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18 मृतकों की एक साथ उठीं अर्थियां, देवास और हरदा में मातम, नेमावर घाट में अंतिम संस्कार

 देवास  गुजरात के बनासकांठा में पटाखा फैक्ट्री हादसे में मारे गए 18 मृतकों के शव मध्य प्रदेश पहुंचे तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। नेमावर घाट पर एक साथ सभी कां अंतिम संस्कार हुआ। गुजरात के बनासकांठा में यह हादसा मंगलवार सुबह 8 बजे हुआ था। जिसमें 20 लोगों की मौत हो गई थी। 8 मृतक हरदा जिले के हंडिया और 10 देवास के संदलपुर गांव के थे। हादसे में जान गंवाने वाले देवास जिले के 9 मजदूरों के शव पहले उनके पैतृक गांव संदलपुर और ठेकेदार का शव खातेगांव पहुंचाया गया। अंतिम दर्शन के बाद सभी के शव नेमावर घाट लाए गए। जबकि, हरदा के हंडिया निवासी श्रमिकों के शव गुजरात से सीधे नेमावर घाट लाए गए। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में सभी को एक साथ मुखाग्नि दी गई। बनासकांठा के नजदीक डीसा में मंगलवार सुबह 8 बजे पटाखा फैक्ट्री में बॉयलर फट गया था। धमाका इतना भीषण था कि कई मजदूरों के शरीर के अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए। फैक्ट्री के पीछे खेत में भी कुछ मानव अंग मिले हैं। हादसे में हरदा के हंडिया के 8 और देवास के संदलपुर के 9 मजदूरों की मौत हो गई। वहीं, खातेगांव के ठेकेदार की भी जान चली गई थी। 8 मजदूरों का इलाज चल रहा है। इनमें 3 की हालत गंभीर है। SP गेहलोत-पीड़ित परिवारों का किया हर संभव सहयोग देवास SP पुनीत गेहलोत ने कहा, घटना के बाद से पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मृतकों के परिजनों से लगातार संपर्क में हैं। घटनास्थल से सभी मृतकों के शव नेमावर घाट लाए जा रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के माध्यम से हर संभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन ने करवाया अंतिम संस्कार ब्लास्ट में जान गंवाने वाले 18 लोगों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। नर्मदा घाट (नेमावर) पर शवों को मुखाग्नि दी गई। देवास के 9 मजदूरों के शव पहले उनके पैतृक गांव संदलपुर पहुंचे। ठेकेदार का शव खातेगांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के बाद सभी शवों को नेमावर घाट लाया गया। वहीं, हरदा के हंडिया के लोगों के शव गुजरात से सीधे नेमावर घाट लाए गए। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पूरे इलाके में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों की आंखें नम हैं। एम्बुलेंस के जरिए एमपी लाए गए सभी शव शवों को लेने पुलिस-प्रशासन टीम के साथ मंत्री नागर सिंह गुजरात गए थे। बुधवार सुबह देवास के 10 मजदूरों के शव उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किए गए। बाकी शव पोस्टमॉर्टम के बाद भिजवाए गए। खातेगांव और संदलपुर के लिए गुजरात से आ रहीं सभी एम्बुलेंस और उनके साथ चल रहे गुजरात प्रशासन की ओर से अश्विन सिंह राठौर, नायब तहसीलदार और उनकी टीम शाम 6 बजे दाहोद से निकलने की तैयारी में थी। इसी बीच एक एम्बुलेंस में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद एम्बुलेंस बदली गई और शवों को रवाना किया गया। देवास जिले में एक साथ इतने शवों को आइस बॉक्स में रखने की सुविधा नहीं है। इसलिए सभी शवों को इंदौर एमवाय अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा गया। गुरुवार सुबह इंदौर से शवों को संदलपुर ले जाया। परिजन ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शवों को नेमावर घाट भेजा गया। वहीं, हरदा के हंडिया के परिवार के शवों को इंदौर से सीधे नेमावार घाट लाया गया। परिजन ने एम्बुलेंस में ही आखिरी शवों को देखा। हरदा जिले के हंडिया निवासी मृतक       गुड्डी बाई नायक पति भगवान सिंह, 30 वर्ष     विजय नायक पिता भगवान सिंह, 17 वर्ष     अजय नायक पिता भगवान सिंह, 16 वर्ष     कृष्णा नायक पिता भगवान सिंह, 12 वर्ष     विष्णु नायक पिता सत्यनारायण सिंह नायक​, 18 वर्ष     सुरेश पिता अमर सिंह नायक, 25 वर्ष     बबिता नायक पति संतोष नायक, 30 वर्ष     धनराज बैगा, 18 वर्ष  देवास जिले के संदलपुर गांव निवासी मृतक     लखन (24) पिता गंगाराम भोपा     सुनीता (20)​ पति लखन भोपा     केशरबाई (50)​पत्नी गंगाराम भोपा     राधा (11)​पिता गंगाराम भोपा     रुकमा (8)​पिता गंगाराम भोपा अभिषेक (5)​ पिता गंगाराम भोपा     राकेश (30)​ पिता बाबूलाल भोपा     लाली (25)​ पत्नी राकेश भोपा     किरण (5)​पिता राकेश भोपा गुजरात फैक्ट्री ब्लास्ट में घायल     राजेश नायक (22) पिता सत्यनारायण सिंह     बिट्टू नायक (14) पिता सत्यनारायण सिंह      विजय काजवे (23) पिता रामदीन काजवे मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता पटाखा फैक्ट्री संदलपुर का पूरा परिवार खत्म हो गया है। मृतकों में मां और बेटों सहित 5-8 साल के बच्चे भी शामिल हैं। चाचा-भतीजे ने भी इस हादसे में जान गंवाई है। मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार ने मृतकों के परिजन को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार के आर्थिक सहायता की घोषणा की है। हरदा विधायक डॉ. आरके दोगने ने विधायक निधि से 20-20 हजार रुपए देंगे। गुजरात सरकार ने 4-4 लाख रुपए सहायता राशि देगी।

राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ ऐलान से शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल को कई देशों पर ताबड़तोड़ टैरिफ लगाने का ऐलान कर दुनियाभर में खलबली मचा दी. भारत और चीन समेत कई देशों पर रियायती रेसिप्रोकल टैरिफ (Discounted Reciprocal Tariff) लगाया गया है. अब भारत की ओर से ट्रंप के इस टैक्स पर प्रतिक्रिया सामने आई है. भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 27 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण किया जा रहा है. वाणिज्य मंत्रालय इसका विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि अमेरिका में सभी तरह के इंपोर्ट पर सार्वभौमिक 10 फीसदी टैरिफ पांच अप्रैल से लागू होगा जबकि बाकी 16 फीसदी टैरिफ 10 अप्रैल से प्रभावी होगा. वाणिज्य मंत्रालय इन टैरिफ के प्रभावों का विश्लेषण कर रहा है. उन्होंने बताया कि इसमें एक प्रावधान है कि अगर कोई देश टैरिफ से जुड़ी हुई चिंताओं को अमेरिका के समक्ष रखता है तो ट्रंप प्रशासन उस देश पर टैरिफ की दर घटाने पर विचार कर सकता है. ट्रंप ने इस टैरिफ को रियायती बताकर बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं. भारत पर उसके 52 फीसदी की जगह 27 फीसदी टैरिफ लगाया गया है. इससे ट्रंप ने भारत के साथ बातचीत की संभावना को खुला रखा है. दोनों देश लगातार एक दूसरे के संपर्क में हैं. ट्रंप का टैरिफ भारत के लिए नहीं है झटका भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहा है. दोनों देशों का लक्ष्य इस साल सितंबर-अक्तूबर तक इस समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने का है. अधिकारी ने बताया कि ट्रंप का भारत पर यह टैरिफ झटका नहीं है बल्कि इसका मिला-जुला असर हो सकता है. बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 27 फीसदी डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ट्रंप ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल में ही अमेरिका आए थे. वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. लेकिन इस दौरे के दौरान मैंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं. भारत हमेशा अमेरिका से 52 फीसदी टैरिफ वसूलता है. बता दें कि व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में मीडिया को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो अप्रैल को अमेरिका के लिए मुक्ति दिवस बताया. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस लिबरेशन डे की लंबे समय से जरूरत थी. अब से दो अप्रैल को अमेरिकी इंडस्ट्री के पुनर्जन्म के तौर पर याद किया जाएगा. इसी दिन को हम अमेरिका को फिर से संपन्न राष्ट्र बनाने के तौर पर याद रखेंगे. हम अमेरिका को फिर से संपन्न बनाएंगे. सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश ट्रंप के नए टैरिफ ऐलान के बाद दुनियाभर के बाजारों में हड़कंप मच गया है. एशियाई बाजारों से लेकर अमेरिकी स्टॉक मार्केट तक, हर जगह गिरावट देखने को मिल रही है. इस फैसले का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी ने भारी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों को झटका आजा यानी गुरुवार को बाजार खुलते ही भारतीय स्टॉक मार्केट में बिकवाली हावी हो गई. सेंसेक्स 805.58 अंकों की गिरावट के साथ 75,811.86 पर आ गया. निफ्टी 50 भी 182.05 अंक लुढ़ककर 23,150.30 पर कारोबार कर रहा है. हालांकि, शुरुआती कारोबार में बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिली. सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स 345.21 अंक (0.45%) की गिरावट के साथ 76,272.23 और निफ्टी 77.70 अंक (0.33%) की गिरावट के साथ 23,254.65 पर ट्रेड कर रहा था. मिडकैप-स्मॉलकैप में हल्की बढ़त, लार्जकैप शेयरों में दबाव शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहे थे, जबकि लार्जकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 125 अंकों (0.24%) की बढ़त के साथ 52,183 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 121 अंकों (0.75%) की तेजी के साथ 16,283 पर कारोबार कर रहा था. फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में तेजी सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, एफएमसीजी, मेटल और मीडिया सेक्टर में गिरावट देखी गई. वहीं, फार्मा, रियल्टी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली. सेंसेक्स के टॉप लूजर्स और गेनर्स इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, टेक महिंद्रा, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल, रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी और कोटक महिंद्रा बैंक टॉप लूजर स्टॉक्स रहे. वहीं, सन फार्मा, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाइटन और अल्ट्राटेक सीमेंट टॉप गेनर के रूप में उभरे. अमेरिकी और एशियाई बाजार भी धड़ाम ट्रंप के ऐलान के बाद अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट आई.डाउ जोन्स 2.4% गिरा,नैस्डैक 4.2% टूटा,एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 3.5% की गिरावट,टोक्यो के निक्केई 225 इंडेक्स में 2.9% की गिरावट,कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.9% टूटा और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 1.8% गिरकर बंद हुआ. क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है. ट्रंप ने करीब 180 देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का ऐलान किया गया है. भारत पर 26 प्रतिशत, चीन पर 34 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत और यूरोपीय यूनियन पर 20 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है. इसके तहत,जापान पर 24%,दक्षिण कोरिया पर 25% टैरिफ लगाए गए हैं. इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया है. भारतीय कंपनियों को भी इस फैसले से झटका लग सकता है, खासकर वे जो एक्सपोर्ट और टेक सेक्टर से जुड़ी हैं. ट्रंप के इस फैसले से रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश प्रभावित होगा. रेसिप्रोकल टैरिफ और न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ का ऐलान: इसके अलावा, ट्रंप ने 10% न्यूनतम बेसलाइन टैरिफ की भी घोषणा की है, जो उन देशों पर लागू होगा जो अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाते हैं। ट्रंप का कहना है कि यह नीति उन देशों पर दबाव बनाने के लिए है, जो अमेरिकी निर्यात के खिलाफ ऊंचे शुल्क लगाते हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार अपनी नीतियों से अमेरिका को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं, और इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ऑटोमोबाइल्स पर भारी टैरिफ: ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें उन्होंने विदेशी … Read more

उद्योगपतियों को दिए गए इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड, मुख्यमंत्री का उद्योग जगत ने किया अभिनंदन

प्रधानमंत्री मोदी के विकास के मॉडल पर हो रहा मध्यप्रदेश में क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपति समाज और सरकार दोनों के सहयोगी, सरकार उन्हें देगी पूरा प्रोत्साहन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए प्रदेश सरकार ने दी 5 हजार 260 करोड़ की सब्सिडी राशि गत वर्ष का कोई भुगतान लंबित नहीं, वृहद और छोटे उद्योग सभी हुए लाभान्वित उद्योगपतियों को दिए गए इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड, मुख्यमंत्री का उद्योग जगत ने किया अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उद्योगों और अन्य क्षेत्रों में तीव्र विकास हो रहा है। उद्योगपति सरकारों और समाज के लिए सहयोगी हैं। वे लाखों परिवारों को रोटी, कपड़ा और मकान उपलब्ध करवाते हैं। उद्योगपतियों के योगदान को सम्मान देने के लिए समाचार संस्थान ने इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान कर सराहनीय कार्य किया है। अवार्ड सेरेमनी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत द्वारा सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में विकास के विक्रेंद्रीकृत मॉडल को अपनाते हुए विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे परिणाम लाने के लिये बेहतर वातावरण निर्मित हुआ है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में उद्योगों की स्थापना और इनके माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगपति आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने में आज पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को विभिन्न राष्ट्रों से जो सम्मान मिल रहा है, वह अद्वितीय हैं। रूस और यूक्रेन भले ही परस्पर लड़ते रहे, लेकिन दोनों देशों ने प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह को मानते हुए भारत और अन्य देशों के विद्यार्थियों को संकट से निकालने में सहयोग दिया। जीवन मूल्यों के साथ विकास और परमार्थ के कार्यों को पूर्ण प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों से राष्ट्र की प्रगति का कार्य हो रहा है। सरकारों का कार्य सिर्फ कानून व्यवस्था संभालना और बिजली, पानी की व्यवस्था करना नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों के साथ विकास और परमार्थ के कार्यों को प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जीआईएस का आयोजन अत्यंत सफल रहा। जीआईएस से सकारात्मक वातावरण बना। प्रदेश की लगभग 9 करोड़ आबादी की बेहतरी के लिए राज्य सरकार प्रोत्साहनकारी भूमिका का निर्वहन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते साल हमने 5 हजार 260 करोड़ की उद्योग निवेश सब्सिडी राशि पूरी पारदर्शिता के साथ डीबीटी के जरिए निवेशकों के खातों में हस्तांतरित की। अब गत वर्ष का कोई भुगतान लंबित नहीं है। वृहद और छोटे उद्योग सभी लाभान्वित हुए हैं। राज्य सरकार ने वचनबद्धतापूर्वक यह कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जीआईएस सिर्फ एक इवेंट नहीं था, बल्कि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का परिचायक आयोजन भी था। उद्योगपतियों ने किया मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिनंदन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग हितैषी नीतियों को लागू करने, मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के सफलतम आयोजन के माध्यम से 30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर क्रियान्वयन और नवाचारों से सुशासन आधारित व्यवस्था को मजबूत बनाने पर उद्योग जगत की ओर से अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेन्द्र कुमार सिंह और आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में सीओओ सुमित मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नेतृत्व ऐसा है जो असंभव कार्यों को संभव बनाता है। प्रदेश में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लागू कर उद्योगपतियों को आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश में सहयोगी बनाया गया है। इन्हें मिले इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय स्टेट बैंक के चीफ जनरल मैनेजर चंद्रशेखर शर्मा को सम्मानित करने के अलावा जिन उद्योगपतियों को इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किए उनमें एचईजी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष गुलाटी, आयनेक्स के अनिल खेमसारा, दावत राइस के राजेंद्र, प्रिज्म सीमेंट के राजेंद्र संचेती, बालाजी पैकेजिंग ग्रुप के विकास मूंदड़ा, महाकौशल शुगर एंड पॉवर इंडस्ट्री के नवाब राजा, उदीप सोशल वेलफेयर ग्रुप की सुपूनम श्रोती, गोयल पैंट के श्याम वैभव गोयल, आईसीसी इंफ्रा के आरिफ जाफरा मंसूरी, आनंदन इंडस्ट्री के अशोक आनंद, एमके इंडस्ट्रीज के मनोज जैन, समरकूल इलेक्ट्रिकल्स एंड होम अप्लायंस के आशुतोष तनुज गुप्ता, आरआरजी इलेक्ट्रिकल के रंगाराव, भंवरदीप कॉपर के आदित्य आकाश बाफना, जेके स्टोन के जितेन्द्र जैन, सुआभा जैन, बालाजी कार्पोरेशन के त्रिलोकी अग्रवाल, स्कायलार्क प्रोटीन्स के जितेंद्र, नरेंद्र ट्रेडिंग कंपनी के प्रमोद वर्मा, अलीशा फूड्स लिमिटेड के एहसान, तिरूपति इंफ्रा के दिलीप परयानी, ओटा इलेक्ट्रिकल सर्जिकल इक्विपमेंट के भूपेंद्र, संजय प्रसाद अग्रवाल, पुनीत खुराना, संदीप पाटीदार, सुनील लड्ढा, विशाल अनिल जोशी, मनीष शाह शामिल हैं।  

GT ने 18वें ओवर में ही आरसीबी के 170 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया, सुदर्शन का जलवा

बेंगलुरु आईपीएल 2025 के 14वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. गुजरात टाइटन्स (GT) की टीम ने 18वें ओवर में ही आरसीबी के 170 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया. आरसीबी अपने घरेलू मैदान पर इस सीजन का पहला मैच खेल रही थी. जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा.  गुजरात की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी. आरसीबी की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट खोकर 169 रन बनाए थे. 170 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात की टीम ने 17.5 ओवर में ही इसे चेज कर लिया. आरसीबी बिना बदलाव के मैदान पर उतरी थी. जबकि गुजरात में एक बदलाव हुआ है. कगिसो रबाडा बाहर हुए और उनकी जगह अरशद खान को जगह दी गई थी.   ऐसे रही आरसीबी की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत बेहद खराब रही. दूसरे ही ओवर में आरसीबी को विराट कोहली के रूप में पहला झटका लगा.कोहली केवल 7 रन बनाकर अरशद खान का शिकार हुए. इसके बाद तीसरे ही ओवर में देवदत्त पडिक्कल को सिराज ने बोल्ड किया. फिर 5वें ओवर में खतरनाक दिख रहे फिल सॉल्ट को सिराज ने आउट किया. 7वें ओवर में कप्तान रजत पाटीदार को ईशांत ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद जितेश शर्मा ने मोर्चा संभाला और 33 रनों की पारी खेली. लेकिन वो भी 13वें ओवर में आउट हो गए. लेकिन इसके बाद लिविंगस्टन ने तूफानी पारी खेली और अर्धशतक जड़ा. वहीं, टिम डेविड ने भी शानदार बल्लेबाजी की. इसके दम पर आरसीबी ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 170 रन बनाए. ऐसी रही गुजरात की बल्लेबाजी 170 रनों के जवाब में उतरी गुजरात की शुरुआत काफी शानदार रही. गिल और साई सुदर्शन ने ठोस शुरुआत दिलाई. हालांकि, गिल 14 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन इसके बाद साई सुदर्शन और जोश बटलर ने मोर्चा संभाला. साई सुदर्शन 49 रन बनाकर आउट हुए लेकिन उन्होंने मोमेंटम गुजरात की ओर शिफ्ट कर दिया. इसके बाद बटलर ने शानदार फिफ्टी जड़ी. बटलर ने नाबाद 73 रनों की पारी खेली और 18वें ओवर में ही गुजरात ने ये मैच जीत लिया. आईपीएल 2025 के 14वें मैच में गुजरात टाइटन्स की टीम ने  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से हराया. इस मैच के हीरो साई सुदर्शन और जोश बटलर रहे. जोश बटलर नाबाद रहे और उन्होंने 73 रनों की पारी खेली. लेकिन साई सुदर्शन ने गुजरात का मोमेंट सेट किया और 49 रनों की पारी खेली. लेकिन साई सुदर्शन आईपीएल में लगातार अपना जलवा बिखेर रहे हैं. पिछली 7 पारियों पर डालें नजर साई सुदर्शन की पिछली सात आईपीएल पारियों पर अगर नजर डालेंगे तो उन्होंने इसमें एक शतक जड़ा और 4 फिफ्टी लगाई है. जबकि एक बार वो फिफ्टी से चूके हैं. यानी सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब साई 10 से कम स्कोर पर आउट हुए हैं. 7 पारियों में साई सुदर्शन ने 444 रन बनाए हैं. यानी साई ने 8.5 करोड़ की कीमत में आईपीएल में वो कमाल किया है, जो मोटी-मोटी रकम में भी बड़े क्रिकेट के सितारे नहीं कर सके हैं. यहां देखें पिछली 7 पारियां 65(39) 84*(49) 6(14) 103(51) 74(41) 63(41) 49(36) इस सीजन  दूसरे नंबर पर साई सुदर्शन इस सीजन आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की बात करें तो साई सुदर्शन दूसरे नंबर पर हैं. पहले नंबर पर लखनऊ के निकोलस पूरन हैं. जिन्होंने 3 मैच में अबतक 189 रन बनाए हैं. जिसमें दो फिफ्टी जड़ी है. वहीं साई सुदर्शन ने 3 मैच में 186 रन बनाए हैं. तीसरे नंबर पर जोश बटलर हैं जिन्होंने 166 रन बनाए हैं.

लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल हुआ पास, पक्ष में 288; विरोध में 232 वोट पड़े

नई दिल्ली बुधवार को देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने लोकसभा में सफलतापूर्वक वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को पारित करा लिया। आज इसे राज्यसभा में पारित कराने के लिए पेश किया जाएगा। 543 सदस्यों वाले लोकसभा में बिल के पक्ष में 288 मत पड़े। वहीं, इसके विरोध में 233 वोट डाले गए। इसके बाद सदन ने दोनों ही बिल को मंजूरी दे दी। राज्यसभा की जहां तक बात है तो यहां कुल 236 सदस्य हैं। बिल को पास कराने के लिए डाले गए मतों में से सर्वाधिक मतों की आवश्यकता होगी। इन दिनों भाजपा यहां सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास कुल 98 सांसद हैं। एनडीए की जहां तक बात करें तो उसके पास 125 सांसद हैं। भाजपा के अलावा जेडीयू के 4, अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के 3 और टीडीपी के 2 सांसद शामिल हैं। नंबर गेम को देखते हुए एनडीए को इस सदन में भी इस बहुचर्चित संशोधन विधेयक को पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। ऐसा इसलिए भी क्योंकि एनडीए ने लोकसभा में एकजुटता दिखाया है। राज्यसभा में क्या है नंबर गेम? संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की बात करें तो यहां सदन की मौजदा स्ट्रेंथ 236 सदस्यों की है. इसमें बीजेपी का संख्याबल 98 है. गठबंधन के लिहाज से देखें तो एनडीए के सदस्यों की संख्या 115 के करीब है. छह मनोनीत सदस्यों को भी जोड़ लें जो आमतौर पर सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं तो नंबरगेम में एनडीए 121 तक पहुंच जा रहा है जो विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी 119 से दो अधिक है. कांग्रेस के 27 और इंडिया ब्लॉक के अन्य घटक दलों के 58 सदस्य राज्यसभा में हैं. कुल मिलाकर विपक्ष के पास 85 सांसद हैं. वाईएसआर कांग्रेस के नौ, बीजेडी के सात और एआईएडीएमके के चार सदस्य राज्यसभा में हैं. छोटे दलों और निर्दलीय मिलाकर तीन सदस्य हैं जो न तो सत्ताधारी गठबंधन में हैं और ना ही विपक्षी गठबंधन में. किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को ये बिल लोकसभा में पेश किया था, जिसे विपक्ष के हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था. जगदंबिका पाल की अगुवाई वाली जेपीसी की रिपोर्ट के बाद इससे संबंधित संशोधित बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी. सत्तापक्ष का कहना है कि वक्फ संशोधन बिल के माध्यम से इसकी संपत्तियों से संबंधित विवादों के निपटारे का अधिकार मिलेगा. वक्फ की संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मदद मिल सकेगी. बता दें कि इससे पहले वक्फ संशोधन बिल लोकसभा से पारित हो गया है. वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में वोटिंग हुई, जिसमें 464 कुल वोटों में से 288 पक्ष में और 232 विरोध में रहे. लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर 12 घंटे से ज्यादा समय तक बहस चली. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विपक्ष के सांसदों ने अपने-अपने पक्ष रखे. अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा और फिर राष्ट्रपति के पास अप्रूवल के लिए भेजा जाएगा. इससे पहलो केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सरकार के इस कदम को मुस्लिम विरोधी बताने के कई विपक्षी सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस विधेयक को मुसलमानों को बांटने वाला बताया जा रहा है, जबकि सरकार इसके जरिए शिया, सुन्नी समेत समुदाय के सभी वर्गों को एक साथ ला रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार तो देश में सबसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय पारसी को भी बचाने के लिए प्रयास कर रही है। रिजिजू ने कहा, ‘‘विपक्ष सरकार की आलोचना कर सकता है, लेकिन यह कहना कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है, सही नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं खुद अल्पसंख्यक हूं और कह सकता हूं कि भारत से ज्यादा अल्पसंख्यक कहीं सुरक्षित नहीं हैं। हर अल्पसंख्यक समुदाय शान से इस देश में जीवन जीता है।’’ उन्होंने विपक्षी सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ‘‘सदन में इस तरह देश को बदनाम करना….आने वाली पीढ़ियां आपको माफ नहीं करेंगी।’ केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विधेयक के पारित होने के बाद देश के करोड़ों मुसलमान प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देंगे। रिजिजू के जवाब के बाद सदन ने अनेक विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए 232 के मुकाबले 288 मतों से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को पारित किया। सदन ने मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक, 2024 को भी ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल भाजपा के सहयोगी दलों जदयू, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जनसेना और जनता दल (सेक्यूलर) ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया। झारखंड में भाजपा की सहयोगी आजसू ने भी विधेयक का समर्थन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक एवं अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक को असंवैधानिक और मुसलमानों की जमीन हड़पने वाला बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया। ऐसे में ये भी सवाल हैं कि क्या एक बिल से मोदी सरकार ने देश में धर्मनिरपेक्षता की राजनीति का गणित बदल दिया? क्या एक बिल से मोदी सरकार ने दिखाया कि मुस्लिमों को डराकर वोट की सियासत नहीं चलेगी? क्या एक बिल ने बता दिया कि मुस्लिमों के हित में बदलाव का मतलब सेक्युरिज्म का विरोध नहीं होता? क्या सरकार ने दिखा दिया कि सीटें घटने से संसद में आक्रामक फैसले लेने की गति नहीं घटी है? क्या वक्फ बिल पर मुहर के साथ अब देश में सियासत की नई सेक्युलरिज्म देखी जाएगी? फैसला लेने में पीएम मोदी का कोई सानी नहीं विपक्ष को ये लगता रहा होगा कि बिहार में नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के सांसदों के भरोसे चलती सरकार वक्फ पर फैसला लेने में हिचकिचाएगी, लेकिन 240 सीट के साथ भी संसद में बीजेपी वैसी ही दिखी जैसे 303 सीट के साथ रही थी. 2019 में जब मोदी सरकार दूसरी बार सत्ता में आई तो 6 महीने के भीतर सरकार ने तीन तलाक, आर्टिकल 370 से आजादी और CAA कानून तीनों को पास करा दिया. तब बीजेपी के पास अपने दम पर 303 सीट का बहुमत था. अबकी बार जब … Read more

घंटों रील्स देखने की है लत, सेहत के लिए कैसे बन रही है खतरनाक, डॉक्टर ने दी अंधेपन की चेतावनी

नई दिल्ली मानसिक स्वास्थ्य पर रील के प्रभाव के बारे में चिंताओं के बाद, डॉक्टर अब एक नए बढ़ते संकट के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, विशेष रूप से इंस्टाग्राम, टिकटॉक, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रील देखने से सभी आयु समूहों में, विशेष रूप से बच्चों और युवा वयस्कों में आंखों से जुड़ी बीमारियों की वृद्धि हो रही है। यह बात एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी और ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी की यशोभूमि – इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, द्वारका, नई दिल्ली में चल रही संयुक्त बैठक के दौरान प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई है। ड्राई आई सिंड्रोम क खतरा बढ़ा एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के कांग्रेस अध्यक्ष डॉक्टर ललित वर्मा ने अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर के कारण होने वाली ‘डिजिटल आई स्ट्रेन की महामारी’ के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा, “हम ड्राई आई सिंड्रोम, मायोपिया प्रोग्रेस, आई स्ट्रेन और यहां तक ​​कि शुरुआती दौर में ही भेंगापन के मामलों में तेज वृद्धि देख रहे हैं, खासकर उन बच्चों में जो घंटों रील देखते रहते हैं।” “हाल ही में एक छात्र लगातार आंखों में जलन और धुंधली दृष्टि की शिकायत लेकर हमारे पास आया था। जांच के बाद, हमने पाया कि घर पर लंबे समय तक मोबाइल पर रील देखने के कारण उसकी आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं आ रहे थे। उसे तुरंत आई ड्रॉप दी गई और 20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह दी गई। इस नियम में हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर किसी चीज को देखना होता है। आयोजन समिति के अध्यक्ष और अखिल भारतीय नेत्र रोग सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हरबंश लाल ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझाया, “छोटी, आकर्षक रीलें लंबे समय तक ध्यान खींचने और बनाए रखने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। हालांकि, लगातार स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से पलकें झपकने की दर 50% कम हो जाती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम और एकोमोडेशन स्पाज़्म (निकट और दूर की वस्तुओं के बीच फ़ोकस बदलने में कठिनाई) की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर यह आदत अनियंत्रित रूप से जारी रहती है, तो इससे दीर्घकालिक दृष्टि संबंधी समस्याएं और यहां तक ​​कि स्थायी रूप से आंखों में तनाव हो सकता है। डॉ. हरबंश लाल ने आगे कहा कि “जो बच्चे रोजाना घंटों तक रील से चिपके रहते हैं, उनमें शुरुआती मायोपिया विकसित होने का जोखिम होता है, जो पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहा है। वयस्कों को भी नीली रोशनी के संपर्क में आने से अक्सर सिरदर्द, माइग्रेन और नींद संबंधी विकार का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, हाल के अध्ययनों के अनुसार 2050 तक दुनिया की 50% से ज़्यादा आबादी मायोपिक होगी, जो अंधेपन का सबसे आम कारण है। अब स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ हम 30 साल की उम्र तक चश्मे का नंबर में बदलाव देख रहे हैं, जो कुछ दशक पहले 21 साल था। अध्ययनों से पता चलता है कि बढ़ती संख्या में लोग, विशेष रूप से छात्र और कामकाजी पेशेवर, उच्च गति, दृष्टि उत्तेजक सामग्री के लंबे समय तक संपर्क के कारण डिजिटल आंखों के तनाव, स्क्विंटिंग और खराब दृष्टि से जूझ रहे हैं। डॉक्टर लगातार रील से जुड़े सामाजिक अलगाव, मानसिक थकान और संज्ञानात्मक अधिभार की एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति को भी देखते हैं। AIOS के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. समर बसाक ने अत्यधिक स्क्रीन समय के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान पर प्रकाश डाला: “हम एक चिंताजनक पैटर्न देख रहे हैं जहां लोग रील में इतने लीन हो जाते हैं कि वे वास्तविक दुनिया की बातचीत को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे पारिवारिक रिश्ते खराब हो जाते हैं और शिक्षा और काम पर ध्यान कम हो जाता है। AIOS के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ और आने वाले अध्यक्ष डॉ. पार्थ बिस्वास ने कहा, “कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था, तेजी से दृश्य परिवर्तन और लंबे समय तक निकट-फोकस गतिविधि का संयोजन आंखों को अत्यधिक उत्तेजित कर रहा है, जिससे एक ऐसी दिक्कत हो रही है जिसे हम ‘रील विजन सिंड्रोम’ कहते हैं। समय आ गया है कि हम इसे गंभीरता से लें, इससे पहले कि यह एक पूर्ण विकसित सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन जाए।” अत्यधिक रील देखने के प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए, नेत्र रोग विशेषज्ञ 20-20-20 नियम का पालन करने की सलाह देते हैं, जो कहता है कि हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर देखें। पलक झपकने की दर बढ़ाएं, स्क्रीन देखते समय अधिक बार पलकें झपकाने का सचेत प्रयास करें, स्क्रीन का समय कम करें और डिजिटल डिटॉक्स लें क्योंकि नियमित स्क्रीन ब्रेक निर्भरता को कम करने और दीर्घकालिक नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है। अनियमित रील खपत के कारण नेत्र विकारों में वृद्धि के साथ, स्वास्थ्य विशेषज्ञ माता-पिता, शिक्षकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से तत्काल निवारक उपाय करने का आग्रह करते हैं। डॉ लाल चेतावनी देते हैं, “रील छोटी हो सकती है, लेकिन आंखों के स्वास्थ्य पर उनका प्रभाव जीवन भर रह सकता है।” “यह समय है कि हम दृष्टि खोने से पहले नियंत्रण करें।

मध्य प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक चलेंगी बसें, पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन

भोपाल  एमपी में 20 साल बाद आखिरकार सरकारी लोक परिवहन सेवा को जमीन पर उतारने का निर्णय हो ही गया। 6 से 8 महीने में यह सेवा शुरू हो जाएगी। मॉडल बदला हुआ होगा। बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री रहते समय राज्य परिवहन निगम की सरकारी बसें दौड़ती थी। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी ऑपरेटरों की बसें दौड़ेंगी, पर इन पर पूरा नियंत्रण सरकार का होगा।ये बसें प्रदेश में शहर से लेकर गांव तक पीपीपी मॉडल पर चलाई जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। लोक परिवहन सेवा फिर शुरू करने का निर्णय जनता के लिए पत्रिका महाअभियान की बड़ी जीत है। पत्रिका ने लोक परिवहन सेवा नहीं होने से आमजन को नुकसान का मामला प्रमुखता से उठाया था। बनाई जाएगी योजना होल्डिंग कंपनी रूट व बस चलाने के लिए सर्वे, योजना बनाएगी। इसके साथ ऑपरेटर्स को परमिट दिलाना, आइटी प्लेटफॉर्म, कंट्रोल कमांड सेंटर तैयार करना, ई-टिकट, मोबाइल एप से बसों की ट्रेकिंग, कैशलेस, टेपऑन-टेपऑफ सुविधा देना, ऐप से पैसेंजर इन्फोर्मेशन सिस्टम विकसित कराना भी होल्डिंग कंपनी का कार्य होगा। अनुबंधित ऑपरेटर के लिए एप, वीडियो ऑडिट सॉफ्टवेयर, फील्ड ऑडिट एप, एमआईएस व डैशबोर्ड की सुविधा देना, ऑपरेटर स्टॉफ का प्रशिक्षण दिलवाना। इसके साथ वे राज्य एवं क्षेत्रीय सहायक कंपनी के लिए कंट्रोल एवं कमांड सेंटर सॉफ्टवेयर, बस, ऑटो, टैक्सी, मेट्रो के लिए बुकिंग प्लेटफॉर्म की सुविधा ऑनलाइन यात्री बुकिंग सुविधा, यात्री हेल्प डेस्क, कार्यालयों में ऑपरेशन डेशबोर्ड, स्टाफ की ट्रेनिंग की सुविधा देंगी। 101.20 करोड़ दिए, कंपनी गठन को मंजूरी 8 कंपनियां मिलकर सेवा शुरू करेंगी। एक होल्डिंग और 7 संभागीय कंपनियों होंगी। सेवा शुरू करने को 101.20 करोड़ रुपए और राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी गठन की स्वीकृति दी। सार्वजनिक परिवहन के लिए 20 शहरों में पंजीकृत 16 कंपनियां कार्यरत हैं। इन्हें 7 संभागीय कंपनियों में मर्ज करने और इनमें राज्य स्तरीय कंपनी बनाने की मंजूरी दी। रीवा एवं ग्वालियर की वर्तमान कंपनी बंद कर नई बनाने, संभागीय मुख्यालयों में सिटी बस ट्रांसपोर्ट कंपनी में संशोधन और जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठन के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी। मोटरयान नियम 1994 में भी संशोधन और नए प्रावधान की स्वीकृति दी। माल ढोने की सुविधा भी मिलेगी सरकार बसें नहीं खरीदेगी: नई लोक परिवहन सेवा के लिए सरकार एक भी नई बसें नहीं खरीदेंगी। पीपीपी मॉडल: हर स्तर पर लागू होगा स्तर पर पीपीपी मॉडल होगा, जो समय पर बस चलाने, उन्हें डिपो की सुविधा देने, ऑनलाइन व्यवस्था में भ्रष्टाचार व गड़बड़ी रोकने और टिकटिंग व्यवस्था जैसे कामों पर लागू होगा। किराए पर नियंत्रणः निजी ऑपरेटर्स की बसों की तुलना में कम किराया लगेगा। यह सरकार तय करेगी। माल लेकर चल सकेंगे यात्री: बसों का एक हिस्सा यात्रियों के माल अर्थात सामग्री और डाक परिवहन के लिए आरक्षित रहेगा। ताकि किसी रूट पर यात्री कम मिले तो माल परिवहन कर उसकी भरपाई की जा सके। 5.बस चलाने वाले टिकट नहीं काटेंगे: बस ऑपरेटर टिकट नहीं काट सकेंगे, इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था होगी। इसके लिए अलग कंपनियों से अनुबंध किया जाएगा। इसके लिए अलग से डैशबोर्ड बनाया जाएगा। 2005 में सड़क परिवहन निगम में की गई थी तालाबंदी गौरतलब है कि भाजपा की बाबूलाल गौर सरकार ने ही वर्ष 2005 में साढ़े चार सौ करोड़ के घाटे में चल रहे राज्य सड़क परिवहन निगम में तालाबंदी की थी, तब से प्रदेश में परिवहन सेवाएं ठप हैं। केवल मुनाफे के मार्ग पर ही निजी बसें चलाई जा रही हैं। नई सेवाएं पहले आदिवासी अंचलों से आरंभ होगी। इस बार मॉडल बदला है परिवहन सेवा को पिछली सरकारों ने बंद कर दिया था, हमने परिवहन नीति बनाई है और इस बार मॉडल बदला है। हम पीपीपी मॉडल पर बसें चलवाएंगे। इसके लिए जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। इसके समन्वयक कलेक्टर रहेंगे। समिति में जिले के सांसद, समस्त विधायकगण, महापौर, अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहेंगे। यह समिति बसों के संचालन की मॉनिटरिंग, संचालन, साधारण एवं ग्रामीण मार्गों पर बस स्टाप, चार्जिंग स्टेशन के निर्माण संबंधी सुझाव के साथ जिले के बस ऑपरेटर्स के मध्य आवश्यक समन्वय का कार्य करेगी। बस का उपयोग कार्गो सेवा के लिए भी किया जाएगा, नीति में इसका प्रविधान किया जाएगा। राज्य परिवहन निगम की संपत्तियां कंपनी के आधिपत्य में रहेगी। यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए एप और कंपनी की मॉनीटरिंग के लिए होगा डैशबोर्ड बसों पर प्रभावी नियंत्रण सरकार का होगा। यात्रियों एवं बस ऑपरेटर्स के लिए एप और कंपनी की मॉनीटरिंग के लिए एक डैशबोर्ड भी होगा। कंपनी के कार्यालयों में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर बनाए जाएंगे। यात्रियों को मोबाइल एप से ई-टिकिट, सुविधा मिलेगी। इससे बसों की ट्रेकिंग, आक्युपेंसी तथा यात्रा प्लानिंग की जा सकेगी। पैसेंजर इन्फोर्मेशन सिस्टम की स्थापना भी बस स्टैंड, यात्री बसों पर रीयल टाइम बेसिस पर की जा सकती है। यह जानकारी मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे यात्रियों को मोबाइल पर मुहैया कराई जाएगी। यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय होगी मॉनीटरिंग प्रदेश में यात्री बसों के संचालन की त्रि-स्तरीय मॉनीटरिंग की जाएगी। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय स्तर पर एक राज्यस्तरीय होल्डिंग कंपनी गठित की जाएगी। प्रदेश के सात बड़े संभागों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं रीवा) में सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियां भी गठित की जाएगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय यात्री परिवहन समिति गठित भी की जाएंगी। रीवा एवं ग्वालियर के लिए वर्तमान प्रचलित कंपनी को बंद कर नई क्षेत्रीय कंपनी गठित की जाएगी। सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की संपत्ति ट्रांसफर -सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की चल-अचल संपति नई कंपनियों को देंगे। निगम, प्राधिकरण की निधि से तैयार बस टर्मिनल, बस स्टैंड, बस स्टॉप होल्डिंग कंपनी के अधीन होंगे। -मौजूदा सिटी बस कंपनियों के कार्यालय भवन का उपयोग नवीन सहायक कंपनियां करेंगी। -इनके कार्यालय की अचल सपंतियां का मूल्यांकन अलग से होगा, राशि की प्रतिपूर्ति परिवहन विभाग करेगा। -होल्डिंग कंपनी आइटी प्लेटफॉर्म स्थापित कर अधिसूचित रुट अनुसार निजी बस ऑपरेटरों से अनुबंधित करेगा। जिले में बनेगी समिति, कलेक्टर समन्वयक जिला स्तर पर समितियां होंगी, समन्वयक कलेक्टर होंगे। इनमें सांसद, विधायक, महापौर, नगर पालिका, जिपं, नप, जपं के अध्यक्ष, आयुक्त नगर निगम, जिला व जपं सीईओ, नपा … Read more

प्रदेश बनेगा देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब, जबलपुर की चमकी किस्मत, माल की लोडिंग-अनलोडिंग ऑटोमेटेड

 जबलपुर    रिंग रोड़ से शहर की तस्वीर बदल रही है। वर्षों से बड़े ट्रांसपोर्ट नगर की कमी से जूझ रहे जबलपुर में अब अत्याधुनिक लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण होगा। भेड़ाघाट के पास खैरी में 52 हेक्टेयर जमीन पर लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (एनएचएलएमएल) सर्वे पूरा कर चुका है। इसमें लॉजिस्टिक पार्क को रेलवे ट्रेक से जोडऩे एक किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी। रिंग रोड से होकर डुमना एयरपोर्ट के लिए भी सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अब लॉजिस्टिक पार्क की डीपीआर तैयार होना है। इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। माल की लोडिंग-अनलोडिंग ऑटोमेटेड ऑटोमेटेड बनना है लॉजिस्टिक पार्क- लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण ऑटोमेटेड सिस्टम पर आधारित होना है। जिसमें माल की लोडिंग-अनलोडिंग ऑटोमेटेड होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इस व्यवस्था से माल हैंडलिंग की लागत घटेगी और कीमतों में कमी आएगी। इसका सीधा फायदा आमजन को मिलेगा और कारोबारी सस्ते दामों पर सामान उपलब्ध करा सकेंगे। देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब, भोपाल, जबलपुर, इंदौर की चमकी किस्मत ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से मध्यप्रदेश का देश में सबसे बड़ा लॉजिस्टिक हब बनने का रास्ता साफ हो गया है. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जबलपुर, इंदौर, रतलाम और कटनी में बड़े लॉजिस्टिक सेंटर को विकसित किया जाएगा. राजधानी भोपाल में मंडीदीप के पास विश्वस्तरीय सुविधाओं वाला लॉजिस्टिक पार्क जल्द ही आकार लेने जा रहा है. करीबन 34 एकड़ भूमि पर डेवलप होने वाले इस लॉजिस्टिक हब में हर माह करीबन 90 हजार टन माल की लोडिंग हो सकेगी. उधर दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे के पास रतलाम में भी एक बड़ा लॉजिस्टिक हब बनाने की तैयारी की जा रही है. भोपाल के इटायाकलां में मार्च से शुरू होगा काम राजधानी भोपाल से जल्द ही देश के किसी भी कोने में माल को पहुंचाना आसान होगा. भोपाल से सटे मंडीदीप के पास इटायाकलां में जल्द रेलवे द्वारा लॉजिस्टिक पार्क विकसित किया जा रहा है. इसका काम मार्च से शुरू हो जाएगा. इसके लिए रेलवे 98 करोड़ की राशि पहले ही मंजूर कर चुका है. इस लॉजिस्टिक हब की खासियत यह होगी कि यहां से देश के किसी भी कोने में लोड और अनलोड करना आसान हो जाएगा. इस स्थान का चयन भी इसलिए किया गया क्योंकि यह देश के सेंटर में स्थित है. लॉजिस्टिक पार्क बदलेंगे एमपी की तस्वीर मध्यप्रदेश में भौगौलिक स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश में कई स्थानों पर लॉजिस्टिक पार्क विकसित किए जाने की तैयारी है. मध्यप्रदेश के मुंबई दिल्ली एक्सप्रेस वे पर रतलाम के पास भी बड़े लॉजिस्टिक पार्क की तैयारी की जा रही है. इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है. यहां से मुंबई-दिल्ली तक माल पहुंचाने के अलावा गुजरात, राजस्थान सहित दक्षिण के राज्यों तक माल लोडिंग-अनलोडिंग की व्यवस्था आसान होगी. इसी तरह मध्यप्रदेश के जबलपुर, कटनी में भी लॉजिस्टिक पार्क डेवलप किया जाएगा. धार और पीथमपुर के लिए 11 करोड़ का बजट मध्यप्रदेश के धार और पीथमपुर में 255 एकड़ में सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक पार्क बनाया जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यह प्रदेश का पहला मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क होगा. राज्य सरकार ने इसे 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए 1100 करोड़ का बजट रखा गया है. इसे एनएचएआई के साथ मिलकर बनाया जा रहा है. इससे आसपास के 2 हजार उद्योगों को फायदा मिलेगा. उज्जैन में भी एक लॉजिस्टिक पार्क बनाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए राज्य सरकार ने सर्वे का काम शुरू कर दिया है. राज्य सरकार दे रही बड़ी रियायत उधर राज्य सरकार ने लॉजिस्टिक पॉलिसी में निवेशकों के लिए बड़ी रियायतें दी हैं. वहीं, निवेशकों ने भी मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक सेक्टर में निवेश को लेकर गहरी रूचि दिखाई है. वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ इंवेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी के डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर दुष्यंत ठाकुर के मताबिक, ” प्रदेश में लॉजिस्टिक उद्योग में निवेश फायदे का सौदा साबित होगा. आने वाले समय में यह निवेशकों के लिए बड़ा फायदा देगा.” लॉजिस्टिक पार्क में होंगी ये सुविधाएं ● बड़े गोदाम और भंडारण सुविधाएं होंगी ● ट्रकिंग, रेलवे की सुविधा होगी ● सीसीटीवी कैमरे, अलार्म सिस्टम, और सुरक्षा गार्ड होंगे ● वेयरहाउस मैनेजमेंट सिस्टम, ट्रैकिंग और ट्रेसिंग सिस्टम और ऑटोमेशन की सुविधा होगी ● पैकेजिंग और लेबलिंग की सुविधा ● इन्वेंट्री मैनेजमेंट सुविधा ● लॉजिस्टिक व सप्लाई चैन मैनेजमेंट सुविधा ● रेस्तरां, कैफेटेरिया की सुविधा ● वाहन पार्किंग सुविधा, यूल स्टेशन, वर्कशॉप की सुविधा लॉजिस्टिक पार्क बनने के शहर को ये होंगे लाभ ● रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे ● नया निवेश आएगा ● सडक़ और परिवहन के बुनियादी ढांचे का विकास होगा ● भंडारण और गोदाम की सुविधाएं होंगी ● व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी ● आधुनिक और विकसित शहर के रूप में होगी पहचान ● सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी  खैरी में रिंग रोड के किनारे लॉजिस्टिक पार्क के निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड ने सर्वे पूरा कर लिया है। रेल कनेक्टिविटी के लिए लगभग एक किलोमीटर का रेलवे ट्रेक भी बिछाया जाना है। वहीं रिंग रोड के माध्यम से एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अब एनएचएलएमएल को डीपीआर तैयार करना है इसके बाद निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया होगी।     अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर

टीकमगढ़-ओरछा हाईवे डबल लेन का टेंडर जारी, 499 करोड़ की आएगी लागत, यातायात होगा सुगम

टीकमगढ़  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मध्य प्रदेश में टीकमगढ़-ओरछा हाईवे (Tikamgarh-Orchha highway) डबल लेन का टेंडर जारी कर दिया है। 499 करोड़ की लागत से इस 79 किमी की सड़क का निर्माण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में हाइवे के साथ ही मार्ग में पड़ने वाले दो बड़े पुल, एक रेलवे ओवर ब्रिज और 16 पुलियों का निर्माण किया जाएगा। इस सड़क का दो साल पूर्व केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने भूमिपूजन किया था। दिल्ली और मुंबई जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग शाहगढ़ से ओरछा हाईवे को जिले के यातायात की लाइफ लाइन कहा जाता है। देश की राजधानी दिल्ली के साथ ही आर्थिक राजधानी मुंबई को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। 2006 में एमपीआरडीसी द्वारा इस सड़क का निर्माण किया गया था। इसके बाद पिछले 10 सालों से लगातार इस सड़क के उन्नयन करने की मांग की जा रही थी। इस सड़क पर जिले के यातायात का सबसे अधिक दबाव है। इस सड़क पर प्रतिदिन 2 हजार माल वाहक, यात्री वाहन के साथ ही कार आदि की आवाजाही होती है। वर्तमान में झा भड़क पर इतना ट्रैफिक रहता है कि लोगों को पृथ्वीपुर तक क्रॉसिंग के लिए भी परेशान होना पड़ता है। 10 मीटर चौड़ी होगी सड़क एनएच के अधिकारियों ने बताया कि यह टीकमगढ़ से ओरछा तक बनने वाली डबल सड़क में 10 मीटर डामर और डेढ़-डेढ़ मीटर की पटरी होगी। सड़क की कुल चौड़ाई 13 मीटर होगी। ऐसे में वाहनों की आवाजाही में सुविधा होगी। इसके साथ ही इस सड़क पर पड़ने वाले ग्राम दिगौड़ा, बहौरी बराना, ज्यौरा मौरा, पृथ्वीपुर में बायपास बनाया जाएगा। अब इन कस्बों से वाहन नहीं निकलेंगे। ऐसे में लोगों को दूरी तय करने में कम समय लगेगा। जल्द ही होगा दूसरा टेंडर इस मामले में एनएच के कार्यपालन यंत्री पंकज व्या ने बताया कि जल्द ही विभाग द्वारा शाहगढ़ से टीकमगढ़ तक का दूसरा टेंडर जारी किया जाएगा। इसमें शाहगढ़ और टीकमगढ़ बायपास भी शामिल किया जाएगा। ऐसे में इसकी लागत 1100 करोड़ रुपए होगी। उनका कहना था कि इसी सप्ताह के अंदर यह टेंडर भी जारी कर दिया जाएगा। बनेगा आरओबी यह सड़क बाबरी तिराहे से ओरछा तिराहा तक बनाई जाएगी। इसमें ओरछा के पास पड़ने वाली रेलवे लाइन के लिए ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। यहां पर 1.2 किमी लंबा ओवर ब्रिज बनेगा। इसके साथ ही सालों से बारिश के समय समस्या बनने वाले पूनौल की पुलिया पर भी बड़े पुल का निर्माण किया जाएगा। वहीं इस सड़क पर आने वाले 16 छोटी पुलियों का भी निर्माण किया जाएगा।

मध्यप्रदेश : इंदौर-दाहोद रेल लाइन का अलग-अलग चरणों में काम चल रहा, 70 फीसदी काम पूरा

इंदौर  मध्यप्रदेश की इंदौर-दाहोद रेल लाइन का अलग-अलग चरणों में काम चल रहा है। कई जगह कार्यों में तेजी आई है। टीही से पीथमपुर के बीच मालगाड़ी के रूप में इंजन जब दौड़ने लगा तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हर कोई यह सोचने लगा कि रेलवे द्वारा ट्रायल किया जा रहा है। दरअसल, महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में इंदौर से टीही के बीच ट्रैक बनकर तैयार हो चुका है। रेलवे स्टेशन के साथ हाईवे पर चल रहा काम शहर में भी रेलवे के दो बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें नौगांव के क्षेत्र में आधुनिक रेलवे स्टेशन और इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाइवे पर ओवरब्रिज शामिल है। जानकारी के अुनसार धार रेलवे स्टेशन में दो मंजिला बिल्डिंग सहित वेटिंग हाल का काम 40 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इसके अलावा 660 मीटर का ट्रेक भी बन रहा है। इस पर रेल लाओ महासमिति के पूर्व प्रवक्ता डॉ. दीपक नाहर ने बताया कि टीही से टनल की ओर लुधियाना का इंजन एक मालगाड़ी से साबरमती से आयातित दर्जनों पटरियां लेकर चला, जो रविवार को पहुंचा। तकरीबन छह किमी के क्षेत्र में पटरी बिछाने का काम शुरू किया है। मालगाड़ी पर रखी पटरियों को नीचे उतारने के साथ ट्रैक पर रखा गया। इसमें 25 से अधिक कर्मचारी और मजदूर लगे हुए थे। सूत्रों की मानें तो पीथमपुर के समीप टनल में साढ़े तीन किमी में पटरी बिछाने का काम अभी चल रहा है। यह कार्य अभी 70 फीसदी पूरा हुआ और शेष 30 प्रतिशत हिस्से में चल रहा है। टनल का काम पूरा होने के बाद पटरी बिछेगी। रेलवे द्वारा 2026 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि जिस स्पीड से यह काम चल रहा है, उसमें अधिक समय लगने की संभावना है। रेलवे द्वारा बनाया जा रहे हैं ओवर ब्रिज, अर्थ वर्क सहित अन्य काम में तेजी आई है। ऐसे चल रहा काम पीथमपुर और धार के बीच कई स्थानों पर अर्थवक और पटरी बिछाने का काम चल रहा है। स्लीपर बिछाने के बाद उस पटरी डाली जाती है। यह पटरी पुरानी होती है, जिसे रेलवे द्वारा बिछाया जाता है। इसमें काम पूरा होने के बाद तय समय पर एक मीटर लंबी पटरी बिछाई जाती है। रेलवे ने टीही से पीथमपुर के बीच के काम शुरू कर दिया है। तीन किलोमीटर के क्षेत्र की पटरी बदलने का काम शुरू हुआ है।

बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए अलग देश की चर्चा ने जोर पकड़ा, हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों को संरक्षण मिलेगा

ढाका बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं हालिया समय में लगातार बढ़ी हैं। मोहम्मद यूनुस की सरकार में खासतौर से बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा भारत और विश्व के लिए मुद्दा बन रही है। इस समस्या से निपटने के लिए बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए अलग देश की चर्चा ने जोर पकड़ा है। इससे एक ओर बांग्लादेशी हिंदुओं को नया देश मिल जाएगा तो वहीं भारत के सामने पूर्वोत्तर में सुरक्षा की चुनौती कम हो जाएगी। इस योजना में बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन और चटगांव डिवीजन को अलग करने का प्रस्ताव है। मोहम्मद यूनुस ने हाल ही में एक बयान में चिकन नेक के भारत की कमजोर कड़ी होने की ओर भी इशारा किया है। स्वराज्य वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में इस संभावना पर बात की है। स्वराज्य वेबसाइट के मुताबिक, रंगपुर और चटगांव को अलग करने से बांग्लादेश के हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के लिए सुरक्षित घर बनाया जा सकता है। साथ ही पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की समस्या भी हल हो जाएगी। इस योजना के स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए आंदोलन को प्रोत्साहित करने और सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहने की बात कही गई है। इस योजना के बारे में कहा गया है कि यह विचार भले ही अभी काल्पनिक लगे लेकिन 1971 में बांग्लादेश बन सकता है तो ये भी संभव हो सकता है। पूर्वोत्तर की समस्या और बांग्लादेश पूर्वोत्तर भारत के सात राज्य गंभीर भौगोलिक चुनौती का सामना करते रहे हैं। यह क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों से एक पतली पट्टी से जुड़ा हुआ है, जिसे ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर कहा जाता है। यह कॉरिडोर लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा है, जो बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से घिरा हुआ है। चीन के कब्जे वाला तिब्बत भी इसके करीब है। ऐसे में ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर की सुरक्षा चिंता का विषय रही है। बांग्लादेश के कट्टरपंथी भी चिकननेक पर कब्जे की बात कहते रहे हैं। बांग्लादेश में हालिया महीनों में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अल्पसंख्यकों के पास देश छोड़ने या इस्लाम में परिवर्तित होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इन समस्याओं का समाधान बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए एक अलग घर बनाना है। बांग्लादेश में 1.3 करोड़ हिंदू हैं, जो अपने लिए एक अलग घर की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेशी हिंदुओं की समस्या का हल बांग्लादेश के अल्पसंख्यक शरण के लिए भारत का रुख करते रहे हैं। हालांकि भारत में प्रवास समाधान नहीं है। ये समाधान बांग्लादेश से काटकर उनके लिए एक अलग घर बनाना है। बांग्लादेश के दो प्रांत- उत्तरी रंगपुर डिवीजन और इसके दक्षिणपूर्वी चटगांव डिवीजन का एक बड़ा हिस्सा देश के उत्पीड़ित हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आदर्श घर होगा। रंगपुर के पश्चिम में बंगाल के उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर जिले हैं। उत्तर-पश्चिम में दार्जिलिंग जिले का सिलीगुड़ी उप-मंडल है। उत्तर में जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जिले हैं और पूर्व में असम के धुबरी और दक्षिण सालमारा जिले हैं। साथ ही मेघालय के पश्चिम और दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स हैं। यह तीन तरफ से भारतीय क्षेत्र से घिरा हुआ है। रंगपुर को भारत में शामिल करने से ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान हो जाएगा। इससे यह कॉरिडोर कम से कम 150 किलोमीटर चौड़ा हो जाएगा। इसी तरह चटगांव हिल ट्रैक्ट्स (CHT) जिसमें चटगांव डिवीजन के तीन जिले खगराछड़ी, रंगमती और बंदरबन हैं। ये त्रिपुरा और मिजोरम की सीमा से लगे हैं।

प्रदेश को 4,302.87 करोड़ लागत की सड़क परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलने से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी: मंत्री राकेश सिंह

भोपाल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा है कि प्रदेश को 4,302.87 करोड़ रुपये लागत की 4 महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिलने से मध्यप्रदेश में विकास की रफ्तार तेज होगी। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार व्यक्त किया है। मंत्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री गडकरी के मार्गदर्शन में देश का अधोसंरचना क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में विकास यात्रा की गति और तेज हो रही है। संदलपुर से नसरुल्लागंज बायपास तक बनेगा 43.200 किमी का 4 लेन राष्ट्रीय राजमार्ग भोपाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-146बी के संदलपुर से नसरुल्लागंज बायपास तक के 43.200 किलोमीटर लंबे खंड को 1535.66 करोड़ रुपये की लागत से 4 लेन में परिवर्तित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह खंड एक महत्वपूर्ण धमनी मार्ग के रूप में कार्य करता है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-47, राष्ट्रीय राजमार्ग-46 और राष्ट्रीय राजमार्ग-45 को आपस में जोड़ता है। यह क्षेत्र अत्यधिक भीड़-भाड़ वाला है, जिसे पेव्ड शोल्डर सहित 4 लेन किए जाने से यातायात की समग्र दक्षता में सुधार होगा। मालवाहन और आमजन के लिए यह मार्ग अब और भी सुचारू, सुरक्षित और समय बचाने वाला होगा। राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक बनेगा 10.079 किमी का 4 लेन कॉरिडोर विदिशा और सागर जिलों में राष्ट्रीय राजमार्ग-146 के राहतगढ़ से बेरखेड़ी तक के 10.079 किमी हिस्से को 731.36 करोड़ रुपये की लागत से 4 लेन में विकसित करने की स्वीकृति दी गई है। यह परियोजना भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है, जो न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी, बल्कि राहतगढ़ जैसे घनी आबादी वाले शहर को बायपास कर एक तेज़ और निर्बाध मार्ग प्रदान करेगी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और राष्ट्रीय राजमार्ग-346 को जोड़ेगी। इसके साथ ही मार्ग के ज्यामितीय सुधार एवं रि-अलॉयमेंट से सामान और लोगों की आवाजाही और भी सुरक्षित व कुशल हो सकेगी। इससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। लहदरा से बेरखेड़ी गुरु तक बनेगा 20.193 किमी लंबा 4 लेन ग्रीनफील्ड बायपास राष्ट्रीय राजमार्ग-146 पर लहदरा गांव जंक्शन से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के बेरखेड़ी गुरु गांव जंक्शन तक 20.193 किमी लंबे 4-लेन ग्रीनफील्ड सागर पश्चिमी बायपास के निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना पर कुल 688.31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-146 शहरी बस्तियों और अत्यधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। नए बायपास के बनने से सागर शहर में यातायात का दबाव कम होगा, साथ ही यात्रा का समय और दूरी दोनों घटेंगे। यह परियोजना क्षेत्र के नागरिकों को सुगम यातायात सुविधा उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी। पश्चिमी ग्वालियर के लिए 28.516 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4-लेन बायपास को स्वीकृति ग्वालियर शहर के पश्चिमी हिस्से में 28.516 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड 4 लेन बायपास के निर्माण को केंद्र सरकार ने 1347.6 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत मुरैना और ग्वालियर जिलों के साथ-साथ रास्ते में आने वाले अन्य प्रमुख ब्लॉकों और तहसील मुख्यालयों को जोड़ा जाएगा। यह नया सड़क खंड एक धमनी मार्ग की तरह कार्य करेगा, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-46, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 और आगामी आगरा-ग्वालियर एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे से कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा। इसके विकास से भारी माल ढुलाई और लंबे मार्ग की यातायात व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यातायात का सुगम और सुरक्षित प्रवाह सुनिश्चित होगा तथा यात्रा के समय में काफी कमी आएगी। यह बायपास न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगा बल्कि आर्थिक और परिवहन संबंधी गतिविधियों को भी बल प्रदान करेगा। इन परियोजनाओं से न केवल मध्यप्रदेश की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी, बल्कि यातायात सुरक्षा, मालवहन दक्षता, समय की बचत, और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। आने वाले वर्षों में ये सड़कें प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।  

पीएम मोदी थाईलैंड और श्रीलंका की यात्रा करेंगे, बैंकॉक में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत

नई दिल्ली बंगाल इनिशिएटिव फॉर सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकॉनोमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) का छठा शिखर सम्मेलन 4 अप्रैल को बैंकॉक में आयोजित होने जा रहा है. इस सम्मेलन से पहले दो अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और 3 अप्रैल को विदेश मंत्रियों की बैठक होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए गुरुवार को बैंकॉक के लिए रवाना होंगे. बैंकॉक में छठा शिखर सम्मेलन कोलंबो में हुए पिछले शिखर सम्मेलन (30 मार्च, 2022) के तीन साल बाद आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का विषय ‘समृद्ध, लचीला और खुला बिम्सटेक’ तय किया गया है, जो क्षेत्रीय एकीकरण और आर्थिक सहयोग के लिए इस मंच की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. एक व्यापक एजेंडे के साथ, शिखर सम्मेलन का मसकद साझा सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौतियों को हल करके सात सदस्य देशों, यानी बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के बीच सहयोग को मजबूत करना है. शिखर सम्मेलन की मुख्य विशेषताओं में 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन घोषणापत्र को अपनाना शामिल है, जो नेताओं के दृष्टिकोण और निर्देशों को हाईलाइट करेगा. साथ ही ऐतिहासिक बैंकॉक विजन 2030, भविष्य के सहयोग को बढ़ाने के लिए पहला रणनीतिक रोडमैप होगा. क्षेत्रीय संपर्क की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सभी देशों के नेता समुद्री परिवहन सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर करेंगे, जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में व्यापार और यात्रा का विस्तार करना है. बिम्सटेक का क्या मकसद बढ़ती भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में 6वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन से बंगाल की खाड़ी में सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रीय मंच के तौर पर संगठन की भूमिका को मजबूत करने की उम्मीद है. पांच दक्षिण एशियाई और दो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ, बिम्सटेक क्षेत्रीय मामलों में एक अधिक गतिशील और प्रभावशाली खिलाड़ी बनने के लिए तैयार है. साल 1997 में अपनी स्थापना के बाद से बिम्सटेक ने पांच शिखर सम्मेलन आयोजित किए हैं. बैंकॉक (2004), नई दिल्ली (2008), नेपीडॉ (2014), काठमांडू (2018) और कोलंबो (2022). संगठन सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है जिनमें कृषि और खाद्य सुरक्षा, कनेक्टिविटी, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, लोगों से लोगों का संपर्क, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, साथ ही आठ उप-क्षेत्र, जिनमें ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य शामिल हैं. भारत सबसे प्रभावशाली सदस्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिम्सटेक का यह शिखर सम्मेलन इसकी रणनीतिक दिशा को आकार देने में मददगार साबित होगा. साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि यह बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में आर्थिक विकास, सुरक्षा सहयोग और सतत विकास के लिए एक यह मंच महत्वपूर्ण ताकत बना रहे. भारत, बिम्सटेक के चार संस्थापक सदस्यों में से एक है, जो सुरक्षा, ऊर्जा और आपदा प्रबंधन में क्षेत्रीय सहयोग का नेतृत्व करता है. बिम्सटेक सचिवालय के बजट में सबसे बड़ा योगदानकर्ता (32 प्रतिशत) होने के नाते, भारत दो बिम्सटेक केंद्रों की मेजबानी करता है. नोएडा, उत्तर प्रदेश में बिम्सटेक मौसम और जलवायु केंद्र और बेंगलुरु में बिम्सटेक ऊर्जा केंद्र. साथ ही कृषि, आपदा प्रबंधन और समुद्री परिवहन में उत्कृष्टता के तीन और नए केंद्रों का प्रस्ताव दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिम्सटेक के पीछे सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति रहे हैं, उन्होंने गोवा में बिम्सटेक नेताओं की रिट्रीट (2016) की मेज़बानी की और संस्थागत क्षमता को मज़बूत करने के लिए 5वें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में एक मिलियन डॉलर के वित्तीय अनुदान की घोषणा की थी. भारत ने जुलाई 2024 में दूसरे बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की रिट्रीट की मेज़बानी की, जिसमें नए केंद्रों, अंतरिक्ष सहयोग और लोगों के बीच आदान-प्रदान को लेकर पहल की गई थी. साथ ही भारत ने न्यूयॉर्क में 79वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक की अध्यक्षता भी की. चीन को चुनौती देने की तैयारी नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, एक्ट ईस्ट पॉलिसी और सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) विजन, बिम्सटेक देशों के साथ भारत के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाते हैं. बंगाल की खाड़ी क्षेत्र एक चौराहे पर खड़ा है, भारत की प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि बिम्सटेक एक एक्टिव फोरम के तौर पर विकसित हो, जो साझा-समृद्ध भविष्य के लिए संस्कृतियों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर सके. भारत ने सार्क को पीछे छोड़ते हुए अब अपना फोकस बिम्सटेक की तरफ मोड़ लिया है. सार्क सदस्यों में पाकिस्तान के शामिल होने की वजह से लगातार बाधाएं पैदा होती थीं और साल 2016 में उरी हमले के बाद सार्क का कोई भी सम्मेलन आयोजित नहीं हुआ है. ऐसे में अब सार्क को एक तरह से निष्क्रिय मंच माना जा रहा है. उधर, बंगाल की खाड़ी से सटे देशों पर चीन का प्रभुत्व खत्म करने और उसके विस्तारवाद को चुनौती देने के मकसद से भी भारत बिम्सटेक को प्राथमिकता दे रहा है. अगर भारत इस मंच का नेतृत्व अच्छी तरह से करता है तो सदस्य देशों को चीन का साथ देने में मुश्किल होगी और ऐसे में भारत न सिर्फ बिम्सटेक बल्कि एशिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है. सदस्य देशों के साथ मजबूत संबंध भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और बिम्सटेक में सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति है. ऐसे में बिम्सटेक के मंच का इस्तेमाल करके सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने से भारत अपनी पूर्वी सीमा से सटे इन देशों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर सकता है जिससे चीन को कड़ी चुनौती मिलेगी. अगर इन देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत होंगे तो ये सदस्य देश भी भारत के हितों को चीन से ऊपर रखेंगे और वहां ड्रैगन के किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले अपने रिश्तों के बारे में जरूर विचार करेंगे. 2015 के बाद से मोदी की द्वीप राष्ट्र की चौथी यात्रा 2015 के बाद से यह प्रधानमंत्री मोदी की द्वीप राष्ट्र की चौथी यात्रा होगी। इससे पहले पीएम मोदी ने 2015, 2017 और 2019 में श्रीलंका का दौरा किया था। यह यात्रा ऐसे वक्त हो रही है, जब भारत और श्रींलका के बीच मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा गरम है। इस कारण से दोनों देशों के बीच तनातनी चल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कई बार विदेश मत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर मुद्दे के स्थायी हल निकालने के लिए काम करने को कह चुके हैं। इस साल करीब 150 से … Read more

गाजा में लंबे समय तक बने रहेंगे इजरायली सैनिक, सेना के नए चीफ ने की आक्रामक तैयारी

तेल अवीव इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज ने बुधवार को गाजा में सैन्य अभियान के बड़े विस्तार की घोषणा की। इस अभियान के दौरान गाजा के एक बड़े हिस्से पर कब्जा करने की योजना है, ताकि उन्हें इजरायल के सुरक्षा क्षेत्रों में शामिल किया जा सके। बयान में, कैट्ज ने कहा कि अभियान में “युद्ध क्षेत्रों से गाजा की आबादी को बड़े पैमाने पर निकालना” भी शामिल होगा। हालांकि उन्होंने ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। बयान के अनुसार, सैन्य अभियान का विस्तार “आतंकवादियों और आतंकी ढांचे के क्षेत्र को कुचलने और साफ करने के लिए किया जाएगा, जबकि बड़े क्षेत्रों पर कब्जा किया जा सके।” दक्षिणी राफा से लोगों को बाहर निकलने को कहा मंगलवार देर रात अरबी मीडिया के लिए इजरायली सेना के प्रवक्ता ने गाजा के दक्षिणी राफा क्षेत्र के निवासियों को अपने घर छोड़ने और उत्तर की ओर जाने का आदेश दिया। सीएनएन ने पिछले महीने ही बताया था कि इजरायल गाजा में एक बड़े जमीनी हमले की योजना बना रहा है, जिसमें एन्क्लेव के एक बड़े हिस्से को साफ करने और उस पर कब्जा करने के लिए हजारों सैनिकों को युद्ध में भेजना शामिल होगा। गाजा पर जारी है इजरायली बमबारी बुधवार को कैट्ज के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि गाजा पट्टी के इस विस्तारित अभियान में अतिरिक्त इजरायली सैनिक शामिल होंगे या नहीं। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब इजरायल ने गाजा पट्टी पर हवाई बमबारी जारी रखी है। नासेर अस्पताल और खान यूनिस में यूरोपीय अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, दक्षिणी गाजा में रात भर इजरायली हमलों में कम से कम 17 लोग मारे गए, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं। अस्पतालों में आ रहे लोगों के शव नासेर अस्पताल के अनुसार, मारे गए लोगों में कम से कम 13 लोग – जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मरने वाले लोग राफा क्षेत्र से विस्थापित होने के बाद एक आवासीय घर में शरण लिए हुए थे। अल अवदा अस्पताल के अनुसार, दो लोग मध्य गाजा में एक अलग हमले में मारे गए। इजरायल ने दो सप्ताह पहले गाजा पर अपना आक्रमण फिर से शुरू किया, जिससे हमास के साथ दो महीने पुराना युद्धविराम टूट गया। इजरायल ने पहले से ही गाजा में मानवीय सहायता की पूरी नाकाबंदी कर दी थी। गाजा में लंबे समय तक बने रहेंगे इजरायली सैनिक इजरायल ने चेतावनी दी कि उसके सैनिक गाजा के कुछ हिस्सों में तब तक स्थायी रूप से मौजूद रहेंगे जब तक कि शेष 24 बंधकों की रिहाई नहीं हो जाती, जिनके बारे में माना जाता है कि वे अभी भी जीवित हैं। तब से एन्क्लेव में सैकड़ों फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि गाजा पट्टी में खाद्य आपूर्ति समाप्त हो रही है। इजरायली सेना के नए चीफ ने की आक्रामक तैयारी इजरायली सेना के नये चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर के नेतृत्व में इजराइली सेना पिछले कई सप्ताह से गाजा में बड़े पैमाने पर अभियान की योजना बना रही है। इस तरह के निर्णय से इजराइली सेना इस क्षेत्र पर कब्जा कर सकती है और वर्षों तक विद्रोहियों से लड़ सकती है। लेकिन गाजा में लंबे समय तक आक्रमण करने से इजराइली जनता का कड़ा प्रतिरोध भी हो सकता है, जिनमें से अधिकांश लोग युद्ध की वापसी के बजाय बंधकों की रिहाई के लिए समझौते की मांग कर रहे हैं।

UPI के जरिए मार्च महीने में ट्रांजैक्शंस के टूटे सारे रिकॉर्ड, 24.77 लाख करोड़ रुपए का हुआ लेन-देन

नई दिल्ली भारत के डिजिटल पेमेंट रेवोल्यूशन ने एक और नया मील का पत्थर छू लिया है। मार्च 2025 में UPI के जरिए 24.77 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लगातार बढ़ रही है UPI की लोकप्रियता नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शंस का ग्रोथ रेट जबरदस्त बना हुआ है। पिछले 11 महीनों से हर महीने लेन-देन का कुल मूल्य 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक बना हुआ है।     सालाना तुलना: मार्च 2024 की तुलना में इस साल 25% की वृद्धि हुई है।     वॉल्यूम ग्रोथ: लेन-देन की संख्या में 36% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।          मार्च में कुल ट्रांजैक्शंस: 18.3 बिलियन (यानी 1830 करोड़ ट्रांजैक्शंस)। तिमाही प्रदर्शन भी शानदार जनवरी से मार्च 2025 के दौरान UPI ट्रांजैक्शंस की कुल वैल्यू 70.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि से 24% ज्यादा है।     दैनिक औसत लेन-देन: ₹79,903 करोड़, जो फरवरी से 1.9% अधिक रहा।     UPI ट्रांजैक्शंस की संख्या: 2.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।     प्रति ट्रांजैक्शन औसत मूल्य: ₹1,353.6, जो दर्शाता है कि लोग अब छोटे लेकिन अधिक फ्रीक्वेंट ट्रांजैक्शंस कर रहे हैं।  UPI की बढ़त जारी रहेगी? UPI की सफलता को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत जल्द ही डिजिटल पेमेंट्स के मामले में नया वैश्विक बेंचमार्क सेट कर सकता है। सरकार, NPCI और फिनटेक कंपनियों की लगातार कोशिशों से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और भी ऊंचाई छू सकता है।  

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