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GG flyover की 1 से 5 जनवरी के बीच ब्रिज की जाएगी ओपनिंग

भोपाल जीजी फ्लाइओवर पीडब्ल्यूडी की अंदरूनी खींचतान में उलझकर जीजी फ्लाइओवर को शुरू करने का काम फिलहाल टल गया है। दूसरी और इसके नीचे की सड़क को बनाने के लिए मेट्रो तैयार है इन पीडब्ल्यूडी। दोनों के निर्माण के दौरान ये सड़क खराब हुई, लेकिन दोनों ही एजेंसी अपने अपने कॉरिडोर के नीचे की ड़क दुरुस्त कर रहे हैं। करीब दस से पंद्रह फीट का हिस्सा बेहाल लावारिस छोड़ दिया। स्थिति ये कि भोपाल पुलिस ने सड़क निर्माण के लिए एक दिन ट्रैफिक बंद करने का कहा, लेकिन सवाल फिर कि इसे कौन बनाएगा? इसमें ही उलझ गया। यह भोपाल का सबसे लंबा ब्रिज है। इसकी लंबाई 2734 मीटर यानी, करीब पौने 3 किमी है। इसका काम दिसंबर 2020 में शुरू हुआ था। जिसे 2 साल में बन जाना था, लेकिन इसे बनने में 4 साल लगे। आखिरकार अब इसका काम आखिरी दौर में है। पहले 26 दिसंबर को ब्रिज की ओपनिंग करने की बात सामने आई थी, लेकिन थर्ड आर्म नहीं बनने की वजह से ट्रैफिक शुरू नहीं हो सका। वहीं, मंत्री गुजरात दौरे पर चले गए। ऐसे में अब उम्मीद है कि 1 से 5 जनवरी के बीच ब्रिज की ओपनिंग हो जाएगी। लाइट की टेस्टिंग शुरू गणेश मंदिर से वल्लभ भवन चौराहा के बीच दो आर्म्स के बीच कुल 230 पोल पर लाइटें लगाई गई हैं। जिसकी टेस्टिंग की जा रही है। करीब 15 मीटर चौड़े इस ब्रिज की थर्ड आर्म पर भी लाइट लगाई जाएगी। ताकि, यह हिस्सा भी रोशन हो सके। यदि लाइटिंग और सर्विस रोड समय पर बन जाती है तो थर्ड आर्म पर भी ट्रैफिक शुरू हो सकता है। वरना, गणेश मंदिर से वल्लभ भवन चौराहा तक ही ट्रैफिक शुरू होगा। लोड टेस्ट पूरा पीडब्ल्यूडी के अफसरों के मुताबिक, गणेश मंदिर से वल्लभ भवन चौराहा की ओर आने वाली पहली और दूसरी आर्म का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। इस रूट पर लोड टेस्ट भी हो चुका है। फिर भी ट्रैफिक का संचालन शुरू होने पर लोगों को कोई परेशानी न आए, इसलिए यहां कुछ उपाय किए जा रहे हैं। ऐसा मैनिट के एक्सपर्ट्स से मिली सलाह के बाद पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने ये बदलाव करने का फैसला लिया है। ऐसे समझें स्थिति • मेट्रो रेल कारपोरेशन का स्टेशन यहां है। इसके नीचे की रोड भी खराब है, लेकिन इसे मेट्रो कारपोरेशन बनाने को तैयार है। इसके साथ ही पास अंडरग्राउंड ड्रेन बनाएंगे। ये स्टेशन की लंबाई के बराबर ही होगी, उसके बाद काम नहीं होगा। इसमें उलझन है। • पीडब्ल्यूडी ब्रिज के नीचे की सड़क ठीक है। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की ओर वाला करीब 200 मीटर का हिस्सा बैरिकेडिंग से ढंका है, इसे बनाना है, लेकिन बनाया नहीं गया। यहां भी मेट्रो का एफओबी बन रहा है, इसलिए पीडब्ल्यूडी ने मेट्रो से ही इसे ठीक करने कहा। इतना ही नहीं, स्टेशन से लगे जिस हिस्से पर मेट्रो ड्रेन बनाएगा, उसके दोनों किनारों पर करीब 150-150 मीटर लंबाई में रोड पर डामर का काम पीडब्लयूडी ने मेट्रो से करने का कहा है। मामले अभी उलझन में है। इस तरह ट्रैफिक प्रभावित जिंसी, पुराना भोपाल, जहांगीराबाद, प्लेटफार्म नंबर छह से सुभाष ब्रिज, पुल बोगदा और आगे तक का ट्रैफिक एमपी नगर, साकेत नगर, नर्मदापुरम रोड तक आवाजाही करता है। बोर्ड ऑफिस के पास मेट्रो स्टेशन व रोड का हिस्सा मेट्रो क्यों नहीं बना रहे इस मामले में मेट्रो कारपोरेशन के अफसर स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है।

अब दिल्ली में भी होगी मोदी सरकार की स्कीम लागू, हाई कोर्ट ने दिया आदेश, 12 दिन का दिया वक्त

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम-आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) स्कीम को राजधानी में लागू करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच 5 जनवरी 2025 तक एमओयू साइन करने को कहा है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने कहा कि योजना को पूरी तरह लागू करना होगा ताकि दिल्ली के लोग इस स्कीम के तहत मिलने वाले फंड और सुविधाओं से वंचित ना रहें। 24 दिसंबर के आदेश में कोर्ट ने कहा कि यदि इस बीच दिल्ली में आचार संहिता लागू हो जाए तो भी एमओयू साइन करना ही होगा, क्योंकि यह दिल्ली के नागरिकों के फायदे के लिए है। कोर्ट ने कहा कि जब 33 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे पहले ही लागू कर चुके हैं तो ऐसा दिल्ली में ना करना उचित नहीं है। कोर्ट ने 12 दिन की मोहलत देते हुए 5 जनवरी तक एमओयू साइन करने को कहा। अगली सुनवाई के दिन इस एमओयू को पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में आईसीयू बेड्स और वेंटिलेटर्स की सुविधा से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। फरवरी में डॉ. एसके सरीन कमिटी का गठन किया गया था जिसे दिल्ली सरकार और एमसीडी समेत अन्य अस्पतालों में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए सलाह देनी थी। बेंच ने इससे पहले दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि राजधानी में सभी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोले जाएं। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हाई कोर्ट का आभार जताते हुए कहा कि PM-ABHIM योजना की घोषणा फरवरी 2021 में की गई थी और उसी साल अक्टूबर में लॉन्च किया गया था। इस योजना के तहत मोदी सरकार हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए पैसा देती है। दिल्ली के लिए मोदी सरकार ने 2406.77 करोड़ रुपए आवंटित करके रखा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत दिल्ली में 1139 अर्बन हेल्थ और वेलनेस सेंटर बनने थे। 11 डिस्ट्रिक्ट इंटिग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब बनने थे, 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स बनने थे जिनमें 950 बेड होते। 400 बेड के क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स बनने थे हर जिला अस्पताल में। 50 बेड वाले 5 ब्लॉक्स बनने थे हर सरकारी जिला अस्पताल में। सांसद ने कहा, ‘कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एमओयू बना रखा है, 2400 करोड़ रुपया मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार के लिए रखा है। लेकिन द्वेष की राजनीति के कारण केजरीवाल सरकार ने ना तो एमओयू साइन किया, ना पैसा लिया, ना हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया। दिल्ली के विकास में अवरोध डाला।’

मनमोहन सिंह: आर्थिक सुधारों के जनक और एक दृढ़ राजनेता

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन को राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। उन्होंने सिंह की प्रशंसा करते हुए शुक्रवार को कहा कि साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद वह देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे। मोदी ने एक प्रतिष्ठित सांसद के रूप में उनकी सराहना करते हुए कहा कि सिंह का जीवन उनकी ईमानदारी और सादगी का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री ने सुधारों के प्रति सिंह की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि देश के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि सिंह का जीवन भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमेशा एक सीख के रूप में काम करेगा कि कैसे कोई व्यक्ति अभावों और संघर्षों से ऊपर उठकर सफलता की ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा, शनिवार को होगी अंत्येष्टि  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेताओं तथा अन्य हस्तियों ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। तिरंगे में लिपटे पूर्व प्रधानमंत्री के पार्थिव शरीर को उनके आवास पर फूलों से सजे ताबूत में रखा गया, जहां दलगत भावना से ऊपर उठकर नेताओं ने दिवंगत नेता को अंतिम श्रद्धांजलि दी। सिंह की पत्नी गुरशरण कौर और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। सिंह का अंतिम संस्कार शनिवार को किया जाएगा। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि सिंह का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह पार्टी मुख्यालय में लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा और फिर वहीं से सुबह साढ़े नौ बजे उनकी अंतिम यात्रा भी शुरू होगी। राष्ट्रपति मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को उनके आवास पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भी सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि दी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) महासचिव प्रियंका गांधी और अन्य नेता भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया और कहा कि उन्हें एक दयालु इंसान, विद्वान अर्थशास्त्री और आर्थिक सुधारों के जरिए देश को एक नए युग में ले जाने वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा। मोदी ने एक वीडियो संदेश में सिंह के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि उनका जीवन भविष्य की पीढ़ियों को सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठकर ऊंचाइयों को प्राप्त किया जाता है। मोदी ने कहा, ‘‘डॉ. सिंह का निधन राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हासिल करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। विभाजन के दौरान भारत आने के क्रम में बहुत कुछ खोने के बावजूद उन्होंने इन उपलब्धियों को हासिल किया।’’ उनका कहना था, ‘‘डॉ. सिंह का जीवन भविष्य की पीढ़ियों को सिखाता है कि कैसे विपरीत परिस्थितियों से ऊपर उठकर महान ऊंचाइयों को प्राप्त किया जाए।’’ भारत में आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाने वाले पूर्व वित्त मंत्री और दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार को निधन हो गया था। वह 92 साल के थे। मनमोहन सिंह को बृहस्पतिवार की शाम तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार देर रात एम्स से उनके आवास पर ले जाया गया। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री सिंह के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया और कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय जीवन पर अपनी छाप छोड़ी है और उनके निधन से राष्ट्र ने एक प्रख्यात राजनेता, जानेमाने अर्थशास्त्री और एक प्रतिष्ठित को नेता खो दिया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की स्मृति में एक शोक प्रस्ताव पारित किया। मंत्रिमंडल ने दो मिनट का मौन रखकर डॉ० मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी।’’ कांग्रेस नेता सिंह 2004 से 2014 तक, 10 वर्ष देश के प्रधानमंत्री रहे और उससे पहले उन्होंने वित्त मंत्री के रूप में देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में मदद की। वह वैश्विक वित्तीय और आर्थिक क्षेत्रों में एक प्रसिद्ध नाम थे। उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और मनरेगा जैसी युग परिवर्तनकारी योजनाओं की शुरूआत की। हमेशा नीली पगड़ी पहनने वाले सिंह को 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में भारत का वित्त मंत्री नियुक्त किया गया था। आर्थिक सुधारों की एक व्यापक नीति शुरू करने में उनकी भूमिका को अब दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है। मनमोहन सिंह: आर्थिक सुधारों के जनक और एक दृढ़ राजनेता  पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भारत में आर्थिक सुधारों के जनक, उसे लाइसेंस राज से मुक्त कराने वाले और देश को उस स्थिति से उबारने वाले उद्धारक के रूप में याद किया जाएगा जब इसका स्वर्ण भंडार भी गिरवी रख दिया गया था। एक दृढ़ राजनेता के तौर पर पहचान बनाने वाले डा. मनमोहन सिंह मौजूदा भारत के शिल्पकार और विद्वता के धनी इंसान थे। विनम्र, विद्वान, मृदुभाषी और आमसहमति में यकीन रखने वाले मनमोहन सिंह का बृहस्पतिवार रात दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। कांग्रेस नेता के रूप में उन्होंने 2004-2014 तक 10 वर्षों के लिए देश का नेतृत्व किया और उससे पहले वित्त मंत्री के रूप में देश के आर्थिक ढांचे को तैयार करने में मदद की। वह वैश्विक स्तर पर वित्तीय और आर्थिक क्षेत्र की एक मशहूर शख्सियत थे। उनकी सरकार ने सूचना का अधिकार (आरटीआई), शिक्षा का अधिकार (आरटीई) और मनरेगा जैसी युग परिवर्तनकारी योजनाओं की शुरूआत की। मनमोहन सिंह ने अभावों के बीच अपने जीवन की शुरूआत की। कभी बिजली से वंचित अपने गांव में मिट्टी के तेल के दीये की मंद रोशनी में पढ़ाई करने वाले मनमोहन सिंह … Read more

एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार अफगानिस्तान, 15000 तालिबान लड़ाके कर रहे कूच, पाकिस्तान की आएगी शामत!

 पेशावर  भारत के पड़ोस में खूनी जंग छिड़ती नजर आ रही है। पाकिस्तान और तालिबान की दोस्ती अब दुश्मनी में बदलने लगी है और दोनों देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान ने भी बदला लेने की ठान ली है। 15 हजार तालिबानी लड़ाकों पाकिस्तान की ओर तेजी से बढ़ रहे है। पाकिस्तान ने मंगलवार (24 दिसंबर) को देर रात अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तानी तालिबान के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया था। एयरस्ट्राइक में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की ओर बढ़े तालिबानी लड़ाके पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार तालिबान के 15000 लड़ाके काबुल, कंधार और हेरात से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से लगती मीर अली सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के यह लड़ाके पाकिस्तान से एयरस्ट्राइक का बदला लेने के लिए तैयार हैं। तालिबान प्रवक्ता का कहना है कि पाकिस्तान को उसकी कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। ‘कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे…’ वहीं, अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। उसका आरोप है कि एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों को भी निशाना बनाया गया। रक्षा मंत्रालय ने इस पर कहा, ‘अपनी मातृभूमि की रक्षा करना हमारा अधिकार है। हम इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब जरूर देंगे।’ क्यों बढ़ा तनाव? टीटीपी एक अलग आतंकवादी संगठन है, लेकिन इसे अफगान तालिबान का करीबी सहयोगी माना जाता है, जो अगस्त 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज हुआ था। पाकिस्तान में पिछले दो दशक में बड़ी संख्या में आतंकवादी हमले हुए हैं, लेकिन हाल के महीनों में इनमें वृद्धि हुई है। TTP ने हाल ही में उत्तर-पश्चिम में एक जांच चौकी पर हमला किया था, जिसमें कम से कम 16 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर साझा सीमा पर आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया है। हालांकि, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोप खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी संगठन को किसी भी देश के खिलाफ हमले करने की इजाजत नहीं देती है। क्या है तालिबान की रणनीति? अफगान तालिबान लंबे समय से यह दिखाता आया है कि वह किसी भी बड़े सैन्य शक्ति के सामने झुकने वाला नहीं है. अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों को उसने वर्षों तक चुनौती दी और आखिरकार उन्हें अफगानिस्तान से लौटने पर मजबूर कर दिया. पाकिस्तान के पास न तो वैसी सैन्य ताकत है और न ही आर्थिक क्षमता, जिससे वह तालिबान का सामना कर सके. मीर अली बॉर्डर पर बढ़ती गतिविधियों के चलते पाकिस्तान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है. सीमाई इलाकों में सैनिकों की तैनाती तेज कर दी गई है. स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और स्थिति किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रही है. तनाव बढ़ने के साथ ही यह देखना होगा कि पाकिस्तान और तालिबान के बीच यह टकराव किस ओर बढ़ता है. तालिबान का उभार अफगानिस्तान से रूसी सैनिकों की वापसी के बाद 1990 के दशक की शुरुआत में उत्तरी पाकिस्तान में हुआ था. पश्तो भाषा में तालिबान का मतलब होता है छात्र खासकर ऐसे छात्र जो कट्टर इस्लामी धार्मिक शिक्षा से प्रेरित हों. कहा जाता है कि कट्टर सुन्नी इस्लामी विद्वानों ने धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से पाकिस्तान में इनकी बुनियाद खड़ी की थी. तालिबान पर देववंदी विचारधारा का पूरा प्रभाव है. तालिबान को खड़ा करने के पीछे सऊदी अरब से आ रही आर्थिक मदद को जिम्मेदार माना गया. शुरुआती तौर पर तालिबान ने ऐलान किया कि इस्लामी इलाकों से विदेशी शासन खत्म करना, वहां शरिया कानून और इस्लामी राज्य स्थापित करना उनका मकसद है. शुरू-शुरू में सामंतों के अत्याचार, अधिकारियों के करप्शन से आजीज जनता ने तालिबान में मसीहा देखा और कई इलाकों में कबाइली लोगों ने इनका स्वागत किया लेकिन बाद में कट्टरता ने तालिबान की ये लोकप्रियता भी खत्म कर दी लेकिन तब तक तालिबान इतना पावरफुल हो चुका था कि उससे निजात पाने की लोगों की उम्मीद खत्म हो गई. अफगान और तालिबान की सैन्य ताकत कितनी? तालिबान की ताकत कितनी है कि वह अफगानिस्तान की सेना पर भारी पड़ रहा? अफगानिस्तान के फर्स्ट वाइस प्रेसिडेंट कहते हैं- ‘तालिबान का जल्द खात्मा होगा. उनके पास 80 हजार के करीब लड़ाके हैं और अफगानिस्तान की सेना के पास 5 से 6 लाख के बीच सैनिक. इसके अलावा अफगानिस्तान के पास वायु सेना है जो तालिबान पर भारी पड़ेगी.’ हालांकि, इस दावे के बावजूद कई ऐसे फैक्ट हैं जो जमीनी स्तर पर तालिबान को मजबूत साबित कर रहे हैं. तालिबान का मैनपावर सोर्स कबाइली इलाकों में बसे कबीले और उनके लड़ाके हैं. इसके अलावा कट्टर धार्मिक संस्थाएं, मदरसे भी उनके विचार को सपोर्ट कर रहे हैं. लेकिन इन सबसे ज्यादा पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की सीक्रेट मदद तालिबान के लिए मददगार साबित हो रही है. अमेरिकी खुफिया आकलन भी जमीनी हालात को साफ करते हैं जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के 6 महीने के भीतर अफगानिस्तान सरकार का प्रभुत्व खत्म हो जाएगा और तालिबान का शासन आ सकता है.  

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ अब्दुल रहमान मक्की की पाकिस्तान के लाहौर में मौत

 लाहौर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ अब्दुल रहमान मक्की की पाकिस्तान के लाहौर में मौत हो गई है. जानकारी के मुताबिक, उसकी मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई है. मुंबई के 26/11 हमले का गुनहगार अब्दुल रहमान मक्की आतंकी हाफिज सईद का रिश्तेदार है. मक्की को अमेरिका ने ग्लोबल आतंकवादी घोषित किया हुआ है. भारत में वो वॉन्टेड था. अब्दुल रहमान मक्की लश्कर-ए-तैयबा के टेरर फंडिग का काम देखता था. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मक्की को 1267 ISIL (दा’एश) और अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था. इसके साथ ही उनकी संपत्ति फ्रीज कर दी गईं थी. यात्रा प्रतिबंध लगा दिया था और हथियारों पर भी बैन लगा दिया था. अब्दुल रहमान मक्की को 16 जनवरी को ISIL और अलकायदा से जुड़े होने लश्कर-ए-तैयबा द्वारा या उसके समर्थन से टेरर फाइनेंसिंग, साजिश रचने, साजिश में हिस्सा लेने, भर्ती करने जैसे कामों में शामिल होने पर लिस्टेड किया गया. मक्की लश्कर की राजनीतिक विंग जमाद उद दावा का भी चीफ था. वह लश्कर के फॉरेन रिलेशन डिपार्टमेंट का भी हेड रहा है. मक्की को घोषित किया था अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी साल 2023 में संयुक्त राष्ट्र ने मक्की को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था। इसके पहले साल 2020 में आतंकी फंडिंग मामले में पाकिस्तान की एंटी टेररिज्म कोर्ट ने मक्की को 6 महीने के लिए जेल में भेजा था। आतंकी फंडिंग मामले में सजा सुनाए जाने के बाद से ही जमात-उद-दावा का उप प्रमुख खुद को लो प्रोफाइल रखे हुए था और सार्वजनिक रूप से बहुत कम नजर आता था। पाकिस्तान मुत्तहिदा मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) ने एक बयान में कहा कि मक्की पाकिस्तान की विचारधारा का समर्थक था। मक्की ने मुंबई आतंकी हमलों के लिए आतंकियों को धन और संसाधन मुहैया कराए थे, जिसमें 166 लोग मारे गए थे। इस दौरान 9 आतंकी मारे गए थे, जबकि एक आतंकी अजमल कसाब का जिंदा पकड़ा गया था। लश्कर ने भारत में कराए ये बड़े हमले UN की वेबसाइट के मुताबिक, मक्की लश्कर और जमात-उद-दावा में नेतृत्व पद पर रहा है. ऐसे में भारत में हुए बड़े हमलों के पीछे हाफिज सईद के साथ साथ मक्की का भी हाथ माना जाता रहा है. लश्कर ने भारत में इन बड़े हमलों को अंजाम दिया है… 1- लाल किले पर हमला: 22 दिसंबर 2000 में लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकियों ने लाल किले में घुसकर सुरक्षाबलों पर फायरिंग की थी. इस अटैक में सेना के दो जवान समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी.  इस आतंकी हमले में राइफलमैन उमा शंकर तो मौके पर ही शहीद हो गए थे. जबकि, नायक अशोक कुमार ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था. अब्दुल्ला ठाकुर नाम के शख्स की भी इस हमले में मौत हो गई थी. 2- रामपुर हमला: लश्कर के 5 आतंकियों ने 1 जनवरी 2008 में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था. इसमें 7 सीआरपीएफ जवानों और एक रिक्शा चालक की जान चली गई थी.   3- लश्कर ने 26/11 को मुंबई में हमला कराया था. मुंबई में अरब सागर के रास्ते 10 आतंकी दाखिल हुए थे, इन लोगों ने कई जगहों पर अंधाधुंध फायरिंग की थी. इस हमले में 175 लोगों की मौत हो गई थी. 4- श्रीनगर अटैक: 12-13 फरवरी 2018 में श्रीनगर के करण नगर में सीआरपीएफ कैंप में लश्कर का आत्मघाती हमलावर घुस गया था. इस दौरान एक जवान शहीद हो गया था. जबकि एक पुलिसकर्मी जख्मी हुआ था. 5- बारामूला: 30 मई 2018 को बारामूला में लश्कर के आतंकियों ने तीन नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था. 6- श्रीनगर हमला: लश्कर आतकियों ने 14 जून 2018 को राइजिंग कश्मीर के एडिटर सुजात बुखारी और दो सिक्योरिटी गार्ड की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. लश्कर ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. 7- बांदीपोरा हमला: जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा में लश्कर के आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की थी, इस दौरान भारतीय सेना के जवानों ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया था. इस हमले में चार जवान शहीद हो गए थे.   मक्की को पाकिस्तान की सरकार ने 15 मई 2019 को गिरफ्तार किया था. वह लाहौर में हाउस अरेस्ट था. 2020 में टेरर फंडिंग केस में मक्की को पाकिस्तानी कोर्ट ने सजा सुनाई थी.  

छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद, 2 मंत्री पद के लिए 6 दावेदार, साय कैबिनेट में इन चेहरों को मिल सकता है मौका

रायपुर  छत्तीसगढ़ में लंबे समय से मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने हाल ही में इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि, मंत्रिमंडल विस्तार तो होना ही है, जब तक होता नहीं इंतजार करना होगा। इसके बाद से यह माना जा रहा था कि मंत्रीमंडल विस्तार फिलहाल टल सकता है, लेकिन अब यह खबरें आ रही हैं कि ज़िला अध्यक्षों के चुनाव के बाद कभी भी मंत्रीमंडल का विस्तार हो सकता है। दरअसल, 30 दिसंबर से पहले प्रदेश में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की जानी है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से इस संबंध में मंजूरी मिल चुकी है, और प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद मंत्रीमंडल विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। माना जा रहा है कि 31 दिसंबर से चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो सकती है, इसलिए इस माह के अंत तक मंत्रीमंडल विस्तार संभव है। इसके साथ ही, मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। दरअसल,  30 दिसम्बर से पहले जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की जानी है. भाजपा की बैठक में एकराय से जिला अध्यक्षों के नाम पर मुंहर लग जाएगी. इसके ठीक बाद कभी भी सीएम साय के मंत्रीमंडल का विस्तार हो सकता है. हालांकि, 31 दिसंबर को चुनाव का आचार संहिता लग सकता है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस माह के अंत तक छत्तीसगढ़ सरकार का मंत्रीमंडल विस्तार हो सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है. इन नामों की चर्चा तेज मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री के साथ कुल मंत्री पद हरियाणा की तरह 13 के बजाय 14 हो सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार में 2 के बजाय 3 विधायकों को जगह मिल सकती है. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व से मंत्रिमडंल विस्तार के लिए हरी झंडी मिल चुकी है. भाजपा के भीतरखाने से खबर आ रही है कि मंत्री पद के लिए अमर अग्रवाल, किरण सिंहदेव, गजेंद्र यादव, राजेश मूणत और अजय चंद्राकर में से किन्हीं 3 को मंत्री बनाये जाने की चर्चा सबसे ज्यादा है. बता दें कि किरण सिंहदेव अभी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. किरण सिंहदेव मंत्री बनते हैं तो शिवरतन शर्मा और अनुराग सिंहदेव में से किसी एक को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की संभावना है. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष के लिये सौरभ सिंह का नाम भी रेस में बताया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही  प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान होगा. मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सरकार के गठन के बाद विष्णु देव साय ने सीएम पद की शपथ ली थी, इसके अलावा अरुण साव और विजय शर्मा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 9 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया था. ऐसे में कुल मिलाकर मंत्रियों की संख्या 12 हो गई थी. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम मंत्रियों की संख्या 13 हो सकती है. ऐसे में एक पद खाली था. एक पद खाली चल रहा था. वहीं, साय कैबिनेट में शामिल बृजमोहन अग्रवाल ने सांसद बनने के बाद मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था.  ऐसे में दो मंत्रियों की जगह खाली है. हालांकि, चर्चा है की हरियारण की तरह ही यहां मंत्रियों की संख्या 13 के बजाय 14 हो सकता है. ऐसे में 2 की बजाय 3 विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. इन नेताओं के नाम पर हो रही चर्चा मंत्रिमंडल विस्तार में मुख्यमंत्री के साथ कुल मंत्रियों की संख्या 13 के बजाय 14 हो सकती है, जैसे कि हरियाणा में हुआ था। सूत्रों के मुताबिक 2 के बजाय 3 विधायकों को मंत्री पद मिल सकता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अमर अग्रवाल (Amar Agarwal), किरण सिंहदेव (Kiran Singh Deo), गजेंद्र यादव (Gajendra Yadav), राजेश मूणत (Rajesh Munat) और अजय चंद्राकर (Ajay Chandrakar) के नाम मंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। किरण सिंहदेव वर्तमान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं, अगर मंत्री बनते हैं, तो प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए शिवरतन शर्मा (Shivratan Sharma) और अनुराग सिंहदेव (Anurag Singh Deo) में से किसी एक को नामित किया जा सकता है। सौरभ सिंह का नाम भी प्रदेश अध्यक्ष के लिए चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी। साय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल छत्तीसगढ़ में सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम पद की शपथ ली थी, जबकि अरुण साव और विजय शर्मा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में 9 विधायकों को शामिल किया था, जिससे कुल मंत्रियों की संख्या 12 हो गई थी। छत्तीसगढ़ में अधिकतम मंत्रियों की संख्या 13 हो सकती है, ऐसे में एक पद खाली था। बता दें कि, मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सांसद बनने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसकी वजह से अब दो पद खाली हैं। अब चर्चा है कि हरियाणा की तरह छत्तीसगढ़ में भी मंत्रियों की संख्या 13 के बजाय 14 हो सकती है, जिससे तीन विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है।

CG का रजत जयंती वर्ष ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप मनाया जाएगा : सीएम विष्णुदेव साय

जशपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर के सराईटोली में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर आयोजित अटल सुशासन चौपाल में शामिल हुए. उन्होंने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के निर्माता श्रद्धेय अटल जी को छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से नमन किया. मुख्यमंत्री ने देश के निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का रजत जयंती वर्ष ‘अटल निर्माण वर्ष‘ के रूप मनाया जाएगा. इस दौरान अधोसंरचना विकास के कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि हमारा राज्य छत्तीसगढ़ उनकी ही देन है.उन्होंने कहा कि अटल जी हमेशा अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहते थे. आज पूरे प्रदेश में उनकी जयंती सुशासन दिवस के रूप में मनाई जा रही है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल जी का मानना था कि छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा तो इस क्षेत्र का तेजी से विकास होगा. यहां के निवासियों और जनजातियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे. उनकी प्रगति को बल मिलेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी की मंशा के अनुरूप राज्य सरकार समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के स्वप्न को पूरा कर रही है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में लगातार मोदी की गारंटी को पूरा करने का काम राज्य सरकार कर रही है. 3100 रूपए प्रति क्विंटल एवं 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की जा रही है. महतारी वंदन योजना में 70 लाख माताओं-बहनों को हर माह एक हजार रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है. रामलला दर्शन योजना के साथ अब तीर्थ यात्रा योजना भी जल्द शुरू की जाएगी. तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक की दर 4000 रूपए से बढ़ाकर 5500 रूपए कर दी गई है.सीजीपीएससी घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. इसमें लिप्त लोगों पर लगातार कार्यवाही की जा रही है. इससे छात्रों का भरोसा सीजीपीएससी पर फिर से लौटा है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है. गुड गवर्नेंस के लिए सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है. बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है. राज्य सरकार पूरे प्रदेश में सभी वर्गों के विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई जी के योगदान के लिए पूरे देश के साथ विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के लोग उनके बहुत आभारी हैं. उन्होंने हमें छत्तीसगढ़ के रूप में एक अलग राज्य की सौगात दी. आज छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ा रही है. मोदी की गारंटी के अधिकांश वायदे हमने एक वर्ष में पूरे किए हैं. सीएम साय ने सराईटोली में अनेक विकास कार्यों की घोषणा की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने क्षेत्र के किसानों की सुविधा की दृष्टि से फरसाबहार में अपेक्स बैंक की शाखा खोलने की घोषणा की. इसके साथ ही कोतईबीरा से कपाटद्वार तक लक्ष्मण झूला की तर्ज पर सस्पेंशन ब्रिज निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों की घोषणा की. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अटल सुशासन चौपाल में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का निरीक्षण कर हितग्राहियों को सहायता राशि और दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण प्रदान किया. उन्होंने मछुआ सहकारी समिति एवं दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को पंजीयन प्रमाण पत्र देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक द्वारा पे-केसीसी कार्ड के वितरण सहित अनेक हितग्राहियों को मोटराइज्ड ट्रायसाइकिल, राष्ट्रीय परिवार सहायता राशि एवं दिव्यांग बच्चों को निःशक्तजन छात्रवृत्ति का प्रमाण पत्र प्रदान किया. उन्होंने दिव्यांग बच्चों को अच्छी पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित भी किया. उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया. इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से मां तारिणी स्व-सहायता समूह को 80 हजार रुपए एवं जय मां अम्बे स्व सहयता समूह को एक लाख रुपए का चेक प्रदान किया. इस अवसर पर कौशल्या देवी साय, रोहित साय, भरत साय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे.

मोहन भागवत का 6 दिवसीय छत्तीसगढ़ दौर, सांय और प्रातः शाखा में शामिल होंगे

रायपुर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत आज से 6 दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगे. मोहन भागवत शाम 6 बजे रायपुर पहुंचेंगे. प्रवास के दौरान टोली बैठक, सांय और प्रातः शाखा में शामिल होंगे. 6 दिवसीय दौरे पर मोहन भागवत आएंगे छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत आज 6 दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ आएंगे. आज शाम 6 बजे रायपुर पहुंचेंगे मोहन भागवत. प्रवास के दौरान टोली बैठक, सांय और प्रातः शाखा में शामिल होंगे. डॉ मोहन भागवत एक जनवरी 2025 को दोपहर रायपुर से दिल्ली रवाना होंगे. संघ के सौ साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अगले साल सौ साल पूरे हो रहे हैं। इस शताब्दी वर्ष में आरएसएस देशभर में कार्यक्रम करेगा। किस तरह के कार्यक्रम होने हैं, इसको लेकर लगातार सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का राज्यों का दौरा चल रहा है। इसी कड़ी में उनका 27 से 31 दिसंबर तक रायपुर प्रवास होगा। इस दौरान वे अलग-अलग सत्र में कार्यकर्ताओं व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संगठन को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। शताब्दी वर्ष में आरएसएस का बड़ा फोकस पंच परिवर्तन पर है। इसके बारे में जानकारी देकर बताया जाएगा, क्या-क्या करना है। स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा RSS 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वर्ष अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है। इसके लिए देश के अलग-अलग प्रांतों में सरसंघचालक मोहन भागवत का प्रवास हो रहा है। इस प्रवास में संबंधित प्रांत में संगठनात्मक कार्यों पर वह चर्चा करते हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनात्मक विषयों व शताब्दी वर्ष पर चलने वाले कार्यक्रमों पर वह संगठन के अधिकारियों व कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे। विभिन्न सत्र में लेंगे बैठक सरसंघचालक डॉ. भागवत अपने प्रवास के दौरान विषय आधारित विभिन्न बैठकों में संगठनात्मक कार्यों की चर्चा करेंगे। सरसंघचालक की इन बैठकों में कार्य विस्तार के साथ कार्यकर्ताओं व स्वयंसेवकों के गुणात्मक विकास पर विशेष रूप से चर्चा होगी। संघ ने शताब्दी वर्ष में प्रत्येक गांव व शहरी क्षेत्र तक शाखा के माध्यम से पहुंचने का लक्ष्य रखा है। सरसंघचालक का प्रवास छत्तीसगढ़ में संघ कार्य को सर्वव्यापी एवं सर्वस्पर्शी बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। नगर पंचायत रामानुजगंज को नगर पालिका का दर्जा नगर पंचायत रामानुजगंज को नगर पालिका का दर्जा मिला है. नगर वासियों में खुशी की लहर,चौक चौराहों पर पटाखा फोड़कर खुशियां मनाई. रामानुजगंज, जिले सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है. वर्तमान नगर पंचायत के अध्यक्ष रमन अग्रवाल के प्रयास से संभव हुआ. लंबे समय से रामानुजगंज को नगरपालिका का दर्जा दिलाने मांग की जा रही थी. छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद क्षेत्रवासियों में दिखी खुशी.

मध्य प्रदेश में बिगड़ा मौसम का मिजाज, भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम का ट्रिपल अटैक देखने को मिल रहा है। कड़ाके की ठंड के बीच बारिश और ओले का अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में चार प्रणालियों के चलते बदलाव देखने को मिल रहा है। दो दिन तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है। 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। प्रदेश में कड़ाके की ठंड के साथ मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। आखिरी दिनों में कोहरे, बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। प्रदेश के कई जिलों में चेतावनी का अलर्ट है। गुरुवार को टीकमगढ़ और छतरपुर समेत कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी हुई है। वहीं, आज राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत पांच संभागों में बारिश और ओला की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ ओले का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, आज से बारिश का नया सिस्टम प्रदेश में एक्टिव हो गया है. जिसके प्रभाव से आज और कल यानी 27 और 28 दिसंबर को कई जिलों में बारिश होने की संभावना है. नए वेदर सिस्टम के एक्टिव होने से भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, सागर और जबलपुर संभाग में ओले भी गिर सकते हैं. आंधी का भी अलर्ट बारिश के मजबूत वेदर सिस्टम के चलते आज प्रदेश के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा. इस वेदर सिस्टम के चलते एमपी के अलग-अलग हिस्सों में 28 दिसंबर को बारिश और ओलवृष्टि देखी जा सकती है. इस दौरान गरज चमक के साथ तेज हवाएं चलेंगी. कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40-50Km प्रति घंटे तक रहेगी. मौसम विभाग के अनुसार, आज यानी शुक्रवार को आंधी, बारिश और ओले का स्ट्रॉन्ग सिस्टम रहेगा. इसके चलते  पूरे प्रदेश में ही मौसम बदला रहेगा. रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, सागर, पांढुर्णा और बड़वानी में बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं. यहां ऑरेंज अलर्ट जारी है. वहीं, अन्य जिलों में भी  कहीं बारिश तो कहीं गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी. इन जिलों में कोहरे का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, रायसेन, उज्जैन, विदिशा, सीहोर, छतरपुर, राजगढ़ और रतलाम में कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। 28 दिसंबर को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के चलते की संभावना जताई गई है। पचमढ़ी की रात सबसे ठंडी प्रदेश के पांच सबसे कम न्यूनतम तापमान वाले शहरों में छतरपुर के नौगांव शहर की रात सबसे ठंडी रही। यहां पारा 11 डिग्री दर्ज किया गया। नरसिंहपुर में 11.2 डिग्री, ग्वालियर में 11.9 डिग्री, मंडला में 12 डिग्री और कल्याणपुर में 12.1 डिग्री दर्ज हुआ। बीते चौबीस घंटे के दौरान भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, देवास, सीहोर, निवाड़ी, पन्ना, छतरपुर, भिंड और मुरैना में हल्का कोहरा हो सकता है। इन जिलों में बारिश और ओले की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में आज से बारिश का नया सिस्टम एक्टिव हो गया है. जिसके प्रभाव से 27 और 28 दिसंबर को कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है.  भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर में तेज हवाओं के साथ बारिश और कहीं कहीं पर ओले गिरने की आशंका है. अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम     27 दिसंबर: रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, सागर, पांढुर्णा और बड़वानी में बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं। यहां 40 से 50Km प्रति घंटे तक हवा भी चलने का अनुमान है।     मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा में 30 से 40Km प्रति घंटा से हवा चलेगी और बारिश भी होगी। इसी तरह भोपाल, विदिशा, राजगढ़, खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।     28 दिसंबर: नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट और पांढुर्णा में ओले-बारिश का अलर्ट है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, भिंड, मुरैना, श्योपुर, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी में हल्की बारिश और आंधी चल सकती है।     29 दिसंबर: भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा में हल्के से मध्यम कोहरा छाया रहेगा।     30 दिसंबर: भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर में हल्के से मध्यम कोहरा रहेगा।

सौरभ शर्मा मामले में ED की एंट्री, घर और दफ्तर लिया कब्जे में, CRPF जवानों के साथ सर्चिंग जारी

भोपाल मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा मामले में शुक्रवार को बड़ा अपडेट सामने आया है. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीम भोपाल और ग्वालियर स्थित सौरभ के घर और दफ्तर पहुंच गई है. लोकायुक्त और आयकर विभाग के ईडी इस मामले की जांच करने में जुटी है. लोकायुक्त का छापा पड़ने के बाद से ही फरार चल रहे सौरभ शर्मा के अरेरा कॉलोनी ई-7 स्थित घर और दफ्तर में सीआरपीएफ जवानों के साथ ED की सर्चिंग जारी है. जबकि ग्वालियर में विनय नगर सेक्टर-2 स्थित सौरभ के पैतृक घर पर भी एजेंसी ने दबिश दी है. दोनों  शहरों के की पॉश इलाकों में सौरभ शर्मा का घर है. दरअसल, लोकायुक्त छापे मामले का प्रमुख आरोपी सौरभ शर्मा फ़िलहाल पत्नी दिव्या समेत फरार चल रहा है. उसके वकील ने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया. बता दें कि लोकायुक्त पुलिस के छापे में पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा के पास 7.98 करोड़ रुपये की चल संपत्ति मिली है, जिसमें 2.87 करोड़ रुपये नकद और 234 किलोग्राम चांदी शामिल है.   भ्रष्टाचार निरोधक लोकायुक्त पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने बताया कि लोकायुक्त पुलिस ने 18 और 19 दिसंबर को सौरभ शर्मा के आवास और कार्यालय की तलाशी ली थी. लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक जयदीप प्रसाद ने बताया कि सौरभ शर्मा के पिता आरके शर्मा सरकारी डॉक्टर थे और उनकी 2015 में मृत्यु हो गई थी. आईपीएस अधिकारी ने बताया कि इसके बाद सौरभ शर्मा को 2015 में अनुकंपा के आधार पर राज्य परिवहन विभाग में कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति मिली और उसने 2023 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली. उन्होंने कहा कि सौरभ शर्मा ने भ्रष्ट तरीकों से अर्जित धन का इस्तेमाल भारी संपत्ति अर्जित करने में किया, जिसमें अपनी मां उमा, पत्नी दिव्या, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों चेतन सिंह गौड़ और शरद जायसवाल के नाम पर स्कूल और होटल स्थापित करना शामिल है. आयकर विभाग ने शर्मा के सहयोगियों गौड़ से नकदी और सोना भी जब्त किया है. प्रसाद ने बताया कि तलाशी के दौरान मिले बैंक विवरण और जमीन के दस्तावेजों की जांच की जा रही है. सौरभ के पास से मिली थी चांदी और कैश दरअसल, लोकायुक्त टीम ने परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के ठिकानों पर छापा मारा था। जहां से 235 किलो चांदी और 2.95 करोड़ रुपए कैश मिले थे। वहीं 19 दिसंबर की देर रात मेंडोरी के जंगल से एक कार से 52 किलो सोना और 10 करोड़ रुपए कैश आईटी की टीम ने बरामद किया था। घर के सामान, आभूषण और नगद जिसकी कुल कीमत 3 करोड़ 86 लाख रुपये है। सौरभ के सहयोगी के निवास से भी मिले थे करोड़ों रुपये वहीं आरोपी के कार्यालय जहां उनका सहयोगी चेतन सिंह गौर का निवास भी है, वहां से चांदी और नगद, कुल 4 करोड़ 12 लाख की संपत्ति बरामद की गई थी। बताया जा रहा है कि प्रदेश के अलग-अलग जगह पर बेनामी संपत्ति के दस्तावेज भी मिले थे। सौरभ शर्मा को पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। उन्होंने सिर्फ 10-12 साल की नौकरी की, फिर परिवहन विभाग से वीआरएस ले लिया था। आयकर विभाग के अधिकारियों के हाथ लगी सौरभ की डायरी से बड़ा खुलासा हुआ। डायरी की मानें तो परिवहन विभाग में हर साल 100 करोड़ का काला हिसाब होता था। प्रदेश के 52 RTO और बड़े अफसरों के नाम, नंबर, पता के साथ हर माह पहुंचने वाली रकम लिखी है। उगाही की काली कमाई का पैसा ऊपर तक पहुंचाने का अनुमान है। सौरभ के सहयोगी चेतन का 150 पन्ने में बयान दर्ज हुआ। चेतन ने अफसरों के साथ कई बड़े नेताओं से सौरभ के गठजोड़ का भी खुलासा किया है। इस मामले में लोकायुक्त, आईटी के बाद ईडी की एंट्री हुई। प्रवर्तन निदेशालय ने सौरभ शर्मा और उसके साथी चेतन के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया था। दुबई से लौटने के बाद सौरभ शर्मा और उसके परिवार से पूछताछ की जाएगी। IT का लुक आउट सर्कुलर, सौरभ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज आयकर विभाग ने लुक आउट सर्कुलर जारी किया था। वहीं दुबई में बैठे सौरभ शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए भोपाल कोर्ट में पिटीशन दायर की थी, लेकिन भोपाल कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी। इस मामले में आज शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन वकील के विशेष अनुरोध पर जज ने कल गुरुवार को ही सुनवाई कर दी।सौरव शर्मा के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि आरोपी लोक सेवक नहीं है, इसलिए उसे अग्रिम ज़मानत का लाभ दिया जाए। न्यायाधीश ने अपने आदेश में उसे लोक सेवक मानते हुए एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया। फिलहाल इस पूरे मामले में लोकायुक्त, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय, तीनों एजेंसियां जांच में जुटी हुई है।  

पर्वतदान (अन्न) एवं अश्वमेध यज्ञ महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

 छत्तीसगढ़ के कण कण में बसी हुई है भगवान श्रीराम की स्मृतियां – मुख्यमंत्री साय मां नाथल दाई पर्यटन केंद्र के रूप में होगा विकसित  – मुख्यमंत्री साय पर्वतदान (अन्न) एवं अश्वमेध यज्ञ महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर हमारी सरकार लगातार लोगों की सुख-समृद्धि के लिए काम कर रही है। 3100 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी, 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी से किसानों में समृद्धि आई है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से हर महीने 70 लाख माताओं-बहनों को एक हजार रुपए प्रति महीने की किश्त हम दे रहे हैं। देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए हम लोग मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा योजना आरंभ करने जा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से भी यात्रियों को निःशुल्क तीर्थ यात्रा का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के ग्राम टिमरलगा में आयोजित पर्वतदान (अन्न) एवं अश्वमेध यज्ञ महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। सरकार लगातार लोगों की सुख-समृद्धि के लिए काम कर रही है। 3100 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी, 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी से किसानों में समृद्धि आई है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से हर महीने 70 लाख माताओं-बहनों को एक हजार रुपए प्रति महीने की किश्त हम दे रहे हैं। देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा के लिए हम लोग मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा योजना आरंभ करने जा रहे हैं। इस योजना के माध्यम से भी यात्रियों को निःशुल्क तीर्थ यात्रा का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के ग्राम टिमरलगा में आयोजित पर्वतदान (अन्न) एवं अश्वमेध यज्ञ महोत्सव को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्राम टिमरलगा में पर्वतदान एवं अश्वमेध यज्ञ महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं, आसपास का पूरा क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर हो जाता है।छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है। यह वो धरती है जहां भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का अधिकतम समय बिताया। छत्तीसगढ़ की पावन धरती में शिवरीनारायण में माँ शबरी ने प्रभु श्रीराम को जूठे बेर खिलाये थे। हमारी छत्तीसगढ़ की भूमि बहुत पवित्र भूमि है। हमारे यहां वाल्मीकि जी का आश्रम तुरतुरिया में है।वाल्मीकि आश्रम ही वह भूमि है जहां लव और कुश ने अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को पकड़ा था। छत्तीसगढ़ के कण कण में भगवान श्रीराम की स्मृतियां बसी हुई हैं। प्रभु श्रीराम की स्मृतियों को सहेजने के लिए हम लगातार कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  हम प्रदेश की पांच शक्तिपीठों को जोड़ने के लिए भी हम कार्य कर रहे हैं। हम लोगों ने त्रिवेणी संगम की नगरी राजिम में भी कुंभ मेले का पुनः आयोजन शुरू किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ग्राम टिमरलगा के माध्यमिक स्कूल का हाईस्कूल में उन्नयन, मां नाथल दाई को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने सौंदर्यीकरण, ग्राम टिमरलगा के उपस्वास्थ्य केंद्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन की घोषणा की। इस अवसर पर रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया, श्रीमती केरा बाई मनहर,शमशेर सिंह, श्रीमती पुष्पा देवी सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी की अपेक्षाओं पर निरंतर खरा उतरेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विचार मंथन द्वितीय सत्र सार्थक रहा मंथन: 2024, मंत्रीगण के मिले महत्वपूर्ण सुझाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश को अनेक क्षेत्रों में हब बनाने पर हुआ गंभीर विचार-विमर्श प्रधानमंत्री मोदी की अपेक्षाओं पर निरंतर खरा उतरेगा मध्यप्रदेश अगला मंथन शिविर विभागीय स्तर पर होगा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पूरे दिन चला मंथन-2024 का आयोजन सार्थक रहा। मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा युवा, गरीब, महिला और किसान, इन चार प्रमुख वर्गों के कल्याण के लिए निर्धारित की गई प्राथमिकता के अनुसार कार्य किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही चार मिशन कार्य करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने सुशासन का महत्व प्रतिपादित किया है। सुशासन को दृष्टिगत रखते हुए आज सम्पन्न मंथन शिविर बैठक में विस्तृत विचार- विमर्श किया गया है। आज लिए गए निर्णय के अनुसार इस तरह की विमर्श बैठकें अब विभाग स्तर पर की जाएंगी। मध्यप्रदेश को अनेक क्षेत्रों में हब बनाने पर गुरूवार को गंभीर विचार-विमर्श हुआ है। मंत्रि-परिषद के सदस्यों को विभागीय कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिक से अधिक जनकल्याण राज्य सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए मध्यप्रदेश सरकार निरंतर प्रयास करेगी। प्रदेश में अस्पतालों में वरिष्ठ रोगियों को सम्मान और सुविधा प्राप्त हो, इस दृष्टि से उनकी पृथक पंक्ति और बैठक का प्रबंध किया जाएगा। प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं ओर चिकित्सा शिक्षा संस्थाओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। प्रदेश में मेडिकल टूरिज्म की दृष्टि से भी प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की जो शुरूआत की गई, उसके सफल परिणाम मिल हैं। उन्होंने बतायया कि प्रधानमंत्री फरवरी 2025 में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में आयेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों को भूमि प्रदान करने के लिए उदार नीति का पालन करते हुए अधोसंरचना विकास के प्रयास बढ़ाए जाएंगे। उद्योग स्वयं विभिन्न विकास कार्यों को आवंटित भूमि के अनुसार क्रियान्वित करेंगे, इससे राज्य की अपनी सम्पदा के विकास और सुविधाओं में वृद्धि संभव होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश की प्रशंसा की गई , प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व. अटल जी की 100वीं जयंती पर खजुराहो में 25 दिसम्बर को केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के भूमि-पूजन के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मध्यप्रदेश ने एक वर्ष में प्रगति के नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन की उन्होंने सराहना की और विश्व के 10 बड़े पर्यटन संभावनाओं से भरे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश के शामिल होने का विशेष उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा किए गए मध्यप्रदेश के इस विशेष उल्लेख का सदैव सम्मान करेगी। मध्यप्रदेश पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य करेगा। प्रदेश में 30 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। आने वाले एक वर्ष में इनकी संख्या 50 से अधिक हो जाएगी। पांच नए आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की पहल हुई है और शीघ्र ही प्रदेश में इनकी संख्या 60 हो जाएगी। प्रदेश में 55 जिले हैं, जिलों से इससे अधिक मेडिकल कॉलेज प्रदेश में हो जाएंगे, जिससे मध्यप्रदेश चिकित्सा का हब भी बनेगा। विभिन्न क्षेत्रों में मध्यप्रदेश बनेगा सिरमौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली युवा कार्य और रोजगार के लिए अन्य प्रदेशों में जाते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों के विकास, नए मेडिकल कॉलेजों के प्रारंभ होने से उत्पन्न होने वाले रोजगार के अवसर, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य की संभावनाओं और कृषि एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विभिन्न कार्यों को गति मिलने से बड़ी संख्या में युवाओं को काम मिलेगा। मध्यप्रदेश पर्यटन क्षेत्र में हब भी बनेगा। इसके साथ ही चिकित्सा क्षेत्र और आईटी में भी हब बनेगा। संभाग स्तर पर हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के प्रस्ताव क्रियान्वित होंगे। हरित अर्थ व्यवस्था, स्वच्छता, सुशासन के ठोस प्रयासों से राज्य के विकास को गति मिलेगी। मध्यप्रदेश सौर ऊर्जा के उपयोग में आगे है। ओंकारेश्वर में प्रारंभ फ्लोटिंग सोलर प्लांट एक उदाहरण है। नर्मदापुरम जिले के मोहासा-बावई में नवकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण की इकाइयों को स्थापित करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। किसानों को सस्ती ही नहीं मुफ्त बिजली देने का कार्य नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के उपायों से संभव हो रहा है। यह क्रांतिकारी परिर्वतन है। मंथन शिविर में मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने क्या कहा     टीम भावना से कार्य करने का प्रयास आवश्यक है।     युवा, महिला, किसान और गरीब कल्याण पर आज मंथन हुआ है।     मंथन शिविर मंत्रीगण और विभागों को कार्यों से यश-प्राप्ति का अवसर भी है।     प्रदेश का बजट पांच वर्ष में दोगुना करने का प्रयास है।     इस मंथन बैठक के बाद आगामी मंथन विभागीय स्तर पर होगा।     ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री मोदी जी ने फरवरी माह में मध्यप्रदेश आने की सहमति दी है। यह समिट अपेक्षा से अधिक सफल होगी।     मंत्रीगण पूरे वर्ष के कार्यों की समीक्षा करें।     विभाग स्तर की समीक्षा से यह ज्ञात होगा कि किस क्षेत्र में प्रयास बढ़ाने हैं।     समान स्वरूप के कार्य विभाग किस तरह संयुक्त रूप से कर सकते हैं, यह विचार-विमर्श भी किया गया है।     कुपोषण कम करने के अभियान और 23 जिलों में टीबी नियंत्रण के अभियान सफल हों, ऐसे प्रयास हों।     मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी पूर्व की महत्वपूर्ण घोषणाओं और निर्णयों के क्रियान्वयन पर ध्यान दें।     सायबर अपराध नियंत्रण के प्रयास बढ़ाने की आवश्यकता है, इसके लिए निर्धारित रणनीति के अमल पर ध्यान दिया जाए।     मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम को प्रदेश में पुन: प्रारंभ करने के संबंध में प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।     नगरों के विकास के लिए टियर-2 और टियर 3 श्रेणी के अनुसार आबादी के आधार पर अधोसंरचना विकास के लिए भारत सरकार से अधिकतम सहयोग प्राप्त करने के लिए भी मार्ग निकाले जा रहे हैं।     वृंदावन ग्राम और नगरों में गीता भवनों की योजना को शीघ्र क्रियान्वित किया जाएगा।     कृष्ण पाथेय के विकास और राम वन गमनपथ के कार्यों को गति दी जाएगी।     दीर्घ अवधि की योजना … Read more

पांढुर्णा: भाजपा जिला अध्यक्ष के लिए संगठन ने भेजा नामों का पैनल, आलाकमान करेगा अंतिम फैसला

पांढुर्णा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पांढुर्णा जिला संगठन में जिलाध्यक्ष के चयन को लेकर प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। रायशुमारी के माध्यम से संभावित नामों का चयन किया गया और पैनल तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को भेजा गया। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व इन नामों का आकलन कर अंतिम निर्णय करेगा। जिलाध्यक्ष चयन प्रक्रिया: पहली बार नई रणनीति भाजपा ने पहली बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तरह जिलाध्यक्षों के चयन के लिए विस्तृत और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई है। पार्टी ने तय किया है कि संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक समीकरण, और नेतृत्व कौशल को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन प्रक्रिया का स्वरूप भाजपा जिला कार्यालय में 12 मंडल अध्यक्षों, तीनों तहसीलों (पांढुर्णा, सौंसर, नांदनवाड़ी) के वरिष्ठ पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ रायशुमारी की गई। रायशुमारी के आधार पर तीन-तीन नामों का पैनल तैयार किया गया। सभी नाम प्रदेश भाजपा कार्यालय भेजे गए, जहां से यह सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। केंद्रीय नेतृत्व दावेदारों का मूल्यांकन कर अंतिम चयन करेगा। प्रबल दावेदार और सामाजिक समीकरण जिलाध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें मुख्यतः कुनबी समाज से वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली ताई महाले, राहुल मोहोड़, संदीप मोहड़, देवीदास राउत, वही पावर समाज से श्रीमती सुनीता यादवराव डोबले, क्रिष्णकुमार डोबले और तेली समाज से श्रीमती मीनाक्षी ताई खुरसंगे, ठाकुर समाज से नरेंद्र परमार जैसे दावेदार भी चर्चा में रहे। हालाकि संगठन नेतृत्व में प्रबल नाम वर्तमान जिलाध्यक्ष श्रीमती वैशाली महाले का माना जा रहा है। केंद्रीय नेतृत्व करेगा अंतिम फैसला संगठन ने सामाजिक समीकरण और कार्यकर्ताओं की अनुभवजन्य क्षमता को ध्यान में रखते हुए पैनल तैयार किया है। केंद्रीय नेतृत्व सभी नामों का आकलन करेगा और जनवरी 2025 तक जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा संभव है। संघ की पृष्ठभूमि और संगठनात्मक अनुभव को मिलेगी प्राथमिकता भाजपा ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जो लंबे समय से संगठन से जुड़े हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पृष्ठभूमि है, और जिन्होंने संगठन में अनुकरणीय कार्य किया है। भाजपा की नई रणनीति इस बार भाजपा ने जिलाध्यक्ष चयन में पारदर्शिता और संगठनात्मक शक्ति को बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपनाई है। पार्टी का उद्देश्य है कि सक्षम और प्रभावी नेतृत्व तैयार किया जाए, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में संगठन को मजबूत कर सके।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नहीं रहे, 92 साल की उम्र में AIIMS में निधन

नई दिल्ली भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का गुरुवार, 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। 92 वर्षीय डॉ. मनमोहन सिंह को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद गुरुवार शाम एम्स, नई दिल्ली में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। एम्स नई दिल्ली ने मनमोहन के निधन की पुष्टि करते हुए न्यूज बुलेटिन जारी किया है। एम्स ने कहा, “अत्यंत दुःख के साथ हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की सूचना देते हैं। उन्होंने 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। वे उम्र से संबंधित बीमारियों के कारण उपचाराधीन थे और 26 दिसंबर 2024 को घर पर अचानक बेहोश हो गए थे। घर पर ही उन्हें तुरंत पुनर्जीवित करने के उपाय शुरू किए गए। उन्हें रात 8:06 बजे एम्स, नई दिल्ली के मेडिकल इमरजेंसी में लाया गया। तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और रात 9:51 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।” पीएम मोदी ने भी पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि दी है। पीएम मोदी ने लिखा, “भारत अपने सबसे प्रतिष्ठित नेताओं में से एक डॉ. मनमोहन सिंह जी के निधन पर शोक मना रहा है। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वे एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। संसद में उनके हस्तक्षेप भी बहुत ही व्यावहारिक थे। हमारे प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए।” इससे पहले कांग्रेस पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस खबर की पुष्टि की। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद, हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मनमोहन सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि दी। डॉ. मनमोहन सिंह अपनी सरलता, ईमानदारी और उत्कृष्ट आर्थिक नीतियों के लिए जाने जाते थे। उनका निधन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।  मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने जताया दुख पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा, “देश ने एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक अर्थशास्त्री भी खो दिया है। पंजाब के एक गांव में जन्म लेने से लेकर अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्हें उनकी सादगी और उनके आर्थिक फैसलों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। आर्थिक सुधार के प्रणेता और ‘अनिच्छुक राजा’ ब्रिटिश मीडिया BBC ने डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की जानकारी देते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि, ‘भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और आर्थिक सुधार के प्रणेता मनमोहन सिंह का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे और उन्हें प्रमुख उदारवादी आर्थिक सुधारों का निर्माता माना जाता है.’ न्यूज़ एजेंसी Reuters ने लिखा है, ‘प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में वह ‘अनिच्छुक राजा’ के तौर पर वर्णित किए गए. मृदुभाषी मनमोहन सिंह, जिनका गुरुवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया, यकीनन भारत के सबसे सफल नेताओं में से एक थे. वह भारत का नेतृत्व करने वाले पहले सिख प्रधानमंत्री थे. उन्हें भारत को अभूतपूर्व आर्थिक विकास की ओर ले जाने और करोड़ों लोगों को भयंकर गरीबी से बाहर निकालने का श्रेय दिया जाता है. क़तरी ब्रॉडकास्टर अल जज़ीरा ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर लिखा है कि, वह 90 के दशक में भारत के आर्थिक उदारीकरण के वास्तुकार थे. पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वित्त मंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाया. अलजज़ीरा ने लिखा कि, ‘सौम्य स्वभाव वाले टेक्नोक्रेट सिंह भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों में से एक थे. डॉ. मनमोहन सिंह: एक महानायक की जीवन यात्रा डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान में) के गाह गांव में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। बचपन से ही वे मेधावी छात्र रहे। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय गए। डॉ. सिंह ने 1950 के दशक में अपने करियर की शुरुआत आर्थिक मामलों में शोधकर्ता के रूप में की। उनके उल्लेखनीय योगदान के कारण उन्हें 1971 में भारत सरकार में आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया। बाद में वे योजना आयोग के उपाध्यक्ष और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के पद पर भी रहे। उदारीकरण के जनक 1991 में, भारत जब गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, उस समय डॉ. मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसने भारत को आर्थिक उदारीकरण की राह पर आगे बढ़ाया। उनके नेतृत्व में अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश के दरवाजे खुले और आर्थिक विकास को गति मिली। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह 2004 से 2014 तक दो कार्यकालों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो लोकसभा चुनाव नहीं जीते थे और राज्यसभा सदस्य रहते हुए इस पद पर आसीन हुए। उनके कार्यकाल में आर्थिक विकास और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। निजी जीवन डॉ. मनमोहन सिंह एक सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले नेता थे। उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं। वे साहित्य, संगीत और अध्यात्म में गहरी रुचि रखते थे। डॉ. मनमोहन सिंह के निधन की खबर सुनते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना सबसे बड़ी अड़चन 2.9 किमी लंबी सुरंग, टनल में फिनिशिंग का काम जारी

इंदौर इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन परियोजना को शुरू हुए करीब 11 साल हो चुके हैं, लेकिन 205 किमी लंबी रेल लाइन के प्रोजेक्ट में पिछले दो वर्षों में ही तेजी आई है। इस पूरी परियोजना में सबसे बड़ी अड़चन पीथमपुर स्थित 2.9 किमी लंबी सुरंग का प्रारंभिक कार्य पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग का कार्य शुरू किया गया है। हर दिन सिर्फ छह मीटर हिस्से में ही फिनिशिंग की जा रही है। इस कारण इस परियोजना में देरी हो रही है। जल्द ही रेलवे यहां पांच मशीनें लगाकर हर दिन 48 मीटर फिनिशिंग का काम शुरू करेगा, ताकि मार्च माह तक यह काम पूरा किया जाकर ट्रैक बिछाने काम शुरू हो सके। टनल में फिनिशिंग का काम जारी जून माह में सुरंग के दोनों हिस्सों को आपस में मिला दिया गया था। इसके बाद टनल से पानी निकालने का काम शुरू कर दिया गया था। करीब दो माह पहले टनल के आंतरिक हिस्से में सीमेंट लेयर तैयार की गई। इसके बाद पिछले सप्ताह ही फिनिशिंग का काम शुरू किया गया है। पानी का रिसाव रोकने का काम इसमें पानी का रिसाव रोकने के लिए जेंट्री मशीन के माध्यम से वाटरप्रूफ जियो टैक्सटाइल और मेमरीन लगाई जा रही है। इसके बाद भी पानी का रिसाव हो तो ड्रेन लाइन भी बनाई गई है। शुरुआत में एक छह मीटर की जेंट्री मशीन के माध्यम से हर दिन छह मीटर हिस्से में फिनिशिंग का काम किया जा रहा है। इस गति से काम होता है तो वर्षभर में ही टनल का काम पूरा नहीं होगा। इसलिए छह मीटर की एक अन्य जेंट्री मशीन और 12 मीटर की तीन जेंट्री मशीन जल्द शुरू की जाएगी, ताकि यह काम मार्च तक पूरा हो सके। दुर्घटना होने पर रेस्क्यू के लिए बनेगी लिफ्ट सुरंग के सेंटर पाइंट को फिलहाल खुला ही रखा गया है। फिनिशिंग और ट्रैक का काम पूरा होने पर इसे कवर कर दिया जाएगा। इसी जगह पर एक लिफ्ट भी लगाई जाएगी। जिसका उपयोग आपातकाल स्थिति में कर्मचारियों को नीचे भेजने और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए होगा। बता दें कि इस बार बजट में प्रोजेक्ट के लिए 600 करोड़ रुपये मिले हैं। पूरी परियोजना को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य इस परियोजना का एक बड़ा हिस्सा आदिवासी अंचल को रेल सेवाओं से जोड़ेगा। परियोजना में पीथमपुर, सागौर, गुणावद, नौगांव, झाबुआ, पिटोल में नए रेलवे स्टेशन भवन, प्लेटफार्म आदि का निर्माण शुरू कर दिया है। इसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। साल 2008 में प्रोजेक्ट का शुभारंग हुआ था और काम साल 2013 में शुरू हुआ था। वर्तमान में 205 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में अलग-अलग हिस्सों में काम चल रहा है। इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट (205 किमी) को इंदौर-टिही (29 किमी), टिही-गुणावद (28 किमी), गुणावद-नौगांव (14 किमी), धार-अमझेरा (20 किमी), अमझेरा-सरदारपुर (20 किमी), सरदारपुर-झाबुआ (60 किमी) सेक्शन में बांटकर काम किया जा रहा है।

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