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अमेरिका में जगुआर लैंड रोवर का एक्‍सपोर्ट रोक टाटा ने दिए संकेत?

नई दिल्‍ली. ब्रिटेन की जानी-मानी कार कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने अमेरिका को अपनी लग्जरी कारों का एक्‍सपोर्ट रोक दिया है। जेएलआर टाटा मोटर्स की सब्सिडियरी है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप के नए टैरिफ के कारण लिया गया है। 7 अप्रैल से यह फैसला लागू होगा। ट्रंप सरकार ने कारों पर 25% का इम्पोर्ट टैक्स लगाया है। इससे जेएलआर को बड़ा झटका लगा है। कंपनी को अपनी योजना बदलनी पड़ रही है। भारत की टाटा मोटर्स के लिए जेएलआर बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले साल मार्च में जेएलआर ने दुनियाभर में लगभग 4,30,000 गाड़ियां बेचीं। इनमें से लगभग 1,07,500 गाड़ियां उत्तरी अमेरिका में बेची गईं। टाटा मोटर्स ने वर्ष 2008 में फोर्ड मोटर्स से जेएलआर का अधिग्रहण किया था। जेएलआर ने अमेरिका को गाड़ियां भेजना इसलिए रोका है क्योंकि अमेरिका ने इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। इससे कंपनी को नुकसान हो रहा है। कंपनी को पहले से ही वित्तीय समस्याएं हो रही हैं। जनवरी में कंपनी का मुनाफा 17% गिर गया था। इसकी वजह मांग में कमी और खर्चों में बढ़ोतरी है। अमेरिका में कारों पर 25% इम्पोर्ट ड्यूटी अमेरिका में कारों पर 25% इम्पोर्ट ड्यूटी 3 अप्रैल से लागू हो गई है। जेएलआर अब खर्चों को कम करने के तरीके खोज रही है। ब्रिटेन में कंपनी के 38,000 कर्मचारी हैं। कंपनी ट्रंप के ट्रेड वॉर से होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश कर रही है। 2 अप्रैल को जेएलआर ने एक बयान में कहा, ‘हमारे लग्जरी ब्रांड पूरी दुनिया में पसंद किए जाते हैं और हमारा कारोबार मजबूत है। हम बाजार की बदलती स्थितियों के अनुसार काम करने के आदी हैं। हमारी प्राथमिकता अब दुनिया भर में अपने ग्राहकों को सेवाएं देना और अमेरिका के साथ नए व्यापार नियमों का पालन करना है।’ ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत जेएलआर का यह फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत है। ट्रंप की रेसिप्रोकल ट्रेड पॉलिसी के कारण ऑटो कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन बदलनी पड़ रही है। टाटा मोटर्स की जेएलआर अब मुश्किल दौर से गुजर रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय कार बिक्री की रणनीतियां बदल सकती हैं। जेएलआर के सामने कई चुनौतियां हैं। इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से गाड़ियों की कीमत बढ़ जाएगी। इससे अमेरिका में जेएलआर की गाड़ियों की मांग कम हो सकती है। कंपनी को अब नए बाजार खोजने होंगे और खर्चों को कम करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि जेएलआर इस मुश्किल परिस्थिति से कैसे निपटती है। कंपनी को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा ताकि वह बाजार में बनी रहे। ट्रंप के फैसले से न केवल जेएलआर, बल्कि अन्य ऑटो कंपनियों को भी नुकसान हो रहा है। जेएलआर के फैसले से यह पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कितना जटिल है। एक देश की पॉलिसी दूसरे देशों पर भी असर डालती है। कंपनियों को हमेशा बदलती हुई परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए। मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार जेएलआर का कहना है कि वह मुश्किलों का सामना करने के लिए तैयार है। कंपनी अपने ग्राहकों को अच्छी सेवाएं देना जारी रखेगी। जेएलआर को उम्मीद है कि वह जल्द ही इस मुश्किल दौर से बाहर निकल जाएगी। कंपनी प्रवक्ता ने कहा, ‘अमेरिका जेएलआर के लक्जरी ब्रांडों के लिए महत्वपूर्ण बाजार है। हम अपने व्यापारिक भागीदारों के साथ नई व्यापारिक शर्तों की दिशा में काम कर रहे हैं। हम अपनी अल्पकालिक कार्रवाइयों को लागू कर रहे हैं। इसमें अप्रैल में निर्यात खेप रोकना भी शामिल है। हम अपनी मध्यावधि से लेकर दीर्घावधि तक की योजनाएं बना रहे हैं।’ प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारी प्राथमिकताएं अब दुनिया भर में अपने ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने और अमेरिका की नई व्यापारिक शर्तों को संबोधित करने की हैं।’

मुख्यमंत्री यादव ने दिल्ली में ‘विक्रमादित्य महानाट्य’ के संबंध में पत्रकारों को संबोधित किया, 12 से 14 अप्रैल को होगा मंचन

नई दिल्ली/ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सुशासन को ध्यान में रखते हुए विभागवार अपने कार्यों को जारी रखे हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्येय वाक्य ‘विरासत से विकास की ओर’ हमारे लिए एक पाथेय की तरह सिद्ध हो रहा है। हम विकास कार्यों में विरासत को महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। मध्यप्रदेश में विरासत की बात करें तो 2000 वर्ष पूर्व सम्राट विक्रमादित्य का शासन काल सुशासन व्यवस्था के एक आदर्श उदाहरण के रूप में परिलक्षित होता है। विक्रमादित्य की जीवन के विविध पक्षों को देखें तो उनकी एक अलग प्रतिमा बनती है। वे एकमात्र ऐसे शासक थे, जिनके जीवन के विविध प्रसंगों से आज भी लोग प्रेरणा लेते हैं। विक्रमादित्य के शासन काल की तुलना सुशासन से करना सर्वश्रेष्ठ तुलना है। उनके द्वारा किए गए कार्य और प्रयोग आज भी प्रासंगिक हैं।     आज हमारे पास हिजरी और विक्रम संवत हैं। इसमें विक्रम संवत उदार परंपरा को लेकर चलने वाला संवत है, अर्थात संवत चलाने वाले के लिए शर्त है कि जिसके पास पूरी प्रजा का कर्ज चुकाने का सामर्थ्य है, वो संवत प्रारंभ कर सकता है। यानी कि शासक के पास इतना धन हो कि वह प्रजा को कर्ज मुक्त कर दे और उद्योग-व्यापार के लिए भी इतना धन उपलब्ध कराए कि उद्योगपति इसे चलाने के लिए भविष्य में कर्ज न लें। यह बात दुनिया के लिए अविश्वसनीय हो सकती है। लेकिन सम्राट विक्रमादित्य के कार्यकाल में यह हुआ।     1 अप्रैल से विक्रम संवत 2082 का शुभारंभ हुआ है। हमारे यहां संवत के भी 60 अलग-अलग प्रकार के नाम हैं। इस तरह से 2082 को धार्मिक अनुष्ठानों के संकल्प में सिद्धार्थ नाम दिया गया है। अगर अंग्रेजी के 2025 को कुछ और बोला जाए तो यह संभव नहीं है, लेकिन विक्रम संवत में वर्ष के नाम के भाव अलग-अलग होते हैं। इन 60 नामों का चक्रीकरण बदलता रहता है।     पहली बार सम्राट विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था में ही नवरत्नों का समूह देखने को मिलता है। उन्होंने नवरत्नों के समूह में प्रत्येक को 5 से 7 मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी थी। विक्रमादित्य ने अपने देश को गुलामी की दास्तां से मुक्त कराया। जब उन्होंने अपने पिता के बाद शासन संभाला तो उनके नवरत्नों में सभी अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ थे।     उन्होंने सुशासन की व्यवस्था स्थापित की। उनके मंत्रि-परिषद में शामिल नवरत्न इनते सक्षम थे कि किसी कारण से विक्रमादित्य उपस्थित न हो तब भी शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती थी। 300 साल पहले शिवाजी महाराज के अष्ट प्रधान की पद्धति में यही व्यवस्था नजर आती है। उनके राज्य में नहीं होने पर भी शासन व्यवस्था चलती रही।     सम्राट विक्रमादित्य दानशीलता, वीरता, प्रजा का ध्यान रखने में अग्रणी थे। विक्रम-बेताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी की कहानियां हम सभी ने सुनी हैं। विक्रमादित्य ने शासन की इनती अच्छी व्यवस्था स्थापित कर ली थी कि हर राजा उनके जैसा शासन करना चाहता था।     विक्रमादित्य का मूल नाम सहशांक था, लेकिन जो उल्टे क्रम को सूत्र में बदल दे, वो विक्रम और जो सूर्य के समान प्रकाशमान रहे वो आदित्य। विक्रमादित्य एक उपाधि है, जो उन्हें मिली थी। कई राजाओं ने स्वयं को विक्रमादित्य से जोड़ा है, लेकिन आदि विक्रमादित्य एक ही हैं और उनकी राजधानी उज्जैन थी।     विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था सुशासन का आधार है। वे एक आदर्श, वीर, जनकल्याणकारी, जनहितैषी सम्राट थे। जिन्होंने कभी खुद को राजा कहलाना पसंद नहीं किया। उन्होंने अपने राज्य में 2000 साल पहले गणतंत्र की स्थापना की थी।     विक्रमादित्य के विराट व्यक्तित्व को सबके सामने लाने के लिए महानाट्य की कल्पना की गई है। जब इसका मंचन दिल्ली में 12, 13 और 14 अप्रैल को लालकिले पर होगा तो इसमें हाथी, घोड़ा, पालकी के साथ 250 से ज्यादा कलाकार अभिनय करते नजर आएंगे।     महानाट्य में शामिल कलाकार निजी जीवन में अलग-अलग क्षेत्र के प्रोफेशनल्स हैं। महानाट्य में वीर सर समेत सभी रस देखने को मिलेंगे। यह गौरवशाली इतिहास को विश्व के सामने लाने का मध्यप्रदेश सरकार का एक प्रयास है। इस कालजयी रचना को सबसे सामने रखने में दिल्ली सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। इससे पूर्व हैदराबाद में विक्रमादित्य महानाट्य का आयोजन हो चुका है।     विक्रमादित्य ने अपने जीवनकाल में मथुरा और अयोध्या जैसे 300 से अधिक स्थानों पर मंदिरों का निर्माण उन्होंने कराया था। विक्रमादित्य काल के जैसे प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में गरीबों को मकान बनाने में मदद की जा रही है। देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सक्षम और सशक्त बन रहा है। यही तो रामराज्य है, जो विक्रमादित्य काल में था।

वैशाली नदी के जीर्णोद्धार को लेकर हाईकोर्ट ने नगर निगम को दिया नोटिस

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने वैशाली नदी मुरार को लेकर दायर जनहित याचिका में सुनवाई की है. कोर्ट ने सुनवाई के बाद नगर निगम को नोटिस जारी कर नदी जीर्णोद्धार से जुड़ी जानकारी मांगी है. याचिकाकर्ता ने इस जनहित याचिका के जरिए मांग की है कि नदी के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है जिसके लिए अब नगर निगम की सहायता की आवश्यकता है. हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से भी कहा है कि नगर निगम इस मामले में सहयोग करेगी. जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किए जा रहे हैं. वहीं इस काम को याचिकाकर्ता भी गंभीरता से करते रहे, जैसे अभी कर रहे हैं. अब इस मामले की सुनवाई 5 मई को होगी.

जापान की बाबा वेंगा ने भविष्यवाणी की जापान की 2011 की सुनामी से तीन गुना ज्यादा तबाही जुलाई में

टोक्यो  जापान की पूर्व आर्टिस्ट और भविष्यवक्ता रयो तत्सुकी इन दिनों चर्चा में है। रयो को उनकी सटीक भविष्यवाणियां करने के लिए पहले ही पहचान मिल चुकी है। रयो की हालिया चर्चा की वजह ये है कि उन्होंने इस साल एक बड़ी तबाही की भविष्यवाणी की है। जापान की बाब वेंगा कही जाने वाली रयो के बारे में दावा है कि 1980 के दशक से उन्हें दुनिया में होने वाली आपदाओं के सपने आ रहे थे। इनको उन्होंने एक डायरी में दर्ज कर दिया। साल 1999 में ‘द फ्यूचर आई सॉ’ नाम से इसे प्रकाशित किया गया। इसे उनकी भविष्यवाणियों की किताब कहा सकता है। इस किताब मेंदर्ज उनकी कई भविष्यवाणियां सच होने का दावा किया जाता है। रयो ने ‘द फ्यूचर आई सॉ’ में इस साल जुलाई में जापान और आसपास के देशों में एक बड़ी सुनामी आने और इससे भारी तबाही होने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जापान के दक्षिण में समुद्र उबल रहा है और वहां बड़े बुलबुले उठ रहे हैं। यह पानी के नीचे ज्वालामुखी फटने का संकेत हो सकता है। रयो की मानें तो इस साल आने वाली ये सुनामी बेहद भयावह होगी। ये 13 साल पहले 2011 मेंआई सुनामी से तीन गुना बड़ी सुनामी होगी। कैसे मिली रयो को पहचान रयो तत्सुकी पहले कॉमिक्स बनाती थीं लेकिन बाद में अपनी भविष्यवाणियों के लिए उनको दुनियाभर में पहचान मिली। उनकी भविष्यवाणियां लोगों को हैरान भी करती हैं और डराती भी हैं। पहले भी तत्सुकी के कई सपने सच हो चुके हैं। इसलिए लोग उनकी नई चेतावनी को गंभीरता से ले रहे हैं। नोस्ट्रैडमस और बाबा वेंगा जैसे कई भविष्यवक्ताओं की लिस्ट में अब रयो तातसुकी का नाम जुड़ गया है। साल 1991 में रयो ने क्वीन के गायक फ्रेडी मर्करी के बारे में बुरा सपना देखा था। कुछ महीनों बाद उनकी बीमार होकर मौत हो गई। 1995 में उन्होंने कोबे, जापान में एक बड़े भूकंप की भविष्यवाणी की थी। ये भी सच साबित हुया और 6,000 से अधिक लोग मारे गए। उनकी सबसे प्रसिद्ध भविष्यवाणी 2011 में आई थी। उन्होंने कहा था कि मार्च 2011 में एक बड़ी आपदा आएगी। ये सही साबित हुआ, जब जापान ने तोहोकू भूकंप और सुनामी का सामना किया । भविष्यवाणी पर क्यो बोले एक्सपर्ट तत्सुकी की नई भविष्यवाणी यह है कि जुलाई 2025 में सुनामी बड़ी तबाही मचाएगी। यह सुनामी जापान और आसपास के देशों को प्रभावित कर सकती है। फिलीपींस, ताइवान, इंडोनेशिया और जापान के कुछ तटीय इलाके इससे प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक इस साल ऐसी सुनामी आने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ऐसे में जुलाई में क्या होगा, ये आने वाला वक्त ही तय करेगा।

तमिलनाडु को रामनवमी पर मिलेगी बड़ी सौगात! PM Modi करेंगे नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन

 रामेश्वरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 अप्रैल, रामनवमी को तमिलनाडु के दौरे पर जा रहे हैं. रामनवमी के अवसर पर दोपहर करीब 12 बजे वे भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल – नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और सड़क पुल से एक ट्रेन और एक जहाज को रवाना करेंगे तथा पुल के संचालन को देखेंगे. इसके बाद दोपहर करीब 12:45 बजे वे रामेश्वरम में रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा करेंगे. रामेश्वरम में दोपहर करीब 1:30 बजे वे तमिलनाडु में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री नए पंबन रेल पुल का उद्घाटन करेंगे और रामेश्वरम-तांबरम (चेन्नई) नई ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाएंगे. रामायण में वर्णित अख्यान के अनुसार रामेश्वरम के पास राम सेतु का निर्माण धनुषकोडी से शुरू हुआ था. वर्टिकल लिफ्ट समुद्री पुल का पीएम करेंगे उद्घाटन रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाला यह पुल वैश्विक मंच पर भारतीय इंजीनियरिंग की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में खड़ा है. इसे 700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया है. इसकी लंबाई 2.08 किमी है, इसमें 99 स्पैन और 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है जो 17 मीटर की ऊंचाई तक उठता है. स्टेनलेस स्टील सुदृढीकरण, उच्च श्रेणी के सुरक्षात्मक पेंट और पूरी तरह से वेल्डेड जोड़ों के साथ निर्मित, पुल में अधिक स्थायित्व और कम रखरखाव की आवश्यकता है. भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए इसे दोहरी रेल पटरियों के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक विशेष पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग इसे जंग से बचाती है, जिससे कठोर समुद्री वातावरण में दीर्घायु सुनिश्चित होती है. 8300 करोड़ की परियोजना की देंगे सौगात प्रधानमंत्री तमिलनाडु दौरे के दौरान राज्य में 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न सड़क और रेल परियोजनाओं की आधारशिला रखेंग. इन परियोजनाओं में एनएच-332 के 29 किलोमीटर लंबे विलुप्पुरम-पुडुचेरी खंड को चार लेन का बनाने का काम, एनएच-40 के 28 किलोमीटर लंबे वालाजापेट-रानीपेट खंड को चार लेन का बनाने का शिलान्यास और एनएच-32 के 57 किलोमीटर लंबे पूंडियनकुप्पम-सत्तनाथपुरम खंड और एनएच-36 के 48 किलोमीटर लंबे चोलापुरम-तंजावुर खंड को राष्ट्र को समर्पित करना शामिल है. ये राजमार्ग कई तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों को जोड़ेंगे, शहरों के बीच की दूरी कम करेंगे और मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, बंदरगाहों तक तेजी से पहुंच को सक्षम करेंगे, इसके अलावा स्थानीय किसानों को कृषि उत्पादों को नजदीकी बाजारों तक पहुंचाने और स्थानीय चमड़ा और लघु उद्योगों की आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने में सशक्त बनाएंगे. पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है पंबन यह नया पुल 2,078 मीटर लंबा और पुराने पुल की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक और मजबूत बनाया गया है. यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल पुल है, जो समुद्री यातायात को सुगम बनाने के लिए ऊपर उठ सकता है. इसका निर्माण बेहतर सुरक्षा और अधिक भार सहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे यह भविष्य में तेज रफ्तार ट्रेनों को भी सुचारू रूप से संचालित करने में सक्षम होगा. 1914 में बना था पुराना पंबन पुल इससे पहले केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था, “1914 में निर्मित पुराने पंबन रेल पुल ने 105 वर्षों तक मुख्य भूमि को रामेश्वरम से जोड़ा. दिसंबर 2022 में जंग लगने के कारण इसे बंद कर दिया गया, जिसने आधुनिक नए पंबन पुल के लिए मार्ग प्रशस्त किया, जो कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत करेगा!” इस पुल के चालू होने से रामेश्वरम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलेगी. साथ ही, यह पुल दक्षिण भारत के रेलवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत करेगा. इस ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन राम नवमी जैसे शुभ दिन पर किया जाना इसे और भी खास बना देता है.

पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी

भोपाल  मध्यप्रदेश के छह शहरों में 582 ई-बसों(E-Bus) का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है। लेकिन इन बसों का संचालन नगरीय निकायों को महंगा पड़ सकता है क्योंकि इनके संचालन के लिए जीसीसी यानी ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रेक्ट मॉडल अपनाया गया है। इसमें इलेक्ट्रिक बस, ड्राइवर, कंडक्टर और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की ही रहेगी। सरकार केवल प्रति किलोमीटर के हिसाब से उसे भुगतान करेगी। प्रतिदिन न्यूनतम 180 किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा। इंदौर में अभी एक एजेंसी 65 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से ई-बसें संचालित कर रही है।  भोपाल की सड़कों पर अगले छह महीनों में दो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। पहला बदलाव जुलाई तक भोपाल मेट्रो की शुरुआत है। दूसरा बदलाव शहर की बसों के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का जुड़ना है। पीएम ई-बस योजना के तहत राज्य के 6 शहरों (भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर) में पीपीपी मॉडल पर 552 शहरी ई-बसें चलाई जाएंगी। इसे पिछले फरवरी में मंजूरी मिली थी। शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. परीक्षित जाडे ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया कि हम उम्मीद करते हैं कि पीएम ई-बस योजना के तहत ये इंट्रासिटी बसें 2025 के मध्य या अंत तक शुरू हो जाएंगी। इस बदलाव का उद्देश्य हजारों छात्रों और अन्य सार्वजनिक परिवहन उपयोगकर्ताओं के लिए सार्वजनिक परिवहन के वित्तीय बोझ को कम करना है। महामारी की समाप्ति के बाद से ये लोग सब्सिडी वाले बस पास का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।  यदि नई ई-बसों का कॉन्ट्रेक्ट 60 रुपए प्रति किलोमीटर में होता है तो एक बस को 180 किमी का प्रतिदिन 10800 रुपए का भुगतान होगा, चाहे उसमें सवारियां बैठे या नहीं। इस प्रकार बसों का संचालन करने वाली एजेंसी को 582 बसों का प्रतिदिन 62 लाख 85 हजार 600 रुपए मिलेगा। एक महीने में यह राशि 18 करोड़ 85 लाख 68 हजार रुपए होगी। टेंडर जारी पीएम ई-बस योजना के तहत प्रदेश के 6 शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में ई-बसें चलाई जाएंगी। इसके लिए कंपनी की तलाश शुरू हो गई है। रेट तय करने के लिए सरकार ने टेंडर जारी किया है। जो कंपनी सबसे कम रेट देगी उसे संचालन का काम मिलेगा। यह सुविधा तीन माह के अंदर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। कुल 582 ई-बसें चलेंगी। इनमें से 472 बसें नौ मीटर वाली होंगी जिनमें लगभग 32 सीट होंगी। जबकि 110 बसें सात मीटर वाली होंगी जो 21 सीटर होंगी। कहां कितनी ई-बसें चलेंगी     भोपाल – 100     इंदौर – 150     जबलपुर – 100     उज्जैन – 100     ग्वालियर – 100     सागर – 32 टिकट एजेंसी का जिम्मा निकाय का इन बसों के चार्जिंग की व्यवस्था भी मिलजुलकर की जा रही है। चार्जिंग स्टेशन और डिपो राज्य सरकार बनवाएगी। इसकी 60 फीसदी राशि केन्द्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य को देना होगी। सरकार सिर्फ जमीन और इंफ्रा विकसित करेगी। चार्जिंग गन बसों का संचालन करने वाली कंपनी ही लगाएगी और बिजली का बिल भी कंपनी ही चुकाएगी। ऐसे 11 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। जबकि टिकटिंग एजेंसी संबंधित निकाय द्वारा तय की जाएगी। टिकट का पैसा निकाय के पास जाएगा, इसी से बसों का भुगतान होगा। केंद्र 12 साल तक राशि देगी बसों के संचालन के लिए प्रति किलोमीटर के अनुसार भुगतान होगा। इसके लिए केंद्र सरकार प्रति किलोमीटर के अनुसार 22 रुपए देगी। केंद्र यह राशि 2037 तक यानी 12 साल तक देगी। जो राशि बचेगी वह किराए से कवर होगी। जहां किराए से कवर नहीं हो पाएगी उसका भुगतान संबंधित नगरीय निकाय को करना होगा। तीन महीने का अग्रिम भुगतान केंद्र ने इसकी भी पुख्ता व्यवस्था की है कि ई-बसों को नियमित भुगतान होता रहे। इसके लिए बैंक में एक एस्क्रो अकाउंट खुलवाया जाएगा। इसमें राज्य सरकार को कम से कम तीन माह का एडवांस पेमेंट जमा कराना होगा। यदि निकाय भुगतान करने में विफल रहते हैं तो इस अकाउंट में से संचालनकर्ता कंपनी को भुगतान हो जाएगा। बीसीएलएल को मिलेंगी 100 ई-बसें सूत्रों के अनुसार एमपी यूएडीडी यात्रियों की यात्रा लागत को सब्सिडी देने के लिए एक स्थिरता मॉडल पर काम कर रहा है। इसके साथ ही बेड़े की व्यवहार्यता को भी बनाए रखा जाएगा। भोपाल नगर निगम की सहायक कंपनी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड आर्थिक रूप से संघर्ष कर रही है। यह राज्य सरकार के समर्थन और वायबिलिटी गैप फंडिंग पर निर्भर है। बीसीएलएल को इस योजना के तहत 100 ई-बसें मिलेंगी। एमपी नगर में 5000 से ज्यादा छात्रों का आना जाना महामारी से पहले भोपाल में 35,000 से अधिक बस यात्री मेयर के बस पास से असीमित यात्रा का लाभ उठाते थे। मिसरोद से एमपी नगर आने-जाने वाले जेईई कोचिंग के छात्र सार्थक और हर्षित ने इस लाभ का अनुभव कभी नहीं किया। एमपी नगर में लगभग 5,000 छात्र 5 किमी के दायरे में कोचिंग क्लासेस आते-जाते हैं। ये छात्र प्रति माह यात्रा पर अनुमानित 35 लाख रुपए खर्च करते हैं। प्रति छात्र औसतन 25 रुपये प्रतिदिन खर्च होता है। महामारी से पहले इस्तेमाल किए जाने वाले मेयर पास के समान एक स्टूडेंट बस पास इन यात्रा लागतों को आधे से भी कम कर सकता है। स्टूडेंट्स के लिए बड़ी सौगात हर्षित ने कहा कि अगर स्टूडेंट पास लागू होता है, तो केवल कोचिंग क्लासेस के लिए छात्रों की बचत 50% से अधिक हो जाएगी। जिन छात्राओं की कोचिंग क्लासेस देर शाम को खत्म होती हैं, उन्हें परिवहन पर अधिक खर्च करना पड़ता है। जल्दी आने-जाने के लिए ई-रिक्शा लेने से खर्च तीन गुना बढ़ जाता है। इससे आर्थिक तंगी बढ़ जाती है। भोपाल की मेयर मालती राय से संपर्क करने पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर IMR तैयार किया जा रहा, पर्यावरण और कनेक्टिवटी पर रहेगा जोर

इंदौर  इंदौर सहित पांच जिलों को मिलाकर इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) तैयार किया जा रहा है। कंसल्टेंट कंपनी ने प्राथमिक रिपोर्ट पेश कर दी है, जिसमें क्षेत्र के इकट्ठा हुए डाटा के आधार पर खाका खींचा गया है। अब उसमें मंत्री व कलेक्टर के सुझाव को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद कंपनी फाइनल रिपोर्ट पेश करेगी। इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुस के हजारों गांव जुड़ेंगे इंदौर, उज्जैन, धार, देवास और शाजापुर की 29 तहसीलों के 1756 गांवों को मिलाकर 2051 के हिसाब से इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का प्लान तैयार किया जा रहा है। 9336 वर्ग किमी एरिया में कनेक्टिविटी, उद्योग और पर्यावरण का संतुलन बनाया जाएगा ताकि बेतरतीब विकास पर नियंत्रण किया जा सके। इसको तैयार करने का काम इंदौर की मेहता एंड एसोसिएट कंपनी को दिया गया है, जिसने प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर दी है। दूसरी रिपोर्ट के लिए तैयारी शुरू प्लान तैयार करने के काम में कंपनी के डेढ़ दर्जन से अधिक विशेषज्ञ पिछले दो माह से जुटे हुए हैं जिन्होंने सभी जिलों से 26 बिंदुओं पर डाटा इकट्ठा किया। बिखरी हुई जानकारी होने की वजह से टीम को पसीने छूट गए। फिर भी बाद में शामिल हुए शाजापुर की जानकारी पूरी नहीं आई है। हालांकि मोटी मोटी जानकारी के आधार पर पूरे क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है जिसे कलेक्टर आशीष सिंह को सौंप दी गई। अब कम्पनी ने दूसरे चरण का काम शुरू कर दिया है जिसमें भौगोलिक स्थिति के साथ क्षेत्र की विशेषता और सामने आए डाटा के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है तो साथ में मैपिंग भी हो रही है। दूसरी रिपोर्ट में रीजन की पिक्चर सामने आ जाएगी। 1. इंदौर जिला क्षेत्रफल – 3901.6 वर्ग किमी प्रतिशत – 100 तहसील – बिचौली हप्सी, देपालपुर, महू, हातोद, इंदौर, कनाड़िया, खुड़ैल, मल्हारगंज, राऊ और सांवेर गांव – 690 2. उज्जैन जिला क्षेत्रफल – 2740.5 वर्ग किमी प्रतिशत – 44.99 तहसील – बड़नगर, घटिया, खाचरौद, कोठीमहल, नागदा, तराना, उज्जैन, उज्जैन नगर और उन्हेल गांव – 512 3. देवास जिला क्षेत्रफल – 2086.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 29.72 तहसील – बागली, देवास, देवास नगर, हाटपिपल्या, सोनकच्छ और टोक खुर्द, गांव – 444 4. धार जिला क्षेत्रफल – 574.4 वर्ग किमी प्रतिशत – 7.04 तहसील – बदनावर, धार और पीथमपुर, गांव – 107 5. शाजापुर जिला क्षेत्रफल – 33.3 वर्ग किमी प्रतिशत – 0.54 तहसील – शाजापुर, गांव – 03 मंत्री और कलेक्टर ने दिए सुझाव पिछले माह इंदौर कलेक्टोरेट में आइएमआर में शामिल जिलों के संभागायुक्त, कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई गई थी। प्रेजेंटेशन देकर उन्हें जानकारी दी गई तो उस दौरान कुछ जनप्रतिनिधियों ने मौके पर ही सुझाव दिए थे तो बाकी से लिखित में सुझाव अपेक्षित किए गए थे। उसमें मंत्री तुलसीराम सिलावट व देवास कलेक्टर ने सुझाव दिए हैं। अब उन पर विचार किया जाएगा।    

उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा, सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली

उज्जैन  मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ लगेगा। वैसे इसके लिए अभी तीन वर्ष का समय है, लेकिन सरकार ने प्रयागराज महाकुंभ को देखकर कई सीख ली है। इसी के चलते उज्जैन के लिए खास तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव जैसे बड़े अधिकारियों ने समीक्षा बैठक की है। सरकार को प्रारंभिक तौर पर अनुमान है कि सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु उज्जैन आ सकते हैं। ऐसे में इनके लिए व्यवस्था करना भी आसान काम नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने अनुमान के आधार पर कुम्भ मेले के दौरान कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। जिनको कुंभ के दौरान लागू किया जाएगा। कुंभ में होंगी ये व्यवस्थाएं कुंभ मेले के दौरान मेला क्षेत्र में प्रतिदिन 16 हजार से ज्यादा सफाईकर्मी स्वच्छता की व्यवस्था संभालेंगे। साथ ही श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिए 50 हजार शौचालय का निर्माण भी किया जाएगा। आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाने का भी निर्णय लिया गया है। सिंहस्थ में लगेंगे इतने सफाईकर्मी बताया जा रहा है कि उज्जैन में सड़क और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर 11 हजार 220 सफाईकर्मियों की आवश्यकता होगी। कचरा संग्रहण के लिए लगभग 5 हजार सफाईकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। कुल मिलाकर 16 हजार 220 सफाई कर्मियों की आवश्यकता सिंहस्थ में होगी। सिंहस्थ में आ सकते हैं 14 करोड़ श्रद्धालु सिंहस्थ में 14 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आ सकते हैं। ऐसे में हर दिन सिंहस्थ मेला क्षेत्र में 740 टन कचरा उत्पन्न होने का अनुमान है। इसे नियंत्रित करने के लिए 50 हजार बायो-टॉयलेट बनाए जाएंगे। सिंहस्थ कुम्भ मेले में 500 अस्थाई अस्पताल और कैम्प लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य सुविधाओं को सिंहस्थ मेला क्षेत्र के अनुसार 6 जोन में बांटा जाएगा। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं का डिजीटल रिकॉर्ड मेंटेन किया जाएगा। डॉक्टर और पेरामेडिकल स्टॉफ की ट्रेनिंग होगी। इसके साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त सुरक्षाबलों को तैनात किया जाएगा।

गोवा घूमने जानें वालों के लिए बड़ी खुशखबरी, इंदौर से दूसरी सीधी फ्लाइट,15 अप्रैल से होगी शुरू, 4 हजार 376 रुपए है बेसिक किराया

इंदौर 15 अप्रैल से इंदौर और गोवा के बीच नई फ्लाइट चलाई जाएगी। फ्लाइट का संचालन एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा किया जाएगा। फ्लाइट के शुरू हो जाने से इंदौर से गोवा जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा हो जाएगी। न सिर्फ गोवा, बल्कि गोवा के आसपास पहुंचने के लिए यात्रियों को इंदौर से अब ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि, इंडिगो एयरलाइंस द्वारा पहले ही गोवा के लिए फ्लाइट संचालित की जा रही है। मौजूदा फ्लाइट का समय इंदौर से प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे है, जबकि नई फ्लाइट का समय गोवा से इंदौर आकर दोपहर 12:20 से इंदौर से गोवा के लिए रवाना रखा गया है। हालांकि, गोवा जाने वाली फ्लाइट में सिर्फ 10 मिनट का अंतराल ही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की नई फ्लाइट सुबह गोवा से इंदौर आकर दोपहर 12:20 इंदौर से गोवा के लिए रवाना होगी। ऐसे में 10 मिनट के अंतराल में इंदौर एयरपोर्ट से दो फ्लाइट गोवा के लिए उड़ान भरेंगी। वहीं, इंदौर से अब हर दिन आने-जाने में 90 से ज्यादा फ्लाइट हो गई हैं। ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश (टाफी) अध्यक्ष टीके जोस ने बताया कि इंदौर से गोवा के लिए 12 महीने यात्री जाते हैं। पहले मानसून सीजन में लोग गोवा जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रह गया है। सीजन के समय तो कई बार एक ओर का किराया 20 हजार तक पहुंच जाता है। कोविड के पहले एयर एशिया भी इंदौर से गोवा के लिए फ्लाइट का संचालन करती थी, लेकिन बाद में यह उड़ान बंद हो गई और एयर एशिया ने इंदौर से संचालन ही बंद कर दिया। बता दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस गोवा के लिए जो उड़ान शुरू करेगी, उसका संचालन नार्थ गोवा के मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से होगा। अभी इंडिगो इंदौर से गोवा के बीच में एक डेली उड़ान का संचालन करती है। यह उड़ान साउथ गोवा के डेंबोलिंब एयरपोर्ट के लिए संचालित होती है। कंपनी ने तीन कैटेगरी में बुकिंग शुरू की इंदौर-गोवा फ्लाइट की बुकिंग कंपनी ने तीन कैटेगरी में शुरू की है। पहली कैटेगरी एक्सप्रेस लाइट है, जिसका किराया 4 हजार 376 रुपए है। वहीं दूसरी कैटेगरी एक्सप्रेस वैल्यू है जिसका किराया 4 हजार 902 रुपए है। वहीं तीसरी कैटेगरी एक्सप्रेस फ्लेक्स है जिसका किराया 5 हजार 636 रुपए है। यह रहेगा शेड्यूल – गोवा-इंदौर : सुबह 10:05 बजे गोवा से रवाना होगी। फ्लाइट 11:40 बजे इंदौर पहुंचेगी। – इंदौर-गोवा : दोपहर 12:20 बजे रवाना होगी। दोपहर 3:45 बजे गोवा पहुंचेगी। इंदौर एयरपोर्ट पर चलने वाली फ्लाइट्स की संख्या 90 से ज्यादा इंदौर एयरपोर्ट से अब गोवा के लिए दो फ्लाइट्स उड़ान भरेंगी। वहीं, अब इस नई फ्लाइट के चलने से इंदौर एयरपोर्ट पर चलने वाली फ्लाइट्स की संख्या 90 से ज्यादा हो गई है। इसे लेकर ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष टीके जोशी ने जानकारी दी कि इंदौर से गोवा जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक है, और 12 महीने यात्री आते-जाते रहते हैं। हालांकि पहले मानसून सीजन में लोग गोवा जाना पसंद नहीं करते थे, लेकिन अब लोग मानसून सीजन में भी गोवा के लिए जाते हैं। सीजन के समय तो कई बार एक ओर का किराया ही बढ़कर ₹20,000 तक पहुंच जाता है। एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट दरअसल, कोविड से पहले एयर एशिया की भी एक फ्लाइट इंदौर से गोवा के लिए चलाई जाती थी, लेकिन इस फ्लाइट को बाद में बंद कर दिया गया और एयर एशिया की कोई भी फ्लाइट इंदौर से नहीं चलाने का निर्णय लिया गया। जानकारी दे दें कि एयर इंडिया एक्सप्रेस गोवा के लिए जो उड़ान शुरू करने जा रही है, इस फ्लाइट का संचालन नॉर्थ गोवा के मनोहर पर्रिकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से किया जाएगा। हालांकि, अभी इंडिगो की एक फ्लाइट इंदौर से गोवा के बीच उड़ान भरती है, जो कि साउथ गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट के लिए संचालित की जाती है।

श्रीलंका में चीन की पकड़ को कमजोर करने के लिए भारत ने मास्टरस्ट्रोक चला, UAE संग मिलाया हाथ

श्रीलंका भारत ने एक बार फिर इंडियन ओशन में अपना कूटनीतिक खेल दिखाया है। इस बार श्रीलंका में चीन की पकड़ को कमजोर करने के लिए भारत ने मास्टरस्ट्रोक चला है। दलअसल श्रीलंका के त्रिंकोमाली शहर में भारत, यूएई और श्रीलंका के बीच एक बड़े ऊर्जा हब को बनाने का ऐलान हुआ है। यह कदम न सिर्फ तीन देशों के आपसी सहयोग को मजबूती देगा बल्कि चीन की अरबों डॉलर की परियोजनाओं को चुनौती भी देगा। शनिवार को कोलंबो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक यात्रा के दौरान यह समझौता हुआ। मोदी का यह दौरा श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा डिसानायके के सत्ता में आने के बाद पहला दौरा था। इस मौके पर त्रिपक्षीय समझौता किया गया जिसे भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री, श्रीलंका के ऊर्जा सचिव प्रो. केटीएम उदयंगा हेमपाला और यूएई के प्रतिनिधियों ने साइन किया। दरअसल त्रिंकोमाली एक प्राकृतिक डीप-वॉटर हार्बर है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है, यह अब ऊर्जा हब बनने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत मल्टी-प्रोडक्ट पाइपलाइन, ऑयल टैंक फार्म और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इंडियन ऑयल की श्रीलंका शाखा पहले से ही इन टैंक फार्म्स के कुछ हिस्से को ऑपरेट कर रही है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “त्रिंकोमाली ऊर्जा सहयोग के लिए एक क्षेत्रीय केंद्र बनने की भारी क्षमता रखता है। यूएई भारत का रणनीतिक ऊर्जा सहयोगी है, और इस पहल में उनका साथ आना इस क्षेत्र के लिए पहली बार की ऐतिहासिक पहल है।”

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज का खातेगांव दौरा, धमाके में जान गंवाने वाले पंकज सांकलिया के घर जाकर उनके माता-पिता से मुलाकात की

 खातेगांव केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को खातेगांव क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने कई परिवारों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की।मंत्री चौहान सबसे पहले कन्नौद में भाजपा के दिवंगत नेता रामप्रसाद यादव के घर पहुंचे। इसके बाद खातेगांव में भाजपा के दिवंगत नेता शंभुकुमार बाकलीवाल के परिजनों से मिले और अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि यह घटना बहुत ही दुखद है, उसमें दो परिवार संदलपुर के पूरी तरह तबाह हो गए। एक परिवार में तो केवल एक बेटी बची है नैना और कोई बचा नहीं है। केवल उसकी दादी है और इस परिवार में तो उसे मूल परिवार से कोई नहीं बचा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का आभारी हूं की परिवारों की चिंता की जा रही है। शिवराज ने कहा कि वे बच्ची नैना की शिक्षा दीक्षा की पूरी व्यवस्था करेंगे। नैना को हर महीने ₹5000 वाला आशीर्वाद योजना के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं। बच्ची की डिजिटल कान्वेंट स्कूल में निशुल्क उसकी पढ़ाई होगी। इसके बाद गुजरात पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले पंकज सांकलिया के घर जाकर उनके माता-पिता से मुलाकात की। फिर वे संदलपुर में इसी हादसे में मारे गए 9 लोगों में से दो परिवारों से मिलने गए। कार्यक्रम के अनुसार, संदलपुर के बाद उन्हें सलकनपुर जाना था। इस दौरे में खातेगांव विधायक आशीष शर्मा भी उनके साथ रहे। केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा कि जो पैसा खाते में आने वाला है उसको फिक्स डिपॉजिट करेंगे, और फिक्स डिपाजिट जो राशि है जब नैना बड़ी होगी तो बाढ़ के 75 लाख रुपया हो जाएगी, पढ़ाई की व्यवस्था भी हो रही। भविष्य में नैना समाज के आशीर्वाद से पढ़ लिखकर आगे बढ़े इसके पूरा प्रबंध किया गया है। मैं दुर्घटना में जो दिवंगत हुए हैं, भगवान से प्रार्थना करता हूं कि उन्हें अपने चरणों में स्थान दें। भोपाल से देवास जा रहे शिवराज सिंह चौहान के काफिले में शामिल गाड़ी पलटी, 3 जवान घायल, हुआ बड़ा हादसा भोपाल से देवास जा रहे केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के काफिले में शामिल पुलिस की गाड़ी आष्टा थाना क्षेत्र के ग्राम बेदाखेड़ी के पास हादसे का शिकार हो गई है। काफिले में शामिल गाड़ी अनियंत्रित होकर पलटने से उसमें सवार 3 पुलिस जवान घायल हुए हैं। घायल जवानों को तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को भोपाल से देवास जिले के खातेगांव संदलपुर जा रहे थे। उनका काफिला जैसे ही आष्टा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बेदाखेड़ी के पास पहुंचा तो काफिले में शामिल एक फॉलो वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें एएसआई एसपी सिमोलिया, नीरज शुक्ला और आकाश अटल शामिल हैं। घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत सीहोर जिला अस्पताल में किया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है। मौके पर मचा हड़कंप जैसे ही गाड़ी पलटी, काफिले में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत ही घायल जवानों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। राहत की बात ये रही कि हादसे के समय शिवराज सिंह दूसरी गाड़ी में सवार थे और पूरी तरह सुरक्षित हैं। पुलिस और प्रशासन सतर्क हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन मौके पर पहुंच गया। घायलों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है। प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है और काफिले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी समीक्षा की जा रही है।

हिंद महासागर पोत ‘सागर’ को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हरी झंडी दिखाई, समंदर में भारत ने बढ़ा दी दुश्मनों की टेंशन!

नई दिल्ली   रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्नाटक के करवार नौसैनिक अड्डे से हिंद महासागर पोत ‘सागर’ को हरी झंडी दिखाई और कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में मुक्त नौवहन, नियम आधारित व्यवस्था और शांति सुनिश्चित करना भारत का सबसे बड़ा उद्देश्य है. रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण करवार नौसैनिक अड्डे पर लोगों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, ‘‘हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की तैनाती सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि मित्र देशों के लिए भी है.’’ रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का प्रयास हिंद महासागर क्षेत्र को और अधिक शांतिपूर्ण एवं समृद्ध बनाना है. राजनाथ सिंह को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर इससे पहले सिंह ने नौसैनिक अड्डे पर विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन किया. केंद्रीय मंत्री दोपहर लगभग एक बजे नौसैनिक अड्डे पर पहुंचे, जहां उन्हें परेड ग्राउंड में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया. रक्षा मंत्री एक सैन्य हेलीकॉप्टर से प्रमुख अड्डे पर उतरे और वह यहां कई कार्यक्रम में शामिल होंगे. नौसेना परियोजना ‘सीबर्ड’ के तहत महत्वपूर्ण नौसैनिक अड्डे का विस्तार कर रही है. रक्षा मंत्री के कार्यालय ने शनिवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हिंद महासागर पोत ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के रूप में आईएनएस ‘सुनयना’ को हरी झंडी दिखाएंगे जिस पर 44 कर्मी सवार हैं.’’ इसने इस पोस्ट में एक वीडियो भी साझा किया है जिसमें इस मिशन के तहत जमीन और समुद्र दोनों पर आयोजित प्रशिक्षण चरणों को दर्शाया गया है. समंदर में बढ़ेगी भारत के दुश्मनों की टेंशन रक्षा मंत्री कार्यालय ने लिखा, ‘‘आईओएस ‘सागर’ हिंद महासागर क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, यह अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ मजबूत संबंध बनाने और हिंद महासागर क्षेत्र में अधिक सुरक्षित एवं समावेशी समुद्री वातावरण की दिशा में काम करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा.’’ हिंद महासागर पोत (आईओएस) ‘सागर’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) आईओआर देशों के साथ निरंतर सहयोग की दिशा में एक पहल है.

एआई में भी अच्छाई और बुराई दोनों हैं, यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं: सीएम मोहन यादव

नई दिल्ली/भोपाल दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में शनिवार को ‘सोशल इंप्लीकेशंस ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ पर सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद शामिल हुए। सीएम मोहन यादव ने बदलते दौर में एआई की बढ़ती हैसियत पर बात की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि आज के समय में यह अत्यंत प्रासंगिक विषय है जिस पर विस्तार से चर्चा की गई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम जन कल्याण और सुशासन के लिए विज्ञान आधारित प्रणालियों का उपयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं, साथ ही आवश्यक सावधानियां भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण विषयों को सामने लाना सराहनीय है। मैं इस पहल के लिए बधाई देता हूं। सीएम यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस कार्यक्रम की झलकियां साझा कीं। जिसमें से एक में वे एआई को लेकर फैले भ्रम पर बात करते दिखे। उन्होंने कहा, “जब कंप्यूटर और इंटरनेट आए, तो लोगों को डर था कि नौकरियां चली जाएंगी और घर बर्बाद हो जाएंगे। हर चीज में अच्छी और बुरी बातें होती हैं। वैसे ही, एआई में भी अच्छाई और बुराई दोनों हैं। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका उपयोग कैसे करते हैं।” इससे पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “‘सोशल इंप्लीकेशंस ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ विषय पर इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित संगोष्ठी में सहभागिता कर प्रबुद्धजनों के समक्ष अपने विचार साझा करने का अवसर प्राप्त हुआ। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आज केवल तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन चुकी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं शासन-प्रशासन जैसे विविध क्षेत्रों में एआई की संभावनाएं अनंत हैं। जब सम्पूर्ण विश्व एआई में अपना भविष्य तलाश रहा है, तब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एआई के वैश्विक पावरहाउस के रूप में उभर रहा है। निश्चित रूप से यह तकनीकी क्रांति “विकसित भारत 2047 के विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में अहम भूमिका निभाएगी।” इस मौके पर, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि एआई पर बहुत बात हो चुकी है। लेकिन, हमारा फोकस ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले हमारे किसान भाइयों को लेकर भी होना चाहिए। किसान जब एआई का इस्तेमाल करे तो वह खेती की फोटो लें और बता पाए कि धान-गेंहू की खेती में कीड़ा लगा है या नहीं। इसमें खाद की जरूरत कब पड़ेगी। इसी तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो छोटी चीजें हैं, उन्हें एआई का इस्तेमाल कर दूर करना होगा। डॉक्टरों को एक-एक आगे चलते हुए शोध करना होगा।

दिल्ली कैपिटल्स ने चेपॉक का किला ध्वस्त किया, चेन्नई सुपर किंग्स को 25 रन से हराया

नई दिल्ली दिल्ली कैपिटल्स ने चेपॉक का किला ध्वस्त कर दिया है। आईपीएल 2025 के 17वें मैच में दिल्ली कैपिटल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 25 रन से हराया। दिल्ली की यह इस सीजन लगातार तीसरी जीत है। वहीं, दिल्ली ने 15 साल बाद पहली बार चेपॉक में जीत दर्ज की है। दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट के नुकसान पर 183 रन बनाए। इसके जवाब में चेन्नई सुपर किंग्स ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 158 रन ही बना सकी। एमएस धोनी 30 रन बनाकर नाबाद लौटे। केएल राहुल की अर्धशतकीय पारी टॉस जीतकर पहले अक्षर पटेल ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। फॉफ डु प्लेसिस की गैर मौजूदगी में केएल राहुल और जैक फ्रेजर मैक गर्ग ने ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, खलील ने पहले ही ओवर में जैक का विकेट लेकर दिल्ली की शुरुआत खराब करने की कोशिश की। हालांकि, इसके बाद अभिषेक पोरेल और राहुल के बीच 36 गेंद पर 54 रन की साझेदारी की। पोरेल 20 गेंद पर 33 रन की कैमियों पारी खेलकर आउट हुए। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए अक्षर पटेल ने 21 रन की पारी खेली। वहीं, दूसरे छोर पर खड़े केएल राहुल ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए अपना पहला आईपीएल अर्धशतक जड़ा और समीर रिजवी के साथ 33 गेंद पर 56 रन की साझेदारी की। केएल राहुल 51 गेंद पर 77 रन बनाकर आउट हुए। ट्रिस्टन स्टब्स ने 12 गेंद पर 24 रन की तेज फारी खेली। चेन्नई के लिए खलील अहमद ने 2 विकेट लिए। शुरुआत से ही लड़खड़ाई चेन्नई 184 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई की पारी शुरुआत से ही लड़खड़ा गई। टीम ने 14 के स्कोर पर रचिन रविंद्र (3) का विकेट गंवा दिया। मुकेश कुमार ने फॉलो थ्रू में कैच लपका। अभी स्कोर में 6 रन और ही जुड़े थे कि कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ (5) अपना विकेट गंवा बैठे। कॉनवे भी 13 रन बनाकर चलते बने। 15 साल बाद चेन्नई में जीती दिल्ली शिवम दुबे ने 15 गेंद पर 18 रन की पारी खेली, लेकिन विप्रज निगम ने उन्हें अपनी स्पिन के जाल में फंसाया। जडेजा मात्र दो रन की पारी खेल सके। विजय शंकर ने नाबाद अर्धशतकीय पारी खेली और एमएस धोनी के बीच 57 गेंद पर नाबाद 84 रन की साझेदारी की। हालांकि, यह जोड़ी भी चेन्नई को जीत नहीं दिला सकी। साल 2010 के बाद दिल्ली ने पहली बार चेपॉक पर जीत दर्ज की है। इससे पहले आरसीबी ने 17 साल के बाद पहली बार चेपॉक में जीत दर्ज की थी।

बस्तर अब बंदूक नहीं, विकास की आवाज से जाना जायेगा : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

रायपुर जनजातीय परंपराओं, लोक कला और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक बस्तर पंडुम 2025 आज दंतेवाड़ा में भव्य समापन समारोह के साथ सम्पन्न हुआ। बस्तर पण्डुम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने अपने उद्बोधन में बस्तर पण्डुम को अगले वर्ष से राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि देशभर के आदिवासी जिलों के कलाकारों को इस महोत्सव में आमंत्रित किया जाएगा, और बस्तर की संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम उत्सव में अपने उद्बोधन में जनजातीय आराध्य देवताओं को नमन किया। साथ ही महाराजा प्रवीर चंद भंजदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उन्होंने जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। केंद्रीय गृह मंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी एवं सामाजिक न्याय के प्रतीक बाबू जगजीवन राम को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी और कहा कि उन्होंने दलित, पिछड़े और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए जीवन समर्पित कर दिया। 47000 कलाकारों की भागीदारी, 5 अप्रैल तक चला आयोजन उन्होंने कहा कि बस्तर पण्डुम में 1850 ग्राम पंचायतों, 12 नगर पंचायतों, 8 नगर परिषदों, और एक नगर पालिका के कुल 47000 कलाकारों ने भाग लिया। यह उत्सव 12 मार्च से 5 अप्रैल तक चला और इस वर्ष 7 श्रेणियों में आयोजित किया गया। अगले वर्ष इसे 12 श्रेणियों में विस्तारित किया जाएगा। संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संजोने का आह्वान केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की बोलियां, वाद्य यंत्र, भजन और परंपराएं केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे भारत की सांस्कृतिक विरासत हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें संरक्षित रखना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। विकास की नई योजना: नक्सलमुक्त गांवों को मिलेगा 1 करोड़ रुपये केंद्रीय गृह मंत्री ने घोषणा की कि जो गांव नक्सलियों के आत्मसमर्पण में सहयोग करेंगे, उन्हें “नक्सली मुक्त गांव” घोषित कर 1 करोड़ रुपये की विकास निधि दी जाएगी। उन्होंने अपील की कि ग्राम सभा कर गांवों को सरेंडर की प्रक्रिया में आगे लाएं। 5500 रुपये में सीधे तेंदूपत्ता की खरीदी, बिचौलियों का अंत केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अब तेंदूपत्ता 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से सीधे सरकार खरीद रही है, और राशि सीधे आदिवासियों के खाते में जा रही है। इससे लाल आतंक से जुड़े लोगों का नियंत्रण समाप्त होगा। आत्मसमर्पण  करने वाले नक्सलियों को मिलेगा पुनर्वास केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो नक्सली हथियार छोड़ देंगे, उन्हें पूरी सुरक्षा और सम्मान के साथ मुख्यधारा में लाया जाएगा। लेकिन जो हथियार नहीं डालेंगे, उनके विरुद्ध सुरक्षाबल कड़ी कार्रवाई करेगी। हर गांव में स्कूल, दवाखाना, आधार और राशन कार्ड की व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि हर गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए छोटे अस्पताल, स्कूल, आधार कार्ड, राशन कार्ड और स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। ‘वोकल फॉर लोकल’ के अंतर्गत बस्तर के उत्पादों को बाजार उपलब्ध केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर के बेल मेटल, टेराकोटा, लकड़ी शिल्प, गोदना और चित्रकला को वैश्विक मंच देने की योजना बताई। ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत इन उत्पादों को दिल्ली तक के बाजारों में पहुंचाया जाएगा। आदिवासी नायकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार एक आदिवासी महिला श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर आदिवासी समाज को ऐतिहासिक सम्मान देने का कार्य हमारी सरकार में किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने 10 साल में 4 करोड़ से अधिक घर बनाए, 11 करोड़ को गैस सिलेंडर, 12 करोड़ घरों में शौचालय, 15 करोड़ घरों में नल से जल, और 70 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और 5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा दिया है। बस्तर का नया सपना: सुकमा से सब-इंस्पेक्टर, कांकेर से कलेक्टर केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि असली विकास तब होगा जब बस्तर से डॉक्टर, कलेक्टर, बैरिस्टर और प्रशासनिक अधिकारी निकलेंगे। उन्होंने आह्वान किया कि अब बस्तर को हथियार नहीं, कलम और कंप्यूटर की शक्ति से आगे ले जाना है।

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