LATEST NEWS

खुद की बिजली से दमकेंगे एमपी के 10 बड़े शहर, 12 मेगावाट तक की क्षमता के लगेंगे पावर प्लांट

भोपाल नगरीय विकास विभाग ने घरेलू कचरे के निस्तारण के मामले में बड़े जुर्माने से बचने के लिए प्रयास शुरू किए हैं। इसके तहत कहीं कचरे से सीएनजी बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं तो कहीं कंपोस्टिंग के प्लांट लग रहे हैं। इसी सिलसिले में अब मध्यप्रदेश के 10 शहरों में कचरे से बिजली बनाने के प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन्हें केन्द्र से अनुमति मिल गई है। यह वर्ष 2026 तक शुरू होने की संभावना है। सरकार ने प्रदेश में नगरीय निकायों को वर्ष 2027 तक कचरा प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया है। यहां पहले से बनाई जा रही रीवा, जबलपुर में कचरे से बिजली बनाने की यूनिट संचालित हैं। प्रतिदिन 950 टन कचरे का प्र-संस्करण कर 18 मेगावॉट बिजली पैदा की जा रही है। लीगेसी वेस्ट खत्म करने में मिलेगी मदद एनजीटी ने 2022 में सॉलिड वेस्ट प्रबंधन में लापरवाही के लिए 3 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। तत्कालीन सीएस ने छह माह में प्रबंधन करने का शपथ-पत्र दिया था। इसके बाद जुर्माना स्थगित किया गया, लेकिन अब भी निकायों की डंपिंग साइट पर 25 लाख टन से ज्यादा लीगेसी वेस्ट जमा है। बिजली प्लांट बनने से वेस्ट भी खत्म करने में मदद मिलेगी। जुर्माने से बचा जा सकेगा। हाल ही में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कटनी, सागर में स्वचालित यूनिट लगाई गई हैं। इन 10 नई इकाइयों को अनुमति 10 नगरीय निकायों के लिए क्लस्टर आधार पर 1018.85 टन प्रतिदिन क्षमता की इकाइयों के लिए मंजूरी मिली है। इन निकायों में सांची, हरदा, नया हरसूद, शाहगंज, आलीराजपुर, देपालपुर, उन्हेल, बाबई, धारकोटि और इंदौर शामिल हैं। इनमें आसपास के स्थानों को भी जोड़ा गया है। जहां कचरा कम निकलता है वहां समीपस्थ अन्य शहरों को जोड़ा गया है। इंदौर-उज्जैन को मिलाकर 607 टन कचरे से बिजली बनाने की यूनिट्स का काम प्रस्तावित है। इसके शुरू होने से 12.15 मेगावाट बिजली बन सकेगी।

चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के लिए किया AI का इस्तेमाल तो मिलेगी सख्त सजा, पहली बार ब्रिटेन ने बनाया कानून

लंदन आर्टिफिशल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल जैसे-जैसे बढ़ रहा है, इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। ब्रिटेन दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जो AI से चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के खिलाफ कानून लेकर आया है। इस कानून में बाल यौन शोषण कंटेंट को बनाने के लिए AI प्रोडक्ट को रखना, बनाना या उनकी किसी भी तरह से डिस्ट्रीब्यूशन को अवैध श्रेणी में रखा गया है। ऐसे करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसे एआई के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त कानून माना जा रहा है। रॉयटर की खबर के मुताबिक AI को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। इसके गलत इस्तेमाल को लेकर भी लोगों में चिंता है। ब्रिटेन सरकार में होम सेक्रेटरी यवेट कूपर ने बताया कि AI द्वारा जनरेट चाइल्ड पोर्नोग्राफी इमेज जैसे खतरों को रोकने के लिए चार नए कानून को पेश किया जाएगा। इसमें सख्त सजा का प्रावधान किया जाएगा। ऐसी सामग्री के साथ पकड़े जाने पर 5 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है। AI पीडोफाइल मैनुअल रखना भी गैर-कानूनी कैटेगरी में पाया है और इसमें अपराधियों को तीन साल तक सजा होगी। कूपर ने चाइल्ड एब्यूज को कूपर ने बाल शोषण के बढ़ते ऑनलाइन पहलू पर भी प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि एक जांच में पाया गया कि पूरे ब्रिटेन में लगभग 500,000 बच्चे हर साल किसी न किसी तरह के दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं, जिसमें इंटरनेट से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है। सरकार उन लोगों पर भी निशाना साध रही है जो बाल यौन शोषण सामग्री को वितरित करने या साझा करने की सुविधा देने वाली वेबसाइट चलाते हैं। ऐसी वेबसाइट चलाते हुए पकड़े जाने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 साल तक की जेल हो सकती है। UK होम मिनिस्ट्री ने दी जानकारी ब्रिटेन की होम मिनिस्ट्री ने इसको लेकर कहा कि ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बनने जा रहा है, जो चाइल्ड एब्यूज कंटेंट बनाने AI प्रोडक्ट को रखना, बनाना या उनको डिस्ट्रीब्यूट करने को अवैध बनाता है. सिखाना भी होगा गैर कानूनी AI पीडोफाइल मैनुअल रखना भी गैर-कानूनी कैटेगरी में पाया है और इसमें अपराधियों को तीन साल तक सजा होगी. AI पीडोफाइल मैनुअल के तहत लोगों को यौन शोषण के लिए AI का उपयोग करना सिखाया जाता हैं. वेबसाइट भी होंगी शामिल नए कानून के तहत चाइल्ड एब्यूज कंटेंट के तहत वे वेबसाइट भी आएंगी, जो चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कंटेंट शेयर करती हैं. नए कानून में वे वेबसाइट भी शामिल होंगी, जो यौन शोषण के लिए बच्चों को कैसे तैयार किया जाए उसके लिए सलाह देने का काम करती हैं. क्राइम एजेंसी ने बताया मीडिया रिपोर्ट्स में नेशनल क्राइम एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए और उससे संबंधित हर महीने 800 गिरफ्तारियां होती हैं. इसमें कहा कि 8.40 लोग देशभर में बच्चों के लिए खतरा हैं, जो वयस्क आबादी का 1.6 परसेंट है. ऑनलाइन और ऑफलाइन खतरा पैदा करते हैं.

हर घर में पाइप लाइन से पहुंचेगी रसोई गैस, केंद्र सरकार की बढ़ी तैयारी

नईदिल्ली केंद्र सरकार उज्जवला योजना के तहत हर घर में एलपीजी पहुंचाने के बाद देश में गैस पाइपलाइन के दायरे में विस्तार कर रही हैं। पाइप लाइन के माध्यम से घर-घर गैस आपूर्ति के लिए सरकार कदम उठा रही है। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 733 जिलों में फैले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करने वाले 307 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) को अधिकृत किया है। यह जानकारी केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सरकार ने देश में सीजीडी क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं। इनमें अन्य बातों के अलावा ये उपाय शामिल हैं-     सीजीडी क्षेत्र को घरेलू प्राकृतिक गैस का आवंटन     पीएनजी प्रयोजन के लिए उपलब्ध मोड (कैस्केड मोड सहित) के माध्यम से घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए अधिसूचना।     सीजीडी परियोजनाओं को सार्वजनिक उपयोगिता का दर्जा प्रदान करना ।     रक्षा आवासीय क्षेत्र/यूनिट लाइनों में पीएनजी के उपयोग के लिए दिशानिर्देश।     सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को अपने-अपने आवासीय परिसरों में पीएनजी की व्यवस्था करने के लिए दिशानिर्देश।     सीपीडब्ल्यूडी और एनबीसीसी सभी सरकारी आवासीय परिसरों में पीएनजी की व्यवस्था करेंगे। सरकार इस विषय में संबंधित राज्यों में सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए राज्य सरकारों के साथ नियमित रूप से बातचीत और बैठकें आयोजित करती है तथा इस संबंध में चुनौतियों का समाधान करती है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विकास के तहत प्रदान किए जाते हैं। पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) द्वारा अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से ये कनेक्शन दिए जाते हैं। आपको बता दें, पीएनजीआरबी ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 733 जिलों में फैले देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 100 प्रतिशत को कवर करने वाले 307 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) को अधिकृत किया है। इसके अतिरिक्त पीएनजीआरबी ने सीजीडी नेटवर्क के विकास के लिए पूरे झारखंड राज्य को कवर करने वाले 11 भौगोलिक क्षेत्रों (जीए) (बिहार और झारखंड में फैले 3 जीए सहित) को अधिकृत किया है। हर घर में आएगी रसोई गैस के लिए पाइप लाइन उन्होंने कहा कि गैस पाइप लाइन का विस्तार हो जाने के बाद देश के 82 प्रतिशत से अधिक भूमि क्षेत्र और 98 प्रतिशत आबादी को पाइप लाइन के जरिये रसोई गैस सप्लाई कर दी जाएगी। गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए बोल का प्रोसेस 12 मई से शुरू होगा। 98 फीसदी आबादी को मिलेगी पाइप के जरिये रसोई गैस हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि बोली प्रक्रिया के बाद बेसिक इंफ्रास्ट्रक्टर का खाका बनाने पर काम किया जाएगा। इसमें एक तय समय लगेगा। मंत्री ने बताया कि 11वीं बोली के बाद 82 फीसदी लैंड एरिया और 98 फीसदी आबादी को रसोई गैस पाइप लाइन के जरिये मिलेगी। इन एरियो को नहीं मिल पाएगी गैस पाइप लाइन वहीं, पहाड़ी इलाकों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि देश के पूर्वी इलाके और जम्मू कश्मीर के कुछ दुर्गम एरिया में गैस पाइप लाइन नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की तुलना में पाइप के माध्यम से मिलने वाली रसोई गैस सस्ती और ज्यादा बेहतर होगी। बनेंगे 1000 एलएनजी स्टेशन कोविड महामारी के दौरान उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त एलपीजी सिलेंडर दिये गए। आज गैस सिलेंडरों की संख्या 30 करोड़ से अधिक है जबकि साल 2014 में 14 करोड़ थी। मंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी की पूरा आबादी को इसमें कवर किया जाए और काम तेजी से किया जाएगा। इसी योजना के तहत 1000 एलएनजी स्टेशन लगाए जाएंगे।

इंदौर में मास्टर प्लान की 23 सड़कें बनेगी, 8 पर पहले फोकस

इंदौर  मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निगमायुक्त शिवम वर्मा ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में मास्टर प्लान के पहले चरण में बनने वाली 8 सड़कों के निर्माण कार्य की समीक्षा की। इस दौरान अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर, अधीक्षण यंत्री डीआर लोधी मौजूद रहे। वर्मा ने बताया कि मास्टर प्लान के तहत 23 सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है।  बिचौली हप्सी से भूरी टेकरी होते हुए नायता मुंडला तक का कार्य जारी है। प्रथम चरण में 8 सड़कों के लिए सेंट्रल लाइन डालने, नोटिस जारी करने संबंधी कार्य इस सप्ताह से शुरू कर दिए जाएंगे। इसके अलावा देवगुराडिया स्थित 500 टीडीपी बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने, इस प्लांट के अत्याधुनिकरण करने, मुख्य मार्गों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने को लेकर चर्चा हुई। 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे महापौर ने बताया कि इन सड़कों के निर्माण पर करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पैसा केंद्र सरकार ने पहले ही इंदौर नगर निगम के खाते में ट्रांसफर कर दिया है। हमने केंद्र सरकार से 14 अन्य सड़कों के लिए भी 400 करोड़ रुपये जारी करने की मांग की है। हम इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेंगे। इन 8 सड़कों का होगा काम -सुभाष मार्ग (गोल मंदिर से रामबाग पुल तक): लंबाई 1300 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -लिंक रोड (एमआर-10 से एमआर-12 तक): लंबाई 1800 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -एमआर-5 (बड़ा बांगड़दा से पीएमएवाय मल्टी तक): लंबाई 1700 मीटर, चौड़ाई 24 मीटर। -भमोरी चौराहे से एमआर-10 व राजशाही गार्डन से होटल वॉच तक: लंबाई 1100 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। -वीर सावरकर प्रतिमा से अटल गेट तक: लंबाई 1310 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। एडवांस एकेडमी से रिंग रोड तक: लंबाई 3650 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। जमजम चौराहे से स्टार चौराहा तक: लंबाई 1920 मीटर, चौड़ाई 30 मीटर। खजराना मंदिर द्वार से जमजम चौराहा तक: लंबाई 1120 मीटर, चौड़ाई 18 मीटर। बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ेगी, अतिरिक्त जमीन भी देंगे बैठक में एशिया के सबसे बड़े 500 टीडीपी क्षमता वाले बायोमिथेन प्लांट की क्षमता बढ़ाकर 800 टीडीपी करने और इस प्लांट को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करने, प्लांट के लिए अतिरिक्त जमीन देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। 24 मीटर या इससे चौड़ी सड़क पर बेच सकेंगे टीडीआर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि बैठक में टीडीआर सर्टिफिकेट पोर्टल के माध्यम से जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। मास्टर प्लान की 23 सड़कों सहित अन्य सड़कें जहां नगर निगम ने चौड़ीकरण के लिए निजी जमीन ली है, वहां जमीन मालिकों को ट्रांसफरेबल डेवलमेंट राइट्स (टीडीआर) सर्टिफिटेक जारी किए जाएंगे।

इंदौर के रेल प्रोजेक्ट के लिए निश्चित राशि रखने के बजाय जैसे-जैसे काम होते जाएगा, भुगतान भी लगातार किया जाएगा

इंदौर  इंदौर रेलवे स्टेशन के दिन फिरेंगे। केन्द्रीय बजट में 480 करोड रुपए रेलवे स्टेशन के री-डेवलेपमेंट के लिए मिलेंगे। पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि इस बार मिली है। बीते साल इंदौर के खाते में 2990 करोड की राशि थी।  सांसद शंकर लालवानी ने दिल्ली में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की, जिसमें बताया गया कि इंदौर के लिए अभी तक का सर्वाधिक 5200 करोड़(Rail Budget in MP) की राशि का प्रावधान किया गया है। इस बार प्रोजेक्ट के लिए निश्चित राशि रखने के बजाय जैसे-जैसे काम होते जाएगा, भुगतान भी लगातार किया जाएगा। इंदौर-खंडवा गेज कन्वर्शन, इंदौर-दाहोद, इंदौर-बुधनी के साथ-साथ इंदौर-मनमाड़ नई लाइन में बजट की कमी नहीं आएगी। इंदौर-बुधनी-जबलपुर प्रोजेक्ट: इंदौर-बुधनी नई रेल लाइन प्रोजेक्ट 2018 में स्वीकृत हुआ था। इस लाइन के लिए 1600 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। जल्द शुरू होगा काम मुख्य स्टेशन के री-डेवलेपमेंट की डेढ़ साल पहले योजना बनी थी। इसके लिए बजट(Rail Budget in MP) में 480 करोड़ रुपए शामिल किए गए हैं। निर्माण के लिए टेंडर भी फाइनल भी हो गए है। एक माह में काम शुरू हो जाएगा। मुख्य बिल्डिंग सात मंजिला बनाई जाएगी। स्टेशन पर आने वाले 50 साल के अनुरूप व्यवस्था जुटाई जाएगी। एयरपोर्ट की तर्ज पर स्टेशन का निर्माण होगा। इन पर नजर इंदौर-मनमाड़ प्रोजेक्ट : इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट वर्ष 2017 में स्वीकृत हुआ। हाल ही में इस केंद्रीय केबिनेट से प्रोजेक्ट के लिए अनुमति मिली है। मप्र के हिस्से में डीपीआर का काम हो चुका है। दाहोद-इंदौर रेल प्रोजेक्ट : वर्ष-2007 में दाहोद-इंदौर रेल प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया था। इंदौर-दाहोद रेल लाइन में सबसे महत्वपूर्ण टीही टनल में इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। रतलाम-महू-खंडवा-अकोला प्रोजेक्ट रतलाम-महू-खंडवा-अकोला ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट को 2008 में विशेष दर्जा मिला। लागत करीब 2 हजार करोड़ के आसपास है। पातालपानी से बलवाड़ा तक डायवर्टेड रेल लाइन के 468.65 करोड़ के टेंडर जारी कर दिए हैं। मध्यप्रदेश को रेल बजट में 14,745 करोड़ रुपए आवंटित मध्यप्रदेश के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जहां रेल बजट 2025-26 घोषित कर दिया गया है। इस बजट में राज्य को 14,745 करोड़ रुपए मिले हैं। जिससे रेल नेटवर्क का विस्तार और आधुनिकीकरण होगा। इसमें 31 नई रेल परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। जिससे रेल की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रियों को सुविधा मिलेगी। इन स्टेशनों का हो रहा रीडेवलपमेंट रीडेवलपमेंट परियोजनाओं के तहत रानी कमलापति स्टेशन, ग्वालियर, खजुराहो, सतना, इंदौर, बीना और जबलपुर जैसे मुख्य स्टेशनों के रीडेवलपमेंट यानी पुनर्विकास में 1950 करोड़ रुपए की लागत से काम जारी है। 80 स्टेशनों पर खर्च किए जाएंगे 2708 करोड़ रुपए प्रदेश के आमला, अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बनापुरा, बरगवां, ब्योहारी, बेरछा, बैतूल, भिंड, भोपाल, बिजुरी, बीना, गुना, ग्वालियर, हरदा, हरपालपुर, इंदौर जंक्शन, इटारसी जंक्शन, जबलपुर, सतना, जुन्नारदेव, करेली, कटनी जंक्शन, कटनी मुरवारा, कटनी साउथ, ब्यावरा राजगढ़, छिंदवाड़ा, डबरा, दमोह, दतिया, देवास, गाडरवारा, गंजबासौदा, घोड़ाडोंगरी शामिल हैं। जिसमें 2708 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। साथ ही सागर, सीहोर, सिवनी, शहडोल, शाजापुर, श्यामगढ़, श्योपुर कलां, शिवपुरी, श्रीधाम, शुजालपुर, सिहोरा रोड, सिंगरौली, टीकमगढ़, उज्जैन, उमरिया, विदिशा, विक्रमगढ़, आलोट, खाचरोद, खजुराहो जंक्शन, खंडवा, खिरकिया, लक्ष्मीबाई नगर, मैहर, मक्सी जंक्शन, मंडला फोर्ट, मंदसौर, एमसीएस छतरपुर, मेघनगर, मुरैना, मुलताई, नागदा जंक्शन, नैनीपुर जंक्शन, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), नरसिंहपुर, नेपनागर, नीमच, ओरछा, पांढुर्णा, पिपरिया, रतलाम, रीवा, रुथियाई, सांची और संत हिरदाराम नगर जैसे स्टेशन शामिल हैं।

चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि, ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना: सर्वे

ग्वालियर मध्य प्रदेश में पन्ना जिले की धरती से ‘हीरा’ निकलता है जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, अब पन्ना के बाद चंबल की धरती भी हीरा उगल सकती है. क्योंकि यहां भी हीरा मिलने की संभावना जताई गई है. जियोलॉजी विभाग के सर्वे में ग्वालियर-शिवपुरी जिले के 421 वर्ग किलोमीटर एरिया में हीरा मिलने की संभवना हैं, अगर ऐसा होता है तो यह ग्वालियर चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी. चंबल की मिट्टी अब हीरा उगलेगीं…जी हां, आपने सही सुना है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने ग्वालियर ओर शिवपुरी जिले के राजस्व, वन और आरक्षित वन भूमि की जानकारी मांगी है। जिसके बाद लगभग 35 लोकेशन के टेंडर होंगे। फिर उसकी नीलामी होगी। दरअसल, पन्ना में हीरा पाया जाता है। यह विंध्य ग्रुप का हिस्सा है। ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के तहत आता है। मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआई ने सर्वे किया था। इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तहत इन गांव की पहाड़ियों पर हीरे संभावना है घाटीगांव ब्लॉक: करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा भितरवार ब्लॉक: भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरथी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना। घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन को ब्लॉक कर दिया जाएगा। भितरवार के लोढी में 2 फीसदी जगह पर ही खनन ब्लॉक मिलेगा। रिछारी कला में 1 फीसदी जगह पर ब्लॉक मिलेगा। वहीं हीरे की खबर को लेकर ग्रामीण भी काफी खुश नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हीरे की खान यहां पर संचालित होती है तो यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा और आमदनी बढ़ेगी। अभी ग्वालियर ओर शिवपुरी में सफेद और लाल पत्थर का खनन हो रहा है। इसके अलावा आयरन की भी खदान आवंटित है। पनिहार के पास नई खदान आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही कांच की खदान डबरा में दी गई हैं। यहां से निकलने वाले खनिज से कांच तैयार किया जा रहा है। वहीं अब हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है। ऐसे में कहा जा सकता है कि हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी। रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। ग्वालियर खनिच विभाग ने भी किया सर्वे बता दें कि पन्ना में हीरा पाया जाता है जो विंध्य ग्रुप का हिस्सा है, ग्वालियर भी विंध्य ग्रुप के तहत आता है, मिट्टी और पहाड़ों की एक जैसी स्थिति को देखते हुए जीएसआइ ने सर्वे किया था. इसमें ग्वालियर और शिवपुरी में हीरा मिलने की संभावना नजर आई है, हीरा मिलने पर ग्वालियर की पहचान भी पन्ना की तरह होगी, ग्वालियर के जिला खनिज अधिकारी प्रदीप भूरिया ने बताया कि हीरा खनन के लिए ब्लॉक दिया जाना है. इसके लिए राजस्व, वन और संरक्षित वन की भूमि की जानकारी मांगी गई है. जनाकरी मिलने के बाद भूमि रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी. ग्वालियर-शिवपुरी जिले के इन गांवों में होगा खनन ! घाटीगांव क्षेत्र के अधिकतर गांव में 100 फीसदी क्षेत्र में खनन का ब्लॉक दिया जाएगा, यहां करई, दुर्गसी, बन्हेरी, सेकरा, चुही, बराहना, पटपरी, उम्मेदगढ़, ओबरा, पाटई, मानपुरा, कलवाह, सेमरी, चनगोरा, डागोर, तघई, बडक़ागांव, मोहना, आदि गांव में खनन किया जाएगा, इसके अलावा ग्वालियर के भितरवार ब्लॉक के भितरी, गधोटा, मावथा, हरसी, खोर, मुसाहरी, सेबई, जतरथी, रिछारी खुर्द, जखवार, बेलगड़ा, डोंगरपुर, मुधारी, रुअर, तालपुर वीरन, बमोर, रिछारी कला, हुरहुरी, रिठोदन, गाजना, श्याऊ, चिटोली, देवरी कला, कैथोड, धोबट, लोढी, करहिया, बैना में कुछ फीसदी ब्लॉक दिया जाएगा. अगर यहां हीरा मिलता है तो इस इलाके की किस्मत चमक सकती है. 

8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी, कर्मचारियों को कितनी की उम्मीद करनी चाहिए? जानिए इसका फॉर्मूला

नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 8वां केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) 1 जनवरी 2026 से लागू होने जा रहा है. इससे एक करोड़ से अधिक केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में वृद्धि होगी. इस आयोग के द्वारा मिलने वाली लाभों की खबरें सरकारी कर्मचारियों में काफी चर्चा का विषय बन चुकी हैं. आइए, जानते हैं कि इस वेतन आयोग से कर्मचारियों को कितनी सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद करनी चाहिए और इसका गणना का तरीका क्या है. 8वां वेतन आयोग और एयक्रॉयड फॉर्मूला 8वां वेतन आयोग भी 7वें वेतन आयोग की तरह सैलरी और पेंशन की वृद्धि के लिए एयक्रॉयड फॉर्मूला का पालन करेगा. इस फॉर्मूला के तहत कर्मचारियों की सैलरी का निर्धारण उनके जीवन निर्वाह की जरूरतों के हिसाब से किया जाता है. इसे डॉ. वॉल्स एयक्रॉयड ने विकसित किया था, जिनका मुख्य उद्देश्य था कि किसी भी श्रमिक के लिए आवश्यक न्यूनतम वेतन उसकी पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तय किया जाए. एयक्रॉयड फॉर्मूला में एक श्रमिक, उसकी पत्नी और दो बच्चों के लिए न्यूनतम वेतन का निर्धारण किया जाता है. यह फॉर्मूला 1957 में भारतीय श्रमिक सम्मेलन (ILC) द्वारा अपनाया गया था और तब से इसका उपयोग न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के लिए किया जा रहा है. 7वें वेतन आयोग का असर 7वें वेतन आयोग में एयक्रॉयड फॉर्मूला का उपयोग करते हुए न्यूनतम मूल वेतन को ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया गया था. साथ ही, इसमें एक फिटमेंट फैक्टर भी शामिल किया गया था, जिससे सैलरी में वृद्धि हुई. इसके तहत एक फिटमेंट फैक्टर को 2.57 के रूप में लागू किया गया था, जिससे कर्मचारियों की सैलरी का पुनरीक्षण हुआ था. 8वें वेतन आयोग में संभावित बदलाव अब जब 8वां वेतन आयोग आने वाला है, तो यह अपेक्षाएँ की जा रही हैं कि यह भी एयक्रॉयड फॉर्मूला का पालन करेगा, लेकिन इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार फिटमेंट फैक्टर को 1.92 से 2.86 के बीच माना जा सकता है. यदि अधिकतम फिटमेंट फैक्टर, यानी 2.86, अपनाया जाता है, तो न्यूनतम मूल वेतन ₹18,000 से बढ़कर ₹51,480 तक पहुँच सकता है, जो कि एक बड़ी बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा, पेंशन में भी वृद्धि हो सकती है, और ₹9,000 से ₹25,740 तक पहुंचने की संभावना है. फिटमेंट फैक्टर का महत्व फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिसका उपयोग सैलरी और पेंशन में वृद्धि का निर्धारण करने के लिए किया जाता है. यह वर्तमान में मिलने वाली सैलरी या पेंशन राशि से गुणा किया जाता है. हालांकि, इस समय सैलरी वृद्धि का प्रतिशत अभी तक तय नहीं हुआ है, लेकिन पिछले आयोगों के सुझावों से हम अनुमान लगा सकते हैं कि इस बार भी कर्मचारियों की सैलरी में अच्छी वृद्धि हो सकती है. 7वां वेतन आयोग और एक्रोयड फॉर्मूला फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 7वें वेतन आयोग ने एक्रोयड फॉर्मूले का इस्तेमाल करते हुए केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था. लगभग एक दशक पहले, 7वें वेतन आयोग ने केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन को अपडेट करने के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था. इस फिटमेंट फैक्टर और एक्रोयड फॉर्मूले पर आधारित वेतन मैट्रिक्स 2016 में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद से प्रभावी है. इस फॉर्मूले पर 8वां वेतन आयोग के तहत कितनी बढ़ेगी सैलरी? माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग के तहत भी एक्रोयड फार्मूला अपनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी कर्मचारियों की सैलरी आज के महंगाई के हिसाब से उचित है या नहीं? रिपोर्ट्स बताती हैं कि सरकार 1.92 से 2.86 के बीच फिटमेंट फैक्टर पर विचार कर सकती है. अगर सीमा का उच्च अंत, 2.86, चुना जाता है, तो सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से 51,480 रुपये तक बढ़ सकता है, जो वर्तमान 18,000 रुपये से काफी अधिक है. इसके अलावा पेंशन में 9,000 रुपये से 25,740 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है. फिटमेंट फैक्टर वेतन और पेंशन बढ़ोतरी का कैलकुलेशन फिटमेंट फैक्टर को वर्तमान न्यूनतम वेतन या पेंशन अमाउंट से गुणा करके तय किया जाता है. 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन बढ़ोतरी कितने फीसदी होगा? अभी ये क्लियर नहीं है. उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही 8वें वेतन आयोग की संरचना की घोषणा करेगी, जिसमें एक अध्यक्ष और दो सदस्य शामिल होंगे.  

भारत में प्रीमियम बाइक्स की कीमतें घटने वाली हैं , खरीदारों के लिए अधिक सुलभ हो जाएंगी

नई दिल्ली भारत सरकार ने हाल ही में बजट पेश किया है। इस बजट में सरकार ने मोटरसाइकिलों में इंपोर्ट ड्यूटी कम करने का ऐलान किया है। यानि की अब हार्ले-डेविडसन, डुकाटी जैसे प्रीमियम बाइक्स अब और सस्ते हो जाएंगी।  हार्ले-डेविडसन टैरिफ भारत और अमेरिका के बीच कई सालों से विवाद का कारण बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस पर कई बार बयान दे चुके हैं और उन्होंने भारत से टैरिफ में सुधार की मांग की थी। इस बार के बजट में होने वाले नए ऐलान से उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर तनाव में कमी आएगी। बता दें कि, हार्ले-डेविडसन टैरिफ भारत और अमेरिका के बीच कई वर्षों से विवाद का विषय रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस मुद्दे पर कई बार बोल चुके हैं और उन्होनें भारत से टैरिफ में सुधार करने की बात कही थी. इस बार के बजट में होने वाले इस नए ऐलान से दोनों देशों के बीच टैरिफ मुद्दे को लेकर होने वाले तनाव में कमी आने की पूरी उम्मीद है. कितनी सस्ती हुईं बाइक्स: सरकार के इस नए फैसले के मुताबिक कम्पलीट बिल्ट यूनिट (CBU) के तौर पर आयात की जाने वाली 1,600 सीसी तक की इंजन क्षमता की मोटरसाइकिलों पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है. इन बाइक्स को CBU रूट से आयात किया जाता था, जिससे इनकी कीमत ज्यादा थी. इसके अलावा 1,600 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाली मोटरसाइकिलों पर और अधिक कटौती की गई है. इन्हें 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है. नए बजट के अनुसार, सेमी-नॉक्ड डाउन (SKD) किट पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है, तथा पूरी तरह से नॉक्ड डाउन (CKD) रूट से इम्पोर्ट की जाने वाली बाइक्स पर ड्यूटी को 15 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है. टैरिफ में इस कमी से भारत में हार्ले-डेविडसन और डुकाटी जैसे ब्रांड्स के प्रीमियम मोटरसाइकिलों की कीमतों में तगड़ी कटौती देखने को मिलेगी. इससे ये महंगी और उंची कीमत वाली बाइक्स भी लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध होगी. जानकारों का मानना है कि, इससे इम्पोर्टेड प्रीमियम बाइक्स की डिमांड बढ़ने की पूरी उम्मीद है. आयातित बाइकों पर टैरिफ में कटौती का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब डोनाल्ड ट्रम्प ने उन देशों पर भी पारस्परिक कर लगाने की धमकी दी है जो अमेरिकी वस्तुओं पर हाई टैरिफ लगाते हैं. पिछले साल दिसंबर में ट्रम्प ने कहा था कि भारत द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स ज्यादा है. उन्होंने कहा कि “यदि वे हम पर टैक्स लगाते हैं, तो हम भी उन पर उतना ही टैक्स लगाएंगे.”  

पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा- कुछ लोगों का फोकस स्टाइलिश बाथरूम पर है, जबकि हमारा ध्यान हर घर तक नल से जल पहुंचाने पर है

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान आम आदमी पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों का फोकस स्टाइलिश बाथरूम पर है, जबकि हमारा ध्यान हर घर तक नल से जल पहुंचाने पर है।” इस दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चर्चित टिप्पणी को दोहराया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “केंद्र से भेजा गया एक रुपया जनता तक सिर्फ पंद्रह पैसे ही पहुंचता है।” पीएम मोदी ने इसे “गजब की हाथ की सफाई” बताते हुए विपक्ष की भ्रष्टाचार नीति पर करारा वार किया। लोकसभा में दिए गए इस भाषण के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्ष ने पीएम मोदी के इस बयान को चुनावी जुमला बताया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे विकास की सच्चाई करार दिया।

कैबिनेट ने दी मंजूरी, जारी रहेगी ढाई लाख की सब्सिडी, शहरी क्षेत्रों में हितग्राहियों को अगले पांच सालों में 10 लाख आवास उपलब्ध कराए जाएंगे

भोपाल शहरों को झुग्गीमुक्त करने की दिशा में राज्‍य सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में हितग्राहियों को आगामी पांच वर्ष में 10 लाख आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 को स्वीकृति दे दी। इसमें केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 50 हजार करोड़ रुपये निवेश करेंगी, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बनेंगे। ऐसे समझें किसे क्‍या लाभ मिलेगा प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दस लाख आवास बनाए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास बनाने वाले को ढाई लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसमें डेढ़ लाख रुपये केंद्र और एक लाख रुपये राज्य सरकार से मिलेंगे। भू-संपदा विनियामक अधिकरण (रेरा) से पंजीकृत बिल्डर द्वारा बनाए आवास लेने पर अनुदान का वाउचर दिया जाएगा। इसका प्रावधान योजना में प्रदेश सरकार की ओर से किया गया है। इसे मंगलवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही इंदौर की हुकमचंद मिल की भूमि पर हाउसिंग बोर्ड बड़ी आवासीय परियोजना लाएगा। इसका भी अनुमोदन किया गया। लागत निकालने के बाद इससे जो लाभ होगा, उसमें आधा हिस्सा इंदौर नगर निगम को दिया जाएगा। ढाई लाख की सब्सिडी जारी रहेगी प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शहरी प्रदेश में लागू करने की सहमति केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है। अब इसे लागू करने का अनुमोदन कैबिनेट द्वारा किया गया। योजना में पांच वर्ष में दस लाख आवास निर्मित किए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। बिल्डरों की एक वाइड श्रेणी बनाई जाएगी। इसमें वे बिल्डर शामिल किए जांएगे, जिनकी योजना को रेरा से अनुमति होगी और रिकार्ड अच्छा होगा। योजना के तहत पात्र व्यक्तियों को इनसे आवास लेने पर अनुदान का वाउचर दिया जाएगा। योजना में उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास कहीं भी पक्का आवास नहीं है। नौ लाख रुपये तक की वार्षिक आय और राज्य व केंद्र सरकार की किसी भी आवास योजना में लाभ ले चुके व्यक्ति योजना के लिए अपात्र होंगे। ऐसे व्यक्ति, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक हो और उनके पास स्वयं का भूखंड हो, उन्हें मकान बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के माध्यम से ढाई लाख रुपये की मदद की जाएगी। यह राशि तीन किस्तों में दी होगी। इसी तरह सरकारी या निजी एजेंसी की परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 30 से 45 वर्ग मीटर का फ्लैट दिलाया जाएगा। हुकुमचंद मिल की भूमि पर बनेगी टाउनशिप, 3,700 करोड़ का होगा निवेश हुकुमचंद मिल की देनदारी 436 करोड़ रुपये चुकाने के बाद अब इसकी 17.52 हेक्टेयर भूमि पर टाउनशिप बनाई जाएगी। 40 प्रतिशत भूमि पर आवासीय परियोजना तो शेष 60 प्रतिशत भूमि का उपयोग वाणिज्यिक किया जाएगा। लगभग 5,100 करोड़ रुपये का निवेश होगा और दस लोगों को रोजगार मिलेगा। परियोजना में 2,323 करोड़ रुपये के अन्य कार्य कराए जाएंगे, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। सरकार को जीएसटी के रूप में 400 करोड़, निर्मित क्षेत्र के विक्रय से 600 करोड़, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क सहित अन्य कर से लगभग 1,200 करोड़ रुपये मिलेंगे। परियोजना के लिए नगर निगम इंदौर भूमि की रजिस्ट्री बिना नीलामी के हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में करेगा। इस पर लगभग 19 करोड़ रुपये का शुल्क लगेगा। हाउसिंग बोर्ड को अनुज्ञेय फर्शी तल अनुपात से .5 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मिलेगा यानी अधिक निर्माण कार्य हो सकेगा। यह अभी दो प्रतिशत है। परियोजना लागत निकालने के बाद जो लाभ होगा, वो नगर निगम इंदौर और हाउसिंग बोर्ड के बीच बराबर बंटेगा। कैबिनेट के महत्‍वपूर्ण फैसले ये भी निजी डेवलपर से हितग्राही यदि आवास खरीदता है तो अनुदान का बाउचर दिया जाएगा। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित अन्य बड़े शहरों को मलिन बस्ती मुक्त करने की दिशा में पीपीपी माडल पर आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। नगरीय निकाय, राज्य की अन्य निर्माण एजेंसी के साथ निजी बिल्डर आवास बनाकर देंगे। इसके साथ ही कामकाजी महिला, औद्योगिक श्रमिक, शहरी प्रवासी, बेघर, निराश्रित, छात्रों सहित अन्य पात्र हितग्राहियों के लिए किराए पर आवास बनाकर उपलब्ध किए जाएंगे। स्वयं की भूमि पर आवास निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये का जो अनुदान दिया जा रहा है, वह जारी रखा जाएगा। बिल्डरों की एक वाइट श्रेणी बनाई जाएगी। इसमें वे बिल्डर शामिल किए जांएगे, जिनकी योजना को रेरा से अनुमति होगी और रिकार्ड अच्छा होगा। केंद्र सरकार ने योजना में अविवाहित कमाऊ वयस्क सदस्यों को अलग से लाभ दिए जाने का प्रविधान समाप्त कर दिया है। एक हितग्राही परिवार में अब पति, पत्नी, अविवाहित बेटा-बेटियां शामिल होंगे। 20 वर्ष में किसी भी आवासीय योजना में लाभ प्राप्त करने वाले अपात्र होंगे। सफाई कर्मी, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा योजना के हितग्राही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मलिन बस्ती के निवेश या विशेष समूह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हितग्राही पांच वर्ष तक आवास न तो बेच सकेंगे, न ही किसी को स्थानांतरित कर सकेंगे।

मंत्री परमार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर सीएम राइज विद्यालय गौलाना में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा का हुआ अनावरण

भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लागू होने के बाद से ही, प्रदेश में शिक्षा में आमूलचूल और व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। मध्यप्रदेश नए संकल्प के साथ, भारत केंद्रित शिक्षा और भारतीय दर्शन से समृद्ध शिक्षा की ओर सतत् आगे बढ़ रहा है। शिक्षा में व्यापक परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में, राज्य सरकार ने सीएम राइज योजना के अंतर्गत विद्यालय स्थापित किए हैं। निर्धनता, अब शिक्षा अर्जित करने में बाधा नहीं बन सकेगी। निर्धन अभिभावक का दर्द समझकर ही सीएम राइज योजना अंतर्गत विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। सभी वर्ग के विद्यार्थी समान रूप से गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ शिक्षा अर्जित कर सकेंगे। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कही। मंत्री परमार मंगलवार को शाजापुर जिले की शुजालपुर विधानसभा के गौलाना स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सीएम राइज विद्यालय में “भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम” में संबोधित कर रहे थे। मंत्री परमार ने गौलाना स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सीएम राइज विद्यालय में भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक भारत रत्न बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया। मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश के प्रथम सीएम राइज विद्यालय के रूप में स्थापित होने के समय ही, हमने इस विद्यालय का नामकरण बाबा साहेब के नाम पर कर दिया था। परमार ने कहा कि बाबा साहेब का संपूर्ण जीवन देश और समाज के लिए एवं सभी के लिए समान अधिकारों के लिए समर्पित रहा। इसके लिए उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना था। परमार ने कहा कि बाबा साहेब सभी के लिए श्रद्धा का केंद्र हैं, सभी वर्ग के लोग उनका सम्मान करते हैं और उनके जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेते हैं। मंत्री परमार ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेकर, उनके विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात् करें और उनकी तरह ही राष्ट्र निर्माण के लिए देशभक्त एवं ईमानदार नागरिक बनने की ओर आगे बढ़ें। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। परमार ने कहा कि विद्यालय परिसर में महापुरुषों के लिए कथनों पर आपस में संवाद कर, उन्हें अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करें। परमार ने कहा कि गौलाना में शीघ्र ही महाविद्यालय का भी लोकार्पण होगा, इससे विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर सुलभ रूप से गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक उच्च शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। परमार ने विद्यार्थियों से कहा कि मातृभूमि, जन्मभूमि, मां गंगा जैसी नदियां एवं गौमाता, इन चार माताओं के प्रति जीवन भर कृतज्ञता ज्ञापित करने का भाव जागृत करें। परमार ने कहा कि निरंतर अपने पुरुषार्थ और परिश्रम से आगे बढ़ें और राष्ट्र निर्माण में सहभागिता के भाव को आत्मसात् करें। परमार ने कहा कि हम सभी की सहभागिता से स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत पुनः विश्वमंच पर सिरमौर बनेगा। उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विद्यालय का भ्रमण कर शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा भी की और विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई के बारे में संवाद भी किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष हेमराज सिंह सिसोदिया, जिला शिक्षा अधिकारी विवेक दुबे, अंतर सिंह जादौन, मांगीलाल, महेंद्र गोवा, योगेंद्र सिंह बंटी बना, राजेश कुमार पाटीदार एवं विद्यालय के प्राचार्य गोपाल कृष्ण शर्मा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य जन उपस्थित थे।  

राजधानी भोपाल में भीख मांगने और देने पर बैन, उल्लंघन करने वालों पर होगी क़ानूनी कार्रवाई

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भीख मांगना और भीख देना अपराध की श्रेणी में आ गया है. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इसके लिए आदेश जारी किया है, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगने और देने दोनों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत जारी किया गया है और इसका उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी. भीख मांगने पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया? डीएम द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राजधानी भोपाल में ट्रैफिक सिग्नलों, चौराहों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने वाले लोग यातायात में बाधा डालते हैं और शासन के आदेशों की अवहेलना करते हैं. इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि भीख मांगने में अन्य राज्यों और शहरों के लोग भी संलग्न रहते हैं, जिनमें से कई का आपराधिक इतिहास होता है. इनमें से कई व्यक्ति नशे और अन्य अवैध गतिविधियों में भी लिप्त पाए गए हैं. इसके अलावा, भीख मांगने की आड़ में कई आपराधिक गिरोह भी सक्रिय हैं, जो इसका फायदा उठाते हैं. ट्रैफिक सिग्नलों पर दुर्घटनाओं का खतरा भीख मांगने का एक और बड़ा खतरा सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ा है. अक्सर देखा गया है कि भिक्षुक ट्रैफिक सिग्नलों पर गाड़ियों के बीच आकर भीख मांगते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है. भोपाल प्रशासन ने इसे एक सामाजिक बुराई मानते हुए इसे समाप्त करने का निर्णय लिया है. भीख देने वाले पर भी होगी कार्रवाई भोपाल कलेक्टर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सिर्फ भीख मांगना ही नहीं, बल्कि भिक्षुकों को भिक्षा देना या उनसे कोई सामान खरीदना भी अपराध माना जाएगा. अगर कोई व्यक्ति किसी भिक्षुक को भोजन, पैसे या अन्य चीजें देता है या उनसे कोई सामान खरीदता है, तो इसे भी इस आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. भिक्षुओं के लिए आश्रय स्थल की व्यवस्था प्रशासन ने भीख मांगने पर पूरी तरह से रोक लगाने के साथ ही, भिक्षुकों को पुनर्वासित करने के लिए विशेष प्रबंध भी किए हैं. आदेश के अनुसार, कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आश्रय स्थल को भिक्षुक गृह के रूप में आरक्षित किया गया है. प्रशासन का कहना है कि इससे बेघर और बेसहारा भिक्षुकों को रहने के लिए उचित स्थान मिलेगा और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. आदेश का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई डीएम कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह भी कहा कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे सार्वजनिक प्रचार, समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा. यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी. भीख न देने पर बदतमीजी दरअसल, एक नागरिक ने भीख न देने पर भिखारी द्वारा की गई बदतमीजी की शिकायत की थी। पुलिस ने भिखारी को पकड़ा और पूछताछ की। जमानती धारा होने के कारण उसे नोटिस देकर छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए भीख मांगने और देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी नए आदेश के अनुसार भोपाल की सीमा में कोई भीख नहीं मांग सकता। कोई भी किसी को भीख नहीं दे सकता। यहां तक कि भिखारियों से कोई सामान खरीदना भी मना है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। प्रशासन चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी करेगा। इससे नियम तोड़ने वालों पर नज़र रखी जा सकेगी। इस नियम के तहत निकाला आदेश यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इस धारा के तहत प्रशासन को लोगों की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार है। भिक्षावृत्ति करने वालों के लिए पुनर्वास भिखारियों के पुनर्वास के लिए भी व्यवस्था की गई है। कोलार स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भिक्षुक गृह बनाया गया है। यहां भिखारियों के रहने, खाने-पीने की व्यवस्था होगी। उन्हें यहां आश्रय दिया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे भिखारियों को भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। यह कदम शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है। इससे नागरिकों को भीख मांगने वालों से होने वाली परेशानी से भी निजात मिलेगी।  

हमने गरीब को झूठे नारे नहीं, सच्चा विकास दिया है, गरीब का दुख, सामान्य मानवी की तकलीफ, राहुल पर कसा तंज: मोदी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को ‘बोरिंग’ बताने वाले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर तंज कसा। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग अपने मनोरंजन के लिए गरीबों की झोपड़ियों में फोटो सेशन कराते हैं, उन्हें संसद में गरीबों की बात बोरिंग ही लगेगी। उन्होंने कहा कि हमने गरीब को झूठे नारे नहीं, सच्चा विकास दिया है। गरीब का दुख, सामान्य मानवी की तकलीफ, मीडिल क्लास के सपने ऐसे ही नहीं समझे जाते हैं, इसके लिए जज्बा चाहिए। मुझे दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ लोगों में यह है ही नहीं। इसके बाद पीएम मोदी ने शीशमहल का जिक्र करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का फोकस आलीशान घरों में जकूजी और शॉवर पर है। कुछ नेताओं का फोकस अपने घर के स्टाइलिश बाथरूम पर है। हमारा फोकस तो ‘हर घर नल से जल’ पहुंचाने पर है। पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए यह बहुत बड़ा सौभाग्य है कि देश की जनता ने मुझे 14वीं बार इस जगह पर राष्ट्रपति के संबोधन का आभार व्यक्त करने का अवसर दिया है। इसलिए मैं जनता-जनार्दन का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं और सदन में इस चर्चा में जिन-जिन लोगों ने हिस्सा लिया और चर्चा को समृद्ध किया, उन सबका भी मैं आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का उद्बोधन भविष्य के 25 वर्ष और ‘विकसित भारत’ के लिए एक नया विश्वास जगाने वाला है। एक प्रकार से आदरणीय राष्ट्रपति का यह उद्बोधन विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देने वाला है, नया विश्वास पैदा करने वाला है और जन-सामान्य को प्रेरित करने वाला है।

सीआरपीएफ के 3 जवान IED ब्लास्ट की चपेट में आने से घायल, एयरलिफ्ट कर लाया गया रायपुर

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन से अब नक्लसियों की कमर टूटने लगी है. मुठभेड़ में मिल रही विफलताओं से माओवादियों में बौखलाहट है. इसलिए जवानों को नुकसान पहुंचाने नक्सली लगातार आईईडी प्लांट कर रहे हैं. आज पुरंगेल के जंगल में IED ब्लास्ट की चपेट में आने से सीआरपीएफ के 3 जवान घायल हो गए. इसकी पुष्टि बस्तर रेंज आईजी पी सुंदरराज ने की है. घायल जवानों को इलाज के लिए रायपुर लाया गया है.   जानकारी के मुताबिक, संयुक्त टीम के साथ हीसीआरपीएफ 231 बटालियन के जवान सोमवार सुबह  सर्चिंग पर निकले थे.  किरंदुल थाना क्षेत्रान्तर्गत पुरंगेल गांव के जंगलों में नक्सलियों ने आज आईईडी ब्लास्ट किया. जिसकी चपेट में आने से एक जवान बुरी तरह से घायल हो गया. साथ ही दो और जवानों को मामूली चोट आई हैं. घायल जवान प्रमोद कुमार का पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया है. क्षेत्र में सघन गश्त सर्चिंग जारी है. घायल जवानों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया है. घायल जवान का अस्पताल में इलाज जारी एयरलिफ्ट कर IED ब्लास्ट में घायल दो जवानों को रायपुर लाया गया है. यहां एक निजी अस्पताल में जवान का इलाज जारी है.  अस्पताल के प्रबंधन निदेशक डॉ. सुनील खेमका ने कहा कि जवानों को यहां लाया गया है, एक और जवान को जल्द ही यहां भर्ती किया जाएगा. घायल जवान प्रमोद कुमार के पैर में चोटें आई हैं, हम उनका ऑपरेशन करेंगे. दूसरे जवान विजय कुमार को मामूली चोटें आई हैं.”

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कैंसर की सही समय में जाँच पर पूर्ण निदान सहजता से संभव

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि कैंसर की सही समय में जाँच पर पूर्ण निदान सहजता से संभव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गौरवशाली नेतृत्व में आज आर्थिक संसाधनों की कमी नहीं है। चिकित्सकीय संस्थानों का उन्नयन किया जा रहा है। अधोसंरचना विकास के साथ अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में संसाधनों के साथ चिकित्सकीय मैनपॉवर का मानवीय रवैया, भावनात्मक सहयोग उपचार को आसान करता है। मरीजों और परिजनों में संतोष का भाव जागृत करता है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी अधिकारियों कार्मिकों में मानवीय संवेदनाओं की समझ और उसका प्रकटीकरण अत्यंत आवश्यक है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्व कैंसर दिवस पर एम्स भोपाल में आयोजित 2 दिवसीय पेलियेटिव केयर प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि कैंसर का निदान सहज और सुलभ बनाने के लिये केंद्रीय बजट में हर ज़िले में कैंसर केयर सेंटर बनाने का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है। साथ ही कैंसर दवाओं को किफायती दरों में उपलब्ध कराने के प्रावधान किये गये हैं। आयुष्मान भारत योजना से हर नागरिक आज उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं सहजता से प्राप्त कर पा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन में स्वस्थ भारत महत्वपूर्ण आयाम है। इसके लिये केन्द्र और राज्य सरकार पूर्ण समर्पण से प्रयास कर रही हैं। इसे साकार करने हेल्थ मैन-पॉवर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सक का दायित्व केवल उपचार करने तक सीमित नहीं है। उपचार के साथ और उपचार के बाद मरीज़ को जो मानसिक और भावनात्मक सहयोग चिकित्सक या अस्पताल स्टॉफ से मिल सकता है, वो उसकी रिकवरी को और तेज़ करने में सहायक होता है। उन्होंने उपस्थित चिकित्सकों और नर्सिंग ऑफिसर से प्रशिक्षण का पूर्ण लाभ उठाने का आह्वान किया। असंचारी रोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए “टेस्ट और ट्रीट” अवधारणा पर किया जा रहा है कार्य उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में संभागीय मुख्यालयों में लाइनैक मशीन, पेट स्कैन, ब्रेकी थेरेपी एयर कैथ लैब जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि हृदय रोग, कैंसर जैसे असंचारी रोगों का समुचित निदान किया जा सके। उन्होंने कहा कि इन रोगों के बेहतर प्रबंधन के लिए “टेस्ट और ट्रीट” अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मियों से आह्वान किया कि पूरे समर्पण से मिशन मोड में सेवा भाव से कार्य करें। संसाधनों के साथ समर्पित प्रयास से मध्यप्रदेश शीघ्र ही स्वास्थ्य मानकों में अग्रणी राज्य बनेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विगत दिवस जबलपुर, भोपाल और इंदौर में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अंग रिट्रीवल एवं प्रत्यारोपण कर बहुमूल्य जीवन के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चिकित्सकीय और सहायक चिकित्सकीय स्टॉफ की प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा ऐसे समर्पित प्रयासों से चिकित्सकीय कार्मिको का मान बढ़ता है और समाज में अपने प्रतिष्ठित स्थान के साथ वे न्याय करते हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रशिक्षण प्रदान करने वाले मास्टर ट्रेनर और रिसोर्स पर्सन को सम्मानित किया। अध्यक्ष एम्स प्रो. डॉ. सुनील मलिक ने पेलियेटिव केयर के विभिन्न आयामों और महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने असंचारी रोगों के बढ़ते दबाव और प्रबंधन के लिए किये जा रहे प्रयासों की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और एम्स के संयुक्त तत्वाधान में किया गया है। एम्स के वरिष्ठ चिकित्सक, प्रोफेसर्स और विषय विशेषज्ञों ने पेलियेटिव केयर की जिम्मेदारियों और दायित्वों की चिकित्सकों और नर्सिंग ऑफिसर को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। क्या है पेलियेटिव केयर.. पेलियेटिव केयर गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए विशेष चिकित्सा देखभाल है। पेलियेटिव केयर का उद्देश्य मरीज़ में दर्द या अन्य कोई शारीरिक, मानसिक या सामाजिक समस्याओं की पहचान और सही मूल्यांकन कर उसकी पीड़ा को कम करने में मदद करना है। इसके लिए ऐसे मरीज़ों के परिजनों को भी परामर्श और तकनीकी कौशल को बढ़ाने की ज़रूरत है ताकि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पर उसकी बेहतर देखभाल हो सके। साथ ही साथ अस्पताल में बार-बार भर्ती होने की संभावनाओं को न्यूनतम किया जा सके। पेलियेटिव केयर कार्यक्रम में कैंसर विभाग, रेडियोथैरेपी, एनेस्थिशिया, मेडिसिन एवं सायकेट्री विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही फंटलाईन डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टॉफ को भी इसकी समझ ज़रूरी है, क्योंकि इन्हीं लोगों के पास सबसे पहले कोई मरीज़ अपनी तकलीफ को लेकर पहुंचता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर में 5 करोड़ 68 लाख लोगों को पेलिएटिव केयर की आवश्यकता है। इनमें से लगभग 2 करोड़ 57 लाख लोग जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। वैश्विक स्तर पर 14 प्रतिशत लोगों को ही पेलिएटिव केयर उपलब्ध है।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet