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फार्मा कंपनी हेलियॉन करेगी 2 हजार करोड़ का निवेश, पीथमपुर में मांगी 40 एकड़ जमीन

 पीथमपुर फार्मा और कन्ज्यूमर हेल्थ प्रोडक्ट में दुनिया की नामी कंपनी हेलियॉन मध्य प्रदेश में बड़ा निवेश करने जा रही है। यूके बेस्ड इस कंपनी ने इंदौर के पीथमपुर में 40 एकड़ जमीन मांगी है। यहां 2 हजार करोड़ से अधिक के निवेश करने का प्लान है। बुधवार को कंपनी के प्रतिनिधि मंडल ने पीथमपुर के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क और फार्मा सेज पहुंचकर जमीन पसंद की है। हेलियॉन ग्रुप के प्रतिनिधि पहुंचे इंडस्ट्रियल पार्क     हेलियॉन ग्रुप एशिया-पैसिफिक हेड कैथ मैकगिनिस, तकनीकी प्रमुख रणदेव गुणासिंघे, निदेशक अनूप ढींगरा, कार्पोरेट अफेयर निदेशक वैदिका कपूर और प्रोजेक्ट मैनेजर मोहित असाटी बुधवार को इंदौर पहुंचे। अधिकारियों से मिलकर उन्होंने पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया।     मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआईडीसी) के कार्यकारी संचालक राजेश राठौर ने कंपनी के प्रतिनिधियों को प्रोजेक्ट, निवेश और रोजगार की जुड़ी जरूरी जानकारी दी। CM मोहन यादव ने दिया था न्योता मुख्यमंत्री मोहन यादव नवंबर के आखिरी सप्ताह निवेश प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने इंग्लैंड, जर्मनी और इटली गए थे। इस दौरान उन्होंने हेलियॉन ग्रुप के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया था। जिसके बाद कंपनी ने एमपी में निवेश में इच्छा जताई है। हेलियॉन ग्रुप के नहीं कोई प्लांट हेलियॉन ग्रुप एशिया-पैसिफिक हेड कैथ मैकगिनिस ने बताया कि भारत में अभी हमारे स्वतंत्र प्लांट नहीं है।  संयुक्त उपक्रम के तौर पर हमारी कंपनी यहां काम करती है। इंदौर के पीथमपुर में पहला प्लांट लगाना चाहते हैं। कंपनी का अभी देश में एक भी प्लांट नहीं है, हालांकि संयुक्त उपक्रम के रूप में वह काम कर रही है। इस लिहाज से यूके की एक बड़ी कंपनी इंदौर से अपने कामकाज की शुरुआत करने जा रही है। कंपनी का 5 सदस्यीय दल आया है, जिसमें समूह के एशिया-पैसिफिक हेड कैथ मैकगिनिस, तकनीकी प्रमुख रणदेव गुणासिंघे, निदेशक अनूप ढींगरा, कार्पोरेट अफेयर निदेशक वैदिका कपूर और प्रोजेक्ट मैनेजर मोहित असाटी शामिल हैं। टीम ने एमपीआईडीसी (मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) अफसरों के साथ पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया। कार्यकारी संचालक राजेश राठौर ने उन्हें यहां चल रहे प्रोजेक्ट, निवेश और रोजगार की जानकारी दी। सीएम की यात्रा में मिले न्योते के बाद आई है कंपनी नवंबर के आखिरी सप्ताह में मुख्यमंत्री मोहन यादव निवेश के लिए विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने इंग्लैंड, जर्मनी और इटली गए थे। उस दौरान हेलियॉन ग्रुप के प्रतिनिधियों से उनकी चर्चा हुई थी। तभी कंपनी ने प्रदेश में निवेश में इच्छा जताई थी।

अबूझमाड़ में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में अब तक सात नक्सली ढेर

नारायणपुर नारायणपुर जिले में दक्षिण अबूझमाड़ में गुरुवार सुबह नक्सलियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में अब तक सात नक्सली ढेर कर दिए गए हैं। पुलिस को सात नक्सलियों के शव मिल चुके हैं। मुठभेड़ में सेंट्रल कमेटी स्तर के नक्सली के मारे जाने की सूचना आ रही है। तड़के तीन बजे से रुक–रुक कर गोलीबारी हो रही है। पुलिस के अनुसार, नक्सल विरोधी सर्च अभियान में मंगलवार को नारायणपुर, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, कोंडागांव जिले की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के साथ स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) तथा सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) की संयुक्त पार्टी दक्षिण अबूझमाड़ क्षेत्र में रवाना हुई थी। एसपी प्रभात कुमार ने कहा है कि क्षेत्र में सर्च अभियान जारी है। बता दें, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 14 से 16 दिसंबर तक छत्तीसगढ़ में रहेंगे। इस दौरान वे बस्तर के धुर नक्सल क्षेत्र के गांवों में जाएंगे। अमित शाह कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा और देवा बारसे के गांव पूवर्ती में भी जाएंगे।

एक साल विश्वास का साल रहा है, पिछली कांग्रेस सरकार में विश्वास का संकट था: मुख्यमंत्री साय

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ प्रेस कॉफेंस कर रहे हैं. सीएम साय न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर के कन्वेंशन हाल से संबोधित कर रहे हैं. मुख्यमंत्री साय ने कहा सरकार के एक साल कल पूरे हो रहे है. एक साल विकास के लिए समर्पित रहा है. ये एक साल विश्वास का साल रहा है. पिछली कांग्रेस सरकार में विश्वास का संकट था. मोदी की गारंटी कांग्रेस ने वादाखिलाफी कर लोगों से धोखा किया था. 2023 के चुनाव में लोगों ने मोदी की गारंटी पर विश्वास किया, हमने एक साल में मोदी की गारंटी को पूरा किया और सुशासन लाया, भ्रष्टाचारियों को दंडित भी किया जा रहा है.  अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन के सपने को साकार करने की कोशिश हम कर रहे हैं. इसी को पुराणों में रामराज्य कहा गया है. 18 लाख आवास की स्वीकृति रायपुर किसानों से किया वादा हमने पूरा किया है. किसानों को दो साल का बकाया बोनस भी दिया है. 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत 1000 रुपये प्रति महीने दे रहे हैं. वादे के मुताबिक 18 लाख आवास की स्वीकृति भी मिली और अब आवास में गृहप्रवेश भी करवा रहे है. तेंदूपत्ता का मूल्य भी बढ़ाया गया. नयी रोजगार परक शिक्षा नीति भी लाए हैं. सीजी पीएससी के दोषी भी दंडित हो रहे है. इस बार के रिज़ल्ट में पीएससी में पारदर्शिता की तारीफ करने अभिभावक मिलने आये थे.

एमसीयू में छात्र संघ की राजनीति विवाद: एनएसयूआई के विरोध के बाद ABVP ने लगाए पोस्टर

भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में छात्र संघ की राजनीति का विवाद गहरा गया है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन(NSUI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच विवाद बढ़ गया है। दोनों छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। एक तरह से माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय परिसर छात्र राजनीति का अखाड़ा बन गया है। दरअसल एनएसयूआई (NSUI) के विरोध के बाद एबीवीपी (ABVP) के बीच पोस्टर वॉर शुरू हो गया है। विश्वविद्यालय में लगे पोस्टर के फोटो वायरल हुआ है। वायरल फोटो में लिखा है Dogs & Nsui Goons Not Allowed। मामले को लेकर एनएसयूआई के एमसीयू प्रभारी तनय शर्मा बोले- एक तरफ सरकार अपने 1 साल का जश्न मना रही है और वहीं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय परिसर में अंग्रेजों का शासन कायम नजर आ रहा है। सरकार से अपील है भेदभाव करने वाले विश्वविद्यालय के अधिकारियों के खिलाफ करवाई हो। एबीवीपी की इकाई गठन कार्यक्रम में महत्पूर्ण पदों पर बैठे विश्वविद्यालय के अधिकारीयों का शामिल होना भेदभाव दर्शाता है और चिंताजनक है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा योग मनोयोग से होता है, सहयोग से नहीं, योग के मार्ग पर सभी को चलना चाहिए, योग हमारे जीवन की दिशा बदलता है

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार सुबह योग ऋषि स्वामी रामदेव महाराज के शिष्य डॉ. स्वामी परमार्थ देव महाराज के सानिध्य में नागझिरी चौराहा स्थित होमगार्ड मैदान में निशुल्क (इंटीग्रेटेड) योग शिविर में भाग लेकर योगाभ्यास किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योग मनोयोग से होता है, सहयोग से नहीं। योग के मार्ग पर सभी को चलना चाहिए। योग हमारे जीवन की दिशा बदलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने योग के बाद संबोधित करते हुए कहा कि उज्जैन के निवासी बड़े भाग्यशाली हैं, जो भगवान श्री महाकाल और भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली में रहते हैं। परमात्मा ने हमें जो यह मनुष्य देह दी है, उसका संरक्षण करना आवश्यक है। हमारे देश में प्राचीन काल से योग का बड़ा महत्व रहा है। बाबा रामदेव ने योग को न केवल भारत में बल्कि विदेशों तक प्रसिद्ध किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 जून को योग दिवस और 21 दिसंबर को ध्यान दिवस मनाया जाएगा, जो उत्तरायण और दक्षिणायन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण तिथियां हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के भौतिकवाद के साथ-साथ प्राचीन विरासत को सहेजते हुए विकास की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि होमगार्ड के मैदान से सरकार का एक वर्ष पूरा हो रहा है। प्रदेश के विकास के साथ-साथ उज्जैन का भी निरंतर विकास हो रहा है। योग करने से कुविचार और कुरीतियां समाप्त होती हैं। विधाता ने जन्म दिया है, तो मृत्यु का समय भी निर्धारित किया है। इसलिए हमें अच्छे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम में होमगार्ड के कमांडेंट संतोष कुमार जाट ने मुख्यमंत्री से सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए होमगार्ड में नई भर्ती और होमगार्ड के लिए नए स्थान की आवश्यकता की मांग की। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया और जिला प्रशासन को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने होमगार्ड के जवानों के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि न्यूनतम साधनों के बावजूद बेहतर कार्य किया जा रहा है। सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।  

श्रीकृष्ण का जीवन प्रशासनिक दक्षता का श्रेष्ठ उदाहरण है – मुख्यमंत्री डॉ.यादव

शिक्षा की परंपरा से प्रदेश व उज्जैन का बहुत पुराना नाता है- मुख्यमंत्री डॉ.यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव कालिदास अकादमी में अंतराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल हुए श्रीकृष्ण का जीवन प्रशासनिक दक्षता का श्रेष्ठ उदाहरण है – मुख्यमंत्री डॉ.यादव इस्कॉन का प्रचार रथ संपूर्ण भारतवर्ष में करेगा श्रीमदभगवद् गीता का प्रचार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन, जो सदा से ही धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बिन्दु है, आज श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ से और अधिक भव्य, दिव्य और ऊर्जामयी लग रही है। अर्जुन को माध्यम बनाकर मुक्ति के तीनों मार्गों – भक्तियोग, ज्ञानयोग और कर्मयोग की गूढ़ता को स्पष्ट रूप से समझाने के लिए मोक्षदा एकादशी के दिन ही कुरूक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अपना विराट स्वरूप प्रकट किया था और श्रीमद्भगवद्गीता के रूप में ज्ञान का संदेश दिया। वेदों का सार उपनिषदों में है और उपनिषदों का निचोड़ श्रीमदभगवद्गीता में है। इस लिहाज से विश्व की प्राचीनतम और समृद्धतम आध्यात्मिक ज्ञानकोष का क्रैशकोर्स है श्रीमदभगवद्गीता। आजकल धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति से जोड़ा जाता है, लेकिन सनातन संस्कृति में धर्म का वास्तविक अर्थ था आदर्श आचरण संहिता। श्रीमद्भगवद्गीता जीवन जीने के उसी आदर्श आचरण का प्रकटीकरण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को उज्जैन में अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा भगवान श्रीकृष्ण का मध्यप्रदेश व उज्जैन से गहरा नाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद महाराजा उग्रसेन को पुन: राजा बनाया और स्वयं उज्जैन के सांदीपनी आश्रम में आकर 64 कलाओं की शिक्षा प्राप्त की। यह मनुष्य के जीवन में शिक्षा के महत्व को दर्शाती है और शिक्षा की सनातन परंपरा से मध्यप्रदेश व उज्जैन का गहरा नाता जोड़ती है। महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी नारायणी सेना कौरवों को दी और स्वयं पाण्डवों के पक्ष में रहे। भगवान श्रीकृष्ण की नारायणी सेना इतनी अनुशासित थी कि उसके सैनिकों ने युद्ध भूमि से पलायन नहीं किया और अंत तक युद्ध में डटे रहे। भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से निकली श्रीमद्भगवद् गीता से कर्मयोग की शिक्षा प्राप्त होती है। भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में लोग गीता की शिक्षा का अनुसरण कर रहे हैं। श्रीमद्भगवद् गीता प्राणियों के जीवन में शांति, सहनशीलता, न्यायोचित, आदर्श जीवन मूल्य, मर्यादा का संदेश देती है। इसी कारण सनातन संस्कृति हजारों वर्ष के बाद भी अपने सम्पूर्ण गौरव के साथ विद्यमान है। गीता के संदेश से मानव मात्र के कल्याण के लिए अपने जीवन का क्षण-क्षण समर्पित कर देने की प्रेरणा मिलती है। चाहे आप छात्र हों, गृहिणी हों, व्यवसायी हों, नौकरीपेशा हों, या अधिकारी हों, चाहे आप हिन्दू हों, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई या मुस्लिम हों, श्रीमद्भगवद्गीता आपको अपने-अपने क्षेत्र में, अपने-अपने पंथ में रहते हुए बेहतर प्रोफेशनल, बेहतर पिता, बेहतर पुत्र, बेहतर नागरिक और बेहतर नेतृत्वकर्ता बनने का मार्गदर्शन करेगी। इसलिए जीवन में लक्ष्य पाने के लिए हम सभी को श्रीमदभगवद् गीता का दिव्य पाठ करना चाहिए। गीता का ज्ञान सभी के लिए है, गीता साक्षात देववाणी है, गीता दिव्यवाणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भोपाल में भगवत भक्तों ने गीता पाठ कर एक अनूठा विश्व रिकार्ड बनाया है। हम मध्यप्रदेश में गीता जी को पाठ्यक्रम में भी सम्मिलित कर रहे हैं। श्रीमदभगवद गीता पर आधारित स्कूली छात्रों की प्रतियोगिता में 45 लाख से अधिक बच्चों ने भाग लिया व पुरस्कार जीतें। श्रीकृष्ण पाथेय अंतर्गत जहां भगवान कृष्ण के चरण पड़े वहां बनेंगे तीर्थ प्रदेश में कृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें अंतर्गत प्रदेश में विद्यमान भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य शासन द्वारा प्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का आयोजन धूमधाम से किया गया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शैक्षणिक संस्थाओं में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से संबंधित विभिन्न प्रसंगों पर शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अकादमी परिसर में ‘श्रीमद्भागवत पुराण’ की पहाड़ी शैली में निर्मित चंबा के कलाकार विजय शर्मा की चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने इस्कॉन मंदिर के श्रीमद्भगवद गीता प्रचार रथ को पूजा-अर्चना कर रवाना किया। यह प्रचार रथ संपूर्ण भारत में श्रीमदभगवद् गीता का प्रचार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रीमदभगवद् गीता एवं मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित छात्रों की प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए। पुरस्कार वितरण कर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने क्रिस मार्टिन से चर्चा कर प्रथम आने पर शुभकामनाएं प्रेषित की। क्रिस मार्टिन ने बताया कि वह ईसाई परिवार से संबंध रखने के बावजूद श्रीमदभगवद् गीता अध्ययन करते हैं एवं उसका सम्मान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गणेश गीता, श्रीराम गीता, श्रीदेवी गीता, श्रीशिव गीता, श्रीयम गीता, भारतीय ज्ञान परंपरा, समय का भारतीयकरण पुस्तकों का विमोचन किया। सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी द्वारा स्वागत भाषण देकर अतिथियों का स्वागत किया गया। राजेश कुशवाह द्वारा कार्यक्रम का आभार माना गया। इस अवसर पर विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतपूर्ण गिरी जी महाराज, परम पूज्य भक्तिप्रेम स्वामी महाराज, स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज, रामनाथ महाराज उपस्थित थे।  

लेपा में आयोजित ग्रामीण प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों पर चलकर ही गांवों का विकास हो सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गौपालन को प्रोत्साहन दिया था और गौधन के बगैर खेती का कार्य संभव नहीं है। गौपालन हमारी पुरातन संस्कृति रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को खरगोन जिले की कसरावद तहसील के ग्राम लेपा में निमाड़ अभ्युदय संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ग्रामीण प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने माकड़खेड़ा से पीपलगोन रोड पर टिगरियाव से बम्हनगांव के बीच वेदा नदी पर पुल बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निमाड़ अभ्युदय संस्थान द्वारा आयोजित ग्रामीण प्रौद्योगिकी सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि तीन दिनों के अमृत मंथन से निकले विचार गांवों में ग्रामीण तकनीक के विकास को प्रोत्साहित करेंगे और इसे गांवों में नियोजित करेंगे। इस संस्थान की संचालक भारती दीदी द्वारा 19 वर्ष पहले शिक्षा का जो पौधा रोपा गया था, वह आज वट वृक्ष बन गया है। ऐसे संस्थान को आगे आकर काम करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ग्रामीण तकनीक को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे हैं। विश्व के 200 से ज्यादा देशों की व्यवस्थाओं में उथल-पुथल हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के कारण भारत की पताका और ऊंची होती जा रही है। हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। इतना ही नहीं हमारा देश विश्व की सबसे अधिक आबादी और सबसे अधिक युवाओं वाला देश भी है। आज हमारे देश का स्वर्णिम काल है। आर्थिक रूप से संपन्न ब्रिटेन को पीछे छोड़कर भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत सियाराम बाबा ने गीता जयंती के दिन सूर्योदय के समय देह का त्याग किया है। संत सियाराम बाबा का हम सब पर सदैव आशीर्वाद बना रहे, ऐसी कामना करते हैं। इस अवसर पर सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, विधायक सचिन यादव, सचिन बिरला, राजकुमार मेव, बालकृष्ण पाटीदार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनुबाई तंवर, हितानंद शर्मा, संस्थान की अध्यक्ष ललिता देशपांडे, संचालक भारती दीदी, मुंबई के उद्योगपति मौलिक शाह एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

इंदौर-खंडवा हाईवे 70% बन चुका, 30 फीसद निर्माण बाकी, एनएचएआइ डेडलाइन बढ़ाने की तैयारी की तैयारी में

 इंदौर  इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण पूरी होने की मियाद जनवरी में खत्म होगी, लेकिन अभी तक सुरंग और सड़क का काम पूरा नहीं हुआ है। लगभग तीस फीसद काम होना बाकी है। अब इसके लिए प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार होने लगा है। निर्माण एजेंसी की तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फाइल को मुख्यालय भेजा है। अधिकारियों के मुताबिक तीन से छह महीने की अवधि बढ़ाई जाएगी। वैसे काम तेज करने के लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश जारी कर दिए है। जनवरी 2025 तक इसे पूरा किया जाना था 216 किमी लंबे राजमार्ग का काम अगस्त 2022 में शुरू किया गया। प्रोजेक्ट को जनवरी 2025 तक पूरा होना था। जमीन अधिग्रहण, सुरंग व अप्रोच रोड निर्माण के दौरान ग्रामीणों से विवाद, दो से तीन बार प्रोजेक्ट में बदलाव ने निर्माण कार्यों गति धीमी कर दी। इधर भवरकुआं से लेकर तेजाजी के बीच सड़क का हिस्सा बन चुका है। इन दिनों तेजाजी से सिमरोल के बीच सड़क, अंडरपास, फ्लाइओवर का काम किया जा रहा है। भेरूघाट के पास जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बाकी उमरीखेडा वनक्षेत्र से 0.80 हेक्टेयर जमीन की प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी हुई है। इतने हिस्से में सड़क अधूरी हो, जो नवंबर से बनाना शुरू की है। इसके अलावा भेरूघाट के पास 800 मीटर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया होना बाकी है। जमीन के बदले किसानों को मुआवजा दिया जाना है। यह काम जनवरी तक होगा। सिमरोल से चोरल के बीच भी सड़क पूरी नहीं हो पाई है। जबकि चोरल और बड़वाह के बीच भी कुछ हिस्सों में काम रुका है। फिलहाल मेघा इंजीनियरिंग की तरफ से मियाद बढ़ाने पर जोर दिया है। सुरंग फरवरी तक होगी पूरी राजमार्ग पर तीन सुरंग बनाई जाएगी, जो तलाई-भेरुघाट और चोरल में 1300 मीटर की रखी है। सुरंग की अप्रोच फरवरी तक पूरी होगी। साथ ही सुरंग के भीतर भी काफी काम बचा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर में अप्रोच रोड के लिए ब्लास्टिंग करने पर विवाद हुआ था। उसके बाद महीनेभर सुरंग के आसपास का काम बंद था। इसका असर प्रोजेक्ट की अवधि पर पड़ा है। वैसे अप्रोच के लिए माउंट ड्रील मशीन बुलवाई है। इससे खोदाई करने पर एजेंसी को तीन से चार महीने का अतिरिक्त समय लग रहा है। मार्च तक देंगे मोहलत     इंदौर-खंडवा राजमार्ग की डेडलाइन नजदीक आ चुकी है। निश्चित ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अवधि बढ़ाना पड़ेगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। फाइल को मुख्यालय भेजा गया है। –     सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

मध्य प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़ी, प्रशासनिक इकाई सुधार आयोग का भी गठन किया गया, पहली बार बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हुई

 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुशासन का मंत्र है- आम आदमी के काम सरलता से हो। पात्रों को योजनाओं का लाभ मिले। मोहन यादव सरकार ने कई नवाचार किए। यही वजह है कि वर्ष में सुशासन के प्रयासों से जनविश्वास जागा है। मुख्यमंत्री ने स्वयं संभागीय मुख्यालयों पर जाकर विकास योजनाओं की समीक्षा की। पहली बार अपर मुख्य सचिव और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को संभागीय प्रभारी बनाकर भेजा तो वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई कर यह संकेत भी दिए कि सुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम सहित अन्य अधिकारियों को मैदान में उतारा तो नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित राजस्व से जुड़े मामलों का निराकरण कराने महाअभियान चलाया। 80 लाख मामलों का हुआ निराकरण ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व से जुड़े प्रकरण बड़ी संख्या में सामने आते हैं। लाखों प्रकरण लंबित थे। इसके निराकरण के लिए पहला महाअभियान 15 जनवरी से 15 मार्च तक चलाया, जिसमें 30 लाख राजस्व मामलों का निपटारा हुआ। दूसरा महाअभियान 18 जुलाई से 31 अगस्त तक चला, जिसमें 50 लाख राजस्व मामलों का निपटारा हुआ। इनमें 18 लाख 95 हजार 239 नामांतरण प्रकरणों का निराकरण किया। सीमाओं का होगा पुनर्निधारण प्रदेश में जिलों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है। नए जिलों की मांग भी है। तहसील के पुनर्गठन के प्रस्ताव भी मिल रहे हैं। कई कस्बे अव्यावहारिक रूप से उन जिलों में शामिल हैं, जिनका मुख्यालय दूर है। इससे जहां आमजन को परेशानी होती है, वहीं, प्रशासनिक नियंत्रण में परेशानी आती है। प्रशासनिक इकाई सुधार आयोग का भी गठन किया गया। अधिकारियों को दिया कड़ा संदेश सामान्यत: जब भी कोई दुर्घटना होती है तो छोटे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर कार्रवाई कर दी जाती है। प्रदेश की मोहन सरकार में पहली बार छोटे नहीं बड़े अधिकारियों पर गाज गिरी। मुख्यमंत्री ने गुना बस हादसे में 13 लोगों के निधन पर कड़ी कार्रवाई करते हुए परिवहन आयुक्त, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाया। इसी तरह ट्रांसपोर्टर की देशव्यापी हड़ताल के दौरान शाजापुर में ट्रक ड्रायवर को औकात दिखाने की बात कहने वाले कलेक्टर को भी हटाया गया। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाना ना पड़े     आमजन को सुविधा देने के लिए जो नवाचार किए गए हैं, वे तो अच्छे हैं पर प्रक्रियाओं का सरलीकरण आवश्यक है। जब तक यह नहीं होगा, आमजन परेशान होते रहेंगे। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि लोगों को अपना काम कराने के लिए ऑफिसों के चक्कर ही न लगाने पड़ें। संभागों में कमिश्नर तैनात हैं तो उन्हें सशक्त बनाना चाहिए ताकि छोटे-मोटे कामों के लिए मंत्रालय तक प्रकरण ही न पहुंचें। अधिकारों का विकेंद्रीकरण हो और अधिकारी संवेदनशील रहें। – शरद चंद्र बेहार, पूर्व मुख्य सचिव  

देश में तेजी से बंद कर रहे हैं ATM? अब UPI बन गई ऑलटाइम टेलर मशीन

मुंबई देश में पिछलेबैंकरों ने कहा कि पेमेंट टूल के रूप में यूपीआई और कार्ड के उभरने से नकदी का यूज कम हो गया है। इस कारण एटीएम अव्यावहारिक हो गए हैं। पांच साल में पहली बार एटीएम की संख्या में गिरावट आई है। बैंकों में नकदी निकालने के लिए लगने वाली लंबी कतार से मुक्ति दिलाने वाली ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) अब कम होती जा रही है। 2020 में बैंकों के विलय होने से जहां एटीएम की संख्या घट गई। वहीं, 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद लोगों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआइ) को हाथों-हाथ लिया।  इसकी बढ़ती लोकप्रियता से भी एटीएम तक लोगों की पहुंच घटने लगी। आलम यह है कि महज 9 साल में प्रदेश में 274 एटीएम कम हो गए। सब्जी, फल, किराना, बिजली व गैस बिल समेत बड़े-छोटे शोरूम में भी यूपीआइ से पेमेंट करने की सुविधा मिली तो लोग ने एटीएम से दूरी बनानी शुरू कर दी। इससे एटीएम पर ट्रांजेक्शन घटे तो बैंकों का मुनाफा कम हुआ और मशीन के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया। बैंकों ने बंद करना शुरू किए ATM नतीजा, बैंकों ने एटीएम बंद करना शुरू कर दिया। यूपीआइ के बढ़ते चलन से जहां नकदी की सुरक्षा संबंधी चिंता बैंकों की कम हो गई, वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नकदी लेन-देन के दौरान करेंसी के खराब होने पर दोबारा छापने का खर्च भी कम हो गया। हालांकि कोरोनाकाल में एटीएम की संख्या जरूर बढ़ी, लेकिन 2019 से इसके कम होने का दौर जारी है। बैंकों का कहना है, एटीएम बंद नहीं कर रहे, नई तकनीक आने पर इसकी शिफ्टिंग कर रहे हैं। हर एटीएम पर इतना खर्च एक एटीएम लगाने में करीब 6-9 लाख रुपए का खर्च आता है। एक मशीन की कीमत 4-8 लाख रुपए और कुछ आंतरिक सज्जा पर खर्च होते हैं। साथ ही हर एटीएम के मेंटेनेंस पर हर माह बैंक को 50 हजार रुपए खर्च होते हैं। इसमें साफ-सफाई, बिजली, एसी और सुरक्षा गार्ड का खर्च शामिल है। बताते हैं, एक लेनदेन पर करीब 18 से 20 रुपए खर्च होता है। इसलिए घटे एटीएम बैंकों के विलय होने के कारण उनके एटीएम एक हो गए। कम्प्यूटरीकृत सिस्टम में किसी भी बैंक के एटीएम से रुपए निकालने की सुविधा। जिन मशीनों से ट्रांजेक्शन घटे, उन्हें बंद या शिफ्ट कर दिया। यूपीआइ के इस्तेमाल से लोगों की पहुंच एटीएम तक कम हो गई। देश में इस तरह बढ़ रहे यूपीआइ ट्रांजेक्शन 2022-23 में 83,453.79 मिलियन ट्रांजेक्शन 2023-24 में 130831.45 मिलियन ट्रांजेक्शन 2024-25 में 117507.31 मिलियन ट्रांजेक्शन (नवंबर तक) यूपीआई का जलवा चौधरी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में भारत ने फाइनेंशियल इनक्लूजन और डिजिटल भुगतान में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। जन धन योजना, यूपीआई के प्रसार और मोबाइल इंटरनेट को व्यापक रूप से अपनाने से ऐसा हुआ है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में यह 535 करोड़ था जो वित्त वर्ष 2023-24 में 13,113 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 (सितंबर तक) में 122 लाख करोड़ रुपये के 8,566 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन रजिस्टर्ड किए गए हैं। इतिहास के झरोखे से पहले रुपए निकालने वालों की बैंकों में लंबी कतार लगती थी। इससे छुटकारा दिलाने के लिए एचएसबीसी बैंक ने 1987 में पहली बार मुंबई में एटीएम लगाई तो बैंकिंग में बड़ी क्रांति आई। महज 10 साल में देश में 1500 एटीएम हो गए। अभी देश में 2.50 लाख एटीएम हैं। राजधानी का दायरा बढ़ा, बढ़े एटीएम मध्यप्रदेश में इकलौते भोपाल जिले में एटीएम की संख्या बढ़ी है। राजधानी का दायरा बढऩे से ग्रामीण क्षेत्र जुड़े और एटीएम की संख्या बढ़ गई। अभी भोपाल जिले में 1079 एटीएम हैं। इनमें 42 ग्रामीण, 15 कस्बों और 1022 एटीएम शहरों में हैं। प्रदेश में एटीएम साल – संख्या 2016 – 9266 2017 – 9263 2018- 9579 2019 – 9345 2020 – 9201 2021 – 9322 2022 – 8812 2023 – 9328 2024 – 8992 (सितंबर तक)

राज्य सरकार प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों की माली हालत सुधारने बड़ा कदम उठाने जा रही, देंगी अंशपूंजी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भारत सरकार द्वारा जारी रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत बिजली कंपनियों को राज्यांश 40 प्रतिशत राशि लगभग 6 हजार करोड़ रुपये ऋण के स्थान पर अंशपूंजी/अनुदान के रूप में देने की स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों को वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, वितरण हानियों में कमी तथा वितरण प्रणाली सुदृढीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण/विकास कार्यों के लिए राज्यांश की राशि ऋण के स्थान पर राज्य शासन द्वारा अंश पूंजी के रूप में प्रदान की जाएगी। योजनांतर्गत बिजली कंपनियों को अद्यतन ऋण के रूप में दिए गए राज्यांश को भी अंश पूंजी में परिवर्तित किया जाएगा। योजनांतर्गत केंद्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि भी राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अनुदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे प्रदेश में स्थापित होने वाले स्मार्ट मीटर के कार्य में तेजी आएगी। यह राशि 6 हजार करोड़ से अधिक होती है। योजना में 60% राशि केंद्र सरकार देती है। इस फैसले से बिजली कंपनियों को कर्ज और उसके ब्याज का बोझ कम होगा। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार शाम को मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।  धान की मिलिंग करने वाले धान मिल मालिकों को राहत देते हुए वर्ष 2023-24 खरीफ में की बकाया प्रोत्साहन राशि और अपग्रेडेशन राशि के भुगतान को मंजूरी दे दी। प्रोत्साहन राशि 300 करोड़ और अपग्रेडेशन राशि 238 करोड़ है। यह भुगतान पिछले एक साल से अटका था। फायदा 1050 धान मिलर्स को मिलेगा। फैसले के मुताबिक, धान मिलर्स को मिलिंग राशि 10 रु./प्रति क्विंटल और प्रोत्साहन राशि 50 रु. की दर से दी जाएगी। कैबिनेट बैठक के बाद डिपटी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि सेंट्रल पूल में एफसीआई को 20 फीसदी धान की आपूर्ति पर 40 रुपए और सेंट्रल पूल में 40 फीसदी धान देने पर 120 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अपग्रेडेशन राशि राज्य सरकार मिलर्स को देगी। सरकार के इस फैसले से किसानों से खरीदी जा रही धान की मिलिंग में तेजी आएगी साथ ही पीडीसी के तहत गरीबों को बांटे जाने वाले चावल की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। गौरतलब है कि पीडीसी के तहत मप्र अपनी जरूरत का चावल राज्य पूल में रख लेगा, इसके अतिरिक्त जितना अतिरिक्त चावल होगा, उसे केंद्र सरकार के फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) को भेज देगा। पीएम ऊषा और रूसा के लिए दी सैद्धांतिक मंजूरी केबिनेट ने केन्द्र सरकार की दो योजनाओं पीएम ऊषा (उच्चतर शिक्षा अभियान) और रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के प्रदेश में स‌ंचालन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को अपग्रेडेशन, रिसर्च, जेंडर इक्वेलिटी और सभी को समान अवसर देने वाले काम करने के लिए केंद्र सरकार से वित्तीय मदद मिल सकेगी। जन विश्वास विधेयक और सप्लीमेंट्री बजट प्रस्ताव को भी मंजूरी केबिनेट ने मंगलवार को विधानसभा के शीत सत्र में पेश किए जाने वाले राज्य सरकार के सप्लीमेंट्री (अनुपूरक) बजट को भी मंजूरी दे दी है। यह लगभग 15 हजार करोड़ के आसपास हो सकता है। इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग के तहत जन विश्वास विधेयक, नगर पालिक व नगर पालिका संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दे दी गई। अब नगर निगमों में अध्यक्ष और नगर पालिका व नगर परिषदों में अध्यक्ष को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की जाएगी। इसके साथ ही अविश्वास प्रस्ताव के लिए तीन चौथाई बहुमत की जरूरत होगी।  

टोक्यो में बर्थ रेट यानी में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू,अब लोगों को सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना होगा

टोक्यो जापान की राजधानी टोक्यो में बर्थ रेट यानी प्रजनन दर में सुधार लाने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है. अगले साल से ऑफिस में यहां 4-वर्किंग डेज के नियम लागू किए जाएंगे. मसलन, अब लोगों को सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही काम करना है. टोक्यो गवर्नर युरिको कोइके ने ऐलान किया कि अगले साल अप्रैल महीने से कर्मचारियों के पास ऑप्शन होगा कि वे सप्ताह में तीन दिन ऑफ ले सकेंगे. मसलन, पिछले कुछ सालों में देखा गया है कि लोग अपने बच्चों के पालन-पोषण के चलते बीच में ही अपना करियर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं. लोगों के बच्चे पैदा न करने के पीछे यह भी एक बड़ा कारण माना जाता है. बीते कुछ सालों की नीतियों की वजह से देश का प्रजनन दर बेहद खराब हुआ है. इसमें सुधार लाने की लिए स्थानीय प्रशासन कई नए तरीके अपनाते रहा है. ताकि किसी को अपना करियर न छोड़ना पड़े गवर्नर कोइके ने कहा, “इस दौरान हम काम के तरीके, फ्लेग्सिबिलिटी लाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी को बच्चे को जन्म देने या फिर बच्चे की केयर करने की वजह से अपना करियर न छोड़ना पड़े. यह पहल जापानी जोड़ों के बीच बच्चों के जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए है. टोक्यो प्रशासन के मुताबिक, यह योजना उन माता-पिता के लिए भी सहायक होगी जिनके बच्चे प्राथमिक विद्यालय में हैं, उन्हें कम काम करने का विकल्प मिलेगा जिससे उनकी तनख्वाह में भी संतुलित कटौती होगी. जापान का जन्म दर पिछले साल, जापान में मात्र 727,277 जन्म दर्ज किए गए. बताया जाता है कि यह कमी देश की ओवरटाइम वर्क कल्चर का नतीजा है, जो महिलाओं को करियर और परिवार के बीच चुनने के लिए मजबूर करती है. वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक, जापान में लिंग रोजगार विषमता अन्य सम्पन्न राष्ट्रों से अधिक है, जहां महिलाओं की भागीदारी 55% और पुरुषों की 72% है. चार दिन के वर्कवीक की रूपरेखा को 2022 में 4 डे-वीक ग्लोबल द्वारा वैश्विक स्तर पर आजमाया गया था. इसमें शामिल कर्मचारियों के 90% से अधिक ने इस शेड्यूल को बनाये रखने की इच्छा जाहिर की. अन्य एशियाई राष्ट्र, जैसे सिंगापुर ने भी लचीले काम के घंटे देने पर जोर दिया है.  

25 दिसंबर से 2 जनवरी तक महाकालेश्वर मंदिर में व्यवस्थाओं में परिवर्तन किया

उज्जैन भगवान महाकाल के दरबार में साल के अंतिम दिनों और नव वर्ष के पहले व दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन किया गया है. इसके अलावा भस्म आरती को भी चलायमान किया जाएगा,  ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद ले सके. 25 दिसंबर से 2 जनवरी तक महाकालेश्वर मंदिर में व्यवस्थाओं में परिवर्तन किया गया है. उज्जैन कलेक्टर और महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष नीरज कुमार सिंह के मुताबिक श्रद्धालुओं को घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है. महाकालेश्वर मंदिर में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था की गई है. हालांकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसके लिए मंदिर समिति द्वारा कुछ नियम बदले गए हैं. भस्म आरती में होंगे चलायमान दर्शन महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती विश्व भर के शिव भक्तों का आकर्षण का केंद्र रहती है. महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रवेश लेना चाहते हैं मगर सीमित संख्या में ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा सकता है. इसी के चलते-चलायमान भस्म आरती व्यवस्था भी लागू रहेगी. 25 दिसंबर से नए साल के पहले सप्ताह तक बिना अनुमति दर्शन करने आने वाले भक्तों को भस्म आरती में भी चलायमान दर्शन होंगे. चार धाम मंदिर से रहेगी दर्शन व्यवस्था महाकालेश्वर मंदिर समिति के प्रशासक गणेश कुमार धाकड़ ने बताया कि दर्शन आरती चार धाम मंदिर से कतारबद्ध होते हुए महाकाल लोक, मानसरोवर, फैसिलिटी सेंटर से टनल परिसर में पहुंचकर कार्तिक और गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे. इसी प्रकार वीआईपी पुरानी व्यवस्था के तहत नीलकंठ द्वारा से प्रवेश कर शंख द्वार के जरिए अंदर प्रवेश करेंगे.

केंद्रीय मंत्री ने बताया मिशन मून का पूरा प्लान- ‘2035 तक भारत के पास होगा अपना स्पेस स्टेशन’

नई दिल्ली अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत लगातार नए अध्याय लिख रहा है। भारत को कई अंतरिक्ष के मिशन में सफलता हाथ लगी है। आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्धारित की गई हैं। इसको लेकर अपना देश आगे बढ़ रहा है। इस बीच केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह ने बड़ा एलान किया है। केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित कर लेगा। वहीं, 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि ये विकास वैश्विक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित करते हैं। भारत के पास होगा अपना स्पेस स्टेशन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, जितेंद्र सिंह ने कहा,” हम 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने जा रहे हैं। इसे भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा, 2040 तक हम एक भारतीय को चंद्रमा पर उतार सकते हैं।” केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष यान मिशन, गगनयान के लिए भी कमर कस रहा है, जो एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजेगा। पहले अंतरिक्ष यात्री के 2024 के अंत या 2026 की शुरुआत में अंतरिक्ष की यात्रा करने की उम्मीद है। भारत का यह मिशन यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो देश को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले देशों की श्रेणी में शामिल कर देगा। समुद्र से जुड़े मिशन पर भी काम कर रहा भारत गौरतलब है कि अंतरिक्ष अन्वेषण प्रयासों के साथ-साथ भारत महासागर की गहराई का अन्वेषण करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। सरकार के Deep Sea मिशन का उद्देश्य 6,000 मीटर की गहराई पर समुद्र तल का अन्वेषण करने के लिए एक मानव को भेजना है, ये एक ऐसा काम है जो भारत ने पहले कभी नहीं किया है। इसकी जानकारी भी केंद्रीय मंत्री ने दी है। यह मिशन भारत के समुद्री संसाधनों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगा, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और अन्वेषण में इसकी क्षमताएँ और मजबूत होंगी।

अधोसंरचना विकास के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के हर क्षेत्र में उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधोसंरचना के विस्तार और अत्याधुनिक उपकरणों की खरीदी के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। यह सुनिश्चित किया जाये कि सेवाएं समय पर आम नागरिकों तक पहुँचे। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश के विभिन्न जिला चिकित्सालयों और कैंसर अस्पतालों में अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही खरीदी प्रक्रिया की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने निर्देश दिये कि अधोसंरचना विकास के साथ-साथ आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रक्रिया की सतत मॉनीटरिंग कर समयसीमा के भीतर उपकरण खरीदी का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने सीटी स्कैन, एमआरआई, कैथ लैब, पेट-स्कैन, लाईनैक, और ब्रेकी-थेरेपी जैसे उन्नत उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने प्रदेश के चिकित्सकीय संस्थानों में औषधि एवं कंज्यूमेबल की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उक्त सामग्री आवश्यकतानुसार संस्थानों में उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने ट्रांसफर पोर्टल की तैयारी की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विभागीय स्तर पर पोर्टल को और अधिक दुरुस्त करने के निर्देश दिये ताकि ट्रांसफर प्रक्रिया में किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री तरुण राठी, एमडी एमपीपीएचएससीएल श्री मयंक अग्रवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।  

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