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अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार के साथ जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने नई एंटी नक्सल नीति में विस्तार किया है. बीजेपी की राज्य सरकार सरेंडर करने वाले नक्सलियों की सुविधाओं को बढ़ाने जा रही है. गृहमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में नक्सल नीति को लेकर बात करते हुए बताया अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों को हर माह 10 हजार की राशि दी जाएगी. साथ ही रहने के लिए जमीन, मकान और रोजगार से जुड़े संसाधन भी दिए जाएंगे. सरकार का प्लान है कि घर जमीन के साथ ही नक्सलियों को खास ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार हासिल करने में आसानी हो. नई नीति के तहत नक्सलियों पर जो इनाम की राशि होती है वो भी नक्सलियों को दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखने के लिए पांच जिलों में भवन बन रहे हैं. शर्मा ने बताया  नक्सलवाद को कम करने के लिए कई आयामों पर काम हो रहे हैं. आगे की जिंदगी जीने के लिए तमाम सुविधाएं दी जाएगी। फिर चाहे वह रहने के लिए जमीन-मकान हो या फिर रोजगार से जुड़े संसाधन। अलग खास भवनों में रखकर नक्सलियों को ट्रेंड किया जाएगा। उन्हें काम सिखाया जाएगा ताकि वह आगामी जीवन में रोजगार हासिल कर सकें। शर्मा बोले- मुझसे किसी ने कहा, नक्सली बनना अच्छा नई नीतियों को बेहतर बताते हुए विजय शर्मा  सुविधाएं गिनाते हुए बोले- ये फायदे सुनने के बाद मुझसे एक सीनियर पत्रकार ने कहा था कि ऐसे में तो नक्सली बनना ही अच्छा है। यह कहकर गृहमंत्री मुस्कुराए। मांझी तय करेंगे गांव में क्या बनेगा गृहमंत्री ने बताया कि, पंचायती राज के माध्यम से बस्तर के विकास का काम हम करने जा रहे हैं। गांवों के मांझियों (बस्तर के अंदरूनी इलाकों के जनप्रतिनिधि) की भागीदारी सुनिश्चित की जाने की मांग उठी थी, तो अब बस्तर के जिला पंचायत के सभागृह में मांझियों की बैठक होगी। जिलेवार ये बैठकें होंगी और मांझी बताएंगे कि उनको क्या-क्या निर्माण कार्य करवाने हैं। इन सभी आयामों को मिलाकर नया सॉल्यूशन समाज को देने की कोशिश है। नक्सल नीति से जुड़ी गृहमंत्री की कुछ बड़ी बातें-     हम अनेक आयामों में काम हो रहे हैं। हम ये भी कर रहे हैं कि सरेंडर बढ़े, लोग नक्सलवाद में न जाए।     अब बस्तर के पांच जिलों में ऐसे भवन तैयार हैं, जहां पर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को रखा जाएगा।     इन भवनों में उनका स्किल डेवलपमेंट किया जाएगा। वहां उनके रहने खाने के लिए 3 साल की व्यवस्था होगी।     जो हथियार वह लेकर के आएंगे उस हथियार से जुड़ी जो राशि घोषित है वह भी उनको दी जाएगी।     उनको प्लॉट दिया जाएगा, उनको प्रधानमंत्री आवास दिया जाएगा।     ये पॉलिसी इस उद्देश्य के साथ तैयार हुई है कि लोग मुख्यधारा में आएं। सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती।     IED ब्लास्ट कर और बंदूक के दम पर गांव की उन्नति को रोक देना कब तक सहा जाएगा।     नक्सल घटनाओं से पीड़ित और प्रभावितों के लिए अलग योजना बनी है, केंद्र से भी और राज्य की भी।     बस्तर के युवाओं को लगातार रायपुर लाया जाएगा, उनके एजुकेशन और स्पोर्ट्स को लेकर कार्यक्रम चलाए जाएंगे। मार्च 2026 तक खत्म करना है नक्सलवाद हाल ही में छत्तीसगढ़ दौरे पर आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म हो जाएगा। इसके बाद से ही प्रदेश में एनकाउंटर और नक्सलियों के खिलाफ दूसरे तरीकों की कार्रवाई बढ़ी है। प्रदेश सरकार का दावा है कि एक साल में 212 से अधिक नक्सली एनकाउंटर में मारे गए हैं। इतने एनकाउंटर पिछली सरकारों के 5-5 साल के कार्यकाल में भी नहीं हुए थे।

UPI से जुड़ा नया नियम 1 जनवरी से होगा लागू, ज्यादा पैसे कर पाएंगे ट्रांसफर

नई दिल्ली 1 जनवरी से नियमों में कुछ बदलाव होने वाले हैं। लेकिन एक सबसे बड़ा बदलाव होने वाला है UPI नियमों में। आज हम आपको यूपीआई के नियमों की जानकारी देने वाले हैं। साथ ही बताएंगे कि इसमें क्या नया मिलने वाला है। RBI ने फैसला लिया है कि UPI 123Pay की ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक ने लिमिट में इजाफा करने का फैसला लिया है। UPI 123Pay का इस्तेमाल करके यूजर्स 5 हजार की जगह 10 हजार रुपए की ट्रांजैक्शन कर पाएंगे। क्या होती है UPI 123Pay UPI 123Pay सर्विस यूजर्स को दी जाती है। ये एक ऐसी सर्विस है जिसमें यूजर्स को बिना इंटरनेट कनेक्शन पेमेंट करने का ऑप्शन दिया जाता है। यही वजह है कि आरबीआई की तरफ से ऐसी ट्रांजैक्शन को कंट्रोल करने के लिए पूरा प्रयास किया जाता है। लेकिन अब इसमें भी बदलाव कर दिया गया है। UPI 123Pay में यूजर्स को पेमेंट करने के अधिकतम 4 ऑप्शन दिए जाते हैं। इसमें IVR नंबर्स, मिस्ड कॉल्स, OEM-embedded Apps और साउंड बेस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है। क्या है डेडलाइन UPI के नए नियमों को लेकर डेडलाइन जारी हो चुकी है। इसमें यूजर्स को 1 जनवरी 2025 तक का समय दिया जाएगा। यानी यूजर्स आसानी से इसके बाद 10 हजार रुपए तक की ट्रांजैक्शन कर पाएंगे। हालांकि इसके साथ ही OTP बेस्ड सर्विस को ऐड कर दिया गया है। यानी आपको पेमेंट करने के लिए OTP की जरूरत होगी। अगर आप पेमेंट करना चाहते हैं तो OTP का इस्तेमाल करना होगा। क्योंकि सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए इसका फैसला लिया गया है। विदेश में पहुंच चुकी है UPI श्रीलंका समेत कई देशों में भी UPI सर्विस की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय सिस्टम ने देखते ही देखते बाहर तक पैर पसार लिए हैं। सरकार की तरफ से इसको लेकर नए फैसले लिए जाते हैं।

जयपुर और जैसलमेर समेत कई शहरों में सोमवार सुबह विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही

जयपुर राजस्थान के कुछ हिस्से शीत लहर से जूझ रहे हैं, जयपुर शहर में कोहरे के कारण दृश्यता कम हो गई है। जयपुर में सोमवार सुबह तापमान नौ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजस्थान के माउंट आबू ने आज फिर बर्फ की चादर ओढ़ ली है। यहां के इस एकमात्र हिल स्टेशन में पिछले दो दिनों से तापमान में लगातार गिरावट आई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में हैं। जयपुर, जैसलमेर, चूरू, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, कोटा, अजमेर, अलवर, भरतपुर, दौसा, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर, सीकर सहित कई शहरों में कोहरे के कारण गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई है। कड़ाके की ठंड और गलन के साथ मौसम विभाग ने 12 जिलों में कोहरे और शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। माउंट आबू का तापमान जमाव बिंदु से चार डिग्री नीचे -4 डिग्री सेल्सियस  माउंट आबू का तापमान जमाव बिंदु से चार डिग्री नीचे -4 डिग्री सेल्सियस था। सोमवार को इसमें एक डिग्री का सुधार जरूर हुआ। लेकिन, फिर भी माउंट आबू बर्फ से ढका हुआ है। माउंट आबू के उद्यान, मैदान और सड़कें सभी जगह बर्फीला मौसम है। नया साल आने में सिर्फ एक दिन पहले पर्यटकों के लिए यह मौसम और भी रोमांचक हो गया है। कश्मीर और हिमाचल का एहसास उन्हें अब माउंट आबू में हो रहा है। नया साल आने में सिर्फ एक दिन पहले पर्यटकों के लिए यह मौसम और भी रोमांचक हो गया है। कश्मीर और हिमाचल का एहसास उन्हें अब माउंट आबू में हो रहा है। प्रदेश के अधिकांश हिस्से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में राजस्थान के अधिकांश हिस्से घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में हैं। जयपुर, जैसलमेर, चूरू, श्रीगंगानगर, बाड़मेर, कोटा, अजमेर, अलवर, भरतपुर, दौसा, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर, सीकर सहित कई शहरों में कोहरे के कारण गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई है। कड़ाके की ठंड और गलन के साथ मौसम विभाग ने 12 जिलों में कोहरे और शीतलहर का येलो अलर्ट जारी किया है। 21 दिसंबर को राजस्थान के चुरू जिले में सर्दी ने जमकर कहर बरपाया था बता दें कि इससे पहले 21 दिसंबर को राजस्थान के चुरू जिले में सर्दी ने जमकर कहर बरपाया था। तब रेतीले धोरों और वाहनों पर बर्फ की परत जमने लगी थी। इसके अलावा, खेतों में भी बर्फ की चादर देखने को मिल रही थी, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई थी, फसलों को नुकसान हो रहा था। जिले का तापमान जमाव बिंदु के निकट पहुंच चुका था। रात का न्यूनतम तापमान काफी नीचे गिर गया था। खेतों में सरसों और अन्य फसलों की पत्तियों पर बर्फ की परत जमने से किसानों को भारी नुकसान हुआ था। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। जयपुर और जैसलमेर समेत कई शहरों में सोमवार सुबह विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही जयपुर और जैसलमेर समेत कई शहरों में सोमवार सुबह विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही। जयपुर शहर में सुबह 7:30 बजे तक घना कोहरा रहा, और विजिबिलिटी 100 मीटर से कम रही। गाड़ियों की लाइट जलाकर लोग वाहन चलाते नजर आए। दुपहिया वाहन चालकों को सर्द हवाओं के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। सवाई माधोपुर में सोमवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, विजिबिलिटी 30 मीटर से भी कम रही। मावठ के बाद शीतलहर के चलते यहां तापमान गिरा। रविवार को अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। जोधपुर और उसके आसपास हल्की धुंध के साथ ठंड का असर महसूस हुआ। दौसा में मौसम साफ रहा लेकिन ठंड तेज हो गई। जिले का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले तीन दिनों में तापमान में 9 डिग्री तक की गिरावट आई। टोंक के ग्रामीण इलाकों में लगातार आठवें दिन कोहरा छाया रहा। सोमवार को विजिबिलिटी केवल 20 मीटर रही। अगले तीन-चार दिनों तक इसी तरह के ठंडे मौसम की संभावना आपको बता दें, बीकानेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभागों में घना कोहरा रहा। सीकर, झुंझुनूं, चूरू, हनुमानगढ़ और गंगानगर में कोल्ड-वेव के कारण गलन और सर्दी बनी रही। हालांकि कोटा, अजमेर और जोधपुर संभागों में दोपहर बाद धूप निकलने से थोड़ी राहत मिली। फलोदी में दिन का अधिकतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो राज्य में सबसे अधिक था। बाड़मेर में 24.8 डिग्री, जालौर में 24, जैसलमेर और जोधपुर में 23, जबकि जयपुर में अधिकतम तापमान 17.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी है, और अगले तीन-चार दिनों तक इसी तरह के ठंडे मौसम की संभावना जताई गई है। लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं और सरकार और प्रशासन ने गरीब लोगों के लिए रैन बसेरों की व्यवस्था की है।

Economy में मजबूती, 2024-25 में GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान, आरबीआई रिपोर्ट

नई दिल्ली देश का केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को जारी अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीलापन और स्थिरता प्रदर्शित कर रही है।  साथ ही कहा है कि भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के 2024-25 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इसमें कहा गया है कि देश की जीडीपी को ग्रामीण खपत में सुधार, सरकारी खपत और निवेश में तेजी और मजबूत सेवा निर्यात से मदद मिलेगी। शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों की स्थिति हुई है मजबूत खबर के मुताबिक, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) का दिसंबर 2024 का अंक जारी किया है, जो भारतीय वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन और वित्तीय स्थिरता के जोखिमों पर वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (एफएसडीसी) की उप-समिति के सामूहिक मूल्यांकन को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों (एससीबी) की सुदृढ़ता मजबूत लाभप्रदता, घटती गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) और पर्याप्त पूंजी और तरलता बफर द्वारा मजबूत हुई है। जीएनपीए रेशियो कई वर्षों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि शिड्यूल्ड कॉमर्शियल बैंकों परिसंपत्तियों पर रिटर्न (आरओए) और इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) दशक के उच्चतम स्तर पर हैं, जबकि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। मैक्रो स्ट्रेस टेस्ट से पता चलता है कि ज्यादातर एससीबी के पास प्रतिकूल तनाव परिदृश्यों के तहत भी विनियामक न्यूनतम सीमा के सापेक्ष पर्याप्त पूंजी बफर है। तनाव परीक्षण म्यूचुअल फंड और क्लियरिंग कॉरपोरेशन के लचीलेपन को भी मान्य करते हैं। वास्तविक जीडीपी वृद्धि में गिरावट अर्थव्यवस्था पर, आरबीआई ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट ने कहा कि 2024-25 की पहली छमाही के दौरान, वास्तविक जीडीपी वृद्धि (वर्ष-दर-वर्ष) 2023-24 की पहली और दूसरी छमाही के दौरान दर्ज की गई क्रमशः 8. 2 प्रतिशत और 8. 1 प्रतिशत की वृद्धि से 6 प्रतिशत तक कम हो गई। आरबीआई ने कहा कि इस हालिया मंदी के बावजूद, संरचनात्मक विकास चालक बरकरार हैं। घरेलू चालकों, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश, मजबूत सेवा निर्यात और आसान वित्तीय स्थितियों में तेजी से समर्थित वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में ठीक होने की उम्मीद है।” रिपोर्ट में महंगाई को लेकर कहा गया है कि आगे चलकर, बंपर खरीफ फसल और रबी फसल की संभावनाओं के अवस्फीतिकारी प्रभाव से खाद्यान्न की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। भू-राजनीतिक संघर्ष और भू-आर्थिक विखंडन भी ग्लोबल सप्लाई चेन और कमोडिटी की कीमतों पर उल्टा दबाव डाल सकते हैं। आरबीआई ने कहा, ‘‘इस हालिया सुस्ती के बावजूद संरचनात्मक वृद्धि चालक बरकरार हैं। घरेलू चालक, मुख्य रूप से सार्वजनिक खपत और निवेश तथा मजबूत सेवा निर्यात के कारण 2024-25 की तीसरी और चौथी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार होने की उम्मीद है।’’ रिपोर्ट में मुद्रास्फीति के बारे में कहा गया कि बंपर खरीफ फसल और रबी फसल के चलते आगे चलकर खाद्यान्न कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। हालांकि, चरम मौसम की घटनाओं के बढ़ते रुझानों के कारण जोखिम बने हुए हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और जिंस कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।  

82 आईएएस अफसरों को डाॅ. मोहन सरकार ने दिया नए साल का तोहफा, बने दो नए प्रमुख सचिव

भोपाल। मध्य प्रदेश के 82 आईएएस अफसरों को डाॅ. मोहन यादव की सरकार ने नए साल का तोहफा दिया है. अलग-अलग बैच के आईएएस का प्रमोशन करते हुए बढ़े हुए वेतनमान का लाभ देने के आदेश जारी किए गए हैं. प्रमोशन की इस लिस्ट में 2001 बैच के दो आईएएस अधिकारी सचिव से प्रमुख सचिव बनाए गए हैं. पर्यावरण विभाग में सचिव नवनीत मोहन कोठारी और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के सचिव पी नरहरि प्रमुख सचिव बनाए गए हैं. मुख्य सचिव अनुराग जैन के अध्यक्षता में हुई विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के बाद पदोन्नति सूची जारी की गई. सभी अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ एक जनवरी 2025 से मिलेगा. 2001 बैच के नवनीत मोहन कोठारी और पी नरहरि प्रमुख सचिव बने 2009 बैच के 16  अधिकारी अपर सचिव से सचिव बनाए गए 2011 बैच के 29 को प्रवर श्रेणी वेतनमान ये अधिकरी उप सचिव से अपर सचिन बने इन श्रेणी में मप्र के जिलों में पदस्थ 13 कलेक्टर के नाम शामिल हैं 2016 बैच के 26 अधिकारियों को कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड 2021 बैच के नौ अधिकारियों को वरिष्ठ समय वेतनमान

2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन हुए क्रैश, 1,473 यात्रियों की मौत, फिर भी सबसे सेफ मानी जाती है हवाई यात्रा!

नई दिल्ली दक्षिण कोरिया और अजरबैजान के पैसेंजर प्लेन के क्रैश होने की घटना ने हिलाकर रख दिया था. कभी पक्षी के टकराने, कभी तकनीकी खराबी या कभी खराब मौसम होने की वजह से दुनियाभर में प्लेन हादसे होते रहे हैं. विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में दुनियाभर में 109 विमान हादसे हुए थे, जिनमें 120 लोगों की मौत हुई थी. इस हिसाब से हर महीने औसतन 9 विमान हादसे हुए जिनमें 10 लोगों की मौत हुई. एविएशन सेफ्टी के मुताबिक, पिछले साल सबसे ज्यादा 34 विमान हादसे अमेरिका में हुए थे. विमान हादसों पर नजर रखने वाली संस्था एविएशन सेफ्टी के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 प्लेन क्रैश हो चुके हैं. प्लेन क्रैश की 813 घटनाओं में 1,473 यात्रियों की मौत हो चुकी है. सबसे ज्यादा विमान हादसे लैंडिंग के दौरान होते हैं. इन सात साल में लैंडिंग के दौरान 261 हादसे हुए हैं. उसके बाद 212 हादसे उड़ान के दौरान ही हुए हैं. इसी दौरान भारत में 14 हादसे हुए हैं. एविएशन सेफ्टी की मानें तो सबसे ज्यादा विमान हादसे टेक ऑफ के दौरान और फिर लैंडिंग के दौरान होते हैं. पिछले साल 109 ऐसी दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें से 37 टेकऑफ और 30 लैंडिंग के दौरान हुई थीं.हर साल दुनियाभर में सैकड़ों विमान हादसे होने के बावजूद हवाई सफर को सबसे सेफ माना जाता है. आंकड़े देखें तो बीते 7 साल में हर साल औसतन 200 विमान हादसे हुए हैं. और सालभर में ही सैकड़ों से ज्यादा लोगों की जान गई है. लेकिन इसके बावजूद भी फ्लाइट के सफर को सबसे सुरक्षित माना जाता है. फिर भी सबसे सेफ मानी जाती है हवाई यात्रा! फ्लोरिडा की एम्ब्री-रिडल एयरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एंथनी ब्रिकहाउस ने सीएनएन को बताया कि हवाई सफर ट्रांसपोर्टेशन का सबसे सुरक्षित साधन है. उन्होंने कहा, 38 हजार की फीट की ऊंचाई पर उड़ना, जमीन पर ड्राइव करने से ज्यादा सुरक्षित है. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की रिपोर्ट की मानें तो 2023 में दुनियाभर में 3.7 करोड़ से ज्यादा विमानों ने उड़ान भरी थी. इसके बावजूद कुछ ही हादसों में लोगों की जान गई. पिछले साल नेपाल में एक विमान क्रैश हुआ था, जिसमें 72 लोग मारे गए थे. बता दें कि आईएटीए हर साल फ्लाइट सेफ्टी पर रिपोर्ट जारी करता है. IATA की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 12.6 लाख विमान उड़ान भरते हैं, तब एक दुर्घटना होती है. IATA का दावा है कि जब कोई व्यक्ति 1,03,239 साल तक हर दिन विमान में सफर करेगा, तब जाकर कोई एक दिन ऐसा आएगा जब उसे घातक दुर्घटना का सामना करना पड़ेगा. कुछ साल पहले मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर अर्नॉल्ड बार्नेट ने भी फ्लाइट सेफ्टी पर एक रिपोर्ट की थी, जिसमें दावा किया गया था कि 2018 से 2022 के बीच अगर 1.34 करोड़ यात्रियों ने हवाई सफर किया है तो उनमें से सिर्फ 1 को ही मौत का खतरा है. कब हुआ था दुनिया का पहला विमान हादसा? एयर ट्रैफिक के इतिहास पर नजर डालें तो 15 जून 1785 को फ्रांस के विमरेक्स के पास रॉजियरे एयर बैलून का हादसा पहली बार जानलेवा साबित हुआ था. इस हादसे में रॉजियरे एयर बैलून के आविष्कारक जीन फ्रैकुआ पिलैत्रे डी रॉजियरे की मौत हो गई थी. जबकि पावर्ड एयरक्राफ्ट का पहला हादसा 17 सितंबर 1908 को हुआ था जब अमेरिका के वर्जिनिया में मॉडल-ए एयरक्राफ्ट क्रैश कर गया था. इसमें इस विमान के सह-आविष्कारक और पायलट घायल हो गए थे जबकि सहयात्री की मौत हो गई थी.  

यूनियन कार्बाइड के 377 टन जहरीले कचरे को 250 KM दूर भेजने की तैयारी, बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, 100 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात

भोपाल  यूनियन कार्बाइड का कचरा भोपाल से पीथमपुर भेजने की तैयारी शुरू हो गया। रविवार से इसके पैकेजिंग की शुरुआत हो गई है। इस बीच भोपाल गैस त्रासदी राहत विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने रविवार को लोगों की चिंता दूर की। उन्होंने बताया कि यूनियन कार्बाइड प्लांट के जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाने से आसपास के गांवों की जमीन और मिट्टी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। यह कचरा 1984 की भोपाल गैस त्रासदी का है। इसे पीथमपुर में सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाएगा। यूनियन कार्बाइड का है कचरा सिंह ने बताया कि पीथमपुर में जो रासायनिक कचरा नष्ट किया जा रहा है, वह यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में बने कीटनाशक का अवशेष पदार्थ है। उन्होंने कहा कि यह मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) जितना खतरनाक नहीं है। MIC का इस्तेमाल कीटनाशक बनाने में होता है। 2-3 दिसंबर, 1984 की रात को भोपाल में MIC गैस का रिसाव हुआ था, जिससे भयानक त्रासदी हुई थी। अलग से लैंडफिल का निर्माण किया गया सिंह ने आश्वासन दिया कि कचरे को जलाने के दौरान यह पानी या मिट्टी के संपर्क में न आए, इसके लिए लैंडफिल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर विशेषज्ञों की निगरानी में 10 टन कचरा पहले ही नष्ट किया जा चुका है। इससे आसपास के इलाके में कोई नुकसान नहीं हुआ है। 337 मीट्रिक टन है कचरा 1984 की त्रासदी का लगभग 337 मीट्रिक टन पैक किया हुआ जहरीला कचरा सुरक्षित निपटान के लिए पीथमपुर ले जाया जाएगा। भोपाल के यूनियन कार्बाइड प्लांट से पीथमपुर के रासायनिक कचरा निपटान केंद्र तक 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। सिंह ने बताया कि अभी सही समय नहीं बताया जा सकता। लेकिन, पैक किए गए कचरे के निपटान के बारे में 3 जनवरी को MP उच्च न्यायालय में एक हलफनामा पेश किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि उससे पहले कचरा पीथमपुर पहुंच जाए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुसार पैकिंग सिंह ने कहा कि जहरीले कचरे की पैकिंग, लोडिंग, परिवहन और अनलोडिंग केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशानिर्देशों के अनुसार की जाएगी। जहरीले कचरे को जलाने के लिए सुरक्षित रूप से उसके गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा। लंबे समय से मुआवजे की मांग भोपाल गैस त्रासदी के बाद, ज़हरीले कचरे के निपटान और पर्यावरणीय मुआवजे की मांग लंबे समय से चली आ रही है। 1984 की त्रासदी के बाद, स्वास्थ्य देखभाल और आर्थिक पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया गया था। लेकिन पर्यावरणीय क्षति को अनदेखा कर दिया गया। 2004 में, आलोक प्रताप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें जहरीले कचरे के वैज्ञानिक निपटान की मांग की गई। उनके बेटे अनन्या अब इस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। एनजीओ ZGKSM, जो त्रासदी पीड़ितों के लिए लड़ रहा था, को हाल ही में उसके परिसर से हटा दिया गया है। मिट्टी भी जहरीली अनुमान है कि फैक्ट्री के नीचे लगभग 1.5 मिलियन टन ज़हरीली मिट्टी दबी हुई है। 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद, ZGKSM नाम के एक NGO ने एक मार्मिक लोगो अपनाया। इस लोगो में “नो हिरोशिमा, नो भोपाल” लिखा था। साथ ही एक अज्ञात बच्चे के दफनाने की एक काली और सफेद तस्वीर भी थी। उस समय, पर्यावरण की चिंताएं गौन थीं। ऑर्गेनिक खाने का कोई महत्व नहीं था। इनका ध्यान रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल पर था। भोपाल प्लांट में भी ऐसे ही उर्वरक बनते थे। इनका इस्तेमाल वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए किया जाता था। विशेष पीपीई किट पहने कई कर्मचारी और भोपाल नगर निगम, पर्यावरण एजेंसियों, डॉक्टरों और भस्मीकरण यानी कूड़ा जलाने वाले विशेषज्ञों के अधिकारी साइट पर काम करते देखे गए. फैक्ट्री के आसपास पुलिस भी तैनात की गई थी. सूत्रों ने बताया कि जहरीले कचरे को भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर इंदौर के पास पीथमपुर में एक भस्मीकरण स्थल पर ले जाया जाएगा. मप्र हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को फैक्ट्री से जहरीले कचरे को हटाने के लिए चार सप्ताह की समय सीमा तय की थी. अदालत ने कहा था कि गैस त्रासदी के 40 साल बाद भी अधिकारी ‘निष्क्रियता की स्थिति’ में हैं, जिससे ‘एक और त्रासदी’ हो सकती है. इसे ‘दुखद स्थिति’ बताते हुए उच्च अदालत ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उसके निर्देश का पालन नहीं किया गया तो उसके खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही की जाएगी. राज्य के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने एक न्यूज एजेंसी से कहा, “भोपाल गैस त्रासदी का कचरा एक कलंक है, जो 40 साल बाद मिट जाएगा. हम इसे सुरक्षित तरीके से पीथमपुर भेजकर इसका निपटान करेंगे.” उन्होंने कहा कि भोपाल से पीथमपुर तक कचरे को कम से कम समय में ले जाने के लिए यातायात का प्रबंधन करके करीब 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा. स्वतंत्र कुमार सिंह ने कचरे के परिवहन और उसके बाद पीथमपुर में उसके निपटान की कोई निश्चित तिथि बताने से इनकार कर दिया, लेकिन सूत्रों ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के मद्देनजर प्रक्रिया जल्द ही शुरू हो सकती है और कचरा 3 जनवरी तक अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है. अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में कचरे का कुछ हिस्सा पीथमपुर की निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है. सिंह ने कहा, “अगर सब कुछ ठीक पाया गया तो कचरा तीन महीने में जलकर राख हो जाएगा. अन्यथा जलने की गति धीमी कर दी जाएगी और इसमें नौ महीने तक का समय लग सकता है.” उन्होंने बताया कि भस्मक से निकलने वाले धुएं को चार परत वाले विशेष फिल्टर से गुजारा जाएगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो और इस प्रक्रिया का हर पल रिकॉर्ड रखा जाएगा. सिंह ने बताया कि जब कचरे को जलाकर हानिकारक तत्वों से मुक्त कर दिया जाएगा, तो राख को दो परतों वाली मजबूत ‘झिल्ली’ से ढक दिया जाएगा और ‘लैंडफिल’ में दफना दिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में न आए. उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की देखरेख … Read more

रोहित शर्मा सिडनी में लेंगे संन्यास, इस दिन खेलेंगे करियर का आखिरी मैच?

मुंबई मेलबर्न टेस्ट में टीम इंडिया की हार के बाद बड़ी खबर सामने आ रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहित शर्मा जल्द टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने वाले हैं. दावा है कि रोहित शर्मा सिडनी टेस्ट के बाद संन्यास ले लेंगे. सिडनी टेस्ट का आगाज 3 जनवरी से होगा. ये मुकाबला अगर पूरे पांच दिनों तक चला तो 7 जनवरी रोहित शर्मा के टेस्ट करियर का आखिरी दिन हो सकता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के उच्च अधिकारियों और चयनकर्ताओं के बीच रोहित की टीम में जगह को लेकर चर्चाएं चल रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कप्तान चयनकर्ताओं को मनाने की कोशिश करेंगे कि अगर भारत WTC फाइनल में पहुंचता है तो उन्हें खेलने दिया जाए. हालांकि, इसके होने की संभावना कम है, इसलिए सिडनी में उनका आखिरी मैच हो सकता है. रोहित का आखिरी टेस्ट सिडनी में? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीसीसीआई और चयनकर्ता रोहित शर्मा के संन्यास की बातें करने लगे हैं. लेकिन टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा सेलेक्टर्स को मनाने में जुटे हैं. रोहित शर्मा दरअसल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलना चाहते हैं, अगर टीम इंडिया पहुंची तो वो मुकाबला उनका आखिरी मैच हो सकता है. वैसे इसकी संभावना कम है, ऐसे में सिडनी रोहित का आखिरी टेस्ट मैच हो सकता है. बड़ी बात ये है कि रोहित शर्मा पर ये रिपोर्ट मेलबर्न टेस्ट में हार के तुरंत बाद आई है. मेलबर्न टेस्ट में टीम इंडिया को 184 रनों से हार मिली. एक समय ऐसा था जब टीम इंडिया ये टेस्ट ड्रॉ करा सकती थी. टी ब्रेक तक भारतीय टीम के 3 ही विकेट गिरे थे लेकिन इसके बाद ऋषभ पंत एक खराब शॉट खेलकर आउट हुए और फिर भारतीय पारी ताश के पत्तों की तरह ढह गई. यशस्वी जायसवाल ने 84 रनों की पारी खेली उनके अलावा कोई और बल्लेबाज विकेट पर टिकने की ज़हमत नहीं दिखा सका. ढलान पर रोहित का टेस्ट करियर कप्तान रोहित शर्मा का खेल टेस्ट क्रिकेट में लगातार नीचे की तरफ जा रहा है. घर पर न्यूजीलैंड के खिलाफ 3 मैचों सीरीज में टीम इंडिया के क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा. इस सीरीज की 3 मैचों में कप्तान के बल्ले से महज 91 रन निकले थे. मौजूदा सीरीज में रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत ने तीन मैच खेला है और दो में हार मिली. 3 मैच की 5 पारी में उन्होंने सिर्फ 31 रन बनाए हैं. उन्होंने 3, 6, 10, 3 और अब 9 रन बनाए हैं. रोहित शर्मा के बल्ले से 15 रन तक का स्कोर नहीं आया. रोहित शर्मा का शर्मनाक प्रदर्शन रोहित शर्मा का ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बुरा हाल है. ये खिलाड़ी इस सीरीज में 3 मैचों में 31 ही रन बना सका है. रोहित का बैटिंग एवरेज 6.20 है. रोहित क्रीज पर टिकने के लिए काफी संघर्ष कर रहे हैं. मेलबर्न टेस्ट में तो उनका एक फैसला टीम इंडिया पर बहुत भारी पड़ा. उन्होंने केएल राहुल को ओपनिंग से हटाकर खुद वो जगह ली और ना तो वो चले और ना ही केएल राहुल रन बना पाए. केएल राहुल तीसरे नंबर पर खेलते हुए दोनों पारियों में फेल रहे. रोहित शर्मा की बैटिंग देखकर ऐसा लग रहा है कि अब टेस्ट क्रिकेट में उनके दिन ज्यादा बचे नहीं हैं. इसीलिए अब उनके संन्यास की खबरें आने लगी हैं.  

साल 2024 :12 महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में नौ से लेकर 100 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई

भोपाल वर्ष 2024 में जैसे-जैसे दिन बीते रसोई पर खर्च बढ़ता रहा। यह खर्च उन्हीं वस्तुओं को खरीदने में हुआ, जिससे कुछ दिनों पहले तक कम दरों में खरीदा जाता रहा था। आटा, दाल, तेल, मसालों सहित ड्रायफ्रूट में लगी महंगाई की आग सब्जियों तक में पहुंच गई। इन 12 महीनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में नौ से लेकर 100 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। दिसंबर 2023 में सोयाबीन, सरसों सहित अन्य खाद्य तेलों के भाव 120 से 130 रुपये प्रतिलीटर थे। दिसंबर 2024 में इनकी कीमतें बढ़कर 140-150 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई। सब्जियों ने भी साल भर रुलाया     जो सब्जियां 30 से 40 रुपये प्रति किलो मिलती थीं, जो बढ़कर 60 से 80 रुपये प्रति किलो इस दिसंबर में मिल रही हैं। इससे हर घर की रसोई का एक महीने का बजट 500 से 1000 रुपये तक बढ़ गया है।     भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू बताते हैं कि सरकार ने विदेश में गेहूं का निर्यात बढ़ाया। इससे अनाज मंडियों में गेहूं की आवक कम होने लगी और आटा महंगा हुआ।     सोयाबीन, सूरजमुखी के कच्चे तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने के कारण और पाम आयल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 137 रुपया प्रति लीटर हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम आइल महंगा होने से खाद्य तेलों के दाम बढ़ते गए।     करोंद सब्जी मंडी थोक विक्रेता कल्याण समिति के अध्यक्ष मोहम्मद नसीम बताते हैं कि इस वर्ष बिन मौसम वर्षा से फसल व सब्जियों की पैदावार 25 से 30 प्रतिशत कम रही। एक साल में ऐसे महंगा हुआ किराना दिसंबर 2023 से 29 दिसंबर-2024 तक किराना सामग्री में नौ प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई। वहीं, सबसे महंगा मखाना व बड़ी इलायची हुई। एक वर्ष में ऐसे महंगी हुईं सब्जियां सब्जी सब्जियों के भाव सब्जी विक्रेताओं से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिकिलो रुपये में दिए गए हैं। थोड़ा-बहुत अंतर संभव है। ..और ऐसे बढ़ गया हर घर की रसोई का बजट अर्थशास्त्री आरजी द्विवेदी बातते हैं कि बीते एक वर्ष में किराना व सब्जियों के दाम बढ़े हैं। महंगाई धीरे-धीरे बढ़ती रही। रोजमर्रा की आवश्यक खाद्य सामग्री 50 प्रतिशत तक बढ़ गई। इससे हर घर की रसोई का 20 से 25 प्रतिशत तक बजट बढ़ा है। उदाहरण के तौर पर एक चार से पांच सदस्यीय परिवार में हर महीने किराने की सामग्री 2500 से 3000 हजार रुपये तक आती थी। अब 3500 से 4000 रुपये तक सामग्री आने लगी है। वहीं हर महीने 1200 से 1800 तक सब्जियां आती थीं, जिसका बजट दोगुना हो गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गर्भ ग्रह में पहुंचकर बाबा महाकाल का किया पूजन और अभिषेक

उज्जैन भारत के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे जहां उन्होंने गर्भ ग्रह में पहुंचकर बाबा महाकाल का पूजन अभिषेक किया और उनका आशीर्वाद लेने के साथ ही मनोकामना भी की। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित घनश्याम शर्मा ने बताया कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने थल सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी के साथ मिलकर विश्वशांति हेतु श्री महाकालेश्वर भगवान का गर्भगृह में पहुंचकर पूजन अर्चन किया। इस दौरान संजय पुजारी, दिलीप पुजारी, प्रमोद पुजारी ने रूद्र मंत्रो से बाबा महाकाल का अभिषेक पूजन करवाया। नंदी हॉल में हाथ जोड़कर की प्रार्थना इसके बाद वे नंदी हॉल में पहुंचे और हाथ जोड़कर बाबा महाकाल से मनोकामना करते हुए दिखाई दिए। बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद आपने मीडिया से कहा कि मैं लंबे समय से यह प्रतीक्षा कर रहा था कि बाबा महाकाल के दर्शन हो जाएं। आज मुझे यह अवसर प्राप्त हुआ। बाबा महाकाल के दर्शन कर आज मेरा जीवन धन्य हो गया। इस दौरान प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य उमेश नाथ महाराज व अन्य लोग उपस्थित थे। मध्यप्रदेश दौरे पर हैं रक्षा मंत्री देश के रक्षा मंत्री इन दिनों दो दिवसीय दौरे पर मप्र में आए हैं। जहां वे इंदौर और महू के कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के साथ उज्जैन पहुंचे।

बांग्लादेश में भागवत कथा करने वाले को मिलेगी 1 करोड़ दक्षिणा : सैम वर्मा

बैतूल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का भारत में पुरजोर विरोध जारी है. इस बीच मध्य प्रदेश के बैतूल में स्थित बालाजीपुरम मंदिर के संस्थापक ने एक बड़ा ऐलान किया है. सैम वर्मा ने कहा है कि जो भी कथावाचक बांग्लादेश में जाकर भागवत कथा करेगा, उसे एक करोड़ रुपये दक्षिणा के रूप में दी जाएगी. इतना ही नहीं, उस कथावाचक और उनके दल को बांग्लादेश आने-जाने के लिए बोइंग चार्टर विमान की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी. देश के पांचवें धाम के नाम से मशहूर बैतूल के बालाजीपुरम मंदिर संस्थान ने ऐतिहासिक घोषणा की है. संस्थान के संस्थापक एनआरआई सैम वर्मा ने बताया कि कोई भी भारतीय कथावाचक, जो बांग्लादेश में जाकर भागवत कथा आयोजित करने की हिम्मत दिखाएगा, उसे मंदिर प्रबंधन न केवल एक करोड़ रुपये की दक्षिणा देगा, बल्कि बांग्लादेश आने-जाने के लिए बोइंग चार्टर प्लेन की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा. इस घोषणा के पीछे बालाजीपुरम मंदिर संस्थान ने अपनी मंशा भी स्पष्ट की है. सैम वर्मा के अनुसार, सनातन धर्म सभी धर्मों, मानवता, और प्राणियों की रक्षा करना सिखाता है. आज बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के हालात ऐसे हैं कि उन्हें भागवत कथा के ज्ञान की सबसे ज्यादा जरूरत है. इसके अलावा, भागवत कथा दल को बांग्लादेश भेजने के लिए सरकारी स्तर पर जो भी प्रयास जरूरी होंगे, वह भी बालाजीपुरम मंदिर संस्थान खुद उठाने को तैयार है. बालाजीपुरम मंदिर के संस्थापक सैम वर्मा का कहना है कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह मानवता और शांति का संदेश देती है. बांग्लादेश में मौजूदा परिस्थितियों में सनातन धर्म का यह संदेश पहुंचाना बेहद जरूरी है. हम हर संभव मदद करने के लिए तैयार हैं. हम चाहते हैं कि बांग्लादेश में सनातन धर्म का संदेश पहुंचे. इसके लिए जो भी सरकारी अनुमति या प्रक्रियाएं होंगी, हम वह सुनिश्चित करेंगे. बता दें कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. ऐसे में वहां भागवत कथा आयोजित करना न केवल एक चुनौती है, बल्कि इसके लिए साहस भी चाहिए. हालांकि, अब सवाल यह है कि क्या भारत के नामचीन कथावाचक बांग्लादेश जाने के लिए तैयार होंगे? और अगर कोई कथावाचक इस चुनौती को स्वीकार करता है, तो क्या भारत सरकार उसे वहां जाने की अनुमति देगी? बालाजीपुरम मंदिर का यह प्रस्ताव कई सवाल खड़े करता है. क्या कोई कथावाचक इस साहसिक कदम के लिए आगे आएगा? और क्या यह प्रयास बांग्लादेश में सनातन धर्म का संदेश पहुंचाने में सफल होगा? आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा.  

पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर भारी और अत्याधुनिक हथियारों से हमला कर रहा तालिबान

काबुल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस समय खूनी जंग लड़ रहे हैं. अफगानिस्तान के तालिबानी लड़ाके डूरंड लाइन क्रॉस कर पाकिस्तान पर कहर बरपा रहे हैं. भारी मशीनगन और आधुनिक हथियारों से लैस तालिबानी लड़ाकोंने पाकिस्तानी चौकियों पर धावा बोल दिया है.   अफगानिस्तान के पूर्वी पक्तिका प्रांत में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के कैंपों पर पाकिस्तानी बमबारी के बाद से दोनों ओर हमले जारी हैं. गुलाम खान क्रॉसिंग पर तालिबानी लड़ाके धड़ाधड़ा हमले कर रहे हैं. पाकिस्तानी सेना का कहना है कि तालिबान बॉर्डर के पास उनकी चौकियों पर भारी और अत्याधुनिक हथियारों से हमला कर रहा है. वही, तालिबान का कहना है कि वह पाकिस्तान से सटी सीमा पर अराजक तत्वों को निशाना बना रहा है. टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि डूरंड लाइन पर दोनों ओर से हिंसक झड़प हो रही है. तालिबान ने पाकिस्तानी सेना की दो चौकियों पर कब्जा कर लिया है. तालिबानी सैनिकों ने भारी हथियारों का इस्‍तेमाल कर डूरंड लाइन पर मौजूद पाकिस्‍तानी सेना की कई चौकियों को आग के हवाले कर दिया. इस दौरान पाकिस्तानी सेना के 19 सैनिकों की मौत हो गई और बाकी भाग खडे़ हो गए. तालिबानी लड़ाके गोजगढ़ी, माटा सांगर, कोट राघा औऱ तरी मेंगल इलाकों में घुस गए हैं और जमकर गोलीबारी कर रहे हैं. इस बीच पाकिस्तानी सेना ने कहा कि उसने खुर्रम और उत्तरी वजीरिस्तान में घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया है. क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई.  

Bhopal Gas Tragedy के 40 साल बाद खत्म होगा जहरीला कचरा, शिफ्टिंग हुई शुरू

भोपाल  भोपाल गैस त्रासदी के 40 साल बाद जहरीले कचरे को हटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. गैस त्रासदी के करीब 40 साल बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से 337 टन जहरीला कचरा हटाया जा रहा है. यह कचरा राजधानी भोपाल से पीथमपुर में ले जाकर जलाया जाएगा. कचरे को ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा. सभी कचरे को 12 हैडार्डस वेस्ट कंटेनर से पीथमपुर ले जाया जाएगा. दरअसल, कोर्ट में सुनवाई के बाद आए निर्णय के बाद से यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से कचरा हटाने की तैयारी की जा रही थी. इसको लेकर बीच में विवाद की भी स्थिति बनी हुई थी. लेकिन हाई कोर्ट के आदेश के बाद इसे निस्तारण के लिए पीथमपुर ले जाने की तैयारी पूरी हो गई है. इस बीच आज से पुलिस की निगरानी में यह कार्य शुरू हो गया. यह पूरा कचरा पीथमपुर की एक औद्योगिक अपशिष्ट निपटान इकाई में नष्ट किया जाएगा. मध्य प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट की फटकार के बाद ये एक्शन लिया है. एक सप्ताह पहले ही MP हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने भोपाल में फैक्ट्री साइट से कचरा न हटाए जाने पर सवाल उठाए थे. अदालत ने सरकार से पूछा था कि लगातार निर्देश दिए जाने के बाद भी कचरे का निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है? जबकि इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट भी निर्देश जारी कर चुका है. सुनवाई के दौरान HC ने कहा था कि ‘निष्क्रियता की स्थिति’ एक और त्रासदी का कारण बन सकती है. सुबह-सुबह फैक्ट्री पहुंचे GPS से लैस ट्रक जहरीले कचरे को इंदौर ले जाने के लिए रविवार सुबह GPS से लैस आधा दर्जन ट्रक यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री साइट पर पहुंचे. इनके साथ लीक प्रूफ कंटेनर भी थे. मौके पर PPE किट पहने कर्मचारी, भोपाल नगर निगम के कर्मचारी, पर्वायरण एजेंसियों के लोग, डॉक्टर्स और कचरा डिस्पोज करने वाले विशेषज्ञ भी शामिल थे. फैक्ट्री के आसपास पुलिकर्मियों की तैनाती भी की गई थी. एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक प्लान के तहत जहरीले कचरे को इंदौर के पीथमपुरा में जलाया जाएगा. यह इलाका राजधानी भोपाल से करीब 250 किलोमीटर दूर है.   बनाया जा रहा 250 KM लंबा कॉरिडोर मध्य प्रदेश के गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह का के मुताबिक पीथमपुरा तक जहरीला कचरा पहुंचाने के लिए 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने कचरे के परिवहन और उसे डिस्पोज करने की तारीख नहीं बताई. लेकिन सूत्रों का कहना है कि 3 जनवरी तक कचरा पीथमपुरा पहुंच जाएगा. 3 महीने में जलकर राख हो जाएगा कचरा! डायरेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने एजेंसी को बताया कि शुरुआत में कचरे का कुछ हिस्सा पीथमपुर की कचरा निपटान इकाई में जलाया जाएगा और अवशेष (राख) की वैज्ञानिक जांच कर पता लगाया जाएगा कि उसमें कोई हानिकारक तत्व तो नहीं बचा है. डायरेक्टर ने कहा,’अगर सब कुछ ठीक रहा तो 3 महीने में कचरा जलकर राख हो जाएगा. लेकिन अगर जलने की गति धीमी रही तो इसमें 9 महीने तक लग सकते हैं. कचरा जलाने वाली ‘भट्टी’ से निकलने वाले धुएं को 4 लेयर फिल्टर्स से गुजारा जाएगा ताकि आसपास की हवा प्रदूषित न हो. इस प्रोसेस का हर पल रिकार्ड रखा जाएगा.’ डबल लेयर के अंदर किया जाएगा डिस्पोज स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक,’एक बार जब कचरे को जला दिया जाएगा और हानिकारक तत्वों से मुक्त कर दिया जाएगा तो राख को दो-परत वाली मजबूत ‘झिल्ली’ से ढक दिया जाएगा और ‘लैंडफिल’ में दफना दिया जाएगा. ऐसा इसलिए किया जाएगा कि ताकि सुनिश्चित हो सके कि कचरा किसी भी तरह से मिट्टी और पानी के संपर्क में नहीं आएगा.’ पीथमपुरा के आसपास के लोग कर रहे विरोध हालांकि, इस पूरी प्रोसेस का एक दूसरा पहलू भी है. पीथमपुरा के आसपास के लोग और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समूह वहां कचरा जलाने का विरोध कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि 2015 में पीथमपुर में परीक्षण के तौर पर 10 टन यूनियन कार्बाइड का कचरा नष्ट किया गया था. इससे कारण आसपास के गांवों की मिट्टी, जमीन का पानी और पानी के सोर्स प्रदूषित हो गए. हालांकि, स्वतंत्र कुमार सिंह ने इस दावे को खारिज कर दिया. हाई कोर्ट ने सरकार को लगाई थी फटकार बता दें कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 3 दिसंबर को 4 सप्ताह के अंदर जहरीले कचरे को फैक्ट्री से शिफ्ट करने की डेडलाइन दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि यह खेदजनक स्थिति है. अदालत ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो अदालत की अवमानना के तहत कार्रवाई की जाएगी. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एसके कैत और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजनल बैंच ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था,’हम समझ नहीं पा रहे हैं कि समय-समय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद भी जहरीले कचरे को हटाने का काम शुरू क्यों नहीं हुआ है, जबकि कचरा हटाने के लिए 23 मार्च 2024 की योजना पर काम किया जाना था.’ इस मुद्दे को लेकर अब 6 जनवरी को हाई कोर्ट में अगली सुनवाई होगी. पांच हजार से ज्यादा लोंगों की हुई थी मौत बता दें कि 2 दिसंबर 1984 की रात भोपाल की यूनियन कार्बाइड कीटनाशक फैक्ट्री से जहरीली गैस मिथाइल आइसोसाइनाइट (MIC) का रिसाव हुआ था. इस हादसे में 5,479 लोगों की मौत हो गई थी. गैस लीक की वजह से पांच लाख से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ था. जिसका असर आज भी कई लोगों पर नजर आता है. इस हादसे के बाद कई लोग विकलांगता के शिकार हो गए थे. कचरा निपटारा मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? 2004 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई. कोर्ट ने भारत सरकार के रसायन और पेट्रोकेमिकल्स विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के विशेषज्ञों ने 2005 में कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए गुजरात के अंकलेश्वर में भरूच एनवायरो-इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (बीईआईएल) के स्वामित्व वाले एक विश्व स्तरीय भस्मक की पहचान की गई. लेकिन 2007 में गुजरात में विरोध प्रदर्शन और 2009 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, … Read more

मुख्यमंत्री ने कहा – बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की ‘मन की बात’ में  बस्तर ओलंपिक आयोजन की प्रशंसा बस्तर ओलंपिक एक ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का हो रहा संगम: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों की ओर से जताया आभार मुख्यमंत्री ने कहा – बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात की 117वीं कड़ी में देश को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित बस्तर ओलंपिक-2024 की प्रशंसा की। मोदी ने कहा पहली बार हुए बस्तर ओलंपिक से बस्तर में नई क्रांति जन्म ले रही है। मेरे लिए यह बहुत ही खुशी की बात है कि बस्तर ओलंपिक का सपना साकार हुआ है। यह ओलंपिक उस क्षेत्र में हो रहा है जो जगह कभी माओवादी हिंसा का गवाह रहा है। मोदी ने कहा कि बस्तर ओलंपिक का शुभंकर है वनभैंसा और पहाड़ी मैना – इसमें बस्तर की समृद्ध संस्कृति की झलक दिखती है। इस बस्तर खेल महाकुंभ का मूलमंत्र है, ‘करसाय ता बस्तर, बरसाय ता बस्तर’ यानी खेलेगा बस्तर, जीतेगा बस्तर।   प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर ओलंपिक-2024 की सराहना करते हुए कहा कि पहली ही बार में बस्तर ओलंपिक में बस्तर संभाग के 7 जिलो के एक लाख 65 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं युवाओं के संकल्प की गौरव गाथा है। एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, वेटलिफ्टिंग, कराटे, कबड्डी, खो-खो और बॉलीवॉल हर खेल में हमारे युवाओं ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में बस्तर ओलंपिक के प्रतिभागियों के उत्साह का भी जिक्र किया। उन्होंने बस्तर की कारी कश्यप का जिक्र करते हुए कहा कि एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है, वे कहती हैं बस्तर ओलंपिक ने हमें खेल का मैदान नहीं जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सुकमा की पायल कवासी जी की बात भी कम प्रेरणादायक नही है, जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पायल जी कहती हैं कि अनुशासन और कड़ी मेहनत से जीवन में कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर के दोरनापाल में रहने वाले पुनेम सन्ना की कहानी को नए भारत की प्रेरक कथा बताते हुए कहा कि एक समय नक्सलियों के प्रभाव में आए पुनेम जी आज व्हीलचेयर पर दौड़कर मेडल जीत रहे हैं, उनका साहस और हौसला हर किसी के लिए प्रेरणा है। कोंडागांव के तीरंदाज रंजू सोरी जी को बस्तर यूथ आइकॉन चुना गया है, उनका मानना है बस्तर ओलंपिक दूरदराज के युवाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर दे रहा है। बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल आयोजन नहीं यह ऐसा मंच है जहां विकास और खेल का संगम हो रहा है, जहां हमारे युवा अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं और एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बस्तर ओलंपिक के आयोजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने आह्वान किया कि ऐसे खेल आयोजन को प्रोत्साहित करें और स्थानीय खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें। खेल से न केवल शारीरिक विकास होता है, बल्कि यह खेल भावना के विकास के द्वारा समाज को जोड़ने का भी एक सशक्त एवं प्रभावकारी माध्यम है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर ओलंपिक की प्रशंसा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार बस्तर में बदलाव और यहां के लोगों के जीवन में खुशहाली लाने दृढ़संकल्पित है। बस्तर ओलंपिक में 1.65 लाख से अधिक लोगों का प्रतिभागी होना ओलंपिक की सफलता को दर्शाता है। बस्तर में अब बंदूक की आवाज नहीं, खेलों का शोर सुनाई देता है, हंसते-खेलते लोगों के चेहरे दिखाई देते हैं। निश्चित ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस प्रोत्साहन और विश्वास से हमारी सरकार को बस्तर की प्रगति के लिए कार्य करने की नई ऊर्जा मिलेगी, साथ ही बस्तरवासियों का मनोबल बढ़ेगा। लोगों के उत्साह ,ऊर्जा और सहभागिता ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। यह आयोजन भविष्य में भी खेल और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को और मजबूती प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन यह सिद्ध करता है कि शांति, विकास और सामूहिक प्रयासों से प्रत्येक चुनौती का सामना किया जा सकता है।

अब प्रदेश सरकार अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी से देगी जनपद व ग्राम पंचायतों के कर्मचारियों को सैलरी, कबसे होगा लागू, जाने

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने जनपद और ग्राम पंचायतों के अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन-भत्ते और मानदेय का भुगतान करने के लिए अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी की राशि का उपयोग करने के नए नियम जारी किए हैं। यह कदम पंचायत राज संस्थाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा। यह नियम 20 जनवरी से अमल होना शुरू हो जाएगा। मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 75 के तहत स्टाम्प ड्यूटी पर एक प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है। इस राशि का उपयोग पंचायती राज संस्थाओं के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों और मानदेय का भुगतान करने के लिए किया जाएगा। यह कदम पंचायत संस्थाओं को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया है, जिससे पंचायतों के कार्यों में किसी भी तरह की कोई रुकावट न आ सके। राशि का उपयोग कैसे किया जाएगा? नए नियमों के तहत अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी से प्राप्त राशि का प्रमुख उपयोग जनपद पंचायत के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों के लिए किया जाएगा। इसके अलावा जनपद पंचायत के पदाधिकारियों के मानदेय का भी भुगतान इसी राशि से किया जाएगा। ग्राम पंचायतों के रोजगार सहायकों, सचिवों और पदाधिकारियों के मानदेय और वेतन का भुगतान भी इसी राशि से होगा। बचत राशि का होगा उपयोग अतिरिक्त राशि बचती है, तो उसे जनपद और ग्राम पंचायतों के अवसंरचना कार्यों में खर्च किया जाएगा। यह राशि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जनसंख्या के आधार पर पंचायतों को अंतरित की जाएगी, जिससे पंचायतों को बेहतर वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

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