LATEST NEWS

मध्य प्रदेश में वर्ष 2030 तक कुल बिजली की खपत के 50% हिस्से की पूर्ति सौर, पवन और जल विद्युत से करने का लक्ष्य रखा

भोपाल  मध्य प्रदेश में वर्ष 2030 तक कुल बिजली की खपत के 50 प्रतिशत हिस्से की पूर्ति सौर, पवन और जल विद्युत से करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सौर ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब सरकार ने तय किया है कि पांच मेगावाट तक का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वालों से उत्पादित बिजली खरीदी जाएगी। इतना ही नहीं, परियोजना लागत पर 30 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा। इसके लिए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के कुसुम सी योजना के प्रस्ताव पर गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दिल्ली मेट्रो को दी जा रही बिजली वर्ष 2012 में प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 500 मेगावाट थी। वर्तमान में यह सात हजार मेगावाट हो गई है, जो राज्य की कुल ऊर्जा क्षमता का 21 प्रतिशत है। रीवा सौर ऊर्जा परियोजना से दिल्ली मेट्रो को बिजली दी जा रही है तो अप्रैल 2024 से भारतीय रेल को प्रतिदिन 195 मेगावाट बिजली दी जा रही है। इसका उपयोग वह गोवा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में ट्रेनों के संचालन में कर रहा है। दिन में उत्पादित इस ऊर्जा का उपयोग अधिक से अधिक करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी औद्योगिक इकाइयों को दिन में खपत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। एक अप्रैल 2025 से घरेलू उपभोक्ताओं को भी दिन में विद्युत की खपत पर ऊर्जा प्रभार में 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस तरह के अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं। अब कुसुम सी योजना में पांच मेगावाट तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित बिजली सरकार खरीदेगी। 30 प्रतिशत तक अनुदान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना का शिलान्यास होने के बाद इसे प्रशासकीय स्वीकृति के लिए कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 3 हजार से ज्यादा गांवों को मिलेगा लाभ परियोजना से श्योपुर, भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, आगर, इंदौर, धार, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर जिले में पीने के पानी और सिंचाई की व्यवस्था होगी। इसका लाभ प्रदेश के 3,217 ग्रामों को लाभ मिलेगा। मालवा और चंबल क्षेत्र में छह लाख 13 हजार 520 हेक्टेयर में सिंचाई होगी और 40 लाख की आबादी को पेयजल उपलब्ध होगा।

MP में जमीन रजिस्ट्री पर बड़ा बदलाव, 24 घंटे स्लॉट, उसी दिन रजिस्ट्री; एक दिन का भी इंतजार नहीं

भोपाल मध्य प्रदेश में घर प्लॉट की रजिस्ट्री को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इस नए सिस्टम के तहत अब लोगों को घर प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. दरअसल, एमपी में रेलवे के तत्काल टिकट सिस्टम की तरह घर-प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भी तत्काल सिस्टम लागू होने जा रहा है. यह सिस्टम आने वाले तीन महीने में शुरू हो जाएगा. इस सुविधा के शुरू हो जाने से न तो पंजीयन कार्यालय जाने की जरूरत पड़ेगी और न ही स्लॉट के लिए इंतजार करना पड़ेगा. बल्कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद स्लॉट की औपचारिकता पूरी होने पर तत्काल रजिस्ट्री हो जाएगी. देना होगा अतिरिक्त चार्ज इसके लिए प्रॉपर्टी खरीदने वाले को अतिरिक्त चार्ज देना होगा. हालांकि यह चार्ज कितना होगा, यह तय नहीं हुआ है. लेकिन माना जा रहा है कि यह एक्स्ट्रा चार्ज 3000 रुपए तक हो सकता है. बताते चले कि छत्तीसगढ़ में तत्काल रजिस्ट्री के लिए 25 हजार रुपए चार्ज लगता है. जबकि गोवा में तत्काल रजिस्ट्री के लिए 50 हजार से 2 लाख रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ता है. इन राज्यों में है सबसे अधिक फीस गौरतलब है कि गोवा और छत्तीसगढ़ के अलावा कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में भी लोगों को तत्काल रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध है. लेकिन इन प्रदेशों में तत्काल रजिस्ट्री की फीस बहुत अधिक ली जाती है. पंजीयन से जुड़े अधिकारियों की मानें तो मध्य प्रदेश में बाकि राज्यों की तुलना में बहुत कम फीस लगेगी. एमपी में तत्काल रजिस्ट्री की सुविधा लागू होने के बाद ऑनलाइन ही स्लॉट बुक हो जाएगा और उसी दिन रजिस्ट्री भी हो जाएगी. प्रकिया जैसे ही पूरी होगी वैसे ही रजिस्ट्री का पीडीएफ आपके मोबाइल पर चला जाएगा. जानिए क्या है रजिस्ट्री का प्रोसेस जिल जिले में जमीन खरीद-फरोख करनी होगी, उस जिले के पंजीयन कार्यलम में कम से कम एक दिन पहले स्लॉट बुक करना होता है. यह स्लॉट सरकार के चिह्नित सर्विस प्रोवाइडर के जरिए बुक होता है. इसके अगले दिन दोनों पक्षों को गवाहों और दस्तावेजों के साथ हाजिर होना पड़ता है. ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग के लिए भी एक दिन पहले सर्विस प्रोवाइडर के जरिए स्लॉट बुक करना होता है. इसके बाद इसकी डिटेल रजिस्टार के लॉग इन पर चली जाएगी. इसके बाद अगले दिन निर्धारित समय पर संपदा-2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जुड़ना होता है. लेकिन इसमें दोनों पक्ष का एक जगह-एक साथ होना अनिवार्य होता है. तत्काल बुकिंग की प्रकिया तत्काल स्लॉट बुकिंग के लिए आईजी पंजीयन कार्यालय में एक सेंटर बनाया जा रहा है. इसमें तत्काल रजिस्ट्री के लिए अलग टीम बनाई जाएगी. शुरुआत में तत्काल रजिस्ट्री प्रकिया के लिए 5 सब-रजिस्ट्रार तैनात रहेंगे. बाद में डिमांड को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है. जो व्यक्ति तत्काल स्लॉट बुक करेगा, उसे ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से जोड़ा जाएगा. तत्काल रजिस्ट्री की सबसे खास बात यह है कि इसके जरिए दुनिया के किसी भी कोने से उसी दिन रजिस्ट्री संभव हो सकेगी. तीन तरीके से हो सकेगी रजिस्ट्री… तत्काल के लिए पंजीयन ऑफिस में बनेगा अलग सेटअप 1. पंजीयन कार्यालय से : जिस जिले में जमीन की खरीद-फरोख्त करना होती है, उस जिले के पंजीयन कार्यालय में कम से कम एक दिन पहले स्लॉट लेना होता है। सरकार द्वारा चिह्नित सर्विस प्रोवाइडर के जरिए स्लॉट बुक होता है। अगले दिन दोनों पक्षों को गवाहों के साथ दस्तावेज के साथ उपस्थित होना पड़ता है। 2.ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग से एक दिन पहले सर्विस प्रोवाइडर के माध्यम से स्लॉट बुक करना होता है। यह सब रजिस्टार के लॉगइन पर चला जाएगा। अगले दिन तय समय पर संपदा-2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन जुड़ना होता है। इसमें दोनों पक्ष का एक जगह एक साथ होना अनिवार्य होता है। 3. तत्काल स्लॉट से : इसके लिए आईजी पंजीयन कार्यालय में एक सेंटर बनाया जा रहा है। इसमें तत्काल रजिस्ट्री के लिए अलग टीम रहेगी। शुरुआत में 5 सब-रजिस्ट्रार तैनात रहेंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। जो व्यक्ति तत्काल स्लॉट बुक करेगा, वह ऑनलाइन वीडियो के जरिए जुड़ जाएगा। ये फायदे… 1. ऑनलाइन ही स्लॉट बुक हो जाएगा और उसी दिन रजिस्ट्री भी हो जाएगी। 2. प्रक्रिया पूरी होते ही रजिस्ट्री की पीडीएफ आपके मोबाइल पर होगी। देश में प्रदेश में यह व्यवस्था है अभी ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से रजिस्ट्री की सुविधा है। हमारा प्रयास है कि लोगों को रजिस्ट्री के लिए एक दिन का भी इंतजार न करना पड़े। – स्वप्नेश शर्मा, वरिष्ठ जिला पंजीयक भोपाल तत्काल में इस तरह होगी प्रक्रिया जो भी व्यक्ति तत्काल रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुक करेगा, वह संपदा 2 पोर्टल के जरिए ऑनलाइन वीडियो से जुड़ जाएगा। इसमें जमीन बेचने वाला और खरीदने वाला, दोनों पक्ष एक साथ एक ही जगह होना अनिवार्य रहेगा। उन्हें अपने साथ अपना पहचान पत्र भी रखना होगा। लॉगइन करते ही ही संबंधित पक्ष के आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। यह ओटीपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सब-रजिस्ट्रार को बताना होगा। ओटीपी के सत्यापित होते ही रजिस्ट्री के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। सब कुछ सही होने पर रजिस्ट्री पूरी हो जाएगी।

एम्स भोपाल ने किया देश का दूसरा सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट

 भोपाल  एम्स भोपाल ने बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने हाल ही में एक सात वर्षीय बच्ची का सफल हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है, जो रिलेप्स्ड एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (बाल्य रक्त कैंसर) से पीड़ित थी। पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है एम्स भोपाल यह सफल ऑपरेशन करने वाला दूसरा अस्पताल बन गया है। इसके पहले एम्स दिल्ली में ऐसा प्रत्यारोपण किया जा चुका है। यह जटिल प्रक्रिया एम्स भोपाल के चिकित्सा ऑन्कोलॉजी और हीमेटोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव ढींगरा और डॉ. सचिन बंसल के नेतृत्व में की गई। बच्ची का इलाज बाल्य आन्कोलाजी विभाग में डॉ. नरेंद्र चौधरी की देखरेख में हो रहा था। ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के भाई को डोनर के रूप में चुना गया, जो आधे एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) में मेल खाते थे। क्या है हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट एम्स के हीमेटोलाजी विभाग के डा. गौरव ढींगरा ने बताया कि यह सामान्य बोन मैरो ट्रांसप्लांट से कई गुना अधिक जटिल प्रक्रिया है। इसमें रोगी को आधे एचएलए मिलान वाले डोनर से स्टेम सेल दिए जाते हैं। जहां एक तरफ मैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट में डोनर और रिसीवर के 12 के 12 जीन मेल खाते हैं और सफलता दर 60 फीसद होती है, वहीं हापलो आइडेंटिकल में सिर्फ छह जीन ही मेल खाते हैं। ट्रांसप्लांट के सफल होने की दर सिर्फ 30 प्रतिशत रहती है। भाई को डोनर के रूप में चुना गया बच्ची का इलाज एम्स भोपाल के बाल्य आन्कोलाजी विभाग में डॉ. नरेंद्र चौधरी की देखरेख में हो रहा था। ट्रांसप्लांट के लिए मरीज के भाई को डोनर के रूप में चुना गया, जो आधे एचएलए (ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन) में मेल खाते थे। एम्स के हीमेटोलाजी विभाग के डॉ. गौरव ढींगरा ने बताया कि यह सामान बौनमेरौ ट्रांसप्लांट से कई गुना अधिक जटिल प्रक्रिया है। जहां एक तरफ मैच्ड बोनमैरो ट्रांसप्लांट में 12 के 12 जीन डोनर और रिसीवर के मेल खाते हैं। इसमें भी सफलता दर 60 फीसदी होती है। हेप्लो आइडेंटिकल में सिर्फ छह जीन ही मेल खाते हैं। इस ट्रांसप्लांट के सफल होने की दर सिर्फ 30 प्रतिशत के करीब रहती है। ऐसे हुआ प्रत्यारोपण सबसे पहले पीड़ित बच्चे के भाई से स्टेम सेल निकाले गए। इसके बाद बच्चे को फुल बाडी रेडिएशन दिया गया। इससे उसकी बाडी इंफेक्शन मुक्त और इम्यूनिटी भी बेहद कम हो जाए। इससे रिसीवर की बाडी डोनर से आए स्टेम सेल को खत्म नहीं कर पाती है। इसके साथ ध्यान रखा गया कि डोनर के स्टेम सेल रिसीवर के सेल्स को मारने का कार्य न करें। यह एक बेहद और बहु स्तरीय प्रक्रिया है। इसमें कई फैक्टर्स को एक साथ निगरानी करना होता है। क्या है हापलो आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट हापलो-आइडेंटिकल बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें रोगी को आधे एचएलए मिलान वाले डोनर से स्टेम सेल दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया उन रोगियों के लिए एक आशा की किरण है, जिनके लिए पारंपरिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट उपलब्ध नहीं है। मरीज को माइलो-अब्लेटिव कंडीशनिंग रेजिमेन के तहत संपूर्ण शरीर की रेडियोथेरेपी (टोटल बाडी इरैडिएशन) दी गई, जिसे रेडिएशन आन्कोलाजी विभाग के डॉ. सैकत दास, डॉ. विपिन खराडे और भौतिक विज्ञानी (आरएसओ) अवनीश मिश्रा द्वारा सफलतापूर्वक संचालित किया गया। रक्त कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाएगा     यह एम्स भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने से यह स्पष्ट होता है कि हमारे संस्थान में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह बच्चों में रक्त कैंसर के इलाज में एक नई उम्मीद जगाएगा। – प्रो. डॉ. अजय सिंह, कार्यपालक निदेशक, एम्स भोपाल  

चीन का ऐलान तिब्‍बत की सबसे लंबी नदी यारलुंग त्‍सांगपो पर बांध बनाएगा, थ्री जॉर्ज बांध से 3 गुना ज्‍यादा बिजली पैदा होगी

बीजिंग  चीन की सरकार ने ऐलान किया है कि वह तिब्‍बत की सबसे लंबी नदी यारलुंग त्‍सांगपो पर महाशक्तिशाली बांध बनाने जा रही है। इस बांध से चीन के धरती की स्‍पीड को प्रभावित करने वाले थ्री जॉर्ज बांध से 3 गुना ज्‍यादा बिजली पैदा होगी। चीन की सरकारी न्‍यूज एजेंसी शिन्‍हुआ ने बुधवार को इसकी जानकारी दी है। चीनी मीडिया का कहना है कि यह बीजिंग के लिए इंजीनियरिंग की बहुत बड़ी चुनौती बनने जा रहा है। चीन की सरकार इस बांध को बनाने के लिए 137 अरब डॉलर खर्च करने जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह चीनी बांध धरती पर चल रहे सिंगल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर के किसी भी प्राजेक्‍ट को बहुत पीछे कर देगा। चीन जिसे यारलुंग त्‍सांगपो नदी कहता है, उसे भारत में ब्रह्मपुत्र नदी कहा जाता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस दैत्‍याकार बांध का हथियार की तरह से इस्‍तेमाल करके भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में कभी भी बाढ़ ला सकता है। करीब 2900 क‍िमी लंबी ब्रह्मपुत्र नदी भारत में आने से पहले तिबब्‍त के पठार से होकर गुजरती है। यह नदी तिब्‍बत में धरती की सबसे गहरी खाई बनाती है। तिब्‍बती बौद्ध भिक्षु इसे बहुत पवित्र मानते हैं। चीन इस बांध को भारत की सीमा करीब अपने भयंकर बारिश वाले इलाके में बनाने जा रहा है। चीन का अनुमान है कि इस बांध से 300 अरब किलोवाट घंटे बिजली हर साल मिलेगी। वहीं अभी बिजली पैदा करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा बांध कहे जाने वाला चीन थ्री जॉर्ज हर साल 88.2 अरब किलोवाट घंटे बिजली पैदा करता है। चीन के हुबई प्रांत में स्थित थ्री जॉर्ज बांध यांगजी नदी पर बनाया गया है। धरती की स्‍पीड को प्रभावित कर रहा चीन का बांध थ्री जॉर्ज बांध में 40 अरब क्‍यूबिक मीटर पानी है और यह धरती की घूमने की रफ्तार को भी प्रभावित कर रहा है। इसकी वजह से धरती की घूमने की गति में हर दिन 0.06 माइक्रोसेकंड बढ़ रहा है। इससे दुनियाभर के वैज्ञानिक काफी चिंत‍ित हैं। इस बांध को सबसे पहले साल 1919 में चीन के पहले राष्‍ट्रपति सुन यात सेन ने बनाने का प्रस्‍ताव दिया था। उन्‍होंने कहा था कि इससे जहां बाढ़ में कमी आएगी, वहीं दुनिया के सामने यह चीन के ताकत का प्रतीक बनेगा। चीन अब तिब्‍बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर नया विशालकाय बांध बनाने जा रहा है। चीन का इरादा है कि इस बेहद जटिल इंजीनियरिंग प्राजेक्‍ट को पूरा करने के लिए चार से लेकर छह तक 30 किमी लंबी सुरंग बनानी होगी। चीन को यह सुरंग नामचा बरवा पहाड़ के अंदर बनानी होगी ताकि महाशक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी के आधे पानी को डायवर्ट किया जा सके। यही नहीं जिस जगह पर यह बांध बनाया जाना है, वहां भूकंप आने का काफी खतरा रहता है। चीन का यह बांध जब पूरा हो जाएगा तो इससे 30 करोड़ लोगों को आसानी से हर साल बिजली दी जा सकेगी। चीन का दावा है कि इस बांध को बनाने के लिए पर्यावरण के मानकों का पूरा ध्‍यान रखा जाएगा। भारत और बांग्‍लादेश दोनों को चीन के बांध से खतरा चीन ने यह नहीं बताया है कि तिब्बत में इस बांध को बनाने का काम कब शुरू होगा और ठीक-ठीक किस जगह पर इसे बनाया जाएगा। चीन इस ऐलान से भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा हा सकता है। यह न केवल सुरक्षा के लिहाज से बल्कि पर्यावरण और आजीव‍िका के लिए है। ब्रह्मपुत्र नदी के पानी पर भारत और बांग्‍लादेश में करोड़ों लोग जीवन बिताते हैं। बांग्‍लादेश में इसे सूरमा नदी कहा जाता है। चीन अगर पानी रोकता है तो इन दोनों देशों में सूखा आ सकता है और अगर अचानक से पानी छोड़ता है तो बाढ़ आ सकती है।

भाजपा को 2244 करोड़, BRS को मिला कांग्रेस से ज्यादा चंदा, जानें किस पार्टी को मिला कितना डोनेशन

नई दिल्ली राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी शेयर कर की है। ECI द्वारा जारी डाटा के मुताबिक 2023-2024 में BJP को अन्य पार्टियों मुकाबले 2,244 करोड़ का चंदा मिला है। पिछले 10 साल से केंद्र की सत्ता पर काबिज BJP को पिछले साल के मुताबिक तीन गुना ज्यादा चंदा मिला है। इसके अलावा कांग्रेस को 255 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला है। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस की बात करें तो उसे भी पिछले साल के मुकाबले तगड़ा मुनाफा हुआ है। पार्टी को पिछले साल 79 करोड़ रुपये का चंदा मिला था, जबकि इस साल 255 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। चुनाव आयोग ने जारी की है रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध 2023-24 की कंट्रीब्यूशन रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि इसी ट्रस्ट ने कांग्रेस को 156.4 करोड़ रुपए दिए। 2023-24 में BJP को मिले चंदे का लगभग एक तिहाई और कांग्रेस को मिले चंदे का आधे से ज्यादा हिस्सा प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से आया है। इसके अलावा 2022-23 में प्रूडेंट को चंदा देने वालों में मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा लिमिटेड, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, आर्सेलर मित्तल ग्रुप और भारती एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल थीं। 2023-24 के लिए प्रूडेंट ने अभी अपने चंदा देने वालों की लिस्ट जारी नहीं की है। क्षेत्रीय पार्टियों ने भी दी है चंदे की जानकारी बता दें कि देश की कुछ क्षेत्रीय पार्टियों ने भी अपनी मर्जी से चंदे का हिसाब किताब दिया है और बताया है कि उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए कितना चंदा मिला है। इनमें बीआरएस भी शामिल है, जिसे बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को 60 करोड़ रुपये और वाईएसआर कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए से 121.5 करोड़ रुपये मिले हैं। जेएमएम ने बॉन्ड के जरिए 11.5 करोड़ रुपये मिलने की घोषणा की है। कांग्रेस पार्टी को ट्रस्टों के जरिए 156 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। प्रूडेंट ने 2023-24 में BRS और YSRCP को 85 करोड़ रुपये और 62.5 करोड़ रुपये डोनेशन दिया था। आंध्र प्रदेश की वर्तमान सत्ताधारी पार्टी की बात करें तो टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये मिले। वहीं डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु: – बीजेपी को प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट से 723.6 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह पार्टी को मिले कुल चंदे का लगभग एक-तिहाई है। – कांग्रेस को प्रूडेंट ट्रस्ट से 156.4 करोड़ रुपये मिले, जो उसके कुल चंदे का आधे से अधिक है। – प्रूडेंट ट्रस्ट को 2022-23 में मेघा इंजीनियरिंग, सीरम इंस्टीट्यूट, आर्सेलर मित्तल और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों से चंदा मिला था। 2023-24 के लिए दानदाताओं की सूची अभी जारी नहीं की गई है। क्षेत्रीय दलों की स्थिति: – बीआरएस को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 495.5 करोड़ रुपये मिले। – वाईएसआर कांग्रेस को 121.5 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को 60 करोड़ रुपये और **जेएमएम** को 11.5 करोड़ रुपये का बॉन्ड मिला। – प्रूडेंट ट्रस्ट ने 2023-24 में बीआरएस को 85 करोड़ और वाईएसआर कांग्रेस को 62.5 करोड़ रुपये दिए। – टीडीपी को प्रूडेंट से 33 करोड़ रुपये का चंदा मिला। – डीएमके को ट्राइंफ इलेक्टोरल ट्रस्ट और जयभारत ट्रस्ट से 8 करोड़ रुपये मिले।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया साहिबजादों के बलिदान का स्मरण, वीर बाल दिवस पर बच्चों ने संभाली गुरूद्वारे की व्यवस्था

वीर बाल दिवस, देश-धर्म और समाज के लिए बलिदान होने की अद्वितीय घटना है – मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी ने करतारपुर साहिब के दर्शन और वीर बाल दिवस मनाने जैसी अनेक सौगातें दीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया साहिबजादों के बलिदान का स्मरण, वीर बाल दिवस पर बच्चों ने संभाली गुरूद्वारे की व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमीदिया रोड स्थित गुरुद्वारा पहुंच कर टेका मत्था भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “वीर बाल दिवस” पर दिन की शुरूआत हमीदिया रोड के गुरुद्वारे में मत्था टेककर, साहिबजादों के बलिदान के स्मरण के साथ की। उन्होंने गुरबाणी का श्रवण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने “जो बोले सो निहाल-सत् अकाल” के उद्घोष के साथ अपना संबोधन आरंभ करते हुए कहा कि आज का दिन भारत ही नहीं, संपूर्ण विश्व के लिए विशेष है। गुरु गोविंद सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन, धर्म-समाज और देश के लिए समर्पित कर दिया। ऐसे महान व्यक्तित्व का यह सौभाग्य था कि उनके परिवार ने भी स्वयं को देश पर बलिदान किया। यह इतिहास की अद्वितीय घटना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने करतारपुर साहब के दर्शन की व्यवस्था और आज के दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने जैसी अनेकों सौगातें समाज को प्रदान की हैं। आने वाली पीढ़ियों को वीर बालकों की शहादत से अवगत कराना जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन के विविध पक्षों को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जा रहा है। आने वाली पीढ़ियों को वीर बालकों की शहादत से अवगत कराने के लिए उनके दृढ़ संकल्प, वीरता और बलिदान का उल्लेख भी पाठ्य पुस्तकों में होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हमीदिया रोड द्वारा वीर बाल दिवस पर गुरुद्वारे की सभी व्यवस्थाएं बच्चों को सौंपने की पहल और बच्चों द्वारा पूरी जिम्मेदारी से किए जा रहे हैं दायित्व निर्वहन की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहादत की गाथा पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हमीदिया रोड द्वारा प्रकाशित पुस्तक “साहिब गुरु गोविंद सिंह जी के लख्ते जिगर चार साहिबजादे एवं माता गुजरी जी की लासानी शहादत की गाथा” का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लघु फिल्म “शहीदी गाथा” भी देखी। इस अवसर पर भोपाल महापौर श्रीमती मालती राय, सांसद आलोक शर्मा, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि सुनेहा बग्गा तथा सिख समाज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने इस कठिनाई को समझा और स्वामित्व योजना बनाई, मालिक को स्वामित्व दिलाया: शिवराज सिंह चौहान

भोपाल केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामित्व योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्र के संपत्ति मालिकों को संपत्ति का स्वामित्व दिलाया है। गुरुवार को राजस्थान के जोधपुर पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि गांव में लोगों के पास अपनी संपत्ति तो होती थी, मकान भी होता था, मकान के आसपास जमीन भी होती थी। लेकिन, इसका स्वामित्व उनके पास कागज पर या ऑन रिकॉर्ड नहीं होता था। इसी कारण उस संपत्ति का अन्य उपयोग नहीं हो सकता था। जैसे बैंक से लोन लेने के लिए इस संपत्ति का उपयोग नहीं हो सकता था। कई बार बिना नक्शा अथवा स्वामित्व के विवाद भी बहुत होते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस कठिनाई को समझा और स्वामित्व योजना बनाई। उस योजना के अंतर्गत जो संपत्ति मकान के रूप में गांव में है, उसके नक्शे बनाए जा रहे हैं, ड्रोन के माध्यम से आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उस संपत्ति का स्वामित्व दिया जा रहा है। कई राज्यों में यह काम तेजी से हो रहा है। उन्होंने किसानों के लिए केंद्र सरकार के कार्यों का ब्योरा देते हुए कहा कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने और किसानों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छह सूत्री रणनीति बनाई गई है। इसका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन की लागत घटाना, उत्पादन के ठीक दाम देना, कृषि का विविधीकरण करना, परंपरागत खेती के अलावा फूलों, फलों, सब्जियों, औषधि की खेती को बढ़ावा देना, नुकसान हो तो उसकी भरपाई करना है। इसके साथ ही जैविक तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश करना भी शामिल है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा किसानों को अच्छे बीज मिलें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आईसीआर काम कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसी साल 109 नए बीजों की किस्में जारी की है। पानी का बेहतर इंतजाम हो, इसके लिए नदी जोड़ो योजना बनाई गई है। इसके लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच समझौता हुआ है।

मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र स्मार्ट मीटर य़ोजना का प्रभावी संचालन कर रही, अब तक 9.20 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित

भोपाल डिजिटल इंडिया की दिशा में तेजी से बढ़ते हुए मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी स्मार्ट मीटर य़ोजना का प्रभावी संचालन कर रही है। अब तक पश्चिम मप्र में 9 लाख 20 हजार से ज्यादा स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं। सबसे ज्यादा स्मार्ट मीटर इंदौर, उज्जैन, रतलाम में लगाए गए हैं। मप्र पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर की प्रबंध निदेशक सुश्री रजनी सिंह ने बताया कि अत्याधुनिक स्मार्ट मीटरों की तेजी से स्थापना हो रही है। वर्तमान में इंदौर जैसे महानगर के अलावा उज्जैन, रतलाम जैसे अन्य बड़े नगर, जिला मुख्यालयों, नपा क्षेत्रों मे बिजली उपभोक्ताओं के यहां प्राथमिकतापूर्वक निःशुल्क स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। इंदौर शहर में अब तक 4 लाख से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उज्जैन शहर में करीब 82 हजार, रतलाम शहर में 81 हजार से ज्यादा स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। वहीं देवास शहर में 55 हजार, खरगोन शहर में 44250 स्मार्ट मीटर स्थापित हो चुके हैं। रतलाम, धार, झाबुआ, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, खंडवा, बड़वानी, आगर, बुरहानपुर क्षेत्र में अब भी स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक पश्चिम मप्र में 9.20 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इन मीटरों की स्थापना के बाद रीडिंग बिलिंग संबंधी विवादों में व्यापक कमी आई हैं, ये स्मार्ट मीटर बिजली कंपनी के “ऊर्जस” ऐप पर लाइव हैं। उपभोक्ता कहीं से भी अपने घर की “ऊर्जस” ऐप पर खपत देख सकता हैं। स्मार्ट मीटर से संबंद्ध उपभोक्ताओं की बिल भुगतान नहीं करने पर यदि बिजली बंद की जाती हैं, तो कैशलेस बिजली बिल भुगतान होने के तुरंत बाद बिजली ऑटोमेटिक चालू हो जाती है। उपभोक्ताओं को बिजली दफ्तर नहीं जाना होता, न ही किसी कर्मचारी को भुगतान रसीद दिखाने की जरूरत होती है।  

पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना की लागत 28 हजार 798 करोड़ और सैंच्य क्षेत्र 04 लाख 72 हजार 970 हेक्टेयर होगा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना के अंतर्गत प्रशासकीय स्वीकृति से शेष रही 16 परियोजनाओं के समूह को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इनकी लागत 28 हजार 798 करोड़ और सैंच्य क्षेत्र 04 लाख 72 हजार 970 हेक्टेयर होगा। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने बताया कि स्वीकृत परियोजना से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 10 जिले गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, इंदौर, देवास आगर मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ के 1865 ग्रामों के 4 लाख 73 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई क्षमता निर्मित होगी। साथ ही चंबल दाईं मुख्य नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिलों के 1205 ग्रामों में 3 लाख 62 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। मंत्री सिलावट ने बताया कि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना सह पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने के लिए सचिव भारत सरकार एवं दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव के बीच मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 28 जनवरी 2024 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह परियोजना केंद्र द्वारा वित्त पोषित है, जिसकी लागत का वहन 90% केंद्र और 10% राज्यों द्वारा किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि प्रयोजन अंतर्गत मध्यप्रदेश की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कुल अनुमानित लागत 35 हजार करोड़ आकलित की गई है। परियोजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश में कुल 21 परियोजना प्रस्तावित थी, जिनमें से पाडोन-एक एवं पाडोन-दो सिंचाई परियोजना के कमांड क्षेत्र को इकजाई कर पाडोन वृहत सूक्ष्म सिंचाई परियोजना एवं पावा सिंचाई परियोजना तथा कटीला सिंचाई परियोजना के कमांड क्षेत्र को इकजाई कर कटीला पावा वृहत सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, इस प्रकार 19 परियोजनाओं का कार्य सम्मिलित है। इनमें से 2 परियोजना उज्जैन जिले की चितावद वृहत सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति 2066.93 करोड़ रूपये 5 अक्टूबर 2023 को और सेवरखेड़ी, सिलारखेड़ी सिंचाई परियोजना के लिये 614.53 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। मंदसौर जिले की मल्हारगढ़ (शिवना) सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। शेष 16 परियोजनाओं को मंत्रि-परिषद द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इन परियोजनाओं को मिली प्रशासकीय स्वीकृति मध्यप्रदेश राज्य की परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये कुल अनुमानित लागत 35000 करोड़ आकलित की गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं में धनवाडी वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, नैनागढ बैराज वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, सोनपुर वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, कटीला-पवा वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, श्यामपुर बैराज वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, पार्वती कॉम्प्लेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, जेठला (वैलेंसिंग रिजरवायर) वृहद सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, कुम्भराज वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, पाडोन वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना (पाडोन-1 एवं पाडोन-2 बैराज), रंजीत सागर काम्पलेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, कालीसिंध कॉम्पलेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, लखुंदर काम्पलेक्स वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, बछौड़ा देपालपुर वृहद सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, सीकरी सुल्तानपुर मध्यम सूक्ष्म सिंचाई परियोजना, सोनचिरी मध्यम सूक्ष्म सिंचाई परियोजना एवं चम्बल नहर प्रणाली के नवीनीकरण और आधुनिकीकरण शामिल है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा -भारत की सनातन परम्परा की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह ने अपने साहिबजादों को बलिदान कर दिया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की सनातन परम्परा की रक्षा के लिए गुरू गोविंद सिंह ने अपने साहिबजादों को बलिदान कर दिया, परंतु वे झुके नहीं। साहिबजादों द्वारा देश और धर्म के लिए बलिदान हो जाना उनके अवतारी स्वरूप से हमें अवगत कराता है। मुगलों द्वारा क्रूरता की पराकाष्ठा करते हुए अल्पायु बालकों को शहीद कर देना सदियों बाद भी हमें झकझोर देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अमर बलिदानियों की पुण्य-स्मृतियों को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की परम्परा वर्ष 2022 से आरंभ की। वीर बलिदानियों की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राज्य शासन द्वारा भी जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। कीर्तन से हुआ शौर्य, वीरता, बलिदान और करूणा का प्रकटीकरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारत भवन में वीर बाल दिवस पर आयोजित साहिबजादों की शहादत गाथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कीर्तन जत्थे द्वारा साहिबजादों की शहादत गाथा प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कीर्तन के माध्यम से अभिव्यक्त शौर्य, वीरता, बलिदान और करूणा की भावनाओं के संवेदनशील और प्रभावशाली प्रस्तुती की सराहना की। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, सांसद श्री वी.डी. शर्मा, श्री हितानंद शर्मा, श्री राहुल कोठारी, सुश्री नेहा बग्गा सहित जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। मात्र 6 और 9 वर्ष की आयु में साहिबजादों ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए किए प्राण न्यौछावर उल्लेखनीय है कि गुरू गोविंद सिंह जी के वीर पुत्रों के अद्वितीय बलिदान और साहस के प्रति सम्मान प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन गुरू जी के छोटे साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। दोनों ही साहिबजादों को दीवार में जीवित चुनवा दिया गया था। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जब उन्होंने अपने प्राण न्यौछावर किए तब साहिबजादे जोरावर सिंह की आयु मात्र 9 वर्ष और साहिबजादे फतेह सिंह की आयु सिर्फ 6 वर्ष थी।  

मुख्यमंत्री साय ने कहा- देश को आजादी दिलाने में जनजातीय समाज के वीर सपूतों का अमूल्य योगदान

रायपुर हमारा देश और समाज हमेशा प्रगतिशील सोच के साथ आगे बढ़ेे, समाज की नई पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में तरक्की करे, उद्यमशीलता की तरफ बढ़े, इसके लिए समाज को निरंतर जागरूक होकर युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हमेशा इसी एकजुटता पर बल देते हैं। हम सब एकजुट रहेंगे और माँ भारती की सेवा करने संकल्पित रहेंगे तो हमारा प्रदेश और देश मजबूत होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर जिले के विकासखण्ड बगीचा के ग्राम घुघरी में आयोजित छत्तीसगढ़ स्तरीय नागवशी समाज के महासम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज के भगवान बिरसा मुंडा, गुण्डाधुर, रानी दुर्गावती, वीर नारायण जैसे वीर सपूतों ने अपनी वीरता से देश को आजादी दिलाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज की इन महान विभूतियों के गौरव को लोगों तक पहुंचाने एवं उनका मान बढ़ाने के लिए जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में गुम इन शहीदों के योगदान को सामने लाने के लिए  नवा रायपुर में जनजातीय योद्धाओं को समर्पित स्मारक का निर्माण किया जा रहा है। इसमें छत्तीसगढ़ के आदिवासी जन नायकों द्वारा लड़े गए 13 महान संग्रामों का वर्णन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर घुघरी में सामाजिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख, खड़ा नाला में पुल निर्माण, ढ़ोड़की में व्यपवर्तन योजना के जीर्णाेद्धार एवं बगीचा में एक करोड़ रुपये की लागत से मंगल भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने नागवंशी समाज की बहु प्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए घुघरी में उनकी देवभूमि को संरक्षित करने हेतु सामुदायिक वनाधिकार पट्टा प्रदान किया गया। इसके साथ ही मात्रात्मक त्रुटि के कारण वंचित रह गए 40 बच्चों को मुख्यमंत्री ने जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने नागवंशी समाज के आराध्य भगवान महादेव-पार्वती एवं नाग देव की पूजा कर प्रदेश की जनता के लिए सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा ही जनजातीय कल्याण और उत्थान के लिए सर्वप्रथम आदिमजाति कल्याण विभाग का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विशेष पिछड़ी जनजातीय लोगों के उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों के कल्याण हेतु बिजली, पानी, राशन वितरण, आवास, स्वास्थ्य, आयुष्मान कार्ड निर्माण आदि का कार्य किया जा रहा है। सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं विधायक पत्थलगांव श्रीमती गोमती साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार द्वारा प्रदेश के विकास को दुगुनी गति प्रदान की गई है। जनजातीय समाज के उत्थान के लिए हमारे जनजातीय समाज के मुख्यमंत्री द्वारा निरन्तर कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में सीतापुर विधायक श्री रामकुमार टोप्पो, जिला पंचायत उपाध्यक्ष उपेंद्र यादव, जनप्रतिनिधि कृष्ण कुमार राय, नागवंशी समाज के अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक  उपस्थित थे।

सरकार धान उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि देगी, एमपी कैबिनेट बैठक में लगी मुहर

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार धान उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 2000 रुपये प्रोत्साहन राशि देगी। विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने धान उत्पादक किसानों को बोनस देने का संकल्प लिया था। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट बैठक में हुए निर्णयों के बारे में जानकारी देते हुए कहा, किसान हित में यह बड़ा कदम उठाया गया है। केन- बेतवा, पार्वती, कालीसिंध और चंबल परियोजनाओं से जुड़ी 19 अन्य सिंचाई परियोजनाओं को कैबिनेट ने स्वीकृति दी है।   कैबिनेट में यह भी फैसला हुआ है कि मध्य प्रदेश में लोग ऑनलाइन जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बना सकेंगे। भारत के महा रजिस्ट्रार कार्यालय ने इसके लिए प्रारूप नियम तैयार किया है। इसी के आधार पर मध्य प्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम 2024 तैयार किया गया है। इसके अनुसार जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के डिजिटल रजिस्ट्रीकरण और इलेक्ट्रॉनिक का उपबंध किया गया है। इसमें गलत जानकारी देने पर कार्रवाई होगी। क्षिप्रा किनारे बनेगा 29 किमी लंबा घाट कैबिनेट बैठक में यह भी तय किया गया कि 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे 29 किलोमीटर लंबा घाट बनाया जाएगा। यह क्षिप्रा नदी के दायीं किनारे पर शनि मंदिर से नागदा बाय पास तक बनेगा। इसकी लागत 771 करोड रुपये आएगी।   मध्य प्रदेश कैबिनेट के अन्य अहम फैसले प्रदेश में 100 प्रतिशत कृषि क्षेत्र को संचित बनाए जाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। केन बेतवा, पार्वती कालीसिंध चंबल लिंक परियोजना की 19 में से 16 योजनाओं को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। जनजाति क्षेत्र के समेकित विकास के लिए धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत प्रदेश के 52 जिलों के आदिवासियों को लाभान्वित किया जाएगा। सभी पंचायत में अटल ग्रामीण सेवा सदन बनाए जाएंगे, जहां ग्रामीणों को सभी शासकीय योजनाओं की जानकारी मिलेगी। पॉलिटेक्निक यूनानी चित्र सहित शिक्षण संस्थानों में इंटर्नशिप करने वाले विद्यार्थियों किसी से बस्ती को महंगाई सूचकांक से जोड़ने का निर्णय भी बैठक में लिया गया है। इससे पहले प्रदेश के सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि हर पंचायत में पैक्स, सभी को रोजगार और सुव्यवस्थित सहकारी आंदोलन ही हमारा लक्ष्य है। सहकारिता को आगे बढ़ाने के लिए इसका विस्तार पंचायत स्तर पर करना होगा। सहकारिता के हर एक मूल भाव को आत्मसात करते हुए देश को समृद्ध बनाना ही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं। समृद्ध राष्ट्र के लिए समाज को जोड़ने की जरूरत है और समाज को जोड़ने का केवल एक ही प्रकल्प है सहकारिता। समाज का निर्माण सहकारिता के माध्यम से ही होता है। सभी की भागीदारी के साथ लक्ष्य को साधने का नाम ही सहकारिता है।

प्रदेश में स्थापित 11 के.वी. फीडर्स को सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किये जाने की स्वीकृति

मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2024 लागू किये जाने की स्वीकृति क्षिप्रा नदी के तट पर घाट निर्माण की स्वीकृति 11 के.वी. फीडर्स को सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किये जाने की स्वीकृति संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल नदी लिंक परियोजना का हुआ प्रशासकीय अनुमोदन मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक गुरूवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2024 लागू किये जाने की स्वीकृति दी है। महा-रजिस्ट्रार कार्यालय, भारत सरकार से प्राप्त प्रारूप नियम के अनुरूप मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2024 तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 1999 की विभिन्न धाराओं में संशोधन किया गया है। मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियम, 2024 के मुख्य बिंदुओं में जन्म और मृत्यु प्रमाण-पत्र के डिजिटल रजिस्ट्रीकरण और इलेक्ट्रॉनिक परिदान का उपबंध, रजिस्ट्रीकृत जन्म और मृत्यु का राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय डाटाबेस तैयार करना, दत्तक ग्रहण किये गये, अनाथ, परित्यक्त, सरोगेट बच्चे और एकल माता-पिता या अविवाहित माता से बच्चे के रजिस्ट्रीकरण प्रक्रिया को सुगम बनाया जाना आदि शामिल है। जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रारंभ की तारीख को या उसके पश्चात् जन्म लेने वाले किसी व्यक्ति के जन्म की तारीख और स्थान को प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण-पत्र उपयोगी है। किसी आपदा या महामारी में मृत्यु के त्वरित रजिस्ट्रीकरण और प्रमाण पत्र जारी करने के लिये विशेष “उप-रजिस्ट्रार” की नियुक्ति का उपबंध किया गया है। किसी जन्म या मृत्यु के 30 दिन के पश्चात् किंतु एक वर्ष के भीतर विलंबित सूचना की दशा में नोटरी या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य अधिकारी के समक्ष किसी शपथ-पत्र के स्थान पर स्व-अनुप्रमाणित दस्तावेज को प्रस्तुत करने का उपबंध किया गया है। किसी जन्म या मृत्यु के एक वर्ष के पश्चात् रजिस्ट्रार को विलंबित सूचना की दशा में आदेश करने वाले प्राधिकारी प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के स्थान पर जिला मजिस्ट्रेट या उपखंड मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का उपबंध किया गया है। लोकहित में जन शिकायत निवारण के लिए रजिस्ट्रार/जिला रजिस्ट्रार द्वारा की गई कार्यवाही से व्यथित होने पर अपील का प्रावधान है और उपबंधित शास्तियों में वृद्धि की गई हैं। प्रदेश में स्थापित 11 के.वी. फीडर्स को सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत किये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के कृषकों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रदेश में स्थापित 11 के.वी. फीडर्स को सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत (सोलराईजेशन) किये जाने की स्वीकृति दी गई। इसके क्रियान्वयन से किसान को सिंचाई के लिये दिन में बिजली उपलब्ध होगी, जिससे उनकी जीवन शैली व्यवस्थित हो सकेगी। सौर संयंत्र से 33/11 किलोवॉट विद्युत वितरण उप केन्द्रों पर स्थापित पॉवर ट्रांसफार्मर पर ओवर-लोडिंग और परिणामतः लो-वोल्टेज एवं पावर कट की समस्या कम होगी। साथ ही विद्युत उप केन्द्रों के उन्नयन पर आने वाले वित्तीय भार को बचाया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि कृषकों की सिंचाई आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति, उनके करीब सौर ऊर्जा का उत्पादन एवं आय के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए केन्द्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, (MNRE) द्वारा प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम- कुसुम) योजना लागू की गयी है। योजना के अंतर्गत सोलर संयंत्र स्थापना के लिए 1.05 करोड़ रूपये प्रति मेगावाट केन्द्रीय सहायता राशि दी जानी प्रावधानित है। प्रदेश में कुसुम-सी के अंतर्गत पृथक कृषि फीडर्स पर स्थापित कृषि पंप को विद्युत प्रदाय करने के लिए सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत (सोलराईजेशन) किया जायेगा। मंत्रि-परिषद द्वारा आगामी सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्षिप्रा नदी के तट पर शनि मंदिर से नागदा बायपास तक 29.215 कि.मी. लंबाई के घाट-निर्माण कार्य के लिये 778 करोड़ 91 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद द्वारा संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल नदी लिंक परियोजना के अंतर्गत परियोजना समूह की लागत 28,798 करोड़ 02 लाख रूपये, सैंच्य क्षेत्र 4 लाख 72 हजार 970 हेक्टेयर का प्रशासकीय अनुमोदन प्रदान किया गया। स्वीकृति परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में मालवा एवं चम्बल क्षेत्र के 10 जिले गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, इन्दौर, देवास, आगर-मालवा, शाजापुर एवं राजगढ़ में कुल 4.73 लाख हेक्टेयर नवीन सिंचित क्षेत्र और चम्बल की दाईं मुख्य नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिण्ड, मुरैना एवं श्योपुर के 1205 ग्रामों में 3.62 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। जनजातीय क्षेत्रों में धरती आबा-जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान प्रारंभ करने की सैधान्तिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, आयुष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास, पशु पालन एवं डेयरी, पर्यटन एवं जनजातीय कार्य विभाग की चिन्हित योजना अंर्तगत शत-प्रतिशत सेचुरेशन के लिए नवीन योजना धरती आबा- जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) प्रारंभ करने की सैधान्तिक स्वीकृति प्रदान की गई है। अन्य निर्णय मंत्रि-परिषद द्वारा आयुष विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय और स्वशासी आयुर्वेद/यूनानी/होम्योपैथी के 9 महाविद्यालयों में स्नातक प्रशिक्षु (इंटर्नशिप) एवं स्नातकोत्तर अध्येताओं की शिष्यवृत्ति एवं गृह चिकित्सकों के समेकित वेतन की वृद्धि को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोड़े जाने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।  

शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाना तंबाकू नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक : एमडी एनएचएम डॉ. सिडाना

तंबाकू नशा-मुक्ति के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं : एमडी एनएचएम डॉ. सिडाना युवाओं में तंबाकू सेवन की प्रवृति चिंताजनक, समन्वित प्रयास से निकालेंगे हल : एमडी एनएचएम डॉ. सिडाना शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाना तंबाकू नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक : एमडी एनएचएम डॉ. सिडाना राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम में राज्य स्तरीय स्मॉल वर्किंग ग्रुप की हुई बैठक भोपाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की प्रबंध संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने कहा कि युवाओं में तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति एक गंभीर समस्या है। बच्चों को बचपन में जो संस्कार मिलते हैं, वे जीवनभर उनके साथ रहते हैं। शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाना तंबाकू नियंत्रण के लिए अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सिडाना ने कहा कि एनएचएम, ‘उमंग कार्यक्रम’ में स्कूलों में तंबाकू नियंत्रण के लिए शिक्षा विभाग के साथ मिलकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगा। एनएचएम कार्यालय भोपाल में गुरूवार को राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत राज्य स्तरीय स्मॉल वर्किंग ग्रुप की बैठक में संचालित गतिविधियों, वर्तमान स्थिति और भविष्य की कार्य योजना पर मंथन किया गया। एम.डी. डॉ. सिडाना ने निर्देश दिए कि COTPA (सिगरेट्स एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट) और ToFEI (टोबैको-फ़्री एजूकेशनल इंस्टीट्यूशंस) गाइडलाइन्स का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये विभागीय समन्वय से प्रयास किये जाए। उन्होंने कहा कि तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जाए और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति के अनुरूप नशा मुक्ति अभियान में तंबाकू सेवन करने वालों को भी सहयोग प्रदान किया जाये। आयुष विभाग के वेलनेस कार्यक्रम से भी तंबाकू सेवन करने वालों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाये। वेलनेस गतिविधियाँ योग, ध्यान आदि मानसिक रूप से मजबूत बनाने और तंबाकू सेवन की लत से मुक्ति दिलाने में सहयोगी होंगी। एमडी एनएचएम ने जिलों में टीबी नियंत्रण सेल को तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रमों से समन्वय करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही नेशनल ओरल हैल्थ प्रोग्राम और राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत तंबाकू सेवन करने वालों की प्राथमिकता से स्क्रीनिंग करने को कहा। वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी, मध्यप्रदेश वालिंटियरी हेल्थ एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक मुकेश कुमार सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के राज्य स्तरीय स्मॉल वर्किंग ग्रुप के अधिकारी उपस्थित थे।  

प्रदेश के 10 शहरों को भिखारी मुक्त करने की मुहिम, उज्जैन पुलिस ने दो दर्जन भिक्षुकों को उठाया

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को भिखारियों से मुक्त शहर बनाने की कवायद शुरू हो गई है। समाज कल्याण विभाग ने इसके लिए तीन हजार भिखारियों को चिह्नित किया है, जिनका पुनर्वास किया जाना है। इनमें से 200 की पूरी प्रोफाइल बना ली गई है। प्रशासन भीक्षावृत्ति को हतोत्साहित करने के लिए भीख देने वालों पर भी जुर्माना लगाने की योजना बना रहा है। मप्र सामाजिक न्याय विभाग ने शहर में भिक्षुक गृह बनाने का प्रस्ताव भेजा है। इसको गैर सरकारी संगठनों की मदद से संचालित किया जाएगा। सामाजिक न्याय विभाग की ओर से बताया गया है कि फिलहाल भिक्षुक गृह शुरू करने के लिए निजी संस्था को जिम्मा दिया गया है। एक साल का समय लगेगा संस्था ने भवन की तलाश शुरू कर दी है। इसमें आदतन भिखारियों को रखकर उनको शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा। उनको रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे सक्षम बनकर मेहनत की कमाई से खुद का और परिवार का पालन पोषण कर सकें। बताया जा रहा है कि शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने में कम से कम एक साल का समय लगेगा। 141 भिखारी गोविंदपुरा क्षेत्र में भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त करने की कवायद चल रही है। भिक्षुक गृह के साथ आम लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जाएगा, जिससे शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त कराया जा सके। भोपाल शहर से भिक्षावृत्ति के काम में लगे जिन 200 लोगों की प्रोफाइल तैयार की गई है, उनमें सबसे अधिक 141 भिखारी गोविंदपुरा क्षेत्र में हैं। कई के आधार ही नहीं बने हैं टीटी नगर, एमपी नगर, हुजूर और कोलार सर्कल क्षेत्र में भीख मांगने वाले बच्चे, महिलाएं और अन्य पुरुषों को चिह्नित किया गया है। ये सभी चौक, चौराहों, तिराहों, धार्मिक स्थल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और सभी प्रकार के सामाजिक स्थलों पर मिले हैं। भीख मांगने वालों कई ऐसे बच्चे और महिलाएं मिली हैं, जिनके आधार ही नहीं बने है। पुलिस की मदद से लगाएंगे जुर्माना वहीं, शहर में भीख देने वालों पर नजर रखने के लिए पुलिस, नगर निगम, प्रशासन की टीम तैयार की जाएगी, जो चौक, चौराहों, तिराहों, धार्मिक स्थल सहित अन्य स्थानों पर नजर रखेगी। यहां भीख देने वालों को पहले समझाया जाएगा। इसके बाद भी यदि नहीं मानते हैं तो उन पर जुर्माना की कार्रवाई की जाएगी। इंदौर में की जा चुकी है भीख देने वालों पर कार्रवाई इंदौर को भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने के लिए सार्वजनिक जगहों पर भीख देने वाले लोगों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जा चुकी है। इसके साथ ऐसे भिखारी जो बार-बार समझाइश के बाद भी नहीं माने, उन्हें भिक्षुक गृह भेजा गया। शहर के लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया गया, जिसमें एनजीओ की मदद ली गई। उज्जैन को भिखारी मुक्त बनाने की पहल तेज हो गई है. पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को इस मिशन के तहत विशेष अभियान की शुरुआत की. इसी कड़ी में महाकाल थाना पुलिस ने रामघाट क्षेत्र से 25 भिखारियों को पकड़ा और उन्हें गाड़ियों में भर कर रैन बसेरों में भेज दिया. उज्जैन, जो बाबा महाकाल की नगरी के रूप में जानी जाती है. इसे केंद्र सरकार के स्माइल प्रोजेक्ट के तहत भिक्षुक मुक्त करने के लिए करीब एक साल पहले चुना गया था. हालांकि, शहर में भिखारियों के रहने की व्यवस्था तय नहीं होने के कारण मिशन अधूरा रह गया था. अब इंदौर में इस पहल की सफलता को देखते हुए, उज्जैन में भी अभियान तेज कर दिया गया है. रामघाट पर 25 भिक्षुकों को रैन बसेरों में भेजा  महाकाल थाना पुलिस ने मंगलवार को शिप्रा नदी के किनारे रामघाट पर अभियान चलाया. यहां नालियों के किनारे भिक्षावृत्ति कर रहे 25 महिलाओं और पुरुषों को पकड़कर पुलिस वैन में ले जाया गया. कई भिखारियों ने जबरन ले जाने का विरोध किया, लेकिन पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए सभी को रैन बसेरों में भेज दिया. पुनर्वास के लिए सेवाधाम आश्रम से बातचीत महाकाल थाने के टीआई नरेंद्र सिंह परिहार ने जानकारी दी कि भिखारियों के पुनर्वास के लिए सेवाधाम आश्रम से चर्चा चल रही है. जब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक सभी को रैन बसेरों में रखा जाएगा. भिक्षावृत्ति के अंत के साथ रोजगार का अवसर कलेक्टर नीरज सिंह ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल भिक्षावृत्ति को समाप्त करना नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था भी करना है. एनजीओ के माध्यम से भिखारियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे, जिससे वे समाज का हिस्सा बन सकें.

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet