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मुख्यमंत्री साय बोले – परीक्षा पे चर्चा युवाओं और अभिभावकों को संबल देने वाली पहल

रायपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल देश की प्रगति की चिंता ही नहीं करते, बल्कि वे युवाओं से विशेष जुड़ाव रखते हैं। उनका यह प्रयास है कि भावी पीढ़ी सही निर्णय ले, जीवन की परीक्षाओं को आत्मविश्वास के साथ दे और देशहित में अपनी ऊर्जा का सर्वोत्तम उपयोग करे। प्रधानमंत्री की यह सोच “परीक्षा पे चर्चा” के माध्यम से मूर्त रूप लेती है, जो देश के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों को संबल प्रदान करने वाली पहल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम शामिल होकर छात्र-छात्राओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वार्ता “परीक्षा पे चर्चा” को सुना। इसके उपरांत विद्यार्थियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बोर्ड सहित अन्य परीक्षाओं की तैयारी भयमुक्त और तनावरहित वातावरण में करने के लिए छात्र छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी पिछले आठ वर्षों से लगातार परीक्षा के समय देश के विद्यार्थियों से संवाद कर रहे हैं और उन्हें मूल्यवान टिप्स दे रहे हैं। सालभर की मेहनत के बावजूद परीक्षा के समय तनाव और दबाव का अनुभव होना स्वाभाविक है, लेकिन प्रधानमंत्री की यह पहल इस समस्या को दूर करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। प्रधानमंत्री न केवल छात्रों से संवाद करते हैं, बल्कि अपने अनुभवों के माध्यम से सफलता का मंत्र भी देते हैं। यह संवाद न केवल बच्चों बल्कि उनके अभिभावकों को भी बहुत कुछ सिखाता है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि परीक्षा के समय उनका मनोबल बढ़ाएं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा बच्चों को छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करने, संतुलित आहार लेने, भरपूर नींद लेने और मानसिक शांति बनाए रखने की सलाह देते हैं। इस वर्ष उन्होंने “सूर्य स्नान” के महत्व पर भी चर्चा की, जिससे विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक स्फूर्ति प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें नई प्रेरणा भी देते हैं। मुख्यमंत्री ने साझा किए छात्र जीवन से जुड़े अनुभव मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर अपने छात्र जीवन से जुड़े प्रेरक अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि गांव में उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई और वे पढ़ाई में हमेशा अच्छे रहे। लेकिन बचपन में ही पिता के निधन ने जीवन में कई चुनौतियाँ प्रस्तुत कीं, जिससे उन्होंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने आगे बताया कि उनकी हैंडराइटिंग बहुत अच्छी थी और शिक्षक उसे अन्य विद्यार्थियों के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तनाव तो स्वाभाविक है, लेकिन जब हमें अपनी तैयारी पर भरोसा होता है, तो हम किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान रायपुर के मयाराम सुरजन शासकीय स्कूल की छात्रा युक्तामुखी साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात का अनुभव मुख्यमंत्री श्री साय के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछने का अवसर मिला, जो उनके लिए अविस्मरणीय क्षण था। युक्तामुखी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनके प्रश्न का उत्तर देते हुए सकारात्मक रहने और छोटी-छोटी खुशियों में आनंद खोजने का मंत्र दिया। इस पर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि हमारे प्रदेश से 20 लाख से अधिक छात्र छात्राओं ने प्रधानमंत्री से सवाल पूछने के लिए आवेदन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “परीक्षा पे चर्चा” केवल परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि यह युवाओं के मानसिक विकास और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली एक सशक्त पहल है। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को, बल्कि अभिभावकों को भी उनके मार्गदर्शन और सहयोग की दिशा में नई दृष्टि प्रदान करता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस संवाद को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए विद्यार्थियों को परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक श्री संजीव कुमार झा, संचालक शिक्षा श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने जाम में फंसे श्रद्धालुओं को भोजन, पानी और आवास सुविधा मुहैया कराने के दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रयागराज का जो क्षेत्र मध्यप्रदेश से सटा हुआ है, विशेष रूप से रीवांचल इलाका, यहां से अन्य राज्यों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में महाकुंभ पहुंच रहे हैं। इसलिए वाहनों के आवागमन से सड़कों पर यातायात का कुछ दबाव बना हुआ है। राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन सभी श्रद्धालुओं के संपर्क में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाकुंभ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं से अपील की है कि स्थिति सामान्य होने तक वे एक-दो दिन इस मार्ग से आगे बढ़ने से बचें। महाकुंभ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा है, उससे व्यवस्थाओं को बनाने में चुनौतियां सामने आ रही हैं। इनसे निपटने के लिए मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह से तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला प्रशासन को निर्देश दिये हैं कि सीमा क्षेत्रों में जहां भी जाम है, वहां यात्रियों के लिए पानी, भोजन और आवास व्यवस्थाएं सुनिश्चत हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में मध्यप्रदेश से प्रयागराज जाने वाले सभी यात्रियों का स्वागत करते हुए कहा कि श्रद्धालु महाकुंभ जाने से पहले पूछताछ कर सुनिश्चित कर लें, कि आगे का रास्ता क्लीयर है या नहीं। यदि जाम की स्थितियां न हो, तभी आगे बढ़ें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खिलाड़ियों को दी बधाई, 21 स्वर्ण, 13 रजत और 18 कांस्य पदक किए अर्जित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। खेलों में भी मध्यप्रदेश इससे अछूता नहीं है। उत्तराखंड में चल रहे 38वें राष्ट्रीय खेलों में प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों ने 51 पदक जीत कर देशभर में चौथा स्थान हासिल किया है। यह मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब राष्ट्रीय खेलों में सिर्फ 5 दिन शेष हैं। हाल ही में नीलू यादव ने अपने बलबूते पर स्वर्ण पदक जीता है। इसे मिलाकर अब हमारे पास 21 गोल्ड हो गए। राष्ट्रीय खेलों का समापन 14 फरवरी को हल्द्वानी में होगा। गत 28 जनवरी से अब तक कई प्रतियोगिताओं के निर्णय हो चुके हैं और अभी कई खेल प्रतियोगिताएं जारी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रीय खेल खत्म होते-होते अभी और भी पदक मध्यप्रदेश की झोली में आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने वाली नीतियों और खिलाड़ियों के बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय खेलों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए अब तक 21 स्वर्ण, 13 रजत और 18 कांस्य समेत कुल 51 पदक हासिल कर लिए हैं। अकेले वुशु गेम में ही प्रदेश को 9 पदक मिले हैं, जिनमें 6 स्वर्ण और दो रजत पदक शामिल हैं। हॉकी में प्रदेश की बहन-बेटियों ने पश्चिम बंगाल जैसी सशक्त टीम को हराकर इतिहास रच दिया। भोपाल की अकादमी में प्रशिक्षित दीक्षा ने 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की 9 करोड़ जनता की ओर से सभी पदक विजेताओं को बधाई दी एवं उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।  

प्रयागराज महाकुंभ के श्रद्धालुओं की व्यवस्था में जनप्रतिनिधि करें सहयोग: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि दिव्य एवं भव्य महाकुंभ की परिकल्पना को साकार करने के लिए सभी का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। प्रयागराज महाकुंभ में बड़ी संख्या में प्रदेश एवं देश के अन्य भागों से श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सभी श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ जैसे दिव्य एवं भव्य आयोजन में सभी श्रद्धालुओं का सहयोग और अनुशासन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चाक घाट (रीवा) से लेकर जबलपुर, कटनी एवं सिवनी जिलों में यातायात बाधित होने की स्थिति में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पानी, ठहरने एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं और जनप्रतिनिधियों से प्रशासन को सहयोग प्रदान करने की अपील की है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विशेष रूप से विंध्य एवं महाकौशल क्षेत्र के समस्त जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों से होकर प्रयागराज महाकुंभ में जा रहे श्रद्धालुओं की यथासंभव मदद करें। उन्होंने भोजन, ठहरने की व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

देवास जिले से सीएम मोहन यादव ने महिलाओं के खातों में सिंगल क्लिक से राशि अंतरित की

देवास लाड़ली बहना योजना के तहत 1.27 करोड़ महिलाओं के खातों में 1,553 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित किए। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं में करोड़ों रुपये की राशि हितग्राहियों को प्रदान की गई। सीएम ने कहा कि अब बहनों को धीरे-धीरे 3 हजार रुपये दिए जाएंगे। किसानों और पेंशनधारियों को बड़ी सौगात मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण योजना के तहत 81 लाख किसानों के खातों में ₹1,624 करोड़ तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 56 लाख हितग्राहियों को ₹337 करोड़ की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर की गई। 144 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री 144 करोड़ रुपये के 53 विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इसमें 102 करोड़ रुपये की लागत से 37 विकास कार्यों का लोकार्पण और 42 करोड़ रुपये की लागत से 16 नए विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को देवास जिले की सोनकच्छ तहसील के पीपलरावां में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना और किसान कल्याण योजना के हितग्राही किसानों के खातों में सिंगल क्लिक से राशि अंतरित की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हितग्राहियों से संवाद कर योजना के लाभ की जानकारी भी ली। इसके पूर्व कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर दीप प्रज्जवलन कर कन्या पूजन किया। कलश यात्रा का समापन कर पार्वती, कालीसिंध और चम्बल तीनों नदियों के जल से जलाभिषेक किया। कार्यक्रम में उन्होंने संबोधित करते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लेकर राहुल और सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने प्रियंका गांधी को नकली गांधी बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भगवान और सनातन के प्रति दुर्भावना है। गांधी परिवार अयोध्या दर्शन के लिए नहीं गया। प्रयागराज भी नहीं गया। उन्होंने कहा कि रंजीत सागर सिंचाई परियोजना में क्षेत्र के 52 गांव डूबने वाले थे, परंतु अब पार्वती-कालीसिंध- चम्बल लिंक परियोजना से 66 गांव को पानी मिलेगा। उन्होंने घोषणा की कि क्षेत्र के प्रत्येक गांव को पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहनों के खातों में धीरे धीरे 3 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। गेहूं का समर्थन मूल्य 2600 रुपये प्रति क्विंटल और देहदान करने वालों को गार्ड ऑफ ऑनर की घोषणा भी की।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित हो रहे बेतिया स्टेशन के 3डी मॉडल का किया अवलोकन

हाजीपुर बेतिया में समपार सं. 02 पर नवनिर्मित सड़क ऊपरी पुल (आर.ओ.बी.) का राष्ट्र को समर्पण हेतु आयोजित समारोह में अश्विनी वैष्णव, माननीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, भारत सरकार द्वारा नारी शक्तिस्वरूप महिलाओं के माध्यम से आरओबी का राष्ट्र को समर्पित कराया गया । इस दौरान उपस्थित माननीय सांसदगण एवं जनसमूह द्वारा बेतिया के रास्ते गोरखपुर और पटना के बीच वंदे भारत ट्रेन चलाने की भारी मांग पर उन्होंने विचार करने का आश्वासन दिया और कहा कि जल्द ही पूरे भारत में कई वंदे भारत ट्रेनें चलायी जाएगीं । माननीय रेल मंत्री जी द्वारा अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित किये जा रहे बेतिया स्टेशन के 3डी मॉडल का भी अवलोकन किया गया । इस अवसर पर बेतिया में आयोजित समारोह में माननीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री, भारत सरकार श्री सतीश चंद्र दुबे, माननीय सांसद डॉ. संजय जायसवाल, माननीय सांसद श्री सुनील कुमार, माननीय सांसद श्री गोपालजी ठाकुर एवं माननीय विधायकगण सहित कई अन्य अतिथिगण उपस्थित थे। पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक श्री छत्रसाल सिंह एवं समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री विनय श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। समारोह के उपरांत बेतिया स्टेशन पर आयोजित प्रेस वार्ता में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए माननीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, भारत सरकार श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच बिहार में रेलवे के विकास के लिए प्रतिवर्ष औसतन 1,132 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया जाता था, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस साल के बजट में बिहार को रेलवे के लिए रिकॉर्ड 10 हजार 66 करोड़ रूपये का बजट दिया है । यानी पिछली सरकार की तुलना में करीब-करीब नौ गुना अधिक बजट आवंटित किया है। इसी रिकॉर्ड बजट का परिणाम है कि बिहार में नई रेल लाइनों के निर्माण, विद्युतीकरण, नई ट्रेनों का संचालन, स्टेशनों का विकास, यात्री सुविधाओं में बढ़ोतरी के कार्य रिकॉर्ड स्तर पर किए जा रहे हैं । उन्होंने कहा कि बिहार में रेलवे के समग्र विकास हेतु 95 हजार 566 करोड़ रूपए का इंवेस्टमेंट किया जा रहा है जिससे अगले 05 वर्षों में बिहार में रेलवे का नेटवर्क का कम्पलीट ट्रांसफॉर्मेशन होने वाला है । उन्होंने कहा कि बिहार में चल रहे प्रोजेक्ट के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी बिहार में 2009 से 2014 के मध्य जहां औसतन प्रतिवर्ष 64 किमी नई लाइन का निर्माण होता था वहीं 2014 से 2025 के मध्य प्रतिवर्ष औसतन 167 किमी नई लाइन का निर्माण हुआ है, जो लगभग 2.6 गुणा ज्यादा है । आपके बताते हुए खुशी हो रही है कि बिहार में 2014 से अब तक 1832 किमी नई रेल लाईन का निर्माण किया जा चुका है जो मलेशिया के कुल रेल नेटवर्क के बराबर है । इसके साथ ही बिहार में 2014 से 3020 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण किया गया है । इसी का परिणाम है कि आज बिहार में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है । उन्होंने कहा कि अमृत भारत स्टेशन के तहत चम्पारण के आसपास के प्रमुख स्टेशनों जैसे – बेतिया, बापूधाम मोतिहारी, नरकटियागंज, रक्सौल आदि सहित बिहार में कुल  98 स्टेशनों का पुर्नविकास किया जा रहा है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में रेलवे अवसंरचना के विकास हेतु नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा रेलखंड के दोहरीकरण कार्य की कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गयी है । वर्तमान में वाल्मीकिनगर-सगौली एवं सगौली-मुजफ्फरपुर रेलखंड का दोहरीकरण कार्य चल रहा है। इसके पूर्ण हो जाने से इस क्षेत्र में और कई ट्रेनों का परिचालन संभव हो पाएगा । इससे पहले आज सुबह माननीय रेल मंत्री जी द्वारा गोरखपुर से स्पेशल ट्रेन द्वारा गोरखपुर-वाल्मीकिनगर-बगहा-बेतिया रेलखंड का विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया गया । इस दौरान माननीय रेल मंत्री महोदय का वाल्मीकिनगर, बगहा एवं नरकटियागंज रेलवे स्टेशनों पर उपस्थित जनसमूह द्वारा फूलमाला से स्वागत किया गया । विदित हो कि बेतिया शहर में ट्रैफिक जाम से राहत के लिए 103 करोड़ रुपए की लागत से बेतिया और कुमारबाग स्टेशन के मध्य बेतिया (छावनी) के निकट समपार सं. 02 पर सड़क ऊपरी पुल (आर.ओ.बी.) के निर्माण की मंजूरी दी गयी थी । इस परियोजना के तहत आरओबी के साथ ही रेलवे लाईन के एक तरफ बेतिया-लौरिया लेन तथा दूसरी तरफ मैनाटांड एवं नरकटियागंज लेन का निर्माण किया जाना था। पिछले वर्ष मार्च, 2024 में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा इस आरओबी के बेतिया-लौरिया लेन का उद्घाटन किया गया था। इस आरओबी के मैनाटांड लेन तथा नरकटियागंज लेन भी पिछले वर्ष मई, 2024 में चालू कर दिए गए थे। इस परियोजना का शेष बचा भाग सड़क उपरि पुल का निर्माण कार्य पिछले माह जनवरी 2025 में पूरा कर लिया गया था जिसका माननीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया । इस आरओबी के चालू होने के बाद बेतिया शहरवासियों को एक ओर जहां ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी वहीं यातायात की आवाजाही आसान और तेज़ होगी। साथ ही, ट्रेनों की परिचालन की संरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। बेतिया में आरओबी का राष्ट्र को समर्पण के उपरांत माननीय रेल मंत्री महोदय स्पेशल ट्रेन द्वारा मुजफ्फरपुर पहुंचे जहां उन्होंने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित किये जा रहे मुजफ्फरपुर जं. के 3डी मॉडल का भी अवलोकन किया । उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर वासियों के लिए हर्ष की बात है कि 442 करोड़ की लागत से मुजफ्फरपुर जं. का वर्ल्ड क्लास स्टेशन के रूप में विकास किया जा रहा है। इस अवसर पर उपस्थित प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में रेलवे के विकास के लिए कई परियोजनाओं पर कार्य किये जा रहे हैं और इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए फंड की किसी भी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी । उन्होंने यह भी कहा कि लंबी दूरी के लिए 100 अमृत भारत ट्रेनें तथा कम दूरी के लिए 50 नमो भारत ट्रेनें बनाने की योजना है । उन्होंने कहा कि रेलवे द्वारा 95 हजार युवाओं की भर्ती हेतु प्रक्रिया चल रही है । पिछले वर्ष भारतीय रेलवे द्वारा पारदर्शी तरीके से 1.51 लाख से ज्यादा भर्तियां की गयी हैं ।     

नरेंद्र मोदी “परीक्षा पे चर्चा 2025” के तहत बच्चों से किया सीधा संवाद, दिए टिप्स

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “परीक्षा पे चर्चा 2025” के तहत बच्चों से सीधा संवाद किया। यह इस पहल का आठवां संस्करण है, जिसमें प्रधानमंत्री छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से परीक्षा की तैयारी, तनाव प्रबंधन और व्यक्तिगत विकास पर संवाद कर रहे हैं। कार्यक्रम में देशभर से 36 छात्र सीधे प्रधानमंत्री से संवाद कर, उनसे मार्गदर्शन लिया। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ छात्रों को मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस वर्ष के विशेष संस्करण में सद्गुरु, मैरी कॉम, दीपिका पादुकोण, अवनि लेखरा, रुजुता दिवेकर, विक्रांत मैसी, भूमि पेडनेकर और टेक्निकल गुरुजी जैसी जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हो रही हैं। किताबी कीड़ा न बनने की सलाह इस कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुक्त रहने और पढ़ाई में रुचि बनाए रखने के सुझाव दिए। उन्होंने विद्यार्थियों को “किताबी कीड़ा” न बनने की सलाह देते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि लें। प्रकृति की रक्षा करें पीएम ने छात्रों को अपनी रुचियों के अनुसार आगे बढ़ने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया। छात्रों को प्रकृति की रक्षा करने, प्रकृति से प्रेम करने और और मां के नाम एक पौधा लगाने की बात कही। पौधों को लगाने और उसको सींचने के लिए पुरानी घड़ा तकनीकि के बारे में बताया।

चंद्रयान-3 जिस शिव शक्ति प्वाइंट पर हुआ लैंड, वैज्ञानिकों का दावा – वहां की सतह करीब 3 अरब से ज्यादा साल पुरानी

नई दिल्ली भारत का चंद्रयान-3 स्पेसक्राफ्ट साल 2023 में चंद्रमा के शिव शक्ति प्वाइंट पर लैंड हुआ था। अब वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद के दक्षिणी पोल की यह सतह करीब 3.7 बिलियन (3 अरब से ज्यादा) साल पुरानी है। स्टडी के दौरान हाई-रिजोल्यूशन वाले रिमोट सेंसिंग डेटासेट्स की मदद ली गई। इसमें वैज्ञानिकों की एक टीम लगी हुई थी जिसमें बेंगलुरु स्थित इसरो के इलेक्ट्रो ऑप्टिक्स सिस्टम सेंटर, अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी और चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स शामिल थे। इन लोगों ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट यानी शिव शक्ति प्वाइंट का मैप तैयार किया। अध्ययन के मुताबिक, चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। जियोपॉलिटिकल मैप में बताया गया कि हाई-रिलीफ रग्ड एरिया, स्मूथ प्लेन्स और लो-रिलीफ स्मूथ प्लेन्स शामिल हैं। स्टडी पेपर में टीम की ओर से यह जानकारी दी गई, जो कि साइंस डायरेक्ट जर्नल में प्रकाशित है। इसमें अनुमान लगाया गया कि लैंडिंग साइट 3.7 बिलियन वर्ष पुरानी है। जानना दिलचस्प है कि इसी कालखंड में पृथ्वी पर सबसे प्राचीन माइक्रोबियल जीवन विकसित हुआ था। शिव शक्ति प्वाइंट की उम्र का कैसे चला पता रिपोर्ट के मुताबिक, स्टडी के दौरान लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO) के वाइड-एंगल कैमरा और टेरेन कैमरा का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए पहले क्रेटर और चट्टानों का अध्ययन किया गया। 25 क्रेटर्स (500-1,150 मीटर व्यास के) के एनालिसिस से पता चला कि लैंडिंग साइट की उम्र 3.7 अरब साल होगी। इसरो के वैज्ञानिक बताते हैं कि चंद्रमा की सतह माइक्रो-मेटियोराइट बमबारी और तापीय उतार-चढ़ाव के कारण बदलती रहती है। लाखों बरस बीत जाने के बाद ये चट्टानें टूटकर रेगोलिथ में बदल गई हैं। आखिर कितना खास रहा मिशन चंद्रयान-3 यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब भारत चंद्रयान-4 मिशन की तैयारी में है। साल 2027 में चंद्रयान-4 लॉन्च होगा, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह से चट्टानों के नमूने एकत्र कर पृथ्वी पर लाना है। मालूम हो कि चंद्रयान-3 इसरो का तीसरा चंद्र अन्वेषण मिशन रहा। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला मिशन था। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई, 2023 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था। 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफल रहा। भारत के चंद्रयान-3 अभियान पर 600 करोड़ रुपये की लागत आई थी जबकि अन्य देशों ने चंद्रमा पर अपने अंतरिक्ष यान भेजने पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

चार दिनों की फ्रांस और अमेरिका की यात्रा पर आज होंगे रवाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चार दिनों की फ्रांस और अमेरिका की यात्रा पर रवाना होंगे. यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस में AI Action Summit की सह-अध्यक्षता करेंगे. साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे. उम्‍मीद है कि इससे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलेगी. साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी की पहली यात्रा होगी, जिससे भारत की रणनीतिक साझेदारी, साथ ही फ्रांस और अमेरिका के साथ भी गति पकड़ेगी. प्रधानमंत्री 10 फरवरी से 12 फरवरी तक फ्रांस में रहेंगे. आज शाम वह पेरिस पहुंचेंगे और एलिसी पैलेस में आयोजित एक रात्रिभोज में शामिल होंगे, जहां दुनिया भर के तकनीकी क्षेत्र के CEO और अन्य लोग उपस्थित रहेंगे. 11 फरवरी को प्रधानमंत्री एआई एक्शन समिट के तीसरे संस्करण की सह-अध्यक्षता करेंगे, जिसकी मेजबानी पहले ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया ने 2023 और 2024 में मेजबानी की थी. इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद भारत और फ्रांस के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत भी होगी. पिछले हफ्ते, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि पीएम मोदी के पेरिस दौरे को लेकर उम्मीद है कि इस समिट में कई घोषणाएं होंगी. उन्होंने कहा कि हमारी रुचि ऐसी AI एप्लिकेशन में है जो सुरक्षित और भरोसेमंद हैं. पीएम मोदी इस दौरान इंडिया-फ्रांस के सीईओ फोरम को भी संबोधित करेंगे. PM मोदी का अमेरिका दौरा 12 फरवरी से होगा शुरू इसके बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर अमेरिका जाएंगे, जहां वे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को गति देंगे. यह प्रधानमंत्री मोदी की पहली अमेरिकी यात्रा होगी, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में होगी और 12 फरवरी से 14 फरवरी तक चलेगी. इस दौरान वह कई बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात करेंगे. PM मोदी और ट्रंप की ये आठवीं मुलाकात PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली मुलाकात 26 जून 2017 को वॉशिंगटन में हुई थी; उनकी दूसरी मुलाकात 30 नवंबर 2018 को अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुई; 28 जून 2019 को जापान के ओसाका में हुई; और 26 अगस्त 2019 को फ्रांस में हुई. दोनों नेताओं की पांचवीं मुलाकात 22 सितंबर 2019 को ह्यूस्टन, अमेरिका में हुई थी. छठी मुलाकात 24 सितंबर 2019 को न्यूयॉर्क में हुई थी, और सातवीं मुलाकात 24-25 फरवरी 2020 को अहमदाबाद में हुई थी.

द्रौपदी मुर्मू ने त्रिवेणी संगम में लगाई डुबकी, मां गंगा को चढ़ाया फूल, सूर्य को दिया अर्ध्य

प्रयागराज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाई। त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति मुर्मू सुबह 11 बजे दिल्ली से विशेष विमान से प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर पहुंची। इसके बाद वे हेलिकॉप्टर से अरैल स्थित डीपीएस हेलीपैड पर उतरी। जिसके बाद राष्ट्रपति कार में सवार होकर अरैल घाट पहुंची और पूरे विधि विधान के साथ संगम में आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल उनके साथ मौजूद रही। संगम में स्नान के बाद राष्ट्रपति गंगा आरती कर रही है। इसके बाद वे डिजिटल महाकुंभ अनुभव केंद्र का अवलोकन करेंगी। शाम चार बजे के करीब दिल्ली के लिए रवाना होंगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश की दूसरी राष्ट्रपति हैं, जो महाकुंभ में संगम स्नान करेंगी। इससे पहले 1954 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने महाकुंभ में पावन स्नान किया था। राष्ट्रपति के महाकुंभ दौरे के चलते सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है। वीवीआईपी घाटों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए है। इन नेताओं ने संगम में लगाई डुबकी महाकुंभ में अब तक पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, अखिलेश यादव, रवि किशन, हरियाणा सीएम नायब सिंह सैनी, मणिपुर सीएम एन बीरेन सिंह, सीएम योगी और उनका पूरा मंत्रिमंडल, उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, कवि कुमार विश्वास, 73 देशों के प्रतिनिधिमंडल, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक समेत कई बड़ी हस्तियां संगम में डुबकी लगा चुके है। 41 करोड़ से ज्यादा लोगों ने किया स्नान महाकुंभ की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। सात समंदर पार के लोग कुंभ की दिव्यता और भव्यता को देखने के लिए आ रहे है। भारत की प्राचीन परंपरा और यहां की सनातन संस्कृति विदेशी लोगों के मन को भा रही है। आज सुबह 8 बजे तक 46 लाख लोगों ने संगम में स्नान कर लिया। महाकुंभ में अब तक 41 करोड़ से भी ज्यादा श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगा ली है। बसंती पंचमी के मौके पर डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने त्रिवेणी संगम में शाही स्नान किया और मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं 10 लाख से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में कल्पवास कर रहे है।

मुख्यमंत्री ने कहा देश के औद्योगिक विकास और रोजगार विज़न से मध्यप्रदेश तेजी बढ़ रहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यावद ने कहा है कि देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न पर काम करते हुए मध्यप्रदेश तेजी के साथ एक मजबूत स्टार्ट-अप हब के रूप में उभर रहा है। प्रदेश सरकार नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देते हुए युवा उद्यमियों की आकाँक्षाओं के अनुकूल स्टार्ट-अप कल्चर को विकसित करने की दिशा में प्रभावी रणनीति अपना रही है। हमारा प्रयास मध्यप्रदेश को “स्टार्ट-अप और नवाचार का केंद्र” बनाना है, जहां युवा उद्यमियों को अपने आईडियाज़ को सफल व्यवसायों में बदलने के लिए अनुकूल माहौल और पूरा सहयोग मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आगामी 24 एवं 25 फरवरी को भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट कई मायनों में खास होगी। समिट में कई देशों के उद्यमी एवं निवेशक शामिल होंगे। इससे हमारे युवा उद्यमियों को अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी और नवाचारों का ज्ञान मिलेगा और मध्यप्रदेश के स्टार्ट-अप्स को नई उड़ान मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्टार्ट-अप्स न केवल प्रदेश के आर्थिक विकास में योगदान देंगे, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेंगे। हम प्रदेश में स्टार्ट-अप्स के विकास के लिए वित्तीय सहायता, सशक्त नीतिगत ढांचा और आधुनिक बुनियादी ढांचे की सुविधा प्रदान कर रहे हैं और इस दिशा में हमारी सरकार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ‘एमपी स्टार्ट-अप पॉलिसी एंड इम्प्लीमेंटेशन स्कीम लागू है, जिसके तहत स्टार्ट-अप्स को वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचा सहयोग और नीति समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है। नई स्टार्टअप नीति के अनुसार स्टार्ट-अप्स को कुल निवेश का 18 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता (अधिकतम 18 लाख रूपये तक) दी जाती है। यह सहायता स्टार्ट-अप के विकास के प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग प्रदान की जाती है, जिसमें अधिकतम 4 चरणों तक सहायता मिल सकती है। इस नीति के अनुसार स्टार्ट-अप्स को वित्तीय प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचा सहयोग और क्षमता निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, स्टार्ट-अप्स को सरकारी निविदाओं में अनुभव और टर्न ओवर की शर्तों में छूट दी गई है और उन्हें अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट से भी मुक्त रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार स्टार्ट-अप्स को अनिवार्य लाइसेंस एवं परमिट शुल्क से छूट प्रदान कर रही है और दो वर्षों तक सरकारी खरीद में प्राथमिकता दे रही है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के पास भरपूर बिजली, पानी, और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं, जो इसे निवेशकों के लिए एक आईडियल डेस्टिनेशन बनाते हैं। मध्यप्रदेश देश के प्रमुख औद्योगिक गलियारों से जुड़ा हुआ है, जिससे यहां से उत्पादों का सुगम और कम लागत में परिवहन संभव है। यह रणनीतिक बढ़त उन कंपनियों के लिए लाभदायक होगी, जो अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं। नवाचार और उद्योगों के लिए उपयुक्त केंद्र भारत के हृदय प्रदेश के रूप में पहचाने जाने वाले मध्यप्रदेश में 300 से अधिक औद्योगिक पार्क मौजूद हैं। प्रदेश की 8 करोड़ से अधिक की जनसंख्या के साथ, यह प्रतिभाओं का एक विशाल केंद्र है, जहां 1,287 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, 1,373 सरकारी एवं निजी कॉलेजों और आईआईटी-आईआईएम जैसे शीर्ष शिक्षण संस्थानों से हर साल हजारों स्नातक पास आउट होते हैं। प्रदेश सरकार स्कूल और कॉलेजों के छात्रों में नवाचार और उद्यमिता की भावना को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम संचालित कर रही है। युवाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध होने पर वे अपने स्टार्ट-अप्स को सफलतापूर्वक स्थापित कर सकेंगे। प्रदेश सरकार की स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का परिणाम है कि आज प्रदेश में 4,900 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप्स कार्यरत हैं। आईटी, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल और सोलर जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए विशेष औद्योगिक पार्क विकसित किए गए हैं, जो स्टार्ट-अप्स के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य ‘स्टार्ट-अप इंडिया’ के तहत पंजीकृत स्टार्ट-अप्स की संख्या को 100 प्रतिशत तक बढ़ाना और कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में स्टार्ट-अप्स को 200 प्रतिशत तक बढ़ावा देना है। इसके लिए प्रदेश में 72 इनक्यूबेटर कार्यरत हैं और उत्पाद-आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार का यह ठोस प्रयास मध्यप्रदेश को भारत के सबसे प्रमुख स्टार्ट-अप हब में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और विशेष प्रोत्साहन • महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को विशेष सहायता स्टार्टअप के पहले निवेश पर 18 प्रतिशत (18 लाख रूपये तक) की वित्तीय सहायता। • अन्य स्टार्ट-अप्स को पहले निवेश पर 15 प्रतिशत (₹15 लाख तक) की सहायता। • स्टार्ट-अप्स द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के लिए 5 लाख रूपये प्रति इवेंट (अधिकतम 20 लाख रूपये प्रति वर्ष) तक सहायता। • इनक्यूबेटर्स के विस्तार के लिए एक बार में 5 लाख रूपये का अनुदान। • स्टार्ट-अप्स के किराए के 50 प्रतिशत हिस्से (अधिकतम 5 हजार रूपये प्रति माह) की तीन वर्षों तक प्रतिपूर्ति। • पेटेंट कराने की लागत के लिए अधिकतम 5 लाख रूपये तक की सहायता। • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय इवेंट्स में भाग लेने पर 75 प्रतिशत तक खर्च की प्रतिपूर्ति (50 हजार रूपये तक घरेलू इवेंट्स और 1.5 लाख रूपये तक अंतर्राष्ट्रीय इवेंट्स)। • स्टार्ट-अप्स के लिए लाइसेंस फीस में छूट और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट।  

कौन होगा दिल्ली का नया मुख्यमंत्री? ‘दावेदारों’ के नाम पर चर्चा तेज

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को बड़े अंतर से हराकर 70 में से 48 सीटें जीत ली हैं. आप को केवल 22 सीटों पर संतोष करना पड़ा. अब सवाल यह है कि दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? भाजपा के पास कई विकल्प हैं, और पार्टी के भीतर इसको लेकर चर्चा तेज है. सबसे आगे प्रवेश वर्मा प्रवेश वर्मा, जो पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं, इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल को नई दिल्ली विधानसभा सीट से हराकर चर्चा में आए हैं. उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है. प्रवेश ने न केवल केजरीवाल को हराया, बल्कि पार्टी के भीतर भी उनकी पकड़ मजबूत है. अशीष सूद और पवन शर्मा अशीष सूद, जो जनकपुरी सीट से जीते हैं, भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें दक्षिण दिल्ली नगर निगम में प्रशासनिक अनुभव है और वर्तमान में वे गोवा और जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रभारी भी हैं. दूसरी ओर, पवन शर्मा ने उत्तम नगर सीट से 1,03,613 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की है. वे असम इकाई के सह-प्रभारी हैं और मुख्यमंत्री पद के लिए उनका नाम भी चर्चा में है. इन नामों पर भी चर्चा भाजपा के पूर्व दिल्ली अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और सतीश उपाध्याय भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं. गुप्ता ने रोहिणी सीट से लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की है, जबकि उपाध्याय ने मालवीय नगर सीट से 39,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की. उपाध्याय का आरएसएस के साथ मजबूत रिश्ता है, जो उनकी दावेदारी को और मजबूत करता है. ये महिला उम्मीदवार भी दावेदार भाजपा केंद्रीय नेतृत्व महिला उम्मीदवार को भी मौका दे सकता है. रेखा गुप्ता और शिखा रॉय दो ऐसे नाम हैं जो इस रेस में शामिल हो सकते हैं. शिखा रॉय ने ग्रेटर कैलाश सीट पर आप के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज को 3,188 वोटों के अंतर से हराया है. वहीं, रेखा गुप्ता ने शालीमार बाग सीट पर आप की बंदना कुमारी को 29,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित किया. क्या कहते हैं सीनियर लीडर? अगर भाजपा विधायक दल से बाहर किसी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करती है, तो पूर्वी दिल्ली के सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी का नाम भी चर्चा में है. तिवारी पूर्वांचल के प्रमुख चेहरे हैं और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें भी मौका मिल सकता है. हालांकि, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश के पिछले अनुभवों को देखते हुए मुख्यमंत्री पद के लिए अटकलें लगाना मुश्किल है. पार्टी का फैसला अक्सर आखिरी पल में ही सामने आता है.

वैश्विक टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार की म.प्र. में हैं अपार संभावनाएँ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के क्षेत्र में अपार संभावनाओं वाला राज्य बन चुका है। राज्य की समृद्ध कृषि पृष्ठभूमि, पारंपरिक बुनकर समुदायों की उत्कृष्ट कला, आधुनिक औद्योगिक आधार और निवेशक-अनुकूल नीतियाँ प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी बना रही हैं। सरकार के सुविचारित प्रयासों से मध्यप्रदेश तेजी से भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंट हब के रूप में उभर रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 इस औद्योगिक यात्रा को और गति देने का माध्यम बनेगा, जहाँ दुनिया भर के निवेशकों को प्रदेश में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का टेक्सटाइल उद्योग केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर रहा है, जिसमें कच्चे माल के उत्पादन से लेकर परिधान निर्माण और वैश्विक निर्यात तक सभी चरण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, भारत के 43% और वैश्विक स्तर पर 24% ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन में योगदान देता है। यह आंकड़ा न केवल प्रदेश की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि इसे पर्यावरणीय रूप से सतत और उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्र निर्माण के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है। कपास, रेशम और आधुनिक फाइबर – मध्यप्रदेश की बुनियादी ताकत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश कपास उत्पादन में अग्रणी है। साथ ही यहाँ का रेशम उद्योग भी लगातार विस्तारित हो रहा है। राज्य प्रतिवर्ष 200 टन से अधिक रेशम उत्पादन करता है, जिससे परंपरागत हथकरघा और आधुनिक सिल्क उत्पाद दोनों को बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, मध्यप्रदेश आधुनिक कृत्रिम फाइबर उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे टेक्निकल टेक्सटाइल और स्पेशलिटी फाइबर निर्माण को बल मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार जिले में विकसित किया जा रहा पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क प्रदेश के कपड़ा उद्योग को नया आयाम देगा। 2,100 एकड़ में फैले इस पार्क में टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योगों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा उपलब्ध होगा। यह पार्क न केवल निवेश आकर्षित करेगा, बल्कि प्रदेश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा। पारंपरिक कला और आधुनिक टेक्सटाइल अनूठा संगम मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि प्रदेश की पहचान केवल बड़े कपड़ा उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ की पारंपरिक कला भी टेक्सटाइल क्षेत्र की एक बड़ी ताकत है। चंदेरी, महेश्वरी, बाग प्रिंट, बाटिक प्रिंट और जरी-जरदोजी जैसे उत्कृष्ट हथकरघा उत्पाद मध्य प्रदेश की विरासत को दर्शाते हैं इन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। महेश्वरी साड़ी, बाग पैटर्न और चंदेरी कॉटन को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे इन उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार में स्थिति और मजबूत हुई है। प्रदेश में 60 से अधिक बड़ी कपड़ा मिल्स, 4,000 से अधिक करघे और 25 लाख स्पिंडल्स कार्यरत हैं। इंदौर, भोपाल, उज्जैन, धार, देवास, ग्वालियर, छिंदवाड़ा और जबलपुर प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में विकसित हो रहे हैं। इंदौर का रेडीमेड गारमेंट क्लस्टर 1,200 से अधिक इकाइयों के साथ प्रदेश में रेडीमेड वस्त्र निर्माण की प्रमुख इकाई बन चुका है। यहाँ स्थित अपैरल डिजाइनिंग सेंटर और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर रहे हैं। टेक्सटाइल उद्योग में निवेश को नई ऊँचाइयाँ देने के लिए सरकार की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई आकर्षक नीतियाँ लागू कर रही है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत टेक्सटाइल क्षेत्र में 3,513 करोड़ रूपये का निवेश आकर्षित किया है। यह निवेश प्रदेश को उच्च गुणवत्ता वाले वस्त्र निर्माण और निर्यात में अग्रणी बनाएगा। सरकार उद्योगों को बिजली और पानी न्यूनतम दरों पर उपलब्ध करा रही है। साथ ही, जीएसटी में छूट, टैक्स रिबेट और अन्य प्रोत्साहनों के माध्यम से निवेशकों को लाभ पहुँचाया जा रहा है। कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष रूप से कस्टमाइज्ड इन्सेंटिव पैकेज भी तैयार किया है, जो उद्योगों को उनकी निवेश आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान करता है। वैश्विक टेक्सटाइल कंपनियों की पसंद बन रहा है मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश पहले से ही ट्राइडेंट ग्रुप, रेमंड, आदित्य बिड़ला, वर्धमान टेक्सटाइल, गोकलदास एक्सपोर्ट्स, सागर ग्रुप, नाहर स्पिनिंग मिल्स, AVGOL, इंदोरामा और भास्कर जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इन कंपनियों द्वारा प्रदेश में लगातार हो रहा निवेश, सरकार की नीतियों और उद्योग के अनुकूल वातावरण का प्रमाण है। इन कंपनियों की सफलता अन्य निवेशकों को भी आकर्षित कर रही है और आने वाले वर्षों में प्रदेश कपड़ा और परिधान क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। जीआईएस औद्योगिक परिवर्तन को देगा नई दिशा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 इस औद्योगिक परिवर्तन को नई दिशा देगा। इस समिट में दुनिया भर के निवेशकों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माताओं को आमंत्रित किया जा रहा है ताकि वे मध्य प्रदेश की संभावनाओं को देख सकें और यहाँ निवेश के नए अवसर तलाश सकें। मध्य प्रदेश टेक्सटाइल क्षेत्र में अपनी ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक नवाचारों का समावेश करते हुए, एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने की दिशा में अग्रसर है। सरकार निवेशकों के लिए हर संभव सुविधा उपलब्ध कराकर इस क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी दौरे पर 12-13 फरवरी को जायेंगे, डोनाल्ड ट्रंप से होगी मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा 12-13 फरवरी को होने वाला है, जैसा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने घोषणा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने, व्यापार, सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। विदेश मंत्रालय (एमईए) की एक विशेष ब्रीफिंग में मिसरी ने कहा, “पीएम मोदी 12 और 13 फरवरी को अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी की यह पहली अमेरिका यात्रा होगी। राष्ट्रपति ट्रंप के उद्घाटन के बाद पीएम अमेरिका का दौरा करने वाले पहले कुछ विश्व नेताओं में शामिल होंगे।”  

वंदे भारत स्लीपर की शुरुआत से नागपुर-मुंबई यात्रा के समय को 10 घंटे किया जा सकता है, जानें पूरी डीटेल

नई दिल्ली नागपुर को पुणे और मुंबई से जोड़ने वाली सेमी-हाई-स्पीड सुपरफास्ट ट्रेन सेवा वंदे भारत स्लीपर शुरू हो सकती है। यह ट्रेन महाराष्ट्र रेल यात्रा में एक बड़ा बदलाव लाएगी। मध्य रेलवे के नागपुर बोर्ड ने रेलवे बोर्ड को एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। प्रस्ताव का वर्तमान में मूल्यांकन किया जा रहा है और इसका उद्देश्य यात्रियों की सुविधा को बढ़ाना और इन उच्च मांग वाले मार्गों पर कनेक्टिविटी में सुधार करना है। वर्तमान में, नागपुर से मुंबई की यात्रा में मेल ट्रेनों से लगभग 16 घंटे लगते हैं, जबकि सुपरफास्ट ट्रेनें 12 से 13 घंटे में यात्रा पूरी करती हैं। दुरंतो एक्सप्रेस थोड़ा तेज विकल्प प्रदान करती है, जो 11 से 12 घंटे में दूरी तय करती है। हालांकि, वंदे भारत स्लीपर की शुरुआत से नागपुर-मुंबई यात्रा के समय को 10 घंटे किया जा सकता है। नागपुर से पुणे 3 घंटे वंदे भारत से नागपुर-पुणे यात्रा का समय घटकर महज तीन घंटे हो जाएगा। अभी, नागपुर-पुणे मार्ग पर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और गरीब रथ एक्सप्रेस चलती है, दोनों सप्ताह में तीन बार चलती हैं। हमसफर एक्सप्रेस सप्ताह में एक बार चलती है। इसके अतिरिक्त, आजाद हिंद एक्सप्रेस और हटिया-पुणे सुपरफास्ट एक्सप्रेस वैकल्पिक यात्रा विकल्प प्रदान करती हैं। हालांकि, बिजी सीजन के दौरान, इन सेवाओं को अक्सर यात्रियों की उच्च मांग को समायोजित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।   नागपुर-मुंबई रूट पर सीमित ट्रेनें इसी तरह, नागपुर-मुंबई मार्ग के पास सीमित विकल्प हैं, केवल विदर्भ एक्सप्रेस (गोंदिया-मुंबई मार्ग पर चलने वाली) और सेवाग्राम एक्सप्रेस (नागपुर-मुंबई मार्ग पर चलने वाली) के कारण यात्रियों के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ जाता है। डीआरएम विनायक गर्ग ने रेलवे नेटवर्क में नागपुर के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रतिदिन 125 से अधिक ट्रेनों के संचालन के साथ, नागपुर एक महत्वपूर्ण जंक्शन के रूप में कार्य करता है। वंदे भारत स्लीपर की मांग वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत से यात्रियों की सुविधा और कनेक्टिविटी में काफी वृद्धि होगी। वंदे भारत नई सेवा के जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इन हाई-स्पीड स्लीपर ट्रेनों को तेज और अधिक आरामदायक यात्रा विकल्पों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में, नागपुर-पुणे और नागपुर-मुंबई मार्गों पर यात्री यातायात मौजूदा ट्रेनों की क्षमता से अधिक बढ़ गया है, जिससे कई यात्रियों को सड़क परिवहन पर निर्भर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। लंबी दूरी की यात्रा होगी शानदार वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें कम यात्रा समय, उन्नत सुरक्षा उपायों और बढ़ी हुई दक्षता के साथ एक बेहतर विकल्प प्रदान करेंगी। अत्याधुनिक तकनीक के लिए प्रसिद्ध वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के आराम और विश्वसनीयता को प्राथमिकता देती हैं। स्लीपर वेरिएंट की शुरुआत लंबी दूरी की यात्रा के अनुभव को और बेहतर करेगी। इन ट्रेनों का शुभारंभ महाराष्ट्र के रेलवे बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो यात्रियों को यात्रा का एक तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक साधन प्रदान करता है। बिजनेस यात्राओं ने बढ़ाया रूट पर ट्रैफिक नागपुर-पुणे और नागपुर-मुंबई रूट पर यात्रियों की संख्या बढ़ने की एक वजह बिजनेस से जुड़ी यात्राएं हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाल ही में दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जाने से इस इलाके में बिजनेस गतिविधियों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे भी इन रूट्स पर यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। नागपुर सिकंदराबाद वंदे भारत के डिब्बे होंगे कम नागपुर-इंदौर और नागपुर-बिलासपुर के बीच चलने वाली वंदे भारत ट्रेनें पूरी तरह भरी रहती हैं। लेकिन नागपुर-सिकंदराबाद वंदे भारत ट्रेन में केवल 40%-45% सीटें ही भर पाती हैं। इसके 20 डिब्बे हैं। कम यात्रियों की वजह से रेलवे बोर्ड जल्द ही इसके डिब्बों की संख्या घटाकर आठ करने पर विचार कर रहा है। वेटिंग लिस्ट होगी खत्म! नागपुर-मुंबई और नागपुर-पुणे रूट पर वंदे भारत ट्रेनों की काफी मांग है। मुंबई और पुणे जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट होती है। त्योहारों के समय तो और भी ज्यादा भीड़ होती है। इसलिए इन रूट्स पर दो और प्रीमियम ट्रेनें चलाना यात्रियों और रेलवे दोनों के लिए फायदेमंद होगा। हालांकि, मौजूदा ट्रेनों के समय में बदलाव और परिचालन में कुछ समायोजन करना होगा। अधिकारी ने यह भी कहा कि इन लंबी दूरी की प्रीमियम ट्रेनों के लिए स्लीपर कोच वाली ट्रेनें सबसे उपयुक्त रहेंगी।

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