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स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने है कि स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्तीकरण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक कोने तक उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचे, हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज हों, अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हों और पर्याप्त स्वास्थ्य अमला हो। उन्होंने कहा कि 46 हज़ार से अधिक स्वास्थ्य अमले की भर्ती के लिये स्वीकृति दी जा चुकी है। उन्होंने शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सशक्त स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा से कोई भी क्षेत्र विकास की छलांग लगाने के लिये तैयार होता है। सशक्त और विकसित प्रदेश के लिये इन क्षेत्रों का सशक्त होना ज़रूरी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समत्व भवन से ‘पीएम जनमन अभियान’ के तहत 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सहज और सुलभ उपलब्धता का कार्य करेगी। संसाधनों की कमी नहीं होने दी जायेगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स दुर्गम और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में पहुँचकर आमजन को ओपीडी, रोग निदान, उपचार और दवाइयों जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगी। प्रत्येक यूनिट में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से प्रदेश के स्वास्थ्य मानकों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्तीकरण के लिये संसाधनों की कमी नहीं होने दी जायेगी। मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिये हम संकल्पबद्ध हैं। 87 विकासखण्डों के 1268 ग्रामों में पहुँचेगी यूनिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट्स (एमएमयू) से 21 जिलों के 87 विकासखंडों में 1268 ग्रामों के लगभग 3,12,246 लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना में चिन्हित जिले अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, छिन्दवाड़ा, दतिया, डिंडौरी, गुना, गवालियर, कटनी, मंडला, मुरैना, नरसिंहपुर, सतना, शहडोल, श्योपुर, सीधी, शिवपुरी, जबलपुर, रायसेन, उमरिया और विदिशा शामिल हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा प्रदाय में लायेंगी क्रांतिकारी बदलाव उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में मध्यप्रदेश सरकार युद्धस्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘पीएम जनमन अभियान’ के तहत प्रदेश के 21 जिलों के 87 विकासखंडों में 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने का कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के वे क्षेत्र जो स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़े और दुर्गम हैं, वहाँ विशेष प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच उत्कृष्ट समन्वय और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सशक्त नेतृत्व और प्रगतिशील सोच से सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, अधोसंरचना विकास और औद्योगिक विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश में नए मानक स्थापित हो रहे हैं। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य विभाग के पूरे अमले के समर्पण और निष्ठापूर्ण प्रयासों से मध्यप्रदेश निश्चित रूप से स्वास्थ्य के विभिन्न मानकों में अग्रणी राज्य बनने में सफल होगा। मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) के लाभ प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में प्रशिक्षित मानव संसाधन, जिसमें एक डॉक्टर, नर्स, एएनएम/एमपीडब्ल्यू, लैब टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और ड्राइवर शामिल हैं, सेवाएँ प्रदान करेंगे। प्रत्येक यूनिट में 14 प्रकार की जांच सुविधाएँ, 65 प्रकार की आवश्यक दवाइयाँ और 29 प्रकार की स्वास्थ्य सामग्रियाँ उपलब्ध रहेंगी। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से लोगों को संचारी रोगों और मूलभूत ओपीडी सेवाएँ, टीबी, कुष्ठ, मलेरिया, फाइलेरिया जैसी बीमारियों की पहचान और उपचार, प्रसवपूर्व एवं प्रसव उपरान्त देखभाल, उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं का चिन्हांकन, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और गुर्दा रोगों की पहचान, नवजात शिशुओं में जन्मजात विकृतियों की जाँच एवं उपचार, परिवार नियोजन सेवाएँ, मानसिक स्वास्थ्य और पोषण परामर्श, वृद्धजनों की देखभाल और आकस्मिक चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जाएंगी। इन यूनिट्स को जीपीएस प्रणाली से लैस किया गया है, जिससे उनकी निगरानी और संचालन में पारदर्शिता बनी रहेगी। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट एक माह में 24 दिन तक सेवाएँ प्रदान करेगी और प्रतिदिन 2 गांवों में लगभग 50 मरीजों का इलाज करेगी। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप कुमार यादव और एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।  

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा- देश की सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण स्त्रोत बहुरंगी कलाएं है

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि देश की सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण स्त्रोत बहुरंगी कलाएं है। यह हमारे अंदर की कोमल भावनाओं को जगा कर हमें मनुष्यता का पाठ पढ़ाती है। कलाएं हमारी परम्पराओं, विरासतों, रीति-रिवाजों, संस्कारों, धर्म, समाज, भाषा आदि की विशिष्टताओं को सहेजती और संरक्षित रखती हैं। राज्यपाल श्री पटेल क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान परिसर श्यामला हिल्स भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय कला उत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर देशभर के विजेता छात्र-छात्राओं को कला की विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किये और राष्ट्रीय कला उत्सव की विभिन्न विधाओं के निर्णायकों को भी सम्मानित किया। राज्यपाल श्री पटेल ने एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा आयोजित कला प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। राष्ट्रीय कला उत्सव का आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और एन.सी.ई.आर.टी. के सहयोग से 3-6 जनवरी, 2025 तक किया गया। कला उत्सव में भारत के केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालय के लगभग 6 सौ प्रतिभागी शामिल हुए। राज्यपाल श्री पटेल ने प्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय कला उत्सव के आयोजन के लिए एन.सी.ई.आर.टी. को साधुवाद भी दिया। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि कला उत्सव, देश की कला-संस्कृति की विरासत को शिक्षा के क्षेत्र में संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने का प्रभावी प्रयास है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति बच्चों की प्रतिभा, कौशल को निखार कर उनका समग्र विकास कर 21वीं सदी के वैश्विक नेताओं के रूप में तैयार करने का प्रकल्प है। यह देश के बच्चों की असीम क्षमता को महसूस करते हुए विकसित भारत 2047 की संकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से बनाई गई है। उन्होंने प्रतिभागी छात्र-छात्राओं से आगामी 12 जनवरी को आयोजित हो रहे विकसित भारत यंग लीडर्स संवाद कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की अपील भी की। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि भावी पीढ़ी, अपनी संस्कृति के जिस स्वरूप को देखती है उसी के अनुरूप अपने जीवन के नये मूल्यों का निर्माण करती है। इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि बच्चों को अनुभव आधारित शिक्षा के द्वारा, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता से जोड़े और एक भारत-श्रेष्ठ भारत के गौरवशाली दृष्टिकोण से परिचित और प्रेरित कराएं। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि कला के लिए जीवन में विशेष जगह रखें क्योंकि कला हमें जोड़ती है, प्रेरित करती है और एक समुदाय के रूप में मजबूत बनाती है। इसलिए प्रयास करें कि राष्ट्रीय कला उत्सव का यह आयोजन, कला के विभिन्न रूपों के प्रदर्शन का केवल मंच नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं के बारे में जागरूक बनाने और संरक्षण के लिए जन मानस को प्रेरित करने का सशक्त माध्यम बने। राज्यपाल श्री पटेल का कार्यक्रम में शॉल और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान का वीडियों संदेश प्रसारित किया गया। केन्द्रीय स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार ने कला के परिचय, प्रकार और उपयोगिता पर अपने विचार रखे। एन.सी.ई.आर.टी. के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कला उत्सव के आयोजन की विस्तार से जानकारी दी। राष्ट्रीय समन्वय डॉ. ज्योत्सना तिवारी ने कला उत्सव आयोजन की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। डॉ. दीपक पालीवाल ने आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय कला उत्सव के समापन समारोह में केन्द्रीय स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के अपर सचिव श्री आनंद राव पाटिल, कला मनीषी, कला गुरू, विभिन्न विधाओं के प्रतिभागी छात्र-छात्राएं और अभिभावक उपस्थित थे।  

महापौर-इन-काउंसिल की साल की पहली बैठक में 7 से अधिक प्रस्ताव पर लगी मुहर, नदियों को साफ करने खर्च होंगे 500 करोड़

इंदौर इंदौर नगर निगम की इस साल की पहली महापौर-इन-काउंसिल(MIC) की बैठक में शहर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत चार एसटीपी बनाने को मंजूरी दी गई। इन प्लांट्स के निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसका उद्देश्य शहर की नदियों को स्वच्छ करना है। दरअसल, इंदौर में नगर निगम की इस साल की पहली एमआईसी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में महापौर और एमआईसी मेंबर सहित निगम के अधिकारी मौजूद रहे। एमआईसी में 7 से अधिक प्रस्ताव पास किए। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत शहर में बनाए जा रहे नए एसटीपी प्लांट का है। इन प्लांट के लिए नगर निगम 15 साल का करार भी करेगा। सिंहस्थ के पहले इन एसटीपी प्लांट से शहर की नदियों में साफ पानी लाने की कवायद की जा रही है। इसके अलावा बाबा साहेब आम्बेडकर पार्क का जीर्णोद्धार और कई इलाकों में नई सीवरेज लाइन डालने के प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई।

तेलंगाना को मिली आधुनिक सुविधाएं, मोदी ने चर्लापल्ली के नए रेलवे टर्मिनल स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन किया

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को तेलंगाना के मेडचल-मलकजगिरी जिले में स्थित चर्लापल्ली के नए रेलवे टर्मिनल स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक टर्मिनल को 413 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह स्टेशन पर्यावरण के अनुकूल डिजाइन के साथ यात्रियों को उन्नत सुविधाएं प्रदान करेगा। साथ ही, यह सिकंदराबाद, हैदराबाद और काचेगुडा के मौजूदा टर्मिनलों पर बढ़ते दबाव को कम करने में मदद करेगा। प्रमुख विशेषताएं और सेवाएं चर्लापल्ली रेलवे टर्मिनल को एक कोचिंग हब के रूप में विकसित किया गया है। यहां प्रतिदिन लगभग 24 ट्रेनें संचालित होंगी। नए टर्मिनल में यात्रियों के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसमें एक विशाल परिसंचारी क्षेत्र, दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग और बस परिवहन के लिए समर्पित क्षेत्र शामिल हैं। टर्मिनल औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन में भी अहम भूमिका निभाएगा। यहां से विशेष ट्रेन सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिसमें त्योहारों के दौरान संक्रांति विशेष ट्रेनों का संचालन भी शामिल है। स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा इस अवसर पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी को टर्मिनल के उद्घाटन के लिए धन्यवाद दिया और राज्य में क्षेत्रीय रिंग रेल परियोजना शुरू करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना तेलंगाना के 60% हिस्से को शहरीकृत करने की क्षमता रखती है। समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। समारोह में वर्चुअल माध्यम से कई नेता और अधिकारी जुड़े।

खेल मंत्री को अभ्यास सत्र में किया क्लीन बोल्ड, राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन ने प्रतापगढ़ की सुशीला ‘बुमराह’ को लिया गोद

जयपुर। राजस्थान की प्रतिभावान क्रिकेट खिलाड़ी सुशीला मीणा ने अपनी तेज गेंदबाजी से खेल मंत्री और ओलंपियन राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को नेट प्रैक्टिस के दौरान क्लीन बोल्ड कर सबको चौंका दिया। आरसीए एकेडमी में आयोजित इस अभ्यास सत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में सुशीला की सटीक गेंदबाजी और राठौड़ के मिडिल स्टंप उखड़ने का दृश्य चर्चा का विषय बन गया है। खेल मंत्री राठौड़ ने सुशीला मीणा को सम्मानित करते हुए कहा, राजस्थान में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। हमें उनकी पहचान कर सही दिशा में प्रोत्साहन देना होगा। आने वाले समय में दुनिया का सबसे तेज गेंदबाज राजस्थान से होना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि आरसीए और राज्य सरकार मिलकर युवा खिलाड़ियों को विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। तेंदुलकर भी कर चुके हैं तारीफ प्रतापगढ़ जिले के आदिवासी बाहुल्य धरियावद कस्बे की रहने वाली है सुशीला मीणा, जो पहले ही अपनी गेंदबाजी से सबका ध्यान खींच चुकी है, का पिछले महीने एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उनके गेंदबाजी एक्शन की तुलना पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान से की गई थी। इस वीडियो पर मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने भी सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी थी। सुशीला की गेंदबाजी प्रतिभा को देखते हुए राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) ने उन्हें गोद लेने का निर्णय लिया है। इससे उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलेंगी। खेल मंत्री राठौड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल क्षेत्र में हो रहे सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। आरसीए पदाधिकारियों में हुई नोंकझोंक इधर सुशीला मीणा को आरसीए द्वारा गोद लिए जाने के आरसीए एडहॉक कमेटी के कार्यक्रम के दौरान आरसीए के पूर्व सचिव और आरसीए के कन्वीनर विधायक जयदीप बिहाणी के बीच तीखी नोंकझोंक हो गई। जिस पर खेल मंत्री ने कहा कि इस तरह के लड़ाई- झगड़े ठीक नहीं है। हमें खेल से जुड़े लोगों को आगे बढ़ाने का काम करना चाहिए।

FBI की जांच में खुलासा, अमेरिका न्यू ऑर्लियंस में जब्बार ने हमले से पहले दो बार फ्रेंच क्वार्टर का दौरा कर बनाया वीडियो

न्यू ऑर्लियंस। अमेरिका के न्यू ऑर्लियंस में हुए आतंकी हमले में संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने नया खुलासा किया है। एफबीआई ने बताया कि ट्रक हमले के लिए जिम्मेदार आतंकी शम्सुद्दीन जब्बार ने पहले भी दो बार न्यू ऑर्लियंस का दौरा किया था। उसने हैंड्स-फ्री चश्मे से फ्रेंच क्वार्टर का वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसके अलावा, एफबीआई की जांच में यह भी पता चला है कि जब्बार ने हमले से पहले मिस्र के काहिरा और कनाडा के ओंटारियो की यात्रा भी की थी। हालांकि, एफबीआई ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि जब्बार की विदेश यात्राएं न्यू ऑर्लियंस में हुए हमले से संबंधित थी या नहीं। बता दें कि जब्बार अमेरिका के ह्यूस्टन शहर का रहने वाला है, उसके पास वहां की नागरिकता भी है। 13 जुलाई 2023 को अमेरिका लौटा था जब्बार न्यू ऑर्लियंस फील्ड ऑफिस के प्रभारी एफबीआई के विशेष एजेंट लियोनेल मायर्थिल ने एक प्रेस ब्रीफिंग की, जिसमें उन्होंने बताया कि हमारी जांच में पता लगा है कि जब्बार ने 22 जून से 3 जुलाई 2023 तक काहिरा, मिस्र की यात्रा की थी। कुछ दिनों बाद, उसने 10 जुलाई को ओंटारियो, कनाडा के लिए उड़ान भरी और 13 जुलाई 2023 को वह अमेरिका लौट आया। जब्बार की गतिविधियों के बारे में पता लगा रहे अधिकारी मायर्थिल ने कहा कि हमारे एजेंट इस बारे में पता लगा रहे हैं कि वह कहां गया था और किन लोगों से मुलाकात की थी। यह भी जानकारी ली जा रही है कि जब्बार की ये यात्राएं न्यू ऑर्लियंस में उसकी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं या नहीं। न्यू ऑर्लियंस में हुए हमले में 15 लोगों की हुई थी मौत एफबीआई के अनुसार, जब्बार ने इस्लामिक स्टेट जिहादी समूह के प्रति अपनी वफादारी का वादा किया था। उसने न्यू ऑर्लियंस के भीड़भाड़ वाले फ्रेंच क्वार्टर में नए साल के दिन लोगों को मारने और घायल करने के लिए पिकअप ट्रक का इस्तेमाल किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे मार गिराया। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 30 अन्य लोग घायल हो गए थे। लास वेगास घटना के कुछ घंटे बाद हुआ न्यू ऑर्लियंस में हमला एफबीआई ने बताया कि न्यू ऑर्लियंस हमला लास वेगास में ट्रंप टावर के बाहर टेस्ला के साइबर ट्रक में हुए विस्फोट के कुछ घंटों बाद हुआ। इस घटना में ड्राइवर की मौत हो गई थी। हमले से पहले जब्बार ने ऑनलाइन वीडियो पोस्ट किया था जब्बार ने हमले से कुछ घंटे पहले ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करके इस्लामिक स्टेट के प्रति अपने समर्थन की घोषणा की थी। यह अमेरिका में वर्षों में सबसे घातक आईएस-प्रेरित हमला था, जिसने संघीय अधिकारियों द्वारा चेतावनी दिए गए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे को उजागर किया।

मुआवजे के प्रकरण ने रूक दिया भारतमाला प्रोजेक्ट का काम, अब पुलिस सुरक्षा में होगा शुरू

रायपुर भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस-वे के पहले फेस का काम ग्राम नायकबांधा के किसानों ने चार माह से रुकवा रखा है। किसानों का कहना है कि जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता, काम शुरू करने नहीं देंगे। मगर, अब यह काम पुलिस सुरक्षा में किया जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि जब ठेकेदार काम करने जाते हैं, तो ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर पहुंच जाते हैं। दरअसल, 559 मीटर जमीन के मुआवजे का प्रकरण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने रोक दिया है। इसलिए किसान आक्रोशित हैं। रुका हुआ काम शुरू कराने के लिए एनएचएआई ने अभनपुर एसडीएम को पुलिस बल उपलब्ध कराने का आवेदन किया है। वहीं, 559 मीटर जमीन के मुआवजे का प्रकरण एनएचएआई के अफसरों ने सीधे संभागीय कमिश्नर के कोर्ट में प्रस्तुत किया है। नियम है कि भू-अर्जन होने के बाद एनएचएआई काम शुरू कर सकती है। मुआवजा प्रकरण लंबित होने पर भी काम रोका नहीं जा सकता। पुलिस बल की मांग की गई है, जिसके लिए पुलिस प्रशासन को पत्र लिखा गया है। मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की आशंका एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि यहां मुआवजा वितरण में भारी गड़बड़ी हुई है। इसका प्रकरण अब रायपुर कमिश्नर कोर्ट में लंबित है। सुनवाई 12 जनवरी को होनी है। राजस्व विभाग के अनुसार, 559 मीटर जमीन का मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपये का होता है। अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफिया ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन को छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरा बांट दिया गया। इसमें मुआवजा के लिए 80 नए नाम रिकॉर्ड में चढ़ा दिए गए। ऐसे में मुआवजा राशि 29.5 करोड़ से बढ़कर 78 करोड़ रुपये पहुंच गई। मुआवजे की राशि देने के लिए राजस्व विभाग से फाइल एनएचएआई को भेजी गई। वहां गड़बड़ी का संदेह होने पर प्राधिकरण ने मुआवजा रोका हुआ है।   246 करोड़ बांटा मुआवजा, 78 करोड़ रोका बता दें कि चार एकड़ भूमि एक ही व्यक्ति के नाम पर थी। मुआवजे के लिए सर्वे होने से तक उस भूमि को एक ही परिवार के 14 लोगों के नाम पर बांट दी गई। इसके बाद एक ही परिवार के सदस्यों को 70 करोड़ रुपये मुआवजा का भुगतान कर दिया गया। अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए 324 करोड़ की मुआवजा राशि निर्धारित की गई। इसमें से 246 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं, 78 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया है।

सरकार ने दिया तगड़ा झटका, केंद्रीय कर्मियों की ‘सामान्य भविष्य निधि’ पर नहीं बढ़ी ब्याज दर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘एक जनवरी से 31 मार्च’ 2025 की तिमाही के लिए सामान्य भविष्य निधि ‘जीपीएफ’ पर मिलने वाले ब्याज की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछले छह वर्षों से ब्याज दरें एक ही प्वाइंट पर अटकी हैं। इसे केंद्रीय कर्मियों के लिए तगड़ा झटका बताया जा रहा है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने गत सप्ताह जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दरों की घोषणा की है। इसमें कहा गया है कि इस तिमाही के लिए भी ब्याज की दर 7.1 फीसदी ही रहेगी। इससे पहले ‘एक अक्तूबर से 31 दिसम्बर’ 2024 की तिमाही में भी जीपीएफ की ब्याज दर 7.1 फीसदी रही थी। सरकार से थी ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग ने ‘एक अक्तूबर से 31 दिसम्बर’ तिमाही के दौरान जनरल प्रोविडेंट फंड और उससे मिलते जुलते अन्य प्रोविडेंट फंड के लिए ब्याज की दरें घोषित की थीं। उस वक्त ब्याज दर 7.1 प्रतिशत रखी गई। नव वर्ष में सरकारी कर्मियों को एनडीए सरकार से जनरल प्रोविडेंट फंड की दरों में बदलाव किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्रालय ने ब्याज की दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया है। लंबे समय से ब्याज दरों को स्थिर रखा गया है। कोरोना के दौरान भी नहीं बढ़ाई गई दरें वर्ष 2021-22 के दौरान सामान्य भविष्य निधि तथा उसी प्रकार की अन्य निधियों के अभिदाताओं की कुल जमा रकमों पर दी जाने वाली ब्याज दर एक जुलाई 2021 से लेकर सितंबर 2021 तक 7.1 फीसदी रखी गई थी। आर्थिक कार्य विभाग के 19 अप्रैल 2021 को जारी संकल्प में भी सामान्य भविष्य निधि की राशि पर ब्याज दर 7.1 फीसदी तय की गई थी। उस वक्त देश में कोरोना की दूसरी लहर ने अपना कहर बरपा रखा था। तब केंद्रीय कर्मियों का महंगाई भत्ता भी 18 माह से रोका गया था। इसी वजह से कर्मियों को यह उम्मीद थी कि सरकार ‘जीपीएफ’ की राशि पर मिलने वाले ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका। एक जुलाई 2020 से लेकर 30 सितंबर 2020 तक जीपीएफ पर मिलने वाले ब्याज की दर 7.1 फीसदी रखी गई थी। इन विभागों में लागू होती हैं दरें ये दरें सामान्य भविष्य निधि (केंद्रीय सेवाएं), अंशदायी भविष्य निधि (भारत), अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि, राज्य रेलवे भविष्य निधि (रक्षा सेवाएं), भारतीय आयुद्ध विभाग भविष्य निधि, भारतीय आयुद्ध कारखाना कामगार भविष्य निधि, भारतीय नौसेना गोदी कामगार भविष्य निधि, रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि और सशस्त्र सेना कार्मिक भविष्य निधि पर लागू होती हैं। जीपीएफ में जमा कर्मियों की राशि पर बैंकों के मुकाबले ब्याज अधिक मिलता है, इसलिए बहुत से कर्मचारी अपना शेयर बढ़ा देते हैं। जीपीएफ में ज्यादा वेतन इसलिए कटवाया जाता था, ताकि कर्मचारी अपनी बड़ी जरूरत के समय इसका इस्तेमाल कर सकें। अब वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर्मचारी अपने जीपीएफ में से 90 फीसदी राशि निकाल सकते हैं। हालांकि इस लेकर नियम-शर्तें बदलती रहती हैं। बच्चों की शिक्षा, शादी, घर बनाना या उसके लिए प्लाट खरीदना, फ्लैट लेना है, पुश्तैनी मकान की रिपेयर करानी है और घर का लोन चुकाना है, जैसे कामों में जीपीएफ राशि काम आ जाती है। तीन वर्ष पहले केंद्र सरकार ने एक वित्त वर्ष में जनरल प्रोविडेंट फंड में वार्षिक योगदान की सीमा 5 लाख रुपये तय कर दी थी। नए प्रावधान के अनुसार, एक वित्त वर्ष में जीपीएफ खाते में जमा की गई कुल राशि पांच लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती है।

18 लाख से ज्यादा किसानों का खरीदा गया धान, नवा रायपुर बन रहा आईटी हब

रायपुर राज्य सरकार नवा रायपुर को आईटी हब के रूप में विकसित कर रही है। आने वाले दिनों में यहां आईटी के क्षेत्र में 10,000 नए रोजगार उपलब्ध होने की संभावना है। वर्तमान में स्क्वायर बिजनेस सर्विसेज और टेली परफॉर्मेंस जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों ने सेवाएं शुरू की हैं, जिनसे अब तक 260 से अधिक युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। स्क्वायर बिजनेस सर्विसेज ने 180 और टेली परफॉर्मेंस ने 80 पदों पर भर्ती की है। टेली परफॉर्मेंस ने 100 और कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना बनाई है। सीएसएम टेक्नोलाजीज ने 200 प्रोफेशनल्स की भर्ती के लिए आवेदन मंगाए हैं। सरकार की योजना नवा रायपुर के आईटी हब बनने की प्रक्रिया में राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रायपुर और नवा रायपुर के बीच आईटी पेशेवरों के लिए मुफ्त बस सेवा की तथा स्क्वायर बिजनेस सर्विसेज के कर्मचारियों के लिए आवासीय समाधान भी उपलब्ध कराने की योजना है। साथ ही सीबीडी सेक्टर 21 में अत्याधुनिक कार्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। आईटी व आईटी-इनबेल्ड सर्विसेस का हो रहा विकास राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल का नतीजा है कि छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर क्षेत्र में आईटी और आईटी- इनेबल्ड सर्विसेस का विकास हो रहा है। राज्य सरकार की योजनाओं और संस्थाओं की पहल से नवा रायपुर युवाओं के लिए रोजगार और विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर में स्क्वायर बिजनेस सर्विसेज और टेली परफॉर्मेंस जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों ने सेवाएं शुरू की हैं, जिनमें युवाओं को रोजगार प्राप्त हो रहा है। राज्य में अब तक 93.44 टन धान की खरीदी एक तरफ सरकार जहां आईटी सेक्टर को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ किसानों के लिए भी कल्याणकारी नीतियां बना रही है। राज्य में अभी तक लगभग 93.44 लाख टन धान की खरीदी हो चुकी है। इसके एवज में 18.69 लाख किसानों को 21 हजार 40 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। प्रदेश के सभी पंजीकृत कृषकों को खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान विक्रय के लिए टोकन की सुविधा आनलाइन एप (टोकन तुंहर हाथ) एवं उपार्जन केंद्रों में 25 जनवरी तक के लिए उपलब्ध है। किसान सुविधा अनुसार तारीख का चयन कर नियमानुसार धान बिक्री कर सकते हैं। धान उठाव के लिए लगभग 62.72 लाख टन का डीओ और टीओ जारी किया गया है, अब तक 36.38 लाख टन धान का उठाव कर लिया गया है। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को 62,494 किसानों से 2.90 लाख टन धान खरीदा गया।

46 करोड़ की परियोजना लाएगी रंग, त्रिपुरा में अगले माह से दौड़ेंगी बिजली से चलने वाली ट्रेनें

अगरतला त्रिपुरा में जल्द ही पटरियों पर बिजली से चलने वाली ट्रेनें दौड़ती दिखेंगी। दरअसल, सोमवार को एक अधिकारी ने जानकारी दी कि राज्य में रेलवे के एक महत्वपूर्ण विद्युतीकरण परियोजना के पूरा होने के बाद इस साल फरवरी तक बिजली से चलने वाली ट्रेनें शुरू हो सकती हैं। 46 करोड़ रुपये की इस विद्युतीकरण परियोजना की शुरुआत 2022 में की गई थी, जो त्रिपुरा को राष्ट्रीय रेलवे ग्रिड से जोड़ेगी। वर्तमान में राज्य में डीजल से चलने वाली ट्रेनें चल रही हैं। टीएसईसीएल कर रहा तैयार अधिकारियों ने बताया कि त्रिपुरा राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (टीएसईसीएल) फरवरी तक राज्य में रेलवे की विद्युत ट्रांसमिशन लाइन को बिजली की आपूर्ति करने के लिए तैयार हो जाएगा। जबकि उत्तर-पूर्व रेलवे (एनएफआर) ने पहले ही त्रिपुरा में धर्मनगर के माध्यम से बड़ापुर से अगरतला तक के मार्ग का विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। क्या बोले अधिकारी? टीएसईसीएल के सहायक जनरल मैनेजर (ट्रांसमिशन) निरुपम गुहा ने बताया, ‘हमने उनकोटी जिला के कुमारघाट, खोवाई जिला के तेलियामुरा और गोमती जिला के उदयपुर में तीन ट्रैक्शन पावर सबस्टेशन लगाने का काम शुरू किया था। कुमारघाट सबस्टेशन का काम पिछले मार्च में पूरा हो गया था।’ उन्होंने कहा कि तेलियामुरा का सबस्टेशन इस महीने और उदयपुर का सबस्टेशन फरवरी तक पूरा हो जाएगा। तीनों टैक्शन सबस्टेशनों के पूरा होने के बाद टीएसईसीएल रेलवे के विद्युत ट्रांसमिशन लाइन को धर्मनगर से अगरतला और अन्य जगहों तक ऊर्जा प्रदान करने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि रेलवे ने प्रत्येक सबस्टेशन के लिए पांच मेगावाट बिजली की मांग की है और आवश्यकता पड़ने पर अधिक बिजली भी आपूर्ति की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद राज्य में अधिक आधुनिक और तेज ट्रेनें शुरू की जाएंगी, जो राज्य के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस जगह का काम पूरा उत्तर-पूर्व रेलवे (NFR) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने कहा, ‘बड़ापुर से अगरतला तक का विद्युतीकरण काम धर्मनगर के माध्यम से पूरा हो चुका है, केवल लुंबिंग-बड़ापुर खंड में पहाड़ी क्षेत्र बाकी है। हम इस खंड के विद्युतीकरण को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कदम उठा रहे हैं।’

बिजली का बिल दे सकता है शोक, बढ़े सकता है प्रति यूनिट 50 पैसे रेट

जबलपुर बिजली कंपनी दरें बढ़ाकर घरेलू उपभोक्ताओं पर बोझ डालना चाह रही है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 151-300 के बीच का स्लैब खत्म कर 151 यूनिट के बाद फ्लैट रेट वसूलने का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को दिया है। प्रस्ताव स्वीकृत हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान मध्यवर्ग के उन उपभोक्ताओं को होगा जो सब्सिडी के दायरे से बाहर आते हैं। प्रदेश में ऐसे करीब 25 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जिन पर 50 पैसे प्रति यूनिट का बोझ डालने की तैयारी हो रही है। 24 जनवरी तक बुलाई गई आपत्ति मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने इस संबंध में याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दी है। इस पर सुनवाई से पूर्व आयोग ने जनता से 24 जनवरी तक आपत्ति बुलाई है। बता दें कि एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व आवश्यकता 58744 करोड़ व वर्तमान दरों पर प्राप्त राजस्व 54637 करोड़ बताया है। कंपनी ने इस अंतर की राशि 4107 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए औसत 7.52 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव दिया है। उपभोक्ताओं की चार श्रेणियों को तीन में समेटा इस प्रस्ताव में कंपनी ने घरेलू उपभोक्ता की बिजली खपत की चार श्रेणी को तीन में समेट दिया है। पहली श्रेणी 50 यूनिट, दूसरी श्रेणी 51 से 150 यूनिट और तीसरी श्रेणी 151 से ऊपर की रखी गई है। अभी 151 से 300 यूनिट की श्रेणी के लिए अलग दर तय थी। अब कंपनी 151 यूनिट के ऊपर एक दर तय करना चाह रही है। इससे 50 पैसे का बोझ प्रति यूनिट उपभोक्ता पर डालने का प्रस्ताव है। प्रदेश में अभी एक करोड़ 27 लाख कुल घरेलू उपभोक्ता हैं। इसमें बिजली कंपनी करीब एक करोड़ उपभोक्ता को सब्सिडी देती है। ये उपभोक्ता 150 यूनिट मासिक खपत के दायरे में आते हैं। कंपनी 100 यूनिट के लिए 100 रुपये और अगली 50 यूनिट पर सामान्य दर से बिलिंग करती है, इससे उपभोक्ता को करीब 450 रुपये से अधिक की बचत होती है। इस बीच 25 लाख से ज्यादा ऐसे बिजली उपभोक्ता है जिनकी मासिक खपत 151 से 300 यूनिट के भीतर रहती है। ऐेसे उपभोक्ताओं को भी अब फ्लैट रेट पर बिल भरना होगा। मध्यवर्गीय पर बोझ अधिक बिजली मामलों के जानकार एडवोकेट राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ में बदलाव करने से मध्यम वर्ग के उपभोक्ता जिनकी मासिक खपत 151 यूनिट से 300 यूनिट के बीच है उन पर अधिक बोझ डाला जा रहा है। ये वर्ग सरकारी सब्सिडी के दायरे से बाहर होता है, इसलिए उन्हें बिजली की पूरी कीमत देनी पड़ती है। एक दर की योजना मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के सीजीएम शैलेंद्र सक्सेना ने बतााया कि कंपनी 151 से 300 यूनिट के स्लैब को खत्म कर एक दर तय करना चाहती है। ऐसी श्रेणी के उपभोक्ता से एक सामान्य दर से बिजली बिल लिया जाएगा।

बंगलूरू में आठ महीने की बच्ची में दिखे संक्रमण के लक्षण ने किया अलर्ट, HMPV वायरस भारत पहुंचा?

बंगलूरू। चीन में फैल रहे ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) संक्रमण की भारत में दस्तक हो गई। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि बंगलूरू में एक आठ महीने की बच्ची एचएमपीवी संक्रमित पाई गई है। हालांकि अभी तक भारत में एचएमपीवी का केस मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं कर्नाटक सरकार का कहना है कि वायरस के स्ट्रेन के बारे में जानकारी नहीं है। चीन में इन दिनों ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) का प्रकोप देखने को मिल रहा है। वायरस से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने की खबरें आ रही हैं। इसे लेकर भारत में भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। कई राज्यों ने एडवाइजरी और अलर्ट जारी किया है। इसके साथ ही भारत में एचएमपीवी वायरस जैसा का पहला केस सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बंगलूरू के बैपटिस्ट अस्पताल में एक आठ महीने की बच्ची में एचएमपीवी वायरस जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि बच्ची में संक्रमण की पुष्टि एक निजी लैब में हुई है। कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उनकी प्रयोगशाला में नमूने की जांच नहीं हुई है। निजी अस्पताल की रिपोर्ट में यह सामने आया है। स्ट्रेन को लेकर जानकारी नहीं है। नमूने को सरकारी प्रयोगशाला में भेजा गया है। वहीं सरकार ने वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है। सतर्कता बरती जा रही है। क्या है ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी)? 0- ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस, जिसे एचएमपीवी के छोटे नाम से भी जाना जाता है, इंसानों की श्वसन प्रक्रिया पर प्रभाव डालने वाला वायरस है। इसकी पहली बार पहचान 2001 में हो गई थी। तब नीदरलैंड के वैज्ञानिकों ने इसका पता लगाया था। यह पैरामाइक्सोविरीडे परिवार का वायरस है। 0- श्वसन संबंधी अन्य वायरस की तरह यह भी संक्रमित लोगों के खांसने-छींकने के दौरान उनके करीब रहने से फैलता है। 0- कुछ स्टडीज में दावा किया गया है कि यह वायरस पिछले छह दशकों से दुनिया में मौजूद है। एचएमपीवी का किस पर और कितना असर? 0- यह मुख्य तौर पर बच्चों पर असर डालता है। हालांकि, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों और बुजुर्गों पर भी इसका प्रभाव दर्ज किया गया है। 0- इस वायरस की वजह से लोगों को सर्दी, खांसी, बुखार, कफ की शिकायत हो सकती है। ज्यादा गंभीर मामलों में गला और श्वांस नली के जाम होने से लोगों के मुंह से सीटी जैसी खरखराहट भी सुनी जा सकती है। 0- कुछ और गंभीर स्थिति में इस वायरस की वजह से लोगों को ब्रोंकियोलाइटिस (फेफड़ों में ऑक्सीजन ले जाने वाली नली में सूजन) और निमोनिया (फेफड़ों में पानी भरना) की स्थिति पैदा कर सकता है। इसके चलते संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। 0- चूंकि इसके लक्षण कोरोनावायरस संक्रमण और आम फ्लू से मिलते-जुलते हैं, इसलिए इन दोनों में अंतर बता पाना मुश्किल है। हालांकि, जहां कोरोनावायरस की महामारी हर सीजन में फैली थी। वहीं एचएमपीवी अब तक मुख्यतः मौसमी संक्रमण ही माना जा रहा है। हालांकि, कई जगहों पर इसकी मौजूदगी पूरे साल भी दर्ज की गई है। 0- कोरोना के इतर इस वायरस के कारण ऊपरी और निचले दोनों श्वसन पथ में संक्रमण का खतरा हो सकता है। 0- सामान्य मामलों में इस वायरस का असर तीन से पांच दिन तक रहता है। वैक्सीन और उपचार के क्या तरीके हैं? मौजूदा समय में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस से बचाव के लिए कोई टीका (वैक्सीन) मौजूद नहीं है। इसके अलावा एंटी वायरल दवाइयों का प्रयोग इस पर असर नहीं डालता। ऐसे में एंटी वायरल का प्रयोग इंसानों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम कर सकता है। इस वायरस से जूझ रहे लोगों को लक्षण हल्का करने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं। हालांकि, वायरस को खत्म करने लायक उपचार अभी मौजूद नहीं है।

आज CM यादव 66 मेडिकल मोबाइल यूनिट को दिखाएंगे हरी झंडी

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मूलमंत्र के अनुक्रम में प्रदेश के दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए ‘पीएम जनमन’ के अंतर्गत मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) सेवा की शुरुआत की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार 6 जनवरी को पीएम जनमन योजना के तहत 21 जिलों के 87 विकासखंडों के लिए 66 मोबाइल मेडिकल यूनिट को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। मुख्यमंत्री निवास श्यामला हिल्स में कार्यक्रम होगा। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट से प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुगम प्रदायगी सुनिश्चित होगी। 1268 ग्रामों की 3.12 लाख आबादी को मिलेंगी स्वास्थ्य सेवाएँ प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट की लागत 33 लाख 86 हजार रूपये है। इस यूनिट से अनूपपुर, अशोक नगर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दतिया, डिंडोरी, गुना, ग्वालियर, कटनी, मंडला, मुरैना, नरसिंहपुर, सतना, शहडोल, श्योपुर, सीधी, शिवपुरी, जबलपुर, रायसेन, उमरिया एवं विदिशा जिले के 87 विकासखंड के 1268 गांव की लगभग 3 लाख 12 हजार से अधिक की आबादी को सुगम स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। जीपीएस से लैस इन यूनिट में सक्शन मशीन, कान जांच की आटो स्कोप, एक्स-रे मशीन, स्ट्रेक्चर, ऑक्सीजन सिलेंडर आदि उपकरण होंगे। माह में 24 दिन गाँव का भ्रमण मोबाइल मेडिकल यूनिट माह में 24 दिन गांवों का भ्रमण करेंगी और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराएगी। ये यूनिट दिन में 2 गांव तथा 50 मरीजों को देखेगी। इस यूनिट में एक-एक डॉक्टर, नर्स, एएनएम/एमपी डब्ल्यू, लैब टेक्नीशियन और फीजियोथेरेपिस्ट मरीजों को सेवाएं प्रदान करेंगे। मरीजों को 65 प्रकार की दवाईयां भी दी जाएंगी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल भी उपस्थित रहेंगे।  

रेल प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा के उद्देश्य से महाकुंभ मेला विशेष ट्रेनें संचालित की जा रही हैं

भोपाल रेल प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं एवं यात्रियों को सुगम, सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महाकुंभ मेला विशेष ट्रेनें संचालित की जा रही हैं। इसी कड़ी में, गाड़ी संख्या 07081/07082 गुंटूर – आजमगढ़ – विजयवाड़ा महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन 01-01 ट्रिप चलाई जा रही है, जो भोपाल मंडल के इटारसी स्टेशन पर ठहरकर गंतव्य तक जाएगी। गाड़ी संख्या 07081 गुंटूर-आजमगढ़ महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन (01 ट्रिप) गाड़ी संख्या 07081 गुंटूर-आजमगढ़ महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन दिनांक 14 फरवरी 2025 को गुंटूर स्टेशन से रात 23.00 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन शाम 17.40 बजे इटारसी एवं मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन शाम 17.15 बजे आजमगढ़ स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 07082 आजमगढ़-विजयवाड़ा महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन (01 ट्रिप) गाड़ी संख्या 07082 आजमगढ़-विजयवाड़ा महाकुंभ मेला विशेष ट्रेन दिनांक 16 फरवरी 2025 को रात्रि 19.45 बजे आजमगढ़ स्टेशन से प्रस्थान कर, अगले दिन 15.40 बजे इटारसी एवं मार्ग के अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन सुबह 07.30 बजे विजयवाड़ा स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी के हाल्ट: रास्ते में यह गाड़ी दोनों दिशाओं में विजयवाड़ा जंक्शन, खम्मम, दोरनाकल जंक्शन, महबूबाबाद, वारंगल, रामागुंडम, मंचेरियल, सिरपुर कागजनगर, बल्हारशाह, चंद्रपुर, नागपुर, बैतूल, इटारसी जंक्शन, पिपरिया, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, वाराणसी जंक्शन, शाहगंज जंक्शन स्टेशनों पर रुकेगी। कोच संरचना: इस विशेष ट्रेन में 09 शयनयान श्रेणी, 02 सामान्य श्रेणी, 08 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी एवं 01 वातानुकूलित द्वितीय श्रेणी के डिब्बे सहित कुल 22 डिब्बे होंगे। यात्रियों से अनुरोध है कि असुविधा से बचने के लिए रेलवे द्वारा अधिकृत रेलवे पूछताछ सेवा NTES/139 से गाड़ी की सही स्थिति की जानकारी पता करके तदनुसार यात्रा प्रारम्भ करें। उक्त विशेष ट्रेनों के विस्तृत समय और ठहराव की विस्तृत जानकारी हेतु कृपया www.enquiry.indianrail.gov.in पर जाएं या NTES ऐप डाउनलोड करें।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर से दौड़ेंगी सरकारी बसें

भोपाल मध्य प्रदेश वासियों के लिए दो दशक पहले बंद की गई राज्य सरकार संचालित बस सेवाएं फिर से शुरू की जाएंगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बस सुविधा शुरू करने का ऐलान किया. मुख्यमंत्री विदिशा जिले के लटेरी कस्बे में सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि गरीबों को बस सेवाओं की आवश्यकता होती है. संपन्न लोगों के पास खुद की गाड़ियां होती हैं. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “याद कीजिए, 20 साल पहले की स्थिति. सड़कों पर राज्य परिवहन निगम की बसें दौड़ा करती थीं. परिवहन निगम की बस सेवाओं की फिर से आवश्यकता है. हम सरकारी बस सेवाएं दोबारा शुरू करने जा रहे हैं.” हालांकि, उन्होंने बस शुरू करने की समय सीमा नहीं बताई. बता दें कि दो दशक पहले मध्य प्रदेश में सरकारी बस सेवाओं को बंद कर दिया गया था. बस बंद होने के बाद मार्गों पर निजी ऑपरेटर्स का कब्जा हो गया है. बड़े शहरों में बस सेवा नगर निगमों की तरफ से संचालित की जाती हैं. गौरतलब है कि लोक परिवहन सेवा गरीब लोगों के सस्ती होती है. मध्य प्रदेश की सड़कों पर फिर से दौड़ेंगी सरकारी बसें सरकारी बसों के संचालन से मध्य प्रदेश की जनता को बुनियादी सुविधा मिलने लगेगी. आम जनता को सस्ती और सुलभ यातायात सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए गठित मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को 2005 में बंद कर दिया गया था. लिहाजा, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई. यात्रियों को भारी परेशानी होने लगी. परिवहन व्यवस्था पर निजी ऑपरेटर्स ने कब्जा जमा लिया. प्राइवेट बस ऑपरेटर्स मुनाफा वाले रूट पर सेवाएं देने लगे. ग्रामीण इलाकों में यात्री बस की सुविधा नदारद हो गई. यात्रियों की असुविधा को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी बसों को शुरू करने ऐलान किया.

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