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धार भोजशाला परिसर में कब्रों पर विवाद गहराया, एएसआई सर्वे रिपोर्ट के बाद मुस्लिम पक्ष ने लिया कोर्ट जाने का निर्णय

धार  धार के भोजशाला परिसर में लंबे समय से शवों को दफनाने का विवाद चला आ रहा है। यहाँ कुछ परिवारों के सदस्यों की मौत होने पर उन्हें परिसर के भीतर ही दफनाया जाता था। हालांकि, हिंदू समाज द्वारा इसका लगातार विरोध किया गया। विवाद बढ़ता देख साल 1997 में तत्कालीन कलेक्टर ने एक आदेश जारी कर भोजशाला में शव दफनाने पर रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद वहां अंतिम संस्कार बंद हुआ, लेकिन मस्जिद के सामने वाले हिस्से में आज भी कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं।  जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन कब्रों को बनाने में उन पत्थरों का इस्तेमाल किया गया जो भोजशाला के हिस्सों को तोड़ने के बाद मलबे के रूप में वहां पड़े थे। एएसआई ने सर्वे के दौरान इन कब्रों के पास के इलाके की भी जांच की है। हालांकि इनके बारे में अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह साफ है कि शहर में अलग कब्रिस्तान होने के बावजूद कुछ लोग शवों को दफनाने के लिए भोजशाला परिसर का ही इस्तेमाल करते थे। भोजशाला के उस हिस्से में जहाँ मस्जिद बनी है, वहां के पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो आमतौर पर मस्जिद निर्माण में नहीं होतीं। कुछ शिलालेखों पर पशुओं की आकृतियां बनी हुई हैं। वहीं, परिसर के 50 से ज्यादा शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें भी लिखी मिली हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम समाज ने एएसआई की इस सर्वे रिपोर्ट को गलत बताते हुए इसे कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। इसके लिए धार के मुस्लिम प्रतिनिधियों ने वकीलों से मशविरा शुरू कर दिया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने के लिए 16 मार्च तक का समय दिया है। परिसर के उस हिस्से में, जहां मस्जिद निर्मित है, पत्थरों और गुंबदों पर ऐसी आकृतियां मिली हैं जो सामान्यतः मस्जिद निर्माण में नहीं देखी जातीं। कुछ शिलालेखों पर पशु आकृतियां उकेरी गई हैं, जबकि 50 से अधिक शिलालेखों पर अरबी और फारसी में आयतें लिखी पाई गई हैं। नींव में मिला परमारकालीन ‘शारदा सदन’ रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान ढांचे के नीचे बेसाल्ट पत्थरों की 10वीं–11वीं शताब्दी की नींव पाई गई। इन पत्थरों पर ‘शारदा सदन’ शब्द अंकित है, जो देवी सरस्वती या वाग्देवी के निवास का संकेत देता है। साथ ही सुप्रसिद्ध साहित्यिक कृति ‘पारिजात मंजरी’ के उल्लेख वाले शिलालेख भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह स्थान पूजा का केंद्र होने के साथ ही शिक्षा और नाट्य गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी था। तीन चरणों में निर्माण, अंतिम चरण में मस्जिद स्वरूप वैज्ञानिक परीक्षणों से एएसआई ने निष्कर्ष निकाला है कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे प्राचीन परत मंदिर की है। इसके ऊपर क्षतिग्रस्त संरचना के अवशेष और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा ढांचा निर्मित किया गया। रिपोर्ट कहती है कि मस्जिद निर्माण के दौरान मंदिर के स्तंभों, शिलाखंडों और सजावटी पत्थरों का पुनः उपयोग किया गया। जिसमें कि निर्माण में समरूपता का अभाव स्पष्ट दिखता है। कई पत्थर उल्टे या आड़े-तिरछे लगाए गए, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे थे। कुछ अक्षरों को घिसकर मिटाने के प्रयास भी मिले हैं। इससे यह संदेह प्रबल होता है कि मूल पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। 106 स्तंभ, 82 अर्धस्तंभ और कीर्तिमुख सर्वे में पाया गया कि पूरी संरचना 106 मुख्य स्तंभों और 82 अर्धस्तंभों पर आधारित है। अधिकांश स्तंभ चूना पत्थर के हैं, जिनका रंग हल्का लाल और धूसर है। इन पर कीर्तिमुख, नागबंध, चैत्य गवाक्ष और उल्टे पत्तों की नक्काशी उकेरी गई है। कीर्तिमुख भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट आकृति है, जिसे सिंहमुख रूप में दर्शाया जाता है और जिसे दुष्ट शक्तियों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। स्तंभों के शीर्ष पर गोलाकार अभाकस, अष्टकोणीय पट्ट और त्रिकोणीय आधार स्पष्ट रूप से मध्यकालीन मंदिर शैली को दर्शाते हैं। 150 से अधिक संस्कृत शिलालेख, 56 अरबी-फारसी अभिलेख रिपोर्ट में 150 से अधिक संस्कृत और प्राकृत भाषा के शिलालेख दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत 56 शिलालेख अरबी और फारसी में पाए गए। यह अनुपात भी मूल संरचना के मंदिर और शैक्षणिक केंद्र होने की ओर संकेत करता है। फर्श और दीवारों में लगे कई पत्थरों पर खुदे अक्षरों को जानबूझकर घिसा गया या उल्टा लगा दिया गया ताकि उन्हें पढ़ा न जा सके। एएसआई के अनुसार यह ‘आइकॉनोग्राफिक इरेजर’ का स्पष्ट उदाहरण है। मूर्तियों के साक्ष्य: गणेश से अर्धनारीश्वर तक सर्वे रिपोर्ट में 94 मूर्तियों और उनके अवशेषों का उल्लेख है। इनमें गणेश, ब्रह्मा, नृसिंह और चार भुजाओं वाले अन्य देवताओं की आकृतियां शामिल हैं। परिसर से पूर्व में प्राप्त अर्धनारीश्वर, कुबेर और नायिका की मूर्तियों को भी साक्ष्य के रूप में जोड़ा गया है। ये प्रतिमाएं वर्तमान में संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। खिड़की फ्रेम पर देवी-देवताओं की अपेक्षाकृत सुरक्षित मूर्तियां और एक स्तंभ पर कटी-फटी आकृतियां इस बात की ओर संकेत करती हैं कि मूल प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाई गई। 1455 ईस्वी का शिलालेख और ऐतिहासिक संदर्भ परिसर में स्थित मकबरे के प्रवेश द्वार पर लगे शिलालेख का उल्लेख रिपोर्ट के खंड चार, पृष्ठ 260 पर किया गया है। यह शिलालेख मालवा सल्तनत के शासक महमूद खिलजी के काल (हिजरी 859/1455 ईस्वी) का है। एएसआई द्वारा किए गए अनुवाद के अनुसार उसमें उल्लेख है कि एक पुराने आश्रम को ध्वस्त कर मूर्तियों को नष्ट किया गया और उसे नमाज की जगह में परिवर्तित किया गया। इस संदर्भ में उल्‍लेखित है कि रिपोर्ट इस अभिलेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रत्यक्ष साक्ष्य मानती है। कारीगरों के 139 निशान और युद्ध दृश्य स्तंभों पर 139 से अधिक प्रकार के चिह्न जैसे त्रिशूल, स्वास्तिक और अन्य प्रतीक मिले हैं। इन्हें कारीगरों के सिग्नेचर या कोड के रूप में देखा गया है। दीवारों पर हाथी और सैनिकों के युद्ध दृश्य भी उकेरे गए हैं। एक स्थान पर बच्चे के हाथ का निशान भी मिला है, जो निर्माणकालीन गतिविधियों का मानवीय संकेत देता है। 98 दिन का सर्वे और 2189 पृष्ठों की रिपोर्ट उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देश पर 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर का वैज्ञानिक सर्वे किया गया। 4 जुलाई 2024 को एएसआई ने 10 … Read more

धार की भोजशाला मामले में नई तारीख तय, 18 फरवरी को होगी सुनवाई

 इंदौर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर आज मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में होने वाली सुनवाई आगे बढ़ गई है।कल  अधिवक्ता संघ द्वारा की गई हड़ताल की वजह से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। इसके लिए न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में यह प्रकरण क्रम संख्या- 62 पर सूचीबद्ध किया गया था। यह सुनवाई गत 22 जनवरी को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रारंभ की जानी है। सुनवाई में भोजशाला को लेकर किए गए 98 दिनों के एएसआई सर्वे की रिपोर्ट खुली अदालत में खोली जाएगी और उसकी कॉपी दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था। बता दें कि हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष सुनवाई में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फार जस्टिस एएसआई सर्वे को आधार बनाकर भोजशाला के वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर होने के पक्ष में अपने तर्क रखने हैं। इसके लिए हिंदू फ्रंट फार जस्टिस की ओर से याचिकाकर्ता आशीष गोयल उपस्थित रहेंगे, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन (नई दिल्ली) तथा अधिवक्ता विनय जोशी (इंदौर) पैरवी करेंगे। निर्णय होने तक 2003 का आदेश प्रभावशील सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तक भोजशाला की संरचना एवं स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसका सात अप्रैल 2003 को एएसआई महानिदेशक द्वारा जारी आदेश यथावत प्रभावी रहेगा। एएसआई सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष 17000 अवशेष मिले थे। 96 मूर्तियां प्राप्त हुईं। 25 फीट से अधिक खुदाई में दीवार का ढांचा मिला। पीछे के खेत क्षेत्र से भी मूर्तियां बरामद की गईं। चारों दिशाओं में 106 स्तंभ पाए गए। 82 भित्ति चित्रयुक्त स्तंभ मिले। 33 प्राचीन सिक्के मिले। ये सिक्के 10वीं–11वीं शताब्दी एवं परमार युग के बताए गए हैं।  

ऐतिहासिक भोजशाला में वाग्देवी पूजन की तैयारी पूरी, पुलिस प्रशासन ने किए सुरक्षा के इंतजाम

धार मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित मां सरस्वती मंदिर भोजशाला में 3 फरवरी को बसंत पंचमी पर्व मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी पर ऐतिहासिक भोजशाला में मां वाग्‍देवी जन्‍मोत्‍सव मनाया जा रहा है। इसे लेकर भोजशाला परिसर को भगवा पताकाओं से सजाया गया है। साथ ही, यज्ञकुंड में आहुतियां दी जा रही है। यज्ञकुंड को गोबर से लीपकर आकर्षक सजावट की गई है। 3 फरवरी को बसंत पंचमी के साथ तीन दिनी बसंतोत्‍सव की भी शुरूआत हो गई।  सूर्योदय के साथ ही भोजशाला में मां वाग्‍देवी की पूजा का क्रम शुरू हो चुका है। दिनभर में हजारों लोग मां वाग्‍देवी के दर्शन के लिए पहुंचेंगे। साथ ही, यज्ञ में आहुतियां भी दी जाएगी। बसंतोत्‍सव के तहत लालबाग से मां वाग्‍देवी की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें हजारों भक्‍त सहभागिता करेंगे। शोभायात्रा प्रमुख मार्गों से होते हुए भोजशाला पहुंचेगी। जहां पर महाआरती के बाद धर्मसभा का आयोजन होगा। जोर शोर पर हुई तैयारियां भोज उत्‍सव समिति द्वारा आयोजित बसंतोत्‍सव के तहत धर्मसभा में इस बार संत उत्‍तम स्‍वामी जी शामिल होने के लिए धार पहुंच रहे है। शोभायात्रा में शामिल होने के बाद वे धर्मसभा को संबोधित करेंगे। आयोजन को लेकर पूरे शहर को भगवा पताकाओं से सजाया गया है। वहीं सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए है। रविवार को भोजशाला में भी दिनभर साज-सज्‍जा का दौर चलता रहा। इधर, मोतीबाग चौक पर धर्मसभा के लिए टेंट लगाए गए। साथ ही, भगवा पताकाओं को पूरे परिसर में सजाया गया। वहीं, मातशक्ति द्वारा भी अपने स्‍तर पर तैयारियां की गई। ये होंगे आयोजन पहला दिन : भोजशाला परिसर में बसंत पंचमी पर सुबह 7 बजे से मां सरस्‍वती यज्ञ शुरु हुआ। जबकि, सुबह 11 बजे उदाजीराव चौराहा लालाबाग से मां वाग्‍देवी शोभायात्रा निकलेगी। वहीं, दोपहर 12.30 बजे धर्मसभा होगी। इसमें मुख्‍य वक्‍ता महर्षि उत्‍तम स्‍वामीजी महाराज रहेंगे। दोपहर 1.30 बजे महाआरती और शाम 5.50 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ आरती होगी। दूसरा दिन : 4 फरवरी को सुबह 8.55 बजे मंगलवार को मां सरस्‍वती मंदिर भोजशाला में नियमित सत्‍याग्रह होगा। दोपहर 2.30 बजे मातशक्ति सम्‍मेलन होगा। मुख्‍य अतिथि धर्मजागरण प्रांत सह संयोजिका भारती दीदी होंगे। रात 8 बजे भजन संध्‍या होगी। इसमें भजन सम्राट द्वारका मंत्री भजनों की प्रस्‍तुतियां देंगी। तीसरा दिन : 5 फरवरी को रात 9 बजे अखिल भारतीय विराट कवि सम्‍मेलन होगा। जबकि 6 फरवरी को कन्‍या पूजन के साथ समापन होगा। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी इधर, आयोजन को लेकर पुलिस भी पुख्ता बंदोबस्‍त कर चुकी है। सुरक्षा को लेकर भोजशाला के मुख्य द्वार से लेकर परिक्रमा मार्ग तक बैरिकेड्स लगाए गए हैं। दर्शन के लिए आने वाले लोग इन बैरिकेड्स से होकर गुजरेंगे। साथ ही, 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरे भी चप्पे-चप्पे की निगरानी के लिए लगाए गए हैं। यहां अस्थाई थाना भी बनाया गया है। जहां से अधिकारी पूरे क्षेत्र की निगरानी रख सकेंगे। सुरक्षा के नोडल अधिकारी एएसपी डॉ इंद्रजीत बाकलवार हैं। भोजशाला समेत 200 मीटर के इलाके को आज से पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पड़ोसी जिलों से भी बुलवाया गया बल सोमवार सुबह यज्ञ के साथ ही दर्शन के लिए आने वाले लोगों का क्रम शुरू हो गया है। ऐसे में सुबह 6 बजे से ही पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। रविवार दोपहर के समय एसपी मनोज कुमार सिंह और कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भी कर्मचारियों को ड्यूटी को लेकर दिशा-निर्देश दिए। भोजशाला में सुरक्षा की दृष्टि से 9 राजपत्र अधिकारी, 19 थाना प्रभारी समेत 700 से अधिक का पुलिसबल ड्यूटी कर रहा है। यही नहीं, पड़ोसी जिलों से भी जरूरत के हिसाब से पुलिसबल धार भोजशाला परिसर में तैनात किया गया है। शोभायात्रा से लेकर धर्मसभा और परिक्रमा मार्ग को चार सेक्टरों में बांटा गया है। ऊंची इमारतों से रखी जा रही निगरानी शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल होंगे। ऐसे में यात्रा मार्ग की 20 हाईराइज बिल्डिंगों पर भी पुलिस जवान तैनात किए जा रहे हैं। साथ ही शहर के 34 चिन्हित स्थानों पर भी सुबह से लेकर शाम तक फिक्स पाईंट बनाए गए हैं। वहीं, 10 बाइक पुलिस टीम नगर के भीतरी हिस्से व चार मोबाइल पुलिस वाहन बाहरी हिस्से में लगातार भ्रमण कर हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं। यात्रा और धर्मसभा में महिलाएं भी शामिल होती हैं, जिसके चलते महिला पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।

धार भोजशाला को जैन मंदिर बताने वाली याचिका हाईकोर्ट से वापस, पूजा करने की मांगी थी अनुमति, ASI की रिपोर्ट पर सबकी नजर

धार  भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर में जैन समुदाय के लिए पूजा करने के अधिकार की मांग वाली याचिका वापस ले ली गई। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में दायर यह रिट याचिका शुक्रवार को तकनीकी आधार पर वापस हुई। दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता सलेकचंद जैन द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया कि विवादित परिसर में एक बार एक जैन गुरुकुल और एक जैन मंदिर था जहां देवी अंबिका की मूर्तियां स्थापित की गई थीं। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से कहा कि याचिका न तो उचित प्रारूप में प्रस्तुत की गई है और न ही इसे दायर करने में देरी का कारण बताया गया है। इसके बाद जैन के वकीलों ने याचिका वापस ले ली और अदालत से निर्धारित प्रारूप में नया आवेदन दायर करने की अनुमति मांगी। बाद में एकल पीठ अदालत की मंजूरी मिलने के बाद याचिका वापस ले ली गई। इसमें (याचिका में) दावा किया गया कि भोजशाला परिसर में एक जैन गुरुकुल और जैन मंदिर हुआ करता था, जहां छात्रों को जैन भिक्षुओं और विद्वानों द्वारा शिक्षा दी जाती थी। इस परिसर में संस्कृत, प्राकृत और अन्य भाषाओं में ग्रंथों के अनुवाद का काम भी किया जाता था। इसलिए जैन समुदाय के लोगों को इस स्थान पर पूजा करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। याचिका में यह भी दावा किया गया कि भोजशाला परिसर में जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) की मूर्ति बता रहा है, वह वास्तव में जैन समुदाय की देवी अंबिका (जैन यक्षिणी) की मूर्ति है, जिसे धार के राजा भोज ने 1034 ई. में इस परिसर में स्थापित किया था। याचिका में मांग की गई थी कि लंदन के एक संग्रहालय में रखी गई प्रतिमा को भारत वापस लाया जाए और धार के भोजशाला परिसर में फिर से स्थापित किया जाए। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमल मौला मस्जिद कहता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। भोजशाला सर्वे मामले में हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक एएसआई को विवादित परिसर की पूरी सर्वे रिपोर्ट 15 जुलाई तक जमा करनी है।

भोजशाला सर्वे पर कोर्ट में सुनवाई के दौरान एएसआई की टीम खाली हाथ पहुंची

धार  भोजशाला में चल रहे सर्वे पर कोर्ट में सुनवाई के दौरान एएसआई की टीम खाली हाथ पहुंची। धार भोजशाला केस की इंदौर हाईकोर्ट में आज सुनवाई थी। एएसआई ने इस दौरान सर्वे की रिपोर्ट पेश नहीं की। भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने रिपोर्ट पेश करने के लिए कोर्ट से चार सप्ताह का समय मांगा था। इस पर कोर्ट ने 15 दिन का समय देकर 22 जुलाई को रिपोर्ट पेश करने के दिए आदेश दिए हैं। 2 जुलाई को पेश करनी थी सर्वे रिपोर्ट बता दें, बीते 11 मार्च को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला परिसर के सर्वे कराने का आदेश दिया था. भोजशाल को हिंदू समुदाय वाग्देवी यानी सरस्वती का मंदिर मानता है. इसके उलट मुस्लिम समुदाय इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद मानता है. एएसआई ने हाईकोर्ट के निर्देश पर परिसर का “वैज्ञानिक सर्वेक्षण” कर रहा है. हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के आदेश के अनुसार, एएसआई को 2 जुलाई तक परिसर के सर्वेक्षण की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी. मामले में अब एएसआई की नई अर्जी पर गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है.  इसी साल बीते 11 मार्च को हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस संगठन के आवेदन पर एएसआई को परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था. हिंदू- मुस्लिम को पूजा-नमाज की अनुमति पिछले 21 सालों से एएसआई ने हिंदू और मुस्लिम समाज के लिए भोजशाला पूजा और नमाज के लिए विशेष व्यवस्था की है. इसके तहत यहां पर हिंदू समाज को हर मंगलवार को भोजशाला में तक पूजा करने की अनुमति दी गई है. इसी तरह मुसलिम समाज को हर शुक्रवार को इस स्थल पर नमाज अदा करने की अनुमति है. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने अपनी याचिका में एएसआई द्वारा दिए गए इस आदेश को चुनौती दी है.

भोजशाला का सर्वे पूरा होने के बाद अब रिपोर्ट तैयार करने में जुटे ASI के अधिकारी, 4 जुलाई को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

धार ऐतिहासिक भोजशाला का सर्वे पूरा होने के बाद अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम गहन रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है। यह रिपोर्ट गहन होगी, जिसमें सर्वे के दौरान मिले पुरावशेषों के बारे में विस्तृत व शोधपरक जानकारी शामिल की जाएगी। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अकेले जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया हैदराबाद ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) की रिपोर्ट पर ही 650 स्लाइड तैयार की हैं। बुधवार को भी एएसआई की टीम भोजशाला पहुंची। रिपोर्ट बनाने को लेकर कार्य तेज कर दिया गया है। 4 जुलाई को हाईकोर्ट में सुनवाई बता दें कि 27 जून को सर्वे बंद होने के बाद रिपोर्ट 2 जुलाई को हाई कोर्ट में प्रस्तुत की जानी थी। एएसआई की ओर से कोर्ट में 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए मांगा गया है। मामले की सुनवाई 4 जुलाई को होनी है। जैन समाज का भी दावा इसी दिन कोर्ट तय करेगी कि एएसआई को रिपोर्ट पेश करने के लिए समय दिया जाए या नहीं। जैन समाज की एक संस्था के पदाधिकारी की ओर से दाखिल याचिका पर भी सुनवाई की जाएगी। इसमें उन्होंने भोजशाला के जैन समाज का स्थल होने का दावा किया है। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट में व्यापकता रहेगी। 194 स्तंभों के 8-8 फोटो लिए गए हैं। यह तो केवल एक उहाहरण मात्र है। इस तरह से कई भागों की वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी की गई है। शिलालेखों का अनुवाद किया गया है। प्राप्त करीब 1700 अवशेषों की विशेषज्ञों की रिपोर्ट है। इस तरह से रिपोर्ट व उसके सहयोगी दस्तावेज हजारों पेज में पहुंचने का अनुमान है, इसलिए समय भी लग रहा है। अभी भी टीम धार के साथ भोपाल व दिल्ली में भी समानांतर रिपोर्ट बनाने के कार्य में जुटी हुई है।

भोजशाला का एएसआई सर्वे के दौरान खुदाई में मिली हिन्दू देवी देवताओं की मूर्तियां

धार मप्र के धार में भोजशाला का एएसआई सर्वे चल रहा है। सर्वे के 80वें दिन सीढ़ियों के नीचे बंद कमरे से भगवान गणेश, मां वाग्देवी, मां पार्वती, हनुमानजी व अन्य देवी प्रतिमाएं मिली हैं। इसके साथ सनातनी आकृतियों वाले शंख-चक्र, शिखर समेत करीब 79 अवशेष मिले हैं। 8 बाय 10 फीट का यह कमरा दोनों पक्षों की मौजूदगी में खोला गया। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ता ने इसे भोजशाला के प्रमाणित होने की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। वहीं मुस्लिम पक्षकार ने कहा कि इन सभी चीजों को यहां पर बाद में रखा गया था। देवी, गणेशजी, हनुमानजी समेत कई मूर्तियां मिली जीपीआर मशीन की जांच के बाद मिले डाटा के आधार पर सर्वे के लिहाज से इसे खोला गया। जहां एक फर्श हटाने के बाद टीम ने जैसे-जैसे मिट्टी हटाई इसके बाद कमरे से सबसे पहले भगवान गणेश, मां वाग्देवी, पार्वती, महिषासुरमर्दिनी, हनुमानजी की प्रतिमा निकली। कोई प्रतिमा डेढ़ फीट की तो कोई दो से ढाई फीट की है। यज्ञशाला की मिट्टी हटाई तो मिली पुरातन चीजें उत्तरी हिस्से में भी मिट्टी की लेवलिंग के दौरान पिलर के बेस, बीच के हिस्से समेत करीब 6 अवशेष निकले हैं। यज्ञशाला के समीप मिट्टी हटाने के दौरान छह बड़े सनातनी अवशेष मिले हैं। इन्हें एएसआई ने जांच में शामिल किया। हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा ने बताया बारिश के चलते भोजशाला के आसपास बनाई गई ट्रेंच को भी मिट्टी भरकर बंद कर रहे हैं। जो अवशेष मिले वह प्रमाणित हैं और अब तक हुए सर्वे में एक दिन में सबसे ज्यादा मिले हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के सदस्य व याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने दावा किया है कि भोजशाला के भीतर बंद कमरा एएसआई के अधीन होकर सालों से बंद पड़ा है। मुस्लिम पक्ष दर्ज करवाएगा आपत्ति मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद का कहना है यह सर्वे पूरी तरह से हाई कोर्ट के आदेश पर गोपनीय तरीके से हो रहा है। मिट्टी हटाने के साथ परिसर में लेवलिंग का भी काम चला है। जो अवशेष सफाई में मिले वह बाद में रखे गए थे। इन अवशेषों के सूचीबद्ध करने पर इनके रखे जाने वाले वर्ष को शामिल कराने की आपत्ति एएसआई को दर्ज कराई जाएगी। धार जिले की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक भोजशाला मंदिर को राजा भोज ने बनवाया था। राजा भोज परमार वंश के महान राजा थे जिन्होंने 1000 से 1055 ईस्वी तक राज किया। बताया जाता है कि 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर हमला किया था और 1401 ईस्वी में दिलवार खान गौरी ने भोजशाला के एक हिस्से में और 1514 ईस्वी में महमूद शाह खिलजी ने दूसरे हिस्से में मस्जिद को बनवाया था। 19वीं शताब्दी में यहां पर खुदाई हुई तो सरस्वती देवी की प्रतिमा मिली जिसे अंग्रेज अपने साथ ले गए। यह प्रतिमा अभी लंदन के संग्रहालय में है। इस प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए भी विवाद चल रहा है। देश की आजादी के बाद भोजशाला में पूजा और नमाज को लेकर विवाद बढ़ने लगा। कोर्ट ने अभी यहां पर हिंदुओं को मंगलवार को प्रवेश के साथ पूजा की मंजूरी दी है और मुस्लिम समाज को शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करने की मंजूरी दी है। जब भी शुक्रवार को बसंत पंचमी आती है तो विवाद बढ़ जाता है। दोनों पक्ष अपनी पूजा और नमाज के लिए विवाद करते हैं। अब कोर्ट के आदेश पर ही यहां एएसआई का सर्वे चल रहा है। 

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