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फरवरी माह में आरएसएस के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत करेंगे बंगाल दौरा, 10 दिनों की रहेगी यात्रा

कोलकाता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत अगले महीने 10 दिनों के लिए पश्चिम बंगाल का दौरा करेंगे। यह यात्रा नौ फरवरी से शुरू होकर 16 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान वे संघ के अन्य शीर्ष पदाधिकारियों के साथ राज्य के विभिन्न हिस्सों में संगठन की गतिविधियों की समीक्षा करेंगे। भागवत के साथ आरएसएस के सहकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले सहित आठ वरिष्ठ पदाधिकारी भी होंगे। यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर आरएसएस के शीर्ष नेता एक साथ बंगाल का दौरा करेंगे, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले संघ की राज्य में बढ़ती सक्रियता स्पष्ट होती है। मुख्य रूप से उनके दौरे को तीन हिस्से में बांटा गया है – दक्षिणी बंगाल (9-11 फरवरी): यात्रा के पहले तीन दिनों में दक्षिण बंगाल के जिलों में संघ की गतिविधियों पर फोकस रहेगा। बर्दवान सत्र (11-16 फरवरी): इसके बाद भागवत और अन्य पदाधिकारी पूर्व बर्दवान जिले में मध्य बंगाल के जिलों में संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसमें जनजातीय बहुल इलाकों में विशेष ध्यान दिया जाएगा। सार्वजनिक रैली (16 फरवरी): दौरे का समापन बर्दवान में एक सार्वजनिक रैली के साथ होगा। हालांकि, आरएसएस ने इस दौरे को एक नियमित संगठनात्मक यात्रा बताया है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञ इसे काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा और इसका पश्चिम बंगाल पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह दौरा और भी प्रासंगिक है।  

मुख्यमंत्री ने किया दो दिवसीय आईएफएस मीट और वानिकी सम्मेलन का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के पन्ना जैसे क्षेत्र जहां वन्य जीवों की स्थिति शून्य हो गई थी, वहां भी वन अधिकारियों के प्रयासों के परिणामस्वरूप वन्य जीवों की गतिविधियां पुन: आरंभ हुईं, यह अपनी सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है और वे बधाई के पात्र हैं। वर्तमान में प्रदेश के पास हीरा है, चीता है और अब तो गजराज भी मध्यप्रदेश का रूख कर रहे हैं। प्रदेश का वन क्षेत्र समृद्ध है। वर्ष 2003 से 2021 के मध्य वन क्षेत्र में 1063 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। भोपाल देश की एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसके आस-पास आसानी से टाइगर देखे जा सकते हैं। यह हमारे प्रदेश के लिए सुखद और पर्यावरण की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पंडित खुशीलाल आयुर्वेद महाविद्यालय सभागार में दो दिवसीय आई.एफ.एस (भारतीय वन सेवा) मीट और वानिकी सम्मेलन के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ कर तथा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार, अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव तथा अन्य आई.एफ.एस. अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रूद्राक्ष का पौधा भेंटकर उनका स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस प्रकार के मीट परस्पर संवाद, मित्रता के भाव, अनुभव साझा करने और बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करने के लिए आवश्यक हैं। मध्यप्रदेश में प्रचुर वन संपदा विद्यमान है तथा पुरातत्व, भू-गर्भ शास्त्र, पर्यावरण, वनस्पति शास्त्र सहित कई विधाओं में अध्ययन व शोध की अपार संभावना विद्यमान हैं। वन विभाग को इन क्षेत्रों में अध्ययन को प्रोत्साहन और सहयोग प्रदान करने के लिए पहल करना होगी। इसी प्रकार पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए भी गतिविधियों का विस्तार किया जाए। उन्होंने रातापानी के संदर्भ में ग्रामों के विस्थापन की चुनौती का प्रभावी तरीके से सामना करने के लिए वन अमले की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वनों के विकास और नवाचारी गतिविधियों के संचालन के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध मध्यप्रदेश के वन और वन्य जीव हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि शासन इनके संरक्षण और सवंर्धन के लिये कटिबद्ध है। प्रदेश में जनभागीदारी को केन्द्र में रखकर अनेक गतिविधियां और कार्यक्रम चलाएं जा रहे है। राज्य मंत्री श्री अहिरवार ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वनों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये की गई ईमानदार एवं प्रभावी पहल का परिणाम है कि प्रदेश के वन आवरण में स्थायित्व आने के साथ ही वन्य प्राणियों के प्रबंधन की दिशा में किये गये प्रयासों को सराहा गया है। मंत्री श्री अहिरवार ने इस अवसर पर भारतीय वन सेवा अधिकारियों को बधाई दी। दो दिवसीय आई.एफ.एस. मीट में वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, संयुक्त वन प्रबंधन, वनवासियों के कल्याण आदि विषय पर चार सत्र होंगे। इसके साथ ही खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- सभी जिलों में सायबर तहसील को लागू करने वाला देश का पहला राज्य है मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अधिकारी वह है, जो जनहित में कार्य करें। इस उद्देश्य से शासकीय सेवा में प्रवेश करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी, स्वयं को प्रधान सेवक मानते हैं। मध्यप्रदेश का मंत्रि-मंडल भी परस्पर सहयोग से जनता के सेवक के रूप में कार्य कर रहा है। पद पर आने के बाद हमारे मन में अहंकार नहीं होगा, इस संकल्प के साथ, समाज हित और प्रदेश के विकास के लिए समर्पित होकर अपने दायित्व निर्वहन में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को रवीन्द्र भवन में कृषि, पशुपालन और राजस्व विभागों के लिए चयनित 362 शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवा अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि माता-पिता सहित परिवार के सदस्यों की आशा, अपेक्षा और उनके सहयोग के परिणामस्वरूप ही यह उपलब्धि प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नव चयनित अधिकारियों सहित उनके परिजन को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के बाद प्रगति पथ पर निरंतर अग्रसर होने का प्रयास जारी रखें। अधिकारी अपनी क्षमता, योग्यता को पहचानते हुए अपने उत्तरदायित्व का श्रेष्ठतम तरीके से निर्वहन कर स्वयं भी गौरवान्वित हो और शासन को भी गौरवान्वित करें। 256 कृषि विस्तार अधिकारी, 70 सहायक पशु चिकित्सकों और 36 नायब तहसीलदारों को प्रदान किए नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री लखन पटेल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विभाग के 256 कृषि विस्तार अधिकारी, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के 70 सहायक पशु चिकित्सकों और राजस्व विभाग के 36 नव चयनित नायब तहसीलदारों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने प्रदेश के सभी जिलों में सायबर तहसील स्थापना की पहल की। यह तकनीक के उपयोग से नागरिक सेवाओं को सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। देश में दुग्ध उत्पादन में मध्यप्रदेश तीसरे स्थान पर है। हमारा लक्ष्य दुग्ध उत्पादन की क्षमता को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इससे देश के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। प्रदेश में गौ-माता की बेहतर देखभाल के लिए गौ-शालाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसी क्रम में भोपाल सहित सभी बड़े शहरों में 10-10 हजार क्षमता की गौ-शालाएं संचालित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। किसानों की आय बढ़ाने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका दुग्ध उत्पादन की है। किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों में दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इससे किसानों को सीधे तत्काल लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि दस गाय से अधिक गौ-पालन करने वालों को अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। गाँवों में सड़क, घर-घर नल से जल जैसी सुविधाएं मिलने से गौपालन भी सुविधाजनक हुआ है। कृषि और पशु चिकित्सा की शिक्षा सुविधा का विस्तार किया जाएगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नव चयनित अधिकारी से यही अपेक्षा है कि वे अपनी प्रतिभा और क्षमता को निरंतर बेहतर करें। विकास की नई संभावनाओं के लिए प्रतिबद्धता के साथ अधिकारी सेवा में प्रवेश करें। प्रदेश में कृषि के रकबे को अगले 5 साल में 48 लाख हैक्टेयर से एक करोड़ हैक्टेयर तक ले जाने का संकल्प है। इस उद्देश्य से हमें सभी प्रबंध बेहतर करने होंगे। राजस्व अधिकारियों की नियुक्तियां, कृषि और पशुपालन विभाग के अमले में विस्तार इसमें सहायक होगा। राज्य सरकार द्वारा कृषि और पशु चिकित्सा की शिक्षा सुविधा का भी विस्तार किया जाएगा, इसमें नई शिक्षा नीति भी सहायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वितरित किए नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विस्तार अधिकारी श्री प्रियंवदा द्विवेदी, श्री कमलेश वाटी, श्री राजेश मीणा, सुश्री बबली बागरी, सुश्री अर्चना गौर, सहायक पशु चिकित्सक डॉ. पूजा सोलंकी, डॉ. नीतेश सूर्यवंशी, डॉ. राहुल यादव और नायब तहसीलदार सुश्री भारती सोलंकी, श्री रवि पटेल, श्री कपिल गुर्जर आदि को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री वर्मा, किसान एवं कृषि विकास मंत्री श्री कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री लखन पटेल ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी।  

पीएससी अंतर्गत तीन वर्ष के पद एक ही वर्ष में भरे जाएंगे, परीक्षाएं होंगी अलग-अलग: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद की जयंती को युवा दिवस के रूप में मनाने की परंपरा आरंभ की गई है। युवा अपने सपनों को साकार करें, जीवन में आगे बढ़ें, प्रदेश और समाज को आगे बढ़ाएं, इस उद्देश्य से राज्य सरकार सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए तत्पर है। युवाओं के जीवन में एक नया सूर्य ऊगे, वे अपने जीवन को आलौकिक करें, अपनी ऊर्जा का समाज हित में उपयोग करें, युवा दिवस के संदर्भ में युवाओं से यही अपील है। इसी क्रम में राज्य सरकार 12 जनवरी से प्रदेश में स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति मिशन का क्रियान्वयन भी आरंभ कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में यह कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि युवा दिवस के अवसर पर प्रदेश की लाड़ली बहनों को जनवरी माह की अनुदान राशि का अंतरण कालापीपल जिला शाजापुर से किया जाएगा। युवाओं को उन्नति और प्रगति के सभी अवसर प्राप्त हों इस उद्देश्य से राज्य सरकार बहुआयामी गतिविधियां संचालित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में बैकलॉग के पदों को भरने जा रही है। पीएससी के अंतर्गत गत तीन वर्ष के जो पद हैं, उनको ही एक ही वर्ष में तीन अलग-अलग परीक्षा कराकर भरने का निर्णय भी लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का मुख्य आधार प्रदेश की युवा शक्ति है। युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार के अवसर प्राप्त हों, इस उद्देश्य से कौशल उन्नयन और प्रशिक्षण की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। प्रदेश में आरंभ हुए रीवा, उज्जैन सहित अन्य आई.टी. पार्कों के माध्यम से युवाओं को अपनी योग्यता और क्षमता के आधार पर प्रदेश में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के परिणामस्वरूप रोजगार की संभावनाओं में वृद्धि के साथ ही शासकीय विभागों में भर्ती की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में 55 पीएम एक्सीलेंस कॉलेज आरंभ किए गए हैं। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में आयुर्वेद, एलोपैथी, होम्योपैथी के कॉलेज आरंभ किए जा रहे हैं। पीपीपी मॉडल को सम्मिलित करते हुए 2 वर्ष में 25 मेडिकल कॉलेज आरंभ किए जाएंगे।  

मुख्यमंत्री साय बोले – पानी प्रकृति का अनमोल उपहार जिसके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सबकी है

देशभर के 400 जल विशेषज्ञ और अनुभवी इंजीनियर्स हो रहे शामिल रायपुर पानी प्रकृति का अनमोल उपहार है, जिसे ईश्वर ने हमें बेमोल दिया है, लेकिन हमें इसका मोल समझना होगा। आज पूरा विश्व जल संकट से जूझ रहा है। देश-दुनिया के कई शहरों में भू जल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है। यदि समय रहते हम सचेत नहीं हुए तो जल संकट विकराल रूप धारण कर सकता है। हम सभी को पानी की एक-एक बूंद को सहेजना होगा। जल संरक्षण की जिम्मेदारी हम सबकी है। जल प्रबंधन आज समय की मांग है। हमें आने वाली पीढ़ियों के बेहतर जीवन के लिए जल के प्रबंधन, संरक्षण के साथ ही जल स्रोतों के संवर्धन पर विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इंडियन वाटर वर्क्स एसोसिएशन के 57वें वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वैश्विक जलवायु संकट के परिपेक्ष्य में जल संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण के लिए जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर, मिशन अमृत और एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियान शुरू कर जल और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मोदी जी ने प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर घर नल से जल योजना शुरू की। हमारी सरकार ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नल कनेक्शन प्रदान किया है, जिससे लोगों के घरों में साफ पानी पहुंचने से उनका स्वास्थ्य स्तर भी सुधरा है और ग्रामीणों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इंडियन वॉटर एसोशिएसन की स्मारिका का विमोचन किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश भर से आए इंजीनियर्स, जल संरक्षण के विषय विशेषज्ञ जल संरक्षण के विषय में गहन विचार विमर्श करेंगे और जल संरक्षण के लिए रणनीति तैयार करने में योगदान देंगे। उल्लेखनीय है कि इंडियन वॉटर एसोशिएसन की मेजबानी में दूसरी बार राजधानी रायपुर में 10 से 12 जनवरी तक आयोजित किए जा रहे इस अधिवेशन में जल-360 डिग्री की थीम रखी गई है। अधिवेशन में देश के 400 जल विशेषज्ञ और अनुभवी इंजीनियर शामिल हो रहे हैं। अधिवेशन में जल, अपशिष्ट जल उपचार और सतत प्रबंधन में नवीन टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा – विश्व हिंदी दिवस, सांस्कृतिक पहचान और गौरव की प्रतीक हिंदी भाषा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विश्व हिंदी दिवस, सांस्कृतिक पहचान और गौरव की प्रतीक हिंदी भाषा के वैश्विक जय घोष के विचारों को आत्मसात करने का दिन है । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्व हिंदी दिवस पर प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने हिंदी भाषा के रूप में मिली विरासत को और अधिक समृद्ध करने के लिए संकल्पित होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का प्रदेशवासियों से आव्हान किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया को जारी संदेश में कहा कि हिन्दी दिवस अपने आप में विशेष है। अब हिन्दी, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। संपूर्ण विश्व में हिन्दी का महत्व तथा लोगों की हिन्दी के प्रति रूचि बढ़ी है। यूरोप हो या चीन सभी देश नई तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हुए अनुवाद के माध्यम से हिन्दी तक अपनी पहुंच बना रहे हैं, यह हम सब के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है। मध्यप्रदेश में बोली जाती है सर्वाधिक हिन्दी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में उपयोग में आने वाली हिन्दी, सर्वाधिक शुद्ध बोली जाने वाली हिन्दी है। बोलने, समझने और लेखन की दृष्टि से मध्यप्रदेश की हिन्दी का विशेष महत्व है। इसी का परिणाम है कि हिन्दी के संदर्भ में मध्यप्रदेश की देश में अपनी अलग पहचान है।  

मुख्यमंत्री साय ने ऑल इंडिया स्टील कॉनक्लेव 2.0 को किया संबोधित

रायपुर, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए हम फौलादी इच्छाशक्ति के साथ काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक 300 मिलियन टन स्टील उत्पादन का लक्ष्य रखा है और इस लक्ष्य को पाने में छत्तीसगढ़ की सबसे अहम भूमिका होगी। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक उद्यमी को छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का ब्रांड एंबेसडर बनना होगा। प्रदेश के स्टील उद्योग को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए हरसम्भव सहयोग हमारी सरकार प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नवा रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में आयोजित ऑल इंडिया स्टील कॉनक्लेव 2.0 को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। हम विकसित छत्तीसगढ़ की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं केंद्रीय राज्य मंत्री था तब स्टील इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से अक्सर मुलाकात होती रही है। साय ने कहा कि 17 राज्यों से आए 1500 प्रतिनिधि यहां दो दिन स्टील उद्योग की चुनौतियों व नये अवसर पर मंथन करेंगे। मुझे विश्वास है कि यहां हुई चर्चा स्टील सेक्टर के साथ ही छत्तीसगढ़ और देश की तरक्की को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया स्टील कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन प्रदेश में स्टील उद्योग को तो प्रोत्साहित करेगा ही, एमएसएमई के लिए भी लाभकारी होगा। देशभर के उद्योग जगत के लोग छत्तीसगढ़ की इस विकास यात्रा में भागीदार होना चाहते हैं। छत्तीसगढ़ में अवसर के कई द्वार अभी और खुलेंगे। जल्द ही हम लिथियम जैसी ऊर्जा खनिज के सबसे बड़े केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्टील उद्योग के लिए काफी अवसर हैं। हमारे पास स्टील इंडस्ट्री के लिए जरुरी खनिज जैसे लोहा ओर और कोयला के साथ ही बिजली पर्याप्त मात्रा में है। हम स्टील उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर हैं। हमें गर्व है कि हमारा प्रदेश देश की इकोनॉमी का पावर हाउस है। छत्तीसगढ़ ने अब ग्रीन स्टील की ओर भी कदम बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि स्टील उद्योग में कई नवाचार हो रहे हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए आप लोग नई और एडवांस टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहे हैं, इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं। आर्थिक विकास को गति देने के साथ हमें जलवायु परिवर्तन की चुनौती का भी समाधान करना होगा। ऐसे में अब पर्यावरण अनुकूल विकास के स्थायी उपाय करने होंगे। उन्होंने नई औद्योगिक नीति के जरिए 5 लाख नये रोजगार सृजन के लक्ष्य की बात दोहराई और कहा कि यह आप सभी के सहयोग से ही पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने इस दौरान सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और नई औद्योगिक नीति पर भी सरकार के विजन को साझा किया। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 एक ऐसा नवाचारी प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए राज्य में उद्योग, व्यवसाय और स्टार्टअप को एक पोर्टल पर तमाम सुविधाएं मिल रही हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल औद्योगिक नीति तैयार की है और इससे प्रदेश में निवेश आकर्षित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वनाच्छादित प्रदेश है और यहां खनिज सम्पदा के विपुल भंडार मौजूद है। प्रदेश के विकास को गति देने की सभी संभावनाएं यहां मौजूद है। देवांगन ने स्टील उद्योग को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी भी दी। उन्होंने कॉनक्लेव में मौजूद सभी उद्योगपतियों से आग्रह करते हुए कहा कि हमारी इस औद्योगिक नीति को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, जिससे लोग इसका लाभ लें और प्रदेश की तरक्की में साझेदार बने। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का सबसे तेजी से विकसित होता हुआ राज्य बन रहा है। प्रदेश में स्टील उद्योग के लिए अनुकूल अवस्थाएं मौजूद हैं। प्रदेश में पहले से ही अनेक उद्योग स्थापित हैं अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम विकास के साथ ही पर्यावरण का भी ध्यान रखें। सीएसआर की सहायता से लोगों के जीवन को भी बेहतर बनाने का प्रयास करें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, ऑल इंडिया स्टील कॉनक्लेव 2.0 के चेयरमैन रमेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ स्टील री रोलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी, भिलाई स्टील प्लांट के सीईओ अजॉय कुमार चक्रवर्ती सहित सीएसआरए के पदाधिकारीगण और स्टील उद्योग से जुड़े उद्योगपति उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- मैं भी मनुष्य हूं, देवता नहीं हूं, मुझसे भी गलतियां होती हैं, राजनीति में अच्छे लोग लगातार आना चाहिए

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पॉडकास्ट इंटरव्यू में कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि “मैं भी मनुष्य हूं, देवता नहीं हूं। मुझसे भी गलतियां होती हैं।” उन्होंने राजनीति में आने के उद्देश्य पर बात करते हुए कहा कि राजनीति में एंबीशन नहीं, बल्कि मिशन होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि राजनीति में अच्छे लोग लगातार आना चाहिए। जब पीएम मोदी से पूछा गया कि पहले और दूसरे टर्म में क्या अंतर है, तो उन्होंने कहा कि पहले टर्म में लोग मुझे समझने की कोशिश करते थे, और मैं भी दिल्ली को समझने की कोशिश कर रहा था। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने युवाओं को राजनीति में आने के लिए यह संदेश दिया कि अगर वह राजनीति में आना चाहते हैं तो उनके पास एक मिशन होना चाहिए। जीनोम सीक्वेंसिंग डेटा जारी किया प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को 10 हजार नागरिकों का जीनोम सीक्वेंसिंग डेटा भी जारी किया। यह जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के क्षेत्र में एक अहम कदम है और भविष्य में इसका बड़ा असर होगा। पीएम मोदी ने वीडियो संदेश के माध्यम से बताया कि इस परियोजना में 20 से ज्यादा रिसर्च इंस्टीट्यूशन ने अहम योगदान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस कदम को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह शोध के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि यह डेटा अब “इंडिया बायोलॉजिकल डेटा सेंटर” में उपलब्ध है। पीएम मोदी ने कहा, “इस परियोजना की शुरुआत पांच साल पहले जीनोम इंडिया परियोजना के रूप में हुई थी और कोविड की चुनौतियों के बावजूद हमारे वैज्ञानिकों ने इसको पूरा किया।” इस डेटा से देश के असाधारण आनुवंशिक परिदृश्य का अध्ययन किया जा सकेगा और इससे भविष्य में कई महत्वपूर्ण शोध होंगे।

अगर आपका आधार कार्ड 10 साल पुराना है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी हो गया है, नहीं तो पुराने आधार कार्ड होंगे रद्द

नई दिल्ली यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने आधार कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। सरकार ने 10 साल से अधिक पुराने आधार कार्ड को अपडेट कराने की आवश्यकता पर जोर दिया है। अगर आपका आधार कार्ड 10 साल पुराना है, तो उसे अपडेट कराना जरूरी हो गया है, क्योंकि पुराने आधार कार्ड को रद्द किया जा सकता है। सरकार ने फ्री आधार अपडेट की समयसीमा को फिर से बढ़ाते हुए अब अंतिम तारीख 14 जून 2025 कर दी है। इससे पहले डेडलाइन 14 दिसंबर 2024 थी। 10 साल से अधिक पुराने आधार कार्ड धारकों को अपनी जानकारी अपडेट करने की सलाह दी जा रही है ताकि उनकी पहचान प्रमाणित और अद्यतन बनी रहे। यह सुविधा केवल ऑनलाइन myAadhaar पोर्टल पर मुफ्त में उपलब्ध होगी। हालांकि, ऑफलाइन मोड के जरिए अपडेट कराने पर शुल्क देना होगा। क्यों जरूरी है आधार कार्ड अपडेट? आधार कार्ड, जिसे देश में पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है, हर व्यक्ति की बायोमेट्रिक और व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ा होता है। समय के साथ, पते या अन्य जानकारी में बदलाव हो सकता है, जिसे अपडेट कराना आवश्यक है। इसके अलावा, फेक आधार कार्ड के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने 10 साल पुराने आधार कार्ड धारकों को जानकारी अपडेट कराने की सिफारिश की है। कैसे करें आधार कार्ड अपडेट? आधार कार्ड अपडेट प्रक्रिया को ऑनलाइन करना बेहद आसान है। UIDAI ने इसे सरल और सुलभ बनाने के लिए विशेष कदम उठाए हैं। इसके लिए, https://myaadhaar.uidai.gov.in/ पर लॉगिन करें और अपनी जानकारी को सत्यापित कर अपडेट करें। सरकार के इस कदम से लाखों आधार कार्ड धारकों को लाभ मिलेगा, खासकर वे लोग जिनकी जानकारी अब तक अपडेट नहीं हुई है। डेडलाइन खत्म होने के बाद आधार अपडेट के लिए शुल्क देना होगा। ऐसे में यह सलाह दी जाती है कि 14 जून 2025 से पहले अपनी जानकारी को अपडेट कराना सुनिश्चित करें।  

बजरंग दल और गोसेवकों की सूचना पर पुलिस ने दी दबिश, दो क्विंटल गोमांस संग छह गिरफ्तार

रायपुर    आजाद चौक के मोमिनपारा में पुलिस ने बुधवार देर रात 226 किलो गोमांस बरामद किया। इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें पिता-पुत्र भी शामिल हैं। बजरंग दल और गोसेवकों की सूचना पर पुलिस ने दुलदुल गली स्थित मकान में दबिश दी थी। यहां गोमांस के साथ पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा का समीर मंडल पकड़ा गया, जबकि आरोपित आटो चालक फरार है। गोमांस बरामद होने से निकाय चुनाव से पहले रायपुर का माहौल गरमा गया है। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल शुक्रवार को एसपी ऑफिस का घेराव करेंगे। पुलिस ने छापा मारकर प्लास्टिक की अलग-अलग थैलियों में गोमांस बरामद किया। इसके साथ ही बड़ा चाकू, तराजू सहित अन्य सामान जब्त किया गया। पुलिस ने जब्त मांस को लैब भेजा, जहां से इसके गोमांस होने की पुष्टि हुई है। पुलिस इन गोवंशों का अंतिम संस्कार करेगी। यह धाराएं लगाई आरोपियों पर पुलिस ने आरोपियों पर धारा 299, 325 बीएनएस तथा कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 5, 6, 10 में केस दर्ज हुआ। इसमें आठ वर्ष का कारावास हो सकता है। 50 हजार जुर्माने का प्रावधान प्रदेश में गोतस्करी, वध और गोमांस बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। गौवध और गोमांस रखने वालों को जेल जाना पड़ेगा। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। धनेली में बेसहारा गोवंशों को काटा एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने पत्रकारों को मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि आरोपितों ने विधानसभा रोड स्थित धनेली के एक मैदान में दो बेसहारा गायों को काटा था। ऑटो से घर लाया गया और कुछ लोगों को बेचा भी गया है। ये हैं गिरफ्तार आरोपित     समीर मंडल पिता साइफल मंडल निवासी नंदग्राम मधबापुर ग्राम जेएल नंबर 152 थाना कोतुलपुर जिला बांकुरा, कोलकाता (पश्चिम बंगाल) हाल-दरगाह वाली गली मौदहापारा।     खुर्शीद अली निवासी मोमिनपारा दुलदुल गली के पास।     मोहम्मद मुंतजीर हैदर उर्फ पिता खुर्शीद अली निवासी डॉ. भागवत क्लीनिक के सामने मोमिनपारा।     अशफाक अली पिता खुर्शीद अली निवासी मोमिनपारा जेके किराया भंडार के सामने।     अरमान हैदर पिता खुर्शीद अली निवासी मोमिनपारा दुलदुल गली हांडीपारा।     ईरशाद कुरैशी पिता मो. रज्जाक कुरैशी निवासी बिलालनगर, बोरियाखुर्द (टिकरापारा)। रात में ऑटो से गोमांस लेकर पहुंचे थे आरोपी शहर के मोमिनपारा की दुलदुली गली के जिस घर में पुलिस ने छापा मारकर भारी मात्रा में गोमांस बरामद किया है, वह घर खुर्शीद अली का है। बीते कुछ दिनों से रात के समय यहां पर नए-नए चेहरे के लोगों की आवाजाही को देखकर आसपास के लोगों को शक हुआ। इसके बाद यह जानकारी बजरंग दल के कार्यकर्ताओं तक पहुंची। जब यह तस्दीक हो गई कि घर में भारी मात्रा में गोमांस रखकर बेचा जा रहा है। तब पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद रात 12 बजे आजाद चौक सीएसपी अमन कुमार ने दल-बल के साथ घर में छापा मारा। एक कमरे में गोमांस के साथ समीर मंडल को दबोचा। इसके बाद खुर्शीद, उसके तीन बेटों के साथ मोहम्मद ईरशाद कुरैशी हत्थे चढ़े। आरोपितों के खिलाफ धारा 299, 325 बीएनएस,छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 5, 6, 10 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच की जा रही है। पुलिस को कर रहे थे गुमराह पूछताछ में पहले तो समीर मंडल ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने बताया कि वह मटन खरीदने आया था। मगर, जरा सी सख्ती बरतने पर वह टूट गया। घर से उसका आधार कार्ड भी मिला। समीर की निशानदेही पर ही शेष पांच आरोपितों की गिरफ्तारी की गई। पूछताछ में खुर्शीद अली ने स्वीकार किया कि विधानसभा रोड स्थित धनेली के सुनसान मैदान में दो गोवंश को काटा था। इसके बाद उनके मांस को निकालकर ऑटो, टैक्सी से लेकर बुधवार रात दस बजे घर आए थे। फिलहाल गोमांस लाने वाला आटो चालक फरार है, जिसकी पतासाजी की जा रही है। रात भर चला मोमिनपारा में हंगामा गोरक्षक अजय सोना ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कुछ लोग घर के अंदर से गोमांस बेच रहे थे। तभी बजरंग दल और गोरक्षकों ने घर में घुसकर मामले की जांच-पड़ताल की। सूचना सही होने के बाद उनका गुस्सा फूटा और हंगामा शुरू हुआ। इसके बाद तत्काल आजाद चौक पुलिस थाने की टीम के साथ सीएसपी मौके पर पहुंचे। 250 रुपये किलो में बेच रहे थे गोमांस एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने बताया कि पुलिस रिमांड पर लिए गए आरोपितों ने स्वीकार किया कि 250 रुपये किलो वे गोमांस बेच रहे थे। इनसे गोमांस खरीदने वालों की पूरी जानकारी ली गई है, उनसे भी पूछताछ करेंगे। बाजार में और कहां-कहां पर आरोपितों ने गोमांस बेचा है, इसकी भी जानकारी एकत्र कर रहे हैं। कब से गोमांस बेचने का कारोबार आरोपित कर रहे थे, इसके बारे में फिलहाल कोई पुख्ता सुबूत नहीं है। हालांकि, पुलिस को शक है कि यह पूरा गिरोह पिछले कुछ महीने से सुनसान स्थान पर आने वाले बेसहारा मवेशियों को अपना शिकार बनाता था। हालांकि, अभी तक एक भी पशु पालक ने अपने मवेशियों के गायब होने की सूचना पुलिस थाने में दर्ज नहीं कराई है। लिहाजा, माना जा रहा है कि आवारा गोवंशों को आरोपियों ने पकड़कर काटा था। एसएसपी ने बताया कि इस पूरे मामले का मुख्य आरोपित खुर्शीद अली है। खुर्शीद के तीन बेटे और समीर, इरशाद मिलकर गौवंश काटने और बेचने का काम करते थे। अब तक की जांच में यह सामने आया कि कुल सात लोग इस घटना में संलिप्त हैं। दो गोवंशों की हत्या कर आरोपितों ने कई लोगों को मांस को बेचा है। कैमरे की भी जांच कर रही है, ताकि मांस खरीदने वालों की पहचान हो सके। मौके पर पहुंची टीम गो सेवक दल एवं विश्व हिंदू परिषद के गोल्डी शर्मा ने बताया कि गो मांस की बिक्री की जानकारी मिलते ही हमारी टीम मौके पर पहुंची और पुलिस के माध्यम से कार्रवाई करवाई गई। इसे लेकर व्यापक रूप से आंदोलन किया जाएगा। इसी क्रम में शुक्रवार को दोपहर 12 बजे एसपी कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा बेटियों को पढ़ाई के खर्चे के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेटियों को पढ़ाई के खर्चे के लिए अपने माता-पिता से पैसे मांगने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने लड़कियों को बड़ा अधिकार देते हुए कहा कि वे जरूरत पड़ने पर पढ़ाई का खर्चा देने के लिए अपने माता-पिता को कानूनी तौर पर बाध्य भी कर सकती हैं. उनके माता-पिता अपनी हैसियत के अंदर बेटी को पढ़ाई का खर्चा देने को बाध्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला तलाक से जुड़े एक विवाद में दिया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ कर रही थी. मामले में एक दंपत्ति 26 साल से अलग रह रहे थे. इनकी बेटी आयरलैंड में पढ़ाई कर रही थी. लड़की ने अपनी मां को दिए जा रहे कुल गुजारा भत्ते के एक हिस्से के रूप में अपने पिता द्वारा उसकी पढ़ाई के लिए दिए गए 43 लाख रुपये लेने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने केस में क्या कहा अदालत ने आदेश में कहा, “बेटी होने के नाते उसे अपने माता-पिता से शिक्षा का खर्च प्राप्त करने का ऐसा अधिकार है जिसे खत्म नहीं किया जा सकता है. इस आदेश को कानूनी रूप से लागू किया जा सकता है.” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केवल इतना ही मानते हैं कि बेटी को अपनी शिक्षा जारी रखने का मौलिक अधिकार है, जिसके लिए माता-पिता को अपने वित्तीय संसाधनों की सीमा के भीतर आवश्यक धनराशि प्रदान करने के लिए बाध्य किया जा सकता है.” अदालत ने कहा कि लड़की ने अपनी गरिमा का ध्यान रखते हुए इस राशि रखने से इनकार कर दिया और अपने पिता को पैसे वापस लेने को कहा, लेकिन पिता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि बेटी कानूनी रूप से राशि की हकदार थी. पिता ने बिना किसी कारण के पैसे दिए, जिससे पता चलता है कि वे फाइनेंशियल तौर पर मजबूत हैं और अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद करने में सक्षम हैं. 73 लाख रुपये में हुआ था सेटलमेंट इस केस में 28 नवंबर 2024 को दंपती के बीच एक समझौता हुआ था. इनकी बेटी ने भी इस समझौते पर हस्ताक्षर किया था. इस सेटलमेंट के तहत पति ने कुल  73 लाख रुपये अपनी पत्नी और बेटी को देने पर सहमति जताई थी. इसमें से 43 लाख रुपये बेटी की पढ़ाई के लिए थे, बाकी पत्नी के लिए थे. कोर्ट ने कहा कि चूंकि पत्नी को अपने हिस्से के 30 लाख रुपए मिल गए हैं और दोनों पक्ष पिछले 26 साल से अलग रह रहे हैं, ऐसे में कोई कारण नहीं बनता है कि आपसी सहमति से दोनों को तलाक न दिया जाए. न्यायालय ने कहा, “परिणामस्वरूप, हम संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए आपसी सहमति से तलाक का आदेश देकर दोनों पक्षों के विवाह को भंग करते हैं.” अदालत ने कहा कि भविष्य में कोई भी पक्ष न तो किसी के खिलाफ अदालत में कोई केस करेगा और न ही किसी तरह का दावा करेगा. विरासत में बेटियों की हिस्सेदारी इससे पहले जनवरी 2022 में भी सुप्रीम कोर्ट ने बेटियों के पक्ष में एक अहम फैसला दिया था. सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले में कहा था कि एक ऐसे व्यक्ति की संपत्ति,जो बिना वसीयत लिखे मर गया और उसकी केवल एक बेटी हो तो उसकी बेटी को संपत्ति में समग्र अधिकार प्राप्त होगा, न कि परिवार के किसी अन्य सदस्य को. कोर्ट के अनुसार संयुक्त परिवार में रह रहे व्यक्ति की वसीयत लिखे बिना ही मौत हो जाए तो उसकी संपत्ति पर बेटों के साथ उसकी बेटी का भी हक होगा. इस दौरान बेटी को अपने पिता के भाई के बेटों की तुलना में संपत्ति का हिस्सा देने में प्राथमिकता दी जाएगी.  

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, रविचंद्रन अश्विन का बयान हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा नहीं

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-3 से हार का सामना करना था. इस हार के चलते भारतीय टीम ने 10 साल बाद बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) गंवा दी थी. ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान ही स्टार स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया था. अश्विन के इस फैसले से फैन्स चौंक गए थे. अश्विन गाबा टेस्ट के बाद ऑस्ट्रेलिया से स्वदेश वापस लौट आए थे. अश्विन के बयान से खड़ा हुआ बखेड़ा अब रविचंद्रन अश्विन ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसके चलते बखेड़ा खड़ा हो गया है. अश्विन ने चेन्नई स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा नहीं है. अश्विन के इस बयान से भाषा पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. अश्विन ने अपने संबोधन के दौरान छात्रों से पूछा कि क्या कोई हिंदी में सवाल पूछने में रुचि रखता है, जिसे लेकर किसी ने रुचि नहीं दिखाई. इसके बाद अश्विन के कहा, ‘मैंने सोचा कि मुझे यह कहना चाहिए. हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है, यह एक आधिकारिक भाषा है.’ आर. अश्विन के बयान से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोगों ने तर्क दिया कि अश्विन को ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए. एक यूजर ने लिखा, ‘अश्विन को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए. मुझे यह पसंद नहीं है. मैं उनका प्रशंसक हूं. आप जितनी अधिक भाषाएँ सीखेंगे, यह अच्छा है. हमारे फोन में किसी भी भाषा का अनुवाद उपलब्ध है. समस्या क्या है, भाषा का मुद्दा लोगों पर छोड़ दें.’ एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, ‘अश्विन पहले ही इंटरव्यूज में कह चुके हैं कि जब आप तमिलनाडु से बाहर जाते हैं और हिंदी नहीं जानते तो जीवन कितना कठिन होता है. क्या हम इसे नहीं सीख सकते, जिसे भारत अधिकांश लोग जानते हैं.’ अश्विन के बयान पर राजनीति भी तेज डीएमके ने आर.अश्विन के बयान का समर्थन किया है. डीएके नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, ‘जब कई राज्य अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं तो हिंदी राजभाषा कैसे हो सकती है.’ हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अपील की है कि भाषा पर फिर से बहस नहीं शुरू होनी चाहिए. भाजपा नेता उमा आनंदन ने कहा, ‘डीएमके की ओर से इसकी सराहना करना आश्चर्य की बात नहीं होगी. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अश्विन राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं या तमिलनाड के क्रिकेटर हैं.’ 1930-40 के दशक में तमिलनाडु में स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य भाषा के रूप में लागू करने का काफी विरोध हुआ था. द्रविड़ आंदोलन का उद्देश्य तमिल को बढ़ावा देना और तमिल भाषियों के अधिकारों का दावा करना था. इस आंदोलन ने हिंदी भाषा के विरोध में केंद्रीय भूमिका निभाई. द्रविड़ राजनीतिक दल जैसे डीएमके, एआईएडीएमके लंबे समय से हिंदी के बजाय तमिल के इस्तेमाल की वकालत करते रहे हैं. उनका तर्क है कि हिंदी को बढ़ावा देने से तमिल जैसी क्षेत्रीय भाषा की स्थानीय पहचान हाशिए पर चली जाएगी. क्या हिंदी है राष्ट्रभाषा या राजभाषा? बता दें कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा 14 सितंबर 1949 को मिला था. इसके बाद 1953 से राजभाषा प्रचार समिति द्वारा हर साल 14 सितंबर को हिंदी द‍िवस का आयोजन किया जाने लगा. अपनी विभिन्‍नताओं के चलते भारत की कोई राष्‍ट्र भाषा नहीं है मगर सरकारी दफ्तरों में कामकाज के लिए एक भाषाई आधार बनाने के लिए हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया. संविधान के भाग 17 में इससे संबंधित महत्‍वपूर्ण प्रावधान भी किए गए हैं. भारत के संविधान के भाग 17 के अनुच्‍छेद 343(1) में कहा गया है कि राष्‍ट्र की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी.

सीवीएस से भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होगा: एम्स भोपाल

भोपाल एम्स भोपाल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। यह प्रक्रिया भ्रूण में किसी भी आनुवांशिक विकार की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) एक प्रीनेटल टेस्ट है, जिसमें गर्भवती महिला के प्लेसेंटा से एक छोटा नमूना लिया जाता है। इस नमूने की जांच करके भ्रूण में किसी भी तरह की आनुवांशिक समस्या का पता लगाया जा सकता है। आनुवांशिक बीमारियों की हिस्ट्री चिकित्सकों का कहना है कि प्रसवपूर्व यह परीक्षण उन गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिनके परिवार में आनुवांशिक बीमारियों का इतिहास रहा हो या जिनकी उम्र 35 साल से अधिक हो चुकी है। भ्रूण की हेल्थ पता चलेगी वे अब एम्स भोपाल में भ्रूण के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगी। एम्स भोपाल में विजिटिंग फीटल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. मनुप्रिया माधवन ने यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया सुरक्षित और प्रभावी है। एम्स भोपाल के निदेशक डॉ. अजय सिंह का कहना है कि सीवीएस सफलतापूर्वक पूरा होना हमारे संस्थान में फीटल मेडिसिन सेवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। क्या होंगे लाभ भ्रूण में आनुवांशिक विकारों का शीघ्र पता लगाना : सीवीएस के माध्यम से गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में ही भ्रूण में आनुवंशिक विकारों का पता लगाया जा सकता है। भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार : सीवीएस के माध्यम से जन्म के साथ दोषों को रोका जा सकता है। इससे भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

डीमैट खातों की संख्या पहुंची 185 मिलियन के पार

नई दिल्ली. बीते वर्ष 2024 में देश में डीमैट खातों की संख्या में जबरदस्त उछाल दर्ज हुआ है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस एक वर्ष की अवधि में डीमैट खातों की संख्या में करीब 46 मिलियन की वृद्धि हुई, जो प्रति माह औसतन 3.8 मिलियन खातों की वृद्धि को दर्शाता है। एनएसडीएल और सीडीएसएल के अनुसार, इससे पिछले वर्ष 2023 की तुलना में नए डीमैट खातों में 33 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जिससे अब कुल डीमैट खातों की संख्या 185.3 मिलियन हो गई है। कोरोना काल के बाद से ही भारत में डीमैट खातों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। डीमैट खातों की संख्या में उछाल की वजह खाता खोलने की आसान प्रक्रिया, स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल और अनुकूल मार्केट रिटर्न जैसे कारकों को माना जा रहा है। 2019 में 39.3 मिलियन से पिछले पांच वर्षों में डीमैट खातों की संख्या चार गुना से अधिक हो गई है। 2024 के पहले नौ महीनों में सेकेंडरी मार्केट में लाभ और रिकॉर्ड आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के बीच 36 मिलियन डीमैट खाते जोड़े गए। 2021 से औसतन हर साल 3 करोड़ नए डीमैट खाते खोले गए हैं। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, “भारत में 2021 से हर साल कम से कम 3 करोड़ नए डीमैट खाते खोले जा रहे हैं और लगभग हर चार में से एक अब महिला निवेशक है, जो बचत के वित्तीयकरण के चैनल के रूप में पूंजी बाजार का इस्तेमाल करने के बढ़ते प्रचलन को दर्शाता है।” इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों में डीमैट खातों की संख्या में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। देश में अगस्त 2024 तक 17.10 करोड़ से अधिक डीमैट खाते खोले जा चुके थे। जबकि वित्त वर्ष 2014 में डीमैट खातों की यह संख्या 2.3 करोड़ थी। इस अवधि के दौरान डीमैट खातों की संख्या में 650 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

यूपी में बृहस्पतिवार को थमी बर्फीली हवाओं की रफ्तार, कई इलाकों में धूप खिलने से राहत

लखनऊ उत्तर प्रदेश में पिछले दो-तीन दिनों से चल रही तेज रफ्तार पछुआ हवाएं बृहस्पतिवार से मद्धिम हुईं। कई इलाकों में सुबह हुई गुनगुनी धूप और पछुआ थमने के असर से फौरी तौर पर गलन से थोड़ी राहत हुई। हालांकि तराई समेत अन्य कुछ जगहों पर बृहस्पतिवार को सुबह घना कोहरा छाया रहा। प्रयागराज समेत कुछ जिलों में दृश्यता शून्य तक जा पहुंची। राजधानी लखनऊ में बृहस्पतिवार को सुबह से ही हल्की धूप खिली और गलन से तात्कालिक तौर पर राहत मिली। यहां रात के पारे में 4 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह लखनऊ में  हल्के से मध्यम कोहरा छाने के आसार है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह का कहना है कि प्रदेश में  शुक्रवार तक रात के पारे में हल्की गिरावट आएगी।  शनिवार से पश्चिमी विक्षोभ के असर से रात का पारा फिर से चढ़ेगा। कुल मिलाकर इस हफ्ते तापमान में उतार चढ़ाव जारी रहेगा। यहां है घना कोहरा छाने की संभावना प्रतापगढ़, चंदौली, वाराणसी, संत रविदास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, बाराबंकी, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर संभल, बदायूं एवं आसपास इलाकों में घना कोहरा छाने की संभावना है।  

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