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गणतंत्र दिवस नहीं इस बार ‘वीर बाल दिवस’ पर बहादुर बच्चों को मिलेगा पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी सम्मानित

नई दिल्ली पहली बार गणतंत्र दिवस के बजाय देश के बाल पुरस्कार आगामी 26 दिसंबर को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के अवसर पर दिए जाएंगे। इस बार पुरस्कृत होने वाले सभी 17 बच्चों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सम्मानित करेंगी। राष्ट्रपति मुर्मु करेंगी सम्मानित यह सम्मान सिर्फ वीरता के लिए ही नहीं बल्कि कला-संस्कृति, अन्वेषण, विज्ञान व तकनीकी, समाज सेवा, खेल और पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भी दिए जाएंगे। हालांकि इस समारोह का मुख्य केंद्र ‘वीर बाल दिवस’ ही होगा। 17 बच्चों को मिलेगा पुरस्कार केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण मंत्री ने मंगलवार को एक बयान जारी करके बताया कि भारत के बच्चों की उपलब्धियों और साम‌र्थ्य को सम्मानित करते हुए आगामी गुरुवार को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर राष्ट्रव्यापी गतिविधियों के लिए इस साल 14 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 17 बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार समारोह में सात श्रेणियों में उल्लेखनीय योगदान के लिए सात लड़कों और दस लड़कियों को सम्मानित किया जाएगा।

पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के 25 दिसंबर को जन्मदिन पर उन्हें नमन किया है। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्मशती है। अटल जी का छत्तीसगढ़ से और छत्तीसगढ़ के लोगों से हमेशा आत्मीय लगाव रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में अटल जी की भूमिका को याद करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़वासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के लोगों की समृद्धि के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया।  अटल जी के  सपनों को पूरा करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ी तेजी से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हमने अटल जी की स्मृति में इस रजत जयंती वर्ष को “अटल निर्माण वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है जिसके अंतर्गत राज्य में अधोसंरचना विकास के कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अटल जी कुशल राजनीतिज्ञ होने के साथ एक ओजस्वी वक्ता और कवि हृदय सरल व्यक्तित्व थे। अटल जी की याद में उनका जन्मदिन ’सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। अटल जी का सपना था – एक सशक्त, समृद्ध और खुशहाल भारत। उसी सपने को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ आज शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस के अवसर पर हम सभी को अटल जी के दिखाए रास्तों पर चलकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपना योगदान देकर अटल जी के स्वर्णिम भारत के स्वप्न को पूर्ण करने में सहभागी बनने के लिए दृढ़संकल्पित होना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी आज खजुराहो आएंगे, केन बेतवा लिंक परियोजना का भूमि पूजन करेंगे

 खजुराहो  देश की प्रथम नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास आज 25 दिसंबर बुधवार को खजुराहो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। 44 हजार 605 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। मप्र के 10 जिले और उत्तर प्रदेश के चार जिलों में पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ होगी। परियोजना में होने वाले व्यय का 90 प्रतिशत भार केंद्र सरकार उठाएगी। प्रदेश के ऊपर वित्तीय भार मात्र 10 प्रतिशत आएगा। इस परियोजना से 103 मेगावाट जल विद्युत एवं 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा, जिसका पूरा लाभ मध्य प्रदेश को मिलेगा। बुंदेलखंड का आर्थिक व सामाजिक विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना के प्रति लोगों को किया जा रहा जागरूक     इस बीच, प्रभावित जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को परियोजना के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गुन्नौर विधायक डॉ. राजेश वर्मा ने कहा कि यह बुंदेलखंड अंचल के लिए महत्वाकांक्षी योजना है।     उन्होंने कहा, ‘बुंदेलखंड की दो दशक पुरानी आस अब पूरी हो रही है। 18 साल से लंबित केन-बेतवा लिंक परियोजना का शुभारंभ क्षेत्र की प्यास के बुझने के साथ ही जीवन बदलने का ऐतिहासिक पड़ाव भी है।’     ‘चार दशके से बुंदेलखंड की जनता को जिस दिन का बेसब्री से इंतजार था, वह दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृढ़संकल्प से आ गया है। साथ ही भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का सपना पूरा हुआ।’     लोगों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से कलश यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है एवं कार्यक्रम में पहुंचने के लिए निमंत्रण दिया जा रहा है। सभी जगह ग्राम पंचायतों में कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।     इस योजना को लेकर सभी गावों में दीवार लेखन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं नुक्कड़ नाटक और गीत संगीत के माध्यम से भी लोगों में केन बेतवा लिंक परियोजना के बारे में बताया जा रहा है। खजुराहो पुलिस ने जारी किया रूट प्लान पीएम मोदी के आगमन को लेकर छतरपुर पुलिस द्वारा यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए पार्किंग व्यवस्था एवं डायवर्सन प्लान बनाया गया है, जिसका रूट चार्ट जारी किया जा रहा है। डायवर्सन प्लान के तहत छतरपुर, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी से कार्यक्रम में आने वाले वाहन की मंजू नगर रोड में फेस्टिवल ग्राउंड, लालगांव, प्रेम गिरी मंदिर, एएसआई ग्राउंड में पार्किंग रहेगी। महोबा, राजनगर, चंदला, गौरीहार, लवकुशनगर की तरफ से कार्यक्रम में आने वाले वाहन बलवंत सिंह महाविद्यालय परिसर पार्किंग, एमपीटी पार्किंग विवेकानंद चौराहा, टूरिस्ट ग्राउंड, आदिवर्त पार्किंग में पार्क करेंगे, जिला दमोह तरफ से आने वाली जो बसे छतरपुर होकर आएंगी वह गंज से राजनगर रोड एवं पन्ना तरफ से आने वाली बसें टोरिया टेक से डायवर्ट होकर आएंगी। पन्ना, चंद्रनगर तरफ से कार्यक्रम में आने वाले समस्त वाहन टोरिया टेक से सूरजपुरा रनेह फॉल, अचनार बाईपास से होते हुवे पायल तिराहा तक आएंगे, विक्रमपुर तरफ से आने वाले वाहन गोकुल धाम होते हुए खजुराहो आएंगे, रानेहफॉल चंद्रनगर से आने वाले वाहन अचनार बाईपास से पायल तिराहा तक आएंगे। पुलिस ने जारी की प्रतिबंधित सामग्री की सूची शिलान्यस समारोह हेतु सभास्थल, मार्ग एवं क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की दृष्टि से छतरपुर पुलिस द्वारा व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था एवं जनसामान्य की सुविधा हेतु छतरपुर पुलिस द्वारा कई घेरे की सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई है। सुरक्षा कारणों से कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन अथवा ड्रोन कैमरे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम धन्यवाद पत्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम छतरपुर जिले के जनपदों एवं ग्राम पंचायतों की जनता ने केन बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात के लिए 443 धन्यवाद पत्र दिए हैं। छतरपुर जिले में आगामी 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री, स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100 वीं जयंती पर केन बेतवा लिंक परियोजना के भूमिपूजन के लिए बुन्देलखण्ड की धरती पर खजुराहो में स्वयं पधार रहे हैं। यह परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिससे बुन्देलखंड के लोगों की पानी की समस्या का निदान होगा। 

30 महीने में बदल जाएगी क्षिप्रा नदी की तस्वीर, 12 किमी की टनल का काम शुरू,सिंहस्थ में पर्व स्नान के लिए नर्मदा से नहीं लाना होगा पानी

उज्जैन इंदौर की कान्ह नदी का गंदा पानी दिसंबर 2027 के बाद क्षिप्रा नदी को प्रदूषित नहीं कर पाएगा। न ही हर पर्व स्नान के लिए नर्मदा से करोड़ाें रुपए का पानी खरीदना पड़ेगा। इसी दावे के साथ कान्ह डायवर्जन की नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। नाम है- क्लोज डक्ट। इसमें 18 किमी की डक्ट होगी और 12 किमी लंबी टनल रहेगी। इंदौर रोड़ स्थित जमालपुरा से शुरू हुई इस योजना का 20% काम हो चुका है। जल संसाधन विभाग के माध्यम से 400 मजदूर, इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट की टीम इसे पूरा कर रही है। इससे पहले कान्ह डायवर्जन के नाम पर पिछले सिंहस्थ में 150 करोड़ रुपए खर्च किए थे। राघोपिपलिया से लेकर कैडी पैलेस तक बड़े पाइप डालकर कान्ह के गंदे पानी को डायवर्ट किया था, लेकिन यह योजना फेल हो गई। पाइपों की ज्वाइंट की इंजीनियरिंग ठीक नहीं थी। वशिष्ठ कंस्ट्रक्शन हैदराबाद के साइट इंजीनियर बृजेंद्र राजपूत ने बताया इस बार हर किमी के लिए इंजीनियर व तकनीकी एक्सपर्ट लगे हैं। कान्ह नदी के डायवर्सन के लिए इंदौर रोड स्थित जमालपुरा से बनाई जा रही टनल की पहली तस्वीर। दावा है कि इस योजना का 20% काम हो चुका है। दिसंबर 2027 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के अनुसार, क्षिप्रा को कान्ह के गंदे पानी से मुक्त करने के लिए यह एक बहुत कारगर योजना है। कान्ह का दूषित जल नहीं मिल सकेगा क्षिप्रा में कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग मयंक सिंह ने बताया कि 919.94 करोड़ लागत की कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना के कार्य मौके पर प्रारंभ हो गए हैं, जिसमें ग्राम बमोरा और देवराखेड़ी में टनल बिछाने के लिए खुदाई और ग्राम जमालपुर में कट एंड कवर का कार्य जारी है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना सिंहस्थ के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी. सन 2052 तक के सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में 40 क्यूमैक्स जल बहाव क्षमता का भूमिगत क्लोज डक्ट का निर्माण किया जा रहा हैं, जिससे जमालपुर के समीप कान्ह नदी पर बैराज निर्माण कर दूषित जल को टनल में भेजा जाएगा, जिससे कान्ह का दूषित जल क्षिप्रा में नहीं मिल सकेगा. सेवरखेड़ी-सिलारखेडी मध्यम सिंचाई परियोजना क्षिप्रा नदी को निरंतर प्रवाहमान बनाए रखने लिए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 614.53 करोड़ की विभाग को प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई हैं,  जिसकी कार्य एजेंसी निर्धारित कर जल्द मौके पर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है. परियोजना में सेवरखेड़ी में बैराज का निर्माण कर मानसून के समय बैराज से 51 मिली घन मीटर जल को लिफ्ट कर सिलारखड़ी जलाशय में डाला जाएगा, जिसके लिए सिलारखेड़ी जलाशय का विस्तार भी किया जाएगा. परियोजना से ग्रीष्म ऋतु में भी क्षिप्रा नदी प्रवाहमान बनी रहेगी. परियोजना को पूर्ण करने के लिए 30 माह लक्ष्य निर्धारित किया गया.  कान्ह और क्षिप्रा नदी पर बनाए जाएंगे बैराज क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए कान्ह नदी पर 5 और क्षिप्रा नदी पर 1 बैराज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए कुल 36.6 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसमें 6.24 करोड़ की लागत से गोठड़ा स्टॉपडेम, 5.06 करोड़ की लागत से पिपलिया राघो  बैराज, 6.35 करोड़ की लागत से रामवासा बैराज , 4.56 करोड़ की लागत से जमालपुरा स्टॉपडेम, 5.74 करोड़ की लागत से पंथपीपलई स्टॉपडैम और क्षिप्रा नदी पर 8.71 करोड़ की लागत से किठोदाराव बैराज का निर्माण किया जाएगा. क्लोज डक्ट योजना की टेंडर शर्त के अनुसार, 15 साल तक कंपनी को ही पूरा मेंटेेनेंस करना होगा। पिछली बार जो कान्ह डायवर्जन योजना थी, उसमें टेंडर में ये शर्तें नहींं थी। नई योजना में वर्षाकाल के बाद के पानी को बायपास करने की मात्रा पिछली कान्ह योजना से लगभग 7-8 गुना ज्यादा होगी। जो डक्ट बनेंगे, उनकी आसानी से जेसीबी तक की मदद से सफाई हो सकेगी। कुल मिलाकर हमारे सारे स्नान पर्व क्षिप्रा में बिना गंदे पानी के हो सकेंगे। 5 मीटर गहरी, 5 मीटर चौड़ी टनल पहले कान्ह डायवर्जन में सही से इंजीनियरिंग नहीं हुई, जिससे पाइपों के ज्वाइंट ठीक नहीं बैठ पाए। योजना फेल हुई। नई योजना में 400 लोगों की दक्ष टीम लगाई है। 5 मीटर गहरी व 5 मीटर चौड़ी टनल बना रहे है, इतनी ही लंबी-चौड़ी डक्ट रहेगी। दिसंबर 2027 में काम पूरा कर देंगे और 15 साल तक कंपनी ही मेंटेनेंस करेगी। -इंजीनियर शुभम पांडेय, डिप्टी प्रोजेक्ट इंचार्ज  

जेक सुलिवन ने बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और लोकतंत्र पर चिंता की व्यक्त

ढाका बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर अमेरिकी प्रशासन का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है। हाल ही में व्हाइट हाउस से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक सख्त संदेश भेजा गया। अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की ओर से की गई इस कॉल में बांग्लादेश में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति और लोकतंत्र पर चिंता व्यक्त की गई। गौरतलब है कि व्हाइट हाउस की तरफ यह बातचीत ऐसे वक्त पर हुई है जब राष्ट्रपति जो बाइडन के व्हाइट हाउस में कुछ ही दिन शेष हैं। व्हाइट हाउस ने अपने बयान में साफ किया कि हर नागरिक के मानवाधिकारों की रक्षा करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। धर्म, जाति और किसी भी प्रकार के भेदभाव से परे, अमेरिका ने बांग्लादेश को चेतावनी दी है कि वह अपनी जमीन पर हो रहे अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। इस बातचीत में यूनुस ने भी मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आश्वासन दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह आश्वासन जमीनी हकीकत में बदलेगा? अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की किरकिरी पिछले कुछ महीनों से बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बनी हुई हैं। अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर बांग्लादेश सरकार की आलोचना कर चुका है। हाल ही में एक धार्मिक नेता चिन्मयकृष्ण दास की गिरफ्तारी और उनके वकीलों के साथ बदसलूकी ने अमेरिका का ध्यान विशेष रूप से खींचा है। इसके अलावा, अमेरिका में रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों ने भी अपने देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर प्रदर्शन किए हैं। इन प्रदर्शनों के चलते बांग्लादेश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा है। क्या बांग्लादेश सुधरेगा? बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने अमेरिका को मानवाधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा का वादा किया है लेकिन हाल के दिनों में यूनुस सरकार हिंदुओं पर हुए हमलों पर चुप्पी ही साधे रही है।

यूनियन कार्बाइड के 337 मीट्रिक टन कचरे के भस्मीकरण के बाद 900 मीट्रिक टन अवशेष बनेगा

भोपाल  राजधानी में 40 साल पहले यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से जहरीली गैस का रिसाव हुआ था, जिससे हजारों लोग काल के गाल में समा गए थे. वहीं लाखों लोग इससे संक्रमित हुए और आज भी इसका दंश झेल रहे हैं. गैस कांड की वजह से बच्चे कई गंभीर बीमारियों के साथ पैदा होते हैं. वहीं अब इसके 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाने की खबरों से लोग दहशत में हैं. दरअसल, 2015 में सरकार ने इसके 10 टन खतरनाक कचरे को बतौर ट्रायल जलाता था, इससे पैदा हुई 40 टन राख को इंदौर जिले के पीथमुर में दफनाया गया था लेकिन इससे 8 किमी क्षेत्र का भूजल दूषित हो गया था. वहीं अब सरकार यहां पड़े 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाकर डिस्पोज करेगी. हालांकि, इसका क्या असर होगा, ये कह पाना मुश्किल है. यही वजह है कि जिस जगह पर यह जहरीला कचरा जलाया जाना है, वहां के लोग विरोध पर उतर आए हैं. ‘तीन गुना बढ़ेगा जहरीला कचरा’ भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा “यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के भस्मीकरण से पर्यावरण और वन मंत्रालय की तकनीकी प्रस्तुति के अनुसार, भस्मीकरण के बाद 900 मीट्रिक टन अवशेष बनेगा. यानी अभी जो कचरा जलाने जा रहे हैं, अवशेष उसका तीन गुना बचेगा. वहीं यह ध्यान रखने योग्य है कि इस 900 मीट्रिक टन में जहरीली धातुओं की बहुत अधिक मात्रा होगी. इधर, पीथमपुर में तथाकथित सुरक्षित लैंडफिल से पिछले कुछ सालों से जहरीला रिसाव जारी है. अधिकारियों के पास यह सुनिश्चित करने का कोई तरीका नहीं है कि 900 मीट्रिक टन अवशेषों से निकलने वाला जहर पीथमपुर और उसके आसपास के भूजल को प्रदूषित न करे.” ‘यूनियन कार्बाइड कंपनी अमेरिका ले जाए कचरा’ भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा “सरकारी योजनाओं के अनुसार, भोपाल से निकलने वाले खतरनाक कचरे को साढ़े तीन महीने तक जलाया जाना है. इतने लंबे समय तक भस्मक से निकलने वाले धुएं में जहर और पार्टिकुलेट मैटर के चपेट में आने वाली आबादी की संख्या एक लाख से भी अधिक है. वर्तमान में जो काम जारी है वह जानबूझकर सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक हादसा पैदा करने से कम नहीं है.” रचना ढ़ींगरा ने कहा कि “यदि सरकार इस कचरे को इंदौर में जलाती है, तो वहां भी वायु और जल प्रदूषण बढ़ेगा. इससे अच्छा ये है कि या तो सरकार उस कचरे को वहीं पड़ा रहने दे या फिर यूनियन कार्बाइड कंपनी के प्रबंधन को यह जहरीला कचरा अमेरिका ले जाने का दबाव बनाए.” पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर और जयंत मलैया ने किया था विरोध यूनियन कार्बाइड के खतरनाक कचरे को पीथमपुर में जलाने के विरोध के लंबे इतिहास पर बोलते हुए भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के नवाब खान ने कहा “पर्यावरण मंत्री के तौर पर जयंत मलैया और गैस राहत मंत्री के तौर पर बाबूलाल गौर ने कई सरकारी बैठकों में भोपाल के कचरे को पीथमपुर में जलाने की योजना का विरोध किया था. गैस राहत आयुक्त ने तो कचरे को पीथमपुर में जलाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा तक दाखिल किया था. हम ये तथ्य अब सबके सामने इसलिए ला रहे हैं ताकि पीथमपुर को धीमी गति से हो रहे भोपाल हादसे में बदलने की प्रक्रिया में लगे अधिकारी बाद में यह न कह सकें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी.” एक किलो कचरा जलाने पर आएगी 3000 रु की लागत रचना ढींगरा ने बताया, “सरकार 337 मीट्रिक टन कचरे को जलाने में 126 करोड़ रु खर्च कर रही है. यह आंकड़ा पूरे विश्व में सबसे मंहगा है. जहां प्रति टन कचरा जलाने पर करीब 27 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे. यानी एक किलो कचरा जलाने की लागत 3 हजार रुपये प्रति किलो से अधिक है.” रचना ने बताया, “इससे पहले 2010 से 2015 के बीच पीथमपुर संयंत्र में जहरीले कचरे के निपटान के सात में से छह परीक्षण विफल रहे. क्योंकि इससे डाइऑक्सिन और फ्यूरान की मात्रा स्वीकार्य सीमा से 16 गुना अधिक हो गई थी.”

20 जनवरी तक हो सकता है BJP के नए अध्यक्ष का ऐलान, जनवरी के दूसरे सप्ताह में बैठक

नई दिल्ली भाजपा को नया अध्यक्ष अगले सााल जनवरी-फरवरी में मिल सकता है। इसके लिए कुछ केंद्रीय मंत्रियों समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। हालांकि, इस बारे में फैसला होने से पूर्व भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं के बीच जनवरी के दूसरे सप्ताह में अनौपचारिक बैठक हो सकती है। इसके पहले पार्टी आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में नये अध्यक्षों की नियुक्ति करेगी। भाजपा नेतृत्व नये अध्यक्ष को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। वह संगठन स्तर पर अपनी स्थिति को व्यापक व मजबूत करने के साथ आगे बढ़ रहा है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा केंद्र में मंत्री बनने के बाद भी अपना दायित्व निभा ही रहे हैं और संगठन स्तर पर भी पूरी तरह सक्रिय हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि संगठन चुनाव चल रहे हैं। जनवरी-फरवरी में नया अध्यक्ष संगठन को मिल जाएगा। दिल्ली के विधानसभा चुनाव को लेकर इस नेता का कहना है कि यह संगठन पर निर्भर करेगा कि उसकी उस समय की प्राथमिकताएं और जरूरतें क्या हैं। चूंकि नया अध्यक्ष 15 जनवरी के बाद आना है, इसलिए अगर चुनाव के चलते संगठन एक माह का और समय लेता है तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, भाजपा अध्यक्ष के चयन के पहले पार्टी व संघ के नेताओं के बीच नये नेता को लेकर चर्चा होना बाकी है। अभी जो नाम चर्चा में है, वह अनुमानों पर है। सूत्रों के अनुसार, अभी तक न तो भाजपा नेतृत्व ने किसी नाम को लेकर संघ से चर्चा की है और न ही संघ ने किसी नाम का सुझाव दिया है। संभवतः जनवरी के दूसरे सप्ताह में भाजपा व संघ के शीर्ष नेताओं के बीच इस बारे में अनौपचारिक बैठक होगी, जिसमें नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा होगी। जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर, जी. किशन रेड्डी आदि शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राज्यों के संगठन चुनावों में आधा दर्जन से ज्यादा प्रदेशों में नये अध्यक्ष आना तय हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात शामिल हैं। संगठन चुनावों की मौजूदा स्थिति में अधिकांश राज्यों में मंडल अध्यक्षों के चुनाव पूरे हो चुके हैं। इस माह के अंत और जनवरी के पहले सप्ताह तक जिलों के चुनाव पूरे किए जाने की तैयारी है। इसके बाद राज्यों के चुनाव होंगे। क्या कहता है बीजेपी का संविधान? भारतीय जनता पार्टी के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले कम से कम आधे राज्य इकाइयों में संगठनात्मक चुनाव खत्म पूरे जाने चाहिए. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल 3 साल का होता है. हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए जेपी नड्डा के कार्यकाल को आगे बढ़ा दिया गया था. 2020 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे नड्डा फरवरी 2020 में जेपी नड्डा को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया था. नड्डा पार्टी के 11वें राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. इसके बाद जनवरी 2023 में नड्डा का कार्यकाल पूरा हो रहा था उससे पहले ही अमित शाह ने कहा कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने सर्वसम्मति से पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा का कार्यकाल जून 2024 तक बढ़ाने का फैसला किया. तब से लेकर अभी तक नड्डा बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. अब बीजेपी का नया अध्यक्ष सरकार या संगठन किसी से भी हो सकता है. बीजेपी का राष्ट्रीय पार्टी या फिर संगठन से कोई भी हो सकता है. अभी तक किसी का भी नाम सामने नहीं आया है. आने वाले कुछ दिनों में इसे लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है.

इसरो के चेयरमैन ने कहा- चांद पर अब इंसान भेजने की भी हो गई तैयारी, बताया किस साल लहराएगा तिरंगा

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद के चेयरमैन डॉ. एस सोमनाथ का कहना है कि भारत 2040 में चांद पर लैंडिंग करेगा। उन्होंने कहा कि हम इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू करने वाले हैं और इंसान को चांद पर लैंड कराएंगे। यही नहीं भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन भी 2035 में स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है। स्पेस स्टेशन मॉड्यूल की लॉन्चिंग 2028 में की जाएगी और फिर अगले 7 सालों में यह अभियान पूरा हो जाएगा। भारत के चंद्रयान मिशन की बड़ी सफलता के बाद इसरो का यह महत्वाकांक्षी अभियान पूरी दुनिया को अंतरिम में भारत की क्षमता को दिखाने वाला है। एस. सोमनाथ ने कहा कि अगले 15 सालों का रोडमैप हमने तैयार कर लिया है और लॉन्ग टर्म विजन के साथ प्रयासों में जुटे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार ने 31 हजार करोड़ रुपये का फंड इसरो के लिए जारी किया है। इसी पर बात करते हुए इसरो चीफ एस. सोमनाथ ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मुझे विश्वास है कि यह साल हमारे लिए बहुत शानदार रहेगा। हम अपने मिशनों पर आगे बढ़ेंगे। इसके अलावा पीएम के विजन के आधार पर आगे का भी रोडमैप तय करेंगे। स्पेस प्रोग्राम के इतिहास में हमारे पास पहली बार अगले 25 सालों का प्लान तय है।’ इस प्लान के तहत भारत अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने वाला है, जिसकी शुरुआत 2028 से होगी। इसके अलावा 2040 में भारत ने चांद पर इंसान को भेजने का लक्ष्य तय किया है। यह बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। डॉ. सोमनाथ ने कहा कि ऐसा कारनामा हम देश की आजादी की 100वीं वर्षगांठ पर करके दिखाएंगे। उन्होंने कहा, ‘हम जब देश की आजादी की 100वीं सालगिरह मनाएंगे तो भारत का झंडा भी चांद पर लहराएगा। हमारा एक यात्री वहां जाएगा और वहीं पर तिरंगा लहराकर लौटेगा। हमारा यह लक्ष्य वर्ष 2040 के लिए है।’ इससे पहले चंद्रयान-4 मिशन पर काम चल रहा है। इसके तहत यह तय किया जाएगा कि चंद्रयान मिशन कैसे सुरक्षित वापस लौटकर भी दिखाए। फिलहाल भारत इस बात की तैयारी कर रहा है कि कैसे चंद्रयान मिशन के लिए पेलोड तैयार किए जाएं। लॉन्च वीकल आदि को विकसित किया जाए, जिससे चांद पर लैंडिंग के साथ ही सुरक्षित वापसी भी की जा सके।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की सफलता एवं आगामी कार्य योजना पर विशेष कार्यक्रम आयोजित

भोपाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि सड़क निर्माण में ऐसी तकनीको का प्रयोग बढ़ाया जाएगा, जिससे प्रकृति संरक्षण और समावेशी विकास हो। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सड़कों के निर्माण में ग्रीन टेक्नोलॉजी में अगुआई करने वाला राज्य बनेगा। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि राज्य ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाय) के तीनों चरणों में उत्कृष्ट कार्य किया है, चौथे चरण में भी बेहतर काम होगा। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में योजना के सभी लक्ष्य समय सीमा में पूर्ण होंगे। मंत्री श्री पटेल मंगलवार को “प्रधानमंत्री ग्राम सड़क की सफलता 2000-2024 एवं आगामी कार्य योजना पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम मे शामिल हुए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी, संयुक्त सचिव श्री अमित शुक्ला, मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क प्राधिकरण श्री दीपक आर्य उपस्थित रहे। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत की। यह योजना से ग्रामीण विकास के लिए वरदान साबित हुई। उनकी जनशताब्दी पर योजना ने 25 वर्ष पूर्ण कर लिए है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के शरीर में जिस तरह रीढ़ की हड्डी है, उसी तरह ग्रामीण सड़कों ने देश के विकास में अपना योगदान दिया है। मध्यप्रदेश ने योजना के प्रारंभ से ही उल्लेखनीय कार्य किए गए है। एमपीआरआरडीए के नवाचार ई-मार्ग, संवेग की सराहना केंद्र सरकार द्वारा की गई है, यह विशेष उपलब्धि है। प्राधिकरण द्वारा योजना के तहत बनाई गई 77 सड़कों का संधारण महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है, यह अत्यंत सराहनीय है। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि राज्य में 10 हजार किलोमीटर के अधिक सड़कें वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग कर बनाई गई है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। मंत्री श्री पटेल कहा कि जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का काम भी इस योजना ने किया है। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित जिलों में सड़कों के बनने से सरकार की पहुंच बढ़ी है। उन्होंने बताया कि कैसे नरसिंहपुर जिले के जनजातीय गांव बमनी तक सड़क बनने से शेष गांव भी लाभान्वित हुए। उन्होंने पीएम जनमन योजना में जनजातीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो बसाहटें सड़क विहीन हैं, उन्हें इस योजना के आगामी चौथे चरण में शामिल किया जायेगा। वर्कशॉप में आगामी कार्ययोजना और संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर भी विचार विमर्श हो। प्रमुख सचिव श्रीमती रस्तोगी ने कहा कि पीएमजीएसवाय की सफलता का कारण योजना की सेंट्रलाइज्ड प्लानिंग है। मध्यप्रदेश हमेशा इस योजना के क्रियान्वयन में अव्वल रहा है, हम आगे भी अग्रणी रहेंगे। आगामी योजना में नई टेक्नोलॉजी के उपयोग पर अधिक जोर दिया जाएगा साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाई जाएगी। संयुक्त सचिव श्री शुक्ला ने कहा कि योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में कई नवाचार किए गए हैं, जो सराहनीय है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का चौथा चरण प्रारंभ हो रहा है। इस चरण में 2011 की जनसंख्या अनुसार मैदानी इलाकों में 500+, पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों, विशेष श्रेणी क्षेत्रों (जनजातीय अनुसूची V, आकांक्षी जिले/ब्लॉक, रेगिस्तानी क्षेत्र) में 250+ की जनसंख्या से अधिक बसाहटों को जोड़ा जायेगा। सर्वे कार्य जनवरी 2025 तक पूर्ण होगा। सड़क निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों को शामिल किया जाएगा, कोल्ड मिक्स प्रौद्योगिकी, अपशिष्ट प्लास्टिक, पैनलयुक्त सीमेंट कंक्रीट, सेल-भरे कंक्रीट तथा अन्य अपशिष्ट, फ्लाई ऐश और स्टील धातुमल का उपयोग होगा। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर पर स्थानीय जन-प्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्य योजना बनाई जाए। योजना के लिए कार्य योजना पीएम गति शक्ति पोर्टल के माध्यम से बनाई जाएगी, साथ ही पोर्टल पर उपलब्ध नियोजन टूल डीपीआर तैयार करने में भी सहायक होगा। मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आर्य ने कहा कि मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विगत तीन वर्षों से सड़क निर्माण एवं गुणवत्ता में अग्रणी होने से केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश को पुरस्कृत किया है। राज्य में आई टी टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा। प्राधिकरण द्वारा विकसित ई-मार्ग सॉफ्टवेयर सम्पूर्ण देश में लागू किया गया है। यह गर्व का विषय है। संवेग पोर्टल से सड़को का संधारण बेहतर हो रहा है। नवीन टेक्नोलॉजी समावेश, कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए राज्य में प्रशिक्षण अकादमी भी स्थापित की गई है। इस अवसर पर पीएमजीएसवाय की उपलब्धियों पर आधारित फिल्म दिखाई गई। मुख्य अभियंता आरआरडीए श्री विजय गुप्ता ने आभार व्यक्त किया।  

19 फरवरी को कराची से शुरू होगा आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का आगाज, 9 मार्च को खेला जायेगा फाईनल मैच

नई दिल्ली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के फिक्स्चर और ग्रुप की घोषणा आईसीसी ने कर दी है। यह टूर्नामेंट 19 फरवरी को कराची में शुरू होगा और फाइनल 9 मार्च को होगा। आठ टीमों के इस टूर्नामेंट में 15 मैच होंगे और यह प्रतियोगिता पाकिस्तान और दुबई में खेली जाएगी। पाकिस्तान में, रावलपिंडी, लाहौर और कराची में तीन जगहों पर मैच खेले जाएंगे। पाकिस्तान में प्रत्येक जगह पर तीन ग्रुप गेम होंगे, जिसमें लाहौर दूसरे सेमीफाइनल की मेजबानी भी करेगा। जबकि भारत से जुड़े तीन ग्रुप मैचों के साथ-साथ पहला सेमीफाइनल दुबई में खेला जाएगा। 9 मार्च को लाहौर में फाइनल होगा। लेकिन अगर भारत फाइनल के लिए क्वालीफाई करता है, उस स्थिति में यह दुबई में खेला जाएगा। दोनों सेमीफाइनल और फाइनल में रिजर्व डे होंगे। पाकिस्तान 19 फरवरी को कराची में ग्रुप ए टूर्नामेंट ओपनर में न्यूजीलैंड से भिड़ेगा। भारत और पाकिस्तान के मैच के साथ दुबई लेग अगले दिन से शुरू होगा। ग्रुप बी की शुरुआत 21 फरवरी को होगी, जब अफगानिस्तान कराची में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैदान में उतरेगा। शनिवार (22 फरवरी) को लाहौर में प्रतिद्वंद्वी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया आमने-सामने होंगे, और अगले दिन (23 फरवरी) बहुप्रतीक्षित पाकिस्तान-भारत मैच होगा। यह मैच दुबई में खेला जाएगा। बता दें कि चैंपियंस ट्रॉफी में प्रतिस्पर्धा करने वाली आठ टीमें आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप 2023 के अंकों की तालिका में शीर्ष आठ स्थानों पर रही टीमें हैं। टूर्नामेंट के ग्रुप ए में मौजूदा चैंपियंस ट्रॉफी धारक और मेजबान पाकिस्तान, भारत, न्यूजीलैंड और बांग्लादेश शामिल हैं, जबकि ग्रुप बी में क्रिकेट विश्व कप 2023 के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। चैंपियंस ट्रॉफी का कार्यक्रम: 19 फरवरी: पाकिस्तान बनाम न्यूजीलैंड, कराची, पाकिस्तान 20 फरवरी: बांग्लादेश बनाम भारत, दुबई 21 फरवरी: अफगानिस्तान बनाम दक्षिण अफ्रीका, कराची, पाकिस्तान 22 फरवरी: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड, लाहौर, पाकिस्तान 23 फरवरी: पाकिस्तान बनाम भारत, दुबई 24 फरवरी: बांग्लादेश बनाम न्यूजीलैंड, रावलपिंडी, पाकिस्तान 25 फरवरी: ऑस्ट्रेलिया बनाम दक्षिण अफ्रीका, रावलपिंडी, पाकिस्तान 26 फरवरी: अफगानिस्तान बनाम इंग्लैंड, लाहौर, पाकिस्तान 27 फरवरी: पाकिस्तान बनाम बांग्लादेश, रावलपिंडी, पाकिस्तान 28 फरवरी: अफगानिस्तान बनाम ऑस्ट्रेलिया, लाहौर, पाकिस्तान 1 मार्च: दक्षिण अफ्रीका बनाम इंग्लैंड, कराची, पाकिस्तान 2 मार्च: न्यूजीलैंड बनाम भारत, दुबई 4 मार्च: सेमीफाइनल 1, दुबई 5 मार्च: सेमीफाइनल 2, लाहौर, पाकिस्तान 9 मार्च: फाइनल, लाहौर (जब तक भारत क्वालीफाई नहीं करता, तब तक यह दुबई में खेला जाएगा) 10 मार्च: रिजर्व डे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति का अपना विशेष महत्व है, मनुष्य जीवन सत्कर्म के लिए प्राप्त हुआ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति का अपना विशेष महत्व है। मनुष्य जीवन सत्कर्म के लिए प्राप्त हुआ है। कथा श्रवण के माध्यम से हमें जीवन दर्शन की राह मिलती है, जो हमें सदमार्ग की ओर चलने के लिए सदैव प्रेरित करती है। गौमाता की सेवा भगवान की सेवा के समान है। संत कमल किशोर नागर महाराज गौसेवा के एक बड़े संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे है। संत श्री के प्रयासों से मालवा, निमाड़, जनजाति अंचल सहित प्रदेश भर में गौमाताओं के पालन का दायित्व निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है, जो प्रशंसनीय और वंदनीय है। भगवत गीता से हमें कर्म के प्रति आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, इसलिए आवश्यक है कि प्रत्येक व्यक्ति ऐसे सदकर्म करें, जिससे उनकी भावी पीढ़ी पुण्य के मार्ग पर चले और मनुष्य जीवन को सार्थक बनाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को इंदौर जिले के सांवेर स्थित चित्तौडा में श्रीमद्भागवत गौशाला में आयोजित भागवत कथा में उपस्थित श्रृद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमद्भागवत गौशाला चित्तौडा की भूमि को गौशाला के नाम करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा गीता जयंती के आयोजन से पूरे प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण के कर्म के संदेश को पहुंचाने का कार्य किया गया है। संत श्री कमल किशोर जी नागर के द्वारा निस्वार्थ भाव से गौशाला संचालन के लिए जो पुनीत कार्य की अलख जगाई गई है, वह वंदनीय है। संत श्री ने गौशाला संचालन के साथ कई आदर्श निर्मित किए हैं, जो समाज को एक नई दिशा देने का कार्य कर रहे है। उन्होंने प्रदेश के जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट के प्रयासों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नदी जोड़ो अभियान विकास को एक नई दिशा देने का काम करेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 25 दिसम्बर को केन-बेतवा नदी जोड़ो अभियान  के माध्यम से विकास को एक नई दिशा देंगे। उन्होंने कहा प्रदेश में दो नदी जोड़ो अभियान से लगभग 25 जिलों के बडे़ क्षेत्रों में सिंचाई का रकबा बढे़गा, जिससे मालवा और बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। नदी जोड़ो अभियान से प्रदेश का बड़ा क्षेत्र लाभान्वित होगा।   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने गोवंश पालन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं। घर-घर गोपाल और गांव-गांव वृंदावन बने, इसके लिए प्रदेश के 313 ब्लॉक के एक-एक गांव में जहां 500 से अधिक गोवंश होगा, उनको वृंदावन गांव बनाकर आदर्श रूप में विकसित करेंगे। वहीं 10 से अधिक गौमाता पालने वाले पशुपालकों को अनुदान देकर प्रोत्साहित करेंगे ताकि घर-घर गोपाल बने। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दूध खरीदी पर बोनस भी दिया जाएगा। हमारा लक्ष्य कि जिससे घर-घर दूध उत्पादन बढ़े और प्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गोपालन के प्रति लोगों में रुचि बढे़, इसके लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने संत कमल किशोर जी नागर द्वारा गोवंश संरक्षण एवं गौशाला के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने व्यास पीठ का पूजन कर संत श्री नागर का शाल भेंट कर अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का साफा बांधकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री चिंदू वर्मा सहित श्रीमद्भागवत गौ-शाला चित्तौडा के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित थे।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों को 24 घंटे साफ पानी देने का वादा किया

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही आम आदमी पार्टी (AAP) ने फिर से बड़े वादे करना शुरू कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों को 24 घंटे साफ पानी देने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए विशेष प्लांट लगाए जाएंगे, जो पानी से अमोनिया हटाएंगे, और साथ ही 2,500 ट्यूबवेल भी लगाए जाएंगे। 24 घंटे मिलेगा साफ पानी आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को यहां राजिंदर नगर इलाके में पांडव नगर डीडीए फ्लैटों में चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति शुरू की। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “जब हम 10 साल पहले दिल्ली में सत्ता में आए थे, तब करीब 50-60 फीसदी पानी टैंकरों से सप्लाई होता था। टैंकर माफिया हुआ करते थे। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आज, 10 साल बाद, दिल्ली के 97 फीसदी हिस्से में पाइपलाइन से पानी आता है।”  हमने वादा किया था कि दिल्ली के हर घर में 24 घंटे साफ़ पानी पहुँचाएंगे। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इसकी शुरुआत हो चुकी है। राजेंद्र नगर विधानसभा में जाकर मैंने ख़ुद टोंटी से पानी पिया, पानी एकदम साफ़-सुथरा है। अब पूरी दिल्ली को नल से 24 घंटे साफ़ पानी मिलेगा। उन्होंने कहा, “आज, राजिंदर नगर में चौबीसों घंटे साफ पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है और हम आने वाले समय में इसे पूरी दिल्ली में लागू करेंगे।” यह दिखाने के लिए कि पानी साफ है, केजरीवाल ने सीधे नल से पानी पिया। आप प्रमुख के साथ दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और स्थानीय विधायक दुर्गेश पाठक भी थे। आप ने अगले साल फरवरी में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए राजिंदर नगर निर्वाचन क्षेत्र से पाठक को मैदान में उतारा है। केजरीवाल के अन्य वादे केजरीवाल ने 2025 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कई और बड़े वादे किए हैं। इनमें से एक बड़ा वादा है कि अगर AAP फिर से सत्ता में आई, तो हर पात्र महिला को हर महीने 2100 रुपये दिए जाएंगे। इस योजना का लाभ 18 साल और उससे ऊपर की हर महिला को मिलेगा, इसके लिए उन्हें रजिस्ट्रेशन कराना होगा।इसके अलावा, केजरीवाल ने दलित समाज के लिए भी एक अहम घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जो भी दलित छात्र विदेश में पढ़ना चाहते हैं, दिल्ली सरकार उनका पूरा खर्च उठाएगी। इन वादों के साथ, आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी चुनावी तैयारियों में जुटी हुई है और दिल्लीवासियों को बेहतर सुविधाएं देने का वादा कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का करेंगे लोकार्पण

प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को खजुराहो में करेंगे देश की पहली केन-बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री मोदी पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश को देंगे अनेक सौगातें प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का करेंगे लोकार्पण 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन और प्रथम किश्त का करेंगे वितरण पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की स्मृति में स्टॉम्प और सिक्का करेंगे जारी भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत-रत्न से सम्मानित स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर मध्यप्रदेश के खजुराहो में देश की पहली महत्वाकांक्षी और बहुउद्देशीय केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी देश की पहली ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना का लोकार्पण और 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की स्मृति में स्टॉम्प और सिक्का भी जारी करेंगे। देश को नदी जोड़ो की परिकल्पना देने वाले युगदृष्टा स्व. वाजपेयी की जयंती पर यह मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी सौगात होगी। प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को दोपहर 12:10 बजे खजुराहो आयेंगे और दोपहर 2:20 बजे दिल्ली के लिये रवाना होंगे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। सिंचाई के साथ पेयजल की सुविधा प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस परियोजना के शिलान्यास के साथ ही स्व. वाजपेयी का नदी जोड़ो का सपना मध्यप्रदेश में मूर्त रूप लेगा। केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, देश में भूमिगत दाब युक्त पाइप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाली सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिलों छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर में 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और 44 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। फसलों के उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण से हरित ऊर्जा में 103 मेगावॉट योगदान के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। बेहतर जल प्रबंधन एवं औद्योगिक इकाइयों को पर्याप्त जल आपूर्ति से औद्योगिक विकास होगा और रोजगार को बढ़ावा भी मिलेगा। इस परियोजना से उत्तर प्रदेश में 59 हजार हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी एवं 1.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मौजूदा सिंचाई का स्थिरीकरण किया जायेगा, जिससे उत्तर प्रदेश के महोबा, झांसी, ललितपुर एवं बांदा जिलों में सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। परियोजना से मध्यप्रदेश की 44 लाख और उत्तर प्रदेश की 21 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा उपलब्ध होगी। ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश के खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में स्थापित फ्लोटिंग सौर परियोजना का लोकार्पण करेंगे। परियोजना के प्रथम चरण में इस वर्ष अक्टूबर माह से पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन प्रारंभ हो गया है। परियोजना के द्वितीय चरण की 240 मेगावॉट क्षमता के लिये एमपीपीएसीए से आवश्यक सहमति उपरांत चयनित विकासक “सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड” से अनुबंध हस्ताक्षरित किया जाना प्रस्तावित है। पुण्य सलिला माँ नर्मदा के ऊपर ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सौर परियोजना को प्रदेश की जनता को समर्पित करना प्रदेश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन ऊर्जा के प्रति सरकार के सतत प्रयासों को प्रदर्शित करता है। अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन प्रधानमंत्री मोदी मध्यप्रदेश में 1153 अटल ग्राम सुशासन भवनों का भूमि-पूजन कर प्रथम किश्त का वितरण भी करेंगे। प्रदेश की 23 हजार ग्राम पंचायतों में से भवन विहीन, जीर्ण-शीर्ण भवन और अनुपयोगी 2500 ग्राम पंचायतों को नवीन भवन की स्वीकृति के लिये चिन्हित किया गया है। प्रारंभिक चरण में 1153 नवीन पंचायत भवनों के लिये 437.62 करोड़ रूपये के कार्य स्वीकृत किये गये हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी का मत था कि पंचायत भवन, ग्राम पंचायत की सर्वाधिक मूल एवं महत्वपूर्ण अधोसरंचना है। इन भवनों की ग्राम पंचायतों के व्यवहारिक रूप से कार्य एवं दायित्वों के संवहन और कार्य संपादन में महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश सरकार ने पंचायतों को सशक्त करने के लिये समस्त ग्राम पंचायतों में नवीन पंचायत भवन एवं क्लस्टर स्तर पर क्लस्टर पंचायत भवन स्वीकृत करने का निर्णय लिया है।  

प्रदेश में 4 दिन तक ओले-पानी, कोहरे का अलर्ट, 4 दिन तक बिगड़ा रहेगा मौसम, भिंड और सीहोर में रात भर से हो रही रिमझिम बारिश

भोपाल नए साल से पहले मध्यप्रदेश में मौसम के अलग अलग रुप देखने को मिल रहा है। ठंड-कोहरे के बीच बादल-बारिश और ओले की स्थिति बनी हुई है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग का मौसम बदला ही रहेगा।खास करके 27 दिसंबर को मौसम सबसे ज्यादा खराब रहने का अनुमान है। 28 दिसंबर तक प्रदेश में कहीं कहीं बारिश होगी तो कुछ स्थानों पर ओले गिरने की संभावना है। इस दौरान अगले 5 दिनों तक दिन-रात के तापमान में भी 2 से 4 डिग्री की वृद्धि होगी लेकिन ठंडी हवाओं से रात में ठिठुरन रहेगी।जनवरी से फिर मौसम करवट लेगा और तापमान के गिरते ही कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर कोहरा का प्रभाव देखने को मिलेगा। मध्यप्रदेश में अगले 4 दिन तक ओले, बारिश और कोहरा रहेगा। वहीं, रात में ठंडी हवाओं से ठिठुरन रहेगी। कई जिलों में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी बादल छाए हुए हैं। भिंड और सीहोर के कई क्षेत्रों में रात भर से हो रही रिमझिम बारिश आज सुबह भी जारी रही। इससे पहले सोमवार को भी मौसम बदला रहा। भोपाल समेत कई जिलों में बादल छाए रहे। इससे दिन के टेम्प्रेचर में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने 27 दिसंबर को सिस्टम सबसे ज्यादा स्ट्रॉन्ग रहने का अनुमान जताया है। इस दिन भोपाल, ग्वालियर समेत 21 जिलों में ओले-बारिश का अलर्ट है। वहीं, अन्य जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, प्रदेश में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के असर से मौसम का मिजाज बदला रहेगा। राजस्थान के ऊपर भी एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की एक्टिविटी रहेगी। जिससे बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं। अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम     24 दिसंबर: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, खरगोन, विदिशा, गुना और अशोकनगर में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इनमें से अशोकनगर, निवाड़ी और छतरपुर में गरज-चमक की स्थिति भी रहेगी।     25 दिसंबर: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, अशोकनगर और गुना में कोहरा रहेगा।     26 दिसंबर: इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर और गुना में हल्की बारिश का दौर रहेगा। इनमें से ज्यादातर जिलों में गरज-चमक की स्थिति भी बनी रहेगी।     27 दिसंबर: भोपाल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, सीहोर, शाजापुर, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा में आंधी, बारिश और गरज-चमक का ऑरेंज अलर्ट है। वहीं, इंदौर, उज्जैन, धार, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, आगर-मालवा, नीमच, राजगढ़, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, जबलपुर, कटनी और उमरिया में गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी। इस बार सीजन का पहला मावठा पड़ेगा मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर के महीने में प्रदेश में बारिश का ट्रेंड रहता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही मौसम है। इस बार भी मौसम बदल गया है। शनिवार को छिंदवाड़ा में बारिश भी हुई थी। वहीं, सोमवार को बादल छा गए हैं। सिस्टम गुजरने के बाद ठंड का असर इस बार मौसम का मिजाज बदला हुआ है। अमूमन दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार पहले ही पखवाड़े में ऐसी ठंड रही। आखिरी दिनों में बारिश की एक्टिविटी रहेगी। इसके गुजरने के बाद एक बार फिर कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो जाएगा, जो पूरे जनवरी महीने तक चलेगा। रात के तापमान में बढ़ोतरी, नौगांव-पचमढ़ी सबसे ठंडे प्रदेश के ज्यादातर शहरों से कड़ाके की ठंड का दौर खत्म हो गया है। ऐसा उत्तरी हवाओं के नहीं आने और वेस्टर्न डिस्टरबेंस की एक्टिविटी की वजह से हुआ है। जिससे रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है। रविवार-सोमवार की रात में नौगांव में 6.2 डिग्री, पचमढ़ी में 7.9 डिग्री, खजुराहो-मंडला में 8 डिग्री, टीकमगढ़ में 8.2 डिग्री, रायसेन में 9.2 डिग्री और उमरिया में 9.4 डिग्री तापमान रहा। बाकी जिलों में पारा 10 डिग्री के ऊपर ही दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में सबसे ज्यादा 14.6 डिग्री, उज्जैन में 13.5 डिग्री, जबलपुर में 10.4 डिग्री, भोपाल में 10.2 डिग्री और ग्वालियर में पारा 9.3 डिग्री रहा।

एमपी में एक बार फिर से बेस्ट ऑफ फाइव योजना को लागू कर दिया गया, अप्रैल 2024 में रद्द किया था

भोपाल एमपी में बोर्ड परीक्षा MP Board Exam में बड़ा बदलाव हुआ है। इसके अंतर्गत परीक्षार्थी 5 पेपर में ही पास हो जाएंगे। हाईस्कूल यानि 10वीं क्लास के 6 प्रश्नपत्रों में से किसी एक में फेल हो जाने पर भी वे पास माने जाएंगे। दरअसल एमपी बोर्ड ने हाईस्कूल के छात्रों के लिए बेस्ट ऑफ फाइव योजना फिर लागू कर दी है। बोर्ड परीक्षार्थियों का मानसिक तनाव कम करने और कमजोर विषयों में राहत देने के उद्देश्य से यह योजना दोबारा लागू की गई है। एमपी बोर्ड परीक्षा में एक बार फिर से बेस्ट ऑफ फाइव योजना को लागू कर दिया गया है। इस योजना से छात्रों को सीधे फायदा होने जा रहा है। दरअसल, बेस्ट ऑफ फाइव योजना के लागू होने के बाद 10वीं बोर्ड के छह प्रश्नपत्रों में से पांच में पास होने वाले परीक्षार्थी पास माने जाएंगे। इसी साल अप्रैल महीने में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर इसे रद्द कर दिया था। हालांकि, एक बार फिर से इसको लागू कर दिया गया है। बेस्ट ऑफ फाइव योजना के बारे में जानिए जानकारी दें कि बेस्ट ऑफ फाइव योजना के तहत छात्रों को 10वीं बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन और सफलता की अधिक संभावना होगी। इसी उद्देश्य के साथ इस योजना को राज्य में लागू किया गया था। योजना के तहत अगर कोई परीक्षार्थी छह अनिवार्य प्रश्नपत्रों में से किसी पांच में पास हो जाता है, तो उसे पास माना जाएगा। इस नियम को छात्रों के ऊपर से परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। जानिए कैसे काम करेगी ये योजना     कक्षा 10वीं के लिए एमपी बोर्ड के अंतर्गत 6 अनिवार्य विषयों की परीक्षा होती है।     योजना के तहत छात्रों को इनमें से किसी पांच विषय में न्यूनतम पासिंग अंक लाने होते हैं।     अगर कोई छात्र किसी एक विषय में कमजोर है तो उसके लिए ये योजना काफी लाभदायक साबित होगी।     यदि किसी छात्र का एक विषय कमजोर रहता है, तो वह अन्य पांच विषयों में अच्छे अंक लाकर पास हो सकता है।     योजना के लागू होने के बाद छात्रों पर पढ़ाई का दबाव कम होता है।     योजना के लागू होने के बाद छात्रों को अपनी ताकत के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने का मौका मिलता है। पहले योजना को किया गया रद्द उल्लेखनीय है कि इस योजना को इस साल अप्रैल के महीने में रद्द कर दिया गया था। इस योजना को रद्द करने के पीछे का उद्देश्य था कि छात्र सभी विषयों पर समान रूप से ध्यान दे सकें और अच्छा कर सकें। हालांकि, बाद में जनहित और छात्रों की मांग को देखते हुए इसे फिर से लागू किया गया है। किन छात्रों को होगा फायदा गौरतलब है कि ये योजना उन छात्रों के लिए विषेष रूप से लाभकारी साबित होने जा रही है, जो किसी एक विषय में कमजोर हैं। वहीं, वे अन्य विषयों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। माना जा रहा है कि ये योजना छात्रों के भीतर आत्मविश्वास को बढ़ाती है। इसके अलावा उनके मानसिक तनाव को भी कम करती है, जिससे वे परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। क्यों किया था रद्द अप्रैल 2024 में बेस्ट ऑफ फाइव योजना रद्द कर दी गई थी। तब कहा गया था कि बोर्ड परीक्षार्थियोें को सभी विषयों में समान रूप से मेहनत करने और ध्यान देने के लिए प्रेरित करने के लिए ऐसा किया गया।  

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