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NCPCR ने क्रिसमस से पहले जारी किया आदेश, सांता क्लॉज़ बनाने से पहले पैरेंट्स से लिखित अनुमति लेनी होगी

भोपाल मध्य प्रदेश के स्कूलों में क्रिसमस पर बच्चों को सांता क्लॉज़ बनाने से पहले पैरेंट्स से लिखित अनुमति लेनी होगी। ये आदेश बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने क्रिसमस से पहले जारी किया है। इसके लिए सभी जिला कलेक्टर को पत्र लिख निर्देशित किया गया है। क्रिसमस के मौके पर बच्चों को स्कूलों में सांता क्लॉज़ बनाने की परंपरा सी रही है। ये त्योहार मनाने का एक तरीका है और बच्चे भी इसमें उत्साह से भाग लेते आए हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में अब अगर कोई स्कूल इस तरह का आयोजन करने की योजना बना रहा है तो उसे अभिभावकों से अनुमति लेनी होगी और वो भी लिखित में। अन्यथा किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति बनने पर स्कूल या संस्था के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। बिना अनुमति बच्चों को न बनाएं सांता क्लॉज़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनुराग पांडेय ने इसके लिए स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत कहा गया है कि किसी भी स्कूल या संस्था द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने वाले बच्चों को किसी भी प्रकार की वेशभूषा पहनाने या किसी पात्र के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उनके अभिभावकों से लिखित अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बाल संरक्षण आयोग का आदेश इस पत्र में लिखा गया है कि ‘विविध आयोजनों के अवसर पर विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सहभागिता करने वाले चयनित बालक/बालिकाओं को विविध वेशभूषा एवं अन्य कोई पात्र बनाए जाने के लिए विद्यालय/संस्था द्वारा बालक/बालिकाओं के अभिभावकों से लिखित अनुमति प्राप्त कर ही बनाया जाए। किसी भी स्थिति में बिना अभिभावकों की लिखित अनुमति के किसी भी बालक/बालिकाओं को उक्त कार्यक्रम में सहभागिता न कराई जाए जिससे कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। इस संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत या विवाद संज्ञान में आता है तो विद्यालय/संस्था के विरुद्ध सुसंगत अधिनियमों के प्रावधानों के तहत कार्यवाही अनुशंसित की जाएगी जिसका संपूर्ण उत्तरदायित्व विद्यालय/संस्था का होगा।’ इस प्रकार अब मध्य प्रदेश में क्रिसमस पर बच्चों को सांता क्लॉज़ बनाने से पहले स्कूलों को स्टूडेंस्ट के पैरेंट्स से अनुमति लेनी होगी, वो भी लिखित में।

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना जल संरक्षण एवं जल समृद्धि की दिशा में एक नया अध्याय लिखने वाला होगा – विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल      मध्यप्रदेश की पुण्यभूमि, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक गौरव के लिए प्रसिद्ध है, अब एक और ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने जा रही है। 25 दिसंबर 2024 को मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के खजुराहो में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना का शिलान्यानस यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेंद्र मोदी जी के कर-कमलों से होगा। यह क्षण न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए विकास, जल संरक्षण एवं जल समृद्धि की दिशा में एक नया अध्याय लिखने वाला होगा, साथ ही यह भारत की जल क्रांति की नई गाथा लिखने का भी प्रतीक बनेगा। शुभ योग यह है कि परियोजना का भूमिपूजन आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की 100वीं जयंती के दिन हो रहा है, जिन्होंने भारत के विकास के लिए अनेक सपने देखे थे, उनमें नदियों को जोड़ना विशेष रूप से शामिल था। उन्होंने इस दिशा में प्रारंभिक कदम भी उठाए थे। प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी अब स्वप्न दृष्टा वाजपेयी जी के सपने साकार करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। यह परियोजना प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता, मध्यप्रदेश के प्रति उनके विशेष स्नेह और अटलजी के विचारों के प्रति समर्पण का एक और प्रमाण है, जो मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होगी।      प्राचीन भारतीय पौराणिक कथाओं में गंगा की धरा पर उपस्थिति का श्रेय राजा भागीरथ को दिया जाता है। राजा भागीरथ के तप और साधना से गंगा धरती पर अवतरित हुईं, जिसकी उपस्थिति से भारत का भू-भाग समृद्ध हुआ, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भी आधुनिक भागीरथ हैं। मोदीजी ने भी जल संकट से जूझते भारत के लिए एक नई जल क्रांति की शुरुआत की है। जल संसाधनों को भारत की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बनाया है। उनके नेतृत्व में जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य और विकास का आधार बन गया है। गुजरात में जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उनकी जल नीतियों ने सूखे और जल संकट से जूझते गुजरात को जलसमृद्धि का अनूठा उदाहरण बनाया। गुजरात, जो कभी सूखे और जल संकट का प्रतीक था, आज नर्मदा नदी के जल से आच्छादित है। उनकी दूरदृष्टि और अदम्य साहस ने नर्मदा नदी के जल को सही दिशा में मोड़ते हुए गुजरात की प्यास बुझाई, कृषि क्षेत्र को समृद्ध किया और नर्मदा के जल से साबरमती नदी को भी नया जीवन दिया। यह उनकी नीतियों और इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि गुजरात में जल के अभाव का स्थान जल के सदुपयोग और समृद्धि ने ले लिया। गुजरात में उनका काम जल संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए आदर्श बन चुका है।      माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी नीति तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बनाया। उनके अनुसार, जल का प्रबंधन एक पुण्य कर्म है, जिसमें वर्तमान की जरूरतें और भविष्य की पीढ़ियों का उत्तरदायित्व दोनों निहित हैं। उनका यह कथन इस सोच को सार्थक रूप देता है कि जल का सवाल केवल संसाधनों का नहीं, बल्कि मानवता के अस्तित्व का है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को आधुनिक राजाभोज कहना न्याय संगत है। राजा भोज ने जल संरक्षण के लिए ऐसी संरचनाएं बनाईं, जो सदियों बाद भी जल प्रबंधन की उत्कृष्ट मिसाल बनी हुई हैं। भोपाल का ऐतिहासिक बड़ा तालाब राजा भोज की जल संरक्षण क्षमता का अद्भुत उदाहरण है,जो सदियों बीत जाने के बाद भी लाखों लोगों की प्यास बुझा रहा है। दो नदियों के संगम से बनाए गए इस तालाब ने यह सिद्ध कर दिया हैकि जल संरक्षण केवल उस समय की आवश्यकता ही नहीं, बल्कि उसे पीढ़ियों के लिए उपहार के रूप में संरक्षित किया जाता है।      प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी का दृष्टिकोण भी ऐसा ही है। मोदी जी भी जल संरचनाओं के जनक राजाभोज की परंपरा को आधुनिकता के साथ मानवता के अस्तित्व के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।      माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी का मानना है कि जल का संरक्षण केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है-“जल संचय केवल एक प्रयास नहीं, यह एक पुण्य है। इसमें उदारता और उत्तरदायित्व दोनों निहित हैं। आने वाली पीढ़ियां जब हमारा आकलन करेंगी, तो यह केवल हमारी आर्थिक उपलब्धियों या भौतिक विकास पर आधारित नहीं होगा। उनका पहला प्रश्न यही होगा कि हमने जल के प्रति क्या दृष्टिकोण अपनाया। जल का संरक्षण, प्रबंधन और इसके प्रति हमारी प्रतिबद्धता ही भविष्य में हमारी पहचान बनेगी।” यह विचार न केवल जल संरक्षण के महत्व को दर्शाता है इसीलिये उनकी जलनीतियां दीर्घकालिक हैं, जो न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करती हैं, बल्कि भविष्य के लिए भी टिकाऊ मार्ग प्रस्तुत करती हैं। माननीय मोदी जी के नेतृत्व में शुरू हुए “जल शक्ति अभियान” और “हर घर जल” और कैच द रैन जैसे अभियानों ने करोड़ों भारतीयों के जीवन को परिवर्तित कर दिया है। उनकी योजनाएं यह सिद्ध करती हैं कि जल प्रबंधन में उनका दृष्टिकोण कितना प्रभावशाली और स्थायी है।      मध्यप्रदेश के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विशेष लगाव समय-समय पर उनकी योजनाओं और निर्णयों से स्पष्ट होता है। उन्होंने हमेशा मध्यप्रदेश को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। उनके प्रयासों से राज्य विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अब केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना मध्यप्रदेश के विकास में नई ईबारत लिखने जा रही है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, जिस भूमि पर बन रही है, वह शौर्य, सम्मान और जनकल्याण के प्रतीक बुंदेलखंड की भूमि है, बुंदेलखंड की पवित्र भूमि ने ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया है, जिन्होंने लोकहित को सर्वोपरि रखा। राजा छत्रसाल ने अपनी नीतियों और नेतृत्व से बुंदेलखंड के लोगों के कल्याण के लिए जो काम किए, उनकी गूंज आज भी सुनाई देती है। प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व भी राजा छत्रसाल के दृष्टिकोण का आधुनिक संस्करण है। उनकी योजनाएं और प्रयास बुंदेलखंड को जल संकट से उबारने और यहां की सूखी धरती को फिर से हराभरा बनाने के लिए समर्पित हैं।      प्रधानमंत्री नरेन्द्र  मोदी जी के संकल्प का फल है कि 44,605 हजार करोड़ रूपये की केन-बेतवा लिंक जैसी बहुप्रतीक्षित परियोजना आज जमीन पर उतर रही है और … Read more

भोपाल में दो समुदायों के बीच झड़प-पथराव, छह लोग घायल, भारी पुलिस बल तैनात

भोपाल राजधानी के जहांगीराबाद इलाके की पुरानी गल्ला मंडी में मंगलवार को दो गुटों के बीच हिंसक झड़प हो गई। दोनों ओर से जमकर पथराव किया गया। भीड़ में कुछ लोग तलवारें और डंडे लेकर घूम रहे थे। इस घटना में लगभग छह लोग घायल बताए जा रहे हैं। एक महिला को भीड़ ने डंडे से बुरी तरह पीटा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में किया। क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। थाना प्रभारी आशीष उपाध्याय ने बताया कि विवाद की वजह दो दिन पहले हुए युवकों के बीच मारपीट से जुड़ी है। उसी को लेकर मंगलवार सुबह एक पक्ष के लोग इकट्ठा हुए और दूसरे पक्ष के घरों पर पथराव करना शुरू कर दिया। यह देखकर दूसरे पक्ष के लोग भी डंडों और तलवारों के साथ बाहर निकल आए। घटना की खबर मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। भारी पुलिस बल तैनात कर इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया। ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। वहीं दोनों पक्षों से कुल छह लोग घायल हुए। उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बवाल की वजह पुराना मामला यह पूरा बवाल दो दिन पहले हुई एक मारपीट की घटना से जुड़ा है। जहांगीराबाद थाना प्रभारी आशीष उपाध्याय के अनुसार, दो दिन पहले कुछ युवकों के बीच मारपीट हुई थी। उसी मामले को लेकर मंगलवार सुबह एक पक्ष के लोग इकट्ठा हुए और दूसरे पक्ष के घरों पर पथराव शुरू कर दिया। इससे इलाके में दहशत फैल गई। पथराव की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

रेलवे का महाकुंभ के लिए बड़ा प्लान, 3 हजार स्‍पेशल समेत 13 हजार ट्रेनें चलाएगा रेलवे

प्रयागराज उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ की तैयारियों को अंतिम रूप दे रही है। इस विशाल धार्मिक आयोजन में देशभर से करोड़ों लोग शामिल होंगे। महाकुंभ के लिए रेलवे ने देशभर से 3,000 विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया है। हालांकि, उत्तर पश्चिम रेलवे से केवल दो विशेष ट्रेनें चलेंगी—एक उदयपुर और दूसरी बाड़मेर से। इसके अलावा, पांच अन्य विशेष ट्रेनें जयपुर सहित उत्तर पश्चिम रेलवे के कई स्टेशनों से होकर गुजरेंगी। महाकुंभ 2025 में करीब 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की उम्‍मीद है। उनकी सुगम आवाजाही के लिए इंडियन रेलवे ने व्‍यापक तैयारी की है। महाकुंभ 2025 के मद्देनजर रेलवे द्वारा इस बार 3000 स्पेशल ट्रेनों के साथ 13000 से अधिक रेलगाड़ियों का संचालन करेगा। महाकुंभ 2025 की तैयारियों पर रेलवे अकेले प्रयागराज में ही पिछले 2 साल में 5000 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर चुका है। यह जानकारी प्रयागराज पहुंचे केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी है। अर्द्धकुंभ से अधिक ट्रेनें चलेंगी उन्‍होंने बताया, प्रयागराज क्षेत्र में सुगम रेल परिचालन के लिए 21 रोड ओवर ब्रिजों और रोड अंडर ब्रिजों का निर्माण किया गया है। वर्ष 2019 में आयोजित कुम्भ मेला में 7000 गाड़ियों का संचालन किया गया था, जबकि इस बार 16000 से भी अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाएगा। मध्य प्रदेश से चलेंगी 48 से अधिक कुंभ स्पेशल ट्रेन इसमें भोपाल रेल मंडल सहित मप्र से विभिन्न स्टेशनों से लगभग 48 से अधिक ट्रेनें ठहराव लेकर चलेंगी। 01661-01662 रानी कमलापति-वाराणसी के लिए कुंभ स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। जानिए टाइम और स्टॉपेज की पूरी लिस्ट     रानी कमलापति से ट्रेन 16 जनवरी, 20 जनवरी, 23 जनवरी, 6 फरवरी, 17 फरवरी और 20 फरवरी को चलेगी। वहीं, वाराणसी से ट्रेन 17 जनवरी, 21 जनवरी, 24 जनवरी, 7 फरवरी, 18 फरवरी और 21 फरवरी को चलेगी।     यह ट्रेन मप्र के मंडीदीप, औबेदुल्लागंज, बुधनी, नर्मदापुरम (होशंगाबाद), इटारसी, सोहागपुर, पिपरिया, गाडरवारा, करेली, नरसिंहपुर, श्रीधाम, मदनमहल, जबलपुर, देवरी, सिहोरा, कटनी, जुकेही, मैहर, सतना, मझगवां से होते हुए उप्र के मानिकपुर, प्रयागराज, मिजार्पुर से होते हुए वाराणसी जाएगी। श्रीधाम एक्सप्रेस नौ, मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस आठ घंटे देरी से पहुंची भोपाल भोपाल और रानी कमलापति रेलवे स्टेशनों पर रविवार देर रात और सोमवार सुबह यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। इसका मुख्य कारण उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में चल रहा तीसरी लाइन का निर्माण कार्य है। संदलपुर-आंतरी स्टेशनों के बीच अप लाइन पर कट और कनेक्शन का काम चल रहा है, जिसके कारण भोपाल सहित मंडल के कई स्टेशनों से गुजरने वाली ट्रेनों को 22 दिसंबर तक परिवर्तित मार्ग से चलाया जा रहा था। इसके साथ ही कोहरे का असर भी ट्रेनों की आवाजाही के समय पर पड़ रहा है। कोहरे के कारण कई ट्रेनों की गति धीमी हो गई है, जिससे ये ट्रेनें अपने निर्धारित समय से गंतव्य पर काफी देरी से पहुंच रही हैं। कुछ ट्रेनें तो डेढ़ घंटे से लेकर नौ घंटे तक की देरी से भोपाल पहुंची। ऐसे में यात्रियों को स्टेशनों पर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। यह ट्रेनें पहुंची देरी से     ट्रेन 12191 श्रीधाम एक्सप्रेस 9:35 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12618 मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस 8:06 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12644 हजरत निजामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस 5:10 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12724 आंध्र एक्सप्रेस 2:15 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12780 हजरत निजामुद्दीन-वास्को डी गामा एक्सप्रेस 2:10 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12626 नई दिल्ली-त्रिवेंद्रम केरला एक्सप्रेस 1:52 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12722 दक्षिण एक्सप्रेस 1:30 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12616 जीटी एक्सप्रेस 1:35 घंटे लेट आई।     ट्रेन 11058 अमृतसर एक्सप्रेस 1:20 घंटे लेट आई।     ट्रेन 12002 शताब्दी एक्सप्रेस 36 मिनट लेट आई।   पहली बार मेमू ट्रेन महाकुंभ 2025 को देखते हुए पहली बार छोटी दूरी के लिए बड़ी संख्या में मेमू ट्रेन का इंतजाम किया जा रहा है। महाकुंभ 2025 की रेगुलर गाड़ियों में दोनों तरफ इंजन लगाया जाएगा जिससे समय की बचत होगी । वहीं श्रद्धालुओं और रेलयात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी। बनारस से प्रयागराज के मध्य रेल ट्रैक के दोहरीकरण से ट्रेनों की स्पीड बढ़ी है। इसी खंड में झूंसी से दारागंज के मध्य गंगा नदी पर 100 वर्ष बाद नया रेल ब्रिज बन कर तैयार हो चुका है। फाफामऊ-जंघई के बीच दोहरीकरण होने से ट्रेन परिचालन क्षमता में वृद्धि हुई है। महाकुंभ 2025 के दौरान बेहतर सुविधाओं के लिए विभिन्न स्टेशनों पर 43 स्थायी होल्डिंग एरिया का निर्माण किया गया है। प्रयागराज क्षेत्र के सभी स्टेशनों पर सभी फुट ओवर ब्रिजों पर वनवे ट्रैफिक की व्यवस्था की गई है। वहीं प्रयागराज क्षेत्र में सुगम रेल परिचालन के लिए 21 रोड ओवर ब्रिजों और रोड अंडर ब्रिजों का निर्माण हो चुका है। 13 को प्रयागराज आ सकते हैं पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 13 दिसंबर को प्रयागराज आ सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव महाकुम्भ की तैयारियों का अवलोकन करने रविवार प्रयागराज पहुंचे थे। उन्‍होंने प्रयागराज में सबसे पहले झूंसी रेलवे स्टेशन पर चल रहे विकास कार्यों एवं महाकुंभ 2025 की तैयारियों का निरीक्षण किया। इसके बाद झूंसी स्टेशन के निकट गंगा नदी पर प्रयागराज–वाराणसी रेल मार्ग दोहरीकरण कार्य के अंतर्गत बने नए ब्रिज संख्या 111 का निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में फाफामऊ स्टेशन एवं प्रयाग जंक्‍शन का भी निरीक्षण किया और महाकुंभ 2025 की तैयारियों को परखा। इस दौरान रेलमंत्री ने फाफामऊ से प्रयाग तथा प्रयाग से प्रयागराज जंक्‍शन तक विंडो ट्रेलिंग करते हुए रेलपथ की संरक्षा की जानकारी भी ली। इस अवसर पर इन दोनों स्टेशनों पर उपस्थित जन प्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों से भेंट की। इस दौरान अध्यक्ष रेलवे बोर्ड श्री सतीश कुमार सहित उत्तर मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे एवं पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक एवं संबंधित मंडल रेल प्रबंधकों के साथ अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

हिमाचल प्रदेश की वादियां बर्फ में लिपटी, 174 स्टेट और 3 नेशनल हाईवे बंद, 1000 से अधिक गाड़ियां फंस गईं

श्रीनगर/ मनाली लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पहाड़ सफेद चादर से ढक गए हैं. हिमाचल प्रदेश की वादियां बर्फ में लिपट गई हैं. मनाली, कुल्लू, रोहतांग और कई अन्य इलाकों में हुई भारी बर्फबारी ने संकट को तो बढ़ा दिया लेकिन पर्यटकों की भीड़ बढ़ गई है. कल इस बर्फबारी की वजह से मनाली-केलांग मार्ग पर वाहनों की आवाजाही अस्थाई रूप से रोकनी पड़ी. अटल टनल के रास्ते पर तो करीब 1000 गाड़ियां फंस गईं. हालांकि प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रेस्क्यू अभियान चलाया. हिमाचल में 3 नेशनल हाईवे बंद हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के चलते पिछले 24 घंटे में 174 स्टेट और 3 नेशनल हाईवे ( NH 03, NH 305, NH 505) बंद किए गए हैं.बिजली और पानी का भी कुछ ज़िलों के डिवीज़नल एरिया कनेक्शन काटा गया है.जबकि 6 ज़िलों में 683 जगह बिजली बाधित है.बदले मौसम और बर्फ़बारी के कारण जन सेवाएं बाधित है. आपदा सूचना विभाग ने जिले के अनुसार रिपोर्ट जारी की है. वहीं, सैलानियों के लिए भी एडवाइज़री जारी की गई है. हिमाचल प्रदेश जैसे हालात उत्तराखंड में भी होने लगे हैं. राज्य के कई ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई है. हालांकि हिमाचल की तुलना में अभी यहां बर्फबारी कम है. फिर भी औली, उत्तरकाशी, चकराता, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले इलाके सफेद चादर से ढंक गए हैं. केदारनाथ धाम में इस सीजन की दूसरी बर्फबारी है. बर्फबारी की वजह से वहां चल रहा पुनर्निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है. केदारनाथ धाम में कल से लगातार बर्फबारी जारी है. धाम में अभी तक एक फ़ीट से अधिक तक बर्फ गिर चुकी है. मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि क्रिसमस और न्यू ईयर पर ज्यादा ठंड रह सकती है. उत्तराखंड के मशहूर पर्यटन स्थल और स्की रिजॉर्ट औली भी एक बार फिर से जबरदस्त बर्फ की आगोश में आ चुका है. औली की वादियां में तस्वीरों में देख सकते हैं किस तरह से पेड़ पौधे, मकान, रास्ते सब कुछ यहां बर्फ की आगोश में दिखाई दे रहा है, जिसके बाद औली का नजारा अपने आप में बहुत ही खूबसूरत दिखाई दे रहा है. जिसका इंतजार पर्यटकों को और स्थानीय होटल व्यवसाईयों को लंबे समय से था वह अब जाकर यहां पर देखने को मिल रहा है. आधा फीट बर्फ की मोटी चादर के नीचे औली की वादियां हर तरफ सफेद दिखाई दे रही है. वहीं कल क्रिसमस है और इस समय वीकेंड के चलते बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड के औली आ रहे हैं. ऐसे में उनके लिए यह बर्फबारी किसी तोहफे से कम नहीं है क्योंकि अब औली की वादियां बर्फ से लकदग हो चुकी है. ऐसे में यहां पहुंचे पर्यटकों को मन मांगी मुराद पूरी हो चुकी है औली अब एक बार फिर से जबरदस्त बर्फ की आगोश में आ चुका है. जम्मू-कश्मीर में भी मौसम का रूख काफी हद तक बदल गया है. वहां भी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी तेज है. कल पीर पंजाल और सोनमर्ग में बर्फबारी हुई. कई अन्य इलाकों में भी मौसम विभाग का अलर्ट है. इन दिनों कश्मीर का तापमान लगातार गिरा है. अभी श्रीनगर में रविवार की रात माइनस 3.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. मशहूर डल झील गिरते पारे की वजह से जमने लगी है. वहीं पहलगाम में माइनस 5 डिग्री तापमान रहा. मौसम विभाग की मानें तो बुधवार तक तापमान और झटका देने वाला है.  

ड्रोन नीति पर हुई एक दिवसीय कार्यशाला, ड्रोन सूचना पोर्टल drone.mp.gov.in लाँच

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ॰ मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ड्रोन टेक्नोलॉजी में अग्रणी बनने की ओर अग्रसर है। राज्य में ड्रोन टेक्नोलॉजी के लिए बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने और ड्रोन नीति पर विचार विमर्श के लिए सोमवार को “शासन में ड्रोन का उपयोग एवं मध्यप्रदेश में ड्रोन पारिस्थितिक तंत्र का विकास” विषय पर कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला हुई। कार्यशाला में ड्रोन प्रौद्योगिकी के व्यापक अनुप्रयोगों पर चर्चा की गयी। सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया हितेश कुमार मकवाना, अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संजय दुबे, प्रबंध निदेशक एमपीएसईडीसी आशीष वशिष्ठ ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस अवसर पर ड्रोन केन्द्र सूचना पोर्टल https://drone.mp.gov.in/ भी लाँच किया गया। सर्वेयर जनरल मकवाना ने कहा कि भारत में पिछले छ: वर्षों में ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ है। ड्रोन के शुरूआती सीमित उपयोग से लेकर आज इसके व्यापक उपयोग तक ड्रोन एक बहुउपयोगी उपकरण के रूप में उभरा है। भारत सरकार ने ड्रोन टेक्नोलॉजी के व्यापक उपयोग के लिये ड्रोन नीति बनाई है। मध्यप्रदेश ड्रोन टेक्नोलॉजी के उपयोग में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभर रहा है। राज्य ने स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन मे ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुये विशेष उपलब्धि हासिल की है। ड्रोन टेक्नोलॉजी कुशल, सुलभ और कम लागत मे उपलब्ध टेक्नोलॉजी है। एसीएस संजय दुबे ने कहा कि केन्द्र सरकार ने ड्रोन नीति के तहत ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित इको-सिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसमें ड्रोन के संचालन के लिये आवश्यक नियम, लाइसेंसिंग प्रक्रियाएं, संचालन की अवधि आदि निर्धारित की गई हैं। मध्यप्रदेश इस नीति को प्रेरणादायक मानते हुए ड्रोन के क्षेत्रीय स्तर पर व्यवहारिक और लाभकारी उपयोग के लिये कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि राज्य में एक मजबूत और समग्र इको-सिस्टम विकसित करें। जब हम ड्रोन की बात करते हैं तो यह केवल एक फ्लाइंग कैमरा ही नहीं बल्कि गेम चेंजिंग टेक्नोलॉजी है। यह टेक्नोलॉजी विभिन्न स्तरों पर सेवाएं प्रदान करने में सक्षम है। राज्य में इस टेक्नोलॉजी के व्यापक अनुप्रयोग की संभावनाएं है, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। हमारा उद्देश्य है कि हम ऐसा इको-सिस्टम विकसित करें, जिससे ड्रोन का व्यापक उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में आसानी से हो सके। यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत और मेक-इन-इंडिया विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हमारा लक्ष्य ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित करने के साथ राज्य में निर्माण इकाइयों को स्थापित करना भी है। एमपीएसईडीसी के एम.डी. आशीष वशिष्ठ ने कहा कि आज ड्रोन टेक्नोलॉजी का व्यापक उपयोग कृषि क्षेत्र में किया जा रहा है। खनन क्षेत्र में ड्रोन के मदद से प्रभावी खनन पर निगरानी रखी जा रही है। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिये ड्रोन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग आबकारी, कानून व्यवस्था, निर्माण गतिविधियों में भी किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य मध्यप्रदेश को देश का ड्रोन हब बनाना है। ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार विस्तार के लिये ड्रोन की परिवर्तनकारी भूमिका है। उन्होंने कहा कि नमो ड्रोन दीदी जैसी पहल से ड्रोन का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग केवल एक विकल्प नहीं बल्कि यह भविष्य की आवश्यकता है। नाबार्ड के जीएम कमर जावेद ने कहा कि मध्यप्रदेश में ड्रोन टेक्नोलॉजी में उल्लेखनीय कार्य हुए है। सहकारी संस्थाओं की तरह पैक्स सोसायटी में भी ड्रोन के उपयोग को बढ़ाया जा सकता है। फिक्की ड्रोन कमेटी को-चैयरमेन एवं सीईओ अंकित मेहता ने कहा कि लॉ-एण्ड-ऑर्डर और निगरानी क्षेत्रों में ड्रोन टेक्नोलॉजी बहुत उपयोगी है। ड्रोन अपनी बहुआयामी उपयोगिता के साथ नवाचार को बढ़ावा दे रहे है और भविष्य की प्रौद्यागिकी को नया आकार दे रहे है। ड्रोन टेक्नोलॉजी के विभिन्न विषयों पर आयोजित हुए सत्र कार्यशाला में ड्रोन टेक्नोलॉजी के विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गये। ड्रोन पॉलिसी एवं इंडस्ट्री इनिशिएटिव विषय पर ड्रोन टेक्नोलॉजी के वर्तमान उपयोग एवं भविष्य में व्यापक उपयोग पर चर्चा की गई। ड्रोन केस स्टडीज विषय पर व्यावसायिक क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग पर जानकारी दी गई। ड्रोन स्टार्ट-अप एवं स्किल डेपलपमेंट विषय पर जानकरी दी गई एवं ड्रोन पॉलिसी ड्रॉफ्ट पर विस्तृत चर्चा भी की गई। इस अवसर पर ड्रोन केन्द्रित सूचना पोर्टल भी लाँच किया गया। यह पोर्टल ड्रोन टेक्नोलॉजी, नीति और प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी को एकीकृत करने में सहायक होगा। इस दौरान ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी के नवीनतम उपयोगों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर एमपीएसईडीसी के परियोजना निदेशक गुरू प्रसाद, अपर परियोजना निदेशक डॉ. संदीप गोयल, परियोजना प्रबंधक अनूप पटेल, सीनियर जनरल मैनेजर कविराज मेहरा सहित एमपीएसईडीसी के अधिकारी-कर्मचारी, सर्वे ऑफ इंडिया डीजीसीए, आईआईटी इंदौर, ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, नाबार्ड, मध्यप्रदेश सरकार के सभी विभागों के प्रमुख सहित ड्रोन इंडस्ट्री के प्रमुख जैसे आइडिया फोर्ज, एस्टेरिया एयरोस्पेस आदि के प्रतिनिधि, ड्रोन दीदीयां और तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थी उपस्थित रहे।  

उज्ज्वला योजना में 24 लाख लाड़ली बहनों के खातों में 26 करोड़ की राशि अंतरित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुन्देलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलेगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सागर की भूमि और यहां के लोगों का मेरे जीवन में विशेष स्थान: उत्तराखंड मुख्यमंत्री धामी उज्ज्वला योजना में 24 लाख लाड़ली बहनों के खातों में 26 करोड़ की राशि अंतरित लाखा बंजारा झील जीर्णोंद्धार एवं पुनर्विकास, निगम के नए भवन सहित 642 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन गौरझामर नगर परिषद, बंडा बरा नगर पंचायत और नरयावली नगर पंचायत होगी सागर में कैंसर अस्पताल एवं विधि संकाय होगा शुरु मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर के गौरव दिवस पर दीं शुभकामनाएँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सागर के गौरव दिवस एवं जनकल्याण पर्व पर कहा है कि सागर में कैंसर अस्पताल एवं रानी अवंतीबाई विश्वविद्यालय में विधि संकाय शुरु होगा। बुधवार 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती पर शुरु होने जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुन्देलखंड की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सागर का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वालीं विभूतियों को सम्मानित करने पर प्रसन्नता जताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाखा बंजारा ने यहाँ झील का निर्माण कर लोगों को पेयजल की समस्या से निजात दिलायी। उनके यह महान कार्य सदा स्मरणीय हैं। मैं उनकी इस महानता को नमन करता हूँ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सागर के गौरव दिवस एवं जनकल्याण पर्व पर नागरिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराजा छत्रसाल और आल्हा-ऊदल के शौर्य और बलिदान के लिए यह बुंदेलखंड की धरा जानी जाती है। अब बुंदेलखंड क्षेत्र का नया इतिहास लिखा जाएगा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 25 दिसम्बर को छतरपुर जिले के खजुराहो में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की नदी जोड़ने की परिकल्पना को साकार करने के लिए केन-बेतवा लिंक परियोजना का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मौजूद जनसमुदाय को मुट्ठी बांधकर परियोजना के भूमि-पूजन कार्यक्रम में आने का संकल्प दिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौरझामर नगर परिषद, बंडा बरा नगर पंचायत, नरयावली नगर पंचायत का दर्जा देने की घोषणा भी की। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा सरकार द्वारा सागर के विकास के लिए कायाकल्प के कई कार्य किए गए हैं जिसमें लाखा बंजारा झील का जीर्णोद्धार, पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण का कार्य भी शामिल है। इससे सागर शहर का जल स्तर संतुलित बना रहेगा। मुख्यमंत्री डॉं यादव और उनकी पूरी टीम ने प्रदेश के विकास को एक नई दिशा प्रदान की। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज यहां 100 करोड़ रूपये से भी ज्यादा की विकास योजनाओं का पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण कार्य पूरा हो रहा हैं। इन सभी कार्यों से डॉ. यादव की सरकार ने अपने पहले ही वर्ष में मध्य प्रदेश के उज्जवल भविष्य की मजबूत नीव स्थापित कर ली है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आने वाले अपने आगामी कार्यकाल में डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और तेजी से विकास करेगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा जब मुझे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ कार्यक्रम में सम्मिलित होने का निमंत्रण प्राप्त हुआ तो मेरे मन में सागर में बिताए मेरे बचपन के दिन याद आ गए। यहां की अनेक स्मृतियां मेने मन में है, आज वे सारी यादें ताजा हो गई। उन्होंने कहा मैं अपने पैतृक स्थान पर आया हूं। सागर मेरे लिए केवल एक शहर नहीं बल्कि मेरे जीवन का एक अविभाज्य हिस्सा हैं। मेरे पिताजी यहाँ महार रेजीमेंट में पदस्थ थे और उस दौरान उनकी पोस्टिंग सागर में थी। इस भूमि से मेरा अटूट रिश्ता रहेगा। मुख्यमंत्री धामी ने कहा आज पूरे देश में डबल इंजन की सरकार है, जो बहुत तेजी से विकास कर रही हैं। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि सागर के गौरव दिवस उपलक्ष्य पर यहां दो मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति सागर के गौरव को और बढ़ा रही है। इस भूमि के सच्चे सपूत डॉ. सर हरिसिंह गौर का योगदान इस क्षण को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। यह उनके योगदान और गौरवशाली इतिहास को याद करने का पल है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा सागर की पहचान “लाखा बंजारा झील” का वर्तमान स्वरूप सागरवासियों का दिल हर्ष से भर देता है। पहले यह झील अपेक्षाकृत रूप से उपेक्षित थी, जिसे राज्य सरकार ने विकास कार्यों की सौगात देते हुए झील का सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार कराया। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सागर संभाग के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में कैंसर डिपार्टमेंट खोलने, महिला रोग चिकित्सकों की नियुक्ति और हेड इंजुरी के संबंध में न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट खोले जाने की मांगे रखी। विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि सागर शहर को पहले लोग बड़ा कस्बा कहा करते थे। स्मार्ट सिटी योजना से यहां कई विकास कार्य हुए और सागर सहित समूचे बुंदेलखंड को नई दिशा मिली है। इस क्षेत्र में पहले फोरलेन रोड नहीं थी अब नये-नये पहुंच मार्ग बना रहे हैं, रेल लाइनें बिछ रहीं हैं। शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार विकास कार्य किये गए हैं। इस अवसर पर विधायक एवं पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरूआत की। उस समय मध्यप्रदेश की 7 स्मार्ट सिटी का चयन किया गया, जिसमें सागर भी शामिल था। इसमें सागर को स्मार्ट सिटी के लिए एक हजार करोड़ रुपए मिले थे। स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत एलिवेटेड कोरिडोर बनाया गया और भी बहुत से विकास के कार्य किये गए। सिंह ने कहा 20 साल के दौरान सरकार ने विकास की अनेक सौगातें दी हैं। विधायक शैलेंद्र जैन ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि सागरवासियों को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले एक वर्ष के नेतृत्व में विकास कार्यों की अनेक सौगात मिलीं हैं। आज हम सभी अभिभूत हैं और उनका नागरिक अभिनंदन करते हैं। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं सागर के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र शुक्ल सहित विधायकगण, जन-प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। नगर निगम महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी ने आभार व्यक्त किया। सागर की विभूतियों का गौरव दिवसपर किया गया सम्मानित सागर … Read more

म्यांमार में सत्ताधारी जुंटा का मुश्किल दौर जारी, जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज

नेपीडाॅ  म्यांमार में सत्ताधारी जुंटा का मुश्किल दौर जारी है। अराकान आर्मी नाम का विद्रोही गुट राखिने और चिन राज्यों में जुंटा सेना को लगातार पीछे धकेल रहा है। ये दोनों राज्य भारत की सीमा से सटे हैं। इसी बीच कई पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बैंकॉक में म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत की। क्या है पूरा मामला जानिए खबरों के मुताबिक,अराकान आर्मी ने रखाइन राज्य के अन्ना शहर में सैन्य मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। विद्रोहियों का दावा है कि चिन राज्य में लगभग 200 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज है,जहां भारत की ओर से निर्मित बंगाल की खाड़ी में एक बंदरगाह है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा करने की कोशिश करती है,तो जुंटा अपनी वायु सेना का इस्तेमाल कर सकता है। सित्तवे सामरिक रूप से जुंटा और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। चीन की प्राइवेट मिलिट्री कंपनी के जवान कथित तौर पर राखिने के क्याउफ्यु बंदरगाह की रक्षा कर रहे हैं, जिसे चीन ने चीन म्यांमार इकोनॉमिक कॉरिडोर के हिस्से के रूप में बनाया है। बैंकॉक बैठक में भारत, चीन, बांग्लादेश, थाईलैंड के अधिकारियों ने सहमति जताई कि म्यांमार के साथ सीधा जुड़ाव महत्वपूर्ण और जरूरी है। थाईलैंड के विदेश मंत्री मारिस संगिआम्पोंगसा ने यह जानकारी दी। म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे ने सभा को सैन्य सरकार के राजनीतिक रोडमैप के बारे में बताया, जिसमें अगले साल होने वाले चुनाव भी शामिल हैं। अराकान आर्मी का मजबूत होना जुंटा के लिए चुनौती अराकान आर्मी लगातार मजबूत होती जा रही है और जुंटा के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। राखिने और चिन राज्यों में जुंटा के सैन्य ठिकाने लगातार अराकान आर्मी के हाथों में जा रहे हैं। इससे म्यांमार में हालात और बिगड़ने की आशंका है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि ये दोनों राज्य भारत की सीमा से लगते हैं। सित्तवे बंदरगाह सामरिक रूप से भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत द्वारा निर्मित है और बंगाल की खाड़ी में स्थित है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा कर लेती है तो भारत के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। चीन की भूमिका भी यहां अहम है। क्याउफ्यु बंदरगाह चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और वह अपनी प्राइवेट मिलिटरी कंपनी के जरिये इसकी रक्षा कर रहा है।

30 मिनटों में इंदौर एयरपोर्ट से सीधा पहुंचेंगे महाकाल के दरबार, मोहन सरकार ने बनाया ये प्लान

इंदौर अगर आप महाकाल के भक्त हैं तो यह आपके लिए अच्छी खबर है. दरअसल, मध्य प्रदेश की मोहन सरकार इंदौर-उज्जैन के बीच नया फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे बनाने जा रही है. इसके बन जाने से इंदौर एयरपोर्ट से महाकाल मंदिर आप मात्र 30 मिनट में पहुंच जाएंगे. इंदौर के एयरपोर्ट से यह फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे सीधे महाकाल मंदिर तक जाएगी. सबसे खास बात है कि इस रूट पर कोई भी क्रॉसिंग नहीं होगी और न ही कोई यू टर्न होगा. बता दें कि इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. उज्जैन स्थित चिंतामन गणेश मंदिर से इंदौर एयरपोर्ट तक की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है. इसको दो हिस्से में बनाया जाएगा. इसमें उज्जैन सिंहस्थ बाइपास को टू लेन से 4 लेन बनाया जाना है.  20 किमी की इस सड़क के निर्माण की लागत 701 करोड़ होगी. वहीं, उज्जैन-इंदौर के बीच 48 किमी का फोर लेन ग्रीन फील्ड रोड बनेगा. इस सड़क की लागत 1370 करोड़ होगी. इस सड़क को प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है. कैबिनेट से मिली मंजूरी : बता दें कि इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड 4 लेन को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। उज्जैन स्थित चिंतामन गणेश मंदिर से इंदौर एयरपोर्ट तक की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। इसको दो हिस्से में बनाया जाएगा। इसमें उज्जैन सिंहस्थ बाइपास को टू लेन से 4 लेन बनाया जाना है। 20 किमी की इस सड़क के निर्माण की लागत 701 करोड़ होगी। वहीं, उज्जैन-इंदौर के बीच 48 किमी का फोर लेन ग्रीन फील्ड रोड बनेगा। इस सड़क की लागत 1370 करोड़ होगी। इस सड़क को प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानाकारी के मुताबिक, सीएम मोहन यादव ने इसको लेकर निर्देश दे दिया है, संबंधित अधिकारियों को इस परियोजना पर तेजी से काम करने के लिए निर्देशित किया गया है, जिससे जल्द से जल्द निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ हो सके। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल 2025 में टेंडर प्रकिया पूरी हो जाएगी। इसी के साथ निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। क्या फायदा होगा : इंदौर-उज्जैन के बीच नया फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे बन जाने से यात्री इंदौर एयरपोर्ट से सिंहस्थ बायपास फोरलेन सड़क मार्ग से चलकर आधे घंटे में सीधे महाकाल मंदिर पहुंच जाएंगे। इस सड़क को पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से भी जोड़े जाने की योजना है। ऐसे में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने से क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मददगार साबित होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेगे : इस फोरलेन के निर्माण से जुड़े आसपास के गांवों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, गोदाम और पेट्रोल पंप के लिए जमीन पहले से ही रिजर्व की जा रही है। इससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर बढ़ेगे। यही नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे के अलावा उज्जैन-जावरा के बीच ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोलल्ड हाईवे का भी निर्माण होने वाला है। इसके बनने से उज्जैन से दिल्ली या मुंबई का सफर आसान हो जाएगा। बताया जा रहा है कि मोहन सरकार ये सारी तैयारियां सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर कर रही है। मोहन सरकार की कोशिश 2027 तक इन्हें पूरा करने की है। जानिए क्या-क्या होगा फायदा इंदौर-उज्जैन के बीच नया फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे बन जाने से यात्री इंदौर एयरपोर्ट से सिंहस्थ बायपास फोरलेन सड़क मार्ग से चलकर आधे घंटे में सीधे महाकाल मंदिर पहुंच जाएंगे. इस सड़क को पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से भी जोड़े जाने की योजना है. ऐसे में पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने से क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मददगार साबित होगी. वहीं, इस फोरलेन के निर्माण से जुड़े आसपास के गांवों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, होटल, गोदाम और पेट्रोल पंप के लिए जमीन पहले से ही रिजर्व की जा रही है. इससे अधिक से अधिक रोजगार के अवसर बढ़ेगे. यही नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच फोर लेन ग्रीन फील्ड हाईवे के अलावा  उज्जैन-जावरा के बीच ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोलल्ड हाईवे का भी निर्माण होने वाला है. इसके बनने से उज्जैन से दिल्ली या मुंबई का सफर आसान हो जाएगा. बताया जा रहा है कि मोहन सरकार ये सारी तैयारियां सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर कर रही है.  मोहन सरकार की कोशिश 2027 तक इन्हें पूरा करने की है.

रातापानी टाइगर रिजर्व का प्रबंधन खुश, केवल बाघों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन भेड़िए दिखना भी अभ्यारण के लिए अच्छे संकेत

भोपाल मध्य प्रदेश का रातापानी टाइगर रिजर्व अब एक और जानवर के लिए फेमस होने वाला है. क्योंकि यहां आपको बाघों के अलावा भेड़िए भी देखने को मिलेंगे. क्योंकि अब तक यहां पहुंचे अलग-अलग पर्यटकों को भेड़िए भी दिखे थे, जिन्हें पर्यटकों ने अपने कैमरे में कैद कर लिया. इस बात से  रातापानी टाइगर रिजर्व का प्रबंधन भी खुश नजर आ रहा है, क्योंकि अब तक यहां केवल बाघों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन भेड़िए दिखना भी अभ्यारण के लिए अच्छे संकेत हैं. बताया जा रहा है कि अब तक यहां पर कुल सात वुल्फ देखने को मिले हैं. मध्य प्रदेश में है सबसे ज्यादा वुल्फ दरअसल, भारत के सबसे ज्यादा वुल्फ यानि भेड़िये मध्य प्रदेश में ही पाए जाते हैं. साल 2022 में भेड़ियों की गिनती हुई थी, जिसमें पूरे देश में 3170 वुल्फ पाए गए थे, इसमें मध्य प्रदेश 772 भेड़ियों के साथ पहले स्थान पर आया था. जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान था. तीसरे पर गुजरात, चौथे पर महाराष्ट्र और पांचवें पर छत्तीसगढ़ शामिल था. यानि भेड़ियों का सेंटर यही इलाका था. क्योंकि इन सभी राज्यों की सीमा भी मध्य प्रदेश से लगती है. मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा भेड़िए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना टाइगर रिजर्व में दिखे थे. लेकिन अब इसमें रातापानी टाइगर रिजर्व का नाम भी जुड़ गया है, जानकरों का मानना है कि वुल्फ माइग्रेट होकर रातापानी पहुंचे हैं. 10 किलोमीटर तक जाती है आवाज वन्य प्राणी विशेषज्ञों के मुताबिक भेड़ियां ऐसा जानवर होता है, जिसकी आवाज 10 किलोमीटर तक भी सुनाई देती है. रातापानी टाइगर रिजर्व में भेड़ियों का मिलना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह टाइगर रिजर्व की जैव विविधता के लिए अच्छा संकेत है. क्योंकि वुल्फ की संख्या तब तेजी से बढ़ती है जब उनके लिए उस इलाके में पर्याप्त मात्रा में भोजन हो, ये केवलल मांस खाता लेकिन भेड़ियां इंसानों को देखकर तुरंत ही भागता है. ये झुंड में शिकार करते हैं और अपने शिकार के लिए एक बार में 200 किलोमीटर तक चल सकते हैं. इनकी औसत आयु 17 साल तक होती है. रातापानी अभ्यारण में जंगल सफारी शुरू हो चुकी है रातापानी को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद यहां पर जंगल सफारी शुरू हो चुकी है, सीएम मोहन यादव ने ही जंगल सफारी की शुरुआत की थी. जिसके बाद से लगातार यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है. राजधानी भोपाल के पास होने से यहां लोग खूब घूमने आ रहे हैं. 

प्रदेश में आने वाले दिनों में तेज हवाएं चलेंगी और ओले गिरने की भी संभावना

भोपाल मध्य प्रदेश में जारी कड़ाके की ठंड के बीच आने वाले कुछ दिनों में मौसम और बिगड़ सकता है। मौसम विभाग ने अगले दो तीन दिन में राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान कुछ जगहों पर ओले गिरने की भी आशंका है। स्थानीय मौसम केंद्र के अनुसार, देश के उत्तरी अंचल में बर्फबारी के चलते राजधानी भोपाल समेत संपूर्ण अंचल में एक बार न्यूनतम तापमान में फिर से गिरावट दर्ज की जाएगी। न्यूनतम तापमान अनेक हिस्सों में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। न्यूनतम तापमान में गिरावट से पिछले तीन चार दिनों से मामूली राहत महसूस की जा रही थी, लेकिन अब आने वाले दिनों में यह गिरकर फिर से 5 से 6 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में न्यूनतम तापमान अनेक हिस्सों एक डिग्री से लेकर 5 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा था, लेकिन इसमें वृद्धि हुई और यह 7 से लेकर 13 डिग्री तक पहुंच गया। तेज हवाएं चलेंगी और ओले गिरने की भी संभावना मौसम केंद्र के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिमी हवाएं अरब सागर से नमी लेकर भी आएंगी। इस वजह से अगले दो तीन दिनों में अनेक हिस्सों में बारिश होगी और कहीं-कहीं पर ओलावृष्टि की आशंका भी जताई गई है। इसके साथ ही सुबह कोहरा छाया रहेगा। तापमान में भी गिरावट आएगी। आज राजधानी भोपाल और आसपास के हिस्सों में सुबह कोहरा दिखाई दिया और सर्द हवाओं का असर भी महसूस किया गया। भोपाल में न्यूनतम तापमान 10़ 2 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान ग्वालियर में 9.3 डिग्री रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान नौगांव में 6.2 डिग्री रहा। इसके अलावा पर्वतीय स्थल पचमढ़ी में यह 7.9 डिग्री रहा। फिलहाल, मध्य प्रदेश में तापमान गिरता चला जा रहा है, जिसके चलते इंदौर में ठंड बढ़ रही है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के कारण मौसम ठंडा हो चुका है, जहां लोग इस ठंड के मौसम से निजात पाने के लिए तरह-तरह की कवायद करते नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग की ओर से जताई गई संभावना पर यदि नजर डालें तो प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जिसमें मुख्य तौर पर ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल, इंदौर खंडवा और धार जैसे जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई जा रही है। वहीं एक बार फिर हल्की बारिश होती है तो ठंड बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। फिलहाल, तापमान काफी कम होता चला जा रहा है, जिसके चलते ठंड बढ़ रही है, वहीं अब यदि एक बार फिर मावठा गिरता है तो तापमान में कमी दर्ज की जाएगी, और सर्द हवाओं की रफ्तार बढ़ेगी। मालवा-निमाड़ में ठंड की दस्तक ठंड के लिए अलग पहचान रखने वाले मालवा निमाड़ अंचल में भी अब गुलाबी ठंड की दस्तक हो चुकी है, जहां ठंड की दस्तक होने के बाद अब तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले दिनों में इसी तरह से तापमान में गिरावट दर्ज होने का सिलसिला जारी रहेगा, जहां इसी तरह से लगातार तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। उधर, प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में भी इसी तरह की स्थिति नजर आ रही है, जहां ठंड की दस्तक के साथ ही ठंड लगातार बढ़ रही है। क्या होता है मावठा? मध्य प्रदेश में ठंड के बीच जब बारिश होती है तो उसे मावठा या मावठे की बारिश कहा जाता है। सामान्य तौर पर मावठा ठंड के समय गिरता है, जहां दिसंबर और जनवरी में मावठे की बारिश होती है। मावठे की बारिश के बाद मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ जाती है, जहां तापमान लगातार कम होता चला जाता है। मध्य प्रदेश के मालवांचल में मावठा शब्द बेहद लोकप्रिय है, जहां इसे ठंड में हो रही बारिश के लिए उपयोग किया जाता है। मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है, जहां मध्यप्रदेश में भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो ठंड के मौसम में एक बार फिर मावठा गिरेगा, जिसके बाद ठंड बढ़ने की संभावना जताई जा रही है,  

नए साल में डिफेंस में बढ़ेगी भारत की ताकत, वायु सेना को तेजस मार्क-1ए फाइटर एयरक्राफ्ट भी मिलेगा

नई दिल्ली  नया साल स्वदेशी डिफेंस इंडस्ट्री के लिए नई उम्मीदें भी लेकर आएगा। डिफेंस सेक्टर में लगातार आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ने की कोशिश जारी है और आर्म्ड फोर्सेस की जरूरतों पूरी करने के लिए स्वदेशी इंडस्ट्री से कई कॉन्ट्रैक्ट भी साइन हुए हैं। जहां नए साल में भी टेक्नॉलजी ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस रहेगा वहीं LAC पर चीन के साथ गतिरोध पूरी तरह खत्म करने की चुनौती भी होगी। लंबे इंतज़ार के बाद अपाचे आएगा भारतीय सेना को इस साल अटैक हेलिकॉप्टर ‘अपाचे’ मिलने की उम्मीद है। अमेरिका से आर्मी के लिए 6 अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की डील हुई थी और पहला अपाचे फरवरी 2024 में मिलना था। लेकिन इंतजार काफी लंबा हो गया। यूपी के अमेठी के फैक्ट्री में बन रही एके-203 असॉल्ट राइफल भी इस साल से आर्मी को मिलना शुरू होने की उम्मीद है। आर्मी को 100 से ज्यादा मैकेनाइज्ड इंफ्रेंट्री वीइकल मिलेंगे, 155 एमएम कैलिबर की अडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) का कॉन्ट्रैक्ट नए साल में साइन हो सकता है। इसके साथ ही टोड गन सिस्टम, पिनाका एक्सटेंडेट रेंज रॉकेट का भी कॉन्ट्रैक्ट साइन होने की उम्मीद है। आर्मी को नए साल में पिनाका की नई रेजिमेंट भी मिल सकती है। शॉर्ट रेंज सर्फेस टू एयर मिसाइल आकाश के नए वर्जन का पहला प्रोटोटाइप मार्च तक मिलने की उम्मीद है। तेजस-मार्क1ए का इंतजार होगा खत्म एयरफोर्स को इस साल तेजस मार्क-1ए मिलने शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें पहले ही काफी देरी हो गई है। एयरफोर्स के पास 42 फाइटर स्क्वॉड्रन होनी चाहिए। लेकिन इस वक्त एयरफोर्स के पास फाइटर एयरक्राफ्ट की 31 स्क्वॉड्रन हैं। मिग-21 बाइसन की दो स्क्वॉड्रन हैं। 2025 में मिग-21 बाइसन की ये दोनों स्क्वॉड्रन फेज आउट हो जाएगी। यह चुनौती है कि कैसे घटती स्क्वॉड्रन में दोनों मोर्चों के लिए खुद को तैयार रखना है। एयरफोर्स को इस साल एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 की बाकी दो यूनिट मिलने की भी उम्मीद है। इस साल एयरफोर्स को अपने फाइटर जेट के लिए ईस्टर्न लद्दाख में न्योमा एयरफील्ड भी मिल जाएगा। मिलेगी तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन नेवी में इस साल तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन कमिशन होने की उम्मीद है। तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन SSBN अरिधमान के अभी समंदर में ट्रायल चल रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि 2025 में ये नेवी में कमिशन होकर स्ट्रैटजिक फोर्सेस कमांड का हिस्सा बन जाएगी। भारत के पास अभी दो न्यूक्लियर सबमरीन (SSBN) ऑपरेशनल हैं। नेवी को 2025 में प्रोजेक्ट-15बी का चौथा और आखिरी डिस्ट्रॉयर- ‘सूरत’ भी मिल जाएगा। साथ ही कलवरी क्लास की एक और सबमरीन ‘वागशीर’ मिलेगी। नीलगिरी क्लास का पहला गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘नीलगिरी’ साल 2025 में नेवी को मिलेगा। इंडियन ओशन रीजन में जिस तरह चीन अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उस चुनौती से नए साल में भी नेवी को निपटना होगा।

भारतवंशी के कायल हुए ट्रंप, श्रीराम कृष्णन को मिली बड़ी जिम्मेदारी?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने बताया कि भारतीय मूल के अमेरिकी एंटरप्रेन्योर और लेखक श्रीराम कृष्णन Artificial Intelligence (AI) को लेकर बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है. साथ ही वह अमेरिकी लीडरशिप में भी अहम भूमिका अदा करेंगे.   श्रीराम कृष्णन AI को लेकर सीनियम व्हाइट हाउस पॉलिसी एडवाइजर की कमान संभालेंगे. श्रीराम कृष्णन पहले भी कई बड़ी कंपनियों की टीम में अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इसमें Microsoft, Twitter, Yahoo!, Facebook और Snap आदि के नाम शामिल हैं. ट्रंप ने बताया है कि वह David Sacks के साथ काम करेंगे, जो White House AI & Crypto Czar होंगे. अमेरिकी लीडरशिप पर भी देना होगा ध्यान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, श्रीराम कृष्णन को इस जिम्मेदारी के साथ अमेरिकी लीडरशिप में लगातार ध्यान लगाएंगे. साथ ही AI पॉलिसी को आकार देने और उसे लागू करने में भी मदद करेंगे. श्रीराम ने माइक्रोसॉफ्ट में अपना करियर Windows Azure के संस्थापक सदस्य के रूप में शुरू किया. नियुक्ति पर श्रीराम कृष्णन ने खुशी जाहिर की श्रीराम कृष्णन ने इस नियुक्ति पर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, मैं अपने देश की सेवा करने और डेविड के साथ मिलकर काम करते हुए AI में लगातार अमेरिकी लीडरशिप को शामिल करने पर सम्मानित महसूस कर रहा हूं. भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय ने स्वागत किया बताते चलें कि कृष्णन की नियुक्ति का भारतीय अमेरिकी समुदाय ने स्वागत किया. इंडियास्पोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा ने कहा कि श्रीराम कृष्णन को हार्दिक बधाई देते हैं और खुशी है कि उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के साइंस और टेक्नोलॉजी पॉलिसी ऑफिस में वरिष्ठ नीति सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है. कौन हैं श्रीराम कृष्णन? श्रीराम कृष्णन का जन्म चेन्नई में हुआ था। उन्होंने तमिलनाडु के कांचीपुरम के कट्टनकुलथुर में एसआरएम इंजीनियरिंग कॉलेज से सूचना प्रौद्योगिकी में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। वह 21 साल की उम्र में 2005 में अमेरिका चले गए। उनके पिता बीमा में काम करते थे। जबकि उनकी मां एक गृहिणी थीं। कृष्णन इससे पहले ‘माइक्रोसॉफ्ट’, ‘ट्विटर (अब X)’, ‘याहू’, ‘फेसबुक’ और ‘स्नैप’ में ‘प्रोडक्ट टीमों’ का नेतृत्व कर चुके हैं। वह डेविड ओ. साक्स के साथ काम करेंगे। ट्रंप ने डेविड को ‘व्हाइट हाउस एआई एंड क्रिप्टो जार’ नामित किया है। कृष्णन ने तमिलनाडु कट्टनकुलथुर में एसआरएम वल्लियमई इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने अपना करियर माइक्रोसॉफ्ट से शुरू किया, जहां उन्होंने Windows Azure के विकास में योगदान दिया। इसके एपीआई और सेवाओं पर काम किया। वह प्रोग्रामिंग विंडोज एज्योर फॉर ओ’रेली (Programming Windows Azure for O’Reilly) नामक पुस्तक के लेखक हैं। कृष्णन 2013 में फेसबुक से जुड़े, जहां उन्होंने कंपनी के मोबाइल ऐप डाउनलोड विज्ञापन व्यवसाय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने स्नैप में भी काम किया। कृष्णन ने 2019 तक ट्विटर (अब X) में काम किया, जहां उन्होंने प्लेटफॉर्म के पुनर्गठन पर एलॉन मस्क के साथ सहयोग किया। कृष्णन ने 2022 में अधिग्रहण के बाद ट्विटर (अब एक्स) को नया रूप देने के लिए मस्क के साथ काम किया। वह 2021 में आंद्रेसेन होरोविट्ज (a16z) में एक सामान्य भागीदार बन गए। बाद में 2023 में उन्होंने लंदन में फर्म के पहले अंतरराष्ट्रीय कार्यालय का नेतृत्व किया। उद्यमी OpenAI’s के ChatGPT और बड़े इंटरनेट प्लेटफॉर्म जैसे AI-संचालित मॉडल के बीच चुनौतियों को हल करने के लिए टेक्नोलॉजी का लाभ उठाने के भी हिमायती रहे हैं। उन्हें 2021 में पॉडकास्ट ‘द आरती एंड श्रीराम शो’ के होस्ट के रूप में भी पहचान मिली। कृष्णन अपनी पत्नी आरती राममूर्ति के साथ इस पर काम करते हैं।    

केंद्रीय सरकार का बड़ा फैसला, ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ समाप्त, जानें पूरा अपडेट

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने शिक्षा की दिशा में अहम बदलाव की ओर कदम बढ़ाते हुए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, सरकार ने पढ़ाई में सुधार को ध्यान में रखते हुए ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को खत्म कर दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद अब 5वीं और 8वीं कक्षा के बच्चों को अगली क्लास में तभी प्रमोट किया जाएगा जब वह परीक्षा पूरी तरह से पास करेंगे। अभी तक 5वीं और 8वीं के बच्चों को अगली क्लास में जाने के लिए परीक्षा पास करना अनिवार्य नहीं था। फेल छात्रों को 2 महीने के अंदर देना होगा एग्जाम सरकार के इस फैसले के की जानकारी केंद्रीय शिक्षा विभाग के सेक्रेटरी संजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी। उन्होंने पीसी में बताया कि सरकार सरकार ने निर्णय किया है कि 5वीं और 8वीं में फेल होने वाले छात्र 2 महीने के भीतर दोबारा परीक्षा दे सकते हैं, लेकिन अगर वह दोबारा भी फेल होते हैं तो उन्हें अब अगली क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा। साथ ही सरकार ने इसमें एक प्रावधान भी जोड़ा है कि 8वीं तक के ऐसे बच्चे को स्कूल से निष्कासित भी नहीं किया जाएगा। शिक्षा में सुधार के लिए उठाया गया कदम शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार ने आगे कहा कि हमारा प्रयास शिक्षा में सुधार के लिए उपाय सभी संभव और जरूरी उपाय करने का है और यह फैसला उसी को ध्यान में रखकर लिया गया है। इस फैसले के बाद हमने यह भी तय किया है कि हमारे स्कूलों में ऐसे बच्चे जिनका पढ़ाई से किसी कारणवश विशेष लगाव नहीं है उन पर विशेष ध्यान भी दिया जाएगा और इसीलिए हमने इस पॉलिसी के अंडर आने वाले बच्चों के लिए दोबारा एग्जाम जल्द आयोजित करने का फैसला किया है। एक्ट में बदलाव के बाद लागू हुई थी पॉलिसी बता दें कि ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ के खत्म होने के बाद केंद्र सरकार के करीब 3000 से अधिक स्कूल इस फैसले से प्रभावित होंगे। केंद्र सरकार के अंतर्गत केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल आते हैं। ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को 2019 में राइट टू एजुकेशन एक्ट में संशोधन के बाद लागू किया गया था। इस पॉलिसी को इस साल दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने भी खत्म कर दिया था। दिल्ली शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने इसी साल मार्च में सरकार ने कक्षा 5 और 8 में ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ को समाप्त करने के मद्देनजर कक्षा 6 से 8 में प्रवेश के लिए मौजूदा नीति में संशोधन किया था। दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा का मौका इस नई व्यवस्था के अनुसार, असफल स्टूडेंट्स को दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा, लेकिन अगर स्टूडेंट्स दोबारा असफल होते हैं, तो उन्हें अगली क्लास में प्रमोट नहीं किया जाएगा. हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि क्लास 8 तक किसी भी स्टूडेंट्स को स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाएगा. इसलिए लिया गया ये फैसला शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने बताया कि यह फैसला बच्चों के पढ़ाई के परिणाम सुधारने के उद्देश्य से लिया गया है. उनका कहना है कि बच्चों की सीखने की क्षमता में गिरावट को रोकने के लिए इस कदम को जरूरी समझा गया.मंत्रालय ने विशेष रूप से क्लास 5 और 8 पर ध्यान केंद्रित किया है, क्योंकि इन क्लासओं को बुनियादी शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. इस नई नीति से स्टूडेंट्स और टीचर्स दोनों को पढ़ाई के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया गया है.

इजरायल के अनुभव, प्रयासों और सुझावों से रीवा नगर निगम क्षेत्र में बेहतर जल प्रबंधन किया जायेगा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

जल वितरण प्रणाली को लीकेज प्रूफ बनाने के साथ रीवा के हर घर में शुद्ध जल सप्लाई सुनिश्चित करना है: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भविष्य आधारित, पर्यावरण अनुसंगत योजना का करें निर्माण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल इजरायल के अनुभव, प्रयासों और सुझावों से रीवा नगर निगम क्षेत्र में बेहतर जल प्रबंधन किया जायेगा : उप मुख्यमंत्री शुक्ल इजराइल का प्रतिनिधि मंडल करेगा सहयोग भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि जल प्रबंधन के लिये इजरायल का नाम विश्व में विख्यात है। उनके अनुभव, प्रयासों और सुझावों से रीवा नगर निगम क्षेत्र में बेहतर जल प्रबंधन किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि योजना का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं और मांग को ध्यान में रखकर किया जाये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि रीवा शहर में जल वितरण प्रणाली को लीकेज प्रूफ बनाने के साथ हर घर में शुद्ध जल पहुँचना सुनिश्चित करना है। जल संग्रहण के साथ जल का संवर्धन भी भविष्य की मांग को पूरा करने के लिये आवश्यक है। जल को उपचारित कर पुनः प्रयोग करना समय की मांग है और पर्यावरण अनुसंगत है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना का निर्माण किया जाये। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने चार इमली स्थित निवास कार्यालय में नगर निगम रीवा में वाटर सप्लाई सुविधा के विस्तार, प्रबंधन और सशक्तीकरण के लिये इजराइल के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा की। जल प्रबंधन और वितरण नेटवर्क सुदृढ़ीकरण पर इज़राइल के प्रतिनिधि मंडल ने अनुभव किये साझा इजरायल प्रतिनिधि मंडल ने बेहतर जल प्रबंधन और वितरण नेटवर्क सुदृढ़ीकरण पर अपने अनुभव को साझा किया। जल संसाधन प्रबंधन के लिये कृत्रिम और प्राकृतिक सोर्स का चिन्हांकन किया जाना महत्वपूर्ण है। कृत्रिम स्तंभों में अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग शामिल है। प्राकृतिक स्तंभों में वर्षा जल संग्रहण, भूजल पुनर्भरण, झील व भूजल निगरानी, और बाढ़ जल संग्रहण शामिल हैं। प्रभावी प्रबंधन के लिए संरक्षण और पुनःप्राप्ति सुनिश्चित कर जल संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। इजराइल प्रतिनिधि मंडल में वॉटर अटैशे श्रीमती नोआ अमसालेम, वरिष्ठ जल संसाधन विशेषज्ञ नीरज गहलावत शामिल थे। भारत में इज़राइल वॉटर अटैशे दोनों देशों के बीच जल संसाधन प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और अनुसंधान में साझेदारी को मजबूत करने का कार्य करते हैं। जल संरक्षण, पुनर्चक्रण और कुशल सिंचाई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, जल सुरक्षा, जल प्रदूषण नियंत्रण और नीति निर्माण में सहयोग प्रदान करते हैं। वॉटर अटैशे शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करते हैं और जल संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान विकसित करने में मदद करते हैं। आगामी 2 वर्ष में रीवा शहर में 15 हज़ार नल कनेक्शन, 450 किमी वितरण नेटवर्क होगा तैयार नगर निगम रीवा में तकनीकी सलाहकार यूएडीडी सतीश कुमार राव ने रीवा में अब तक किये गये कार्य, प्रस्तावित योजना की जानकारी दी। रीवा शहर में वर्तमान में 550 किमी वितरण नेटवर्क से 45 हजार परिवारों को नल कनेक्शन दिये गये हैं। 23 मिलियन किली की भंडारण क्षमता है। 58 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट किया जा रहा है। अमृत 2.0 परियोजना में 2026 तक 37 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 18.7 मिलियन किली भंडारण क्षमता 450 किमी वितरण नेटवर्क और 15 हज़ार नये जल कनेक्शन दिया जाना प्रस्तावित है। साथ ही पुरानी नेटवर्क प्रणाली को रिपेयर करना कार्ययोजना का प्रमुख अंग है। रीवा में 24×7 वॉटर सप्लाई सुनिश्चित करने के लक्ष्य पर योजना का निर्माण किया जा रहा है, इसके लिये जल के ज़िम्मेदारी पूर्ण उपयोग के लिये जन-जागरूकता अभियान को भी प्रस्ताव में शामिल किया जायेगा।  

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