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मुख्यमंत्री ने लटेरी, विदिशा में किया 132 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण और भूमि-पूजन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में सर्वश्रेष्ठ देश बनने की ओर अग्रसर है। हमारी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। युवा, गरीब, किसान और महिलाएं हमारी विशेष प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश तेज गति से देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने के लिए निरन्तर कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को लटेरी (विदिशा) में विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में विशाल जन समुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने क्षेत्र के लिए 132 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। इनमें 80 करोड़ 16 लाख रुपए के 54 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 51 करोड़ 96 लाख रुपए के 198 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हित लाभ भी वितरित किए। कार्यक्रम में विदिशा जिले में 505 हेक्टेयर चरनोई की भूमि को अतिक्रमण मुक्त किए जाने पर एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आधुनिक युग के भगीरथ हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रयासों से केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजनाओं से प्रदेश को दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं मिली है। इससे न केवल बुंदेलखंड अपितु मालवा और चंबल क्षेत्र में भी बड़े क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल सुविधा मिलेगी। इस क्षेत्र के भी 360 गांव को जल उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य है हर किसान के खेत में पानी पहुंचाना। हर खेत में पानी आने से किसान की जिंदगानी बदलेगी। कृषि उत्पादन में हम पंजाब, हरियाणा को भी पीछे छोड़ने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि, पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार आदि सभी क्षेत्रों में प्रदेश में तेज गति से विकास हो रहा है। हर गरीब को पक्का मकान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी संकल्पित हैं। आयुष्मान भारत योजना में 5 लाख रुपए तक का इलाज मुफ्त है। उद्योग और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उज्जैन, सागर, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट में करोड़ों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। युवा वर्ग के लिए सरकार शीघ्र ही एक लाख सरकारी और निजी क्षेत्र में लगभग 3 लाख पदों पर भर्ती करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिक्षा की महत्ता को हमेशा याद रखें। बच्चों को अच्छी शिक्षा दें, शिक्षा की सारी व्यवस्था सरकार कर रही है। प्रदेश के 55 जिलों में पीएम एक्सीलेंस स्कूल खोले जा रहे हैं। गरीबों को परिवहन की अच्छी सुविधा देने के लिए सरकार मध्यप्रदेश राज्य परिवहन को दोबारा प्रारंभ करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को भी सरकार बढ़ावा दे रही है। जो गाय पाले, वही गोपाल है तथा जहाँ गाय का कुल हो, वही गोकुल है। सरकार दुग्ध उत्पादन पर बोनस देने वाली है तथा 10 से अधिक गाय पालने पर अनुदान दिया जाएगा। प्रदेश में बड़ी संख्या में गौ-शालाएं बनाई जा रही हैं। प्रदेश की धरती पर जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण पधारे थे, उन सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। उज्जैन में संदीपनी आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण ने शिक्षा ग्रहण की, जानापाव में उन्हें सुदर्शन चक्र मिला। कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता वही है जब मित्र बगैर सामने आये मित्र की सहायता करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्र में रेलवे लाइन के लिए विशेष प्रयास करने को आश्वस्त किया। उन्होंने आनंदपुर में शासकीय महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा भी की। पशुपालन एवं डेयरी मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं विदिशा जिले के प्रभारी मंत्री श्री लखन पटेल ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से प्रदेश में देश की दो नदी जोड़ो परियोजनाएं प्रारंभ हुई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के मसीहा बनकर कार्य कर रहे हैं। हमारा संकल्प पूरे प्रदेश को सिंचित करना है। सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने भी सभा को संबोधित किया। विधायक श्री उमाकांत शर्मा ने क्षेत्र के विकास के लिए कई मांगे रखीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्हें पूरा करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विधायक श्री मुकेश टंडन, श्री हरि सिंह सप्रे, श्री हरि सिंह रघुवंशी, श्री सूर्य प्रकाश मीणा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में जन समुदाय उपस्थित था।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा- अपने ज्ञान से दूसरों को बड़ा करने में ही शिक्षित व्यक्ति का गौरव है

भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि अपने ज्ञान से दूसरों को बड़ा करने में ही शिक्षित व्यक्ति का गौरव है। उसकी शिक्षा का गौरव है। उन्होंने कहा कि आज से 38 वर्ष पूर्व कम्प्यूटर ज्ञान के प्रसार के लिए ‘कम्प्यूटर एक परिचय’ पुस्तक की रचना कर, लेखक ने अपनी शिक्षा को गौरवान्वित किया है। संपूर्ण समाज को लाभान्वित करने का उनका प्रयास अभिनंदनीय है। राज्यपाल श्री पटेल आईसेक्ट पब्लिकेशन की पुस्तक ‘कम्प्यूटर एक परिचय’ के 40 वें संस्करण के लोकार्पण कार्यक्रम को स्थानीय कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी के पूर्व निदेशक श्री शिव कुमार अवस्थी भी मंचासीन थे। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पुस्तक लेखन समाज सेवा का सशक्त माध्यम है। नई सोच और दृष्टि के द्वारा समाज का मार्गदर्शन करने वाले लेखकों का सम्मान समाज का दायित्व है। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि ज्ञान के लिए केवल पाठ्य पुस्तकों पर निर्भर नहीं रहे, पुस्तकों में उपलब्ध हमारे देश, समाज और संस्कृति के ज्ञान का भी अध्ययन करे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक परिवर्तन का नया दौर शुरू हुआ है, जिसकी आजादी के समय से ही देश अपेक्षा कर रहा था। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में युवाओं को महत्वपूर्ण भूमिका देने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बंधन मुक्त शिक्षा का अभूतपूर्व अवसर दिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी आगामी 13-14 जनवरी को देश के 3 हजार युवाओं के साथ संवाद करेंगे। राज्यपाल श्री पटेल ने कार्यक्रम को देखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि वैचारिक चिंतन में सहभागिता से नए विषयों और कार्यों के संबंध में जानकारी मिलती है। भविष्य के पथ का प्रदर्शन होता है। ‘कम्प्यूटर एक परिचय’ पुस्तक के लेखक श्री संतोष चौबे की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री पटेल का रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह और आईसेक्ट पब्लिकेशन के विज्ञान लेखन की पुस्तकों और भारतीय वैज्ञानिकों के मोनोग्राफ का सेट भेंट किया। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री भरत शरण सिंह ने भारतीय ज्ञान परम्परा में कम्प्यूटर के सिद्धांतों की उपलब्धता और कम्प्यूटर निर्माण में भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को प्रकाशित किया। कम्प्यूटर एक परिचय पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तक ने भारतीय भाषाओं में डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने पुस्तक की रचना के लिए लेखक को बधाई दी। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने पुस्तक की रचना की पृष्ठ भूमि और विकास का विवरण देते हुए बताया कि देश में तकनीक का विकास भारतीय भाषाओं के माध्यम से ही सम्भव है। संस्था द्वारा 6 विश्वविद्यालय संचालित किए जा रहे है। संस्थान उत्तरपूर्व में 7वें विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक के नवाचार और समाज के साथ जुड़ाव के द्वारा हर क्षेत्र में विकास की अपार सम्भावनाएं है। इसका उदाहरण देते हुए बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से किताब का लेखन किया जा सकता है, किन्तु किस विषय और भाषा पर पुस्तक लिखी जानी है, यह वास्तविक बुद्धिमत्ता से ही सम्भव है। स्वागत उद्बोधन स्कोप ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी के चान्सलर श्री सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने दिया। उन्होंने बताया कि पुस्तक ने देश में कम्प्यूटर के प्रति लोगों के दृष्टिकोण में बदलाव और सोच को नई दिशा देने का कार्य किया है। पुस्तक के प्रकाशन के बाद संस्थान निर्माण के दुनियां में जो उदाहरण मिलते है, उसमें ‘कम्प्यूटर एक परिचय’ पुस्तक का भी स्थान है। पुस्तक की सफलता ने आईसेक्ट पब्लिकेशन को जन्म दिया। आभार प्रदर्शन रबीन्द्र नाथ टैगोर विश्वविद्याल के कुलसचिव श्री विजय सिंह ने किया। संचालन विश्वविद्यालय की प्रो. चान्सलर डॉ. अदिति चतुर्वेदी ने किया।  

मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए खुशखबरी, शिक्षकों के विभिन्न पदों पर वैकेंसी ,आवेदन प्रक्रिया 28 जनवरी 2025 से शुरू

भोपाल मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए खुशखबरी है । कर्मचारी चयन मंडल ने शिक्षकों के विभिन्न पदों पर वैकेंसी निकाली है। आवेदन की प्रक्रिया 28 जनवरी 2025 से शुरू होगी।अप्लाई करने के इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट https://esb.mp.gov.in पर जाकर 11 फरवरी 2025 आवेदन कर सकते हैं।लास्ट डेट बीतने के बाद कोई एप्लीकेशन फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस भर्ती के माध्यम से शिक्षा विभाग के तहत माध्यमिक शिक्षक (विषय, खेल एवं संगीत गायन वादन) और प्राथमिक शिक्षक (खेल संगीत गायन-वादन व नृत्य) और एमपी शासन, जनजातीय विभाग के अंतर्गत माध्यमिक शिक्षक (विषय) और प्राथमिक शिक्षक (खेल, संगीत, गायन वादन ,नृत्य) के पदों पर भर्ती की जाएगी।अनुमान है कि इस भर्ती के माध्यम से 10 हजार पदों को भरा जाएगा। आवेदन शुल्क: सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये निर्धारित किया गया है।SC/ST/OBC/EWS और दिव्यांगजन श्रेणी के उम्मीदवारों, जो मध्य प्रदेश के निवासी हैं आवेदन शुल्क 250 रुपये है।आवेदन प्रक्रिया के दौरान ईएसबी द्वारा किसी भी प्रमाण पत्र की जांच की जाएगी। यह जांच नियुक्ति प्रक्रिया के समय संबंधित विभाग द्वारा की जाएगी। ऑनलाइन परीक्षा में उमीदवारों की पात्रता पूरी तरह से प्रावधिक मानी जाएगी। मार्च में होगी परीक्षा     परीक्षा 20 मार्च 2025 से दो चरणों में आयोजित की जाएगी। उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के बाद परीक्षा की तिथियों और परीक्षा केंद्रों से संबंधित जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।     पहली पाली सुबह 9 बजे 11 बजे तक।अभ्यर्थियों को सुबह 7 बजे से 8 बजे के बीच रिपोर्ट करना होगा।     दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी। रिपोर्टिंग समय दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक है।     भोपाल , बालाघाट, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में आयोजित की जाएगी। महत्वपूर्ण तारीख     ऑनलाइन आवेदन की तारीख: 28 जनवरी 2025 ।     आवेदन की लास्ट डेट :11 फरवरी 2025 तक ।     आवेदन फॉर्म में करेक्शन की प्रक्रिया 28 जनवरी से 16 फरवरी 2025 तक ।     परीक्षा: 20 मार्च 2025

किसानों को मिलेगा लहसुन की बिक्री का लाभ, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 8 साल का विवाद खत्म

इंदौर  मंडी के बने सरकारी नियम-कायदों में लहसुन को सब्जी की श्रेणी में ही रखा जाएगा। किसान की मर्जी है कि वो चाहे तो अपनी उपजाई लहसुन को सरकारी सिस्टम से बेचे या व्यापारियों के पास ले जाकर बेचे। बिजलपुर के किसान कैलाश मुकाती के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय दिया है। इसके साथ ही मप्र में आठ साल से लहसुन की बिक्री पर चल रहे विवाद का पटाक्षेप हो गया है। इसी के साथ सरकारी सिस्टम से लहसुन की नीलामी करवाने के बंधन से किसानों को मुक्ति मिल गई है। एमपी हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार रखा सुप्रीम कोर्ट ने  निर्णय देते हुए मप्र हाई कोर्ट की डिवीजनल बेंच के उस निर्णय को बरकरार रखा है कि लहसुन जल्द खराब होने वाली कमोडिटी है। ऐसे में इसे सब्जियों की श्रेणी में रखा जाएगा। किसान अपनी सुविधा व दाम के अनुसार इसकी बिक्री करवा सकते हैं। लहसुन की नीलामी में सालभर से किसानों की नहीं सरकारी मर्जी चल रही थी। बीते वर्ष फरवरी से इंदौर मंडी में लहसुन की सीधी नीलामी करने से आढ़तियों और व्यापारियों को रोक दिया गया था। नियम लागू कर दिया था कि अनाज-मसालों की तरह लहसुन की नीलामी सरकारी मंडी में सरकारी कर्मचारी करेंगे। इसके बाद मंडी में कई बार विरोध प्रदर्शन भी हुआ। किसानों ने मांग की कि उनकी उपज को कहां बेचना है यह उनकी मर्जी पर छोड़ना चाहिए। आठ वर्षों से विवाद, उलझे थे किसान प्रदेश में लहसुन पर विवाद करीब आठ वर्षों से चल रहा था। किसानों के संगठन के आवेदन पर मप्र मंडी बोर्ड ने 2015 में लहसुन को सब्जी की श्रेणी में शामिल कर लिया था। इससे किसानों को यह छूट मिल गई थी कि वे चाहे तो लहसुन को सरकारी बोली प्रक्रिया में बेचें या चाहे तो सब्जियों के साथ आढ़तियों या व्यापारियों के द्वारा नीलाम करवा दें। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही कृषि विभाग ने इस आदेश को रद कर दिया और कृषि उपज मंडी समिति अधिनियम(1972) का हवाला देकर लहसुन को मसाले की श्रेणी में डाल दिया। 2016 में मंडी व्यापारियों की एसोसिएशन हाई कोर्ट पहुंची। मर्जी से नीलामी की छूट दी कोर्ट ने 2017 में लहसुन को सब्जी में माना और किसानों की मर्जी से नीलामी की छूट दी। इसी बीच एक व्यापारी मुकेश सोमानी ने पुनर्विचार याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने फिर से फिर से लहसुन को मसालों की श्रेणी में रख दिया। इस आधार पर सरकार ने फरवरी 2024 में आदेश जारी कर इंदौर मंडी में हो रही लहसुन की नीलामी से आढ़तियों को बाहर कर दिया। सरकारी कर्मचारियों से नीलामी शुरू कर दी। किसानों ने इसका विरोध किया। कहा कि उनकी जानकारी और पक्ष जाने बगैर निर्णय हुआ। हाईकोर्ट ने निर्णय दिया था लहसुन सब्जी है बिजलपुर के किसान कैलाश मुकाती ने किसानों की ओर से हाई कोर्ट की डिवीजनल बेंच में अपील की। इस पर जुलाई 2024 में हाई कोर्ट की डिवीजनल बेंच ने निर्णय दिया कि लहसुन सब्जी है और किसान इसे अपनी मर्जी जहां चाहे बिक्री कर सकता है। इस निर्णय पर मंडी प्रशासन खामोश रहा। व्यापारी मुकेश सोमानी फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और हाई कोर्ट डिवीजनल बेंच के निर्णय पर स्थगन हासिल कर लिया। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने स्थगन हटाकर किसानों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डिवीजनल बेंच के आदेश को बरकरार रखा।  

सरकार नए नियमों से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कसेगी लगाम, लगेगा 250 करोड़ रुपए जुर्माना

नईदिल्ली नई दिल्ली। केंद्र सरकार सोशल मीडिया और इंटरनेट से जुड़े मामलों को लेकर नए नियम बनाने जा रही है। इसके लिए डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 लाया जाएगा। नए बदलाव के अनुसार 18 साल के कम उम्र के बच्चों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की सहमति लेनी होगी। केंद्र ने  डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 के मसौदा नियमों को प्रकाशित किया। MeitY (Ministry of Electronics and Information Technology) ने बताया है कि आम लोग मसौदा पर अपनी राय दे सकते हैं। बता सकते हैं कि क्या बदलाव किए जाने चाहिए। MyGov.in पर जाकर आम लोगों को अपनी राय दर्ज कराने का मौका दिया गया है। 18 फरवरी 2025 के बाद इन सुझावों पर सरकार गौर करेगी। इंटरनेट पर व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग रोकेंगे नए नियम सोशल मीडिया पर दी जाने वाली व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग बढ़ा है। बच्चे इसके शिकार हो रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार सख्त कानून बना रही है। नए नियमों के तहत बच्चों और विकलांग लोगों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए सख्त उपाय किए गए हैं। व्यक्तिगत डेटा संभाल रही संस्थाओं को नाबालिगों से संबंधित किसी भी व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करने से पहले माता-पिता या अभिभावक की सहमति लेनी होगी। सहमति सत्यापित करने के लिए सरकार द्वारा जारी आईडी या डिजिटल पहचान टोकन का इस्तेमाल करना होगा। शैक्षिक संस्थानों और बाल कल्याण संगठनों को नियमों के कुछ प्रावधानों से छूट दी जा सकती है। नए नियमों में इंटरनेट यूजर के अधिकारों को बढ़ाया जाएगा। यूजर अपने डेटा को हटाने की मांग कर सकेंगे। कंपनियों से पारदर्शिता की मांग कर सकेंगे कि उनका डेटा क्यों जुटाया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन करने पर लग सकता है 250 करोड़ रुपए जुर्माना अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या कंपनी नियमों का उल्लंघन करती है तो उसपर 250 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उपभोक्ताओं को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे डेटा जुटाए जाने को चुनौती दे सकें और जवाब मांग सकें कि उसके डेटा का इस्तेमाल किस लिए किया गया है। नए नियम में “ई-कॉमर्स संस्थाएं”, “ऑनलाइन गेमिंग मध्यस्थ” और “सोशल मीडिया मध्यस्थ” जैसे महत्वपूर्ण डिजिटल मध्यस्थों को परिभाषित किया गया है। प्रत्येक के लिए खास दिशानिर्देश दिए गए हैं। मसौदे के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसे मध्यस्थ हैं जो मुख्य रूप से उपयोगकर्ताओं के बीच ऑनलाइन बातचीत सक्षम करते हैं। इसमें सूचना शेयर करना, भेजना और संशोधित करना शामिल है। नए नियमों का पालन हो यह तय करने के लिए सरकार एक डेटा संरक्षण बोर्ड स्थापित करने की योजना बना रही है। यह डिजिटल नियामक निकाय के रूप में काम करेगा।  

यूनियन कार्बाइड का जहरीले कचरे की राख जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव

भोपाल यूनियन कार्बाइड का कचरा जलने से कई तरह की गंभीर बीमारियों की आशंका है।  विशेषज्ञ डॉक्टरों से रासायनिक कचरे(Union Carbide Waste) के जलने से उत्पन्न स्थिति के बारे में जाना। विशेषज्ञों ने कहा, अगर रासायनिक पदार्थ जलता है तो धुआं निकलता है। वैसे अलग-अलग तरह के धुएं होते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। धुएं बनते हैं कैंसर की वजह कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. दिगपाल धारकर के मुताबिक, ‘कुछ धुएं कैंसर का कारण बन सकते हैं। इन्हें कार्सिनोजेनिक धुआं कहा जाता है, जिनमें ऐसे पदार्थ होते हैं जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। तंबाकू के धुएं से फेफड़ों, गले और अन्य प्रकार के कैंसर तो डीजल के धुएं से फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर का खतरा होता है। रासायनिक धुएं में वाष्पशील कार्बनिक यौगिक होते हैं, जो कैंसरकारी हो सकते हैं। कई मामलों में तो सालों बाद भी कैंसर का खतरा रहता है। लोगों को सुझाव दिया जाता हैै कि अगर वे कार्सिनोजेनिक धुएं के संपर्क में आते हैं तो किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।’ कचरे की राख जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव डॉ. पीयूष जोशी(एमडी )के मुताबिक, ‘रासायनिक कचरे की राख को जमीन में डंप करने से दुष्प्रभाव की आशंका रहती है। राख को जमीन में डंप करने से भूमिगत जल के दूषित होने की पूरी आशंका रहती है। पीथमपुर से यशवंत सागर जुड़ा है, बेटमा इलाका भी लगा है, जहां तक प्रभाव हो सकता है। इस तरह का दूषित जल पीने से कैंसर का खतरा रहता है। साथ ही गर्भवती महिला संपर्क में आती है तो गर्भस्थ बच्चा प्रभावित हो सकता है और पैदा होने पर उसमें विकृति की आशंका रहती है। त्वचा रोग का भी खतरा रहता है।’ एक्सपर्ट व्यू डॉ. योगेंद्र व्यास, शिशु रोग विशेषज्ञ व फिटनेस कोच के मुताबिक, ‘पीथमपुर पहुंचा यूनियन कार्बाइड का कचरा(Union Carbide waste) 40 साल पुराना है। इसमें कोई केमिकल बचा नहीं है। विशेषज्ञ एनालिसिस भी कर रहे हैं। भोपाल से पीथमपुर इसलिए आया है, क्योंकि यहां मौजूद रामकी कंपनी इंटरनेशनल होने के साथ वेस्ट मैनेजमेंट का अनुभव भी रखती है। कई लोग बोल रहे हैं कि कचरे से नुकसान होगा व पर्यावरण प्रदूषित होगा। इसके बारे में कहूंगा कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड की 70 एकड़ जमीन है। इसमें से 30 एकड़ पर कई सालों से अतिक्रमण है। वहां लोग रह रहे हैं। उन्हें असर हुआ या नहीं, इसकी स्टडी पहले कर ली जाए। रामकी कंपनी नौ माह में पूरे मापदंड के साथ इसका निष्पादन करेगी। सभी उत्सर्जित गैसों की निगरानी होगी। फिल्टर भी लगा है। इसलिए चिंतित नहीं होना चाहिए।’  

मुख्यमंत्री यादव ने जनभावनाओं का आदर करते हुए पीथमपुर में फिलहाल यूनियन कार्बाइड का कचरा नहीं जलाने का फैसला किया

भोपाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनभावनाओं का आदर करते हुए पीथमपुर में फिलहाल यूनियन कार्बाइड का कचरा नहीं जलाने का फैसला किया है। राजधानी भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र में जमा रासायनिक कचरे को जलाने के लिए पीथमपुर ले जाने पर जनता की ओर से काफी विरोध हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार की देर रात को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बैठक बुलाई और साथ ही ऐलान किया कि सरकार जनता का अहित किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस मामले पर सरकार के रुख की ताजा अपडेट दी। उन्होंने लिखा, “हमारी सरकार ने पीथमपुर घटना के बारे में संज्ञान लिया है। हमारी सरकार जनकल्याणकारी, जनहितैषी तथा जन भावनाओं का आदर करती है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में यूनियन कार्बाइड के कचरे का परिवहन पीथमपुर में किया गया है। “जनभावनाओं का आदर करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष समस्त परिस्थितियों एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के बारे में अवगत कराया जाएगा। इस संबंध में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं राजेंद्र शुक्ला, कैबिनेट के साथी कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, धार विधायक नीना विक्रम वर्मा, मुख्य सचिव सहित उच्च अधिकारियों के साथ अति आवश्यक बैठक ली।” उन्होंने आगे कहा, “मैं जनता से अपील करता हूं कि किसी भी अफवाह या भ्रम की खबरों पर विश्वास नहीं करे। मैं और मेरी सरकार आपके साथ है।” उल्लेखनीय है कि भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र परिक्षेत्र में बीते 40 साल से रासायनिक कचरा जमा था, जिसे न्यायालय के निर्देश पर पीथमपुर ले जाया गया है। इस कचरे को रामकी इंडस्ट्रीज में जलाया जाना है। सरकार की ओर से की गई इस कोशिश का इंदौर सहित पीथमपुर और अन्य स्थानों पर विरोध शुरू हो गया है। पीथमपुर में तो दो युवकों ने आत्मदाह करने तक की कोशिश की। इंदौर तथा आसपास के इलाकों में बढ़ते विरोध को देखते हुए राज्य सरकार ने विभिन्न वर्गों के लोगों के साथ जनप्रतिनिधियों से भी संवाद किया है। सभी को न्यायालय के आदेश के बारे में बताया गया। साथ ही किसी भी तरह का नुकसान न होने का भी दावा किया गया है। मुख्यमंत्री निवास पर शुक्रवार की रात को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में यूनियन कार्बाइड के कचरे के परिवहन एवं पीथमपुर के निकट डंप एवं निष्पादन किए जाने के संबंध में वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ ही विधिवेत्ताओं से विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट के आदेश के परिपालन में यूनियन कार्बाइड का कचरा पीथमपुर पहुंचाने का परिपालन किया गया है। हमने न्यायालय की याचिकाओं और आदेशों के तारतम्य में सुरक्षा मापदंडों का परिपालन करते हुए केवल परिवहन किया है। न्यायालय को 6 जनवरी तक इसकी रिपोर्ट अपेक्षित थी। सुरक्षा के मापदंडों पर किसी प्रकार से कोई खतरा या कोई डर का भाव जनता के बीच आया तो राज्य सरकार यह प्रयास करेगी कि न्यायालय के समक्ष यह विषय प्रस्तुत हो। इसके बाद न्यायालय जैसा आदेश देगा, हम उसका पालन करने के लिए तत्पर रहेंगे। तब तक हम आगे नहीं बढ़ेंगे।  

विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने पहली लिस्ट में 29 उम्मीदवारों के नाम का किया ऐलान, केजरीवाल के सामने होंगे प्रवेश वर्मा

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की पहली लिस्ट जारी हो गई है. बीजेपी ने इस लिस्ट में 29 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है. केजरीवाल के खिलाफ प्रवेश वर्मा को टिकट दिया गया है. वहीं, सीएम आतिशी के खिलाफ रमेश बिधूड़ी को चुनावी मैदान में उतारा गया है. आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले कैलाश गहलोत को भी पार्टी ने बिजवासन सीट से टिकट दिया है. बिजवासन से कैलाश गहलोत को टिकट बीजेपी ने आदर्श नगर सीट से राजकुमार भाटिया, बादली से दीपक चौधरी, रिठाला से कुलवंत राणा, नांगलोई जाट से मनोज शौकीन, मंगोलपुरी सीट से राजकुमार चौहान, रोहिणी से विजेंद्र गुप्ता, शालीमार बाग से रेखा गुप्ता, मॉडल टाउन से अशोक गोयल, करोल बाग से दुष्यंत कुमार गौतम, पटेल नगर से राजकुमार आनंद, राजौरी गार्डन से सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, जनकपुरी से आशीष सूद, बिजवासन सीट से कैलाश गहलोत को टिकट दिया है. कालकाजी से रमेश बिधूड़ी, पटपड़गंज से रवींद्र सिंह नेगी पर भरोसा इसके साथ ही नई दिल्ली से प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, जंगपुरा से सरदार तरविंदर सिंह, मालवीय नगर से सतीश उपाध्याय, आरके पुरम सीट से अनिल शर्मा, महरौली से गजेंद्र यादव, छतरपुर से करतार सिंह तंवर, अंबेडकर नगर से खुशीराम चुनार, कालकाजी से रमेश बिधूड़ी, बदरपुर में नारायण दत्त शर्मा, पटपड़गंज से रवींद्र सिंह नेगी, विश्वास नगर से ओम प्रकाश वर्मा, कृष्णा नगर से अनिल गोयल, गांधीनगर से अरविंदर सिंह लवली, सीमापुरी से कुमारी रिंकू, रोहतास नगर से जितेंद्र महाजन और घोंडा से अजय महावर को चुनावी मैदान में उतारा गया है. इसके अलावा जनकपुरी विधानसभा सीट से आशीष सूद, बिजवासन से कैलाश गहलोत, नई दिल्ली से प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, जंगपुरा से सरदार तरविंदर सिंह मारवाह, मालवीय नगर से सतीश उपाध्याय, आरके पुरम से अनिल शर्मा, महरौली से गजेंद्र यादव, छतरपुर से करतार सिंह तंवर, अंबेडकर नगर (एससी) से खुशीराम चुनार, कालकाजी से रमेश बिधूड़ी, बदरपुर से नारायण दत्त शर्मा, पटपड़गंज से रविंद्र सिंह नेगी, विश्वास नगर से ओम प्रकाश शर्मा, कृष्णा नगर से अनिल गोयल, गांधीनगर से सरदार अरविंद सिंह लवली, सीमापुरी (एससी) से कुमारी रिंकू, रोहतास नगर से जितेंदर महाजन और गोहाना से अजय महावर को उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की लिस्ट पहले ही जारी कर दी है।

सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव ने यूनियन कार्बाइड कचरा निस्तारण मामले में एनजीटी भोपाल में याचिका की दायर

 जबलपुर  नागरिक उपभोक्ता मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव ने यूनियन कार्बाइड कचरा निस्तारण मामले में एनजीटी भोपाल में याचिका दायर की है। यह याचिका शनिवार को दायर की गई, जिस पर शीघ्र सुनवाई की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट में पूर्व से दायर जनहित याचिका पर संज्ञान आधार पर सोमवार को सुनवाई निर्धारित है। इसके साथ इंदौर बेंच में दायर याचिका को संलग्न करके विचार किया जाएगा। इधर सरकार कचरा जलाने हाईकोर्ट से मांगेगी समय मध्य प्रदेश सरकार हाई कोर्ट में शपथ पत्र देकर यूनियन कार्बाइड के कचरे के निस्तारण के लिए समय मांगेगी। इसके लिए जन जागरण को आधार बनाया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि हम पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के अनुसार ही कर रहे हैं। हर स्तर पर संवाद किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार के कोई भ्रम की स्थिति ना रहे। यूनियन कार्बाइड का भी 10 टन कचरा पूर्व में वहां जलाया जा चुका है और उसके जो निष्कर्ष निकलकर सामने आए थे वह सभी मानकों के अनुरूप थे तभी सुप्रीम कोर्ट ने आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। अभी कचरा जलाने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इधर उपभोक्ता मंच के नाजपांडे ने अपनी एनजीटी की याचिका में सवाल उठाया है कि यूनियन कार्बाइड कचरे के निस्तारण में नुकसान नहीं होगा, यह सरकार स्पष्ट करे। यह भी बताए कि कया कार्यवाही नियमानुसार हुई है? सरकार इस सिलसिले में शपथपत्र प्रस्तुत करे। वैज्ञानिक रिपोर्ट भी सार्वजनिक करे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल इस संबंध में निर्देश जारी करें। शपथपत्र के साथ घोषणा करें युनियन कार्बाइड के जहरीले कुचरे के निस्तारण मे भूमि, जल तथा वायु में कोई विपरीत परिणाम नहीं होगा तथा वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 का पालन हुआ, यह शपथपत्र के साथ मुख्य सचिव, मप्र शासन घोषणा करें। आयुक्त, नगर निगम, भोपाल, धार तथा पीथमपुर भी शपथपत्र प्रस्तुत करें कि उस क्षेत्र के लोगों को नुकसान नहीं होगा। नागरिकों के जीवन के अधिकार का संरक्षण होना चाहिए प्रदेश सरकार कचरे के निस्तारण पर वैज्ञानिक रिपोर्ट अखबारों में प्रकाशित कर उसे सार्वजनिक करें। अधिवक्ता प्रभात यादव ने याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया कि नागरिकों के जीवन के अधिकारों का संरक्षण होना चाहिए, इसकी गारंटी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदान की गई है। कचरे के जलने पर लगा ब्रेक, जानिए पूरे मामले की A to Z… भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड का कचरा पीथमपुर में जलाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने फिलहाल इस पर ब्रेक लगा दिया है। सीएम मोहन यादव ने शुक्रवार रात इमरजेंसी बैठक में कहा कि, हाईकोर्ट के सामने सभी परिस्थितियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को रखेंगे। कोर्ट का आदेश आने तक यूनियन कार्बाइड का कचरा नहीं जलाया जाएगा। आइये जानते हैं यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने से लेकर इसे रोकने तक की A to Z कहानी…। दरअसल, साल 2004 में उच्च न्यायालय जबलपुर (Jabalpur High Court ) में आलोक प्रताप सिंह ने जनहित याचिका दायर की। इस याचिका में उच्च न्यायालय से मांग की गयी कि यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन इंडिया लिमिटेड भोपाल परिसर (UCIL) में संग्रहित रासायनिक अपशिष्ट पदार्थों का विनिष्टीकरण किया जाये एवं उस पर होने वाले व्यय कि प्रतिपूर्ति यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन (यूसीसी)/ डॉउ केमिकल से किया जाये। यूनियन कार्बाइड कार्पोरेशन लिमिटेड भोपाल परिसर (UCIL) में बिखरे रासायनिक पदार्थों को जून-2005 में एकत्रित कर एक सुरक्षित शेड में मध्यप्रदेश प्रदूषण निवारण बोर्ड की सुपरविजन में रखा गया। जबलपुर हाई कोर्ट ने 16 दिसंबर 2008 को आदेश पारित कर निर्देश दिये गये कि विनिष्टीकरण की कार्यवाही राज्य शासन द्वारा समय सीमा 6 सप्ताह मे सुनिश्चित की जाये यदि कोई किसी प्रकार व्यवधान पैदा करता है तो अवमानना संबंधी कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। गैस राहत विभाग एवं मध्यप्रदेश प्रदूषण निवारण मण्डल भोपाल द्वारा सीपीसीबी की गाइडलाइन का पालन करते हुए जून-2008 में लाइम स्लज 39.6 एमटी. को सीपीसीबी की गाइडलाइन अनुसार सफलतापूर्वक लैंडफिल टीएसडीएफ, पीथमपुर जिला-धार में किया गया। समय-समय पर कोर्ट द्वारा दिये गये निर्देश सर्वोच्च न्यायालय ने 4 मार्च 2013 को निर्देश दिये कि, 10 मेट्रिक टन हिन्दुस्तान इन्सेक्टीसाइड लिमिटेड प्लांट केरल राज्य में कोचिन से परिवहन कर टीएसडीएफ की पीथमपुर में ट्रायल रन की जाए-केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2013 में सफलतापूर्वक ट्रायल किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल 2014 को निर्देश दिये गये 10 मेट्रिक टन यूनियन कार्बाइड टीएसडीएफ की पीथमपुर में ट्रायल रन की जाए केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 2015 में सफलतापूर्वक ट्रायल किया गया। जबलपुर उच्च न्यायालय 3 दिसंबर 2024 के आदेश में राज्य शासन एवं राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को केमिकल वेस्ट यूनियन कार्बाइड स्थल से पूर्व निर्धारित स्थल पर 4 सप्ताह के भीतर सुरक्षित परिवहन करने के निर्देश दिए गए। विभाग ने की गई कार्यवाही केन्द्रीय प्रदूषण निवारण मण्डल नई दिल्ली द्वारा शेष बचे 337 मेट्रिक टन रासायनिक यूसीआईएल वेस्ट के विनिष्टीकरण के लिए RFP 4 दिसंबर 2017 को तैयार कर सचिव, भारत सरकार, रसायन एवं पेट्रोरसायन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक 5 दिसंबर 2017 को राज्य शासन को उपलब्ध कराया गया है। केन्द्रीय प्रदूषण निवारण मण्डल से प्राप्त RFP का परीक्षण कर निविदा जारी करने के लिए निविदा प्रपत्र तैयार किया। इसके बाद यह काम करने के लिए संचालक गैस राहत एवं पुनर्वास की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय समिति का गठन किया गया। 23 सितम्बर 2021 को निविदा प्रकाशित की गयी जिसमें दो निविदाकारों मेसर्स पीथमपुर इण्डस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट प्राईवेट लिमिटेड, पीथमपुर जिला-धार म.प्र. एवं मेसर्स सेन्चुरी ईको सोल्यूशन प्राईवेट लिमिटेड, बैंगलुरु, कर्नाटक द्वारा निविदा प्रस्तुत की गयी। इस कार्य के लिए पीथमपुर कम्पनी की निविदा उपयुक्त पाई गई। विभाग द्वारा कार्रवाई से पता चला कि, भोपाल में लगभग 358 टन यूनियन कार्बाइड का कचरा निकला है। इसमें 60% से ज्यादा केवल स्थानीय मिट्टी है एवं लगभग 40% सेवन नेपथॉल, रिएक्टररेसीड्यूस और समी प्रोसेस पेस्टीसाइड्स का अपशिष्ट है। सेवन नेपथॉल रेसीड्यूस मूलतः मिथाइल आइसो साइनेट एवं कीटनाशकों के बनने की प्रक्रिया का सह-उत्पाद होता है। इसका जहरीलापन 25 साल में लगभग पूर्तः समाप्त हो जाता है। स्पष्ट है कि घटना को 40 साल बीत चुके हैं, इसलिए बचे हुए कचरे में कोई हानिकारक तत्व नहीं है। विभाग … Read more

क्या शपथ से पहले ट्रंप को होगी जेल? पोर्न स्टार मामले में सुनाई जाएगी सजा; 10 जनवरी को कोर्ट में पेशी

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क के जज जुआन मर्चेन ने शुक्रवार (3 जनवरी) को घोषणा की कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 10 जनवरी 2025 को सजा सुनाई जाएगी, जो उनके शपथ ग्रहण से 10 दिन पहले होगी. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक ये सजा हश मनी के उस मामले से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे दिए थे. इस पर मर्चेन ने संकेत दिया कि वे ट्रंप को जेल की सजा देने के पक्ष में नहीं हैं और बिना शर्त रिहाई की ओर झुकाव दिखाया है. इसका मतलब है कि ट्रंप किसी शर्त के अधीन नहीं होंगे, लेकिन वे दोषी के रूप में व्हाइट हाउस में प्रवेश करेंगे. 78 वर्षीय ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया था, जिनमें 2016 के चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए व्यवसाय रिकॉर्ड में हेराफेरी शामिल है. ट्रंप को चार साल तक की जेल की सजा हो सकती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा. ट्रंप ने इस मामले में अपील करने की योजना बनाई है, जिससे सजा में देरी हो सकती है. ट्रंप के वकीलों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और अन्य न्यायिक निर्णयों के आधार पर खारिज करने की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए कई आधिकारिक कृत्यों के लिए अभियोजन से छूट प्राप्त है. शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को मिल जाएगी छूट हालांकि, न्यायाधीश ने इस तर्क को खारिज कर दिया लेकिन कहा कि शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को अभियोजन से छूट मिल जाएगी. ट्रंप के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने इस सजा के फैसले की आलोचना की और इसे सुप्रीम कोर्ट के प्रतिरक्षा निर्णय का उल्लंघन बताया. चेउंग ने कहा कि यह मामला कभी लाया ही नहीं जाना चाहिए था और इसे तुरंत खारिज किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप तब तक लड़ते रहेंगे जब तक ये सभी मामले खत्म नहीं हो जाते. दो संघीय मामलों का सामना कर रहे ट्रंप ट्रंप अभी भी विशेष वकील जैक स्मिथ द्वारा लाए गए दो संघीय मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन मामलों को न्याय विभाग की नीति के तहत खारिज कर दिया गया, जो एक बैठे राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देती है. ट्रंप पर 2020 के चुनाव परिणामों को पलटने की साजिश और गोपनीय दस्तावेज हटाने के आरोप भी लगे हैं, लेकिन राष्ट्रपति के रूप में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन मामलों को बंद कर दिया जाएगा. राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में कानून अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह नहीं माना है कि राष्ट्रपति को अभियोजन से छूट है. यह अवधारणा न्याय विभाग की व्याख्या पर आधारित है, खासकर उसके कानूनी परामर्शदाता कार्यालय (OLC) की तरफ से दी गई सलाह के तहत. OLC का मानना है कि आपराधिक अभियोग, अभियोजन और सजा राष्ट्रपति पद को अक्षम कर सकते हैं, जिससे राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो सकते हैं. OLC यह भी मानता है कि किसी कार्यरत राष्ट्रपति को इस तरह से अक्षम करना असंवैधानिक होगा. इसके लिए संविधान में महाभियोग या 25वां संशोधन जैसे प्रावधान मौजूद हैं. महाभियोग के माध्यम से राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है, जबकि 25वें संशोधन के तहत किसी अक्षम राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है.

किसानों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के कल्याण को दें सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा कलेक्टर्स को मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान को गति देने और नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर सुव्यवस्था स्थापित करने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में जिला किस तरह अग्रणी हो, इसके लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो। मुख्यमंत्री जनकल्याण अभियान में विभिन्न योजनाओं में अधिक से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य 22 जनवरी तक पूर्ण किया जाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों में कलेक्टर की भूमिका विकास कार्यों और जनकल्याण की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है। समाज के युवाओं, किसानों, महिलाओं और गरीबों के कल्याण के लिए योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला कलेक्टर की पहचान कार्य और जनकल्याण के कार्यक्रमों के श्रेष्ठ क्रियान्वयन के आधार पर ही बनेगी। कुछ क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियों का आवश्यक प्रचार भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किया जाए। इससे अन्य जिलों में अधिकारियों और अन्य सभी को भी ऐसे कार्यों को करने की प्रेरणा मिलेगी। कलेक्टर, देखें रैन बसेरों की व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सर्दी में रैन बसेरों में रहने वाले व्यक्तियों की अच्छी देखभाल सुनिश्चित करें। समय-समय पर रैन बसेरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लें। इसके साथ ही कलेक्टर, थानों का आकस्मिक निरीक्षण भी करें। जिले की घटनाओं पर कलेक्टर की बारीक नजर होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों से संवाद और सम्पर्क में कमी नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा के महत्वपूर्ण सेक्टर्स में जिलों में ऐसे आयोजन हों, जो जिले के महत्व को बढ़ाते हों। टी.बी. रोग नियंत्रण में गतिविधियां बढ़ाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निक्षय अभियान में देश के 347 जिले चिन्हित कर विशेष प्रयास कर क्षय रोग के नियंत्रण का अभियान प्रारंभ किया। यह अभियान आगामी 24 मार्च तक चलेगा। निक्षय अभियान में मध्यप्रदेश में 23 जिले चिन्हित किए गए हैं। प्रदेश में इस अभियान को गति प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के 5 जिले मंदसौर, नरसिंहपुर, मंडला, बैतूल और खंडवा इस अभियान के क्रियान्वयन में शीर्ष पर हैं। इसी तरह टी.बी. रोगियों को फूड-बॉस्केट के वितरण में जबलपुर, नरसिंहपुर, मंदसौर, अनूपपुर और मंडला सबसे आगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि टी.बी. नियंत्रण के कार्य में कलेक्टर विभिन्न नवाचार भी कर सकते हैं। स्वास्थ्य संचालक ने जानकारी दी कि मंदसौर में एक्सरे मशीन की खरीदी, सीहोर में जनप्रतिनिधियों द्वारा एक-एक टी.बी. रोगी की देखभाल का प्रण लेने और उज्जैन एवं नीमच में टी.बी. रोगियों के पंजीयन और उपचार के कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रेडक्रास सोसायटी, एनसीसी और एनएसएस जैसे संगठनों का टी.बी. उन्मूलन अभियान के लिए सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आयुष्मान योजना में निर्धन वर्ग के नागरिकों की सहायता के लिए जिलों में समन्वय पूर्वक सहायता के कार्य किए जाएं। मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया के रोगियों के उपचार के संबंध में कलेक्टर को निर्देशित किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री कार्यालय के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

Pithampur में अभी नहीं जलेगा Union Carbide का कचरा, CM Mohan Yadav का बड़ा फैसला

पीथमपुर पीथमपुर में शुक्रवार को यूनियन कार्बाइड के 337 टन जहरीले कचरे के निस्तारण को लेकर भारी हंगामा हुआ। सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। कई प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह करने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस बल पर पथराव हुआ और माहौल बेकाबू हो गया। हालात बिगड़ने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने देर रात आपात बैठक बुलाई। बैठक में निर्णय लिया गया कि अदालत का आदेश आने तक कचरा नहीं जलाया जाएगा। सीएम ने हाईकोर्ट से और समय मांगने और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही।   हाईकोर्ट से और समय मांगा जाएगा   सरकार ने हाईकोर्ट से कचरे के निस्तारण के लिए 7 जनवरी तक का समय मांगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को अदालत के सामने रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी प्राथमिकता अदालत के आदेश का पालन करना और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बैठक में तय हुआ कि सरकार जनता को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए कोशिश करेगी। इसके साथ ही, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर किसी भी खतरे को रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे।   जहरीले कचरे को लेकर लोगों में नाराजगी धार जिले के पीथमपुर इंडस्ट्रियल एरिया में यूनियन कार्बाइड से जुड़े जहरीले कचरे को जलाने के फैसले से स्थानीय लोग नाराज हो गए हैं। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने हाईवे पर जाम लगाकर अपना विरोध जताया। सड़कों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि दो प्रदर्शनकारियों ने खुद को आग लगाने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कचरा उनके स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक है। पथराव और प्रदर्शन के कारण प्रशासन को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इसके बाद मुख्यमंत्री ने तुरंत बैठक बुलाकर स्थिति को काबू में करने के निर्देश दिए।   मुख्यमंत्री ने बुलाई इमरजेंसी बैठक स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार देर रात उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि अदालत से कचरे के निस्तारण के लिए और समय मांगा जाएगा। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता को किसी प्रकार का नुकसान न हो। सीएम ने कहा कि सरकार जनता की सुरक्षा और पर्यावरण को प्राथमिकता देगी।   जनता की सुरक्षा सबसे ऊपर है मुख्यमंत्री मोहन यादव नेकहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूनियन कार्बाइड का कचरा अदालत के निर्देश के मुताबिक पीथमपुर लाया गया था। हालांकि, अगर इससे जनता के बीच कोई डर है या फिर किसी तरह का खतरा पैदा हो रहा है, तो इसे अदालत के सामने रखा जाएगा। सीएम ने कहा कि जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की।   पार्टी के नेताओं को समझाने की योजना   बैठक में यह भी तय किया गया कि पहले पार्टी के भीतर फैले भ्रम को दूर किया जाएगा। पार्टी अध्यक्ष वीडी शर्मा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वह नेताओं से बातचीत करें। खासकर, नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और धार विधायक नीना वर्मा को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। बैठक में कैलाश विजयवर्गीय और नीना वर्मा ने कहा कि उन्हें पर्यावरण रिपोर्टों और परीक्षणों की जानकारी नहीं दी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित पक्षों को पूरी जानकारी दी जाए।   पुलिस ने दर्ज किए पांच केस   प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के चलते पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज की हैं। धार के एसपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इन मामलों में कुछ आरोपी नामजद हैं, जबकि कुछ अज्ञात हैं। प्रदर्शन के बाद से स्थिति नियंत्रण में है। शनिवार को शहर का जनजीवन सामान्य रहा और फैक्ट्रियों ने काम शुरू कर दिया। हालांकि, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती जारी है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी पूरी है।   कोर्ट के आदेश का पालन जरूरी   सीएम मोहन यादव ने कहा  कि यूनियन कार्बाइड का कचरा कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते  ही पीथमपुर लाया गया था। कचरे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया है। हालांकि, जनता की सुरक्षा सबसे पहले है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में अदालत से और समय मांगा जाएगा ताकि जनता के बीच किसी तरह का भय न रहे। सीएम ने भरोसा जताया कि सरकार अदालत के आदेश और जनता की भलाई के बीच संतुलन बनाए रखेगी।   कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर जनता को गुमराह करने और अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया। सीएम ने कहा कि सरकार ने पर्यावरणीय रिपोर्टों और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह अध्ययन किया है। उन्होंने जनता से अपील की कि किसी भी तरह की भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें। सीएम ने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी है। 

5 जनवरी को राहगीरी के आनंदोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद शामिल होंगे, अपनी-अपनी कलाओं का प्रदर्शन

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के शहर उज्जैन में राहगीरी का आयोजन किया जा रहा है. इस राहगीरी में 5 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद शामिल होंगे, इसलिए लेकर तैयारी शुरू हो रही है. राहगीरी का आयोजन कोरोना काल के पहले उज्जैन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ही शुरू किया था. यह आयोजन नगर निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से होता है. उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने बताया कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करने के उद्देश्य से राहगीरी को शुरू किया गया था.  राहगीरी के माध्यम से स्थानीय खेल को भी काफी बढ़ावा मिलता है.  यह आयोजन उज्जैन का अपना अलग ही आयोजन है. इसे नगर निगम, जिला प्रशासन, आनंद विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है. अभी नहीं आया है CM यादव का अधिकृत कार्यक्रम 5 जनवरी और 19 जनवरी को उज्जैन में कोठी मार्ग पर इसका आयोजन होगा, जिसकी तैयारियां की जा रही है. इस आयोजन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की शामिल होंगे. अभी उनका अधिकृत कार्यक्रम नहीं आया है, लेकिन उन्होंने उज्जैन आगमन की स्वीकृति दी है. राहगीरी का आयोजन 1 किलोमीटर लंबे मार्ग पर होता है इस रविवार को ही आयोजित किया जाता है, ताकि सभी लोगों को शामिल होने का अवसर मिल सके. अपनी-अपनी कलाओं का प्रदर्शन राहगीरी कार्यक्रम में संगीत खेलकूद व्यायाम नृत्य सहित विद्यार्थियों से लेकर बड़ों तक अपनी कला का प्रदर्शन किया जाता है. म्यूजिकल ग्रुप के संयोजक वैभव यादव के मुताबिक आयोजन में लोग बढ़ चढकर हिस्सा लेते हैं. यह आयोजन पिछले कई सालों से उज्जैन में लगातार हो रहा है. इसका एक उद्देश्य कलाकारों को प्लेटफार्म भी उपलब्ध कराना है.

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्री रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ 11 जनवरी, 2025 को मनाई जाएगी

अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के प्रथम वर्षगांठ प्राण प्रतिष्ठा द्वादशी तिथि के अनुसार पौष शुक्ल द्वादशी तदनुसार 11 जनवरी को है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसे “प्रतिष्ठा द्वादशी “ का नाम दिया है। इस अवसर पर 11 जनवरी से 13 जनवरी तक राम मंदिर में चार स्थानों पर तीन दिवसीय आयोजन होंगे। अयोध्या के संत भी होंगे आमंत्रित समारोह में अयोध्या के संतो को आमंत्रित किया जा रहा है। जिसके लिए बैठक की गई और आमंत्रित करने वाले संतो की सूची फाइनल की गई। “प्रतिष्ठा द्वादशी “ के आयोजन पर अंगद टीला पर होने वाले समस्त कार्यक्रमों में सम्पूर्ण समाज को आमंत्रित किया जा रहा है। इसके लिए आमंत्रण पत्र भी बटना शुरू हो गया हैं। यहां आने के लिए आम श्रद्धालुओं को भी सुरक्षा सम्बन्धी कोई बाधा , रोक टोक नहीं होगी और प्रतिदिन भोजन प्रसाद भी सभी के लिए उपलब्ध रहेगा। ट्रस्ट महामंत्री चंपत राय ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का प्रथम वर्ष भारतीय काल गणना के अनुसार मनाया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा पौष शुक्ल द्वादशी (22 जनवरी 2024) को की गई थी । वर्ष 2025 के जनवरी मास में पौष शुक्ल द्वादशी 11 जनवरी को है। इसे “प्रतिष्ठा द्वादशी “ कहा जाएगा, इस अवसर पर चार स्थानों पर तीन दिवसीय आयोजन होंगे। मंदिर परिसर के यज्ञ मण्डप में होंगे आयोजन उन्होंने बताया कि शुक्ल यजुर्वेद मध्यन्दनी शाखा के 40 अध्यायों के 1975 मंत्रो से अग्नि देवता को आहुति दी जाएगी, 11 वैदिक मन्त्रोंच्चार करेंगे| होम का यह कार्य प्रातः काल 8 से 11:00 बजे तक और अपराह्न 2 से सायं 5:00 बजे तक होगा। श्रीराम मंत्र का जप यज्ञ भी इसी कालखंड में दो सत्रों में होगा, 6 लाख मंत्र जप किया जाएगा। इसके अतिरिक्त राम रक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, पुरुष सूक्त, श्री सूक्त, आदित्य हृदय स्तोत्र, अथर्वशीर्ष आदि के पारायण भी होंगे। द्वितीय स्थान मन्दिर के भूतल पर होंगे कार्यक्रम श्री चंपत राय ने बताया कि दक्षिणी दिशा के प्रार्थना मंडप में नित्य अपराह्न 3 से 5 बजे तक भगवान को राग सेवा प्रस्तुत की जाएगी। मंदिर की कोली में नित्य सायं काल 6 से 9:00 बजे तक रामलला के सम्मुख बधाई गान प्रस्तुत होंगे। तृतीय स्थान यात्री सुविधा केंद्र पर होंगे कार्यक्रम श्री चंपत राय ने बताया कि राम मंदिर के यात्री सुविधा केंद्र के प्रथम तल पर तीन दिवसीय संगीतमय मानस पाठ होगा। चतुर्थ स्थान अंगद टीला के मैदान में होंगे कार्यक्रम श्री चंपत राय ने बताया कि अंगद टीला के मैदान पर नित्य अपराह्न 2 से 3:30 बजे तक राम कथा और अपराह्न 3:30 से 5:00 बजे तक मानस पर प्रवचन होंगे। नित्य सायंकाल 5:30 से 7:30 बजे तक अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसी स्थान पर 11 जनवरी को प्रातः काल से भगवान के भोजन प्रसाद का वितरण प्रारंभ होगा|उन्होंने बताया कि अंगद टीला के समस्त कार्यक्रमों में सम्पूर्ण समाज सादर आमंत्रित है। यहां सुरक्षा सम्बन्धी कोई बाधा / रोक टोक नहीं होगी। इन स्थलों पर 11 से 13 जनवरी तक रोज होंगे कार्यक्रम 1- यज्ञ मंडप (मंदिर परिसर) – शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रों से अग्निहोत्र (सुबह 8-11 बजे और दोपहर 2-5 बजे) – छह लाख श्रीराम मंत्र जाप, रामरक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, आदि का पाठ 2- मंदिर भूतल पर कार्यक्रम – राग सेवा (3 से 5 बजे) – बधाई गान (6 से 9 बजे) 3-यात्री सुविधा केंद्र के प्रथम तल पर – संगीतमय मानस पाठ 4- अंगद टीला – रामकथा (2 से 3:30 बजे) – मानस प्रवचन (3:30 से 5 बजे) – सांस्कृतिक कार्यक्रम (5:30 से 7:30 बजे) – भगवान का प्रसाद वितरण (प्रातः काल से)

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज करेंगे चंबल अभयारण्य का भ्रमण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वन्य जीव पर्यटन की दिशा में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। आज शनिवार 4 जनवरी से वन्य-जीव पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव चंबल अभयारण्य का भ्रमण कर चंबल नदी के घड़ियाल अभयारण्य की व्यवस्थाओं का अवलोकन कर पर्यटन सुविधाओं का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रकृति ने मध्यप्रदेश को कई वरदान दिए हैं। सघन वन, वृक्षों की विविधता के साथ ही वन्य-प्राणियों की भी विविधता मध्यप्रदेश में देखने को मिलती है। वनों और वन्य-प्राणियों से मध्यप्रदेश की एक अलग पहचान बनी है। मध्यप्रदेश बाघ, तेंदुआ और घड़ियाल जैसे प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला प्रदेश है। चीता पुनर्स्थापन करने वाला मध्यप्रदेश एक मात्र प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश में ही नहीं पूरे विश्व में सर्वाधिक घड़ियाल चंबल नदी में पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि विश्व में लगभग तीन हजार घड़ियाल हैं, तो इनमें से 85 प्रतिशत चंबल नदी में हैं। करीब चार दशक पहले घड़ियालों की गणना का कार्य शुरू हुआ, जिससे घड़ियालों के इतनी बड़ी संख्या में चंबल में होने की जानकारियां सामने आईं। जनवरी और फरवरी महीने में अनुकूल तापमान का अनुभव कर घड़ियाल पानी से बाहर निकलते हैं और उस वक्त घड़ियालों और मगरमच्छों की गिनती आसानी से हो जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्य-जीव अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है। पर्यटकों में यह चंबल बोट सफारी के नाम से प्रसिद्ध है। यह तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संयुक्त प्रयासों से एक प्रमुख संरक्षण परियोजना है। मध्यप्रदेश में वर्ष 1978 में इसे वन्य-जीव अभयारण्य के रूप में मान्यता दी गई थी। चंबल घड़ियाल वन्य-जीव अभयारण्य का मुख्य उद्देश्य लुप्तप्राय घड़ियाल, लाल मुकुट वाले छत कछुए और लुप्तप्राय गांगेय डॉल्फिन को संरक्षित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह अभयारण्य लगभग साढ़े पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। पहाड़ियों और रेतीले समुद्र तटों से यह धरती भरी हुई है। यह वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है और इसका मुख्यालय मुरैना में है। घड़ियालों और गंगा डॉल्फिनों का निवास स्थान, पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन यहाँ पाए जाते हैं। अन्य जानवर जो (दुर्लभ) श्रेणी में हैं, उनमें मगरमच्छ, चिकने-लेपित ऊदबिलाव, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय भेड़िये हैं, जो संरक्षण सूची की अनुसूची-1 में शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चंबल नदी में कछुआ परिवार की 26 दुर्लभ प्रजातियों में से 08 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें भारतीय संकीर्ण सिर एवं नरम खोल वाला कछुआ, तीन धारीदार छत वाला कछुआ और मुकुटधारी नदी वाला कछुआ शामिल हैं, जो यहां की पहचान है। शीतकाल है घड़ियाल देखने का उपयुक्त समय चंबल में घड़ियाल अभयारण्य देखने के लिए यात्रा का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से जून तक रहता है। शीतकाल में घड़ियाल देखने और यह क्षेत्र घूमने का सबसे अच्छा समय माना गया है। राष्ट्रीय चंबल वन्य-जीव अभयारण्य में प्रकृति को देखने की बहुत सी गतिविधियाँ होती हैं। घड़ियाल, डॉल्फ़िन, अन्य सरीसृप, जल निकायों और सुंदर परिदृश्य की फोटोग्राफी नाव की सवारी से की जा सकती है। यहाँ की घाटियों और नदियों के किनारे पगडंडियों पर चलना प्रकृति को करीब से देखने का मौका देता है। चंबल नदी लगभग एक हजार किलोमीटर लंबी है। पर्यटक चंबल घड़ियाल सफारी अभयारण्य का आनंद उक्त क्षेत्र के निकटवर्ती नगरों में रहवास सुविधा का उपयोग ले सकते हैं।  

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