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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट में प्रदेश के 51वें आयुर्वेदिक कॉलेज की रखी गई नींव

मध्यप्रदेश की धरती पर अब नहीं बचेंगे नक्सली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सरकार नक्सलियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम, नक्सली सरेंडर करें, नहीं तो मारे जाएंगे मुख्यमंत्री ने नक्सल ऑपरेशन में शामिल 64 पुलिसकर्मियों को दी क्रम पूर्व पदोन्नति बालाघाट में हुआ 169 करोड़ लागत के 93 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन बालाघाट में प्रदेश के 51वें आयुर्वेदिक कॉलेज की रखी गई नींव मुख्यमंत्री ने जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रदर्शनी का किया अवलोकन  बालाघाट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में वर्ष-2026 तक देशभर से नक्सलवाद के खात्मे का संकल्प लिया गया है। इसे पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार भी केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही है। इसी क्रम में बालाघाट जिले के पिछले दिनों नक्सल मुठभेड़ों में शामिल रहे पुलिस फोर्स, हॉक फोर्स और विशेष सशस्त्र बल के 64 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों को क्रम पूर्व पदोन्नति प्रदान की गई है। राज्य सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम पुलिसकर्मियों का हौसला बढ़ाएगा। क्रम पूर्व पदोन्नति पुलिस इतिहास में स्वर्णिम क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट कभी अत्यधिक नक्सल प्रभावित 12 जिलों की सूची में शामिल था। सरकार की मंशा और पुलिस के परिश्रम से अब केंद्र सरकार ने बालाघाट को गंभीर समस्या वाली श्रेणी से बाहर कर अन्य श्रेणी में रखा है। बालाघाट में नक्सल गतिविधियों में गिरावट प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को बालाघाट के लांजी में आयोजित क्रम से पूर्व पदोन्नति अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैज लगाकर पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नत कर किया और बधाई दी। राज्य सरकार नक्सलियों से निपटने में सक्षम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को 4 दिन की लड़ाई में पस्त कर दिया। गृह मंत्री शाह के नेतृत्व में देशभर में नक्सल विरोधी अभियान संचालित हो रहा है। इस अभियान को मजबूती देने के लिए मध्यप्रदेश पुलिस को आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस किया जा रहा है। राज्य सरकार नक्सलियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। बालाघाट की धरती पर यह अलंकरण समारोह नक्सलियों को सीधा संदेश है कि वे सरेंडर करें नहीं तो मारे जाएंगे। प्रदेश की धरती पर नक्सल का खूनी खेल अब नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि आज बालाघाट में पुलिस के वीरों का सम्मान हो रहा है। पुलिसकर्मी जान की बाजी लगाकर नागरिकों की सुरक्षा करते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सर्वोच्च बलिदान देने वाले 37 वीर पुलिसकर्मियों को नमन करते हुए कहा कि जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है, लेकिन मृत्यु ऐसी हो, जिस पर देश, प्रदेश और समाज गर्व करे। बालाघाट में 169 करोड़ लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में जल गंगा संवर्धन अभियान में बालाघाट जिले में किए गए विकास कार्यों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने 169 करोड़ रुपए लागत के 93 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया। इनमें आयुर्वेदिक महाविद्यालय भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालाघाट में प्रदेश के 51वें आयुर्वेदिक कॉलेज की नींव रखी। इस अवसर पर सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक लांजी राजकुमार कर्राहे, विधायक वारासिवनी विक्की पटेल, विधायक गौरव पारधी, पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल और रामकिशोर कावरे उपस्थित रहे। बालाघाट खनिज और जल संपदा से परिपूर्ण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट खनिज और जल संपदा से परिपूर्ण है। यहां तांबा और मैग्नीज के भंडार हैं। बालाघाट के चिन्नौर चावल को जीआई टैग प्राप्त होना, हमारे लिये गौरव की बात है। बालाघाट में नक्सलियों के खात्मे के साथ विकास के कार्य भी निरंतर जारी हैं। यहां आयुर्वेद से जुड़ी भरपूर संपदा है। नर्सिंग और पैरामेडिकल के कोर्स भी आयुर्वेदिक कॉलेज में चलाए जाएंगे। एक समय था जब वर्ष 2002-03 तक मध्यप्रदेश में एलोपैथी के मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे। अब प्रदेश में इनकी संख्या 30 है। इसके अतिरिक्त 8 और नए मेडिकल कॉलेज खुलने वाले हैं। पीएम जनमन अभियान में बालाघाट में बन रही देश में पहली सड़क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बालाघाट में सड़क विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। पीएम जनमन अभियान में देश में पहली सड़क बालाघाट में बन रही है, जो 23 किलोमीटर लंबी है। हमारी सरकार बेघरों को घर देकर गरीब से गरीब व्यक्ति की जिंदगी बेहतर करने का प्रयास कर रही है। आगामी 26 मई को नरसिंहपुर में कृषि मेला लगेगा। यहां किसानों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की जाएंगी। राज्य सरकार टमाटर सहित अन्य सब्जियों के भंडारण एवं प्र-संस्करण के लिए व्यवथा कर रही है। किसानों से 2600 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदकर उन्हें लाभ दिया गया है। जल संरक्षण और संवर्धन के लिए 30 जून तक अभियान चल रहा है। बालाघाट में तालाब, नदी, कुंए, बावड़ी सहित सभी जल स्त्रोतों का संरक्षण किया जा रहा है। युवाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदी जोड़ों परियोजनाओं से सिंचाई का रकबा बढ़ेगा। राज्य सरकार किसानों को मात्र 10 प्रतिशत राशि पर 30 लाख से अधिक सोलर पंप दे रही है। किसानों से अतिरिक्त बिजली खरीदकर उन्हें लाभान्वित किया जाएगा। राज्य सरकार ने किसानों को और अधिक लाभ देने के लिये डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना की शुरुआत की है। किसान खेती के साथ दूध उत्पादन से भी आय बढ़ाएं। सरकार दूध खरीदेगी, किसानों को रोज पैसे मिलेंगे। प्रदेश में दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी के साथ सरकार ने गौशालाओं के लिए प्रति गाय अनुदान 20 रुपए को बढ़ाकर 40 रुपए किया है। राज्य सरकार ने वृंदावन ग्राम योजना भी शुरू की है। युवाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के कर्मचारियों के हितैषी: मंत्री सिंह बालाघाट के प्रभारी एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि आज क्रम पूर्व पदोन्नति पाने वाले पुलिसकर्मियों ने त्याग और सेवा भावना से प्रदेश को गौरवान्वित किया है। यह संदेश है कि जो कर्मचारी बेहतर कार्य करते हैं, उन्हें सरकार प्रोत्साहित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के … Read more

पहलगाम हमले में बहनों का सिंदूर उजाड़ने वालों का भारत ने किया हिसाब चुकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी ने किया आतंकवाद के विरूद्ध भारत की नीति का उद्घोष : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यह युग आतंकवाद का नहीं है, यह एक वाक्य काफी है भारत का संदेश समझने को: मुख्यमंत्री डॉ. यादव देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी का आभार मानती है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहलगाम हमले में बहनों का सिंदूर उजाड़ने वालों का भारत ने किया हिसाब चुकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश, प्रधानमंत्री की विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर चलने को है तैयार प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रतिक्रिया भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए भारत की आतंकवाद के विरूद्ध नीति का उद्घोष किया है। भारत ने आपरेशन सिंदूर सिर्फ स्थगित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि यह युग युद्ध का नहीं है, लेकिन यह युग आतंकवाद का भी नहीं है। यह एक वाक्य भारत का संदेश समझने के लिए काफी है। भारत ने पहलगाम की घटना में जिन बहनों का सिंदूर उजड़ा उसका हिसाब पाकिस्तान से चुकता करने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक मजबूत अर्थ व्यवस्था बना है, साथ ही राष्ट्रवासियों ने धारा 370 को समाप्त होते देखा है। राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे कठिन निर्णय प्रधानमंत्री मोदी ने लिए, जिनकी कल्पना नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि जो मार भारत ने पाकिस्तान पर मिसाइलों से की उससे कहीं अधिक मार आज प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों से हुई है और इस संबोधन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेना अध्यक्ष सहित अन्य दुश्मनों की जमीन खिसका दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्र को दिए गए संबोधन के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि दुनिया बदलते दौर का भारत देख रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है और उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है। ऊर्जा से लबरेज कर दिया है। उन्होंने उत्साह और उमंग से सेनाओं का हौसला भी बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व में सेना ने सिर्फ 5 दिन में जबरदस्त प्रतिकार करते हुए पाकिस्तान की कमर तोड़ने का कार्य किया है। आज प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवाद को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए यह भी कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को खाद-पानी देता रहा है। आतंकवादियों के जनाजे पर पाकिस्तान का झंडा चढ़ते हुए देखा गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मेड इन इंडिया की दृष्टि से भारत की सर्वोच्च सुरक्षा का आव्हान किया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि जब बात होगी तो पीओके (पाक ऑक्युपाईड कश्मीर) पर होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में न्यूक्लियर बम के नाम पर पाकिस्तान द्वारा ब्लैक मेल किया जाना असंभव है। प्रधानमंत्री मोदी के एक-एक शब्द से प्रत्येक भारतीय का सीना छप्पन इंच करने का कार्य किया है।  

DRDO के वैज्ञानिक ह्यूमनॉइड रोबोट पर काम कर रहे हैं, 2027 तक तैयार होगा जो रक्षा और अन्य क्षेत्रों में क्रांति लाएगा

बेंगलुरु रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक एक ऐसे मानवरोबोट (ह्यूमनॉइड रोबोट) के विकास पर काम कर रहे हैं, जो अग्रिम पंक्ति के सैन्य मिशनों में हिस्सा ले सके. एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि इस रोबोट का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सैनिकों की जान को खतरे में डाले बिना जटिल कार्यों को अंजाम देना है. डीआरडीओ के तहत एक प्रमुख प्रयोगशाला, रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स), इस मशीन को विकसित कर रही है. प्रत्यक्ष मानव निर्देशों के तहत जटिल कार्यों को करने में सक्षम होगी. इस रोबोट को विशेष रूप से ऐसे वातावरण में सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है, जहां जोखिम अधिक है. चार साल से चल रहा है प्रोजेक्ट पुणे में सेंटर फॉर सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स के समूह निदेशक एस.ई. तलोले ने बताया कि उनकी टीम पिछले चार साल से इस परियोजना पर काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हमने ऊपरी और निचले शरीर के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप विकसित किए हैं. आंतरिक परीक्षणों के दौरान कुछ कार्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया है. यह ह्यूमनॉइड रोबोट जंगल जैसे कठिन इलाकों में भी काम कर सकेगा. हाल ही में पुणे में आयोजित नेशनल वर्कशॉप ऑन एडवांस्ड लेग्ड रोबोटिक्स में इस रोबोट को प्रदर्शित किया गया था. उन्नत विकास चरण में प्रोजेक्ट वर्तमान में यह प्रोजेक्ट अपने उन्नत विकास चरण में है. टीम का ध्यान रोबोट की ऑपरेटर के निर्देशों को समझने और उन्हें लागू करने की क्षमता को और बेहतर बनाने पर है. इस प्रणाली में तीन मुख्य घटक शामिल हैं:       एक्ट्यूएटर्स: ये मानव मांसपेशियों की तरह गति उत्पन्न करते हैं.       सेंसर: ये आसपास के वातावरण से वास्तविक समय में डेटा एकत्र करते हैं.       नियंत्रण प्रणाली: ये एकत्रित जानकारी का विश्लेषण करके रोबोट के कार्यों को निर्देशित करती हैं. तलोले ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि रोबोट वांछित कार्यों को सुचारू रूप से कर सके. इसके लिए संतुलन, तीव्र डेटा प्रोसेसिंग और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में महारत हासिल करना आवश्यक है. डिज़ाइन टीम का नेतृत्व कर रहे वैज्ञानिक किरण अकेला ने बताया कि शोधकर्ता इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. 2027 तक इस परियोजना को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं. रोबोट की विशेषताएं और क्षमताएं डीआरडीओ के अधिकारियों ने बताया कि दो पैरों (बाइपेडल) और चार पैरों (क्वाड्रुपेडल) वाले रोबोट रक्षा और सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा, घरेलू सहायता, अंतरिक्ष अन्वेषण और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं प्रदान करते हैं. हालांकि, स्वायत्त और कुशल लेग्ड रोबोट बनाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है. वैज्ञानिकों ने बताया कि इस ह्यूमनॉइड रोबोट का ऊपरी हिस्सा हल्के वजन वाले हाथों से सुसज्जित होगा, जिसमें गोलाकार रिवॉल्यूट जोड़ कॉन्फ़िगरेशन होगा. इसमें कुल 24 डिग्री ऑफ फ्रीडम होंगे – प्रत्येक हाथ में 7, ग्रिपर में 4, और सिर में 2. यह रोबोट जटिल स्वायत्त कार्य करने में सक्षम होगा, जैसे:  बंद-लूप ग्रिपिंग के साथ वस्तुओं को पकड़ना.   वस्तुओं को मोड़ना, धक्का देना, खींचना, स्लाइडिंग दरवाजे खोलना, वाल्व खोलना और बाधाओं को पार करना. खतरनाक सामग्रियों जैसे खदानों, विस्फोटकों और तरल पदार्थों को सुरक्षित रूप से संभालना. दोनों हाथ मिलकर सहयोगात्मक रूप से कार्य करेंगे, जिससे खतरनाक सामग्रियों को सुरक्षित रूप से संभाला जा सके. उन्नत तकनीकी विशेषताएं यह रोबोट दिन हो या रात, घर के अंदर हो या बाहर, निर्बाध रूप से काम करेगा. इसमें निम्नलिखित तकनीकी विशेषताएं शामिल होंगी… प्रोप्रियोसेप्टिव और एक्सटेरोसेप्टिव सेंसर: ये रोबोट को अपने शरीर और आसपास के वातावरण के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे.       डेटा फ्यूजन क्षमता: विभिन्न स्रोतों से डेटा को एकीकृत करने की क्षमता.       सामरिक संवेदन: यह रोबोट को जटिल परिस्थितियों में निर्णय लेने में मदद करेगा.       ऑडियो-विजुअल धारणा: यह रोबोट को देखने और सुनने की क्षमता प्रदान करेगा. इसके अलावा, यह ह्यूमनॉइड बाइपेड रोबोट निम्नलिखित विशेषताओं से लैस होगा…     फॉल और पुश रिकवरी: गिरने या धक्का दिए जाने पर स्वयं को संभालने की क्षमता.       वास्तविक समय में मैप जनरेशन: आसपास के क्षेत्र का नक्शा बनाने की क्षमता.       स्वायत्त नेविगेशन और पथ नियोजन: सिमुल्टेनियस लोकलाइजेशन एंड मैपिंग (एसएलएएम) के माध्यम से यह रोबोट जटिल और उच्च जोखिम वाले वातावरण में स्वायत्त रूप से संचालित हो सकेगा. भविष्य की संभावनाएं डीआरडीओ के इस ह्यूमनॉइड रोबोट प्रोजेक्ट से न केवल रक्षा क्षेत्र में क्रांति आएगी, बल्कि यह अन्य क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य सेवा, अंतरिक्ष अन्वेषण और औद्योगिक अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की उन्नत तकनीक सैनिकों की सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ मानव जीवन को और सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने में मदद करेगी.  

MP में कर्मचारी-अधिकारियों के वेतन बढ़ोत्तरी के बाद अब, माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की तैयारी की जा रही

भोपाल मध्य प्रदेश में कर्मचारी-अधिकारियों के वेतन भत्तों में बढ़ोत्तरी के बाद अब करीब 9 साल बाद प्रदेश के माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की तैयारी की जा रही है. पक्ष और विपक्ष के विधायकों की मांग पर विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव तैयार कर संसदीय कार्य विभाग को प्रस्ताव सौंपा गया है. समिति ने विधायकों की वेतन-भत्तों में 40 फीसदी और पेंशन में करीबन 30 फीसदी की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव सौंपा है. वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी का आधार दूसरे राज्यों में दी जा रही सुविधाओं को बनाया गया है. उधर इस प्रस्ताव पर विधानसभा सचिवालय की लेखा शाखा द्वारा एक बार फिर आंकलन किया जा रहा है. विधायकों को कितना मिलता है वेतन-भत्ता मध्य प्रदेश के विधायकों का वेतन भत्ता 2016 में बढ़ाया गया था, जिसे अब एक बार फिर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. अभी प्रदेश के विधायकों को वेतन भत्ते मिलाकर करीबन 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं. एमपी विधायकों का वेतन भत्ता विधायकों को रेल कूपन भी दिया जाता है, इससे विधायक राज्य के अंदर व बाहर रेल यात्रा कर सकते हैं. यह रेल कूपन विधायक के अकेले सफर के लिए फर्स्ट क्लॉस एससी के लिए होता है. राज्य के अंतर एक साल में 10 हजार किलोमीटर की यात्रा कर सकते हैं. विधायकों को 10 हजार रुपए मेडिकल अलाउंस और विधानसभा की हर बैठक में भाग लेने के लिए 2500 रुपए तक दैनिक भत्ता दिया जाता है. वेतन बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव हुआ तैयार इसको लेकर सत्तापक्ष और विपक्षी विधायकों द्वारा वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की मांग की जाती रही है. विधानसभा बजट सत्र के दौरान भी विधायकों ने इसको लेकर बात उठाई थी. विधायकों का कहना था कि पिछले 9 सालों में महंगाई बढ़ी है. इसके अलावा बंगले पर पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं के स्वागत सत्कार में भी काफी पैसा खर्च होता है. उधर विधायकों की मांग पर अब विधायकों के वेतन-भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी के लिए विधानसभा की सदस्य सुविधा समिति ने प्रस्ताव तैयार किया है. कहां विधायकों की कितनी सैलरी इसमें विधायकों का वेतन 40 फीसदी बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपए और पेंशन 35 हजार रुपए से बढ़ाकर 58 हजार रुपए दिए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. उधर विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व विधायकों, विधायकों को लेकर प्रस्ताव भेजा गया था, फिलहाल शासन स्तर पर यह विचाराधीन है. जबकि इन राज्यों में मध्य प्रदेश से कम सैलरी मिलती है     मॉर्डन हो रहे मध्य प्रदेश के ‘माननीय’, ऑफलाइन से ज्यादा ऑनलाइन पूछे सवाल, जानिए कितना पढ़े-लिखे हैं विधायक     संपत्ति के मामले में बीवियों से पिछड़े माननीय, शिवराज और कमलनाथ भी रह गए गरीब, देखिए किसकी पत्नी कितनी धनवान झारखंड के विधायकों को मिलता है सबसे ज्यादा वेतन देश में झारखंड में विधायकों को सबसे ज्यादा वेतन-भत्ते मिलते हैं. झारखंड में विधायकों को हर माह वेतन-भत्ते सहित करीबन 2 लाख 90 हजार रुपए वेतन-भत्ते दिए जाते हैं. जबकि महाराष्ट्र में करीबन 2 लाख 60 हजार रुपए वेतन-भत्ते मिलते हैं. तेलंगाना विधानसभा में विधायकों को करीबन 2 लाख 75 हजार वेतन-भत्ता मिलता है.

भोपाल समेत आसपास के पांच जिलों को मिलाकर 8791 वर्ग किमी का क्षेत्र तय किया जा रहा

भोपाल भोपाल (Bhopal) मेट्रोपॉलिटन रीजन (Bhopal Metropolitan Region) का प्राथमिक मैप तैयार कर लिया गया है। भोपाल समेत आसपास के पांच जिलों को मिलाकर 8791 वर्ग किमी का क्षेत्र (Mahanagar) तय किया जा रहा है। हेक्टेयर में ये आठ लाख 79 हजार 109.94 है। भोपाल जिले की आबादी के घनत्व 855 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर के अनुसार इसमें 75 लाख की आबादी के लिए जगह तय (Development News) होगी। गौरतलब है कि इसकी डीपीआर के लिए बीडीए ने दस लाख रुपए के शुरुआती बजट के साथ कंसल्टेंट तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी की है। इस माह कंसल्टेंट तय हो जाएगा, इसके 14 माह में डीपीआर बनाना होगी। इन जिलों के ये क्षेत्र भोपाल मेट्रोपॉलिटन में रायसेन जिले के रायसेन, औबेदुल्लागंज। विदिशा जिले के विदिशा, ग्यारसपुर, गुलाबगंज। सीहोर जिले के सीहोर, इछावर, आष्टा, श्यामपुर, जावर। राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़, जीरापुर, ब्यावरा, पिछोर, खूजनेर। भोपाल जिले के हुजूर, बैरसिया, कोलार। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग मेट्रोपॉलिटन रीजन में सेटेलाइट टाउन बनाकर नए आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। अतिरिक्त आबादी को इसमें बसाया जाएगा। शहरी क्षेत्र की बजाय रीजन के रूरल एरिया में विशेष आवासीय क्षेत्र बनाकर लोगों को बसाएंगे और कार्यस्थल पर आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर करेंगे। इतना ही नहीं, रीजन में नए टूरिस्ट सेंटर व सर्किट तय किए जाएंगे। इस तरह होगा विकास का खाका क्षेत्र विकास के आधार पर योजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की योजना ग्रोथ सेंटर को चिन्हित करना सेटेलाइट टाउन के लिए क्षेत्र चिन्हित करना टूरिस्ट सेंटर व सर्किट भी तय होगा पर्यावरणीय विकास के लिए पूरा मैनेजमेंट तय करना बेहतर कृषि भूमि का संरक्षण प्लान कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान होगा, जिसमें रोड, प्राकृतिक नाले, जनसुविधाएं व सेवाओं के साथ रीजन के आर्थिक विकास का पूरा मैप रहेगा। टूरिस्ट सेंटर व सर्किट की प्लानिंग भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्राथमिक मैप तैयार है। बेहतर प्लान के साथ रीजन तय करेंगे। भोपाल का स्वरूप बदलेगा, विकास की संभावनाएं बढ़ेगी। – संजीव सिंह, संभागायुक्त व प्रशासक बीडीए इंदौर में 5 जिलों के 1756 गांव होंगे शामिल इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में पांच जिले इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर को शामिल किया जाएगा। जिसका कुल क्षेत्रफल 9 हजार किलोमीटर का होगा। इसमें भौगोलिक, आर्थिक, धार्मिक-सामाजिक स्थिति का आंकलन किया जाएगा कि कहां कौन सी इंडस्ट्री है, कैसे जरूरतें हैं। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके बाद रीजनल और इंवेस्टमेंट प्लान बनाया जाएगा। बता दें कि, इंदौर के पहले चरण के इंस्पेक्शन का काम पूरा हो चुका है। अब इसमें ऑथरिटी के द्वारा यह तय किया जाएगा कि इसमें कौन-कौन से जिले, तहसीलें और गांवों को शामिल किया जाएगा।

इंदौर-खंडवा हाईवे पर टोल प्लाजा का काम जुलाई से शुरू होगा और एनएचएआई संचालन करेगा

 इंदौर इंदौर-खंडवा राजमार्ग का पहला टोल प्लाजा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने जनवरी से शुरू करने का फैसला किया है। यह प्लाजा तेजाजी नगर बायपास से 33 किमी पर बनाया जाएगा, जो बलवाड़ा के नजदीक गांव पडाली में होगा। मगर वाहन चालकों से 33 की बजाए 46 किमी की सड़क का टोल टैक्स वसूला जाएगा, क्योंकि इंदौर-चोरल की बीच तीन सुरंगें होंगी। इस वजह से राजमार्ग के इस हिस्से की दरें अधिक होंगी। फिलहाल टोल की दरों पर यातायात को लेकर आकलन करना बाकी है, जो अक्टूबर से प्रारंभ किया जाएगा। उसके आधार पर दरें निर्धारित की जाएंगी। अधिकारियों के मुताबिक दिसंबर से भारी वाहन भी राजमार्ग से गुजरेंगे। 216 किमी लंबे इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का काम जनवरी 2025 में खत्म होना था, लेकिन काम धीमा होने से एनएचएआई ने प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाई है। फरवरी 2026 तक मेघा इंजीनियरिंग को यह काम पूरा करना है। मगर तलाई (300), भेरूघाट (500) और चोरल (300) मीटर की तीन सुरंग है। इनका 35-40 फीसद काम बाकी है। एनएचएआइ ने एजेंसी को दिसंबर तक काम पूरा करने पर जोर दिया है। खंडवा तक रहेंगे दो टोल राजमार्ग पर दो से तीन टोल रहेंगे। इंदौर से बलवाड़ा के बीच पहला टोल रखा जाएगा, जबकि धनगांव में दूसरा प्लाजा अगले कुछ दिनों में शुरू हो जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक 50-55 किमी की दूरी पर टोल प्लाजा रहेंगे। इंदौर-बलवाड़ा वाले हिस्से में टैक्स थोड़ा अधिक होगा, क्योंकि इस हिस्से में तीन सुरंग है। इनकी लंबाई 1300 मीटर रखी है। अधिकारियों के मुताबिक सुरंग की लंबाई की तुलना में दस गुना टैक्स लगाया जाता है। जैसे 1300 मीटर सुरंग की लंबाई है तो 13 किमी सड़क का टोल टैक्स लगाया जाएगा। इस आधार पर इंदौर से बलवाड़ा के बीच 33 किमी का सफर तय करने पर 46 किमी का टैक्स देना होगा। एनएचएआई करेगी संचालित राजमार्ग का प्रोजेक्ट लगभग 900 करोड़ रुपये का है। नए नियमों के मुताबिक एजेंसी की बजाए एनएचएआई ही टोल का संचालन करेगा। टोल टैक्स से आने वाली राशि का कुछ हिस्सा एजेंसी को दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा, क्योंकि निर्माण कार्य के दौरान 60 फीसद राशि एजेंसी लगाती है। अक्टूबर से करेंगे आकलन इंदौर-बलवाड़ा के बीच बनने वाले टोल प्लाजा से वाहन गुजरने का आकलन अक्टूबर से किया जाएगा। तब तक राजमार्ग का हिस्सा भारी वाहनों के लिए भी खोल दिया जाएगा। यातायात के दवाब को देखने के बाद टोल की दरें तय होंगी। कार, हल्के-भारी वाहन, कंटेनर-ट्रक, बस की राशि निर्धारित करेंगे। थोड़ा ज्यादा देना होगा टैक्स     इंदौर-खंडवा राजमार्ग पर पहला टोल प्लाजा बलवाड़ा के पास बनेगा। इसके लिए थोड़ी अधिक टैक्स राशि चुकानी होगी, क्योंकि इस हिस्से में तीन सुरंगें आ रही हैं। इन्हें बनाने में खर्च अधिक आता है। इसके लिए टैक्स भी अधिक वसूला जाएगा। सुरंग की लंबाई के आधार पर दस गुना टैक्स लगता है। जुलाई से टोल प्लाजा का काम शुरू होगा। अक्टूबर से दरें निर्धारित की जाएंगी। – सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

भविष्य में रतलाम में आर्थिक गतिविधियां उड़ान भरने की संभावना, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रसे-वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से तस्वीर बदलेगी

रतलाम  भविष्य में रतलाम में आर्थिक गतिविधियां उड़ान भरने की संभावना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रसे-वे और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर रतलाम की तस्वीर बदलने जा रहे हैं. इसी को देखते हुए रतलाम के बंजली हवाई पट्टी को विस्तारित करने पर जोर है. यहां से बिजनेस जेट्स और कॉमर्शियल फ्लाइट्स उड़ान भरेंगी. मध्य प्रदेश सरकार बंजली हवाई पट्टी पर बिजनेस जेट्स उतारने की तैयारी कर रही है. इसके लिए रविवार को भोपाल से टेक्निकल टीम विशेष विमान से रतलाम पहुंची. टेक्निकल टीम ने किया हवाई पट्टी का निरक्षण टेक्निकल टीम ने बंजली हवाई पट्टी का निरीक्षण किया. हवाई पट्टी को बिजनेस जेट्स की आवाजाही के लिए तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश तकनीकी टीम ने लोक निर्माण विभाग और अन्य सबंधित विभागों को दिए. रतलाम जिले से गुजर रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और यहां बन रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को देखते हुए रतलाम की इस एयर स्ट्रिप पर कॉमर्शियल उड़ानें भी शुरू हो सकेंगी. भोपाल से पहुंची टीम के सीनियर पायलट कैप्टन विश्वास राय ने कहा “निरीक्षण का लक्ष्य हवाई पट्टी के विस्तार और कॉमर्शियल उड़ानों की संभावना को तलाशना है.” रतलाम हवाई पट्टी का विस्तार दो भागों में योजना के अनुसार रतलाम एयर स्ट्रिप की सतह को व्यवस्थित किया जाएगा. दो भागों में एयर स्ट्रिप का विस्तार किया जाएगा. इसके लिए सरकारी भूमि को चिह्नित कर लोक निर्माण और राजस्व विभाग की मदद से हवाई पट्टी के विस्तार की योजना को अमल मे लाया जाएगा. गौरतलब है कि दिल्ली-मुंबई 8 लेन एस्कप्रेस-वे पर रतलाम के पास करीब 1500 हेक्टेयर में नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आकार ले रहा है. ऐसे में रतलाम हवाई पट्टी पर, विमानों का आवागमन बढ़ जाएगा.

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे नवंबर से शुरू होगा निर्माण, मप्र, उप्र और राजस्थान को मिलेगा लाभ, 220 करोड़ स्वीकृत

ग्वालियर  ग्वालियर से आगरा के बीच 4,263 करोड़ रुपये की राशि से प्रस्तावित 88.4 किमी. लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जीआर इंफ्रा से अनुबंध होने के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करानी है। अधिग्रहण के काम में तेजी लाने, मुआवजा वितरण करने के लिए 220 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिल गई है। इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के 14 गांव, राजस्थान के धौलपुर के 30 गांव, मध्य प्रदेश के मुरैना और ग्वालियर सहित कुल 100 गांवों में भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। 88.400 किमी. सड़क सिक्सलेन बनेगी इसके बाद नवंबर माह से ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि मुआवजा वितरण में किसानों की ओर से आपत्तियां लगाई गई हैं, लेकिन एनएचएआई के अधिकारी इनका भी निराकरण करने का दावा कर रहे हैं। इस परियोजना में ग्वालियर से राजस्थान के बीच 88.400 किमी. सड़क सिक्सलेन होगी। एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए दोतरफा तैयारियां चल रही हैं, क्योंकि कंपनी को अब छह माह के अंदर निर्माण कार्य के लिए राशि की व्यवस्था करनी है, तो वहीं एनएचएआई को जमीन उपलब्ध करानी है। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत कंपनी को वर्तमान ग्वालियर-आगरा फोरलेन हाईवे की मरम्मत को प्राथमिकता से करना होगा। ग्वालियर से सीधे आगरा पहुंचाएगा एक्सप्रेस-वे कंपनी को इस पूरे हाईवे का पुनरुद्धार करना है, ताकि जिन वाहनों को ग्वालियर से सीधे आगरा जाना है, वह एक्सप्रेस-वे का सहारा लें। वहीं जिन वाहनों को मुरैना, धौलपुर की ओर जाना है, वे वर्तमान फोरलेन का सहारा ले सकें। कंपनी को वर्तमान हाईवे की मरम्मत के लिए सिर्फ एक साल का समय दिया जाएगा, यानी नवंबर 2026 तक कंपनी को इसकी मरम्मत का काम पूरा करना होगा। मिल चुकी हैं सारी अनुमतियां इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए एनएचएआई द्वारा सरकारी एजेंसियों से सभी अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं। रेलवे, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण, वन विभाग और तीनों राज्यों के राजस्व विभाग से अनुमतियां प्राप्त होने के बाद कार्य में तेजी आई है। अब सिर्फ निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया बाकी रह गई है। चूंकि एनएचएआई को अब राशि स्वीकृत हो चुकी है, ऐसे में अब मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिग्रहण प्रक्रिया अंतिम चरण में     ग्वालियर-आगरा सिक्सलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके लिए लगभग 220 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो गई है। जल्द ही मुआवजा वितरण शुरू किया जाएगा। – प्रशांत मीणा, मैनेजर एनएचएआई।  

प्रदेश में अब एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए एक साथ होंगी भर्तियां, भर्ती प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता

 भोपाल मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए यह बड़ी खबर है. अब सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को अलग-अलग विभागों की अलग-अलग परीक्षाओं से जूझना नहीं पड़ेगा. दरअसल, राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है. सभी विभागों में भर्ती के एक जैसे नियम बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं को नियम समझने में कोई परेशानी न हो.। इसके लिए आदर्श भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। शासन ने इसकी जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी है। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से इस बारे में सुझाव मांगे हैं। दरअसल, प्रदेश में विभिन्न विभागों में अगले दो-तीन साल में करीब ढाई लाख पदों पर भर्तियां होनी हैं। इसके लिए ही सभी विभागों के भर्ती नियम एक जैसे करने का निर्णय लिया गया है, ताकि कोई नियमसंगत समस्या खड़ी न हो। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियमों में भिन्नता है। 2.5 लाख पदों पर होंगी भर्तियां बता दें कि राज्य के अलग-अलग विभागों में आने वाले 2-3 सालों में करीब 2.5 लाख पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इसलिए राज्य सरकार द्वारा सभी विभागों में कर्मचारियों के भर्ती नियम एक समान बनाने का फैसला किया गया है। दरअसल, अब तक कई विभागों में भर्ती के कुछ नियम काफी अलग हैं। इसकी वजह से प्रदेश लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करते हैं और अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। कुछ नियम अलग-अलग हैं मसलन, वन विभाग, शिक्षा विभाग और नगर तथा ग्राम निवेश सेवा भर्ती के कुछ नियम अलग-अलग हैं। इनके आधार पर राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल भर्ती नियम तैयार करके अलग-अलग विज्ञापन निकालते हैं। नियम अलग होने से इन चयन एजेंसियों को विभागवार भर्ती करने में परेशानी होती है और समय भी अधिक लगता है। चूंकि, अब प्रदेश में बड़े पैमाने पर भर्तियां होनी हैं, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि सभी विभागों के भर्ती नियमों में एकरूपता रहे ताकि भर्ती विज्ञापन जारी करने में विलंब न हो। एक जैसी प्रकृति के विभागों के लिए भर्ती एक साथ करवा दी जाएंगी। रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को देंगे अंतिम रूप इससे समय और संसाधन की बचत होगी। इसे देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। सेवानिवृत्त अधिकारियों की एक समिति भी बनाई गई है, जो नियमों का अध्ययन करके रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भर्ती नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। क्या है राज्य सरकार का प्लान? विभागों के कर्मचारियों के भर्ती नियम अलग होने के कारण राज्य की चयन एजेंसियों को भर्ती करने में परेशानी होती है। इसके अलावा, भर्ती के प्रोसेस पर भी काफी समय लगता है। प्रदेश में आने वाले सालों में पैमाने पर विभाग में भर्तियां होने वाली हैं। अगर पुराने नियम से भर्ती हुई तो उसमें काफी समय लगेगा। समय और संसाधन की बचत के लिए प्रदेश में एक नई भर्ती नियमावली बनाई जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमों की समानता सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लागू की जाएगी। ये नियम हो सकते हैं एक समान     उम्र संबंधी।     पात्रता के मानक।     आरक्षण संबंधित मानक।     महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण मानक।     परिवीक्षा अवधि। चयन भर्तियों में किया जा चुके हैं बदलाव बता दें कि हाल ही में राज्य लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं को लेकर कुछ बदलाव किए गए हैं। इनके अंतर्गत अब वर्ष में केवल एक बार होंगी। इससे अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा और फीस नहीं देनी होगी। जनवरी 2026 से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इससे भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और समय पर होगी। यह कदम अभ्यर्थियों के हित में माना जा रहा है।

अमेरिका नहीं चाहता था कि पाकिस्तान बिखर जाए, कर्ज पर टिकी इकॉनमी, भारत के सामने घुटने टेकने पड़े

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 10 मई की शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया और भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हो गया। इसके बाद पाकिस्तान की तरफ से आई तस्वीरों में जश्न का सा माहौल था, जबकि भारत में जैसे चुप्पी साध ली गई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे अपनी जीत बताते हुए पाकिस्तानी सेना को बधाई तक दे डाली। US-चीन एकमत: पाकिस्तान में मनाई जा रही खुशी समझौते की है या फिर इसलिए कि ट्रंप ने हार से बचा लिया? भारत के लोग इसे किस नजरिए से देखें? यह मसला दो देशों के बीच का था, तो ट्रंप ने इसकी घोषणा क्यों की? क्या इसका संदेश यह नहीं जाता कि ट्रंप हर हाल में पाकिस्तान को बचाना चाह रहे थे। वैसे चीन भी नहीं चाहता था कि भारत-पाकिस्तान टकराव जारी रहे क्योंकि कुछ मामलों में उसकी भी भद्द पिट रही थी, अमेरिका ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। तो क्या पाकिस्तान मसले पर अमेरिका और चीन एकमत थे? ट्रंप की बेचैनी: सिद्धांत रूप से चीन के लिए दक्षिण एशिया में पाकिस्तान का वही महत्व है, जो पश्चिम एशिया में अमेरिका के लिए इस्राइल का। अमेरिका भी पाकिस्तान को इसी नजरिए से देख रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी वजह से ट्रंप इतने बेचैन थे? समझौते के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मालिक ने जो ट्वीट किया, उसके कुछ तो मायने हैं, ‘संघर्ष विराम 10 मई 2025 : हमने भारत के भविष्य को यह पूछने के लिए छोड़ दिया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी हमले (22 अप्रैल को पहलगाम में) के बाद अपनी कार्रवाइयों से भारत ने कोई राजनीतिक या रणनीतिक लाभ हासिल किया या नहीं।’ ऐसा ही कुछ पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने भी अपने ट्वीट की अंतिम पंक्ति में लिखा है, ‘ …हम हर बार घटनाओं पर आधारित प्रतिक्रिया देकर अपने लोगों की जान नहीं गंवा सकते। यह तीसरी बार है, अब आगे कोई और मौका नहीं।’ अनसुनी पुकार: ट्रंप के लिए यह खुशी का अवसर हो सकता है, वह दुनिया को यह संदेश देने में कामयाब हो गए कि अमेरिका अब भी दुनिया का लीडर है। उनके विदेश मंत्री ने इसका भरपूर प्रचार भी कर दिया। अमेरिका मानव हानि से बड़ा आहत दिखा। होना भी चाहिए। लेकिन क्या भारत से अधिक कोई राष्ट्र मानवीय संवेदनाओं से संपन्न है? स्पष्टतया नहीं। 1990 के दशक से ही भारत दुनिया को पाकिस्तान की आतंकी हरकतों का सबूत देता चला आ रहा है, पर किसी ने नहीं सुना। लेकिन, जैसे ही 9/11 की घटना हुई, अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ दी। अमेरिका ने जब काबुल में तबाही फैलाई, तो क्या आम अफगानी नहीं मरा? पाकिस्तान पर मौन: काबुल के बाद अमेरिका ने बगदाद को निशाना बनाया, जिसका कोई औचित्य नहीं था। हां, उसे सद्दाम हुसैन की तरफ से कुछ खतरे दिख रहे होंगे, और उसने बगदाद का ध्वंस कर दिया। दुनिया उस समय मौन थी या तालियां बजा रही थी। दुनिया इस बात पर भी मौन रही कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद का एपीसेंटर पाकिस्तान है, और उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ। आतंक की जड़: यह स्थापित हो चुका है कि पाकिस्तान ही एशिया में आतंकवाद की जड़ है। लेकिन, अमेरिका ने अफगान वॉर में उसे सिपहसालार बना लिया था। यह बात तो अमेरिकी सेना के जनरल डेविड पेट्रास ने भी कही थी कि अल-कायदा, पाकिस्तानी तालिबान, अफगान तालिबान, TNSM (तहरीक-ए-नफज-ए-शरीयत-ए-मोहम्मदी) के बीच सिम्बियोटिक रिलेशनशिप है, फिर भी अमेरिका खामोश रहा। दबाव बढ़ रहा था: अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरें बता रही थीं कि पाकिस्तान काफी दबाव में है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने लिखा था, ‘भारत ने आतंकी संगठनों पर कार्रवाई कर पाकिस्तान को यह संदेश दिया है कि अब वह ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान अंदरूनी समस्याओं से जूझ रहा है। इमरान खान जेल में हैं, चुनाव विवादित रहे हैं। देश आर्थिक संकट में है…।’ पाकिस्तान में घबराहट: वहां तख्तापलट या मार्शल लॉ लागू होने की आशंकाएं जोर पकड़ रही थीं। टॉप लीडर और वरिष्ठ सैन्य अफसर अपना पैसा विदेश भेजने लगे थे। पाकिस्तान के स्टेट बैंक की जांच में यह बात पता चली। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के ओपन एक्सचेंज मार्केट से डॉलर मिलना मुश्किल होने लगा था। उसके पास 12 दिन का आयात बिल चुकाने भर का विदेशी मुद्रा भंडार ही बचा था। अगर IMF से बेलआउट पैकेज की अगली किस्त न जारी होती, तो पाकिस्तान की आर्थिक गतिविधियां ही ठप पड़ जातीं। अब सवाल है कि जिस IMF में अमेरिकी इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, वहां भारत के विरोध के बाद भी पाकिस्तान को कर्ज मिल जाना क्या संकेत देता है? बिखरने से बचाया: अमेरिका को अच्छी तरह मालूम था कि कर्ज पर टिकी इकॉनमी की वजह से पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़ेंगे। अमेरिका नहीं चाहता था कि ऐसा हो और पाकिस्तान बिखर जाए। ऐसे तो दक्षिण एशिया में भारत के लिए कोई चुनौती ही नहीं रह जाती। अमेरिका को यह स्वीकार नहीं था। उसे पाकिस्तान को बचाना था और इसका एक ही रास्ता था, समझौता।

भारत के हमले से रहीम यार खान एयरबेस का रनवे तहस-नहस, एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित

लाहौर पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान रहीम यार खान एयरबेस अब काम नहीं कर पा रहा है. भारत की ओर से किए गए जवाबी हमले ने इस एयरपोर्ट के रनवे को तहस-नहस कर दिया है. अब पाकिस्तान ने फिलहाल एक सप्ताह के लिए इस एयरबेस को एक सप्ताह के लिए नॉन ऑपरेशनल घोषित कर दिया है. पाकिस्तान ने इस बाबत नोटम (NOTAM) नोटिस टू एयरमैन जारी किया है. ये नोटिस पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने शनिवार शाम को जारी किया है. ये नोटम 10 मई को पाकिस्तानी समय के अनुसार 4 बजे शाम से प्रभावी हो गए हैं और 18 मई 5 बजे तक प्रभावी रहेगा. यानी कि इतने समय तक रहीम यार खान नूर बेस काम नहीं करेगा. पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि बंद करने का कारण वर्क इन प्रोग्रेस है. लेकिन पाकिस्तान ने शातिराना चालाकी करते हुए ये नहीं बताया है कि वो जंग जैसे इतने अहम समय में अपने सैन्य हवाई अड्डे पर क्या काम कर रहा है. नोटम में कहा गया है कि फिलहाल ये एयरबेस उड़ान के लिए संचालित नहीं होगा. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दक्षिणी भाग में इस महत्वपूर्ण एयरबेस को अस्थायी रूप से बंद करना और बंद करने का समय और इसकी टाइमिंग इस एयरबेस पर भारत की ओर से किए गए तगड़े हमले की पुष्टि करती है. रहीम यार खान एयरबेस, जिसे आधिकारिक तौर पर शेख जायद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Shaikh Zayed International Airport) के नाम से जाना जाता है, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रहीम यार खान शहर के पास स्थित है. यह हवाई अड्डा शहर से लगभग 4.6 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है. रहीम यार खान एयरबेस पर हमले का असर रविवार शाम को ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े एक ब्रीफिंग में, भारतीय वायु सेना ने उपग्रह चित्रों से पुष्टि की कि रहीम यार खान वायु सेना अड्डे के रनवे पर भारत ने स्ट्राइक किया था. इस हमले में ये हवाई अड्डा तबाह हो गया था. नोटम के लिए जारी इस मैसेज में लिखा गया है. “RWY NOT AVBL FOR FLT OPERATION WIP” अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के अनुसार, NOTAM में कोड ‘WIP’ का उपयोग प्रगति पर चल रहे कार्य को दर्शाता है. अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) के अनुसार, ‘WIP’ हवाई अड्डे की सतह पर किए जा रहे किसी भी कार्य को दर्शाता है. यह देखते हुए कि NOTAM में विशेष रूप से एयरबेस पर रनवे का उल्लेख किया गया है, यह दर्शाता है कि रनवे पर ही प्रगति पर काम चल रहा है. रहीम यार खान एयरबेस में शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है. फ्लाइटराडार24 पर उपलब्ध एयरपोर्ट डेटा के अनुसार, इसका एकमात्र रनवे- रनवे 01/19- बिटुमिनस सरफेस वाला है और इसकी लंबाई 3,000 मीटर या 9,843 फीट है. यूं तो इस एयरपोर्ट को पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी (PCAA) द्वारा संचालित किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग पाकिस्तान वायु सेना (PAF) द्वारा भी सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है. बता दें कि 10 मई को पाकिस्तानी हमले का जवाब देते हुए भारत ने पड़ोसी मुल्क के कई सैन्य एयरपोर्ट को निशाना बनाया. भारत के मिसाइल हमले में रफीकी, मुरीद, चकलाला, सुक्कुर, रहीम खान एयरबेस, चुनियां एयरबेस, नूर खान एयरबेस, सरगोधा एयरबेस को मुख्य रूप से निशाना बनाया. भारत के हमले में रहीम खान एयरबेस को तगड़ा नुकसान पहुंचा था. और इसकी हवाई पट्टी पर बड़ा गड्ढ़ा बन गया था. अब पाकिस्तान इन मलबों को साफ कर रहा है. और गड्ढे की मरम्मत कर रहा है. एयरबेस का मुख्य रनवे जो लगभग 3,000 मीटर लंबा है, पूरी तरह से तबाह हो गया. सैटेलाइट इमेजरी और वीडियो फुटेज में रनवे पर बड़ा गड्ढा दिखाई देता है. रिपोर्ट के अनुसार भारत के हमलों में एयर ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर और दो हैंगर तबाह हो गए. रडार यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा, जिससे एयरबेस की संचालन क्षमता अस्थायी रूप से ठप हो गई है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने दावा किया कि भारत ने इन एयरबेसों पर अपने फाइटर जेट्स से एयर-टू-सरफेस मिसाइलें दागीं. भारत ने रविवार को कहा है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 आतंकी मारे गए हैं. जबकि 40 से 50 पाकिस्तानी जवान और अधिकारी मारे गए हैं.  

भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार, मृत्यु दर 130 से घटकर 93 हुई

नई दिल्ली भारत में मातृ और शिशु मृत्य दर में वर्ष 2014 से 2021 के बीच बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्वास्थ्य एवं परिवारण कल्याण मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014-16 के दौरान जो मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख पर 130 थी वह 2021 में घटकर 93 रह गई है। इसी तरह शिशु मृत्यु दर में भी कमी आई है। 2014 में प्रति एक हजार शिशुओं में 39 की मौत होती थी जो अब घटकर 27 रह गई है। यह जानकारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) की ओर से जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट में दी गई। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह 2030 तक मातृ मृत्यु दर को 70 तक कम करने के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आठ राज्यों केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), और कर्नाटक (63) ने पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। इन राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और मातृ देखभाल सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं। नवजात मृत्यु दर में आई कमी नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में 26 से घटकर 2021 में 19 हो गई, जबकि पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 45 से घटकर 31 हो गई। ये संकेतक भारत में नवजात और बच्चों की देखभाल में महत्वपूर्ण प्रगति के दर्शाते हैं। इसके अलावा, जन्म के समय लिंगानुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया। यह लैंगिक संतुलन में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल प्रजनन दर (टीएफआर) भी 2014 में 2.3 से घटकर 2021 में 2.0 पर स्थिर रही, जो जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में प्रगति को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर भारत का बेहतर प्रदर्शन संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान इंटर-एजेंसी समूह (यूएन-एमएमईआईजी) की 2000-2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एमएमआर 2020 से 2023 तक 23 अंक कम हुआ। 1990 से 2023 तक भारत में एमएमआर में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी केवल 48 प्रतिशत थी। संयुक्त राष्ट्र शिशु मृत्यु अनुमान समूह (यूएन-आईजीएमई) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यू5एमआर में 78 प्रतिशत, एनएमआर में 70 प्रतिशत, और आईएमआर में 71 प्रतिशत की कमी दर्ज की, जो वैश्विक औसत से कहीं अधिक है। वहीं सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 और 2021 में भारत की अतिरिक्त मृत्यु दर 9.3% रही। आयुष्मान भारत को क्रेडिट इस प्रगति का श्रेय सरकार की आयुष्मान भारत को दिया जा सकता है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य गारंटी कार्यक्रम है। इसके तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक की वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाता है। मंत्रालय ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य इकाइयों, जैसे मातृ प्रतीक्षा गृह, मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग, ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), और नवजात स्थिरीकरण इकाइयों (एनबीएसयू) की स्थापना पर ध्यान केंद्रित किया है। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफ्त संस्थागत प्रसव, सिजेरियन डिलीवरी, मुफ्त परिवहन, दवाएं, निदान, और पोषण सहायता सुनिश्चित की गई है। वहीं, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 26 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 19 हो गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) 2014 में प्रति 1000 जन्मों पर 45 से घटकर 2021 में प्रति 1000 जन्मों पर 31 हो गई है। जन्म के समय लिंग अनुपात 2014 में 899 से सुधरकर 2021 में 913 हो गया है। कुल प्रजनन दर 2021 में 2.0 पर स्थिर है, जो 2014 में 2.3 से उल्लेखनीय सुधार है। एसआरएस 2021 रिपोर्ट के अनुसार, देश में केरल (20), महाराष्ट्र (38), तेलंगाना (45), आंध्र प्रदेश (46), तमिलनाडु (49), झारखंड (51), गुजरात (53), कर्नाटक (63)। राज्य पहले ही एमएमआर (2030 तक <=70) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। वहीं, बारह (12) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही यू5एमआर (2030 तक <=25) का एसडीजी लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं- केरल (8), दिल्ली (14), तमिलनाडु (14), जम्मू और कश्मीर (16), महाराष्ट्र (16), पश्चिम बंगाल (20), कर्नाटक (21), पंजाब (22), तेलंगाना (22), हिमाचल प्रदेश (23), आंध्र प्रदेश (24) और गुजरात (24)। इसके अलावा, 6 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पहले ही एनएमआर का एसडीजी लक्ष्य (वर्ष 2030 तक <=12) प्राप्त कर चुके हैं, जिसमें शामिल हैं -केरल (4), दिल्ली (8), तमिलनाडु (9), महाराष्ट्र (11), जम्मू और कश्मीर (12) और हिमाचल प्रदेश (12)। दरअसल, सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं को गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी देने के लिए एकीकृत किया गया है। यह पूरी तरह से निःशुल्क है। इसमें देखभाल से इनकार करने के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है। वहीं, आयुष्मान भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य आश्वासन पहल है जो प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है, जिससे वित्तीय सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित होती है। केंद्रित सहयोग यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में निःशुल्क परिवहन, दवा, निदान और पोषण सहायता के साथ-साथ सीजेरियन सेक्शन सहित नि:शुल्क संस्थागत प्रसव का अधिकार हो। समावेशी और न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, मंत्रालय ने मातृत्व प्रतीक्षा गृह, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयाँ (एचडीयू)/गहन देखभाल इकाइयाँ (आईसीयू) नवजात शिशु स्थिरीकरण इकाइयाँ (एनबीएसयू), बीमार नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ (एसएनसीयू), माँ-नवजात शिशु देखभाल इकाइयाँ, और जन्म दोषों की जाँच के लिए समर्पित कार्यक्रम स्थापित करके स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है। वहीं, समय से पहले प्रसव के लिए प्रसवपूर्व कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स की व्यवस्‍था, निरंतर सकारात्मक वायुमार्ग दबाव (सीपीएपी) का उपयोग, और सुनने और दृष्टि की जांच के लिए संरचित अनुवर्ती जैसी प्रमुख नैदानिक ​​व्‍यवस्‍थाएं नवजात शिशु के जीवित रहने के परिणामों में सुधार करने में योगदान करती हैं। इन उपायों से सालाना लगभग 300 लाख सुरक्षित गर्भधारण और 260 लाख स्वस्थ जीवित जन्म होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समता मूलक समाज से हम उन्नति, विकास और सबके कल्याण के मार्ग प्रशस्त कर सकते

भगवान बुद्ध के आदर्शों का अनुसरण करने वाला एकमात्र देश है भारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समता मूलक समाज, प्रेम ,करुणा और सत्य की आधारशिला पर ही समाज की तरक्की संभव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मुख्यमंत्री ने कहा कि समता मूलक समाज से हम उन्नति, विकास और सबके कल्याण के मार्ग प्रशस्त कर सकते मुख्यमंत्री ने बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध को नमन कर अर्पित किये पुष्प भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन से ज्ञान लेकर हम सारे भारतीय आगे बढ़ रहे हैं और विश्व बंधुत्व को अपनाते हुए प्रेम ,करुणा, सत्य, समता के भाव को आगे बढा रहे हैं। भगवान बुद्ध राज-पाट छोड़कर जब ज्ञान की खोज मे निकले थे और कठिन तप के बाद जो ज्ञान विश्व को दिया, उसका अनुसरण ही हम सबका उदेश्य होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि समता मूलक समाज से हम उन्नति, विकास और सबके कल्याण के मार्ग प्रशस्त कर सकते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन के अशोक बुद्ध विहार में बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भारती बौद्ध महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी को भगवान बुद्ध जयंती पर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मप्र में सांची, बुद्ध धर्मावलंबियों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। उनके लिए सांची आना सौभाग्य की बात है। बुद्ध सर्किट में सांची का प्रमुख स्थान है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय खगोल विज्ञान के अनुसार निर्धारित की गई तिथि, पूर्णिमा अपने आप में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध और संत रविदास जी के साथ ही अन्य बड़े संत, महात्माओं का जन्म हुआ है। पूर्णिमा पर जब चंद्रमा की 16 कलाएं पूर्ण हो जाती हैं तो एक दिव्य प्रकाश निकलता है। ऐसे महापुरुषों ने पूर्णिमा के दिन जन्म लेकर अपने ज्ञान के प्रकाश से विश्व को रौशन किया है। विश्व में भारतीय ज्ञान परंपरा ही ऐसी परंपरा है, जो ऐतिहासिक काल से लेकर वर्तमान समय तक अक्षुण्ण है। सबसे बड़ी बात है कि समाज के लिए आज भी प्रासंगिक है। 5000 साल से भी अधिक पुराने हमारे ज्ञान को आज भी कोई चैलेंज नहीं कर पाया है। भारत विश्व गुरु है, विश्व गुरु रहेगा। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालुहेड़ा, विधायक सतीश मालवीय, सभापति श्रीमति कलावती यादव, जनप्रतिनिधि संजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री ने उज्जैन में संत कंवरराम जी की प्रतिमा का किया अनावरण

उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संतो का जीवन और आदर्श हमेशा अनुकरणीय होते हैं, जैसे सूर्य स्वयं जलकर हम सबको प्रकाश देता है ,वैसे ही संत भी स्वयं तप कर हम सबके जीवन को ज्ञान और आनंद से प्रकाशित करते हैं । संत कंवरराम जी भी ऐसे ही एक महान संत थे । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को उज्जैन की सिंधी कॉलोनी अलखधाम नगर के सार्वजनिक उद्यान में संत कंवरराम जी की प्रतिमा का अनावरण समारोह में यह बात कही। उन्होनें समर्थ सेवा संस्थान के द्वारा आयोजित दिव्यांग जनों को नि:शुल्क हवाई यात्रा करवाने पर बने गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के प्रमाण पत्र का वितरण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का दिन अत्यंत शुभ दिन है। आज वैशाख माह की पूर्णिमा है। आज बुध्द पूर्णिमा है। संत कंवरराम जी ने लोगों को सच्चाई और नैतिकता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। वे सबको साथ में लेकर चलने में विश्वास रखते थे । इस उद्यान में संत कंवरराम जी की प्रतिमा स्थापना से सबको उनका आर्शिवाद मिलता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरपालिका निगम के अधिकारियों से कहा कि उद्यान का नियमित रुप से रख-रखाव किया जाए। उन्होंने अलखधाम नगर के उद्यान को आदर्श उद्यान बनाए जाने के लिए शासन की ओर से सहयोग राशी प्रदान करने की घोषणा भी की। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दिव्यांग जनों को नि:शुल्क धार्मिक यात्रा के प्रमाण पत्र वितरण के पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दिव्यांग जनों की सेवा ईश्वर की सेवा के समान है। समर्थ सेवा संस्थान के द्वारा यह एक अत्यंत प्रशंसनीय कार्य किया गया है जो की सबके लिए अनुकरणीय भी है। उल्लेखनीय है की समर्थ सेवा संस्थान के द्वारा अब तक 47 दिव्यांग जनों को धार्मिक हवाई यात्रा नि:शुल्क करवाई गई है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने अपनी ओर से संस्था के पदाधिकारीयों को शुभकामनाऐं दी। कार्यक्रम में श्याम माहेश्वरी ने संस्थान के बारे में जानकारी प्रदान की। दौलत खेमचंदानी के द्वारा संत कंवरराम जी का जीवन परिचय दिया गया। उन्होनें बताया कि संत कंवर राम जी एक प्रसिद्ध भारतीय संत और कवि थे, जिन्होंने भक्ति साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कविताओं में जीवन के मूल्यों, प्रेम, और अध्यात्म की गहराई को व्यक्त किया गया है। संत कंवर राम जी का जन्म राजस्थान में हुआ था। उनकी कविताओं में सादगी, प्रेम, और अध्यात्म की भावना देखने को मिलती है। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ आवाज उठाई। संत कंवर राम जी की कविताओं में जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। उनकी रचनाओं में प्रेम, भक्ति, और अध्यात्म की भावना प्रमुख है। उनकी कविताएं लोगों को प्रेरित करती हैं और जीवन के मूल्यों को समझने में मदद करती हैं। संत कंवर राम जी की विरासत आज भी जीवित है। उनकी कविताएं और शिक्षाएं लोगों को प्रेरित करती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मदद करती हैं। इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेडा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापती श्रीमती कलावती यादव, संजय अग्रवाल, समर्थ सेवा संस्थान के अध्यक्ष श्याम माहेश्वरी, किशोर खंडेलवाल, वासु केसवानी, वट्ठिल नागर, दिपक बेलानी, रवि सोलंकी, महेश परियानी, गोल्डन बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के पदाधिकारी मनीश विश्नोई एवं अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे।  

सिंहस्थ-2028 के कार्यों की मॉनिटरिंग में करें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल: मुख्यमंत्री डॉ.यादव

साधु, संत और श्रद्धालुओं की आस्था को सर्वोपरि रख करें सिंहस्थ 2028 के सभी कार्य: मुख्यमंत्री डॉ.यादव सिंहसथ-2028 में श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाकर किया जा रहा यातायात सुगम सिंहस्थ-2028 के कार्यों की मॉनिटरिंग में करें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने की उज्जैन में सिंहस्थ के कार्यों समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 2028 की तैयारी में साधु-संत और श्रद्धालुओं की भावनाओं को सर्वोपरि रखकर कार्य योजना को पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ – 2028 के प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा करते हुए उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य प्रशासनिक संकुल भवन कलेक्टर कार्यालय सभागृह में अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्य योजना की जानकारी लेकर कहा कि सभी कार्य समय-सीमा में गुणवत्ता और मापदंडों के अनुसार हो। सभी कार्यों में निर्माण एजेंसियां समन्वय बनाकर कार्य करें, जिससे श्रद्धालुओं को सिंहस्थ-2028 का अनुभव आस्थामय, भव्य और अलौकिक हो। सिंहस्थ निर्माण कार्यों में शहर के आसपास सड़कों का जाल बिछाकर यातायात सुगम किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए संपूर्ण मेला क्षेत्र की कनेक्टविटी 4 लेन और 6 लेन मार्गों से की जा रही है। सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे आवश्यक मार्ग चौड़ीकरण के कार्यों में सभी गणमान्य नागरिकों का भी विशेष ध्यान रखते हुए कार्य करें। आवश्यक मार्गों पर एलिवेटेड ब्रिज बनाए जाएंगे जिससे नीचे व्यापार प्रभावित ना हो और ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सभी सिंहस्थ कार्यों की मॉनिटरिंग आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल कर करें, जिससे कार्य की भौतिक प्रगति के साथ कार्य की गुणवत्ता का आंकलन भी हो सके। सिंहस्थ-2028 अंतर्गत रेलवे से समन्वय बनाकर शासन के सभी आवश्यक विभाग इंटीग्रेटेड कार्य योजना बनाए, जिससे श्रद्धालुओं का आवागमन सुव्यवस्थित रूप से हो सके। उन्होंने केंद्रीय मदद की आवश्यकता होने पर केन्द्र सरकार संबंधित सभी महत्वपूर्ण कार्यों की सूची बनाने के निर्देश दिए। श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने मेडिकल टूरिज्म हब बनाया जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए मेले में आर्मी भी मौजूद रहेगी। सभी मुख्य देव-स्थानों को जल्द ही देवलोक के रूप में विकसित करने की कार्य योजना बनाए। उज्जैन में न्यायपालिका द्वारा भी न्यायिक संस्था शुरू की जाएगी। उन्होंने इसके लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। मेडिसिटी मेडिकल कॉलेज निर्माण की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रध्दालुओं को स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए जिले को मेडिकल टूरिज्म का हब बनाने के लिए योगा, वेलनेस, नेचुरोपैथी, एलोपैथी और आयुर्वेद के केंद्रों के साथ मेडिकल डिवाइस उद्योग, फार्मा कंपनियों और मेडिकल रिसर्च संस्थाओं को साथ लेकर एकीकृत कार्ययोजना तैयार करें। नगर निगम और अन्य संस्थाएं भी अपने मद से किए जाने वाले शहर के कार्य निरंतर करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा। बैठक में संभागायुक्त संजय गुप्ता, सिंहस्थ मेंला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने जानकारी दी कि सिंहस्थ कार्ययोजना में अब तक 153 कार्य स्वीकृत व प्रगतिरत है, जिनकी लागत 23,332 करोड़ रुपए है, जिसमें सिंहस्थ मद से 3,728 करोड़ के 78 कार्य और विभागीय मद से 19,604 करोड़ के कार्य है। अब तक 27 कार्य प्रारंभ हो चुके है, 94 कार्य निविदा प्रक्रियाधीन है और 32 कार्य प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। उक्त कार्यों में भवन विकास निगम द्वारा मेडिसिटी मेडिकल कॉलेज का निर्माण 592.3 करोड़ की लागत से किया जा रहा है। अब तक 4.5 प्रतिशत भौतिक कार्य पूर्ण हो चुका है। जलसंसाधन विभाग के 778.91 करोड़ की लागत राशि से घाट निर्माण संबंद्ध कार्य, 920 करोड़ की लागत का कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना में 31.70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। साथ ही 614.53 करोड़ की सेवरखेडी-सिलारखेड़ी परियोजना में 23.60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पेारेशन द्वारा हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल अंतर्गत प्रगतिरत 1692 करोड़ राशि का 44.4 कि.मी लंबाई का इंदौर – उज्जैन 6 लेन मार्ग का 13.64 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है, 195 करोड़ राशि का 44.14 कि.मी लंबाई का महिदपुर-घोसला मार्ग का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। 5,017 करोड़ की राशि का 98.41 कि.मी लंबाई का उज्जैन – जावरा 4 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस कंट्रोल हाई-वे का निर्माण किया जा रहा है। श्रध्दालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन-मक्सी मार्ग, उज्जैन सिंहस्थ बायपास मार्ग, इंगोरिया-उन्हेल मार्ग और इंदौर-उज्जैन वैकल्पिक मार्ग का भी निर्माण किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा 58 करोड़ की राशि का 8.80 कि.मी लंबाई का नागझिरी दताना मार्ग का 65 प्रतिशत कार्य और 13.45 करोड़ की राशि का सदावल हेलीपेड का 45 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। 225 करोड़ राशि का हरिफाटक लालपुल मुरलीपुरा व्हाया शंकराचार्य चौराहा से चंदूखेडी मार्ग निर्माण,12.5 कि.मी लंबाई का क्षिप्रा नदी पर अतिरिक्त पुल, 4.5 कि.मी लंबाई का लालपुल से चिंतामन गणेश मार्ग और 78 करोड़ राशि का 31.75 कि.मी लंबाई का करोहन से नईखेड़ी (पंचक्रोशी मार्ग), 67 करोड़ राशि का 22.19 कि.मी लंबाई का उज्जैन बडनगर बायपास,129.80 करोड़ राशि का 5.40 कि.मी लंबाई का वाकडकर ब्रिज से दाउदखेडी मार्ग, 4.50 कि.मी लंबाई का तपोभूमी से हामूखेडी मार्ग, 2.10 कि.मी लंबाई का रणजीत हनुमान से सिहस्थ बायपास व्हाया गोन्सा मार्ग, एक कि.मी लंबाई का अंगारेश्वर महादेव मंदिर पहुँच मार्ग, 45.88 करोड़ की राशि का 4.6 कि.मी की लंबाई का बड़ा पुल रंजीत हनुमान मोजमखेडी मार्ग, 0.9 कि.मी की लंबाई का मोजमखेडी से कालभैरव मार्ग और 6.11 करोड़ की राशि का 1.10 कि.मी का मंगलनाथ से चक्कमेड मार्ग का निर्माण किया जाना है। इसके अतिरिक्त कुल 56 कार्य अनुशंसित किए गए है, जिसमें सिंहस्थ मद से 1813 करोड़ 24 लाख और विभागीय मद से 1441 करोड़ 85 लाख के कार्य उज्जैन, मंदसौर, शाजापुर, देवास, आगर मालवा, रतलाम, नीमच, इंदौर, खण्डवा और खरगोन जिलों में किए जाना है। बैठक में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, जनप्रतिनिधि संजय अग्रवाल,रवि सोलंकी, राजेंद्र भारती, डीआईजी नवनीत भसीन, पुलिस अधिक्षक प्रदीप शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।  

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