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बस्तर में सक्रिय देश की इकलौती नक्सल बटालियन को भी नक्सलियों ने कई टुकड़ों में तोड़ दिया, गुरिल्ला वार की आशंका

जगदलपुर सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सलियों ने संगठन स्तर पर कई बड़े फेरबदल किए हैं। बस्तर में सक्रिय देश की इकलौती नक्सल बटालियन को भी नक्सलियों ने कई टुकड़ों में तोड़ दिया है। अब नक्सली छोटे-छोटे समूहों में गुरिल्ला वार की रणनीति बना रहे हैं, जबकि पहले गर्मियों में नक्सली बड़े हमले करते थे। बस्तर में मार्च, अप्रैल, मई और जून के समय को नक्सली टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन (टीसीओसी) कहते हैं। यह वही समय है, जब जंगल के भीतर दृश्यता बढ़ जाने का लाभ उठाकर नक्सली बड़े हमले करते रहे हैं। टीसीओसी के दौरान हुए हमले में तीन अप्रैल, 2010 को ताड़मेटला हमले में 76 जवान, 25 अप्रैल, 2017 को सुकमा के बुरकापाल में 32 जवान और तीन अप्रैल 2021 को टेकुलगुड़ेम मुठभेड़ में 22 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि इस बार स्थिति बदली हुई है। नक्सलियों के पुनर्वास की सरकार की नई नीति के चलते भी कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। ऐसे लोगों को फिर से मुख्यधारा में जोड़ा जा रहा है। राज्य में शांति स्थापित होने से विकास कार्यों में तेजी आएगी।   14 महीने में मारे गए 304 नक्सली सुरक्षा बल ने पिछले 14 माह में नक्सलियों के विरुद्ध आक्रामक अभियान करते हुए 304 नक्सलियों को ढेर कर दिया है, जबकि 34 अग्रिम सुरक्षा चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके बाद नक्सली भी यह मानकर चल रहे हैं कि टीसीओसी का लाभ फोर्स भी उठा सकती है और संगठन को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। पिछली गर्मियों में इसी रणनीति से सुरक्षा बल ने नक्सलियों के विरुद्ध कई बड़े अभियान किए थे। यही कारण है कि जंगल के भीतर से जो जानकारी आ रही है उसके अनुसार नक्सलियों ने इस बार अपने संगठन में भारी बदलाव किया है। कंपनी और प्लाटून स्तर पर भी फेरबदल किया गया है। एक साल में छीना नक्सलियों का गढ़ पिछले एक वर्ष के भीतर सुरक्षा बल ने बस्तर में नक्सलियों के सबसे ताकतवर किले को ढहा दिया है। सुकमा और बीजापुर जिले का सीमावर्ती क्षेत्र दो दशक से नक्सलियों के बटालियन का केंद्र था। पिछले दो वर्ष में सुरक्षा बल ने यहां टेकुलगुड़ेम, पूवर्ती, तर्रेम, गुंडेम, कोंडापल्ली, जिड़पल्ली, वाटेवागु सहित दस से अधिक अग्रिम चौकियों की स्थापना कर खुद को मजबूत बना लिया है। नक्सली अब बचने के लिए स्माल एक्शन ग्रुप्स में बंटकर हमला करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। मगर, सुरक्षा बल तैयार है। टीसीओसी में नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को और भी आक्रामक किया जाएगा। -सुंदरराज पी., आईजीपी बस्तर बड़ा नुकसान पहुंचाने की ताक में हैं नक्सली पूर्व पुलिस महानिदेशक विज नक्सल मामलों के जानकार छत्तीसगढ़ के पूर्व पुलिस महानिदेशक आरके विज ने कहा कि इस समय सुरक्षा बल की स्थिति जंगल के भीतर मजबूत हुई है। सटीक सूचना के आधार पर अभियानों में नक्सलियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। यही कारण है कि नक्सली गुरिल्ला लड़ाई तकनीक के अनुसार छोटे-छोटे समूह में बंटकर बड़े नुकसान पहुंचाने की ताक में होंगे। गुरिल्ला युद्ध में छोटा बल भी बड़ा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।  

अब वोटर आईडी से लिंक होगा आधार, मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में हुआ फैसला

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने वोटर आईडी (EPIC) को आधार से जोड़ने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में इस पर चर्चा हुई। आयोग ने साफ किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत ही होगी। कानूनी ढांचे के तहत होगी प्रक्रिया चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर आईडी को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) के तहत होगी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इसलिए आधार से लिंक करने की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि सिर्फ भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में दर्ज हों। आयोग ने कहा, “संविधान के अनुसार, मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही मिल सकता है। आधार सिर्फ व्यक्ति की पहचान साबित करता है, उसकी नागरिकता नहीं। इसलिए इस प्रक्रिया को कानूनी दायरे में रखा जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के सिविल के फैसले के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।” तकनीकी विशेषज्ञों के साथ चर्चा होगी शुरू चुनाव आयोग और आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था यूआईडीएआई के तकनीकी विशेषज्ञ जल्द ही इस पर काम शुरू करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए किया जाएगा, ताकि कोई भी नागरिकता से जुड़ा भ्रम न फैले। राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पद संभालने के बाद चुनाव सुधारों को तेज कर दिया है। चुनाव आयोग आगामी चुनावों को ज्यादा पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए कई नए कदम उठा रहा है। चुनाव आयोग ने पहली बार राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से 30 अप्रैल 2025 तक सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा, 31 मार्च 2025 तक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में राजनीतिक दलों की चिंताओं और सुझावों पर विचार किया जाएगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता बनी रहे।

धरती ने आपको मिस किया, अंतरिक्ष से विलियम्स की वापसी पर पीएम का संदेश

 नई दिल्ली सुनीता विलियम्स की धरती पर सकुशल वापसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में उन्होंने लिखा, ” आपका स्वागत है, क्रू9 ! धरती ने आपको मिस किया।” पीएम ने लिखा, “उनका यह अनुभव धैर्य, साहस और असीम मानवीय भावना की परीक्षा रहा है। सुनीता विलियम्स और क्रू 9 के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक बार फिर हमें दिखाया है कि दृढ़ता का सही अर्थ क्या है। विशाल अनिश्चितता के सामने उनका अटूट दृढ़ संकल्प हमेशा लाखों लोगों को प्रेरित करेगा।” पीएम नरेद्र मोदी ने क्रू 9 का वापसी अभियान पूरा होने के बाद अपने संदेश में कहा, “अंतरिक्ष अन्वेषण का मतलब है मानवीय क्षमता की सीमाओं को आगे बढ़ाना, सपने देखने का साहस करना और उन सपनों को हकीकत में बदलने का साहस करना।” पीएम ने सुनीता विलियम्स के बारे में कहा कि वे एक पथप्रदर्शक और एक आइकन हैं। उन्होंने अपने पूरे करियर में इस भावना का उदाहरण दिया है। हम उन सभी पर अविश्वसनीय रूप से गर्व करते हैं जिन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अथक परिश्रम किया। उन्होंने दिखाया है कि जब सटीकता जुनून से मिलती है और तकनीक दृढ़ता से मिलती है तो क्या होता है।”

मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया- गेहूँ उपार्जन के लिये 31 मार्च तक होगा पंजीयन

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मुल्य पर गेहूं की बिक्री के लिये अभी तक 10 लाख 20 हजार 224 किसानों ने पंजीयन कराया है। मंत्री श्री राजपूत ने किसानों से आग्रह किया है कि गेहूँ की बिक्री के लिए समय-सीमा में पंजीयन जरूर करायें। उन्होंने बताया है कि किसान 31 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं, खरीदी उपार्जन केन्द्रों में 5 मई तक होगी। गेहूँ की खरीदी के लिये 2648 उपार्जन केन्द्र बनाये जा चुके हैं। गेहूँ की खरीदी 2600 रूपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। इसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रूपये है और राज्य सरकार द्वारा 175 रूपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जा रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की बिक्री के लिए जिला बुरहानपुर में 160, खरगौन में 4305, बड़वानी में 577, अलीराजपुर में 85, खंडवा में 11,560, धार में 20,647, झाबुआ में 3934, इंदौर में 31,694 मंदसौर 31,714, नीमच 10,259, आगर-मालवा में 25,357, देवास में 37,038, रतलाम में 19,966, शाजापुर में 53,172, उज्जैन में 78,016, अशोकनगर में 12,557, शिवपुरी में 8662, ग्वालियर में 5880, दतिया में 7680, गुना में 8446, भिंड में 10,470, श्योपुर में 11,157, मुरैना में 7824, जबलपुर 11,075, बालाघाट 806, कटनी में 15,511, पांढुर्णा 89, डिंडौरी में 1773, छिंदवाड़ा में 9091, सिवनी में 24,801, नरसिंहपुर में 20,979, मंडला में 9350, हरदा में 22,227, बैतूल में 8788, नर्मदापुरम में 52,017, विदिशा में 65,348, रायसेन में 57,898, राजगढ़ में 55,855, भोपाल में 26,847, सीहोर में 76,299, सतना में 12,028, रीवा में 9439, सिंगरौली में 4369, मऊगंज 996, मैहर में 3835, सीधी में 4535, अनूपपुर में 521, उमरिया में 4312, शहडोल में 5145, पन्ना में 14,785, निवाड़ी में 1132, दमोह में 22,505, टीकमगढ़ में 8048, छतरपुर में 12,198 और सागर में 56,462 किसानों ने पंजीयन कराया है।  

सोने में तेजी से गोल्ड मार्केट कैप बढ़कर नए रेकॉर्ड $20 लाख करोड़ पर पहुंचा

नई दिल्ली  सोने के दाम आसमान छू रहे हैं! MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना 88,488 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रेकॉर्ड पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोना 3,000 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया है। वहीं सोने ने एक और रेकॉर्ड बना दिया है। सोने का बाजार पूंजीकरण 20 लाख करोड़ डॉलर से भी ज्यादा हो गया है। यह पहली बार है जब इसका मार्केट कैप इतना ज्यादा हुआ है। एमसीएक्स पर सोने के अप्रैल वायदा अनुबंध 0.52% या 465 रुपये बढ़कर 88,488 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमतें 3,024 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं। सोने की कीमत में यह तेजी डॉलर के कमजोर होने, दुनिया में तनाव बढ़ने और निवेशकों के सावधानी बरतने के कारण आई है। डॉलर में आई गिरावट डॉलर इंडेक्स पांच महीने के निचले स्तर पर आ गया है। इसलिए सोना अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के लिए और भी आकर्षक हो गया है। जब डॉलर कमजोर होता है तो दूसरे देशों के लोगों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। बाजार में डर का माहौल दुनिया में तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और डॉलर के कमजोर होने की वजह से सोने के दाम बढ़ रहे हैं। मिडिल ईस्ट में युद्ध, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और फेडरल रिजर्व के फैसलों का इंतजार, इन सब वजहों से बाजार में डर का माहौल है। निवेशक सोने को सुरक्षित मान रहे हैं और इसमें निवेश कर रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर हूती विद्रोही लाल सागर में हमले करते हैं तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। इससे बाजार में डर का माहौल है। इजराइल और हमास के बीच लड़ाई तेज हो गई है। इजराइल गाजा में हमले कर रहा है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अभी भी जारी है। अमेरिका के आर्थिक आंकड़े कमजोर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े कमजोर हैं और फेड की नीतियों का इंतजार है। अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कम हैं। इससे विकास को लेकर चिंता बढ़ गई है। ICICI सिक्योरिटीज ने कहा, ‘अमेरिका से कमजोर-अपेक्षित आर्थिक डेटा और यमन के हूती के खिलाफ अमेरिकी हमलों के बाद तेल-समृद्ध मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते भी सोना महंगा हुआ है।

LIC का लक्ष्य हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का 31 मार्च से पहले एंट्री करना है ऐलान संभव

नई दिल्ली भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में एंट्री करने की तैयारी में है। इसके लिए LIC हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिग्रहण की प्रक्रिया में लग गई है। यह जानकारी कंपनी के सीईओ सिद्धार्थ मोहंती ने दी है। इस खबर के बीच LIC के शेयर में तेजी आई और सप्ताह के दूसरे दिन यह 1.70% बढ़कर 758 रुपये के पार पहुंच गया। बता दें कि 3 मार्च को शेयर 715 रुपये के निचले स्तर तक आ गया था। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो भी है। कब तक है LIC का प्लान LIC का लक्ष्य हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी का 31 मार्च से पहले अधिग्रहण को अंतिम रूप देना और इसकी घोषणा करना है। मोहंती ने स्पष्ट किया कि एलआईसी जिस कंपनी का अधिग्रहण करेगी, उसमें उसकी बहुलांश हिस्सेदारी नहीं होगी। इस कदम से बीमा क्षेत्र में एलआईसी की उपस्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। आपको बता दें कि एलआईसी के चेयरमैन सिद्धार्थ मोहंती ने पहले हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में कंपनी की संभावनाओं का जिक्र किया था। एलआईसी के प्रीमियम में बढ़ोतरी की हाल ही में एलआईसी ने वित्त वर्ष 2025 के पहले 11 महीनों में समूह वार्षिक नवीकरणीय प्रीमियम और व्यक्तिगत प्रीमियम दोनों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है। एलआईसी ने बताया कि समूह वार्षिक नवीकरणीय प्रीमियम में 28.29 प्रतिशत और व्यक्तिगत प्रीमियम में 7.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फरवरी 2025 तक एलआईसी का कुल प्रीमियम कलेक्शन 1.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1.86 लाख करोड़ रुपये से 1.90 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, फरवरी 2025 में व्यक्तिगत प्रीमियम संग्रह 1.07 प्रतिशत घटकर 4,837.87 करोड़ हो गया जबकि फरवरी 2024 में यह 4,890.44 करोड़ था। इस दौरान समूह प्रीमियम के तहत कुल 4,898 पॉलिसियां जारी की गईं, जो पिछले वर्ष की 4314 पॉलिसियों की तुलना में 13.53 प्रतिशत अधिक है।

मध्यप्रदेश में फैल रही रहस्यमई बीमारी, मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्न होना या लकवा भी हो सकता

इंदौर  छह माह पहले पुणे में सामने आई गुइलैन-बैरे सिंड्रोम बीमारी(Guillain-Barré Syndrome) के लक्षण वाले मरीज इंदौर में भी मिल रहे हैं। एमवायएच की मेडिसिन विभाग ओपीडी की न्यूरोलॉजी यूनिट में हर सप्ताह दो से तीन केस इसके लक्षण वाले आ रहे हैं, जिसमें से कुछ को तीन सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती भी करना पड़ रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में इसकी जांच के साथ ही उपचार के लिए प्लाज्मा एक्सचेंज या इयूनोग्लोबुलिन थेरेपी भी की जा रही है, जिससे मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचने से बच रहे हैं। यह बीमारी किसी वायरस के कारण नहीं, बल्कि बैक्टीरियल इंफेक्शन से होती है। इसलिए इसके एक-दूसरे को प्रभावित करने की स्थिति नहीं रहती। डॉक्टर्स के अनुसार, यह एक दुर्लभ नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारी होती है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। इसके कारण तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्न होना या कभी-कभी लकवा भी हो सकता है। इस सिंड्रोम की शुरुआत आमतौर पर एक इन्फेक्शन जैसे वायरल फीवर, लू या गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन से होती है। मुख्य लक्षण(Guillain-Barré Syndrome)     मांसपेशियों में कमजोरी     सुन्न या झंकार महसूस होना     चलने में समस्या     सांस लेने में कठिनाई पांच-छह सप्ताह से पहुंच रहे मरीज एमवायएच की मेडिसिन विभाग की ओपीडी में पिछले पांच से छह माह से ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। मेडिसिन विभाग के डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया, विशेषकर ऋतु परिवर्तन के दौरान यह संया अधिक देखते में आ रही है। इसमें बारिश से ठंडी के बीच का समय व ठंड से गर्मी के बीच या वायरल फीवर के केस बढ़ने की स्थिति शामिल है। एक साथ कई मरीज आए हों, ऐसी स्थिति नहीं है। एक सप्ताह में दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं। वेंटिलेटर पर भी रखने की बनी स्थिति एमवायएच में जांच के बाद स्थिति का पता चल रहा है, जिसके बाद कई मरीजों को कुछ समय के लिए आइसीयू या वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा। हालांकि कुछ दिन बाद यह ठीक भी हुए हैं। शुरुआती पहले सप्ताह में मरीज की स्थिति गंभीर रहती है। दूसरे व तीसरे सप्ताह में यह ठीक होने लगते हैं। इसके कुछ वेरिएंट भी जांच के दौरान मिले हैं। पैरों के माध्यम से होता है प्रभाव डॉक्टर्स के अनुसार, इस बीमारी(Guillain-Barré Syndrome) में पैर के माध्यम से प्रभाव मालूम होता है। यह पैर की कमजोरी से प्रारंभ होती है। फिर हाथों की कमजोरी, श्वास लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। इसके बाद खाना निगलने व बोलने में भी परेशानी होती है। लापरवाही करने पर यह गंभीर स्थिति तक पहुंच जाता है। गुइलैन-बैरे सिंड्रोम(Guillain-Barré Syndrome) दुर्लभ नर्वस सिस्टम से संबंधित बीमारी है। इसके मरीज एमवायएच पहुंचे हैं। यह बीमारी एपायलो वैक्टर जेजेनी बैक्टीरिया के कारण होती है। इसके लिए नस संबंधित जांच कराई जाती है। इसमें कौन सा भाग प्रभावित है, यह देखा जाता है। इसके अलावा धड़कन, ब्लड प्रेशर की स्थिति में भी बदलाव होता है। जीबीएस के जितने मरीज आ रहे हैं उन्हें उपचार मिल रहा है, जिससे यह ठीक हुए हैं। समय पर उपचार मिलने पर यह बीमारी घातक नहीं होती है। – डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल, न्यूरोलॉजिस्ट, एमजीएम

छत्तीसगढ़ में अब अवैध धर्मांतरण रोकने सख्त कानून बनाया जाएगा

रायपुर छत्तीसगढ़ में अब गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन करना गुनाह है। प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने साफ कहा है कि इसे रोकने के लिए सख्त कानून बनाया जाएगा। विजय शर्मा डिप्टी सीएम होने के साथ छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री भी हैं। आज विधानसभा में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने धार्मिक धर्मांतरण का मुद्दा उठाया था। चंद्राकर ने कहा कि ‘चंगाई सभा’ (उपचार बैठक) के बहाने निर्दोष,असहाय,गरीब लोगों को प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य,शिक्षा और सामाजिक कार्य क्षेत्रों में काम करने के उद्देश्य से बने एनजीओ विदेशी देशों से धन प्राप्त कर रहे हैं,जिसका कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है। राज्य में ऐसे कई एनजीओ हैं,जो धार्मिक आधार पर पंजीकृत हैं और विदेशों से धन भी प्राप्त कर रहे हैं। अजय चंद्राकर ने आरोप लगाया कि बस्तर जिले में 19 पंजीकृत संगठनों में से 9 और जशपुर जिले में 18 संस्थानों में से 15 ईसाई मिशनरियों की ओर से चलाए जा रहे हैं। इन संगठनों पर नियंत्रण की कमी के कारण धर्मांतरण गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर संगठन जशपुर जिले (मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गृह जिला) में काम कर रहे हैं,जहां धर्मांतरण के ज्यादातर मामले सामने आते हैं। भाजपा विधायक ने इस साल की शुरुआत में बिलासपुर और रायपुर जिलों में पुलिस में दर्ज धार्मिक धर्मांतरण के कुछ मामलों का भी हवाला दिया। धर्मांतरण में विदेशी फंडिंग के उपयोग से इनकार नहीं किया जा सकता। चंद्राकर ने दावा किया कि हालांकि सरकार ऐसे फंडों पर प्रतिबंध लगाने का दावा करती है,लेकिन ये संस्थान ऑडिट रिपोर्ट न देकर अपना रास्ता निकाल लेते हैं। अपने जवाब में उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि एनजीओ पर स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण की कमी के कारण धर्मांतरण की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस उचित जांच करती है और जब ऐसी चंगाई सभाओं में लोगों को धर्मांतरित करने के लिए लुभाने की शिकायतें मिलती हैं तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करती है।शर्मा ने कहा कि 2020 में एक मामला दर्ज किया गया,2021 में सात, 2022 में तीन,2023 में शून्य,2024 में कुल 12 और 2025 में अब तक चार मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद चंद्राकर ने कहा कि यह मुद्दा बहुत गंभीर है और मुख्यमंत्री साय ने हाल ही में इसके बारे में बात की है। राज्य में विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ का निरीक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी सहायता का उपयोग धार्मिक धर्मांतरण सहित अवैध गतिविधियों में नहीं किया जा रहा है। चंद्राकर ने राज्य में विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ का विवरण और क्या ऐसे संस्थानों के खिलाफ कोई शिकायत मिली है। शर्मा ने कहा कि विदेशी धन प्राप्त करने वाले एनजीओ विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत हैं और केंद्रीय गृह मंत्रालय ऐसे विदेशी धन की प्राप्ति की निगरानी करता है। शर्मा ने कहा कि पहले राज्य में 364 एनजीओ थे जो विदेशी धन प्राप्त कर रहे थे। इसके बाद,चंद्राकर ने पूछा कि क्या सरकार अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए नए प्रावधान या कानून लाएगी। जवाब में डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बहुत गंभीर है। हालांकि छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम लागू है,सरकार सोच रही है कि नए कानूनी प्रावधान लागू होने चाहिए। उचित समय पर नए प्रावधान पेश किए जाएंगे। विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि पुलिस प्रशासन अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। वर्तमान में, पुराने प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। सरकार नए प्रावधानों की आवश्यकता पर विचार कर रही है। हम जल्द ही नया कानून लाएंगे। अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून बनाया जाएगा।

मेट्रो रेल प्रबंधन द्वारा इस संबंध में एचसीसी-टीपीएल कंपनी को वर्कआर्डर जारी किया, इंदौर में एयरपोर्ट से रीगल तक चलेगी अंडरग्राउंड मेट्रो

इंदौर इंदौर शहर में एयरपोर्ट से रीगल तिराहे तक मेट्रो का 8.9 किमी का भूमिगत हिस्सा हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी-टाटा प्रोजेक्ट लि.(एचसीसी-टीपीएल) का संयुक्त उपक्रम तैयार करेगा। इस हिस्से में कंपनी अप और डाउन लाइन की दो भूमिगत टनल तैयार करेगी और सात भूमिगत स्टेशन तैयार करेगी। मप्र मेट्रो रेल प्रबंधन द्वारा इस संबंध में एचसीसी-टीपीएल कंपनी को वर्कआर्डर जारी कर दिया गया है। तीन-चार माह में कंपनी मैदानी स्तर पर काम शुरू करेगी। कंपनी को चार साल में प्रोजेक्ट पूर्ण करना होगा। कंपनी इस प्रोजेक्ट पर 2190.91 करोड़ रुपये खर्च करेगी। एशियन डेवलपमेंट बैंक दे रहा है लोन इंदौर के भूमिगत मेट्रो प्रोजेक्ट में एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) 1600 करोड़ रुपये का लोन दे रहा है। ऐसे में एडीबी एचसीसी-टीपीएल का वित्तीय मूल्यांकन कर एनओसी जारी करने के बाद ही मेट्रो प्रबंधन ने कंपनी को वर्कआर्डर जारी किया। मेट्रो के भूमिगत प्रोजेक्ट के लिए 60 फीसद राशि एडीबी के लोन से मिलेगी। वहीं 20-20 फीसद राशि केंद्र व राज्य सरकार दे रही है। मेट्रो के भूमिगत रूट पर इन स्थानों पर तैयार होंगे स्टेशन     एयरपोर्ट     बीएसएफ     रामचंद्र नगर     बड़ा गणपति     छोटा गणपति     राजवाड़ा     रीगल कंपनी करेगी जियो टेक्नीकल और यूटिलिटी सर्वे एचसीसी-टीपीएल कंपनी को भूमिगत मेट्रो निर्माण के लिए वर्कआर्डर जारी होने के बाद कंपनी अगले तीन से चार माह में कंपनी काम शुरू करेगी। सबसे पहले कंपनी जियो टेक्नीकल सर्वे के साथ मिट्टी के परीक्षण का कार्य करेगी। कंपनी भूमिगत मेट्रो निर्माण के पहले उस रूट पर जमीन के नीचे मौजूद सीवरेज, नर्मदा पाइप लाइन, गैस लाइन सहित अन्य सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने के लिए ‘यूटिलिटी ट्रायल ट्रेंचिंग’ का सर्वे करेगी। 20 मीटर गहराई में उतारेंगे मशीन कंपनी मेट्रो के भूमिगत प्रोजेक्ट के लिए एयरपोर्ट व बड़ा गणपति के पास वेयर हाउस की जमीन पर करीब 800 वर्गमीटर हिस्से में खोदाई कर भूमिगत मेट्रो की टनल बनाने वाली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को जमीन की 20 मीटर गहराई में उतारा जाएगा। इसके बाद भूमिगत मेट्रो के निर्माण का कार्य शुरू होगा। इंदौर मेट्रो     31.32 किमी कुल लंबाई     22.62 किमी एलिवेटेड हिस्सा     8.6 किमी भूमिगत हिस्सा     28 मेट्रो स्टेशन कुल     21 एलिवेटेड स्टेशन     7 भूमिगत स्टेशन  

इंदौर में 3 किलोमीटर लंबी गेर में मुख्यमंत्री मोहन यादव, एनआरआई सहित लाखों लोग शामिल होंगे

इंदौर  रंगों के त्योहार को पूरे जोर-शोर से मनाने बनाने के लिए इंदौर नगर निगम ने पूरी तैयारी कर ली हैं. इस बार इंदौर की गेर में आकर्षक झांकियां भी देखने मिलेंगे जो टोरी कॉर्नर से शामिल होंगी. वहीं सबसे खास नजर रहेगी नगर निगम के हाथी पर जो 150 फीट की दूरी तक लोगों पर रंग फेंकेगा. आइए जानते इंदौर की गेर और नगर निगम के इस हाथी के बारे में. 20 फीट का हाथी बरसाएगा गेर में रंग दरअसल, इंदौर नगर निगम की वर्कशॉप में वेस्ट मटेरियल और मशीनी पार्ट्स से 20 फीट का एक हाथी बनाया गया है. यह हाथी अपने सिर को चारों तरफ घूमाएगा और सूंड से लगभग डेढ़ सौ फीट ऊंचाई तक रंगों की बौछार करेगा. सोमवार को इस हाथी को अंतिम रूप दिया गया है और इसकी टेस्टिंग भी पूरी कर ली गई है. वहीं दूसरी गेर में एक मंच पर खड़ी चार स्वच्छता दीदी लोगों को रंगों से सराबोर करेंगी. इसके साथ ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव अपनी एमआईसी टीम के साथ लोगों पर रंग वर्षा करते नजर आएंगे. मुख्यमंत्री और एनआरआई भी होंगे शामिल महापौर पुष्यमित्र भार्गव और नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने बताया कि गेर में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल होने आ रहे हैं। सभी व्यवस्था की जा चुकी है। महापौर ने बताया कि पिछले दो साल से नगर निगम भी आधिकारिक रूप से शामिल हो रहा है। इस बार नगर निगम की गेर रहेगी, एनआरआई का रथ भी रहेगा। 500 से ज्यादा सफाई मित्र रहेंगे तैनात गेर के बाद सफाई व्यवस्था की भी पूरी तैयारी की जा चुकी है। 500 से ज्यादा कर्मचारी और संसाधन एक साथ लगकर रिकॉर्ड टाइम में पूरे गेर मार्ग को साफ करेंगे। इस बार के भी फोटो-वीडियो यूनेस्को को भेजे जाएंगे। भारत सरकार से भी निवेदन किया है कि यूनेस्को में पत्र भेजे और उनकी विजिट कराए। गेर के लिए अब तक की तैयारियां राजवाड़ा को ढंका गया इंदौर की विशेष पहचान राजवाड़ा को ढंकने का काम किया जा चुका है। बड़ा पीला प्लास्टिक राजवाड़ा पर लगा गया है ताकि रंगों के कारण इसे नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही गोराकुंड और सराफा क्षेत्र में बिल्डिंगों को बड़े प्लास्टिक से ढंका गया है। कई लोग भी अपने घरों को रंग-गुलाल से बचाने के लिए प्लास्टिक से कवर कर रहे हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाया पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने बताया कि गेर के पूरे रूट में 100 से 200 मीटर के सेक्टर बनाए जा रहे हैं, ताकि उसमें प्रभावी तरीके से सुरक्षा व्यवस्था की जा सके। साथ ही अन्य आकस्मिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इमरजेंसी एग्जिट रूट बनाए जा रहे हैं। हाइराइज की व्यवस्था भी की जा रही है। गेर वाली रूट पर सीसीटीवी, एंबुलेंस तमाम व्यवस्थाएं आज 19 मार्च बुधवार को परम्परागत रूप से निकल जाने वाली रंगपंचमी की गेर को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं. पूरे मार्ग पर ‍निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, साथ ही कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. बेरिकेटिंग से लेकर आकस्मिक चिकित्सा के लिए भी प्रबंध किए गए हैं. निर्धारित स्थानों पर एम्बुलेंस और अग्निशमन वाहनों की व्यवस्था भी रहेगी. इंदौर शहर की पहचान बन चुके इस त्योहार को देखन के लिए गेर वाले रूट पर नागरिकों के बैठने का भी प्रबंध किया गया है. इंदौर नगर निगम द्वारा बनाया गया रंग फेंकने वाला हाथी वहीं बिजली विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम व पुलिस विभाग की टीमों ने एकसाथ टोरी कार्नर, मल्हारगंज से लेकर राजबाड़ा, कृष्णपुरा तक के गेर मार्ग का निरीक्षण किया और तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया है. सुरक्षा दृष्टि से बीच-बीच में बंद की जाएगी बिजली गेर मार्ग पर केबल व तार पर्याप्त व सुरक्षात्मक हाइट पर किए गए हैं, वहीं कुछ स्थानों पर ट्रांसफार्मर के पुराने, क्षतिग्रस्त बॉक्स बदले गए हैं. कई इलाकों में रंग व पानी से बचाव के लिए कवर लगाए गए हैं. वहीं सुभाष चौक जोन पर बिजली कंपनी का अस्थाई कंट्रोल रूम भी बनाया गया है. ऐतिहासिक गेर के दौरान फायर फायटर से 100 से 150 फीट की ऊंचाई तक रंग उड़ाया जाएगा. इस दौरान सुरक्षात्मक कारणों से 11 केवी लाइन के कुल 14 फीडरों से अलग-अलग समय पर बिजली बंद की जाएगी. आपात स्थिति के लिए तैयार है प्रशासन कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि गेर को लेकर सभी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गेर मार्ग पर आइडेंटिफिकेशन किया गया है। कहां-कहां मंच लगाने हैं, कहां वॉच टावर बनेंगे, सीसीटीवी कैमरे लगाने की जगह भी निर्धारित की गई है। गलियों में बीच-बीच में एग्जिट रूट बनाए हैं। वहां एम्बुलेंस भी रहेगी, अगर कोई घटना हो जाती है तो उसके जरिए बाहर निकाला जा सकता है। कैबिनेट के आने की सूचना नहीं है, लेकिन हमारी पूरी तैयारी है। बैलगाड़ी से हुई थी गेर की शुरुआत गेर आयोजक कमलेश खंडेलवाल ने बताया कि आज से 75 साल पहले उनके पिता प्रेमस्वरूप खंडेलवाल, बाबूलाल गिरी और सत्यनारायण सत्तन साहब ने मिलकर इंदौर में गेर की शुरुआत की थी। बैलगाड़ी से शुरू हुआ गेमिसाइल, टैंकर, डीजे सहित मॉडर्न साधनों तक पहुंच चुका है। इस गेर की पहचान पूरे देशभर में है। गेर आयोजक शेखर गिरी ने बताया कि गेर 48 और 50 के दशक में बाबूलाल गिरी और छोटे लाल गिरी ने निकाली थी। हमारी एक पीढ़ी गेर निकाल चुकी है। दूसरी पीढ़ी गेर का संचालन कर रही है। मेरे बाद भी मेरे भाई और भतीजे भविष्य में गेर को निकालेंगे। गेर खेलने छतों की कराई जाती है बुकिंग गेर में अब ट्रैक्टर-ट्रॉली, डीजे, पानी के टैंकर और अन्य गाड़ियां शामिल होने लगी हैं। रंगपंचमी की गेर देखने के लिए लोग छतों पर बुकिंग कराने लगे हैं। पहले की अपेक्षा अब लाखों की संख्या में लोग इस गेर में शामिल होने लगे हैं। नगर निगम गेर में पिछले दो साल से आधिकारिक रूप से शामिल होने लगा है। इसमें अब एनआरआई भी शामिल होने के लिए आने लगे हैं।

सीधी का दशरथ मांझी, जिसने प्यार के चलते पहाड़ का सीना चीर के निकाला पानी

सीधी  आपने अब तक प्यार की कई ऐसी कहानियां सुनी होगी, जिसमें लोग प्यार के चक्कर में किसी भी हद तक गुजरने को तैयार हो जाते हैं. प्यार के चक्कर में कुछ लोग तो इस कदर दीवाने हो जाते हैं कि वो असंभव कार्य को भी संभव कर दिखाते हैं. अपनी पत्नी की प्यार में शाहजहां ने मुमताज की याद में संगमरमर का ताजमहल बनवा दिया तो बिहार के दशरथ मांझी ने पत्नी की याद में पहाड़ खोदकर रास्ता निकाल दिया. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के सीधी जिले से आया है, जहां हरि सिंह की पत्नी 2 किलोमीटर दूर पानी लाने जाती थी. पत्नी की परेशानी को देख हरि सिंह ने पहाड़ों का सीना चीर कर पानी निकाल दिया. लोग हरि सिंह की तुलना बिहार के दशरथ मांझी से कर रहे हैं. मध्य प्रदेश के सीधी जिले में रहने वाले 40 वर्षीय हरि सिंह ने इस बात को सच कर दिखाया है. उनकी पत्नी सियावती को हर दिन 2 किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था. यह दर्द हरि सिंह से देखा नहीं गया. उन्होंने ठान लिया कि इस समस्या का समाधान खुद ही निकालेंगे. 4 साल तक कड़ी मेहनत कर, चट्टानों से भरे पहाड़ में 60 फीट गहरा और 20 फीट चौड़ा कुआं हरि सिंह ने खोद डाला. अब यह कुआं न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए जीवनदायिनी बन चुका है. पत्नी के संघर्ष ने जगाई चेतना बरबंधा गांव की सियावती हर रोज दो किलोमीटर दूर जाकर पानी भरकर लाती थी. गर्मी में यह सफर और भी मुश्किल हो जाता था. कई बार वे बीमार भी पड़ जातीं, लेकिन पानी के बिना कोई गुजारा नहीं था. यह पीड़ा देखकर हरि सिंह के मन में सवाल उठता, “क्या हम जिंदगी भर ऐसे ही पानी के लिए भटकते रहेंगे?” फिर एक दिन यही सवाल उनके संकल्प में बदल गया और 2019 के दिसंबर में उन्होंने पहाड़ को काटने का फैसला किया. संघर्ष, जब पत्थर भी रोड़ा बने यह आसान नहीं था. जिस पहाड़ को खोदना था, वह पूरी तरह से चट्टानों से भरा था. वहां मिट्टी की परत तक नहीं थी. जिससे खुदाई बेहद मुश्किल हो गई. न कोई मशीन, न सरकार की मदद, न कोई और सहारा बस खुद की इच्छाशक्ति और परिवार का साथ. हरि सिंह दिन-रात हथौड़े और छेनी से चट्टानें तोड़ते रहे. कई बार ऐसा लगता कि यह काम असंभव है, लेकिन उनकी पत्नी और बच्चों ने उनका हौसला बनाए रखा. वहीं हरि सिंह के इस जज्बे पर पत्नी सियावती कहती हैं, “जब मैं देखती कि मेरे पति पत्थरों को तोड़ते हुए थक जाते हैं, तो मैं खुद भी उनके साथ लग जाती थी. हम सबने इसे अपनी लड़ाई मान लिया था.” चार साल की इस कठिन तपस्या के बाद दिसंबर 2023 में आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और कुएं से पानी निकल आया. गांव की उम्मीद बना ‘संकल्प कुआं’ हरि सिंह के इस प्रयास ने पूरे गांव की तकदीर बदल दी. अब यह कुआं पूरे गांव की प्यास बुझा रहा है. जहां पहले लोग पानी के लिए तरसते थे. अब वहां भरपूर पानी उपलब्ध है. गांव के बुजुर्ग रामसिंह कहते हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे गांव में खुद का कुआं होगा. यह हरि सिंह की मेहनत का ही नतीजा है कि अब हमें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता.” सरकारी उपेक्षा के बावजूद रचा इतिहास हरि सिंह ने इस दौरान प्रशासन और पंचायत से कई बार मदद मांगी, लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी. “मैंने सोचा था कि शायद सरकार कोई योजना देकर मदद करेगी, लेकिन कुछ नहीं मिला. फिर मैंने खुद ही इस समस्या का हल निकालने की ठानी,” हरि सिंह बताते हैं “अब पूरा गांव इस कुएं का लाभ उठा रहा है, और हर कोई हरि सिंह को ‘सीधी का दशरथ मांझी’ कहकर बुलाने लगा है. प्रेरणा, संकल्प और संघर्ष से हर सपना संभव हरि सिंह की कहानी यह साबित करती है कि अगर इंसान कुछ ठान ले, तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती. यह सिर्फ एक कुआं नहीं, बल्कि इंसानी हौसले और मेहनत की मिसाल है. “अगर हिम्मत हो, तो पहाड़ भी झुक सकते हैं और प्यासे को पानी भी मिल सकता है.” हरि सिंह का यह संघर्ष हर किसी के लिए एक प्रेरणा है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो असंभव भी संभव हो सकता है.” सीधी के माउन्टेन मैन ने कही यह बात.. हरि सिंह का कहना है की इस कुएं को खोदने के बाद थोड़ा बहुत पानी मिल गया है। लेकिन जब तक समुचित उपयोग के लिए पानी नहीं मिल जाता तब तक यह कुआं खोदने का कार्य उनके द्वारा लगातार जारी रहेगा। इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े। कुआं खोदने का काम विगत 3 वर्ष से उनके द्वारा जारी है। तब जाकर थोड़ा बहुत पानी मिल पाया है। इस कुएं की खुदाई के कार्य में 3 वर्ष से उनकी पत्नी सियावती व दो बच्चे तथा एक बच्ची उनकी मदद में लगे हुए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी की पानी की परेशानी को दूर कर दिया है। शुरू में यह कार्य उन्हे बहुत कठिन लग रहा था क्योंकि पूरा का पूरा पत्थर खोदना था, मिट्टी की परत एक भी नहीं थी। ऐसे में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन हार मान कर बैठने की बजाए उन्होंने इस कठिन कार्य को करने की ठानी। जिसके बाद उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने पहाड़ खोदकर पानी निकाल दिया। जाहिर है 40 वर्षीय हरि सिंह की कहानी भी दशरथ मांझी से कम नहीं है। इसीलिए लोग उन्हें सीधी के दशरथ मांझी के नाम से भी पुकारने करने लगे हैं।

केंद्र सरकार लंबे समय से डीए बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, जल्‍द बढ़ सकता है महंगाई भत्‍ता

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में बढ़ोतरी की घोषणा करने की संभावना है, जिससे एक करोड़ से अधिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी। इस कदम का कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन पर सीधा असर पड़ेगा। कैबिनेट बैठक के बाद आज डीए बढ़ोतरी की घोषणा होने की संभावना केंद्र सरकार लंबे समय से डीए बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। शुरुआत में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इसकी घोषणा होली से पहले हो सकती है। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट 19 मार्च, 2025 को अपनी अगली बैठक में इस पर अंतिम फैसला ले सकती है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो देश भर के लाखों सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों को इसका फायदा मिलेगा। 2% बढ़ोतरी की उम्मीद सरकार कथित तौर पर डीए को मौजूदा 53% से बढ़ाकर 55% करने की योजना बना रही है, यानी 2% की बढ़ोतरी। सरकारी कर्मचारी के वेतन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महंगाई भत्ता होता है, जिसे मुद्रास्फीति से निपटने में मदद के लिए साल में दो बार जनवरी और जुलाई में संशोधित किया जाता है। महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के वेतन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए हर साल दो बार (जनवरी और जुलाई) में संशोधित किया जाता है।   डीए बढ़ोतरी जनवरी 2025 में लागू होगी, बकाया का आकलन किया जाएगा चूंकि अद्यतन डीए 1 जनवरी, 2025 से लागू होने की उम्मीद है, इसलिए जनवरी से मार्च 2025 तक का बकाया कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भुगतान किया जाएगा। अक्टूबर 2024 में हाल ही में 3% की बढ़ोतरी के बाद, डीए को 1 जुलाई, 2024 से 50% से बढ़ाकर 53% कर दिया गया है। अब सभी की निगाहें 19 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां सरकार यह तय करेगी कि बढ़ोतरी को 2% पर जारी रखा जाए या अधिक राहत देने के लिए इसे और बढ़ाया जाए।  

मुख्यमंत्री यादव ने कहा- दुग्ध उत्पादन में अभी हम तीसरे नंबर पर हैं, अगले चार साल में आएंगे पहले नंबर पर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की उर्वर धरा में खेती-किसानी लाभ का व्यवसाय है। हमने इसी दिशा में काम किया। नई कृषि विधियों को अपनाया, कई नवाचार किए। यही कारण है कि आज मध्यप्रदेश कृषि विकास के मामले में पंजाब, हरियाणा और अन्य कई राज्यों से आगे निकलकर देश में अव्वल स्थान पर है। हम खेती-किसानी और किसान दोनों की समृद्धि के लिए प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में नेशनल डिफेंस कॉलेज की ओर से मध्यप्रदेश आए अध्ययन यात्रा दल को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि एवं सहकारिता में मध्यप्रदेश में बीते दशकों में लगातार काम हुआ है। खेती के साथ-साथ सिंचाई पर भी हमने काम किया है। वित्त वर्ष 2002-03 तक मध्यप्रदेश में मात्र 7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित थी। आज मध्यप्रदेश की 55 लाख से अधिक कृषि हेक्टेयर भूमि को हम सिंचित क्षेत्र में लेकर आए हैं। हम किसानों को सुविधा सम्पन्न बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। अगले तीन सालों में हमारी सरकार प्रदेश के 30 लाख किसानों को न केवल सोलर पम्प देगी, वरन् उनके द्वारा उत्पादित अतिरिक्त सोलर ऊर्जा का क्रय भी करेगी। इससे किसानों को दोहरा फायदा होगा। इसके अलावा हम किसानों को मात्र 5 रूपए की राशि पर बिजली कनेक्शन भी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में भी आगे है। देश में सबसे सस्ती बिजली देने वाला प्रदेश मध्यप्रदेश है। दिल्ली मेट्रो भी मध्यप्रदेश की बिजली से चलायमान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी), नई दिल्ली द्वारा “राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रणनीति” विषय पर आयोजित अध्ययन यात्रा के लिए मध्यप्रदेश राज्य की यात्रा के लिए आए दल ने सौजन्य भेंट की। देश के 5 मित्र देशों के प्रतिनिधि भी अध्ययन दल के साथ मध्यप्रदेश आए हैं। एनडीसी द्वारा पूरे देश के लिए ऐसे 8 अध्ययन समूह तय किए गए हैं, जिनमें से 16 सदस्यीय एक समूह मध्यप्रदेश की अध्ययन यात्रा पर है। मध्यप्रदेश आए यात्रा दल को यहां प्रदेश में ‘कृषि एवं सहकारिता’ अध्ययन शीर्षक दिया गया है। आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी को इस समूह को मध्यप्रदेश की अध्ययन यात्रा कराने का दायित्व मिला है। अध्ययन यात्रा दल ने बीते दिनों मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों का फील्ड विजिट कर कृषि एवं सहकारिता क्षेत्र में हुई प्रगति का अध्ययन किया और देखा कि मध्यप्रदेश ने इन दोनों क्षेत्रों में बेहतरीन प्रगति हासिल की है। अध्ययन दल ने पाया कि सरकार की नीतियों से किसानों की समृद्धि बढ़ी है। वहीं स्व-सहायता समूहों के जरिए प्रदेश में आजीविका विकास विशेषकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए अभूतपूर्व काम हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश आए अध्ययन दल से परिचय प्राप्त किया और दल से आग्रह किया कि उज्जैन जरूर जाइए, महाकाल के दर्शन कीजिये और देखिये कि धार्मिक पर्यटन के मामले में म.प्र. कितने आगे बढ़ा हैं। सदियों पुराने श्री महाकाल मंदिर का विकास कर हमारी सरकार ने श्री महाकाल महालोक तैयार किया। इसमें भगवान शिव की जीवंत उपस्थिति, उनका पार्वती से विवाह, सती कथा का प्रसंग सहित उनके जीवन के सभी प्रमुख पक्षों (तांडव मंत्र में दी गई 108 मुद्राओं सहित) को जीवंत कर प्रतिमाओं के रूप में उकेरा है। श्री महाकाल महालोक हमारी आस्था है, हमारी पूंजी भी है। अध्ययन यात्रा दल के संयोजक के रूप में नेशनल डिफेंस कॉलेज के श्री मुकेश अग्रवाल, इसी कॉलेज के श्री प्रकाश प्रवीण सिद्धार्थ सहित 16 सदस्यीय अध्ययन दल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से आत्मीय चर्चा कर अपने फील्ड विजिट के जागृत अनुभव (रीयलस्टिक एक्सपीरियन्स) साझा किए। यात्रा दल के सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, यह हमने खुद देखा है। कृषि के जरिए किसानों एवं स्व-सहायता समूहों के जरिए आजीविका विकास (सहकारिता की सफलता के संदर्भ में) के लिए सरकार के प्रयास नि:संदेह प्रशंसनीय है। म.प्र. में शासन, प्रशासन की मदद से लोग खुद-ब-खुद जुड़कर अपनी आजीविका और जिंदगी की सफलता की कहानी खुद लिख रहे हैं। हमने मध्यप्रदेश में सामाजिक बदलाव (सोशल चेंज) देखा है। हम मध्यप्रदेश की सफलता से अभिभूत हैं। बैठक में आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालक श्री मुजीबुर्रहमान खान ने अध्ययन यात्रा दल के उद्देश्यों और उनके आगामी दिनों के कार्यक्रम की जानकारी दी।  

माता टीला डेम में श्रद्धालुओं से भरी पलटी नाव, सात की मौत

शिवपुरी शिवपुरी में सिद्ध बाबा मंदिर पर फाग चढ़ाने जा रहे श्रद्धालुओं से भरी नाव पलट गई। इसमें सात लोगों की मौत की खबर है। सात को बचा लिया गया है। मरने वालों में दो लड़के, दो लड़कियां व तीन महिलाएं शामिल हैं। यह देर शाम की घटना है। प्रशासन मौके पर पहुंच रहा है। शिवपुरी के खनियाधाना थाना क्षेत्र स्थित माता टीला डेम में श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटी है। रजावन गांव के लोग नाव से डेम के बीच बने टापू पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर के दर्शन करने जा रहे थे। बीच रास्ते में नाव अचानक असंतुलित होकर पलट गई। नाव में सवार कई लोग डूबने लगे। तीन घंटे हो चुके हैं। लापता का कोई पता नहीं चला है, शव मिलना बाकी हैं।

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