू प्रांत में आतंकवाद का बढ़ना बेहद चिंताजनक है। हमारी संवेदनाएं घायल जवानों और उनके परिवारों के साथ हैं। सरकार को आतंकवाद से निपटने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। फिलहाल इलाके में सुरक्षाबलों की तरफ से सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। बीते दो माह में सेना के वाहन पर यह दूसरा आतंकी हमला है। अधिकारियों ने कहा कि आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर ग्रेनेड फेंके और इसके बाद फायरिंग शुरू कर दी। सेना के जवान रूटीन पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान आतंकियों ने सेना की गाड़ी पर दोपहर करीब 3.30 बजे हमला कर दिया।  

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