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गरियाबंद में जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 3 नक्सली ढेर

गरियाबंद छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के इंदागांव थाना क्षेत्र के सोरनामाल जंगल में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. डीआरजी, एसटीएफ और सीआरपीएफ के जवानों ने इस एनकाउंटर में तीन नक्सलियों को मार गिराया है. सर्च ऑपरेशन के लिए कुल तीन सौ सैनिक देर रात निकले थे. ओडिशा के नवरंगपुर से आए सैनिकों ने भी घेराबंदी की है. यह सर्च ऑपरेशन खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किया गया था. पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है कि अब तक तीन नक्सली मारे गए हैं. कब होगा नक्सलवाद का खात्मा? हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने साल 2026 तक पूरी तरह से नक्सलवाद को खत्म करने की बातें कही थीं. इसके बाद से पूरे छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज हो गए हैं. वहीं, केंद्र को मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत की दिशा में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है. जनवरी 2024 से नवंबर तक कुल 257 नक्सलियों को ढेर किया गया. 861 को गिरफ्तार किया गया और 789 नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में लौटे. इसके अलावा 2010 के सर्वाधिक मृत्यु के स्तर 1005 से 90 फीसदी घट कर सितंबर, 2024 तक 96 फीसदी थी. ये चार दशकों बाद साल 2022 में पहली बार मृत्यु की तादाद 100 से कम दर्ज की गई है. साथ ही टॉप 14 नक्सली लीडर न्यूट्रलाइज्ड किया जा चुका है. वहीं, माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में सेक्योरिटी वैक्यूम को खत्म करके साल 2019 से 279 नए कैम्पों की स्थापना द्वारा सुरक्षा ग्रिड का विस्तार किया गया है.

पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाए जाने का विरोध, पुलिस ने किया लाठीचार्ज, आत्मदाह की कोशिश

 पीथमपुर धार जिले के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में भोपाल से लाए गए यूनियन कार्बाइड के कचरा का विरोध बढ़ता जा रहा है. इसके विरोध में पहले से घोषित आज बंद को व्यापक समर्थन मिला रहा है. विरोध में दो प्रदर्शनकारियों ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली. फिलहाल उन्हें इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.   दरअसल, शुक्रवार सुबह से ही पीथमपुर के बाजार बंद हैं. चाय पानी की दुकानें बंद रखकर रहवासियों ने इस बंद को समर्थन दिया है. यहां छोटी-छोटी दुकानें भी बंद हैं.   इधर, कुछ बंद समर्थकों ने धनगड, बस स्टैंड और आजाद चौक पर पहुंचकर सड़कें जाम करने का प्रयास किया था. लेकिन वहां पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से झड़प हुई. पुलिस ने कुछ बंद समर्थकों पर लठियां चलाईं, हल्का बल प्रयोग कर उन्हें समझाइश देकर रवाना किया.   वहीं, गुरुवार से आमरण अनशन पर बैठे संदीप रघुवंशी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. जबकि सैलाना विधायक कमलेश डोडियार भी धरना स्थल पर ही मौजूद हैं. सैलाना MLA कमलेश डोडियार भी प्रदर्शन में शामिल हालांकि, औद्योगिक क्षेत्र में कारखाने चालू हैं. कर्मचारी और मजदूरों के आवागमन में कोई बाधा नहीं हो रही है. बसों का संचालन भी हो रहा है. क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा धार के लाठीचार्ज पर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेर लिया है. एमपी कांग्रेस ने पूछा है, ”क्या मध्यप्रदेश में लोकतंत्र शेष है या नहीं? पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का जहरीले कचरा जलाने का विरोध करने पर लाठी, MPPSC के खिलाफ आंदोलन पर युवाओं को जेल. इस सरकार ने विरोध को केवल दमन करना सीख लिया है! मोहन सरकार के अराजक राज में हक अधिकार की बात करना दुश्वार है.” कांग्रेस राजनीति कर रही: डिप्टी CM धार में यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर हुए लाठीचार्ज पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कचरा अब हानिकारक नहीं है और घटना के 25 साल बाद भी इसका असर खत्म नहीं हुआ है. पीथमपुर में भी कचरे को जलाने से कोई नुकसान नहीं है, इसलिए वहां के लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है. कांग्रेस यूनियन कार्बाइड के नाम पर राजनीति कर रही है. 337 टन जहरीला कचरा भोपाल से भेजा गया 250 किमी दूर भोपाल गैस कांड के 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन जहरीला कचरा गुरुवार तड़के इंदौर के पास स्थित पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में पहुंचा दिया गया. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जहरीले अपशिष्ट को 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की अपशिष्ट निपटान इकाई में भेजा गया. एक निजी कंपनी द्वारा संचालित इस यूनिट के आस-पास बड़ी तादाद में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. डधर, स्थानीय नागरिक समूहों ने यूनियन कार्बाइड कारखाने के जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट नहीं किए जाने की मांग को लेकर इस औद्योगिक कस्बे में विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है. करीब 1.75 लाख की आबादी वाले पीथमपुर में शुक्रवार को बंद का आह्वान भी किया गया है. नागरिकों ने जहरीले कचरे को पीथमपुर में नष्ट किए जाने से इंसानी आबादी और पर्यावरण पर दुष्प्रभावों की आशंका जताई है. प्रदेश सरकार ने इस कचरे के सुरक्षित निपटान के पक्के इंतजामों का भरोसा दिलाते हुए हुए इन आशंकाओं को खारिज किया है. दरअसल, पीथमपुर धार लोकसभा क्षेत्र में आता है. इस क्षेत्र की लोकसभा में नुमाइंदगी करने वाली सावित्री ठाकुर केंद्र सरकार में महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री हैं. ठाकुर ने बताया कि हम जन प्रतिनिधि राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक पीथमपुर के नागरिकों का पक्ष पहुंचाएंगे और मुख्यमंत्री से उचित कदम उठाए जाने का आग्रह किया जाएगा. पीथमपुर, राज्य के प्रमुख शहर इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर है. इंदौर के नागरिक भी यूनियन कार्बाइड कारखाने का जहरीला कचरा पीथमपुर में जलाए जाने का विरोध कर रहे हैं. इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मांग की है कि इस कचरे को पीथमपुर में नष्ट किए जाने की योजना पर फिर से विचार किया जाना चाहिए और इस सिलसिले में राज्य सरकार की ओर से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की जानी चाहिए। बता दें कि भोपाल में 2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था. इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे. इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक आपदाओं में से एक माना जाता है. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने तीन दिसंबर को इस कारखाने के जहरीले कचरे को स्थानांतरित करने के लिए चार सप्ताह की समय-सीमा तय की थी और सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्यवाही की जाएगी. राज्य के गैस राहत और पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि पीथमपुर की अपशिष्ट निपटान इकाई में शुरुआत में कचरे के कुछ हिस्से को जलाकर देखा जाएगा और इसके ठोस अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि पता चल सके कि इसमें कोई हानिकारक तत्व तो बचा नहीं रह गया है. उन्होंने बताया कि भस्मक में कचरे के जलने से निकलने वाले धुएं को चार स्तरों वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा ताकि आस-पास की वायु प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया के पल-पल का रिकॉर्ड रखा जाएगा.  कचरे के भस्म होने और हानिकारक तत्वों से मुक्त होने के बाद इसके ठोस अवशेष (राख) को दो परतों वाली मजबूत ‘मेम्ब्रेन’ (झिल्ली) से ढक कर ‘लैंडफिल साइट’ में दफनाया जाएगा ताकि यह अपशिष्ट किसी भी तरह मिट्टी और पानी के संपर्क में न आ सके.  

नए साल में PM मोदी का झुग्गीवासियों को दिया शानदार तोहफा, 1675 लोगों को सौंपी उनके सपनों की चाबी

नई दिल्ली ‘जहां झुग्गी-वहां मकान’ वाले वादे को पूरा करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने दिल्ली में 1600 से अधिक गरीबों को शानदार फ्लैट बनाकर दिया है। दिल्ली के अशोक विहार फेज-II में 1675 ईडब्ल्यूएस फ्लैट लाभार्थियों को दिए गए हैं। शानदार इमारत और लिफ्ट समेत तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस फ्लैट्स को देखकर वे लोग चौंक गए जिनके नाम इन्हें आवंटित किया गया है। दिल्ली के अशोक विहार में स्वाभिमान अपार्टमेंट में बनाए गए इन फ्लैट्स को देखने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुंचे। उन्होंने फ्लैट्स और अपार्टमेंट में जाकर सुविधाओं का जायजा लिया। उत्तर पश्चिम दिल्ली के अशोक विहार में ‘स्वाभिमान अपार्टमेंट’ नाम से यह आवासीय परियोजना बनाई गई है। केंद्र सरकार ने एक फ्लैट के निर्माण पर 25 लाख रुपये खर्च किए हैं, पात्र लाभार्थी कुल राशि का सात प्रतिशत से कम भुगतान करेंगे, जिसमें मामूली योगदान के रूप में 1.42 लाख रुपये और रखरखाव के पांच साल के लिए 30,000 रुपये शामिल हैं। फ्लैट लाभार्थियों के साथ पीएम मोदी डीडीए अधिकारियों ने कहा कि 400 वर्ग फुट क्षेत्र के 1,675 ईडब्ल्यूएस फ्लैट को जहां झुगी वहीं मकान योजना के तहत झुग्गी वासियों का पुर्नविकास किया गया है। इनकी कुल लागत 421.81 करोड़ रुपये है। प्रत्येक फ्लैट में दो कमरे, एक रसोईघर, एक बाथरूम, एक शौचालय और एक बालकनी शामिल है। फ्लैटों का निर्माण नवीनतम MIVAN तकनीक का उपयोग करके किया गया है। जहां इमारतों के सभी घटक कंक्रीट से बने हैं। प्रत्येक टावर आठवीं मंजिल पर लिफ्ट और एक खुले मनोरंजन स्थान से सुसज्जित है। इन फ्लैटों में सामुदायिक हॉल, चार दुकानें, आंगनवाड़ी कक्षाएं, डॉक्टर क्लिनिक और बच्चों के डेकेयर सेंटर जैसी सुविधाएं भी हैं। बेसमेंट पार्किंग 11 हजार से अधिक वर्ग मीटर के क्षेत्र में उपलब्ध है और सतही पार्किंग के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के साथ, परियोजना स्थल के अंदर 9,200 वर्ग मीटर का हरित स्थान भी प्रदान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार इस अपार्टमेंट में ट्रिपल जल आपूर्ति प्रणाली है। पीने योग्य पानी, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। गैर-पीने योग्य पानी की आवश्यकताओं को उपचारित भूमिगत जल और एसटीपी से उपचारित जल से पूरा किया जाएगा। निवासियों की सुरक्षा के लिए साइट के चारों ओर एक चारदीवारी भी बनाई गई है।

सौरभ शर्मा पर रेड के बाद RTO में बड़ा फेरबदल, परिवहन आयुक्त समेत 3 IPS अधिकारियों का ट्रांसफर

भोपाल  मध्य प्रदेश में करोड़ों की संपत्ति के ज़ब्ती के बाद परिवहन विभाग में बड़ा फेरबदल हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया है। यह कार्रवाई पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के बाद हुई है। इसमें परिवहन आयुक्त डी.पी. गुप्ता भी शामिल हैं। भोपाल में हुई छापेमारी के बाद राज्य के परिवहन विभाग पर सवाल उठ रहे थे। इसके चलते 1994 बैच के IPS अधिकारी डी.पी. गुप्ता को ADG पुलिस मुख्यालय (PHQ) नियुक्त किया गया है। गुप्ता फरवरी 2024 में परिवहन आयुक्त बने थे। उनकी जगह 1988 बैच के IPS अधिकारी विवेक शर्मा को नया परिवहन आयुक्त बनाया गया है। विवेक शर्मा पहले PHQ प्लानिंग में ADG थे। इसके अलावा ADG योगेश चौधरी को PHQ प्लानिंग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह तबादले सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की अधिसूचना के बाद हुए हैं। करोड़ों की सपत्ति मिलने के बाद उठने लगे थे सवाल पूर्व RTO कांस्टेबल सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर ED, आयकर विभाग और लोकायुक्त की SEP ने छापेमारी की थी। इन छापेमारियों में करोड़ों की संपत्ति बरामद हुई है। इसके बाद परिवहन विभाग पर सवाल उठने लगे थे। इन छापेमारियों के बाद ही यह तबादले हुए हैं। इससे साफ़ है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। लावारिस गाड़ी में मिला था 52 किलो सोना लोकायुक्त ने पिछले हफ्ते छापेमारी में सौरभ शर्मा के पास से 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति बरामद की थी। इसमें 2.87 करोड़ रुपये नकद और 235 किलो चांदी शामिल थी। साथ ही कई रियल एस्टेट निवेश दस्तावेज और एक नकदी गिनने की मशीन भी ज़ब्त की गई। इसके बाद आयकर विभाग ने एक और छापेमारी में भोपाल में एक छोड़ी हुई SUV से 40 करोड़ रुपये के 52 किलो सोने के बिस्कुट और 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद की। यह SUV शर्मा के करीबी सहयोगी चेतन सिंह गौड़ के नाम पर रजिस्टर्ड थी। हालांकि आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है, लेकिन अधिकारियों को शक है कि यह बरामदगी शर्मा से जुड़ी है। ईडी ने भी दर्ज किया है मामला लोकायुक्त की FIR के बाद ED ने शर्मा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। पिछले शुक्रवार को भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में छापेमारी की गई। ED ने कई जगहों से वित्तीय दस्तावेज, संपत्ति और लैपटॉप व कंप्यूटर से इलेक्ट्रॉनिक डेटा जब्त किया है। सौरभ शर्मा 2015 में अनुकंपा के आधार पर परिवहन विभाग में कांस्टेबल के पद पर नियुक्त हुए थे। उनके पिता सरकारी डॉक्टर थे, जिनकी मृत्यु के बाद उन्हें यह नौकरी मिली थी। शर्मा ने 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। मां, पत्नी और साले के नाम पर करोड़ों की संपत्ति अधिकारियों का आरोप है कि शर्मा ने भ्रष्ट तरीकों से संपत्ति अर्जित की। उन्होंने अपनी माँ, पत्नी, साली और करीबी सहयोगी चेतन गौड़ और शरद जयसवाल के नाम पर एक स्कूल और एक होटल भी बनाया। शर्मा के घर और दफ्तर से जब्त किए गए दस्तावेजों से करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चलता है। इससे पता चलता है कि उनके पास बड़ी मात्रा में नकदी आ रही थी। हालांकि, हो सकता है कि शर्मा को बड़ी मात्रा में नकदी के समय के साथ खराब होने की चिंता रही हो, जिसके कारण उन्होंने कीमती धातुओं को तरजीह दी। आने वाले समय में होगा बड़ा खुलासा इस पूरे मामले से मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एक साधारण कांस्टेबल इतनी बड़ी संपत्ति कैसे बना सकता है, यह जांच का विषय है। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की उम्मीद है। सरकार की इस कार्रवाई से यह संदेश ज़रूर जाएगा कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने संस्था के विकास हेतु 50 लाख रुपए देने की घोषणा की

रायपुर कोई भी देश तभी मजबूत रह सकता है जब उसकी बुनियाद मजबूत हो। हमारे देश की बुनियाद हमारी सनातन परंपराओं में है। सनातन परंपरा हमें वसुधैव कुटुम्बकं की सीख देती है और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती है। अपने देश और राज्य की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को भी सनातन परंपरा के वही संस्कार प्रदान करें जो हमें अपने शिक्षकों और अभिभावकों से मिले हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर के समीप ग्राम कंगोली में वेदमाता गायत्री महाविद्यालय के भूमिपूजन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गायत्री मंत्र हमारी सनातन परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है। यह मंत्र हमें सन्मार्ग की ओर चलने के लिए प्रेरित करता है। विद्या भारती संस्थान में विद्यार्थियों को श्रेष्ठ शिक्षा के साथ-साथ देशभक्ति के संस्कार भी दिए जा रहे हैं।  मुख्यमंत्री साय ने  कहा कि मानव जीवन में शिक्षा का विशेष महत्व है और इसी ध्येय के साथ प्रदेश सरकार शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास पर भी जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम जैसी उच्च स्तरीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान उपलब्ध हैं। इसके अलावा राज्य में 341 पीएम स्कूल स्थापित किए गए हैं जहां गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही प्रदेश के विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं और अनुकूल वातावरण प्रदान करने नालंदा परिसर भी बड़े शहरों में स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति और दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी के लिए बनाए गए यूथ हॉस्टल के संबंध में भी जानकारी दी। कार्यक्रम को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरूण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा ने भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री साय ने विद्याभारती संस्था के विकास के लिए 50 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। इस अवसर पर लोकसभा क्षेत्र कांकेर के सांसद भोजराज नाग ने विद्याभारती संस्था के प्रदेश में स्थित विभिन्न संस्थाओं के विकास के लिए सांसद निधि से हर वर्ष एक करोड़ रूपए दिए जाने तथा जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह ने जगदलपुर स्थित संस्था के विकास के लिए 10 लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्रदाय करने की घोषणा की। कार्यक्रम में संस्था प्रमुख राजबहादुर सिंह राणा, संस्थान के महामंत्री नरेन्द्र तनेजा एवं रामदत्त चक्रधर ने संस्था के उद्देश्यों और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री साय ने सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित यज्ञ में सम्मिलित होकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधानपूर्वक आहुति दी और बस्तर सहित प्रदेशवासियों की प्रगति व खुशहाली के लिए कामना की। उन्होंने प्रांगण में सागौन के पौधे रोपे। इस अवसर पर दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, विद्यालय के आचार्यगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थीगण उपस्थित थे।

यूका के कचरे का पीथमपुर से दिल्ली तक विरोध, पीथमपुर और सागौर में आज शहर बंद का ऐलान

महू-पीथमपुर पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड कचरा जलाने का विरोध दिन पर दिन तेज हो रहा है। गुरुवार तड़के कचरा पहुंचने के बाद विरोध में अब एकता नजर आने लगी है। साथ ही विरोध के स्वर भी मुखर हो रहे हैं। पीथमपुर के छत्र छाया गेट के सामने प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम करने का प्रयास भी किया। गुरुवार को विरोध रैली के बाद शुक्रवार को पीथमपुर बंद का आह्वान किया गया था। जिसके चलते शुक्रवार सुबह से ही पूरा पीथमपुर बंद है। सभी बाजार, मोहल्ले व मुख्य सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। बंद के समर्थन में पीथमपुर के उद्योगों ने भी अपने उद्योग बंद कर दिए हैं। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का जहरीला कचरा नष्ट करने के लिए पीथमपुर लाया गया है। जिसे रामकी एनवायरो कंपनी में नष्ट किया जाएगा। इसे लेकर पीथमपुर से दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन हो रहा है। पीथमपुर में लोगों और विभिन्न संगठनों ने कचरा यहां जलाए जाने के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। करीब 40 युवा तो अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। इधर, पीथमपुर बचाओ समिति ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। 3 जनवरी को पीथमपुर बंद का ऐलान किया गया है। स्थानीय नेताओं बंद के समर्थन के लिए घर-घर जाकर लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की है। इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पीथमपुर में यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने का विरोध करने वाले लोगों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संगठनों के साथ बैठक की है। मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि मेरी सीएम से बात हुई है। सरकार जवाबदेही से काम कर रही हैं। पहले भी हुआ था चक्काजाम करने का प्रयास इसके साथ ही पुलिस भी पूरे पीथमपुर के हर क्षेत्र में नजर बनाए रखी हुई है। शुक्रवार को दो तीन जगह विरोध के रूप में कुछ लोगों ने चक्काजाम करने का प्रयास किया था। हालांकि पुलिस की मौजूदगी के कारण चक्काजाम का प्रयास सफल नहीं रहा। सभी छोटी से लेकर बड़ी दुकानें व होटलें भी पीथमपुर में बंद हैं। इसी तरह सागौर में भी सुबह से ही सभी व्यापार व दुकानें बंद रहीं। विरोध शांतिपूर्ण रूप से हो इसके लिए पीथमपुर में हर जगह पर पुलिस तैनात की गई है।   सीएम बोले- यूनियन कार्बाइड के कचरे पर राजनीति न करें इससे पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सारे सुझावों के बाद हमने भोपाल से यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा पीथमपुर भिजवाया है। इस घटना को 40 साल हो चुके हैं। ऐसे में स्वाभाविक रूप से कई सारी आशंकाओं का अपने आप में उत्तर मिल जाता है। इसलिए इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा-

प्रदेश पर्याप्त बिजली उपलब्धता के साथ आगे बढ़ रहा, उपलब्ध क्षमता 23788 मेगावॉट हुई

भोपाल प्रदेश हर बिजली उपभोक्ता को सतत एवं निर्वाध विद्युत आपूर्ति करने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश पर्याप्त बिजली उपलब्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश की रिकार्ड विद्युत उपलब्ध क्षमता 23 हजार 788 मेगावॉट है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में विभाग लगातार उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के साथ ही उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण भी कर रहा है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि दिसम्बर-2023 से नवंबर-2024 तक कुल 10136 करोड़ यूनिट बिजली दी गई, जो कि विगत वर्ष इस अवधि में प्रदाय की गई बिजली से 1.67 प्रतिशत अधिक है। गत 20 दिसम्बर को इतिहास में आज तक की सर्वाधिक 18913 मेगावॉट बिजली आपूर्ति सफलतापूर्वक की गई। मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा ड्रोन की सहायता से लाइनों की पेट्रोलिंग तथा अति उच्च दाव उप केन्द्रों का रिमोट ऑपरेशन किया जा रहा है। प्रदेश के घरेलू एवं कृषि उपभोक्ताओं को विगत वर्षों की तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिये लागू टैरिफ दरों में राहत देने के लिये बिजली कंपनियों को अनुमानित 24 हजार 420 करोड़ 8 लाख रूपये की सब्सिडी देने का निर्णय राज्य शासन द्वारा लिया गया है। यह सब्सिडी अटल गृह ज्योति योजना, अटल कृषि ज्योति योजना, टैरिफ सब्सिडी और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में दी जायेगी। अटल गृह ज्योति योजना में दिसम्बर-23 से नवंबर-24 तक लगभग 5482 करोड़ रूपये की, अटल कृषि योजना में 13042 करोड़ रूपये और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में 4710 करोड़ रूपये की राहत दी गई है। अटल गृह ज्योति योजना में प्रति माह एक करोड़ से अधिक, अटल कृषि ज्योति योजना में 26 लाख 59 हजार और नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना में 9 लाख 3 हजार कृषि उपभोक्ता प्रति माह लाभान्वित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृहों द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में अब तक का सर्वाधिक 28627 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन का नया रिकार्ड बनाया गया है। यह पॉवर जनरेटिंग कंपनी के इतिहास का सर्वाधिक ताप विद्युत उत्पादन है। ताप विद्युत गृहों द्वारा विभिन्न मापदंडों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया गया। ताप विद्युत गृहों का इस दौरान प्लांट लोड फेक्टर (पीएलएफ) 60.3 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2019-20 के पश्चात् सर्वाधिक है। वित्तीय वर्ष 23-24 के दौरान 13 थर्मल इकाइयों ने लगातार 100 दिनों एवं अधिक सतत् व निर्बाध विद्युत उत्पादन किया, जिनमें से दो इकाइयों ने 200 दिनों से अधिक समय तक विद्युत उत्पादन किया। प्रदेश में बिजली अधोसंरचना का लगातार विकास हो रहा है। वर्तमान में 33 के.वी. लाइंस 61 हजार 162 किलोमीटर हो गई है। 33 के.वी. लाइंस वर्ष 2003 में 29 हजार 70 किलोमीटर, वर्ष 2008 में 33 हजार 913 , वर्ष 2011 में 38 हजार 867, वर्ष 2013 में 41 हजार 528, वर्ष 2014 में 43 हजार 910 और वर्ष 2024 में 61 हजार 162 किलोमीटर हो गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में मार्च 2024 तक 3165 किलोमीटर 11 केव्ही लाइन का विस्तार किया गया है। यह क्रम लगातार जारी है। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई ने 210 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट को लगातार 300 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। यह विद्युत यूनिट की स्थापना के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी तरह श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया (एसएसटीपीपी खंडवा) के अभियंताओं और कार्मिकों ने एक बार फिर कमाल दिखाते हुए 660 मेगावाट स्थापित क्षमता की यूनिट नंबर 3 को 200 दिन तक संचालित करने में सफलता हासिल की है। बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिये अधोसंरचना निर्माण के उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। ट्रांसमिशन व्यवस्था मजबूत करने के लिये वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14 अति उच्चदाब उप केन्द्रों की स्थापना की गई है। साथ ही 26 अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मर ऊर्जीकृत किये गये हैं। कुल 818.170 सर्किट किलोमीटर अति उच्चदाब लाइन का निर्माण भी किया गया है। यही नहीं 25 अतिरिक्त अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मर की स्थापना एवं 40 अति उच्चदाब पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर अति उच्चदाब उप केन्द्रों की क्षमता में 4630 एमव्हीए की वृद्धि भी की गई है। किसानों को शीघ्र स्थायी सिंचाई पंप कनेक्शन दिये जाने के उद्देश्य से स्वयं का ट्रांसफार्मर लगाये जाने की योजना लागू की गई है। योजना में किसान स्वयं अथवा समूह में निर्धारित मापदंड के अनुसार ट्रांसफार्मर स्थापित कर सकते हैं। योजना में नवंबर 2024 तक एक लाख 40 हजार 101 ट्रांसफार्मर स्थापित किये जा चुके हैं। प्रदेश में औद्योगिक व उच्च दाब (एचटी) विद्युत उपभोक्ताओं, निम्न दाब (एलटी) औद्योगिक और गैर घरेलू उपभोक्ताओं (जिनका लोड 10 किलोवाट से अधिक है) के लिए नये विद्युत टैरिफ में दिन के समय में (सौर ऊर्जा अवधि के घंटों के दौरान) सुबह 9 से शाम 5 बजे तक की गयी खपत पर ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट तथा शाम 5 से रात्रि10 बजे के दौरान की गयी ऊर्जा खपत पर 20 प्रतिशत का सरचार्ज लागू किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को दिन के समय खपत करने पर उनके विद्युत देयकों में कमी आयी है, साथ ही उच्चतम मांग अवधि के दौरान कोयला आधारित विद्युत की मांग पर नियंत्रण हो रहा है। उन्होंने बताया है कि विद्युत वितरण कंपनियों की इस योजना से प्रदेश के कुल 10025 औद्योगिक एवं उच्च दाब उपभोक्ता लाभान्वित हुए हैं। इनको प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा अप्रैल से अब तक 310 करोड़ 66 लाख रूपए का रिबेट प्रदान किया गया है।

भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में

मुंबई  भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। हिंदू बिजनसलाइन की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अंबानी ने रिलायंस जियो के आईपीओ की तैयारियां शुरू कर दी है। कंपनी का आईपीओ 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक इसमें ऑफर ऑफ सेल के साथ-साथ ताजा शेयर भी जारी किए जाएंगे। यह आईपीओ साल की दूसरी छमाही में आ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया पिछले साल 27,870.16 करोड़ रुपये का आईपीओ लाई थी जो देश में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस जियो के आईपीओ के लिए प्री-आईपीओ प्लेसमेंट पर शुरुआती बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी है। इनवेस्टमेंट बैंकर्स का कहना है कि यह इश्यू बड़ा हो सकता है और इसमें सब्सक्रिप्शन की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। प्री-प्लेसमेंट की राशि इस बात पर निर्भर करेगी कि इसमें फ्रेश इश्यू का साइज क्या होगा। ओएफएस और फ्रेश इश्यू का हिस्सा कितना होगा, इस पर अभी फैसला नहीं हुआ है। इस बारे में रिलायंस को भेजे ईमेल का कोई जबाव नहीं आया। किस-किस की है हिस्सेदारी सूत्रों का कहना है कि रिलायंस जियो के आईपीओ में ओएफएस कंपोनेंट अहम होगा क्योंकि इससे कई मौजूदा निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का मौका मिलेगा। कंपनी में विदेशी निवेशकों की 33 फीसदी हिस्सेदारी है। रिलायंस ने साल 2020 में अबू धाबी इनवेस्टमेंट फंड, केकेआर, मुबादला और सिल्वर लेक जैसे विदेशी फंड्स से 18 अरब डॉलर जुटाए थे। कई ब्रोकरेज का कहना है कि रिलायंस जियो की वैल्यूएशन 100 अरब डॉलर हो सकती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कंपनी की नजर 120 अरब डॉलर की वैल्यूएशन पर है। अंबानी एआई सेक्टर में भी बड़ा दांव खेल रहे हैं। एआई लेंग्वेज मॉडल विकसित करने के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में एनवीडिया से हाथ मिलाया है। टेक के साथ-साथ एआई पुश से रिलायंस जियो दूसरी स्टार्टअप कंपनियों से आगे निकल सकती है। कंपनी को सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज शुरू करने के लिए भी रेगुलेटरी मंजूरी मिल गई है। रिलायंस ने अपने टेलीकॉम, इंटरनेट और डिजिटल बिजनस को मजबूत करने के लिए पिछले पांच साल में अधिग्रहण पर 3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। अक्टूबर के अंत तक कंपनी के 46 करोड़ सब्सक्राइबर थे। पिछले साल जून में कंपनी ने टैरिफ बढ़ाया था जिसके कारण उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या में गिरावट आई है। लेकिन इसके बावजूद वह नंबर 1 बनी हुई है। टैरिफ बढ़ाने से सितंबर तिमाही में कंपनी के मुनाफे में काफी तेजी आई है। इसे लिस्टिंग से पहले 5जी सर्विसेज को मॉनीटाइज करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी अब आखिरी दौर में, मेट्रो का परिचालन शुरू होते ही शहर की ट्रैफिक व्यवस्था एक नई उपलब्धि हासिल कर लेगी

इंदौर  इंदौर में जल्द ही मेट्रो ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। मेट्रो रेल परियोजना के वाणिज्यिक परिचालन को अब मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की हरी झंडी का इंतजार है और सब कुछ ठीक रहा, तो शहर में इस महीने या अगले महीने से मेट्रो रेल दौड़ना शुरू कर सकती है। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सीएमआरएस की हरी झंडी का इंतजार उन्होंने बताया कि एमपीएमआरसीएल द्वारा सीएमआरएस को जरूरी दस्तावेज जमा किए जाने का काम अंतिम दौर में है और इसके बाद सीएमआरएस का दल मेट्रो रेल के डिपो और स्टेशनों के निरीक्षण की तारीख तय करके सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेगा। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद सीएमआरएस की हरी झंडी मिलने की स्थिति में शहर में मेट्रो रेल का वाणिज्यिक परिचालन इस महीने या फरवरी से शुरू हो सकता है। शुरुआत में चलाई जाएगी तीन डिब्बों की मेट्रो ट्रेन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुरुआत में तीन डिब्बों की मेट्रो ट्रेन चलाई जाएगी. यात्रियों की संख्या बढ़ने पर मेट्रो में तीन अतिरिक्त डिब्बे जोड़ दिए जाएंगे. डिब्बों को बढ़ाने का फैसला यात्रियों की तादाद पर निर्भर होगा. बताया जा रहा है कि मेट्रो ट्रेन के एक डिब्बे में 300 यात्री सफर करेंगे और सीट पर बैठने वाले 50 यात्री शामिल हैं. इंदौर में 7500 करोड़ की लागत वाली मेट्रो ट्रेन परियोजना के पहले चरण नींव 14 सितंबर 2024 को रखी गई थी.  शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लंबा मेट्रो ट्रेन का गलियारा का बनाया जाना है. मेट्रो ट्रेन के चलने की खबर से इंदौर वासी उत्साहित हैं. अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में शहर के गांधी नगर स्टेशन से सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-तीन के बीच 5.90 किलोमीटर के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कॉरिडोर पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर पर मेट्रो रेल प्रायोगिक परीक्षण (ट्रायल रन) सितंबर 2023 में किया गया था। बहरहाल, जानकारों का कहना है कि इस मार्ग पर छितराई आबादी के कारण मेट्रो रेल को शुरुआत में यात्रियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। छह डिब्बों की ट्रेन दौड़ेगी एमपीएमआरसीएल अधिकारी ने कहा, ‘‘शहर में एक बार मेट्रो रेल शुरू हो जाने और इसके मार्ग की लम्बाई बढ़ने के बाद यात्रियों की कोई कमी नहीं होगी।” अधिकारी ने बताया कि शहर में मेट्रो रेल के स्टेशन इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि इनके जरिये छह डिब्बों की रेल चलाई जा सकती है। उन्होंने हालांकि बताया,‘‘शुरुआत में हम तीन डिब्बों की रेल चलाएंगे। यात्रियों की तादाद बढ़ने पर इसमें तीन और डिब्बे जोड़े जा सकते हैं।’’ अधिकारी ने बताया कि मेट्रो रेल के एक डिब्बे में करीब 300 यात्री सफर कर सकते हैं जिनमें सीट पर बैठने वाले 50 लोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में 7,500. 80 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण की नींव 14 सितंबर 2019 को रखी गई थी। इसके तहत शहर में गोल आकार वाला करीब 31.50 किलोमीटर लम्बा मेट्रो रेल गलियारा बनाया जाना है।

2023-24 में लड़कियों के स्कूली नामांकन में 16 लाख की कमी, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज

नई दिल्ली भारत में स्कूलों जाने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल 2023-24 में करीब 37 लाख छात्रों ने स्कूली पढ़ाई छोड़ी दी है, जिनमें 16 लाख लड़कियां शामिल हैं. साल 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में स्कूली छोड़ने वाली छात्रों की संख्या अधिक है. शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE) की एक रिपोर्ट में यह डेटा में सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में कुल 25.17 करोड़ छात्र स्कूलों में नामांकित थे, जबकि 2023-24 में यह संख्या घटकर 24.80 करोड़ रह गई और 2021-2022 में करीब 26.52 करोड़ था. इसके अनुसार, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट आई है. इस तरह2023-24 में लड़कियों के नामांकन में 16 लाख की कमी आई, जबकि लड़कों के नामांकन में 21 लाख की गिरावट दर्ज की गई. अल्पसंख्यकों की भागीदारी UDISE 2023-24 ने पहली बार छात्रों का व्यक्तिगत डेटा और स्वैच्छिक आधार पर उनके आधार नंबर जुटाए. 2023-24 तक 19.7 करोड़ छात्रों ने अपने आधार नंबर शेयर किए. कुल नामांकन में 20% छात्र अल्पसंख्यक समुदायों से थे. इनमें 79.6% मुस्लिम, 10% ईसाई, 6.9% सिख, 2.2% बौद्ध, 1.3% जैन और 0.1% पारसी समुदाय से थे. जातीय वर्गीकरण रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल लेवल पर पंजीकृत (UDISE डेटा के अनुसार), 26.9% छात्र सामान्य वर्ग से, 18% अनुसूचित जाति से, 9.9% अनुसूचित जनजाति से और 45.2% अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में स्कूलों, शिक्षकों और नामांकित छात्रों की उपलब्धता अलग-अलग है। ‘घोस्ट स्टूडेंट्स’ की पहचान व्यक्तिगत डेटा से फर्जी छात्रों (‘घोस्ट स्टूडेंट्स’) की पहचान और सरकार की योजनाओं का लाभ सही छात्रों तक पहुंचाने में मदद मिली. इससे सरकारी खर्च में बचत और बेहतर प्रबंधन संभव हुआ. एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर पर व्यक्तिगत छात्र डेटा जुटाया गया. इसलिए, यह डेटा 2021-22 या उससे पहले के आंकड़ों से तुलनात्मक नहीं है. यह प्रक्रिया स्कूल-वार डेटा से अलग है, जिससे शिक्षा प्रणाली की वास्तविक स्थिति सामने आती है. राज्यों में स्कूल और छात्रों का अनुपात उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान में स्कूलों की संख्या छात्रों की तुलना में अधिक है. वहीं, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और बिहार में छात्रों की संख्या स्कूलों से ज्यादा है. यह रिपोर्ट बताती है कि नई डेटा प्रणाली से छात्रों के ड्रॉपआउट और शिक्षा में प्रगति को सटीकता से ट्रैक किया जा सकेगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा.

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में कई प्रमुख बाजारों की सड़कों का चौड़ीकरण जल्द

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में कई प्रमुख बाजारों की सड़कों का चौड़ीकरण होने वाला है, इसे लेकर टेंडर जारी किया जा रहा है. नगर निगम द्वारा एक-दो दिनों में मार्किंग शुरू कर दी जाएगी. इस चौड़ीकरण पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने वाली है. यह चौड़ीकरण लंबे समय से पेंडिंग था. उज्जैन के नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने बताया कि उज्जैन में कई प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है. इसे लेकर महापौर परिषद ने भी निर्णय लिया है. प्रमुख रूप से निकास चौराहा से कंठाल, गाड़ी अड्डा चौराहे से विक्रमादित क्लॉथ मार्केट, केडी गेट जूना सोमारिया होते हुए शिप्रा नदी की बड़ी पुल तक चौड़ीकरण होगा. इसके अतिरिक्त खजूर वाली मस्जिद से अब्दलपुरा, रविंद्र नाथ टैगोर मार्ग जीवाजी गंज से गणेश चौक तक चौड़ीकरण किया जाएगा.  इसके अलावा कोयला फाटक से छत्री चौक, गोपाल मंदिर तक चौड़ीकरण होगा. इसी तरह गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंहपुरा होते हुए लालपुर ब्रिज तक चौड़ीकरण किया जाएगा.   मार्किंग को लेकर क्या बोले कमिश्नर उज्जैन में होने वाले चौड़ीकरण की मार्किंग को लेकर नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत के दौरान कहा कि एक-दो दिनों में मार्किंग शुरू हो जाएगी. पहले चौड़ीकरण की मार्किंग होगी.  इसके बाद टेंडर लगाए जाएंगे. जैसे ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होगी, वैसे ही चौड़ीकरण शुरू हो जाएगा. सिंहस्थ 2028 को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय उज्जैन के महापौर मुकेश टेटवाल ने बताया कि सिंहस्थ 2028 को लेकर चौड़ीकरण को काफी महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है. पूर्व में भी चौड़ीकरण की मांग उठती आई है, मगर अब सिंहस्थ के पहले सड़कों का चौड़ीकरण इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि उज्जैन में सिंहस्थ में पिछले सिंहस्थ 2016 की तुलना में बड़ी संख्या में अधिक श्रद्धालु आएंगे.

हमास की लड़ाकों की संख्या तेजी से बढ़ी, हमास की भर्ती बढ़ाएगी आईडीएफ की टेंशन, गाजा में हमास जारी रखे हुए है अपनी लड़ाई

तेल अवीव  गाजा पट्टी में अक्टूबर, 2023 से हमास और इजरायल के बीच भीषण लड़ाई चल रही है। इसमें फिलिस्तीनी गुट हमास को बीते कुछ समय में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। उसके ज्यादातर शीर्ष नेता और कमांडर हालिया महीनों में मारे गए हैं। ऐसे में हमास के खत्म हो जाने के दावे भी कुछ एक्सपर्ट हालिया समय में करने लगे थे लेकिन इस गुट ने एक बार फिर तगड़ी वापसी की है। इजरायली वेबसाइट यरूशलम पोस्ट और चैनल 12 ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास नए लड़ाकों की भर्ती करके गाजा पट्टी में इजरायली सेना (आईडीएफ) के सामने जोरदार वापसी कर रहा है। ये रिपोर्ट इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की चिंता बढ़ा सकती है। चैनल 12 ने बुधवार रात अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमास के पास अभी भी 20,000 से 23,000 लड़ाके हैं। आईडीएफ का दावा है कि उसने अब तक युद्ध के दौरान 17,000 से 20,000 हमास और इस्लामिक जिहाद के लड़ाकों को अब तक मारा है। आईडीएफ ने युद्ध के दौरान 6,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है, जिनमें से कम से कम 4,300 अभी भी हिरासत में हैं। हमास बढ़ा रहा है लड़ाकों की तादाद युद्ध की शुरुआत में आईडीएफ ने हमास के पास 25,000 लड़ाके होने का अनुमान लगाया था और अभी भी 23,000 तक लड़ाके हमास में होने की बात कही जा रही है। वहीं आईडीएफ 20 हजार लड़ाकों को युद्ध में मारने का भी दावा कर रहा है। ऐसे में साफ है कि बड़े स्तर पर भर्ती हुई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये साफ है कि हमास नए लड़ाकों को हथियार सौंप रहा है। हालांकि इनकी ट्रेनिंग पर कई तरह के सवाल हैं। ये लड़ाके उस तरह से ट्रैंड नहीं है, जैसे शुरुआती दौर में हमास के पास थे। हमास ने बड़ी संख्या ऐसे लड़ाके भी भर्ती किए हैं, जिनकी उम्र 20 या 18 साल से भी कम है। हमास के पुनरुत्थान और लड़ाकों की संख्या के बारे में परस्पर विरोधी रिपोर्ट भी सामने आई हैं। आईडीएफ और इजरायली अखबारों के दावे भी एक जैसे नहीं है।हालांकि इस सबके बीच इजरायल के उन दावो पर जरूर बड़ा सवाल उठता है, जिनमें बार-बार हमास के गाजा में बेहद कमजोर हो जाने का दावा किया जाता रहा है। साथ ही गाजा में चल रहे संघर्ष की वास्तविक स्थिति के बारे में सवाल उठता है, जहां लाखों लोग अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हो रहे हैं।

डीजीपी ने कहा मध्य प्रदेश में बढ़ रहे साइबर अपराध, नशा और यातायात दुर्घटना गंभीर चुनौती

भोपाल  मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम का मामला बढ़ता जा रहा है. इस बीच प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने नए साल पर पुलिस विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को एमपी में बढ़ रहे साइबर अपराध, नशा और यातायात दुर्घटना को गंभीर चुनौती बताते हुए साल 2025 में इन पर रोक लगाने की अपील की है. डीजीपी का संदेश सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाणा ने साल 2025 के शुभकामना संदेश में मध्य प्रदेश पुलिस की दिशा तय करने के संकेत दे दिए हैं. डीजीपी ने अपने संदेश में कहा, “साल 2024 मध्य प्रदेश पुलिस के लिए चुनौती पूर्ण रहा है लेकिन कई उल्लेखनीय उपलब्धियां भी पुलिस ने हासिल की हैं. मध्य प्रदेश में साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने में पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है”. डीजीपी साल 2025 को लेकर पुलिस को टास्क भी दिया है. डीजीपी ने कहा है कि मध्य प्रदेश में बढ़ रहे साइबर अपराध, नशा और यातायात दुर्घटना गंभीर चुनौती है. इन पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस की और अधिक सक्रियता जरूरी है. इसके अलावा आम लोगों में इसके बचाव हेतु “जागरूकता अभियान” भी निरंतर जारी रखने की आवश्यकता है. अपराधों में तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाना चाहिए- डीजीपी डीजीपी ने पुलिस विभाग को दिए अपने संदेश में कहा है कि पुलिस कर्मियों को अपने स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति भी जागरूक रहने की जरूरत है. इसके लिए पुलिस विभाग द्वारा योग और ध्यान केंद्र के कार्यक्रम चलाए जाने की योजना है. डीजीपी कैलाश मकवाणा ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है, “मेरी अपेक्षा है कि महिलाओं और बच्चों के प्रति संवेदनशीलता बरतते हुए उनके विरुद्ध घटित अपराधों में तत्काल कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए”. बता दें, हाल के दिनों में साइबर क्राइम की कई घटनाओं ने पुलिस-प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा था. जिसके बाद डीजीपी का यह कदम अहम माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी का कश्मीर की संस्कृति और भाषाओं को लेकर विशेष ध्यान है, बदल सकते है कश्मीर का नाम: अमित शाह

नई दिल्ली केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ‘J&K and Ladakh Through the Ages’ पुस्तक के विमोचन के दौरान कहा कि कश्मीर का नाम कश्यप से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने बताया कि कश्मीर में भारत की संस्कृति की नींव पड़ी थी, और यहां सूफी, बौद्ध और शैल मठों ने बहुत अच्छा विकास किया। अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने कश्मीरी, डोगरी, बालटी और झंस्कारी भाषाओं को सरकारी स्वीकृति दी है, जिससे कश्मीर की छोटी-छोटी भाषाएं जीवित रह सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का कश्मीर की संस्कृति और भाषाओं को लेकर विशेष ध्यान है। गृह मंत्री ने धारा 370 और 35ए के बारे में भी बात की, जिनका उद्देश्य देश को बांटने और कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए था। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने इन धाराओं को हटाकर कश्मीर में विकास के रास्ते खोले हैं। उन्होंने कहा कि इन धाराओं के कारण आतंकवाद पनपा था, लेकिन इनकी समाप्ति के बाद अब कश्मीर में शांति बढ़ी है। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर का इतिहास अब इस पुस्तक के जरिए प्रमाणित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत का इतिहास और संस्कृति पूरे देश में फैली हुई है, और कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक है। उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा, और इस पुस्तक में इसके ऐतिहासिक प्रमाण दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर में जो मंदिर पाए गए हैं, वे भारत और कश्मीर के बीच अटूट संबंधों को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास कभी भी लुटियन दिल्ली से नहीं लिखा जा सकता, उसे वास्तविकता को समझकर और प्रमाणों के आधार पर लिखा जाना चाहिए। अमित शाह ने अंत में कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर तय होती हैं, और दुनिया में कोई भी देश हमें भू-राजनीतिक नजरिए से परिभाषित नहीं कर सकता। भारत की एकता और अखंडता की ताकत उसकी संस्कृति में निहित है।

इंदौर संभाग में चल रही विकास गतिविधियों एवं निर्माण कार्यों की समीक्षा, मुख्यमंत्री ने बैठक में दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विधायकों को अपने क्षेत्र के विकास का विजन डॉक्यूमेंट (रोडमैप) बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी विधायक क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ जन समस्याओं के निराकरण को लेकर जन-संवाद करें। जनकल्याण अभियान के मिल रहे परिणामों का आकलन करें और सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए जरूरी है कि जनता के बीच जाएं, उनसे संवाद करें, उनकी समस्याएं जानें और निराकरण के लिए तुरन्त कदम उठाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर संभाग में चल रही विकास गतिविधियों एवं वृहद् निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री नागर सिंह चौहान, इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी सहित अन्य क्षेत्रीय विधायकों एवं जन-प्रतिनिधियों ने बैठक में अपने-अपने क्षेत्र से वर्चुअली सहभागिता की। मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री एस.एन, मिश्रा, अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव श्री अनुपम राजन, प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, प्रमुख सचिव श्री संजय शुक्ल, प्रमुख सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। गाँव में रात्रि विश्राम करें अधिकारी और जन-प्रतिनिधि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में वुर्चअली जुड़े मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधियों से कहा कि वे सरकार की योजनाओं का फीडबैक लेने के लिए अधिकाधिक फील्ड दौरे करें। जन-प्रतिनिधि, क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ दूरस्थ गाँव (विशेषकर जनजातीय ग्राम) में रात्रि विश्राम करें। वहां ग्रामीणों से बात करें, उनकी कठिनाईयों का समाधान करें। मुख्यमंत्री ने दिन-ब-दिन बढ़ती सर्दी के मद्देनजर कलेक्टर एवं जिला अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे रैन बसेरों का औचक निरीक्षण करें। जरूरतमंदों को कंबल एवं गर्म वस्त्र प्रदाय करें। किसी को भी सर्दी से कठिनाई न होने पाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए विधायक यदि चाहें, तो कोई नवाचार भी कर सकते हैं। ऐसी नवाचारी गतिविधियों को अमल में लाएं, जिससे जनता को अधिकतम लाभ हो। उन्होंने कहा कि अब सभी संभागों के प्रभारी अपर मुख्य सचिव जिलेवार समीक्षा बैठक करेंगे। इससे सभी विधायकों को अपने-अपने क्षेत्र की प्रमुख मांगों एवं संवदेनशील विषयों को रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर्स अब विधानसभावार समीक्षा बैठक करें। जिले के सभी विधायकों से चर्चा करें और उनके विधानसभा क्षेत्र का विजन डाक्यूमेंट बनाने में सहयोग भी करें। पुराने मंजूर सीएम राइज स्कूल का निर्माण पूरा कराएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीएम राइज स्कूलों के निर्माण की समीक्षा में कहा कि पुराने मंजूर सीएम राइज स्कूलों का जितना भी निर्माण कार्य अभी शेष है, पहले उन्हें विशेष प्राथमिकता से पूरा कर लिया जाए। इसके बाद नये सीएम राइज स्कूलों के निर्माण का प्रस्ताव लिये जाए। ताप्ती-चिल्लूर वृहद परियोजना की पूर्णता के लिये महाराष्ट्र सरकार से करेंगे चर्चा जल संसाधन विभाग की समीक्षा में खंडवा जिले की ताप्ती-चिल्लूर वृहद सिंचाई परियोजना के बारे में जानकारी दी गई। इस पर खंडवा जिले के हरसूद से विधायक एवं जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने मुख्यमंत्री से इस परियोजना को जल्द से जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द से जल्द इस पर काम शुरू किया जाएगा। यदि आवश्यकता हुई, तो वे स्वयं महाराष्ट्र शासन से भी इस परियोजना के संबंध में चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि करीब 26 हजार 279 करोड़ रूपए लागत वाली इस वृहद सिंचाई परियोजना के पूरा होने पर संबंधित क्षेत्र के 81 हजार 600 हेक्टेयर रकबे में फसल सिंचाई एवं वाटर रिचार्जिंग की स्थायी सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। जल जीवन मिशन के कामों में तेजी लाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर संभाग में जल जीवन मिशन के तहत संचालित कामों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करें। जल जीवन मिशन सीधा जनता से जुड़ा अभियान है। यदि इस अभियान के क्रियान्वयन में कोई समस्या आ रही है, तो आपसी संवाद एवं समन्वय से उसका समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि वे 20 जनवरी तक पूरे प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। बताया गया कि इंदौर संभाग के अंतर्गत अधीन जिलों में नल-जल योजना के अंतर्गत खोदी गई 3205.83 कि.मी. रोड के विरूद्ध अब तक 3166.81 कि.मी. रोड का रेस्टोरेशन कार्य गुणवत्तापूर्वक पूरा कर लिया गया है। शेष रोड का रेस्टोरेशन कार्य पाइप लाईन की टेस्टिंग के बाद पूरा कर लिया जाएगा। इंदौर-उज्जैन के वर्तमान फोरलेन को बनाया जाएगा सिक्स लेन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर-उज्जैन के फोरलेन को सिक्स लेन में बदलने के संबंध में अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। बताया गया कि इस काम के लिए निर्माण एजेंसी से अनुबंध कर लिया गया है। तय निर्माण एजेंसी द्वारा अनुबंध के अनुसार प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियां भी तेजी से संचालित की जा रही है। इंदौर सांसद ने इंदौर-देपालपुर मार्ग को फोरलेन बनाए जाने की मांग रखी। 

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