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ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा- बिजली कंपनियों में रिक्त 2573 पदों की भर्ती से कार्यालयीन व्यवस्थाओं में काफी आसानी होगी

भोपाल ऊर्जा विभाग के अधीन तीनों बिजली वितरण कंपनियों, ट्रांसमिशन कंपनी, जनरेशन कंपनी और पॉवर मैनेजमेंट कंपनी में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के रिक्त 2573 पदों के लिए ऑनलाइन परीक्षा कार्यक्रम 20 से 30 मार्च तक घोषित कर दिया गया है। यह परीक्षा इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सतना, सागर में होगी। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि इन भर्तियों से बिजली वितरण, जनरेशन, ट्रांसमिशन कार्यों के अलावा कार्यालयीन व्यवस्थाओं में काफी आसानी होगी। ऊर्जा विभाग में भर्ती के लिए नोडल कंपनी मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया कि लॉ असिस्टेंट, असिस्टेंट लॉ ऑफिसर के लिए परीक्षा 20 मार्च को सुबह 9 से 11 बजे, स्टोर असिस्टेंट, ड्रेसर, फायर मैन, जूनियर स्टेनोग्राफर, सिक्योरिटी गार्ड के लिए दोपहर 1 से 3 और जूनियर इंजीनियर मैकेनिकल प्लांट के लिए शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। ऑफिस असिस्टेंट ग्रेड 3 के लिए 21 मार्च को तीन सत्रों में सुबह 9 से 11, दोपहर 1 से 3 और शाम 5 से 7 तक, जूनियर इंजीनियर सिविल के लिए 22 मार्च सुबह 9 से 11, प्लांट असिस्टेंट इलेक्ट्रिकल दोपहर 1 से 3, प्लांट असिस्टेंट मैकेनिकल शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। इसी तरह असिस्टेंट मैनेजर एचआर, सिक्योरिटी सब इंस्पेक्टर के लिए 23 मार्च सुबह 9 से 11, असिस्टेंट मैनेजर आईटी, सिविल अटेंडेंट व रेडियोग्राफर के लिए दोपहर 1 से 3, लेब टेक्निशियन के लिए शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। प्रबंध निदेशक ने बताया कि ईसीजी टेक्निशियन, फार्मासिस्ट, पब्लिसिटी ऑफिसर के लिए 24 को 9 से 11, एएनएम, स्टॉफ नर्स, प्रोग्रामर, वेलफेयर असिस्टेंट के लिए दोपहर 1 से 3 बजे तक, जूनियर इंजीनियर इलेक्ट्रॉनिक्स (प्लांट) के लिए शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। लाइन अटेंडेंट के लिए 26 से 29 मार्च 4 दिन सुबह 9 से 11, दोपहर 1 से 3 और शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। इसी तरह जूनियर इंजीनियर डिस्ट्रिब्यूशन, ट्रांसमिशन, प्लांट, इलेक्ट्रिकल के लिए 30 मार्च को सुबह 9 से 11, दोपहर 1 से 3 और शाम 5 से 7 तक परीक्षा होगी। प्रबंध निदेशक ने बताया कि इन परीक्षाओं के लिए करीब सवा लाख युवाओं ने एमपी ऑन लाइन के माध्यम से ऑनलाइन फार्म जमा कराए थे। प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने अभ्यर्थियों से ऑन लाइन माध्यम से प्रवेश पत्र लाउनलोड कर प्रवेश पत्र में लिखे नियम, शर्तों के अनुरूप तय समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने का अनुरोध किया है।  

अप्रैल के पहले सप्ताह में श्रीलंका की यात्रा पर जा सकते हैं पीएम मोदी, राष्ट्रपति दिसानायके दिया निमंत्रण

कोलंबो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के निमंत्रण पर अप्रैल के पहले सप्ताह में श्रीलंका की यात्रा पर जा सकते हैं। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। पीएम मोदी की संभावित यात्रा से भारत-श्रीलंका संबंधों में मजबूती आने के साथ ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच जन-केंद्रित साझेदारी को गति मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी थाईलैंड से वापस आते समय कोलंबो पहुंच सकते हैं। बैंकॉक में 2 से 4 अप्रैल तक ‘बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) शिखर सम्मेलन’ का छठा आयोजन होगा। दिसानायके ने दिसंबर में तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को ‘अपनी सुविधानुसार जल्द’ श्रीलंका की यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया था। सितंबर 2024 में पदभार ग्रहण करने के बाद दिसानायके की यह पहली विदेश यात्रा थी। दोनों नेताओं ने अपनी चर्चाओं के दौरान भारत-श्रीलंका देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और संबंधों को मैत्रीपूर्ण बनाने पर सहमति जताई। दिसानायके ने अपनी भारत यात्रा को काफी ‘सफल’ करार दिया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यात्रा के दौरान भारतीय नेतृत्व और व्यापारिक समुदाय के साथ उनकी ‘सार्थक चर्चा’ हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से अब तक तीन बार श्रीलंका का दौरा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की श्रीलंका की आखिरी यात्रा जून 2019, में ईस्टर संडे के हमलों के बाद एकजुटता व्यक्त करने के लिए हुई थी। इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च 2015 में श्रीलंका का दौरा किया था, जो 1987 के बाद से भारत के किसी प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। पीएम मोदी मई 2017 में श्रीलंका द्वारा आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय वेसाक दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

मध्य प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करके नागरिक सेवाओं में सुधार किया जाएगा

 भोपाल  भोपाल सहित प्रदेश की सात स्मार्ट सिटी में एआइ तकनीक से नागरिक सेवाएं बेहतर बनाई जाएंगी। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर एवं सतना का चयन स्मार्ट सिटी के रूप में किया गया है। चिह्नित शहरों में सुशासन और नागरिक सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन चयनित शहरों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) और इंटेलिजेंट ट्रेफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) को लागू किया गया है। रियलटाइम डाटा आईसीसीसी तकनीक स्मार्ट सिटी में नागरिक सेवाओं में डाटा संचालन और निर्णय लेने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आईसीसीसी और आईटीएमएस इन दोनों प्रणालियों में रियलटाइम में डाटा एकत्र कर त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता है। इन प्रणालियों के जरिए स्मार्ट सिटी में जल आपूर्ति, अपशिष्ट प्रबंधन, स्ट्रीट लाइटिंग और सार्वजनिक सुरक्षा जैसी शहर की सेवाओं की लगातार निगरानी संभव है। नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन में एआई को किया शामिल केंद्र सरकार ने नेशनल अर्बन डिजिटल मिशन (एनडीयूएम) में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को शामिल करने का निर्णय लिया है। आईसीसीसी तकनीक से स्मार्ट सिटी में अपशिष्ट संग्रह वाहनों की वास्तविक समय की ट्रैकिंग से समय पर कचरा निपटान और सफाई सुनिश्चित हो रही है। भविष्य में इन केंद्रों को स्वचलित अलर्ट स्वच्छता संबंधी मुद्दों को तुरंत निराकृत करने में भी सक्षम बनाया जाएगा। स्मार्ट सिटी में जल वितरण और रिसाव का पता लगाने वाली प्रणालियों को कंट्रोल रूम के माध्यम से निगरानी में रखा जा सकेगा। इससे पानी के अपव्यय को काफी हद तक कम करने और शहर में पानी की समान रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसी के साथ आईसीसीसी के माध्यम से स्मार्टग्रिड और स्ट्रीटलाइट आटोमेशन ऊर्जा की खपत को कम करने और विद्युत वितरण व्यवस्था को और दक्ष बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अपराध की रोकथाम और यातायात प्रबंधन में भी मिल रही मदद वर्तमान में इन सात स्मार्ट सिटी में आईसीसीसी के साथ एकीकृत निगरानी प्रणाली अपराध की रोकथाम और यातायात प्रबंधन में मदद कर रही है। स्मार्ट सिटी में आईटीएमएस द्वारा भीड़-भाड़ को कम करने, दुर्घटनाओं को कम करने और शहरी गतिशीलता को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। इस प्रणाली के माध्यम से ट्रैफिक सिग्नल और रियल टाइम ट्रैफिक का विश्लेषण भी किया जा रहा है। सातों स्मार्ट सिटी में 303 स्थानों पर 2301 कैमरे लगाए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में इस प्रणाली के माध्यम से करीब 27 लाख 25 हजार ई-चालान की कार्रवाईयां की गई हैं।

रेलवे के नए नियम RAC यात्रियों को पैकेट बंद बेडरोल मिलेगा, जिसमें दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और तौलिया

भोपाल ट्रेनों के एसी कोच में आरएसी टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे ने बड़ी सौगात दी है। रेलवे ने रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (आरएसी) टिकट के नियमों में बदलाव कर इसको लागू कर दिया है। रेलवे के नए नियम के अनुसार अब ट्रेनों में आरएसी टिकट के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को एसी कोच में फुल बेडरोल की सुविधा रेल प्रशासन प्रदान करेगी। नए नियम से पहले तक होती थी ये परेशानी नए नियम से पहले तक आरएसी टिकट वाले यात्रियों को साइड लोअर बर्थ की आधी सीट पर यात्रा करनी पड़ती थी। किसी दूसरे व्यक्ति के साथ में सीट शेयर करनी होती थी। साथ ही एसी में आरएसी टिकट लेकर यात्रा करने वाले दो यात्री को मिला कर एक ही बेडरोल दिया जाता था। लेकिन अब यात्रियों को पूरी एक सीट, पूरे बेडरोल सेट के साथ मिलेगी। रेलवे के इस फैसले के बाद उन सभी यात्रियों को मदद मिलेगी, जो कि टिकट के लिए पैसा तो पूरा देते थे। मगर उनको आधी सीट ही मिलती थी। रेलवे के नए नियम के मुताबिक आरएसी यात्रियों को पैकेट बंद बेडरोल मुहैया कराएगा, जिसमें यात्रियों को दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और तौलिया शामिल होगा। पैसा पूरा, फिर भी आधी सुविधा: RAC टिकट वाले यात्री पूरे किराए का भुगतान करते हैं लेकिन उन्हें साइड लोअर बर्थ की आधी सीट पर सफर करना पड़ता है. हालांकि, अब इन यात्रियों को कंफर्म टिकट धारकों की तरह बेडरोल की सुविधा मिलेगी. कोच अटेंडेंट बर्थ पर पहुंचते ही बेडरोल उपलब्ध कराएगा. क्या कहते है अधिकारी: जागरण.कॉम के हवाले से जनसंपर्क अधिकारी (वाराणसी) अशोक कुमार ने बताया कि, “आरएसी यात्रियों को कंफर्म टिकट वालों की तरह सुविधा मिलेगी. कोच अटेंडेंट बर्थ पर पहुंचते ही बेडरोल उपलब्ध कराएगा. यह व्यवस्था यात्रियों की सुविधा और संतोष के लिए लागू की गई है.” अब मिलेगी ये सुविधाएं: अब प्रत्येक RAC यात्री को एक पैकेट बंद बेडरोल प्रदान किया जाएगा, जिसमें बेडशीट, पिलो, ब्लैंकेट, और तोलिया शामिल होंगे.     आरएसी यात्रियों को पूरी सुविधा: अब आरएसी (RAC) टिकट पर सफर करने वाले दोनों यात्रियों को अलग-अलग बेडरोल दिए जाएंगे, जिससे असुविधा और कहासुनी खत्म होगी.     ठंड से राहत: एसी कोच में ठंड से बचने के लिए पैकेट में शामिल सभी सामान (बेडशीट, पिलो, ब्लैंकेट, और तोलिया) मिलेगा.     कंफर्म टिकट के बराबर सेवा: आरएसी यात्री भी अब कंफर्म टिकट धारकों की तरह सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे. रेलवे को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर RAC यात्री तक बेडरोल सही समय पर पहुंचे, ताकि यह सुविधा सुचारू रूप से लागू हो सके. ह कदम आरएसी यात्रियों के अधिकारों और उनकी यात्रा को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है.

झाबुआ मेडिकल कॉलेजअगले तीन साल में शुरू होगा, पहले चरण में एमबीबीएस की मान्यता ली जाएगी

झाबुआ देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) का पहला मेडिकल कॉलेज झाबुआ में स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसके लिए 100 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली है, और इस महीने के अंत तक जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। योजना के अनुसार, 2028-29 से मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई शुरू होगी। हालांकि, इससे पहले झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग में अगले सत्र से अस्थायी रूप से मेडिकल कॉलेज संचालित करने का प्रस्ताव रखा गया है।   डीएवीवी की पिछली कार्यपरिषद बैठक में झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद जमीन की तलाश शुरू की गई। जिला अस्पताल से करीब 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में 100 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। डीएवीवी कुलपति और झाबुआ कलेक्टर के बीच इस जमीन को लेकर सहमति बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यहां अगले तीन वर्षों में मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में एमबीबीएस कोर्स की मान्यता प्राप्त की जाएगी, और बाद में बीडीएस, आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथी के कोर्स भी इसी कैंपस में जोड़े जाएंगे। झाबुआ में लंबे समय से मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग की जा रही थी। यहां के स्थानीय लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गुजरात के दाहोद जाना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज खुलने से स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा और लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।   1200 करोड़ होगी अनुमानित लागत   झाबुआ मेडिकल कॉलेज की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने पर विचार शुरू हो चुका है। इसकी अनुमानित लागत 1200 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस परियोजना में राज्य सरकार से अनुदान मिलेगा, जबकि शेष राशि विश्वविद्यालय के बजट से खर्च की जाएगी। हालांकि, मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन को विकल्प के रूप में रखा गया है। इस भवन का उपयोग किया जाए तो मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए केवल 600 करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव भेजा है कि यदि इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन उपलब्ध हो जाता है, तो 2026-27 सत्र से ही मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई शुरू की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर विचार करने और इसे आरजीपीवी (राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) को भेजने के निर्देश दिए हैं।   डीएवीवी की पिछली कार्यपरिषद बैठक में ही झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद वहां जमीन की तलाश शुरू हुई थी। जिला अस्पताल से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर डूंगरा लालू क्षेत्र में ही 100 एकड़ जमीन मिल गई है। डीएवीवी कुलपति व झाबुआ कलेक्टर के बीच इस जमीन को लेकर सहमति बन गई है। दावा किया जा रहा है कि यहां अगले तीन साल में मेडिकल कॉलेज शुरू कर दिया जाएगा। पहले चरण में एमबीबीएस की मान्यता ली जाएगी। इसके बाद बीडीएस, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी के कोर्स भी इसी कैंपस में चलाए जाएंगे। मालूम हो, झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मांग लंबे समय से उठ रही थी। अभी यहां के लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दाहोद जाना पड़ता है। 1200 करोड़ आंकी जा रही है लागत झाबुआ मेडिकल कॉलेज की डीपीआर को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। इसकी अनुमानित लागत 1200 करोड़ आंकी जा रही है। इसमें राज्य शासन की ओर से अनुदान मिलेगा। बाकी राशि यूनिवर्सिटी के बजट से खर्च की जाएगी। हालांकि, शुरुआत के लिए विकल्प के तौर पर झाबुआ का इंजीनियरिंग कॉलेज भी रखा गया है। यहां 600 करोड़ से ही शुरुआत हो सकेगी। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने सीएम डॉ. मोहन यादव को प्रस्ताव दिया कि अगर इंजीनियरिंग कॉलेज का भवन मिल जाए तो अगले सत्र (2026-27) से ही मेडिकल कॉलेज शुरू हो सकता है। सीएम यादव ने इसे लेकर आरजीपीवी को प्रस्ताव भेजने के लिए कहा है। कॉलेज के लिए इसी महीने से काम शुरू कर देंगे ^झाबुआ में 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित कर ली है। स्थानीय प्रशासन से इसकी सहमति मिल गई है। हमारी कोशिश है कि इसी माह नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर मेडिकल कॉलेज के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया जाएगा। इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग मिलती है तो 2026 से ही एमबीबीएस कोर्स शुरू कर दिया जाएगा। – प्रो. राकेश सिंघई, कुलपति, देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी प्रशासन को जमीन पसंद आ गई है ^जिला अस्पताल से 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में जमीन यूनिवर्सिटी प्रशासन को पसंद आई है। एक और विकल्प इंजीनियरिंग कॉलेज के पास की 12 हेक्टेयर जमीन का भी है। यह मिल जाती है तो इस जगह को एजुकेशन हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। – नेहा मीणा, कलेक्टर, झाबुआ जल्द शुरू होगा कॉलेज का काम   देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राकेश सिंघई ने बताया कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज के लिए 100 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित कर ली गई है और स्थानीय प्रशासन से इसकी स्वीकृति भी मिल चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की योजना है कि इस महीने के अंत तक जमीन का नामांतरण पूरा कर लिया जाए और मेडिकल कॉलेज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। अगर इंजीनियरिंग कॉलेज की बिल्डिंग मिल जाती है, तो 2026 से ही एमबीबीएस कोर्स शुरू कर दिया जाएगा।   झाबुआ प्रशासन ने दी हरी झंडी झाबुआ की कलेक्टर नेहा मीणा ने बताया कि जिला अस्पताल से 5 किलोमीटर दूर डूंगरा लालू क्षेत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन को जमीन पसंद आई है। इसके अलावा, इंजीनियरिंग कॉलेज के पास स्थित 12 हेक्टेयर जमीन का भी एक विकल्प है। यदि यह जमीन मिल जाती है, तो इस क्षेत्र को एक प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में विकसित किया जा सकता है। इस मेडिकल कॉलेज के निर्माण से झाबुआ और आसपास के क्षेत्रों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी और लोगों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा लंबे समय से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही महिला अपने साथी पर रेप के आरोप नहीं लगा सकती क्योंकि यह सहमति से बना संबंध

नई दिल्ली  दो बालिगों में प्रेम संबंध। प्यार परवान चढ़ा। पुरुष बैंक अधिकारी तो महिला लेक्चरर। दोनों दो-चार नहीं, बल्कि 15-16 साल तक प्रेम संबंध में रहे। तमाम बार शारीरिक संबंध बनाए। फिर महिला ने एक दिन पुरुष पर शादी का झांसा देकर रेप का केस दर्ज करा दिया। आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पुरुष के खिलाफ चल रहे आपराधिक केस को रद्द करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह यकीन करना मुश्किल है कोई महिला शादी के झूठे वादे पर यकीन करके किसी से 16 साल तक संबंध बनाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामला सहमति से संबंध या लिव-इन रिलेशनशिप का है जो बिगड़ गया तो रेप का केस दर्ज करा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला लंबे समय से लिव-इन में रह रही है, तो वो अपने पार्टनर पर सिर्फ शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप नहीं लगा सकती। क्योंकि इतने लंबे समय बाद ये साबित करना मुश्किल है कि संबंध सिर्फ शादी के वादे के कारण ही बने थे। एक बैंक अफसर पर रेप का आरोप लगा था। उसकी लिव-इन पार्टनर, जो एक लेक्चरर हैं, ने कहा कि वो 16 साल तक उससे शादी के वादे के भरोसे संबंध बनाती रही। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने महिला की दलील नहीं मानी और बैंक अफसर के खिलाफ केस खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों पढ़े-लिखे हैं और ये रिश्ता उनकी मर्जी से था। दोनों अलग-अलग शहरों में पोस्टिंग के दौरान भी एक-दूसरे के घर जाते थे। कोर्ट ने कहा कि ये एक प्रेम प्रसंग या लिव-इन रिलेशनशिप का मामला है जो बिगड़ गया। कोर्ट ने कहा, ‘यह विश्वास करना कठिन है कि शिकायतकर्ता लगभग 16 वर्षों की अवधि तक अपीलकर्ता की मांगों के आगे झुकती रही, बिना कभी कोई विरोध किए कि अपीलकर्ता शादी के झूठे वादे के बहाने उसका यौन शोषण कर रहा था। 16 वर्षों की लंबी अवधि, जिसके दौरान पार्टियों के बीच यौन संबंध निर्बाध रूप से जारी रहे, यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त है कि रिश्ते में कभी भी बल या छल का तत्व नहीं था।’ साफ शब्दों में कोर्ट को लगा कि 16 साल तक बिना किसी विरोध के संबंध बनाना, ये दिखाता है कि इसमें जबरदस्ती नहीं थी। कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में भले ही मान लिया जाए कि झूठा वादा किया गया था, लेकिन इतने लंबे समय तक संबंध जारी रहने से महिला की दलील कमज़ोर हो जाती है। महिला का कहना था कि वो इस गलतफहमी में थी कि आरोपी उससे शादी करेगा, लेकिन 16 साल तक बिना किसी सवाल के संबंध जारी रखना, इस दलील को कमजोर बनाता है। कोर्ट ने कहा कि इतने समय तक चुप रहना समझ से परे है। यदि वाकई धोखा हुआ था, तो इतने सालों तक रिश्ते क्यों निभाए गए? ये एक बड़ा सवाल है।  

मध्य प्रदेश में विधि एवं विधायी विभाग के कर्मचारियों को मिली पदोन्नति, आर्थिक लाभ, महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल

भोपाल  नौ वर्ष से मध्य प्रदेश में बंद पदोन्नतियों की राह विधि एवं विधायी विभाग ने खोल दी है। विभाग ने सवा सौ से अधिक कर्मचारियों को विभागीय भर्ती नियम के अनुसार वरिष्ठताक्रम में एक जनवरी 2024 से पदोन्नति के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी दे दिया। इसमें महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारी भी शामिल हैं। ये पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण को लेकर विचाराधीन प्रकरण में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। इसी प्रक्रिया के आधार पर अब अन्य विभागों में भी सशर्त पदोन्नति दी जा सकती है। इसकी ही मांग कर्मचारी लंबे समय से कर रहे थे। मई 2016 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 को निरस्त कर दिया था। सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों का मामला विचाराधीन है। इसके कारण पदोन्नतियां बंद थीं। हजारों कर्मचारी बिना प्रमोशन हुए रिटायर हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो गए। इसका रास्ता निकालने का सरकार ने बहुत प्रयास किया पर कभी एकराय नहीं बन पाई। इस बीच विधि एवं विधायी विभाग के कर्मचारियों ने पदोन्नति न मिलने पर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति में आरक्षण नियम निरस्त हुए हैं न कि विभागीय भर्ती नियम। इसमें प्रविधान है कि एक निश्चित अवधि के बाद वरिष्ठताक्रम में उच्च पद पर पदोन्नत किया जाएगा। इसे ही आधार बनाते हुए हाई कोर्ट ने आरपी गुप्ता एवं अन्य विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य के प्रकरण में पारित आदेश के अनुसार समिति बनाकर भर्ती नियम 2010 के प्रविधान के अंतर्गत नए पदों को सम्मिलित करते हुए पदोन्नति दी गई। साथ ही विभाग के प्रमुख सचिव नरेंद्र प्रताप सिंह ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ये पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरक्षण से संबंधित प्रकरण के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। मंत्री समिति भी बनाई उधर, सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार पदोन्नति का रास्ता निकालने को लेकर गंभीर है और काफी समय से प्रयास भी चल रहे हैं। मंत्री समिति भी बनाई गई और विधिक परामर्श भी लिया गया। कर्मचारी संगठनों से भी चर्चा की लेकिन एक राय नहीं बनी। अब सभी परिस्थितियों को देखते हुए आगामी कदम उठाए जाएंगे। बढ़ा हुए वेतन भी मिल जाएगा उधर, मंत्रालयीन अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक का कहना है कि पदोन्नति का सबसे बेहतर विकल्प समयमान वेतनमान देकर पदनाम दे दिया जाए तो सारी समस्या ही समाप्त हो जाएगी। इससे बढ़ा हुए वेतन भी मिल जाएगा और पदनाम भी बदल जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग विधिक अभिमत लेने के बाद इसे लेकर नौ मार्च 2020 को परिपत्र जारी किया था। यही व्यवस्था राज्य प्रशासनिक सेवा, वित्त सेवा सहित अन्य सेवाओं में लागू हो चुकी है।

प्रति वर्ष पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करने के लिए अप्रैल से एक योजना लेकर आएगी: मुख्यमंत्री लालदुहोमा

आइजोल मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 15,198.76 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इसमें किसानों एवं छोटे उद्यमियों के लिए संचालित ‘बाना कैह’ योजना का वित्तीय आवंटन 75 प्रतिशत बढ़ाने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने राज्य विधानसभा में अगले वित्त वर्ष का बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार लाभार्थियों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान करने के लिए अप्रैल से एक योजना लेकर आएगी। बजट में नया कर लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है। यह बजट 15,198.76 करोड़ रुपये का है, जो पिछले वर्ष के 14,412.12 करोड़ रुपये से 5.4 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्रालय का भी प्रभार रखने वाले लालदुहोमा ने चालू वित्त वर्ष (2024-25) के लिए 3,512.33 करोड़ रुपये के अनुदान की अनुपूरक मांगें भी पेश कीं। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि राज्य सरकार के प्रमुख कार्यक्रम ‘बाना कैह’ योजना के लिए बजट में 350 करोड़ रुपये आवंटित किए जा रहे हैं, जो चालू वित्त वर्ष में निर्धारित 200 करोड़ रुपये से 75 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल सितंबर में शुरू की गई बाना कैह योजना का उद्देश्य उद्यमियों और किसानों की आर्थिक वृद्धि और आत्मनिर्भरता के लिए तैयार कार्यक्रमों के जरिए वित्तीय सहायता और समर्थन देना है। इस योजना में राज्य सरकार ने प्रमुख फसलों- अदरक, हल्दी, मिजो मिर्च और झाड़ू के लिए समर्थन मूल्य पेश किए। लालदुहोमा ने कहा कि उनकी सरकार अगले वित्त वर्ष में किसानों से चार कृषि फसलों की खरीद जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अप्रैल से एक योजना शुरू करेगी जिसमें लाभार्थियों को प्रति वर्ष पांच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा। लालदुहोमा ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजस्व प्राप्ति और पूंजीगत प्राप्ति के तहत अनुमानित कुल राशि 15,198.76 करोड़ रुपए है। इसके साथ राजस्व व्यय 12,540.20 रुपए रहने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने मिजोरम की विकास यात्रा को ‘विकसित भारत’ पहल के साथ जोड़ने का संकल्प व्यक्त किया, यह सुनिश्चित करते हुए कि पेंशन लाभ समय पर वितरित किए जाएं, बिजली खरीद के बकाए का निपटान किया जाए, और मिजोरम स्वास्थ्य योजना के तहत स्वास्थ्य बिलों का 80 प्रतिशत निपटान किया जाए। क्षेत्रवार बजट आवंटन सामान्य सेवाएं: 14.95% की वृद्धि आर्थिक सेवाएं: 7.27% की वृद्धि पूंजीगत व्यय: 8.29% की वृद्धि सामाजिक सेवाएं: 4.4% की गिरावट मुख्य घोषणाएं और व्यय योजनाएं – कराधान आधुनिकीकरण: कर संग्रह बढ़ाने के लिए कराधान विभाग को अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति द्वारा सुदृढ़ किया जाएगा। – खाद्य सब्सिडी का अनुकूलन: खर्चों को सुव्यवस्थित करने के लिए राशन चावल की खरीद में ₹20 करोड़ की कमी की जाएगी। – रेशम उद्योग को बढ़ावा: रेशम की कीमतों में प्रति किलोग्राम 16% की वृद्धि की जाएगी। – स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: मिजोरम राज्य स्वास्थ्य योजना (एमएसएमएस ) के लिए ₹20 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ की राशि आवंटित की जाएगी, ताकि अस्पतालों के बिलों का समय पर भुगतान और सुविधाओं का उन्नयन सुनिश्चित किया जा सके। 2025-26 के लिए मुख्य आवंटन – 350 करोड़ रुपये को हैंड-होल्डिंग योजनाओं के लिए आवंटित किया गया है, जो पिछले वर्ष के 200 करोड़ से 75% अधिक है। – 500 करोड़ रुपये बिजली खरीद के लिए, पिछले वर्ष की तुलना में ₹50 करोड़ की वृद्धि, साथ ही 20 करोड़ रुपये बिजली ढांचे के विकास के लिए। – 100 करोड़ रुपये सड़क निर्माण और सुधार के लिए आवंटित किए गए हैं। – 55 करोड़ रुपए सड़क निधि बोर्ड के लिए, साथ ही सड़क रखरखाव सेस से ₹15 करोड़ अतिरिक्त। – 5 करोड़ रुपए अंतिम संस्कार खर्च के लिए निर्धारित किए गए हैं। – विधायक निधि अपरिवर्तित रखी गई है। यह बजट मिजोरम सरकार की वित्तीय विवेकशीलता, अवसंरचनात्मक विकास और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की प्रतिबद्धता को उजागर करता है, साथ ही ऋण कम करने और राजस्व संग्रह पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

श्रीनगर : 25 जून से शुरू हो जाएगी अमरनाथ यात्रा, 9 अगस्त तक होगी यात्रा अवधि….

श्रीनगर  इस साल अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए तारीख सामने आ गई है। श्रद्धालुओं के लिए बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई शुरू होगी और 9 अगस्त तक चलेगी। 39 दिनों तक चलने वाली यात्रा के लिए प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। श्री अमरनाथ यात्रा का शेड्यूल जारी हो गया। इसे लेकर श्रद्धालु 3 जुलाई से 9 अगस्त तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। अमरनाथ यात्रा 39 दिनों तक चलेगी। जानकारी के मुताबिक श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (Shri Amarnath Ji Shrine Board) जल्द ही एडवांस पंजीकरण के लिए अधिकृत किए जाने वाले बैंकों की शाखाओं की विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवाएगा। चूंकि पंजीकरण के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जरूरी है। इसलिए देश भर के राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनने वाले अस्पतालों व डॉक्टरों की टीमों की सूची जारी की जाएगी। आम तौर पर पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक और जम्मू कश्मीर बैंकों की करीब साढ़े पांच सौ शाखाओं से पंजीकरण करने की व्यवस्था होती है। बोर्ड जल्द ही ग्रुप पंजीकरण के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण को भी खोला जाएगा। कितनी ऊंचाई पर हैं अमरनाथ गुफा? यात्रा स्कंद षष्ठी के शुभ अवसर पर शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर समाप्त होती है। वर्ष के इस समय के दौरान, तीर्थयात्रियों के लिए मौसम काफी सुखद रहता है। यह क्षेत्र वर्ष के बाकी समय बर्फ से ढका रहता है, इसलिए उन महीनों के दौरान यहां नहीं जाया जा सकता है। अमरनाथ की यात्रा श्रीनगर और पहलगाम से शुरू होती है और अमरनाथ गुफा तक जाती है जो 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इन मार्गों से होती है अमरनाथ यात्रा 38 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से होती है। एक एास्ता अनंतनाग जिले में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग का है जबकि दूसरा रास्ता गांदेरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबा बालटाल से होते हुए है। श्रीनगर से 141 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 12,756 फीट की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ यात्रा करने के लिए हर साल लाखों की तादाद में भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन करने पहुंचते हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए कहां से करें रजिस्ट्रेशनबाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है। ऐसे में भक्त श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट https://jksasb.nic.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा अमरनाथ श्राइन बोर्ड की मोबाइल एप्लिकेशन से भी अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। यात्रा का मार्ग      मंद‍िर तक पहुंचने वाले मार्ग पर बेहद ही कठ‍िनाई होती है। लिहाजा इसल‍िए अमरनाथ यात्रा मार्ग को जुलाई-अगस्त के आसपास श्रावण के महीने में ही जनता के लिए खोला जाता है। सड़क के रास्ते अमरनाथ पहुंचने के लिए पहले जम्मू तक जाना होगा फिर जम्मू से श्रीनगर तक का सफर करना होता है। श्रीनगर से तीर्थयात्री पहलगाम या बालटाल पहुँचते हैं। पहलगाम या बालटाल तक आप किसी भी वाहन से पहुंच सकते हैं लेकिन इससे आगे का सफर आपको पैदल ही करना होता है। क्योंकि पहलगाम और बालटाल से ही श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत होती है और पवित्र गुफा तक पहुंचने के लिए यहाँ से दो रास्ते निकलते हैं। पहलगाम से अमरनाथ की पवित्र गुफा की दूरी जहाँ करीब 48 किलोमीटर है वहीं बालटाल से गुफा की दूरी 14 किलोमीटर है। यहाँ से तीर्थयात्रियों को पैदल मार्ग से ही गुफा तक यात्रा करनी होती है।   चूँकि बालटाल से अमरनाथ गुफा तक की दूरी कम है और यह छोटा रूट है लिहाजा तीर्थयात्री कम समय में गुफा तक पहुंच सकते हैं। लेकिन यह रास्ता काफी कठिन और सीधी चढ़ाई वाला है इसलिए इस रूट से ज्यादा बुजुर्ग और बीमार नहीं जाते हैं। जबकि बात करें पहलगाम रूट की तो यह अमरनाथ यात्रा का सबसे पुराना और ऐतिहासिक रूट है। इस रूट से गुफा तक पहुंचने में करीब 3 दिन लगते हैं। लेकिन यह ज्यादा कठिन नहीं है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनवाड़ी का आता है जो पहलगाम बेस कैंप से करीब 16 किलोमीटर दूर है यहां तक रास्ता लगभग सपाट होता है इसके बाद चढ़ाई शुरू होती है। इससे अगला स्टॉप 3 किलोमीटर आगे पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव शेषनाग है जो पिस्सू टॉप से करीब 9 किलोमीटर दूर है। शेषनाग के बाद अगला पड़ाव पंचतरणी का आता है जो शेषनाग से 14 किलोमीटर दूर है। पंचतरणी से पवित्र गुफा केवल 6 किलोमीटर दूर रह जाती है। पिछले साल 29 जून से शुरू हुई थी यात्रा पिछले साल अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था 29 जून को रवाना हुआ था. यह यात्रा रक्षाबंधन के दिन यानी 19 अगस्त तक चली थी. पिछले साल श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. जम्मू-कश्मीर पुलिस की सुरक्षा विंग ने जम्मू में अमरनाथ बेस कैंप के आसपास के इलाके में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए थे.

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बाघ-चीतों के संरक्षण पर जताई प्रसन्नता, माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे बाघों का जोड़ा

माधव नेशनल पार्क होगा प्रदेश का 9वां बाघ संरक्षित क्षेत्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव वन्यजीव प्रेमियों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा चंबल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे बाघों का जोड़ा मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बाघ-चीतों के संरक्षण पर जताई प्रसन्नता, माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे बाघों का जोड़ा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत में टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल कर चुके मध्यप्रदेश को जल्द ही एक नए टाइगर रिजर्व पार्क की सौगात मिलने जा रही है। शिवपुरी जिले का माधव नेशनल पार्क प्रदेश का 9वां बाघ संरक्षित क्षेत्र होगा, जो चंबल क्षेत्र में वन्य जीव प्रेमियों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वे स्वयं बाघों का एक जोड़ा माधव नेशनल पार्क में छोड़ेंगे। चंबल रेंज में पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से स्थानीय युवाओं को रोजगार-स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। एशिया में पहली बार चीते भी चंबल के कूनो नेशनल पार्क में दिखाई दे रहे हैं। चंबल नदी क्षेत्र में घड़ियाल एवं डॉल्फिन प्रोजेक्ट पर भी कार्य चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मीडिया को जारी संदेश में कहा कि देश में सबसे ज्यादा टाइगर मध्यप्रदेश में हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक मध्यप्रदेश आते हैं। बाघ संरक्षित क्षेत्र में जंगल सफारी का आनंद लेने के लिए सभी नेशनल पार्कों में सीजन भर पर्यटकों का आवागमन रहता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में बाघों की संख्या और उनके संरक्षण से प्राप्त उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित प्रदेशवासियों को बधाई दी।  

वो हमपर टैक्स लगाएंगे, तो हम भी लगाएंगे… ट्रंप ने भारत को अधिक टैरिफ पर दी चेतावनी

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले संयुक्त सत्र में कई बड़े मसलों पर बात की. उन्होंने फ्री स्पीच पर जोर दिया और टैरिफ के फैसले का खुलकर बचाव किया. उन्होंने भारत का भी जिक्र किया और कहा, चीन, कनाडा, मेक्सिको और भारत हम पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाते हैं. ट्रंप का कहना था कि भारत जो टैक्स लगाता है, वो उचित नहीं है. ट्रंप ने भाषण में दो बार भारत का नाम लिया. उन्होंने ऐलान किया कि 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाया जाएगा. अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत, ब्राजील और दक्षिण कोरिया बहुत ज्यादा टैरिफ लगाते हैं. ये अच्छी बात नहीं है. जो भी देश हम पर टैरिफ चार्ज लगाएंगे, हम भी उन पर चार्ज लागू करेंगे. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. टैरिफ से अमेरिका को फिर से अमीर बनाना है. ट्रंप ने कहा, हमारा प्रशासन अमेरिका की जरूरत के अनुसार बदलाव लाने के लिए प्रयास कर रहा है. यह बड़े सपने देखने और साहसिक कार्रवाई का समय है. हमने सभी पर्यावरणीय प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया है जो हमारे देश को कम सुरक्षित और पूरी तरह से अप्रभावी बना रहे थे. ट्रंप ने कहा, हमने 43 दिन में जो किया है, वो कई सरकारें अपने 4 या 8 साल के कार्यकाल में भी नहीं कर पाई हैं. ट्रंप ने जो बाइडेन पर भी तंज कसा और उन्हें इतिहास का सबसे खराब राष्ट्रपति बताया. भारत और चीन के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका 2 अप्रैल को भारत और चीन समेत अन्य देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा. उन्होंने कहा, वे हम पर जो भी टैरिफ लगाएंगे, हम उन पर टैरिफ लगाएंगे. अन्य देशों ने दशकों से हमारे खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल किया है और अब हमारी बारी है कि हम उन अन्य देशों के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल करना शुरू करें. यूरोपीय संघ, चीन, ब्राजील, भारत और अनगिनत अन्य देश हमसे बहुत ज्यादा टैरिफ वसूलते हैं. यह बहुत अनुचित है. भारत हमसे 100 प्रतिशत टैरिफ वसूलता है. यह सिस्टम अमेरिका के लिए उचित नहीं है. यह कभी नहीं था. उन्होंने कहा, 2 अप्रैल से पारस्परिक टैरिफ लागू हो जाएंगे. यदि वे हमें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लगाते हैं, तो हम उन्हें अपने बाजार से बाहर रखने के लिए नॉन मोनेटरी टैरिफ लागू करेंगे. ट्रंप के संबोधन की बड़ी बातें यहां पढ़ें:- – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हम यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इस युद्ध में हजारों लोग मारे गए हैं इसलिए इसे रोकना होगा. – ट्रंप ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी सरकार पनामा नहर पर दोबारा कब्जा करेगी और हमने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि हम ग्रीनलैंड के लोगों के अधिकार का सम्मान करते हैं कि उन्हें अपने भविष्य का सम्मान करने का हक है. लेकिन हम चाहते हैं कि ग्रीनलैंड हमारा हिस्सा बने. हम आपको समृद्ध बनाएंगे इसलिए आप हमसे हाथ मिला लें वरना हम किसी न किसी तरीके से ऐसा कर ही लेंगे. लेकिन यकीन दिलाते हैं कि हम आपको सुरक्षित रखेंगे. – संसद को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम जल्द ही एक एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन करेंगे, जिसके बाद पुलिस अधिकारी किसी हत्या करने पर मौत की सजा का प्रावधान होगा. – ट्रंप ने कहा कि टैरिफ की रकम से अमेरिका फिर से समृद्ध होगा. इससे अमेरिका दोबारा ग्रेट और अमीर बनेगा और यह हो रहा है. – राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अब अवैध प्रवासियों से छुटकारा चाहिए. हमारे देश के कुछ कब्जों में इन अवैध प्रवासियों का कब्जा है. हमें इनसे छुटकारा चाहिए और हम इन्हें देश से बाहर निकालकर रहेंगे. – ट्रंप ने कहा कि यह समय बड़े सपनों और बोल्ड फैसलों का है. लेकिन अब हमारा मकसद अमेरिका को फिर से अफोर्डेबल बनाना है. अब हमारा देश Woke नहीं रहेगा. – अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा कि कनाडा, मेक्सिको, भारत और दक्षिण कोरिया बहुत टैरिफ लगाते हैं. हम दो अप्रैल से कनाडा, मेक्सिको, चीन और भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाएंगे. जो हम पर टैक्स लगाएंगे, हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे. – डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमसे उगाहे गए पैसों को वसूल कर देश की महंगाई को काबू में करेंगे. मैं अभी तक बाइडेन की असफल नीतियों को दुरुस्त करने में लगा हुआ है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के संबोधन के बीच डेमोक्रेट सांसद Al Green को संसद से बाहर का रास्ता दिखाया गया. उन्हें राष्ट्रपति के संबोधन में व्यवधान डालने के लिए बाहर किया गया. – ट्रंप ने कहा कि अब सिर्फ दो ही जेंडर होंगे महिला और पुरुष. मैंने पुरुषों के महिला खेल खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया है. – अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संबोधन में फ्री स्पीच की भी बात की. ट्रंप ने कहा कि मैंने कुछ दिन पहले अंग्रेजी भाषा को एकमात्र आधिकारिक भाषा बनाया. गल्फ ऑफ मेक्सिको को गल्फ ऑफ अमेरिका किया. – अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हमने फैसला किया है कि हर एक नया फैसला लेने पर पुराने 100 फैसलों को रद्द किया जाएगा. – ट्रंप ने कहा कि यह बड़े सपनों और बोल्ड एक्शन का समय है. DOGE इसमें बेहतरीन काम कर रहा है. हमने बेहूदा नीतियों को खत्म कर दिया है. भ्रष्ट हेल्थ पॉलिसी को भी खत्म कर दिया है. बाइडेन सरकार की उन नीतियों को तुरंत प्रभाव से खत्म किया है, जिससे देश को फायदा नहीं हो रहा था. – ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मोमेंटम वापस आ गया है. हमारी रूह वापस आ गई है. हमारा गौरव वापस आ गया है. हमारा विश्वास लौट आया है और अब अमेरिकी लोग अपने सपने पूरे कर पाएंगे. – ट्रंप ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि हमने सिर्फ 43 दिनों में वह कर दिखाया है, जो पिछली सरकारों ने चार साल में भी नहीं किया. – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि America is Back. – … Read more

कुवैत: रमजान के दौरान सार्वजनिक स्थान पर खाने-पीने पर होगी जेल, सरकार ने जारी किया आदेश

 कुवैत इस्लाम का पवित्र महीना रमजान शुरू हो चुका है. इस पूरे महीने मुसलमान रोजा रखते हैं जिसमें सूरज उगने से पहले और डूबने के बाद ही कुछ खाया-पीया जाता है. उपवास यानी रोजा को लेकर मुस्लिम देशों में अलग-अलग नियम हैं. इसी बीच कुवैत ने एक ऐसा नियम बनाया है जिसे तोड़ने पर जेल की सजा भी हो सकती है. कुवैत के नए नियम के मुताबिक, अगर किसी ने उपवास के घंटों में सार्वजनिक जगह पर खाना-पीना किया तो उस पर 100 दिनार (28,230 रुपये) का जुर्माना लगाया जाएगा और जेल भी हो सकती है. गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नियम में सार्वजनिक जगहों पर खाने-पीने से मना किया गया है. उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ-साथ अधिकतम एक महीने की जेल भी हो सकती है. कब माना जाएगा रोजे का उल्लंघन? अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर सार्वजनिक स्थान पर खाता है, पानी पीता है या धूम्रपान करता है और अपने किए की कोई वाजिब वजह नहीं बता पाता तो इसे रोजा नियम का उल्लंघन माना जाएगा. वाजिब वजहों में बीमार होना या लंबी यात्रा करना शामिल है. कुवैती अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि जो लोग रोजा नहीं रख रहे, वो सार्वजनिक स्थानों के बजाए प्राइवेट में खाना-पीना करें. कुवैत का यह नियम वहां की कंपनियों और अन्य व्यवसायों पर भी लागू होता है. अगर कोई कंपनी या प्रतिष्ठान सार्वजनिक रूप से खाने-पीने की अनुमति देता है तो सजा के तौर पर कम से कम उसे दो महीने तक बंद कर दिया जाएगा. कुवैत की नगर पालिका ने दुकान और रेस्टोरेंट के खुले रहने के घंटों पर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत सूर्यास्त से दो घंटे पहले इफ्तार की तैयारियों के लिए वो खुले रह सकते हैं. किन मुसलमानों को रोजा न रखने की होती है छूट? रोजा रखना सभी मुसलमानों के लिए जरूरी होता है. लेकिन छोटे बच्चों को रोजा न रखने की छूट होती है. तरुणावस्था में प्रवेश करने के बाद उनका रोजा रखना भी जरूरी होता है. बच्चों के अलावा बीमार लोगों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं और यात्रा कर रहे लोगों को रोजा न रखने की छूट होती है. रोजा के नियम -यौवनावस्था में पहुंच चुके सभी स्वस्थ मुसलमानों को रमजान के महीने में उपवास करना चाहिए. -अगर कोई बीमार है तो ठीक होते ही उसे अगले दिन रोजा रखना चाहिए. -जो लोग किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और रोजा नहीं रख सकते, उन्हें फिदया अदा करना चाहिए. इसका मतलब है कि रोजा छूटने के बाद रमजान में हर दिन जरूरतमंदों को खाना खिलाना चाहिए. -रमजान के महीने में यात्रा करने से बचना चाहिए, जब तक कि बहुत जरूरी न हो. लेकिन अगर यह जरूरी हो, तो यात्रा के बाद फिर से रोजा शुरू करना चाहिए. -रोजा के वक्त सहरी और इफ्तार के सही वक्त का ध्यान रखना चाहिए और तय समय पर ही खाना चाहिए. सूरज उगने से पहले किए जाने वाले भोजन को सहरी कहते हैं और सूरज डूबने के बाद खाना खाकर रोजा तोड़ने को इफ्तार कहते हैं. -उपवास के दौरान भोजन, पानी, धूम्रपान से बचना चाहिए. इस दौरान यौन संबंधों से भी दूर रहने की सलाह दी जाती है. -रोजे में झूठ बोलना, लड़ना, गाली देना और बहस करने की मनाही होती है.  

केदारनाथ में रोप-वे, 36 मिनट में होगी 9 घंटे की यात्रा मोदी कैबिनेट का हेमकुंड साहिब, 3 बड़े फैसले

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज यानी बुधवार (5 मार्च 2025) को उत्तराखंड को बड़ा तोहफा मिला है. केंद्र की मोदी सरकार ने उत्तराखंड में केदारनाथ धाम के लिए रोप वे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. सोनप्रयाग से केदारनाथ तक  12.9  किलोमीटर का रोपवे होगा, जिसमें 4081 करोड़ रुपया खर्च होगा. नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट इसे बनाएगा. इसके बनने से 8 से 9 घंटे की यात्रा सिर्फ 36 मिनट पूरी हो जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने सोनप्रयाग से केदारनाथ (12.9 किमी) तक 12.9 किमी रोपवे परियोजना के निर्माण को मंजूरी दे दी है. परियोजना को डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और स्थानांतरण (डीबीएफओटी) मोड पर 4,081.28 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत पर विकसित किया जाएगा. यह सबसे एडवांस्ड ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा. इसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटे प्रति दिशा (पीपीएचपीडी) होगी, जो प्रति दिन 18,000 यात्रियों को ले जाएगी. रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान होगी क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटाकर लगभग 36 मिनट कर देगी. सिर्फ 36 मिनट की हो जाएगी यात्रा यह सबसे एडवांस्ड ट्राई-केबल डिटेचेबल गोंडोला (3एस) तकनीक पर आधारित होगा. इसकी डिजाइन क्षमता 1,800 यात्री प्रति घंटे प्रति दिशा (पीपीएचपीडी) होगी, जो प्रति दिन 18,000 यात्रियों को ले जाएगी. रोपवे परियोजना केदारनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वरदान होगी क्योंकि यह पर्यावरण-अनुकूल, आरामदायक और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और एक दिशा में यात्रा का समय लगभग 8 से 9 घंटे से घटाकर लगभग 36 मिनट कर देगी. केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और वर्तमान में इसे पैदल या टट्टू, पालकी और हेलिकॉप्टर द्वारा तय किया जाता है. प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है. गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किमी रोपवे प्रोजेक्ट को मंजूरी कैबिनेट की बैठक में गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब जी तक 12.4 किलोमीटर रोपवे प्रोजेक्ट के निर्माण को भी मंजूरी मिल गई है. इस परियोजना की कुल लागत 2,730.13 करोड़ रुपये होगी. वर्तमान में हेमकुंड साहिब जी की यात्रा गोविंदघाट से 21 किलोमीटर की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है. यह रोपवे प्रोजेक्ट गोविंदघाट और हेमकुंड साहिब जी के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा. इसका डिजाइन इस तरीके से तैयार किया जाएगा जिससे इसकी क्षमता प्रति घंटे प्रति दिशा 1,100 यात्री (पीपीएचपीडी) होगी और यह प्रतिदिन 11,000 यात्रियों को ले जाएगा. हेमकुंड साहिब जी उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक तीर्थ स्थल है. इस पवित्र स्थल पर स्थापित गुरुद्वारा मई से सितंबर के बीच साल में लगभग 5 महीने के लिए खुला रहता है और हर साल लगभग 1.5 से 2 लाख तीर्थयात्री यहां आते हैं. पशुओं के स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम के लिए बड़ा फैसला केंद्र सरकार ने आज पशुओं के स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम के लिए 3,880 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है. यह कैबिनेट का तीसरा बड़ा फैसला है, जो पशुपालकों और किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा. पशुओं में होने वाली दो बड़ी बीमारियां हैं, खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) और ब्रुसेलोसिस. सभी पशुओं का संपूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किया जाएगा. मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स की मदद से किसानों को घर-घर पशु स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी. रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए ‘भारत पशुधन पोर्टल’ लॉन्च किया जाएगा, जिससे टीकाकरण और अन्य सेवाओं पर नजर रखी जा सकेगी. PM-किसान समृद्धि केंद्र और सहकारी समितियों के माध्यम से जेनरिक दवाएं किसानों तक पहुंचेंगी. पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए एथनो-वेटरनरी मेडिसिन्स को भी प्रोत्साहित किया जाएगा. सरकार के अनुसार, टीकाकरण कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं. करीब 9 राज्य FMD-मुक्त होने की कगार पर हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा. केदारनाथ मंदिर तक की यात्रा गौरीकुंड से 16 किमी की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई है और वर्तमान में इसे पैदल या टट्टू, पालकी और हेलिकॉप्टर द्वारा तय किया जाता है. प्रस्तावित रोपवे की योजना मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा प्रदान करने और सोनप्रयाग तथा केदारनाथ के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है. केंद्र सरकार के इस कदम से चारधाम यात्रा को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यवसायों को लाभ मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को बल मिलेगा. इससे पूरे छह महीने तीर्थयात्रियों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे शुरुआती दो महीनों में संसाधनों पर अत्यधिक दबाव कम होगा. इतना ही नहीं यात्रा सीजन में रोजगार के अवसरों में भी बढ़ोतरी होगी. केदारनाथ रोपवे परियोजना उत्तराखंड रोपवे अधिनियम, 2014 के तहत संचालित होगी, जो लाइसेंसिंग, संचालन की निगरानी, सुरक्षा और किराया निर्धारण का कानूनी ढांचा प्रदान करता है. वहीं दूसरा प्रोजेक्ट हेमकुंड साहिब में रोप वे प्रोजेक्ट बनने का है, जिसके लिए 2730 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट से हेमकुंड साहिब और वैली ऑफ फ्लावर तक की यात्रा की जा सकेगी.

भोपाल में एक करोड़ की ठगी करने वाले कॉल सेंटर मामले में, थाना प्रभारी समेत 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगी के कॉल सेंटर मामले में लापरवाही और साठगांठ के आरोप में ऐशबाग थाना प्रभारी (TI) जितेंद्र गढ़वाल समेत 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने सबूतों के आधार पर यह सख्त कार्रवाई की. इस मामले में पहले से ही एक ASI पवन रघुवंशी लाइन अटैच था. दरअसल, शहर के प्रभात चौराहे के पास संचालित कॉल सेंटर का सरगना अफजल खान  लोगों को मुनाफे का झांसा देकर निवेश करवाता था. शिकायत मिलने पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कॉल सेंटर पर छापा मारा. छापेमारी में 100 कंप्यूटर, कई मोबाइल और 29 सिम जब्त किए गए. अफजल खान और उसकी बेटी साहिबा खान के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया. जांच में कॉल सेंटर कर्मचारियों के करीब 50 बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई. साठगांठ के सबूत जांच में पता चला कि ऐशबाग टीआई जितेंद्र गढ़वाल और कुछ पुलिसकर्मी कॉल सेंटर संचालकों के साथ मिले हुए थे. पुलिस कमिश्नर को सबूत मिलने के बाद गढ़वाल और तीन अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया. यह कार्रवाई साइबर ठगी की जांच में लापरवाही और संलिप्तता के गंभीर आरोपों के बाद की गई. ASI पवन रघुवंशी पहले ही इस मामले में लाइन अटैच हो चुका था. पुलिस कमिश्नर का सख्त रुख पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्रा ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ जांच में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह सस्पेंशन पुलिस महकमे में साफ-सफाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. जांच अभी जारी है, और कॉल सेंटर के अन्य संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है. जनता में चर्चा यह घटना भोपाल में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रही है. लोगों का कहना है कि अगर पुलिसकर्मी ही ठगों के साथ मिल जाएंगे, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे होगी. इस कार्रवाई से पुलिस की साख को मजबूत करने की उम्मीद जताई जा रही है.  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जीआईएस-भोपाल में देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न पर काम करते हुए मध्यप्रदेश भी तेजी के साथ एक मजबूत स्टार्ट-अप हब के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए युवा उद्यमियों की आकांक्षाओं के अनुकूल स्टार्ट-अप कल्चर को विकसित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना है, जहां युवा उद्यमियों के आइडियाज को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए अनुकूल माहौल और पूरा सहयोग मिले। जीआईएस-भोपाल में आयोजित ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ सेशन नें प्रदेश के स्टार्ट-अप्स इकोसिस्टम को पंख दे कर ग्लोबल बना दिया है। आधुनिक तकनीक के इस युग में देश के स्टार्ट-अप जगत में मध्यप्रदेश बहुत तेजी से अपनी उपस्थिति दर्ज चुका है। जीआईएस-भोपाल में 20 से अधिक यूनिकॉर्न के संस्थापकों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है। स्टार्ट-अप पर फोकस्ड सेशन ‘फ्यूचर-फ्रंटियर : स्टार्ट-अप पिचिंग’ में शामिल होने के लिए कुल 180 स्टार्ट-अप्स ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 25 हाईली पोटेंशियल स्टार्ट-अप्स ने प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों के विश्लेषण के बाद उन्हें जरूरी मार्गदर्शन और निवेश के अवसर भी मिले। इस सेशन में कुल 47 स्टार्ट-अप शामिल हुए थे। इनमें से 19 स्टार्ट-अप्स को एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्राप्त हुए। आईआईसीई ने 4 स्टार्ट-अप्स में रुचि दिखाई, एसजीएसआईटीएस ने 3 स्टार्ट-अप्स में, सिल्वर नीडल वेंचर्स ने 3 स्टार्ट-अप्स में, आईटीआई ग्रोथ ने 3 स्टार्ट-अप्स में, ईज़ीसीड ने 7 स्टार्ट-अप्स में, सीफंड ने 3 स्टार्ट-अप्स में, वेंचर कैटालिस्ट्स ने 10 स्टार्ट-अप्स में, वीएएसपीएल इनिशिएटिव्स ने 4 स्टार्ट-अप्स में, एआईस-आरएनटीयू ने 5 स्टार्ट-अप्स में तथा इक्वैनिमिटी इन्वेस्टमेंट्स ने 5 स्टार्ट-अप्स में निवेश की अभिरुचि प्रदर्शित की। स्टार्ट-अप्स को मिल रही है वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन मध्यप्रदेश में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिये महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति के उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 18 फीसदी, अधिकतम 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिल रही है। अन्य स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 15 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 15 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसके साथ इन्क्यूबेटर विस्तार के लिए 5 लाख रुपये का एक मुश्त अनुदान, स्टार्ट-अप्स के ऑफिस किराए में 50 फीसदी राशि की वापसी (तीन वर्षों तक प्रतिमाह 5,000 रुपये) की भी व्यवस्था की गई है। नीति में पेटेंट कराने पर 5 लाख रुपये तक की सहायता और पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया में आवश्यक सहायता का भी प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप्स को विशेष प्रोत्साहन मध्यप्रदेश में इस समय 4,900 से अधिक स्टार्ट-अप संचालित हो रहे हैं। इनमें से करीब 44 प्रतिशत स्टार्ट-अप्स महिलाओं द्वारा संचालित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ के तहत पंजीकृत स्टार्ट-अप्स की संख्या को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना और कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को 200 प्रतिशत तक बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रदेश में 72 इनक्यूबेटर कार्यरत हैं और उत्पाद-आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार की स्टार्ट-अप नीति और क्रियान्वयन योजना के अंतर्गत स्टार्ट-अप्स को वित्तीय मदद, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में सहायता और नीतिगत मदद मुहैया कराई जा रही है। नई स्टार्ट-अप नीति के तहत वित्तीय अनुदान के पात्र स्टार्ट-अप्स को कुल निवेश का 18 फीसदी (अधिकतम 18 लाख रुपये) का अनुदान दिया जा रहा है। नई नीति में वित्तीय प्रोत्साहन, अधोसंरचना सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।  

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