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भारतीय नौसेना की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए पाकिस्तान में भी नेवी को मजबूत करने की मांग उठने लगी

इस्लामाबाद भारतीय नौसेना की बढ़ती परमाणु ताकत को देखते हुए पाकिस्तान में भी नेवी को मजबूत करने की मांग उठने लगी है। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक और भारत में उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने पाकिस्तानी नौसेना के बेड़े में परमाणु चालित पनडुब्बी शामिल करने की मांग की है। पाकिस्तान के पास वर्तमान में एक भी परमाणु चालित पनडुब्बी नहीं है। अब्दुल बासित ने भारतीय नौसेना की परमाणु हमला करने की क्षमता का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर सबमरीन की आवश्यकता पर जोर दिया। बासित ने कहा कि भारत ने हाल की न्यक्लिर सबमरीन से के-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो बहुत बड़ी कामयाबी है। इसकी क्षमता 3500 किलोमीटर है। भारत के वर्तमान में अरिहंत और अरिघात श्रेणी की परमाणु चालित पनडुब्बियां हैं। एक दिन पहले सोमवार को ही भारतीय नौसेना प्रमुख ने भारत की पूर्ण स्वदेशी निर्मित पनडुब्बी को शामिल करने की योजना का खुलासा किया है। पाकिस्तानी एक्सपर्ट ने बताई भारत की बढ़त अब्दुल बासित ने कहा कि भारत रक्षा पर भारी खर्च कर रहा है और जवाबी हमला करने की क्षमता की तरफ जा रहा है। पाकिस्तान के पास सबमरीन तो हैं, लेकिन न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन नहीं हैं। उन्होंने कहा, हम कोशिश कर रहे हैं कि हमारे पास जो पारंपरिक मिसाइल हैं, वे परमाणु मिसाइल फायर कर सकें। लेकिन सेकंड स्ट्राइक क्षमता के लिए पाकिस्तान को न्यूक्लियर पावर सबमरीन की आवश्यकता होगी।’ पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक ने आगे बताया कि परमाणु चालित पनडुब्बी का फायदा ये है कि वह बिना ऊपर आए तीन से चार महीने तक समंदर के नीचे रह सकती है। जवाबी हमला करने की क्षमता के लिए यह एक बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘मान लीजिए कि भारत हमारे ऊपर पहला हमला करता है और सारी परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर देता है। तो हमारे पास वो क्षमता बची होनी चाहिए कि हम सेकंड स्ट्राइक करें।’ पाकिस्तान के लिए बताई जरूरत बासित ने कहा कि भविष्य में हमें भी परमाणु पनडुब्बी लेनी होंगी। भारत जिस तरह से अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ा रहा है, पाकिस्तान इससे दूर नहीं रह सकता है। हमें अपनी रक्षा के लिए वो तमाम उपाय करने होंगे, जो जरूरी हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि दोनों देशों के बीच हालात सुधरें। बासित का ये बयान पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान में उस मजबूत नैरेटिव को दिखाता है, जो भारत की सेना के आधुनिकीकरण को एक बढ़ते खतरे के रूप में देखता है और इसके लिए जवाबी उपाय की आवश्यकता पर जोर देता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने पाकिस्तान द्वारा अल्प से मध्यम अवधि में परमाणु ऊर्जा पनडुब्बी क्षमता हासिल करने की व्यवहार्यता पर चिंता जताई है, क्योंकि इसके लिए पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी।

भारत-चीन संबंध जो 2020 से असामान्य थे, अब कुछ सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं: विदेश मंत्री एस. जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि भारत-चीन संबंध जो 2020 से असामान्य थे, अब कुछ सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ‘चीन के साथ भारत के संबंधों में हाल के घटनाक्रम’ के संबंध में लोकसभा में वक्तव्य देते हुए विदेश मंत्री ने भारत-चीन रिश्तों, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल के घटनाक्रमों पर विस्तृत जानकारी दी। लोकसभा में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, “हमारे (भारत-चीन) संबंध 2020 से असामान्य हुए, जब चीनी कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भंग हुई थी। हाल के घटनाक्रम, जो तब से हमारे निरंतर राजनयिक जुड़ाव को दर्शाते हैं, ने हमारे संबंधों को कुछ सुधार की दिशा में आगे बढ़ाया है।” बता दें अक्टूबर में भारत और चीन के बीच सीमा पर सैनिकों की वापसी को लेकर समझौता हुआ था। जयशंकर ने कहा, “सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के अभाव में भारत-चीन संबंध सामान्य नहीं हो सकते। शांति और सौहार्द की बहाली ही शेष संबंधों को आगे बढ़ाने का आधार होगी।” विदेश मंत्री ने कहा, “हम स्पष्ट हैं कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना हमारे संबंधों के विकास के लिए एक शर्त है। आने वाले दिनों में, हम सीमा क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों के प्रभावी प्रबंधन के साथ-साथ तनाव कम करने पर भी चर्चा करेंगे। विदेश मंत्री वांग यी के साथ मेरी हाल की बैठक में, हम इस बात पर सहमत हुए कि विशेष प्रतिनिधि और विदेश सचिव स्तर के तंत्र जल्द ही बैठक करेंगे।” जयशंकर ने भारत के तीन प्रमुख सिद्धांतों की पुष्टि की- एलएसी के प्रति सख्त सम्मान और उसका पालन, यथास्थिति में एकतरफा बदलाव न करना और पिछले समझौतों का पालन करना। उन्होंने कहा, “सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति पर मजबूत और सैद्धांतिक रुख और संबंधों की समग्रता के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण पिछले चार वर्षों से चीन के साथ हमारे जुड़ाव का आधार रहा है।” 21 अक्टूबर को भारत ने चीन के साथ सीमा समझौते पर पहुंचने की घोषणा की थी, जिससे लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध समाप्त होने की शुरुआत हुई। अगले दिन समझौते की पुष्टि करते हुए बीजिंग ने कहा कि ‘प्रासंगिक मामलों’ पर समाधान हो गया है और वह समझौते की शर्तों को लागू करने के लिए नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई जाये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिये जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाई जाये। उन्होंने नक्सल प्रभावी क्षेत्रों में गश्त बढ़ाते हुए मुखबिर व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 36वीं बटालियन, हॉक फोर्स सहित सभी स्पेशल फोर्स एक्टिव होकर जिम्मेदारी से कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को बालाघाट में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर जन-प्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने आईजी श्री संजय सिंह एवं पुलिस अधीक्षक नागेंद्र कुमार द्वारा जिले में नक्सल गतिविधियों के उन्मूलन के उद्देश्य से तैयार की गई योजना के प्रेजेंटेशन का अवलोकन भी किया। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा एवं बालाघाट जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री श्री लखन पटेल, सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक श्री गौरव पारधी, विधायक राजकुमार कर्राहे, विधायक श्री मधु भगत, विधायक श्री विक्की पटेल, पूर्व मंत्री श्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल, संभागायुक्त श्री अभय वर्मा, कलेक्टर श्री मृणाल मीना सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।  

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन हमारी संस्कृति रही है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन हमारी संस्कृति रही है। कई जन्मों के पुण्य के बाद देवता हमारे यज्ञ की आहुति स्वीकारते है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बालाघाट के सरदार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा नवीन शिक्षा नीति में भारत की गौरवशाली इतिहास एवं हमारी संस्कृति तथा आदर्शो को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि नवीन शिक्षा नीति में किये गये प्रावधान अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति अब गायत्री मंत्र के मर्म एवं महिमा में पीएचडी करना चाहे तो कर सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गायत्री परिवार के नशामुक्ति, नारी सशक्तिकरण जैसे जनजागृति अभियानों से जुड़कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का आहवान किया। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रो वाइस चांसलर डॉ. चिन्मय पाण्ड्या ने आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह, पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री श्री लखन पटेल, सांसद श्रीमती भारती पारधी, विधायक श्री गौरव पारधी, विधायक राजकुमार कर्राहे, पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे, पूर्व मंत्री श्री प्रदीप जायसवाल, पूर्व सांसद श्री ढालसिंह बिसेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गायत्री परिवार के पदाधिकारी की उपस्थिति रहीं।  

मुख्यमंत्री बालाघाट में स्वदेशी मेले में हुए शामिल, कहा- उद्यमशीलता के संवर्धन का सशक्त माध्यम हैं मेले

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वदेशी स्टार्ट-अप, मेक-इन-इंडिया और वोकल-फॉर-लोकल के प्रेरणादायक आह्वान ने देश में उद्यमिता के पुनर्जागरण की अलख जगाई है। भारत आज इंग्लैंड को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  मंगलवार को बालाघाट में स्वदेशी मेले को संबोधित कर रहे थे। डॉ. यादव ने मेले में शासकीय विभागों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। साथ ही युवाओं को ऑफर लेटर और दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्रदान किए और उपस्थित युवाओं से संवाद किया। स्वदेशी विचारक श्री भैया जी जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्वदेशी मेले में आने के लिए श्री भैयाजी जोशी का आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मेला का अर्थ मेल-जोल है और इसमें व्यापार के साथ ही सांस्कृतिक मेलजोल को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मेले का प्रारंभ वर्ष 1999 से निरंतर विभिन्न स्थानों पर किया जा रहा है। मुम्बई से प्रारंभ स्वदेशी मेले में स्वदेशी उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय से छोटे-बड़े उद्योगों को बल मिला है। यह केवल मेला ही नहीं स्वदेशी मेले के रूप में मिनी इंडिया का स्वरूप देखने को मिल रहा है। यहाँ अलग-अलग प्रांतों की लोककला और कारीगरी को एक स्थान और एक मंच पर देखने का अवसर मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले हमारा देश सोने की चिड़िया हुआ करता था, हम दुनिया की शीर्षस्थ अर्थव्यवस्था थे और हमारे उद्योग, धंधे, मसाले, रेशम और मलमल जैसे चमत्कारी वस्त्र दुनिया भर में मशहूर थे। कहा जाता है कि ढाका का बना मलमल अंगूठी के छल्ले से निकल जाता था। अंग्रेजों ने हमारी इसी स्वदेशी ताकत को कमजोर बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री के प्रोत्साहन और प्रेरणा से देश के साथ ही प्रदेश के युवा ने भी नौकरी मांगने नहीं, देने वाले बनने के गंभीर और दूरदर्शी संदेश को समझा। आज हमारे यहां 37 हजार से भी अधिक स्वदेशी स्टार्ट-अप सक्रिय हैं। हमारा युवा उद्यमशील होकर नौकरी देने वाला बन रहा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से आगे बढ़ रही प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के कंसेप्ट को आगे बढ़ाने में हमें प्रधानमंत्री का प्रोत्साहन भी मिला है। हमारे प्रयास सफल रहे, हमने सागर, रीवा, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी सफलतापूर्वक रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का सफल आयोजन किया और अब जल्द ही नर्मदापुरम में भी करने जा रहे हैं। नर्मदापुरम में इंडस्ट्री के लिए पूर्व में आरक्षित 250 हेक्टेयर भूमि को बढ़ाकर 500 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसे हम 750 हेक्टेयर तक बढ़ायेंगे। इसमें नवकरणीय ऊर्जा पार्क और अन्य दूसरे उद्योगों की स्थापना के प्रस्ताव भी मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अब तक हुई रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से 2.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए और इनसे 2 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने बताया कि  हम उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी को इंडस्ट्री-फ्रेंडली बनाने के लिये हर स्तर पर जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए हम उद्योगों को पारिश्रमिक के रूप में प्रति कर्मचारी 5 हजार रुपए की प्रारंभिक सहायता भी दे रहे हैं। प्रदेश में हुए 17 मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के अंतिम छोर के नागरिक के लिए भी अच्छे स्वास्थ्य और उसे चिकित्सा सुविधाएं सुलभ कराने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पबद्ध है।  प्रदेश में वर्ष 2003-04 में 5 मेडिकल कॉलेज थे, जिन्हें बढ़ाकर हमने 17 कर दिया है। इतना ही नहीं प्रदेश में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या भी 13 हो गई है। आने वाले वर्ष में 12 और सरकारी कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज भी खोले जाएंगे, इनमें से एक बालाघाट में भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी मेले की सराहना करते हुए कहा कि इसमें आयुर्वेदिक औषधियों को बिक्री के लिए प्रदर्शित किया जाना अच्छी पहल है। कोविड त्रासदी के दौर में हमारी स्वदेशी आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली की जीवन-रक्षक शक्ति की महत्ता पूरे देश ने जानी समझी। आयुर्वेद में असीम संभावनाएं हैं, इसलिए प्रदेश सरकार इसे बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार के प्रयासों से आज प्रदेश का बजट 3.25 लाख करोड़ से बढ़कर 3.5 लाख करोड़ हो चुका है। हमारा लक्ष्य इसे 7 लाख करोड़ रुपए तक ले जाना है, जिससे हम प्रधानमंत्री श्री मोदी के देश को 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें। मेला हमारे जीवन का अभिन्न अंग बालाघाट में आयोजित स्वदेशी मेले के शुभारंभ में स्वदेशी विचारक श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि मेले हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं और इनमें स्वदेशी के समावेश से हम आर्थिक रूप से शक्तिशाली बन रहे हैं। श्री जोशी ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से भारत सभी क्षेत्रों में विश्व में अग्रणी बन रहा है। चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हमने इतना विकास किया है कि आज विदेशी भी इलाज के लिये भारत आते हैं। स्वदेशी मेले में आयोजक पूर्व मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, आयोजक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। इसमें जनजातीय कलाकारों ने आकर्षक लोकनृत्य की प्रस्तुति दी।  

मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी

मुंबई महाराष्ट्र में महायुति की जीत में बड़ा फैक्टर मानी जा रही लड़की बहन योजना में विस्तार की तैयारी चल रही है। खबर है कि राज्य की नई सरकार अगले साल से रकम बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने ऐसे संकेत दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुनगंटीवार ने कहा कि 2025 दीपावली से लड़की बहन योजना की राशि 1500 से बढ़ाकर 2100 कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के घोषणापत्र में राशि बढ़ाने की बात कही गई थी, जिसक चलते पार्टी पर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए राशि में इजाफा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर वादा पूरा नहीं किया गया, तो इससे पूरे देश में पार्टी की छवि खराब होगी। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने वादा पूरा करना चाहिए।’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार हमारी प्यारी बहनों को 2100 रुपये देने में सक्षम है। हम फैसला करेंगे कि इसे जनवरी, जुलाई या फिर अगले महीने से शुरू किया जाए। हम लोगों से किया वादा पूरा करेंगे।’ रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, ‘हमने बीते साल भाई दूज पर योजना की शुरुआत की थी और हम अगले साळ भाई दूज से राशि बढ़ा देंगे।’ उन्होंने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री की प्यारी बहनों के खाते में पहले ही पांच किश्तें जमा हो चुकी हैं। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को हुआ था जिसके परिणाम तीन दिन बाद घोषित हुए थे, ‘महायुति’ गठबंधन ने 288 विधानसभा सीट में से 230 सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा 132 सीट के साथ आगे रही जबकि शिवसेना को 57 और राकांपा को 41 सीट मिली थीं। कब तक सरकार का गठन संभव महाराष्ट्र में बड़ी जीत के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है। खबरें हैं कि बुधवार को भाजपा के पर्यवेक्षक विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे। इसके बाद 5 दिसंबर को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सीएम पद भाजपा के खाते में आने के आसार हैं। जबकि, डिप्टी सीएम शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बनाए जा सकते हैं।

सीएम साय ने ”नालंदा परिसर” का किया भूमिपूजन, महतारी वंदन योजना की जारी की 10वीं किश्त

रायगढ़ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज रायगढ़ में वित्त मंत्री ओपी चौधरी के ड्रीम प्रोजेक्ट हाईटेक लाइब्रेरी नालंदा परिसर के भूमिपूजन समेत 137 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसके अलावा, सीएम ने महतारी वंदन योजना की 10वीं किश्त की राशि ऑनलाइन जारी की। साथ ही रायगढ़ में रिंग रोड बनाने और रामलला दर्शन योजना से लाभ देने की भी घोषणा की है। वहीं कांग्रेस के धान खरीदी निरीक्षण के फैसले का स्वागत करते हुए निशाना भी साधा। बता दें कि रायगढ़ के शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने रायपुर की तर्ज पर रायगढ़ के मरीन ड्राइव एरिया में 42 करोड़ की लागत से बनने वाले नालंदा परिसर का भूमिपूजन किया, इसके साथ ही उन्होंने रायगढ़ जिले को 137 करोड़ रुपये की लागत वाले विकास एवं निर्माण कार्यों की सौगात दी, जिसमें 97 करोड़ 51 लाख रुपये की लागत से निर्मित 67 कार्यों का लोकार्पण और 37 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 13 कार्यों का शिलान्यास शामिल है। वहीं रायगढ़ में रिंग रोड की घोषणा भी सीएम साय ने की। रायगढ़ में प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर गौरतलब है कि रायगढ़ के मरीन ड्राइव में सर्वसुविधायुक्त नालंदा परिसर प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर होगा। इसके लिए नगर निगम और एनटीपीसी के मध्य 42 करोड़ 56 लाख का करार हुआ है। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। बता दें कि नालंदा परिसर एक अत्याधुनिक लाइब्रेरी होगी। इसमें वह सारी सुविधाएं होंगी जो अमूमन बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों की को लाइब्रेरी में देखने को मिलती हैं। इसमें आने वाले समय के मांग और जरूरतों के अनुसार सुविधा संसाधन होंगे। यहां अध्ययन-अध्यापन का एक ऐसा इको सिस्टम छात्रों को मिलेगा, जिससे वे खुद को प्रदेश के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकेंगे। नालंदा परिसर स्मार्ट लाइब्रेरी और स्टडी जोन होगा। कार्यक्रम के बाद रायगढ़ में पत्रकारों से चर्चा करते हुए सीएम विष्णुदेव साय ने कहा- रायगढ़ के बेटा-बेटियों के लिए नालंदा परिसर बनाया जा रहा है। शहर को रिंग रोड की जरूरत थी, वह भी पूरी की जाएगी। रामलला दर्शन योजना का भी रायगढ़ वासियों को लाभ मिल रहा है। सीएम साय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा- कि कांग्रेस के धान खरीदी निरीक्षण का स्वागत है। वह धान खरीदी केंद्रों में जाएं और वस्तुस्थिति की जानकारी लें।

कल सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक की मौजूदगी में देवेंद्र फडणवीस के नाम पर मुहर लग जाएगी!

मुंबई  पांच साल के सीएम, फिर 72 घंटे के मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और फिर ढाई साल के डिप्टी सीएम। पिछले 10 साल तक अलग-अलग रोल में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति की राजनीति के हीरो बने रहे। अब पांच दिसंबर को वह तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। महाराष्ट्र में अब पांच साल के मराठा राज के बाद ‘पेशवा’ की ‘पेशवाई’ की चलेगी। बीजेपी ने फडणवीस के नाम को सीएम पद के लिए फाइनल कर लिया है। चार दिसंबर को सुबह 10 बजे विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक निर्मला सीतारमन और विजय रूपाणी की मौजूदगी में उनके नाम पर मुहर लग जाएगी। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण नेता, जो दूसरी बार सीएम बनेंगे मराठा इतिहास में पंतप्रधान यानी ‘पेशवा’ अपने कूटनीति और युद्धनीति के लिए जाने जाते थे। देवेंद्र फडणवीस के प्रशंसक भी उन्हें ‘पेशवा’ और देवा भाऊ ही कहते हैं। देवेंद्र फडणवीस पहले भी दो बार महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं, मगर उनके लिए यह कुर्सी ‘लॉलीपॉप’ की तरह नहीं मिली। हर बार उन्होंने बड़े चैलेंज को स्वीकार किया और हर दांव से पार्टी को जीत दिलाई। उनकी खासियत यह है कि उन्होंने युवा पार्षद के तौर पर राजनीति में एंट्री ली है, इसलिए वह जनता और कार्यकर्ताओं के नब्ज को पहचानते हैं। देवेंद्र फडणवीस संघ के ‘लाडले’ हैं और शाह-मोदी के प्रिय भी। काबिलियत के कारण ही वह मराठा राजनीति वाले राज्य में दूसरे ब्राह्मण सीएम बने। महाराष्ट्र के पहले ब्राह्मण सीएम शिवसेना के नेता मनोहर जोशी थे, मगर वह पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। कांग्रेस-एनसीपी के 15 साल के शासन का किया था अंत 2014 में पहली बार देवेंद्र फडणवीस जब सीएम बने थे, तब उन्होंने एनसीपी-कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया था। फडणवीस ने विधानसभा से सड़क तक कांग्रेस-एनसीपी शासन में हुए सिंचाई घोटाले को लेकर आवाज बुलंद की। मोदी लहर के बीच प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र ने चुनाव का ताना-बाना बुना और जीत हासिल की। दूसरी बार भी एंटी इम्कबेंसी को दरकिनार कर गठबंधन के साथ बहुमत हासिल किया, मगर सत्ता हासिल नहीं कर सके। 72 घंटे की सरकार बनाई, तब उन्होंने शरद पवार से बातचीत की थी। जब सरकार गिरी, तब फडणवीस ने विधानसभा में चेतावनी के लहजे में पवार और ठाकरे को एक शेर सुनाया था। ‘मेरा पानी उतरता देख, मेरे किनारे पर घर मत बसा लेना। मैं समंदर हूं…लौटकर आऊंगा।’ ढाई साल बाद ही शिवसेना दो हिस्सों में टूट गई। एनसीपी के दो टुकड़े हो गए। बीजेपी को फडणवीस सत्ता में ले आए। 2024 में एक बार फिर अपनी रणनीति से एंटी इम्कबेंसी की हवा बदल दी। बीजेपी सर्वाधिक 132 सीटें जीती ही, महायुति ने भी इतिहास रच दिया। नरेंद्र मोदी क्यों हुए देवेंद्र फडणवीस के मुरीद ? रिपोर्टस के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में रैली के दौरान नरेंद्र मोदी एयरपोर्ट पर बीजेपी के बड़े नेताओं से बातचीत कर रहे थे। वहां नितिन गडकरी, गोपीनाथ मुंडे और देवेंद्र फडणवीस भी थे। नरेंद्र मोदी ने पूछा कि महाराष्ट्र में बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी? गडकरी और मुंडे 17-18 के आंकड़े तक पहुंच सके। तब देवेंद्र फडणवीस ने 40 सीटें जीतने की भविष्यवाणी की और यह सच साबित हुई। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान फडणवीस ने शिवसेना से अलग चुनाव लड़ने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को राजी किया। यह प्रयोग भी सफल हुआ। 2014 में पहली बार शिवसेना से अलग प्रदेश में बीजेपी अकेले चुनाव लड़ी और 125 सीटें हासिल कीं। उनकी इस रणनीति का बीजेपी के बड़े नेताओं ने विरोध किया था, मगर फडणवीस की रणनीति कामयाब रही और बीजेपी को महाराष्ट्र की पहली बार सत्ता मिली। उद्धव ठाकरे के घमंड को तोड़ने वाले ‘पेशवा’! यह कहानी महाराष्ट्र की सियासी गलियारों में सुनाई जाती है। सच या झूठ, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने उद्धव ठाकरे को बातचीत का निमंत्रण दिया था। बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे ने संदेश दिया कि बीजेपी नेता मातोश्री में आकर उनसे चर्चा करे। यह बात बीजेपी को पसंद नहीं आई। तब देवेंद्र फडणवीस ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। पहले बीजेपी अकेले चुनाव लड़कर बड़ी पार्टी बनी। 44 साल की उम्र में जब पहली बार सीएम बने, तब फडणवीस ने पहली बार शिवसेना को गठबंधन का जूनियर पार्टनर बनाया। पांच साल तक सरकार चलाई। दूसरी बार बीजेपी और शिवसेना साथ में उतरी। महायुति को बहुमत मिला, मगर उद्धव ठाकरे सीएम पोस्ट पर अड़ गए। देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के क्षणिक बागी अजित पवार के साथ 80 घंटे के लिए सरकार बनाई, मगर चल नहीं सकी। फडणवीस विपक्ष में बैठे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ढाई साल में ही दो हिस्सों में बंट गई। जब चुनाव में उतरे तो ठाकरे की सेना को 20 पर समेट दिया। धीरे-धीरे देवेंद्र बनते गए मराठा राजनीति के सूरमा देवेंद्र फडणवीस के पिता गंगाधर फडणवीस जनसंघ और बीजेपी के नेता रहे। नागपुर के गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी भी अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं। 22 साल की उम्र में फडणवीस ने नागपुर के पार्षद से राजनीति शुरूआत की, फिर 27 साल की आयु में युवा मेयर बनने का रेकॉर्ड बनाया। 1999 में दक्षिण पश्चिम नागपुर सीट से विधानसभा चुनाव लड़े और लगातार जीतते रहे। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले गोपीनाथ मुंडे के आकस्मिक निधन के बाद नेतृत्व की चर्चा चल रही थी। नितिन गडकरी और एकनाथ खडसे जैसे दिग्गज कतार में थे। चुनाव के दौरान दिल्ली में नरेंद्र, महाराष्ट्र में देवेंद्र का नारा काफी लोकप्रिय हुआ। देखते ही देखते वह बीजेपी के पोस्टर बॉय बन गए। अपनी बेदाग छवि और लोकप्रियता के कारण आरएसएस ने भी उन्हें नेक्स्ट जेनरेशन के नेता के तौर पर चुना, जिसमें वह खरे साबित हुए। उन्होंने गठबंधन की सरकार चलाकर अपने नेतृत्व क्षमता को भी साबित कर दिया।

रातपानी एमपी का 8वां टाइगर रिजर्व बन गया है. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया

भोपाल मध्य प्रदेश के बड़ी खुशखबरी है. राज्य को एक और टाइगर रिजर्व मिल गया है. रातापानी प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व होगा. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. इस टाइगर रिजर्व में 90 बाघ हैं. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी ने साल 2022 में रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी दी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस साल जून में रातापानी को टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफाई करने के निर्देश दिए थे. सीएम यादव ने इसे पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर कहा है. जानकारी के मुताबिक, रातापानी टाइगर रिजर्व का फोरेस्ट एरिया 1271.465 स्क्वेयर किमी है. इसमें से 763.812 स्क्वेयर किमी कोर और 507.653 स्क्वेयर किमी बफर एरिया होगा. इस टाइगर रिजर्व में 3 हजार से ज्यादा जानवर हैं. इसमें 90 बाघ, 70 तेंदुए, 500 से ज्यादा सांभर, 600 से ज्यादा चीतल, 8 भेड़िये हैं. इसका कोर एरिया भोपाल, रायसेन और सीहोर में होगा. बता दें, इस टाइगर रिजर्व में 9 गांव शामिल होंगे. इसके बनने से गांववालों के अधिकारों में सरकार कोई बदलाव नहीं करेगी. इससे टूरिज्म बढ़ेगा, रोजगार पैदा होंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार से बजट मिलने से एनिमल मैनेजमेंट और बेहतर होगा. इसके अलावा यहां ईको सिस्टम डेवलप होगा. इससे भी गांववालों को लाभ मिलेगा. रातापानी टाइगर रिजर्व बनने से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पहचान ही बदल जाएगी. लंबे समय से पेंडिंग था मामला यह फैसला काफी समय से लंबित था। 2008 में NTCA से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने टाइगर रिजर्व बनाने में देरी की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राज्य सरकार को अधिसूचना प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। उन्होंने इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष और बाघों की आबादी की रक्षा की जरूरत का हवाला दिया था। इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए अजय दुबे ने कहा कि मैं सरकार के फैसले से बहुत खुश हूं। इस अधिसूचना को खनन माफिया और क्षेत्र में निहित स्वार्थ रखने वाले लोग रोक रहे थे। रायसेन और सीहोर जिले में है स्थित रातपानी वन्यजीव अभ्यारण्य रायसेन और सीहोर जिलों में स्थित है। यह मध्य प्रदेश में बाघों के एक महत्वपूर्ण आवास का हिस्सा है। हाल के वर्षों में, सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला से बाघ इस अभ्यारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में आने लगे हैं। बाघों के इन इलाकों में आने के बाद, 2007 में राज्य सरकार ने रतपानी और सिंघोरी अभ्यारण्यों को टाइगर रिजर्व घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। 2008 में मिल गई थी मंजूरी NTCA ने 2008 में रिजर्व के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी थी। राज्य वन विभाग को रिजर्व की सीमाओं और कोर क्षेत्रों के लिए विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, अंतिम अधिसूचना प्रक्रिया में कई देरी हुई। 2012 में, NTCA ने राज्य सरकार को रिमाइंडर जारी किए, जिसमें तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया था। देरी की वजह से बढ़ रहे थे बाघ और इंसानों के संघर्ष PIL में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि रतपानी टाइगर रिजर्व को अंतिम रूप देने में देरी के कारण बाघ-मानव संघर्ष में वृद्धि हुई है। बाघ भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों में भटक रहे हैं। अतिक्रमण और आवास क्षरण के कारण अभ्यारण्य के भीतर पर्याप्त शिकार की कमी ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है। 2011 में, स्थानीय रिपोर्टों ने भोपाल के बाहरी इलाके में बाघों और तेंदुओं की उपस्थिति पर प्रकाश डाला था। बढ़ती मांसाहारी आबादी का समर्थन करने के लिए ‘शिकार आधार’ की मांग की गई थी। संघर्ष तब एक दुखद मोड़ पर पहुंच गया जब 2012 में, एक बाघ भोजन की तलाश में मानव बस्तियों में भटक गया और ग्रामीणों द्वारा उसे बेरहमी से मार डाला गया। NTCA ने तुरंत इस स्थिति का संज्ञान लिया, लेकिन राज्य द्वारा रिजर्व अधिसूचना को पूरा करने में विफलता ने इस क्षेत्र को असुरक्षित छोड़ दिया। बफर जोन में कई बुनियादी परियोजनाओं को मंजूरी दी इस मुद्दे को और जटिल बनाते हुए, मध्य प्रदेश के राज्य वन्यजीव बोर्ड (SWB) ने रिजर्व के प्रस्तावित बफर ज़ोन में कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंज़ूरी दे दी। इनमें कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट, 765kV ट्रांसमिशन लाइन और एक रेलवे लाइन शामिल हैं। ये मंजूरियां बाघों के आवास पर संभावित प्रभाव पर विचार किए बिना दी गई थीं। उच्च न्यायालय में दायर PIL ने इन मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया। अदालत से राज्य सरकार को तुरंत रिजर्व को अधिसूचित करने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं ने SWB द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं को निलंबित करने की भी मांग की जो प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। याचिका के जवाब में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि NTCA की वैधानिक मंज़ूरी और संरक्षण की ज़रूरत के बावजूद, राज्य के अधिकारियों ने अभ्यारण्य के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए पर्याप्त तेज़ी से काम नहीं किया। अदालत ने राज्य सरकार से टाइगर रिजर्व की अधिसूचना को अंतिम रूप देने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया था। प्रबंधन एक चुनौती है उन्होंने कहा है कि अधिसूचना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, लेकिन अब असली चुनौती रिजर्व के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने में है। इसमें स्पष्ट सीमाएं स्थापित करना, शिकार को रोकना और वन्यजीव-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ना शामिल है। सीएम यादव ने कही ये बात इस टाइगर रिजर्व के बनने के बाद सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है. रायसेन जिले में स्थित रातापानी को अब प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है. यह निर्णय न केवल बाघों की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी नई दिशा देगा.

प्रदेश का आठवां टाइगर रिजर्व क्षेत्र बना रातापानी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रातापानी सैंक्चुअरी टाइगर रिजर्व बफर एरिया घोषित होने से मध्यप्रदेश अब वास्तविक रूप में टाइगर स्टेट बन गया है। मध्यप्रदेश के लिये यह बहुत बड़ी सौगात है। केन्द्र सरकार के अनुमोदन के बाद रातापानी, मध्यप्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मध्यप्रदेश को हमेशा प्राथमिकता दी है, जिसके परिणामस्वरूप श्योपुर के कूनो में चीते और उसके बाद रातापानी को टाइगर बफर क्षेत्र का अनुमोदन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी सैंक्चुअरी टाइगर रिजर्व बफर जोन की विशेष बात यह है कि यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है जो राजधानी (भोपाल) के बेहद नजदीक है। इससे यह माना जा सकता है कि राजधानी इस अभयारण्य का हिस्सा है। इस अभयारण्य के दायरे में रायसेन, भोपाल और सीहोर जिले का क्षेत्र भी आएगा। यहां लगभग 90 से ज्यादा बाघ और अन्य वन्य जीव भी हैं। उन्होंने कहा कि रातापानी को टाइगर रिजर्व घोषित करने से पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। टाइगर रिजर्व का संपूर्ण कोर क्षेत्र रातापानी अभयारण्य की सीमा के भीतर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीणों के वर्तमान अधिकार में कोई परिवर्तन नहीं होगा बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन से रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और उन्हें आर्थिक रूप से लाभ भी मिलेगा। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा टाइगर भी हैं और टाइगर पार्क भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी टाइगर रिजर्व घोषित होने से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्र सरकार एवं राज्य द्वारा आवंटित बजट से वन्य-प्राणियों का और बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे रातापानी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी तथा राजधानी भोपाल की पहचान टाईगर कैपिटल के रूप में होगी।  

MP के कई जिलों में ठंड का कहर, नौगांव के बाद राजगढ़ मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा जिला

 भोपाल  मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में ठंड का कहर देखने को मिल रहा है। रविवार-सोमवार की रात नौगांव के बाद राजगढ़ की मप्र में सबसे ठंडी रात के रूप में दर्ज किया गया है। राजगढ़ का न्यूनतम तापमान 8.0 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। सर्दी बढ़ने के कारण कलेक्टर ने कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कूल खुलने का समय सुबह 9 बजे से कर दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन-चार दिनों से जिले में सर्द हवाएं चल रही हैं। इस कारण न सिर्फ दिन, बल्कि रातें भी सर्द हो रही है। नवंबर के अंतिम सप्ताह से ही जिले में सर्दी अपना असर दिखा रही है। इस सीजन में दूसरी बार 8 डिग्री तक तापमान गिर चुका है। जबकि शनिवार-रविवार की रात सबसे कम सात डिग्री तापमान दर्ज किया था। जो इस सीजन का सबसे कम तापमान था। इसके बाद रविवार-सोमवार की दरमियानी रात को तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन फिर भी सर्दी शबाब पर रही। इस बार राजगढ़ मप्र का दूसरा सबसे ठंडा जिला रहा है। मप्र में सबसे कम तापमान नौगांव में 7.8 डिग्री दर्ज किया गया, इसके बाद राजगढ़ का 8.0 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। राजगढ़ जिले में सर्दी को देखते हुए कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। भोपाल में दो दिन से पारा 11.5 डिग्री के करीब ठहरा राजधानी भोपाल में दो दिन से पारा 11.5 डिग्री के करीब ठहरा सागर। दो दिन से न्यूनतम पारा 11 डिग्री के पास ठहरा हुआ है। दिन और रात का तापमान सामान्य से कम होने के कारण ठंडी का असर बढ़ा है। दिन का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है जो सामान्य से 2 डिग्री कम है। वहीं रात का पारा 11.5 डिग्री पर लुढ़ककर आ गया जो सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस कम है। पारे में गिरावट आने से दिन और रात के समय कंपकपा देने वाली सर्दी पड़ रही है। अगले 48 घंटे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश में अगले 48 घंटे बाद मौसम में परिवर्तन आने का अनुमान है। कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो सकता है। बर्फीली हवाओं से पूरा प्रदेश ठिठुर सकता है। उत्तरी हिस्से में इसका ज्यादा असर देखने को मिलेगा। उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है। इस कारण से पहाड़ों में बर्फबारी होगी और उत्तरी हवाएं मध्यप्रदेश में तेजी से आएंगी। जिससे प्रदेश में दिन और रात में ठंड बढ़ने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिक रितेश कुमार के मुताबिक, अभी तमिलनाडु में चक्रवात सक्रिय है, जिसके प्रभाव से आसमान पर हल्के बादल छाए हुए हैं। इससे तापमान में बढ़ोत्तरी होना थी, लेकिन जम्मू कश्मीर में बारिश और बर्फबारी होने से उत्तरी हवाएं तेज हो गई हैं। इससे अगले तीन दिन तक तापमान में एक से दो डिसे की मामूली गिरावट आएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नेतृत्व में दिव्यांग व्यक्तियों को मिल रहा है कई योजनाओं का लाभ: महेन्द्र सिंह मरपच्ची

विश्व दिव्यांग दिवस पर विशेष लेख मनेन्द्रगढ़/एमसीबी विश्व दिव्यांग दिवस हर वर्ष 3 दिसंबर को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, उनके लिए अवसरों का विस्तार करना और उनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिव्यांग दिवस की शुरुआत 1992 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक ऐसा समाज बनाना जहां वे बिना किसी भेदभाव के अपने अधिकारों का उपयोग कर सकें, इस दिव्यांग दिवस का मुख्य लक्ष्य है। सन् 1981 में संयुक्त राष्ट्र ने ’’अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग वर्ष’’ मनाया। इसके बाद 1983 से 1992 के दशक को ’’दिव्यांग व्यक्तियों का दशक’’ घोषित किया गया। इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करने के प्रयास किए गए। 2006 में संयुक्त राष्ट्र ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर अभिसमय (United Nations Convention on the Rights of Persons with Disabilities) लागू किया। यह अभिसमय दिव्यांग व्यक्तियों को समाज के हर क्षेत्र में अधिकार और समावेश प्रदान करने के लिए कानूनी मान्यता देता है। भारत ने इसे 2007 में अंगीकृत किया और इसे अपनी नीतियों में सम्मिलित किया। भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर 1995 में ’’दिव्यांग व्यक्तियों का अधिकार अधिनियम’’ लागू हुआ। इस अधिनियम ने शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को सुनिश्चित किया। 2016 में इस कानून को संशोधित कर दिव्यांगताओं की संख्या 21 कर दी गई और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षण, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत बनाया गया है। केंद्र सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें ’’सुगम्य भारत अभियान’’ प्रमुख है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक भवनों, परिवहन और डिजिटल सेवाओं को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ बनाना है। ’’दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग’’ दिव्यांग व्यक्तियों के लिए शिक्षा, रोजगार और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराता है। वहीं ’’स्किल इंडिया’’ पहल के अंतर्गत दिव्यांग युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिव्यांग व्यक्तियों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। समावेशी शिक्षा के तहत विशेष स्कूल और उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।  दिव्यांगजन स्वरोजगार योजना के तहत दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर देने के लिए वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ’’सुगम छत्तीसगढ़ अभियान’’ के माध्यम से सार्वजनिक भवनों और परिवहन को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अनुकूल बनाया गया है। सरकार ने विभिन्न प्रकार के नि:शुल्क उपकरण वितरण और दिव्यांग पेंशन योजना के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों को आर्थिक और भौतिक सहायता प्रदान की है। फिर भी आज दिव्यांग व्यक्तियों के समक्ष कई चुनौतियां हैं। इनमें समाज में भेदभाव, सुविधाओं की कमी और रोजगार और शिक्षा में सीमित अवसर प्रमुख हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष स्कूल खोलने और तकनीकी नवाचार का उपयोग करने की आवश्यकता है। आज दिव्यांगता को शारीरिक, मानसिक, संवेदी और बौद्धिक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। शारीरिक दिव्यांगता जैसे पोलियो या रीढ़ की हड्डी में चोट, दृष्टिबाधित दिव्यांगता, श्रवण बाधित दिव्यांगता, मानसिक और बौद्धिक दिव्यांगता और न्यूरोलॉजिकल दिव्यांगता मुख्य प्रकार हैं। इनके प्रमुख कारणों में जन्मजात दोष, दुर्घटनाएं, संक्रमण, कुपोषण और मानसिक आघात शामिल हैं। इन समस्याओं का उपचार फिजियोथेरेपी, सर्जरी, काउंसलिंग और सहायक उपकरणों के माध्यम से किया जा सकता है। दिव्यांग व्यक्तियों को समाज में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज भी उन्हें कहीं-कहीं भेदभाव का शिकार बनाया जाता है, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उनके अवसर सीमित होते हैं, और सार्वजनिक स्थानों तक उनकी पहुंच नहीं होती। स्वास्थ्य सेवाओं और उपकरणों की कमी भी उनकी चुनौतियों को बढ़ाती है। इन समस्याओं से निपटने के लिए जागरूकता अभियान चलाने, सुलभता बढ़ाने, विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और आर्थिक सहायता देने की आवश्यकता है। केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। इनमें ’’सुगम्य भारत अभियान’’, ’’दिव्यांगजन स्वरोजगार योजनाएं’’ और ’’कृत्रिम अंग योजनाएं’’ प्रमुख हैं। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समावेशी शिक्षा, स्वरोजगार योजना और ’’सुगम छत्तीसगढ़ अभियान’’ जैसी योजनाओं के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। यह विश्व दिव्यांग दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह दिव्यांग दिवस हमें एक ऐसा समाज बनाने की प्रेरणा देता है जो समानता, अधिकार और समावेशिता के मूल्यों पर आधारित हो। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ की सरकार ने इस दिशा में सराहनीय प्रयास किए हैं। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम इन प्रयासों को आगे बढ़ाएं और एक ऐसा वातावरण बनाएं जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों को सम्मान और समान अवसर मिले।

72 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट से दो राज्यों का होगा कायापलट, बनेंगे 21 बांध-बैराज

भोपाल केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाला पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट देश के दो प्रमुख राज्यों राजस्थान और मध्यप्रदेश की कायापलट कर देगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री तथा दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव व सचिवों की उपस्थिति में 28 जनवरी को इस प्रोजेक्ट का डीपीआर बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। 72 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में कुल 21 बांध, बैराज और बैलेंसिंग रिजर्वायर आदि बनाए जाएंगे। प्रोजेक्ट अगले 5 साल में पूर्ण कर लिया जाएगा। इससे संबंधित एक अहम अपडेट सामने आया है।  पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट में मालवा इलाके के सभी घटकों का काम अब पहले चरण में ही होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के प्रयासों के बाद यह संशोधन किया गया है। पहले सिंचाई और पेयजल संबंधित घटकों का निर्माण फेस-2 में रखा गया था। संशोधन के बाद मालवा को सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक प्रयोजन के लिए योजना के पहले चरण में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाएगा। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट से प्रदेश के चंबल और मालवा इलाके के लाखों किसानों का जीवन बदल जाएगा। उन्हें न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा बल्कि यहां पर्यटन और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश की 17 परियोजनाएं और राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल है। प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद मध्यप्रदेश के करीब 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। पेयजल और उद्योगों के लिए 172 मि.घ.मी. पानी भी मिलेगा। प्रदेश के करीब 40 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश से निकलनेवाली वाली पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा और अन्य सहायक नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। प्रदेश में प्रोजेक्ट में कुल 35 हजार करोड़ रूपए के काम प्रस्तावित हैं। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स में 4 बांध बनेंगे। ये बांध कटीला, सोनपुर, पावा और धनवाड़ी में बनाए जाएंगे। इसके साथ ही श्यामपुर, नैनागढ में 2 बैराज बनेंगे। कुम्भराज कॉम्पलेक्स में 2 बांध तथा 7 अन्य बांध भी इसमें शामिल हैं। गांधी सागर बांध की अप-स्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे कई बांधों का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट से एमपी के मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, श्योपुर, इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास एवं राजगढ़ को लाभ होगा। इन 13 जिलों में सिंचाई, पेयजल, और औद्योगिक प्रयोजन के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा। प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर और मध्यप्रदेश में CRMC सिस्टम को अंतिम छोर तक आधुनिक बनाया जाएगा। इससे प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड जिलों को आवंटित पानी मिल सकेगा। अधिकारियों के अनुसार संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स की 6 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है।इन्हें राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को भेजा जा चुका है। शेष डीपीआर की प्रक्रिया चल रही है।

नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रही हैं, इस बीच एकनाथ शिंदे की तबियत बिगड़ी, अस्पताल में कराया भर्ती

मुंबई महाराष्ट्र में सियासी गहमागहमी के बीच कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तबियत बिगड़ गई है। खबर है कि उन्हें ठाणे स्थित जुपिटर अस्पताल पहुंचाया गया है। रविवार को ही शिंदे अपने पैतृक गांव से लौटे हैं। खबरें थीं कि वह स्वास्थ्य खराब होने के चलते आराम करने के लिए गांव गए थे। खास बात है कि शिंदे को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी ऐसे समय पर हुई है, जब राज्य में नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियां चल रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने जानकारी दी है कि स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने के बाद शिंदे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर ने उनकी पूरी जांच की सलाह दी है। कहा जा रहा है कि उन्हें जांच के लिए कुछ समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है। खबरें थीं कि शिंदे शुक्रवार को भी तेज बुखार के बाद सतारा चले गए थे। उन्होंने लौटने पर बताया था कि वह अब ठीक हैं और आराम के लिए गांव गए थे। महाराष्ट्र में शपथ ग्रहण समारोह संभावनाएं जताई जा रही हैं कि महाराष्ट्र में गुरुवार को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि उस दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम शपथ ले सकते हैं। शिंदे के भी शपथ लेने के आसार जताए जा रहे हैं। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता का ऐलान कर सकती है। श्रीकांत शिंदे डिप्टी सीएम की रेस से बाहर शिंदे के बेटे एवं शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में आयी उन खबरों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि वह राज्य में उपमुख्यमंत्री या कोई अन्य मंत्री पद की दौड़ में हैं। एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, ‘चुनाव परिणामों के बाद सरकार के गठन में थोड़ी देरी हुई है और इसीलिए बहुत सारी अफवाहें उड़ रही हैं और उनमें से एक यह है कि मैं नयी सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने जा रहा हूं। मैं सभी को बताना चाहता हूं कि यह पूरी तरह से निराधार और झूठ है, इसमें कोई तथ्य नहीं है। मुझे पहले ही लोकसभा चुनाव के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनने का मौका मिला था, लेकिन मैंने अपनी पार्टी के संगठन के लिए काम करना चुना और यह अभी भी वैसा ही है। मुझे सत्ता के पद की कोई इच्छा नहीं है।’

मध्य प्रदेश में आज से धान खरीदी शुरू, किसानों को मिलेगा उपज का इतना दाम

भोपाल मध्य प्रदेश में खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के लिए धान की खरीदी 2 दिसंबर से शुरू हो जाएगी. धान कॉमन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 और धान ग्रेड-ए का 2320 रुपये प्रति क्विंटल है. किसानों की एफएक्यू गुणवत्ता की उपज इन्हीं दरों पर खरीदी की जाएगी. धान की खरीदी 3  दिसंबर से 20 जनवरी 2025 तक किया जाएगा. उपार्जन सोमवार से शुक्रवार तक होगा. 45 लाख मीट्रिक टन होगी धान की खरीदी केन्द्र सरकार की ओर से निर्धारित मात्रा के अनुसार, समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 45 लाख मीट्रिक टन की जाएगी. गोदाम स्तर पर खाद्यान्न की गुणवत्ता का परीक्षण उपार्जन एजेंसी के गुणवत्ता सर्वेयर द्वारा स्टेक लगाने के पहले किया जाएगा. वहीं परिवहनकर्ता की ओर से उपार्जित खाद्यान्न का परिवहन समय-सीमा में नहीं करने पर पेनाल्टी की व्यवस्था साप्ताहिक रूप से की जाएगी. कब तक होगी धान की खरीदी मध्य प्रदेश सरकार धान की खरीदी 2 दिसंबर से 20 जनवरी 2025 तक करेगी. वहीं किसान सोमवार से शुक्रवार तक केंद्र में धान बेच सकते हैं. अवैध बिक्री रोकने के लिए कलेक्टर को दिए गए निर्देश समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद भुगतान कृषक पंजीयन के दौरान आधार नम्बर से लिंक बैंक खाते में किया जाएगा. धान उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केन्द्र पर लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिए सभी जिले के कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं. ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सामान्य किस्म की धान 2,300 और ग्रेड ए धान का समर्थन मूल्य 2,320 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी जाएगी। गुणवत्तायुक्त उपज का ही उपार्जन हो, इसके लिए ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है। उपज में कचरा मिला तो उसे लौटा देंगे राज्य और जिला स्तर पर उपार्जन पोर्टल पर दर्ज होने वाली उपज संबंधी जानकारी के आधार पर आकलन किया जाएगा। यदि उपज में कचरा, टूटन या नमी अधिक होती है तो उसे लौटा दिया जाएगा। जब किसान उपज ठीक कराकर निर्धारित मापदंड के अनुसार लाएगा, तब ही उसे स्वीकार किया जाएगा। दरअसल, धान किसान से लेने के बाद उसे चावल बनाने के लिए मिलर्स को दी जाती है। उस समय कई बार नमी, कचरा और टूटन अधिक होने की शिकायत सामने आती है। ऐसी उपज मिलर्स नहीं लेते हैं क्योंकि प्रति क्विंटल धान से 67 किलोग्राम चावल लिया जाता है। जब यह मात्रा नहीं मिलती है तो मिलर्स को नुकसान होता है। यही कारण है कि इस बार गुणवत्तायुक्त उपज की खरीदी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी उपार्जन केंद्रों पर नमी की जांच करने के लिए नमी मापक यंत्र (मायश्चर मीटर) रखे जाएंगे। मिलिंग भी समय पर होगी नमी जांचने के बाद धान लेकर सीधे उपार्जन केंद्र से ही मिलिंग के लिए मिर्लस को दी जाएगी। इससे परिवहन और भंडारण व्यय में कमी आने के साथ मिलिंग भी समय पर होगी। भारतीय खाद्य निगम ने मिलिंग के लिए अंतिम सीमा जून रखी है। मंत्री, प्रमुख सचिव और आयुक्त करेंगे औचक निरीक्षण उपार्जन के दौरन या उसके बाद होने उपार्जन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी और आयुक्त सिबि चक्रवर्ती औचक निरीक्षण करेंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उड़नदस्ते भी जिला स्तर पर गठित होंगे, जो उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। किसानों को समाधान के लिए किए गए ये व्यवस्था पंजीयन और उपार्जन में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए जिले में और राज्य स्तर पर भी तकनीकी सेल का गठन किया गया है. जिला स्तरीय समिति उपार्जन संबंधी सभी विवादों का अंतिम निराकरण और उपार्जित खाद्यान्न की गुणवत्ता की निगरानी करेगी. इसके अलावा राज्य स्तर पर एक कंट्रोल-रूम भी स्थापित किया गया है. अगर आप किसी भी जानकारी के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क करना चाहते हैं इस नंबर 0755-2551471 पर कॉल कर हैं. ये उपार्जन अवधि में सुबह 9 से रात 7 बजे तक संचालित रहेगा.

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