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इंदौर में जोरदार बारिश से राहत, अगले चार दिन में क्या होगा मौसम का हाल

इंदौर इंदौर में बुधवार से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला गुरुवार तक चलता रहा। गुरुवार को सुबह से बारिश शुरू हुई और लगातार रुक-रुककर होती रही। तेज ठंडी हवाओं ने मौसम पूरी तरह बदल दिया और गर्मी और उमस पूरी तरह से गायब हो गई। इससे पहले बुधवार को दोपहर बाद बादल छाए और शाम को कई क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई। इससे कुछ समय के लिए गर्मी से राहत मिली, लेकिन बाद में उमस का असर तेज हो गया था। पिछले 24 घंटों में इंदौर का अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जो सामान्य से 4 डिग्री कम था। इस दौरान तापमान में 1 डिग्री की गिरावट आई है। मौसम वैज्ञानिकों ने अब लगातार बारिश की संभावना जताई है। जून के तीसरे हफ्ते में बढ़ेगी बारिश जून का तीसरा हफ्ता चल रहा है, और इस महीने इंदौर की औसत बारिश 5 इंच रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आगामी 12 दिनों में अच्छी बारिश की संभावना है। गुरुवार को इंदौर, उज्जैन और पूरे मध्य प्रदेश में आंधी-बारिश की संभावना जताई जा रही है। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, दो लो प्रेशर एरिया और तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय हैं, जिसके कारण अगले 4 दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान कहीं अति भारी तो कहीं भारी बारिश हो सकती है, और 24 घंटों में ढाई से 8 इंच तक पानी गिर सकता है। इससे शहरवासियों को गर्मी व उमस से राहत मिलेगी। एयरपोर्ट स्थित वेदर स्टेशन पर बुधवार रात 8.30 बजे तक तीन मिमी वर्षा दर्ज हुई। रीगल स्थित मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वेदर स्टेशन पर 8.50 मिमी वर्षा दर्ज हुई।भोपाल स्थित मौसम केंद्र के विज्ञानियों के मुताबिक वर्तमान में एक कम दबाव का क्षेत्र मध्य राजस्थान पर बना हुआ है। शहर में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी वहीं एक द्रोणिका पंजाब होते हुए उत्तरी गुजरात तक जा रही है। इसके अलावा मध्य उत्तर प्रदेश पर एक ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। इसके प्रभाव से इंदौर में आगामी दिनों में बारिश की गतिविधियों में निरंतरता दिखाई देगी। इंदौर में अगले दो दिन 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से हवाएं चलेंगी। वही गरज-चमक के साथ बारिश होगी। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री कम था। वहीं न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य था। दो वेदर सिस्टम एक्टिव मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला के अनुसार प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर बने वेदर सिस्टम की वजह से कई जिलों में अच्छी बारिश हो सकती है। 25-26 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के आसार है। इस कारण रुक-रुककर बारिश का यह सिलसिला अभी जारी रहेगा। मानसून का एक दिन देर से आगमन इस बार मानसून देश में तय समय से 8 दिन पहले ही पहुंच चुका था। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मानसून तय समय से पहले ही आया था, जिसके कारण यह अनुमान था कि मध्य प्रदेश में मानसून जून के पहले हफ्ते में आ जाएगा। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ, और मानसून पिछले 15 दिनों से महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में ही ठहरा हुआ था। 13-14 जून को मानसून ने आगे बढ़कर मध्य प्रदेश में प्रवेश किया, लेकिन यह प्रदेश में एक दिन लेट हो गया। गुजरात में बने सिस्टम से तेज बारिश की संभावना तीन दिन के भीतर ही मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून होती है, जबकि पिछले साल यह 21 जून को आया था। अब गुजरात में बना सिस्टम मध्य प्रदेश में सक्रिय होगा, जिसमें एक-दो दिन का समय लगेगा। इस दौरान प्रदेश में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा। 

आने वाले समय में अंग्रेजी बोलने में आएगी शर्म ‘, भाषा विवाद के बीच अमित शाह बोले- अब बदलाव का समय

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत में लोग अंग्रेजी बोलने पर शर्मिंदगी महसूस करेंगे. उन्होंने भारतीय भाषाओं को देश की संस्कृति के रत्न बताते हुए कहा कि ये भाषाएं हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं और इनके बिना हम भारतीय नहीं कहला सकते. दिल्ली में पूर्व सिविल सेवक आईएएस आशुतोष अग्निहोत्री द्वारा लिखी किताब के विमोचन के मौके पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा, ‘मेरी बात ध्यान से सुनिए और याद रखिए, इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी, ऐसे समाज का निर्माण अब दूर नहीं है. चीजों को वो ही कर पाते हैं जो एक बार अपने मन में ठान लेते हैं और मैं मानता हूं कि हमारे देश की भाषाएं, हमारा गहना है. इनके बिना हम भारतीय नहीं हैं. आप किसी विदेशी भाषा में अपने इतिहास, संस्कृति और धर्म को नहीं समझ सकते.’ देश को समझने के लिए विदेशी भाषा पर्याप्त नहीं शाह ने कहा कि इस देश में अंग्रेजी बोलने वालों को जल्द ही शर्म आएगी। ऐसे समाज का निर्माण दूर नहीं है, केवल दृढ़ निश्चयी लोग ही बदलाव ला सकते हैं। मेरा मानना है कि हमारे देश की भाषाएं हमारी संस्कृति के रत्न हैं। अपनी भाषाओं के बिना हम सच्चे भारतीय नहीं हैं। अपने देश, अपनी संस्कृति, अपने इतिहास और अपने धर्म को समझने के लिए कोई भी विदेशी भाषा पर्याप्त नहीं हो सकती है।  प्रधानमंत्री के पंच प्रण उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के पंच प्रण कै जिक्र किया। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना, गुलामी की हर सोच से मुक्ति पाना, विरासत पर गर्व करना, एकता और एकजुटता, प्रत्येक नागरिक में कर्तव्य की भावना जगना। उन्होंने कहा कि ये पांच प्रतिज्ञाएं देश के नागरिकों का संकल्प बन गई हैं। 2047 के विकसित भारत की यात्रा में हमारी भाषाएं प्रमुख भूमिका निभाएंगी।  प्रशासनिक प्रशिक्षण मॉडल में सहानुभूति को करना होगा शामिल  गृह मंत्री पूर्व आईएएस आशुतोष अग्निहोत्री की लिखी गई पुस्तक मैं बूंद स्वयं, खुद सागर हूं, के विमोचन में गुरुवार को शामिल हुए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण मॉडल में सहानुभूति लाने पर जोर दिया। शाह ने कहा कि यह मॉडल ब्रिटिश काल से प्रेरित है, इसलिए यहां सहानुभूति की कोई जगह नहीं है। मेरा मानना है कि कोई शासक अगर सहानुभूति के बिना शासन करता है, तो वह अपने वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकता है।  प्रशिक्षण में बदलाव की जरुरत शाह ने प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में बदलाव की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को प्रशासन में अधिक महत्व देना चाहिए ताकि देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिले। इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। कुछ लोगों ने इसे भारतीय भाषाओं के प्रति गर्व का प्रतीक बताया, जबकि कुछ ने इसे भाषाई विवाद के रूप में देखा। विवादों में बयान यह बयान कुछ हलकों में विवादास्पद भी हो सकता है, क्योंकि अंग्रेजी देश में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली भाषा है, खासकर शहरी क्षेत्रों और पेशेवर माहौल में। इस बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पर बहस की संभावना है। उन्होंने आगे कहा कि अधूरी विदेशी भाषाओं के साथ संपूर्ण भारत की कल्पना नहीं की जा सकती. मैं इस बात से पूरी तरह वाकिफ हूं कि लड़ाई कितनी कठिन है. मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय समाज इस लड़ाई को जीतेगा और अपनी भाषाओं पर गर्व करते हुए हम अपने देश को चलाएंगे, विचार करेंगे, शोध करेंगे, निर्णय लेंगे और दुनिया पर शासन करेंगे. इसमें किसी को संदेह करने की कोई जरूरत नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि 2047 में दुनिया में शीर्ष पर रहने में हमारी भाषाओं का बहुत बड़ा योगदान होगा.  

दीपावली से लाड़ली बहनों को मोहन सरकार देगी 1500, साल 2028 तक तीन हजार कर देंगे

इंदौर   मध्य प्रदेश के बड़वानी में आज सिकल सेल एनिमिया दिवस के मौके पर कार्यक्रम चल रहा है। पहले इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी शामिल होने वाली थीं, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते उनका शेड्यूल कैंसिल हो गया। वहीं, खराब मौसम के चलते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़वानी नहीं पहुंच सके, पर उन्होंने इंदौर से वर्चुअली जुड़कर आयोजन को संबोधित किया। यहां पत्रकारों से चर्चा के दौरान सीएम मोहन ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लाडली बहना योजना की राशि बढ़ाने पर उठाए सवालों पर खासा हमला किया। यही नहीं, सीएम ने उन्होंने राशि बढ़ाए जाने के समय की भी घोषमा कर दी। 2028 तक 3000 रुपए कर देंगे उन्होंने कहा कि साल 2028 तक इसे 3000 रुपए कर दिया जाएगा। सीएम ने कांग्रेस नेताओं पर भी निशाना साधा और कहा कि बीजेपी सरकार जवाबदेही से काम करती है। उन्होंने कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी के मामले में कहा कि कानून तोड़ने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। कांग्रेसी नेता सभी जमानत पर चल रहे सीएम यादव ने कहा कि बीजेपी की सरकार जवाबदेही से चलती है। अय्याशी कांग्रेस करती है और यह उनका रिकॉर्ड है कि सभी नेता जमानत पर चल रहे हैं। बीजेपी सरकार जनता के लिए काम करती है। वहीं कांग्रेसी पार्षद अनवर कादरी उर्फ डकैत के लव जिहाद के लिए फंडिंग के मामले में फरारी पर सीएम ने कहा कि हमारी सरकार में कानून का राज चलता है, कानून तोड़ने वालों से निपटना जानते हैं, चाहे वह डकैत हो या डकैत का बाप हो। हमने प्रशासन से भी कहा है जो जहां मिले उसे पकड़ो, हर हाल में कानून का शासन रहेगा। बता दें कि सीएम अचानक कार से भोपाल से इंदौर पहुंचे थे। दरअसल उन्हें बड़वानी कार्यक्रम में जाना था लेकिन मौसम के चलते वह इंदौर आए और यहां वर्चुअली पर शामिल हुए। सीएम के साथ महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक महेंद्र हार्डिया, पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता, चिंटू वर्मा व अन्य नेता थे। साथ ही प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सीएम ने पटवारी को दी नसीहत- मर्यादा से राजनीति करें सीएम ने कहा कि कांग्रेस के लोग कहते हैं कि लाड़ली बहना योजना की राशि बढ़ाओ नहीं तो चोरी होगी, इन्हें पाप लगेगा। यह तो डाके डालते थे, कभी चिंता नहीं की, कांग्रेसी सरला मिश्रा कांड भूल गए। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी पर हमला बोलते हुए सीएम ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को शर्म आना चाहिए, उन्होंने जिस भाषा से बात की, उन्हें जवाब देना चाहता हूं, राजनीति करना है तो मर्यादा से करना चाहिए। हमने डंके की चोट पर कहा कि लाड़ली बहना को तीन हजार देंगे।  हमारी सरकार के समय दो हजार दाम बढ़े गेंहू के सीएम ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने किसान सम्मान निधि से लेकर किसानों को बिजली देना, सोलर उर्जा जैस कई प्रयास किए। हमारी सरकार ने औद्योगीकरण विकास दर 25 फीसदी कर किया है, खासकर फूड प्रोसेसिंग ध्यान दिया, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम मिले।  गेंहू पर हमने एमएसपी के साथ बोनस देकर सबसे ज्यादा दाम 2600 रुपए प्रति क्विटंल दिए हैं। कांग्रेस के कार्यकाल में 55 साल सरकार रही। साल 1956 में 94 रुपए प्रति क्विंटल गेंहू था जब दिग्विजय सिंह की सरकार गई तब 550 का दाम था, 55 साल में केवल 500 रुपए दाम बढ़ाए। वही हमारी 20 साल की सरकार ने दो हजार रुपए प्रति क्विंटल गेंहू के दाम बढ़ाए हैं। किसानों पर कुछ नहीं बोलती कांग्रेस- सीएम सीएम ने आगे कहा कि, कांग्रेस ने किसानों के लिए भी कुछ नहीं कहा कि हमारी सरकार ने किसानों के गेहूं को देश में सबसे ज्यादा एमएसपी राशि 2500 रुपये क्विंटल में खरीदा। कांग्रेस की सरकार में वर्ष 1956 में 94 रुपये गेहूं के दाम क्विटंल थे, जब दिग्विजय सिंह की सरकार थी तो साढ़े पांच सौ रुपएं क्विंटल पर सरकारी खरीदी होती थी। 55 वर्षों में सिर्फ 500 रुपए क्विंटल दाम बढ़े। भाजपा की सरकार में 20 वर्षों में दो हजार रुपये क्विंटल भाव बढ़ाए है। किसानों को लाभ देने का प्रयास उन्होंने कहा कि अटल बिहारी जन्म शताब्दी वर्ष पर हमारी सरकार कई काम करेगी। आठ घंटे से ज्यादा बिजली किसानों को खेतों में दी जा रही है। हम फूड इंडस्ट्री पर भी ध्यान दे रहे है, ताकि किसानों को भी इसका लाभ मिल सके। हम वादे पर हैं कायम सीएम मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार लाडली बहना योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए देने के अपने वादे पर कायम है। उन्होंने कहा कि बीजेपी जो कहती है, वो करती है। पांच साल में पूरा करेंगे संकल्प पत्र मोहन यादव ने कहा कि सरकार अपने संकल्प पत्र को 5 साल में पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना के तहत राशि को हर साल बढ़ाया जाएगा। दिवाली पर यह राशि 1500 रुपए होगी। इसके बाद 2026, 2027 और 2028 में भी राशि बढ़ाई जाएगी। कांग्रेस नेता जमानत पर बाहर सीएम ने कांग्रेस नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि वे सभी जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है, जबकि कांग्रेस अय्याशी करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का रिकॉर्ड खराब है और उनके सभी नेता जमानत पर चल रहे हैं। बीजेपी सरकार हमेशा जनता के लिए काम करती है।  

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन देशों की यात्रा की पूरी, दिल्ली लौटे

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की पांच दिवसीय यात्रा से गुरुवार को दिल्ली वापस लौट आए. पीएम मोदी बुधवार को अपनी यात्रा पूरी कर क्रोएशिया से भारत के लिए रवाना हुए. इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले साइप्रस पहुंचे. उसके बाद पीएम मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए कनाडा पहुंचे, आखिर में पीएम मोदी ने क्रोएशिया की यात्रा की. पीएम मोदी की तीनों देशों का यात्रा सफल रही. पीएम पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने क्रोएशिया की राजकीय यात्रा की. पीएम मोदी ने अपनी इस यात्रा को खास बनाने के लिए क्रोएशिया और साइप्रस के राष्ट्राध्यक्षों को गिफ्ट भी दिए. ये उपहार भारतीय सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प के थे. पीएम मोदी ने किसे क्या दिया गिफ्ट प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव में क्रोएशिया पहुंचे थे. जहां पीएम मोदी ने क्रोएशिया के राष्ट्रपति को ओडिशा की पट्टचित्र पेंटिंग तोहफे में दी. जबकि पीएम मोदी ने क्रोएशिया के प्रधानमंत्री को राजस्थान की सिल्वर कैंडल स्टैंड भेंट की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तोहफों को उपहार में देकर भारतीय कला और संस्कृति को एक नई पहचान देने का काम किया. इसके साथ ही पीएम मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा में मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम पार्डो को एक वारली पेंटिंग भेंट की. बता दें कि ये वारली पेंटिंग महाराष्ट्र के वारली समुदाय की एक पारंपरिक आदिवासी कला है. जो भारतीय लोक कला के सबसे पुराने एवं सरल रूपों में से एक है. इसमें मिट्टी की दीवारों या पृष्ठभूमि पर सफेद चावल के पेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है. इस पेंटिंग में रोज़मर्रा की ज़िंदगी का नजारा देखने  को मिलता है. जिसमें खेती किसानी, मछली पकड़ना, नृत्य करना और गांव के उत्सव आदि शामिल होते हैं. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के तोहफे में दी मधुबनी पेंटिंग पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग को मधुबनी पेंटिंग भेंट की. बता दें कि मधुबनी पेंटिंग को मिथिला कला भी कहा जाता है. जो बिहार की प्रसिद्ध पारंपरिक कला है. जिसे ज़्यादातर महिलाओं बनातीहैं. इस रंगीन पेंटिंग को मुख्यरूप से त्योहारों और शादियों के मौके पर मिट्टी की दीवारों पर उकेरा जाता है. क्रोएशिया के राष्ट्रपति को गिफ्ट में दी पट्टचित्र पेंटिंगइसके साथ ही पीएम मोदी ने क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच को ओडिशा की एक पारंपरिक पट्टचित्र पेंटिंग तोहफे में दी.  जो ओडिशा की एक  पारंपरिक कला है. इस पेंटिंग को कपड़े पर बनाया जाता है. इसी लिए इसका नाम पट्टा यानी कपड़े से मिलकर बना है. ये पेंटिंग मुख्यरूप से भगवान कृष्ण और जगन्नाथ परंपरा से जुड़ी कहानियां को दर्शाती हैं. PM मोदी के 4 बड़े बयान…. 1. भारत और क्रोएशिया दोनों लोकतंत्र जैसे मूल्यों से जुड़े हैं प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोएशिया की पहली यात्रा पर गर्मजोशी से स्वागत के लिए वहां की सरकार और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविच का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत और क्रोएशिया लोकतंत्र, कानून और विविधता जैसे साझा मूल्यों से जुड़े हैं। 2. दोनों देशों के बीच डिफेंस, डिजिटल में साझेदारी बढ़ेगी दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को तीसरे कार्यकाल में तीन गुना गति से बढ़ाने का निर्णय लिया। रक्षा सहयोग योजना, व्यापार, फार्मा, कृषि, आईटी, डिजिटल व स्वच्छ तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाई जाएगी। 3. संस्कृति, शिक्षा और सहयोग को मजबूत किया जाएगा भारत-क्रोएशिया के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत किया जाएगा। हिंदी चेयर की टाइमलाइन 2030 तक बढ़ाई गई है, 5 साल का सांस्कृतिक कार्यक्रम तय हुआ है और लोगों की आवाजाही के लिए मोबिलिटी समझौता जल्द होगा। 4. भारत-क्रोएशिया साझेदारी को और मजबूत करेंगे PM मोदी ने कहा कि क्रोएशिया में भले ही यह यात्रा छोटी है, लेकिन मुझे आपके शहर की संस्कृति, जीवनशैली और यहां के लोगों की गर्मजोशी का अनुभव हुआ। यहां मुझे अपनेपन का एहसास हुआ। हमने बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जो भारत-क्रोएशिया साझेदारी को और मजबूत करेंगे और नए क्षेत्रों में मिलकर काम करने के रास्ते खोलेंगे। क्रोएशिया 1991 में बगावत कर अलग हुआ था क्रोएशिया ने 25 जून 1991 को आधिकारिक रूप से यूगोस्लाविया से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की। इससे पहले, यह देश सोशलिस्ट फेडरल रिपब्लिक ऑफ यूगोस्लाविया का हिस्सा था, जिसमें कुल छह गणराज्य शामिल थे। 1990 में क्रोएशिया में बहुदलीय चुनाव हुए और राष्ट्रवादी नेता फ्रांजो तुजमान की पार्टी सत्ता में आई। जून 1991 में संसद ने स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। यूगोस्लाव सरकार और वहां की सेना ने इसका विरोध किया, जिससे क्रोएशिया युद्ध शुरू हुआ। युद्ध करीब चार साल (1991-1995) तक चला, जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों बेघर हुए। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के दबाव और मध्यस्थता से शांति स्थापित हुई। क्रोएशिया को 15 जनवरी 1992 को यूरोपीय देशों द्वारा औपचारिक मान्यता मिली और बाद में संयुक्त राष्ट्र ने भी उसे सदस्यता दी। कनाडा-साइप्रस-क्रोएशिया में पीएम मोदी ने दिए खास तोहफे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया की यात्रा पूरी हो गई है। पीएम मोदी ने साइप्रस में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस से मुलाकात की। इसके बाद कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया। इसके बाद पीएम मोदी क्रोएशिया पहुंचे और वहां राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच और प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच से मुलाकात की। अपने दौरे पर पीएम मोदी देश के पारंपरिक उपहार लेकर गए थे। यात्रा के दौरान उन्होंने साइप्रस, कनाडा के जी-7 शिखर सम्मेलन और क्रोएशिया में जिन-जिन नेताओं से मुलाकात की, सभी को उपहार भेंट किए। आइए जानते हैं पीएम मोदी ने किस देश के नेता को कौन सा उपहार दिया और उसकी खासियत क्या है? क्रोएशिया के राष्ट्रपति को भेंट किया पट्टचित्र क्रोएशिया के राष्ट्रपति जोरान मिलनोविच को ओडिशा की एक पट्टचित्र पेंटिंग उपहार में दी। पट्टचित्र ओडिशा की पारंपरिक कला रूप है। यह कपड़े पर अपनी विस्तृत और रंगीन पेंटिंग के लिए जाना जाता है। इसका नाम पट्टा यानि कपड़ा और चित्र से आया है। ये कलाकृतियां आमतौर पर भारतीय पौराणिक कथाओं, खासकर भगवान कृष्ण और जगन्नाथ परंपरा से जुड़ी हैं। कलाकार बोल्ड लाइन और विस्तृत दृश्य बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों और हस्तनिर्मित ब्रश का उपयोग करते हैं। क्रोएशिया के प्रधानमंत्री को उपहार में दिया सिल्वर कैंडल स्टैंड प्रधानमंत्री मोदी ने क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेंकोविच को सिल्वर कैंडल स्टैंड उपहार में दिया। राजस्थान … Read more

UK की तरह एमपी में भी शुरू होगी हेलीकॉप्टर सेवा, सीएम मोहन यादव ने कर दिया ऐलान

 भोपाल  मध्यप्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को एक शानदार घोषणा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जल्द ही उत्तराखंड की तरह हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी, जिससे पर्यटकों को प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने में सुविधा होगी। यह अनोखी घोषणा ‘ग्रामीण रंग, पर्यटन संग’ राज्य स्तरीय उत्सव में की गई, जो कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में आयोजित हुआ। इस कदम से मध्यप्रदेश में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे और पर्यटकों को एक नई अनुभव की अनुभूति होगी। वेलनेस टूरिज्म और रेस्पॉसिबल टूरिज्म पर ज़ोर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन स्थलों पर अब वेलनेस सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह है कि पर्यटक मानसिक और शारीरिक विश्राम के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकें। इसी क्रम में रेस्पॉसिबल टूरिज्म मिशन  की नई वेबसाइट लॉन्च की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही उत्तराखंड की तर्ज पर राज्य पर्यटन बोर्ड के माध्यम से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी। प्रदेश सरकार ने पर्यटकों के लिए वेलनेस सुविधाएं बढ़ाने के लिए समिट की है। इससे प्रदेश का मेडिकल टूरिज्म बढ़ेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। इस दौरान ग्रामीण होम स्टे संचालकों, सरपंचों और 10 जिले के कलेक्टरों को बेहतर काम के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्राम स्तर पर पर्यटन गतिविधियों से युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक उन्नति के अवसर उपलब्ध होते हैं। पर्यटन गतिविधियां, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, तीज-त्योहार-पर्व और खानपान को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक होती है। आयोजन में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला शामिल हुए। ग्रामीण क्षेत्र में योग और ध्यान का प्रशिक्षण और छोटे वेलनेस सेंटर की स्थापना के लिए पर्यटन बोर्ड और दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट (पतंजलि) के बीच समझौता हुआ। 61 पर्यटक गांवों में सौर ऊर्जा चलित स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए सिग्निफाई इनोवेशंस इंडिया लिमिटेड के बीच करार हुआ है। इन कलेक्टरों को किया गया सम्मानित होम स्टे निर्माण में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने पर नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीणा, आगर-मालवा के राघवेंद्र सिंह, छतरपुर के पार्थ जायसवाल, छिंदवाड़ा के शीलेंद्र सिंह, रीवा की कलेक्टर प्रतिभा पाल, निवाड़ी के लोकेश कुमार जांगिड, मुरैना के अंकित अस्थाना, सीहोर के बालागुरु के, सीधी के एस सोमवंशी और पन्ना के कलेक्टर सुरेश कुमार को सम्मानित किया गया। होम स्टे का वर्चुअल लोकार्पण, बढ़ेगा रोजगार इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 241 होम स्टे का वर्चुअल लोकार्पण किया। इन होम स्टे को राज्य के 121 गांवों में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है। अब तक का होम स्टे विकास     कुल गांव – 121     चालू होम स्टे – 241     लाभार्थी जिले – 10     संभावित रोजगार – 500+ ग्रामीण युवा एलईडी और सोलर लाइट्स से रोशन होंगे 61 गांव इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और सिग्निफाइंग संस्था के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू साइन किया गया। इसके तहत 61 गांवों में एलईडी और सोलर लाइट्स लगाई जाएंगी, जिससे वहां के पर्यटन स्थलों की रोशनी बढ़ेगी और पर्यावरण के प्रति जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

सुदूर जनजातीय अंचल से निकलकर जिले की एक बेटी ने नीट की परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रचा

“दास्तां खुशियों की” भारिया जनजाति की बेटी शांति बनी प्रदेश का गौरव जिले में भारिया जनजाति की पहली छात्रा जिसने पाई नीट में सफलता  सुदूर जनजातीय अंचल से निकलकर जिले की एक बेटी ने नीट की परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रचा  भोपाल  मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के सुदूर जनजातीय अंचल से निकलकर जिले की एक बेटी ने नीट की परीक्षा उत्तीर्ण कर इतिहास रच दिया है। सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए कुमारी शांति पचलिया ने यह साबित कर दिया कि “अगर इरादा मजबूत हो, सपने सिर्फ देखे नहीं, पूरे भी किए जा सकते हैं।” विशेष पिछड़ी जनजाति भारिया से ताल्लुक रखने वाली छात्रा कु. शांति, छिंदवाड़ा जिले की पहली छात्रा बन गई हैं जिसने नीट की परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार, गाँव और समुदाय को गौरवान्वित किया है, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों को एक नई प्रेरणा भी दी है। शांति का जन्म 23 अप्रैल 2007 को विकासखण्ड हर्रई के ग्राम बालूसार में हुआ। उनके पिता श्री लिट्टी पचलिया कृषक हैं और माता श्रीमती लता पचलिया गृहिणी हैं। शांति ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई शासकीय विद्यालयों से की और वर्तमान में आदिवासी उत्कृष्ट छात्रावास हर्रई में निवास करती हैं। पढ़ाई के लिए उन्होंने रोजाना 4 से 5 घंटे तक कड़ी मेहनत की और नीट 2025 परीक्षा में सफल हुईं। आर्थिक और सामाजिक रूप से सीमित संसाधनों के बावजूद शांति का सपना था डॉक्टर बनकर अपने गाँव की सेवा करना। उनका कहना है कि मैं अपने गाँव को आगे बढ़ाना चाहती हूँ और सबकी मदद करना चाहती हूँ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा जनजातीय संवर्ग के विद्याथियों को उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिये नि:शुल्क शिक्षा के लिये बनाई गई शैक्षणिक योजनाओं की सहुलियतों ने शैक्षणिक क्रांति का बीजारोपण किया है। सरकार ने जुलाई 2024 से सभी शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में नीट और जेईई की तैयारी के लिए एक अतिरिक्त पीरियड की व्यवस्था शुरू करवाई। इसके साथ ही इंदौर की नामचीन कोचिंग संस्था की मदद से कार्यशालाएँ, निशुल्क नोट्स, हिंदी-अंग्रेजी में अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई गई। शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया, छात्रों की कठिनाइयों को समय-समय पर दूर किया गया। नीट 2025 परीक्षा में छिंदवाड़ा के लगभग 1400 विद्यार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 80 से ज्यादा विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की, इनमें से कई आदिवासी विकासखंडों के छात्र-छात्राएँ भी शामिल हैं। कलेक्टर श्री सिंह ने नीट 2025 में चयनित शांति सहित सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा है कि, “सरकारी स्कूलों के बच्चों में असीम क्षमता है, उन्हें सिर्फ दिशा, संसाधन और निरंतर प्रेरणा की ज़रूरत होती है। शांति जैसी बेटियाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और राज्य शासन के प्रयासों को सार्थक बना रही हैं।” 

सीहोर में कॉलेज छात्रा से रेप और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया

 सीहोर  सीहोर में एक गंभीर मामला सामने आया है। कॉलेज छात्रा ने दो भाइयों और एक मौलवी पर रेप और धर्मांतरण का आरोप लगाया है। छात्रा का कहना है कि दो भाइयों ने उसे शारीरिक शोषण का शिकार बनाया। इसके साथ ही उसे धर्म बदलने के लिए भी मजबूर किया। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच शुरू कर दी है। धमकाकर घर बुलाकर किया रेप पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह भोपाल के एक कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर की छात्रा है और सीहोर की निवासी है। 2022 में उसके घर के पास रहने वाले जुबैर मंसूरी ने उसे अपनी पसंदगी जताई। छात्रा ने मना किया, लेकिन जुबैर ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। धमकी देने के बाद, जुबैर ने मई 2022 में उसे अपने घर बुलाकर दुष्कर्म किया। पीड़िता ने जुबैर से संपर्क तो बंद कर लिया, लेकिन उसने परिवार को मारने और बदनाम करने की धमकी दी। इस डर से वह फिर से जुबैर से मिलने लगी। जुबैर के भाई ने भी किया शारीरिक शोषण पीड़िता के अनुसार, सितंबर 2022 में जुबैर ने फिर से उसे अपने घर बुलाया। उसके बड़े भाई शोएब (सोहेल) ने उसे जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डाला। शोएब ने धमकी दी कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी, तो उसकी फोटो वायरल कर देगा। बदनामी के डर से छात्रा ने उसकी बात मानी और शारीरिक शोषण का शिकार हुई। इसके बाद जुबैर ने उसे कहा कि उनके परिवार में यह सब चलता है और उसे यह सब करना पड़ेगा। कलमा पढ़वाकर नाम बदलवाने की कोशिश 2024 में जुबैर ने पीड़िता को अपने घर बुलाया और उसे मस्जिद में रहने वाले हाफिज साहब आरिफ से मिलवाया। हाफिज साहब ने उसे मंदिर जाने और पूजा-पाठ करने से मना किया और जबरन कलमा पढ़वाने की कोशिश की। इसके बाद, पीड़िता का नाम बदलकर जैनब मंसूरी रखा गया। जुबैर ने उसे कहा कि वह इस प्रक्रिया के बाद उसका निकाह कराएंगे। पीड़िता बोलीं- धमकाकर घर बुलाया, रेप किया छात्रा ने पुलिस को दिए बयान में बताया- ‘मैं सीहोर की रहने वाली हूं। भोपाल के एक कॉलेज से बीए कर रही हूं। 2022 में घर के सामने रहने वाले जुबैर मंसूरी ने कहा कि मैं तुम्हें पसंद करता हूं। उसने बात करने की कोशिश की तो मैंने मना कर दिया। उसने कहा- बात करने में क्या बुराई है। मैं उसकी बातों में आ गई और हमारी फोन पर बात होने लगी। पीड़िता ने आगे बताया- ‘जब घर पर कोई नहीं होता था, तो जुबैर मिलने बुलाता। मैंने मना किया तो वह धमकाने लगा। बोला- नहीं आएगी तो सबको बता दूंगा कि तू मुझसे बात करती है। उसकी धमकी से डरकर मैं मई 2022 में उसके घर गई, जहां उसने रेप किया।’ पीड़िता के मुताबिक- ‘इसके बाद मैंने उससे बात करना बंद कर दिया। कुछ दिनों बाद जुबैर ने फोन करके धमकी दी कि मुझसे बात नहीं करेगी तो तेरे परिवारवालों को मार दूंगा और तुझे बदनाम कर दूंगा। बदनामी के डर से मैं फिर से बात करने लगी। जुबैर के भाई ने भी धमकी देकर रेप किया पीड़िता ने बताया कि सितंबर 2022 में जुबैर ने फिर मुझे अपने घर बुलाया। वहां उसका बड़ा भाई शोएब (सोहेल) ने हमें एक साथ देख लिया। कुछ दिन बाद शोएब ने मुझसे कहा कि तू मेरे साथ संबंध बना। मैंने मना किया तो उसने धमकी दी कि तेरे फोटो वायरल कर दूंगा। बदनामी के डर से मैं उससे मिलने चली गई और उसने भी मेरे साथ गलत काम किया। छात्रा ने कहा कि मैंने यह बात जुबैर को बताई तो उसने कहा- हमारे यहां यह सब चलता है, तुझे करना पड़ेगा। इसके बाद कई बार जुबैर ने मेरी मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बनाए। बात करना बंद की तो धमकाया पीड़िता ने आरोप लगाते हुए बताया कि गलत काम होने के बाद मैंने जुबैर से बात करना बंद कर दिया, कुछ दिन तो सामान्य रहा लेकिन एक दिन उसने फोन कर धमकी दी की अगर तुम मुझसे बात नहीं करेगी तो तेरे परिवार वालों को मार दूंगा और तुझे बदनाम कर दूंगा,जुबैर की धमकी से डर कर मैं उसे फिर बात करने लग गई। पीड़िता ने बताया कि बाद में उसका भाई भी रेप करने लगा। उसने कहा, ‘सितंबर 2022 में जुबैर ने एक बार फिर धमकाकर मुझे अपने घर बुलाया। वहां उसका बड़ा भाई शोएब भी आ गया और उसने हमें एक साथ देख लिया इनके बाद शोएब ने फोटो वायरल करने की धमकी देकर बुलाया और मेरे साथ दुष्कर्म किया। यह बात जब जुबैर को बताई तो उसने कहा- हमारे यहां यह सब चलता है, तुझे करना पड़ेगा। इसके बाद कई बार जुबैर ओर शोएब ने मेरी मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बनाए।’ मंदिर जाने से किया मान, मौलवी से धर्म परिवर्तन पीड़िता ने आरोप लगाते हुए कहा कि साल 2024 में जुबैर ने मुझे अपने घर बुलाया और मस्जिद में रहने वाले हाफिज साहब आरिफ से मिलवाया, उन्होंने मेरा नाम जैनब मंसूरी रखा। इस दौरान उन्होंने कई बार जबरन कलमा पढ़वाने का प्रयास कराया ओर मौलवी ने कहा की तुम मंदिर मत जाया करो, पूजा-पाठ मत किया करो, कलमा पढ़ा करो इससे हमारे रीति-रिवाज सीख जाओगे तो तेरा निकाह जुबैर से करा देंगे। आखिरकार जुबैर से परेशान होकर मैंने अपनी चचेरी बहन और भाई को सारी बात बताई। इसके बाद हम थाने पहुंचे और जुबैर, शोएब और हाफिज साहब आरिफ के खिलाफ शिकायत दी। एसडीओपी पूजा शर्मा ने बताया कि युवती ने मंगलवार शिकायत दी थी, जिसके बाद जांच पड़ताल की गई ओर बुधवार तीनों आरोपियों के खिलाफ धारा 376, 363, 366, 376(2n), पॉक्सो एक्ट और मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत केस दर्ज किया है। तीनों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है,गुरुवार आरोपियों को न्यायलय में पेश किया जाएगा। मुझसे कलमा पढ़वाया और नाम बदलवाया पीड़िता ने कहा कि 2024 में एक दिन जुबैर ने मुझे अपने घर बुलाया। वहां मस्जिद में रहने वाले हाफिज साहब आरिफ से मिलवाया। उन्होंने कहा कि तुम मंदिर मत जाया करो, पूजा-पाठ मत किया करो, कलमा पढ़ा करो। उन्होंने बहुत बार जबरन कलमा पढ़वाने की कोशिश की। कहा कि हमारे रीति-रिवाज … Read more

मुख्यमंत्री मोहन यादव को अचानक से इंदौर कलेक्टर ऑफिस में देख सीएम सब रह गए हैरान

इंदौर  खराब मौसम के चलते मुख्यमंत्री को बड़वानी दौरा निरस्त करना पड़ा। गुरुवार सुबह वे अचानक कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और वहीं से बड़वानी के कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अटेंड किया। विश्व सिकल सेल दिवस पर बड़वानी जिले के ग्राम तलून में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर कलेक्टोरेट से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।  खराब मौसम के कारण टालना पड़ी यात्रा मुख्यमंत्री मोहन यादव को हेलीकॉप्टर से इंदौर से बड़वानी होते हुए तलून पहुंचना था, पर मौसम खराब होने के कारण यह यात्रा टाल दी गई। निर्धारित कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री को सुबह 10:20 बजे वायुयान से इंदौर एयरपोर्ट पहुंचना था और यहां से 10:25 बजे हेलीकॉप्टर से तलून के लिए रवाना होना था। मुख्यमंत्री तय समय पर इंदौर तो पहुंच गए, पर मौसम ज्यादा खराब होने के कारण हेलीकॉप्टर से तलून की उड़ान नहीं भर सके। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री को दोपहर 1:15 बजे बड़वानी से खरगोन जाना है। उन्हें खरगोन के ग्राम बेड़िया सनावद पहुंचकर स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होना है और शाम 3:50 बजे बेड़िया से हेलीकॉप्टर से इंदौर एयरपोर्ट पहुंचना है। यहां से उन्हें वायुयान से शाम 4.15 बजे भोपाल के लिए प्रस्थान करना है। सड़क मार्ग से गए राज्यपाल और उप मुख्यमंत्री बारिश की वजह से बदले हुए कार्यक्रम के तहत अतिथियों को सड़क मार्ग से जाना पड़ा। इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी शामिल हो रहे हैं। राज्यपाल और उप मुख्यमंत्री इंदौर से सुबह सड़क मार्ग से तलून के लिए रवाना हो गए हैं। राज्यपाल को बड़वानी से दोपहर 2 बजे प्रस्थान कर शाम 5 बजे इंदौर पहुंचना और रात्रि विश्राम करना है। राज्यपाल अगले दिन सुबह 10.30 बजे वायुयान से भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।  

54 जिलों में मानसून की एंट्री, MP में इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें IMD अपडेट, ग्वालियर-चंबल में ऑरेंज अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है और कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। भोपाल में बूंदाबांदी हुई है, अशोकनगर और रतलाम में तेज बरसात हुई है। ग्वालियर-चंबल संभाग के कुछ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश की संभावना है क्योंकि दो लो प्रेशर एरिया और तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम एक्टिव हैं। 3 दिन में कवर किए 54 जिले प्रदेश के 54 जिलों में मानसून 3 दिन में ही पहुंच गया है, सिर्फ भिंड जिला बचा है जहां गुरुवार को मानसून की एंट्री होने की संभावना है। भोपाल में सुबह बूंदाबांदी हुई और बादल छाए रहे। आज ग्वालियर-चंबल संभाग के श्योपुर, मुरैना और गुना जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। यहां 24 घंटे में ढाई से सवा 4 इंच तक बारिश हो सकती है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में आंधी-बारिश होने की संभावना है।  अगले 4 दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट एमपी में दो लो प्रेशर एरिया (कम दवाब का क्षेत्र) और तीन साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम एक्टिव है। इस वजह से अगले 4 दिन तक प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। कहीं अति भारी तो कहीं भारी बारिश हो सकती है। यानी, 24 घंटे के दौरान ढाई से 8 इंच तक पानी बरस सकता है। बुधवार को मंदसौर, रतलाम और बड़वानी में तेज बारिश हुई जिससे गर्मी से राहत मिली। धार, इंदौर और उज्जैन में भी बारिश का दौर रहा। 2 डिग्री तक लुढ़का पारा आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में गिरावट हुई है, प्रदेश में औसत 2 डिग्री तक पारा लुढ़क गया। टीकमगढ़ में सबसे ज्यादा 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 33 डिग्री, इंदौर में 31.4 डिग्री, ग्वालियर में 35.5 डिग्री, उज्जैन में 31.7 डिग्री और जबलपुर में 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में बारिश हुई, पारा लुढ़का प्रदेश के कई जिलों में बुधवार को आंधी-बारिश का दौर रहा। मंदसौर, रतलाम, बड़वानी में तेज बारिश हुई। इससे गर्मी से निजात मिल गई। वहीं, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन में भी बारिश का दौर रहा। आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। प्रदेश में औसत 2 डिग्री तक पारा लुढ़क गया। टीकमगढ़ में सबसे ज्यादा 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बाकी शहरों में पारा इससे नीचे रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 33 डिग्री, इंदौर में 31.4 डिग्री, ग्वालियर में 35.5 डिग्री, उज्जैन में 31.7 डिग्री और जबलपुर में 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस बार एक दिन, पर 3 दिन में कवर किया इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। वहीं, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया। ऐसे में अनुमान था कि मध्यप्रदेश में यह जून के पहले सप्ताह में ही आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। इस वजह से एमपी में इसकी एंट्री नहीं हो पाई। 13-14 जून को मानसून आगे बढ़ा। बावजूद यह प्रदेश में 1 दिन लेट हो गया। हालांकि, 3 दिन में ही मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। बता दें कि एमपी में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून ही है। पिछले साल यह 21 जून को एंटर हुआ था। मानसून कब कहां पहुंचा इस बार देश में मानसून 8 दिन पहले ही आ गया था। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में यह तय समय से पहले पहुंच गया। पिछले 15 दिन से मानसून महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ में एक ही जगह पर ठहरा रहा। 13-14 जून को मानसून आगे बढ़ा और प्रदेश में 1 दिन लेट हो गया। हालांकि, 3 दिन में ही मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। एमपी में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून है, पिछले साल यह 21 जून को एंटर हुआ था। राजधानी भोपाल में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ट्रेंड है। क्या कह रहा है पिछले 10 सालों का ट्रेंड पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर रहा, 4 साल तो टेम्प्रेचर 45 डिग्री के पार पहुंच गया। रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी, 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था। इंदौर में पिछले साल 4 इंच बारिश हुई थी। जून में पिछले 5 साल में कम गर्मी पड़ी पिछले 5 साल यानी 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.1 डिग्री के बीच रहा है, पिछले साल 40.6 डिग्री तक पारा पहुंचा था। साल 1980 में इंदौर में जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था।

मौसम विभाग पर बड़ा अपडेट…आज कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें मौसम का हाल

नई दिल्ली भीषण गर्मी से बेहाल उत्तर भारत के कई राज्यों को राहत मिलने के आसार हैं। दक्षिण पश्चिम पश्चिम तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसकी वजह से कई इलाकों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, 23 जून तक देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, गरज के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की भविष्यवाणी की गई है। आईडीएम के मुताबिक, मॉनसून की गतिविधियां तेज होने वाली हैं।देश के आधे से ज्यादा हिस्से में मॉनसून पहुंच चुका है और अच्छी बारिश का सिलसिला जारी है. कई राज्य बारिश से बेहाल हो गए हैं तो कई इलाकों में लोगों को गर्मी से राहत मिली है. हालांकि राजधानी दिल्ली में अभी मॉनसून ने दस्तक नहीं दी है लेकिन यहां प्री मॉनसून बारिश से कुछ राहत देखी जा रही है. आज, 19 जून भी मौसम विभाग ने लगभग आधे भारत में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग के ताजा अपडेट के मुताबिक, आज झारखंड में अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है. वहीं मध्य भारत और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट है. इसके अलावा मौसम का पूर्वानुमान लगाने  वाली एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, गुजरात, कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, बिहार के कुछ हिस्से, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट है. वहीं, इन्हीं राज्यों के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है. दिल्ली के मौसम का हाल राजधानी दिल्ली के मौसम की बात करें तो मौसम विभाग ने यहां आज मध्यम श्रेणी की बारिश का अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा दिनभर बादल छाए रहेंगे. आईएमडी के मुबातिक शाम के वक्त दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश, आंधी और धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं रात के वक्त तूफान के साथ भारी बारिश हो सकती है. वहीं, चक्रवाती हवाओं की वजह से दिल्ली, गुजरात और दक्षिण भारत में तूफान की भी आशंका है. मौसम विभाग ने 23 जून तक पूरे भारत में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. मुंबई में देर शाम से रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है. मौसम विभाग के मुताबिक आज मूसलाधार बारिश के आसार हैं. मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के रायगढ़ और रत्नागिरी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है जबकि मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. पूर्वी राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के लिए खराब मौसम की आशंका है। इसी तरह, असम और मेघालय में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम सुहाना बना हुआ है। हालांकि, यहां मॉनसून की एंट्री 22-23 जून तक पहुंच सकता है। कहीं 21 तो कहीं 23 जून तक बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट पर गौर करें तो 19 जून से 23 जून तक देश के कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी और मध्य भारत में मॉनसून की रफ्तार बढ़ने वाली है। मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में गंगा के मैदानी इलाकों में 21 जून तक मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज के साथ बिजली भी चमक सकती है और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। पूर्व भारत में भारी बारिश का रेड अलर्ट दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में भी इस दौरान तेज बारिश की आशंका है। पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भी भारी बारिश की तैयारी है। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलेंगी। IMD ने दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है। पूर्वी भारत के राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी भारत में गुजरात, कोंकण, गोवा और महाराष्ट्र में 20 जून तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। 22 और 23 जून को यहां और भी तेज बारिश हो सकती है। इस क्षेत्र में हवा की गति 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा में भी बरसेंगे बदरा उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में 19 जून से 21 जून तक बहुत भारी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में 20 जून से 22 जून के बीच तेज बारिश होने की संभावना है। IMD ने तटीय इलाकों और समुद्र में 45 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब हो सकती है। मछुआरों को इस दौरान समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। दिल्ली-एनसीआर में कैसा रहेगा मौसम IMD ने दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें मध्यम से भारी बारिश, गरज के साथ बारिश और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। सुबह 82 फीसदी आर्द्रता और 28°C का न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। दिन का अधिकतम तापमान 36°C रहने का अनुमान है। बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका भी जताई गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जून को खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला, उज्जैन में करेंगे। कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे। इस दौरान अनेक शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें योग शिविर, शून्य छाया अवलोकन, साइंस शो, स्टेम वर्कशॉप, व्याख्यान एवं परिचर्चा प्रमुख हैं। कार्यशाला भारतीय खगोलशास्त्र की परंपरा और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर केंद्रित होगी। विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला में खगोल विज्ञान के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा। कार्यशाला का आयोजन म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, भोपाल, विज्ञान भारती, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल एवं वीर भारत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से शून्य छाया अवलोकन करेंगे। साथ ही आचार्य वराहमिहिर न्यास एवं अवादा फाउंडेशन द्वारा निर्मित अत्याधुनिक तारामंडल का लोकार्पण भी करेंगे। इस दौरान तारामंडल-शो का प्रदर्शन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वेधशाला स्थित ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन-सत्र को संबोधित करेंगे। परिचर्चा सत्र में खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा अवादा फाउण्डेशन के आर्थिक सहयोग एवं डीप स्काई प्लेनेटेरियम, कोलकाता के तकनीकी सहयोग से आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा ग्राम डोंगला में अत्याधुनिक डिजीटल तारामंडल की स्थापना की गई हैं। तारामण्डल की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के आमजन एवं स्कूली बच्चों में खगोल विज्ञान संबंधी जानकारी एवं प्राकृतिक घटनाओं संबंधी जिज्ञासा शांत करना है। इस तारामण्डल में 8 मीटर व्यास के एफ.आर.पी. डोम में ई-विजन 4 के डिजीटल प्रोजेक्टर एवं डिजीटल साउण्ड सिस्टम लगाया गया हैं। इस वातानुकूलित गोलाकार तारामण्डल में 55 लोग एक साथ बैठकर आकाशीय रंगमंच की हैरतअंगेज और जिज्ञाशावर्धक ब्रह्मांड में होने वाली घटनाओं का रोमांचक अनुभव एवं आनन्द ले सकेंगे। इस तारामण्डल की लागत लगभग 1.6 करोड़ रूपयें हैं। वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला : मध्य भारत में खगोल विज्ञान अनुसंधान का अग्रणी केंद्र उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित ऐतिहासिक ग्राम डोंगला से कर्क रेखा गुजरती है। प्राचीन काल से ही खगोल और ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा ग्राम डोंगला में वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना, भूमि चयन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष योगदान रहा है। इस वेधशाला की स्थापना में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर और आर्यभट्ट प्रशिक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। वेधशाला में 5 मीटर डोम में स्थापित 20 इंच का आधुनिक टेलीस्कोप अनुसंधान और खगोल वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। यह सुविधा प्रदेश और देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और अनुसंधान का मंच प्रदान कर रही है। यहाँ खगोल विज्ञान पर आधारित विंटर स्कूल का आयोजन होता है और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” योजना के अंतर्गत अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी इस वेधशाला का भ्रमण कर रहे हैं। हाल ही में इस टेलीस्कोप को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर के सहयोग से ऑटोमेशन की सुविधा प्रदान की गई है। यह नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप एक ऐतिहासिक पहल है। इससे सुदूर अंचलों के विद्यार्थी भी ऑनलाइन माध्यम से वेधशाला से जुड़ सकेंगे। डोंगला में ही स्थापित पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, जो प्राचीन खगोलीय यंत्रों पर केन्द्रित है, इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के समन्वय के रूप में डोंगला को “डोंगला मीन टाइम (DMT)” की अवधारणा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह प्रयास एक ऐतिहासिक पहल है। देश के वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद होंगे शामिल कार्यशाला में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, भारतीय ज्ञान प्रणाली भारत सरकार नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. गंटी एस. मूर्ति, राष्ट्रीय नवप्रर्वतन प्रतिष्ठान गांधीनगर के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रजेश पांडे, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एन. पी. शुक्ला, डेक्कन विश्वविद्यालय पुणे के पूर्व कुलपति एवं सीएसआईआर भटनागर फेलो, सीसीएमबी हैदराबाद डॉ. वसंत शिंदे, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन के अध्यक्ष श्री हेमंत भवालकर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, अवादा फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती रितु पटवारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक सहित अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद शामिल होंगे।

पूर्व PM भारत रत्न अटल जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर उनके सम्मान में ग्वालियर में मंत्री परिषद की बैठक होगी: CM

वीरांगना के सम्मान के लिये प्रदेश सरकार तत्पर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महानाट्य के लिये पाँच लाख रूपए देने की घोषणा पूर्व PM भारत रत्न अटल जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर उनके सम्मान में ग्वालियर में मंत्री परिषद की बैठक होगी: CM  विभिन्न विभूतियों का मुख्यमंत्री ने किया सम्मान ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना लक्ष्मीबाई की शौर्यगाथा जन-जन तक पहुँचना चाहिए। ग्वालियर में पिछले 26 वर्षों से महारानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित होने वाला बलिदान मेला एक सार्थक प्रयास है। बलिदान मेले के आयोजन के लिये सरकार पूरा सहयोग करेगी। इसके साथ ही वीरांगनाओं के जीवन पर आधारित नाट्य मंचनों के लिये पाँच लाख रूपए की धनराशि देने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल जी के जन्म शताब्दी वर्ष पर उनके सम्मान में ग्वालियर में मंत्री परिषद की बैठक होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 167वी वर्षगांठ के अवसर पर महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान मेले में शहीद मंगल पाण्डेय के साथी दुर्गा सिंह के वंशज, शौर्य चक्र प्राप्त शहीद विवेक सिंह तोमर की धर्मपत्नी एवं नेशनल क्रिकेटर कु. वैष्णव शर्मा को भी सम्मानित किया। बलिदान मेले के अवसर पर पूज्य महंत रामदास जी महाराज दंदरौआ सरकार, प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेन्द्र लोधी, बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, क्षेत्रीय सांसद भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री संगठन हितानंद शर्मा, क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य आरएसएस यशवंत इंन्द्रापुरकर, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, सभापति नगर निगम मनोज तोमर, पूर्व मंत्री रामनिवास रावत, भाजपा जिला अध्यक्ष शहर जयप्रकाश राजौरिया, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार हमेशा वीरांगनाओं के सम्मान के लिए समर्पित रही है, वीरांगना के रूप में साक्षात् देवी दुर्गा ने धरती पर जन्म लेकर हमारे मध्य प्रदेश के ग्वालियर की भूमि पर अपना बलिदान दिया, यह भूमि हमारे लिए तीर्थ के समान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्वालियर की धरती पर राजमाता विजयाराजे सिंधिया और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान विभूतियों ने देश के विकास में अतुलनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में नई शिक्षा नीति लागू कर युवाओं को देश की शौर्य गाथाओं, संस्कृति, संगीत एवं अन्य विधाओं से अवगत कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। प्रदेश सरकार अटल बिहारी वाजपेयी की नदी जोड़ों योजना पर तेजी से कार्य कर रही है। इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ ग्वालियर-चंबल संभाग को मिलेगा। साथ ही ग्वालियर में शीघ्र ही टेक्नोलॉजी हब भी स्थापित होगा, जिससे अनेकों अनेक युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। वीरांगना मेला के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि 166 साल पहले ग्वालियर की इसी धरा पर वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भारत माता के चरणों में अपनी आहुति दी थी। बलिदान मेला देश भक्ति जगाने का अनुष्ठान एवं महायज्ञ है। वर्ष 2000 से यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है। पवैया ने कहा कि बलिदान मेला जिस स्थान पर आयोजित किया जाता है इस धरा पर महारानी लक्ष्मीबाई का रक्त शामिल है। यह धरती जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि चंदन है। उन्होंने बलिदान मेले के आयोजन के संबंध में जानकारी भी दी। वीरांगना लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन बलिदान मेले के गरिमापूर्ण कार्यक्रम में वीरांगना लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य की प्रस्तुति दी गई, जिसे दर्शकों द्वारा बेहद सराहा गया। इसके साथ ही कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ। विख्यात कवियों द्वारा देशभक्तिपूर्ण कविताओं ने श्रोताओं का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री ने वीरांगना लक्ष्मीबाई के समाधि स्थल पहुँच कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की झाँसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में पड़ाव स्थित लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर पहुँचकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी एवं पुष्पमाला अर्पित की। उन्होंने वीरांगना लक्ष्मीबाई के शौर्य एवं बलिदान को नमन किया।  

मंत्री चौहान ने “लैब टू लैंड” को मजबूत करने की घोषणा, वैज्ञानिकों को अब सप्ताह में तीन दिन खेतों में जाना होगा

नई दिल्ली   केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “लैब टू लैंड” पहल को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के वैज्ञानिकों को अब सप्ताह में तीन दिन अनिवार्य रूप से खेतों में जाकर किसानों के साथ संवाद करना होगा. यह कदम किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझने और वैज्ञानिक अनुसंधान को खेतों तक पहुंचने के लिए उठाया गया है. इसके साथ ही, कृषि मंत्री ने स्वयं भी सप्ताह में दो दिन किसानों के बीच जाने की प्रतिबद्धता जताई. उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे निश्चित समय के लिए खेतों में जाएं और किसानों की चुनौतियों का जमीनी स्तर पर आकलन करें. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये बात कही. उन्होंने कहा की “असली काम खेतों में ही होता है. यदि वैज्ञानिक और अधिकारी केवल प्रयोगशालाओं या कार्यालयों में बैठे रहेंगे, तो हम किसानों की वास्तविक जरूरतों को नहीं समझ पाएंगे. ज्ञान, अनुसंधान और क्षमता के बीच जो अंतर है, उसे हमें पाटना होगा.” यह बयान उन्होंने हाल ही में “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के तहत किसानों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद को बढ़ावा देने के संदर्भ में दिया. इस अभियान के तहत, 29 मई से 12 जून 2025 तक देश भर में 2170 वैज्ञानिक टीमों ने 65,000 से अधिक गांवों में 1.08 करोड़ किसानों से मुलाकात की. इस दौरान किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य, और जलवायु-अनुकूल खेती के बारे में जानकारी दी गई. चौहान ने इस अभियान को “लैब टू लैंड” दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर खेतों तक ले जाना है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) वैज्ञानिकों को अब नियमित रूप से किसानों के खेतों में जाना होगा ताकि वे स्थानीय मिट्टी, जलवायु, और फसलों की जरूरतों के आधार पर अनुकूलित सलाह दे सकें. चौहान ने जोर देकर कहा कि यह पहल न केवल किसानों की उत्पादकता बढ़ाएगी, बल्कि वैज्ञानिकों को भी किसानों की व्यावहारिक चुनौतियों से अवगत कराएगी. चौहान ने खुद के बारे में भी बोलते हुए कहा कि वह स्वयं सप्ताह में दो दिन खेतों में बिताएंगे. उन्होंने हाल ही में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, और उत्तराखंड जैसे राज्यों में किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना. पिछले दिनों दिल्ली के तीगीपुर गांव में एक “किसान चौपाल” में भी उन्होंने कहा,था कि “किसानों की मेहनत और उत्पादन को समझने के लिए हमें उनके बीच जाना होगा. केवल मंत्रालय में बैठकर स्थिति का सही आकलन नहीं हो सकता.” मंत्री ने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को भी खेतों में जाने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि नीतियां अब कार्यालयों में नहीं, बल्कि खेतों से निकलेंगी. यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी योजनाएं और नीतियां किसानों की वास्तविक जरूरतों पर आधारित हों. चौहान ने वैज्ञानिकों और किसानों के बीच निरंतर संवाद को “विकसित भारत 2047” के लिए आवश्यक बताया. उन्होंने कहा कि, “हमारा मंत्र है ‘एक राष्ट्र, एक कृषि, एक टीम’. वैज्ञानिक, अधिकारी, और किसान मिलकर भारत को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगे.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जून को अत्याधुनिक तारामंडल का करेंगे लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव योग दिवस 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परम्परा” पर उज्जैन में राष्ट्रीय कार्यशाला का करेंगे शुभांरभ उज्जैन स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला में आयोजित होगी कार्यशाला अत्याधुनिक तारामंडल का करेंगे लोकार्पण उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 21 जून को “खगोल विज्ञान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला, उज्जैन में करेंगे। कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे। इस दौरान अनेक शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें योग शिविर, शून्य छाया अवलोकन, साइंस शो, स्टेम वर्कशॉप, व्याख्यान एवं परिचर्चा प्रमुख हैं। कार्यशाला भारतीय खगोलशास्त्र की परंपरा और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता पर केंद्रित होगी। विशेषज्ञ भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यशाला में खगोल विज्ञान के साथ-साथ भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जायेगा। कार्यशाला का आयोजन म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, भोपाल, विज्ञान भारती, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी भोपाल एवं वीर भारत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पद्मडॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से शून्य छाया अवलोकन करेंगे। साथ ही आचार्य वराहमिहिर न्यास एवं अवादा फाउंडेशन द्वारा निर्मित अत्याधुनिक तारामंडल का लोकार्पण भी करेंगे। इस दौरान तारामंडल-शो का प्रदर्शन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वेधशाला स्थित ऑडिटोरियम में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन-सत्र को संबोधित करेंगे। परिचर्चा सत्र में खगोल विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा अवादा फाउण्डेशन के आर्थिक सहयोग एवं डीप स्काई प्लेनेटेरियम, कोलकाता के तकनीकी सहयोग से आचार्य वराहमिहिर न्यास द्वारा ग्राम डोंगला में अत्याधुनिक डिजीटल तारामंडल की स्थापना की गई हैं। तारामण्डल की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के आमजन एवं स्कूली बच्चों में खगोल विज्ञान संबंधी जानकारी एवं प्राकृतिक घटनाओं संबंधी जिज्ञासा शांत करना है। इस तारामण्डल में 8 मीटर व्यास के एफ.आर.पी. डोम में ई-विजन 4 के डिजीटल प्रोजेक्टर एवं डिजीटल साउण्ड सिस्टम लगाया गया हैं। इस वातानुकूलित गोलाकार तारामण्डल में 55 लोग एक साथ बैठकर आकाशीय रंगमंच की हैरतअंगेज और जिज्ञाशावर्धक ब्रह्मांड में होने वाली घटनाओं का रोमांचक अनुभव एवं आनन्द ले सकेंगे। इस तारामण्डल की लागत लगभग 1.6 करोड़ रूपयें हैं। वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला, डोंगला : मध्य भारत में खगोल विज्ञान अनुसंधान का अग्रणी केंद्र उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित ऐतिहासिक ग्राम डोंगला से कर्क रेखा गुजरती है। प्राचीन काल से ही खगोल और ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा ग्राम डोंगला में वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की परिकल्पना, भूमि चयन से लेकर निर्माण तक की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विशेष योगदान रहा है। इस वेधशाला की स्थापना में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बैंगलोर और आर्यभट्ट प्रशिक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES), नैनीताल का तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। वेधशाला में 5 मीटर डोम में स्थापित 20 इंच का आधुनिक टेलीस्कोप अनुसंधान और खगोल वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। यह सुविधा प्रदेश और देश के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन और अनुसंधान का मंच प्रदान कर रही है। यहाँ खगोल विज्ञान पर आधारित विंटर स्कूल का आयोजन होता है और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” योजना के अंतर्गत अन्य राज्यों के विद्यार्थी भी इस वेधशाला का भ्रमण कर रहे हैं। हाल ही में इस टेलीस्कोप को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर के सहयोग से ऑटोमेशन की सुविधा प्रदान की गई है। यह नई शिक्षा नीति और राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप एक ऐतिहासिक पहल है। इससे सुदूर अंचलों के विद्यार्थी भी ऑनलाइन माध्यम से वेधशाला से जुड़ सकेंगे। डोंगला में ही स्थापित पद्मडॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, जो प्राचीन खगोलीय यंत्रों पर केन्द्रित है, इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है। आधुनिक तकनीक और प्राचीन ज्ञान के समन्वय के रूप में डोंगला को “डोंगला मीन टाइम (DMT)” की अवधारणा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह प्रयास एक ऐतिहासिक पहल है। देश के वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद होंगे शामिल कार्यशाला में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. शिवकुमार शर्मा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, भारतीय ज्ञान प्रणाली भारत सरकार नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. गंटी एस. मूर्ति, राष्ट्रीय नवप्रर्वतन प्रतिष्ठान गांधीनगर के निदेशक डॉ. अरविंद रानाडे, भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी नई दिल्ली के कार्यकारी निदेशक डॉ. ब्रजेश पांडे, म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एन. पी. शुक्ला, डेक्कन विश्वविद्यालय पुणे के पूर्व कुलपति एवं सीएसआईआर भटनागर फेलो, सीसीएमबी हैदराबाद डॉ. वसंत शिंदे, आचार्य वराहमिहिर न्यास उज्जैन के अध्यक्ष हेमंत भवालकर, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी, अवादा फाउंडेशन की निदेशक श्रीमती रितु पटवारी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक सहित अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद शामिल होंगे।  

महाकाल की नगरी उज्जैन में बन रहा महाकाल-संस्कृति वन, लगेंगे 30 हजार पौधे, योग-ध्यान केंद्र होगा तैयार

उज्जैन  PM मोदी की पहल पर गुजरात में स्थापित संस्कृति वन की तर्ज पर उज्जैन में भी एक भव्य महाकाल संस्कृति वन का निर्माण किया जा रहा है। यह वन 12 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला होगा और इसे कोठी रोड पर बनाया जा रहा है। इस वन के निर्माण के साथ पर्यावरण और संस्कृति को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि आने वाले लोग न केवल प्रकृति से जुड़ सकें, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी समृद्ध हो सकें। संस्कृति वन का निर्माण महाकाल संस्कृति वन को कुल 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इस वन में 30 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें औषधीय पौधों का भी समावेश है। यहां नीम, करंज, बरगद, सिंदूर, बेल, पाम, चंदन, बादाम और कदम जैसे पौधे लगाए गए हैं। यह वन केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भी प्रतीक बनेगा। इस वन में योग केंद्र भी बनाया जाएगा, जहां लोग ध्यान और योग का अभ्यास कर सकेंगे। इसके अलावा, अवंतिका नगरी का इतिहास दर्शाने के लिए राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी का भी निर्माण किया जा रहा है। यह वन धार्मिक यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का एक अनूठा केंद्र बनेगा। महाकाल संस्कृति वन में कुल 8 ब्लॉक्स होंगे, जिनका नाम कालिदास वन, शांति वन, जैव विविधता वन, नवग्रह वाटिका, सिंदूर वाटिका, रुद्राक्ष वाटिका जैसे आकर्षक नामों से रखा जाएगा। विक्रम टीले और सिंहासन बत्तीसी उज्जैन के महाकाल संस्कृति वन में सम्राट विक्रमादित्य की भव्य सिंहासन बत्तीसी का दर्शन भी होगा। विक्रम टीला भी यहां विशेष रूप से सुसज्जित किया जा रहा है, जहां फूलों से सुसज्जित एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत किया जाएगा। यह दृश्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी अनूठा होगा। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में एक स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। 5,000 करोड़ रुपए की लागत से इस सिटी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़के, अंडरग्राउंड लाइटिंग, हॉस्पिटल, स्कूल, खूबसूरत चौराहे और सड़कों के बीच डिवाइडर जैसी सुविधाएं होंगी। यह स्थायी कुंभ सिटी सिंहस्थ कुम्भ के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए एक समृद्ध अनुभव प्रदान करेगी। सिंहस्थ से पहले एलिवेटेड ब्रिज की सौगात सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन को दो एलिवेटेड ब्रिज भी मिलेंगे, जिनकी मंजूरी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी है। ये ब्रिज नागपुर की तर्ज पर बनाए जाएंगे और इस सड़क मार्ग को चौड़ा करेंगे, जिससे तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम हो सकेगी। महाकाल संस्कृति वन के अन्य आकर्षण महाकाल संस्कृति वन में सप्त सागरों के आसपास 84 शिवलिंग स्थापित किए जाएंगे, जिनकी परिक्रमा की जा सकेगी। इसके अलावा, यहां फूल घाटी, विद्या वाटिका, कालिदास अरण्य, नक्षत्र वाटिका, और चरक वाटिका जैसे अनेक आकर्षक स्थान होंगे। इसके साथ ही, भगवान श्री कृष्ण की 64 कलाओं का भी यहां दर्शन किया जा सकेगा। भविष्य की योजनाएं और सुविधाएं महाकाल संस्कृति वन में कैफेटेरिया, पार्किंग, व्हीलचेयर और ग्रीन शेड जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, वन में शुद्ध ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी। वन विभाग जल्द ही अहमदाबाद जाकर वहां के संस्कृति वन की स्टडी करेगा, ताकि यहां भी उसी मॉडल पर काम किया जा सके। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा एक नया रूप  महाकाल संस्कृति वन उज्जैन का एक अद्भुत और अनूठा धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बनेगा। यह वन न केवल पर्यटकों को धार्मिक अनुभव प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य करेगा। इस वन के साथ उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को एक नया रूप मिलेगा और यह स्थान तीर्थ यात्रियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन जाएगा। उज्जैन का फिर से लौटेगा प्राचीन वैभव, मोहन यादव की इच्छानुसार महाकाल क्षेत्र के सभी गेटों का किया जाएगा जीर्णोद्धार. डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव अब महाकाल की नगरी उज्जैन में लौटने जा रहा है. प्राचीनकाल में बाबा महाकाल की नगरी में प्रवेश द्वार की परंपरा रही है. जिसका जीर्णोद्धार अब मुख्यमंत्री के निर्देशन में प्रशासन कराने जा रहा है. उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय में उज्जैन में जिस तरह के प्रवेश द्वारा हुआ करते थे, उसी तरह के द्वार फिर से बनाए जाएंगे. जिससे नगर में आने वाले पर्यटक महाकाल नगरी की प्राचीन परंपरा को जान सकेंगे. आइए जानते हैं ये द्वारा कैसे थे और इसका इतिहास क्या था. क्या कहते हैं इतिहास के जानकार? विक्रम विश्वविद्यालय में पुराविद प्रोफेसर डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि “प्राचीन भारत में गोपुरम की परंपरा रही है. यह एक प्रकार का विशाकाय द्वार होता है. इसका अर्थ होता है ‘मंदिर का द्वार’. दक्षिण भारत के मंदिरों में ये आज भी मौजूद है. 2600 साल पहले उज्जैन एक राजधानी के रूप में हुआ करता था. यह 16 महाजनपदों में से एक अवंती महाजनपद की राजधानी थी, जिसके पहले राजा चंद प्रद्योत थे. उन्होंने अपने शासन काल में उज्जैन क्षेत्र में परिखाये और गोपुरम निर्माण करवाए, बाद में अशोक मौर्य जब राज्यपाल बनकर आए तो उन्होंने उनका जीर्णोद्धार करवाया.” राजा भोज ने बनवाया था चौबीस खंबा प्रवेश द्वार डॉ रमण सोलंकी आगे बताते हैं कि “सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में इस परंपरा को आगे बढ़ाया. इसके अलावा परमारों के सम्राट राजा भोज ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कई द्वारों का निर्माण कराया. राजा भोज द्वारा बनवाया गया चौबीस खंबा प्रवेश द्वार आज भी मौजूद है. इस पर देवी महामाया और देवी महालया विराजमान हैं. महाकाल के द्वारा का कराया जाएगा जीर्णोद्धार  मुगल शासक अकबर ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दानी गेट, सती गेट, केडी गेट बनवाए. अब मोहन यादव इन द्वारों के जीर्णोद्धार और निर्माण कराने जा रहे हैं. इससे 2600 साल पुरानी परंपरा का वैभव फिर से लौटेगा. इससे यहां आने वाले श्रद्धालु महाकाल नगरी के इस सुनहरे इतिहास को जान सकेंगे और देख सकेंगे.” करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है महाकाल का दरबार दरअसल, विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल का धाम लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है. मंदिर का इतिहास हजारों वर्षों पूर्व का बताया जाता है. ज्योतिर्लिंग होना मतलब स्वयंभू … Read more

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