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युवाओं को सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका, कांस्टेबल और SI के पदों पर जल्द शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया, भरे जाने हैं 8000 पद

भोपाल मध्य प्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर कार्रवाई शुरू होने वाली है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस माह के अंत में करीब आठ हजार पदों पर पुलिस भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसमें इसमें 7,500 कांस्टेबल और 500 उप निरीक्षक (एसआई) के पद शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय ने कर्मचारी चयन मंडल से जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने का अनुरोध किया है। भर्ती की अधिसूचना इस माह के अंत तक जारी की जा सकती है और शारीरिक दक्षता परीक्षा जून-जुलाई के आसपास हो सकती है। बता दें कि राज्य में एसआई के पदों पर भर्ती परीक्षा छह साल बाद हो रही है। इससे पहले 2018 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक भर्ती नहीं हो सकी। इसका एक कारण कोविड-19 और पिछले कुछ सालों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना है। युवा लंबे समय से इस भर्ती का इंतजार कर रहे थे। भर्ती के इंतजार में कई युवाओं की तो अब उम्र भी बीत चुकी है, लेकिन राहत की बात यह है कि अब सरकार ने इस भर्ती को जल्द से जल्द शुरू करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में युवाओं को अभी से ही इस भर्ती के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।  छह साल बाद हो रही एसआई की भर्ती परीक्षा एसआई के पदों पर भर्ती परीक्षा छह साल बाद हो रही है। इससे पहले 2018 में सब इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक भर्ती नहीं हो सकी। इसका एक कारण कोविड-19 और पिछले कुछ सालों से भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना है। लंबे समय से एसआई भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थी अब उम्र सीमा पार भी कर चुके हैं। पांच साल में होगी ढाई लाख पदों पर भर्ती सरकार ने विधानसभा में सरकारी विभागों के रिक्त पदों को भरने का एलान किया है। सरकार ने कहा कि आगामी पांच साल में सरकार ढाई लाख पदों पर भर्ती करेगी। सभी विभागों के खालों पदों को भरा जाएगा। सरकार ने हर वर्ग को एससी,एसटी और ओबीसी को उनके लिए आरक्षित आरक्षण के अनुसार लाभ देने का भी वादा किया है। वहीं, कांग्रेस भी सरकार पर रोजगार को लेकर हमलावर है। कई अवसरों पर कांग्रेस सरकार को उनके वादे पूरे नहीं करने को लेकर घेर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि कई विभागों में पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार कोई पद नहीं भर रही। सिर्फ वादे कर रही है। MP Police भर्ती अधिसूचना जल्द, परीक्षा जून-जुलाई में मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा इस माह के अंत तक भर्ती अधिसूचना जारी की जा सकती है। पुलिस मुख्यालय ने बोर्ड से भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) जून-जुलाई में आयोजित की जा सकती है। MP Police में 6 साल बाद फिर से SI भर्ती 2018 के बाद से अब तक MP में कोई SI भर्ती नहीं हुई थी। कोविड-19 और प्रशासनिक देरी की वजह से प्रक्रिया अटकी रही। इस देरी से कई अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं, जिससे सरकार पर पहले से ही दबाव बना हुआ था। सरकार का बड़ा वादा: 5 साल में 2.5 लाख नौकरियां सरकार ने विधानसभा में घोषणा की है कि अगले 5 वर्षों में 2.5 लाख पदों पर भर्ती की जाएगी। सभी विभागों में खाली पदों को भरने की तैयारी की जा रही है। SC/ST/OBC वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। राजनीतिक हलचल भी तेज कांग्रेस सरकार पर रोजगार के वादे पूरे न करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार सिर्फ घोषणाएं कर रही है, जबकि विभागों में हज़ारों पद खाली पड़े हैं।

मध्यप्रदेश में शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया

 भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर बहुत गंभीर है इसलिए शासन ने 750 करोड़ रुपये का प्रावधान कर मुख्यमंत्री नगरीय विकास योजना बनाई है इस पंचवर्षीय योजना में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के प्रयास किये जायेंगे साथ ही प्रदेश के पांच शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रदेश के नगरीय क्षेत्र में हरित स्थान विकास और सौन्दर्यपरक पर्यावरण के लिये मुख्यमंत्री नगर विकास योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया है। पांच वर्ष की इस योजना में वर्ष 2028-29 तक के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना राज्य सरकार द्वारा अपने वित्तीय संसाधनों से संचालित करेगी। प्रदेश में विकसित होंगे नगर वन योजना के मुताबिक विभाग द्वारा प्रत्येक नगर वन के विकास के लिये अधिकतम 2 करोड़ 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। योजना में न्यूनतम क्षेत्रफल प्रति एकड़ 10 लाख रुपये नगर वन के सृजन के लिये नगरीय निकायों को अनुदान स्वरूप दिये जाएंगे। योजना के संबंध में नगरीय निकायों को निर्धारित प्रावधान के अनुसार प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिये गये है। मुख्यमंत्री जन सहभागिता निर्माण योजना का मिलेगा लाभ नगरीय क्षेत्रों में जन-भागीदारी से नागरिकों की सुविधा के लिये अद्योसंरचना विकास के लिये “मुख्यमंत्री जन-सहभागिता निर्माण’’ योजना चलाने का भी निर्णय लिया है। योजना में 150 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से 5 वर्षों के लिये 750 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना में प्रतिवर्ष नगरपालिक निगमों के लिये 5 करोड़ रुपये, नगरपालिकाओं को एक करोड़ रुपये और नगर परिषदों को 25 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। जन-भागीदारी एवं राज्य शासन की आर्थिक सहायता का अनुपात समान रूप से 50-50 प्रतिशत रहेगा। योजना में नगरीय क्षेत्र के मोहल्लों में सीमेंट- कांक्रिट निर्माण, सीवरेज की उचित व्यवस्था के साथ कचरे के निपटान की उचित व्यवस्था को वरीयता दी जाएगी। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2028-29 तक किया जाएगा। सरकारी वाहन इलेक्ट्रिक वाहन में बदलेंगे प्रदेश के पर्यावरण को शुद्ध रखने की दिशा में इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक प्रोत्साहन देने की योजना शासन ने बनाई है योजना के तहत नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शासकीय वाहनों को 80 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने का कार्यक्रम बनाया है। इसी क्रम में भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को ईवी मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। हर 20 किलोमीटर पर होगा चार्जिंग स्टेशन योजना के तहत प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन के लिये हर 20 कि.मी. पर चार्जिंग स्टेशन और हाई-वे पर 100 कि.मी. पर फास्ट चार्जिंग सुविधा स्थापित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश की ईवी नीति में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन खोलने पर सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। प्रदेश में चलेंगी 552 शहरी बस इसके अलावा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजनांतर्गत 6 शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 552 शहरी बसों के संचालन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। केन्द्र सरकार के शहरी कार्य मंत्रालय ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, सागर के बस डिपो, अद्योसंरचना के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दे दी है।  

भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा

नई दिल्ली देश के विकास की दिशा को ध्यान में रखते हुए, जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बिना किसी संकोच के कहा: 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए , भारत को 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था में बदलना होगा। यह सिर्फ़ एक छलांग नहीं है – यह एक पीढ़ीगत धुरी है, और उन्होंने तर्क दिया कि फिनटेक क्षेत्र को इसे आगे बढ़ाने वाले इंजनों में से एक होना चाहिए। कांत ने कहा, “भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग नौ गुना वृद्धि होनी चाहिए, इसकी प्रति व्यक्ति आय में लगभग आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए, और इसके विनिर्माण में लगभग 16 गुना वृद्धि होनी चाहिए।” उन्होंने व्यापक आर्थिक लक्ष्यों और क्षेत्र-विशिष्ट उत्प्रेरकों के बीच सीधी रेखा खींची। उनके लिए, फिनटेक केवल एक और उच्च-विकास वाला वर्टिकल नहीं है; यह समावेशी, व्यापक-आधारित विकास को प्राप्त करने का आधार है। “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि फिनटेक क्षेत्र बढ़ता रहे और विस्तार करता रहे ताकि हम समाज में सभी स्तरों पर ऋण प्रदान करने में सक्षम हों।” आंकड़े उनके आत्मविश्वास को पुष्ट करते हैं। भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक हब है, न केवल मात्रा के मामले में बल्कि मूल्य के मामले में भी। इस क्षेत्र ने 2023 में 25 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया – जो कि साल-दर-साल (YoY) 56 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। 2030 के लिए अनुमान और भी चौंकाने वाले हैं: 150 फिनटेक यूनिकॉर्न जिनका संयुक्त मूल्यांकन 500 बिलियन डॉलर है और वार्षिक राजस्व 190 बिलियन डॉलर तक पहुँच रहा है। कांत इस विस्फोट का श्रेय तकनीक-प्रेमी युवा जनसांख्यिकी, पूंजी तक बेहतर पहुंच, सरकारी नीतियों को सक्षम बनाने और मोबाइल और इंटरनेट बुनियादी ढांचे में व्यापक प्रगति के शक्तिशाली मिश्रण को देते हैं। लेकिन उन्होंने एक चेतावनी भी जारी की- इस वृद्धि को जिम्मेदारी में बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “नवाचार फिनटेक की जीवनरेखा है, और जब हम नवाचार करते हैं, तो हमें जिम्मेदारी से ऐसा करना चाहिए।” इसका मतलब है कि ऐसे उत्पाद डिजाइन करना जो कमजोर आबादी की सेवा करें, न कि उन्हें किनारे करें। इसका मतलब है साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहना और यह सुनिश्चित करना कि UPI, डिजिटल वॉलेट, ब्लॉकचेन के माध्यम से मुख्यधारा का अपनाना, केवल नवीनता पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित हो। स्व-नियमन केंद्रीय विषय था। राज्य द्वारा हर कदम तय करने की प्रतीक्षा करने के बजाय, कांत भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम करने वाले स्व-नियामक संगठनों (एसआरओ) में फिनटेक शासन का भविष्य देखते हैं। “ये संस्थाएँ आरबीआई की निगरानी में काम करती हैं। वे उद्योग मानकों को निर्धारित करने, अनुपालन लागू करने और नियामकों और फिनटेक कंपनियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने की राह की चुनौतियाँ:     गरीबी और असमानता:         वर्ष 1947 में स्वतंत्रता से लेकर वर्ष 1991 तक गरीबी कम करने के उद्देश्य से समाजवादी नीतियों के क्रियान्वयन के बावजूद भारत की गरीबी दर 50% के आसपास बनी रही।         हालाँकि, उदारीकरण के बाद  (1991-2011) गरीबी लगभग 20% तक कम हो गई, जहाँ 350 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए।     मध्यम-आय जाल:         विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार, मध्यम-आय जाल (Middle-Income Trap) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक मध्यम-आय देश बढ़ती लागत और घटती प्रतिस्पर्द्धा के कारण उच्च-आय अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने में विफल रहता है।         भारत के लिये भी मध्यम-आय जाल में फँसने का खतरा है, जहाँ देश मध्यम-आय से उच्च-आय की स्थिति में पहुँचने में विफल हो जाते हैं।         वर्ष 1960 में 101 मध्यम-आय अर्थव्यवस्थाओं में से केवल 23 ही वर्ष 2018 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था बन सके।         ऐसी आशंकाएँ व्यक्त की जाती हैं कि विकसित अर्थव्यवस्था की राह पर आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था मध्यम-आय जाल में फँस सकती है। माना जाता है कि 5,000-6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुँचने के बाद यह अधिक तेज़ी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।     वृद्ध होती आबादी:         भारत की आबादी, जो वर्तमान में लगभग 1.4 बिलियन है, वर्ष 2048 तक 1.64 बिलियन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचने के बाद बाद वर्ष 2100 तक घटकर 1.45 बिलियन रह जाएगी।         इसके परिणामस्वरूप, भारत को वृद्ध होती आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते खर्च, बढ़ती पेंशन देनदारियाँ और संभावित श्रम की कमी शामिल हैं।     गतिहीन कृषि:         कृषि क्षेत्र भारत की लगभग 46% आबादी को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 16.5% है।         हालाँकि, अप्रभावी भूमि सुधारों, अवैज्ञानिक अभ्यासों, संस्थागत ऋण प्रवाह की कमी और जलवायु अनिश्चितताओं के कारण यह गतिहीन एवं निम्न उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है।     विनिर्माण क्षेत्र का पिछड़ापन:         आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र भारत के केवल 11.4% कार्यबल को रोज़गार प्रदान करता है।         इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र को उच्च इनपुट लागत और अस्थिर मांग के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।     अकुशल लॉजिस्टिक्स:         आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 से पता चलता है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के 14-18% के बीच है, जो वैश्विक बेंचमार्क 8% से अधिक है। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (LPI) 2023 में भारत 38वें स्थान पर है।     रोज़गारहीनता और प्रच्छन्न बेरोज़गारी:         आईटी सेवाओं में उछाल से प्रेरित भारत के उच्च विकास वर्षों (2000-10) के बावजूद 46% श्रम शक्ति अभी भी कृषि में संलग्न है, जो सकल घरेलू उत्पाद में केवल 18% का योगदान देती है। इसकी उत्पादकता कम है और यह अल्प-रोज़गार (underemployment) की समस्या से भी ग्रस्त है।         इसके अलावा, CMIE के अनुसार भारत में बेरोज़गारी दर मई 2024 में 7% से तेज़ी से बढ़कर जून 2024 में 9.2% हो गई।     श्रम बल गतिशीलता:         महिला श्रम बल भागीदारी मात्र 37% है, हालाँकि वर्ष 2019 में 26% की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। फिर भी, यह स्तर अन्य तेज़ी से विकास करते देशों की तुलना में कम है।     वैश्विक आर्थिक मंदी:         वैश्विक आर्थिक मंदी, वस्तुओं की अस्थिर कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और कठिन होती … Read more

खुलासा : मध्य प्रदेश में9,000 फिजियोथेरेपिस्ट में से केवल 40 क्लीनिक सरकार के स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में 9,000 से ज़्यादा फिजियोथेरेपिस्ट काम कर रहे हैं, लेकिन सरकारी हेल्थ पोर्टल पर सिर्फ 40 फिजियोथेरेपी क्लीनिक ही रजिस्टर्ड हैं। यह जानकारी 26 मार्च तक की है। इतने कम क्लीनिकों के रजिस्ट्रेशन से अवैध और बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों पर शक गहरा गया है। इसलिए इनकी जांच शुरू हो गई है। सरकार अब ऐसे क्लीनिकों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। राज्य के हेल्थ कमिश्नर तरुण राठी ने सभी जिलों के CMHO को एक आदेश दिया है और कहा है कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों को पहचाना जाए और उन्हें बंद किया जाए। साथ ही उन्होंने CMHO को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जो क्लीनिक सही हैं, वे सरकार के पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। यह कार्रवाई विधानसभा सत्र में उठे सवालों के बाद की जा रही है। सवालों में बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई गई थी। यह राज्य के नर्सिंग होम एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का उल्लंघन है। इस एक्ट के अनुसार, सभी मेडिकल सर्विस देने वालों का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और आसान बनाए सरकार MP फिजियोथेरेपिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील पांडे ने कहा कि अवैध फिजियोथेरेपी क्लीनिकों के खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए, लेकिन सरकार को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट को MP एलाइड एंड हेल्थ केयर काउंसिल में तुरंत रजिस्टर करना चाहिए। वादे पूरे नहीं करने का भी आरोप पहले फिजियोथेरेपिस्ट पैरामेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराते थे। एक साल पहले तक इस काउंसिल में 3,028 फिजियोथेरेपिस्ट रजिस्टर्ड थे। जांच में यह भी पता चला है कि फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं। पहले घोषणा की गई थी कि सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोथेरेपी डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे। साथ ही सरकारी अस्पतालों में फिजियोथेरेपिस्ट की नियुक्ति भी बढ़ाई जाएगी, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सरकार की कार्रवाई से जागी उम्मीद इस पूरे मामले से कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सरकार अवैध क्लीनिकों पर लगाम लगाने में सफल होगी? क्या फिजियोथेरेपिस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आसान हो पाएगी? और क्या फिजियोथेरेपी शिक्षा और सेवाओं को लेकर किए गए वादे पूरे होंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ही मिल पाएंगे, लेकिन फिलहाल, सरकार की कार्रवाई से फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद जगी है।

विदिशा रेलवे स्टेशन जल्द ही यात्रियों को नए भवन की चमचमाती सुविधाओं का लाभ मिलेगा, शुरू होंगी VIP सुविधाएं

 विदिशा मध्य प्रदेश के विदिशा रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत चल रहे नवीनीकरण कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। अब स्टेशन का चेहरा बदलने ही वाला है। जल्द ही यात्रियों को नए भवन की चमचमाती सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इस बहुप्रतीक्षित आधुनिक स्टेशन का लोकार्पण जल्द ही तय होगा। उससे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री और विदिशा सांसद शिवराज सिंह चौहान खुद निर्माण कार्यों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण अगले सप्ताह संभावित माना जा रहा है। कयास यह भी लगाए जा रहे है कि इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर सकते है। प्लेटफॉर्म एक से चार तक नया अनुभव स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक से चार तक यात्रियों की सुविधाओं में जबरदस्त इजाफा किया गया है। वर्षों पुरानी व्यवस्थाओं को पूरी तरह से बदला गया है। कुल 18.6 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे स्टेशन को नया रूप दिया गया है। अधिकतम एक से डेढ़ महीने में प्लेटफॉर्म नंबर एक की तरफ बने मुख्य द्वार को यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही तीन स्तर के शानदार वीआइपी वेटिंग हॉल भी उपयोग के लिए उपलब्ध होंगे। स्टेशन होगा फाइव स्टार जैसा नए स्टेशन भवन में टिकट बुकिंग ऑफिस, वीआइपी लाउंज, इमरजेंसी गेट, टीटीई लॉबी और पार्सल रूम जैसी सुविधाएं यात्रियों को हाई-क्लास अनुभव देंगी। वहीं, स्टेशन पर आने वाले वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की भी व्यवस्था की जा रही है। यह सभी निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में हैं और जल्द ही यात्रियों को इनका सीधा लाभ मिलेगा। शिवराज सिंह से निरीक्षण की मांग रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य कमलेश सेन ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर निर्माण कार्यों का अवलोकन करने और लोकार्पण की तिथि तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे यात्रियों को जल्द से जल्द सुविधाएं मिलने लगेंगी। विदिशा स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 12 हजार यात्री पहुंचते हैं और यहां करीब 100 ट्रेनों का स्टॉपेज होता है। इन सभी यात्रियों को नए निर्माण कार्यों से सीधा लाभ मिलेगा। अधूरे कार्य ने बढ़ाया इंतजार जहां एक ओर स्टेशन का नवीनीकरण लगभग पूरा हो चुका है, वहीं दूसरी ओर फुट ओवरब्रिज का कार्य अभी अधूरा है। प्लेटफॉर्म नंबर एक के बाहरी हिस्से से लेकर प्लेटफॉर्म चार के छोर तक प्रस्तावित ओवरब्रिज का 50 फीसदी से ज्यादा काम अब भी बाकी है। यही नहीं, तीन स्वचालित सीढ़ियों (एस्केलेटर) का कार्य तो अब तक शुरू भी नहीं हो पाया है। यात्रियों को इन सुविधाओं के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। प्रधानमंत्री कर सकते हैं उद्घाटन रेलवे स्टेशन के नए भवन के लोकार्पण को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निरीक्षण के बाद उद्घाटन की तिथि तय की जाएगी। पूरी संभावना है कि इस भव्य और आधुनिक स्टेशन भवन का लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। इससे न सिर्फ विदिशा को गौरव मिलेगा, बल्कि यात्रियों को भी उच्चस्तरीय सुविधाओं का तोहफा मिलेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यों के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग – परिणामों की समीक्षा के लिये डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया गया

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग में अकादमिक एवं प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग तथा परिणामों की समीक्षा के लिये डिजिटल प्लेटफार्म तैयार किया गया है। इस प्लेटफार्म पर विभिन्न स्तरों पर जानकारी की त्वरित उपलब्धता तथा उनके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही की व्यवस्था की गयी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस वर्ष एक अप्रैल, 2025 को एजुकेशन पोर्टल-3.0 शुरू किया है। विद्यार्थी प्रवेश प्रणाली प्रदेश में एक अप्रैल से नवीन अकादमिक सत्र में सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में प्रवेश की कार्यवाही एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर की जा रही है। इसके लिये स्टूडेंट डायरेक्ट्री मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है। पोर्टल पर कक्षा-1 में संभावित पात्र विद्यार्थियों की सूची संबंधित शाला को उनके ग्राम और बसाहट के अनुसार प्रदर्शित की गई है। इस सुविधा से पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश कराने में सुलभता होगी। शाला प्रभारी द्वारा सूची के अनुसार पालकों से सम्पर्क कर विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाया जायेगा। इस वर्ष नवीन पोर्टल पर सभी शालाओं एवं उनमें पदस्थ शिक्षकों को लॉग इन आईडी दी गई है। शाला प्रवेश के समय दस्तावेज के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश से वंचित नहीं रखा जायेगा। कक्षोन्नति पूर्व से शालाओं में दर्ज विद्यार्थियों की अगली कक्षा में प्रवेश के लिये विगत वर्ष 2024-25 में कक्षा-1 से 8 तक की शालाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों की जानकारी प्रदर्शित की गई है। शिक्षक द्वारा परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की जानकारी पोर्टल पर संबंधित शिक्षक या स्कूल की आईडी से चिन्हित की जायेगी। कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के समक्ष पास अथवा फेल की प्रविष्टि करते हुए प्रतिशत अंकित करने पर विद्यार्थी अगली कक्षा में पोर्टल पर स्वत: ही प्रवेशित हो जायेंगे। प्रदेश की ऐसी प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में जहाँ अगली कक्षा क्रमश: 6 और 9 उपलब्ध नहीं हैं, ऐसी स्थिति में कक्षा-5, 8 एवं कक्षा-10वीं के विद्यार्थियों को पूर्व की शाला के प्रधानाध्यापक, प्राचार्य विद्यार्थियों एवं पालकों से चर्चा कर समीप शाला में कक्षा-6, 9 एवं कक्षा 11 में ऑनलाइन प्रवेशित करायेंगे। संबंधित शाला जहाँ प्रवेश होना है, ऐसे विद्यार्थियों की सूची को समीपस्थ विद्यालय के शिक्षकों-शालाओं के लॉगइन में होगी। वरिष्ठ शाला के प्राचार्य भी विद्यार्थी पर क्लिक कर उसे अपनी संस्था में अपने स्तर से भी दर्ज कर सकेंगे। शासकीय शालाओं के अलावा अन्य सभी प्रबंधन की शालाएँ, जिनमें प्रायवेट स्कूल, मदरसा, केन्द्रीय विद्यालय और नवोदय आदि को उनकी शाला के यूडीआईएसई कोर्ट के माध्यम से लॉग इन कर संबंधित शाला के प्राचार्य द्वारा शाला के समस्त विद्यार्थियों का प्रवेश, पोर्टल पर किया जायेगा। शैक्षणिक वर्ष के 2 माह के भीतर ड्रॉप-आउट की पहचान करना, जिनमें ऐसे छात्र, जिनकी पदोन्नति या प्रवेश की सूचना अगले शैक्षणिक वर्ष में नहीं दी गयी है, उनकी पहचान कर उनका प्रवेश कराने की व्यवस्था की जायेगी। एजुकेशन पोर्टल-3.0 पर सभी शासकीय और प्रायवेट स्कूलों के लिये सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा रही हैं। इसमें सभी बोर्ड जैसे एमपी बोर्ड, सीबीएसई, मदरसा बोर्ड और संस्कृत बोर्ड के अंतर्गत संचालित शालाएँ, केन्द्रीय विद्यालय, सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय भी पंजीकृत हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण की फैक्ट्री होते हैं और शिक्षकगण इन संस्थाओं के कुशल कारीगर होते हैं। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल के तृतीय दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि अपने ज्ञान का प्रयोग समाज के उत्थान में करें। केवल व्यक्तिगत सफलता ही नहीं, समाज और देश के विकास में भी भागीदारी आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि बड़े पद पर पहुँचने के बाद ही असली कार्य प्रारंभ होता है। अपने योगदान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे राष्ट्र के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अधोसंरचना, आर्थिक समृद्धि, और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के संकल्प को दोहराया और कहा कि ‘स्किल, स्केल और स्पीड’ के तीन स्तंभों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि “धरती से दौलत निकालनी होगी”- इस विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए ‘नदी जोड़ो परियोजना’ के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नव युग की शुरुआत हो रही है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आज युवाओं के पास विकास के बहुत अवसर हैं। इन अवसरों का लाभ उठायें। उन्होंने युवाओं से आहवान किया कि वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहें और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग स्वयं, समाज, देश और विश्व के कल्याण के लिये करें। उन्होंने कहा कि समाज युवाओं की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और युवाओं को इस भरोसे पर खरा उतरना होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की दीक्षांत समारोह स्मारिका तथा “कंप्यूटर एक परिचय” पुस्तक के 41वें संस्करण का विमोचन भी किया। समारोह में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे, कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे, इसरो के वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक राधाकांत पाढ़ी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।  

जशपुर में सीएम साय ने हरी झंडी दिखाकर कैंसर डिटेक्शन वैन किया रवाना

  जशपुर जिला प्रशासन और बालको मेडिकल सेंटर द्वारा निःशुल्क रोग परामर्श शिविर का किया जा रहा आयोजन रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जशपुर जिला प्रशासन और बालको मेडिकल सेंटर, रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 07 एवं 08 अप्रैल 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुनकुरी में निःशुल्क रक्त एवं कैंसर रोग परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है।           मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सीएम कैंप कार्यालय बगिया से मोबाइल कैंसर डिटेक्शन वैन को झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कैंसर डिटेक्शन वैन के माध्यम से जशपुर जिले में कैंसर सम्भावित मरीजों का जाँच एवं उपचार  7 एवं 8 अप्रैल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुनकुरी में नि:शुल्क उपलब्ध रहेगा।  इस स्वास्थ्य शिविर का उद्देश्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना है जिसे इसका प्रभावी एवं सुगम इलाज हो सके । शिविर में स्तन कैंसर, बच्चेदानी का कैंसर, मुंह का कैंसर, रक्त संबंधी कैंसर व रक्त विकारो की नि:शुल्क जांच की जाएगी।

खेती की आधुनिक पद्धतियों, कृषि यंत्रों एवं नवीनतम तकनीकों की जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर दी जा रही: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए लगातार प्रयास रही है। खेती की आधुनिक पद्धतियों, कृषि यंत्रों एवं नवीनतम तकनीकों की जानकारी कृषि विभाग के अधिकारियों को समय-समय पर दी जा रही है, जिससे कि वे क्षेत्र में जाकर किसानों को उनसे अवगत करा सकें। राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा वर्ष 2024-25 में 57 प्रशिक्षणों के द्वारा 1530 अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कृषि की आवश्यकता अनुसार विषयों पर प्रशिक्षण कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान बरखेड़ी कला, भोपाल कृषि की आवश्यकता अनुसार विभिन्न विषयों पर विभागीय अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि विभाग की आत्मा योजना अंतर्गत वर्ष 2024-25 में कृषि एवं संवर्गीय विभाग के अधिकारियों के 54 प्रशिक्षण आयोजित किए गए जिससे 1338 प्रशिक्षणार्थियों को लाभ मिला। आत्मा योजना क्रियान्वयन के लिए 2 रिव्यू वर्कशॉप के माध्यम से 155 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। स्टेट लेवल वर्कशॉप ऑन ट्रेंनिंग नीड असेसमेंट के प्रशिक्षण द्वारा 37 अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया। पिछले एक वर्ष में 30 विषयों पर दिया गया प्रशिक्षण मंत्री कंषाना ने कहा कि पिछले एक वर्ष में 30 विषयों पर प्रशिक्षण आयोजित किए गए। इनमें सॉइल हेल्थ मैनेजमेंट, एग्रो फॉरेस्ट्री फॉर इंक्रीजिंग फार्मर्स इनकम, फार्म मैकेनाइजेशन, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट इन एग्रीकल्चर एंड हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स, ऑर्गेनिक फार्मिंग एंड सर्टिफिकेशन इश्यूज एंड स्ट्रेटजीज, इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर फॉर क्वालिटी कंट्रोल एंड लीगल एस्पेक्ट्स, ओरिएंटेशन ऑन फ्लैगशिप स्कीम्स, ऑफिस मैनेजमेंट फॉर एग्रीकल्चर एंड एलाइड डिपार्मेंट (एग्जीक्यूटिव), ऑफिस मैनेजमेंट फॉर एग्रीकल्चर एंड एलाइड डिपार्टमेंट (मिनिस्टीरियल), मार्केट लेड एक्सटेंशन एंड मार्केट लिंकेज, लीडरशिप डेवलपमेंट एंड टीम बिल्डिंग, इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट, सस्टेनेबल लाइवस्टॉक एंड फोडर प्रोडक्शन, मिलेट्स प्रोडक्शन, रिसोर्स कंजर्वेशन टेक्नोलॉजी इन एग्रीकल्चर, आईटी इन एग्रीकल्चर पर सुपरवाइजरी ऑफिसर्स, जीआई आईपीआर और डब्ल्यूटीओ, रिफ्रेशर ट्रेनिंग कम वर्कशॉप फॉर खरीफ क्रॉप्स, रिफ्रेशर ट्रेनिंग कम वर्कशॉप फॉर रबी क्रॉप्स, सॉइल ट्रेनिंग एंड न्यूट्रीशनल रिकमेंडेशन फॉर एग्रीकल्चर क्रॉप्स, जेंडर सेंसटाइजेशन एंड जेंडर बजटिंग, फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन एंड कंपनीज, मैनेजमेंट ऑफ मेजर पॉलिफेगस इंसेक्ट्स पेस्टस, आत्मनिर्भर भारत मिशन इन एग्रीकल्चर एंड एलाइड सेक्टर, स्वच्छता एक्शन प्लान, रेनफेड फार्मिंग, प्रेसीजन फार्मिंग एग्रीकल्चर, रिफ्रेशर ट्रेनिंग फॉर आत्मा फंशनरीज और रिफ्रेशर ट्रेनिंग फॉर फॉर्म मैनेजर विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।  

नगरीय निकायों में खेल विभाग के सहयोग से कम्युनिटी स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा: मंत्री सारंग

प्रदेश में खेलों के उन्नयन के लिये मंत्री सारंग ने ली सभी महापौरों की बैठक मंत्री सारंग ने कहा कम्युनिटी स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से विभिन्न पहल की जा सकती खेलों के सकारात्मक माहौल के लिये हुई बैठक नगरीय निकायों में खेल विभाग के सहयोग से कम्युनिटी स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा: मंत्री सारंग भोपाल सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को तात्या टोपे स्टेडियम भोपाल में खेलों के उन्नयन के लिये प्रदेश के सभी महापौरों की बैठक ली। बैठक में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से नगरीय निकायों में खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने, युवाओं को खेलों के प्रति आकर्षित करने, नगरीय निगम के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन सहित अनेक विषयों पर चर्चा हुई। मंत्री सारंग ने कहा कि नगरीय निकायों के पास पहले से मौजूद खेल मैदानों व अधोसंरचना का उन्नयन कर खेल गतिविधियों को गति दी जा सकती है। बैठक में नगरीय निकायों और खेल विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया, जिससे राज्य भर में खेलों का व्यापक प्रसार और विकास सुनिश्चित किया जा सके। खेल विभाग के सहयोग से नगरीय निकायों में कम्युनिटी स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा मंत्री सारंग ने कहा कि नगरीय निकायों में कम्युनिटी स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहयोग से विभिन्न पहल की जा सकती हैं। इसमें फिट इंडिया क्लब की स्थापना तथा सामुदायिक स्तर पर विभिन्न खेल गतिविधियों का आयोजन प्रमुख है। उन्होंने उपस्थित सभी महापौरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खेलों के उन्नयन के लिये क्षेत्र चिन्हित कर प्रस्ताव तैयार करें। इससे खेलों के प्रति रुचि को बढ़ावा मिलेगा और स्वस्थ एवं सक्रिय समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकेंगे। हर जिले में फिट इंडिया क्लब, हर विधानसभा क्षेत्र में बनेगा आधुनिक खेल परिसर मंत्री सारंग ने बताया कि भोपाल में प्रदेश का पहला फिट इंडिया क्लब स्थापित किया गया है, जिसका द्वितीय चरण वर्तमान में निर्माणाधीन है। इसी मॉडल को अपनाते हुए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सर्वसुविधायुक्त फिट इंडिया क्लब स्थापित किए जाएंगे। इन क्लबों में बच्चों, युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी आयु वर्ग के नागरिकों के लिए शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाली सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने महापौरों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इन क्लबों की स्थापना के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर शीघ्र प्रस्ताव भेजें। मंत्री सारंग ने कहा कि देश में पहली बार प्रदेश सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में खेल परिसरों के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है। यह पहल युवाओं को खेलों से जोड़ने, प्रतिभाओं को तराशने और खेल के प्रति सकारात्मक माहौल को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। खेल विभाग के नवाचारों पर हुई चर्चा बैठक में खेल विभाग द्वारा प्रारंभ किये गये नवाचार- “खेलो बढ़ो अभियान, पार्थ, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान” पर भी चर्चा हुई। मंत्री सारंग ने कहा कि नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ने के लिये खेलो बढ़ो अभियान की शुरूआत की गई है। इसके साथ ही युवाओं को पुलिस, सेना व पैरा मिलिट्री की शारीरिक व लिखित परीक्षाओं की तैयारी के लिये पार्थ योजना प्रारंभ की गई है। इसके अतिरिक्त, मध्यप्रदेश युवा प्रेरक अभियान के माध्यम से युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक सोच विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री सारंग ने महापौरों से कहा कि वे अपने नगरीय निकाय क्षेत्रों में इन नवाचारों को सक्रिय रूप से लागू करने में सहयोग करें, जिससे अधिक से अधिक युवा लाभान्वित हो सकें। नगरीय निकायों में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिये महापौरों ने दिये सुझाव बैठक में उपस्थित महापौरों ने अपने नगरीय निकाय क्षेत्रों में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिये सुझाव भी दिये। भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, खंडवा महापौर श्रीमती अमृता यादव, बुरहानपुर महापौर श्रीमती माधुरी पटेल, छिंदवाड़ा महापौर विक्रम सिंह अहके, मुरैना महापौर श्रीमती शारदा राजेंद्र सोलंकी, उज्जैन महापौर मुकेश टेटवाल, रतलाम महापौर प्रहलाद पटेल, देवास महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल, सागर महापौर श्रीमती संगीता तिवारी, रीवा महापौर अजय मिश्रा बाबा, सिंगरौली श्रीमती रानी अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, खेल संचालक राकेश गुप्ता, संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित खेल अधिकारी उपस्थित थे।  

छत्तीसगढ़ के विकास के लिए खरसिया – परमलकसा रेल परियोजना एक ऐतिहासिक कदम : मुख्यमंत्री साय

रायपुर केंद्रीय कैबिनेट की ओर से मंजूर खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल प्रोजेक्ट के बारे में रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को रेल भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को बदलने वाला है । इस प्रोजेक्ट पर 8741 करोड़ रुपये की लागत आएगी और इससे पूरे छत्तीसगढ़ को एक छोर से दूसरे छोर तक कवरेज मिलेगा । रेल मंत्री ने कहा कि खरसिया-परमलकसा 5वीं-6वीं रेल लाइन छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क की नई धमनी की तरह है। यह ओडिशा की सीमा से महाराष्ट्र की सीमा तक रेल नेटवर्क की सुविधा प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि यह भारत के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक है । इससे छत्तीसगढ़ के रायगढ़, जांजगीर चाँपा, बिलासपुर, बलौदा बाजार, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिले जुड़ेंगे । इसके तहत 21 स्टेशन बनेंगे, 48 बड़े ब्रिज और साथ ही 349 माइनर ब्रिज, 14 फ्लाईओवर और 184 अंडर पास का निर्माण होगा । स्थानीय स्तर पर निवासियों को दिक्कत ना हो इसके लिए 5 रेल फ्लाईओवर भी निर्मित किए जाएंगे । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में 278 किलोमीटर रूट में 615 किलोमीटर लंबी पटरियां बिछाई जाएंगी। इस रूट के निर्माण के बाद 8 से ज्यादा मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जाएगा । इस रेल नेटवर्क के निर्माण से करीब 22 करोड़ लीटर डीजल बचेगा और रेलवे को लगभग 2500 करोड़ रुपये के डीजल की बचत होगी । रेल मंत्री ने कहा कि भगवान राम के वनवास के दौरान माता शबरी के प्रसंग से जुड़े लक्ष्मी नारायण मंदिर का भी इस रेल नेटवर्क से संपर्क स्थापित होगा । बलौदा बाजार और खरसिया जैसे सीमेंट उत्पादन के बड़े इंडस्ट्रियल हब भी इस नेटवर्क से जुड़ेंगे । श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए रेलवे अब बायपास पद्धति को अपना रही है । इसके तहत मालगाड़ी को शहर के बाहर से निकालने पर जोर दिया जा रहा है । वहीं यात्री गाड़ियों को शहर के अंदर एंट्री दी जाएगी । इस रेल लाइन के निर्माण के दौरान भी इस पर फोकस रहेगा । साथ ही छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत कोसा सिल्क के उत्पादन वाले इलाके भी रेल लाइन के जरिए जुड़ेंगे । इसके चलते 2 करोड़ मानव दिवस रोजगार उत्पन्न होगा । रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का रेलवे बजट अब 22 गुना बढ़कर लगभग 6900 करोड़ से ज्यादा हो गया है । साथ ही 2014 के बाद छत्तीसगढ़ में रेलवे के काम में अभूतपूर्व तेजी आई है । इसके तहत 1,125 किमी नए ट्रैक बने हैं, जोकि दुबई के पूरे रेलवे नेटवर्क से ज्यादा है ।   उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में रेलवे का कुल निवेश 47 हजार करोड़ से अधिक है । इसके तहत 32 स्टेशनों का पुनर्निर्माण हो रहा है, और इन्हें पूरी तरह नया बनाया जा रहा है । इनमें से कई स्टेशनों के विकास का कार्य इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा। राज्य के महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट्स की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि दल्लीराजहरा से रावघाट नई लाइन पूरी होने वाली है । अब इसके आगे रावघाट से जगदलपुर रेल लाइन के डीपीआर बनाने का काम लगभग पूरा हो गया है । वैसे ही गेवरा-पेन्ड्रा रोड नई लाइन पर भी तेजी से काम चल रहा है । साथ ही राजनांदगांव से नागपुर तीसरी लाइन, झारसुगड़ा से बिलासपुर चौथी लाइन, रायपुर-केन्द्री-धमतरी से अभनपुर-राजिम लाइन का गेज कन्वर्जन करके ब्रॉड गेज बनाया जा रहा है । राजनांदगांव से डोंगरगढ़ चौथी लाइन, जगदलपुर से कोरापुट की डबलिंग, धरमजयगढ़ से कोरबा नई लाइन, अनूपपुर से अंबिकापुर के दोहरीकरण के लिए पर्याप्त फंड दिए गए हैं । रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लोगों ने जिन उम्मीदों के साथ डबल इंजन की सरकार बनाई है, उसे पूरा करने का काम भारतीय रेल कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आई है, छत्तीसगढ़ में रेलवे से जुड़ा हजारों करोड़ का काम हो रहा है । नई परियोजना से छत्तीसगढ़ के अनेक जिले जुड़ते हैं, यह राज्य के लिए सौभाग्य की बात है । स्टेशनों के विकास के लिए सरकार ने करोड़ों का फंड दिया है, इससे रेलवे और छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदलेगी । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्वनी वैष्णव को  धन्यवाद देते हुए कहा कि खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल परियोजना जैसी महत्त्वपूर्ण सौगात से छत्तीसगढ़ के विकास को एक नई गति मिलेगी। यह रेल परियोजना जांजगीर-चांपा, सक्ती, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव जैसे प्रमुख जिलों को जोड़ेगी। इससे इन जिलों के नए अवसर मिलेंगे। लोगों को रोजगार मिलेगा। बलौदाबाजार और जांजगीर अब उद्योगों के लिए नया हब बनकर उभरेंगे। यह क्षेत्र लाइमस्टोन (चूना पत्थर) से समृद्ध है। रेल संपर्क बेहतर होने से यहां सीमेंट उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि नया रायपुर तक सीधी रेल लाइन से राजधानी का संपर्क मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों से और बेहतर होगा। परियोजना से माल परिवहन तेज होगा, जिससे उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। इससे कृषि उत्पादों, खनिजों और निर्माण सामग्री के ट्रांसपोर्ट को भी बल मिलेगा। इससे नया रायपुर के विकास को नई दिशा और रफ्तार मिलेगी। केन्द्रीय आवासन एवं शहरी राज्यमंत्री श्री तोखन साहू  ने छत्तीसगढ़ राज्य के लिए मंजूर किए गए इस परियोजना के लिए खुशी जाहिर करते हुए समस्त छत्तीसगढ़ के निवासियों की तरफ से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं  केंद्र सरकार का धन्यवाद किया ।

रविंद्र पुरी महाराज ने कहा अनुयायियों को कम से कम 4 बच्चे पैदा करना चाहिए. इनमें से एक बच्चे को सन्यास के मार्ग पर लाना चाहिए.

उज्जैन  अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र पुरी महाराज ने इन दिनों उज्जैन में हैं. वह यहां सिंहस्थ 2028 की तैयारी का जायजा लेने आए हैं. पत्रकारों से बात करते हुए रविंद्र पुरी महाराज ने कहा “उनके अनुयायियों को सिर्फ दो बच्चों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कम से कम 3 या 4 बच्चे पैदा करना चाहिए. इनमें से एक बच्चे को सन्यास के मार्ग पर लाना चाहिए.” हर परिवार का एक बच्चा ले संन्यास रविंद्र पुरी महाराज का कहना है “मेरे पास लगातार भक्तों के फोन आ रहे हैं कि वे अपने बच्चों में से किसी एक को संत बनाना चाहते हैं. लेकिन अगर सब दो बच्चों पर ही रुक जाएंगे तो सनातन धर्म के लिए संत कहां से आएंगे. सनातन धर्म और देशहित की सेवा के लिए जरूरी है कि हर परिवार का कम से कम एक बच्चा संन्यास ले. ये तभी संभव है जब परिवारों में 3-4 बच्चे हों. अखाड़ों में शामिल होने के लिए शिष्य परंपरा ही मान्य है.” तेजस्वी यादव पर साधा निशाना रविंद्र पुरी महाराज ने कई मुद्दों पर बात की. बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा “तेजस्वी का मुख्यमंत्री बनने का सपना अब अधूरा ही रहेगा. गृह मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में अब भाजपा की सरकार बनेगी. लालू यादव और उनके परिवार की परेशानियां अब और बढ़ेंगी. चारा घोटाले सहित अन्य मामलों की जांच फिर से शुरू हो चुकी है, जिससे आने वाला वक्त उनके लिए कठिन होगा.”  अखिलेश यादव की भी आलोचना इसके साथ ही वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर भी रविंद्र पुरी महाराज ने प्रतिक्रिया दी. उनका कहना है “ये बिल गरीब मुसलमानों के हित में है. हिंदुओं को इससे कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. सपा अध्यक्ष अखिलेश मुसलमानों के नेता बनने की कोशिश करते हैं, लेकिन हिंदू त्योहारों पर सवाल उठाते हैं. ये बहुत आपत्तिजनक है.” लालू परिवार की बढ़ेंगी मुश्किलें अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने बड़ा दावा किया हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार के सीएम नहीं बन पाएंगे। उनका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा। इतना ही नहीं महंत रविद्र ने यह भी दावा किया है कि आने वाले दिनों में लालू यादव परिवार की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज बीते तीन दिनों से मध्य प्रदेश के उज्जैन में है। वे अष्टमी पर बड़नगर रोड स्थित निरंजनी अखाड़े में कन्या पूजन और भंडारे के कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने साधु-संतों और श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरण कराया। तेजस्वी का सपना पूरा नहीं होगा- महंत रविंद्र पुरी उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए बड़ा दावा किया। महंत रविंद्र ने कहा कि ‘तेजस्वी यादव भले ही मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हों, लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं होगा।’ उन्होंने कहा कि ‘गृहमंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि बिहार में अगली सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही बनेगी। इसलिए लालू परिवार की बेचैनी बढ़ गई है।’ हिंदूओं से की 3-4 बच्चे पैदा करने की अपील वहीं महंत रविंद्र पुरी ने हिन्दू समाज से तीन से चार बच्चा पैदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इनमें से एक को संत बनने के लिए प्रेरित करें, ताकि सनातन धर्म और देश की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। महाराज का कहना है कि यह धर्म और राष्ट्र दोनों के हित में है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से भक्त उनके पास फोन कर रहे हैं, जो अपने बच्चों को संत बनाना चाहते हैं।  

जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद आवश्यक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

चयनित अधिकारी सेवा भाव और सकारात्मक मानसिकता के साथ करें अपने अधिकारों का उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद आवश्यक मुख्यमंत्री ने राज्य सिविल सेवा अधिकारियों के 118वें संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ उप जिलाधीश, उप पुलिस अधीक्षक और नायब तहसीलदार के कुल 83 प्रशिक्षु लेंगे सात सप्ताह का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय समाज स्व-नियंत्रित और सुसंस्कृत समाज है। राज्य सेवा के लिए चयनित अधिकारी पवित्र सेवा भाव और परिष्कृत मन मस्तिष्क के साथ, उन्हें मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए अपने दायित्व निर्वहन की ओर अग्रसर हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अधिकारी अपनी कुशलता और दक्षता से सभी की आशाओं-आकांक्षाओं पर खरे उतरें यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य सिविल सेवा के अधिकारियों के 118वें संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ सत्र को प्रशासन अकादमी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का महानिदेशक प्रशासन अकादमी सचिन सिन्हा द्वारा पुष्प-गुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। प्रशिक्षण शुभारंभ पर अकादमी संकल्प गान की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रशिक्षु अधिकारियों का ग्रुप फोटो भी हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रशिक्षुओं से कहा कि नर्सरी कक्षा से लेकर अब तक के शिक्षण-प्रशिक्षण से मिले ज्ञान के आत्म अवलोकन से अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और कार्यों को दक्षतापूर्वक संपन्न करें। उन्होंने कहा कि शिक्षण से व्यक्ति और प्रशिक्षण से व्यक्तित्व का निर्माण होता है। हमारी पाठ्य पुस्तकें अपार ज्ञान का भंडार हैं, लेकिन दायित्वों को पूरा करने के लिए इसी ज्ञान की मदद से अपना मार्ग स्वयं खोजना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने दायित्वों के निर्वहन में पारिवारिक मूल्यों का ध्यान रखने, जनसामान्य के साथ शालीन व्यवहार और संवाद क्षमता विकसित करने तथा आउट ऑफ बॉक्स सोचते हुए समाज हित में नवाचार करने के लिए प्रेरित किया। बड़े पद की जिम्मेदारी के साथ-साथ परिवारजन और मित्रों की अपेक्षाओं पर बने रहना भी एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि आपका व्यवहार ऐसा हो कि आप अधिक से अधिक लोगों की आशाओं व आकांक्षाओं पर खरे उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी से विकास और जनकल्याण की दिशा में राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्यरत है। चयनित अधिकारियों को स्वयं के परिश्रम और ईश्वर की कृपा से जनसेवा का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने सबसे अपेक्षा की कि प्रशिक्षण उपरांत अधिकारी, मैदानी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए आत्मविश्वास और सकारात्मक मानसिकता के साथ सुशासन और गुणवत्तापूर्ण लोक सेवाओं के लिए उत्तरदायी-जवाबदेह-पारदर्शी-स्वच्छ और संवेदनशील भूमिका का निर्वहन करें। शुभारंभ सत्र को अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय दुबे, महानिदेशक प्रशासन अकादमी सचिन सिन्हा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने भी संबोधित किया। संचालक प्रशासन अकादमी मुजीबुर्रहमान खान ने आभार माना। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में चयनित वर्ष 2020 और 2021 बैच के उप जिलाधीश, उप पुलिस अधीक्षक और नायब तहसीलदार पद के लिए चयनित कुल 83 प्रशिक्षुओं के सात सप्ताह का संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम 7 अप्रैल से 23 मई 2025 तक प्रशासन अकादमी में संचालित होगा।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की नवीन आपराधिक कानूनों की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्तमान चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाए गए नए आपराधिक कानून, भारतीय न्याय प्रणाली को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। सभी के लिए अधिक सुलभ, सहायक और कुशल न्याय प्रणाली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बने इन कानूनों और नवीन प्रक्रियाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है। न्याय प्रणाली से जुड़ी सभी संस्थाओं में अद्यतन व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए जन-सामान्य को नई धाराओं और प्रक्रियाओं से शीघ्र अतिशीघ्र अवगत कराने के लिए नए आपराधिक कानूनों के बारे में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन आपराधिक कानूनों की समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मंत्रालय में हुई बैठक में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस, जेल, अभियोजन, न्यायिक एवं फॉरेंसिक कर्मियों के बीच अद्यतन तकनीक के उपयोग का प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। सभी हितधारकों में हर स्तर पर बेहतर समन्वय जरूरी है। प्रत्येक स्तर पर आवश्यक व्यवस्था, उपकरण और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अचल सम्पत्ति संबंधी अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस के साथ राजस्व का अमला भी सजग और सतर्क रहे, साथ ही दोनों विभागों में परस्पर समन्वय भी हो। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों सहित जिन क्षेत्रों में भूमि की दरें तेजी से बढ़ रही है, वहां विशेष सजगता बरती जाए। बैठक में बताया गया कि समयावधि में चालान के लिए नवीन डैशबोर्ड उपलब्ध है। ई-साक्ष्य की प्रक्रिया भी आरंभ की जा चुकी है। पुलिस थानों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए न्यायश्रुति सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया गया है और थानों व कंट्रोल रूम में साउंड प्रूफ कक्ष चिन्हित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन समन/वारंट मॉड्यूल के अंतर्गत गतिविधियां प्रगति पर हैं। पिछले तीन महीने में 50 प्रतिशत से अधिक वारंट तिथि से पहले इलेक्ट्रानिक रूप से तामील किए गए। इनकी मॉनीटरिंग के लिए सभी जिलों में सेल गठित किए जा चुके हैं। डिजिटल इन्वेस्टिगेशन केलिए टेबलेट्स और लाइव स्कैनर थानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बैठक में डिजिटल धोखाधड़ी, डेटा चोरी जैसे सायबर अपराधों के बारे में जागरूकता के लिए की गई पहल की भी जानकारी दी गई।  

भोपाल में ट्यूबवेल खनन पर रोक, तेज गर्मी-गिरते भूजल स्तर को देखते हुए फैसला; 30 जून तक नहीं करवा पाएंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गर्मी और भू-जल के गिरते स्तर को देखते हुए ट्यूबवेल खनन पर रोक लगा दी गई है। कोई भी व्यक्ति 30 जून तक भोपाल जिले में ट्यूबवेल की खुदवाई नहीं करा सकेगा। इस संबंध में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, एसडीएम की अनुमति के बिना जिले में बोरिंग मशीनों का प्रवेश और खनन दोनों प्रतिबंधित रहेगा। केवल सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को छूट दी गई है। अवैध बोरिंग पर FIR और 2 साल तक की सजा भी होगी। भोपाल में गर्मी और गिरते भूजल स्तर को देखते हुए ट्यूबवेल खनन पर रोक लगा दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति 30 जून तक भोपाल जिले में ट्यूबवेल नहीं खुदवा सकेगा। इस संबंध में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सोमवार को आदेश जारी किया। सोमवार को प्रदेश के सभी शहरों में सुबह से ही तेज धूप खिलने की वजह से गर्मी का असर बढ़ा है। भोपाल में सुबह 11 बजे ही सड़कें सूनी नजर आईं। मौसम विभाग के मुताबिक, आज सोमवार को पूरे प्रदेश में गर्मी का असर रहेगा जबकि मंगलवार से लू का अलर्ट है। 15 अप्रैल तक राजस्थान से सटे जिलों में लू चलेगी। वहीं, 9 और 10 अप्रैल को कुछ जिलों में हल्की बारिश और बादल छाए रहेंगे। अगर कोई मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है या नलकूप खनन करती है, तो संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी मशीन को जब्त कर एफआईआर दर्ज करवा सकेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपए जुर्माना, दो साल की सजा या दोनों हो सकते हैं। मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 6 (1) के तहत पूरे जिले में निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश केवल निजी नलकूपों पर लागू होगा। शासकीय योजनाओं के तहत किए जा रहे नलकूप खनन कार्यों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। पीएचई द्वारा संचालित कार्यों को परमिशन की जरूरत नहीं होगी आगे ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम विभाग, भोपाल की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया- पिछले दिनों एक्टिव रहा ओले-बारिश का सिस्टम आगे बढ़ गया है। अब राजस्थान से जुड़े जिलों में हीट वेव का असर देखने को मिलेगा। 8 अप्रैल को वेस्टर्न डिस्टरबेंस के एक्टिव होने का अनुमान है। इसकी वजह से पूर्वी हिस्से में मौसम बदला रहेगा। अप्रैल में 7 से 10 दिन चल सकती है लू मध्यप्रदेश में अप्रैल महीने में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। पहले और दूसरे सप्ताह में हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, दूसरे सप्ताह से लू भी चलेगी। सबसे गर्म आखिरी सप्ताह रहेगा। दिन का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार हो सकता है। मौसम केंद्र भोपाल के वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वेदप्रकाश सिंह ने बताया- इस बार तापमान के सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, प्रदेश में अप्रैल महीने में 7 से 10 दिन तक हीट वेव यानी लू का असर देखने को मिल सकता है।

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