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RBI ने रेपो रेट में लगातार दूसरी बार की कटौती, सस्ते हो जाएंगे लोन, इकॉनमी को लगेंगे पंख

नई दिल्ली आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर दी है। लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कटौती की गई है। इससे पहले फरवरी में भी रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती की गई थी। यह करीब पांच साल में रेपो रेट में पहली कटौती थी। आज की कटौती के साथ अब रेपो रेट 6 फीसदी हो गया है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई बैंकों को लोन देता है। इसके कम होने से आपके होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन की किस्त कम होती है।आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट में कटौती का फैसला लिया गया। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी दी। आरबीआई की एमपीसी की नए फाइनेंशियल ईयर में यह पहली बैठक थी। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में कटौती के पक्ष में वोट दिया। उन्होंने कहा कि नया वित्त वर्ष काफी उथलपुथल के साथ शुरू हुआ है। ट्रेड के मामले में कुछ आशंकाएं सही साबित हो रही हैं और ग्लोबल कम्युनिटी परेशान है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने कीमतों में स्थिरता और नियमित विकास के मामले में अच्छी प्रगति की है। दुनिया में इकनॉमिक आउटलुक तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत अमेरिकी शुल्क के साथ वैश्विक अनिश्चितता के साथ हुई है लेकिन आरबीआई स्थिति पर नजर रखे हुए है। भारतीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ रही है और आर्थिक वृद्धि में सुधार जारी है। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत रुख को तटस्थ से बदलकर उदार करने का फैसला किया है। महंगाई में कमी आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रियल जीडीपी ग्रोथ के इस फाइनेंशियल ईयर में 6.5% रहने का अनुमान है। पहले इसके 6.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। पहली तिमाही में इसके 6.5%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 6.6% और चौथी तिमाही में 6.3% रहने का अनुमान है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में महंगाई दर 4 फीसदी रहने का अनुमान है जो फरवरी के 4.2 फीसदी अनुमान से कम है। पहली तिमाही में महंगाई की दर 3.6%, दूसरी तिमाही में 3.9%, तीसरी तिमाही में 3.8% और चौथी तिमाही में 4.4% रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि हमारा रुख नकदी प्रबंधन पर किसी मार्गदर्शन के बिना नीति दर मार्गदर्शन प्रदान करता है। वैश्विक निश्चितताओं से मुद्रा पर और दबाव पड़ सकता है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, नवीनतम व्यापार संबंधी उपायों से अनिश्चितताएं और बढ़ गई हैं जिससे विभिन्न क्षेत्रों में परिदृश्य धुंधला गया है। महंगाई में कमी का असर माना जा रहा था कि आरबीआई रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है। अधिकांश अर्थशास्त्रियों ने इसका अनुमान जताया था। उनका कहना था कि देश में महंगाई कम हो रही है, इसलिए आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर सकता है। भारत की खुदरा महंगाई की दर फरवरी में 3.61% तक गिर गई थी। यह जनवरी में 4.26% थी। यह सात महीनों में पहली बार RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे आई। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मार्च में भी महंगाई RBI के अनुमान से कम रहेगी। क्या होता है रेपो रेट? रेपो रेट के जरिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया वाणिज्यिक बैंकों को शॉर्ट टर्म लोन प्रदान करती है। ये एक तरह से बैंकों के लिए लोन ब्याज दर की तरह काम करता है। ये लोन एक समय सीमा के लिए निर्धारित किया जाता है। हालांकि अगर बैंक लंबे समय के लिए लोन लेना चाहे तो उन्हें बैंक रेट के आधार पर आरबीआई लोन ऑफर करती है। कैसे पड़ेगा आप पर प्रभाव? रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर- अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी आती है, तो इसका मतलब है कि बैंकों को लोन महंगा पड़ने वाला है, जिसका इनडायरेक्ट असर आपके लोन के ब्याज और ईएमआई पर देखने को मिलता है। रेपो रेट में कटौती का असर- अगर आरबीाई द्वारा रेपो रेट में कटौती की जाती है। तो इससे बैंकों को लोन सस्ता पड़ता है। वहीं लोग भी कम ब्याज दर पर लोन ले पाते हैं। इस तरह से रेपो रेट फिक्सड डिपॉजिट के फ्लोटिंग और फिक्सड रेट पर भी इनडायरेक्ट असर डाल सकता है। आरबीआई ने क्यों घटाया रेपो दर? हमारे देश की केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कटौती और बढ़ोतरी कर अर्थव्यवस्था में मनी सप्लाई पर नियंत्रित करने की कोशिश करती है। रेपो रेट में कटौती और बढ़ोतरी का फैसला कई तरह के महत्वपूर्ण तथ्यों को देखकर लिया जाता है। इनमें से एक महंगाई भी है। रेपो रेट की खबर ने दी राहत इससे पहले 7 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के उत्पाद शुल्क बढ़ाना, एलपीजी गैस के दामों में इजाफा होने की खबर से लोगों को बड़े झटके मिले हैं। इस बीच आरबीआई का ये फैसला राहत दे सकता है हालांकि बढ़ते उत्पाद शुल्क का असर पेट्रोल डीजल के दामों में देखने को नहीं मिला है। आज भी इनमें दाम स्थिर है।

प्रधानमंत्री संतगण से करेंगे भेंट, आनंद सरोवर में करेंगे पुष्प अर्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से वैशाखी का वार्षिक मेला बनेगा अविस्मरणीय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री बनेंगे आनंदपुर धाम के सेवा कार्यों के साक्षी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री संतगण से करेंगे भेंट, आनंद सरोवर में करेंगे पुष्प अर्पित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव आनंदपुर धाम जैसा केन्द्र, एक बार जरूर देखना चाहिए मुख्यमंत्री ने की प्रधानमंत्री की मध्यप्रदेश यात्रा की तैयारियों की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेन्स द्वारा ग्वालियर संभाग के कमिश्नर, आईजी सहित वरिष्ठ अधिकारियों और कलेक्टर, एसपी अशोक नगर से चर्चा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगामी 11 अप्रैल को प्रस्तावित कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं गरिमामयपूर्वक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसके पहले गत 4 अप्रैल को आनंदपुर धाम पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की तैयारियों को लेकर किये गये प्रबंधों का अवलोकन कर चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी आगामी 11 अप्रैल को मध्यप्रदेश आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी अशोक नगर जिले के आनंदपुर धाम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी परमहंस अद्वैत मत के प्रमुख गुरू महाराज, महात्मा शब्द प्रेमानंद जी और अन्य संतगण से भेंट कर आनंदपुर धाम के सेवा प्रकल्पों की जानकारी लेंगे। धाम में वैशाखी मेले में लगभग 20 हजार श्रद्धालु भागीदारी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में कार्यक्रम के स्वरूप और अन्य तैयारियों की विस्तार से जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के लिए सभी जरूरी प्रबंध कर लिए गए हैं। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक, आध्यात्मिक और सेवा संस्थानों में से एक अशोकनगर के आनंदपुर धाम में प्रतिवर्ष वैशाखी पर वार्षिक मेला लगता है। इस समागम में धाम से जुड़े हजारों देशी-विदेशी अनुयायी पधारते हैं। इस वर्ष प्रधानमंत्री मोदी के आगमन से यह मेला अविस्मरणीय बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आनंदपुर धाम जैसे स्थान आस्था के केंद्र होने के साथ ही धार्मिक, आध्यात्मिक पर्यटन के भी बड़े केंद्र हैं। इसे जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों को एक बार जरूर देखना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी आनंद सरोवर में पुष्प करेंगे अर्पित प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी आनंदपुर धाम परिसर स्थित आनंद सरोवर में पुष्प अर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी को इस धाम में होने वाली भक्ति और ज्ञान से जुड़ी गतिविधियों के साथ ही संचालित सेवा कार्यों की भी जानकारी दी जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी आनंदपुर सत्संग आश्रम परिसर स्थित चारों मंदिरों को देखेंगे। वे विशाल सत्संग हॉल में मंचीय कार्यक्रम में वैशाखी के वार्षिक मेला आयोजन में नागरिकों और इस धाम से जुड़े देश-विदेश के अनुयायियों को संबोधित करेंगे। वे लंगर में प्रसाद भी ग्रहण करेंगे।  

फिर टूटा CSK फैन्स का दिल, पंजाब किंग्स के सामने फीकी पड़ी चेन्नई सुपर किंग्स

नई दिल्ली आईपीएल 2025 का 22वां मुकाबला पंजाब किंग्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच मुल्लांपुर में खेला गया। इस मैच को पंजाब किंग्स ने 18 रन से अपने नाम कर लिया। पंजाब के कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। ऐसे में पंजाब ने 6 विकेट के नुकसान पर 219 रन बना लिए थे। 220 रन के टारगेट का पीछा करते हुए चेन्नई निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट पर 201 रन ही बना पाई। बता दें कि यह सीएसके की इस आईपीएल में लगातार चौथी हार है। लामी बल्लेबाज प्रियांश आर्य के तूफानी शतक से पंजाब किंग्स ने इंडियन प्रीमियर लीग में मंगलवार को चेन्नई सुपर किंग्स को 18 रन से हरा दिया। यह चेन्नई सुपर किंग्स की लगातार चौथी हार है। पंजाब किंग्स के 220 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सुपर किंग्स की टीम सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉन्वे (69 रन, 49 गेंद, छह चौके, दो छक्के) के अर्धशतक और शिवम दुबे (42) के साथ तीसरे विकेट की उनकी 89 रन की साझेदारी के बावजूद पांच विकेट पर 201 रन ही बना सकी। कॉन्वे ने रचिन रविंद्र (36) के साथ भी पहले विकेट के लिए 61 रन जोड़े। पंजाब किंग्स की ओर से लॉकी फर्ग्युसन सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 40 रन देकर दो विकेट चटकाए। पंजाब किंग्स ने इससे पहले खराब शुरुआत से उबरते हुए छह विकेट पर 219 रन बनाए। आईपीएल इतिहास का संयुक्त रूप से चौथा सबसे तेज शतक जड़ने वाले प्रियांश ने 42 गेंद में नौ छक्कों और सात चौकों से 103 रन की पारी खेली। उन्होंने शशांक सिंह (नाबाद 52) के साथ उस समय छठे विकेट के लिए 34 गेंद में 71 रन की साझेदारी की जब टीम 83 रन पर पांच विकेट गंवाकर संकट में थी।  प्रियांश आर्या ने 39 गेंद में जड़ा आईपीएल का चौथा सबसे तेज शतक पंजाब किंग्स (PBKS) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के बीच खेले गए मैच में प्रियांश आर्या का तूफान देखने को मिला. प्रियांश ने महज 39 गेंदों पर शतक जड़ दिया. अपनी इस पारी में प्रियांश ने 9 छक्के और 7 चौके लगाए. जड़ा चौथाा सबसे तेज आईपीएल शतक 24 वर्षीय प्रियांश आर्या ने शतक जड़कर कई कीर्तमान अपने नाम कर लिए हैं. आईपीएल में सबसे तेज शतक (गेंदों के हिसाब से) लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में वो संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर हैं. इस लिस्ट में टॉप पर क्रिस गेल हैं जिन्होंने 2013 में महज 30 गेंदों पर शतक जड़ा था. 30 गेंद – क्रिस गेल (RCB) 2013 37 गेंद – यूसुफ पठान (RR) 2010 38 गेंद- डेविड मिलर (KXIP) 2013 39 गेंद- ट्रैविस हेड (SRH) 2024 39 गेंद- प्रियांश आर्य 2025* सबसे तेज शतक जड़ने वाले अनकैप्ड भारतीय बने प्रियांश इन अनकैप्ड खिलाड़ियों ने आईपीएल में अबतक शतक लगाए हैं. शॉन मार्श 2008 मनीष पांडे 2009 पॉल वाल्थाटी 2009 देवदत्त पडिक्कल 2021 रजत पाटीदार 2022 यशस्वी जयसवाल 2022 प्रभसिमरन सिंह 2023 प्रियांश आर्य 2025* धोनी फिर नहीं जिता सके मैच 220 रनों के जवाब में उतरी सीएसके ने शुरुआत में ही धीमी बल्लेबाजी की. हालांकि, शिवम दुबे और कॉन्वे के बीच अच्छी साझेदारी हुई. लेकिन 16वें ओवर में दुबे का विकेट गिरा. इसके बाद बल्लेबाजी के लिए महेंद्र सिंह धोनी पहुंचे. जब धोनी बल्लेबाजी के लिए आए तो चेन्नई को जीत के लिए 25 गेंदों में 69 रनों की दरकार थी. धोनी ने लगाए तीन छक्के धोनी ने 12 गेंदों में 27 रन बनाए. इसमें तीन छक्के भी शामिल हैं. एक चौका भी धोनी ने लगाया. धोनी ने फग्यूसन के  18वें ओवर में दो छक्के लगाए. जबकि अर्शदीप को एक छक्का जड़ा. लेकिन 20वें और आखिरी ओवर में जब जीत के लिए 6 गेंदों में 28 रनों की दरकार थी तब धोनी पहली ही गेंद पर आउट हो गए.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्वालियर में तेजी से अनेक विकास कार्य मूर्तरूप ले रहे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया विवेकानंद नीडम आरओबी व छात्रावासों का वर्चुअल लोकार्पण तेजी से हो रहा है ग्वालियर का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्रीय मंत्री सिंधिया, विधानसभा अध्यक्ष तोमर एवं राज्य सरकार के मंत्रीगण भी कार्यक्रम में वर्चुअली हुए शामिल ग्वालियर में सांसद कुशवाह की मौजूदगी में हुआ लोकार्पण समारोह का आयोजन ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्वालियर में तेजी से अनेक विकास कार्य मूर्तरूप ले रहे हैं। ग्वालियर से आगरा तक सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण से ग्वालियर और दिल्ली में कोई अंतर नहीं रहेगा। साथ ही वेस्टर्न बायपास सहित अन्य बड़े-बड़े विकास कार्य होने जा रहे हैं, जिससे अधोसंरचनागत विकास के साथ आर्थिक दृष्टि से भी ग्वालियर विकसित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर में आयोजित हुए विवेकानंद नीडम रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के लोकार्पण समारोह को भोपाल से वर्चुअल संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ग्वालियरवासियों को इस सौगात के लिये बधाई देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा ग्वालियरवासियों को वेस्टर्न बायपास के रूप में एक और बड़ी सौगात दी है। केन्द्र सरकार द्वारा 4 हजार करोड से अधिक लागत से प्रदेश में मंजूर की गईं 4 महत्वपूर्ण सड़कों में ग्वालियर की वेस्टर्न बायपास भी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्वालियर को रेलवे ओवरब्रिज के साथ 2 छात्रावासों की सौगात भी मिली है। 50-50 सीटर कन्या छात्रावासों से ग्वालियर की अनुसूचित जाति की बालिकाओं को पढ़ाई के लिये आवासीय सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी 11 अप्रैल को अशोकनगर जिले के आनंदपुर धाम भी पधार रहे हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में भी उद्योगों के लिए बना है अनुकूल वातावरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों के लिए प्रदेश में काफी अनुकूल वातावरण बना है। ग्वालियर-चंबल अंचल में भी तेजी के साथ औद्योगिक विकास हो रहा है। गत मार्च माह में ग्वालियर-चंबल अंचल में नई औद्योगिक इकाइयों की आधारशिला रखी गई है। साथ ही आगे चलकर बड़ी-बड़ी इकाईयां यहां मूर्तरूप लेंगी। उन्होंने कहा बड़े उद्योग हों या लघु अथवा सूक्ष्म उद्योग सभी के लिये प्रदेश में काफी अनुकूल वातावरण बना है। राज्य शासन द्वारा 5200 करोड रुपए की समस्त देनदारी चुका दी गई है। ऊर्जा विभाग ने भी कोयले से संबंधित भुगतान का कार्य पूर्ण कर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में सभी का सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों को आगामी 10 अप्रैल को महावीर जयंती और 14 अप्रैल की अंबेडकर जयंती की अग्रिम बधाई भी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1 लाख 52 हजार रुपए वार्षिक से अधिक हो गई है। प्रदेश का बजट 5 वर्ष में दोगना हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में किसानों से 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है। नदी लिंक परियोजनाओं का लाभ भी ग्वालियर-चंबल को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरराज्यीय नदी जोड़ो परियोजना से भी ग्वालियर चंबल क्षेत्र लाभान्वित होगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना और केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना दोनों से यह संभाग लाभान्वित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुग्ध उत्पादन में श्योपुर और अन्य जिलों की विशेष पहचान है। अद्भुत है यह लोकार्पण कार्यक्रम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खुशनुमा अंदाज में कहा कि यह लोकार्पण कार्यक्रम अद्भुत है। केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रेल में सफर करते हुए कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े हैं। वहीं विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर नई दिल्ली से, जबलपुर से लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह एवं प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट नर्मदापुरम से इस कार्यक्रम में वर्चुअल जुडे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा भोपाल में मेरे साथ ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सहित तोमर मौजूद है। सांसद भारत सिंह कुशवाह ग्वालियर में मौके पर मौजूद हैं। इसलिए यह अद्भुत लोकार्पण कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें ग्वालियर के बहादुरा के लड्डू पसंद हैं। आज जो सौगात ग्वालियर को मिली है सहज ही परस्पर मिठाई खिलाने का भी एक सुअवसर है। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि ग्वालियर के विकास में नए-नए आयाम जुड़ रहे हैं। इस श्रृंखला में शामिल हुए नए आरओबी से शिवपुरी – दतिया हाईवे तक जाने के लिये एक और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हुआ है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनौतियों को अवसर में बदला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्पूर्ण प्रदेश में विकसित राज्य बनाने का काम कर रहे हैं। इससे ग्वालियर के विकास को भी नई ऊँचाईयां मिल रही हैं। मुख्यमंत्री ने आज नए आरओबी के साथ-साथ ग्वालियर को दो छात्रावासों का लोकार्पण भी किया है। सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर को 1300 करोड रूपए लागत के वेस्टर्न बायपास की सौगात मिली है, जिससे ग्वालियर के विकास को और गति मिलेगी। उन्होंने पिछले वर्षों में ग्वालियर में स्थापित हुए विकास के विभिन्न आयामों का उल्लेख भी इस अवसर पर किया। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी वर्चुअल उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार से ग्वालियर के सुनियोजित विकास के लिये भरपूर मदद कर रहीं हैं। प्रसन्नता की बात है कि ग्वालियर में एक साथ 5 रेलवे ओवरब्रिज सरकार ने मंजूर किए थे। ये सभी पूर्ण हो चुके हैं, इससे ग्वालियरवासियों को सुगम आवागमन की सुविधा मिली है। साथ ही शहर की तस्वीर बदली है। उन्होंने विवेकानंद नीडम आरओबी की शहरवासियों को बधाई दी। विधानसभा अध्यक्ष तोमर ने ग्वालियर के सुनियोजित विकास में योगदान के लिये प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति भी आभार जताया। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी इस अवसर पर वर्चुअल संबोधन दिया और सभी को विवेकानंद नीडम आरओबी के लोकार्पण की बधाई और शुभकामनायें दीं। जिले के प्रभारी एवं जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विकसित ग्वालियर का संकल्प तेजी से मूर्तरूप ले रहा है। सांसद भारत सिंह कुशवाह ने आरओबी व दो छात्रावासों की सौगात देने के लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रति आभार जताया। साथ ही कहा कि ग्वालियर में विकास कार्यों की श्रृंखला चल रही है। निर्माणाधीन बड़े-बड़े कार्यों के पूर्ण होने पर आगे चलकर निश्चित ही ग्वालियर एक विकसित शहर का रूप लेगा। … Read more

सोने के दाम में आ रही बड़ी गिरावट: इस महीने पहुंचेगा 56,000 रुपये तोला, एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी

मुंबई सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, और निवेशक जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या सोने का भाव 56,000 रुपये तक गिर सकता है। हालिया घटनाओं और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कई Gold Market एक्सपर्ट्स इस संभावना को लेकर अपने विचार साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कुछ महीनों में सोने के दामों में और गिरावट आने की संभावना है, और अगर ये ट्रेंड जारी रहता है, तो सोने का भाव 56,000 रुपये तक पहुंच सकता है। इसका मुख्य कारण अमेरिका के tariff chart, वैश्विक शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और डॉलर की मजबूत स्थिति को माना जा रहा है। इसके अलावा, मांग में कमी और अधिक खनन के कारण भी सोने के दामों में गिरावट आ सकती है। जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ चार्ट ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया, जिसके बाद इन देशों ने भी जवाबी कार्रवाई में टैरिफ बढ़ा दिए। इसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ा, और कहीं न कहीं हर देश में महंगाई बढ़ने की आंशका जताई जा रही है। इसी बीच, सोने की कीमतों को लेकर एक नया अनुमान सामने आया है। गोल्ड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ की वजह से अगले महीने सोने की कीमतों में भारी गिरावट आने वाली है। कब तक आएगी सोने में गिरावट? रिपोर्ट्स के अनुसार, सोने के दाम 40% तक गिर सकते हैं, और ये गिरावट अगले महीने तक महसूस हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सोने का दाम 90,000 रुपये से घटकर महज 50-55 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। क्या है सोने के दाम गिरने की वजह? सोने के दाम में यह गिरावट अमेरिका के टैरिफ चार्ट, अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण हो सकती है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव और सोने की मांग में कमी भी इसकी वजह हो सकती है। अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए बेहतरीन हो सकता है। मगर, क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी, या यह महज एक अस्थायी बदलाव है? क्यों गिरेगा सोने का भाव? अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थितियां: वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव सोने के दाम को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर की मजबूती: डॉलर के मजबूत होने से सोने के दाम में गिरावट हो सकती है, क्योंकि डॉलर की तुलना में सोने की मांग घट सकती है। सार्वभौमिक खनन और आपूर्ति: सोने के ज्यादा खनन और कम डिमांड के चलते भी इसकी कीमतों में कमी हो सकती है। निवेशकों के लिए क्या है सही समय? अगर आप सोने में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अच्छा हो सकता है, खासकर अगर सोने के दाम में गिरावट आती है। लेकिन, जैसा कि एक्सपर्ट्स का कहना है, सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना है, तो आपको सावधानी से काम करना चाहिए और बाजार की स्थिति को ध्यान से देखना चाहिए।  

मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिली, नेशनल हाईवे होगा अपग्रेड

भोपाल मध्यप्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ी सौगात मिल गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मध्यप्रदेश से गुजर रहे नेशनल हाईवे-34 के हिस्से को अपग्रेड करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद एक्स पर साझा की है। 531.84 करोड़ रुपए की स्वीकृति केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी साझा करते हुए लिखा कि मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के शाहगढ़-बक्सवाहा-नरसिंहगढ़-दमोह से 63.50 किमी लंबाई के खंड को पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन में अपग्रेड करने के लिए 531.84 करोड़ रुपए की लागत के साथ स्वीकृति दी गई है। बनाए जाएंगे 4 बाईपास आगे जानकारी देते हुए लिखा है कि नेशनल हाईवे-34 उत्तराखंड के गंगोत्री धाम को मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर) पर लखनादौन से जोड़ता है। शाहगढ़-दमोह खंड के उन्नयन में 5 प्रमुख पुल, बक्सवाहा, भटेरा, नरसिंहगढ़ और पिपरिया चंपत में 4 बाईपास और दमोह के निर्मित क्षेत्रों में सर्विस/स्लिप रोड (दोनों तरफ 1.3 किलोमीटर) शामिल हैं। इस राजमार्ग के जुड़ने से कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी और आर्थिक विकास को भी तेजी से बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से चल रही थी मांग नेशनल हाईवे 34 प्रदेश के नरसिंहपुर, सागर, दमोह और राजगढ़ से निकलता है। इस मार्ग को लंबे समय से अपग्रेड करने की मांग की जा रही थी। बता दें कि, 63.50 किलोमीटर का हिस्सा एमपी से गुजरता है। इस मार्ग के अपग्रेड होने से कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी।

एक दशक में दूसरी बार भारतीय प्रधानमंत्री ने यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया

नई दिल्ली  श्रीलंका की सफल यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत लौट आए हैं। थाईलैंड के बाद श्रीलंका पहुंचे पीएम मोदी का जोरदार स्‍वागत किया गया। इस दौरान श्रीलंका के राष्‍ट्रपति अनूरा कुमार दशनायके ने शनिवार को पीएम मोदी को देश का सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान ‘श्रीलंका मित्र व‍िभूषण’ दिया। पीएम मोदी ने बौद्ध धर्मस्‍थलों का भी दौरा किया जिनका भारत से करीबी नाता रहा है। पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान एक दुर्लभ घटना घटी। पीएम मोदी ने श्रीलंका में अनुराधापुरम की अपनी यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के बेहद शक्तिशाली हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया। एक दशक में ऐसा दूसरी बार हुआ है जब भारतीय प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के अंदर यात्रा के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया। बताया जा रहा है कि कभी तमिल विद्रोही गुट लिट्टे का गढ़ रहे श्रीलंका में सुरक्षा कारणों से पीएम मोदी के लिए यह फैसला लिया गया। यही नहीं पिछले कुछ वर्षों में श्रीलंका के अंदर कई आतंकी हमले भी हो चुके हैं। इसी खतरे को देखते हुए पीएम मोदी के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया गया। पीएम मोदी ने अनुराधापुरम में भारत के वित्‍तपोषण वाले कई रेलवे प्राजेक्‍ट का उद्घाटन किया। इसमें माहो- ओमानथाई लाइन और हाल ही में बनाया गया माहो- अनुराधापुरम खंड शामिल है। इसके अलावा माहो- अनुराधापुरम खंड के सिग्‍नल को भी दुरुस्‍त किया गया। पीएम मोदी ने क‍िया वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल वरिष्‍ठ पत्रकार येशी सेली ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि सुरक्षा कारणों से भारतीय हेलिकॉप्‍टर इस्‍तेमाल करने का यह फैसला लिया गया था। एक सूत्र ने कहा, ‘यह किसी राष्‍ट्राध्‍यक्ष के लिए ऐसी जगहों पर जिन्‍हें सुरक्षित नहीं माना जाता है, वहां पर अपनी सेना के हेलिकॉप्‍टर या विमान का इस्‍तेमाल करने में कुछ भी असामान्‍य नहीं है। इसके लिए काफी पहले ही हवाई क्लियरेंस ले लिया जाता है।’ उन्‍होंने कहा कि निश्चित रूप से भारतीय प्रधानमंत्री के इस हेलिकॉप्‍टर के लिए पहले ही मंजूरी ले ली गई होगी। दुनियाभर में हाल के वर्षों में राष्‍ट्राध्‍यक्षों के साथ कई ऐसी घटनाएं हुई हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से भी पीएम मोदी को किसी खतरे से बचाने के लिए भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया गया। प‍िछले साल 19 मई को ईरानी एयरफोर्स का एक हेलिकॉप्‍टर अजरबैजान की सीमा के पास क्रैश हो गया था और इसमें ईरान के तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी की मौत हो गई थी। सूत्र ने कहा, ‘श्रीलंका में हालांकि हालात सुधर गए हैं लेकिन फिर भी हम खतरा नहीं उठा सकते हैं।’ माना जा रहा है कि उनका इशारा श्रीलंका के गृहयुद्ध की ओर था जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने एसपीजी के साथ अपनी लैंड रोवर में क‍िया सफर लिट्टे नेता प्रभाकरण की मौत के बाद तमिल हिंसक आंदोलन खत्‍म हो गया। लिट्टे के ही आत्‍मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मौत हो गई थी। इससे पहले साल 2015 में जब पीएम मोदी श्रीलंका के अनुराधापुरम, जाफना और तलाईमनार की यात्रा पर गए थे तब उन्‍होंने भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर का इस्‍तेमाल किया था। पीएम मोदी की यात्रा को देखते हुए श्रीलंका की सरकार ने कुछ समय के लिए अनुराधापुरम के एयरफोर्स बेस को रविवार को इंटरनैशनल एयरपोर्ट घोषित कर दिया था ताकि भारतीय प्रधानमंत्री यहां से आसानी से स्‍वदेश रवाना हो सकें। पीएम मोदी अपनी खास लैंडरोवर कार से इस एयरपोर्ट पर पहुंचे थे जिसे खासतौर पर श्रीलंका पहुंचाई गई थी। पूरी सुरक्षा का जिम्‍मा एसपीजी कमांडो के हवाले था। यह शक्तिशाली कार हर तरह के हमले झेल सकती है।

मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला, 71 करोड़ होंगे खर्च !

रीवा  मनगवां विधानसभा में जल्द ही मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम बनने वाला है. गौधाम का क्षेत्रफल तकरीबन 1303 एकड़ का होगा. जिसकी लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से भी अधिक है. वर्तमान में इस गौधाम में 30 हजार गौवंशो की देखरेख और भरण पोषण की व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा गौधाम के विस्तार होने के बाद यहां 50 हजार से भी ज्यादा गौवंशों को आश्रय मिल जाएगा. गौधाम में 100 से अधिक गौ सेवकों को रोजगार तो मिलेगा ही सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. बेसहारा गौवंशों को मिलेगा सहारा मध्य प्रदेश में बेसहारा गौवंश आम आदमी के साथ ही सड़क में चलने वाले बड़े और छोटे वाहनों के आलावा किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है. सड़कों में घूम रहे गौवंश अक्सर सड़क हादसे का शिकार होकर घायल हो जाते हैं और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है. इसके अलावा सड़क पर घूम रहे बेसहारा गौवंशो से टकराकर अक्सर वाहन भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. जिसमें सवार यात्रियों को अपनी जान तक गंवानी पड़ जाती है. प्रदेश की सड़कों पर हैं 10 लाख से अधिक गौवंश गौवंश की सड़क पर होने की समस्या से निजात पाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश भर में गौशाला खोलने की योजना तैयार की है. कई गौशाला भी बनाई गई हैं. जहां पर लाखों गौवंशो को रखा भी जा रहा है. यहांं पर उनके भरण पोषण की व्यवस्था भी बनाई गई. लेकिन प्रदेश मे बेसहारा गौवंशो की संख्या 10 लाख से भी अधिक है. जिसके चलते प्रदेश सरकार ने गौशालाओं के बाद गौधाम बनाने का निर्णय लिया गया. ये गौधाम गौशालाओं से काफी विशाल होंगे. जिसमें अधिक संख्या में बेसहारा गौवंशो को रखकर उनकी देखभाल की जाएगी. रीवा में होगा प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम मध्य प्रदेश में अब तक का सबसे बड़ा गौधाम ग्वालियर लाल टिपारा गौधाम है लेकिन अब रीवा के मनगवां विधानसभा में स्थित हिनौती ग्राम पंचायत में जिस गौधाम का निर्माण हो रहा है वह प्रदेश का सबसे बड़ा गौधाम होगा. इस गौधाम की लागत तकरीबन 71 करोड़ रुपए से अधिक होगी. जबकी इसका क्षेत्रफल 1303 एकड़ का होगा. वर्तमान में यहां पर 30 हजार से ज्यादा गौवंशो को रखा गया है. जिनके भरण पोषण के साथ ही देखरेख की जा रही है. जल्द ही यहां पर गौवंशो की संख्या बढ़ाकर 50 हजार से अधिक कर दी जाएगी. वर्तमान में हैं 30 हजार गौवंश प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के प्रयासों से मनगवां विधानसभा के हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम बनाए जाने की सौगात मिली. जिसके बाद बीते कुछ माह पूर्व ही उप मुख्यमंत्री के द्वारा हिंनौती मे भूमि पूजन किया गया था. वर्तमान में इस गौशाला का निर्माण कार्य चल रहा है. अभी इस गौधाम में 30 हजार से अधिक गौवंशो को रखा गया गया है, जिनकी देख रेख की जा रही है. जल्द ही गौधाम विस्तार करते हुए अधिक क्षमता वाला गौधाम बनाया जाएगा, जहां पर 50 हजार से भी अधिक गौवंशो को रखा जाएगा. ‘एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बनाने का होगा प्रयास’ मनगवां विधायक नरेन्द्र प्रजापति ने बताया कि “हिंनौती ग्राम पंचायत में गौधाम का निर्माण कार्य चल रहा है. उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के दिशा निर्देशन मे गौधाम बनाया जा रहा है. वर्तमान में 30 हजार गौवंश वहां पर रखे गए हैं. गौधाम में जल्द ही एक रेस्ट हाउस का भी निर्माण होगा. यहां से एक प्रतिनिधि मंडल राजस्थान के पथमेड़ा गया था और वहां के गौधाम को देखकर उसी के आधार पर मनगवां में गौधाम का निर्माण कार्य किया जा रहा है. प्रयास किया जाएगा की यह गौधाम एशिया का सबसे बड़ा गौधाम बने.”

वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी, कब्रिस्तानों पर बने सरकारी दफ्तरों पर चलेंगे बुलडोजर

भोपाल नए वक्फ बिल के बाद राजधानी में जल्द ही वक्फ की जमीनों पर कब्जे हटाने शुरू होगें। वक्फ रेकॉर्ड के अनुसार सबसे ज्यादा कब्जे कब्रिस्तानों पर हैं। करीब 100 कब्रिस्तान खत्म हो चुके हैं। इनमें कहीं बस्तियां हैं तो कहीं काम्पलेक्स तो सरकारी दफ्तर भी काबिज हैं।  बोर्ड के रेकॉर्ड में राजधानी में 7700 वक्फ सम्पत्तियां हैं इसमें 135 कब्रिस्तान हैं। लेकिन इनमें से 30 ही बचे हैं। कब्रिस्तानों के संरक्षण के लिए काम कर रहे जमीयत के सचिव इमरान हारून के मुताबिक वर्तमान में भोपाल टॉकीज चौराहा, पुराना आरटीओ ऑफिस, नरेला संकरी, कोलार, जहांगीराबाद सहित कई इलाकों में कब्रिस्तानों के नामोनिशान भी नहीं बचा। पीएचक्यू के पास सरकारी दफ्तर के पीछे कब्रों के निशान अब भी हैं। वक्फ बोर्ड ने जिला प्रशासन को 7700 संपत्तियों की जानकारी दी है। राजस्व रेकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। इसके आधार पर बोर्ड का रिकॉर्ड भी अपडेट होगा। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल के मुताबिक प्रशासन को सभी की जानकारी दी चुकी है। इमरान हारून ने बताया कि शहर में करीब 70 प्रतिशत कब्रिस्तान खत्म हो गए हैं। कब्रिस्तान पर बस्तियां बस गई हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है। नए बिल से निजी कब्जों पर तो कार्रवाई संभव है सरकारी के लिए क्या होगा कुछ पता नहीं। उसके बदले बोर्ड क्या सरकार से जमीन लेेगी। मुस्लिम महासभा के मुन्नवर अली ने बताया कि ये भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। बीते साल ही शहर के कब्रिस्तानों में दफनाने के लिए जगह की कमी की बात सामने आई। निजी कब्जेधारियों पर तो कार्रवाई हुई लेकिन जिन जमीनों पर सरकार का कब्जा है उनके बदले क्या होगा। कब्रिस्तान के बदले जमीन मिलनी चाहिए। जानें वक्फ के नए कानून में क्या है वक्फ का नया कानून बनने के बाद होने वाले बदलावों को लेकर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने शनिवार को विस्तृत जानकारी दी है। इसमें लोगों के बीच बनी धारणा और कानून के प्रावधानों की सच्चाई को सामने रखते हुए सरकार ने साफ किया है कि नया कानून बनने के बाद न तो वक्फ संपत्तियां वापस ली जाएंगी और न ही निजी भूमि पर कब्जा किया जाएगा। इसी पर एक नजर… सवाल : वक्फ संपत्तियां वापस ले ली जाएंगी? सच्चाई : वक्फ कानून 1995 के तहत पंजीकृत कोई भी संपत्ति वक्फ के रूप में वापस नहीं ली जाएगी। क्योंकि एक बार जब कोई संपत्ति वक्फ की घोषित हो जाती है तो स्थायी रूप से उसी रूप में रहती है। विधेयक जिला कलेक्टर को उन संपत्तियों की समीक्षा करने की अनुमति देता है जिन्हें वक्फ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया जा सकता है, खासकर अगर सरकारी संपत्ति है तो। वैध वक्फ संपत्तियां संरक्षित रहती हैं। सवाल : क्या वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण नहीं होगा? सच्चाई : एक सर्वेक्षण होगा। कानून सर्वेक्षण आयुक्त की पुरानी भूमिका के स्थान पर जिला कलेक्टर को नियुक्त करता है। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग करके सर्वेक्षण करेंगे। इसका उद्देश्य सर्वेक्षण प्रक्रिया रोके बिना रिकॉर्डों की सटीकता में सुधार करना है।   सवाल : क्या मुसलमानों की निजी भूमि अधिग्रहित की जाएगी? सच्चाई : कोई निजी भूमि अधिग्रहित नहीं की जाएगी। यह केवल उन संपत्तियों पर लागू होता है जिन्हें वक्फ घोषित किया गया है। निजी या व्यक्तिगत संपत्ति को प्रभावित नहीं करता है जिसे वक्फ के रूप में दान नहीं किया गया है। केवल स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वक्फ के रूप में समर्पित संपत्तियां ही नए नियमों के अंतर्गत आती हैं। सवाल : क्या वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम बहुसंख्यक हो जाएंगे? सच्चाई : बोर्ड में गैर-मुस्लिम शामिल होंगे लेकिन वे बहुमत में नहीं होंगे। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में पदेन सदस्यों को छोड़कर दो गैर-मुस्लिमों को सदस्य के रूप में शामिल करने की आवश्यकता होगी, जिससे परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य और वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन सदस्य हो सकते हैं। केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्डों में कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए। इसका उद्देश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को कम किए बिना विशेषज्ञता को जोड़ना है। सवाल : क्या सरकार इस विधेयक का उपयोग वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए करेगी? सच्चाई : कानून जिला कलेक्टर के पद से ऊपर के एक अधिकारी को यह समीक्षा करने और सत्यापित करने का अधिकार देता है कि क्या सरकारी संपत्ति को गलत तरीके से वक्फ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। लेकिन यह वैध रूप से घोषित वक्फ संपत्तियों को जब्त करने के लिए अधिकृत नहीं करता है। क्या कानून गैर-मुसलमानों को मुस्लिम समुदाय की संपत्ति पर नियंत्रण या प्रबंधन की अनुमति देता है? सच्चाई : संशोधन में प्रावधान किया गया है कि केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य बोर्ड में दो कुछ ही गैर-मुस्लिम होंगे। चूंकि अधिकांश सदस्य मुस्लिम समुदाय से होंगे, जिससे धार्मिक मामलों पर समुदाय का नियंत्रण बना रहेगा। धारणा : क्या उपयोगकर्ता  द्वारा वक्फ का प्रावधान हटाने से लंबे समय से स्थापित परंपराएं खत्म हो जाएंगी? सच्चाई : यह प्रावधान हटाने का उद्देश्य संपत्ति पर अनधिकृत या गलत दावों को रोकना है। उपयोगकर्ता संपत्तियों (जैसे मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान) द्वारा ऐसे वक्फ को सुरक्षा प्रदान की गई है जो वक्फ संपत्ति के रूप में बनी रहेंगी, सिवाय इसके कि संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से विवाद में है या सरकारी संपत्ति है। उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जहां किसी संपत्ति को सिर्फ इसलिए वक्फ माना जाता है क्योंकि उसका उपयोग लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है, भले ही मालिक द्वारा कोई औपचारिक, कानूनी घोषणा न की गई हो। सवाल : क्या मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान की पारंपरिक स्थिति प्रभावित होगी? सच्चाई : वक्फ संपत्तियों के धार्मिक या ऐतिहासिक चरित्र में हस्तक्षेप नहीं करता। इन स्थलों की पवित्र प्रकृति में बदलाव करना नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना ही इसका उद्देश्य है।

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के लिए 120 बीघा जमीन की सहमति मिल चुकी

इंदौर  एमपी में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के किसान जमीन देने पर सहमत होते जा रहे हैं। बीते दिन दो विधायकों और जमीन मालिकों के साथ एमपीआइडीसी की बैठक हुई। मौके पर ही कुछ जमीन मालिकों ने करीब 40 बीघा जमीन देने के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। अब तक 120 बीघा जमीन देने पर सहमति बन गई है।  एमपीआइडीसी के ऑफिस में हुई बैठक में विधायक उषा ठाकुर, मधु वर्मा और इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के 50 से अधिक जमीन मालिक व किसान मौजूद थे। प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देकर कई लोगों की शंका का समाधान किया गया। सवाल किया गया कि यह कब पूरा होगा तो एमपीआइडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बताया कि जमीन मिलने के बाद दो साल में प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। पहली बार सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड किसी योजना में दे रही है। कॉरिडोर के तैयार होने से क्षेत्र और इंदौर के विकास को नई उड़ान मिलेगी। बच्चों को रोजगार मिलेगा। समय पर पूरी होने की उम्मीद एमपीआईडीसी के कार्यकारी डायरेक्टर राजेश राठौड़ ने बैठक में जमीन मालिकों के हर सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी, जिससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, उन्हें मिलने वाले विकसित भूखंडों का उपयोग वे तुरंत शुरू कर सकेंगे। जमीन मालिकों ने भी इस बात पर संतोष जताया कि परियोजना समय पर पूरी होने की उम्मीद है। मिलेंगे रोजगार के अवसर उनका कहना था कि इससे उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उनके बच्चों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। किसानों का कहना है पहले डर था कि जमीन चली जाएगी और बदले में जो मिलेगा, वो पर्याप्त नहीं होगा, लेकिन अब स्थिति साफ हो गई है, और अब जब हमें 60त्न विकसित प्लॉट मिलने की गारंटी दी जा रही है, तो हम इस परियोजना का हिस्सा बनने को तैयार हैं। समय पर दर्ज कराएं सहमति राजेश राठौड़ ने कहा हमारा लक्ष्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए इस परियोजना को मूर्त रूप देना है। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें किसान न केवल अपनी जमीन का उचित प्रतिफल प्राप्त करेंगे, बल्कि औद्योगिक विकास के साझेदार भी बनेंगे। इसलिए समय रहते अपनी सहमति दर्ज कराएं और इस ऐतिहासिक परिवर्तन का हिस्सा बनें।  जिला प्रशासन द्वारा भी इस परियोजना को सफल बनाने के लिए तेजी से कार्रवाई की जा रही है। ग्राम रिजलाय में एसडीएम राऊ गोपाल वर्मा ने एक अलग बैठक ली, जिसमें कई जमीन मालिक शामिल हुए। इस बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई और किसानों ने परियोजना के प्रति उत्साह दिखाया। प्रशासन का यह प्रयास है कि हर किसान की सहमति बिना किसी दबाव के, उनकी मर्जी से ली जाए। सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन बैठक में महू विधायक उषा ठाकुर ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों की हर मांग को पूरा किया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि जमीन देने वाले किसानों को 60 फीसदी विकसित प्लॉट मिलेगा। यह योजना स्वर्णिम भारत के निर्माण का एक कदम है। उद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए हमारे युवाओं को रोजगार मिलेगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि किसानों की छोटी-छोटी शंकाओं का समाधान करने के लिए प्रशासन और एमपीआईडीसी के अधिकारी हर कदम पर उनके साथ हैं। राऊ विधायक मधु वर्मा भी इस मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने परियोजना को क्षेत्र के लिए अतिमहत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि किसानों के लिए भी आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। जिस गांव में जमीन वहीं मिलेंगे प्लॉट पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर 19.6 किलोमीटर लंबी और 75 मीटर चौड़ी सडक़ के दोनों ओर 300-300 मीटर के बफर जोन में विकसित की जाएगी। इसमें 17 गांवों- नैनोद, कोर्डियाबर्डी, रिजलाय, बिसनावदा, नावदापंथ, श्रीरामतलावली, सिन्दोड़ा, सिन्दोड़ी, शिवखेड़ा (रंगवासा), नरलाय, मोकलाय, डेहरी, सोनवाय, भैंसलाय, बागोदा, धन्नड़ और टिही की कुल 1331 हेक्टेयर जमीन शामिल है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2410 करोड़ रुपये है और इसे तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे विकास कार्य में कोई बाधा न आए। किसानों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि उन्हें अपनी जमीन के बदले 60त्न विकसित भूखंड मिलेंगे। ये भूखंड फ्री होल्ड होंगे, यानी किसान इनका पूरा मालिकाना हक रख सकेंगे। ये भूखंड यथासंभव उसी गांव में आवंटित किए जाएंगे, जहां उनकी मूल जमीन स्थित है। इससे किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का मौका मिलेगा और वे इन भूखंडों का उपयोग आवास, व्यवसाय या बिक्री के लिए कर सकेंगे। सहमति देने की प्रक्रिया जमीन मालिक अपनी सहमति एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय कार्यालय, इंदौर में जमा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रारूप में दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसकी पावती उन्हें दी जाएगी। सहमति मिलने के बाद एमपीआईडीसी और राजस्व विभाग की टीम जमीन का भौतिक निरीक्षण करेगी और इसके आधार पर रजिस्ट्री एमपीआईडीसी के पक्ष में होगी। रजिस्ट्री से पहले किसानों को यह शपथ-पत्र देना होगा कि उनकी जमीन पर कोई विवाद या ऋ ण नहीं है। यदि जमीन पर ऋण है, तो संबंधित बैंक से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट देना होगा। रजिस्ट्री के बाद किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार भूखंड आरक्षित कर सूचित किया जाएगा और परियोजना पूरी होने पर इनका कब्जा और रजिस्ट्री उनके नाम होगी। समस्या आई तो हम रहेंगे साथ विधायक ठाकुर ने किसानों से कहा कि औद्योगीकरण आज की जरूरत है और इसके जरिए युवाओं को रोजगार मिलेगा। किसानों की समस्याओं के निराकरण के लिए हमेशा खड़ी हूं। वर्मा ने योजना को क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगी। दावे-आपत्तियों का अंतिम निराकरण कॉरिडोर को लेकर एमपीआइडीसी ने दावे-आपत्ति बुलाए थे, जिसमें 700 लोगों ने उपस्थिति दर्ज कराई थी। पहले चरण में सभी दावे-आपत्तियों को सुना गया था। अब सरकार 60 फीसदी विकसित भूखंड देकर जमीन ले रही है तो बड़ी संख्या में किसान जमीन देने को राजी हो गए हैं। मंगलवार को आपत्तिकर्ताओं की आखिरी सुनवाई होगी। बताया गया है कि कुछ कॉलोनाइजरों की भी जमीन है और वे अड़े हुए हैं।

एनफ्जूएंजा वायरस मिलने के बाद प्रदेशभर में अलर्ट जारी, अंतरराज्यकीय सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ाई, मचा हड़कंप

उत्तराखंड उत्तराखंड चारधाम यात्रा के शुरू होने से पहले एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। केदारनाथ धाम रूट पर एक्वाईन एनफ्जूएंजा वायरस मिलने के बाद से हड़कंप मच गया है। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के बाद अब कुमाऊं मंडल में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। एनफ्जूएंजा वायरस मिलने के बाद प्रदेशभर में अलर्ट जारी करने के साथ ही प्रदेश के अंतरराज्यकीय सीमाओं पर भी चौकसी बढ़ा दी गई है। वायरस की जांच से लेकर रोकथाम के लिए कड़े इंतजाम भी किए जा चुके हैं। क्वारंटीन सेंटर बनाने से लेकर पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की जा चुकी है। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में अश्ववंशीय पशुओं में एक्वाईन एनफ्जूएंजा नामक संक्रामक बीमारी फैलने की आहट के बीच पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। आपको बता दें कि यह वायरस मुख्यत: घोड़े, खच्चरों में फैलता वाला है। जो कि रोग, वायरल जुकाम की तरह लक्षण सामने आते हैं। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ.रमेश नितवाल ने बताया कि एक्वाईन एनफ्जूएंजा को लेकर उत्तराखंड के गढ़वाल में अलर्ट पहले ही जारी हो चुका है। राहत भरी खबर यह है कि कुमाऊं मंडल में फिलहाल किसी भी अश्ववंशीय पशुओं वायरस का कोई केस सामने नहीं आया है। लेकिन, एहतियातन विभाग ने सावधानी बरतने को कहा है। पशुपालन के डॉ राजीव सिंह कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से संदिग्धों अश्ववंशीय जानवरों के ब्लड सेंपल भी जरुरत पड़ने पर पशुपालन विभाग लेगा। कहा कि इस रोग से ग्रसित घोड़ों और खच्चरों के मांसपेशियों में दर्द, थकान व कमजोरी महसूस होती है। संक्रामक रोग की तरह यह बीमारी फैलती है। बताया कि अभी रूद्रप्रयाग में इसके एक दो केस सामने आए हैं। लंपी को समय पर हराने के बाद विभाग के लिए अब यह दूसरी मुसीबत आ खड़ी हुई है। हालांकि विभाग ने इसके लिए तैयारी कर रखी है। यात्रा रूट पर 12 अश्ववंशीय पशुओं में मिला था वायरस उत्तराखंड चारधाम यात्रा रूट पर रुद्रप्रयाग जिले में 12 अश्ववंशीय पशुओं में एनफ्जूएंजा वायरस मिला था। पशुओं में वायरस मिलने के बाद धामी सरकार अलर्ट मोड पर आ गई थी। वायरस मिलने के बाद पशुपालन मंत्री सौरभ बहुगुणा ने आला-अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए थे। वायरस की स्क्रीनिंग करने पर विशेषतौर से फोकस करने को कहा गया है। सरकार की ओर से सख्त निर्देश दिए हैं कि चारधाम यात्रा के दौरान किसी भी रोगग्रस्त घोड़े-खच्चर को ले जाने की अनुमति नहीं होगी। रुद्रप्रयाग में बनेंगे दो क्वारंटीन सेंटर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में दो क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। वायरस की चपेट में आने वाले अश्ववंशीय पशुओं को क्वारंटीन किया जाएगा। आपको बता दें कि यह वायरस पशुओं में एक से दूसरे में बहुत ही तेजी के साथ फैलता है। उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों को भी अलर्ट रुद्रप्रयाग जिले में अश्ववंशीय पशुओं में वायरस की पुष्टि होने के बाद उत्तराखंड के बॉर्डर में अलर्ट जारी कर दिया गया है। विभाग की ओर से टीमें गठित कर अंतरराज्यकीय बॉर्डरों पर तैनात किया गया है। आपको बता दें कि चारधाम यात्रा के दौरान देश-विदेश से भारी संख्या में तीर्थ यात्री दर्शन करने को उत्तराखंड आते हैं। केदारनाथ और उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री धामों में घोड़े-खच्चरों से यात्रा करते हैं। मुक्तेश्वर में होगी सैंपलों की जांच उत्तराखंड के पांच जिलों के सभी घोड़े-खच्चरों के सीरोलोजिकल सैंपल लिए जाएंगे, जिनकी जांच इंडियन वेटरी रिसर्च इंस्टीट्यूट मुक्तेश्वर में कराई जाएगी। यदि कोई अश्ववंशीय पशु पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे क्वारंटीन किया जाएगा। फिर 12 दिन बाद उसका सैंपल लेकर जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही यात्रा में तैनाती की अनुमति दी जाएगी। केदारनाथ-यमुनोत्री चारों धामों के कपाट खुलने की यह डेट उत्तराखंड में केदारनाथ, यमुनोत्री समेत चारों धामों के कपाट खुलने की तारीखों का ऐलान हो चुका है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई को खोले जाएंगे, जबकि यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे। चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट 4 मई, जबकि गंगोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे।

पश्चिमी रिंग रोड में नई गाइडलाइन के दोगुना मुआवजा दिए जाने पर किसानों और प्रशासन के बीच सैद्धांतिक सहमति बनी

इंदौर बहुप्रतीक्षित पश्चिमी आउटर रिंगरोड परियोजना को लेकर एक बड़ी बाधा अब दूर हो गई है। जमीन अधिग्रहण को लेकर असहमति जता रहे किसान अब सर्वे के लिए तैयार हो गए हैं। नई गाइडलाइन के दोगुना मुआवजा दिए जाने पर किसानों और प्रशासन के बीच सैद्धांतिक सहमति बन गई है। इसके साथ ही परियोजना को लेकर लंबे समय से रुकी प्रक्रिया अब फिर से गति पकड़ने जा रही है। सहमति बनने के बाद मंगलवार से दो टीमें सर्वे का काम शुरू करेगी। पश्चिम रिंग रोड को लेकर रेसीडेंसी कोठी में जिला प्रशासन, एनएचआई और किसान नेताओं के बीच बैठक हुई। बैठक में नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा देने पर सहमति बन गई। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि किसानों को पुरानी गाइडलाइन पर अवार्ड पारित होगा, लेकिन आर्बिटेशन के माध्यम से नई गाइडलाइन का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। 15 दिन में किसानों को अवार्ड पारित होगा। वहीं आरबीडेशन की प्रक्रिया डेढ माह में पूरी करेंगे। इस पर किसानों के साथ सहमति बन गई है। मंगलवार से टीमें सर्वे का काम शुरू करेगी। वर्षाकाल से पहले निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा, ताकि वर्षाकाल से पहले काफी काम पूरे किए जा सके।   विरोध के कारण अटका था काम करीब आठ माह पूर्व इस परियोजना का टेंडर किया गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण में किसानों की असहमति के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ सका। किसानों की मांग थी कि उन्हें उचित दर पर मुआवजा दिया जाए। किसान बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा मांग रहे थे। किसानों के विरोध के कारण प्रशासन ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया रोक दी थी। अब ग्रामीण क्षेत्रो में कृषि भूमि की गाइडलाइन सर्वाधिक बड़ी है। ऐसे में किसान बड़ी गाइडलाइन के दो गुना मुआवजे पर सहमत हो गए।

मध्‍य प्रदेश में गर्मी का कहर जारी, 7 जिलों में टूटा रिकॉर्ड, नर्मदापुरम में 44 के पार पहुंचा पारा

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई शहरों में गर्मी का कहर जारी है। प्रदेश में दो दशक बाद अप्रैल महीने में ही जून जैसा तापमान देखने को मिल रहा है। गुजरात-राजस्थान से आ रहीं गर्म हवाओं के कारण भीषण गर्मी पड़ रही है। जिसकी वजह से तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। सोमवार को नर्मदापुरम और रतलाम सबसे गर्म रहे, जबकि प्रदेश के 5 बड़े शहर- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन में सीजन की सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी। ऐसी ही गर्मी मंगलवार को भी पड़ेगी। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रतलाम और नीमच समेत 8 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इंदौर, उज्जैन और धार में रातें गर्म रहेंगी जबकि श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, गुना, नीमच, मंदसौर और रतलाम में लू का अलर्ट है। 9 और 10 अप्रैल को भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में भी हीट वेव चलने की संभावना है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) की वजह से 11 अप्रैल को प्रदेश के कई शहरों में हल्की बारिश हो सकती है। इससे पहले तेज गर्मी का असर बना रहेगा। सभी शहरों में सीजन का सबसे गर्म दिन सोमवार को मध्यप्रदेश के सभी शहरों में सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। मौसम विभाग के अनुसार, नर्मदापुरम में 44.3 डिग्री और रतलाम में 44 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। सीजन में पहली बार भोपाल-इंदौर समेत सभी पांच बड़े शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री के पार रहा। भोपाल में 41.6 डिग्री, इंदौर में 40.6 डिग्री, ग्वालियर में 41.7 डिग्री, उज्जैन में 42 डिग्री और जबलपुर में 40.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। ऐसा रहेगा अप्रैल में मौसम     पहला सप्ताह ऐसा रहा: रात का तापमान सभी संभागों में सामान्य से 2-3 डिग्री ज्यादा 21-24 डिग्री सेल्सियस बना रहा। वहीं, दिन में पश्चिमी गर्म हवाओं के कारण अधिकतम तापमान इंदौर, सागर और नर्मदापुरम संभागों में सामान्य से ज्यादा 39 से 44 डिग्री तक पहुंच गया। उज्जैन, भोपाल, ग्वालियर समेत बाकी संभागों में यह 41 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। पहले सप्ताह रतलाम में लू चल चुकी है। वहीं, बाकी शहरों में गर्म हवाओं से गर्मी बढ़ी रही।     दूसरा सप्ताह: इंदौर, उज्जैन और चंबल संभाग में रात का तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री ज्यादा यानी 23 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। पूर्वी नम हवाओं के कारण थोड़ी राहत के साथ भोपाल, जबलपुर, सागर, रीवा, शहडोल, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में तापमान सामान्य यानी 22-24 डिग्री बना रहेगा। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में तापमान सामान्य से बढ़कर 41 से 43 डिग्री सेल्सियस रहेगा। 2 से 3 दिन लू भी चल सकती है। इस दौरान बारिश होने की संभावना नहीं है, लेकिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से दक्षिणी हिस्से में बादल जरूर छा सकते हैं।     तीसरा सप्ताह: उत्तर-पश्चिमी हवाओं के जोर पकड़ने के साथ इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, नर्मदापुरम संभागों में न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। पूरे प्रदेश में दिन में अधिकतम तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। 2 से 3 दिन लू चल सकती है। हल्की बारिश होने की संभावना है।     चौथा सप्ताह: उत्तर-पश्चिमी हवाओं के लगातार जोर पकड़ने के साथ न्यूनतम तापमान पूरे प्रदेश में सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक यानि 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। दिन के साथ रातें भी गर्म हो जाएंगी। ग्वालियर, चंबल, सागर और रीवा संभाग में पारा 43-45 डिग्री जबकि इंदौर, उज्जैन-भोपाल सहित बाकी प्रदेश में 41 से 44 डिग्री सेल्सियस तापमान रह सकता है। बंगाल क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से अप्रैल के आखिरी में 3 से 4 दिन तक लू का असर रह सकता है। अप्रैल-मई में हीट वेव का असर ज्यादा मध्यप्रदेश में मार्च से गर्मी के सीजन की शुरुआत हो जाती है। इसी ट्रेंड के अनुसार अगले 3 महीने तेज गर्मी पड़ेगी। मौसम विभाग ने मई तक 15 से 20 दिन हीट वेव चलने का अनुमान जताया है। अप्रैल-मई में 30 से 35 दिन तक गर्म हवा चल सकती है। अप्रैल-मई में सबसे ज्यादा गर्मी जिस तरह दिसंबर-जनवरी में सर्दी और जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह गर्मी के दो प्रमुख महीने अप्रैल और मई हैं। इस बार मार्च के दूसरे पखवाड़े में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। मार्च महीने के आखिरी में ही टेम्प्रेचर बढ़ने लगता है, लेकिन इस बार ऐसा मौसम नहीं रहा। आखिरी 3 दिन वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की वजह से पारे में गिरावट हुई। अप्रैल के पहले पखवाड़े में मौसम का असर मिला-जुला रहेगा।

26 लाख के इनामी 22 नक्सलियों ने आज डीआईजी के समक्ष किया आत्मसमर्पण

बीजापुर शासन की पुनर्वास एवं आत्मसर्पण नीति के साथ ही चलाये जा रहे नियद नेल्ला नार योजना से प्रभावित होकर पीएलजीए बटालियन नम्बर एक सदस्य, टीएससी (तेलंगाना स्टेट कमेटी) अंतर्गत सीआरसी कंपनी नम्बर 2 का सदस्य, एसीएम, मिलिशिया डिप्टी कमांडर, मिलिशिया सदस्य, केएमएस उपाध्यक्ष, मिलिशिया प्लाटून डिप्टी कमांडर, मिलिशिया प्लाटून सदस्य, पदेड़ा, गलगम, कोत्तागुड़ा, कमलापुर, डुमरीपालनार, कोरसागुड़ा आरपीसी के अन्य सदस्य कुल 22 नक्सलियों ने आठ अप्रैल को डीआईजी सीआरपीएफ बीजापुर देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर जितेन्द्र कुमार यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया। नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण के पीछे जिले में हो रहे विकास कार्य सबसे अहम वजह है। तेजी से बनती सड़कें, गावों तक पहुंचती विभिन्न सुविधाओं ने इन्हें प्रभावित किया है। संगठन के विचारों से स्थानीय युवाओं में संगठन से मोहभंग हो रहा है। संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद इनके आत्मसमर्पण का बहुत बड़ा कारण है। छत्तीसगढ़ शासन की नवीन पुनर्वास नीति ने कई नक्सलियों को नई उम्मीद दी है और उन्हें संगठन के भीतर शोषण और क्रूर व्यवहार से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है। यह नीति उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटकर सामान्य जीवन जीने की आशा देती है। इसके अलावा सुरक्षा बलों के लगातार अंदरूनी क्षेत्रों में कैम्प स्थापित करने और क्षेत्र में चलाए जा रहे आक्रामक अभियानों ने भी नक्सलियों को संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के नाम कमली हेमला उर्फ सोमे पद पीएलजीए बटालियन नम्बर 1 में सदस्य, इनाम 08.00 लाख रूपये, मुया माड़वी उर्फ राजेश टीएससी (तेलंगाना स्टेट कमेटी) अन्तर्गत सीआरसी कंपनी न. 2 में (पार्टी सदस्य), इनाम 8.00 लाख रूपये, सोनू ताती पश्चिम बस्तर डिवीजन प्रेस टीम कमाण्डर (एसीएम) , घोषित ईनाम 5.00 लाख रूपये,महेश पुनेम प्लाटून नबंर 13 में (पीएलजीए सदस्य) घोषित इनाम 05.00 लाख, बुधराम ताती उर्फ सुद्दू उर्फ गट्टा मिलिशिया कंपनी डिप्टी कमाण्डर, सन्नू हेमला मिलिशिया कंपनी सदस्य, सोमलू मड़कम उर्फ पटेल सदस्य/कृषि शाखा अध्यक्ष, हुंगा कुहराम उर्फ वड्डे उर्फ ओयाम सदस्य/जन सम्पर्क शाखा अध्यक्ष, देवा माड़वी उर्फ बुड़ता कृषि शाखा अध्यक्ष, हुंगा कट्टम उर्फ बैदी आरपीसी मिलिशिया प्लाटून बी सेक्शन कमाण्डर, पोज्जा बाड़से उर्फ जोगा आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, नंंदा मड़कम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, हुंगी कुंजाम आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्या, हड़मा पोड़ियम उर्फ उरपा आरपीसी मिलिशिया प्लाटून सदस्य, विज्जो कुंजाम आरपीसी केएएमएस सदस्या,नरसी कट्टम आरपीसी केएएमएस उपाध्यक्ष, मोती सोढ़ी आरपीसी केएएमएस सदस्या, विज्जा उईका आरपीसी सीएनएम सदस्य कोसा पोड़ियम उर्फ लमडी कोसा आरपीसी केएएमएस सदस्या,विजय मड़कम ऊर्फ विज्जा सेल सदस्य/संस्कृति शाखा सदस्य, बोदी कारम उर्फ करवे RPC केएएमएस सदस्या, कोसा मड़कम सेल सदस्य/संस्कृति शाखा सदस्य।

वक्फ संशोधित कानून आज से देश में प्रभावी, अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नई दिल्ली देश में आज से वक्फ संशोधन अधिनियम लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने इसको लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। जिसमें बताया कि वक्फ संशोधित कानून 8 अप्रैल से देश में प्रभावी कर दिया गया है। वक्फ संधोशन विधेयक को पिछले हफ्ते संसद के दोनों सदनों और राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई थी। जिसके बाद आज से यह नया कानून प्रभावी होगा। सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन यह अधिसूचना भारत के राजपत्र (The Gazette of India) में प्रकाशित की गई है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने संविधान प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए अधिनियम की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत 8 अप्रैल 2025 को वह तारीख घोषित की है जिस दिन से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के सभी प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में मिली कानून को चुनौती राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक कानून बन चुका है। हालांकि, संसद के दोनों सदनों से पारित होते ही इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई है। अभी तक कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं जिनमें इसे संविधान के खिलाफ और धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताते चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या दी है दलील? कानून के खिलाफ कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन की आजादी मिली हुई है, जबकि इस नये कानून में मुसलमानों की इस आजादी में हस्तक्षेप होता है और सरकारी दखलंदाजी बढ़ती है। याचिकाओं में वक्फ बोर्ड के सदस्यों में गैर मुस्लिमों को शामिल करने का भी विरोध किया गया है। सरकार ने कोर्ट में दाखिल किया कैविएट वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 15 अप्रैल को सुनवाई संभावित है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को शीर्ष अदालत में कैविएट दाखिल की है, ताकि बिना उसकी दलीलें सुने कोई आदेश पारित न किया जा सके। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति ने दी थी मंजूरी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, संसद से पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 मंगलवार यानी 8 अप्रैल से प्रभाव में आ गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को विधेयक को अपनी मंजूरी दी थी। 10 से अधिक याचिकाएं दायर, कई बड़े नेता भी याचिकाकर्ता नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 10 से ज्यादा याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाकर्ताओं में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जमीयत उलमा-ए-हिंद, DMK, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी व मोहम्मद जावेद, आप विधायक अमानतुल्लाह खान, RJD सांसद मनोज झा और फैज़ अहमद जैसे नाम शामिल हैं। अधिनियम को बताया गया अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला AIMPLB की याचिका में कहा गया है कि यह अधिनियम न सिर्फ मुस्लिम अल्पसंख्यकों को उनके धार्मिक ट्रस्ट व संपत्तियों के प्रशासन से वंचित करता है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का भी उल्लंघन करता है। DMK और अन्य दलों ने जताई गहरी आपत्ति DMK ने अदालत में दी अपनी याचिका में कहा है कि तमिलनाडु के 50 लाख और देशभर के 20 करोड़ मुसलमानों के अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। ओवैसी की याचिका में कहा गया है कि अन्य धर्मों के धार्मिक ट्रस्टों को जो संरक्षण मिला हुआ है, वह वक्फ ट्रस्टों से छीना जा रहा है—जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के खिलाफ है। जमीयत उलमा-ए-हिंद: यह संविधान पर सीधा हमला है जमीयत ने इसे “मुसलमानों की धार्मिक आज़ादी पर सीधी चोट” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से अधिनियम को रद्द करने की मांग की है। क्या कहते हैं कानून विशेषज्ञ? कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक समुदायों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए यह सुनवाई अहम साबित हो सकती है।

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