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Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज पर खीरे की क्यों करते हैं पूजा, जानें रहस्य

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret

Why cucumber is worshiped on Hariyali Teej, know the secret Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का पर्व सुहागिन महिलाओं (Married Women) के लिए बहुत ही खास होता है. सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह पर्व रखती हैं. वैसे तो साल भर में तीन प्रकार की तीज होती हैं, जिसमें हरियाली तीज सबसे पहले पड़ता है. हरियाली तीज का पर्व सावन महीने (Sawan Month 2024) की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होती है, जोकि आज बुधवार 7 अगस्त 2024 को है. आज विवाहिताएं हरियाली तीज का व्रत रखेंगी और शिव-पार्वती (Shiv Parvati) की पूजा करेंगी. पूजा में कई तरह की सामग्रियों (Puja Samagri) की जरूरत पड़ती है, जिसमें खीरा (Kheera) भी शामिल है. हरियाली तीज की पूजा (Hariyali Teej ki Puja) में खीरा का होना बहुत जरूरी होता है, इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है. आइये जानते हैं आखिर क्यों हरियाली तीज में होती है खीरा की जरूरत और क्या है तीज में खीरा पूजन का रहस्य. हरियाली तीज की पूजा में खीरा का महत्व (Cucumber Importance of Hariyali Teej Puja) ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) में खीरा का संबंध चंद्रमा (Chandrama) से बताया गया है. दरअसल जितने भी तरल पदार्थ होते हैं, उनका संबंध चंद्र ग्रह से होता है. हरियाली तीज में शिव शक्ति के साथ ही चंद्रमा पूजन का भी महत्व है. इसलिए पूजा के दौरान खीरा रखना अनिवार्य माना जाता है. एक अन्य कारण यह भी है कि, चंद्रमा शिव को अधिक प्रिय है. इसे शिवजी (Shiv ji) ने अपने माथे पर इसे सुशोभित किया है. चंद्रमा से खीरे का संबंध है और चंद्र का शिव से. इसलिए हरियाली तीज की पूजा में खीरा को चंद्रमा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है, जिससे कि चंद्रमा के शुभ फल से मन के विकार दूर हों, शुभता प्राप्त हो और व्रत में किसी तरह का दोष न रहे.

Tirupati Balaji : जाने का बना रहे हैं मन, तो जाने से पहले मंदिर के बारे में जान लें कुछ खास बातें

If you are planning to visit Tirupati Balaji then know some special things about the temple before

If you are planning to visit Tirupati Balaji then know some special things about the temple before going तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है, जहां हर दिन हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु आकर माथा टेकते हैं। यह भारत में सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह पवित्र मंदिर आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के पहाड़ी शहर तिरुमाला में स्थित है, जो भगवान विष्णु के अवतार वेंकटेश्वर को समर्पित है। कहा जाता है कि हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान वेंकटेश्वर मानवता को ‘कलियुग’ की कठिनाइयों और क्लेशों से मुक्ति दिलाने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। इस अवधारणा के अनुसार, इस क्षेत्र को कलियुग वैकुंठम के रूप में जाना जाता है, और भगवान को कलियुग प्रत्यक्ष दैवम के रूप में जाना जाता है। आइये जानते हैं तिरुपति मंदिर के बारे में कुछ रोचक तथ्य। तिरुपति मंदिर के कुछ रोचक तथ्य भगवान तिरुपति बालाजी की जो मूर्ति रखी गई है वह गर्भगृह के मध्य में खड़ी हुई प्रतीत हो सकती है, लेकिन यह मूर्ति वास्तव में गरबा गुड़ी के दाहिने कोने की ओर थोड़ी सी है। तिरुपति बालाजी मंदिर का नाम भारत के सबसे अमीर मंदिरों में आता है और यहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, जिससे इसने टूरिस्ट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। तिरुपति बालाजी मंदिर के गर्भगृह में देवता की मूर्ति के सामने रखे गए मिट्टी के दीपक भी बुझते नहीं हैं। ये दीपक कब जलाए गए और किसने जलाए, इसके बारे में कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड नहीं है। जब आप मुख्य मूर्ति की पीठ पर अपना कान लगाते हैं, तो आपको एक गरजते हुए समुद्र की आवाज सुनाई देती है। पहाड़ियों के बारे में एक तथ्य यह है कि,इनमें में से एक पर स्वामी का चेहरा है। देखने पर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह सो रहें हैं और आप वास्तव में उनका चेहरा देख सकते हैं। कहा जाता है कि यह मूर्ति इतनी मजबूत है कि कभी क्षतिग्रस्त नहीं हो सकती है। जब सिनामोमम कैम्फोरा पेड़ से प्राप्त कच्चा कपूर या हरा कपूर किसी पत्थर पर लगाया जाता है, तो इससे वस्तु पर दरारें पड़ जाती हैं। लेकिन, श्री तिरुपति बालाजी की मूर्ति पर कपूर की अस्थिर रासायनिक प्रतिक्रियाओं को कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। भगवान वेंकटेश्वर का अभिषेक करने के लिए उपयोग की जाने वाली वस्तुएं केवल जंगल से एकत्र की जाती हैं। हिंदू मंदिरों में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए पैसों में करोड़ों की विदेशी मुद्रा होती है, RBI उस पैसे को बदलने में TTD बोर्ड की मदद करता है। तिरुपति बालाजी- दर्शन नियम तिरूपति बालाजी मंदिर के सामान्य तौर पर दर्शन सुबह 6.30 बजे से शुरु हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि जब आप तिरुपति दर्शन करने जाते हैं तो, यहां दर्शन करने के भी कुछ नियम भी हैं। नियम के अनुसार दर्शन करने से पहले आपको कपिल तीर्थ पर स्नान करके , कपिलेश्वर के दर्शन करने होते हैं। इसके बाद ही वेंकटाचल पर्वत पर जाकर बालाजी के दर्शन करने चाहिए। वहीं इसके पश्चात देवी पद्मावती के दर्शन करें। यहां ये भी जान लें कि पद्मावती देवी का मंदिर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पत्नी पद्मावती लक्ष्मी जी को समर्पित है। माना जाता है कि जब तक भक्त इस मंदिर के दर्शन नहीं करते, तब तक आपकी तिरुमला की यात्रा पूरी नहीं होती।

सावन का तीसरा सोमवार कब ? शिव जी पर चढ़ाएं ये खास चीज

When is the third Monday of Sawan? Offer this special thing to Lord Shiva

When is the third Monday of Sawan? Offer this special thing to Lord Shiva Sawan Somwar 2024: चातुर्मास में संसार का संचालन शिव जी करते हैं और सावन चातुर्मास (Chaturmas) का पहला महीना होता है. इसलिए श्रावण की विशेष मान्यता है. इस साल सावन में पांच सोमवार (Sawan somwar) का संयोग बन रहा है. सावन सोमवार के दिन शिव जी का रुद्राभिषेक (Rudrabhishek) और जलाभिषेक (Jalabhishek) करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है. सावन सोमवार के व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती है. जिन लोगों की शादी में अड़चने आ रही हैं वे सावन सोमवार के दिन कुछ खास उपाय जरुर करें. जानें 2024 में तीसरा सावन सोमवार कब है ? तीसरा सावन सोमवार 2024 (Sawan Third Somwar 2024) तीसरा सावन सोमवार 5 अगस्त 2024 को है. इस दिन सावन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 4 अगस्त 2024 को शाम 04.42 मिनट पर शुरू हो रही है, इसका समापन 5 अगस्त 2024 को शाम 06 बजकर 03 मिनट पर होगा. तीसरे सावन सोमवार पर करें ये उपाय (Sawan Somwar Upay) सफलता – बहुत मेहनत करने के बाद भी करियर में मन मुताबिक सफलता नहीं मिल रही है तो तीसरे सावन सोमवार के दिन गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करें. इस उपाय को करने से मनोवांछित सफलता मिलती है. बाधाओं का नाश होता है.व्यापार में वृद्धि – व्यापार मंद पड़ा है तो, बिजनेस को बढ़ाने की योजनाएं लाभ नहीं दे पा रही है या फिर किसी ने काम बांध रखा है तो सावन के तीसरे सोमवार पर शिवजी को केसर अर्पित करें. मान्यता है इससे भाग्योदय होता है. व्यक्ति कारोबार में तरक्की पाता है.घर में सुख-शांति – जिन लोगों के घर में आए दिन किसी बात को लेकर विवाद होता है. उन्हें सावन के पूरे महीने खासकर सोमवार के दिन शिव पुराण का पाठ करना चाहिए. शिव पुराण सुन भी सकते हैं. इससे तनाव दूर होता है. घर में हो रहे क्लेश मिटते हैं.धन लाभ – सावन सोमवार की पूजा में शिवलिंग पर लौंग अर्पित करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है. माना जाता है कि इससे धन से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती हैं.

गुरूपूजन कर पंच कुण्‍डीय गायत्री महायज्ञ में समर्पित की आहुतियां

After worshiping Guru, offerings were made in Panch Kundiya Gayatri Mahayagya.

After worshiping Guru, offerings were made in Panch Kundiya Gayatri Mahayagya. हरिप्रसाद गोहेआमला । अखिल विश्‍व गायत्री परिवार आमला द्वारा गायत्री प्रज्ञापीठ आमला में गुरूपुर्णिमा पर्व हर्षोल्‍लास के साथ मनाया गया । इस मौके पर सैकड़ों साधको ने अपने अनुष्‍ठान की पुर्णाहुती समर्पित कि व बृम्‍हास्‍त्र साधना के साथ 40 दिवसीय सवा लक्ष गायत्री पुरष्‍चरण हेतु संकल्‍प लिया वहीं साधको द्वारा गुरूदिक्षा लेकर साधना के मार्ग को अपनाया । इस अवसर पर प्रज्ञापीठ के मुख्‍य ढ्रस्‍टी बी पी धामोड़े,एस पी डढोरे ने गायत्री साधना हेतु मार्गदर्शन दिया ।पंच कुण्‍डीय गायत्री महायज्ञ और महाप्रसादी कार्यक्रम में साधको द्वारा बढ चढकर हिस्‍सा लिया वहीं भरत धोटें और नर्मदा सोलंकी द्वारा गुरूपुर्णिमा पर्व पर संगीत की प्रस्‍तुती दी गई । कार्यक्रम में भोजनालय में प्रसादी बनाने हेतु त्रषभ पंवार एवं महिला मंडल द्वारा प्रसादी निर्माण कर सभी परिजनो को वितरित किया । इस अवसर पर सभी ट्रस्टी एवं समन्‍वयक समिति के सदस्‍यों द्वारा आगामी 4 सितम्‍बर 2024 को हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर वृक्षगंगा अभियान के तहत करंजी के पौधों का रोपण कर अपने अभियान को गति देने हेतु योजना बनाकर परिजनो से पौधो को लगाने हेतु चर्चा कर कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आग्रह किया । गुरूपुर्णिमा पर्व पर गायत्री परिवार के के सूर्यवंशी, वंदना ढढोरे, विमला पंवार, माधुरी मालवीय ,श्रद्धा मालवीय ,पंचफूला देशमुख ,उमा देशमुख, गुलाबराव ओडुकले, देवकरण टिकारिया ,राजेश मालवी, वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता अनिल पाठक, राजेन्‍द्र उपाध्‍याय, नितिन देशमुख, अनिल सोनी आदि परिजन मौजूद रहे । ट्रस्‍टी ठाकुर दास पंवार ने बताया कि गायत्री परिवार बृम्‍हास्‍त्र साधना का क्रम चला रहा है जिसमे एक बैठक में 10 माला गायत्री महामंत्र के साथ एक माला महामृत्‍युंजय मंत्र का जप वंदनीय माता जी जन्‍म शाताब्‍दी तक परिजनो द्वारा चलाया जाना है । इस हेतु इच्‍छुक परिजन अपना पंजीयन करवा ले जिसकी जानकारी शांतिकुंज हरिद्वार दोष परिमार्जन हेतु भेजी जायेगी । गायत्री परिवार के निलेश मालवीय ने बताया की आगामी 04 अगस्‍त दिन रविवार को हसलपुर की रामटेक पहाड़ी पर करंजी के पौधे लगाकर वृक्षगंगा अभियान को गति देने ज्‍यादा से ज्‍यादा संख्‍या में पंहुचकर श्रम दान करने जिससे इस प्रकृति का संरक्षण हो ।

पैराडाइज स्कूल में विद्या की देवी मां सरस्वती की स्थापना कर धूमधाम से मनाया गुरु पूर्णिमा का महापर्व 

The great festival of Guru Purnima was celebrated with great

The great festival of Guru Purnima was celebrated with great pomp by installing Goddess Saraswati, the goddess of knowledge, in Paradise School. हरिप्रसाद गोहे  आमला । गुरु,शिष्य, गुरुजी एवं विद्यार्थी के बीच अमिट कड़ी का महापर्व गुरु पूर्णिमा रविवार पैराडाइज हायर सेकेंडरी स्कूल बंधा रोड आमला में स्कूल शिक्षण समिति अध्यक्ष केपी सिक्केवाल शाला परिवार सदस्य एवं शाला में अध्ययनरत विद्यार्थियों की गरिमामय उपस्थिति में धूमधाम से मनाया गया । इस अवसर पर स्कूल में मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई बाद सुंदर कांड का आयोजन किया गया । शाला के प्राचार्य अनुराग मालवीय से प्राप्त जानकारी अनुसार  गुरू पूर्णिमा पर्व पर माता सरस्वती की स्थापना आमला स्थानीय पैराडाइज हायर सेकेंडरी स्कूल में विद्या की देवी माता सरस्वती की मूर्ति की स्थापना की गई । इस अवसर पर विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष श्री के पी सेक्केवाल द्वारा विधिवत पूजन कर विद्यालय परिसर में माता की प्रतिमा की स्थापना की गई । विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक शिक्षिका इस अवसर पर उपस्थित थे साथ ही विद्यालय की छात्राए नौ देवियों के रूप में कार्यकम में उपस्थित थी । मूर्ति स्थापना के बाद सुंदर काण्ड का की सुंदर प्रस्तुति निलेश खड़गड़े वा ग्रुप के द्वारा की गई ।  कार्यक्रम में विद्यालय के राजेश नागले, प्रवीण दिघडे, सुनील करारे, अभीकेश सातनकार, श्रीमती ममता पवार, श्रीमती आशा विश्वकर्मा, श्रीमती हीरा कापसे, श्रीमती दुर्गा देशमुख, श्रीमती पायल सातनकार, कुमारी प्रिय झारबड़े, कुमारी खुशबू साहू,  कुमारी तेजस्विनी मथनकर, कुमारी डॉली साहू, कुमारी पूजा हरोड़े, कुमारी करुणा चौकीकर, कुमारी कंचन चौकीकर, कुमारी प्रज्ञा मकोड़े, कुमारी शारदा झरबडे, श्रीमती अनिता डोंगरे, श्रीमती रश्मि देशमुख, श्रीमती प्रियंका ठाकुर, कुमारी सोनल सिंह, कुमारी शिखा यादव, श्रीमती बनायित, श्रीमती तयवाड़े,  श्रीमती सोनाली खातरकर, श्रीमती प्रियंका बेडरे आदि उपस्थित थे ।

भागवत कथा जीवन के उद्देश्य और दिशा को दर्शाती है:देवी सत्यार्चा जी

Bhagwat Katha shows the purpose and direction of life: Devi Satyarcha Ji हरिप्रसाद गोहे  आमला। हारोडे परिवार द्वारा सिटी मैरिज लान आमला में भागवत कथा का आयोजन 18 मई से 25 मई तक किया जा रहा है। आयोजन के मुख्य जजमान धर्मराज हारोडे तथा हारोडे परिवार के धनराज हारोड़े,धर्मराज हारोडे,युवराज हारोडे,बलराज हारोडे,प्रमोद हारोडे है।आयोजित भागवत कथा में राष्ट्रीय कथा वाचिका  देवी सत्यार्चा जी के मुखार बिंद से कथा की रसधार प्रवाह मान है। श्रीमद् भागवत कथा में राष्ट्रीय कथावाचिका देवी सत्यार्चा जी ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। देवी सत्यार्चा जी ने कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह चेदिनरेश राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुक्मी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुक्मी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया आयोजन करता परिवार  जयेश, विनोद,हारोडे,स्वराज,कर्मराज , आदित्य, क्रिस,सक्षम,पिपराज सभी भक्तजनों कथा श्रवण करने आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत कर धन्य अनुभव कर रहे है।  

गंगोत्री में जाम में फंसे मप्र के तीन श्रद्धालुओं की मौत, सीएम ने जताया दुख, सहायता राशि का एलान

Death of three devotees of Madhya Pradesh stuck in traffic jam in Gangotri, CM expressed grief, announced assistance amount प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा में फंसे श्रद्धालुओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यात्रा में फंसे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए हेल्प लाइन नंबर 011-26772005, 0755-2708055 एवं 0755-2708059 पर संपर्क कर सकते हैं। मध्य प्रदेश से चारधाम यात्रा पर गए तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख सहायता राशि की घोषणा की है। वहीं, उत्तराखंड में फंसे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। उत्तराखंड में मृत तीनों श्रद्धालु अलग-अलग शहर इंदौर, सागर और नीमच के रहने वाले थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन श्रद्धालुओं की मौत पर दु:ख जताया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की है। हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चार धाम यात्रा पर गए मध्य प्रदेश के तीन श्रद्धालुओं के जाम में फंसने से हुए असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं की शांति एवं परिजनों को यह गहन दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। इन यात्रियों की हुई मौतसागर के रहने वाले 71 वर्षीय राम गोपाल, नीमच की 62 वर्षीय संपत्ति बाई और इंदौर के 39 वर्षीय रामप्रसाद की मौत हुई है। राम गोपाल और संपत्ति बाई की मौत 10 मई और रामप्रसाद की मौत 14 मई को हुई। अधिकारियों ने अनुसार तीनों की मौत यमुनौत्री धाम की यात्रा के दौरान हुई है। मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया है। इन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्कप्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा में फंसे श्रद्धालुओं के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यात्रा में फंसे प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए हेल्प लाइन नंबर 011-26772005, 0755-2708055 एवं 0755-2708059 जारी किया गया है। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर सहायता के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। भीड़ बढ़ने से सरकारी इंतजाम फेलउत्तराखंड में यमुनोत्री धाम की यात्रा अक्षय तृतीया से शुरू हो गई है। यमुनोत्री धाम की कठिन पैदल यात्रा के दौरान कई बार ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण तीर्थ यात्रियों की तबीयत बिगड़ जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को पहाड़ी यात्रा को रुक रुक कर पूरा करने की सलाह दी जाती है। वहीं, इसके अलावा सैकड़ों यात्री गंगोत्री-यमुनोत्री धामों पर बिना रजिस्ट्रेशन के पहुंचने के कारण फंस गए हैं। इसके चलते सरकार की व्यवस्था चरमरा गई है। लोग जाम में फंसने के कारण भी परेशान हो रहे हैं।

जानिए बजरंगबली ने क्यों अपना हृदय चीरा और कैसे पड़ा हनुमान नाम ?

Know why Bajrangbali tore his heart and how he got the name Hanuman? देशभर में आज बड़े ही धूम-धाम के साथ भगवान हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में भारी भीड़ है। उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के बाद महाकाल का हनुमान जी के स्वरूप में श्रृंगार किया गया। भगवान शंकर से हनुमानजी को मिला वरदानहनुमान से शंकरजी के अवतार हैं और भोलेनाथ से हनुमान जी को वरदान मिला है कि हनुमान जी को किसी भी अस्त्र से नहीं मारा जा सकता। हनुमान जी क्यों रखते हैं अपने पास गदाहनुमान जी दुष्टों को संहार और भक्तों की समस्याओं का निदान गदा से करते हैं। हनुमान जी हाथ में हमेशा गदा होती है। क्या आपको ये मालूम है हनुमान जी को गदा कैसे प्राप्त हुई है। दरअसल बजरंगबली को गदा कुबेर देव मिली थी और साथ में ये भी आशीर्वाद दिया कि हनुमान को कभी भी किसी युद्ध में परास्त नहीं किया जा सकता है। भगवान हनुमान को यमराज से मिला वरदानभूत पिशाच निकट नहि आवै, महावीर जब नाम सुनावै…भगवान हनुमान का नाम लेते ही सभी तरह की नकारात्मक शक्तियां फौरन ही भाग जाती हैं। धर्मराज यमराज से भी हनुमान जी को वरदान मिला हुआ है, उन्हें कभी भी यमराज का शिकार नहीं होने का वरदान प्राप्त है। सूर्यदेव से मिला हनुमान जी को तेजधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान को अमरता का वरदान मिला है। हनुमानजी कलयुग में साक्षात और जाग्रत देवता हैं। यह भक्तों की पूजा से जल्दी प्रसन्न होकर हर तरह की मनोकामनाओं का पूरा करते हैं। हनुमान जी भगवान शिव के ग्याहरवें अवतार हैं और उन्हें कई तरह की शक्तियां मिली है। मान्यता है कि सूर्यदेव से हनुमान जी को तेज प्राप्त है। सूर्य देव ने उन्हें अपने तेज का सौवां अंश दिया है इसी कारण हनुमान जी के सामने कोई नहीं टिक पाता। जब हनुमानजी ने अपना सीना चीर दिया…हनुमानजी आज भी इस धरती पर विचरण करते हैं। हनुमान जी कलयुग के देवता हैं। कलयुग में हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होती है। नकारात्मक ऊर्जा एवं बुरी शक्तियां हनुमानजी की आराधना करने से भाग जाती हैं। हनुमानजी ने भगवान राम के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दुनिया उन्हें प्रभु राम का सबसे बड़ा भक्त मानती है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद दरबार में उपस्थित सभी लोगों को उपहार दिए जा रहे थे। इसी दौरान माता सीता ने रत्न जड़ित एक बेश कीमती माला अपने प्रिय हनुमान को दी। प्रसन्न चित्त से उस माला को लेकर हनुमान जी थोड़ी दूरी पर गए और उसे अपने दांतों से तोड़ते हुए बड़ी गौर से माला के मोती को देखने लगे। उसके बाद उदास होकर एक-एक कर उन्होंने सारे मोती तोड़-तोड़ कर फेंक दिए। यह सब दरबार में उपस्थित लोगों ने देखा तो सब के सब आश्चर्य में पड़ गए। जब हनुमान जी मोती तो तोड़ कर फेंक रहे थे तब लक्ष्मणजी को उनके इस कार्य पर बहुत क्रोध आया,इस बात को उन्होंने श्री राम का अपमान समझा। उन्होंने प्रभु राम से कहा कि ‘हे भगवन, हनुमान को माता सीता ने बेशकीमती रत्नों और मनकों की माला दी और इन्होंने उस माला को तोड़कर फेंक दिया। जिसके बाद भगवान राम बोले, ‘हे अनुज तुम मुझे मेरे जीवन से भी अधिक प्रिय हो, जिस कारण से हनुमान ने उन रत्नों को तोड़ा है यह उन्हें ही मालूम है। इसलिए इस जिज्ञासा का उत्तर हनुमान से ही मिलेगा। तब राम भक्त हनुमान ने कहा ‘मेरे लिए हर वो वस्तु व्यर्थ है जिसमें मेरे प्रभु राम का नाम ना हो। मैंने यह हार अमूल्य समझ कर लिया था, लेकिन जब मैंने इसे देखा तो पाया कि इसमें कहीं भी राम-नाम नहीं है। उन्होंने कहा मेरी समझ से कोई भी वस्तु श्री राम के नाम के बिना अमूल्य हो ही नहीं सकती। अतः मेरे हिसाब से उसे त्याग देना चाहिए। यह बात सुनकर भ्राता लक्ष्मण बोले कि आपके शरीर पर भी तो राम का नाम नहीं है तो इस शरीर को क्यों रखा है? हनुमान तुम इस शरीर को भी त्याग दो। लक्ष्मण की बात सुनकर हनुमान ने अपना वक्षस्थल नाखूनों से चीर दिया और उसे लक्ष्मणजी सहित सभी को दिखाया, जिसमें श्रीराम और माता सीता की सुंदर छवि दिखाई दे रही थी। यह घटना देख कर लक्ष्मण जी से आश्चर्यचकित रह गए,और अपनी गलती के लिए उन्होंने हनुमानजी से क्षमा मांगी । आज यानी 23 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन हनुमान जन्मोत्सव पर भगवान हनुमान की विशेष रूप से पूजा आराधना की जाती है। ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी के बचपन का नाम मारुति था। उन्हें उनके पिता पवन देव और माता अंजनी के पुत्र के रूप में जाना जाता है। एक दिन पवन पुत्र अपनी निद्रा से जागे तो उन्हें तीव्र भूख लगी। उन्होंने पास के एक वृक्ष पर लाल पका फल देखा, जिसे खाने के लिए वे निकल पड़े। दरअसल मारुती जिसे लाल पका फल समझ रहे थे वे सूर्यदेव थे। उस दिन अमावस्या का दिन था और राहु सूर्य पर ग्रहण लगाने वाला था, लेकिन जब तक सूर्य को ग्रहण लग पाता, उससे पहले ही हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया। सारे संसार में अन्धकार व्याप्त हो गया। मनुष्य से लेकर सभी देवता तक बड़े व्याकुल हो गए और हनुमानजी को मनाने के लिए आ गए लेकिन, मारुति हठ करके बैठ गए। सभी देवताओं ने देवराज इंद्र से सहायता मांगी। इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर जब हनुमान जी ने सूर्यदेव को मुक्त नहीं किया तो, इंद्र ने विवश होकर अपने वज्र से मारुति के हनु यानी ठोड़ी पर प्रहार किया, जिससे सूर्यदेव मुक्त हुए। वहीं वज्र के प्रहार से पवन पुत्र मूर्छित होकर पृथ्वी पर आ गिरे और उनकी ठुड्डी टेढ़ी हो गई। जब पवन देवता को इस बात की जानकारी हुई तो वे बहुत क्रोधित हुए। उन्होंने अपनी शक्ति से पूरे संसार में वायु के प्रवाह को रोक दिया, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर जीवों में त्राहि-त्राहि मच उठी। इस विनाश को रोकने के लिए सारे देवगण पवनदेव से आग्रह करने पहुंचे कि वे अपने क्रोध को त्याग पृथ्वी पर प्राणवायु का प्रवाह करें। सभी देवताओं … Read more

मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में रामनवमी पर हुआ सीताराम कीर्तन का समापन

Sitaram Kirtan concludes on Ramnavmi in Manokamna Nath Nageshwar Shiv Temple हरिप्रसाद गोहे आमला ! रामनवमी के पावन अवसर पर हवाई पट्टी स्थित मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में नौ दिवसीय सीताराम कीर्तन का समापन हुआ।श्री श्री 1008 महंत रघुवरदास जी महाराज चतुर्भुजी भगवान का मंदिर विद्याकुण्ड अयोध्या निवासी के मार्गदर्शन में आयोजित सीताराम कीर्तन को 40 वर्ष पूर्ण हुए । पूर्णाहुति महंत श्री विशंभरदास जी महाराज निवासी अयोध्या के मुखरबिंद से संपन्न हुई ।साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद गृहण किया। लक्ष्मण चौकीकर ने बताया कि 9.4.2024 से प्रारंभ होकर 17.4. 24 रामनवमी पर सीताराम कीर्तन संपन्न हुआ । प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र पर शिव मंदिर में नौ दिनों तक सीताराम कीर्तन का आयोजन होता है, उमराव चौकीकर भगत जी के रामायण मंडल द्वारा पिछले 40 वर्षो से रामनवमी के अवसर पर कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे ने अपनी धर्मपत्नी मंजू पंडाग्रे के साथ शिव मंदिर पहुंचकर प्रसाद गृहण किया और आशीर्वाद लिया । इस अवसर पर बोड़खी,आमला, सारणी, बैतूल, देवगांव, छावल, खापा, बोरी, रतेड़ा, जमदेही, नांदीखेड़ा, धौसरा, खिड़की,भारत भारती, जामठी, आवरियां, अंधारिया, अंबाडा, पंखा, बेलमंडई सहित विभिन्न ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भंडारे में प्रसाद गृहण किया ।

मां वैष्णवी धाम तिरनघाट में देवी भागवत महापुराण का हो रहा आयोजन 

Devi Bhagwat Mahapuran is being organized at Maa Vaishno Dham Kiran Ghat. हरिप्रसाद गोहे  आमला । चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर शहर सहित अंचल के विभिन्न देवीधामो में नवरात्रि की धूम है । अयोजन को लेकर सभी देवीधामों में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन आयोजित किए जा रहे है। इधर ब्लाक मुख्यालय से सटे ग्राम बरंगवाडी स्थित मां वैष्णवी देवीधाम तिरनघाट में दिनांक  09 अप्रैल 2024 से संगीतमय श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन बाबा बारंगदेव की तपोधरा में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित किया जा रहा हे । जहां देवी भागवत कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त जन पहुंच रहे हे। प्राप्त जानकारी अनुसार संगीतमय देवी भागवत महा पुराण का वाचन स्थानीय कथा वाचक व्यास महेश महाराज के मुखारबिंद से श्रवण कराया जा रहा हैं । क्था का आयोजन तिरंनघाट परिवार एवं समस्त क्षेत्रवासी के सौजन्य से किया जा रहा है। क्षेत्र के गणमान्य नागरिक महेश साहू, किशोरी राठौर, दादा शिवपाल सिंह ठाकुर, दिलीप सागरे, अभिमन्यु सोनपुरे ने क्षेत्र की धर्मप्रेमी जनता से बुधवार दिनांक 17/4/2024 को भागवत कथा समापन अवसर, पर आयोजित विशाल भंडारे एवं डंडार प्रतियोगिता में पहुंच कार्यक्रम को सफल बनाने अपील की है। मंगलवार कथा समाप्ति उपरांत आरती में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे थे ।

चैत्र नवरात्र के अवसर पर सीताराम कीर्तन का शुभारंभ हुआ ,कीर्तन का ये 40 वाँ वर्ष है

Sitaram Kirtan was started on the occasion of Chaitra Navratri This is the 40th year of Kirtan हरिप्रसाद गोहे आमला । चैत्र नवरात्र के अवसर पर हवाई पट्टी स्थित मनोकामना नाथ नागेश्वर शिव मंदिर में आज सीताराम सीताराम कीर्तन का शुभारंभ हुआ । शिव मंदिर में प्रतिवर्ष चैत्र नवरात्र के अवसर पर नौ दिवसीय सीताराम कीर्तन आयोजित किया जाता है । कीर्तन 9 अप्रैल से आरंभ होकर 17 अप्रैल रामनवमी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा । सीताराम कीर्तन में आमला बोड़खी के रामायण मंडल एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भजन मंडल और महिला मंडल सम्मिलित होते है ।  मंदिर समिति के लक्ष्मण चौकीकर ने बताया कि कीर्तन का ये 40 वांँ वर्ष है । विगत 39 वर्षो से प्रतिवर्ष उमराव चौकीकर भगत जी के रामायण मंडल द्वारा चैत्र नवरात्र रामनवमी के अवसर पर अखंड सीताराम कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है । मंदिर समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओ से कीर्तन में सम्मिलित होने का आगृह किया  है।

गौ-शालाओं को मिलने वाली राशि में होगा इजाफा ,सीएम मोहन यादव

The amount received by cow shelters will increase, CM Mohan Yadav announces सीएम मोहन यादव ने कहा कि गायों के लिए गौ-शालाओं को प्रति गाय की राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रदान की जायेगी। इसके अलावा अधूरी गौ-शालाओं का निर्माण पूर्ण किया जायेगा। भारतीय नव वर्ष अर्थात इस चैत्र माह से अगले वर्ष तक वह गौ- वंश रक्षा वर्ष मनाया जाएगा। चरनोई की भूमि से अतिक्रमण हटाए जाएंगे। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में गौ-माता और गौ-वंश के संरक्षण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। गौ-शालाओं के बेहतर संचालन के लिए उन्हें दी जा रही राशि में वृद्धि की जाएगी। साथ ही प्रदेश में चरनोई की भूमि पर अतिक्रमण हटाने, प्रति 50 किलोमीटर पर सड़कों पर दुर्घटना का शिकार हुई गायों को इलाज के लिए भिजवाने और सड़कों पर बैठने वाले पशुधन को बैठने से रोकने या अन्य स्थानांतरित करने के लिये आधुनिक उपकरणों की सहायता ली जायेगी। उपकरणों पर मिलेगा अनुदानसीएम ने आगे कहा कि गायों के लिए चारा काटने के उपकरणों पर अनुदान की व्यवस्था की जायेगी। पंचायतों को आवश्यक सहयोग और प्रेरणा मिले, इसके लिए गौ-संवर्धन बोर्ड प्रयास करेगा। गायों के लिए गौ-शालाओं को प्रति गाय की राशि 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रदान की जायेगी। अधूरी गौ-शालाओं का निर्माण पूर्ण किया जायेगा। नई गौ-शालाएं भी बनेंगी। बता दें कि मुख्यमंत्री कुशाभाऊ ठाकरे सभागृह में “गौ-रक्षा संवाद” के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। प्रमुख घोषणाएं मेरे परिवार में भी गाय पालने की परंपराउन्होंने ये भी कहा कि गौ-पालक ही गाय का महत्व समझता है। हमारे देश में गाय पालना, गौ-शाला चलाना पवित्र कार्य है। गौ-शाला संचालन से ज्यादा बेहतर काम यह है कि घर में ही गौ-पालन किया जाये। यदि पर्याप्त जगह है, तो गाय अवश्य पालें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके परिवार में भी गाय पालने की पुरानी परंपरा है। आज भी वयोवृद्ध पिता, बूढ़ी गायों की सेवा करते हैं। गाय को मां स्वरूप मानते हैं। गौ-पालक परिवार यदि गाय के दूध का उपयोग करता है, तो सेवा में भी पीछे नहीं रहना चाहिये। इस अवसर पर अखिलेश्वरानंद गिरि, गोपालानंद सरस्वती जी महाराज, पूर्व सांसद मेघराज जैन, प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, संचालक पशुपालन एवं प्रबंध संचालक म.प्र.गौ संवर्धन बोर्ड एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉको गुजरात से आए पूर्व सांसद एवं चेयरमैन राष्ट्रीय कामधेनु आयोग श्री वल्लभ भाई कठेरिया ने अपनी पुस्तक “कल्याण गौ-सेवा अंक” भेंट की। पंचायत एवं ग्रामीण विकास, श्रम मंत्री श्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि वे स्वयं गौ-पालक हैं। इसलिये इस कार्यशाला से उनका विशेष जुड़ाव है। आज यहां इस क्षेत्र के अनेक जानकारों और विशेषज्ञों के विचार एवं सुझाव जानने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने गौ-पालन से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर कैबिनेट के संकल्प को पूरा किया है। कार्यशाला में प्राप्त अनुशंसाएं उपयोगी हैं। इनसे संबंधित आवश्यक निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लिये हैं। निश्चित ही मध्यप्रदेश की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।

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