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इंदौर शहर के मुख्य मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लग्जरी एसी इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी, नौ बस डिपो होंगे अपडेट

इंदौर  एबी रोड पर 12 वर्ष पहले बनाए गए 11.5 किमी लंबे बीआरटीएस कॉरिडोर को तोड़कर रोड साइड 40 बस स्टाप बनाए जाएंगे। इसके साथ ही एआईसीटीएसएल (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड) अब धीरे-धीरे कॉरिडोर से बनी सेवाएं भी बंद करने जा रही है, जिसकी शुरुआत सीएनजी आई-बसों को बंद करने के साथ हो चुकी है। गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में निर्णय लिया गया कि जल्द ही टेंडर अवार्ड होते ही कॉरिडोर को तोड़ने का काम भी शुरू हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि 27 फरवरी को हाई कोर्ट ने बीआरटीएस को तोड़ने की अनुमति दे दी थी। आदेश के बाद शिवाजी वाटिका से जीपीओ चौराहे के बीच रेलिंग भी हटा दी गई थी। बीआरटीएस पर बने बस स्टाप बंद हो जाएंगे एआईसीटीएसएल अब बीआरटीएस पर सीसीटीवी कैमरों, आटोमैटिक डोर के संचालन व रखरखाव संबंधी कार्य, ट्रैफिक सिग्नल मेंटेनेंस, आई-बस स्टाप, रेलिंग, लॉलीपाप, यूनिपोल, स्ट्रीट लाइट पोल पर कियोस्क के माध्यम से विज्ञापन का काम कर रही एजेंसी को नोटिस जारी कर बंद किया जा रहा है। आगामी माह से बस स्टाप पर तमाम सुविधाएं बंद हो जाएंगी। वर्तमान में बीआरटीएस पर बने 20 मीडियन बस स्टाप को हटाकर एबी रोड पर दोनों 20-20 बस स्टाप बनाए जाने हैं, जिसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। इसके साथ ही एआईसीटीएसएल अपनी आय बढ़ाने के लिए एबी रोड के इस हिस्से में विज्ञापन योजना बनाएगा। मुख्य रूट पर दौड़ेगी लग्जरी एसी ई-बस बैठक तय किया गया कि शहर के मुख्य मार्ग पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लग्जरी एसी इलेक्ट्रिक बस चलाई जाएंगी। इसके लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही शहर में बने नौ बस डिपो को अपडेट करने के लिए नगर निगम और आईडीए से फंड लेकर काम किया जाएगा। सिटी बस के रूट रेशनलाइजेशन कर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। बैठक में एआईसीटीएसएल सीईओ दिव्यांक सिंह सहित अन्य अफसर मौजूद थे।

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड ‘एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट’ प्रोजेक्ट पर काम कर रहा, मिलेंगी ये खास सुविधाएं

भोपाल 18 अप्रैल 2025 को पूरी दुनिया में विश्व धरोहर दिवस मनाया . भारत हमेशा से ही पूरी दुनिया में धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का गढ़ रहा है. लेकिन, Madhya Pradesh में प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक धरोहरें, संस्कृति और गौरवशाली परंपराएं हमेशा से ही दुनिया भर के Tourists को आकर्षित करती रही हैं. प्रदेश के ये स्थल न केवल मन को सुकून देते हैं, बल्कि मानव सभ्यता, कला, कौशल से आज की पीढ़ी को अवगत कराते हैं. प्रदेश की इन धरोहरों तक प्रत्येक व्यक्ति की पहुंच को सुलभ बनाने के उद्देश्य से MP Tourism Board एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत महेश्वर, मांडू, धार व ओरछा में रैंप, ब्रेल साइन बोर्ड, व्हीलचेयर, आदि सुविधाओं से दिव्यांगों की पहुंच आसान व सुलभ बनाई जाएगी. दिव्यांगों के लिए खास सुविधा प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और प्रबंध संचालक एमपी टूरिज्म बोर्ड शिव शेखर शुक्‍ला ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश के अधिक से अधिक स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की स्थायी सूची में शामिल कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. ऐतिहासिक धरोहरों के सुलभता से दर्शन के अभिलाषी दिव्यांगों के लिए टूरिज्म बोर्ड पर्यटन स्थलों का कायाकल्प करेगा. बोर्ड प्रारंभिक तौर पर महेश्वर, मांडू, धार और ओरछा में एक्सेसिबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट परियोजना पर कार्य कर रहा है. इन स्थानों पर मिलेंगी विशेष सुविधाएं       महेश्वर : महेश्वर में मध्य प्रदेश टूरिज्म नर्मदा रिसॉर्ट, राम कुंड, देवी संग्रहालय, कालेश्वर मंदिर, जलेश्वर मंदिर और कमानी गेट पर  विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे.     मांडू : मांडू में मध्य प्रदेश टूरिज्म रिसॉर्ट, सात कोठरी मंदिर, दिल्ली दरवाजा, मालवा रिसॉर्ट, मलिक दीनार मस्जिद, धर्मशाला, होशंगशाह का मकबरा, जामी मस्जिद, अशरफी महल, नीलकंठ मंदिर, दरिया खान का मकबरा, दाई का महल, लाल महल, संग्रहालय, ईको–पॉइंट, बाज बहादुर और रूपमति पेवेलियन में दिव्यांगों की सुविधा के दृष्टिगत कायाकल्प किया जाएगा.       धार : धार में “बाघ की गुफाओं” के अंतर्गत अलग–अलग गुफाओं और बाघ संग्रहालय में  निर्माण कार्य किए जाएंगे.         ओरछा : ओरछा में राजा महल, तमिरत की कोठी, जहांगीर महल, तीन दासियों की छतरी, पंचमुखी महादेव मंदिर और राय प्रवीण महल में  दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी. प्रदेश के 18 स्थल यूनेस्को सूची में एमपी में यूनेस्को द्वारा घोषित 18 धरोहरों है, जिसमें तीन स्थाई और 15 टेंटेटिव सूची में है. यूनेस्को की स्थायी विश्व धरोहर स्थल की सूची में प्रदेश के खजुराहो के मंदिर समूह, भीमबेटका की गुफाएं एवं सांची स्तूप शामिल हैं. गौरतलब है कि यूनेस्को ने इस वर्ष प्रदेश की चार ऐतिहासिक धरोहरों को सीरियल नॉमिनेशन के तहत टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया है. सम्राट अशोक के शिलालेख, चौंसठ योगिनी मंदिर, गुप्तकालीन मंदिर और बुंदेला शासकों के महल और किले को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में घोषित होना प्रमाणित करता है कि एमपी अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश में विशेष स्थान रखता है. ग्वालियर किला, बुरहानपुर का खूनी भंडारा, चंबल घाटी के शैल कला स्थल, भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर, मंडला स्थित रामनगर के गोंड स्मारक और धमनार का ऐतिहासिक समूह, मांडू में स्मारकों का समूह, ओरछा का ऐतिहासिक समूह, नर्मदा घाटी में भेड़ाघाट-लमेटाघाट, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और चंदेरी भी टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हैं. मौर्य कालीन अशोक के शिलालेख मौर्य कालीन शासक सम्राट अशोक को भला कौन नहीं जानता, जिन्होंने न केवल बौद्ध धर्म का प्रचार किया बल्कि कुशल शासन और नैतिकता का संदेश भी दिया. यही संदेश प्रदेश के शिलालेखों में नजर आते हैं. इन शिला और स्तंभ लेखों में सम्राट अशोक से संबंधित संदेश 2200 से अधिक वर्षों से संरक्षित हैं. सांची स्तंभ अभिलेख, जबलपुर में रूपनाथ लघु शिलालेख, दतिया में गुज्जरा लघु शिलालेख और सीहोर में पानगुरारिया लघु शिलालेख को इसमें शामिल किया गया है. चौंसठ योगिनी मंदिर हिन्दू धर्म में मां जगतजननी को सुख और समृद्धि दायिनी माना जाता है. हजारों वर्षों से धर्म स्थलों में मां की प्रतिमा को स्थापित कर श्रद्धालु उनके प्रति आस्था भाव से पूजन–अर्चन करते आए हैं. माता की आराधना का ऐसे ही स्थल हैं चौंसठ योगिनी मंदिर. 9वीं से 12वीं शताब्दी के बीच निर्मित यह मंदिर तांत्रिक परंपराओं का प्रतीक है. इन मंदिरों की गोलाकार, खुले आकाश के नीचे बनी संरचनाएं, जटिल शिल्पकला और आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय हैं. इसमें खजुराहो, मितावली (मुरैना), जबलपुर, बदोह (जबलपुर), हिंगलाजगढ़ (मंदसौर), शहडोल और नरेसर (मुरैना) के चौसठ योगिनी मंदिर को शामिल किया गया है. गुप्तकालीन मंदिर प्रदेश में सांची, उदयगिरि (विदिशा), नचना (पन्ना), तिगवा (कटनी), भूमरा (सतना), सकोर (दमोह), देवरी (सागर) और पवाया (ग्वालियर) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर को यूनेस्को द्वारा शामिल किया गया है. गुप्तकालीन मंदिर भारतीय मंदिर वास्तुकला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाते हैं. मंदिर उत्कृष्ट नक्काशी, शिखर शैली और कलात्मक सौंदर्य को प्रदर्शित करते हैं. बुंदेला काल के किला-महल बुंदेला काल के गढ़कुंडार किला, राजा महल, जहांगीर महल, दतिया महल और धुबेला महल, राजपूत और मुगल स्थापत्य कला के बेहतरीन संगम को दर्शाते हैं. ये महल बुंदेला शिल्पकला, सैन्य कुशलता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अद्भुत मिसाल हैं

महू तहसील के 18 गांव से होकर गुजरेगी इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन, 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क होगा

 इंदौर इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए इस बार बजट में 267.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस राशि से प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। मप्र के तीन जिलों के 77 गांव से होकर रेल लाइन गुजरेगी। नवंबर-2024 में रेल मंत्रालय ने इन 77 गांव की जमीन अधिग्रहण करने के लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया था। इसके बाद इसी वर्ष मंत्रालय ने इंदौर जिले की महू तहसील के 18 गांवों की सूची जारी की थी। यह नई रेल लाइन से धार(Dhar), खरगोन(Khargone) और बड़वानी(Barwani) जिलों के आदिवासी अंचल के लिहाज से महत्वपूर्ण है। परियोजना से लगभग एक हजार गांव और 30 लाख आबादी का रेल सेवाओं से सीधा संपर्क होगा। अनुमान के मुताबिक प्रोजेक्ट पूरा होने पर 16 जोड़ी से ज्यादा पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होगा, जिनमें 50 लाख यात्री शुरुआती वर्षों में सफर करेंगे। हर साल इस प्रोजेक्ट से रेलवे को 900 करोड़ से अधिक का राजस्व मिलेगा। इंदौर से मुंबई की दूरी भी 830 किमी से घटकर 568 किमी रह जाएगी। इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण होना है अफसरों के अनुसार रेल मंत्रालय द्वारा 14 जनवरी को जारी नोटिफिकेशन के अनुसार महू तहसील के खेड़ी, चैनपुरा, कमदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ाखेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, कैलोद, बेरछा, गवली पलासिया, आशापुरा, मलेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चौरड़िया, न्यू गुराडिया, और महू केंटोमेंट एरिया की चिह्नित जमीन का रेल प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण होना है। प्रोजेक्ट के लिए राशि आवंटित होने के बाद अब जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। 568 किमी. रह जाएगी इंदौर-मनमाड़ की दूरी इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन प्रोजेक्ट महू से धार होते हुए धरमपुरी, ठीकरी, राजपुर, सेंधवा, सिरपुर, शिखंडी, धुले, मालेगांव होकर मनमाड़ पहुंचेगी। पूरी परियोजना में 30 नए रेलवे स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इसके पूरा होने के बाद इंदौर और मुंबई की दूरी 568 किमी रह जाएगी। इस परियोजना में मप्र के तीन जिलों के 77 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। जिनमे बड़वानी जिले के 39, धार जिले के 28 और खरगोन जिले के 10 गांव शामिल हैं। आगामी पांच साल में इस प्रोजेक्ट को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इन गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित धार जिला– राती तलाई, सेवरी माल, सराय तालाब, आंवलिया, चुंडीपुरा बीके, बियाघाटी, आंवलीपुरा, जामदा, झाड़ीबड़ोदा, जलवाय, नागझीरी, लुन्हेराखुर्द, सुंद्रेल, पटलावद, भीखरोन, पंधानिया, ग्यासपुर खेड़ी, एकलारा खुर्द, एकलारा, दुधी, भोंदल, चिकटयावड़, सिरसोदिया, दुंगी, कोठिदा, चौकी, भारूडपुरा बीके और भारूड़पुरा। बड़वानी जिला– सोलवान, मालवान, मालवान बीके, भामन्या, बावदड़, अजनगांव, अजनगांव बीके, नवलपुरा, बनिहार, गोई, कलालदा, जामली, सालीकलां, नांदेड़, मातमुर, बालसमुद, ओजर, सांगवी नीम, देवला, जुलवानिया रोड, निहाली, छोटी खरगोन, वासवी, कुसमारी, मुंडला, रेलवा बुजुर्ग, बंजारी, खजूरी, बघाड़ी, घाटी, अजंदी, हसनखेड़ी, सिकंदर खेड़ी, सेगवाल, उमरदा, शेरपुरा, जरवाह और जरवाह बीके। खरगोन जिला– जारोली, औरंगपुरा, नागंवा, कोठड़ा, ज्ञानपुरा, मोहिदा, मक्सी, भेडल्याबाड़ा, नीमगढ़ और कुसुम्भ्या।

चीतों के लिए नया घर तैयार:गांधीसागर अभयारण्य में चीतों के लिए बड़े बाड़े तैयार, जन्मे दो नर चीतों को 20 अप्रैल को किया जाएगा रिलीज

भोपाल  मध्य प्रदेश में चीतों का दूसरा घर यानी गांधी सागर अभयारण्य जल्द ही चीतों से आबाद होने जा रहा है। यहां चीतों को बसाने की तारीख तय हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि 20 अप्रैल को गांधी सागर अभ्यारण्य में 2 चीतों को कूनो से यहां शिफ्ट किया जाएगा।  कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य चीतों का दूसरा रहवास स्थल हो जाएगा। बताया जा रहा है कि चीतों की शिफ्टिंग के लिए चीता स्टीयरिंग कमेटी ने अपनी हरी झंडी दे दी है। इस संबंध में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और केन्द्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच आज गुरुवार को होने वाली बैठक के बाद शिफ्टिंग की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। मध्यप्रदेश के कूनो में इस समय कुल 26 चीते हैं। इनमें 12 वयस्क और 14 शावक शामिल हैं। इनमें से 6 वयस्क और 11 शावक, यानी कुल 17 चीते, कूनो नेशनल पार्क के खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग ने शुरू कर दी तैयारी अफ्रीका, केन्या के प्रतिनिधिमंडलों और केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी के निरीक्षण के बाद आखिरकार तय हो गया कि भारत की धरती पर जन्म लेने वाले चीतों से ही गांधीसागर आबाद होना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की हां होते ही वन विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दो नर चीतों को लाया जा रहा है फिलहाल यहां कूनो नेशनल पार्क में जन्मे लेने वाले दो नर चीतों को लाया जा रहा है। उन्हें 20 अप्रैल को यहां छोड़ा जाएगा। इसकी तैयारी गांधीसागर अभयारण्य में काफी समय पहले से चल रही थी। मंदसौर के डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि 6400 हेक्टेयर में चीतों के लिए बड़े बाड़े बनकर तैयार हैं। इनमें आठ क्वारंटाइन बाड़े भी हैं। शुरुआत में चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। गांधीसागर अभयारण्य को अनुकूल बताया था बता दें कि केंद्र सरकार की सात सदस्यीय हाइपावर कमेटी ने निरीक्षण के बाद दिल्ली में वन मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में गांधीसागर अभयारण्य को चीतों के लिए पूरी तरह से अनुकूल बताया था, तो केंद्र सरकार ने यहां कूनो से ही चीते भेजने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों ने बाड़े, क्वारंटाइन बाड़ों, हाइमास्ट कैमरा, जलस्रोत मानीटरिंग के लिए बनाए गए स्थल और उपचार केंद्र सहित सभी तैयारी देखी हैं। बड़े जानवरों का शिकार नहीं कर सकता चीता चीता बड़े जंगली जानवरों का शिकार नहीं कर सकता है। ऐसे में गांधी सागर अभयारण्य क्षेत्र में 1250 चीतल और हिरणों को चीतों के भोजन के लिए छोड़ने का लक्ष्य है। अभी तक करीब 472 हिरण-चीतल छोड़े गए हैं। भोपाल के वन विहार, नरसिंहगढ़ सेंचुरी और कान्हा टाइगर सफारी आदि स्थानों से हिरण व चीतल को पकड़कर यहां छोड़े जा रहे हैं।  

मुख्यमंत्री ने जताई प्रवासी पक्षियों पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी और रैप्टाईल्स व जल जीवों के संरक्षण के लिए कार्य योजना की आवश्यकता

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन, आजीविका से सम्बद्ध विषय है। जनजातीय क्षेत्र में अपार वन संपदा उपलब्ध है। इसके प्रबंधन में ध्यान रखना होगा कि विकास से जनजातीय वर्ग के हित प्रभावित न हो। भारतीय जीवन पद्धति वनों पर आधारित रही है। वनों के प्रबंधन में औपनिवेशिक सोच से मुक्त होने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विरासत से विकास और प्रकृति को जोड़ते हुए प्रगति और प्रकृति में सामंजस्य स्थापित कर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। पेसा एक्ट इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जीवन का आनंद समग्रता में है, और प्रकृति आधारित जीवन जीने से कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापना, जलवायु परिवर्तन और समुदाय आधारित आजीविका पर प्रशासन अकादमी में राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा भगवान बिरसा मुंडा और वीरांगना रानी दुर्गावती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। प्रदेश के महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, केन्द्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उईके भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में वनों की स्थिति में सुधार और वन प्रबंधन में नवाचार के लिए के लिए वन विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों के संरक्षण से इको सिस्टम बेहतर हो रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर चीतों का पुनर्स्थापना हो पाया है। उन्होंने किंग कोबरा सहित रैप्टाइल्स की प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इससे सर्पदंश की घटनाओं में कमी आएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन क्षेत्र में विद्यमान जनजातीय समुदाय के पूजा और आस्था स्थलों के संरक्षण के लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता होने पर केंद्र शासन से भी सहयोग प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश वन की दृष्टि से बहुत संपन्न है। प्रदेश में यद्यपि कोई ग्लेशियर नहीं है, किन्तु प्राकृतिक रूप से वनों से निकलने वाली जल राशि से ही प्रदेश से निकलने वाली बड़ी नदियां आकार लेती हैं। मध्यप्रदेश से निकली सोन, केन, बेतवा, नर्मदा नदियां देश के कई राज्यों में जल से जीवन पहुंचा रही हैं। बिहार, गुजरात और उत्तर प्रदेश की प्रगति में प्रदेश के वनों से निकले इस जल का महत्वपूर्ण योगदान है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश के वन, पूरे देश के वन हैं। इन नदियों के संरक्षण और उनके निर्मल अविरल प्रवाह को बनाए रखने के लिए मध्यप्रदेश के वनों का संरक्षण और संवर्धन महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा समग्र के माध्यम से नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए कार्य किया जा रहा है। अन्य नदियों पर भी कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) लिंक परियोजना के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार माना। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के बड़े क्षेत्र में पेयजल की उपलब्धता और सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल जीवों के संरक्षण पर कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य प्राणियों के संरक्षण में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने प्रवासी पक्षियों पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को सरल और सुलभ बनाने के लिए आयोजित कार्यशाला की सफलता की कामना करते हुए कहा कि जनजातीय क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के साथ-साथ वन-पर्यावरण के संरक्षण में भी यह कार्यशाला उपयोगी सिद्ध होगी। केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री यादव ने कहा कि हमें प्रकृति के संरक्षण के लिए समुदाय आधारित योजनाएं तैयार करने की जरूरत है। केन्द्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रकृति के संरक्षण के लिए एनवायरमेंट फ्रेंडली लाइफ पर ध्यान देने के लिए जनता को निरंतर प्रेरित कर रहे हैं। पृथ्वी पर निवासरत प्रत्येक व्यक्ति को ऊर्जा, अन्न और जल को सुरक्षित रखना होगा। पर्यावरण संरक्षण में सॉलिड वेस्ट और ई-वेस्ट मैनेजमेंट बड़ी चुनौती हैं। प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और स्वस्थ जीवन शैली अपनाना आवश्यक है।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- इको सिस्टम के प्रॉपर डेवलपमेंट के लिए मध्यप्रदेश में वृहद स्तर पर काम हो रहा है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इको सिस्टम के प्रॉपर डेवलपमेंट के लिए मध्यप्रदेश में वृहद स्तर पर काम हो रहा है। वन्य पर्यटन हमारी अर्थव्यवस्था को गति देता है और अब यही हमारी समृद्धि का प्रवेश द्वार बन रहा है। हमारी सरकार कूनो राष्ट्रीय उद्यान को एक आदर्श वन्य प्राणी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी। प्रदेश में सिर्फ कूनो ही नहीं, अब मंदसौर जिले का गांधीसागर अभयारण्य भी चीतों से गुलजार होगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के सहयोग से आगामी 20 अप्रैल को गांधी सागर अभयारण्य में चीते छोड़े जाएंगे। कड़ी सुरक्षा में कूनो नेशनल पार्क से 2 चीते शिफ्ट कर गांधीसागर अभयारण्य में ले जाये जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में पर्यटन तेजी से बढ़े, इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार ग्वालियर से कूनो के लिए डायरेक्ट रोड और एयर कनेक्टिविटी भी विकसित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव के साथ मध्यप्रदेश में चीता प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन संबंधी समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। भारत में जन्में चीता शावकों की सर्वाइवल रेट विश्व में है अधिकतम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों द्वारा यह जानकारी दिए जाने पर हर्ष व्यक्त किया कि भारत (मध्यप्रदेश) में जन्में चीता शावकों की जीवन प्रत्याशा (सर्वाइवल रेट) पूरे विश्व में सर्वाधिक है। दूसरे देशों में चीता शावक जलवायु से अनुकूलन के अभाव में सर्वाइव नहीं कर पाते हैं। चीतों के लिए जरूरी जलवायु और वातावरण की दृष्टि से गांधीसागर अभयारण्य बेहद अनुकूल है, इसलिए सरकार यहां चीते छोड़कर इस अभयारण्य को भी चीतों से गुलजार करेगी। कूनो जुड़ेगा रोड टू एयर कनेक्टिविटी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के साथ मिलकर सबके सहयोग से हम चीतों का पुनर्वास करेंगे। ग्वालियर से कूनो नेशनल पार्क तक पक्की बारहमासी रोड बनाई जाएगी। कूनो में टेंट सिटी तैयार कर यहां आने वाले पर्यटकों को जंगल में प्रकृति के पास समय बिताने का सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वन मंत्री श्री यादव की मंशा के अनुरूप हम कूनो प्रक्षेत्र में इंटरनेशनल लेवल का एक पशु चिकित्सालय और रेस्क्यू सेंटर भी खोलेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार से भी मदद लेंगे। पशु चिकित्सालय के संचालन से कूनों के चीतों के इलाज के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र में गौवंश के उपचार में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के नेचर टूरिज्म सेक्टर में निहित असीम संभावनाओं को एक्सप्लोर करेगी। राज्य के अधिक से अधिक युवाओं और महिलाओं को वन्य पर्यटन से जोड़ेंगे। चीता मित्र और महिला स्व-सहायता समूह की महिलाओं को टूरिस्ट गाईड भी बनाएंगे, कूनो परिक्षेत्र में राज्य आजीविका विकास मिशन से दीदी कैफे संचालित किए जाएंगे, जिससे चीता मित्रों और महिलाओं को स्थानीय रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार किंग कोबरा और दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का भी करेगी संरक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की धरती पर चीतों के पुनर्वास से एक सदी का इंतजार खत्म हुआ है। राज्य सरकार किंग कोबरा, घड़ियाल और दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के संरक्षण के लिए भी प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सरकार किंग कोबरा संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेश के जंगलों में जहरीले सांपों की संख्या नियंत्रित करने के लिए किंग कोबरा को बसाना आवश्यक है। पहले चरण में 10 किंग कोबरा मध्यप्रदेश लाने पर विचार हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन अधिकारियों को चंबल नदी से घड़ियाल और कछुओं को प्रदेश की 4 बड़ी नदियों और जलाशयों में पुर्नवासित करने के निर्देश दिए। चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने के लिए आईआईएफएम की लें सेवाएं : केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र में बड़ी क्षमताएं विद्यमान हैं। उन्होंने कूनो में चीतों के पुनर्वास और वन टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों की प्रशंसा की। केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने वन्य प्राणियों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में चल रहे वन्य प्राणियों की पुनर्वास परियोजनाओं की देखरेख के लिए वन, पर्यटन, पशु चिकित्सा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य एवं परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक टास्क फोर्स बनाया जाए। यह टास्क फोर्स नियमित रूप से सभी प्रोजेक्ट्स की निगरानी करें। उन्होंने कहा कि श्योपुर जिले के 80 गांवों के 400 चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल के साथ अनुबंध कर सकते हैं। चीता मित्रों को होम स्टे के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें नेचर टूरिज्म के लिए तैयार करने की दिशा में भी कार्य किए जाएं। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही कूनो के आसपास स्थित ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटकों के लिए विकसित किया जाए। कूनो में मौजूद एक पुराने किले को हेरिटेज वॉक के रूप में विकसित किया जा सकता है। मगरमच्छ और घड़ियाल के दीदार के लिए व्यू प्वाइंट्स बने, वन्य प्राणियों के रेस्क्यू के लिए सेंटर और पर्यटकों के लिए आयुर्वेदिक सेंटर तैयार किए जाएं। केन्द्रीय वन मंत्री श्री यादव ने कहा कि पर्यटन से रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कूनो समेत प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों को सुविधाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को जोड़ा जाए। देश-विदेश से कूनो आने वाले पर्यटकों को आवास, भोजन, स्वच्छता से जुड़ी बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अगर सुविधाएं विश्वस्तरीय होंगी, तो निश्चित रूप से दुनिया से टूरिस्ट चीता देखने के लिए पर्यटक कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर अभयारण्य आएंगे। बोत्सवाना से दो चरण में लाए जाएंगे 8 चीते बैठक में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से बताया गया कि देश में चीता प्रोजेक्ट पर अब तक 112 करोड़ रुपए से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है। इसमें से 67 प्रतिशत राशि मध्यप्रदेश में हुए चीता पुनर्वास पर व्यय हुई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत ही अब गांधीसागर अभयारण्य में भी चीते चरणबद्ध रूप से विस्थापित किए जाएंगे। गांधीसागर अभयारण्य राजस्थान की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए अंतर्राज्यीय चीता संरक्षण परिसर की स्थापना के लिए … Read more

एनएचएआई द्वारा सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम एक मई से लागू करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया: केंद्र सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिसमें एक मई से राष्ट्रीय स्तर पर सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम लागू करने की बात कही गई थी। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि कुछ मीडिया हाउस की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एक मई से राष्ट्रीय स्तर पर सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम लागू हो जाएगा और यह मौजूदा फास्टैग आधारित टोल कलेक्शन सिस्टम को रिप्लेस करेगा। मंत्रालय ने आगे कहा, “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम एक मई से लागू करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है।” टोल प्लाजा पर वाहनों की निर्बाध, बिना किसी परेशानी के आवाजाही को सक्षम करने और यात्रा के समय को कम करने के लिए चुनिंदा टोल प्लाजा पर ‘एएनपीआर-फास्टैग बेस्ट बैरियर-लैस टोलिंग सिस्टम’ लागू किया जाएगा। मंत्रालय ने बताया कि यह एडवांस टोलिंग सिस्टम ‘ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन’ (एएनपीआर) टेक्नोलॉजी, जिसमें नंबर प्लेट से वाहनों की पहचान की जाती है और ‘फास्टैग सिस्टम’, जो कि रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) पर काम करता है, दोनों का मिश्रण होगा। इस सिस्टम के तहत वाहनों से टोल हाई परफॉर्मेंस वाले एएनपीआर कैमरा और फास्टैग रीडर्स के माध्यम से लिया जाएगा, जिसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। मंत्रालय के मुताबिक, अगर वाहन चालक टोल पर भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें ई-नोटिस दिया जाएगा और उनका फास्टैग भी रद्द किया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर करीब 855 प्लाजा हैं, जिनमें से 675 सरकारी हैं, जबकि 180 या उससे अधिक निजी ऑपरेटरों द्वारा मैनेज किए जाते हैं। इस महीने की शुरुआत में, एनएचएआई ने बढ़ती लागतों के कारण देश भर में राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के टोल शुल्क में औसतन 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि की थी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय के लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि टेली-मेडिसिन सेवा दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाओं के प्रदाय का सशक्त माध्यम है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में टेली-मेडिसिन सेवा का शुभारंभ किया। इस सेवा से रीवा और सीधी जिलों के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सकों को वरिष्ठ विशेषज्ञों का परामर्श प्राप्त होगा। इस सेवा के तहत अब संजय गांधी अस्पताल, रीवा के मेडिसिन, शिशु रोग (पेडियाट्रिक्स) तथा स्त्री रोग (गायनी) विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक, दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को फोन या अन्य संचार माध्यमों से जरूरी परामर्श देंगे। इससे उन मरीजों को तुरंत लाभ मिलेगा जिन्हें विशेषज्ञ सलाह की आवश्यकता होती है। अब ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को विशेषज्ञ सेवाओं के लिए ज़िला मुख्यालय आने की आवश्यकता विशेष परिस्थितियों में ही पड़ेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि यह सेवा न सिर्फ मरीजों की यात्रा की आवश्यकता को कम करेगी, बल्कि समय, धन और संसाधनों की भी बचत करेगी। साथ ही, इससे प्राथमिक स्तर पर कार्यरत चिकित्सकों को विशेषज्ञों की मदद से त्वरित एवं सटीक निर्णय लेने में सुविधा होगी। इससे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान व इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि टेली-मेडीसिन सेवा का प्रभावी उपयोग “सशक्त व स्वस्थ मध्यप्रदेश” के विजन को धरातल पर उतारने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने टेली-मेडिसिन कक्ष की व्यस्थाओं का अवलोकन किया एवं विधिवत संचालन के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वे अगले सप्ताह प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे। डीन मेडिकल कॉलेज रीवा डॉ. सुनील अग्रवाल सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित थे।  

मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने सीजीएमएससी सप्लाई चैन मैनेजमेंट एसओपी का विमोचन किया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) के नव नियुक्त अध्यक्ष दीपक म्हस्के के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए और मुख्य अतिथि की आसंदी से उन्हें शुभकामनाएं दी। इस दौरान मुख्यमंत्री सहित अतिथियों ने सीजीएमएससी सप्लाई चैन मैनेजमेंट एसओपी का विमोचन किया।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) की स्थापना वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में हुई थी। इस संस्था की भूमिका राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और आवश्यक दवाओं व उपकरणों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। आज यह कॉरपोरेशन केवल आपूर्ति एजेंसी नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।              मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि दीपक म्हस्के  पूर्व में केमिस्ट्री विषय के शिक्षक रहे हैं। यह अनुभव अब उनके नेतृत्व में सीजीएमएससी के कार्यों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बल देगा, जिससे प्रदेश की जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी राज्य स्थापना का रजत जयंती मना रहा है। वर्ष 2000 में जब राज्य का गठन हुआ, तब से लेकर अभी तक प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार बेहतर हुई हैं। प्रदेश में एम्स जैसे संस्थान कार्यरत है और 13 मेडिकल कॉलेजों की भी स्थापना हो चुकी है, जो राज्य सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रतिबद्धता का प्रमाण है।          मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य किसी भी नागरिक की सबसे बड़ी पूंजी होती है और इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई आयुष्मान भारत योजना ने देश के करोड़ों गरीब परिवारों को निःशुल्क इलाज की सुविधा दी है। छत्तीसगढ़ में भी लाखों परिवार इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य मंत्री स्वयं ऊर्जावान और सक्रिय हैं और अब कॉरपोरेशन की जिम्मेदारी दीपक महस्के जैसे कर्मठ और योग्य व्यक्ति को मिली है, तो निश्चित रूप से सीजीएमएससी प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने संबोधन के अंत में महस्के को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनका कार्यकाल छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को और अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाएगा।                      विधानसभा अध्यक्ष  डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जेनेरिक दवाइयां, सर्जिकल सामग्री, मेडिकल उपकरणों की समय से उपलब्धता और आधारभूत स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती के उद्देश्य के साथ वर्ष 2010 में इस कॉर्पोरेशन का गठन हुआ था। डॉ. सिंह ने कहा कि म्हस्के  जैसे योग्य, ईमानदार, दूरदर्शी और काबिल हाथों में इस कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई और वे अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में सफल होंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ सिंह ने म्हस्के को नए दायित्व मिलने पर अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने संबोधित कर सीजीएमएससी के कार्य, स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की।          इस अवसर पर विधायक मोतीलाल साहू, विधायक किरण देव, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुनील सोनी, विधायक रोहित साहू, विधायक इंद्र कुमार साव, महापौर श्रीमती मीनल चौबे,  मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित निगम मंडलों के अध्यक्ष गण, जनप्रतिनिधिगण और अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल, PM मोदी ने दी शुभकामनाये

नई दिल्ली  श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र को यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (Memory of the World Register) में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। यूनेस्को ने गुरुवार को जिन 74 नई प्रविष्टियों को इस रजिस्टर में जोड़ा है, उनमें ये दोनों महत्वपूर्ण ग्रंथ भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस रजिस्टर में कुल 570 संग्रह हो गए हैं। पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, श्रीमद्भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र का यूनेस्को में शामिल होना हमारी शाश्वत परंपरा, गहन ज्ञान और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने आगे कहा कि गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से मानव सभ्यता, चेतना और सांस्कृतिक विकास को दिशा दी है। इनकी शिक्षाएं आज भी दुनियाभर के लोगों को प्रेरणा देती हैं। गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, भारत की सांस्कृतिक धरोहर को यह वैश्विक सम्मान मिलना अत्यंत गौरवपूर्ण है। अब यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर में भारत के 14 अभिलेख दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गीता और नाट्यशास्त्र केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, कलात्मकता और सभ्यता के स्तंभ हैं।  यूनेस्को की इस सूची में जिन अन्य 74 संग्रहों को स्थान मिला है, उनमें दासता, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक महिलाओं से जुड़ी सामग्री, जिनेवा कन्वेंशन (1864–1949), और मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज भी शामिल हैं। इनमें से 14 संग्रहों को वैज्ञानिक दस्तावेजी धरोहर के रूप में मान्यता दी गई है। यह फैसला न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा।  

सरकार ने दिखाई संवेदनशीलता, शिक्षकों ने जताया विश्वास, आंदोलन समाप्त

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज उनके निवास कार्यालय में बीएड प्रशिक्षित बर्खास्त सहायक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। यह प्रतिनिधिमंडल 126 दिनों से लगातार आंदोलनरत था और आज की आत्मीय मुलाकात और चर्चा के बाद उन्होंने अपने आंदोलन को समाप्त करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि आप सब हमारे परिवार के सदस्य हैं। आपकी पीड़ा हमारी पीड़ा है। आपकी समस्याओं को समझते हुए सरकार सहानुभूति के साथ इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस मामले के समाधान के लिए शासन स्तर पर हरसंभव सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री साय से भेंट के पश्चात शिक्षकों ने सरकार की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस मौजूद रहे।

भोपाल के 1250 क्वार्टर इलाके में सरकारी मकान के आंगन में बनी मजार ने विवाद, हिंदू संगठनों ने इसे ‘लैंड जिहाद’ करार दिया, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अति विशिष्ट (VVIP) इलाके 1250 क्वार्टर में एक सरकारी मकान के आंगन में बनी मजार ने विवाद खड़ा कर दिया है. हिंदू संगठनों ने इसे ‘लैंड जिहाद’ करार देते हुए जिला प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है. यह इलाका मंत्रियों, IAS अधिकारियों और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उपमुख्यमंत्री समेत एक दर्जन से अधिक मंत्रियों के सरकारी आवासों से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.   संस्कृति बचाओ मंच के संयोजक चंद्रशेखर तिवारी ने दावा किया कि यह मजार हाल ही में बनाई गई है और इसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा, “प्रशासन को इसकी जांच कर इसे हटाना चाहिए, वरना हम आंदोलन करेंगे.” वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मजार कई वर्षों से मौजूद है. आसपास रहने वाले कुछ निवासियों ने बताया कि यह  मजार पुरानी है और इसे एक मुस्लिम परिवार ने बनाया था, जो इस सरकारी मकान में रहता है. लैंड जेहाद का आरोप स्थानीय लोगों ने रिपब्लिक भारत को बताया कि ये मजारें कई सालों से यहां है और आसपास के लोग इसका रखरखाव करते हैं। मजार वाले घर के पड़ोस की एक महिला ने बताया कि ये घर पहले मुस्लिम कर्मचारी को एलॉट था। हिंदू वादी संगठनों ने इन मजारों को लेकर आपत्ति जताई है और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। एसडीएम से हिंदू वादी संगठनों ने जांच की मांग की है, संगठनों का आरोप है कि ये लैंड जेहाद है। SDM ने दिए जांच के आदेश इस पूरे मामले को लेकर जब रिपब्लिक भारत ने एसडीएम अर्चना शर्मा से सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि सरकारी मकान के अंदर किसी भी तरह का धर्म स्थल निर्माण होना अवैध है। SDM ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। अगर जांच में इसे अवैध पाया गया तो इसे तोड़ने की भी कार्रवाई की जाएगी। SDM ने स्थानीय पटवारी और तहसीलदार को जांच के आदेश दिए है, जांच रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्रवाई करने बात कही है। 90% सरकारी मकान, फिर भी सिस्टम की चुप्पी 1250 क्वार्टर इलाके में करीब 90% मकान सरकारी हैं, जहां क्लास वन अधिकारी से लेकर बाबू स्तर के कर्मचारी रहते हैं. ऐसे में एक सरकारी मकान के आंगन में मजार का होना सवाल खड़े करता है. शिकायत की कॉपी हिंदू संगठनों ने जिला प्रशासन को शिकायत सौंपी है, जिसमें पूछा गया है कि सरकारी जमीन पर यह मजार कैसे बनी? यदि यह पुरानी है, तो इसके आसपास सरकारी इमारतें कैसे बन गईं? और यदि नई है, तो प्रशासन ने इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने पतंजलि संस्थान द्वारा विंध्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश एवं औद्योगिक परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि हाल ही में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉनक्लेव, रीवा के माध्यम से विंध्य क्षेत्र में निवेश के अपार अवसर खुले हैं। जो विंध्य के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। पतंजलि समूह जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की भागीदारी से इस क्षेत्र में औद्योगिक क्रांति की मजबूत आधारशिला रखी जा सकती है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल से अमहिया, रीवा स्थित निज निवास पर पतंजलि योगपीठ के संस्थापक सचिव आचार्य बालकृष्ण ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर पतंजलि संस्थान द्वारा विंध्य क्षेत्र में किए जा रहे निवेश एवं संभावित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। क्षेत्रीय विकास, स्थानीय संसाधनों के समुचित उपयोग तथा युवाओं को रोजगार से जोड़ने के विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधनों और जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर विंध्य के निर्माण की दिशा में सार्थक चर्चा हुई।  

सुकमा में 40 लाख रुपये के 22 इनामी नक्सलियों ने किया सरेंडर, दंपति भी है शामिल

 सुकमा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बड़ी खबर है. यहां 22 नक्सलियों ने एक साथ पुलिस और सीआरपीएफ के अफसरों के सामने सरेंडर किया है. इन पर कुल 40 लाख रुपये का इनाम घोषित है. ये सभी नक्सली माड़ डिवीजन और नुआपाडा डिवीजन में सक्रिय रहे हैं. पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर किया है सरेंडर प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के बीच नक्सल संगठन घबराया हुआ है. इस बीच सरकार की पुनर्वास नीति भी नक्सलियों को काफी प्रभावित कर रही है. इस बीच सुकमा में शुक्रवार को एक साथ 22 नक्सलियों ने हिंसा का साथ छोड़कर सरेंडर कर दिया है. इसमें एक दंपति भी शामिल हैं. इन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित है. इनके सरेंडर को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है. 22 माओवादियों का सरेंडर: सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि जिले में लगातार नक्सल उन्नमूलन अभियान चलाया जा रहा है. पुनर्वास नीति का भी प्रचार प्रसार किया जा रहा है. नियद नेल्लानार योजना के तहत विकास कार्य भी कराया जा रहा है, जिससे प्रभावित होकर 9 महिला समेत 22 माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सरेंडर किया है. नक्सलियों को 50-50 हजार की प्रोत्साहन राशि: पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह सभी माओवादी माड़ डिवीजन और नुआपाड़ डिवीजन में सक्रिय थे. सभी समर्पित माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ ही कपड़े भी दिए गए हैं. एसपी ने कहा कि सभी सरेंडर करने वालों को पुनर्वास नीति के तहत अन्य सुविधाएं भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी. आत्मसमर्पित 1 पुरुष और 1 महिला नक्सली पर आठ आठ लाख का इनाम. वहीं 1 पुरूष और 1 महिला नक्सली पर पांच पांच लाख, 2 पुरूष और 5 महिला पर 2-2 लाख, 1 पुरूष नक्सली पर 50 हजार यानी कुल 40 लाख 50 हजार रुपए का इनाम था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि नक्सलियों को आत्मससमर्पण के लिए प्रोत्साहित कराने में जिला बल, डीआरजी सुकमा, रेंज फिल्ड टीम (आरएफटी) कोंटा, सुकमा, जददलपुर सीआरपीएफ 02, 74, 131, 217, 219, 223, 226,227,241 एवं कोबरा 203 वाहिनी के आसूचना शाखा कार्मिकों की विशेष भूमिका रही है. सरेंडर माओवादियों की लिस्ट 1. मुचाकी जोगा पिता बुधरा उम्र लगभग 33 वर्ष है. उसकी जाति मुरिया है. वह सुकमा जिले के भेज्जी थाना के रेगड़गट्टा गांव का निवासी है. उसका पद माड़ डिवीजन अन्तर्गत पीएलजीए कम्पनी नंबर 01, प्लाटून नंबर 01 का डिप्टी कमाण्डर/सीवायपीसीएम और इनाम 8 लाख था. 2. मुचाकी जोगी पति जोगा उम्र 28 वर्ष है. उसकी जाति मुरिया है. वह सुकमा जिले के भेज्जी थाना के रेगड़गट्टा गांव की निवासी है. उसका पद पीएलजीए कम्पनी नम्बर 01 प्लाटून नम्बर 01 सदस्य/पीपीसीएम और इनाम 8 लाख था. 3. किकिड़ देवे पिता स्वर्गीय नंदा उम्र लगभग 30 वर्ष है. उसकी जाति मुरिया है. वह सुकमा जिले के थाना गादीरास के दोक्कापारा गुफड़ी गांव का निवासी है. वह नुवापाड़ा डिवीजन सीतानदी एरिया कमेटी सदस्या एसीएम और पांच लाख की इनामी थी. 4. मनोज उर्फ दूधी बुधरा पिता चमरू उम्र लगभग 28 वर्ष. जाति मुरिया, निवासी चिंतनार दूधीपारा थाना पुसपाल, जिला सुकमा. माड़ डिवीजन डीके प्रेस टीम सदस्य/एसीएम, इनाम 5 लाख 5. माड़वी भीमा पिता नंदा उम्र लगभग 30 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी सुरपनगुड़ा थाना चिंतलनार, जिला सुकमा. सुरपनगुड़ा आरपीसी डीएकेएमएस अध्यक्ष. इनाम 2 लाख. 6. माड़वी सोमड़ी पति माड़वी भीमा उम्र लगभग 48 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी मेट्टागुड़ा सरपंचपारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर. मेट्टागुड़ा आरपीसी केएमएस अध्यक्ष, इनाम-02 लाख. 7. संगीता उर्फ हड़मे माड़वी पिता स्वर्गीय सुकड़ा, उम्र लगभग 24 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी पैतुलगुट्टा थाना किस्टाराम जिला सुकमा. उसूर एलओएस पार्टी सदस्या. इनाम 02 लाख. 8. माड़वी कोसी पिता हुंगा उम्र लगभग 24 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी वेलपोच्चा पेरमापारा, थाना कोंटा, जिला सुकमा. गोमपाड़ आरपीसी सीएनएम अध्यक्षा. इनाम 02 लाख. 9- वंजाम सन्नी पति वंजाम माड़ा उम्र लगभग 24 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ वंजामपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी सीएनएम अध्यक्षा. इनाम 02 लाख 10. माड़वी मंगली पिता हुंगा उम्र लगभग 35 वर्ष. जाति मुरिया, निवासी दुलेड़ वंजामपारा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी केएमएस अध्यक्षा. इनाम 02 लाख. 11. ताती बण्डी पिता स्वर्गीय हड़मा, उम्र 35 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी गोमगुड़ा ईत्तापारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर. पालागुड़ा आरपीसी मिलिशिया कमांडर, इनाम 02 लाख. 12. पुनेम जोगा पिता स्वर्गीय जोगा, उम्र लगभग 28 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी एर्रनपल्ली किकिरपारा, थाना पामेड़, जिला बीजापुर. एर्रनपल्ली आरपीसी सीएनएम सदस्य, इनाम 50 हजार रुपए. 13. पुनेम नरसिंग राव पिता स्वर्गीय मल्ला, उम्र लगभग 25 वर्ष. जाति दोरला. निवासी दुलेड़ वंजामपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 14. सोड़ी हुंगा पिता स्व0 हड़मा उम्र लगभग 30 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ वंजामपारा, थाना चिंतागुफा जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 15. वंजाम रामा पिता स्वर्गीय पोज्जा, उम्र लगभग 26 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी बगड़ेगुड़ा करकापारा, थाना केरलापाल, जिला सुकमा. पूर्व बगड़ेगुड़ा पंचायत मिलिशिया सदस्य. 16. हेमला नंदे पति गुण्डा उम्र लगभग 37 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी नागाराम सरपंचपारा, थाना चिंतलनार, जिला सुकमा. नागाराम आरपीसी केएमएस सदस्या. 17. हेमला मुके पति नंदा उम्र लगभग 38 वर्ष जाति मुरिया निवासी नागराम सरपंचारा थाना चिंतलनार जिला सुकमा. नागाराम आरपीसी केएमएस सदस्या. 18. गोंडसे/मड़कम हुंगा पिता बण्डी उम्र लगभग 25 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ बंजामपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया डिप्टी कमाण्डर. 19. मड़कम गंगा पिता मुक्का उम्र लगभग 33 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी बड़ेकेड़वाल, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. सिंघनमड़गू आरपीसी शाखा अध्यक्ष. 20. माड़वी सोना पिता रामा उम्र लगभग 27 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड पोकड़ीपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 21. माड़वी हिड़मा पिता स्व. भीमा, उम्र लगभग 30 वर्ष. जाति मुरिया. निवासी दुलेड़ पोकड़ीपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा. दुलेड़ आरपीसी मिलिशिया सदस्य. 22. पुनेम कन्हैया पिता कन्ना, निवासी चिमलीपेंटा, थाना चिंतलनार, जिला सुकमा. सुरपनगुड़ा आरपीसी मिलिशिया सदस्य पुलिस ने चलाया था ऑपरेशन समाचार एजेंसी आईएएनएस ने भी नक्सलियों के सरेंडर का वीडियो साझा किया है। आत्म समर्पण करने वाले नक्सलियों में 9 लड़कियां और 13 लड़के शामिल हैं। नक्सलियों के खिलाफ सुकमा में ऑपरेशन चलाया गया था। इस ऑपरेशन में सुकमा के अलावा जगदलपुर के डीआईजी ऑफिस समेत कई सीआरपीएफ बटालियनों ने हिस्सा लिया था। पुलिस का यह ऑपरेशन कामयाब रहा और 22 नक्सलियों ने नक्सलवाद को अलविदा कहने का फैसला … Read more

गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के वास्ते सभी बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार

गाजा इजरायल की ताबड़तोड़ कार्रवाई से हमास के हौंसले पस्त होते नजर आ रहे हैं। फिलिस्तीन के इस कट्टरपंथी संगठन ने एक महत्वपूर्ण घोषणा में कहा है कि वह गाजा में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के वास्ते सभी बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार है। हमास ने कहा है कि वह इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले सभी इजरायली बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है। यह बयान हमास के वरिष्ठ अधिकारी खलील अल-हय्या ने गुरुवार को एक टेलीविजन भाषण में दिया। इस प्रस्ताव को गाजा में डेढ़ साल से अधिक समय से चल रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में एक संभावित कदम के रूप में देखा जा रहा है। हमास का प्रस्ताव हमास के वरिष्ठ अधिकारी खलील अल-हय्या ने कहा, “हम एक व्यापक समझौते के लिए तैयार हैं, जिसमें सभी इजरायली बंधकों की रिहाई, इजरायल में कैद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई, गाजा युद्ध का अंत और क्षेत्र के पुनर्निर्माण की शुरुआत शामिल हो।” हालांकि, हमास ने स्पष्ट किया कि वह इजरायल की उस मांग को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें उसे अपने हथियार डालने होंगे। अल-हय्या ने इजरायल के 45 दिन के अस्थायी युद्धविराम प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया, जिसमें हमास के हथियार डालने की शर्त शामिल थी। हमास ने यह भी कहा कि कोई भी समझौता स्थायी युद्धविराम, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण की गारंटी पर आधारित होना चाहिए। एक वरिष्ठ फिलिस्तीनी अधिकारी ने कहा, “इजरायल का नवीनतम प्रस्ताव युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा नहीं करता और केवल बंधकों को प्राप्त करना चाहता है।” संघर्षविराम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे नेतन्याहू- हमास अल-हय्या ने इजराइल द्वारा प्रस्तावित 45 दिन की अस्थायी संघर्षविराम योजना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अब हमास किसी भी “आंशिक समझौते” को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संघर्षविराम का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने रॉयटर्स के हवाले से कहा, “नेतन्याहू और उनकी सरकार आंशिक समझौतों का इस्तेमाल अपनी उस राजनीतिक नीति को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं, जिसका मकसद नरसंहार और भुखमरी के जरिए युद्ध को जारी रखना है — भले ही इसके लिए अपने ही बंधकों की बलि क्यों न देनी पड़े। हम इस नीति को लागू करने का हिस्सा नहीं बनेंगे।” हमास की इस सख्त स्थिति से मिस्र के मध्यस्थों द्वारा युद्धविराम को बहाल करने की कोशिशों को और झटका लग सकता है। काहिरा में इस हफ्ते हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। हमास ने इजरायल की उस मांग को भी खारिज कर दिया है, जिसमें संगठन से अपने हथियार छोड़ने की शर्त रखी गई थी। हमास ने साफ कहा है कि वह तभी बचे हुए 59 इजराइली बंधकों को छोड़ेगा, जब इजराइल युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने पर सहमत होगा। इजरायल ने तेज किए हमले इधर, इजरायली सेना ने गाजा पर अपने हमले तेज कर दिए हैं। गुरुवार को हुए हवाई हमलों में गाजा स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कम से कम 32 फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। जबालिया में संयुक्त राष्ट्र संचालित एक स्कूल पर हमले में छह लोगों की जान गई। इजराइल ने दावा किया कि वहां एक हमास कमांड सेंटर था। वहीं, हमास ने यह जानकारी दी कि इजरायली-अमेरिकी सैनिक एडन अलेक्जेंडर को बंधक बनाकर रखने वाले लड़ाकों से उनका संपर्क टूट गया है। बताया गया कि जिस स्थान पर अलेक्जेंडर को रखा गया था, वहां इजराइली हमले हुए। हमास ने एक वीडियो संदेश में बंधकों के परिवारों को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे हमलों में उनके प्रियजन मारे जा सकते हैं। 2023 से चल रहा संघर्ष यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ, जब हमास ने दक्षिणी इजरायल पर एक आश्चर्यजनक हमला किया, जिसमें इजरायली अधिकारियों के अनुसार 1,200 लोग मारे गए और 251 लोग बंधक बनाए गए। इसके जवाब में, इजरायल ने गाजा पर व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक 51,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं। हमास का कहना है कि वर्तमान में उसके पास 59 बंधक हैं, जिनमें से 24 के जीवित होने की उम्मीद है। इजरायल में जनता का दबाव इजरायल में, बंधकों की रिहाई को प्राथमिकता देने की मांग बढ़ रही है। सैकड़ों पूर्व मोसाद और वायुसेना कर्मियों ने सरकार से युद्ध को रोककर बंधकों की रिहाई पर ध्यान देने का आह्वान किया है। तेल अवीव में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां लोग बंधकों की सुरक्षित वापसी के लिए समझौते की मांग कर रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी, योना श्निट्जर ने कहा, “गाजा में बंधकों की स्थिति सामान्य नहीं होनी चाहिए। यह दिल दहलाने वाला है।”

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